Category: Madhya Pradesh

  • MP: शिवपुरी में हैंडपंप के पानी से बीमार हुआ व्यक्ति.. समाधान के बजाए नोटिस चिपकाकर निकल गए अधिकारी

    MP: शिवपुरी में हैंडपंप के पानी से बीमार हुआ व्यक्ति.. समाधान के बजाए नोटिस चिपकाकर निकल गए अधिकारी


    शिवपुरी।
    इंदौर के भागीरथपुरा (Indore Bhagirathpura) में दूषित पानी (Contaminated Water) से मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी (Shivpuri) से दूषित पानी पीने से एक युवक के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। शिवपुरी जिले के पोहरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भटनावार के मठ गांव में हैंडपंप (Handpump) के दूषित पानी से एक युवक की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद विभाग की लापरवाही देखिए, जब ग्रामीणों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सूचना दी, तो विभागीय अमला मौके पर पहुंचा, लेकिन समाधान के बजाय हैंडपंप पर केवल “पानी पीने योग्य नहीं है” लिखकर लौट गया।

    इसके बावजूद ग्रामीणों को मजबूरी में उसी दूषित पानी को छानकर पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी का कोई दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है, ऐसे में रोक के बाद भी उन्हें इसी हैंडपंप के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पेयजल का एकमात्र स्रोत यही हैंडपंप था। इसी का पानी पीने से रोहित पुरी गोस्वामी बीमार हुए थे। अब हैंडपंप के उपयोग पर रोक लगने और वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को सिर्फ चेतावनी देने के बजाय शुद्ध पानी की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

    दुलारा पंचायत के सरपंच दिनेश धाकड़ ने विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पूरी पंचायत में कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुछ हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने से पानी निकल सकता है, लेकिन इस संबंध में दी गई कई लिखित शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मामले में PHE विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम गुप्ता ने कहा कि दुलारा पंचायत और मठ गांव में जांच के लिए एसडीओ को भेजा जाएगा। जांच के बाद पेयजल समस्या के समाधान के लिए व्यावहारिक विकल्पों पर विचार कर ग्रामीणों को राहत दी जाएगी।

  • इंदौर में ई-रिक्शा संचालन में बदलाव: सात सेक्टर में बांटकर शुरू होगी नई व्यवस्था

    इंदौर में ई-रिक्शा संचालन में बदलाव: सात सेक्टर में बांटकर शुरू होगी नई व्यवस्था


    इंदौर । शहर में ई-रिक्शा के बढ़ते संचालन को नियंत्रित करने के लिए अब नई व्यवस्था लागू की जा रही है। शहर को सात सेक्टरों में बांटा जाएगा, और हर ई-रिक्शा के लिए एक सीमित क्षेत्र निर्धारित मार्ग और रंग आधारित पहचान लागू की जाएगी। इस बदलाव का उद्देश्य ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित सुरक्षित और सुगम बनाना है।

    पुलिस उपायुक्त यातायात, आनंद कलादगी की अध्यक्षता में बुधवार को पलासिया स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में एक बैठक हुई जिसमें इस योजना के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि सेक्टरों में ई-रिक्शा के संचालन के लिए 30 दिन की तैयारी अवधि होगी जिसके बाद एक महीने का ट्रायल रन शुरू होगा। ट्रायल के दौरान यदि किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न होती है तो आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

    ई-रिक्शा चालकों को अपनी गाड़ी से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर, सेक्टर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए अगले दो दिनों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविर में पंजीकरण प्रक्रिया पहले आएं पहले पाएं नीति के तहत होगी और इसमें चालकों को उनके इलाके के अनुसार सेक्टर का चयन करने का अवसर मिलेगा। पंजीकरण के बाद चालकों को सीरियल नंबर वाला स्टीकर दिया जाएगा जिस पर सेक्टर का नाम वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और सीरियल नंबर अंकित होगा।

    नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक सेक्टर में 20 से 25 किमी तक के रूट निर्धारित किए जाएंगे और स्टैंड भी तय किए जाएंगे। ई-रिक्शा की पहचान को और सरल बनाने के लिए प्रत्येक वाहन के आगे-पीछे एक विशेष स्टीकर लगाया जाएगा जो सवारी और निगरानी के लिए मददगार होगा। साथ ही हर सेक्टर के लिए सात अलग-अलग रंगों का कोड होगा जिससे पहचान में आसानी होगी।

    इस योजना के बारे में इंदौर बैटरी रिक्शा चालक महासंघ के संस्थापक राजेश बिड़कर ने असंतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि कुछ कार्यकर्ता इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और 12 जनवरी को ई-रिक्शा बंद करने की घोषणा की है। वे सुबह 11 बजे गांधी हाल परिसर में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।आगामी 15 दिनों में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, और फिर अगले 10 दिनों में सेक्टर और स्टीकर वितरण की प्रक्रिया की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो भविष्य में सेक्टर व्यवस्था में सुधार किए जा सकते हैं।

  • बड़ा खुलासा… मप्र के गांवों में मिल रहा पानी लोगों के इस्तेमाल के लायक नहीं

    बड़ा खुलासा… मप्र के गांवों में मिल रहा पानी लोगों के इस्तेमाल के लायक नहीं


    भोपाल।
    इंदौर के भागीरथपुरा (Bhagirathpura, Indore) में काल बने पीने के पानी ने अब तक 20 लोगों की जिंदगियां लील ली हैं और जो इससे बच गए, उनका अस्पताल में इलाज जारी है। सरकार कटघरे में है तो विपक्ष भी इस मुद्दे पर हावी है। इस बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गांवों (Villages) में पीने के पानी (Drinking water) पर आई एक रिपोर्ट आपको भी हैरान कर देगी। केंद्र सरकार के ‘जल जीवन मिशन’ (‘Jal Jeevan Mission’) की एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक-तिहाई से अधिक पीने का पानी इंसानों के इस्तेमाल के लायक नहीं है, जिससे लाखों लोग अनदेखे लेकिन जानलेवा खतरों की चपेट में हैं।


    रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

    4 जनवरी 2026 को जारी ‘फंक्शनैलिटी असेसमेंट रिपोर्ट’ (कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्ट) के अनुसार मध्य प्रदेश में पानी के केवल 63.3% नमूने ही गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 76% है। इसका मतलब है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में 36.7% पानी के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। इनमें हानिकारक बैक्टीरिया (कीटाणु) या रासायनिक मिलावट पाई गई है। ये नमूने सितंबर-अक्टूबर 2024 के दौरान मध्य प्रदेश के 15,000 से अधिक ग्रामीण घरों से इकट्ठा किए गए थे।

    यह स्थिति उन जगहों पर और भी अधिक चिंताजनक है जो सुरक्षा और इलाज के लिए बनी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में पानी के केवल 12% नमूने ही सूक्ष्मजीवविज्ञानी (microbiological) सुरक्षा जांच में पास हो पाए, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 83.1% है। इसका मतलब है कि मध्य प्रदेश के लगभग 88% अस्पतालों में मरीजों को असुरक्षित पानी दिया जा रहा है। स्कूलों में 26.7% नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट में फेल हो गए, जिससे बच्चे हर दिन दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।


    इन जिलों की हालत सबसे खराब

    अनूपपुर और डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में स्थिति सबसे खराब है, जहां एक भी पानी का नमूना सुरक्षित नहीं पाया गया। बालाघाट, बैतुल और छिंदवाड़ा में 50% से अधिक पानी के नमूने दूषित मिले हैं। मध्य प्रदेश में केवल 31.5% घरों में नल के कनेक्शन हैं, जो कि 70.9% के राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। जहां पाइपलाइन बिछी भी है, वहां व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है; राज्य के 99.1% गांवों में पाइप से जलापूर्ति की व्यवस्था तो है, लेकिन केवल 76.6% घरों में ही चालू हालत में नल लगे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हर चौथे घर में या तो नल खराब है या पानी ही नहीं आता।


    नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं….

