Category: Madhya Pradesh

  • ग्वालियर व्यापार मेले में वायुसेना के बैण्ड पर बालीवुड की धुन पर झूमे श्रोता

    ग्वालियर व्यापार मेले में वायुसेना के बैण्ड पर बालीवुड की धुन पर झूमे श्रोता


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में चल रहे श्रीमंत माधवराव सिंधिया व्यापार मेले (Shrimant Madhavrao Scindia Trade Fair) में वायुसेना की बैण्ड (Air Force Band.) ने लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी अपनी प्रस्तुति दी। वायुसेना के बैण्ड द्वारा दी गई रोमाटिंक गानों की शानदार धुन को सुनकर दर्शक हतप्रद रह गए और झूमते नजर आए।

    ग्वालियर व्यापार मेले में पहली बार वायुसेना के बैण्ड ने दो दिवसीय अपनी प्रस्तुति दी है। इस प्रस्तुति में वायुसेना के जवानों के कई रंग देखने को मिले। शनिवार की शाम हिंदुस्तान मेरी जान गीत के साथ वायुसेना के बैण्ड ने मेले में प्रस्तुति की शुरुआत की। देर तक चली इस प्रस्तुति में वायुसेना के बैण्ड पर रोमांटिक वालीवुड के गानों को सुनकर जो दर्शक जहां खडा था, वहीं पूरी तन्मयता के साथ खड़ा रहा और प्रस्तुति को सुनने में मग्न नजर आया।

    इस अवसर पर एयर कमोडोर मनीष शर्मा (वायु सेवा मेडल एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर फोर्स स्टेशन ग्वालियर), ग्रुप कैप्टन सुभाष सी सिंह (चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर), ग्रुप कैप्टन अमित बाजपेई (स्टेशन सिक्योरिटी ऑफिसर), कलेक्टर रूचिका चौहान व नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय आदि मौजूद रहे। इस अवसर पर कलेक्टर रुचिका चौहान ने एयरफोर्स के बैंड द्वारा दी गई शानदार प्रस्तुति के लिए एयरफोर्स के अधिकारियों और बैंड के सदस्यों को धन्यवाद दिया। साथ ही सभी को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।


    रोमाटिंक गीतों की प्रस्तुति में दिखा वायुसेना का अलग रूप

    ग्वालियर व्यापार मेले में वायुसेना के बैण्ड ने शुरुआत फन फेयर की मधुर धुन से की। इसके बाद वंदे मातरम एवं हिंदुस्तान गीत की मधुर धुन प्रस्तुत की। इसके बाद वायुसेना के बैण्ड ने बालीवुड के रोमांटिक गानों की सुंदर प्रस्तुतियां दीं। बालीवुड के गानों में 80-90 के दशक के रोमांटिक गानों ने समा बांध दिया। सबसे पहले बदन पर सितारे लपेटे हुए.. हो जाने तमन्ना… कहां जा रही हो… गाने की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद जब हम चले…, छू कर मेरे मन को किया तुने क्या इशारा… आदि गानों की प्रस्तुति दी।


    स्टॉल पर दिखी सामान खरीदने उमडी भीड

    व्यापार मेले में वायुसेना की ओर से स्टॉल भी लगाया गया था, इस स्टॉल पर वायुसेना की टोपी, टीशर्ट सहित विभिन्न प्रकार की वस्तुएं रखी थीं। इन वस्तुओं को मेले में आए सैलानियों ने काफी पंसद किया और जमकर वस्तुओं की खरीदारी की।

  • राष्ट्रीय दलहन उत्पादक सम्मेलन : केंद्रीय कृषि मंत्री सहित नौ राज्यों के कृषि मंत्रियों ने देखी उन्नत फसलें

    राष्ट्रीय दलहन उत्पादक सम्मेलन : केंद्रीय कृषि मंत्री सहित नौ राज्यों के कृषि मंत्रियों ने देखी उन्नत फसलें

    सीहोर। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि गांवों में सुगमता से बीजों की वैरायटी पहुंच सके, इसके लिए ‘बीज ग्राम’ बनाए जाएंगे।


    केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत आयोजित ‘राष्ट्र-स्तरीय परामर्श और रणनीति सम्मेलन’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री चौहान ने उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं किस्मों के प्रदर्शन के लिए खेतों का भ्रमण और किसानों से संवाद किया। इस मौके पर उन्होंने ‘बीज ग्राम’ बनाने की घोषणा की।


    सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रकाशित ‘बायोलॉजिकल सॉल्यूशंस एडवांसिंग री-जेनेरेटिंग एग्रीकल्चर फॉर हेल्थ एंड एनवायरनमेंट’ और वैश्विक स्तर पर अनुसंधान के लिए चर्चित आईसीएआरडीए की पुस्तक का विमोचन किया गया। साथ ही पल्स मिशन पोर्टल की लॉन्चिंग की गई। कार्यक्रम में जैविक खेती के विस्तार सहित कृषि के क्षेत्र में नवाचार व विशेष योगदान देने वाले किसानों को पुरस्कार भी वितरित किए गए।


    इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने अतिथियों को अमलाहा स्थित क्षेत्र में तैयार चने और मसूर की उन्नत किस्मों की फसल का अवलोकन कराया। वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन पद्धतियों की जानकारी भी साझा की। सम्मेलन में दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श चल रहा है। सम्मेलन में मप्र समेत प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और उद्योग प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।


    राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर से आए कृषि वैज्ञानिकों और नौ राज्यों के कृषि मंत्रियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना विकसित और आत्मनिर्भर भारत का है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता देश के लिए आवश्यक है और विदेशों से दाल आयात करना गर्व नहीं, बल्कि चिंता का विषय है।


    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 27 देशों के साथ समझौते किए, लेकिन किसानों के हितों से समझौता नहीं होने दिया। अब लक्ष्य है कि देश में दालों का उत्पादन बढ़ाया जाए। उन्होंने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि एक ही फसल बोने से जमीन भी थकती है और कीटों का प्रकोप बढ़ता है, इसलिए चना, मसूर, उड़द और तुअर जैसी फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है।


    उन्होंने मध्य प्रदेश को दलहन उत्पादन में देश में नंबर वन बताते हुए कहा कि क्षेत्रफल में कमी चिंता का विषय है, जिसे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। आईसीएआरडीए सहित अन्य अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से उन्नत बीज विकसित किए जा रहे हैं, जो मौसम और बीमारियों के अनुकूल होंगे। बीज वितरण के लिए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और आदर्श खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये की सहायता भी दी जाएगी।


    मध्य प्रदेश में लगेंगी 55 दाल मिल
    केंद्रीय मंत्री चौहान ने घोषणा की कि देशभर में 1000 नई दाल मिलें स्थापित की जाएंगी, जिनमें से 55 मध्य प्रदेश में लगेंगी। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि तुअर 8000 रुपये प्रति क्विंटल, उड़द 7800 रुपये, चना 5875 रुपये और मसूर 7000 रुपये प्रति क्विंटल खरीदी जाएगी। “बीज से लेकर बाजार तक” किसानों की चिंता सरकार करेगी।


    उन्होंने बताया कि सम्मेलन के बाद सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ मंथन कर दलहन उत्पादन बढ़ाने का राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस मिशन के तहत मध्य प्रदेश को 354 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि असली आनंद खेत, किसान और मिट्टी से जुड़कर काम करने में है, और सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    कृषि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा भारत : मुख्यमंत्री
    सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय परंपरा में अन्न और दाल का विशेष महत्व है। हमारी थाली में परोसा गया अन्न ही हमारे लिए देवतुल्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसान, युवा, गरीब और नारी सशक्तीकरण के लिए निरंतर योजनाएं चलाई जा रही हैं।


    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की कृषि परंपरा प्राचीन और समृद्ध रही है। प्रदेश में स्थापित अनुसंधान केंद्र किसानों के हित में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनें, क्योंकि देश में मांग के अनुपात में उत्पादन अभी भी चुनौती बना हुआ है। डॉ. यादव ने कहा कि दलहन-तिलहन मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश सरकार दो कदम आगे रहकर कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को डेढ़ हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि सीधे खातों में पहुंचाई गई। सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।


    मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों से आए कृषि मंत्रियों से भी आग्रह किया कि भारत की कृषि उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर दलहन उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम है।

  • CJI सूर्यकांत का मध्यप्रदेश का पहला आधिकारिक दौरा उद्घाटन सत्र में देंगे मार्गदर्शनCJI सूर्यकांत का मध्यप्रदेश का पहला आधिकारिक दौरा उद्घाटन सत्र में देंगे मार्गदर्शन

    CJI सूर्यकांत का मध्यप्रदेश का पहला आधिकारिक दौरा उद्घाटन सत्र में देंगे मार्गदर्शनCJI सूर्यकांत का मध्यप्रदेश का पहला आधिकारिक दौरा उद्घाटन सत्र में देंगे मार्गदर्शन


    भोपाल /देश की न्यायिक प्रणाली को अधिक एकीकृत प्रभावी और जन केंद्रित बनाने की दिशा में आज भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में दो दिवसीय राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन की शुरुआत हो रही है। इस अहम सम्मेलन में भारत के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति सूर्यकांत सहित देश के 25 से अधिक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और वरिष्ठ न्यायाधीश भाग ले रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद यह पहला मौका है जब उच्च न्यायपालिका के इतने बड़े स्तर के पदाधिकारी एक साथ भोपाल में एक मंच पर जुट रहे हैं।

    सम्मेलन की थीम एकीकृत कुशल और जन केंद्रित न्यायपालिका रखी गई है। इस विषय के अंतर्गत न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों न्यायिक प्रक्रिया में सुधार तकनीक के उपयोग और आम नागरिकों तक न्याय की पहुंच को सरल बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न उच्च न्यायालयों के अनुभव साझा कर न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए साझा और समन्वित रणनीति विकसित करना है।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनने के बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत का यह मध्यप्रदेश का पहला आधिकारिक दौरा है। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में CJI न्यायपालिका की भूमिका संस्थागत समन्वय और समयबद्ध न्याय वितरण प्रणाली पर अपना संबोधन देंगे। उनके विचारों को वर्तमान न्यायिक परिदृश्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सम्मेलन में भाग ले रहे विभिन्न हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अपने अपने राज्यों में न्यायिक प्रशासन से जुड़े अनुभव सुधारात्मक प्रयास और व्यावहारिक चुनौतियों को साझा करेंगे। विशेष रूप से लंबित मामलों को कम करने वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र ई कोर्ट्स न्यायिक प्रशिक्षण और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे। आयोजकों का मानना है कि यह संवाद न्यायपालिका के भीतर सहयोग और समन्वय को नई दिशा देगा।

    CJI के भोपाल आगमन को देखते हुए सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी एयरपोर्ट से लेकर नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी तक व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। सम्मेलन के दौरान CJI की वरिष्ठ अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों से औपचारिक मुलाकात की भी संभावना है।

    नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में आयोजित यह सम्मेलन केवल न्यायपालिका के आंतरिक सुधारों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका व्यापक प्रभाव आम नागरिकों तक न्याय को सरल पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर भी पड़ेगा। सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों के निष्कर्षों और सुझावों के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना तय किए जाने की संभावना है।

  • झाबुआ: रामा में जैविक उपज विक्रय हाट बाजार बना आकर्षण का केंद्र

    झाबुआ: रामा में जैविक उपज विक्रय हाट बाजार बना आकर्षण का केंद्र

    झाबुआ। मध्य प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य झाबुआ जिले में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास अब सार्थक रुप ग्रहण करते हुए नजर आ रहे हैं।

    जिले के जनपद मुख्यालय रामा में शुक्रवार को साप्ताहिक जैविक हाट बाजार के आयोजन में आम लोगों की दिलचस्पी इस बात को रेखांकित करती है। आयोजित जैविक उपज हाट बाजार का संचालन अंचल के जैविक, पारंपरिक, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों द्वारा किया गया था, जिसमें बिना रासायनिक खाद, कीटनाशक रहित उगाए गए दाले, मसाले, फल, सब्जी एवं अनाज को बिक्री हेतु प्रस्तुत किया गया था।

