Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर दूषित पानी कांड: 5 महीने के मासूम अव्यान की मौत, 1,100 से अधिक लोग बीमार

    इंदौर दूषित पानी कांड: 5 महीने के मासूम अव्यान की मौत, 1,100 से अधिक लोग बीमार


    इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पीने के पानी से फैल रही गंभीर बीमारी ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं। पांच महीने के मासूम अव्यान साहू की मौत दस्त और उल्टी से हुई। बच्चे के परिवार ने बताया कि घर में गाढ़े दूध में नगर निगम के नल का पानी मिलाकर पिलाया गया था, लेकिन वही पानी जहरीला साबित हुआ। स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के अनुसार, दूषित पानी ने पूरे इलाके में व्यापक स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया।

    अव्यान का परिवार पिछले 10 सालों से उसकी उपस्थिति का इंतजार कर रहा था, लेकिन यह खुशी मातम में बदल गई। पिता सुनील साहू ने मीडिया से बताया कि बच्चे को उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हुई थी। चिकित्सक से परामर्श के बाद घर पर दवाइयां दी जा रही थीं, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई। उन्होंने कहा कि दूध गाढ़ा था, इसलिए वे इसे नगर निगम के नल के पानी में मिलाकर पिला रहे थे, लेकिन वही पानी उनके बच्चे के लिए जानलेवा साबित हुआ।

    सरकारी आंकड़ों और स्थानीय बयानों के अनुसार, अब तक भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण कम-से-कम सात लोगों की मौत हो चुकी है और 1,100 से अधिक लोग पेट और दस्त जैसी बीमारियों से प्रभावित हैं। कई गंभीर मरीज शहर के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं।प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मुख्य जलापूर्ति लाइन में लीकेज के कारण नालों का गंदा पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में मिला। नगर निगम के कर्मचारियों ने मंगलवार देर शाम इस लीकेज का पता लगाया। फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं ताकि स्थिति और अधिक गंभीर न हो।

    इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने अब तक सात मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोग यह दावा कर रहे हैं कि नौ लोगों की मौत दूषित पानी की वजह से हुई। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जांच जारी है।स्थानीय निवासियों ने बताया कि इलाके में गंदा पानी नल से बहते देखा गया है और पहले भी अस्वस्थ जल आपूर्ति पर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। लेकिन यह समस्या पिछले एक सप्ताह में जानलेवा रूप ले चुकी है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे और जांच अभियान शुरू किया है, और प्राथमिक उपचार तथा अस्पतालों में भर्ती की सुविधा प्रदान की जा रही है।

    यह मामला इंदौर जैसे “सबसे स्वच्छ शहर” के दावे पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जल स्रोत की सुरक्षा और जलापूर्ति अवसंरचना की निगरानी में खामियों ने स्थानीय निवासियों को भारी कीमत चुकाई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि दूषित पानी के फैलाव को रोकने, नियमित जांच करने और सार्वजनिक जल आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक हैअदालत और उच्च प्रशासन ने भी इस स्थिति पर संज्ञान लिया है। व्यापक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए रिपोर्ट मांगी गई है। पीड़ित परिवारों को मुआवजा और चिकित्सा सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

  • नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज

    नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की पहली सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्साह के बीच शुरू हुई। 1 जनवरी की सुबह होते ही प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में तड़के चार बजे से दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह नौ बजे तक लगभग 80 हजार श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके थे। प्रशासन के अनुसार दिनभर यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।महाकाल मंदिर में नए साल के अवसर पर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई और श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध दर्शन की सुविधा सुनिश्चित की गई। इस दौरान महिला क्रिकेट विश्वकप विजेता भारतीय टीम की सदस्य भी मंदिर पहुंचीं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंधन समिति ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।