    इससे भी बदतर बात यह है कि नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं है। इंदौर जिला, जिसे आधिकारिक तौर पर 100% नल कनेक्शन वाला घोषित किया गया है, वहां भी केवल 33% घरों को ही सुरक्षित पीने का पानी मिल रहा है। पूरे राज्य में 33% पानी के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हो गए, जो इस बात की पुष्टि करता है कि संकट केवल पानी की पहुंच का नहीं, बल्कि ‘जहरीली सप्लाई’ का है। केंद्र सरकार ने इस स्थिति को “सिस्टम की ओर से पैदा की गई आपदा” करार दिया है और चेतावनी दी है कि यदि पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो इस साल फंड (बजट) में कटौती की जा सकती है।

    यह चेतावनी एक बड़ी त्रासदी के बाद आई है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत हो गई। 429 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से 16 आईसीयू (ICU) में हैं और तीन वेंटिलेटर पर हैं। अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने औपचारिक रूप से इस संकट को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ (सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल) घोषित कर दिया है। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि “अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में साफ पीने का पानी पाने का अधिकार भी शामिल है” और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दायरे में आती है।

  • एम.पी. ट्रांसको की नई डिजिटल पहल: पेंशनर्स को वेबसाइट पर उपलब्ध होगी पेंशन स्लिप

    एम.पी. ट्रांसको की नई डिजिटल पहल: पेंशनर्स को वेबसाइट पर उपलब्ध होगी पेंशन स्लिप

    मध्यप्रदेश। पावर ट्रांसमिशन कंपनीएम.पी. ट्रांसको ने अपने पेंशनर्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की है। कंपनी की आईटी सेल एवं पेंशन विभाग की संयुक्त टीम के प्रयासों से अब एम.पी. ट्रांसको के तकरीबन 4500 पेंशनर्स, चाहे वो किसी भी बैंक से पेंशन प्राप्त करते हों, कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी पेंशन स्लिप ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।

    एम.पी. ट्रांसको के मुख्य वित्तीय अधिकारी श्री मुकुल मेहरोत्रा ने बताया कि अब तक केवल यूनियन बैंक से पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनर्स को ही वेबसाइट पर पेंशन स्लिप उपलब्ध कराने की सुविधा थी। लेकिन अब भारतीय स्टेट बैंक सहित अन्य बैंकों से पेंशन लेने वाले पेंशनर्स के लिए भी यह व्यवस्था सफलतापूर्वक विकसित कर ली गई है।

    ऐसे प्राप्त करें स्लिप

    कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध पेंशन पोर्टल में पेंशन स्लिप प्राप्त करें नामक विकल्प जोड़ा गया है। इसके माध्यम से पेंशनर अपने न्यूमेरिक पीपीओ नंबरबैंक खाता संख्या तथा माह का चयन कर आसानी से पेंशन स्लिप ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में दिसंबर 2025 से संबंधित पेंशन स्लिप उपलब्ध कराई गई हैं, शीध्र ही वर्ष 2025 से पूर्व अवधि की पेंशन स्लिप भी वेबसाइट पर उपलब्ध करवा दी जायेगी।

  • मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में नव नियुक्त सहायक अभियंता व केमिस्ट का प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ

    मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में नव नियुक्त सहायक अभियंता व केमिस्ट का प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ


    मध्यप्रदेश । पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेडMPPGCL के नवनियुक्त 16 सहायक अभियंताओंप्लांट एवं केमिस्ट के प्रथम बैच का छह सप्ताह का आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थानएनपीटीआई नागपुर में प्रारंभ हो गया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कंपनी में नव नियुक्त तकनीकी अधिकारियों को आधुनिक विद्युत उत्पादन तकनीकों संचालन प्रक्रियाओं एवं पर्यावरणीय मानकों की व्यावहारिक समझ प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

