Category: Madhya Pradesh

  • सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण

    सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण


    सीधी । सोशल मीडिया के दौर में अगर आवाज बुलंद हो और इरादे मजबूत हों तो बदलाव मुमकिन हैयह साबित कर दिखाया है सीधी जिले की यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर लीला साहू ने। वर्षों से खराब सड़क को लेकर संघर्ष कर रहीं लीला की मांग अब पूरी हो गई है। सड़क निर्माण का काम शुरू होते ही गांव में खुशी और उत्साह का माहौल है।

    जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर ग्राम खड्डी से बैगहा टोला तक करीब 10 किलोमीटर का यह सड़क मार्ग वर्षों से बदहाल स्थिति में था। खासकर बरसात के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते थे कि गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल ले जाना मानो टेढ़ी खीर बन गया था। इसी दुर्दशा को लेकर लीला साहू ने सोशल मीडिया को हथियार बनाया और सड़क की सच्चाई देश-दुनिया के सामने रखी।

    लीला साहू ने सड़क की बदहाली को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जो देखते ही देखते वायरल हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री तक गुहार लगाई वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसदों पर भी नाराजगी जाहिर की थी। उनके वीडियो ने न सिर्फ प्रशासन का ध्यान खींचा बल्कि यह मुद्दा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।

    अब जब सड़क निर्माण कार्य शुरू हो गया है तो लीला साहू ने गांव वालों के साथ खुशी जाहिर करते हुए एक बार फिर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उन्होंने प्रदेश के मुखिया स्थानीय सांसद और मीडिया का धन्यवाद किया है। उनका कहना है कि यह जीत अकेले उनकी नहीं बल्कि पूरे गांव की है जिसने वर्षों तक कठिनाइयों का सामना किया।

    ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क बनने से अब उन्हें शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। बच्चों को स्कूल पहुंचने में आसानी होगी और आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना सरल होगा। गांव में विकास की नई उम्मीद जगी है।

    लीला साहू की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब आम नागरिक अपनी बात मजबूती से और सही मंच पर रखता है तो सिस्टम को भी सुनना पड़ता है। सोशल मीडिया की ताकत और जनआवाज ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बदलाव संभव है।

  • 50 साल के कब्जे, कोर्ट के स्टे और चार रजिस्ट्री के बावजूद गरजा बुलडोजर: मऊगंज में प्रशासन बनाम गरीब

    50 साल के कब्जे, कोर्ट के स्टे और चार रजिस्ट्री के बावजूद गरजा बुलडोजर: मऊगंज में प्रशासन बनाम गरीब


    मऊगंज । कहते हैं कानून अंधा होता है लेकिन मऊगंज का राजस्व अमला इस कहावत से भी एक कदम आगे नजर आ रहा है यहां कानून न सिर्फ अंधा बल्कि बहरा भी दिखाई दे रहा है। देवतालाब उप-तहसील के नौडिया गांव में प्रशासन ने जिस तरह भारी पुलिस बल के साथ गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी की उसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यह कार्रवाई उस जमीन पर की जा रही है जिस पर लोग पिछले करीब 50 वर्षों से काबिज हैं और जहां सिविल कोर्ट का स्पष्ट स्थगन आदेश स्टे भी लागू है।

    पूरा विवाद 1988 में की गई एक रजिस्ट्री से शुरू होता है। आरोप है कि भगवानदीन पटेल नाम के एक रसूखदार पटवारी ने जमीन की रजिस्ट्री करवाई नामांतरण भी हुआ लेकिन इसके बाद खेल शुरू हुआ। पटवारी के भाई ने अपील दायर कर खरीदारों का नाम रिकॉर्ड से कटवा दिया और जमीन दोबारा अपने नाम दर्ज करा ली। हैरानी की बात यह है कि जिस अपील के आधार पर मालिकाना हक बदला गया उसका कोई रिकॉर्ड आज राजस्व विभाग के पास मौजूद नहीं है।

