Category: Madhya Pradesh

  • उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के बीच मंदिर शिफ्टिंग की चुनौती: हनुमान मंदिर पीछे होगा, गणेश मंदिर के लिए नई जगह की तलाश

    उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के बीच मंदिर शिफ्टिंग की चुनौती: हनुमान मंदिर पीछे होगा, गणेश मंदिर के लिए नई जगह की तलाश


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन में चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्यों के बीच मंदिरों की शिफ्टिंग एक बार फिर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। कंठाल से सतीगेट मार्ग के चौड़ीकरण के दौरान कई धार्मिक स्थल प्रभावित हो रहे हैं, जिससे निर्माण कार्य की गति पर असर पड़ सकता है।

    नगर निगम ने इस बार पहले से योजना बनाकर काम शुरू किया है, लेकिन कई जगहों पर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। पिछले अनुभवों को देखते हुए प्रशासन इस बार समय रहते समाधान करने की कोशिश कर रहा है, ताकि सड़क निर्माण कार्य बीच में न रुके।

    कंठाल-सतीगेट चौड़ीकरण मार्ग पर दो प्रमुख मंदिर प्रभावित हो रहे हैं। योजना के अनुसार हनुमान मंदिर को पीछे की ओर स्थानांतरित किया जाएगा, जबकि गणेश मंदिर के लिए आसपास किसी नई उपयुक्त जगह की तलाश की जा रही है। हालांकि, स्थान चयन को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

    इसके साथ ही कंठाल क्षेत्र में नाले के ऊपर बने एक मंदिर को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद भी सामने आया है। स्थानीय निवासी अरविंद मैदावाला ने संभागायुक्त को आवेदन देकर अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने और प्रशासन की योजना पर जानकारी मांगी है।

    इसी तरह बियाबानी चौड़ीकरण मार्ग पर भी एक मंदिर को शिफ्ट करने की तैयारी की गई है, जिसके लिए पास में ही नया स्थान चिन्हित किया गया है। ढाबारोड क्षेत्र में चल रहे चौड़ीकरण में भी श्रीनाथजी की हवेली का हिस्सा प्रभावित हो रहा है, जिस पर अभी अंतिम निर्णय लंबित है।

    प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते मंदिरों की शिफ्टिंग पूरी नहीं हुई, तो सड़क चौड़ीकरण कार्य प्रभावित हो सकता है। इसका असर आगामी बड़े आयोजन सिंहस्थ पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर, विकास कार्य और धार्मिक संरचनाओं के संतुलन को बनाए रखना इस समय नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • उज्जैन सीवरेज प्रोजेक्ट में देरी: काम 12 हिस्सों में बांटा गया, अब टाटा के साथ अन्य कंपनियां भी संभालेंगी जिम्मेदारी

    उज्जैन सीवरेज प्रोजेक्ट में देरी: काम 12 हिस्सों में बांटा गया, अब टाटा के साथ अन्य कंपनियां भी संभालेंगी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली।  मध्य प्रदेश के उज्जैन में लंबे समय से चल रहे सीवरेज प्रोजेक्ट में एक बार फिर देरी सामने आई है। शहर की सीवरेज व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट में अब तक तय समय सीमा के बावजूद हजारों घरों में कनेक्शन नहीं हो सके हैं।

    प्रोजेक्ट का काम देख रही टाटा कंपनी को 31 मार्च तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अब भी करीब 30 हजार से अधिक हाउसहोल्ड कनेक्शन बाकी हैं। धीमी प्रगति को देखते हुए नगर निगम ने अब बड़ा कदम उठाते हुए पूरे काम को 12 हिस्सों में बांट दिया है।

    अब इस प्रोजेक्ट में केवल टाटा कंपनी ही नहीं, बल्कि अन्य एजेंसियों को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए नए टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें से तीन कंपनियों के रेट स्वीकृत कर लिए गए हैं, जबकि तीन के रेट अधिक होने के कारण खारिज कर दिए गए हैं।

    नगर निगम के अपर आयुक्त पवनकुमार सिंह के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और फिलहाल उनका विश्लेषण किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि इस साल के अंत तक सीवरेज प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके।

    यह प्रोजेक्ट वर्ष 2017 में शुरू हुआ था और शुरुआत में इसे 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन कई बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद काम अधूरा रह गया। इससे पहले भी टाटा प्रोजेक्ट्स को 10 से अधिक बार एक्सटेंशन दिया जा चुका है।