    छह सप्ताह की अवधि वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहायक अभियंताओं को ताप विद्युत एवं जल विद्युत संयंत्रों के संचालनऑपरेशन और संधारणमेंटेनेंस से संबंधित विस्तृत एवं गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान अभियंताओं को विद्युत उत्पादन की विभिन्न प्रणालियों उपकरणों की कार्यप्रणाली सुरक्षा मानकों तथा तकनीकी चुनौतियों से अवगत कराया जाएगा ताकि वे भविष्य में पावर प्लांट संचालन की जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर सकें।प्रशिक्षण कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि के रूप में सहायक अभियंताओं को दो सप्ताह का विशेष सुपर-क्रिटिकल सिम्युलेटर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण के माध्यम से अभियंताओं को अत्याधुनिक सुपर-क्रिटिकल तकनीक पर आधारित विद्युत संयंत्रों के संचालन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण से अभियंता वास्तविक परिस्थितियों में आने वाली तकनीकी समस्याओं का समाधान करना सीखेंगे जिससे उनके निर्णय लेने की क्षमता और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।

    वहीं नवनियुक्त केमिस्टों को प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जल रसायनवॉटर केमिस्ट्री कोयला परीक्षणकोल टेस्टिंग बॉयलर एवं कूलिंग सिस्टम से संबंधित रासायनिक प्रक्रियाओं तथा पर्यावरणीय कारकों के परीक्षण का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें प्रदूषण नियंत्रण उत्सर्जन मानकों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवीनतम नियमों एवं प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी जाएगी जिससे विद्युत उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सके।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर एनपीटीआई नागपुर के प्रमुख निदेशक श्री रामचन्द्र उकिरदे ने कहा कि इस प्रशिक्षण सत्र का पाठ्यक्रम इस प्रकार तैयार किया गया है कि सहायक अभियंता ताप एवं जल विद्युत गृहों के संचालन और संधारण कार्यों में समान रूप से दक्षता प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विद्युत उत्पादन की नवीन तकनीकों के साथ-साथ पर्यावरणीय बारीकियों गुणवत्ता मानकों एवं सुरक्षा उपायों की भी गहन जानकारी दी जाएगी।उन्होंने यह भी बताया कि एनपीटीआई का उद्देश्य ऐसे कुशल और जिम्मेदार तकनीकी अधिकारी तैयार करना है जो देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को भी ध्यान में रखें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल प्रतिभागियों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाएगा बल्कि उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए भी तैयार करेगा।

  • शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे सरकार का बड़ा फैसला

    शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे सरकार का बड़ा फैसला


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश शासन के परिवहन विभाग ने शासकीय विभागों, निगमों एवं निकायों द्वारा विभिन्न प्रयोजनों के लिए अनुबंधित किए जाने वाले वाहनों के संबंध में नवीन निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेशानुसार अब बगैर वैध दस्तावेजों के किसी भी वाहन को शासकीय कार्यालयों में उपयोग में नहीं लिया जाएगा।

    शासकीय विभागों द्वारा सीधे अथवा निजी एजेंसियों के माध्यम से उपयोग में लाए जाने वाले मालवाहक एवं यात्री वाहनों के सभी वैधानिक दस्तावेज अनुबंध से पूर्व और वाहन उपयोग की संपूर्ण अवधि के दौरान वैध होना अनिवार्य होगा। साथ ही, विभागों को भुगतान से पहले भी इन दस्तावेजों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    परिवहन विभाग ने यह भी निर्देश दिये है कि खनिज अथवा अन्य सामग्री के परिवहन के लिये जारी की जाने वाली अनुमति संबंधित वाहन की निर्धारित क्षमता से अधिक नहीं होनी चाहिए। अनुबंधित वाहनों द्वारा नियमानुसार मोटरयान कर का भुगतान किया गया होना चाहिए।

    ई-मेल से भीप्राप्‍त कर स‍कते हैं मार्गदर्शन

    सभी विभागों, निगमों एवं निकायों को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वे अपने यहां अनुबंधित अथवा एजेंसियों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे वाहनों के संबंध में परिवहन आयुक्त कार्यालय, मध्यप्रदेश, ग्वालियर से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए ई-मेल आईडी [email protected] पर पत्र प्रेषित किया जा सकता है।

  • मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को: सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद

    मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को: सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘विकसित एम.पी. @2047’विज़न को सकारात्मक गति देने और अधिक सुदृढ़ करने के साथ ही स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को अगले स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से 11 एवं 12 जनवरी 2026 को रवींद्र भवन, भोपाल में मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 2026 का आयोजन होने जा रहा है। सोमवार 12 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसमें सहभागिता करेंगे। समिट में राज्य एवं देश भर से स्टार्ट-अप्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, उद्योग प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थान एवं अन्य हितधारक सहभागिता करेंगे। यह समिट स्टार्ट-अप्स को निवेश, नेटवर्किंग, नीति संवाद एवं नवाचार प्रदर्शन का एक सशक्त मंच प्रदान करेगी।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति–2025 का फ़रवरी 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में विमोचन के साथ राज्य में नवाचार एवं उद्यमिता को एक नई दिशा प्राप्त हुई। नीति के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप प्रदेश के स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान एवं तीव्र गति प्राप्त हुई है। नवीन नीति से स्टार्ट-अप्स के प्रत्येक चरण के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, निवेश, पेटेंट सहयोग एवं बाजार से जुड़ाव जैसे अनेक सशक्त प्रावधान सुनिश्चित किए गए, जिससे प्रदेश में नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को गति मिली है।

    आयुक्त एमएसएमई श्री दिलीप कुमार ने स्टार्ट-अप्स, नव प्रवर्तकों, उद्यमियों, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स एवं स्टार्ट-अप इको-सिस्टम से जुड़े हितधारकों का आह्वान किया है कि वे इस स्टार्ट-अप समिट में सक्रिय रूप से सहभागिता करें। आयुक्त एमएसएमई ने कहा कि स्टार्ट-अप्स नवाचार-आधारित विकास एवं रोजगार सृजन की आधारशिला है। यह समिट स्टार्ट-अप्स के लिए अपने विचारों, उत्पादों एवं समाधानों को प्रदर्शित करने, निवेशकों एवं नीति-निर्माताओं से संवाद स्थापित करने तथा मध्यप्रदेश के सशक्त स्टार्ट-अप इको-सिस्टम का हिस्सा बनने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

  • भोपाल में मातम: बैंक क्लर्क ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में खुद को बताया जिम्मेदार।

    भोपाल में मातम: बैंक क्लर्क ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में खुद को बताया जिम्मेदार।


    भोपाल । राजधानी भोपाल के व्यस्ततम एमपी नगर इलाके से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है जहां जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। भारतीय स्टेट बैंक SBI में क्लर्क के पद पर कार्यरत 35 वर्षीय अभिनाष जैन ने मंगलवार को चेतक ब्रिज के नीचे ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना उस समय हुई जब ऑफिस में उनका अपनी पत्नी के साथ किसी बात को लेकर तीखा विवाद हुआ था।

    दफ्तर से निकले और फिर कभी नहीं लौटे जानकारी के अनुसार लाला लाजपत राय कॉलोनी निवासी अभिनाष जैन और उनकी पत्नी रोली जैन दोनों ही मैदा मील स्थित एसबीआई की एक ही शाखा में कार्यरत थे। मंगलवार की सुबह दोनों हमेशा की तरह साथ में घर से दफ्तर के लिए निकले थे लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात होगी। ऑफिस पहुंचने के बाद पति-पत्नी के बीच किसी गंभीर विषय पर बहस हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक विवाद के बाद अभिनाष मानसिक रूप से काफी विचलित हो गए और अचानक बैंक से बाहर निकल गए।

    व्हाट्सएप पर अंतिम विदाई: अब कभी वापस नहीं आऊंगा बैंक से निकलने के कुछ ही समय बाद अभिनाष ने अपने पिता भाई और पत्नी को व्हाट्सएप पर एक भावुक संदेश भेजा। इस संदेश को सुसाइड नोट के रूप में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि वे अब कभी वापस नहीं लौटेंगे और अपने इस कठोर फैसले के लिए वे किसी और को नहीं बल्कि स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं। संदेश भेजने के तुरंत बाद उन्होंने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया जिससे परिजनों में हड़कंप मच गया। घबराए हुए परिजनों ने तत्काल एमपी नगर पुलिस को इसकी सूचना दी जिसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की।