    उज्जैन के अलावा नर्मदा तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी सुबह से भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया और मंगला आरती के बाद दर्शन खोले गए। इसके साथ ही ओरछा के रामराजा मंदिर, मैहर के शारदा देवी मंदिर, नलखेड़ा के मां बगलामुखी धाम और देवास के प्रमुख मंदिरों में भी हजारों भक्त नए साल की पहली सुबह दर्शन के लिए पहुंचे।सीहोर जिले के प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर में ठंड और कोहरे के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। दमोह जिले के बांदकपुर स्थित जागेश्वरनाथ धाम में भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। गुना के हनुमान टेकरी मंदिर में सुबह की आरती के साथ ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, जहां प्रशासन ने अनुमान लगाया कि एक लाख से अधिक भक्त पहुंचे।

    धार्मिक गतिविधियों के साथ ही प्रदेश के शहरों और पर्यटन स्थलों पर नए साल का जश्न भी देर रात तक चलता रहा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में लोग सड़कों, होटलों और सार्वजनिक स्थलों पर एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दे रहे थे। मांडू और पचमढ़ी जैसे पर्यटन केंद्रों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और अलाव के माध्यम से नए साल का स्वागत किया गया।जबलपुर के भेड़ाघाट धुआंधार में साल के पहले सूर्योदय को देखने बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचे। उगते सूर्य के साथ लोगों ने नए साल की शुरुआत को यादगार बनाया। इस प्रकार, मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्सव दोनों के लिए विशेष रही।

  • रतलाम में फर्जी पहचान से महिला को झूठे प्रेम जाल में फंसाने का मामला, पुलिस जांच जारी

    रतलाम में फर्जी पहचान से महिला को झूठे प्रेम जाल में फंसाने का मामला, पुलिस जांच जारी


    रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में एक सनसनीखेज मामला सामने आया हैजिसमें एक व्यक्ति ने अपनी असली पहचान छुपाकर एक शादीशुदा महिला को प्रेम जाल में फंसाया और उसकी जिंदगी को प्रभावित किया। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी जैसी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

    पीड़िता के अनुसारआरोपी ने खुद को अलग नाम से पेश किया और शादी का झांसा देकर करीब पांच साल तक महिला के साथ लगातार शारीरिक उत्पीड़न किया। घटना की शुरुआत 2020 में हुईजब महिला की मुलाकात रतलाम के राम मंदिर क्षेत्र में आरोपी से हुई। उस समय आरोपी ने खुद को सोनू बताकर महिला को भरोसा दिलाया कि वह भी उसी धर्म का है। महिला की मौजूदा शादी थीलेकिन आरोपी ने धीरे-धीरे उसके विश्वास को तोड़ा और उसे अपने प्रेम जाल में फंसाया।2023 में आरोपी ने महिला को अपने संपर्क में लिया और उसे अपने पति से तलाक लेने के लिए उकसाया। महिला ने उसकी बातों में आकर जुलाई 2023 में अपना घर छोड़ दिया और अपने पिता के पास रहने लगी। कुछ ही समय बाददोनों नयागांव में किराए के कमरे में रहने लगे और पति-पत्नी की तरह व्यवहार करने लगे। इस दौरान आरोपी ने लगातार महिला का शारीरिक उत्पीड़न किया।

    कुछ समय बाद महिला को पता चला कि जिसे वह सोनू समझ रही थीअसल में उसका नाम इमरान था। इसके बावजूद महिला ने शादी की उम्मीद में उसका साथ रखा। नवंबर 2024 में महिला का पति से आधिकारिक तलाक हो गयालेकिन आरोपी ने शादी करने से इनकार कर दिया। दिसंबर 2025 में जब महिला ने शादी का दबाव डालातो आरोपी ने उस पर हिंसा की और जान से मारने की धमकी दी।पीड़िता ने आखिरकार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने उसे कई जगहों पर पत्नी के रूप में पेश किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जांच में पता चला कि आरोपी पहले ड्रग तस्करी के मामले में जेल जा चुका है। पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।

