Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, न्यूनतम वेतन बढ़ाने की उठाई मांग, निकाली रैली

    भोपाल में ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, न्यूनतम वेतन बढ़ाने की उठाई मांग, निकाली रैली


    भोपाल । राजधानी भोपाल में ठेका, अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने गुरुवार को अपने वेतन और नौकरी की स्थिति को लेकर जोरदार आंदोलन किया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने नीलम पार्क क्षेत्र में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और पार्क में धरना देते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग के साथ सांकेतिक सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी भी दी है।

    कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार ने न्यूनतम मजदूरी 12,425 रुपए से बढ़ाकर 16,769 रुपए प्रतिमाह तय की है, लेकिन यह उनके लिए पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि न्यूनतम वेतन कम से कम 26,000 रुपए प्रतिमाह होना चाहिए। साथ ही उनका आरोप है कि केंद्र सरकार के मानकों के बावजूद राज्य के कई विभागों में मजदूरों से 3 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह पर काम कराया जा रहा है, जिससे असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

    कई विभागों में बेहद कम वेतन देने का आरोप

    प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अलग-अलग विभागों में कार्यरत श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों, पावर प्लांट और सीमेंट उद्योगों में भी ठेका श्रमिकों को पूरी मजदूरी नहीं मिलने की बात कही गई है।

    कर्मचारियों के अनुसार स्कूलों, छात्रावासों और आयुष विभाग के अंशकालीन कर्मियों को 4 से 5 हजार रुपए मिलते हैं। ग्राम पंचायतों में चौकीदार, पंप ऑपरेटर और सफाईकर्मियों को 3 से 4 हजार रुपए, स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मियों को 7 से 8 हजार रुपए, राजस्व विभाग के लोक यूथ सर्वेयरों को करीब 1 हजार रुपए, मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ताओं को लगभग 4 हजार रुपए और मनरेगा मेट श्रमिकों को 2 हजार रुपए से भी कम भुगतान किया जाता है।

    सरकार से स्थायी समाधान और वेतन गारंटी की मांग

    अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने बताया कि अब तक 50 हजार से अधिक आवेदन सरकार को दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी सरकार की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन खुद ही न्यूनतम वेतन और स्थायी नौकरी से वंचित हैं। कर्मचारियों ने सरकार से न्यूनतम वेतन की गारंटी देने, इसे बढ़ाकर 26 हजार रुपए करने और आउटसोर्स व्यवस्था की समीक्षा कर स्थायी रोजगार देने की मांग की है।

  • बीजेपी विधायक पर गंभीर आरोप: महिला कांग्रेस पहुंची राज्यपाल के दरबार, विधायकी रद्द करने की मांग

    बीजेपी विधायक पर गंभीर आरोप: महिला कांग्रेस पहुंची राज्यपाल के दरबार, विधायकी रद्द करने की मांग


    भोपाल । भोपाल में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब महिला कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मंगूभाई पटेल से मुलाकात कर बीजेपी विधायक के खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई। यह मामला चिंतामणि मालवीय से जुड़ा है, जिन पर एक बुजुर्ग महिला के घर पर कब्जा करने सहित अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    महिला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि उज्जैन में एक वृद्ध महिला की संपत्ति पर कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है। इस संबंध में उन्होंने दस्तावेज और एफिडेविट भी राज्यपाल को सौंपे हैं, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और पीड़ित को न्याय मिल सके।

    प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विधायक के खिलाफ पहले से ही यौन शोषण जैसे गंभीर मामलों में शिकायतें दर्ज हैं। ऐसे में उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक की सदस्यता समाप्त की जाए। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों पर इस तरह के आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था और समाज के विश्वास को आहत करते हैं, इसलिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

    मुलाकात के दौरान महिला कांग्रेस ने केवल इस मामले को ही नहीं उठाया, बल्कि महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने लोकसभा और मध्यप्रदेश विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि जब तक महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक उनके मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाया नहीं जा सकेगा।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अब सभी की नजरें राज्यपाल के रुख और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।

  • किसानों के हित में बड़ा कदम: समर्थन मूल्य पर 2625 रुपए में खरीदी, तारीख बढ़ाकर 23 मई तक

