Category: Madhya Pradesh

  • खंडवा में प्रशासन का बड़ा अभियान: होटल एप्पल और हरिओम दूध भंडार से 22 घरेलू गैस सिलेंडर और 5 गैस भट्टी जब्त, अवैध भंडारण पर सख्त कार्रवाई

    खंडवा में प्रशासन का बड़ा अभियान: होटल एप्पल और हरिओम दूध भंडार से 22 घरेलू गैस सिलेंडर और 5 गैस भट्टी जब्त, अवैध भंडारण पर सख्त कार्रवाई


    नई दिल्ली। खंडवा जिले के पंधाना क्षेत्र में प्रशासन ने शनिवार देर शाम से रविवार सुबह तक घरेलू गैस के अवैध भंडारण और कालाबाजारी के खिलाफ बड़ा छापा मारा। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम ने बोरगांव बुजुर्ग स्थित होटल एप्पल और हरिओम दूध भंडार पर कार्रवाई करते हुए कुल 22 घरेलू गैस सिलेंडर और 5 गैस भट्टी जब्त की। इस कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग और पुलिस बल भी मौजूद रहे।

    टीम के मुताबिक, होटल एप्पल में सिलेंडरों को इस तरह जमा किया गया था जैसे किसी गोदाम में रखा गया हो। ये सिलेंडर आरुद स्थित सुमन एचपी गैस एजेंसी से जुड़े हुए पाए गए। पंधाना तहसील प्रशासन ने बताया कि नियमों के अनुसार किसी भी परिसर में 100 किलोग्राम से अधिक गैस भंडारण करना प्रतिबंधित है, लेकिन यहां 20 से अधिक सिलेंडर रखे गए थे, जो गंभीर अनियमितता मानी जा रही है।

    हरिओम दूध भंडार पर भी इसी तरह की जांच की गई। यहां घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था, जिसे मौके पर ही जब्त कर लिया गया। खाद्य विभाग के अधिकारी रोहित देवल ने कहा कि प्रशासन ऐसे मामलों के खिलाफ लगातार अभियान जारी रखेगा ताकि उपभोक्ताओं को गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    पंधाना तहसीलदार दिवाकर सुल्या, नायब तहसीलदार वैशाली बघेल और पटवारी अजय रघुवंशी के साथ पुलिस बल कार्रवाई में शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य न केवल अवैध भंडारण रोकना है, बल्कि कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर भी सख्त नजर रखना है।

    यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के हित में प्रशासन की सजगता और कानून व्यवस्था में कड़े कदम का प्रतीक है, जिससे यह संदेश भी जाता है कि किसी भी व्यवसायिक प्रतिष्ठान में घरेलू गैस का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • भोपाल के काटजू अस्पताल में 20 मार्च से शुरू होगा स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर, नि:संतानता और स्त्री रोग की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे

    भोपाल के काटजू अस्पताल में 20 मार्च से शुरू होगा स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर, नि:संतानता और स्त्री रोग की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे


    भोपाल । भोपाल के कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में 20 मार्च से महिलाओं के लिए हाईटेक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। इस सेंटर का नाम है स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनाकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी । यह प्रदेश का पहला सरकारी इन्फर्टिलिटी सेंटर होगा जहां महिलाओं को नि:संतानता इन्फर्टिलिटी पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन मेनोपॉज फाइब्रॉइड अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी स्त्री रोग संबंधी समस्याओं का इलाज मिलेगा।

    करीब दो करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस सेंटर में जांच से लेकर उपचार तक सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रचना दुबे के अनुसार यहां आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीक के जरिए इन्फर्टिलिटी का इलाज भी होगा। इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए वीआईए तकनीक का उपयोग किया जाएगा जिससे समय रहते इलाज संभव हो सके और महिलाओं की जान बचाई जा सके।

