पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जिले में अवैध गतिविधियों और अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इस गिरोह के पकड़ने को एक बड़ी सफलता करार देते हुए कहा कि नकली नोटों के प्रचलन को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।नकली नोटों के इस गोरखधंधे में गिरफ्तार दोनों आरोपियों से आगे की पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं, जिससे नकली नोटों के नेटवर्क को और भी उजागर किया जा सकेगा।
Category: Madhya Pradesh
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नर्मदा में सीवेज से पेयजल पर संकट: दिग्विजय सिंह की चेतावनी से मचा हड़कंपजबलपुर में जनता भयभीत
जबलपुर । जबलपुर में नर्मदा नदी में सीवेज मिलने और उससे जुड़े पेयजल संकट को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इस गंभीर मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गएतो शहर एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवकेंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह से हस्तक्षेप की मांग की है।दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि ग्वारीघाट क्षेत्र में बने सीवेज टैंक से बिना पूरी तरह फिल्टर किया गया गंदा पानी सीधे नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। यही नर्मदा नदी लगभग 500 मीटर दूर स्थित ललपुर पेयजल सप्लाई प्लांट के माध्यम से जबलपुर शहर को पानी उपलब्ध कराती है। ऐसे में सीवेज मिश्रित पानी के जरिए हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने इस पूरे तंत्र को लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत बताई।
इस बीचगंदे पानी की सप्लाई का मामला न्यायिक दहलीज तक भी पहुंच चुका है। जबलपुर निवासी अधिवक्ता ओपी यादव ने इस संबंध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कलेक्टरनगर निगम आयुक्तमहापौर और प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2019 से शहर के कई इलाकों में लगातार गंदे और बदबूदार पानी की आपूर्ति की जा रही है। बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
याचिका में हाईलेवल कमेटी गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जबलपुर की जनता को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और स्पष्ट किया है कि जनता के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
यह मामला इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील हो गया है क्योंकि हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 18 लोगों की मौत हो चुकी हैजबकि कई अन्य लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इस घटना के बाद प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता और प्रभावितों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। ऐसे में जबलपुर में भी इसी तरह की स्थिति बनने की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि नर्मदा जैसी पवित्र और जीवनदायिनी नदी में सीवेज मिलने की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यह केवल एक शहर का मुद्दा नहींबल्कि पर्यावरणजल सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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वंदे मातरम् के 150 वर्ष: देशभर में भारतीय सेना के विशेष बैंड कार्यक्रम, देशभक्ति की धुनों से गूंजेंगे शहर
नई दिल्ली । राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए भारतीय सेना ने देशभर में विशेष बैंड परफॉर्मेंस आयोजित करने की व्यापक योजना बनाई है। यह आयोजन केवल एक सांगीतिक प्रस्तुति नहीं होगा बल्कि राष्ट्र की एकता सांस्कृतिक विरासत और देशभक्ति की भावना को सशक्त करने का प्रयास भी होगा। सेना के ये विशेष कार्यक्रम 19 से 26 जनवरी 2026 तक देश के प्रमुख शहरों में आयोजित किए जाएंगे।भारतीय सेना के अनुसार प्रत्येक बैंड परफॉर्मेंस लगभग 45 मिनट की होगी और इन्हें दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में मिलिट्री बैंड और आर्मी सिम्फनी बैंड द्वारा वंदे मातरम् सहित कई देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। संगीत के माध्यम से आम जनता को राष्ट्र के इतिहास बलिदान और एकता की भावना से जोड़ना इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है।