    यहीं से जमीन की जालसाजी का सिलसिला तेज हो गया। आरोप है कि एक ही जमीन की चार बार रजिस्ट्री की गई। 1988 के बाद वर्षों तक लोग उसी जमीन पर मकान बनाकर रहते रहे फिर 2022 में दोबारा खरीद-फरोख्त हुई। एक ही खसरे की जमीन अलग-अलग लोगों को बेची जाती रही और प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा। अब जब विवाद कोर्ट में है और मामला विचाराधीन है तो अचानक प्रशासन को यह जमीन “सरकारी” नजर आने लगी।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सिविल कोर्ट का स्टे ऑर्डर प्रभावशील है तो प्रशासन किस कानून के तहत अतिक्रमण हटाने पहुंचा? क्या मऊगंज का राजस्व अमला खुद को माननीय न्यायालय से ऊपर समझता है? कार्रवाई के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ लोगों ने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश क किसी ने हाथ की नस काट ली तो किसी ने खुद को घर में बंद कर लिया।

    विडंबना यह भी है कि जिस जमीन को सरकारी बताया जा रहा है उससे जुड़े पुख्ता दस्तावेज प्रशासन के पास नहीं हैं। न यह स्पष्ट है कि जमीन कब और कैसे सरकारी घोषित हुई। इसके बावजूद कार्रवाई के दौरान जब लोगों ने विरोध किया तो अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भले ही रोक दी गई लेकिन वर्तमान पटवारी ने पीड़ितों पर ही “कानूनी हंटर” चला दिया। नौ लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा और गाली-गलौज जैसी धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया।

    आज नौडिया गांव के लोग अपनी ही जमीन पर खुद को बेगाना महसूस कर रहे हैं। सवाल यह है कि जिसने 27 डिसमिल हिस्से में 40 डिसमिल जमीन बेच दी उस पूर्व पटवारी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ गरीबों के घर गिराना है या उस सिस्टम को दुरुस्त करना भी है जो भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है?

  • मप्र में जहरीले कफ सीरप से 25वीं मौत, 4 महीने कोमा में रहने के बाद जिंदगी की जंग हार गया एक और बच्चा

    मप्र में जहरीले कफ सीरप से 25वीं मौत, 4 महीने कोमा में रहने के बाद जिंदगी की जंग हार गया एक और बच्चा

    toxic cough syrup

    भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा जिले (Chhindwara district) के परासिया क्षेत्र में हुए जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड (Toxic Coldrif Cough Syrup Scandal) के शिकार एक और बच्चे की मौत हो गई। बैतूल जिले के चार वर्षीय हर्ष यदुवंशी की रविवार रात करीब नागपुर एम्स में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह पिछले चार महीने से आईसीयू में भर्ती था और एम्स नागपुर में कोमा में जिंदगी की जंग लड़ रहा था। इस मौत के बाद प्रदेश में जहरीले कफ सीरप के सेवन से मरने वाले बच्चों की संख्या 25 हो गई है।

    जानकारी के अनुसार, बैतूल जिले के टीकाबर्री निवासी गोकुल यदुवंशी के पुत्र हर्ष को सर्दी खांसी की शिकायत पर एक अक्टूबर 2025 को छिंदवाड़ा जिले के परासिया में एसएस ठाकुर को दिखाया था। ठाकुर की क्लीनिक पर हर्ष को कोल्ड्रिफ सीरप दिया गया था। उसको पीने के बाद हर्ष की हालत बिगड़ गई। बच्चे को गंभीर हालत में परिजन ने नागपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। बाद में जब छिंदवाड़ा और बैतूल में कई बच्चों की मौत हो गई तो प्रशासन हरकत में आया। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर हर्ष को भी निजी अस्पताल से निकालकर नागपुर एम्स में भर्ती कराया गया। तबसे वह एम्स में ही भर्ती था।

    डॉक्टरों ने हर्ष की स्थिति शुरुआत से ही नाजुक बताई थी, लेकिन वे धीरे-धीरे रिकवरी होने की बात कह रहे थे। बच्चे के दादा देवा यदुवंशी ने बताया कि उसे भर्ती कराने के बाद से होश नहीं आया। डॉक्टर रोज कहते थे कि अब थोड़ा बेहतर है, लेकिन कल रात वह हमें छोड़ गया।

