Category: Madhya Pradesh

  • मुरैना-धौलपुर रोड पर चलती कार में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, NHM ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट

    मुरैना-धौलपुर रोड पर चलती कार में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, NHM ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट


    नई दिल्ली ।  मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की टीम ने एक बड़े स्टिंग ऑपरेशन में चलती कार में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया। ऑपरेशन में टीम ने ननद बनकर महिला के साथ बैठी डॉक्टर और गर्भवती महिला को सुरक्षित बाहर निकाला।

    स्टिंग ऑपरेशन की झलक
    घटना 2 मई 2025 को मुरैना-धौलपुर रोड पर चंबल नदी के पुल के पास हुई।

    एक कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन लगाकर गर्भवती महिला का लिंग पता लगाया जा रहा था।

    पीछे से आ रही NHM की टीम ने गाड़ी को रोका, शीशे तोड़े और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।

    टीम में डॉ. प्रज्ञा तिवारी, डॉ. बिंदु, डॉ. प्रबल, डॉ. अनुभा और संजय जोशी शामिल थे।

    गिरोह का नेटवर्क
    जांच में सामने आया कि यह गिरोह मध्यप्रदेश-राजस्थान बॉर्डर क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय था।

    नेटवर्क में कुछ एएनएम और आशा कार्यकर्ता भी शामिल थीं।

    गर्भवती महिलाओं को अलग-अलग लोकेशन पर ले जाकर चलती कार में सोनोग्राफी की जाती थी।

    भ्रूण का लिंग मौखिक रूप से और स्क्रीन पर दिखाकर बताया जाता था।

    स्टिंग ऑपरेशन की तैयारी
    NHM ने करीब 6 महीने की तैयारी के बाद स्टिंग ऑपरेशन किया।

    एक गर्भवती महिला को डिकॉय के रूप में तैयार किया गया और गिरोह तक पहुंचाने के लिए स्थानीय इंफॉर्मर का उपयोग किया गया।

    आशा कार्यकर्ता ने भ्रूण लिंग बताने के लिए 50 हजार रुपए की मांग भी की।

    रिपोर्ट और केंद्र को जानकारी
    इस स्टिंग ऑपरेशन की जानकारी 6 मार्च 2026 को NHM की संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी ने केंद्र सरकार को भेजी थी।

    रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश में बिगड़ते लिंगानुपात के पीछे अवैध लिंग परीक्षण और फैमिली बैलेंसिंग तकनीकें बड़ी वजह हैं।

    लिंगानुपात पर चिंता
    आंकड़ों के अनुसार, 2016-18 में मध्यप्रदेश का लिंगानुपात 925 था, जो 2020-22 में घटकर 915 हो गया। 2023 में हल्का सुधार हुआ और यह 917 पर पहुंचा।

    ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों का जन्म अनुपात अभी भी कम (911) है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 941 दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रूण लिंग परीक्षण और बेटे की चाह सामाजिक मानसिकता के मुख्य कारण हैं।

    चुनौती अभी बाकी
    NHM का कहना है कि नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, लेकिन अवैध कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

    जागरूकता अभियान और इनफॉर्मर रिवॉर्ड (50 हजार से 2 लाख रुपए) के जरिए लोगों को सही रास्ते पर लाया जा रहा है।

    विभाग लगातार निगरानी और कानूनी कार्रवाई से इस काले कारोबार पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है।

    यह स्टिंग ऑपरेशन न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में भ्रूण लिंग परीक्षण जैसे अवैध और सामाजिक रूप से घातक कृत्यों पर कड़ी कार्रवाई की मिसाल है।

  • MP में दो दिन और झुलसाएगी गर्मी, 18-19 मार्च को बारिश के आसार; भोपाल में घरों पर ग्रीन नेट, सड़कों पर पसरा सन्नाटा

    MP में दो दिन और झुलसाएगी गर्मी, 18-19 मार्च को बारिश के आसार; भोपाल में घरों पर ग्रीन नेट, सड़कों पर पसरा सन्नाटा


