Category: Madhya Pradesh

  • MP: भोपाल भी पी रहा जहरीला पानी… 4 इलाकों के पानी में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया, स्लॉटर हाउस सील

    MP: भोपाल भी पी रहा जहरीला पानी… 4 इलाकों के पानी में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया, स्लॉटर हाउस सील


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) और आसपास के इलाकों में दूषित पानी (Contaminated water) को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच भोपाल नगर निगम की जांच में शहर के चार अलग-अलग स्थानों पर ई-कोलाई बैक्टीरिया (E. coli bacteria) की पुष्टि हुई है। नगर निगम द्वारा अब तक लिए गए कुल 1,810 सैंपलों में से ये चार नमूने फेल पाए गए, जो मुख्य रूप से ट्यूबवेल और ग्राउंड वॉटर से जुड़े थे। भोपाल की मेयर मालती राय ने साफ किया है कि यह दूषित पानी निगम की मुख्य पाइपलाइन से सप्लाई होने वाला पानी नहीं है, बल्कि कच्चा जल है। इस मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक स्लॉटर हाउस (बूचड़खाने) को भी सील कर दिया है क्योंकि वहां के नमूनों में गड़बड़ी पाई गई थी।

    राय ने कहा, नगर निगम को कई शिकायतें मिल रही हैं। नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी तुरंत संबंधित स्थानों पर जाकर जांच कर रहे हैं। शिकायत होने पर नगर निगम की टीम मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान कर रही है। रिसाव या सार्वजनिक शिकायतों की स्थिति में नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी जांच कर रहे हैं। वे लोगों की शिकायतों के आधार पर जांच कर रहे हैं और सैंपलों को संबंधित अधिकारियों को भेज रहे हैं।

    मेयर ने यह भी बताया कि शहर के एक स्लॉटर हाउस को उसके नमूनों में गड़बड़ी पाए जाने के बाद सील कर दिया गया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्लॉटर हाउस के सैंपल गलत पाए गए हैं। नमूने गलत पाए जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। संबंधित अधिकारी, निजी विक्रेता या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

    दूसरी ओर, इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सीवेज प्रोजेक्ट में हुई लापरवाही के कारण गंदा पानी पीने के पानी के स्रोतों में मिल रहा है, जिससे जनता का स्वास्थ्य खतरे में है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जबलपुर के ग्वारीघाट में सीवेज का पानी नर्मदा नदी में मिलने और वहां से पीने के पानी की आपूर्ति होने पर गहरी चिंता जताई है। हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के बाद, अब पूरे प्रदेश में जल संकट और स्वच्छता को लेकर प्रशासन पर भारी दबाव है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

  • अनुशासनहीनता की हद: स्कूल प्रबंधन सोया रहा, 8 फीट की बाउंड्री फांदकर स्कूल से बंक मारती नजर आईं छात्राएं

    अनुशासनहीनता की हद: स्कूल प्रबंधन सोया रहा, 8 फीट की बाउंड्री फांदकर स्कूल से बंक मारती नजर आईं छात्राएं


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले के शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल नागौद में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां की छात्राएं स्कूल की 8 फीट ऊंची बाउंड्री फांदकर बाहर जा रही थीं, लेकिन स्कूल प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह मामला तब सुर्खियों में आया, जब बाउंड्री फांदते हुए छात्राओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। विडंबना यह है कि विद्यालय के पीछे से बाउंड्री लांघकर छात्राएं मुख्य सड़क पर कूद रही थीं, जहां दिनभर वाहनों की आवाजाही होती रहती है। इस स्थिति में किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता था। वीडियो में छात्राएं बाउंड्री फांदते समय गिरती भी नजर आ रही हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि अगर कोई गंभीर दुर्घटना हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती

    स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यह मामला छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, और स्कूल प्रशासन की लापरवाही बेहद चिंताजनक है। स्कूल समय के दौरान छात्राओं का इस तरह बाउंड्री फांदकर बाहर जाना न केवल अनुशासनहीनता का प्रतीक है, बल्कि उनकी जान को भी खतरे में डालने वाला है। जैसे ही यह वीडियो मीडिया में आया, जिला शिक्षा अधिकारी कंचन श्रीवास्तव ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमने इस घटना के बारे में जानकारी प्राप्त की है। हम प्राचार्य से चर्चा करेंगे और इस मामले में उचित प्रबंध कराने के लिए निर्देश देंगे।

