Category: Madhya Pradesh

  • मध्य प्रदेश कैलेंडर विवाद: हिरण की तस्वीर पर दिग्विजय सिंह और भाजपा में जुबानी जंग

    मध्य प्रदेश कैलेंडर विवाद: हिरण की तस्वीर पर दिग्विजय सिंह और भाजपा में जुबानी जंग


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कैलेंडर पर छपी एक हिरण की तस्वीर ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि कैलेंडर पर जिस हिरण का चित्र लगाया गया है, वह इम्पाला है, जो केवल अफ्रीका में पाया जाता है और न तो मध्य प्रदेश में मिलता है और न ही पूरे भारत में। दिग्विजय ने पोस्ट में लिखा, मुख्यमंत्री जी, जिस हिरण का चित्र आपने एमपी के कैलेंडर पर लगाया है वह एमपी में ही नहीं बल्कि भारत में भी नहीं पाया जाता। कृपया सोच-समझ कर शासकीय कैलेंडर पर चित्र लगवाया करें। जय सिया राम।”

    पूर्व मुख्यमंत्री के इस पोस्ट के बाद उनके बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने भी समर्थन जताया। जयवर्धन ने कहा कि मध्य प्रदेश एक वाइल्डलाइफ स्टेट है, बावजूद इसके कैलेंडर में विदेशी हिरण की तस्वीर छापी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें जमीनी स्तर की जानकारी नहीं है और इस कदम से बड़ी त्रुटि हुई है।

    भाजपा की ओर से पलटवार करते हुए प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस नेता बच्चों की पुलिस की तरह व्यवहार कर रहे हैं। सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल विरोध के लिए विरोध कर रही है और नकारात्मक राजनीति में लिप्त है। उन्होंने कहा कि मूल मुद्दों पर ध्यान न देकर ऐसे तुच्छ विवाद उठाना उनकी आदत बन गई है।

    यह विवाद इस बात को उजागर करता है कि सरकारी कैलेंडर और प्रतीकों को लेकर राजनीतिक दल कितनी तेजी से प्रतिक्रियाशील हो जाते हैं। दिग्विजय और जयवर्धन का तर्क है कि राज्य की पहचान और प्राकृतिक विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करना जरूरी है। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि ऐसे मुद्दों को राजनीतिक हथियार बनाना सही नहीं है।

    मध्य प्रदेश में वाइल्डलाइफ और जैवविविधता के संरक्षण को लेकर यह बहस एक नई दिशा में बढ़ सकती है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है। लेकिन इस विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सामाजिक मीडिया पर एक छोटी सी छवि भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला केवल कैलेंडर का नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सांस्कृतिक प्रतीकों और स्थानीय पहचान को लेकर बढ़ते मतभेद का संकेत है। इस मामले में जनता और मीडिया की नजरें अब इस पर टिकी हुई हैं कि सरकार इस मुद्दे का समाधान कैसे करती है और क्या भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए कदम उठाए जाते हैं।

  • खेल-खेल में हादसा: घड़ी का सेल निगलने के बाद बच्चे की जान बचाई डॉक्टरों ने

    खेल-खेल में हादसा: घड़ी का सेल निगलने के बाद बच्चे की जान बचाई डॉक्टरों ने


    खंडवा से बुधवार को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। बुरहानपुर निवासी 10 वर्षीय कृष्णा खेलते समय गलती से अपनी घड़ी का सेल निगल बैठा। छोटे बच्चे की लापरवाही एक बड़ी परेशानी बन गई, जब सेल गले के निचले हिस्से में फंस गया। कृष्णा को तेज दर्द, बेचैनी और सांस लेने में कठिनाई होने लगी, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।

    परिवार ने देखते ही बच्चे को जिला अस्पताल सह शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय खंडवा पहुंचाया। वहां के नाक-कान-गला विभाग (ईएनटी) में डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत एक्स-रे जांच कराई। जांच में स्पष्ट हुआ कि घड़ी का सेल आहार नली के निचले हिस्से में फंस गया है और यदि समय पर कार्रवाई न की जाए तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

