Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर में बोरिंग के पानी में घुला जहर 35 सैंपल फेल फीकल बैक्टीरिया से बढ़ा स्वास्थ्य संकट

    इंदौर में बोरिंग के पानी में घुला जहर 35 सैंपल फेल फीकल बैक्टीरिया से बढ़ा स्वास्थ्य संकट


    इंदौर । इंदौर में दूषित पानी का संकट गहरा गया है जिसमें अब बोरिंग के पानी में भी फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया है। इस बैक्टीरिया के कारण हैजा टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारियाँ फैल रही हैं। इस समस्या का मुख्य कारण सीवेज रिसाव माना जा रहा है जो पानी में मिलकर स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार नगर निगम ने बोरिंग के कुल 69 पानी के सैंपल लिए थे जिसमें से 35 सैंपल जांच में फेल हो गए। इन सैंपलों में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत है।

    इस बैक्टीरिया का मुख्य स्रोत सीवेज ओवरफ्लो अनुपचारित सीवेज डिस्चार्ज और खराब सेप्टिक टैंक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में यह बैक्टीरिया तब घुलता है जब ड्रेनेज चैंबरों से सीवेज लीक होता है और मल-मूत्र युक्त पानी बोरिंग के पानी में मिल जाता है। इस स्थिति से इंदौर शहर के भागीरथीपुरा क्षेत्र में विशेष रूप से संकट बढ़ा है। यहां 600 से अधिक बोरिंग की गई हैं जिनका पानी कई परिवारों की जीवनरेखा है। गंदे पानी के कारण अब तक 150 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 20 लोगों की हालत गंभीर है और उन्हें ICU में रखा गया है।

    इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का मुख्य कारण पानी में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया का बढ़ना है जो आंतों किडनी लिवर और इम्यून सिस्टम पर प्रभाव डाल सकता है। लंबे समय तक यह बैक्टीरिया आंतों में सूजन और कोलाइटिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है जिससे शरीर में गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। इंदौर नगर निगम ने इस समस्या के समाधान के लिए सख्त कदम उठाने की योजना बनाई है ताकि पानी की गुणवत्ता सुधारी जा सके और लोगों को स्वच्छ पानी मिल सके।

  • दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण

    दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण


    नई दिल्ली । इंदौर में दूषित पेयजल से हुई गंभीर घटनाओं के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। शहर में कहीं भी पीने के पानी में गंदगी की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। शनिवार को कलेक्टर ऋतुराज सिंह, नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार और नगर निगम सभापति रवि जैन ने शहर के वार्ड क्रमांक 44 और 45 के अंतर्गत आने वाले नागदा और पालनगर क्षेत्रों का दौरा कर जलदाय व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र की पानी की टंकियों, सप्लाई लाइनों और नल कनेक्शनों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान कई स्थानों पर गंभीर खामियां सामने आईं। कुछ नल कनेक्शन नालियों के बेहद पास पाए गए, वहीं कई जगह नलों में टोटियां तक नहीं लगी थीं, जिससे गंदा पानी पाइपलाइन में जाने का खतरा बना हुआ था। अधिकारियों ने मौके पर ही नगर निगम की टीम को तत्काल टोटियां लगाने और कनेक्शन दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया निरीक्षण

    कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि यह निरीक्षण मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया है। दूषित पानी से हुई मौतों को प्रशासन बेहद गंभीरता से ले रहा है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।निरीक्षण के दौरान पानी की हार्डनेस की भी जांच की गई और विभिन्न स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी सैंपल्स की लैब में समयबद्ध जांच हो और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं।

    नालियों के पास पाइपलाइन बनी खतरे की वजह

    स्थानीय रहवासियों ने अधिकारियों को बताया कि गणेश मंदिर जाने वाले मार्ग पर नाली का गंदा पानी अक्सर सड़क पर बहता रहता है। चूंकि अधिकांश पानी की लाइनें और नल कनेक्शन नालियों के पास हैं, ऐसे में सीवेज का पानी पीने की सप्लाई में मिलने का खतरा बना रहता है। निरीक्षण के दौरान एक खुली टोटी भी मिली, जिससे दूषित पानी सीधे पाइपलाइन में जा रहा था। इस पर निगम अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    टंकियों की सफाई और क्लोरीनेशन के आदेश