    स्कूल की प्राचार्य, विनीता श्रीवास्तव ने इस पर सफाई देते हुए कहा, मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था और अंदर प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं। अब हमें इस घटना की जानकारी मिली है और इसके लिए उचित प्रबंध किए जाएंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि जब गेट पर ताला लगा था, तो स्कूल प्रबंधन ने छात्राओं के बाहर जाने पर नजर क्यों नहीं रखी। यह मामला विद्यालय प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करता है, जो छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन की जिम्मेदारी लेने में नाकाम रहा। अगर भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो यह बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो जाएगा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।
     

  • दूषित पानी से हुई मौतों पर भाजपा सांसद का शर्मनाक बयान, जनता से सरकार के भरोसे न बैठने की अपील

    दूषित पानी से हुई मौतों पर भाजपा सांसद का शर्मनाक बयान, जनता से सरकार के भरोसे न बैठने की अपील


    खंडवा । मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से लगभग 18 लोगों की मौत हो गई जिसे लेकर शासन-प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद लोगों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं और अब भाजपा नेताओं के विवादास्पद बयानों ने इन उम्मीदों को और बिखेर दिया है। पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और अब खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने जनता से अपील की कि वे सरकार के भरोसे न बैठें और अपनी जिम्मेदारी खुद निभाएं।

    सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल खंडवा में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। जब उनसे इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, चाहे खंडवा हो, नगर परिषद हो या ग्राम पंचायत हो, इंदौर की घटना से हम सभी को सबक लेना चाहिए। सिर्फ सरकार ही सब कुछ करे सरकार के भरोसे हम रहे, ये भी ठीक नहीं है। जनता की भी एक जिम्मेदारी बनती है। इस बयान से उन्होंने एक तरह से साफ कर दिया कि गंदगी और दूषित पानी की समस्या के लिए अब जिम्मेदारी सरकार के बजाय जनता पर डाल दी गई है।

    सांसद का यह बयान विवादों में घिर चुका है क्योंकि इसने सीधे तौर पर जनता पर सफाई का जिम्मा थोप दिया। सवाल यह उठता है कि क्या अब जनता खुद सड़कें खोदकर पाइपलाइन लगाएगी या फिर नगर निगम की टंकियों को साफ कर घर-घर पानी पहुंचाने का काम करेगी अगर यही जिम्मेदारी जनता की है, तो फिर सवाल यह भी है कि सांसद जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे लोग क्या कर रहे हैं क्या उनके कर्तव्यों में ऐसी समस्याओं का समाधान करना नहीं आता ।

    यह पहली बार नहीं है जब भाजपा नेताओं के बयानों ने विवाद उठाया है। इससे पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकार से अभद्रता करते हुए ‘घंटा’ शब्द कहा था, जिसके बाद कांग्रेस ने इस बयान के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। इस घटना के बाद विजयवर्गीय भी बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं। इंदौर में हुए हादसे के बाद से प्रशासन की नाकामी और नेताओं के विवादास्पद बयानों ने लोगों के विश्वास को तोड़ा है। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे या फिर इस बार भी जनता को ही दोषी ठहराया जाएगा।

  • इंदौर में कॉल सेंटर कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का दबाव, युवती ने बीच सड़क जूतों से की पिटाई

    इंदौर में कॉल सेंटर कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का दबाव, युवती ने बीच सड़क जूतों से की पिटाई


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक कॉल सेंटर में कार्यरत युवती पर लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी युवक का नाम अब्दुल कलाम है, जो कॉल सेंटर में एमओ मैनेजमेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। युवती ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी काम के दौरान उसे बार-बार धर्म परिवर्तन करने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। इस दबाव से परेशान होकर युवती ने कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ दी, लेकिन आरोपी का पीछा तब भी नहीं रुका।

    युवती ने बताया कि कंपनी के दो माह के नोटिस पीरियड के दौरान, जब वह रोजाना काम पर जा रही थी, तब भी आरोपी उसे रास्ते में रोककर परेशान करता रहा। लगातार उत्पीड़न से तंग आकर एक दिन युवती का गुस्सा फूट पड़ा। रास्ते में ही उसने आरोपी की जूतों से पिटाई कर दी। इसके बाद, पीड़िता ने पूरे मामले की शिकायत लसूड़िया थाना पुलिस में दर्ज कराई।