    विभागाध्यक्ष और ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सुनील बाजोलिया ने तुरंत उपचार की कमान संभाली। उन्होंने अपनी टीम के साथ बिना समय गंवाए दूरबीन पद्धति यानी एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से ऑपरेशन शुरू किया। यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और जटिल थी, क्योंकि घड़ी का सेल गले के नाजुक हिस्से में फंसा हुआ था।

    करीब आधे घंटे की लगातार मेहनत और विशेषज्ञता के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की घड़ी का सेल सुरक्षित निकाल लिया। बच्चे की जान इस समय पूरी तरह सुरक्षित बताई जा रही है और वह अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट रहा है।

    डॉ. बाजोलिया ने बताया कि बच्चों की ऐसी लापरवाही अक्सर गंभीर परिणाम दे सकती है। खेलते समय छोटे सामान निगल जाने की घटनाएं आम हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से बड़ी अनहोनी टली जा सकती है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों पर नजर रखें और छोटे-छोटे खतरनाक सामान उनके हाथों से दूर रखें।

    इस घटना ने खंडवा अस्पताल की ईएनटी टीम की विशेषज्ञता और तत्परता को भी उजागर किया। बच्चे की स्थिति को देखते हुए तुरंत एक्स-रे, सही निदान और एंडोस्कोपिक प्रक्रिया ने मुश्किल हालात में भी जान बचाई। परिवार ने डॉक्टरों की सराहना की और कहा कि समय पर इलाज मिलने से बड़े हादसे से बचा जा सका।

    खेलते समय बच्चों की सुरक्षा और सतर्कता पर इस घटना ने एक बार फिर जोर दिया। अस्पताल अधिकारियों का कहना है कि समय रहते सही कदम उठाने से ऐसी अनहोनी टाली जा सकती है और छोटे-छोटे हादसे बड़े संकट में नहीं बदलते।

  • नौकरी जाने का तनाव, शराब और हादसा: भोपाल में सीढ़ियों से गिरकर युवक की मौत

    नौकरी जाने का तनाव, शराब और हादसा: भोपाल में सीढ़ियों से गिरकर युवक की मौत


    भोपाल  भोपाल के छोला मंदिर इलाके में गुरुवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में 36 वर्षीय मधुर नामदेव की मौत हो गई। वह कैंची छोला फाटक के पास अपने परिवार के साथ रहता था। जानकारी के अनुसार मधुर पूर्व में जिंसी स्थित एक कार शोरूम में ड्राइवर के रूप में कार्यरत था, लेकिन करीब दो महीने पहले उसकी नौकरी छूट गई थी। तब से वह नई नौकरी की तलाश में लगातार शोरूम और अन्य स्थानों पर रिज्यूमे दे रहा था, मगर सफलता नहीं मिल रही थी, जिससे वह मानसिक तनाव में रहने लगा था।

    गुरुवार रात वह शराब के नशे में घर लौटा। बताया जा रहा है कि दूसरी मंजिल पर जाने के लिए सीढ़ियां चढ़ते समय उसका संतुलन बिगड़ा और वह नीचे गिर गया। गिरने से उसके सिर में गंभीर चोट आई। परिजन उसे संभाल पाते, उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी। शुक्रवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि हादसा नशे की हालत में पैर फिसलने से हुआ। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। बेरोजगारी, मानसिक तनाव और नशे की बढ़ती आदत ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया, और यह घटना एक बार फिर सामाजिक व व्यक्तिगत दबावों के गंभीर परिणामों की ओर इशारा करती है।

  • ग्वालियर में हर्बल गुलाल की बढ़ती मांग, त्वचा और स्वास्थ्य बनी प्राथमिकता..

    ग्वालियर में हर्बल गुलाल की बढ़ती मांग, त्वचा और स्वास्थ्य बनी प्राथमिकता..