    चेतक ब्रिज के पास मिला क्षत-विक्षत शव पुलिस और परिजन जब शहर के विभिन्न कोनों में अभिनाष की तलाश कर रहे थे तभी चेतक ब्रिज के पास रेलवे ट्रैक पर लोगों की भारी भीड़ जमा होने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे मृतक के साले ने कपड़ों और हुलिए से अभिनाष की पहचान की। ट्रेन की चपेट में आने के कारण शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुका था। सूचना मिलते ही एमपी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल रवाना किया।

    जांच के घेरे में वो आखिरी विवाद पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। एएसआई अनूप के अनुसार प्राथमिक तौर पर यह मामला आत्महत्या का ही है लेकिन पुलिस उस विवाद की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जो बैंक परिसर में पति-पत्नी के बीच हुआ था। क्या तनाव केवल उस क्षण का था या लंबे समय से कोई पारिवारिक कलह चल रही थी पुलिस इन सभी बिंदुओं पर परिजनों के बयान दर्ज करेगी। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।यह दुखद घटना समाज में बढ़ते मानसिक तनाव और छोटी-छोटी बातों पर उपजे विवादों के भयावह परिणाम की याद दिलाती है। एक सुरक्षित भविष्य और प्रतिष्ठित नौकरी होने के बावजूद क्षणिक आवेश ने एक युवा जीवन का अंत कर दिया।

  • अंबेडकर पोस्टर प्रकरण: अनिल मिश्रा को हाईकोर्ट से जमानत, तत्काल रिहाई..

    अंबेडकर पोस्टर प्रकरण: अनिल मिश्रा को हाईकोर्ट से जमानत, तत्काल रिहाई..


    ग्वालियर। हाईकोर्ट ने डॉ. भीमराव अंबेडकर का पोस्टर जलाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए एडवोकेट अनिल मिश्रा को बड़ी राहत दी है। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें एक लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड और समान राशि की जमानत पर तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया। चार दिनों से न्यायिक हिरासत में बंद मिश्रा की रिहाई अब सुनिश्चित हो गई है यह मामला ग्वालियर से जुड़ा है, जहां सोशल मीडिया पर कथित पोस्टर जलाने की घटना के बाद साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई की। इस प्रकरण में अनिल मिश्रा समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

    हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर जताई आपत्ति

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि एफआईआर में उल्लिखित तथ्यों के आधार पर अनिल मिश्रा को नोटिस देकर पूछताछ की जा सकती थी। हिरासत लेना अंतिम विकल्प होना चाहिए था, जबकि इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी से पहले वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की गई, जो व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा संवेदनशील विषय है।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इसी आधार पर जमानत प्रदान की गई। हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि अन्य सह-आरोपियों को भी राहत मिल सकती है, बशर्ते उनके मामलों में परिस्थितियां समान हों।

    एफआईआर रद्द करने की मांग पर अलग सुनवाई
    अनिल मिश्रा की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि दर्ज एफआईआर कानूनन टिकाऊ नहीं है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर निरस्त करने की मांग को अलग प्रक्रिया के तहत सुना जाएगा। फिलहाल केवल जमानत याचिका पर निर्णय लेते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया गया।

    पुलिस जांच जारी

    ग्वालियर साइबर पुलिस का कहना है कि प्रकरण की जांच अभी भी जारी है और सोशल मीडिया से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली पर जवाबदेह रहना होगा।

    कानूनी हलकों में चर्चा

    इस फैसले के बाद प्रदेश के कानूनी और अधिवक्ता समुदाय में चर्चा तेज हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गिरफ्तारी की वैधानिक सीमाओं को रेखांकित करता है। पुलिस को यह संदेश जाता है कि संवेदनशील मामलों में भी कानून की प्रक्रिया से समझौता नहीं किया जा सकता।
  • ग्वालियर गैंगवार35 गोलियां चलीं. 10 हजार के इनामी बदमाश की गिरफ्तारी