    पुलिस ने युवती की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की जांच जारी है। यह घटना एक बार फिर कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी गंभीर सवालों को उजागर करती है। क्या हमारे कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित महसूस होता है क्या हम उनके धार्मिक विश्वासों और स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं? इन सवालों का जवाब अब समाज और जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा ।

  • साढ़े 3 लाख शिक्षकों पर एस्मा लागू, छुट्टियों और धरना-प्रदर्शन पर रोक

    साढ़े 3 लाख शिक्षकों पर एस्मा लागू, छुट्टियों और धरना-प्रदर्शन पर रोक


    भोपाल । मध्य प्रदेश में साढ़े तीन लाख शिक्षकों पर एस्मा सार्वजनिक आपातकालीन सेवा संरक्षण अधिनियम लागू कर दिया गया है। यह आदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल माशिमं ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किया है, जिसके तहत शिक्षकों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक लगाई गई है और उनका धरना-प्रदर्शन करना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। एस्मा के तहत अगले दो महीनों तक शिक्षकों को कोई भी छुट्टी लेने की अनुमति नहीं होगी और वे अपनी ड्यूटी से इंकार नहीं कर सकेंगे। यह आदेश 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक लागू रहेगा।

    एस्मा के इस आदेश का मुख्य उद्देश्य आगामी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं केमद्देनजर परीक्षा ड्यूटी में किसी प्रकार की विघ्न नहीं आनी चाहिए। प्रदेश में 7 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं और इनमें करीब 17 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। इस दौरान शिक्षकों को अपनी ड्यूटी से न भागने और परीक्षा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    यह आदेश सार्वजनिक सेवा में किसी भी प्रकार की बाधा डालने या ड्यूटी से मना करने को कानून के उल्लंघन के रूप में देखा जाएगा। एस्मा लागू होने से शिक्षकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें, खासकर परीक्षा के दौरान।इस फैसले के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए अगले दो महीनों तक कोई विशेष छुट्टी या अवकाश लेने की सुविधा नहीं होगी। इस दौरान अगर कोई शिक्षक या कर्मचारी ड्यूटी से इंकार करता है या प्रदर्शन करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

  • यासीन मछली की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया

    यासीन मछली की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया


    भोपाल । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यासीन अहमद उर्फ मछली की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यासीन के खिलाफ दर्ज आरोपों की गंभीरता और उसके आपराधिक इतिहास को देखते हुए यह फैसला लिया। यासीन मछली, जो एक पत्रकार के नाम पर जारी फर्जी विधानसभा पार्किंग पास का इस्तेमाल कर रहा था, को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने यासीन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे ठुकरा दिया, यह कहते हुए कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

    यह घटना भोपाल में उस समय सामने आई थी जब यासीन मछली विधानसभा पार्किंग में एक फर्जी पास लगाकर अपनी कार पार्क कर रहा था। यह पास एक पत्रकार के नाम पर जारी हुआ था, जिसे दिसंबर 2024 के विधानसभा सत्र के लिए जारी किया गया था। पत्रकार ने इस मामले की शिकायत भोपाल अरेरा हिल्स पुलिस से की थी, जिसके बाद यासीन को गिरफ्तार कर लिया गया था।

    यासीन मछली के खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने यासीन और उसके चाचा शाहवर को ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। इसके अलावा, आरोपी के मोबाइल से अश्लील वीडियो भी बरामद हुए थे, जो जांच में एक और बड़ा मामला सामने लाए। यासीन और उसके साथियों के खिलाफ एक और गंभीर आरोप यह है कि वह स्कूल और कॉलेज की लड़कियों को पार्टियों के बहाने ड्रग्स की लत लगवाते थे, फिर उनका यौन शोषण करते और उन्हें ब्लैकमेल कर वीडियो बनाते थे। इसके अलावा, धर्मांतरण का दबाव भी इन अपराधों से जुड़ा हुआ था, जो पुलिस की जांच में उभरकर आया है।

    इस मामले के बाद से यासीन मछली की आपराधिक गतिविधियों की गहराई से जांच की जा रही है, और पुलिस उसे सख्त सजा दिलाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर चुकी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देता है, कि कोर्ट गंभीर अपराधों में लिप्त आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं देगी। इस फैसले से यह भी स्पष्ट हो गया है कि अपराधी चाहे कितनी भी ताकतवर स्थिति में क्यों न हो, कानून के सामने सभी समान होते हैं।