    किसानों के हित में बड़ा कदम: समर्थन मूल्य पर 2625 रुपए में खरीदी, तारीख बढ़ाकर 23 मई तक


    भोपाल । भोपाल में किसानों को राहत देते हुए मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन की अंतिम तिथि बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। पहले जहां यह प्रक्रिया 9 मई तक निर्धारित थी, अब इसे बढ़ाकर 23 मई कर दिया गया है। इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश अब तक अपनी उपज नहीं बेच पाए थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त और किसानों के अनुकूल हों, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्रों पर पीने के पानी, छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेच सकते हैं, जिससे उनकी सुविधा और विकल्प दोनों बढ़े हैं।

    गेहूं खरीदी को सुगम बनाने के लिए सरकार ने एफएक्यू मापदंडों में भी शिथिलता दी है, ताकि अधिक से अधिक किसानों की उपज खरीदी जा सके। इसके अलावा तौल प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, नेट कनेक्शन, कूपन और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण जैसी व्यवस्थाएं भी केंद्रों पर उपलब्ध कराई गई हैं। उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं, जिससे किसानों को बेहतर अनुभव मिल सके।

    राज्य सरकार किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद रही है, जिसमें 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। यह दर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से तय की गई है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए हैं कि वे स्वयं भी उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं, ताकि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इस कदम से प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और अधिकारियों पर बेहतर काम करने का दबाव भी रहेगा।
    सरकार का यह फैसला किसानों के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और उपार्जन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।

  • रिश्तों में क्या हुआ ऐसा दर्द? नई-नवेली दुल्हन ने लगाई फांसी, हादसे ने बचा ली जान

    रिश्तों में क्या हुआ ऐसा दर्द? नई-नवेली दुल्हन ने लगाई फांसी, हादसे ने बचा ली जान


    ग्वालियर ।
    ग्वालियर के महाराजपुरा इलाके से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी के महज दो दिन बाद ही एक नवविवाहिता ने फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। हालांकि किस्मत ने उसका साथ दिया और फंदा तथा कुर्सी टूट जाने के कारण उसकी जान बच गई। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

    जानकारी के मुताबिक, भिंड जिले के गोरमी क्षेत्र की रहने वाली 22 वर्षीय सपना गुर्जर की शादी 25 अप्रैल 2026 को ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र स्थित लक्ष्मणगढ़ निवासी सौरभ गुर्जर के साथ हुई थी। शादी के बाद सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन दो दिन बाद ही ससुराल में किसी बात को लेकर विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि इसी विवाद से आहत होकर सपना ने अपने कमरे में जाकर फांसी लगाने का प्रयास किया।

    घटना के दौरान अचानक फंदा और पैरों के नीचे रखी कुर्सी टूट गई, जिससे तेज आवाज हुई। आवाज सुनकर परिजन तुरंत कमरे में पहुंचे, जहां सपना बेसुध हालत में मिली। परिजनों ने बिना समय गंवाए उसे तुरंत Jayarogya Hospital पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर इलाज शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत गंभीर जरूर है, लेकिन फिलहाल स्थिर बनी हुई है। उसके गले पर फंदे के निशान पाए गए हैं, जिससे आत्महत्या के प्रयास की पुष्टि होती है।

    घटना की सूचना मिलते ही महाराजपुरा थाना पुलिस भी अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, नवविवाहिता अभी बयान देने की स्थिति में नहीं है। जैसे ही वह होश में आएगी, उसके बयान दर्ज किए जाएंगे, जिससे इस पूरे घटनाक्रम की असली वजह सामने आ सकेगी। फिलहाल पुलिस ससुराल पक्ष के लोगों से पूछताछ कर रही है और मायके पक्ष को भी सूचना दे दी गई है।

    उधर, सपना के परिजन भी भिंड से ग्वालियर पहुंच चुके हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर शादी के दो दिन बाद ही ऐसा क्या हुआ, जिसने नवविवाहिता को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। यदि जांच में किसी प्रकार की प्रताड़ना या दबाव की बात सामने आती है, तो संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है और सभी की निगाहें नवविवाहिता के बयान पर टिकी हैं, जो इस पूरे घटनाक्रम की असली वजह उजागर करेगा।