    ग्वालियर में होली का त्योहार अब सिर्फ चटख रंग और हुड़दंग तक सीमित नहीं रह गया है। शहर के लोग अब अपनी सेहत और त्वचा के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। इस जागरूकता के चलते इस बार बाजार में केमिकल वाले पक्के रंगों की जगह हर्बल और आर्गेनिक गुलाल ने ले ली है।

    हाट बाजार में हर्बल गुलाल की मांग में तेजी देखी जा रही है। दुकानदारों ने भी प्राकृतिक रंगों का भारी स्टॉक जमा कर लिया है। पिछले कुछ वर्षों के अनुभवों ने लोगों को सतर्क कर दिया है। पक्के रंगों में मौजूद कांच के कण, लेड और अन्य खतरनाक केमिकल्स त्वचा में जलन, आंखों में समस्या और सांस की बीमारियों का कारण बनते रहे हैं। शहर के त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि होली के बाद क्लीनिकों में आने वाले मरीजों की संख्या पहले बढ़ जाती थी, लेकिन अब लोग खुद ही सतर्क हो रहे हैं और हर्बल गुलाल का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    ठिकाना शहर के फूलबाग के पास हाट बाजार में इस बार विशेष हर्बल कार्नर सजाए गए हैं। यहां स्थानीय स्वयं सहायता समूह और कारीगरों द्वारा तैयार किए गए रंग उपलब्ध हैं। रंग बनाने में गेंदे के फूल, चुकंदर, पालक और हल्दी का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा चंदन और गुलाब की खुशबू वाले गुलाल की डिमांड सबसे अधिक है। ये गुलाल चेहरे पर लगने के बाद भी सौम्य रहते हैं और त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते।

    27 फरवरी यानी शुक्रवार से हाट बाजार में होली पर स्पेशल मेला आयोजित किया जा रहा है। इसमें महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार हर्बल रंग और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। विनीत गुप्ता, डीपीएम, जिला पंचायत ने बताया कि मेले में प्राकृतिक रूप से तैयार किए गए गुलाल और रंग खरीदारों को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे होली खेलने पर स्किन को नुकसान नहीं पहुंचे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में हर्बल के नाम पर नकली रंग भी मिल सकते हैं। असली हर्बल गुलाल पहचानने का तरीका सरल है। इसे हाथों पर लगाने पर हल्का महसूस होना चाहिए। इसकी महक तेज या चुभने वाली नहीं होनी चाहिए। पानी से हाथ धोने पर यह आसानी से निकल जाता है और कोई दाग नहीं छोड़ता। इस तरह से लोग नकली और असली हर्बल रंग में अंतर कर सकते हैं।

    इस वर्ष ग्वालियर में होली का त्योहार न केवल रंगों से बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ नजर आ रहा है। लोगों की जागरूकता और स्थानीय कारीगरों की भागीदारी से यह पर्व अब पूरी तरह से सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके से मनाया जा सकेगा।

  • गोवा हादसे में पिता की मौत, बेटी का दर्द छलका: बदला नहीं, इंसाफ चाहिए

    गोवा हादसे में पिता की मौत, बेटी का दर्द छलका: बदला नहीं, इंसाफ चाहिए


    नई दिल्ली। 23 फरवरी को जन्मदिन मनाने गोवा पहुंची रुचिका शर्मा के लिए यह तारीख हमेशा का जख्म बन गई। तेज रफ्तार थार की टक्कर में उनके पिता भगतराम शर्मा की मौत हो गई, मां लीला शर्मा गंभीर रूप से घायल हैं और तीन महीने की मासूम बच्ची भी चोटिल हुई। रुचिका का आरोप है कि हादसे के बाद आरोपी मदद करने के बजाय वीडियो बनाता रहा और एंबुलेंस बुलाने की जगह अपने पिता को फोन किया। परिवार का कहना है कि अगर उस वक्त संवेदनशीलता दिखाई जाती, तो शायद दर्द कुछ कम होता।

    परिजन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहते हैं कि भगतराम शर्मा की गर्दन टूटने और अंदरूनी रक्तस्राव से मौत हुई, जबकि मां की पेल्विस, पसलियों और कंधे में फ्रैक्चर है। गोवा पुलिस के मुताबिक गाड़ी शौर्य नामक युवक चला रहा था, उसे गिरफ्तार कर जमानत मिल चुकी है। परिवार का कहना है कि यह सिर्फ सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक पूरा परिवार टूटने की कहानी है। रुचिका ने कहा, “हमें बदला नहीं, इंसाफ चाहिए, ताकि कोई और बेटी अपने पिता को इस तरह न खोए।

