Category: Madhya Pradesh

  • एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस धर्माधिकारी बने मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, 24 साल की प्रैक्टिस के बाद मिला बड़ा पद

    एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस धर्माधिकारी बने मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, 24 साल की प्रैक्टिस के बाद मिला बड़ा पद


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश न्यायिक जगत के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। Sushrut Arvind Dharmadhikari को Madras High Court का नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र के Ministry of Law and Justice (India) ने गुरुवार को उनकी नियुक्ति का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इस नियुक्ति के साथ ही वे Madhya Pradesh High Court से अन्य राज्यों में चीफ जस्टिस बनने वाले 17वें न्यायाधीश बन गए हैं।

    8 जुलाई 1966 को Raipur में जन्मे जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी ने वर्ष 1992 में अपने विधिक करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने करीब 24 वर्षों तक मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में वकालत की और इस दौरान सिविल, क्रिमिनल और संवैधानिक मामलों में सक्रिय रूप से पैरवी की। उनके लंबे अनुभव और कानूनी समझ के कारण उन्हें न्यायिक क्षेत्र में विशेष पहचान मिली।

    वकालत के दौरान उन्होंने 2000 से 2015 तक केंद्र सरकार के लिए स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में भी काम किया।

    इस दौरान उन्होंने Income Tax Department, Reserve Bank of India और Central Excise Department सहित कई सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का प्रतिनिधित्व किया।

    बाद में उन्हें 7 अप्रैल 2016 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद 17 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में पुष्टि मिली। न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और न्यायिक व्यवस्था में अहम योगदान दिया।

    चीफ जस्टिस बनने से पहले उनका तबादला 23 अप्रैल 2025 को Kerala High Court में किया गया था।

    यह स्थानांतरण संविधान के अनुच्छेद 222 के तहत किया गया था, जिसकी मंजूरी भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति ने दी थी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 20 मार्च, 24 मार्च और 3 अप्रैल 2025 को हुई बैठकों में उनके स्थानांतरण की सिफारिश की थी।

    केरल हाईकोर्ट में कार्यरत रहते हुए जस्टिस धर्माधिकारी हाल ही में चर्चित फिल्म The Kerala Story 2: Goes Beyond से जुड़े मामले की सुनवाई में भी शामिल रहे। इस मामले में एकल न्यायाधीश द्वारा फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों की अस्थायी रोक लगाए जाने के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी।

    जस्टिस धर्माधिकारी और P. V. Balakrishnan की खंडपीठ ने इस अपील पर लगभग दो घंटे तक सुनवाई करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    बताया जा रहा है कि जस्टिस धर्माधिकारी की नियुक्ति Manindra Mohan Shrivastava के सेवानिवृत्त होने के दिन 5 मार्च को प्रभावी हुई है। उनकी नियुक्ति को न्यायिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है और इससे मध्यप्रदेश न्यायिक व्यवस्था की प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।

  • तिरंगे के अपमान का आरोप: मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को कोर्ट का नोटिस, पूछा-क्यों न दर्ज हो एफआईआर?

    तिरंगे के अपमान का आरोप: मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को कोर्ट का नोटिस, पूछा-क्यों न दर्ज हो एफआईआर?


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब Rao Uday Pratap Singh के खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान के मामले में अदालत ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जबलपुर स्थित सांसद-विधायक मामलों की विशेष अदालत ने परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए। अदालत ने उन्हें 7 अप्रैल 2026 को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
    यह मामला मध्यप्रदेश के Narsinghpur जिले के गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट द्वारा दायर परिवाद पर आधारित है। परिवादी के अनुसार 11 अगस्त 2024 को Gadarwara में आयोजित एक ‘तिरंगा यात्रा’ के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अनादर किया गया। आरोप है कि इस यात्रा का नेतृत्व मंत्री राव उदय प्रताप सिंह कर रहे थे और वह एक खुली जीप के बोनट पर खड़े होकर लोगों को संबोधित कर रहे थे।