    उल्लेखनीय है कि जिला कलेक्टर नेहा मीना द्वारा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु कृषकों को जैविक खेती करने हेतु प्रेरित किया जाता रहा है। परिणामस्वरूप जिले में जैविक खेती की शुरुआत हुई, ओर जब जैविक फसल तैयार हुई तो किसानों को जैविक फसल का अच्छा प्रतिसाद मिले, इस उद्देश्य से जिला कलेक्टर द्वारा जिले के कृषि एवं उद्या निकी जैसे कृषिगत विभागों को जैविक उपज का साप्ताहिक बाजार लगाने के निर्देश दिए गए थे, ओर उन्हीं निर्देशों के पालन में शुक्रवार को रामा में जैविक उपज हाट बाजार लगाया गया।

    रामा के दशहरा मैदान में पृथक से लगाए गए जैविक उपज हाट बाजार में अंचल के जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों ने अपनी गुणवत्ता और पोषण से युक्त खा‌द्यान सामग्री आमजन को विक्रय के लिए उपलब्ध कराई। साप्ताहिक रूप से पृथक से लगाए गए जैविक उपज बाजार में किसानों द्वारा अपने खेत में उगाई देशी मक्का, अरहर दाल, उड़द दाल, मूंग की जैविक दाले, देशी चावल, कोदो, देशी किस्म की सेम, बैगन, अमरूद, देशी टमाटर, गाजर, मक्का के भुट्टे जैसे उत्पाद सुलभ कराए गए थे। इन जैविक उत्पादों की गुणवत्ता अंचल के आमजनों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।

    उक्त हाट बाजार में उप संचालक कृषि एन एस रावत ने स्वयं जैविक उपज बाजार में उपस्थित होकर अंचल के किसानों का उत्साहवर्धन करते हुए किसानों से जैविक उपज खरीदी। रावत ने कहा कि हर आम जागरूक व्यक्ति बिना रासायनिक खाद के उगाए गए खा‌द्यान्न, फल और सब्जी का उपयोग करना चाहता है। जिले में कई किसान, स्वयं सहायता समूह जैविक और प्राकृतिक खेती के माध्यम से सब्जियों, फलों तथा कोदो, कॅगनी, रागी जैसे अनाजों की खेती कर रहे हैं। जैविक बाजार के माध्यम से जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को अपने जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए उचित स्थान प्राप्त होता है। जिससे जैविक खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज का समुचित दाम प्राप्त होने से उनके जैविक खेती करने के मनोयोग को संबल मिलेगा, अन्य कृषक भी जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। किसानों के मध्य जैविक और प्राकृतिक उत्पाद बेचने के लिए भरपूर उत्साह था और उनके द्वारा आमजनता से इस सुविधा का लाभ उठाने का आव्हान भी किया। जैविक बाजार में अपनी उपज विक्रय करने के लिए ग्राम पलासड़ी, साड ओर नवापाड़ा से आए अग्रणी किसानों ने हाट में अपनी उपज विक्रय के लिए प्रस्तुत की, ओर उन्हें अच्छा प्रतिसाद मिला।

    साप्ताहिक रूप से आयोजित होने वाले जैविक उपज हाट बाजार में कृषि विभाग के सहायक संचालक एस.एस.रावत, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ज्वाला सिंगाड़ सहित अन्य ‌विभागीय अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे, साथ ही बड़ी संख्या में हाट करने आए लोोगों ने जैविक फसलों के हाट बाजार की सराहना की।

  • मनोज बाजपेयी सहित निर्माता निर्देशक पर कार्रवाई की मांग फिल्म पर तत्काल रोक लगाने का दबाव

    मनोज बाजपेयी सहित निर्माता निर्देशक पर कार्रवाई की मांग फिल्म पर तत्काल रोक लगाने का दबाव