    प्रशासन ने लापरवाही को देखते हुए कंपनी को पिछले चार महीने पहले आगे के तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था, हालांकि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।

    वर्तमान स्थिति यह है कि कंपनी प्रतिदिन तय लक्ष्य के अनुसार 300 कनेक्शन भी नहीं कर पा रही है। जबकि यदि रोजाना 1000 कनेक्शन भी किए जाएं, तब भी निर्धारित समय में काम पूरा करना मुश्किल माना जा रहा है।

    अब देखना होगा कि नए टेंडर और अन्य कंपनियों की भागीदारी से यह लंबे समय से अटका हुआ प्रोजेक्ट कितनी तेजी से पूरा हो पाता है।

  • महावीर जन्म कल्याणक विवाद: इंदौर में 50 लाख का मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी की मांग

    महावीर जन्म कल्याणक विवाद: इंदौर में 50 लाख का मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी की मांग


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में महावीर जन्म कल्याणक के मौके पर आयोजित नवकारसी कार्यक्रम अब कानूनी विवाद में बदल गया है। इस मामले में 50 लाख रुपए का मानहानि नोटिस भेजा गया है, जिसमें श्वेताम्बर जैन महासंघ न्यास के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    नोटिस अक्षय जैन की ओर से उनके अधिवक्ता के माध्यम से जारी किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि महासंघ द्वारा जारी स्पष्टीकरण में आधिकारिक लेटरहेड का दुरुपयोग करते हुए निराधार और अपमानजनक टिप्पणियां प्रकाशित की गईं, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

    नोटिस के अनुसार, यह पत्र केवल संस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में व्यापक रूप से प्रसारित हुआ और व्हाट्सएप सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी वायरल हुआ। इससे संबंधित पक्ष की सार्वजनिक छवि को ठेस पहुंची है। दावा किया गया है कि पिछले 40 वर्षों से व्यापार और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय अक्षय जैन की साख को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

    विवाद की जड़ में महावीर जन्म कल्याणक के दिन हुए नवकारसी आयोजन का एक घटनाक्रम है, जिसमें ट्रैक्टर खड़ा होने को लेकर विवाद हुआ था। नोटिस में कहा गया है कि इस घटना के लिए इवेंट कंपनी के संचालक ने पहले ही लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांग ली थी। इसके बावजूद करीब 29 दिन बाद आरोपों के साथ पत्र जारी करना दुर्भावनापूर्ण बताया गया है।

    इसके अलावा 29 अप्रैल को हुई बैठक के मिनट्स पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संस्था के मंच का इस्तेमाल कर व्यक्तिगत आरोपों को संस्थागत रूप दिया गया, जिससे न केवल संस्था की गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि एक व्यक्ति विशेष के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया गया।

    नोटिस में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 (मानहानि) और धारा 61 (आपराधिक साजिश) का हवाला देते हुए इसे दंडनीय कृत्य बताया गया है। साथ ही इसे दीवानी क्षति के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है।

    नोटिस में 15 दिनों के भीतर 50 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति, 25 हजार रुपए विधिक खर्च, और 7 दिनों के भीतर बिना शर्त लिखित माफी जारी करने की मांग की गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने और भविष्य में ऐसे कृत्यों से बचने की भी शर्त रखी गई है।

    स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि तय समयसीमा में मांगें पूरी नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा और अलग से दीवानी वाद भी दायर किया जाएगा।

  • इंदौर में फ्लैट सौदे में धोखाधड़ी: गिरवी रखी प्रॉपर्टी बेचने की कोशिश, दंपति पर FIR दर्ज

    इंदौर में फ्लैट सौदे में धोखाधड़ी: गिरवी रखी प्रॉपर्टी बेचने की कोशिश, दंपति पर FIR दर्ज


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रॉपर्टी सौदे से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक दंपति पर गिरवी रखे फ्लैट को बेचने की कोशिश करने का आरोप लगा है। मामले में शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।

    घटना अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता सुनिता पाल ने संगीता मोटवानी और उनके पति कमल मोटवानी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि दंपति ने धनवंतरी निवास सिल्वर पैलेस कॉलोनी में स्थित अपने फ्लैट का सौदा 47 लाख रुपए में तय किया, जबकि वह पहले से ही बैंक में गिरवी रखा हुआ था।

