Category: Madhya Pradesh

  • पीएमएफएमई योजना से प्रेमलता गृहिणी से बनी सफल उद्यमी, सालाना 30 लाख की आय

    पीएमएफएमई योजना से प्रेमलता गृहिणी से बनी सफल उद्यमी, सालाना 30 लाख की आय


    नीमच। कभी घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली नीमच जिले के ग्राम बमोरा की श्रीमती प्रेमलता पाटीदार आज एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना ने उनके सपनों को पंख देकर आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।

    श्रीमती प्रेमलता बताती हैं कि वे हमेशा कुछ अपना करना चाहती थीं, लेकिन संसाधनों की कमी और मार्गदर्शन के अभाव में आगे बढ़ना आसान नहीं था। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग के माध्यम से पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत उन्होंने 23.61 लाख रुपये की लागत से बालाजी उद्योग नाम से खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाई स्थापित की। उद्योग की स्थापना के लिए उन्होंने नीमच जिले में भारतीय स्टेट बैंक की जीरन शाखा से 20 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। शासन की ओर से उन्हें 8.26 लाख रुपये का अनुदान भी मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ।

    श्रीमती प्रेमलता ने गोपाल कृष्ण नाम के ब्रांड से कोकोनट ऑयल का पंजीयन कराया और अपने उत्पाद को बाजार में उतारा। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और निरंतर मेहनत के बल पर उनका व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ा। आज उनका मासिक टर्नओवर लगभग 8 से 10 लाख रुपये है और वे प्रतिमाह 2 से 3 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। सालाना लाभ लगभग 30 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुका है।

    प्रेमलता की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। उन्होंने अपने उद्योग में 7 स्थानीय लोगों को रोजगार देकर गांव में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया है। वे कहती हैं, “सरकार की योजना ने मुझे हिम्मत दी, लेकिन सफलता मेहनत और विश्वास से मिली।

    नीमच जिले में पीएमएफएमई योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिले में अब तक 210 हितग्राहियों को योजना से लाभान्वित किया गया है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 125 नए उद्योग स्थापित हुए हैं। इस उपलब्धि के साथ नीमच जिला प्रदेश और संभाग के अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है।

    प्रेमलता पाटीदार की यह कहानी बताती है कि आत्म विश्वास के साथ सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिल जाये तो एक गृहिणी भी सफल उद्योगपति बन सकती है। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है।

  • मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल

    मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल


    भोपाल!
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन तथ तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है। मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है। राज्य कुल दलहन फसल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर हैं। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषकों की आय को बढ़ाने एवं उनके समग्र कल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है।

    खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरा स्थान

    गेहूं उत्पादन में राज्य ने 24.51 मिलियन टन उत्पादन किया और लगभग 20.78 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य मक्का उत्पादन में भी अग्रणी रहा, 6.64 मिलियन टन उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश का राष्ट्रीय हिस्सेदारी में लगभग 15.30 प्रतिशत योगदान रहा, जिससे यह देश का प्रमुख उत्पादक राज्य बना। मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) के उत्पादन में भी राज्य ने 7.78 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की और देश में तृतीय स्थान हासिल किया।

    दलहन उत्पादन शीर्ष स्थान बरक़रार

    दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल दलहन उत्पादन में 5.24 मिलियन टन उत्पादन किया और 20.40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया। चना उत्पादन में राज्य 2.11 मिलियन टन उत्पादन और लगभग 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष तीन राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा।

    तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य

    तिलहन क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति मजबूत रही। कुल तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की एवं देश से दूसरा स्थान हासिल किया। विशेष रूप से सोयाबीन उत्पादन में राज्य ने 5.38 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है और इसे देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में स्थापित करता है। राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.55 मिलियन टन रहा जो कि देश के कुल उत्पादन का 12.99 प्रतिशत रहा। मूंगफली उत्पादन में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है।