  • सिस्टम की चूक, उजागर सतना में कुपोषण से बच्ची की मौत, के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई

    सिस्टम की चूक, उजागर सतना में कुपोषण से बच्ची की मौत, के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना जिले में कुपोषण से एक चार माह की मासूम बच्ची की मौत ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मझगंवा ब्लॉक के सुरांगी गांव में हुई इस घटना में जांच के दौरान आंगनबाड़ी स्तर से लेकर सुपरवाइजर तक की गंभीर लापरवाही सामने आई जिसके बाद तत्काल प्रभाव से कदम उठाए गए

    मृत बच्ची सूर्यांशी उर्फ प्रियांशी प्रजापति अति गंभीर कुपोषण की शिकार थी। जानकारी के अनुसार वह अपने जुड़वा भाई के साथ पोषण की कमी से जूझ रही थी लेकिन समय रहते उसे आवश्यक उपचार नहीं मिल सका। जांच में यह भी सामने आया कि बच्ची की स्थिति गंभीर होने के बावजूद उसे समय पर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती नहीं कराया गया जो उसकी जान बचाने के लिए बेहद जरूरी कदम था

    बुखार आने पर परिजन बच्ची को मझगंवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया और उसे पीआईसीयू में भर्ती किया गया लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे Rewa मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। दुर्भाग्यवश रास्ते में ही एंबुलेंस में बच्ची ने दम तोड़ दिया और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा

    इस पूरे मामले में जांच के बाद प्रशासन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूजा पाण्डेय को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में सामने आया कि उन्होंने बच्ची की नियमित वृद्धि निगरानी नहीं की और अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी में होने के बावजूद उसे NRC के लिए रेफर नहीं किया। इतना ही नहीं परिजनों को सही समय पर उचित सलाह भी नहीं दी गई और टीकाकरण में भी लापरवाही बरती गई

    कलेक्टर Satish Kumar S ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। वहीं पर्यवेक्षण स्तर पर भी बड़ी चूक सामने आई जिसके चलते दो सुपरवाइजर दीपक विश्वकर्मा और करूणा पाण्डेय के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। दोनों को बच्चों की निगरानी और फॉलोअप की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन नहीं किया

    प्रशासन ने दोनों सुपरवाइजर की दो वित्तीय वर्षों तक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई केवल दंड नहीं बल्कि एक सख्त संदेश भी है कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी जिम्मेदारियों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

    यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी भी है कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर अधिक सजगता और जवाबदेही की जरूरत है। यदि समय रहते सही कदम उठाए जाते तो शायद इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी

  • दर्शन से लौट रहा परिवार बना हादसे का शिकार, कार में लगी आग ने छीन ली 6 जिंदगियां

    दर्शन से लौट रहा परिवार बना हादसे का शिकार, कार में लगी आग ने छीन ली 6 जिंदगियां


    श्योपुर । राजस्थान के अलवर जिले में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है जिसने कई जिंदगियों को एक झटके में खत्म कर दिया। वैष्णो देवी के दर्शन कर मध्यप्रदेश लौट रहे श्रद्धालुओं की कार अचानक आग का गोला बन गई और उसमें सवार छह लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई जबकि चालक ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है

    यह हादसा अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के पास हुआ जहां एक अर्टिगा कार में अचानक आग भड़क उठी। कार में सवार सभी लोग मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के नागदा गांव के रहने वाले थे और वैष्णो देवी के दर्शन कर अपने घर लौट रहे थे। यात्रा का यह सफर खुशियों से भरा होना चाहिए था लेकिन कुछ ही पलों में यह मातम में बदल गया

    बताया जा रहा है कि कार में आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अंदर बैठे श्रद्धालु आग की लपटों में घिर गए और बुरी तरह झुलस गए। राहगीरों ने तत्काल मदद करने की कोशिश की और चालक को किसी तरह बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी। बाद में उसे जयपुर रेफर किया गया जहां इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया

    इस हादसे में जिन लोगों की जान गई उनमें चालक विनोद के अलावा संतोष आदिवासी उनकी पत्नी बबली दयावली उनकी सास पार्वती और दो मासूम बच्चियां रागनी और साक्षी शामिल हैं। एक ही परिवार के इतने लोगों की मौत ने गांव में सन्नाटा पसार दिया है। हर आंख नम है और हर चेहरा गम से भरा हुआ है

