Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल-इंदौर के रेस्टोरेंट्स में 10 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी, देशभर में 1 दिन के सर्वे में 408 करोड़ की चोरी का खुलासा

    भोपाल-इंदौर के रेस्टोरेंट्स में 10 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी, देशभर में 1 दिन के सर्वे में 408 करोड़ की चोरी का खुलासा


    भोपाल।  आयकर विभाग ने देशभर में रेस्टोरेंट्स के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर सर्वे अभियान चलाकर टैक्स चोरी का खुलासा किया है। इस जांच के दौरान भोपाल के मिलन स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट और इंदौर के नानन सर ढाबा में लगभग 10 करोड़ रुपए की बिक्री छिपाने की गड़बड़ी सामने आई। विभाग का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के मुताबिक, यह सर्वे अभियान 8 मार्च को देशभर में एक साथ किया गया। शुरुआती जांच में करीब 408 करोड़ रुपए की बिक्री छिपाने का मामला सामने आया। जांच में पता चला कि कई रेस्टोरेंट्स बिल डिलीट करने, रिकॉर्ड में बदलाव करने और बिक्री कम दिखाने जैसे तरीके अपनाकर टैक्स चोरी कर रहे थे।

    आयकर विभाग ने नवंबर 2025 में फूड एंड बेवरेज (F&B) सेक्टर में टैक्स चोरी के पैटर्न की जांच शुरू की थी। इसके तहत 1.77 लाख रेस्टोरेंट्स के लेन-देन का एआई आधारित विश्लेषण किया गया और इसे आयकर रिटर्न में घोषित टर्नओवर से मिलाया गया। इस प्रक्रिया में कई रेस्टोरेंट्स ने अपनी आय कम दिखाई और कई जगह बिक्री का पूरा रिकॉर्ड ही रिटर्न या खातों में दर्ज नहीं था।

    अभियान के तहत 22 राज्यों के 46 शहरों में 62 रेस्टोरेंट्स पर सर्वे किया गया। विभाग ने 63 हजार रेस्टोरेंट्स को नोटिस भेजते हुए उन्हें 31 मार्च 2026 तक अपने रिटर्न अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम स्वैच्छिक अनुपालन बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    जांच में यह भी पता चला कि कई रेस्टोरेंट्स “पेट पूजा” जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रोजाना होने वाली बिक्री का डेटा डिलीट कर देते थे, ताकि आय कम दिखाई जा सके। भोपाल के मिलन स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट में भी इसी तरह का सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जा रहा था। आयकर अधिकारियों ने जांच के दौरान इस डेटा को रिकवर किया और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए।

    आयकर विभाग का कहना है कि यह अभियान न सिर्फ बड़े रेस्टोरेंट्स बल्कि पूरे F&B सेक्टर में टैक्स अनुपालन सुधारने के लिए लगातार जारी रहेगा।

  • एमपी में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य, मंत्री ने निगरानी के निर्देश दिए सोशल मीडिया अफवाहों से पैनिक फैलने की आशंका

    एमपी में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य, मंत्री ने निगरानी के निर्देश दिए सोशल मीडिया अफवाहों से पैनिक फैलने की आशंका



    भोपाल। मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर राज्य सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल किसी प्रकार की कमी नहीं है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में इस मसले पर चर्चा के बाद पेट्रोलियम विभाग के मंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की आपूर्ति की लगातार निगरानी की जाए। बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी और घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है।

    मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार राज्य में सोमवार से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर रोक लागू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों के स्टॉक पर्याप्त हैं और प्रदेश में किसी प्रकार का गंभीर असर नहीं होगा।

    भोपाल पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि फिलहाल सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं है और डीलरों के ऑर्डर नियमित रूप से पूरे किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा सकते हैं, जिससे पैनिक की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को सोशल मीडिया पर निगरानी रखनी चाहिए ताकि अफवाहें न फैलें।

    अजय सिंह के अनुसार, मध्यप्रदेश में सालाना लगभग 1200 मीट्रिक लीटर पेट्रोल और 1600 मीट्रिक लीटर डीजल की खपत होती है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल-डीजल को स्टॉक किया जा सकता है, लेकिन घरेलू रसोई गैस के मामले में स्टॉकिंग संभव नहीं है, इसलिए उसकी लगातार आपूर्ति और निगरानी जरूरी है।