    इस मामले ने महिलाओं की सुरक्षा और समाज में जागरूकता पर भी सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले हमें चेतावनी देते हैं कि व्यक्तिगत पहचान की पुष्टि और भरोसेमंद रिश्तों में सावधानी बहुत जरूरी है। पुलिस और कानून व्यवस्था लगातार ऐसे अपराधों पर नज़र रखती हैंलेकिन पीड़ितों की सुरक्षा और कानूनी मदद सुनिश्चित करना सबसे अहम है।इस घटना ने रतलाम और मध्य प्रदेश में लोगों को व्यक्तिगत सुरक्षारिश्तों में सतर्कता और धोखाधड़ी से बचाव के महत्व के प्रति जागरूक किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी जल्द ही पकड़ा जाएगा और कानून के तहत सजा भुगतने के लिए तैयार होगा।

  • भारत में इस साल कूनो में 12 चीता शावक पैदा हुए, 3 की मौत

    भारत में इस साल कूनो में 12 चीता शावक पैदा हुए, 3 की मौत

    भोपाल। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (KNP) में चीतों के पुनर्वास से जुड़ा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट साल 2025 में तेजी से आगे बढ़ा। इस साल पार्क में 12 शावकों का जन्म हुआ। हालांकि दुख की बात ये है कि इनमें से तीन शावक अलग-अलग कारणों से जीवित नहीं रह सके। इसके बावजूद भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 30 हो गई है।

    इस साल कुल 6 चीतों की हुई मौत

    देश में चीतों के बारे में यह जानकारी प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने दी।उन्होंने बताया कि साल 2025 में कुल छह चीतों की मौत हुई, जिनमें तीन शावक शामिल हैं। इसके अलावा नामीबिया से लाए गए एक वयस्क चीते और दो उप-वयस्क चीतों की भी मौत दर्ज की गई। इस साल तीन मादा चीतों ने इन 12 शावकों को जन्म दिया था। अधिकारियों के अनुसार, शावकों की मौत के पीछे अलग-अलग प्राकृतिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण रहे।
    7 दशक पहले भारत से विलुप्त हो चुका है चीता

    आपको जानकर हैरानी होगी कि चीता करीब सात दशक पहले भारत से विलुप्त हो चुका था। इसे दोबारा देश में बसाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत की। इसके तहत सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीतों को भारत लाया गया, जबकि फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया था।
    चीतों को जल्द मिलेगा तीसरा ठिकाना

    फिलहाल भारत में कुल 30 चीतों में से 27 कूनो नेशनल पार्क में मौजूद हैं, जबकि तीन चीतों को मंदसौर जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में ट्रांसफर किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, अब चीतों को भारत में तीसरा ठिकाना भी मिलने वाला है। मध्य प्रदेश के सागर जिले स्थित नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य को चीतों के नए घर के तौर पर तैयार किया जा रहा है।

    अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल भारत में मौजूद 30 चीतों में से 19 का जन्म भारत में ही हुआ है, जो इस परियोजना की बड़ी सफलता मानी जा रही है। बीते तीन वर्षों में देश ने 20 चीतों के आयात के बाद अपनी कुल चीता आबादी में 10 की शुद्ध बढ़ोतरी दर्ज की है।
    8 और चीतों को भारत लाने की तैयारी

    अधिकारियों के अनुसार, बोत्सवाना से आठ और चीतों को भारत लाने की तैयारी चल रही है। ये चीते वहां पहले ही पकड़े जा चुके हैं और फरवरी तक कूनो नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं। प्रोजेक्ट चीता को भारत में वन्यजीव संरक्षण के इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