    हर्ष के पिता गोकुल पेशे से किसान हैं। उनके दो बेटे हैं, जिनमें हर्ष बड़ा था। बच्चे के इलाज के लिए परिवार के सदस्य पिछले चार महीनों से नागपुर में ही डेरा जमाए हुए थे। एम्स में हर्ष का इलाज तो मुफ्त हुआ, लेकिन परिजनों के नागपुर में रहने और खाने-पीने पर इन चार महीनों में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। आमला एसडीएम शैलेंद्र बड़ोनिया ने बच्चे की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बीमार हुए बच्चों में बैतूल जिले का हर्ष भी शामिल था, जिसे गंभीर हालत में नागपुर एम्स रेफर किया गया था।

    गौरतलब है कि पिछले वर्ष सितंबर-अक्टूबर महीने में जहरीले कफ सीरप कोल्ड्रिफ का सेवन करने वाले बच्चों की किडनी खराब होने की जानकारी सामने आई थी। लगातार मौतों के बाद कफ सीरप बनाने वाली तमिलनाडु की कंपनी और कफ सीरप लिखने वाले चिकित्सकों और दवा दुकानदारों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। अब हर्ष की मौत के साथ ही यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सोमवार को पोस्टमार्टम कराने के बाद स्वजन शव लेकर गांव पहुंचे और देर शाम उसका अंतिम संस्कार किया गया।

  • मुरैना में रफ्तार का कहर: यात्री बस ने खड़े ई-रिक्शा को मारी टक्कर, पहिया चढ़ने से महिला की दर्दनाक मौत; एक ही परिवार के 5 लोग घायल

    मुरैना में रफ्तार का कहर: यात्री बस ने खड़े ई-रिक्शा को मारी टक्कर, पहिया चढ़ने से महिला की दर्दनाक मौत; एक ही परिवार के 5 लोग घायल


    मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में सोमवार सुबह करीब 10 बजे नेशनल हाईवे 552 पर एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। माता बसैया थाना क्षेत्र के खैरा मोड़ पर एक तेज रफ्तार यात्री बस ने सड़क किनारे खड़े ई-रिक्शा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ई-रिक्शा में बैठी महिला उछलकर सड़क पर गिर गई और बस का पिछला टायर उसके ऊपर से निकल गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में मृतिका के बेटे सहित परिवार के पांच अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

    खड़े रिक्शे पर काल बनकर आई बस प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुनीता प्रजापति पत्नी पप्पू प्रजापति अपने परिवार के साथ ई-रिक्शा में सवार होकर कहीं जा रही थीं। खैरा मोड़ के पास ई-रिक्शा साइड में खड़ा हुआ था, तभी मुरैना से अंबाह की ओर जा रही ‘शीतला बस’ क्रमांक MP06 P 0524 के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए रिक्शे को टक्कर मार दी। सुनीता प्रजापति सड़क पर गिर गईं और बस का पहिया उनके ऊपर से गुजर गया।

    परिवार के 5 सदस्य जिला अस्पताल में भर्ती हादसे में ई-रिक्शा में सवार अन्य लोग सड़क पर बिखर गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं। घायलों में मृतिका का 26 वर्षीय बेटा लवकुश भी शामिल है। अन्य घायलों की पहचान इस प्रकार है: शुभम 18 वर्ष, अर्चना पत्नी मांगी लाल गौर 40 वर्ष, मणि गौर पुत्र दाताराम गौर 45 वर्ष ,मुन्नी पत्नी दाताराम गौर 60 वर्ष , लवकुश पुत्र पप्पू प्रजापति 26 वर्ष सभी घायलों को तत्काल एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है।

    बस छोड़कर फरार हुआ चालक हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों को इकट्ठा होते देख बस चालक मौके पर ही बस छोड़कर फरार हो गया। माता बसैया थाना प्रभारी एसआई अरुण कुशवाहा ने बताया कि पुलिस ने बस को जब्त कर थाने में रखवा लिया है। मृतिका के शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