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कार में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी माना जा रहा है हालांकि पुलिस मामले की जांच में जुटी है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और वाहन मेंटेनेंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। लंबी यात्राओं के दौरान वाहनों की नियमित जांच और सावधानी बेहद जरूरी होती है ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। लेकिन जब हादसा अचानक होता है तो उसके परिणाम इतने भयावह हो सकते हैं कि पूरा परिवार ही खत्म हो जाता है

    श्योपुर जिले के नागदा गांव में इस घटना के बाद मातम का माहौल है। जिन घरों में कुछ समय पहले दर्शन की खुशियां थीं वहां अब केवल आंसू और सन्नाटा है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि कई सपनों के एक साथ खत्म होने की कहानी बन गया है

  • एक बूंद पानी को तरसे गांव इछावर में बिगड़े हालात जल जीवन मिशन पर उठे सवाल

    एक बूंद पानी को तरसे गांव इछावर में बिगड़े हालात जल जीवन मिशन पर उठे सवाल


    इछावर। मध्यप्रदेश के इछावर क्षेत्र में इन दिनों जल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है जहां लोगों की जिंदगी का सबसे बड़ा संघर्ष अब पानी बन चुका है। भीषण गर्मी के बीच हालात इतने खराब हो चुके हैं कि गांवों में रहने वाले लोगों को रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी की तलाश करनी पड़ रही है। सीहोर जिले के आलमपुरा जमनी और बड़ी कुलास जैसे गांवों में पानी के लिए जूझ रहे लोगों की तस्वीरें किसी त्रासदी से कम नहीं हैं

    सुबह होते ही महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग खाली बर्तन लेकर घर से निकल पड़ते हैं और दिनभर पानी की तलाश में भटकते रहते हैं। चिलचिलाती धूप में तपती जमीन पर नंगे पांव या चप्पल पहनकर लंबी दूरी तय करना उनकी मजबूरी बन चुका है। कई बार घंटों की मशक्कत के बाद भी उन्हें साफ पानी नहीं मिल पाता और जो पानी मिलता है वह भी पीने लायक नहीं होता

    ग्रामीणों के अनुसार इलाके के अधिकांश हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं और नलों में कई दिनों से पानी नहीं आया है। पानी की कमी ने न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित किया है बल्कि स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। दूषित पानी पीने से बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है

    इस गंभीर स्थिति को लेकर स्थानीय समाजसेवी और किसान एम.एस. मेवाड़ा ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि यह केवल पानी का संकट नहीं बल्कि मानवता की परीक्षा है जहां हर किसी को मिलकर आगे आना होगा

    सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन भी इस क्षेत्र में बेअसर साबित होती नजर आ रही है। इस योजना का उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना था लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। कई गांवों में नल तो लगाए गए लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा जिससे लोगों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं

    जल संकट का असर अब सामाजिक जीवन पर भी पड़ने लगा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है क्योंकि उन्हें भी पानी लाने में परिवार का साथ देना पड़ता है। महिलाएं घर के कामकाज के साथ साथ पानी लाने की जिम्मेदारी निभाते हुए शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से थक चुकी हैं

    ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाए ताकि लोगों को इस भीषण संकट से राहत मिल सके। जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उनका सही तरीके से क्रियान्वयन हो और हर गांव तक पानी की पहुंच सुनिश्चित की जाए

  • अचानक खरीदी केंद्र पहुंचे सीएम मोहन यादव ,व्यवस्थाओं की हकीकत जानी किसानों संग चाय पर चर्चा

    अचानक खरीदी केंद्र पहुंचे सीएम मोहन यादव ,व्यवस्थाओं की हकीकत जानी किसानों संग चाय पर चर्चा

    भोपाल/खरगोन । मध्यप्रदेश में किसान कल्याण को लेकर सरकार की सक्रियता एक बार फिर देखने को मिली जब Mohan Yadav ने अपने ही बयान को अगले ही दिन जमीन पर उतार दिया। 29 अप्रैल को उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं और 30 अप्रैल की सुबह उन्होंने इसे सच कर दिखाया। मुख्यमंत्री अचानक Khargone जिले के कतरगांव स्थित खरीदी केंद्र पहुंच गए जहां उन्होंने व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और किसानों से सीधे संवाद किया