  • भोपाल में न्यू ईयर 2026: जानें शहर के खास सेलिब्रेशन स्पॉट्स और योजनाएं

    भोपाल में न्यू ईयर 2026: जानें शहर के खास सेलिब्रेशन स्पॉट्स और योजनाएं


    भोपाल।नए साल 2026 के आगमन में अब कुछ ही घंटे शेष हैं और भोपाल शहर में जश्न की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। राजधानी के होटल, रिसॉर्ट, कैफे और ओपन-एयर वेन्यू न्यू ईयर ईव को यादगार बनाने के लिए पूरी तरह सज चुके हैं। जो लोग अभी तक तय नहीं कर पाए हैं कि 31 दिसंबर की रात कहां सेलिब्रेशन करेंगे, उनके लिए शहर में कई विकल्प मौजूद हैं।इस बार न्यू ईयर सेलिब्रेशन का फोकस केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और बच्चों के लिए भी खास व्यवस्थाएं की गई हैं। कई होटल और क्लब्स में थीम आधारित पार्टियों का आयोजन किया जा रहा है। यहाँ देर रात तकDJ म्यूजिक, डांस फ्लोर और रंगीन लाइटिंग का आनंद लिया जा सकेगा। आयोजकों के अनुसार, अनलिमिटेड डिनर और ड्रिंक्स के पैकेज लोगों को संपूर्ण मनोरंजन का अनुभव देंगे।

    जो लोग शांत और खुले माहौल में नया साल मनाना चाहते हैं, उनके लिए शहर के बाहरी इलाकों में स्थित रिसॉर्ट्स सबसे आकर्षक विकल्प बनकर सामने आए हैं। यहाँ बोनफायर, ओपन-एयर म्यूजिक और नेचर लाइटिंग के बीच सेलिब्रेशन किया जाएगा। ये वेन्यू विशेष रूप से उन लोगों को पसंद हैं, जो शहर की भीड़-भाड़ से दूर सुकून भरा जश्न मनाना चाहते हैं।परिवार के साथ आने वालों के लिए कई स्थानों पर किड्स जोन, बच्चों के खेल, मैजिक शो और अलग फूड काउंटर की व्यवस्था की गई है। इससे माता-पिता आराम से और सुरक्षित माहौल में सेलिब्रेशन का आनंद ले सकेंगे। आयोजकों ने सुरक्षा और सुविधा दोनों पर विशेष ध्यान दिया है।

    पर्यटन से जुड़े प्रतिष्ठानों और शहर के प्रमुख होटलों में भी न्यू ईयर ईव को लेकर खास कार्यक्रम रखे गए हैं। यहां ठीक रात 12 बजे काउंटडाउन के साथ नए साल का स्वागत किया जाएगा। कुछ जगहों पर पारंपरिक संगीत और आधुनिक बीट्स का संयोजन देखने को मिलेगा, ताकि हर वर्ग के लोग इस उत्सव का आनंद उठा सकें।शहर के कई रूफटॉप कैफे और रेस्टोरेंट भी न्यू ईयर नाइट पर खास मेन्यू और लाइव म्यूजिक के साथ लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। यहां सीमित संख्या में एंट्री रखी गई है, जिससे भीड़ नियंत्रण और बेहतर अनुभव सुनिश्चित किया जा सके।

    सुरक्षा को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग ने भी तैयारी पूरी कर ली है। प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त पुलिस तैनात की गई है और ट्रैफिक को सुचारु रूप से चलाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे जिम्मेदारी के साथ जश्न मनाएं और नियमों का पालन करें।कुल मिलाकर, भोपाल में न्यू ईयर 2026 का स्वागत संगीत, रोशनी और उत्साह के साथ होने जा रहा है। चाहे दोस्तों के साथ पार्टी करनी हो या परिवार संग शांत और सुरक्षित माहौल में जश्न मनाना हो, शहर हर प्रकार के सेलिब्रेशन के लिए तैयार है।

  • जबलपुर में पकड़े गए बांग्लादेशी अवैध प्रवासी, सजा पूरी होने पर देश वापसी..

    जबलपुर में पकड़े गए बांग्लादेशी अवैध प्रवासी, सजा पूरी होने पर देश वापसी..