    मध्यप्रदेश में केंद्र एवं राज्य सरकार की कृषि विकास योजनाओं रासायनिक उर्वरकों का वितरण, पौध संरक्षण कार्यक्रम, मांग आधारित कृषि के लिए फसलों का विविधीकरण, एक जिला-एक उत्पाद योजना, मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन, कृषि उत्पादक संगठनों का गठन एवं संवर्धन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भावांतर भुगतान, रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना आदि का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। परिणामस्वरूप राज्य को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। कुल उत्पादन में वृद्धि हुई है। कृषि आधारित नीतियों के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित है।

  • शिवपुरी में बेखौफ गुंडागर्दी: सरकारी शौचालय बचाने गई नपा टीम पर हमला, FIR न होने से पुलिस पर सवाल

    शिवपुरी में बेखौफ गुंडागर्दी: सरकारी शौचालय बचाने गई नपा टीम पर हमला, FIR न होने से पुलिस पर सवाल


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। देहात थाना क्षेत्र की महल सराय आदिवासी बस्ती में शासकीय शौचालय को तोड़कर अतिक्रमण किए जाने की सूचना पर पहुंची नगर पालिका टीम पर बदमाशों ने हमला कर दिया। कर्मचारियों के साथ न केवल धक्का-मुक्की की गई बल्कि जमकर मारपीट भी की गई। घटना के बाद से नगर पालिका अमले में आक्रोश है और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    जानकारी के अनुसार महल सराय आदिवासी बस्ती में बने सरकारी शौचालय को कुछ लोग तोड़कर उस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। शिकायत मिलने पर नपा अतिक्रमण दस्ता प्रभारी अशोक खरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि मौके पर कुछ लोग शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे। जब टीम ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो आरोपियों ने अचानक हमला कर दिया। कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें मौके से खदेड़ने की कोशिश की गई।

    घटना के बाद घायल कर्मचारियों ने देहात थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दी। पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में स्पष्ट रूप से मारपीट और हंगामा दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न किए जाने की बात सामने आ रही है जिससे देहात थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    नगर पालिका कर्मचारियों का कहना है कि जब शासकीय संपत्ति को बचाने गए कर्मचारियों पर खुलेआम हमला होता है और उसके बाद भी त्वरित कार्रवाई नहीं होती तो इससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद होते हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने फिलहाल केवल आवेदन लिया है लेकिन प्रकरण दर्ज करने में देरी की जा रही है।

    स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और कर्मचारियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जाएं।

  • कैसे नक्सल मुक्त हुआ मध्य प्रदेश? DGP कैलाश मकवाना ने खोला रणनीति का राज, इन नेताओं को दिया श्रेय

    कैसे नक्सल मुक्त हुआ मध्य प्रदेश? DGP कैलाश मकवाना ने खोला रणनीति का राज, इन नेताओं को दिया श्रेय


    इंदौर। मध्य प्रदेश को नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद पुलिस महानिदेशक DGP लाश मकवाना का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस उपलब्धि को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देश और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित अभियान का परिणाम बताया।

    डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए नक्सलवाद लंबे समय से एक गंभीर चुनौती रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस रणनीतिक ढंग से कार्रवाई की गई उससे प्रदेश में नक्सल नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने में सफलता मिली। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah की ओर से स्पष्ट निर्देश थे कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करना है। इन्हीं निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में अभियान को तेज किया गया।

    डीजीपी ने यह भी बताया कि जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई तब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया। लगातार सर्च ऑपरेशन संवेदनशील इलाकों में विशेष बल की तैनाती खुफिया तंत्र की मजबूती और तकनीक आधारित निगरानी से नक्सल गतिविधियों पर निर्णायक प्रहार किया गया।

    कैलाश मकवाना के अनुसार इस सफलता के पीछे केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं बल्कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल भी अहम रहा। वन क्षेत्र सीमावर्ती जिलों और पहले से चिन्हित संवेदनशील इलाकों में संयुक्त ऑपरेशन चलाए गए। स्थानीय स्तर पर विश्वास बहाली के प्रयास ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने भी नक्सल संगठनों की जड़ें कमजोर कीं।

    उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सुरक्षा बलों की नहीं बल्कि पूरे शासन-प्रशासन की सामूहिक कोशिश का परिणाम है। प्रदेश में जिन क्षेत्रों को पहले नक्सल प्रभावित माना जाता था वहां अब शांति का वातावरण है और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

    डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि अब फोकस केवल नक्सल गतिविधियों को खत्म करने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि शांति और विकास को स्थायी बनाए रखने पर रहेगा। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी सामुदायिक पुलिसिंग और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दोबारा किसी भी प्रकार की उग्र गतिविधियां पनपने न पाएं।

  • उज्जैन सिंहस्थ 2028: पुलिस ने तैयारियों को लेकर की उच्च स्तरीय बैठक, प्रशिक्षण और तकनीक पर जोर

    उज्जैन सिंहस्थ 2028: पुलिस ने तैयारियों को लेकर की उच्च स्तरीय बैठक, प्रशिक्षण और तकनीक पर जोर


    उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में अगले वर्ष होने वाले सिंहस्थ 2028 के आयोजन को लेकर पुलिस विभाग ने तैयारियों को तेज कर दिया है। इस क्रम में पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई जिसमें प्रशिक्षण संसाधनों और रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।

    पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि सिंहस्थ-2028 के सफल और सुरक्षित आयोजन के लिए यह उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में शामिल अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि पुलिस बल को समय पर समुचित प्रशिक्षण दिया जाए और किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहें। बैठक में एडीजी इंटेलीजेंस डीजी ईओडब्ल्यू और सिंहस्थ-2016 में पदस्थ रहे पूर्व आईजी मनोहर वर्मा समेत स्थानीय और बाहरी जिलों से लगभग 22 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

    एसपी शर्मा ने कहा कि बैठक में मुख्य रूप से प्रशिक्षण मॉड्यूल की समीक्षा और रिविजन पर जोर दिया गया। पुराने अनुभवों को ध्यान में रखते हुए नए तकनीकी उपकरणों मॉनिटरिंग सिस्टम और सुरक्षा प्रबंधन के तरीकों को जोड़कर एक संतुलित प्रशिक्षण योजना बनाई जा रही है। इससे न केवल पुलिस बल की कार्यकुशलता बढ़ेगी बल्कि आने वाले विशाल आयोजन में सुरक्षा व जनसुविधा सुनिश्चित करना भी आसान होगा।

    बैठक में प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा रिसोर्स पर्सन की नियुक्ति संचालन तंत्र और व्यवस्थाओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रशिक्षण चरणबद्ध तरीके से सभी स्तरों पर दिया जाए और वास्तविक परिस्थितियों में पुलिस कर्मियों की क्षमता बढ़ाने के लिए सिमुलेशन और अभ्यास सत्र आयोजित किए जाएं।

    पुलिस विभाग का मानना है कि समय पर सुव्यवस्थित प्रशिक्षण और रणनीतिक तैयारी ही सिंहस्थ-2028 जैसे विशाल आयोजन को सफल और सुरक्षित बनाने की आधारशिला है। अधिकारी यह भी मानते हैं कि तकनीक और पुराने अनुभवों का सही संयोजन आने वाले वर्षों में आयोजनों को और प्रभावी और नियंत्रित बनाने में मदद करेगा।

    सुरक्षा व्यवस्था के अलावा बैठक में भीड़ नियंत्रण यातायात प्रबंधन आकस्मिक स्थिति से निपटने के उपाय और जनसंपर्क रणनीतियों पर भी चर्चा की गई। एसपी शर्मा ने कहा कि इस बार प्रशिक्षण मॉड्यूल में नई तकनीक और डिजिटल साधनों के माध्यम से सतत निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    उज्जैन पुलिस का उद्देश्य है कि सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं और नागरिकों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराते हुए आयोजनों का सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित किया जाए। अधिकारी इस आयोजन को देखते हुए समय रहते हर स्तर पर तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

  • दो काले हिरण का शिकार: रेंजर समेत 6 वनकर्मी सस्पेंड, प्राकृतिक मौत दिखाने का प्रयास विफल