    परिवाद में कहा गया है कि इस दौरान जीप के बोनट पर तिरंगा ध्वज इस तरह लगाया गया था कि वह झुक गया था और पास खड़े व्यक्ति के पैर से भी स्पर्श हो रहा था।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज को वाहन के बोनट, छत या किसी अन्य हिस्से पर इस प्रकार लगाना और उसे पैरों के संपर्क में आने देना राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा के खिलाफ है।

    इस मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश डी.पी. सूत्रकार ने प्रारंभिक साक्ष्यों को देखते हुए मंत्री को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या इस मामले में राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत अपराध दर्ज किया जाना चाहिए। इस कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को गंभीर अपराध माना गया है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

    परिवादी कौशल सिलावट का कहना है कि उन्होंने इस घटना की शिकायत पहले स्थानीय पुलिस से की थी। उन्होंने Gadarwara Police Station में जाकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने कई बार Narsinghpur के पुलिस अधीक्षक को भी लिखित शिकायत भेजी, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने पंजीकृत डाक के माध्यम से थाना प्रभारी को शिकायत भेजी तो उसे स्वीकार करने से भी इंकार कर दिया गया। उन्होंने अदालत में यह भी तर्क दिया कि यह पुलिस के वैधानिक कर्तव्यों के विपरीत है।

    परिवादी ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले Lalita Kumari vs Government of Uttar Pradesh (2014) का हवाला भी दिया। इस फैसले में स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलती है तो पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होता है।

    अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों में घटना की तस्वीरें, मीडिया रिपोर्ट, डाक ट्रैकिंग रिपोर्ट और विभिन्न अधिकारियों को भेजी गई शिकायतों की प्रतियां भी शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों को देखते हुए विशेष अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया है।
    अब इस मामले में 7 अप्रैल को अदालत में सुनवाई होगी, जहां मंत्री को अपना पक्ष रखना होगा। अदालत के इस कदम के बाद प्रदेश की राजनीति में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।

  • कृषक कल्याण वर्ष पर सियासी घमासान, जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर हमला, बोले- सीएम पहलवान, लेकिन अफसरों के दांव में चित; 60% पद खाली, किसान बेहाल

    कृषक कल्याण वर्ष पर सियासी घमासान, जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर हमला, बोले- सीएम पहलवान, लेकिन अफसरों के दांव में चित; 60% पद खाली, किसान बेहाल


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में किसानों के मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है। Jitu Patwari ने प्रदेश सरकार के “कृषक कल्याण वर्ष” पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav पर तीखा हमला बोला। भोपाल स्थित Madhya Pradesh Congress Committee कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कहा कि सरकार एक तरफ किसानों के कल्याण की बात कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उनके साथ इस दौरान Mukesh Nayak, Abhay Dubey और Sukhdev Panse भी मौजूद थे।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि शुरुआती दिनों में डॉ. मोहन यादव पहलवानी करते थे और Ujjain में उन्हें पहलवान के नाम से जाना जाता था। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि जब कोई अधिकारी उनके सामने “पहलवानी का दांव” चलता है तो मुख्यमंत्री खुद ही चित हो जाते हैं। पटवारी ने कहा कि यह स्थिति एक-दो बार नहीं बल्कि लगभग हर महीने देखने को मिलती है, जिससे सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने किसानों को लेकर भाजपा की चुनावी गारंटियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय किसानों से वादा किया गया था कि गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल, धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन 6000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से खरीदी जाएगी। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि Ujjain Mandi में गेहूं का भाव करीब 1800 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। पटवारी ने कहा कि यह स्थिति मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र की मंडी की है, जिससे साफ है कि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

    पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले को लेकर वीडियो भी जारी किया था, जिसमें मंडी में किसानों को कम दाम पर गेहूं बेचते देखा जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ किसानों के हित की बात करती है, लेकिन बाजार में किसानों को उनकी उपज का सही दाम तक नहीं मिल पा रहा है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे पिछले 20 साल की नहीं बल्कि केवल पिछले एक साल की उपलब्धियों का हिसाब प्रदेश की जनता के सामने रखें। पटवारी के अनुसार अगर सरकार वास्तव में किसानों के हित में काम कर रही है तो उसे अपने कामकाज का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कृषि तंत्र की स्थिति को भी चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि से जुड़े विभागों में भारी संख्या में पद खाली पड़े हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कृषि विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद रिक्त हैं, यानी लगभग 60 प्रतिशत पद खाली हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन विभाग में 1,290 में से 722 पद खाली हैं, जबकि उद्यानिकी विभाग में 3,079 में से 1,459 पद रिक्त पड़े हैं। पशुपालन और डेयरी विभाग में भी बड़ी संख्या में पद खाली होने से किसानों से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं।

    पटवारी ने कहा कि जब कृषि से जुड़े विभागों में इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी ही नहीं हैं तो सरकार किसानों के कल्याण की बात किस आधार पर कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द इन रिक्त पदों को भरे और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि प्रदेश के किसान आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें।

  • ग्वालियर: PM आवास की पानी टंकी में मरी छिपकलियां, 1300 परिवारों में दहशत

    ग्वालियर: PM आवास की पानी टंकी में मरी छिपकलियां, 1300 परिवारों में दहशत


    ग्वालियर । ग्वालियर के मानपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने फ्लैटों की पानी टंकी में मरी हुई पांच छिपकलियां मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। इस टंकी से लगभग 1300 फ्लैटों में रहने वाले 5 हजार लोगों को पानी की आपूर्ति होती है।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि फेस वन के ब्लॉक ई 52 की टंकी में पानी की क्वॉलिटी पर पहले से ही शक था। पानी में गंदगी और बदबू महसूस होने के बाद कुछ लोगों ने टंकी की जांच की। ढक्कन खोलने पर टंकी में मरी हुई छिपकलियां पाई गईं। रहवासियों ने इन्हें बाहर निकाला और पूरे घटना का वीडियो भी बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    कॉलोनी निवासी अनिक राभास नीलकमल मुदगल ने बताया कि टंकी में मरी छिपकलियों को उन्होंने बाहर निकाला और घटना का वीडियो भी बनाया। उनका कहना है कि कॉलोनी में सफाई और रखरखाव की स्थिति बहुत खराब है। नगर निगम की ओर से पर्याप्त सफाई कर्मी नहीं हैं और महीनों से कचरा नहीं उठाया गया।

    रहवासी राजेंद्र शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अच्छे घर बने हैं, लेकिन नगर निगम की लापरवाही के कारण उनका सही उपयोग नहीं हो पा रहा। विकास तोमर ने बताया कि पिछले महीने नगर निगम और कलेक्टर को शिकायत देने के बाद सिर्फ दो टंकियों की सफाई हुई, जबकि 45 से अधिक टैंक अभी भी गंदे पड़े हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश घरों में आरओ या फिल्टर सिस्टम नहीं है और सीधे टंकी का पानी पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल हो रहा है। इस घटना के बाद कई परिवारों ने टंकी का पानी पीना बंद कर दिया और बाहर से आरओ या कैन का पानी मंगाने लगे हैं।

    फ्लैटों में रहने वालों का आरोप है कि पिछले दो साल से पानी टंकी की नियमित सफाई नहीं हुई। ढक्कन भी ठीक से बंद नहीं है, जिससे कीड़े मकोड़े या अन्य जीव अंदर गिर सकते हैं। कॉलोनी के प्रतिनिधियों ने नगर निगम अधिकारियों से मुलाकात कर समस्या बताई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम आयुक्त संघ प्रिया ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि इंदौर में हुई घटना के बाद ग्वालियर में भी टंकियों की सफाई और ढकने की व्यवस्था कराई गई थी।

  • उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण पर BJP विधायक का विरोध, बोले- जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ूंगा

    उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण पर BJP विधायक का विरोध, बोले- जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ूंगा


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में सड़क चौड़ीकरण को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने पिपलीनाका क्षेत्र में सड़क चौड़ी करने के सरकारी फैसले का विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि सड़क 24 मीटर से अधिक चौड़ी की गई तो वह खुद जन आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।

    विधायक का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण से कई परिवारों की रोजी रोटी प्रभावित होगी लेकिन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दी है। अनिल जैन ने जनता से वादा किया कि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वह सड़क पर जनता के साथ खड़े रहेंगे। जानकारी के अनुसार भैरवगढ़ रोड के किनारे लगभग 410 घर हैं। इनमें से कई बच्चों के बोर्ड एग्जाम भी चल रहे हैं। नगर निगम ने 7 दिन में घर खाली करने का नोटिस जारी किया है। नोटिस के मुताबिक कई घरों का हिस्सा 10 फीट से 20 फीट तक ही बचेगा जबकि बाकी को बुलडोजर से तोड़ने की तैयारी है।

    नोटिस मिलने के बाद स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने विधायक के कार्यालय का घेराव किया और सरकार व विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विधायक ने कहा कि यदि सड़क 24 मीटर से अधिक चौड़ी हुई तो वह खुद सड़क पर उतरकर जनता का समर्थन करेंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण 150 फीट की योजना से शुरू हुई थी जिसे बाद में घटाकर 100 फीट कर दिया गया। वहीं निवासी 80 फीट चौड़ी सड़क की मांग कर रहे हैं ताकि कई घरों के टूटने से बचा जा सके।

    अनिल जैन ने कहा कि जनता की भावना का सम्मान करना उनका फर्ज है। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से कहा कि प्रशासन और अधिकारी कभी कभी मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दे देते हैं जिससे जनता को परेशानी होती है। यह कोई पहली बार नहीं है जब विधायक सरकार के खिलाफ मुखर हुए हैं। पहले वे लैंड पूलिंग एक्ट के विरोध में भी सामने आ चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर चेतावनी दी थी कि यदि एक्ट वापस नहीं लिया गया तो वे किसानों के विरोध में शामिल होंगे।

    विधायक ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उन्होंने सरकार की लैंड पूलिंग स्कीम का समर्थन किया था। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि यह स्कीम अभी भी लागू है जिसके चलते उन्होंने किसानों के हित और सम्मान में विरोध जारी रखने का निर्णय लिया। स्थानीय प्रशासन जल्द ही साइट पर सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू करने की तैयारी कर रहा है जबकि विधायक और जनता की मांगों के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

  • भोपाल में रंग पंचमी का भव्य जुलूस: पिचकारी वाला अनोखा निमंत्रण और मुख्यमंत्री की सराहना

    भोपाल में रंग पंचमी का भव्य जुलूस: पिचकारी वाला अनोखा निमंत्रण और मुख्यमंत्री की सराहना



    भोपाल राजधानी भोपाल इस बार 8 मार्च को होने वाले रंग पंचमी पर्व के लिए पहले से ही उत्साह और उमंग से सराबोर हो गई है। श्री हिंदू उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस साल के रंग पंचमी जुलूस (चल समारोह) को विशेष और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि इस बार के आयोजन के लिए प्रकाश मालवीय को संयोजक बनाया गया है, जिन्होंने शहर के विभिन्न समाजों, एसोसिएशनों और समितियों के पदाधिकारियों को एक अनोखे अंदाज में निमंत्रित किया है।