    सरकारी सेंटर में नि:संतानता का इलाज 40, 000 से 80, 000 रुपए तक में हो सकेगा जबकि प्राइवेट अस्पतालों में यही इलाज 3 लाख रुपए तक का खर्च मांगता है। भारत में महिलाओं में नि:संतानता की दर लगभग 10-14% है जो खराब जीवनशैली और देर से शादी करने के कारण बढ़ रही है।

    महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर देश में दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है भोपाल इस मामले में 15वें स्थान पर है। ब्रेस्ट कैंसर सबसे अधिक आम है और भोपाल देश में 8वें नंबर पर है। गर्भाशय में गांठ या फाइब्रॉइड महिलाओं के जीवनकाल में 30-50% में विकसित होते हैं और 40 वर्ष के बाद अधिक आम हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज पीसीओडी से 10-27% महिलाएं प्रभावित हैं जिससे अनियमित पीरियड्स और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    काटजू अस्पताल में शुरू हो रहे इस स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर के जरिए प्रदेश की महिलाओं को एक ही छत के नीचे सुरक्षित आधुनिक और किफायती स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। एम्स में भी जल्द ही आईवीएफ की सुविधा शुरू होने वाली है लेकिन सरकारी सेंटर की तुलना में यहां खर्च अधिक है।

  • हरदा के आईआईटीयन श्रेयांश ने 2.3 करोड़ का पैकेज ठुकराया, पहले प्रयास में यूपीएससी क्लियर कर प्रदेश का नाम रोशन

    हरदा के आईआईटीयन श्रेयांश ने 2.3 करोड़ का पैकेज ठुकराया, पहले प्रयास में यूपीएससी क्लियर कर प्रदेश का नाम रोशन


    हरदा । मध्यप्रदेश के हरदा जिले के आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्र श्रेयांश बड़ोदिया ने अपनी मेहनत और साहस से प्रदेश का नाम रोशन किया है। श्रेयांश ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 194वीं रैंक हासिल की। खास बात यह है कि उन्होंने सालाना 2.3 करोड़ रुपए के पैकेज वाली आईटी नौकरी छोड़कर पहली ही कोशिश में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली।

    श्रेयांश ने बताया कि नौकरी से आर्थिक सुविधा तो मिल रही थी लेकिन मन को संतुष्टि नहीं मिल रही थी। उनका मानना था कि उन्हें समाज और देश के लिए कुछ बेहतर करना चाहिए। उन्होंने कहा जब मैंने जॉब छोड़ने का फैसला किया तो मेरी स्थिति अंग्रेजी कहावत आई वास इन टू माइंड जैसी थी। एक तरफ आराम था दूसरी तरफ संतुष्टि नहीं। मैं चाहता था कि जीवन में ऐसा काम करूं जिससे समाज और देश के लिए योगदान हो।

    श्रेयांश ने वर्ष 2018 में आईआईटी मुंबई से बीटेक पूरी की और गुरुग्राम की कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य करने लगे। नौकरी के दौरान ही उन्हें सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा मिली। अगस्त 2024 में उन्होंने परिवार को सूचित करने के बाद नौकरी छोड़ दी और मुंबई में रहकर पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में जुट गए।

    श्रेयांश ने मई 2025 में प्रीलिम्स अगस्त में मेंस और जनवरी 2026 में इंटरव्यू पास किया। नौ महीने की कड़ी मेहनत और रणनीति से उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई। उन्होंने कहा कि आईटी सेक्टर में कंफर्ट जोन जरूर था लेकिन संतुष्टि नहीं। प्रशासनिक सेवा में जाकर वे अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करना चाहते थे।

    भविष्य में श्रेयांश शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए काम करना चाहते हैं। प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने और स्वास्थ्य क्षेत्र में आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर कम करने पर उनका विशेष ध्यान रहेगा।

    श्रेयांश का परिवार मुंबई में रहता है। उनके पिता जी.डी. बड़ोदिया नर्मदापुरम में जिला कोषालय अधिकारी रह चुके हैं और मेहर गढ़वाल समाज के अध्यक्ष भी रहे। 2023 में उन्होंने विधायक पद के लिए चुनाव भी लड़ा था। परिणाम घोषित होने के बाद श्रेयांश परिवार के साथ मध्यप्रदेश लौटे और अपने गृह जिले हरदा पहुंचे।

    यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम 2025 में कुल 958 उम्मीदवार क्वालिफाई हुए। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया टॉप किया भोपाल के ईशान भटनागर टॉप 5 में रहे जबकि धार जिले के पक्षल सेक्रेटरी ने 8वीं रैंक हासिल की।

  • मुरैना में वन विभाग का बड़ा कारनामा: फ्रिज से 2 क्विंटल नीलगाय का मांस, सिर और चमड़ी बरामद, तस्करी का गहरा नेटवर्क खुला

    मुरैना में वन विभाग का बड़ा कारनामा: फ्रिज से 2 क्विंटल नीलगाय का मांस, सिर और चमड़ी बरामद, तस्करी का गहरा नेटवर्क खुला



    मुरैना मुरैना के जातवर गांव में शनिवार देर शाम वन विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक घर पर छापा मारा और फ्रिज में रखे लगभग 2 क्विंटल यानी चार बोरे नीलगाय का मांस बरामद किया। इस कार्रवाई में आरोपी रिंकू खान को गिरफ्तार किया गया, जबकि मकान मालिक सोनू नागर पर भी विभाग ने कार्रवाई की। वन विभाग का दावा है कि आरोपी चंबल के बीहड़ में नीलगाय का शिकार करते थे और मेवाती होटलों तथा आसपास के जिलों में मांस सप्लाई करते थे।

    हिंदू संगठन की सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ग्राम जातवर पहुंची। मौके पर रिंकू खान पुत्र अकबर खान मिला। टीम ने घर में रखे बड़े फ्रिज की तलाशी ली, तो चार प्लास्टिक के बोरों में भरा हुआ 2 क्विंटल नीलगाय का मांस बरामद हुआ। वन विभाग ने मांस जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया और पूछताछ शुरू कर दी।

    जांच में आरोपी की निशानदेही पर टीम ने सिहोरी गांव के बीहड़ में भी दबिश दी। वहां से नीलगाय का सिर और चमड़ी बरामद हुई। वन विभाग ने बताया कि तस्कर नीलगायों को पकड़कर वहीं बीहड़ में काटते और मांस को होटलों और दूसरे जिलों में सप्लाई करते थे। इस कार्रवाई से इलाके में नीलगाय की तस्करी का बड़ा नेटवर्क सामने आया है।

    वन विभाग के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि पकड़े गए आरोपी से लगातार पूछताछ जारी है। उन्होंने कहा, “रिंकू खान की निशानदेही पर बीहड़ से मांस, सिर और चमड़ी बरामद की गई। सहयोगी मदीना उर्फ लाली नट नागर को भी गिरफ्तार किया गया है। अभी यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। मकान मालिक सोनू नागर पर भी कार्रवाई की गई है।”

    वन विभाग के इस बड़े अभियान ने इलाके में नीलगाय संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाईयों से तस्करों को खुला चुनौती मिलती है और वन्य जीवों की अवैध शिकार तथा मांस तस्करी पर कड़ी रोक लगेगी।

  • ग्वालियर में क्राइम की बढ़ती घटनाएं: फरार गैंगस्टर गिरफ्तार, होटल के बाहर युवक का अपहरण, पारिवारिक रंजिश में मारपीट के 4 आरोपी गिरफ्तार

    ग्वालियर में क्राइम की बढ़ती घटनाएं: फरार गैंगस्टर गिरफ्तार, होटल के बाहर युवक का अपहरण, पारिवारिक रंजिश में मारपीट के 4 आरोपी गिरफ्तार