    ग्वालियर गैंगवार35 गोलियां चलीं. 10 हजार के इनामी बदमाश की गिरफ्तारी


    ग्वालियर। ग्वालियर में दो महीने पहले घासमंडी क्षेत्र के कोटेश्वर रोड पर हुई गैंगवार में 35 गोलियां चली थीं। इस घटना में हवलदार के बेटे विजय गौड़ और एक अन्य युवक हाकिम सिंह बघेल घायल हो गए थे। यह हमलावर बदमाशों के गैंग रिंकू कमरिया से जुड़े थे जो वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गुस्से में थे। अब इस गैंग के 10 हजार के इनामी बदमाश मनीष यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    गैंगवार और गोलियां

    यह घटना रविवार रात की थी जब विजय गौड़ अपने दोस्त बल्लू सरदार और हाकिम सिंह के साथ कार से घासमंडी क्षेत्र में जा रहे थे। वापस लौटते समय उनका सामना रिंकू कमरिया गैंग से हुआ जिसमें अन्नी कमरिया छोटू कमरिया मनीष यादव चेतन पांडेय प्रियांशु अनिल कमरिया कालू कमरिया और रमेश कमरिया शामिल थे। बदमाशों ने कार को घेर लिया और 15 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें 35 गोलियां चलाई गईं। इस हमले में विजय गौड़ को तीन और हाकिम सिंह को एक गोली लगी। इसके बाद सभी बदमाश फरार हो गए थे।

    लेन-देन का विवाद और रिंकू कमरिया

    पुलिस जांच में पता चला कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर हुआ था। विजय गौड़ ने पुलिस को बताया कि रिंकू कमरिया उससे कई बार पैसे मांगने के बावजूद रुपए नहीं लौटा रहा था। उसने धमकी दी थी कि अगर पैसे मांगे तो वह गोली मार देगा। रिंकू कमरिया जो एक लिस्टेड बदमाश है पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है जिनमें फायरिंग मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामले दर्ज हैं।

    गिरफ्तारी और फरार आरोपी

    पुलिस को सूचना मिली कि मनीष यादव जो इस मामले में मुख्य आरोपी था घासमंडी चौराहे के पास देखा गया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। जब मनीष यादव ने पुलिस को देखा तो उसने भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस की सतर्कता से उसे पकड़ लिया गया। मनीष यादव की पहचान बुलबुलपुरा मिर्जापुर के निवासी के रूप में हुई।इस गैंगवार के मास्टरमाइंड रिंकू कमरिया समेत 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि एक और आरोपी राहुल फौजी अब भी फरार है जिसकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।ग्वालियर में हुए इस गैंगवार ने न केवल पुलिस की सतर्कता को चुनौती दी बल्कि यह भी साबित किया कि अपराधी समूहों में वर्चस्व की लड़ाई और लेन-देन के विवाद किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं।

    इस घटना के बाद पुलिस अब पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और सभी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
    में दो महीने पहले घासमंडी क्षेत्र के कोटेश्वर रोड पर हुई गैंगवार में 35 गोलियां चली थीं। इस घटना में हवलदार के बेटे विजय गौड़ और एक अन्य युवक हाकिम सिंह बघेल घायल हो गए थे। यह हमलावर बदमाशों के गैंग रिंकू कमरिया से जुड़े थे जो वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गुस्से में थे। अब इस गैंग के 10 हजार के इनामी बदमाश मनीष यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    गैंगवार और गोलियां

    यह घटना रविवार रात की थी जब विजय गौड़ अपने दोस्त बल्लू सरदार और हाकिम सिंह के साथ कार से घासमंडी क्षेत्र में जा रहे थे। वापस लौटते समय उनका सामना रिंकू कमरिया गैंग से हुआ जिसमें अन्नी कमरिया छोटू कमरिया मनीष यादव चेतन पांडेय प्रियांशु अनिल कमरिया कालू कमरिया और रमेश कमरिया शामिल थे। बदमाशों ने कार को घेर लिया और 15 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें 35 गोलियां चलाई गईं। इस हमले में विजय गौड़ को तीन और हाकिम सिंह को एक गोली लगी। इसके बाद सभी बदमाश फरार हो गए थे।