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में गर्मी का असर तेजी से बढ़ने लगा है और लोग इससे बचने के लिए तरह तरह के उपाय करने लगे हैं। राजधानी भोपाल में कई घरों को तेज धूप से बचाने के लिए ग्रीन नेट से कवर किया जा रहा है, ताकि घरों के अंदर का तापमान ज्यादा न बढ़े। वहीं इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले दो दिन तक तेज गर्मी का असर बना रहेगा, जबकि 18 और 19 मार्च को मौसम में बदलाव के साथ कई जिलों में बारिश हो सकती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक रविवार को ग्वालियर चंबल क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिला। इसके चलते आसमान में बादल छाए रहे और तापमान में करीब 1.7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। हालांकि यह सिस्टम अब कमजोर पड़ चुका है। इसी वजह से 16 और 17 मार्च को प्रदेश में कहीं भी बारिश या बादलों का अलर्ट नहीं है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार 17 मार्च की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर मध्यप्रदेश में 18 और 19 मार्च को देखने को मिलेगा।

    रविवार को प्रदेश के कई जिलों में तापमान में हल्की गिरावट जरूर दर्ज की गई। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री, दतिया में 32.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 36 डिग्री, सिवनी में 35.6 डिग्री, मंडला में 37.2 डिग्री और बालाघाट में 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि शाम तक कहीं बारिश नहीं हुई, लेकिन बादल छाए रहने से तापमान में कुछ राहत मिली।

    वहीं पिछले तीन दिनों से तीव्र गर्मी झेल रहे नर्मदापुरम में भी पारा कुछ नीचे आया और अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 36.4 डिग्री, इंदौर में 35.5 डिग्री, ग्वालियर में 32.6 डिग्री, उज्जैन में 35.5 डिग्री और जबलपुर में 35.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    तेज गर्मी के चलते राजधानी भोपाल को मार्च महीने में ही जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया गया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश जारी करते हुए निजी ट्यूबवेल खनन पर रोक लगा दी है। अब केवल सरकारी ट्यूबवेल ही खोदे जा सकेंगे और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की नल जल योजनाओं को सुचारू रखने के लिए जरूरी काम किए जाएंगे। आदेश में यह भी कहा गया है कि बिना अनुमति ट्यूबवेल खनन करने पर दो साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही बोरवेल मशीनों के जिले से गुजरने पर भी रोक लगा दी गई है।

    डॉक्टरों का कहना है कि मार्च का मौसम बीमारियों के लिहाज से भी संवेदनशील होता है। दिन में तेज गर्मी और सुबह शाम हल्की ठंड रहने से सर्दी जुकाम, एलर्जी और अस्थमा के मरीज बढ़ जाते हैं। कई लोग दिन की गर्मी से बचने के लिए हल्के कपड़े पहन लेते हैं और ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसलिए सुबह और देर रात की ठंडी हवा से बचने की सलाह दी गई है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को।

    मौसम विभाग के अनुसार इस साल अप्रैल और मई में प्रदेश में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ने की संभावना है। ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच सकता है, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी का असर रहेगा।

  • भोपाल: प्रोस्टेट बीमारी में इमामत नहीं कर सकते, फतवे में कहा – पेशाब टपकने जैसी बीमारी हो तो खुद पढ़े, लोगों को पढ़ाएं नहीं

    भोपाल: प्रोस्टेट बीमारी में इमामत नहीं कर सकते, फतवे में कहा – पेशाब टपकने जैसी बीमारी हो तो खुद पढ़े, लोगों को पढ़ाएं नहीं



    भोपाल। राजधानी भोपाल में जामे एहतमाम मसाजिद कमेटी के दारुल इफ्ता द्वारा जारी फतवा सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद का विषय बन गया है। फतवा प्रोस्टेट की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की इमामत (नमाज पढ़ाने) क्षमता पर केंद्रित है।दस्तावेज में कहा गया है कि जिस व्यक्ति को लगातार पेशाब टपकने जैसी बीमारी हो, उसे शरियत में ‘माजूर’ माना जाता है।

    ऐसी स्थिति में वह व्यक्ति खुद नमाज पढ़ सकता है, लेकिन इमाम बनकर लोगों को नमाज नहीं पढ़ा सकता।यदि कोई व्यक्ति ऐसे इमाम के पीछे फर्ज़ नमाज पढ़ ले, तो उसे दोबारा पढ़ने की जरूरत नहीं।

    जरूरी जानकारी

    फतवा 9 मार्च 2026 को नायब मुफ़्ती सैयद अहमद खान कासमी की ओर से जारी किया गया।मुफ़्ती-ए-शहर भोपाल की मुहर भी लगी है।सवाल भोपाल के पीरगेट निवासी सहेल अली ने पूछा था।पूरे दस्तावेज में भोपाल के वर्तमान शहर काज़ी का नाम नहीं है।बावजूद इसके, सोशल मीडिया पर इसे सीधे शहर काजी से जोड़कर वायरल किया गया, जिससे भ्रम फैल गया।

