Category: Madhya Pradesh

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महात्मा गांधी को दी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, सत्य और अहिंसा का संदेश याद किया

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महात्मा गांधी को दी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, सत्य और अहिंसा का संदेश याद किया


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और एकता के माध्यम से समाज और मानवता की सेवा का मार्ग दिखाया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महात्मा गांधी के व्यक्तित्व और उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने बताया कि गांधी जी ने अपने सरल जीवन और आदर्शों से लोगों को सामाजिक न्याय, समानता और नैतिकता का महत्व समझाया। उनके संदेश आज भी हर नागरिक के लिए मार्गदर्शक हैं।

    डॉ. यादव ने कहा कि महात्मा गांधी ने हमें यह सिखाया कि परिवर्तन का मार्ग हिंसा से नहीं, बल्कि सत्य और अहिंसा के मार्ग से संभव है। उनके विचार और कृतित्व न केवल स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरणादायक रहे, बल्कि समाज में सामूहिक भलाई और मानवता के मूल्य स्थापित करने में भी मार्गदर्शन करते हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे गांधी जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और उनके सिद्धांतों के अनुसार समाज और राष्ट्र की सेवा करें। उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी का जीवन हमें अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार और जिम्मेदार रहने का संदेश देता है।

    महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री द्वारा दी गई श्रद्धांजलि में उनकी विचारधारा और जीवन दर्शन की महत्ता को प्रमुखता दी गई। डॉ. यादव ने कहा कि गांधी जी की अहिंसा, सत्य और सेवा की भावना आज भी देश में समाजिक और नैतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी के आदर्शों को युवाओं तक पहुंचाने और उन्हें उनके जीवन और संदेशों से प्रेरित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को गांधी जी के विचारों और उनके नैतिक मूल्यों के महत्व से परिचित कराया जाना चाहिए, ताकि वे अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में इन्हें लागू कर सकें।

  • मंत्रालय स्थित पटेल पार्क में 2 फरवरी को राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का आयोजन

    मंत्रालय स्थित पटेल पार्क में 2 फरवरी को राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का आयोजन


    भोपाल ।मध्य प्रदेश के मंत्रालय स्थित वल्लभ भाई पटेल पार्क में 2 फरवरी, 2026 को राष्ट्रगीत वन्देमातरम और राष्ट्रगान “जन-गण-मन” का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम सुबह 10:15 बजे शुरू होगा। यह आयोजन माह के प्रथम कार्य दिवस पर प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी किया जा रहा है।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देश जारी किए हैं। बताया गया है कि 1 फरवरी को शासकीय अवकाश होने के कारण यह कार्यक्रम अगले दिन आयोजित किया जा रहा है, ताकि सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी इसमें भाग ले सकें।

    प्रत्येक माह के प्रथम कार्य दिवस पर मंत्रालय में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का आयोजन परंपरागत रूप से किया जाता है। इसका उद्देश्य न केवल देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करना है, बल्कि सरकारी कार्यस्थलों में एकजुटता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को भी बढ़ावा देना है। अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे समय पर उपस्थित होकर इस कार्यक्रम में भाग लें और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाएं।

    वल्लभ भाई पटेल पार्क में आयोजित होने वाले इस आयोजन में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और अन्य उपस्थित लोग राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के माध्यम से देशभक्ति का संदेश फैलाएंगे। यह कार्यक्रम राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक कर्मचारी की उपस्थिति अनिवार्य होगी और कार्यक्रम का पालन पूरी गंभीरता से किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों से अपेक्षा है कि वे अनुशासन बनाए रखें और राष्ट्रगीत तथा राष्ट्रगान के महत्व को ध्यान में रखते हुए श्रद्धा और सम्मान के साथ इसमें भाग लें।

    इस तरह, मंत्रालय द्वारा आयोजित यह आयोजन देशभक्ति की भावना को प्रबल करने, अधिकारियों और कर्मचारियों में राष्ट्रीय सम्मान और अनुशासन बढ़ाने और राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत के महत्व को युवा अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

  • मंत्रालय में शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन, महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यर्पण

    मंत्रालय में शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन, महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यर्पण


    भोपाल ।  30 जनवरी 2026 को मंत्रालय स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बलिदान दिवस और वीर शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन धारण किया गया। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यर्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने मंत्रालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर सुबह 11 बजे दो मिनट का मौन रखा। इस मौन सभा के माध्यम से देश के उन सभी वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया गया, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की स्वतंत्रता और अखंडता सुनिश्चित की।

    इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री मनु श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव श्री पी. नरहरि सचिव श्री एम. रघुराज, श्री मनीष सिंह सहित मंत्रालय के वल्लभ भवन सतपुड़ा विंध्याचल भवन के अधिकारी-कर्मचारी और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यर्पण किया और उनकी शिक्षाओं तथा अहिंसा और सत्य के मार्ग को याद किया।

    कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल शहीदों की स्मृति को सम्मानित करना था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी उनके बलिदान और देशभक्ति से प्रेरित करना बताया गया। मुख्य सचिव श्री जैन ने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी और अन्य शहीदों के आदर्श आज भी समाज और प्रशासनिक कार्यों में मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि दो मिनट का मौन रखना एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुष्ठान है, जो हमें अपने कर्तव्यों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की याद दिलाता है।

    इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और यह संकल्प लिया कि वे अपने कार्य क्षेत्र में देश की सेवा और नागरिक कल्याण को सर्वोपरि रखेंगे। माल्यर्पण और मौन धारण का यह आयोजन मंत्रालय में शांति और श्रद्धा का वातावरण बनाए रखने में सफल रहा।

    इस प्रकार, 30 जनवरी के अवसर पर मंत्रालय ने महात्मा गांधी और वीर शहीदों को याद कर उनके योगदान को सम्मानित किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने न केवल पुष्प अर्पित किए, बल्कि महात्मा गांधी और शहीदों के आदर्शों को अपने कार्य और जीवन में अपनाने का संकल्प भी लिया।

  • राज्यपाल श्री पटेल ने महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, शहीद दिवस पर रखी दो मिनट की मौन सभा

    राज्यपाल श्री पटेल ने महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, शहीद दिवस पर रखी दो मिनट की मौन सभा


    भोपाल । राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर राज्यपाल ने दो मिनट का मौन रखकर देशभक्त शहीदों को भी याद किया। कार्यक्रम में लोकायुक्त जस्टिस श्री सतेंद्र कुमार सिंह और राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे।

    राज्यपाल ने महात्मा गांधी के चित्र पर फूल अर्पित करते हुए उनके आदर्शों और अहिंसा के मार्ग का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता का जीवन हमें सत्य, अहिंसा और सेवा की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को याद किया, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

    लोकभवन में राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारियों ने भी महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान शांति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। इस अवसर पर उपस्थित सभी ने महात्मा गांधी के जीवन और उनके राष्ट्रहित में किए गए योगदान को याद किया।

    राज्यपाल श्री पटेल ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि महात्मा गांधी ने हमेशा देशवासियों को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उनके आदर्श आज भी समाज और प्रशासनिक कार्यों में मार्गदर्शन का काम करते हैं। राज्यपाल ने कहा कि शहीद दिवस पर दो मिनट का मौन रखने से हम अपने देश के उन सभी वीरों को सम्मानित करते हैं जिन्होंने स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

    लोकायुक्त जस्टिस सतेंद्र कुमार सिंह ने भी महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनका जीवन देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी उपस्थित कर्मचारियों के साथ मिलकर शहीदों और राष्ट्रपिता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

    इस अवसर पर राज्यपाल कार्यालय में उपस्थित सभी कर्मचारियों ने न केवल पुष्पांजलि अर्पित की, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों पर चर्चा भी की और उनके सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। राज्यपाल श्री पटेल ने अंत में कहा कि ऐसे कार्यक्रम हमें हमारे इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों की याद दिलाते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि आने वाली पीढ़ियां भी इन आदर्शों से प्रेरित हों।

  • देवालयों में VIP कल्चर पर उठे सवाल, पुजारी महासंघ ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ‘समान प्रवेश कानून’ की मांग

    देवालयों में VIP कल्चर पर उठे सवाल, पुजारी महासंघ ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ‘समान प्रवेश कानून’ की मांग


    उज्जैन। देश के प्रमुख देवालयों में बढ़ते वीआईपी कल्चर और सुरक्षा के नाम पर पुजारियों व आम श्रद्धालुओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर अब खुलकर विरोध सामने आने लगा है। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने इसे सनातन परंपरा और मंदिरों की मर्यादा के लिए गंभीर संकट बताया है। इसी कड़ी में महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री महाकालेश्वर मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंदिरों में “वीआईपी प्रवेश प्रतिबंधित कानून” बनाने की मांग की है।