  • उज्जैन के बड़नगर में बिजली विभाग की टीम पर हमला: कनेक्शन काटने पर किसान ने की मारपीट

    उज्जैन के बड़नगर में बिजली विभाग की टीम पर हमला: कनेक्शन काटने पर किसान ने की मारपीट


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र में बिजली विभाग की टीम पर हमला होने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना ग्राम पिपलु में हुई, जहां एक किसान ने बिजली बिल का लंबा समय से भुगतान न करने के बाद जब बिजली विभाग की टीम ने उसका कनेक्शन काटा, तो किसान ने कर्मचारियों पर हमला कर दिया।

    घटना का विवरण

    बताया जा रहा है कि सुपरवाइजर जनार्दन द्विवेदी अपनी टीम के साथ बकाया बिजली बिल की वसूली के लिए किसान लोकेंद्र के घर पहुंचे थे। लोकेंद्र पर काफी समय से बिजली का बिल बकाया था, और जब विभागीय टीम ने कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू की, तो किसान लोकेंद्र आक्रोशित हो गए। उन्होंने जनार्दन द्विवेदी और उनके साथियों से मारपीट करना शुरू कर दिया।

    मोबाइल में कैद हुई मारपीट की घटना

    किसान द्वारा की गई मारपीट की घटना को किसी ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जिसके बाद इसका वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि किसान ने कनेक्शन काटने के दौरान कर्मचारियों से हाथापाई की। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद घटना ने काफी तूल पकड़ लिया।

    पुलिस में शिकायत और जांच

    मारपीट की इस घटना के बाद सभी कर्मचारी बड़नगर थाने पहुंचे और आरोपी किसान लोकेंद्र के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट करने की शिकायत की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी किसान के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    घटना का असर

    इस घटना ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में जहां एक ओर बिजली विभाग की टीम कनेक्शन काटने के लिए जाती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की हिंसक घटनाएं विभाग के कार्यों में रुकावट डाल सकती हैं।अब देखना होगा कि पुलिस मामले की जांच के बाद क्या कार्रवाई करती है और क्या किसान लोकेंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी या नहीं।

  • रेत माफिया के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र आंदोलन: महाकाल मिनरल्स पर अवैध उत्खनन का आरोप, ट्रकों की लंबी कतार

    रेत माफिया के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र आंदोलन: महाकाल मिनरल्स पर अवैध उत्खनन का आरोप, ट्रकों की लंबी कतार


    शहडोल । शहडोल मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में रेत माफिया के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है। उमरिया जिले की महाकाल मिनरल्स कंपनी के खिलाफ ग्राम पंचायत पोड़ी कलां के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महाकाल मिनरल्स कंपनी ने शहडोल जिले के अमिलिया टेढ़ी घाट में अवैध रूप से रेत का उत्खनन शुरू कर दिया है और यह कंपनी उमरिया जिले की सीमा को लांघकर इस क्षेत्र में रेत खनन कर रही है।

    अवैध उत्खनन पर विरोध

    ग्रामीणों ने रेत से लदे ओवरलोड ट्रकों को रोककर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे मौके पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं। उनका कहना है कि भारी मशीनों और ओवरलोड वाहनों के द्वारा न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि इस गतिविधि से पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस अवैध उत्खनन की शिकायत पहले ही जिला प्रशासन से की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके चलते उन्हें इस आंदोलन को शुरू करने पर मजबूर होना पड़ा है।

    सड़कें हो रही हैं क्षतिग्रस्त

    ग्रामीणों का कहना है कि ओवरलोड रेत परिवहन के कारण क्षेत्रीय सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही, नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इन समस्याओं को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है और वे प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    तहसीलदार पर हमला: आक्रोश और बढ़ा

    हाल ही में, ब्यौहारी में तहसीलदार पर रेत माफिया द्वारा कथित हमला और उन्हें जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद ग्रामीणों में और भी अधिक गुस्सा फूट पड़ा है, और अब वे खुलकर रेत माफिया के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। इस घटना ने स्थिति को और भी तनावपूर्ण बना दिया है।