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल उपार्जन की प्रक्रिया को देखा बल्कि किसानों के साथ बैठकर चाय भी पी और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों। यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं था बल्कि जमीनी हकीकत को समझने और सुधार की दिशा तय करने का प्रयास था

    दरअसल मुख्यमंत्री इससे एक दिन पहले महेश्वर में रात्रि विश्राम पर थे और वहीं से उन्होंने संकेत दिए थे कि वे कभी भी निरीक्षण कर सकते हैं। उनके इस कदम ने यह साफ कर दिया कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है बल्कि क्रियान्वयन पर भी उतना ही जोर दे रही है। प्रदेश सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए छाया बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए हैं ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े

    सरकार ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए कई अहम बदलाव भी किए हैं। तौल में देरी से बचने के लिए उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है और जरूरत के अनुसार इसे और बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा चमक विहीन गेहूं की स्वीकार्यता सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है जिससे अधिक किसानों को राहत मिल सके। सूकड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा को भी बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया गया है

    खरीदी केंद्रों पर बारदाना तौल कांटे हम्माल तुलावटी सिलाई मशीन कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और साफ सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं ताकि किसानों की उपज का सही मूल्य मिल सके

    यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है। अब तक प्रदेश में 9.83 लाख किसानों ने 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक किए हैं जबकि 5 लाख से अधिक किसानों से 22.70 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। पिछले वर्ष जहां 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था वहीं इस बार सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है

    मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा यह संदेश देता है कि सरकार किसानों के हितों को लेकर गंभीर है और हर स्तर पर निगरानी रख रही है ताकि योजनाओं का लाभ सही समय पर और सही तरीके से किसानों तक पहुंच सके

  • मुस्लिम पक्ष का तर्क… भोजशाला राजस्व रिकॉर्ड में मस्जिद के रूप में दर्ज… मंदिर होने का कोई प्रमाण नहीं

    मुस्लिम पक्ष का तर्क… भोजशाला राजस्व रिकॉर्ड में मस्जिद के रूप में दर्ज… मंदिर होने का कोई प्रमाण नहीं


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) में बुधवार को भोजशाला विवाद (Bhojshala controversy) पर सुनवाई हुई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष ने अपनी बात रखते हुए दावा किया कि पुराने सरकारी कागजों यानी राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) में यह जगह हमेशा से एक मस्जिद के रूप में दर्ज रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूद इतिहास के स्रोतों में ऐसा कोई साफ जिक्र नहीं मिलता कि राजा भोज ने यहां सरस्वती मंदिर बनवाया था। बता दें कि हिंदू समाज इस जगह को देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। इस पूरी जगह की देखरेख ISI कर रहा है।

    खुद को सूफी संत मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती के वंशज और सज्जादानशीन (किसी सूफी दरगाह, खानकाह या धार्मिक स्थल का आध्यात्मिक प्रमुख, गुरु या उत्तराधिकारी) बताने वाले काजी मोइनुद्दीन की ओर से उनके वकील नूर अहमद शेख ने इंदौर पीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के सामने विस्तृत दलीलें पेश कीं।

    मोइनुद्दीन ने भोजशाला मामले में ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ नामक संगठन और कुलदीप तिवारी एवं एक अन्य व्यक्ति की ओर से दायर दो जनहित याचिकाओं पर हस्तक्षेपकर्ता के रूप में सवाल उठाए हैं। इन याचिकाओं में कहा गया है कि भोजशाला सरस्वती मंदिर है। परिसर में केवल हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार दिया जाना चाहिए।


    मस्जिद के रूप में दर्ज है स्थान

    मोइनुद्दीन के वकील शेख ने अदालत में दावा किया कि मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती की वंशावली से जुड़े उनके मुवक्किल के पुरखों के पास विवादित परिसर की सनदें (अधिकार पत्र) ऐतिहासिक तौर पर रही हैं। सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में भी यह स्थान मस्जिद के रूप में दर्ज रहा है। भोजशाला परिसर में स्थित कमाल मौला मस्जिद के प्रबंधन से जुड़े लोगों का इस स्थान पर लंबे समय से ‘सतत और शांतिपूर्ण कब्जा’ रहा है।