इन विशेष प्रस्तुतियों के लिए देश के लगभग हर क्षेत्र को शामिल किया गया है। बिहार में पटना और गया उत्तर प्रदेश में लखनऊ और प्रयागराज उत्तराखंड में देहरादून छत्तीसगढ़ में रायपुर ओडिशा में गोपालपुर और कर्नाटक में बेंगलुरु में सेना के बैंड कार्यक्रम होंगे। मध्य प्रदेश में जबलपुर महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे तेलंगाना में हैदराबाद हिमाचल प्रदेश में शिमला राजस्थान में जयपुर और लद्दाख के कारगिल जैसे सामरिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों को भी इस आयोजन में शामिल किया गया है।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट पर 18 जनवरी 2026 को आर्मी सिम्फनी बैंड की विशेष प्रस्तुति होगी जिसे इस श्रृंखला का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल के नैहाटी में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जो वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मस्थली है। इस आयोजन को सांस्कृतिक और भावनात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारतीय सेना का कहना है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रीय गीतों और स्वतंत्रता संग्राम के सांस्कृतिक पक्ष से जोड़ना है। सेना के अधिकारियों के अनुसार संगीत एक ऐसा माध्यम है जो बिना शब्दों के भी देशप्रेम और एकता का संदेश देता है। यही कारण है कि इन प्रस्तुतियों को सार्वजनिक और निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसे आयोजन युवाओं में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करते हैं और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। सेना के इन कार्यक्रमों में विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षिक संस्थानों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है जिससे यह आयोजन केवल सैन्य नहीं बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय उत्सव का रूप ले सके।
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प्रदूषण से जूझते मध्य प्रदेश में विकास की भारी कीमत, 15 लाख पेड़ों की कटाई पर उठे गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश में एक ओर वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण एनजीटीद्वारा राज्य के आठ शहरों को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की श्रेणी में रखे जाने के बावजूद इन्हीं क्षेत्रों में लाखों पेड़ों को काटने की तैयारी ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार केवल इन आठ शहरों में ही करीब 6.50 लाख पेड़ों के कटने का प्रस्ताव है, जबकि पूरे प्रदेश में विभिन्न परियोजनाओं के चलते लगभग 15 लाख पेड़ संकट में हैं।जिन शहरों को एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने सबसे अधिक प्रदूषित माना है, उनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सिंगरौली, सागर और देवास शामिल हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीपीसीबीके अनुसार इन शहरों में पीएम-10 का औसत स्तर 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम-2.5 का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक दर्ज किया गया है, जो सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है। इसके बावजूद इन्हीं इलाकों में सड़क, मेट्रो, कोयला, ऊर्जा और परिवहन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पुराने और परिपक्व पेड़ों को हटाने की योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।
सबसे बड़ा पर्यावरणीय खतरा सिंगरौली जिले में प्रस्तावित धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना से जुड़ा माना जा रहा है। इस परियोजना के लिए करीब 1,397 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित की गई है, जिसमें अधिकांश हिस्सा घने जंगल का है। जानकारी के अनुसार अब तक लगभग 35 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि करीब 5.70 लाख और पेड़ों के कटने की आशंका जताई जा रही है। सिंगरौली पहले से ही कोयला खनन और ताप विद्युत संयंत्रों के कारण गंभीर प्रदूषण झेल रहा है।राजधानी भोपाल में अयोध्या बायपास को फोरलेन से 10 लेन में तब्दील करने की योजना के तहत लगभग 7,800 पेड़ों को हटाने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा कोलार बायपास और बंगरसिया से भोजपुर तक सड़क निर्माण कार्यों में भी बड़ी संख्या में पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं। इंदौर में रीगल चौराहे पर मेट्रो स्टेशन निर्माण के लिए 1,200 से अधिक पेड़ों पर संकट है, जबकि इंदौर-उज्जैन मार्ग के चौड़ीकरण में करीब 3,000 पेड़ प्रभावित होंगे।