    इधर, रसोई गैस डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि आरके गुप्ता ने बताया कि कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई फिलहाल बंद है, लेकिन घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य है। उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम चार बजे भोपाल जिला प्रशासन की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें स्थिति की समीक्षा कर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।

    राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि किसी भी अफवाह या पैनिक की स्थिति से बचने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की निगरानी लगातार की जा रही है और आम जनता को भरोसा दिया गया है कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कमी का कोई सवाल नहीं है।

  • जबलपुर हाईकोर्ट में भ्रूण लेकर घुसने पर सुरक्षा फेल: 4 पुलिसकर्मी निलंबित, एसपी ने की कड़ी कार्रवाई

    जबलपुर हाईकोर्ट में भ्रूण लेकर घुसने पर सुरक्षा फेल: 4 पुलिसकर्मी निलंबित, एसपी ने की कड़ी कार्रवाई


    जबलपुर। हाईकोर्ट परिसर की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था उस वक्त तार-तार हो गई, जब एक व्यक्ति अपने बैग में ‘भ्रूण’ लेकर गेट नंबर 6 से भीतर दाखिल हो गया। सोमवार को हुई इस सनसनीखेज घटना के बाद मंगलवार को जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय ने कड़ी कार्रवाई की है। ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में एक एएसआई (ASI) और तीन अन्य पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

    लापरवाही पर गाज: ये पुलिसकर्मी हुए निलंबित
    एसपी संपत उपाध्याय ने सुरक्षा ड्यूटी में तैनात निम्नलिखित पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया है:

    ASI मुन्ना अहिरवार

    हेड कांस्टेबल ब्रह्मदत्त खत्री

    हेड कांस्टेबल अरुण उपाध्याय

    कांस्टेबल प्रतीक सोनकर

    घटनाक्रम: गेट नंबर 6 से बैग लेकर घुसा याचिकाकर्ता
    रीवा जिले के बैकुंठपुर का रहने वाला दयाशंकर पांडे सोमवार को अपने केस की पैरवी करने खुद हाईकोर्ट पहुंचा था। वह गेट नंबर 6 से अंदर दाखिल हुआ, जहां सघन चेकिंग का दावा किया जाता है। दयाशंकर के बैग में कानूनी दस्तावेजों के साथ एक भ्रूण रखा हुआ था। जैसे ही परिसर के भीतर इस बात का खुलासा हुआ, वहां हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस ने उसे हिरासत में लिया।

    वजह: ‘पुलिस निष्क्रियता’ के खिलाफ अनोखा विरोध या मजबूरी?
    दयाशंकर पांडे ने अपनी इस हरकत के पीछे रीवा पुलिस की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया है दयाशंकर के अनुसार, 2024 में निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद से उस पर और उसके परिवार पर लगातार हमले हो रहे हैं।उसने बताया कि 1 मार्च को एक बिना नंबर की कार ने उसकी बाइक को टक्कर मारी थी, जिसमें उसकी गर्भवती पत्नी घायल हो गई। इस हादसे के कारण 8 मार्च को उसकी पत्नी का गर्भपात (मिसकैरेज) हो गया। दयाशंकर का आरोप है कि रीवा पुलिस ने शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे तंग आकर वह सबूत के तौर पर भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया।

    हाईकोर्ट जैसी संवेदनशील जगह पर बिना चेकिंग के किसी वस्तु का बैग में लेकर पहुंच जाना सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है। हालांकि, दयाशंकर की पीड़ा पुलिसिया तंत्र की विफलता की ओर इशारा करती है, लेकिन इस तरह का कृत्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का बड़ा उल्लंघन है।

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  • उज्जैन: चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर को फंसाने की 'खूनी' साजिश साध्वी मंदाकिनी और साथी पर FIR, बनारस की महिला ने खोली पोल

    उज्जैन: चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर को फंसाने की 'खूनी' साजिश साध्वी मंदाकिनी और साथी पर FIR, बनारस की महिला ने खोली पोल