  • इंदौर भागीरथपुरा त्रासदी: दूषित पानी ने ली 32वीं जान, वेंटिलेटर पर रही बुजुर्ग महिला ने तोड़ा दम; अभी भी 2 मरीज ICU में

    इंदौर भागीरथपुरा त्रासदी: दूषित पानी ने ली 32वीं जान, वेंटिलेटर पर रही बुजुर्ग महिला ने तोड़ा दम; अभी भी 2 मरीज ICU में


    इंदौर। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार रात बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती 65 वर्षीय अनिता कुशवाह की मौत के साथ ही इस हादसे में मरने वालों की संख्या अब 32 हो गई है। अनिता पिछले एक महीने से वेंटिलेटर पर थीं और उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    एक महीने तक चला संघर्ष, फेल हुई किडनी अनिता के बेटे नीलेश ने बताया कि उनकी मां को पहले से कोई बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को दूषित पानी के कारण उन्हें उल्टी-दस्त शुरू हुए। भाग्यश्री अस्पताल से डिस्चार्ज होने के कुछ ही घंटों बाद उनकी हालत फिर बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें अरबिंदो और फिर बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया। संक्रमण इतना घातक था कि उनकी किडनी फेल हो गई और उन्हें कार्डियक अरेस्ट दिल का दौरा भी आया। लंबे समय तक डायलिसिस और वेंटिलेटर पर रहने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।

    450 मरीज ठीक हुए, पर खतरा अभी टला नहीं सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार, अब तक 450 से ज्यादा लोग इलाज के बाद ठीक होकर घर जा चुके हैं। हालांकि, अभी भी तीन मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 2 की हालत अत्यंत नाजुक है और वे आईसीयू में जीवन रक्षक प्रणालियों पर हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 24 घंटे खुला रखा है और दो एम्बुलेंस तैनात की हैं।

    निगम के दावों पर अविश्वास: 30% हिस्से में ही सप्लाई नगर निगम का दावा है कि अब पानी साफ आ रहा है और पाइप लाइन के लीकेज दुरुस्त कर लिए गए हैं, लेकिन क्षेत्र के निवासी अभी भी डरे हुए हैं। वर्तमान में केवल 30% हिस्से में ही पानी की सप्लाई की जा रही है। लोग निगम के पानी के बजाय आरओ और टैंकरों के पानी पर निर्भर हैं। 70% हिस्से में अभी भी नई पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है, जिसके बाद लीकेज टेस्टिंग और सैंपल जांच की जाएगी। अनिता कुशवाह का अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा। उनके परिवार में पति, एक बेटा और दो बेटियां हैं। यह घटना इंदौर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही है।

  • इंदौर में रैपिडो चालक की दरिंदगी: नाबालिग को झांसा देकर फ्लैट में ले गया, फिर किया दुष्कर्म; पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

    इंदौर में रैपिडो चालक की दरिंदगी: नाबालिग को झांसा देकर फ्लैट में ले गया, फिर किया दुष्कर्म; पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज


    इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक रैपिडो बाइक चालक ने राजवाड़ा खरीदारी करने जा रही एक नाबालिग लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया। आरोपी ने न केवल सुरक्षा के भरोसे को तोड़ा, बल्कि नाबालिग को सस्ते कपड़ों का लालच देकर सुनसान फ्लैट पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    राजवाड़ा जाने के लिए बुक की थी बाइक पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह खरीदारी करने के लिए राजवाड़ा जाना चाहती थी, जिसके लिए उसने मोबाइल ऐप के माध्यम से रैपिडो बाइक बुक की थी। चालक उसे राजवाड़ा तो ले गया, लेकिन वहां उसने पीड़िता को अपनी बातों के जाल में फंसाना शुरू कर दिया। आरोपी ने नाबालिग से कहा कि वह एक ऐसी जगह जानता है जहाँ बहुत ही सस्ते दामों पर अच्छे कपड़े मिलते हैं। मासूम लड़की उसकी बातों में आ गई।