ग्वालियर में थाटीपुर रीडेंसिफिकेशन योजना और अन्य सड़क परियोजनाओं के चलते हजारों पुराने पेड़ हटाए जा चुके हैं या हटाने की प्रक्रिया में हैं। मंडला जिले में बसनिया डेम और उससे जुड़ी नहर व पावर परियोजनाओं से लगभग 2,100 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होगा, जहां करीब 5 लाख पेड़ों के कटने का अनुमान है। डिंडोरी में नर्मदा पर प्रस्तावित राघवपुर बांध और महू-खंडवा रेलवे लाइन परियोजना भी बड़े पैमाने पर वन कटाई का कारण बन रही हैं।पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से जूझ रहे शहरों में हरित आवरण का इस तरह कम होना सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को और गहरा सकता है। वहीं सरकार का तर्क है कि इन परियोजनाओं के बदले बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा, लेकिन विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या नए पौधे दशकों पुराने पेड़ों की भरपाई कर पाएंगे।
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वेश्यावृत्ति व तस्करी के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, IG से कहा– सोच बदलिए, 11 साल का डेटा पेश करें
ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लड़कियों की कथित तस्करी और जबरन वेश्यावृत्ति से जुड़े एक गंभीर मामले में पुलिस प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े अपराधों को हल्के में लेना अस्वीकार्य है। अदालत ने ग्वालियर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अरविंद सक्सेना को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश देते हुए वर्ष 2014 से अब तक के 11 वर्षों में ग्वालियर संभाग से लापता हुई लड़कियों और उनकी बरामदगी से जुड़ा विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है।यह सख्त आदेश पायल नामक महिला द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिवपुरी जिले में कुछ संगठित गिरोह युवतियों को बंधक बनाकर उनसे जबरन देह व्यापार करवा रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ऋषिकेश बोहरे ने अदालत को बताया कि इस संबंध में पुलिस और प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब पर अदालत ने तीखी आपत्ति जताई। शासन ने अपने जवाब में इस पूरे मामले को आपसी पारिवारिक विवाद बताया था। हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि आरोपों में जरा भी सच्चाई है, तो यह केवल निजी विवाद नहीं बल्कि संगठित अपराध, मानव तस्करी और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बनता है।
खंडपीठ ने टिप्पणी की कि पुलिस का दृष्टिकोण बेहद चिंताजनक है। अदालत ने कहा कि महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी सबसे अहम है। इसी क्रम में कोर्ट ने आईजी को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि केवल फाइलों और कागजी जवाबों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सोच और कार्यशैली में बदलाव जरूरी है।हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2014 से अब तक ग्वालियर संभाग में दर्ज सभी गुमशुदगी मामलों का विस्तृत ब्योरा पेश किया जाए। इसमें यह जानकारी भी शामिल करनी होगी कि कितनी लड़कियां लापता घोषित की गईं, कितनी को बरामद किया गया और कितने मामलों की जांच अब तक लंबित है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि इन आंकड़ों के विश्लेषण के बाद पुलिस प्रशासन पर और भी सख्त निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले शिवपुरी जिले के पुलिस अधीक्षक को भी इस मामले में तलब किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि गंभीर आरोपों को नजरअंदाज करना या उन्हें घरेलू विवाद बताकर दबाना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।अदालत के इस सख्त रुख के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। अधिकारियों के अनुसार, पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और आंकड़ों को संकलित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वहीं महिला अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को अहम बताते हुए कहा है कि इससे लड़कियों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