    उज्जैन। उज्जैन के प्रसिद्ध चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज के खिलाफ रची गई एक खौफनाक साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस साजिश की सूत्रधार कोई और नहीं, बल्कि अखाड़े से निष्कासित साध्वी मंदाकिनी पुरी और उसका साथी घनश्याम पटेल हैं। आरोपियों ने महाराज को ‘हनीट्रैप’ में फंसाकर करोड़ों की वसूली और मंदिर पर कब्जे का प्लान बनाया था, जिसके लिए बाकायदा बनारस से एक महिला को ‘हायर’ किया गया था।

    साजिश: 50 हजार का लालच और ‘अश्लील वीडियो’ का डर
    महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल के अनुसार, साजिश को अंजाम देने के लिए घनश्याम पटेल ने बनारस की एक महिला को 50 हजार रुपये का लालच दिया।महिला को महामंडलेश्वर पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाने के लिए उज्जैन बुलाया गया।जब महिला ने मना किया, तो घनश्याम ने उसके अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी और जबरन उसे उज्जैन आने के लिए बस का टिकट भेजा।

    खुलासा: रंगपंचमी के दिन दत्त अखाड़ा परिसर में जब घनश्याम महिला का ‘झूठा बयान’ रिकॉर्ड कर रहा था, तभी संतों ने उन्हें पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

    महामंडलेश्वर का पक्ष: “मंदिर पर कब्जे की है लड़ाई”
    महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने इसे अपनी छवि खराब करने और चारधाम मंदिर पर कब्जा करने की सोची-समझी साजिश बताया है। वहीं, एक अन्य महामंडलेश्वर नर्मदाशंकर ने भी मंदाकिनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उसने ‘आचार्य महामंडलेश्वर’ बनाने के नाम पर उनसे 8 लाख 90 हजार रुपये की ठगी की है।

    मंदाकिनी पुरी: रसोइए से ‘महामंडलेश्वर’ और फिर जेल तक का सफर
    जांच में साध्वी मंदाकिनी का एक काला अतीत सामने आया है:

    झूठ की बुनियाद: कभी संतों के लिए खाना बनाने वाली ममता जोशी (मंदाकिनी) ने खुद को अविवाहित और करोड़ों की संपत्ति का मालिक बताकर 2016 के सिंहस्थ में महामंडलेश्वर की पदवी हासिल की थी।

    आपराधिक रिकॉर्ड: धोखाधड़ी और उगाही के आरोपों के बाद अखाड़े ने उसे निष्कासित कर दिया था। उस पर जयपुर के एक व्यापारी से हर्बल प्रोडक्ट के नाम पर लाखों की ठगी का भी आरोप है।

    सुसाइड ड्रामा: पदवी छिनने के बाद उसने कीटनाशक पीकर जान देने की कोशिश भी की थी, ताकि सहानुभूति बटोर सके।

    अखाड़ा परिषद का रुख: “संतों को बदनाम करने का ट्रेंड”
    अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने इस घटना पर कड़ा रोष जताया है। उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ को देखते हुए संतों की आस्था पर चोट पहुँचाने के लिए ऐसे गिरोह सक्रिय हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर पुलिस इस पूरे नेटवर्क को चिह्नित कर रही है।

    निष्कर्ष
    “यह मामला केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि धर्म की आड़ में चल रहे ‘कॉरपोरेट स्टाइल’ अपराध का उदाहरण है। जहाँ एक तरफ संतों की गरिमा दांव पर थी, वहीं पुलिस और सतर्क साधुओं ने समय रहते इस ‘हनीट्रैप’ का भंडाफोड़ कर एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया।”

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  • भोपाल में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष राहटकर करेंगी महिलाओं की जनसुनवाई

    भोपाल में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष राहटकर करेंगी महिलाओं की जनसुनवाई


    भोपाल। महिलाओं से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग सक्रिय हो गया है। इसके तहत आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया राहटकर 11 मार्च 2026 को भोपाल में महिलाओं के साथ जनसुनवाई करेंगी। यह जनसुनवाई दोपहर 1.30 बजे शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई महाविद्यालय पॉलिटेक्निक चौराहा भोपाल में आयोजित की जाएगी।

    इस मौके पर महिलाएं सीधे राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष के समक्ष अपनी समस्याओं और शिकायतों को रख सकेंगी। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं के मामलों का शीघ्र और प्रभावी समाधान हो सके। जिन मुद्दों को सामने रखा जाएगा उनकी जांच और समाधान की कार्रवाई तुरंत शुरू की जाएगी।