    दो काले हिरण का शिकार: रेंजर समेत 6 वनकर्मी सस्पेंड, प्राकृतिक मौत दिखाने का प्रयास विफल


    नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सिवनी मालवा क्षेत्र में दो दुर्लभ काले हिरणों के शिकार के मामले ने वन विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया। सोमवार देर रात वन विभाग ने रेंजर और चार वनकर्मियों सहित कुल छह कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। आरोप है कि हिरणों की मौत को प्राकृतिक घटनाक्रम दिखाने की कोशिश की गई और सबूतों को नष्ट किया गया लेकिन जांच में उनका झूठ बेनकाब हो गया।

    नर्मदापुरम के डीएफओ गौरव शर्मा ने बताया कि यह घटना 21 जनवरी को बासनिया गांव के पास हुई। जानकारी के अनुसार शिकारी दो हिरणों को ले जा रहे थे जिन्हें गांव वालों ने देख लिया। लोगों ने सूचना दी और हिरण रिवेन्यू भूमि पर छोड़ दिए। इसके बाद वन कर्मचारियों ने हिरणों की उचित जांच नहीं की और पूरी जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी।

    डीएफओ ने आगे बताया कि मुखबिर की सूचना पर स्टाफ की कॉल डिटेल्स और कार्रवाई का विश्लेषण किया गया। कड़ी पूछताछ में सामने आया कि वन कर्मचारियों ने वास्तविक स्थिति को छिपाया। उन्होंने बताया कि एक हिरण के शिकार की बात की गई जबकि वास्तव में दो हिरणों में से एक जिंदा था और दूसरा मृत। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि घटना को प्राकृतिक मौत का रूप देने का प्रयास किया गया।

    इस मामले में सिवनी मालवा रेंजर आशीष रावत वनपाल महेश गौर वनरक्षक मनीष गौर रूपक झा ब्रजेश पगारे और पवन उइके को निलंबित किया गया। डीएफओ ने कहा कि रेंजर के निलंबन के लिए सीसीएफ को पत्र लिखा गया जिसके बाद रेंजर को भी निलंबित किया गया।

    सीसीएफ अशोक कुमार चौहान ने बताया कि प्राथमिक जांच प्रतिवेदन में वन कर्मचारियों द्वारा प्रकरण के वास्तविक स्वरूप को छिपाने और जांच में गंभीर लापरवाही बरतने के तथ्य सामने आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।

    इस घटना ने वन विभाग में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की कमी को उजागर किया है। दुर्लभ काले हिरण की शिकार की घटनाओं पर पर्यावरणविद और वन संरक्षणकर्ता चिंतित हैं। वन विभाग के सख्त कदम से यह संदेश गया कि किसी भी कर्मचारी की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

    इस प्रकरण से यह भी स्पष्ट हुआ कि वन्य जीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन गंभीर मामला है और इसे छिपाने या दबाने की कोशिश करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग ने कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम और निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

     मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सिवनी मालवा क्षेत्र में दो दुर्लभ काले हिरणों के शिकार के मामले ने वन विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया। सोमवार देर रात वन विभाग ने रेंजर और चार वनकर्मियों सहित कुल छह कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। आरोप है कि हिरणों की मौत को प्राकृतिक घटनाक्रम दिखाने की कोशिश की गई और सबूतों को नष्ट किया गया लेकिन जांच में उनका झूठ बेनकाब हो गया।

    नर्मदापुरम के डीएफओ गौरव शर्मा ने बताया कि यह घटना 21 जनवरी को बासनिया गांव के पास हुई। जानकारी के अनुसार शिकारी दो हिरणों को ले जा रहे थे जिन्हें गांव वालों ने देख लिया। लोगों ने सूचना दी और हिरण रिवेन्यू भूमि पर छोड़ दिए। इसके बाद वन कर्मचारियों ने हिरणों की उचित जांच नहीं की और पूरी जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी।