    आंदोलन को उग्र करने की चेतावनी

    यादव महासभा के जिला उपाध्यक्ष हेमराज यादव ने कहा महाकाल मिनरल्स कंपनी द्वारा उमरिया जिले की सीमा से बाहर आकर खुलेआम रेत का उत्खनन किया जा रहा है। हमने प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन कार्रवाई न होने से माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए हैं। यदि अवैध उत्खनन तुरंत बंद नहीं हुआ तो हम आंदोलन को और उग्र करेंगे।

    प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

    ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। फिलहाल, मौके पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और ग्रामीण जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। यह आंदोलन केवल रेत माफिया के खिलाफ ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी एक गंभीर सवाल उठाता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस स्थिति से कैसे निपटता है और क्या रेत माफिया के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।

  • इंदौर एमवाय अस्पताल में फिर लापरवाही: चेस्ट वार्ड में डेढ़ माह के मासूम का अंगूठा कटा, नर्स सस्पेंड

    इंदौर एमवाय अस्पताल में फिर लापरवाही: चेस्ट वार्ड में डेढ़ माह के मासूम का अंगूठा कटा, नर्स सस्पेंड


    इंदौर । इंदौर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार एमवाय अस्पताल एक बार फिर गंभीर लापरवाही के कारण सुर्खियों में है। चूहा कांड के बाद अब अस्पताल में एक और शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसमें एक डेढ़ माह के मासूम का अंगूठा कट गया। यह घटना चेस्ट वार्ड में हुई, जहां एक नर्स की लापरवाही के कारण मासूम का अंगूठा काटा गया। इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तत्काल कार्रवाई की गई।

    घटना का विवरण

    बताया जा रहा है कि बेटमा से निमोनिया के इलाज के लिए एक मासूम को एमवाय अस्पताल के चेस्ट वार्ड में भर्ती कराया गया था। यहां, नर्स ने बच्चे के हाथ पर लगे टेप को काटने के लिए कैंची का इस्तेमाल किया। लापरवाही से कैंची बच्चे के अंगूठे पर लग गई, जिससे उसका अंगूठा कट गया। घटना के बाद बच्चे के परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए।

    अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई

    इस गंभीर लापरवाही को लेकर अस्पताल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित नर्स को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही तीन नर्सिंग इंचार्ज का वेतन रोकने की भी कार्रवाई की गई। अस्पताल प्रशासन ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

    बच्चे का उपचार

    हालांकि, इस घटना के बाद बच्चे की स्थिति गंभीर थी, लेकिन उसे इंदौर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया गया, जहां प्लास्टिक सर्जन की टीम ने ऑपरेशन कर कटे हुए अंगूठे को सफलतापूर्वक ठीक कर दिया। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि बच्चे की हालत स्थिर है और उसे निगरानी में रखा गया है।

    पहले भी विवादों में रहा अस्पताल

    यह पहला मामला नहीं है, जब एमवाय अस्पताल विवादों में आया हो। इससे पहले भी नवजात बच्चों को चूहों द्वारा कुतरे जाने की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। लगातार ऐसी लापरवाहियां सामने आने के बाद अब अस्पताल प्रशासन को सख्त कार्रवाई की जरूरत है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों का विश्वास बना रहे।

  • मऊगंज में खाकी का गवाह घोटाला: पुलिस के 'सुपर गवाह' ने खोला तंत्र का कच्चा चिट्ठा, 1000 मुकदमे और सिर्फ 6 चेहरे

    मऊगंज में खाकी का गवाह घोटाला: पुलिस के 'सुपर गवाह' ने खोला तंत्र का कच्चा चिट्ठा, 1000 मुकदमे और सिर्फ 6 चेहरे


    मऊगंज । मऊगंज अभय मिश्रा मऊगंज जिले के नईगढ़ी और लौर थाने में पुलिस द्वारा गवाहों के नाम पर एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है जो ना सिर्फ कानून की धज्जियां उड़ाने वाला है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। यहां पर ऐसे सुपर गवाह सामने आए हैं, जो एक ही दिन में 7-7 मुकदमों में गवाही देते हैं और हर मामले में वही चेहरा दिखाई देता है। इन गवाहों में प्रमुख नाम है अमित कुशवाहा का जो अब तक 500 से ज्यादा मामलों में गवाही दे चुका है।