    श्रीमती राहटकर ने कहा है कि यह जनसुनवाई महिलाओं के लिए अपने अधिकारों और समस्याओं को सीधे सुनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसमें घरेलू हिंसा उत्पीड़न नौकरी या शिक्षा से जुड़ी समस्याएँ सुरक्षा और समाज में महिला सम्मान से संबंधित मामले शामिल हो सकते हैं।

    आयोग के अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे और महिलाओं की शिकायतों को दर्ज करेंगे। आयोग का प्रयास रहेगा कि प्रत्येक शिकायत को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए और उसकी त्वरित कार्रवाई की जाए।

    इस जनसुनवाई का आयोजन महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनकी समस्याओं को सीधे शासन और आयोग तक पहुँचाने के लिए किया गया है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    स्थानीय मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस जनसुनवाई में शामिल होंगे ताकि इसे व्यापक जनजागरूकता के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती राहटकर का मानना है कि महिलाओं की समस्याओं का समाधान केवल सरकारी प्रयास से ही नहीं बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।

    जनसुनवाई में उपस्थित महिलाएं सीधे अपने मुद्दे प्रस्तुत कर सकती हैं और आयोग अधिकारियों से मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकती हैं। इससे न केवल तत्काल समस्या का समाधान होगा बल्कि महिलाओं में अपने अधिकारों को समझने और उनका प्रयोग करने की क्षमता भी बढ़ेगी।

    इस तरह की पहल महिलाओं के लिए अपने जीवन और समाज में सम्मानजनक स्थान बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। भोपाल में होने वाली यह जनसुनवाई महिलाओं को अपने मुद्दों को सामने रखने और राष्ट्रीय महिला आयोग से सहायता प्राप्त करने का अवसर देगी।

  • मंत्री परमार ने चित्रकूट के पंचवटी घाट पर किया श्रमदान, मां मंदाकिनी नदी को स्वच्छ रखने का संदेश दिया

    मंत्री परमार ने चित्रकूट के पंचवटी घाट पर किया श्रमदान, मां मंदाकिनी नदी को स्वच्छ रखने का संदेश दिया


    भोपाल । चित्रकूट की पवित्र घाटियों में सोमवार को एक जीवंत दृश्य देखने को मिला जब उच्च शिक्षा तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने पंचवटी घाट पर माँ मंदाकिनी नदी के स्वच्छता अभियान में स्वयं हाथ बंटाया। मंत्री ने घाट परिसर में सफाई करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक अधिकारियों को स्वच्छता के महत्व की याद दिलाई और जनभागीदारी की प्रेरणा दी।

    मंत्री परमार ने कहा कि चित्रकूट धार्मिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ बहने वाली माँ मंदाकिनी नदी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसकी स्वच्छता बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि जनभागीदारी से ही सफल होने वाला एक जनआंदोलन है।

    घाट परिसर में पहुंचे सभी लोगों के साथ मिलकर मंत्री ने कचरा एकत्रित किया आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित किया और लोगों से आग्रह किया कि वे नदी में कोई कचरा न डालें। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय समुदाय प्रशासन और आगंतुकों का सहयोग ही स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक पर्यावरण सुनिश्चित कर सकता है।

    इस अवसर पर जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर माँ मंदाकिनी की स्वच्छता के लिए श्रमदान किया और इस पहल का उत्साहजनक समर्थन किया। मंत्री परमार ने आशा जताई कि इस प्रकार के अभियान स्थानीय लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी को बढ़ाएंगे।

    मंत्री ने यह भी कहा कि स्वच्छता के लिए छोटे छोटे प्रयास भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। नदी और घाट का पर्यावरण केवल प्रशासनिक कर्मियों का कार्यक्षेत्र नहीं बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखें और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाएं।

    इस मौके पर उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि इस तरह के अभियान धार्मिक स्थलों की साफ सफाई के साथ साथ स्थानीय पर्यटन और स्वास्थ्य के लिए भी बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि पंचवटी घाट जैसे धार्मिक स्थल स्वच्छ रहेंगे तो वहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का अनुभव भी सकारात्मक होगा।