    परदेसीपुरा ले जाकर किया दुष्कर्म आरोपी चालक नाबालिग को राजवाड़ा से परदेसीपुरा स्थित अपने एक कमरे पर ले गया। वहां पहुँचते ही आरोपी ने अपना असली रंग दिखाया और पीड़िता के साथ जबरदस्ती की। डरी-सहमी नाबालिग जब बदहवास हालत में अपने घर पहुँची और परिजनों को आपबीती सुनाई, तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। तत्काल रावजी बाजार थाने पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई गई।

    पुलिस की तलाश और तकनीक का सहारा रावजी बाजार पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अज्ञात आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस की टीमें अब दो स्तरों पर काम कर रही हैं डिजिटल फुटप्रिंट: रैपिडो ऐप से उस समय की गई बुकिंग और चालक की आईडी की जानकारी निकाली जा रही है।

    CCTV फुटेज: राजवाड़ा से लेकर परदेसीपुरा तक के पूरे रूट के कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि बाइक नंबर और आरोपी के चेहरे की स्पष्ट पहचान हो सके। यह घटना उन हजारों महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है जो रोजाना निजी ट्रांसपोर्ट एप्स का इस्तेमाल करती हैं। पुलिस ने जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है।

  • दामजीपुरा बवाल अपडेट: बैतूल में भारी पुलिस बल तैनात, आरोपी अब्बू खान गिरफ्तार; हिंसा के बाद अब शांति की ओर कदम

    दामजीपुरा बवाल अपडेट: बैतूल में भारी पुलिस बल तैनात, आरोपी अब्बू खान गिरफ्तार; हिंसा के बाद अब शांति की ओर कदम


    बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के दामजीपुरा गांव में बीते रविवार को हुई साम्प्रदायिक हिंसा के बाद अब हालात धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं। एक आपत्तिजनक और अमानवीय वीडियो वायरल होने के बाद भड़की भीड़ ने इलाके में जमकर उत्पात मचाया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है और फिलहाल गांव एक छावनी में तब्दील नजर आ रहा है।

    घटना का मूल कारण: अमानवीय कृत्य और आक्रोश विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक विशेष समुदाय के आदतन अपराधी अब्बू खान द्वारा गाय के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने का मामला सामने आया। इस घृणित कार्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। रविवार सुबह दामजीपुरा और आसपास के करीब 10 गांवों से हजारों की भीड़ जमा हो गई। आक्रोशित भीड़ ने आरोपी के घर और दुकान सहित कई स्थानों पर तोड़फोड़, आगजनी और पथराव किया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।

    भारी सुरक्षा घेरा और 120 जवानों की तैनाती हालात बेकाबू होते देख बैतूल सहित आसपास के चार जिलों का पुलिस बल तत्काल दामजीपुरा रवाना किया गया। वर्तमान में करीब 120 सशस्त्र जवान गांव की गलियों में गश्त कर रहे हैं। पुलिस की पैनी नजर उन असामाजिक तत्वों पर है जो सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था तब तक कायम रहेगी जब तक पूर्ण विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता।

    आरोपी सलाखों के पीछे पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अब्बू खान को गिरफ्तार कर लिया है। उसे न्यायालय में पेश कर सख्त रिमांड मांगी जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आरोपी के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बने। वहीं, आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल उपद्रवियों की भी पहचान की जा रही है।

    बाजारों में लौटी रौनक, शांति की अपील सोमवार से दामजीपुरा के बाजार में दुकानें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं और लोग अपनी दिनचर्या की ओर लौट रहे हैं। कलेक्टर और एसपी ने संयुक्त रूप से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस विभाग ने चेतावनी जारी की है कि कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

  • मऊगंज में 'कागजी' तस्करी का भंडाफोड़: 28 गौवंशों से भरी 3 पिकअप जब्त; सरपंचों के फर्जी पत्राचार ने खोली प्रशासन की पोल