    धार्मिक जानकारों की राय:

    इस तरह के फतवे आमतौर पर शरई नियम स्पष्ट करने के लिए दिए जाते हैं।यह जरूरी नहीं कि फतवा किसी खास व्यक्ति के खिलाफ हो।

    आगामी कदम:

    ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने फतवे को लेकर अहम बैठक बुलाई है।बैठक में मुस्लिम धर्म गुरु और संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।समिति के संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि बैठक में शहर काजी की बीमारी और नमाज को लेकर फतवा पर चर्चा होगी।

    विशेष टिप्पणी:

    यह फतवा केवल धार्मिक नियम स्पष्ट करने के लिए जारी किया गया है।

    सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले दावे भ्रम पैदा कर सकते हैं, इसलिए सटीक दस्तावेज देखें।

  • 1 अप्रैल से बदलेगी मध्यप्रदेश में पेंशन व्यवस्था: SBI बनेगा एकमात्र एग्रीगेटर बैंक, जिला पेंशन कार्यालय होंगे बंद

    1 अप्रैल से बदलेगी मध्यप्रदेश में पेंशन व्यवस्था: SBI बनेगा एकमात्र एग्रीगेटर बैंक, जिला पेंशन कार्यालय होंगे बंद


    भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार राज्य के करीब साढ़े चार लाख पेंशनभोगियों को राहत देने के लिए पेंशन भुगतान की पूरी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी जिसके तहत अब किसी भी बैंक में खाता रखने वाले सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद उसी खाते में सीधे पेंशन मिल सकेगी। राज्य शासन ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के उद्देश्य से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एकमात्र ‘एग्रीगेटर बैंक’ नियुक्त किया है।

    नई व्यवस्था के तहत राज्य सरकार पेंशन की पूरी राशि सीधे SBI को हस्तांतरित करेगी। इसके बाद SBI नोडल एजेंसी के रूप में काम करते हुए सभी पेंशनभोगियों के खातों में पेंशन की राशि जमा करेगा चाहे उनका बैंक खाता किसी भी बैंक में क्यों न हो। अभी तक पेंशन वितरण की प्रक्रिया में करीब 11 अलग-अलग बैंक शामिल थे लेकिन अब पूरा प्रबंधन और क्लेम प्रक्रिया सिर्फ SBI के माध्यम से होगी।

    दरअसल मौजूदा पेंशन प्रणाली में कई तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं सामने आ रही थीं जिनकी वजह से पेंशनर्स को काफी परेशानी होती थी। कई मामलों में पेंशनभोगियों को उसी बैंक में खाता बनाए रखना पड़ता था जहां उनका वेतन खाता था। इसके अलावा महंगाई भत्ता बढ़ने या वेतनमान में संशोधन होने पर पेंशन अपडेट करने की प्रक्रिया भी काफी जटिल थी। यह काम सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेल (CPPC) के माध्यम से होता था और यह सुविधा केवल चार बड़े बैंकों में ही उपलब्ध थी। जिन बैंकों में यह सुविधा नहीं थी वहां पेंशन अपडेट होने में काफी समय लग जाता था और पेंशनभोगियों को एरियर के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था।

    पेंशन भुगतान में देरी की एक बड़ी वजह पेंशन अदायगी आदेश यानी PPO के हस्तांतरण में लगने वाला समय भी था। सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी का PPO संबंधित बैंक को भेजा जाता था लेकिन समन्वय की कमी के कारण कई बार रिटायरमेंट के बाद भी पेंशन शुरू होने में देरी हो जाती थी। इसके अलावा वेतनमान फिक्सेशन में मामूली त्रुटियां भी पेंशन प्रक्रिया को महीनों तक रोक देती थीं।

    पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेशदत्त जोशी ने मौजूदा व्यवस्था में भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया है। उनके अनुसार जिला और संभागीय पेंशन कार्यालयों में कई बार कर्मचारियों द्वारा पेंशन प्रकरणों में बार-बार आपत्तियां लगाई जाती हैं जिससे रिटायर्ड कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से परेशान होना पड़ता है और कई मामलों में रिश्वत की शिकायतें भी सामने आती हैं।