    ग्वालियर । ग्वालियर में क्राइम की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई वारदातों में पुलिस ने सक्रिय कार्रवाई करते हुए फरार गैंगस्टर और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुरार थाना क्षेत्र में प्रॉपर्टी के लेनदेन को लेकर 5 मार्च को आमोद राणा निवासी बिलारा के साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी। इस वारदात में विक्रम राणा और उनके साथी गजेंद्र कोली सोनू भदौरिया और कपिल रावत शामिल थे। पुलिस ने घायल युवक को इलाज के लिए भेजने के साथ ही चारों बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश शुरू की।

    लगभग 10 दिन की लगातार कार्रवाई के बाद पुलिस ने राजस्थान के धौलपुर से गैंगस्टर विक्रम राणा और उसके साथी गजेंद्र कोली उर्फ गड़रा, कपिल रावत और जीतू गुर्जर को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार जीतू गुर्जर के पास से पिस्टल भी बरामद की गई।

    वहीं कोतवाली थाना क्षेत्र के हुजरात चौराहे में पुरानी पारिवारिक रंजिश के चलते मारपीट की घटना सामने आई। युवक अरविंद गुर्जर और उसकी मां के साथ अरोपी आलोक गुर्जर, शत्रु गुर्जर, मोहित गुर्जर और भरत गुर्जर ने मारपीट की। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ है। फरियादी अरविंद गुर्जर ने थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इसी बीच थाटीपुर थाना क्षेत्र में होटल के रिसेप्शनिस्ट श्यामु राणा का अपहरण किया गया। अपहरणकर्ताओं ने श्यामू से उसके साडू उप्पे राणा के बारे में पूछताछ की और मारपीट की। बदमाशों ने पीड़ित को मुरार इलाके से लेकर गोविंदपुरी के पास छोड़ दिया। यह घटना गायत्री विहार स्थित बागवान होटल के बाहर हुई। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के पास है। पुलिस ने अपहरण और मारपीट के मामले में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और फरार आरोपियों को ट्रैक कर गिरफ्तार किया जा रहा है। वहीं शहर में बढ़ते अपराध की घटनाओं ने आम लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा

    सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा


    नई दिल्ली। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए इंदौर पुलिस ने भीड़ प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस ने योजना बनाई है कि उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश से पहले इंदौर में ही रोका जाएगा। इसके लिए शहर के बाहरी क्षेत्रों में अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन और पुलिस के बीच हुई संयुक्त बैठक में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की रणनीति पर चर्चा की गई।

    इंदौर से सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा आवाजाही इंदौर मार्ग से होने की संभावना है। ऐसे में भीड़ का दबाव कम करने के लिए पहले से व्यवस्था तैयार की जा रही है।

    प्रस्तावित सैटेलाइट टाउन में श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, पेयजल, भोजन, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन स्थानों से श्रद्धालुओं को नियंत्रित तरीके से उज्जैन की ओर भेजा जाएगा।

    बाहरी क्षेत्रों में स्थानों का चयन

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार शहर के बाहरी इलाकों में ऐसे कई स्थानों का चयन किया गया है, जहां अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे। इससे उज्जैन में अचानक भीड़ का दबाव नहीं बढ़ेगा।

    ट्रैफिक प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण

    एडिशनल पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) आर.के. सिंह के अनुसार सिंहस्थ को देखते हुए ट्रैफिक प्रबंधन के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

    तीन नए ट्रैफिक थानों का प्रस्ताव

    शहर में फिलहाल एक ही ट्रैफिक थाना है। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए तीन नए ट्रैफिक थानों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है।

    इनमें चंदन नगर क्षेत्र में धार रोड, बाणगंगा में सुपर कॉरिडोर और लसूड़िया में महालक्ष्मी नगर में ट्रैफिक थाना बनाने की योजना है। धार रोड के लिए प्रशासन ने जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

    कई थानों में बल बढ़ाने का प्रस्ताव

    पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने तिलक नगर, राऊ और द्वारकापुरी थानों में अतिरिक्त बल बढ़ाने का प्रस्ताव भी पुलिस मुख्यालय को भेजा है। इसके अलावा ट्रैफिक थानों के लिए भी अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की जाएगी।