  • ग्वालियर व्यापार मेला में टूटा 100 साल का रिकॉर्ड: 38 दिन में 32,787 वाहन पंजीकृत, कारों ने बाइक को पछाड़ा

    ग्वालियर व्यापार मेला में टूटा 100 साल का रिकॉर्ड: 38 दिन में 32,787 वाहन पंजीकृत, कारों ने बाइक को पछाड़ा


    नई दिल्ली। ग्वालियर व्यापार मेला इस बार 100 साल के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए ऑटोमोबाइल सेक्टर में नया इतिहास रच गया है। 38 दिनों तक चलने वाले मेले में कुल 32,787 वाहनों का पंजीयन हुआ, जिनमें 17,736 कारें और 15,051 दोपहिया वाहन शामिल थे। पांच साल पहले जहां कारों की बिक्री करीब 7,500 थी, अब यह संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई, जो शहर की बढ़ती क्रय शक्ति और चार पहिया वाहनों की ओर रुझान को दर्शाती है।

    मेले के दौरान रोड टैक्स में 50% तक की छूट, आसान फाइनेंस सुविधा और ऑन-द-स्पॉट पंजीयन जैसे ऑफर्स ने ग्राहकों को आकर्षित किया। अंतिम दिन तक 1,351 वाहनों का पंजीयन हुआ, जिससे बिक्री में निरंतर उत्साह बना रहा। हालांकि 50 लाख से 2 करोड़ रुपए तक की लग्जरी कारों की बिक्री में गिरावट देखी गई, केवल 62 कारें बिकीं।

    आरटीओ विक्रमजीत सिंह कंग ने बताया कि लोगों ने दोपहिया की बजाय चार पहिया वाहनों पर अधिक ध्यान दिया। वाहन डीलरों और फाइनेंस कंपनियों में रिकॉर्ड बिक्री से उत्साह देखा गया है और कोविड काल के बाद बाजार में आई सुस्ती अब पूरी तरह समाप्त होती नजर आ रही है। कुल मिलाकर, ग्वालियर व्यापार मेला ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए ऐतिहासिक और आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी का संकेत बन गया है।

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  • भोपाल में हाईवोल्टेज ड्रामा: ई-रिक्शा रोकने पर पत्नी ने निगली चूहामार दवा, बेकाबू पति ने पुलिस की बाइकें तोड़ीं!

    भोपाल में हाईवोल्टेज ड्रामा: ई-रिक्शा रोकने पर पत्नी ने निगली चूहामार दवा, बेकाबू पति ने पुलिस की बाइकें तोड़ीं!


    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार दोपहर उस वक्त कोहराम मच गया जब एक ई-रिक्शा चालक की पत्नी ने पुलिस की कथित बदसलूकी से तंग आकर सरेराह जहर खा लिया। घटना पुराने पुलिस कंट्रोल रूम तिराहे की है जहाँ नवल कुशवाह नामक युवक अपनी पत्नी पूजा के साथ जा रहा था। आरोप है कि वहां तैनात दो पुलिसकर्मियों ने सिग्नल तोड़ने का हवाला देते हुए रिक्शा रोका और नवल के साथ अभद्रता की। विवाद इतना बढ़ा कि पुलिसकर्मियों ने जब थाने चलने की धमकी दी तो घबराहट और गुस्से में आकर पूजा ने अपने पर्स में रखी चूहामार दवा निगल ली।

    पत्नी की बिगड़ती हालत देख नवल का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने बीच सड़क पर रिक्शा खड़ा कर जाम लगा दिया और उन पुलिसकर्मियों पर टूट पड़ा। हालात बिगड़ते देख दोनों जवान अपनी जान बचाकर पुराने कंट्रोल रूम के भीतर जा छिपे। बदहवास नवल ने वहीं ट्रैफिक चौकी के बाहर खड़ी पुलिस की बाइकों को पलट दिया और उनमें तोड़फोड़ शुरू कर दी। करीब 10 मिनट तक चले इस ड्रामे के दौरान पूजा रिक्शे में तड़पती रही” लेकिन नवल अड़ा रहा कि जब तक दोषी पुलिसकर्मी बाहर नहीं आते” वह अस्पताल नहीं जाएगा। अंततः” साथी पुलिसकर्मियों की समझाइश के बाद वह पत्नी को लेकर जेपी अस्पताल रवाना हुआ” जहाँ उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। हालांकि” पुलिस प्रशासन का दावा है कि विवाद के बाद घर जाकर दंपति में झगड़ा हुआ और जहर घर पर खाया गया” जो कि घटनाक्रम को नया मोड़ दे रहा है।