    सौदे के तहत पीड़िता ने पहले 1 लाख रुपए बयाने के रूप में दिए और 6 जून 2025 को सेल एग्रीमेंट होने के बाद 5 लाख रुपए का चेक भी दिया गया, जिसे आरोपियों ने नकद कर लिया। इसके बाद टैक्स भुगतान के नाम पर भी पीड़िता से रकम खर्च करवाई गई, जिसमें हाउस टैक्स और अन्य देनदारियां शामिल थीं।

    जब रजिस्ट्री का समय आया, तब आरोपियों ने खुलासा किया कि फ्लैट पर बैंक से लोन लिया गया है। जांच में सामने आया कि फ्लैट पर करीब 23 लाख रुपए का कर्ज बकाया है। जबकि इस महत्वपूर्ण जानकारी का जिक्र सेल एग्रीमेंट में नहीं किया गया था।

    पीड़िता का आरोप है कि जब उसने पूरी रकम की व्यवस्था कर ली और रजिस्ट्री की बात की, तो दंपति ने सौदा करने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, आरोप है कि उन्होंने समाज के कुछ लोगों को बुलाकर पीड़िता को धमकाया और मानसिक दबाव बनाया।

    मामला बढ़ने पर पीड़िता ने पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी। जांच के बाद पुलिस ने इसे प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी मानते हुए दंपति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    यह मामला एक बार फिर प्रॉपर्टी खरीदते समय पूरी जांच-पड़ताल और दस्तावेजों की पुष्टि की जरूरत को रेखांकित करता है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।

  • इंदौर में ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ा भारी: 210 चालकों के लाइसेंस होंगे सस्पेंड

    इंदौर में ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ा भारी: 210 चालकों के लाइसेंस होंगे सस्पेंड


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी अब महंगी पड़ने वाली है। शहर की ट्रैफिक पुलिस ने लगातार नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 210 लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
    ट्रैफिक विभाग के अनुसार, जिन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, वे पिछले तीन महीनों में बार-बार गंभीर नियमों का उल्लंघन करते पाए गए। इनमें रेड सिग्नल जंप करना, रॉन्ग साइड वाहन चलाना और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना जैसे खतरनाक व्यवहार शामिल हैं, जो सड़क पर अन्य लोगों की जान को जोखिम में डालते हैं।
    राजेश त्रिपाठी (डीसीपी ट्रैफिक) ने बताया कि ऐसे चालकों की पहचान वाहन नंबर और रजिस्ट्रेशन के आधार पर की गई है। इनकी सूची परिवहन विभाग को भेज दी गई है, जहां से लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
    पुलिस का कहना है कि यह कदम सड़क हादसों को कम करने और लोगों में नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। लगातार नियम तोड़ने वालों पर निगरानी और सख्ती आगे भी जारी रहेगी। 
    ट्रैफिक पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें, ताकि खुद की और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। नियमों की अनदेखी न सिर्फ कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है।
  • सर्वाइकल कैंसर जांच में बड़ा बदलाव: मप्र में ‘डीएनए किट’ से होगी स्क्रीनिंग, महिलाएं खुद दे सकेंगी सैंपल

    सर्वाइकल कैंसर जांच में बड़ा बदलाव: मप्र में ‘डीएनए किट’ से होगी स्क्रीनिंग, महिलाएं खुद दे सकेंगी सैंपल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक अहम पहल सामने आई है। अब प्रदेश में सर्वाइकल कैंसर की जांच पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक डीएनए किट के जरिए की जाएगी। इसका उद्देश्य जांच के दौरान होने वाली झिझक को खत्म करना और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को स्क्रीनिंग से जोड़ना है।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी कर रहा है। योजना के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की जांच डीएनए आधारित किट से की जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट जुलाई से शुरू हो सकता है, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तार दिया जाएगा।
    नई तकनीक में महिलाओं को खुद सैंपल देने की सुविधा मिलेगी। किट में दिए गए स्वैब और विशेष कंटेनर की मदद से नमूना लेकर उसे लैब में भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया से शारीरिक जांच की जरूरत कम होगी, जिससे महिलाएं बिना झिझक जांच करवा सकेंगी। इससे स्क्रीनिंग का दायरा भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
    इस जांच के जरिए सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण मानव पेपिलोमा वायरस (HPV) की पहचान की जाएगी। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो आगे की जांच और उपचार तुरंत शुरू किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर पहचान होने से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 30 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है। अब तक पारंपरिक जांच पद्धतियां खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बाधा बनती थीं, लेकिन डीएनए आधारित तकनीक से शुरुआती स्तर पर संक्रमण पकड़ना आसान हो जाएगा।
    साथ ही, प्रदेश टीकाकरण के मामले में भी आगे है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीन के तहत मध्य प्रदेश में करीब 92% किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है। आंकड़ों के अनुसार, हर साल प्रदेश में 4 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं, जबकि करीब 2100 महिलाओं की इस बीमारी से मौत हो जाती है।
    कुल मिलाकर, यह नई पहल न केवल महिलाओं की झिझक को खत्म करेगी, बल्कि समय पर पहचान और इलाज के जरिए हजारों जिंदगियां बचाने में भी मददगार साबित हो सकती है।