    डीएफओ ने आगे बताया कि मुखबिर की सूचना पर स्टाफ की कॉल डिटेल्स और कार्रवाई का विश्लेषण किया गया। कड़ी पूछताछ में सामने आया कि वन कर्मचारियों ने वास्तविक स्थिति को छिपाया। उन्होंने बताया कि एक हिरण के शिकार की बात की गई जबकि वास्तव में दो हिरणों में से एक जिंदा था और दूसरा मृत। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि घटना को प्राकृतिक मौत का रूप देने का प्रयास किया गया।

    इस मामले में सिवनी मालवा रेंजर आशीष रावत वनपाल महेश गौर वनरक्षक मनीष गौर रूपक झा ब्रजेश पगारे और पवन उइके को निलंबित किया गया। डीएफओ ने कहा कि रेंजर के निलंबन के लिए सीसीएफ को पत्र लिखा गया जिसके बाद रेंजर को भी निलंबित किया गया।

    सीसीएफ अशोक कुमार चौहान ने बताया कि प्राथमिक जांच प्रतिवेदन में वन कर्मचारियों द्वारा प्रकरण के वास्तविक स्वरूप को छिपाने और जांच में गंभीर लापरवाही बरतने के तथ्य सामने आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।

    इस घटना ने वन विभाग में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की कमी को उजागर किया है। दुर्लभ काले हिरण की शिकार की घटनाओं पर पर्यावरणविद और वन संरक्षणकर्ता चिंतित हैं। वन विभाग के सख्त कदम से यह संदेश गया कि किसी भी कर्मचारी की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

  • रबी-खरीफ फसल तक का ज्ञान चाहिए, राहुल गांधी को CM मोहन यादव का तंज

    रबी-खरीफ फसल तक का ज्ञान चाहिए, राहुल गांधी को CM मोहन यादव का तंज


    भोपाल । कांग्रेस की किसान महा चौपाल में शामिल होने राजधानी में पहुँचे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के स्वागत से पहले ही सियासी तापमान बढ़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसान महा चौपाल लगाना अच्छी बात है लेकिन राहुल गांधी को यह भी समझना चाहिए कि रबी और खरीफ फसल क्या होती है। उनका तंज सीधे कांग्रेस के किसान दृष्टिकोण पर था।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा मध्य प्रदेश के दूध उत्पादन पर भी कुछ कहें। हम 365 दिन किसानों के लिए काम कर रहे हैं। राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए क्योंकि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में किसानों के साथ अन्याय किया है। 2003 तक साढ़े सात लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा ही क्यों रहा जबकि हमने डेढ़ साल में उससे अधिक कार्य कर दिया।

    मोहन यादव ने कांग्रेस के पुराने कार्यकाल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछले 55 सालों में सिंचाई का विस्तार बहुत कम हुआ वहीं वर्तमान सरकार ने इसे तेजी से बढ़ाया है। उन्होंने भावांतर योजना और किसान कल्याण योजनाओं का भी जिक्र किया जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है।

    मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को सुझाव भी दिया कि अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासित करें। उन्होंने कहा कपड़े खोलकर प्रदर्शन करने वालों को डांट लगानी चाहिए और छमा मांगनी चाहिए। यह आदर्श जगह है और देश भी आदर्श होना चाहिए।

    कांग्रेस की किसान महा चौपाल राजधानी भोपाल के जवाहर चौक में आयोजित की जा रही है जिसमें किसानों की समस्याओं और भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर प्रतिक्रिया जुटाई जाएगी। इस अवसर पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे किसानों की आवाज़ को केंद्रित करेंगे और कृषि नीतियों पर अपनी पार्टी की प्राथमिकताओं को उजागर करेंगे।

    सियासत की इस गरमाई हुई स्थिति में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसानों के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने सिंचाई मूल्य सुरक्षा और किसान कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए यह संदेश दिया कि मध्य प्रदेश में किसानों के हित सर्वोपरि हैं।

    राहुल गांधी के आगमन से पहले किए गए इस बयान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी किसान मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं और आगामी समय में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है।

  • एमपी विधानसभा बजट सत्र में पत्थरबाजी पर हंगामा, सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित

    एमपी विधानसभा बजट सत्र में पत्थरबाजी पर हंगामा, सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित


    भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में आज एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया जब सदन में पत्थरबाजी के मामले पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा प्रदर्शन हुआ। मामला इतना गरमा गया कि विधानसभा की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर देना पड़ा। बजट सत्र के छठे दिन जब सदन पहुँच चुका था तब भाजपा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने अचानक ध्यान आकर्षण पेश करते हुए कहा कि भोपाल और इंदौर दोनों जगह भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुई हैं जिसमें पत्थरबाजी भी शामिल रही और कुछ महिला कार्यकर्ता घायल भी हुई हैं। उन सभी घटनाओं पर चर्चा की आवश्यकता है।

    पांडे ने कहा कि “पहले से पत्थर इकट्ठा किए गए थे और यह सब न सिर्फ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास है बल्कि मध्य प्रदेश में गुंडागर्दी की तरफ इशारा भी करता है। उन्होंने यह भी बताया कि शनिवार-शनिवार होने के कारण उन घटनाओं के बारे में पहले सूचना नहीं दी जा सकी। जब विपक्ष से चर्चा शुरू करने की अपील की गई तब कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने पलटवार किया और कहा कि उनके कार्यालय पर हमला हुआ है और इसी मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस के सोहनलाल वाल्मीकि ने सवाल उठाया कि इंदौर के भागीरथपुरा में हुए विवाद और हिंसा पर क्यों चर्चा नहीं कराई जा रही है इसके बजाय सदन में अलग मुद्दों को उछाला जा रहा है।

    एक समय ऐसा आया कि विपक्ष और सदस्यों के बीच आवाजें मिलने लगीं और सदन में व्यवधान बढ़ता गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा ताकि दोनों पक्ष संतुलित होकर फिर से चर्चा शुरू कर सकें। यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026‑27 के बजट को पेश किया है जिसमें कई नई घोषणाएँ भी की गई हैं। विपक्ष का मानना है कि बजट पर बात करते हुए सुरक्षा कानून व्यवस्था और सामाजिक शांति जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए जबकि सरकार इसे स्थानीय तनाव बताते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

    मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में आज एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया जब सदन में पत्थरबाजी के मामले पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा प्रदर्शन हुआ। मामला इतना गरमा गया कि विधानसभा की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर देना पड़ा। बजट सत्र के छठे दिन जब सदन पहुँच चुका था तब भाजपा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने अचानक ध्यान आकर्षण पेश करते हुए कहा कि भोपाल और इंदौर दोनों जगह भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुई हैं जिसमें पत्थरबाजी भी शामिल रही और कुछ महिला कार्यकर्ता घायल भी हुई हैं। उन सभी घटनाओं पर चर्चा की आवश्यकता है।

    पांडे ने कहा कि पहले से पत्थर इकट्ठा किए गए थे और यह सब न सिर्फ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास है बल्कि मध्य प्रदेश में गुंडागर्दी की तरफ इशारा भी करता है। उन्होंने यह भी बताया कि शनिवार-शनिवार होने के कारण उन घटनाओं के बारे में पहले सूचना नहीं दी जा सकी। जब विपक्ष से चर्चा शुरू करने की अपील की गई तब कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने पलटवार किया और कहा कि उनके कार्यालय पर हमला हुआ है और इसी मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस के सोहनलाल वाल्मीकि ने सवाल उठाया कि इंदौर के भागीरथपुरा में हुए विवाद और हिंसा पर क्यों चर्चा नहीं कराई जा रही है इसके बजाय सदन में अलग मुद्दों को उछाला जा रहा है।

    एक समय ऐसा आया कि विपक्ष और सदस्यों के बीच आवाजें मिलने लगीं और सदन में व्यवधान बढ़ता गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा ताकि दोनों पक्ष संतुलित होकर फिर से चर्चा शुरू कर सकें।  यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026‑27 के बजट को पेश किया है जिसमें कई नई घोषणाएँ भी की गई हैं। विपक्ष का मानना है कि बजट पर बात करते हुए सुरक्षा कानून व्यवस्था और सामाजिक शांति जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए जबकि सरकार इसे स्थानीय तनाव बताते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