    सिंहस्थ-2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए इंदौर पुलिस तैयारियों को लेकर योजना बना रही है।

  • एमपी में हीट अटैक के बीच बारिश की चेतावनी: मार्च में पहली बार मावठा के आसार, कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट

    एमपी में हीट अटैक के बीच बारिश की चेतावनी: मार्च में पहली बार मावठा के आसार, कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में इन दिनों तेज गर्मी के बीच मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। प्रदेश में हीट अटैक जैसे हालात के बीच मौसम विभाग ने अगले चार दिनों में कई इलाकों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार मार्च के महीने में पहली बार मावठा गिरने की संभावना बन रही है। हालांकि प्रदेश के कई हिस्सों में गर्म हवाओं और तेज धूप का असर भी जारी रहेगा।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सक्रिय हो रहे वेस्टर्न डिस्टरबेंस और ट्रफ लाइन के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। 17 मार्च के आसपास एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है जिसके असर से मध्य प्रदेश के कई जिलों में बादल छाने गरज चमक के साथ बारिश और तेज हवा चलने की संभावना है।

    पूर्वी और दक्षिणी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। 16 मार्च को छिंदवाड़ा बालाघाट बैतूल पंढुर्ना मंडला सिवनी अनूपपुर और डिंडोरी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    इसके बाद 17 मार्च को भी कुछ जिलों में बारिश का असर जारी रह सकता है। इस दिन बालाघाट सिवनी मंडला अनूपपुर और डिंडोरी में बादल गरजने के साथ पानी गिरने के असर हैं। वहीं 18 मार्च को मौसम का असर और बढ़ सकता है। इस दौरान ग्वालियर मुरैना भिंड श्योपुर शहडोल के साथ साथ बालाघाट मंडला डिंडोरी सिवनी अनूपपुर पांढुर्णा और छिंदवाड़ा में बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    दूसरी ओर प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को प्रदेश के अधिकांश शहरों में सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाएं महसूस की गईं। राजधानी भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया।

    सबसे ज़्यादा तापमान नर्मदापुरम में रिकॉर्ड किया गया जहाँ पारा 40.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। इसके अलावा खरगोन में तापमान 39.2 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं शाजापुर सतना सिवनी सागर छिंदवाड़ा खजुराहो खंडवा रतलाम रायसेन मंडला दमोह गुना बैतूल नरसिंहपुर धार उमरिया और टीकमगढ़ समेत कई जिलों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में जहां कुछ जिलों में बारिश और आंधी से लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है वहीं कई क्षेत्रों में हीट वेव जैसे हालात बने रहेंगे। ऐसे में लोगों को दोपहर के समय तेज धूप से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी गई है।

  • डॉक्टर भी रह गए दंग: शादी के 2 साल बाद पत्नी में पाया गया XY क्रोमोसोम, पति ने दिखाई मिसाल!

    डॉक्टर भी रह गए दंग: शादी के 2 साल बाद पत्नी में पाया गया XY क्रोमोसोम, पति ने दिखाई मिसाल!



    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी में रहने वाले एक डिफेंस अधिकारी और उनकी पत्नी की साल 2023 में हुई अरेंज मैरिज सामान्य और खुशहाल चल रही थी। दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य और खुशहाल था, लेकिन शादी के दो साल बाद भी संतान न होने पर जब दंपती ने इलाज शुरू कराया, तो एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।

    जांच में पता चला कि महिला के शरीर में सामान्य महिलाओं की तरह XX क्रोमोसोम नहीं, बल्कि पुरुषों वाले XY क्रोमोसोम मौजूद थे। बाहरी रूप से महिला पूरी तरह सामान्य दिखाई देती थीं, लेकिन शरीर के अंदर ओवरी की जगह अविकसित अंडकोष पाए गए। यह जानकारी सुनकर दंपती गहरे सदमे में आ गए।