    घाट पर श्रमदान करते हुए मंत्री परमार ने यह संदेश भी दिया कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का काम केवल सरकार के हाथ में नहीं छोड़ना चाहिए। हर नागरिक की भागीदारी से ही माँ मंदाकिनी और अन्य नदियों का जल स्वच्छ और सुरक्षित रहेगा। यह कदम चित्रकूट के धार्मिक और सामाजिक जीवन में स्वच्छता के प्रति नई चेतना का प्रतीक बन गया है।

  • ग्वालियर में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव: गिरवाई में पुलिस और भीड़ आमने-सामने, हालात काबू करने के लिए किया गया बल प्रयोग

    ग्वालियर में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव: गिरवाई में पुलिस और भीड़ आमने-सामने, हालात काबू करने के लिए किया गया बल प्रयोग




    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior में अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम पर भीड़ ने पथराव कर दिया, जिसके बाद स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। घटना शहर के Girwai इलाके की बताई जा रही है। विवाद बढ़ने पर पुलिस को हालात नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के मुताबिक तहसीलदार न्यायालय द्वारा एक जमीन पर बेदखली का आदेश जारी किया गया था। इसी आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची थी। प्रशासन की टीम का उद्देश्य जमीन से अतिक्रमण हटाकर उसे खाली कराना था।

    बताया जा रहा है कि उस जमीन पर कुछ लोग लंबे समय से मकान बनाकर रह रहे थे। जैसे ही प्रशासन की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, वहां मौजूद लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह विरोध उग्र हो गया और मौके पर मौजूद भीड़ ने पुलिस और प्रशासनिक अमले पर पथराव शुरू कर दिया।

    पथराव के बाद स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। वायरल वीडियो में पुलिस और भीड़ के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट जैसी स्थिति भी दिखाई दे रही है। कुछ वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा लाठीचार्ज करते हुए भी देखा जा सकता है, जिसमें महिलाओं के साथ भी सख्ती बरतने के आरोप सामने आए हैं।

    घटना के दौरान इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हालात पर काबू पा लिया। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और पथराव करने वालों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

    प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेश का पालन कराने के लिए ही यह कार्रवाई की जा रही थी। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय दिए बिना अचानक कार्रवाई की गई, जिसके कारण विवाद की स्थिति बनी।

    फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि दोबारा किसी तरह की अशांति न फैले।

    Keywords: ग्वालियर गिरवाई पथराव, अतिक्रमण हटाने कार्रवाई, ग्वालियर पुलिस लाठीचार्ज, गिरवाई जमीन विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई ग्वालियर, पथराव वीडियो वायरल, पुलिस भीड़ झड़प, मध्यप्रदेश कानून व्यवस्था.

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के टूरिज्म सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों लोगों ने फिलहाल अपने ट्रैवल प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की संभावना थी, लेकिन मौजूदा हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी या नई बुकिंग ही नहीं कराई।

    ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म MakeMyTrip की भोपाल लोकेशन हेड Richa Singh Bhadauria के मुताबिक लगभग 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले से फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जो सीधे प्रभावित हुए हैं। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने अनिश्चित हालात को देखते हुए अपनी यात्रा योजनाएं टाल दी हैं। हालांकि फिलहाल इंटरनेशनल ट्रैवल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन पर्यटन कारोबार में साफ तौर पर सुस्ती देखी जा रही है।

    60 करोड़ का संभावित कारोबार अटका
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपए प्रति व्यक्ति का होता है। यदि 60 हजार रुपए का औसत और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपए का संभावित ट्रैवल कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि सभी मामलों में पूरी राशि का नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड या क्रेडिट शेल का विकल्प दे रही हैं।