    इसी समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी जिलों में संचालित पेंशन कार्यालयों को बंद किया जाएगा जबकि संभागीय मुख्यालयों के कार्यालय पहले की तरह काम करते रहेंगे। अब पेंशन निर्धारण की पूरी प्रक्रिया भोपाल स्थित मुख्यालय से केंद्रीकृत रूप से संचालित होगी। नई व्यवस्था में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी कर्मचारी को यह पता नहीं चलेगा कि उसकी पेंशन फाइल किस अधिकारी के पास है जिससे स्थानीय स्तर पर दबाव और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी।

    इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए SBI ने भी तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में राज्य में करीब 4 लाख 46 हजार पेंशनर्स हैं और इस वर्ष लगभग 22 हजार कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। बैंक ने अन्य 10 बैंकों से दो लाख से अधिक PPO वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है जिसे पूरा होने में तीन से चार महीने लग सकते हैं।

    वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश के करीब 22.5 लाख बुजुर्ग विधवा और दिव्यांग पेंशनर्स के लिए केंद्र से निराशाजनक खबर आई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यसभा में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली पेंशन राशि में फिलहाल किसी प्रकार की बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है।

  • जबलपुर में नदी में डूबे दो छात्रों में से एक का शव मिला, दोस्त को बचाने में बहा इंजीनियरिंग छात्र

    जबलपुर में नदी में डूबे दो छात्रों में से एक का शव मिला, दोस्त को बचाने में बहा इंजीनियरिंग छात्र


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में रविवार को हुई नदी में डूबने की घटना में बड़ा अपडेट सामने आया है। नहाने के दौरान नदी में बह गए दो छात्रों में से एक का शव बरामद कर लिया गया है जबकि दूसरे युवक की तलाश अभी भी जारी है। घटना के बाद एसडीआरएफ की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है।

    जानकारी के मुताबिक यह हादसा गौर पुलिस चौकी क्षेत्र के जामतारा घाटपर रविवार को हुआ था। बताया जा रहा है कि सात दोस्त एक साथ नदी में नहाने के लिए घाट पर पहुंचे थे। नहाते नहाते तीन युवक गहरे पानी में चले गए और तेज बहाव में फंस गए।

    इस दौरान एक इंजीनियरिंग छात्र ने साहस दिखाते हुए अपने दो दोस्तों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन जब वह तीसरे साथी को बचाने की कोशिश कर रहा था तभी दोनों तेज बहाव में बह गए और नदी में डूब गए। घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

    सूचना मिलने के बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों ने एक छात्र का शव बरामद कर लिया। बताया जा रहा है कि छात्र का शव बहते हुए ग्वारीघाटतक पहुंच गया था जहां से उसे बाहर निकाला गया।

    हालांकि दूसरे युवक की तलाश अभी भी जारी है। एसडीआरएफ और गोताखोरों की टीम लगातार नदी में सर्च ऑपरेशन चला रही है। प्रशासन का कहना है कि दूसरे छात्र का पता लगाने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है।

    इस घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। दोस्तों के साथ घूमने और नहाने गए छात्रों के साथ हुई इस दुर्घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नदी या जलाशयों में नहाते समय सावधानी बरतें और गहरे पानी में जाने से बचें।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दूसरे युवक की तलाश जारी है।

  • देवास के जंगल में चल रही थी अवैध पटाखा फैक्ट्री, पुलिस की दबिश में सुतली बम और बारूद जब्त

    देवास के जंगल में चल रही थी अवैध पटाखा फैक्ट्री, पुलिस की दबिश में सुतली बम और बारूद जब्त

    देवास । मध्यप्रदेश के देवास जिले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। यहां घने जंगल के बीच अवैध रूप से संचालित हो रही पटाखा फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मौके पर दबिश देकर भारी मात्रा में सुतली बम, बारूद और पटाखा बनाने की सामग्री जब्त की है। हालांकि अभी तक इस अवैध फैक्ट्री के संचालक का खुलासा नहीं हो सका है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

    यह मामला उदयनगर थाना क्षेत्र के पोलखाल जंगल का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार आदिवासी क्षेत्र के घने जंगल में टीन शेड के नीचे दो अवैध पटाखा फैक्ट्रियां संचालित की जा रही थीं। इसकी सूचना पुलिस को मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके पर छापा मारा।