    कलेक्टर ने बताया कि शहर की सभी पानी की टंकियों की साफ-सफाई का काम एक दिन पहले ही शुरू कर दिया गया है। साथ ही सात दिनों के भीतर पूरे शहर में पानी की व्यापक टेस्टिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को सभी वार्डों में टंकियों की गहन सफाई, क्लोरीनेशन और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां-जहां पानी की सप्लाई में गंदगी मिलने की आशंका है, वहां संबंधित प्वाइंट्स को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। इसके अलावा सीवरेज लाइनों में लीकेज की जांच कर कहीं भी पानी और सीवर की मिक्सिंग पाए जाने पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    सभापति ने बताई निरीक्षण की स्थिति

    नगर निगम सभापति रवि जैन ने बताया कि वार्ड क्रमांक 44 और 45 में कई जगह नाली और पानी की लाइनें साथ-साथ चल रही हैं। कुछ स्थानों पर लीकेज भी सामने आए हैं। निरीक्षण के दौरान गणेश मंदिर पहुंच मार्ग पर नाली का पानी ऊपर आता हुआ पाया गया, जो बेहद चिंताजनक है। इन सभी बिंदुओं पर निगम की टीम को तुरंत सुधार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार अब सभी वार्डों में नियमित और सतत निरीक्षण किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

    नागरिकों से की गई अपील

    प्रशासन की ओर से आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं भी पीने के पानी में गंदगी, बदबू या रंग बदलने जैसी समस्या नजर आए, तो तुरंत नगर निगम या संबंधित वार्ड कार्यालय को इसकी सूचना दें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
    दूषित पानी की घटना के बाद प्रशासन की इस सक्रियता को शहरवासियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, हालांकि लोग चाहते हैं कि यह सतर्कता सिर्फ निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।

  • सरेराह युवक की हत्या, दो बाइक पर सवार छह युवकों ने चाकू से किया हमला, CCTV के सहारे जांच में जुटी पुलिस

    सरेराह युवक की हत्या, दो बाइक पर सवार छह युवकों ने चाकू से किया हमला, CCTV के सहारे जांच में जुटी पुलिस


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के पाटन थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े हुई एक सनसनीखेज हत्या की वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया। दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए छह युवकों ने सरेराह एक युवक पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है।एसडीओपी बरगी अर्जुन अयंक मिश्रा के अनुसार, मृतक की पहचान अभिषेक उर्फ महेन्द्र साहू 27 वर्ष के रूप में हुई है, जो पाटन थाना क्षेत्र का निवासी था। महेन्द्र पेशे से ट्रैवल्स एजेंसी का संचालन करता था और साथ ही लोगों को प्राथमिक उपचार भी उपलब्ध कराता था। वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। परिवार में उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं।

    उज्जैन जाने के दौरान हुई वारदात

    पुलिस के मुताबिक, महेन्द्र बीते दिन अपने दोस्तों के साथ उज्जैन जाने के लिए घर से निकला था। यात्रा के दौरान सहजपुर के पास उसकी स्कॉर्पियो गाड़ी खराब हो गई। रात होने के कारण उसने गाड़ी को सड़क किनारे खड़ा कर दिया और वहीं रुक गया। अगले दिन सुबह उसने वाहन सुधारने के लिए एक मैकेनिक को बुलाया और दोपहर करीब एक बजे गाड़ी में बैठकर उसके आने का इंतजार कर रहा था।

    दो बाइक पर पहुंचे आरोपी, मच गई अफरातफरी

    इसी दौरान अचानक दो मोटरसाइकिलों पर सवार छह युवक मौके पर पहुंचे। आरोपियों ने महेन्द्र को जबरन गाड़ी से बाहर निकाला और उस पर चाकू से लगातार वार करने लगे। अचानक हुए हमले से महेन्द्र संभल नहीं पाया और गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आरोपी वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए।

    भागते समय बदले कपड़े

    प्रत्यक्षदर्शियों और CCTV फुटेज के अनुसार, आरोपी कुछ दूरी पर जाकर रुके और अपनी पहचान छिपाने के इरादे से आपस में कपड़े बदल लिए। इसके बाद चार युवक मोटरसाइकिलों पर सवार होकर फरार हो गए, जबकि दो युवक पैदल ही अलग दिशा में निकल गए। यह पूरी गतिविधि आसपास लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है।