    60–70% यात्रियों को मिला पूरा रिफंड
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार प्रभावित बुकिंग्स में से लगभग 60 से 70 प्रतिशत यात्रियों को पूरा रिफंड मिल गया है। ऐसा उन मामलों में हुआ जहां एयरलाइंस ने खुद फ्लाइट रद्द की या शेड्यूल बदला। वहीं करीब 15 से 25 प्रतिशत यात्रियों को आंशिक नुकसान हुआ है, जो मुख्य रूप से वीजा फीस, होटल कैंसिलेशन पॉलिसी या नॉन-रिफंडेबल बुकिंग के कारण हुआ। कई यात्रियों ने रिफंड लेने के बजाय भविष्य के लिए ट्रैवल क्रेडिट या क्रेडिट शेल का विकल्प चुना है।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा कैंसिलेशन
    ट्रैवल ट्रेड के अनुभव के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी कुछ प्रभाव देखा गया है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं बल्कि धीमी पड़ गई हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी 30–40% गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री अपनी यात्रा पूरी तरह रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा प्रभावित
    मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा असर लीजर ट्रैवल सेगमेंट पर पड़ा है, जिसमें फैमिली हॉलीडे, हनीमून ट्रिप और ग्रुप टूर शामिल हैं। इसके मुकाबले कॉर्पोरेट ट्रैवल अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है, क्योंकि बिजनेस मीटिंग और काम से जुड़े यात्राओं को पूरी तरह टालना कई बार संभव नहीं होता।

    एयरलाइंस दे रही लचीले विकल्प
    मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई एयरलाइंस यात्रियों को राहत देने की कोशिश कर रही हैं। कुछ कंपनियां क्रेडिट शेल की वैधता बढ़ा रही हैं, जबकि कई एयरलाइंस बिना अतिरिक्त शुल्क के भविष्य की तारीख पर रीबुकिंग की सुविधा दे रही हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री का फोकस फिलहाल यात्रियों का भरोसा बनाए रखने और सुरक्षित समय पर यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने पर है।

    तनाव लंबा चला तो बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का मानना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है, क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है, तो इंटरनेशनल टूरिज्म में गिरावट और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों की मांग फिर तेजी से वापस लौट सकती है।

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  • मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार, 4865 युवाओं को गांवों में मिलेगी जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार, 4865 युवाओं को गांवों में मिलेगी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री Mohan Yadav की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री Chaitanya Kashyap ने बताया कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि स्वामित्व को मजबूत करने और योजनाओं की निगरानी बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठा रही है।

    46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च सरकार देगी
    कैबिनेट ने फैसला लिया है कि SVAMITVA Yojana के तहत प्रदेश के करीब 46 लाख ग्रामीण नागरिकों की संपत्ति रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क राज्य सरकार खुद वहन करेगी। इस निर्णय से सरकार पर करीब 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।

    इस योजना की शुरुआत Ministry of Panchayati Raj ने वर्ष 2020 में की थी। इसके तहत ड्रोन तकनीक से गांवों की आबादी वाली जमीन का सीमांकन कर प्रॉपर्टी कार्ड दिए जाते हैं। इससे ग्रामीणों को कानूनी स्वामित्व मिलता है, भूमि विवाद कम होते हैं और बैंक से लोन लेने में भी आसानी होती है।

    योजनाओं का फीडबैक लेने नया कार्यक्रम
    कैबिनेट ने योजनाओं की जमीनी स्थिति जानने के लिए “सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम” शुरू करने का भी निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा।

    इसके तहत प्रदेश के हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन किया जाएगा और कुल 4865 युवाओं को गांवों में तैनात किया जाएगा। चयन प्रक्रिया Atal Bihari Vajpayee School of Good Governance and Policy Analysis के माध्यम से होगी।

    युवाओं को मिलेगा मानदेय
    चयनित युवाओं को 10 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा और उन्हें एक साल के अनुबंध पर रखा जाएगा। इस पूरी योजना पर तीन साल में लगभग 170 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने-अपने विकासखंड में चल रही सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का अध्ययन और फीडबैक रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन स्कूल के जरिए मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इसके लिए विशेष डैशबोर्ड और डिजिटल पोर्टल भी बनाया जाएगा।

    2031 तक जारी रहेंगी कई योजनाएं
    कैबिनेट ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य और महिला-बाल विकास सहित सात विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए 33,240 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

    इनमें महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग की योजनाएं, छात्रवृत्ति कार्यक्रम, आरडीएसएस योजना, दिव्यांगजनों के लिए प्रोफेशनल टैक्स में छूट और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।

    स्वास्थ्य केंद्रों में होगी भर्ती
    कैबिनेट ने मैहर, निमरानी और कैमोर में पीएफआईसी के तहत अस्पतालों के लिए स्टाफ भर्ती को मंजूरी दी है। श्रम विभाग के माध्यम से डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों सहित 51 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। साथ ही चितरंगी में व्यवहार न्यायाधीश के पद को भी मंजूरी दी गई है।