  • इंजीनियरिंग एडमिशन में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मिलेगा मौका, जुलाई और जनवरी से शुरू होंगे सत्र

    इंजीनियरिंग एडमिशन में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मिलेगा मौका, जुलाई और जनवरी से शुरू होंगे सत्र


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से तकनीकी शिक्षा को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब साल में दो बार एडमिशन की व्यवस्था लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) गाइडलाइन तैयार कर रहा है, जबकि तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

    नई व्यवस्था के तहत एक शैक्षणिक सत्र जुलाई में शुरू होगा, जबकि दूसरा सत्र जनवरी से प्रारंभ किया जाएगा। जुलाई सत्र में सभी सीटों पर एडमिशन के लिए सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग कराई जाएगी। इसके बाद जो सीटें खाली रह जाएंगी, उन्हें जनवरी सत्र में भरा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सीटें खाली रहने की समस्या खत्म होगी और एडमिशन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी।

    फिलहाल स्थिति यह है कि एडमिशन प्रक्रिया सितंबर-अक्टूबर तक खिंच जाती है और कई बार सीटों को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। नई व्यवस्था से इस देरी पर रोक लगेगी और एकेडमिक कैलेंडर भी तय समय पर लागू किया जा सकेगा।

    हालांकि, इस बदलाव को लेकर शिक्षा विशेषज्ञों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, जनवरी सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को सीधे दूसरे सेमेस्टर से पढ़ाई शुरू कराई जा सकती है। बाद में वे पहले सेमेस्टर की पढ़ाई करेंगे। इसी तरह आगे भी सेमेस्टर का क्रम उलट-पुलट तरीके से चल सकता है जैसे चौथा सेमेस्टर पहले और तीसरा बाद में।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई में विषय आपस में जुड़े होते हैं। ऐसे में बेसिक विषयों से पहले एडवांस विषय पढ़ना छात्रों की समझ को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा प्लेसमेंट पर भी असर पड़ने की आशंका है। जनवरी सत्र में एडमिशन लेने वाले छात्र फरवरी-मार्च के आसपास पासआउट होंगे, जबकि अधिकांश कंपनियां दिसंबर तक पास होने वाले छात्रों को ही भर्ती करती हैं। ऐसे में उनके लिए अलग प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करनी पड़ सकती है।

    लेटरल एंट्री के छात्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है। अभी डिप्लोमा के बाद दूसरे वर्ष में प्रवेश के लिए जो सीटें बचती हैं, वे अगले सत्र में भरी जाती हैं। लेकिन साल में दो बार एडमिशन होने से इन सीटों की उपलब्धता कम हो सकती है।

    सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और दो अलग-अलग ग्रुप बनाकर पढ़ाई सुचारु रूप से चलाई जा सकेगी। कंपनियां भी अपने प्लेसमेंट शेड्यूल में बदलाव कर सकती हैं।

    कुल मिलाकर, यह नई व्यवस्था जहां एक ओर एडमिशन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और लचीला बनाएगी, वहीं छात्रों और संस्थानों के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकती है। आने वाले समय में इसका वास्तविक असर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।

  • भोपाल की सफाई पर बड़ा सवाल: क्या सच में देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर है ग्राउंड रियलिटी?

    भोपाल की सफाई पर बड़ा सवाल: क्या सच में देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर है ग्राउंड रियलिटी?