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होमवर्क न करने पर 6 साल की बच्ची को टीचर ने ऐसा मारा थप्पड़ कि गिरने से टूटा हाथ
सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले के एक प्राइवेट स्कूल में 6 साल की मासूम बच्ची को होमवर्क पूरा न करने की ऐसी सजा मिली कि उसका हाथ टूट गया। इंग्लिश टीचर ने बच्ची को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि वह जमीन पर गिरी और उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया। अब बच्ची के हाथ पर प्लास्टर चढ़ा है। हैरानी की बात यह है कि जब पिता स्कूल पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज मांगा, तो प्रबंधन ने रटा-रटाया जवाब दे दिया कि “कैमरे खराब हैं”।फिलहाल पिता की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने सम्बंधित टीचर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।बर्थडे, होमवर्क और टीचर की सजा
दरअसल पूरा मामला शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले अमौधा स्थित सीएमए विद्यालय का है। यहां पतेरी के चौहान नगर निवासी पीड़ित बच्ची के पिता ने बताया की बच्ची मंगलवार को स्कूल गई थी। घर पर छोटी बहन का जन्मदिन होने के कारण वह अपना इंग्लिश का होमवर्क पूरा नहीं कर पाई थी। क्लास में जब इंग्लिश टीचर सपना खरे ने होमवर्क चेक किया और अधूरा पाया, तो वे गुस्से में तमतमा गईं।उन्होंने बच्ची को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। थप्पड़ लगते ही मासूम का संतुलन बिगड़ा और वह जमीन पर गिर पड़ी, जिससे उसके हाथ की हड्डी टूट गई।
डरी सहमी बच्ची घर पहुंची और…स्कूल से लौटने के बाद डरी-सहमी बच्ची ने शाम को हाथ में दर्द की शिकायत की। मां को लगा मामूली चोट होगी, इसलिए बाम लगा दिया और बच्ची सो गई। बुधवार सुबह जब स्कूल जाने के लिए बच्ची को उठाया गया, तो उसका हाथ बुरी तरह सूजा हुआ था। परिजन घबराकर उसे जिला अस्पताल ले गए। वहां एक्स-रे करने पर फ्रैक्चर की पुष्टि हुई और डॉक्टरों ने तुरंत प्लास्टर चढ़ाया है।
सीसीटीवी फुटेज की मांग पर क्या बोला स्कूलबेटी की हालत देख पिता का गुस्सा फूट पड़ा है। वे पहले सिविल लाइन थाने गए और फिर स्कूल पहुंचे।
पिता ने प्रिंसिपल से घटना की शिकायत की और क्लासरूम का सीसीटीवी फुटेज दिखाने को कहा। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने अपनी लापरवाही छिपाते हुए कह दिया कि कैमरे कई दिनों से खराब हैं। परिजनों का यह भी आरोप है की कभी कभार फीस लेट हो जाने पर बच्ची को परीक्षा में न बैठने की धमकी भी दी जा चुकी है। स्कूल में अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ शारीरिक हिंसा की जा रही है, जो कानूनन अपराध है। प्रबंधन आरोपी टीचर को बचाने की कोशिश कर रहा है।वही, सिविल लाइन पुलिस ने पिता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सम्बंधित शिक्षिका के खिलाफ बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज लिया है और मामले पर आंगे जांच कर रही है।
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भोपाल में 40 साल पुरानी पाइपलाइन जर्जर, रसोई तक पहुंच रहा सीवेज का पानी
भोपाल। भोपाल नगर निगम ने शहर को स्मार्ट सिटी और सबसे स्वच्छ शहर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए हैं लेकिन असलियत में शहर की जलापूर्ति और सीवेज व्यवस्था आज भी पुराने और जर्जर ढांचे पर निर्भर है। चार से पांच दशक पुरानी पाइपलाइनें कई इलाकों में सीवेज और पानी की पाइपलाइन के एक साथ होने के कारण दूषित पानी की समस्या बढ़ गई है।हाल ही में नगर निगम ने शहर के विभिन्न इलाकों से पानी के नमूने लिए थे। इन नमूनों का परीक्षण करने पर बुधवार को 250 नमूनों में से चार में बैक्टीरिया पाया गया। इनमें से दो सैंपल आदमपुर खंती के पास, एक बाजपेयी नगर के पास नलकूप और एक खानूगांव में कुएं से लिया गया था। यह साफ करता है कि पानी की गुणवत्ता में भारी कमी है और नागरिकों को दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