    जबलपुर।बांग्लादेश से अवैध रूप से मध्यप्रदेश पहुंचे मीनारा बेगम और मोहम्मद मोसूर को दो साल की जेल की सजा पूरी होने के बाद जबलपुर से उनके देश भेज दिया गया। दोनों आरोपी 2023 में गुजरात के मार्ग से भारत में प्रवेश कर चुके थे और जबलपुर में छिपकर भीख मांगकर जीवन यापन कर रहे थे।पुलिस ने बताया कि दोनों संदिग्ध गतिविधियों के कारण निगरानी में आए और पूछताछ में अपनी पहचान साबित नहीं कर सके। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वे अवैध बांग्लादेशी नागरिक हैं। गोरखपुर थाना पुलिस ने दोनों को विदेशी अधिनियम की धारा 14ए के तहत गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया।

    सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने प्रारंभ में दोनों को चार-चार साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की। सरकारी वकील की पैरवी के बाद सजा घटाकर दो साल कर दी गई। दिसंबर 2025 में दोनों आरोपी अपनी सजा पूरी कर चुके थे। मीनारा बेगम को महिला सुधार केंद्र और मोहम्मद मोसूर को सिविल लाइन थाने में अस्थायी रूप से रखा गया।सजा पूरी होने के बाद केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से डिपोर्टेशन की कार्रवाई की गई। दोनों को सड़क मार्ग से पश्चिम बंगाल के मालदा जिले होते हुए बांग्लादेश सीमा तक पहुंचाया गया। लगभग 1200 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर उन्हें बीएसएफ की मदद से बांग्लादेश सरकार को सौंपा गया।

    एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि दोनों आरोपी अवैध रूप से भारत में प्रवेश किए थे और उनके पास कोई वैध पहचान या निवास दस्तावेज नहीं थे। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि बेहतर जीवन की तलाश में वे भारत आए थे। पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि प्रदेश में अवैध घुसपैठ पर सतर्कता जारी है और सजा पूरी होने के बाद आरोपियों की वतन वापसी सुनिश्चित की जाती है।जबलपुर पुलिस ने बताया कि मीनारा और मोसूर गोरखपुर मैदान में रात बिताते और दिन में भीख मांगते थे। सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने उन्हें पकड़ा। इससे पहले भी जबलपुर और प्रदेश के अन्य जिलों में कई अवैध बांग्लादेशी नागरिक पकड़े जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि सीमापार से बेहतर जीवन या रोजगार की तलाश में लोग प्रवेश करते हैं, लेकिन कानून की निगरानी सख्त है।

    यह मामला राज्य और केंद्र सरकार की अवैध घुसपैठ रोकने की नीति का उदाहरण है। पुलिस लगातार निगरानी, गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन सुनिश्चित कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसी अवैध गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और राज्य की सुरक्षा तथा सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता जारी रहेगी।इस घटना से यह संदेश भी जाता है कि अवैध प्रवेश करने वालों को कानून के तहत सजा दी जाएगी और उनके देश वापसी की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही यह प्रदेश में कानून और सामाजिक सुरक्षा बनाए रखने में प्रशासन की सतर्कता और सक्रियता को भी उजागर करता है।

  • नए साल 2026 से पहले ग्वालियर अलर्ट मोड पर: 2 हजार पुलिसकर्मी, 40 चेकिंग पॉइंट्स, ड्रिंक एंड ड्राइव पर सख्ती

    नए साल 2026 से पहले ग्वालियर अलर्ट मोड पर: 2 हजार पुलिसकर्मी, 40 चेकिंग पॉइंट्स, ड्रिंक एंड ड्राइव पर सख्ती