    CCTV फुटेज बनी जांच का आधार

    पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। फुटेज में आरोपी युवक, उनकी मोटरसाइकिलें और वारदात के बाद भागने का तरीका स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। इन्हीं फुटेज के आधार पर पुलिस अज्ञात आरोपियों की पहचान और उनकी तलाश कर रही है।

    अस्पताल में मृत घोषित, हत्या का केस दर्ज

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल महेन्द्र को अस्पताल भिजवाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।

    पुरानी रंजिश या साजिश की जांच

    पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि हत्या के पीछे कोई पुरानी रंजिश, आपसी विवाद या साजिश तो नहीं है। मृतक के दोस्तों, परिजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

    इलाके में दहशत का माहौल

    दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वहीं मृतक के घर में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने पुलिस से आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है।पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और CCTV फुटेज के आधार पर लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।

  • बांध से अचानक छोड़ा गया पानी, खेड़ी घाट में नदी के बीच फंसे 10 से ज्यादा मजदूर, टली बड़ी त्रासदी

    बांध से अचानक छोड़ा गया पानी, खेड़ी घाट में नदी के बीच फंसे 10 से ज्यादा मजदूर, टली बड़ी त्रासदी


    खंडवा जिले के खेड़ी घाट क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गयाजब ओंकारेश्वर बांध से अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। इस दौरान रेलवे स्टेशन ओंकारेश्वर रोड से बड़वाह के बीच मोरटक्का-खेड़ी घाट पर चल रहे पुल निर्माण कार्य में लगे 10 से अधिक मजदूर और इंजीनियर नदी के बीच फंस गए। हालात कुछ ही पलों में गंभीर हो गएलेकिन स्थानीय नाविकों और गोताखोरों की सूझबूझ और तत्परता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यदि पानी का बहाव कुछ और बढ़ जातातो यह घटना एक बड़ी जनहानि में बदल सकती थी।

    पुल निर्माण स्थल पर मची अफरातफरी


    खेड़ी घाट पर नर्मदा नदी पर पुराने पुल को तोड़कर मंगलम कंपनी द्वारा नए पुल का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाली एप्रोच रोड बनाई गई हैपिलर खड़े किए जा रहे हैं और भारी मशीनें नदी के अंदर काम कर रही हैं। शनिवार को भी मजदूर रोज़ की तरह निर्माण कार्य में जुटे थे। इसी दौरान ओंकारेश्वर बांध से अचानक पानी छोड़े जाने से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और देखते ही देखते मजदूरों का रास्ता कट गया।पानी बढ़ते ही मौके पर अफरातफरी मच गई। कुछ मजदूर ऊंचे पिलरों और चट्टानों पर चढ़ गएजबकि कुछ लोग बहाव के बीच फंस गए। गनीमत यह रही कि आसपास मौजूद नाविकों को स्थिति की जानकारी मिल गई और उन्होंने तुरंत राहत कार्य शुरू किया।

    नाविकों ने दिखाया साहस


    स्थानीय नाविकों और गोताखोरों ने बिना देर किए अपनी जान जोखिम में डालकर सभी मजदूरों और इंजीनियरों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसारअगर कुछ मिनट की भी देरी हो जातीतो पानी का बहाव इतना तेज हो सकता था कि किसी को बचाना मुश्किल हो जाता। इस त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।

    कंपनी प्रबंधन ने जताई नाराजगी


    मंगलम कंपनी के मैनेजर पंकज पटेल ने ओंकारेश्वर बांध प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बांध प्रबंधन जितना पानी छोड़े जाने की सूचना देता हैअसल में उससे कहीं ज्यादा पानी छोड़ा जाता है। इससे पहले भी कंपनी को इस कारण करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है और इस बार तो मजदूरों की जान पर बन आई थी।उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से कई बार शासन-प्रशासन और बांध प्रबंधन को लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया गया है कि यदि अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जाना होतो कम से कम दो दिन पहले स्पष्ट और सही जानकारी दी जाए। लेकिन अब तक कोई प्रभावी सूचना प्रणाली लागू नहीं की गई है।

    स्थानीय लोगों और व्यापारियों को भी नुकसान


    अचानक जलस्तर बढ़ने का असर सिर्फ निर्माण स्थल तक सीमित नहीं रहा। खेड़ी घाट क्षेत्र में नर्मदा तट पर स्थित कई छोटी दुकानें पानी में डूब गईंजिससे स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय निवासी दशरथ केवटमुकेश शुक्ला और सत्यदेव जोशी ने बताया कि कई बार दिन या रात किसी भी समय अचानक पानी छोड़ दिया जाता हैजिसकी कोई पूर्व जानकारी नहीं मिलती। उनका कहना है कि श्रद्धालुमजदूर और पर्यटक अक्सर नदी किनारे या चट्टानों पर फंस जाते हैं। समय पर नाविक न पहुंचेंतो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