    महेश शर्मा ने पत्र में कहा है कि आज देश के कई प्रमुख मंदिरों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इस हद तक बढ़ा दी जाती है कि नित्य पूजा-अर्चना करने वाले पुजारी, पुरोहित और सेवक भी अपने ही गर्भगृह, पूजा कक्ष और आवासीय क्षेत्रों से बाहर कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन के महाकाल मंदिर से लेकर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर तक ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो सनातन परंपराओं के खिलाफ हैं।

    पुजारी महासंघ ने हाल ही में वृंदावन में हुए एक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के दौरे के दौरान पुजारियों, उनके परिवारों और महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। महासंघ का आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर मंदिरों की आंतरिक व्यवस्था को पूरी तरह दरकिनार कर दिया जाता है, जिससे न केवल पूजा पद्धति बाधित होती है, बल्कि पुजारियों के सम्मान को भी ठेस पहुंचती है।

    इस मुद्दे पर महासंघ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी तीखे सवाल किए हैं। पत्र में पूछा गया है कि यदि भविष्य में सत्ता परिवर्तन होता है और कोई अन्य मुख्यमंत्री गोरखनाथ पीठ में दर्शन करने पहुंचे तथा सुरक्षा का हवाला देकर योगी आदित्यनाथ या उनके संतों को मठ से बाहर कर दिया जाए, तो क्या वे इसे स्वीकार करेंगे। महासंघ ने तर्क दिया कि यदि यह स्थिति स्वयं के लिए अनुचित मानी जाती है, तो बांके बिहारी मंदिर में पुजारियों के साथ हुआ व्यवहार भी पूरी तरह गलत है।

    अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि जब तक कोई व्यक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन है, उसे पद के प्रोटोकॉल के साथ मंदिरों में प्रवेश नहीं करना चाहिए। यदि वे दर्शन करना चाहते हैं, तो एक सामान्य श्रद्धालु की तरह कतार में लगकर दर्शन करें। इससे मंदिरों की परंपरा, पूजा पद्धति और आध्यात्मिक वातावरण सुरक्षित रहेगा।

    महासंघ का कहना है कि मंदिर किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव या सत्ता प्रदर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, समानता और श्रद्धा का केंद्र हैं। वीआईपी कल्चर के कारण आम भक्तों में असंतोष बढ़ रहा है और पुजारियों का आत्मसम्मान भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस विषय में हस्तक्षेप कर समान प्रवेश कानून बनाने की अपील की है, ताकि देवालयों की मर्यादा और सनातन परंपरा अक्षुण्ण रह सके।

  • बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों के बैठने का रोस्टर जारी, फरवरी में 20 दिन होगी जनसुनवाई

    बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों के बैठने का रोस्टर जारी, फरवरी में 20 दिन होगी जनसुनवाई


    भोपाल । मध्यप्रदेश में संगठन और सरकार के समन्वय को मजबूत करने की दिशा में भारतीय जनता पार्टी ने एक अहम कदम उठाया है। बीजेपी प्रदेश कार्यालय में फरवरी महीने के लिए मंत्रियों के बैठने का विस्तृत रोस्टर जारी कर दिया गया है। इस रोस्टर के अनुसार, फरवरी माह में कुल 20 कार्यदिवसों पर अलग-अलग मंत्री प्रदेश कार्यालय में मौजूद रहेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं तथा आमजनों की समस्याएं सुनेंगे।

    बीजेपी प्रदेश कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था सोमवार से शुक्रवार तक लागू रहेगी। हर कार्यदिवस दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मंत्रियों की ड्यूटी तय की गई है। खास बात यह है कि इस जनसुनवाई में मंत्रियों के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी और विधायक भी मौजूद रहेंगे, ताकि समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

    पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करना, संगठनात्मक फीडबैक लेना और जनहित से जुड़े मुद्दों को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि इससे न केवल संगठन मजबूत होगा, बल्कि जमीनी स्तर की समस्याओं का भी समय पर निराकरण संभव हो सकेगा।

    जारी रोस्टर के मुताबिक फरवरी के पहले सप्ताह में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह जैसे वरिष्ठ मंत्री प्रदेश कार्यालय में बैठेंगे। वहीं दूसरे सप्ताह में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी जनसुनवाई करेंगे।