    उज्जैन : ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म घूसखोर पंडत का टीजर सामने आते ही विवाद गहराता जा रहा है। फिल्म के नाम और कुछ संवादों को लेकर ब्राह्मण समाज में गहरी नाराजगी है। शनिवार को अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उज्जैन के माधव नगर थाने पहुंचे और फिल्म के निर्माता निर्देशक एवं अभिनेता मनोज बाजपेयी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।

    ब्राह्मण समाज का आरोप है कि फिल्म के टाइटल घूसखोर पंडत और इसमें प्रयुक्त संवाद ब्राह्मण लंगोट का ढीला होता है समाज की छवि को अपमानित करने वाले हैं। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि पंडितों को घूसखोर बताना पूरे समाज का अपमान है जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    उन्होंने कहा कि फिल्म के संवाद जानबूझकर ब्राह्मण समाज को बदनाम करने के उद्देश्य से डाले गए हैं। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि एक पूरे वर्ग को नीचा दिखाने की कोशिश है। चतुर्वेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस फिल्म को लेकर एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो उज्जैन में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।

    प्रदर्शन के दौरान अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। युवा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि भले ही फिल्म निर्माताओं ने कहीं माफी मांगी हो लेकिन समाज उन्हें माफ करने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज की मान प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। ऐसी फिल्मों के जरिए समाज को बदनाम करने की साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि फिल्म के टाइटल में तुरंत बदलाव किया जाए। फिल्म से विवादित संवाद हटाए जाएं और यदि अन्य आपत्तिजनक दृश्य या बयान हैं तो उन्हें भी हटाया जाए। साथ ही फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की गई।जानकारी के अनुसार फिल्म में मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं और वह एक पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में उन्हें पंडित नाम से संबोधित किया गया है जिस पर समाज को विशेष आपत्ति है।

    माधव नगर थाना प्रभारी राकेश भारती ने बताया कि अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र चतुर्वेदी द्वारा शिकायत दी गई है। मामले की जांच की जा रही है और विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।फिल्म को लेकर देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में यह विवाद अब कानूनी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

  • दतियाः प्रसिद्ध पीताम्बरा पीठ में खुले में साधना-जप पर पूर्ण रोक

    दतियाः प्रसिद्ध पीताम्बरा पीठ में खुले में साधना-जप पर पूर्ण रोक

    दतिया। मध्य प्रदेश दतिया में स्थित प्रसिध पीताम्बरा पीठ में दर्शनार्थियों की सुविधा, सुरक्षा एवं मंदिर परिसर में शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खुले में साधना-जप पर पूर्ण रोक लगा दी गई है।

    जनसम्पर्क अधिकारी निहारिका मीना ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि यह निर्णय मणिपुर धाम नया स्वामी साधना केंद्र पीताम्बरा पीठ मंदिर परिसर में गत दिवस जिला प्रशासन द्वारा पीठ प्रबंधन के साथ हुई बैठक में लिया गया। पीठ प्रबंधन ने निर्णय लिया है कि पीताम्बरा पीठ परिसर में खुले में बैठकर साधना या जप करने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके साथ ही पीठ प्रबंधन द्वारा साधकों एवं पंडितों के लिए दो स्थान निर्धारित किए गए है।

    बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि पीताम्बरा पीठ परिसर स्थित वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर में विभिन्न साधकों द्वारा साधना किए जाने से मंदिर परिसर में भीड़, अव्यवस्था एवं दर्शनार्थियों को असुविधा की स्थिति बनती है। बैठक में लिए गए निर्णय वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की साधना नहीं की जाएगी। खुले में बैठकर साधना/जप पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। साधना/जप केवल पीठ प्रबंधन द्वारा निर्धारित स्थानोंकृमणिपुर धाम एवं नया स्वामी साधना केंद्र में ही किया जाएगा। दर्शनार्थियों की सुविधा, सुरक्षा तथा मंदिर परिसर में शांति एवं अनुशासन बनाए रखना सर्वोपरि रहेगा। उक्त निर्णय/व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू रहेगी।

  • मप्र को मिला केंद्र से पंचायती राज के लिए 652 करोड़ का बूस्टर: ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति!