    मऊगंज में 'कागजी' तस्करी का भंडाफोड़: 28 गौवंशों से भरी 3 पिकअप जब्त; सरपंचों के फर्जी पत्राचार ने खोली प्रशासन की पोल


    मऊगंज । रीवा और मऊगंज जिले की सीमा पर स्थित लौर थाना क्षेत्र में गौ-तस्करी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पटपरा तिराहे पर स्थानीय ग्रामीणों की सजगता से गौवंशों से भरी तीन पिकअप गाड़ियों को पकड़ा गया है। इस कार्रवाई ने न केवल पशु क्रूरता की पराकाष्ठा को उजागर किया है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि तस्करों ने बचने के लिए पंचायतों और कागजों का एक ऐसा मायाजाल बुना है, जिसकी जड़ें काफी गहरी हैं।

    क्रूरता की हदें पार, चीख भी नहीं सके बेजुबान ग्रामीणों ने जब घेराबंदी कर तीन पिकअप वाहनों MP17 G3621, MP17 ZH 1466, MP 17 G 346 को रोका, तो अंदर का नजारा देखकर रूह कांप गई। तीन गाड़ियों में कुल 28 गौवंशों को इतनी बेरहमी से ठूंस-ठूंस कर भरा गया था कि वे हिलने-डुलने तक में असमर्थ थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान महेंद्र गुप्ता, अंकित साकेत और सुरेश साहू निवासी मनगवां के रूप में हुई है।

    फर्जी दस्तावेजों का मायाजाल पकड़े जाने के बाद आरोपियों ने जो दस्तावेज पेश किए, वे तस्करी के इस खेल को और भी संदिग्ध बनाते हैं। मऊगंज की आमोखर ग्राम पंचायत के सरपंच ने 26 जनवरी को एक पत्र जारी कर 50 किलोमीटर दूर स्थित तिवरीगवां पंचायत से 70 गौवंशों की मांग की थी। हैरानी की बात यह है कि जब तिवरीगवां के सरपंच से संपर्क किया गया, तो उन्होंने ऐसे किसी भी पत्राचार या जानकारी से साफ इनकार कर दिया। आखिर एक पंचायत का सरपंच दूसरी पंचायत के आवारा पशुओं का ‘सौदा’ कैसे कर सकता है?

    गौ-सेवा या संगठित तस्करी? सूत्रों की मानें तो यह गौ-सेवा नहीं बल्कि तस्करी का एक संगठित सिंडिकेट है। आमोखर गौशाला, जिसकी क्षमता 400 है और जहाँ पहले से ही 500 से अधिक पशु बदहाली में हैं, वहाँ अचानक दूसरे जिले से पशु क्यों मंगाए जा रहे थे? आरोपियों ने बचाव के लिए रीवा प्रशासन का महीनों पुराना एक पत्र भी दिखाया, जिसका वर्तमान परिवहन से कोई कानूनी लेना-देना नहीं था। यह साफ इशारा करता है कि कागजों को ढाल बनाकर तस्करी की चाल चली जा रही थी।

    सवालों के घेरे में ‘खाकी’ और पंचायत आशुतोष मिश्रा और गोलू गौतम जैसे सजग युवाओं की बदौलत यह गिरोह पकड़ में तो आ गया, लेकिन पुलिस की कार्रवाई फिलहाल ‘पशु क्रूरता’ की साधारण धाराओं तक सीमित दिख रही है। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन उन सरपंचों पर शिकंजा कसेगा जिन्होंने फर्जी पत्राचार किया? क्या पुलिस इस रैकेट के असली ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुँचेगी? मऊगंज एसडीओपी सचि पाठक ने वैधानिक कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि इसे केवल क्रूरता नहीं बल्कि संगठित अपराध मानकर जांच की जाए।

  • श्रद्धा, आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम है बोरेश्वर महादेव मंदिर, रात में दर्शन को आते हैं नंदी महाराज

    श्रद्धा, आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम है बोरेश्वर महादेव मंदिर, रात में दर्शन को आते हैं नंदी महाराज