    तीसरे सप्ताह में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, कृषि मंत्री ऐदलसिंह कंसाना, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया और खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को जिम्मेदारी दी गई है। चौथे सप्ताह में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, एमएसएमई मंत्री चेतन्य कश्यप और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे।

    पार्टी नेताओं का कहना है कि हर दिन अलग-अलग विभागों से जुड़े मंत्री मौजूद रहने से संबंधित विषयों पर सीधे चर्चा संभव हो पाएगी। इसके साथ ही प्रदेश पदाधिकारी भी मंत्रियों के साथ बैठकर मामलों को नोट करेंगे और आवश्यक फॉलोअप सुनिश्चित करेंगे।

    बीजेपी संगठन की इस पहल को आगामी समय में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल का माध्यम माना जा रहा है। इससे कार्यकर्ताओं में भी यह संदेश जाएगा कि पार्टी नेतृत्व उनकी बात सुनने और समाधान निकालने के लिए गंभीर है। प्रदेश कार्यालय में होने वाली यह नियमित सुनवाई आने वाले दिनों में पार्टी की संगठनात्मक मजबूती को और धार देने का काम करेगी।

  • MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज

    MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज


    इंदौर । मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग MP PSC कार्यालय के सामने आयोजित धरना प्रदर्शन अब प्रदर्शनकारियों के लिए मुश्किल का कारण बन गया है। ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संयोगितागंज थाने में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस प्रकरण में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि अन्य की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, MP PSC कार्यालय के सामने 27 जनवरी तक धरना प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित समय और तय डेसिबल सीमा के भीतर ही किया जाए। इसके बावजूद प्रदर्शन के दौरान बार-बार तेज आवाज में माइक और साउंड सिस्टम का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आईं।

    बताया जा रहा है कि धरना समाप्त होने के बाद जब प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपा जा रहा था, उस समय भी लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके पर ध्वनि स्तर की जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि माइक की आवाज तय डेसिबल सीमा से ज्यादा थी। इससे MP PSC कार्यालय के आसपास के इलाके में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बन गई और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित रखना अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

    इस मामले में पुलिस ने राधे जाट, रंजीत सहित कुल चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। वहीं, कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और ध्वनि मापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयोगितागंज थाना पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को नियमों के पालन की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद लाउडस्पीकर की तेज आवाज का उपयोग किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।

    इस कार्रवाई के बाद शहर में यह संदेश भी गया है कि प्रशासन ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कार्यक्रम या प्रदर्शन के दौरान नियमों का पालन करें, ताकि दूसरों को असुविधा न हो। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज

    MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज


    इंदौर । मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग MP PSC कार्यालय के सामने आयोजित धरना प्रदर्शन अब प्रदर्शनकारियों के लिए मुश्किल का कारण बन गया है। ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संयोगितागंज थाने में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस प्रकरण में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि अन्य की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, MP PSC कार्यालय के सामने 27 जनवरी तक धरना प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित समय और तय डेसिबल सीमा के भीतर ही किया जाए। इसके बावजूद प्रदर्शन के दौरान बार-बार तेज आवाज में माइक और साउंड सिस्टम का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आईं।

    बताया जा रहा है कि धरना समाप्त होने के बाद जब प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपा जा रहा था, उस समय भी लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके पर ध्वनि स्तर की जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि माइक की आवाज तय डेसिबल सीमा से ज्यादा थी। इससे MP PSC कार्यालय के आसपास के इलाके में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बन गई और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित रखना अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

    इस मामले में पुलिस ने राधे जाट, रंजीत सहित कुल चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। वहीं, कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और ध्वनि मापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयोगितागंज थाना पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को नियमों के पालन की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद लाउडस्पीकर की तेज आवाज का उपयोग किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।

    इस कार्रवाई के बाद शहर में यह संदेश भी गया है कि प्रशासन ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कार्यक्रम या प्रदर्शन के दौरान नियमों का पालन करें, ताकि दूसरों को असुविधा न हो। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • कलंकित हुआ शिक्षा का मंदिर: टीकमगढ़ में 58 वर्षीय शिक्षक ने मासूम छात्रा के साथ की दरिंदगी की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार

    कलंकित हुआ शिक्षा का मंदिर: टीकमगढ़ में 58 वर्षीय शिक्षक ने मासूम छात्रा के साथ की दरिंदगी की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार


    टीकमगढ़ । मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से मानवता और गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। जहाँ एक ओर शिक्षक को समाज में ‘गुरु’ का दर्जा देकर भगवान से ऊपर माना जाता है, वहीं पलेरा थाना क्षेत्र के एक शासकीय स्कूल में एक 58 वर्षीय शिक्षक ने इस मर्यादा को तार-तार कर दिया। इस कलयुगी शिक्षक ने स्कूल परिसर के भीतर ही एक छह वर्षीय मासूम छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाने का प्रयास किया, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।

    मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित मासूम रोज की तरह विद्या के मंदिर में शिक्षा ग्रहण करने पहुंची थी। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस शिक्षक की सुरक्षा में वह स्कूल जा रही है, वही उसकी मासूमियत को रौंदने की ताक में बैठा है। आरोपी शिक्षक ने मासूम को बहला-फुसलाकर स्कूल परिसर में ही बन रहे एक निर्माणाधीन कक्ष में ले गया। एकांत का फायदा उठाकर आरोपी ने छात्रा के कपड़े उतारे और उसके साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। इस घिनौनी हरकत से सहमी मासूम जोर-जोर से रोने लगी। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर और पकड़े जाने के डर से आरोपी ने उसे डराया-धमकाया और इस बारे में किसी को न बताने की चेतावनी देकर छोड़ दिया।

    रोती-बिलखती मासूम जब अपने घर पहुंची, तो उसने अपनी दादी को पूरी आपबीती सुनाई। पोती की जुबानी शिक्षक की काली करतूत सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना देर किए परिजन बच्ची को लेकर पलेरा थाने पहुंचे और आरोपी शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की और आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    इस घटना की खबर जैसे ही कस्बे में फैली, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हिंदू संगठनों ने इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों और संगठनों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि दोषी शिक्षक के खिलाफ न केवल कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए, बल्कि उसके घर पर प्रशासन का बुलडोजर चलाकर कड़ी नजीर पेश की जाए।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह कुशवाहा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी को न्यायालय में पेश कर दिया गया है और पुलिस हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। यह घटना समाज के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है कि कैसे शिक्षण संस्थानों में भी बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है।

  • इंदौर में छात्र से मारपीट और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, न्यूड वीडियो बनाने के आरोप में 5 नाबालिगों पर केस

    इंदौर में छात्र से मारपीट और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, न्यूड वीडियो बनाने के आरोप में 5 नाबालिगों पर केस


    इंदौर । शहर के जूनी इंदौर थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक नाबालिग छात्र के साथ मारपीट, अपहरण और ब्लैकमेलिंग किए जाने का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, स्कूल में पढ़ने वाले कुछ नाबालिग लड़कों ने आपसी रंजिश के चलते पीड़ित छात्र को निशाना बनाया और उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पहले छात्र के साथ मारपीट की, इसके बाद जबरन उसे गाड़ी में बैठाकर शहर के खजराना क्षेत्र में स्थित एक कमरे में ले गए। वहां उसे बंद कर दोबारा बेरहमी से पीटा गया। आरोप है कि इसी दौरान पीड़ित के कपड़े उतरवाकर उसका आपत्तिजनक वीडियो बना लिया गया। बाद में आरोपियों ने इस वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर छात्र को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

    पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले की जड़ स्कूल से जुड़ी आपसी रंजिश बताई जा रही है। बताया गया है कि मुख्य आरोपी करण की बहन और पीड़ित छात्र एक ही स्कूल में पढ़ते हैं। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और पांच नाबालिगों ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद आरोपियों ने पीड़ित को धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया या पुलिस में शिकायत की, तो उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा।

    पीड़ित छात्र ने पुलिस को बताया कि घटना के समय उसके पिता की तबीयत गंभीर रूप से खराब थी, जिसके कारण वह डर और मानसिक दबाव में रहा और तत्काल किसी को कुछ नहीं बता सका। इसी दौरान आरोपियों ने हद पार करते हुए वीडियो को पीड़ित के पिता के मोबाइल फोन पर भेज दिया। इसके बाद परिवार को पूरे मामले की जानकारी हुई और वे सीधे थाने पहुंचे।

    परिजनों की शिकायत पर जूनी इंदौर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपहरण, मारपीट, ब्लैकमेलिंग, आईटी एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी पांचों आरोपियों को पकड़ लिया है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी विधि-विवादित बालक नाबालिग हैं, जिनके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं और वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि वीडियो कहां-कहां भेजा गया और कहीं उसे वायरल तो नहीं किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नाबालिगों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।