    मप्र को मिला केंद्र से पंचायती राज के लिए 652 करोड़ का बूस्टर: ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति!

    भोपाल। मध्य प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान के रूप में 652.55 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह राशि वित्त वर्ष 2024-25 की बंधनरहित अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में है, जो राज्य की सभी 52 पात्र जिला पंचायतों, 312 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 23,001 पात्र ग्राम पंचायतों को लाभ पहुंचाएगी। साथ ही, पिछली किस्त के रोके गए 77 लाख रुपये भी तीन अतिरिक्त ब्लॉक पंचायतों और छह ग्राम पंचायतों को मुहैया कराए गए हैं।


    इस संबंध में प्राप्‍त जानकारी के अनुसार उक्‍त अनुदान ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को मजबूत करने का माध्यम बनेगा, जो स्वच्छता, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास में सहायक होगा। मध्य प्रदेश जैसे कृषि-प्रधान राज्य में यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला साबित होगा।

    उल्‍लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में पंचायती राज संस्थाएं (पीआरआई) लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने का आधार हैं। राज्य में कुल 52 जिला पंचायतें, 312 ब्लॉक पंचायतें और 23,001 ग्राम पंचायतें कार्यरत हैं, जो लगभग 7.8 करोड़ की जनसंख्या को कवर करती हैं। 73वें संविधान संशोधन के बाद यह त्रिस्तरीय व्यवस्था स्थापित हुई, जो ग्रामीण विकास को स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित करती है। पंद्रहवें वित्त आयोग ने 2021-26 की अवधि के लिए कुल 2.36 लाख करोड़ रुपये का अनुदान निर्धारित किया था, जिसमें मध्य प्रदेश को 6,339 करोड़ रुपये का हिस्सा मिलना है। इस अनुदान का बड़ा हिस्सा बंधनरहित है, जिसका उपयोग पंचायतें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार कर सकती हैं।

    आर्थिक आंकड़ों से झलकता विकास का चित्र

    पिछले वर्षों के आंकड़े इस अनुदान की अहमियत को रेखांकित करते हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में मध्य प्रदेश को पंद्रहवें वित्त आयोग से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक मिले थे, जिनका उपयोग जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और ग्रामीण सड़कों पर हुआ। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024 तक ग्राम पंचायतों ने 15,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कें बनाईं, जबकि स्वच्छता अभियान में 90 फीसद से ऊपर खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) गांव हासिल हो चुके हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसएसओ) के अनुसार, मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय 2023 में 1.2 लाख रुपये तक पहुंची, जो अनुदान से प्रेरित है।

    इस अनुदान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। मध्य प्रदेश का ग्रामीण जीडीपी राज्य के कुल जीडीपी (2024-25 अनुमान: 4.5 लाख करोड़ रुपये) का 55% है। अनुदान से जल संरक्षण परियोजनाओं में निवेश बढ़ेगा, खासकर बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्रों में जहां सूखा प्रभावित किसान हैं। उदाहरणस्वरूप, 2024 में राज्य ने 5,000 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया, जिससे सिंचाई क्षमता 20 फीसद बढ़ी। इसके अलावा, महिला सशक्तिकरण के लिए पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण ने 1.5 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधियों को सक्रिय किया है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार ने 2025 बजट में पंचायतों के लिए 10,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया, जो केंद्र अनुदान के साथ मिलकर ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को दोगुना करेगा। विशेष रूप से, आदिवासी बहुल जिलों जैसे मंडला, डिंडोरी में यह राशि स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। नीति आयोग के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पंद्रहवें वित्त आयोग अनुदान से राज्य की ग्रामीण गरीबी दर 2024 में 25 फीसद से घटकर 22 फीसद रह गई है।

  • युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर का पहला जबलपुर दौरा रानी दुर्गावती को नमन कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह

    युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर का पहला जबलपुर दौरा रानी दुर्गावती को नमन कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह


    नई दिल्ली ।भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर अपने पहले आधिकारिक दौरे पर जबलपुर पहुंचे। नगर आगमन पर युवा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। प्रदेश अध्यक्ष ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके अदम्य साहस शौर्य और बलिदान को नमन किया।

    इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद सदस्य चंद्रशेखर पटेल ने प्रदेश अध्यक्ष का स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत रानी दुर्गावती के जीवन और संघर्ष को स्मरण करते हुए की गई। आयोजन के दौरान वीरांगना रानी दुर्गावती के जीवन पर आधारित लोक नृत्य की विशेष प्रस्तुति दी गई जिसने उपस्थित युवाओं और अतिथियों को इतिहास और संस्कृति की गौरवशाली परंपरा से जोड़ दिया।

    लोक नृत्य के माध्यम से नारी शक्ति और स्वाभिमान का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने इस प्रस्तुति को प्रेरणादायक बताया। श्याम टेलर ने कहा कि रानी दुर्गावती जैसी वीरांगनाएं आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।

    कार्यक्रम के दौरान आगामी बजट सत्र को लेकर भी चर्चा हुई। इसमें युवाओं की भूमिका जनकल्याणकारी योजनाएं और प्रदेश व देश के विकास की दिशा पर विचार विमर्श किया गया। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि युवा मोर्चा संगठन की रीढ़ है और युवाओं को नीति निर्माण और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में युवा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी अहम है। युवाओं को संगठन के माध्यम से सेवा समर्पण और राष्ट्रवाद की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।इस कार्यक्रम में योगेंद्र सिंह ठाकुर जय रोहणी आशीष काटकर ईशान नायक शरद विश्वकर्मा रोहन वैद्य राहुल सिंह पटेल अभिषेक वाल्मीक शशांक विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष के पहले जबलपुर दौरे का गर्मजोशी से स्वागत किया।

  • विंध्य की गोद में बसा खिवनी अभयारण्य बन रहा इको-टूरिज्म का आकर्षण केन्द्र

    विंध्य की गोद में बसा खिवनी अभयारण्य बन रहा इको-टूरिज्म का आकर्षण केन्द्र

    भोपाल। विंध्य पर्वतमालाओं की गोद में स्थित खिवनी अभयारण्य मध्य प्रदेश के उभरते हुए इको-टूरिज्म स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। देवास और सीहोर जिलों की सीमा पर फैला लगभग 134 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला यह अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव शोधकर्ताओं और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित कर रहा है।

    जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि घने जंगल, पर्वत घाटियां, बहते नदी-नाले और समृद्ध जैव विविधता इसे एक अनूठा प्राकृतिक स्थल बनाते हैं। ईको-पर्यटन विकास बोर्ड के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। सफारी संचालन, भोजन व्यवस्था, आवास प्रबंधन तथा लघु उद्योगों के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और कारीगरों की आय में वृद्धि हो रही है। अभयारण्य में https://mpforest.gov.in/ecotourism/ecobooking/destination.aspx के माध्यम से बुकिंग की जा सकती है।

    उन्होंने बताया कि देवास जिले में स्थित इस अभयारण्य का लगभग 89.9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र देवास तथा 44.8 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र सीहोर जिले में आता है। खिवनी अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन का सुंदर उदाहरण देखने को मिलता है। यहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के साथ अनेक औषधीय पौधों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं, जो इसकी प्राकृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। अभयारण्य में पर्यटकों के ठहरने के लिये सर्व-सुविधायुक्त टूरिस्ट कैंपस विकसित किया गया है, जिसमें कॉटेज, टेंट, वॉच टावर, पैगोडा और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है।

    वन्यजीव और जैव विविधता की समृद्ध धरोहर

    खिवनी अभयारण्य में मांसाहारी वन्यजीवों में बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, सोनकुत्ता, जंगल कैट, गोल्डन जैकाल, एशियन पाम सिवेट सहित अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं, वहीं शाकाहारी जीवों में चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंगा, कृष्णमृग, जंगली सूअर और खरहा प्रमुख हैं। पक्षियों की लगभग 170 प्रजातियां तथा तितलियों की करीब 65 प्रजातियां इस अभयारण्य की जैव विविधता को और समृद्ध बनाती हैं।