    सूचना व्यवस्था पर सवाल


    स्थानीय लोगों का आरोप है कि बांध प्रबंधन केवल यह कहकर जिम्मेदारी से बच जाता है कि प्रशासन को सूचना दे दी गई है। लेकिन कितना पानी छोड़ा जाएगाजलस्तर कितनी तेजी से बढ़ेगा और निचले इलाकों पर इसका क्या असर पड़ेगाइसकी स्पष्ट जानकारी न तो निर्माण कंपनियों को मिलती है और न ही आम जनता को।इस मामले में ओंकारेश्वर बांध परियोजना के प्रमुख एवं महाप्रबंधक धीरेंद्र दीक्षित से संपर्क करने की कोशिश की गईलेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इससे बांध प्रबंधन की जवाबदेही पर और सवाल खड़े हो गए हैं। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ओंकारेश्वर क्षेत्र में श्रद्धालु और स्थानीय लोग चट्टानों पर फंस चुके हैंजिन्हें नाविकों ने बचाया था। बावजूद इसकेव्यवस्था में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी सूचना प्रणाली लागू नहीं की गईतो भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • कोहरे की गिरफ्त में मध्यप्रदेश, दिन में भी ठिठुरन, ट्रेनों और सड़कों की रफ्तार थमी..

    कोहरे की गिरफ्त में मध्यप्रदेश, दिन में भी ठिठुरन, ट्रेनों और सड़कों की रफ्तार थमी..


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से वातावरण में नमी बढ़ गई है, जिसके चलते प्रदेशभर में घने कोहरे की चादर छाई हुई है। हालात ऐसे हैं कि ठंड का असर सिर्फ सुबह-शाम ही नहीं, बल्कि दिन के समय भी साफ महसूस किया जा रहा है। कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे चला गया है और शीतल दिन जैसी स्थिति बन गई है।

    शनिवार को प्रदेश के 11 से 12 शहरों में अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। दतिया और रीवा में पूरे दिन ठंड का असर बना रहा। ग्वालियर में सुबह के समय अति घना कोहरा छाया रहा, जबकि इंदौर और जबलपुर में घने कोहरे के कारण दृश्यता विजिबिलिटी काफी कम हो गई। राजधानी भोपाल और नर्मदापुरम में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया।मौसम विभाग के अनुसार, इस सर्दी के सीजन में यह कोहरे का अब तक का सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। भोपाल में शनिवार को दिनभर कोहरा बना रहा, जिससे धूप के दर्शन भी मुश्किल हो गए। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है। कोहरे के साथ-साथ शीतलहर का असर भी तेज हो सकता है, जिससे रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है।

    इंदौर में विजिबिलिटी शून्य के करीब

    शनिवार रात इंदौर में हालात सबसे ज्यादा खराब नजर आए। घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी लगभग शून्य हो गई, जिससे सड़कों पर चल रहे वाहन एक-दूसरे को मुश्किल से देख पा रहे थे। इसका सीधा असर यातायात पर पड़ा और वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई। कई जगहों पर जाम जैसे हालात भी बने।

    रेल यातायात पर पड़ा असर


    कोहरे का असर रेल यातायात पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। दिल्ली की ओर से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली मालवा एक्सप्रेस, सचखंड एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस सहित एक दर्जन से अधिक ट्रेनें 30 मिनट से लेकर 6 घंटे तक की देरी से चल रही हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को भी ट्रेनों के लेट होने की आशंका बनी हुई है, जिससे यात्रियों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।

    इन जिलों में ज्यादा असर


    रविवार को भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर के अलावा श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, सागर, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, कटनी और मैहर समेत कई जिलों में कोहरे का असर बना हुआ है।

    अगले दो दिन का अलर्ट


    मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों के लिए भी घने कोहरे की चेतावनी जारी की है।5 जनवरी को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में घना कोहरा रहने की संभावना है।6 जनवरी को भी शिवपुरी, श्योपुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में कोहरे का असर बना रह सकता है।