    लेन-देन का विवाद और रिंकू कमरिया

    पुलिस जांच में पता चला कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर हुआ था। विजय गौड़ ने पुलिस को बताया कि रिंकू कमरिया उससे कई बार पैसे मांगने के बावजूद रुपए नहीं लौटा रहा था। उसने धमकी दी थी कि अगर पैसे मांगे तो वह गोली मार देगा। रिंकू कमरिया जो एक लिस्टेड बदमाश है पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है जिनमें फायरिंग मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामले दर्ज हैं।

    गिरफ्तारी और फरार आरोपी

    पुलिस को सूचना मिली कि मनीष यादव जो इस मामले में मुख्य आरोपी था घासमंडी चौराहे के पास देखा गया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। जब मनीष यादव ने पुलिस को देखा तो उसने भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस की सतर्कता से उसे पकड़ लिया गया। मनीष यादव की पहचान बुलबुलपुरा मिर्जापुर के निवासी के रूप में हुई।इस गैंगवार के मास्टरमाइंड रिंकू कमरिया समेत 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि एक और आरोपी राहुल फौजी अब भी फरार है जिसकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।

    ग्वालियर में हुए इस गैंगवार ने न केवल पुलिस की सतर्कता को चुनौती दी बल्कि यह भी साबित किया कि अपराधी समूहों में वर्चस्व की लड़ाई और लेन-देन के विवाद किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं। इस घटना के बाद पुलिस अब पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और सभी फरारआरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। में दो महीने पहले घासमंडी क्षेत्र के कोटेश्वर रोड पर हुई गैंगवार में 35 गोलियां चली थीं। इस घटना में हवलदार के बेटे विजय गौड़ और एक अन्य युवक हाकिम सिंह बघेल घायल हो गए थे। यह हमलावर बदमाशों के गैंग रिंकू कमरिया से जुड़े थे जो वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गुस्से में थे। अब इस गैंग के 10 हजार के इनामी बदमाश मनीष यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    गैंगवार और गोलियां

    यह घटना रविवार रात की थी जब विजय गौड़ अपने दोस्त बल्लू सरदार और हाकिम सिंह के साथ कार से घासमंडी क्षेत्र में जा रहे थे। वापस लौटते समय उनका सामना रिंकू कमरिया गैंग से हुआ जिसमें अन्नी कमरिया छोटू कमरिया मनीष यादव चेतन पांडेय प्रियांशु अनिल कमरिया कालू कमरिया और रमेश कमरिया शामिल थे। बदमाशों ने कार को घेर लिया और 15 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें 35 गोलियां चलाई गईं। इस हमले में विजय गौड़ को तीन और हाकिम सिंह को एक गोली लगी। इसके बाद सभी बदमाश फरार हो गए थे।

    लेन-देन का विवाद और रिंकू कमरिया

    पुलिस जांच में पता चला कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर हुआ था। विजय गौड़ ने पुलिस को बताया कि रिंकू कमरिया उससे कई बार पैसे मांगने के बावजूद रुपए नहीं लौटा रहा था। उसने धमकी दी थी कि अगर पैसे मांगे तो वह गोली मार देगा। रिंकू कमरिया जो एक लिस्टेड बदमाश है पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है जिनमें फायरिंग मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामले दर्ज हैं।

    गिरफ्तारी और फरार आरोपी

    पुलिस को सूचना मिली कि मनीष यादव जो इस मामले में मुख्य आरोपी था घासमंडी चौराहे के पास देखा गया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। जब मनीष यादव ने पुलिस को देखा तो उसने भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस की सतर्कता से उसे पकड़ लिया गया। मनीष यादव की पहचान बुलबुलपुरा मिर्जापुर के निवासी के रूप में हुई।

    इस गैंगवार के मास्टरमाइंड रिंकू कमरिया समेत 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि एक और आरोपी राहुल फौजी अब भी फरार है जिसकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।ग्वालियर में हुए इस गैंगवार ने न केवल पुलिस की सतर्कता को चुनौती दी बल्कि यह भी साबित किया कि अपराधी समूहों में वर्चस्व की लड़ाई और लेन-देन के विवाद किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं। इस घटना के बाद पुलिस अब पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और सभी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।