    ‘एक जिला-एक उत्पाद’ को बढ़ावा
    राज्य सरकार ने One District One Product योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए 37.50 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की है। इस योजना में एमएसएमई, उद्योग और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग मिलकर काम करेंगे।

    कैबिनेट बैठक में इन मुद्दों पर भी चर्चा
    बैठक से पहले कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। सरकार ने गेहूं की खरीदी के लिए MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल पर 40 रुपये बोनस जोड़कर 2625 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद का फैसला किया। वहीं उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय भी लिया गया।

    इसके अलावा मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल Pachmarhi को जर्मनी द्वारा “ग्रीन डेस्टिनेशन” प्रमाणन मिलने को प्रदेश के पर्यटन के लिए बड़ी उपलब्धि बताया गया।

  • सास बहू से देवरानी जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से चमक रहा छिंदवाड़ा का ग्रामीण पर्यटन

    सास बहू से देवरानी जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से चमक रहा छिंदवाड़ा का ग्रामीण पर्यटन


    छिंदवाड़ा । छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्राम धीरे धीरे एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। सास बहू मां बेटी या देवरानी जेठानी जैसे रिश्ते अब केवल पारिवारिक संबंध नहीं बल्कि ग्रामीण पर्यटन की नई ताकत बन गए हैं। ग्राम धूसावानी में श्रीमती मनेशी धुर्वे और उनकी सास श्रीमती अलका धुर्वे इस बदलाव की मिसाल हैं। दोनों मिलकर अपने होम स्टे में पर्यटकों का स्वागत करती हैं भोजन तैयार करती हैं और पूरे उत्साह के साथ मेहमाननवाजी करती हैं।

    सावरवानी गांव में भी श्रीमती मालती यदुवंशी अपनी सास श्रीमती शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम स्टे का संचालन कर रही हैं। यह केवल दो परिवारों की कहानी नहीं बल्कि पूरे जिले में ग्रामीण पर्यटन में महिलाओं की भागीदारी की एक जीवंत तस्वीर है। इन होम स्टे से महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता तो मिल रही है साथ ही रिश्तों में विश्वास और सहयोग का नया आयाम भी देखने को मिल रहा है।

    छिंदवाड़ा जिला अब मध्यप्रदेश के उन जिलों में शामिल है जहाँ सबसे अधिक होम स्टे संचालित हैं। जिले में लगभग 50 से अधिक होम स्टे हैं और इन सबका पंजीकरण महिलाओं के नाम पर है। संचालन की ज़िम्मेदारी भी अधिकांशतः महिलाएं ही संभालती हैं। सावरवानी चोपना काजरा देवगढ़ चिमटीपुर गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में महिलाएं स्थानीय संस्कृति खानपान और आतिथ्य के हर पहलू को संभाल रही हैं।

    पर्यटक इन होम स्टे में आने पर केवल ठहरने नहीं आते बल्कि ग्रामीण जीवन और संस्कृति के करीब से अनुभव करते हैं। महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक व्यंजन तैयार करती हैं लोकनृत्य और लोकगायन से उन्हें क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती हैं। इससे पर्यटकों को ग्रामीण अनुभव मिलता है और महिलाओं को आर्थिक सम्मान भी प्राप्त होता है।

    सास बहू मां बेटी देवरानी जेठानी जैसे रिश्तों की यह साझेदारी ग्रामीण पर्यटन के लिए नई पहचान बन गई है। महिलाएं स्वागत से लेकर भोजन आवास और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रबंधन तक पूरी जिम्मेदारी लेती हैं। यह पहल साबित कर रही है कि परिवार की महिलाएं मिलकर केवल घर ही नहीं बल्कि पूरे गांव की विकास यात्रा को आगे बढ़ा सकती हैं।

    स्थानीय लोग मानते हैं कि होम स्टे की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों का और विस्तार होने की संभावनाएं भी उज्ज्वल दिखाई दे रही हैं। छिंदवाड़ा का यह ग्रामीण पर्यटन मॉडल यह दिखाता है कि रिश्तों का सहयोग और विश्वास नई आर्थिक और सामाजिक दिशा में कैसे बदल सकता है।