    पुलिस अधीक्षक पुनीत गहलोत के निर्देशन में एडिशनल एसपी एच.एन. बाथम, उदयनगर थाना प्रभारी सी.एल. रायकवार और अधिकारी बी.डी. वीरा सहित पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। जब पुलिस टीम जंगल में पहुंची तो वहां टीन शेड के नीचे पटाखे बनाने का काम चल रहा था और कई मजदूर भी मौके पर मौजूद मिले।

    छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में सुतली बम और बारूद से भरे पैकेट बरामद हुए। इसके अलावा पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाला कागज, धागे, केमिकल और अन्य उपकरण भी मौके से जब्त किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक मौके से हजारों की संख्या में सुतली बम और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है।

    फिलहाल बरामद सामग्री की गिनती और जांच की प्रक्रिया जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अवैध फैक्ट्री का संचालन कौन कर रहा था और इसमें कितने लोग शामिल हैं।

    प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि घने जंगल में फैक्ट्री संचालित करने के पीछे मकसद प्रशासन और पुलिस की नजरों से बचना हो सकता है। फिलहाल पुलिस मजदूरों से पूछताछ कर रही है और फैक्ट्री संचालक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • गैस सिलेंडर न मिलने से भड़की महिला, एजेंसी पर किया हंगामा; लोगों ने कहा माता आ गई,

    गैस सिलेंडर न मिलने से भड़की महिला, एजेंसी पर किया हंगामा; लोगों ने कहा माता आ गई,


    मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के जौरा क्षेत्र से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है जहां घरेलू गैस सिलेंडर नहीं मिलने से परेशान एक महिला ने गैस एजेंसी के बाहर जमकर हंगामा कर दिया। कई दिनों से सिलेंडर के लिए एजेंसी के चक्कर लगा रही महिला जब इस बार भी खाली हाथ रह गई तो उसने वहीं खड़े होकर जोर जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। इस दौरान वह जीभ निकालकर अजीब हरकतें करने लगी जिससे वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला एजेंसी के गेट के पास खड़ी होकर जोर जोर से चिल्ला रही है और कर्मचारियों से बार बार गैस सिलेंडर देने की मांग कर रही है। इसी दौरान वह जीभ निकालकर डरावनी आवाजें भी निकालने लगती है। उसकी हरकतों को देखकर वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसे माता आना बता दिया और कहने लगे कि महिला पर देवी का साया आ गया है। हालांकि कई लोग उसे समझाने और शांत कराने की कोशिश करते भी दिखाई दिए।

    बताया जा रहा है कि महिला पिछले कई दिनों से घरेलू गैस सिलेंडर के लिए एजेंसी के चक्कर लगा रही थी। बार बार आने के बावजूद जब उसे सिलेंडर नहीं मिला तो उसका गुस्सा फूट पड़ा। गुस्से और हताशा में उसने एजेंसी के गेट को पकड़कर जोर जोर से हिलाना भी शुरू कर दिया और उसे तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान मौके पर मौजूद अन्य उपभोक्ता और कर्मचारी भी उसकी स्थिति देखकर हैरान रह गए।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक इलाके में पिछले कुछ दिनों से घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर दिक्कतें आ रही थीं। कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर लेने के लिए बार बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। इसी वजह से लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है।

    इस पूरे मामले को लेकर जौरा के एसडीएम शुभम शर्मा का कहना है कि हाल ही में गैस बुकिंग के सर्वर में तकनीकी समस्या आ गई थी जिसके कारण कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में देरी हुई। उन्होंने बताया कि अब सर्वर की समस्या ठीक कर दी गई है और एजेंसियों में गैस सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उपभोक्ताओं के नंबर के अनुसार सिलेंडर दिए जा रहे हैं।

    एसडीएम ने यह भी कहा कि वायरल वीडियो की जानकारी मिली है और महिला को किस वजह से परेशानी हुई इसकी भी जांच कराई जाएगी। फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि देर तक चले इस पूरे हंगामे के बाद भी महिला को उस समय गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया और उसे खाली हाथ ही लौटना पड़ा।

  • एमपी में दो दिन झुलसाएगी तेज गर्मी, फिर 18-19 मार्च को बदलेगा मौसम, बारिश के आसार