    दूसरी ओर मध्य प्रदेश के ही धार जिले से भी प्रशासन पर जनता के आक्रोश की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ एक चूना पत्थर खदान के सर्वे के लिए पहुँची प्रशासनिक टीम पर ग्रामीणों ने जानलेवा हमला कर दिया। देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और तहसीलदार सहित पुलिस की गाड़ियों पर पत्थरों की बारिश कर दी। नौ थानों की पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीणों ने सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया और तहसीलदार की गाड़ी पलटने की कोशिश की। पत्थरबाजी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं” जो सरकारी अमले और आम जनता के बीच बढ़ते टकराव की गवाह दे रहे हैं।

  • इंदौर में जहरीली गैस के रिसाव के बाद लोगों सांस लेने में हुई परेशानी, घरों से निकले बाहर

    इंदौर में जहरीली गैस के रिसाव के बाद लोगों सांस लेने में हुई परेशानी, घरों से निकले बाहर


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के रावजी बाजार थाना क्षेत्र में गुरुवार रात जहरीली गैस के रिसाव से इलाके में हड़कंप मच गया। गैस के असर से कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई, जिसके बाद लोग घरों से बाहर निकल आए।

    बताया जा रहा है कि एक कबाड़ी की दुकान पर गैस से भरा सिलेंडर लाया गया था। कबाड़ी सिलेंडर को काट रहा था, उसी दौरान उसमें भरी गैस रिसने लगी। गैस फैलते ही आसपास के लोगों को घबराहट और सांस लेने में परेशानी होने लगी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कबाड़ी को हिरासत में ले लिया। दमकल विभाग की टीम ने सिलेंडर को अपने कब्जे में लेकर मौके से हटाया। क्षेत्र में पानी का छिड़काव भी किया गया, जिसके बाद हालात कुछ हद तक काबू में आए।

    जहरीली गैस रिसाव से सांस लेने में तकलीफ होने के बाद दो महिलाओं समेत पांच लोगों को एहतियातन अस्पताल भेजा गया। प्रशासन के मुताबिक सभी की हालत स्थिर है और कोई भी गंभीर नहीं है। सीएमएचओ डॉक्टर माधव हसनी ने बताया कि पांचों की हालत ठीक है।

    डीसीपी आनंद कालादगी ने बताया कि ककतपुरा पुल के नीचे शहजाद नाम के एक कबाड़ी द्वारा सिलेंडर काटा जा रहा था। इसी दौरान उसमें से अमोनिया गैस का रिसाव शुरू हो गया। गैस फैलते ही आसपास मौजूद लोगों को घबराहट और सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगी। डीसीपी ने स्पष्ट किया कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति गंभीर रूप से प्रभावित नहीं हुआ है। सभी लोग सुरक्षित हैं। पुलिस ने कबाड़ी शहजाद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है।

  • मध्य प्रदेश ने लगातार दूसरे वर्ष एसएटीटीई 2026 में जीता ‘बेस्ट स्टेट टूरिज्म’ अवॉर्ड

    मध्य प्रदेश ने लगातार दूसरे वर्ष एसएटीटीई 2026 में जीता ‘बेस्ट स्टेट टूरिज्म’ अवॉर्ड


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश को दक्षिण एशिया के प्रमुख ट्रैवल एवं टूरिज्म प्रदर्शनी एसएटीटीई 2026 में प्रतिष्ठित “बेस्ट स्टेट टूरिज्म” अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। लगातार दूसरे वर्ष यह सम्मान प्राप्त कर राज्य ने भारत के प्रमुख और पसंदीदा पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान को और सुदृढ़ किया है।