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    नई दिल्ली। देश के सबसे साफ शहरों की सूची में लगातार ऊंचा स्थान पाने वाला भोपाल एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है स्वच्छता सर्वे का बदला हुआ तरीका और शहर की वास्तविक सफाई व्यवस्था को लेकर उठते सवाल। अब केवल ऑनलाइन वोटिंग के आधार पर रैंकिंग तय नहीं होगी, बल्कि अधिकारी खुद लोगों के बीच जाकर उनकी राय लेंगे। ऐसे में असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद बढ़ गई है।

    अब तक माना जाता रहा है कि भोपाल की साफ-सफाई व्यवस्था काफी बेहतर है, लेकिन जब जमीनी स्तर पर लोगों से बात की गई तो कई अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोग शहर की सफाई व्यवस्था से संतुष्ट नजर आए। उनका कहना है कि नियमित कचरा उठान, सड़कों की सफाई और सार्वजनिक जगहों पर स्वच्छता का स्तर पहले से बेहतर हुआ है। खासतौर पर मुख्य सड़कों और वीआईपी इलाकों में सफाई स्पष्ट दिखाई देती है।

    हालांकि, दूसरी तरफ कई नागरिकों ने सफाई व्यवस्था में खामियां भी गिनाईं। लोगों का कहना है कि अंदरूनी कॉलोनियों और पुराने इलाकों में अभी भी कचरा जमा रहता है और सफाई नियमित नहीं होती। कुछ जगहों पर डस्टबिन की कमी और कचरा प्रबंधन में लापरवाही भी देखने को मिलती है। इससे साफ जाहिर होता है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में सफाई का स्तर एक जैसा नहीं है।

    स्वच्छता सर्वे के नए फॉर्मेट में अब नागरिकों की सीधी भागीदारी बढ़ा दी गई है। अधिकारी घर-घर जाकर फीडबैक ले रहे हैं, जिससे केवल डिजिटल वोटिंग के बजाय वास्तविक अनुभव को महत्व मिलेगा। इससे यह तय होगा कि रैंकिंग सिर्फ आंकड़ों पर आधारित है या वास्तव में जमीनी हकीकत भी उतनी ही मजबूत है।

    भोपाल के लिए यह एक अहम मौका है, जहां उसे अपनी छवि को बनाए रखने के साथ-साथ उन कमियों को भी दूर करना होगा, जो अब तक नजरअंदाज होती रही हैं। अगर शहर प्रशासन इन फीडबैक को गंभीरता से लेता है, तो आने वाले समय में भोपाल न केवल रैंकिंग में, बल्कि वास्तविक सफाई व्यवस्था में भी एक मिसाल बन सकता है।

  • कमर्शियल गैस महंगी: भोपाल में बाहर खाना पड़ेगा और महंगा, 30% तक बढ़ सकते हैं दाम

    कमर्शियल गैस महंगी: भोपाल में बाहर खाना पड़ेगा और महंगा, 30% तक बढ़ सकते हैं दाम


    नई दिल्ली। देश के दूसरे सबसे स्वच्छ शहर भोपाल में अब महंगाई की नई लपट देखने को मिल रही है। कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी ने होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार की कमर तोड़ दी है। पिछले डेढ़ महीने से गैस की कमी झेल रहे कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी किसी झटके से कम नहीं है।

    जानकारी के मुताबिक, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2081 रुपए से बढ़कर सीधे 3074 रुपए हो गई है। यानी करीब 993 रुपए की बढ़ोतरी ने ईंधन लागत को डेढ़ गुना तक बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर अब खाने-पीने की कीमतों पर पड़ने वाला है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि अब मेन्यू के दाम 25 से 30 फीसदी तक बढ़ाना मजबूरी हो गया है।

    कारोबारियों के अनुसार, पहले जहां गैस पर मासिक खर्च करीब 2 लाख रुपए होता था, अब यह बढ़कर 3 से सवा 3 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। छोटे कारोबारियों की हालत और भी खराब है। 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर (छोटू) की कीमत 585 रुपए से बढ़कर 827 रुपए हो गई है, जिससे हॉकर और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर सीधा असर पड़ा है।