    एमपी में दो दिन झुलसाएगी तेज गर्मी, फिर 18-19 मार्च को बदलेगा मौसम, बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ती गर्मी से बचने के लिए लोगों ने अब इंतजाम शुरू कर दिए हैं। राजधानी भोपाल में कई घरों को ग्रीन नेट से ढककर धूप के असर को कम करने की कोशिश की जा रही है, ताकि घरों का तापमान ज्यादा न बढ़े। वहीं इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले दो दिन तक तेज गर्मी का असर बना रहेगा। इसके बाद 18 और 19 मार्च को कई जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। इससे पहले रविवार को ग्वालियर-चंबल संभाग में पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखाई दिया। क्षेत्र में दिनभर बादल छाए रहे, जिससे तापमान में करीब 1.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक अब यह सिस्टम कमजोर पड़ गया है।

    मौसम विभाग ने बताया कि 16 और 17 मार्च को प्रदेश में कहीं भी बारिश या बादल का अलर्ट नहीं है। हालांकि 17 मार्च की रात से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश में 18 और 19 मार्च को देखने को मिल सकता है।

    कई जिलों में तापमान में गिरावट
    मौसम विभाग के अनुसार रविवार को ग्वालियर में अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री, दतिया में 32.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 36 डिग्री, सिवनी में 35.6 डिग्री, मंडला में 37.2 डिग्री और बालाघाट में 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इन क्षेत्रों में मौसम में बदलाव की संभावना पहले ही जताई गई थी। शाम तक बारिश दर्ज नहीं हुई, लेकिन बादलों की वजह से तापमान में गिरावट देखी गई।

    वहीं पिछले तीन दिनों से लू के असर वाले नर्मदापुरम में भी तापमान घटकर 38.9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में भोपाल में 36.4 डिग्री, इंदौर में 35.5 डिग्री, ग्वालियर में 32.6 डिग्री, उज्जैन में 35.5 डिग्री और जबलपुर में 35.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

    अप्रैल–मई में पड़ेगी सबसे ज्यादा गर्मी
    मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस साल अप्रैल और मई सबसे ज्यादा गर्म रहेंगे। इन महीनों के दौरान ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी गर्मी का असर तेज रहने की संभावना है।

  • संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है ऐतिहासिक नगर चंदेरी : सिंधिया

    संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है ऐतिहासिक नगर चंदेरी : सिंधिया


    – केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने चंदेरी में बैजू बावरा संगीत समारोह का किया शुभारंभ

    भोपाल। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि ऐतिहासिक गौरवशाली नगरी चंदेरी सदियों से कला, संस्कृति और अद्भुत कारीगरी की पहचान रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विरासत भी, विकास भी के मंत्र के साथ यह ऐतिहासिक शहर संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान गढ़ रहा है।

    केन्द्रीय मंत्री सिंधिया रविवार शाम को मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी में आयोजित बैजू बावरा संगीत समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री सिंधिया और संस्कृति मंत्री लोधी ने चंदेरी मेला ग्राउंड में आयोजित बैजू बावरा संगीत समारोह का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया।

    इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि ऐतिहासिक गौरवशाली चंदेरी नगरी में महान संगीतज्ञ बैजू बावरा समारोह का आयोजन एक महत्वपूर्ण कड़ी है। ग्वालियर में महान संगीतज्ञ तानसेन तथा चंदेरी में बैजू बावरा संगीत समारोह का आयोजन वृहद स्तर पर हो, यह सुनिश्चित किया जाए।

    उन्होंने कहा कि चंदेरी में पग-पग और डग-डग पर प्राचीन ऐतिहासिक धराहरें हैं, जो प्राचीन काल का इतिहास बताती हैं। चंदेरी की इस माटी के साथ सिंधिया परिवार का सदैव हृदय से संबंध रहा है। मध्य प्रदेश के एक छोर पर बसी चंदेरी ने समूचे बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के अंचल को एक बट वृक्ष के रूप में छाया दी है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर में संगीत सम्राट तानसेन तथा चंदेरी में महान संगीतज्ञ बैजू बावरा समारोह के बीच प्रतिवर्ष प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, जिससे ग्वालियर के साथ-साथ आने वाले समय में चंदेरी का भी महत्व संगीत के क्षेत्र में विश्व में चिरस्थाई हो सके।