    ग्वालियर। नए साल 2026 के स्वागत को लेकर ग्वालियर शहर में जश्न की तैयारियों के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कसी गई है। पुलिस प्रशासन ने 31 दिसंबर और 1 जनवरी को शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा प्लान लागू किया है। इस दौरान शहर भर में 2 हजार से अधिक पुलिस जवान और अधिकारी तैनात रहेंगे। प्रमुख सड़कों तिराहों और चौराहों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा, ताकि नए साल का जश्न सुरक्षित और अनुशासित माहौल में मनाया जा सके।पुलिस ने शहर में कुल 40 चेकिंग पॉइंट बनाए हैं। इनमें से 35 स्थान विशेष रूप से ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों पर नजर रखने के लिए चुने गए हैं। इन पॉइंट्स पर पुलिसकर्मी ब्रीथ एनालाइजर के साथ तैनात रहेंगे और वाहन चालकों की जांच करेंगे। शराब पीकर वाहन चलाते पाए जाने पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 10 हजार रुपये तक का जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    निगरानी की शुरुआत 30 दिसंबर से हो चुकी है। पुलिस ने ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना, स्टंटबाजी और सार्वजनिक स्थानों पर हंगामा करने वालों पर विशेष नजर रखी है। अधिकारियों का कहना है कि 31 दिसंबर की रात और 1 जनवरी को भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को अतिरिक्त रूप से मजबूत किया गया है।एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने होटल, रेस्टोरेंट, बार और रिसॉर्ट संचालकों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया है कि नए साल के कार्यक्रम पूरी तरह नियमों के अनुसार ही आयोजित किए जाएं। डीजे और साउंड सिस्टम की आवाज तय मानकों के भीतर रखनी होगी, ताकि आसपास के इलाकों में शांति भंग न हो। किसी भी तरह की अव्यवस्था या नियम उल्लंघन पाए जाने पर आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए साल के नाम पर हुड़दंग मारपीट या कानून तोड़ने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में आरोपियों को हिरासत में लिया जाएगा और उनकी नई साल की रात हवालात में भी गुजर सकती है। आपात स्थितियों से निपटने के लिए डायल-112 की टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सख्ती लोगों के उत्सव में बाधा डालने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। प्रशासन चाहता है कि शहरवासी नए साल का स्वागत शांति जिम्मेदारी और उत्साह के साथ करें।

    सुरक्षा की इस तैयारियों में पैदल और वाहन निगरानी, चेकिंग पॉइंट्स पर ब्रीथ एनालाइजर कंट्रोल रूम से निगरानी और आपातकालीन टीमों की तैनाती शामिल है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, शराब पीकर वाहन न चलाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।इस व्यापक योजना से ग्वालियर पुलिस का उद्देश्य है कि शहरवासी अपने परिवार और दोस्तों के साथ सुरक्षित तरीके से नए साल का जश्न मनाएं और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

  • इंदौर में दूषित पानी से मौतों का संकट: 8 की आशंका, 111 मरीज अस्पतालों में भर्ती..

    इंदौर में दूषित पानी से मौतों का संकट: 8 की आशंका, 111 मरीज अस्पतालों में भर्ती..


    इंदौर। देश के स्वच्छ शहरों की सूची में शीर्ष पर रहने वाले इंदौर में अचानक दूषित पानी से फैलने वाली बीमारी ने शहर में गंभीर संकट पैदा कर दिया है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित जल पीने से अब तक 8 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर 3 मौतों की पुष्टि की है। इस घटना के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। वर्तमान में 111 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनका इलाज जारी है।

    घटना तब उजागर हुई जब बीते एक सप्ताह से इलाके में उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायतें लगातार बढ़ने लगीं। सोमवार रात स्थिति गंभीर हो गई और बड़ी संख्या में लोग निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए। मंगलवार को दिनभर मौतों की सूचनाएं मिलती रहीं, और देर रात तक कुल 8 मौतों की जानकारी सामने आई। प्रशासन ने बताया कि मौतों का कारण डायरिया और जलजनित संक्रमण है।स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार अब तक क्षेत्र के 2700 से अधिक घरों का सर्वे किया जा चुका है और लगभग 12,000 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई है। मौके पर 1,100 से अधिक लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया। कई अस्पतालों में विशेष वार्ड और अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है जबकि कुछ मरीजों को आईसीयू में रखा गया।