    शेख ने मुस्लिम कानूनों का जिक्र करते हुए बताया कि यदि कोई धार्मिक संपत्ति हैए जैसे कि मस्जिद या उससे जुड़ी जमीन तो उसके देख-रेख करने वाले लोगों जैसे सज्जादानशीन और मुतवल्ली को खास हक मिलते हैं। इन पदों पर बैठे लोगों और उनके परिवार वालों को ना सिर्फ उस संपत्ति के कार्यों में दखल देने का अधिकार है वरन उसका इस्तेमाल करने का पूरा हक भी कानूनन उनके पास होता है।

    मुस्लिम पक्ष के वकील ने प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1904 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून में ‘संपत्ति के प्रभारी’ की शब्दावली का प्रयोग किया गया है जिससे स्पष्ट होता है कि जो व्यक्ति या पक्ष लंबे समय से किसी संपत्ति के प्रभार में है, उसे उस संपत्ति के संबंध में अधिकार प्राप्त होते हैं।


    सरस्वती मंदिर के अस्तित्व का स्पष्ट उल्लेख नहीं

    सुनवाई के दौरान धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने दावा किया कि दोनों जनहित याचिकाओं में हिन्दू पक्षकारों की ओर से हाई कोर्ट के समक्ष ऐतिहासिक तथ्यों के संबंध में ‘भ्रामक प्रस्तुतीकरण’ किया गया है। उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों में धार में परमार राजवंश के राजा भोज की ओर से स्थापित किसी सरस्वती मंदिर के अस्तित्व का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है।


    न्यायिक परीक्षण पर गंभीर सवाल

    धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने यह भी कहा कि एएसआई ने भोजशाला विवाद को लेकर दायर मुकदमों में समय-समय पर अपने उत्तरों में परिवर्तन करते हुए तीन अलग-अलग रुख अपनाए हैं। ऐसी स्थिति न्यायिक परीक्षण को लेकर गंभीर सवाल उत्पन्न करती है।


    सर्वेक्षण प्रक्रिया पर जताई आपत्तियां

    वारसी ने एएसआई की ओर से भोजशाला परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने इसकी वीडियोग्राफी के तरीके के बारे में भी आपत्तियां जताईं। उनकी ओर से अदालत से अनुरोध किया कि इन आपत्तियों का परीक्षण किया जाए। भोजशाला मामले में सुनवाई बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी। हाई कोर्ट इस स्मारक के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर 4 याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है।

  • MP: इंदौर में शादी में आए यूपी के कारोबारी की कार से नगदी और हथियार चोरी… आरोपी गिरफ्तार

    MP: इंदौर में शादी में आए यूपी के कारोबारी की कार से नगदी और हथियार चोरी… आरोपी गिरफ्तार


    इंदौर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में शादी समारोह में शामिल होने आए एक कारोबारी (Businessman) की कार से नकदी और हथियार चोरी (Cash and weapon theft) होने का मामला अब सुलझ गया है. भंवरकुआ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और चोरी गया सामान भी बरामद कर लिया है।

    जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बरेली निवासी कारोबारी केशव सोनी इंदौर में एक शादी में शामिल होने आए थे. इस दौरान उनकी फॉर्च्यूनर कार का कांच तोड़कर एक अज्ञात बदमाश ने कार में रखा बैग चुरा लिया था. बैग में करीब एक लाख रुपये नकद, लाइसेंसी पिस्टल और कारतूस रखे हुए थे. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम गठित की. एडिशनल डीसीपी जोन-4 आनंद कलादगी के नेतृत्व में पुलिस ने आसपास लगे 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. जांच के दौरान एक संदिग्ध पल्सर बाइक नजर आई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंचने में सफल रही।

    पुलिस ने भगवती नगर, मूसाखेड़ी निवासी सलमान खान को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में उसके पास से चोरी गया बैग, नकदी, लाइसेंसी पिस्टल और कारतूस बरामद कर लिए गए हैं. वारदात में इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक भी जब्त कर ली गई है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी पहले से कई आपराधिक मामलों में लिप्त रहा है. फिलहाल उससे पूछताछ जारी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह और किन घटनाओं में शामिल रहा है.