    संस्कृति मंत्री लोधी ने कहा कि भारत की संस्कृति में संगीत को आत्मा में अभिव्यक्ति माना गया है। संगीत को नादमय माना गया है। संपूर्ण जगत नादमय में है सृष्टि का आधार नाद है और सभी इसी इसी नाद से प्रेरित होकर अपनी साधना की अभिव्यक्ति करते हैं। भारत की परंपरा में संगीत को ही ईश्वर से संवाद का माध्यम माना जाता है। जहां संगीत है, वहां नृत्य है, जहां नृत्य है, वहां ईश्वर है और जहां ईश्वर है, वहां मंगल ही मंगल होता है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत साधना की इसी महान परंपरा ने स्वामी हरिदास, तानसेन, बैजू बावरा जैसे महान संगीतज्ञों को जन्म दिया है। बैजू बावरा महान संगीत परंपरा के तपस्वी थे, जो हमेंशा संगीत साधना से आत्मा की यात्रा तक ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा ऐसे आयोजन लगातार किए जा रहे हैं, जिससे संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है।

    शुभारंभ अवसर पर उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर ने चंदेरी में तीन दिवसीय बैजू बावरा समारोह के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बैजू बावरा समारोह का आयोजन प्रति वर्ष चंदेरी में नियमित रूप से कराया जाएगा।


    राज्य स्तरीय साहित्य कला क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने कलाकारों का किया सम्मान

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने मध्य प्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार साहित्य कला क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का सम्मान किया। इनमें दत्तात्रय दामोदर देवलालीकर पुरस्कार से- नंदिता तिवारी (कृति शीर्षक– स्क्रैप मटेरियल), रघुनाथ कृष्णराव फड़के पुरस्कार से -अनुश्री गुप्ता (कृति शीर्षक -सुंदरकांड एवं समकालीन कथा), नारायण श्रीधर बेन्द्रे पुरस्कार से- गोविंद विश्वकर्मा (कृति शीर्षक मृत्युंजय), मुकुन्द सखाराम भाण्ड पुरस्कार – प्रतिभा सिंह (कृति शीर्षक- संपूर्ण रामायण), देवकृष्ण जटाशंकर जोशी पुरस्कार – मोहन विश्वकर्मा (कृति शीर्षक- मैं और मेरी सहेली), जगदीश स्वामीनाथन पुरस्कार -आकाश जाटव (कृति शीर्षक ग्वालियरनेस 2), लक्ष्मीसिंह राजपूत पुरस्कार – शैलजा सुल्लेरे (कृति शीर्षक – हनुमान चालीसा), राममनोहर सिन्हा पुरस्कार -अनूप श्रीवास्तव (कृति शीर्षक– मांडू सीरीज) एवं विष्णु चिंचालकर पुरस्कार से आदित्य सिंह राजपूत बैलेंस वन (कृति शीर्षक- स्क्रैप मटेरियल) को अलंकृत किया गया। सम्मान स्वरूप सम्मान पट्टिका, 51 हजार रुपये की कर मुक्त राशि, शॉल एवं श्रीफल प्रदान किया गया।

    समारोह के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों ने रूपंकर कला प्रदर्शनी का अवलोकन कर सराहना की। इस प्रदर्शनी में राज्य रूपंकर कला पुरस्कार हेतु आमंत्रित कलाकृतियों में से चयनित 80 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया, जिसमें चित्र एवं मूर्तिकला शामिल हैं। तत्पश्चात हुनर– प्रदर्शनी सह विक्रय में शिल्पकलाओं का अवलोकन किया गया, जिसमें शिल्पकारों द्वारा चंदेरी साड़ी, गौ शिल्प, माटी शिल्प, लकड़ी के खिलौने इत्यादि की सराहना की।

  • MP: ग्वालियर में लगेगा पुस्तक मेला, स्कूली बच्चों को सस्ते दर पर मिलेंगी किताबें, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म

    MP: ग्वालियर में लगेगा पुस्तक मेला, स्कूली बच्चों को सस्ते दर पर मिलेंगी किताबें, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म

    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्कूली बच्चों को सस्ती दर पर किताबें, यू

    Gwalior

    नीफॉर्म व स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए सात दिवसीय पुस्तक मेला (बुक फेयर) लगने जा रहा है। सरकार की मंशा के अनुरूप यह बुक फेयर मौजूदा मार्च माह के दौरान ग्वालियर मेला में सूर्य नमस्कार तिराहा के समीप स्थित शिल्प बाजार परिसर में लगेगा।