    इस बार के निमंत्रण पत्र की खासियत यह है कि इसे पिचकारी के आकार में तैयार किया गया है, जिसमें पूरी जानकारी पिचकारी पर ही अंकित है। समिति ने इस अनोखे कार्ड की प्रतियां मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी भेंट की, जिन्हें यह अभिनव प्रयास बहुत पसंद आया और उन्होंने इसका खुले दिल से स्वागत किया।

    रंग पंचमी का जुलूस केवल उत्सव का प्रदर्शन नहीं बल्कि यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक गौरव और पारंपरिक लोक रंगों का जीवंत अनुभव भी है। प्रकाश मालवीय ने बताया कि इस वर्ष जुलूस में ढोल-ताशों की गूंज, घोड़ी की आकर्षक प्रस्तुति, सुसज्जित झांकियां, डीजे की धुनें और रंग-गुलाल की बौछारें शामिल होंगी, जो पूरे शहर को उत्सवधर्मी माहौल में रंगों से सराबोर कर देंगी।

    समिति का कहना है कि यह जुलूस केवल आनंद और मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि शहरवासियों को आपसी मेल-जोल और सांस्कृतिक भागीदारी का संदेश देने का अवसर भी है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी जुलूस का मार्ग विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, ताकि अधिकतम लोग इस पारंपरिक उत्सव का आनंद ले सकें।

    भोपाल के नागरिक और उत्सव प्रेमी इस भव्य आयोजन के लिए पहले से ही उत्साहित हैं। पिचकारी जैसे अनोखे निमंत्रण पत्र और जुलूस की तैयारियों ने रंग पंचमी को और भी खास और यादगार बना दिया है। शहर के लोग अब 8 मार्च का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब पूरा भोपाल रंगों, संगीत और उत्साह से भरपूर माहौल में झूम उठेगा।

  • RTE 2026-27: प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन का मौका, 13 मार्च से शुरू होंगे आवेदन

    RTE 2026-27: प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन का मौका, 13 मार्च से शुरू होंगे आवेदन


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए बड़े निजी स्कूलों में पढ़ने का सपना अब साकार हो सकता है। शिक्षा का अधिकार RTE अधिनियम के तहत सत्र 2026-27 के लिए निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 13 मार्च 2026 से शुरू होंगे, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 28 मार्च 2026 तय की गई है। इच्छुक अभिभावक आधिकारिक पोर्टल www.rteportal.mp.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे।

    आरटीई के तहत मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए सीटों का आवंटन ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। यह लॉटरी 2 अप्रैल 2026 को निकाली जाएगी। जिन विद्यार्थियों का चयन होगा, उन्हें संबंधित निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।

    शिक्षा विभाग द्वारा जारी समय-सारिणी के अनुसार निःशुल्क प्रवेश के लिए मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूलों और उनमें उपलब्ध सीटों की जानकारी 9 मार्च 2026 से आरटीई पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। इसके बाद वंचित समूह और कमजोर वर्ग के अभिभावक 13 मार्च से 28 मार्च के बीच ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन करते समय पात्रता से संबंधित किसी एक आवश्यक दस्तावेज को अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    ऑनलाइन आवेदन के बाद अभिभावकों को दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। 14 मार्च से 30 मार्च 2026 के बीच संबंधित संकुल केंद्र वाले स्कूल में अधिकृत सत्यापन अधिकारी के माध्यम से दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाएगा। इस दौरान आवेदक अपनी कैटेगरी और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज मूल प्रमाण पत्र के आधार पर सत्यापित करवा सकेंगे।

    शिक्षा विभाग का कहना है कि लॉटरी से पहले दस्तावेजों का सत्यापन होने से बाद में स्कूल आवंटन के समय किसी प्रकार की त्रुटि या दस्तावेजों की कमी के कारण प्रवेश निरस्त होने की समस्या नहीं आएगी। इसके साथ ही आवेदन के दौरान अभिभावकों को त्रुटि सुधार का भी मौका दिया जाएगा।