    प्रमुख दर्शनीय स्थल

    अभयारण्य में बाल गंगा मंदिर, कलम तलई सनसेट पॉइंट, ईको व्यू पॉइंट, गोल कोठी, खिवनी मिडो, शंकर खो एवं भदभदा झरने, भूरी घाटी और दौलतपुर घाटी जैसे अनेक आकर्षक स्थल हैं। विशेषकर वर्षाकाल में झरनों, हरियाली और पर्वत श्रृंखलाओं का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

    पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयास

    खिवनी अभयारण्य को पर्यटन मानचित्र पर व्यापक स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नियमित मॉनिटरिंग के साथ पर्यटकों की सुविधाओं के समुचित प्रबंधन किया जा रहा है। खिवनी अभयारण्य भोपाल–इंदौर मार्ग पर आष्टा से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इंदौर–नेमावर–हरदा मार्ग से कन्नौद होकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन हरदा तथा निकटतम हवाई अड्डे इंदौर और भोपाल हैं।

    प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों की विविधता और शांत वातावरण के कारण खिवनी अभयारण्य पर्यटकों की नई पसंद बनता जा रहा है और मध्यप्रदेश के इको-टूरिज्म को एक नई दिशा दे रहा है।

  • सुप्रीम कोर्ट में सरकार के जवाब से पहले विजय शाह का भावुक संदेश कहा सेना और समाज के प्रति कोई दुर्भावना नहीं

    सुप्रीम कोर्ट में सरकार के जवाब से पहले विजय शाह का भावुक संदेश कहा सेना और समाज के प्रति कोई दुर्भावना नहीं

    मध्यप्रदेश / कर्नल सोफिया को लेकर दिए विवादित बयान पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से ठीक पहले मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने एक बार फिर माफी मांगी है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उन्होंने कहा कि उनके शब्द किसी महिला अधिकारी भारतीय सेना या किसी समाज के अपमान के उद्देश्य से नहीं थे बल्कि वे देशभक्ति के उत्साह और आवेश में निकल गए थे।

    विजय शाह ने कहा कि उन्होंने पहले भी कई बार क्षमा याचना की है और आज एक बार फिर अंतकरण से माफी मांग रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक होती है और इस घटना से उन्होंने आत्ममंथन किया है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में वाणी पर पूर्ण नियंत्रण रहेगा और ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।

    उन्होंने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक है कि एक छोटी सी त्रुटि से इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने भारतीय सेना के प्रति अपने सम्मान को दोहराते हुए कहा कि सेना के लिए उनके मन में हमेशा सम्मान रहा है और रहेगा।

    यह विवाद पिछले साल 11 मई को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में दिए गए भाषण से शुरू हुआ था। एक कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए मंत्री विजय शाह ने ऐसा बयान दिया जिसे लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई। विपक्षी दलों के साथ साथ पूर्व सैन्य अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने बयान को आपत्तिजनक बताया।

    मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जहां मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति को लेकर मध्यप्रदेश सरकार को जवाब दाखिल करना है। कोर्ट ने पहले ही राज्य सरकार को 15 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। अब 9 फरवरी को इस मामले में अहम सुनवाई प्रस्तावित है।सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से और समय मांग सकती है। तर्क दिया जा सकता है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण जरूरी है। यही रुख इस मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम का भी रहा है।

    विजय शाह मामले की जांच एसआईटी कर रही है जिसमें प्रमोद वर्मा कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं। एसआईटी पहले भी अतिरिक्त समय की मांग कर चुकी है। इसी बीच मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करने के लिए दिल्ली भेज दी है। गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस संबंध में दिल्ली पहुंचे हैं।सूत्र बताते हैं कि सरकार ने इस मामले में पार्टी नेतृत्व के साथ साथ अटॉर्नी जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी कानूनी सलाह ली है। संभावना है कि 9 फरवरी को अभियोजन से जुड़े बिंदुओं पर सुनवाई होगी जबकि 11 फरवरी को अन्य पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।