    क्यों बन रहा है ऐसा मौसम 


    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, उत्तर भारत के बड़े हिस्से में इस समय कोहरे की स्थिति बनी हुई है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और बिहार में भी इसी तरह का मौसम है। पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद वातावरण में बची नमी के कारण कोहरा लगातार बन रहा है। हालांकि एक-दो दिन बाद इसकी तीव्रता में कुछ कमी आने की संभावना जताई गई है।

  • नर्मदा जल में सीवर की मिलावट का खुलासा, खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से बढ़ा हैजा-डायरिया का खतरा

    नर्मदा जल में सीवर की मिलावट का खुलासा, खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से बढ़ा हैजा-डायरिया का खतरा


    नई दिल्ली। इंदौर शहर से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से सप्लाई हो रहे नर्मदा जल को लेकर की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। सरकारी और निजी प्रयोगशालाओं में लिए गए पानी के सैंपल्स में कई खतरनाक और जानलेवा बैक्टीरिया पाए गए हैं जिससे इलाके में हैजा डायरिया और अन्य पेट संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है।लैब रिपोर्ट के अनुसार पानी में फीकल कॉलिफॉर्म ई-कोलाई विब्रियो कोलेरी स्यूडोमोनास क्लेबसेला सिट्रोबैक्टर और प्रोटोजोआ जैसे सूक्ष्म जीव मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन बैक्टीरिया की मौजूदगी इस बात का सीधा संकेत है कि पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवर का गंदा पानी मिल रहा है। इसी कारण पानी को जांच रिपोर्ट में अनसैटिस्फैक्ट्री यानी पूरी तरह असंतोषजनक श्रेणी में रखा गया है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से इलाके में लगातार लोग बीमार पड़ रहे हैं। कई घरों में उल्टी-दस्त पेट दर्द और बुखार की शिकायतें सामने आई हैं। इसी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पानी की सैंपलिंग शुरू की। रविवार से लगातार पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। यह सैंपल्स शहर के 100 से अधिक कॉलेजों और निजी अस्पतालों की लैब में भी भेजे गए जहां रिपोर्ट ने स्थिति को गंभीर बताया है।हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक इन रिपोर्ट्स को सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक विभाग के पास मौजूद रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित। इसके बावजूद आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है जिससे लोगों में नाराजगी और डर दोनों बढ़ रहे हैं।

    इसी बीच कलेक्टर शिवम वर्मा ने क्षेत्र का दौरा किया और लोगों को भरोसा दिलाने के लिए मौके पर पानी पीकर दिखाया। लेकिन संक्रमण के समय लिए गए पानी की लैब कल्चर रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीपेज के जरिए सीवर का पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है जिससे यह स्थिति पैदा हुई है।रिपोर्ट में विब्रियो कोलेरी बैक्टीरिया की मौजूदगी विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि यही बैक्टीरिया हैजा फैलाने के लिए जिम्मेदार होता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसके अलावा ई-कोलाई और फीकल कॉलिफॉर्म की मौजूदगी यह दर्शाती है कि पानी में मलजनित प्रदूषण है जो किसी भी हालत में सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोग बुजुर्ग और बच्चे इस दूषित पानी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। स्यूडोमोनास और क्लेबसेला जैसे बैक्टीरिया फेफड़ों मूत्र मार्ग और खून में संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं।फिलहाल जरूरत इस बात की है कि जल सप्लाई सिस्टम की तत्काल जांच कर ली जाए पाइपलाइनों की मरम्मत की जाए और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप और जागरूकता अभियान चलाने की भी सख्त जरूरत है ताकि किसी बड़े स्वास्थ्य संकट को समय रहते रोका जा सके।

  • नववर्ष के पहले रविवार को महाकाल मंदिर में भक्तों का उमड़ा सैलाबअद्भुत शृंगार में दर्शन

    नववर्ष के पहले रविवार को महाकाल मंदिर में भक्तों का उमड़ा सैलाबअद्भुत शृंगार में दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन नववर्ष के पहले रविवार को उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के मंदिर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा हुआ। साल के पहले रविवार पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचे। इस दिन को विशेष रूप से भस्म आरती और बाबा के अद्भुत शृंगार के लिए जाना जाता है।भक्तों का उत्साह सर्द मौसम में भी बरकरार रहा और देर रात से ही वे भस्म आरती में शामिल होने के लिए मंदिर परिसर में लाइनों में खड़े नजर आए। श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन से अभिभूत हो गएऔर हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा मंदिर गूंज उठा।