    यदि किसी अभिभावक को ऑनलाइन आवेदन करने में समस्या आती है, तो वह अपने क्षेत्र के विकासखंड के बीआरसी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। वहीं 2 अप्रैल को लॉटरी के माध्यम से छात्रों को स्कूल आवंटित किए जाएंगे। आवंटन की जानकारी आवेदक को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएगी। इसके अलावा लॉटरी की सूची आरटीई पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेगी।

    आयु सीमा की बात करें तो नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 कक्षाओं में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 3 वर्ष से 4 वर्ष 6 माह तक तय की गई है। वहीं कक्षा 1 में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 6 वर्ष से अधिक और 7 वर्ष 6 माह तक होनी चाहिए। नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 के लिए आयु की गणना 31 जुलाई 2026 की स्थिति में की जाएगी, जबकि कक्षा 1 के लिए आयु की गणना 30 सितंबर 2026 के आधार पर होगी। सरकार की इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे भी बड़े निजी स्कूलों में पढ़कर बेहतर भविष्य बना सकें।

  • होली के जश्न में मातम: जबलपुर में नाले, तालाब और बरगी बांध में डूबने से 3 की मौत

    होली के जश्न में मातम: जबलपुर में नाले, तालाब और बरगी बांध में डूबने से 3 की मौत


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में होली का त्योहार उस समय मातम में बदल गया, जब अलग-अलग थाना क्षेत्रों में डूबने से तीन लोगों की मौत हो गई। इन घटनाओं में एक बुजुर्ग और दो युवकों ने अपनी जान गंवा दी। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने तीनों शव बरामद कर लिए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार तीनों घटनाएं जबलपुर जिले के बरगी, सिहोरा और संजीवनी नगर थाना क्षेत्रों में हुई हैं।
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नशा और लापरवाही इन हादसों की बड़ी वजह बनी।पहली घटना में बुजुर्ग रूपसिंह पटेल की नाले में डूबने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वे नशे की हालत में थे और इसी दौरान कछपुरा नाले में गिर गए। काफी देर तक जब उनका कोई पता नहीं चला तो स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नाले से उनका शव बरामद किया।

    दूसरी घटना बरगी बांध के जीरो डिग्री क्षेत्र की है, जहां एक युवक की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान शैलेष नेमा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि शैलेष अपने दोस्तों के साथ बरगी बांध में नहाने गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। घटना के बाद एसडीआरएफ और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। करीब तीन दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद युवक का शव बरामद किया गया।

    तीसरी घटना सिहोरा क्षेत्र में सामने आई, जहां तालाब में डूबने से एक अन्य युवक की मौत हो गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि तीनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही त्योहारों के दौरान लोगों से सावधानी बरतने और नशे की हालत में जलाशयों के पास न जाने की अपील भी की गई है। होली जैसे पर्व के दौरान हुए इन हादसों से इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि त्योहार मनाते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • तुलसी नगर में शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर का भव्य ध्वजा महोत्सव: श्रद्धालुओं ने अभिषेक और भव्य वरघोड़े से मनाई आस्था की अनूठी धूम

    तुलसी नगर में शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर का भव्य ध्वजा महोत्सव: श्रद्धालुओं ने अभिषेक और भव्य वरघोड़े से मनाई आस्था की अनूठी धूम


    नई दिल्ली। राजधानी के तुलसी नगर में स्थित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर में दो दिवसीय ध्वजा महोत्सव का भव्य आयोजन शनिवार और शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस महोत्सव में देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे और भगवान पार्श्वनाथ की जिन प्रतिमाओं का अभिषेक कर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत अनुभव किया। मंदिर परिसर पूरी तरह से भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक आनंद से गूंज उठा। मंदिर समिति के अध्यक्ष आईएल मेहता ने बताया कि इस अवसर पर सभी धार्मिक अनुष्ठानों और विधियों को बड़े श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न कराया गया।