    इस बढ़ोतरी का असर शादी-विवाह जैसे आयोजनों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कैटरर्स का कहना है कि पहले से बुक किए गए ऑर्डर्स में उन्हें नुकसान झेलना पड़ेगा, क्योंकि पुराने रेट पर ही काम करना होगा। एक शादी में औसतन 10 सिलेंडर खर्च होते हैं, जिससे प्रति इवेंट करीब 10 हजार रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। आने वाले ऑर्डर्स में प्रति प्लेट 50 रुपए तक बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, 500 लोगों के एक आयोजन का 5 लाख रुपए का बजट अब 45 से 50 हजार रुपए तक बढ़ सकता है। इससे साफ है कि महंगाई की यह मार सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी असर डालेगी।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 अप्रैल 2025 के बाद से अब तक कमर्शियल सिलेंडर के दाम 16 बार बदले जा चुके हैं। इनमें 8 बार बढ़ोतरी और 6 बार कमी दर्ज की गई है। सबसे बड़ी बढ़ोतरी 1 मई को हुई, जिसने बाजार का पूरा संतुलन बिगाड़ दिया।

    कुल मिलाकर, गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने भोपाल के फूड इंडस्ट्री सेक्टर को मुश्किल में डाल दिया है। आने वाले दिनों में बाहर खाना अब पहले से काफी महंगा हो सकता है, जिसका सीधा असर आम जनता के बजट पर पड़ेगा।

  • जबलपुर क्रूज हादसा: पानी में फंसे यात्री को स्थानीय युवक ने जोखिम लेकर बचाया, मानवता की मिसाल कायम

    जबलपुर क्रूज हादसा: पानी में फंसे यात्री को स्थानीय युवक ने जोखिम लेकर बचाया, मानवता की मिसाल कायम

    मध्‍य प्रदेश /जबलपुर के बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा एक ओर जहां दर्द और तबाही की तस्वीर छोड़ गया, वहीं दूसरी ओर इसने मानवता की एक ऐसी मिसाल भी पेश की, जिसने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में इंसानियत किसी धर्म या पहचान की मोहताज नहीं होती।
    घटना उस समय हुई जब एक डबल डेकर क्रूज अचानक तेज हवाओं और आंधी की चपेट में आ गया। मौसम में अचानक आए बदलाव ने स्थिति को इतना गंभीर बना दिया कि कुछ ही पलों में क्रूज पानी में डूबने लगा। उस समय क्रूज में 30 से अधिक लोग सवार थे, जिनमें से कई लोग घबराहट में पानी में गिर गए और अफरा-तफरी मच गई।
    इसी बीच एक यात्री अयाज हुसैन खुद को किसी तरह बचाते हुए क्रूज के ऊपरी हिस्से पर पहुंच गए। वह वहीं फंसे रहे और तीन घंटे तक जीवन और मौत के बीच संघर्ष करते रहे। पानी का स्तर और तेज लहरें उनकी स्थिति को और कठिन बना रही थीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
    उसी समय स्थानीय निवासी कन्हैयालाल साहू वहां पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने बिना किसी सुरक्षा उपकरण और अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में उतरने का फैसला किया। उनके साथ कुछ अन्य लोग भी मदद के लिए आगे आए, लेकिन मुख्य भूमिका कन्हैयालाल की ही रही, जिन्होंने सीधे उस यात्री तक पहुंचने की कोशिश की।
    कन्हैयालाल ने बताया कि अयाज हुसैन जीवन रक्षक उपकरण पहने हुए थे और किसी तरह क्रूज के ऊपरी हिस्से पर टिके हुए थे। चारों ओर पानी और अंधेरा माहौल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। यह पूरा प्रयास बेहद जोखिम भरा था, लेकिन मानवता की भावना ने हर डर पर जीत हासिल की।
    इस हादसे में कई अन्य लोग भी प्रभावित हुए हैं। बचाव दल लगातार राहत और खोज कार्य में जुटे हुए हैं। अब तक कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है, जबकि कुछ लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
    स्थानीय लोगों की भूमिका इस घटना में बेहद अहम रही है। बिना किसी आधिकारिक संसाधन के उन्होंने जिस तरह से मदद की, वह इस बात का उदाहरण है कि आपदा के समय समाज खुद भी एक बड़ा सहारा बन सकता है।
    यह पूरी घटना सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि मानवता की ताकत की कहानी बन गई है, जहां एक अनजान व्यक्ति ने दूसरे की जान बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। इसने यह संदेश दिया है कि मुश्किल हालात में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म होती है।