    महाकाल का अद्भुत शृंगार

    माघ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के रविवार को बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गयाजिसे देखकर भक्त भावविभोर हो उठे। इस शृंगार में बाबा के माथे पर बेलपत्र और चांदी का चांद चढ़ाया गयाजिससे उनके दिव्य स्वरूप की अनुभूति हुई। शृंगार के दौरान बाबा पर घीदूधदही और रस से जलाभिषेक किया गया। इसके बादभांग से बाबा का शृंगार किया गया। बाबा महाकाल का यह रूप भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षक था और उन्हें आंतरिक शांति का अनुभव हुआ।

    भस्म आरती का महत्व

    शृंगार के बाद भस्म आरती का आयोजन हुआजिसमें बाबा महाकाल को भस्म से नहलाया गया। भस्म आरती के दौरान माना जाता है कि बाबा निराकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैंलेकिन शृंगार के बाद वे साकार रूप में अपने भक्तों के कष्ट हरने आते हैं। इस दौरान बाबा महाकाल ने कमल और मखाने की माला पहने हुएअपने भक्तों को आलोकिक रूप में दर्शन दिए। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत अभूतपूर्व थाऔर मंदिर में जय श्री महाकाल की गूंज सुनाई दी।

    महाकाल के अलग-अलग रूप

    बाबा महाकाल का शृंगार हर दिन अलग तरीके से किया जाता है। प्रत्येक तिथि और शुभ दिन पर बाबा अपने भक्तों को नए रूप में दर्शन देते हैंयही कारण है कि भस्म आरती में हमेशा भक्तों की अधिकतम संख्या होती है। बाबा महाकाल की सेवा में सुबह से शाम तक छह अलग-अलग आरतियां होती हैंजो प्रत्येक में अपने आप में विशिष्ट होती हैं बाबा महाकाल के दर्शन और शृंगार से श्रद्धालुओं का मन श्रद्धा और भक्ति से अभिभूत हो जाता है। इस नववर्ष के पहले रविवार ने भक्तों को बाबा महाकाल के नए रूप से साक्षात्कार करने का अवसर दियाऔर उनके हर कष्ट को हरने की शक्ति को महसूस किया।

  • एम्स भोपाल को मिलेंगी गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी हाईटेक सुविधाएं ट्रांसप्लांट के लिए नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू

    एम्स भोपाल को मिलेंगी गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी हाईटेक सुविधाएं ट्रांसप्लांट के लिए नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू

    भोपाल । नए साल 2026 में मध्य प्रदेश के मरीजों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई उम्मीद सामने आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स भोपाल इस साल अपने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक विस्तार करने जा रहा है। इस विस्तार के तहत एम्स भोपाल में गामा नाइफ और पेट स्कैन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को स्थापित किया जाएगा जिससे गंभीर बीमारियों खासकर कैंसर और ट्यूमर के इलाज में बड़े सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

    एम्स भोपाल इस वर्ष ‘ट्रांसप्लांट’ के लिए समर्पित एक नया ऑपरेशन थिएटर भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इस ऑपरेशन थिएटर के शुरू होने से हृदय लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट अब एक ही छत के नीचे संक्रमण रहित वातावरण में किए जा सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वेटिंग लिस्ट कम हो सकेगी और अधिक मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा जिससे उनका जीवन बचाया जा सकेगा।

    इसके अलावा गामा नाइफ तकनीक का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर और मस्तिष्क के अन्य जटिल रोगों के इलाज में किया जाएगा। गामा नाइफ के माध्यम से बिना चीरा लगाए सटीक रेडिएशन के जरिए ट्यूमर का इलाज संभव हो सकेगा। यह तकनीक विशेषकर उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी जिन्हें ब्रेन ट्यूमर के इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    एम्स भोपाल के इस नए कदम से अब मरीजों को दिल्ली मुंबई या अन्य बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी क्योंकि यहां उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। संस्थान का पूरा फोकस इस वर्ष डायग्नोस्टिक सेवाओं को और बेहतर बनाने और क्रिटिकल केयर की क्षमता को बढ़ाने पररहेगा।यह पहल न केवल मध्य प्रदेश बल्कि आस-पास के क्षेत्रों के मरीजों केलिए भी राहत लेकर आएगी क्योंकि अब उन्हें उच्च गुणवत्ता वालेउपचार के लिए दूर-दराज के शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