  • एटीएस ने पकड़ा फर्जी पासपोर्ट गिरोह, अफगान सहित 11 आरोपी गिरफ्तार

    एटीएस ने पकड़ा फर्जी पासपोर्ट गिरोह, अफगान सहित 11 आरोपी गिरफ्तार


    भोपाल। मध्य प्रदेश एटीएस ने 44 फर्जी पासपोर्ट से जुड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि विदेशी नागरिकों के लिए अस्तित्वहीन पतों पर पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया और रिश्वत देकर पासपोर्ट डिलीवरी बीच रास्ते में ही हासिल कर ली गई।

    एटीएस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में जिया उल रहमान, सुल्तान मोहम्मद, रजा खान, सैयद मोहम्मद और जफर खान शामिल हैं। इसके अलावा पांच अफगान नागरिकों को कोलकाता से गिरफ्तार कर जबलपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 25 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया।

    जांच में 300 मोतीनाला तालाब सदर, 410 उपरैनगंज और 870 छोटी ओमती जैसे पते फर्जी पाए गए। इसके बावजूद पुलिस वेरिफिकेशन दिखाकर पासपोर्ट जारी कर दिए गए। आरोपियों ने कथित तौर पर एक पोस्टमैन को लगभग तीन हजार रुपये देकर पासपोर्ट डाक वितरण से पहले ही हासिल कर लिए।

    मामले का खुलासा मुख्य आरोपी सोहबत खान की गिरफ्तारी के बाद हुआ। अगस्त 2025 में सोशल मीडिया पर एटी-47 के साथ तस्वीर साझा करने के आधार पर उसे पकड़ा गया। पूछताछ में उसने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। इसके अलावा दिनेश गर्ग, महेंद्र कुमार सुखदान और चंदन सिंह की भूमिका भी सामने आई, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में मदद की।

    एटीएस सूत्रों के मुताबिक गिरोह 2018-19 के दौरान अफगानिस्तान के काबुल से दिल्ली होते हुए कोलकाता पहुंचा था। एक आरोपी मेडिकल वीजा पर भारत आया, जबकि अन्य के अवैध प्रवेश की आशंका जताई गई। बाद में इनकी मुलाकात जबलपुर निवासी सोहबत खान से हुई, जिसने प्रति व्यक्ति ढाई लाख रुपये में भारतीय पासपोर्ट बनवाने का सौदा किया।

    इस प्रकरण ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबलपुर पुलिस ने वेरिफिकेशन प्रक्रिया की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। एटीएस ने बताया कि 10 अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेन-देन और संपर्कों की भी पड़ताल की जाएगी।

  • सिहोरा पत्थरबाजी मामला: TI हटाए गए, प्रतीक्षा मार्को को सौंपा थाने का प्रभार

    सिहोरा पत्थरबाजी मामला: TI हटाए गए, प्रतीक्षा मार्को को सौंपा थाने का प्रभार

    जबलपुर जिले के सिहोरा में हाल ही में हुई पत्थरबाजी की घटना के बाद टीआई पर कार्रवाई की गई है। सिहोरा के आजाद चौक इलाके में घरों और लोगों पर पत्थरबाजी करने वाले कई युवकों का वीडियो कैमरे में कैद हुआ था, जिसमें कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग भी पत्थरबाजी करते हुए दिखाई दिए थे।

    मामले में सिहोरा टीआई को हटाकर प्रतीक्षा मार्को को थाने का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस घटना के बाद सिहोरा के हालात बिगड़ गए थे और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने कई पत्थरबाजों को हिरासत में लेकर जेल भेजा है और अभी भी संदेहियों से पूछताछ जारी है।

    स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि पत्थरबाजी जैसी हिंसक घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी। नए प्रभारी टीआई प्रतीक्षा मार्को ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की और पुलिस फोर्स को सतर्क रहने के निर्देश दिए।