पुराने शहर के कई इलाकों में सीवेज और पानी की पाइपलाइनें एक साथ बिछाई गई हैं, जिससे यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि रसोई तक पहुंचने वाला पानी पूरी तरह से साफ और सुरक्षित हो। यही कारण है कि भोपाल के नागरिक पेट से संबंधित बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि 80% बीमारियां दूषित पानी के कारण होती हैं, और यह समस्या भोपाल में दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
इसके बावजूद केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम अधूरा पड़ा हुआ है। राजधानी में दूषित पानी पीने से इंदौर में 20 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन भोपाल में इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है। नगर निगम लीकेज सुधार और सीवेज चैंबर की सफाई का दिखावा कर रहा है लेकिन असल में स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।यह समस्या जितनी गंभीर है, उतनी ही उपेक्षित भी है, और यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो शहर में पानी की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य पर और गंभीर संकट आ सकता है।
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इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज में नर्स की लापरवाही से डेढ़ महीने के बच्चे का अंगूठा कटकर गिरा
इंदौर । सरकारी अस्पतालों में इलाज की बेहतर सुविधाओं का दावा किया जाता है, लेकिन कभी-कभी यहां इलाज के दौरान लापरवाही के गंभीर मामले सामने आ जाते हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के न्यू चेस्ट वार्ड में एक शर्मनाक घटना सामने आई जहां डेढ़ महीने के एक बच्चे का अंगूठा नर्स की लापरवाही से कटकर गिर गया।घटना तब घटी जब नर्स इंट्राकेथ बदलने के दौरान बच्चे का हाथ पकड़ रही थी और टैप को काटते समय उसने कैंची से बच्चे के अंगूठे को काट दिया। इसके परिणामस्वरूप बच्चे का अंगूठा कटकर जमीन पर गिर गया। इस घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यूनिट के डॉक्टरों ने अस्पताल के अधीक्षक को इस घटना की जानकारी नहीं दी जिससे यह लापरवाही छिपी रही।
सौभाग्य से बच्चे को तुरंत सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल भेजा गया जहां सर्जरी कर बच्चे के कटे हुए अंगूठे को जोड़ा गया। हालांकि इस घटना ने अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता और नर्सिंग स्टाफ की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना न केवल अस्पताल की लापरवाही का प्रतीक बन गई, बल्कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही लापरवाही की ओर भी इशारा करती है। ऐसे मामलों में जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से मरीजों की जान बचाई जा सके।
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विदिशा 90 वर्षीय मां के रख-रखाव को लेकर चार बेटों में विवाद, पुलिस पंचायत ने किया समाधान
विदिशा । एक दिल को झकझोर देने वाली घटना बुधवार को पुलिस पंचायत में सामने आई, जहां 90 वर्षीय महिला ने अपने चार बेटों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया कि उसने अपनी जमा पूंजी से सभी बेटों को पांच-पांच लाख रुपये दिए थे, लेकिन अब जीवन के अंतिम पड़ाव पर कोई भी बेटा उसे अपने पास रखने को तैयार नहीं है।चारों बेटों के बीच पारिवारिक विवाद के कारण, उन्होंने तय किया था कि प्रत्येक बेटा एक-एक माह के लिए मां को रखेगा। लेकिन अब महिला का आरोप है कि पहले बेटे के एक माह पूरे होने के बाद दूसरा बेटा भी उन्हें रखने को तैयार नहीं है।
इस गंभीर मामले को पुलिस पंचायत ने तुरंत संज्ञान में लिया और आदेश दिया कि एक बेटा अपनी मां को स्थाई रूप से रखेगा, जबकि बाकी तीन बेटे उन्हें हर माह एक-एक हजार रुपये खर्च के लिए देंगे। इस फैसले से महिला को कुछ राहत मिली है।
पुलिस पंचायत में इस प्रकार के मामलों की सुनवाई नियमित रूप से होती है, और बुधवार को भी इस जैसे चार से पांच मामले सुने गए। एक अन्य मामले में दो सीनियर सिटीजन मित्रों के बीच भूमि किराए पर लेकर खेती करने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था, जिसका समाधान भी पंचायत ने किया।