    इस स्थिति का समाधान कराने के लिए दंपती ने एम्स भोपाल का रुख किया। यहां विशेषज्ञों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने दो चरणों में सर्जरी कर समस्या का समाधान किया। पहले चरण में माइक्रो प्लास्टिक सर्जरी तकनीक का उपयोग करके विकसित छोटे पुरुष अंग को हटाया गया। दूसरे चरण में पेट के अंदर अविकसित अंडकोष को निकाल दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में पति ने पत्नी का पूरा सहयोग किया और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया।

    एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि इस स्थिति में दंपती के लिए प्राकृतिक रूप से संतान होना संभव नहीं है। पति ने अपने निर्णय में स्पष्टता दिखाई और कहा कि वे पत्नी के साथ जीवनभर निभाएंगे। भविष्य में दंपती ने बच्चा गोद लेने का विकल्प चुना है।

    एम्स भोपाल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग में इस तरह के मामले हर महीने 10 से 12 मरीजों की सर्जरी होती है। यहां ट्रांसजेंडर क्लीनिक में रोगियों की विस्तृत जांच, सर्जरी और काउंसलिंग की जाती है। डॉक्टरों के अनुसार सही समय पर जांच और सामाजिक समर्थन मिलने से मरीज सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी सकते हैं।

    यह घटना न केवल चिकित्सा जगत के लिए अनोखी है, बल्कि यह रिश्तों, समझदारी और संवेदनशीलता का भी प्रेरणादायक उदाहरण है। डिफेंस अधिकारी द्वारा पत्नी का हर परिस्थिति में साथ निभाना दर्शाता है कि सच्चा साथी वही है जो हर कठिन समय में मजबूती और प्रेम के साथ खड़ा रहे।

  • हाईटेक मोड में मिनी मुंबई की पुलिस: इंदौर के हर थाने में तैयार होंगे साइबर एक्सपर्ट, मौके पर ही सुलझेगी फ्रॉड की शिकायत

    हाईटेक मोड में मिनी मुंबई की पुलिस: इंदौर के हर थाने में तैयार होंगे साइबर एक्सपर्ट, मौके पर ही सुलझेगी फ्रॉड की शिकायत


    इंदौर । इंदौर की पुलिस अब तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए हाईटेक रणनीति पर काम कर रही है। मिनी मुंबई के नाम से पहचाने जाने वाले इस शहर में पुलिस कमिश्नरेट ने फैसला लिया है कि अब हर थाने में ऐसे प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, जो साइबर फ्रॉड की शिकायत मिलते ही मौके पर ही कार्रवाई कर सकें। इसका उद्देश्य यह है कि पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने या समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें तुरंत राहत मिल सके।

    इसी योजना के तहत पुलिस कमिश्नर कार्यालय में एक विशेष साइबर ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न थानों से करीब 80 पुलिसकर्मियों को बुलाकर आधुनिक तकनीक और साइबर अपराध से निपटने की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन पुलिस कमिश्नर Santosh Kumar Singh के निर्देश पर किया गया, जिनका मानना है कि बदलते तकनीकी दौर में पुलिस को भी लगातार खुद को अपडेट रखना होगा।

    पुलिस कमिश्नरेट की योजना के अनुसार थाना स्तर पर साइबर हेल्प डेस्क को मजबूत किया जाएगा, ताकि किसी भी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी या डिजिटल फ्रॉड होने पर वह सीधे थाने में जाकर शिकायत दर्ज करा सके और तत्काल कार्रवाई शुरू हो सके। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त Amit Singh और आर.के. सिंह सहित शहर के सभी डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी भी मौजूद रहे।