    कलेक्टर रुचिका चौहान ने रविवार की शाम संबंधित अधिकारियों एवं पुस्तक विक्रेताओं के साथ शिल्प बाजार परिसर पहुँचकर पुस्तक मेले की तैयारियों का जायजा लिया। कलेक्टर ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि पुस्तक मेला अवधि के दौरान बाजार में किसी भी पुस्तक की दुकान से स्कूली पुस्तकें व स्टेशनरी नहीं बेची जा सकेंगीं।

    इस पर पुस्तक विक्रेताओं एवं एसोसिएशन के अधिकारियों ने सहमति जताई। साथ ही कहा कि पुस्तक विक्रेताओं ने कहा कि पुस्तक मेला को लेकर हम उत्साहित हैं। पुस्तक मेले में प्रत्येक दुकानदार द्वारा किताबों, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म की बिक्री पर आकर्षक छूट भी प्रदान की जायेगी। पुस्तक मेला परिसर के निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर कुमार सत्यम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत, जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी, डीपीसी रविन्द्र तोमर एवं मेला सचिव सुनील बाबू त्रिपाठी सहित अन्य संबंधित अधिकारी, पुस्तक विक्रेता एसोसिएशन के पदाधिकारी व पुस्तक विक्रेता मौजूद थे।

    पुस्तक विक्रेताओं को जिले के विभिन्न स्कूलों के पाठ्यक्रम उपलब्ध करा दिए गए हैं। कलेक्टर ने इस मौके पर पुस्तक विक्रेताओं से कहा कि वे निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकों के सेट बच्चों एवं उनके अभिभावकों को उपलब्ध कराएं। वेंडर्स यानी पुस्तक विक्रेताओं द्वारा पुस्तक मेला मे किताबें, स्टेशनरी व ड्रेस खरीदने वाले अभिभावकों को विशष छूट दी जायेगी। पुस्तक मेला लगने से अनाधिकृत प्रिंटिग कर पुस्तक बेचने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

    मार्च माह के द्वितीय पखवाड़े में लगने जा रहे पुस्तक मेले में सीबीएसई, आईएसई एवं एमपी बोर्ड से संबंध सभी निजी स्कूलों के पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकें व यूनीफॉर्म उपलब्ध रहेंगी। जिला प्रशासन द्वारा बच्चों व उनके अभिभावकों के हित को ध्यान में रखकर लिए गए पुस्तक मेला लगाने के निर्णय का पुस्तक प्रकाशकों (पब्लिशर्स) व डीलर्स ने स्वागत किया है।

    कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान पुस्तक मेले की रूपरेखा के संबंध में विस्तार से चर्चा की। पुस्तक विक्रेताओं ने पिछले साल जिन दुकानदारों को जो दुकानें आवंटित की गई थीं, उन्हीं दुकानों का इस बार भी आवंटन करने का आग्रह किया। कलेक्टर ने कहा कि पुस्तक विक्रेताओं की सहमति से ही आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जायेगा। उन्होंने शिल्प बाजार परिसर की साफ-सफाई, विद्युत व्यवस्था, शौचालय व पेयजल की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही कहा कि पुस्तक मेला परिसर में फूड स्टॉल भी लगवाए जाएं।

    आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिये पुस्तक मेला परिसर में बुक बैंक भी स्थापित किया जायेगा। ऐसे स्कूली विद्यार्थी जो अपनी पिछली कक्षा की किताबें दान करना चाहते हैं वे बुक बैंक में अपनी किताबें जमा कर सकेंगे। ज्ञात हो पिछली साल बनाए गए बुक बैंक से 700 जरूरतमंद बच्चों ने नि:शुल्क पुस्तकें प्राप्त की थीं।

    पुस्तक विक्रेताओं एवं स्कूली बच्चों व उनके अभिभावकों की मदद के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से हैल्पलाईन नंबर भी जारी कराया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कॉर्डिनेटर आईटी सेल अरविंद तोमर (मोबा. 98935-87573) से संपर्क कर पुस्तक मेला के संबंध मे जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। साथ ही पुस्तक मेला के संबंधित समस्याएं भी दर्ज कराई जा सकेंगी।

    स्कूलों द्वारा निर्धारित पुस्तकों के सेट की कीमत का परीक्षण कराया जा रहा है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिला शिक्षा अधिकारी व जिला परियोजना समन्वयक को जल्द से जल्द यह परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पिछली साल के पुस्तक मेले में अभिभावकों व विद्यार्थियों द्वारा दर्ज किए गए फीड बैक का अध्ययन कर इस बार के मेले को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए हैं।