    इस ध्वजा महोत्सव में विशेष रूप से आचार्य मुक्ति सागर सूरीश्वर महाराज और आचार्य अचल मुक्ति सागर महाराज ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और भक्तों को धर्म, भक्ति और संयम की सीख दी। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति आस्था बनाए रखने और धार्मिक कृत्यों में भाग लेने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर मंदिर की मूलनायक प्रतिमा शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के अभिषेक का सौभाग्य तुलसी नगर मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कोठारी और उनके परिवार को प्राप्त हुआ। यह पल न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे जैन समाज के लिए गौरव का अवसर बना।

    ध्वजा महोत्सव के पहले दिन, शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मंदिर में विविध धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। अभिषेक, पूजन, प्रार्थना और भजन कीर्तन के माध्यम से भक्तों ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। मंदिर में भक्ति और उल्लास का माहौल पूरे दिन बना रहा। इस दौरान चेंबर ऑफ कॉमर्स के महामंत्री ललित तातेड, श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष राजेश तातेड, मनोज संघवी, शिल्पा कोठारी सहित जैन समाज के कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।

    महत्वपूर्ण बात यह है कि महोत्सव का दूसरा दिन शनिवार 7 मार्च को सुबह 8 बजे प्रारंभ होगा। इस दिन आचार्य संघ के मार्गदर्शन में ध्वजाओं का भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा। इस भव्य शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे और भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति में डूबेंगे। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि जैन समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी मजबूती प्रदान करता है।

    ध्वजा महोत्सव के माध्यम से मंदिर समिति ने यह संदेश दिया कि भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा के साथ किए गए धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाते हैं। तुलसी नगर का यह आयोजन जैन धर्म के इतिहास और परंपरा का प्रतीक बनकर उभरा है। महोत्सव ने लोगों को न केवल भगवान के प्रति आस्था बढ़ाने का अवसर दिया, बल्कि समाज में मेलजोल, सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों को भी जीवित रखा।

    इस प्रकार, शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में ध्वजा महोत्सव ने भक्ति, उल्लास और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जो आने वाले वर्षों तक श्रद्धालुओं के लिए यादगार रहेगा।

  • ग्वालियर में PM आवास की पानी की टंकी में मरी छिपकलियां, 1300 परिवारों में दहशत में

    ग्वालियर में PM आवास की पानी की टंकी में मरी छिपकलियां, 1300 परिवारों में दहशत में


    ग्वालियर। मानपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने फ्लैटों की पानी की टंकी में मरी हुई पांच छिपकलियां मिलने से 1300 परिवारों में दहशत का माहौल बन गया है। टंकी से सीधे फ्लैटों में पानी सप्लाई होता है, जिससे रहवासियों को डर है कि कई दिन तक वे अनजाने में दूषित पानी पी चुके हैं।
    स्थानीय लोगों ने बताया कि फेस-वन के ब्लॉक ई-52 की पानी की टंकी में बदबू और गंदगी की शिकायत के बाद टंकी का ढक्कन खोला गया, तो अंदर मरी हुई छिपकलियां पाई गईं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे परिसर में भय का माहौल बन गया। अधिकांश परिवारों ने फिलहाल टंकी का पानी पीना बंद कर दिया है और बाहर से कैन या आरओ का पानी मंगाना शुरू कर दिया है।

    रहवासियों का आरोप है कि पिछले दो साल से टंकी की नियमित सफाई नहीं कराई गई।

    हाल ही में कॉलोनी के प्रतिनिधियों ने नगर निगम से मुलाकात कर सफाई और व्यवस्था सुधारने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम आयुक्त संघ प्रिया ने कहा कि ठेकेदार का ठेका समाप्त हो चुका है और जल्द ही टंकियों की देखभाल के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाएगी।
    इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि नगर निगम की लापरवाही और निगरानी की कमी को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पानी की टंकियों की नियमित सफाई और ढक्कन की स्थिति पर ध्यान न देने से गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।