  • भोपाल मेट्रो में पैसेंजर की कमी 14 दिन में ही ट्रिप घटाई नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू

    भोपाल मेट्रो में पैसेंजर की कमी 14 दिन में ही ट्रिप घटाई नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू


    भोपाल । भोपाल मेट्रो में कम पैसेंजर की संख्या को लेकर एक बड़ी समस्या सामने आई है। मेट्रो की शुरुआत के सिर्फ 14 दिन बाद ही मेट्रो कॉर्पोरेशन को यात्री कम होने की वजह से टाइमिंग और ट्रिप्स में बदलाव करना पड़ा है। अब मेट्रो का नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू होगा जिसमें ट्रिप्स की संख्या कम कर दी गई है और टाइमिंग में भी बदलाव किया गया है।

    पहले मेट्रो का संचालन सुबह 9 बजे से शुरू होता था लेकिन अब एम्स स्टेशन से मेट्रो दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। वहीं शाम का आखिरी ट्रिप अब साढ़े सात बजे होगा जबकि पहले यह समय देर रात तक था। इस बदलाव का मुख्य कारण यह है कि मेट्रो को अपेक्षित संख्या में यात्री नहीं मिल रहे हैं। शुरुआत के दिनों में भी मेट्रो की सवारी में गिरावट देखी गई है और अब यह स्थिति इस हद तक पहुँच चुकी है कि मेट्रो को दिन में कम ट्रिप्स करने पड़ रहे हैं।

    भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को हुआ था जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल ने इसका उद्घाटन किया। इसके बाद 21 दिसंबर से मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हुआ था। उद्घाटन के पहले दिन लोगों में मेट्रो को लेकर काफी उत्साह था और 6568 पैसेंजर ने मेट्रो में सफर किया था। हालांकि इसके बाद यात्रियों की संख्या में गिरावट आई और मेट्रो के संचालन के लिए आवश्यक पैसेंजर संख्या नहीं जुटाई जा सकी।

    भोपाल मेट्रो के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि मेट्रो का संचालन काफी महंगा होता है और इसकी लागत को कवर करने के लिए पैसेंजर की संख्या जरूरी है। अब मेट्रो को यात्रा की स्थिति में सुधार लाने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार करना होगा।

  • ग्वालियर में एआई की मदद से महिला की लाश की पहचान पुलिस ने स्कैच से संदेही तक पहुंचा

    ग्वालियर में एआई की मदद से महिला की लाश की पहचान पुलिस ने स्कैच से संदेही तक पहुंचा


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जहां पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई की मदद से एक महिला की लाश की पहचान की। यह महिला गोला का मंदिर स्थित कटारे फार्म में झाड़ियों के बीच अर्द्धनग्न अवस्था में मृत पाई गई थी महिला का सिर पत्थर से कुचला गया था जिससे उसकी हत्या की आशंका जताई जा रही थी।

    पुलिस ने एआई तकनीक का उपयोग कर महिला का स्कैच तैयार कराया। इस स्कैच के आधार पर जब पुलिस ने स्थानीय लोगों से संपर्क किया तो उन्होंने महिला की पहचान “कल्लो उर्फ कालीबाई” के रूप में की। वह अक्सर उस क्षेत्र में घूमती रहती थी और वहां के स्थानीय लोग उसे पहचानते थे।

    स्कैच के आधार पर पुलिस ने फिर से सीसीटीवी फुटेज की जांच की और देखा कि महिला एक युवक के साथ घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर सड़क पर चलती हुई दिखाई दी थी। पुलिस ने इस युवक को प्रमुख संदेही मानते हुए उसकी तलाश शुरू की। संदेही की जैकेट भी घटनास्थल से मिले महिला के कपड़ों के पास पाई गई जिससे पुलिस को और सबूत मिले हैं।

    इस खोज ने पुलिस को मामले की दिशा में महत्वपूर्ण मदद दी है और इस जघन्य हत्या के आरोपी तक पहुंचने के प्रयासों को तेज किया है। पुलिस का कहना है कि वे जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी कोशिश करेंगे।यह घटना ग्वालियर के कटारे फार्म में सोमवार को हुई थी जब महिला की लाश झाड़ियों में पाई गई। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी थी और अब एआई तकनीक के सहारे इस हत्याकांड के पीछे के रहस्यों को सुलझाने में मदद मिल रही है।