    प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को यह सिखाया गया कि साइबर अपराध की शिकायत मिलते ही किस तरह त्वरित कार्रवाई की जाए। क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी Rajesh Dandotiya और उनकी तकनीकी टीम ने पुलिसकर्मियों को कई महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसमें 1930 हेल्पलाइन, cybercrime.gov.in पोर्टल, एनसीआरपी सिस्टम, संचार साथी, समन्वय, ई-DAR, निदान और साइबर पुलिस पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इन पोर्टल्स के जरिए शिकायत मिलते ही ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है और जरूरत पड़ने पर पीड़ित के बैंक खाते से जुड़े लेन-देन को तुरंत होल्ड भी कराया जा सकता है।

    प्रशिक्षण सत्र में यह भी बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि तुरंत कार्रवाई की जाए तो ठगी की रकम को ट्रैक कर उसे वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी वजह से पुलिस अब हर थाने में ऐसे प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती करना चाहती है, जो तकनीकी प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए तत्काल कदम उठा सकें।

    पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने इस दौरान कहा कि आज के डिजिटल दौर में अपराधी भी लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस को उनसे एक कदम आगे रहना होगा। उनका लक्ष्य है कि शहर का हर थाना साइबर अपराधों से निपटने में सक्षम बने और कोई भी पीड़ित व्यक्ति थाने से निराश होकर वापस न लौटे।

    कमिश्नरेट के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। आने वाले समय में इंदौर के प्रत्येक थाने में साइबर मामलों में दक्ष पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, ताकि शहर में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सके।

  • सिंगरौली के गजरा बहरा कोल यार्ड से बढ़ा प्रदूषण, फसलें बर्बाद; दमा खांसी से जूझ रहे ग्रामीण

    सिंगरौली के गजरा बहरा कोल यार्ड से बढ़ा प्रदूषण, फसलें बर्बाद; दमा खांसी से जूझ रहे ग्रामीण


    सिंगरौली । सिंगरौली जिले के गजरा बहरा क्षेत्र में संचालित कोल यार्ड से फैल रहे प्रदूषण ने आसपास के गांवों के लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। कोयले की धूल और लगातार उड़ने वाली डस्ट के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, वहीं ग्रामीण खांसी, दमा और सांस से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कोल यार्ड संचालक की लापरवाही के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

    ग्रामीणों का कहना है कि कोल यार्ड में प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी उपाय नहीं किए जा रहे हैं। न तो नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही धूल को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था की गई है। इसके कारण कोयले की महीन धूल हवा के साथ आसपास के खेतों और घरों तक पहुंच रही है। किसान बताते हैं कि फसलों पर जमी काली धूल से उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है और कई खेतों में फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है।

    प्रदूषण का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। आसपास के गांवों में रहने वाले लोग सांस से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कई लोगों को लगातार खांसी और दमा की शिकायत हो रही है। बुजुर्गों और बच्चों की स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कोयले की धूल से वातावरण इतना खराब हो गया है कि घर के भीतर भी सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

    सड़क पर उड़ती धूल के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार कोल यार्ड से गुजरने वाले ट्रकों की आवाजाही और उड़ती डस्ट की वजह से सड़क पर दृश्यता कम हो जाती है, जिससे आए दिन छोटे बड़े हादसे होते रहते हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

    इस मामले में पर्यावरण विभाग ने कोल यार्ड संचालक पर कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है। हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संचालक ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दायर कर दिया है। न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण फिलहाल प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई नहीं की जा रही है।

    ग्रामीणों का आरोप है कि अदालत में मामला लंबित होने का हवाला देकर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग जिम्मेदारी से बच रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदूषण के कारण लोगों का स्वास्थ्य लगातार खराब हो रहा है, लेकिन स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

    यह इलाका आदिवासी बहुल क्षेत्र माना जाता है और यहां रहने वाले अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। ऐसे में इलाज की सुविधा भी सीमित है, जिसके कारण बीमारियों से जूझ रहे कई लोग समय पर उपचार नहीं करा पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    स्थानीय लोगों ने प्रशासन और पर्यावरण विभाग से मांग की है कि कोल यार्ड संचालक को प्रदूषण नियंत्रण के सभी नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए बाध्य किया जाए। साथ ही प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।