    नई दिल्ली। उज्जैन और काशी को बाबा महाकाल की धरती के रूप में पूजा जाता है जहां हर मंदिर से कोई न कोई धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व जुड़ा हुआ है। उज्जैन की पावन भूमि पर बाबा महाकाल के अलावा भगवान शिव का एक और अद्भुत और रहस्यमयी स्वरूप विराजमान है जिसे बोरेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यहां केवल दर्शन मात्र से ही 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का फल प्राप्त हो जाता है।

    उज्जैन जिले के दंगवाड़ा गांव में स्थित बोरेश्वर महादेव मंदिर अन्य शिव मंदिरों से बिल्कुल अलग है। जहां अधिकांश मंदिरों में भगवान शिव शिवलिंग के रूप में पूजे जाते हैं वहीं यहां शिवलिंग बोर के आकार की आकृति में स्थापित है। यह शिवलिंग बेलनाकार लंबा और गोल दिखाई देता है और जमीन के ऊपर नहीं बल्कि नीचे की ओर धंसा हुआ है।

    यह मंदिर अत्यंत प्राचीन माना जाता है और इसकी ऐतिहासिक जड़ें ताम्र पाषाण काल से लेकर गुप्त काल तक फैली हुई बताई जाती हैं। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान बोरेश्वर महादेव स्वयंभू हैं। मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता इसकी जलाधारी है जिसमें कितना भी जल अर्पित किया जाए उसका स्तर कभी न बढ़ता है और न ही घटता है। यह रहस्य आज तक वैज्ञानिकों के लिए भी एक पहेली बना हुआ है।

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों का समावेश है। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कहा जाता है कि मंदिर में रात के समय चमत्कार होते हैं। भक्तों का विश्वास है कि रात्रि में नंदी महाराज स्वयं भगवान के दर्शन के लिए मंदिर आते हैं और उस दौरान मंदिर की घंटियां अपने आप बजने लगती हैं।मंदिर के समीप से चंबल नदी भी गुजरती है जो शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं बल्कि आधी परिक्रमा करती है। इसे भगवान शिव के सोमसूत्र के नियम का पालन माना जाता है जो इस स्थान को और भी रहस्यमयी बनाता है।

    महाशिवरात्रि के अवसर पर बोरेश्वर महादेव मंदिर में विशेष शृंगार किया जाता है और बाबा की भव्य सवारी नगर भ्रमण के लिए निकलती है जो वापस मंदिर में आकर संपन्न होती है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव स्वयं नगर में भ्रमण कर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। सावन मास में भी प्रत्येक सोमवार को बाबा की सवारी निकलती है जिसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।

  • फरवरी माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर मंत्रालय में वंदे मातरम और जन-गण-मन का सामूहिक गायन

    फरवरी माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर मंत्रालय में वंदे मातरम और जन-गण-मन का सामूहिक गायन


    भोपाल : मंत्रालय स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में फरवरी माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर सोमवार को राष्ट्र-गीत  वंदे मातरम और राष्ट्र-गान  जन-गण-मन का सामूहिक गायन किया गया। इस अवसर पर पुलिस बैंड ने मधुर धुनों से कार्यक्रम को भव्य बनाया और उपस्थित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया।

    इस सामूहिक गायन कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु, अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीमती कृष्णा गौर भी उपस्थित रही। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेकर राष्ट्र-गीत और राष्ट्र-गान की महत्ता पर बल दिया।

    अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, श्री मनु श्रीवास्तव, श्री संजय कुमार शुक्ला, सचिव श्री एम. रघुराज के साथ-साथ मंत्रालय वल्लभ भवन और सतपुड़ा-विंध्याचल भवन के अधिकारी-कर्मचारी एवं पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे। सभी ने सामूहिक रूप से राष्ट्र-गीत और राष्ट्र-गान का गायन कर देशभक्ति की भावना का परिचय दिया।इस कार्यक्रम से मंत्रालय में कार्यदिवस की शुरुआत देशभक्ति के स्फूर्तिदायक वातावरण में हुई। अधिकारियों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर राष्ट्र की गरिमा और सम्मान को महसूस किया और कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित की।