    नई दिल्ली में गुरुवार को आयोजित एसएटीटीई अवॉर्ड्स समारोह के दौरान यह पुरस्कार प्रदान किया गया, जिसे मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर ने प्राप्त किया। विजेताओं का चयन प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और उद्योग जगत के वरिष्ठ नेताओं की जूरी द्वारा किया गया।

    पर्यटन सचिव एवं मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. ने बताया कि एसएटीटीई 2026 में लगातार दूसरे वर्ष ‘बेस्ट स्टेट टूरिज्म’ अवॉर्ड मिलना मध्य प्रदेश के पर्यटन इको सिस्टम को मजबूत करने के हमारे निरंतर प्रयासों का प्रमाण है। राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ सतत, जिम्मेदार और अनुभव-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये सरकार निरंतर प्रयासरत है। बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, पर्यटक सुविधाओं और नवाचारपूर्ण पहलों में लगातार सुधार ने मध्य प्रदेश को विरासत, वन्यजीव, आध्यात्मिक और इको-टूरिज्म के क्षेत्र में अग्रणी गंतव्य बना दिया है।

    प्रबंध संचालक डॉ. इलैया ने कहा कि मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड राज्य की विविधता को व्यापक रूप से प्रस्तुत कर रहा है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों जैसे खजुराहो समूह स्मारक, सांची स्तूप और भीमबेटका रॉक शेल्टर्स से लेकर प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व, पवित्र आध्यात्मिक केंद्र जैसे उज्जैन और ओंकारेश्वर, जीवंत जनजातीय एवं लोक परंपराएं, ग्रामीण पर्यटन अनुभव, एडवेंचर सर्किट और उभरते हुए अनुभवात्मक गंतव्य तक सतत विकास, सामुदायिक भागीदारी और बेहतर पर्यटक अनुभव पर विशेष ध्यान देते हुए मध्यप्रदेश एक ऐसे गंतव्य के रूप में विकसित हो रहा है, जो देश और दुनिया भर के यात्रियों को गहराई, प्रामाणिकता और वर्षभर आकर्षण प्रदान करता है।

    उन्होंने कहा कि एसएटीटीई 2026 में मिला यह सम्मान इस बात की पुष्टि करता है कि मध्य प्रदेश घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के पर्यटकों को आकर्षित करने में सफल रहा है और भारत में एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति को निरंतर मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • मप्र: हाजिरी पर सख्ती, सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति को किया गया चेक

    मप्र: हाजिरी पर सख्ती, सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति को किया गया चेक


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद राजधानी भोपाल के तीन प्रमुख शासकीय कार्यालय (वल्लभ भवन, सतपुड़ा भवन और विंध्याचल भवन) में अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर बड़ी कार्रवाई शुरू की गई है।

    गुरुवार को सामान्य प्रशासन विभाग के दल द्वारा मंत्रालय, वल्लभ भवन, विंध्याचल भवन एवं सतपुड़ा भवन में स्थित शासकीय कार्यालयों में शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों की प्रात: 10 बजे उपस्थित सुनिश्चित कराये जाने के संबंध में जानकारी प्राप्ति की गई। इस दौरान सभी प्रमुख विभागों के कार्यालय में जाकर उपस्थिति रजिस्टर चेक किए। वहीं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी ऐसा करने को कहा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नववर्ष-2026 के उपलक्ष्य में ली गई बैठक में निर्देश दिये थे कि सभी अधिकारी-कर्मचारी कार्यालयीन शासकीय निर्धारित समय प्रात: 10 से 6 बजे तक उपस्थित रहेंगे। गुरूवार को हुए आकस्मिक निरीक्षण में कई अधिकारियों का अपने दायित्व निर्वाहन किये जाने संबंध में विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा में भी उपस्थिति पाई गई।

    शुक्रवार को मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा ली जायेगी जानकारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर शुक्रवार 27 फरवरी को प्रात: 10 से 10.30 के बीच मुख्य सचिव कार्यालय से भी सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिवों को दूरभाष पर संपर्क कर उनके कार्यालय के अधीनस्थ अधिकारी-कर्मचारियों के उपस्थिति के संबंध में जानकारी प्राप्त की जायेगी।