    गवाहों के नाम पर खेल

    अमित कुशवाहा, जो खुद एक सरकारी वाहन चालक है, मऊगंज पुलिस के पॉकेट गवाह के रूप में सामने आया है। आश्चर्यजनक रूप से, 2020 की एक FIR में उसकी उम्र 20 साल दर्ज की जाती है, जबकि 5 साल बाद 2025 की FIR में उसकी उम्र केवल 21 साल बताई जाती है। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या मऊगंज पुलिस ने जानबूझकर यह गवाह तैयार किया है। RTI के जवाब में पुलिस ने दावा किया था कि अमित कुशवाहा उनका वाहन चालक नहीं है, लेकिन जब उसे सरकारी गाड़ी चलाते पकड़ा गया तो यह सफाई पूरी तरह से झूठी साबित हो गई। इसके अलावा यह भी तथ्य सामने आया है कि अमित कुशवाहा थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर के साथ हमेशा रहता है और जहां-जहां साहब का तबादला होता है वह गवाही देने पहुंच जाता है।

    पुलिसिया तंत्र की पोल
    टीम ने यह भी खुलासा किया कि गवाही देने वाले इसी पॉकेट गवाह के जरिए पुलिस ने दर्जनों निर्दोषों को सलाखों के पीछे डाला। उदाहरण के तौर पर जहरीली शराब मामले में 20 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई जिसमें अमित कुशवाहा गवाह बना। यह मामला सिर्फ एक उदाहरण था क्योंकि ऐसे कई मामलों में गवाह वही चेहरा नजर आता है जिससे पुलिस ने तंत्र को पूरी तरह से मजाक बना दिया। नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर का नाम इस पूरे खेल में सबसे ऊपर है, क्योंकि उनके कार्यकाल में गवाहों के इस सिंडिकेट का पूरी तरह से विस्तार हुआ। इनका ट्रैक रिकॉर्ड विवादों से भरा पड़ा है जिसमें बिछिया थाने में एक निर्दोष व्यक्ति की पिटाई के मामले में मानवाधिकार आयोग ने जुर्माना लगाया था लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    किसकी हो रही है सुनवाई

    मऊगंज के इस मामले में आरोप है कि पुलिस ने 80 साल के बुजुर्ग नंदकुमार तिवारी को आधी रात को लॉकअप में डाल दिया। उनके खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं था बस उन्होंने पुलिस की रात में मौजूदगी पर सवाल उठाया था। वायरल ऑडियो में पुलिसकर्मी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उनके पास शराब नहीं बल्कि पेट्रोल था फिर भी आरोप आबकारी का बनाया गया और गवाह वही पुलिस का चहेता अमित कुशवाहा।

    सिंडीकेट का बड़ा खुलासा

    नईगढ़ी और लौर थाने में पॉकेट गवाहों की पूरी फौज खड़ी कर दी गई है, जिनमें राहुल विश्वकर्मा, दिनेश कुशवाहा जैसे नाम शामिल हैं, जो थाने में चपरासी तक के काम करते हैं। यह मामला अब राज्य की सियासत के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। समाजसेवी कुंजबिहारी तिवारी ने इस संगठित अपराध की शिकायत मुख्यमंत्री, डीजीपी, आईजी और लोकायुक्त से की है। उनके पास साक्ष्य और वीडियो प्रमाण हैं, जो पुलिस के खिलाफ गवाही दे रहे हैं।

    सीसीटीएनएस पोर्टल और मैनुअल जांच
    मऊगंज पुलिस का गवाह घोटाला अब सीसीटीएनएस पोर्टल के जरिए सामने आया है, जहां पर दर्ज डिजिटल रिकॉर्ड से इस पूरे तंत्र का खुलासा हुआ है। जानकारों का मानना है कि अगर मैनुअल FIR और पुरानी केस डायरियों की निष्पक्ष जांच की जाए तो यह आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है, जो मऊगंज के नईगढ़ी और लौर थाना पुलिस के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है।

    न्याय के गले में फंसा ताला
    क्या खाकी अब बेगुनाहों की जिंदगी से खेल रही है यह सवाल मऊगंज की पुलिस पर ही नहीं पूरे न्यायिक तंत्र पर भी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अमानुल्लाह ने हाल ही में पॉकेट गवाहों पर सख्त टिप्पणी करते हुए इसे न्याय का कत्ल बताया था लेकिन मऊगंज का यह मामला पूरी तरह से पुलिसिया तंत्र की पोल खोलने का काम कर रहा है। अब सवाल यह है कि इस घोटाले पर कब कार्रवाई होगी ।