    जांच के दौरान भागीरथपुरा इलाके में एक चौंकाने वाली वजह सामने आई। चौकी से सटे शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य जल आपूर्ति लाइन में लीकेज पाया गया, जिससे गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया। माना जा रहा है कि इसी कारण संक्रमण बड़े पैमाने पर फैला। मरम्मत के लिए संबंधित संरचना को तोड़कर लाइन की तत्काल मरम्मत कराई गई। इसके अलावा नर्मदा जल आपूर्ति लाइन से भी बदबूदार पानी आने की शिकायतें मिली हैं।प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में डॉक्टरों की टीमें, पैरामेडिकल स्टाफ और आशा कार्यकर्ताओं को तैनात किया है। लोगों को उबला हुआ पानी पीने, बाहर का भोजन न करने और लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है। राहत के तौर पर टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।

    इस गंभीर मामले के बाद नगर निगम और जल आपूर्ति से जुड़े अधिकारियों पर निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई की गई है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने और सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने की घोषणा की है।यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है बल्कि स्वच्छता के राष्ट्रीय मॉडल माने जाने वाले शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी होंगी।

  • जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

    जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई


    भोपाल। प्रदेश के जनजातीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। अब छात्रावासों में अधीक्षक का रातभर परिसर में रहना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने वाले अधीक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पद से हटाया जा सकता है।सरकार ने यह निर्णय छात्रावासों में लगातार मिल रही शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को ध्यान में रखते हुए लिया है। वर्तमान में कई अधीक्षक मूल रूप से शिक्षक हैं, जो न तो नियमित रूप से पढ़ा रहे हैं और न ही छात्रावासों में पर्याप्त समय दे रहे हैं। बच्चों के हित में उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नई अधीक्षक कैडर प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। योजना के तहत अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूर्णकालिक अधीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि मौजूदा शिक्षक अधीक्षक अपने मूल शिक्षण कार्य में लौटेंगे।
    छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार ने तय किया है कि प्रत्येक छात्रावास में अधीक्षक के लिए आवासीय व्यवस्था होगी। अधीक्षक को बच्चों के साथ ही परिसर में रुकना होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही संभाग स्तर पर विशेष निगरानी टीमें बनाई जाएंगी, जो छात्रावासों का औचक निरीक्षण करेंगी और व्यवस्थाओं की रिपोर्ट तैयार करेंगी।तकनीकी निगरानी को भी मजबूत किया जाएगा। प्रदेश के लगभग 2500 जनजातीय छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक/थंब इम्प्रेशन सिस्टम लगवाए जाएंगे। इससे यह रिकॉर्ड रखा जा सकेगा कि कौन व्यक्ति कब छात्रावास में आया और कब गया। इसके अलावा, भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए रोजाना परोसी जाने वाली थाली की तस्वीर भेजना भी अनिवार्य किया जाएगा।
    इस बीच, भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की जमीन को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर ही लिया जाएगा। लंबे समय से लंबित कचरा निष्पादन की प्रक्रिया को पूरा करना सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि आगामी शिक्षा सत्र से पहले किसी भी छात्रावास में बिना पुलिस सत्यापन के कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं होगा। सुरक्षा गार्ड से लेकर अन्य स्टाफ की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य होगी।
    इसके अलावा, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रत्येक विकासखंड में आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल, छात्रावास और सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के अवसर प्रदान करना है।सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा के इस सुधार से यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उनकी पढ़ाई पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से छात्राओं और छात्रों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी।

  • MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP

    MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP


    सतना।
    पद और प्रतिष्ठा मिल जाए, लेकिन इंसान को अपना अतीत और किसी का उपकार कभी नहीं भूलना चाहिए। मध्य प्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) के चर्चित और संवेदनशील अधिकारी DSP संतोष पटेल ने इस बात को साबित कर दिखाया है। वे अपने ऊपर चढ़े हुए 26 साल पुराने एक कर्ज (A 26-year-old Debt) को उतारने के लिए सतना (Santa) की तंग गलियों में मौजूद एक झुग्गी बस्ती (Slum) में पहुंचे। यह कर्ज पैसों का नहीं था, बल्कि खून का था। जिस सफाईकर्मी संतु मास्टर ने बचपन में अपना खून देकर संतोष पटेल की जान बचाई थी, वे उसी से मिलने के लिए शहर में आए थे। हालांकि यहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि संतु अब दुनिया में नहीं रहे, जिसके बाद वे उनके परिवार का पता लगाकर उनसे मिलने के लिए यहां आ गए। यहां संतु मास्टर की बेटियों से मिलकर वह भावुक हो गए और इस दौरान उन्होंने उनकी बड़ी बेटी के चरण स्पर्श कर परिवार की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया।

    यहां पहुंचकर DSP संतोष पटेल ने एकबार फिर अपने बचपन का वो डरावना मंजर याद किया, जब उनकी जान पर बन आई थी। बात साल 1999 की है, जब वे महज 8-9 साल के थे। एक गंभीर बीमारी ने उन्हें जकड़ लिया था। शरीर का खून पानी बनकर मवाद में बदल गया था। इस दौरान उनके पिता और दादा ने 6 महीने झाड़-फूंक में गंवा दिए। हालत बिगड़ने पर उन्हें पन्ना जिला अस्पताल और फिर सतना के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि तत्काल ऑपरेशन करना होगा, और खून की सख्त जरूरत है।


    खून देने से पहले पिता को लगाई थी फटकार

    DSP ने बताया कि उस दौर में रक्तदान को लेकर कई भ्रांतियां थीं और कोई डोनर नहीं मिल रहा था। लेकिन इसी बीच अस्पताल में एक अजीब संयोग बना। संतोष के पिता ने गलती से पान-सुपारी खाकर अस्पताल परिसर में थूक दिया। वहां सफाई कर रहे संतु ने उन्हें देखा और दौड़कर आया। इसके बाद उसने पिता को डांटा-फटकारा और चला गया। हालांकि इसी दौरान जब बेटे की हालत की वजह से संतोष के पिता जब वहां पर निराश बैठे हुए थे, तो उसी सफाईकर्मी संतु ने उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा था, ‘आप हताश मत हो, आपका बेटा जिंदा रहेगा।’

    इसी बीच जब संतु मास्टर को पता चला कि बच्चे को खून की जरूरत है, तो उसने बिना किसी स्वार्थ के अपना ब्लड डोनेट किया था। उसी खून से ऑपरेशन सफल रहा और आज संतोष पटेल जिंदा हैं और पुलिस अधिकारी है।

    ‘अधिकारी नहीं, बेटा बनकर आया हूं’
    DSP बनने के बाद संतोष पटेल सतना के उसी अस्पताल पहुंचे। वे संतु मास्टर को गले लगाना चाहते थे, लेकिन वहां पता चला कि उनका निधन हो चुका है और पत्नी भी नहीं रहीं। अस्पताल की एक बुजुर्ग महिला कर्मचारी ने बताया कि संतु की दो बेटियां झुग्गी बस्ती में रहती हैं। इसके बाद DSP उनका पता लेकर तुरंत यहां पहुंचे। वर्दी पहने एक बड़े अफसर को अपनी झोपड़ी में देख बेटियां सहम गईं, लेकिन जब DSP ने झुककर उनके पैर छुए, तो सबकी आंखें नम हो गईं।


    DSP बोले- मैं करूंगा कन्यादान

    DSP ने संतु की बेटियों से कहा,मैं संतु मास्टर का मुंह नहीं देख पाया, इसका अफसोस जीवन भर रहेगा, लेकिन मेरी रगों में भी उनका खून दौड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे लोग अकेले नहीं हैं। DSP ने संकल्प लिया कि वे संतु मास्टर की छोटी बेटी की शादी धूमधाम से कराएंगे। उन्होंने कहा, ‘अगर समय और संयोग रहा, तो मैं खुद भाई और पिता का फर्ज निभाते हुए कन्यादान भी करूंगा’।