Category: Madhya Pradesh

  • मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने बढ़ाई मुश्किलें 9 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

    मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने बढ़ाई मुश्किलें 9 जिलों में ऑरेंज अलर्ट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में जनवरी की शुरुआत के साथ ही ठंड और घने कोहरे ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शीतलहर के कारण दिन-प्रतिदिन तापमान गिर रहा है और सड़कों पर सन्नाटा छा रहा है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है जिससे आने वाले दिनों में और ठंड और कोहरे का सामना करना पड़ सकता है।

    9 जिलों में अति घने कोहरे का अलर्ट

    मौसम विभाग ने ग्वालियर दतिया भिंड रीवा सतना पन्ना छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में अति घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में अगले 24 से 48 घंटे तक कोहरे का असर रहने की संभावना जताई गई है साथ ही कुछ इलाकों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और गिरावट हो सकती है।

    पचमढ़ी रहा प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान

    प्रदेश का प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी एक बार फिर सबसे ठंडा स्थान रहा जहां न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे ठिठुरन और बढ़ गई है और खासकर पहाड़ी इलाकों में लोगों को ठंड से राहत मिलना मुश्किल हो रहा है।

    प्रमुख शहरों का न्यूनतम तापमान

    शिवपुरी – 6 डिग्री ,टीकमगढ़ – 8 डिग्री,राजगढ़ – 9 डिग्री,रीवा – 9.2 डिग्री,भोपाल – 10.6 डिग्री,ग्वालियर – 10.2 डिग्री,इंदौर – 12.4 डिग्री,बैतूल – 10 मीटर से कम विजिबिलिटी

    बैतूल में सबसे घना कोहरा

    बैतूल जिले में इस मौसम का अब तक का सबसे घना कोहरा दर्ज किया गया है। कई इलाकों में दृश्यता 10 मीटर से भी कम रही जिससे सड़क यातायात में परेशानी आई। कोहरे के कारण उत्तर भारत से आने-जाने वाली कई ट्रेनें भी देरी से चल रही हैं। मौसम विभाग ने अगले एक-दो दिन में और घने कोहरे की संभावना जताई है खासकर सुबह के समय। इस मौसम में ठंड और कोहरे का असर शहरों और कस्बों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी देखा जा रहा है जहां लोग गर्म कपड़े और हीटर का इस्तेमाल बढ़ा चुके हैं।

  • भोपाल के संजय नगर में बिजली डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट में लगी भीषण आग राहत की बात – कोई जनहानि नहीं

    भोपाल के संजय नगर में बिजली डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट में लगी भीषण आग राहत की बात – कोई जनहानि नहीं


    भोपाल । भोपाल के शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र स्थित संजय नगर में शुक्रवार रात एक बिजली डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट डीपी में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग की लपटें आसमान तक उठती हुईं और इलाके में घना धुआं फैल गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    घटना का समय और स्थान
    यह घटना शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे के आसपास की है। संजय नगर क्षेत्र में एक बिजली पोल पर लगे डिस्ट्रीब्यूशन पाइंट डीपी से अचानक चिंगारी निकली जिसके बाद आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग तेज़ी से फैलने लगी और आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए।

    आग फैलने का कारण

    स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में पोल के ऊपर से तेज आवाज के साथ चिंगारी निकली उसके बाद आग की लपटें उठने लगीं। प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की आशंका जताई जा रही है हालांकि बिजली विभाग की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। डीपी में लगी आग से तारों में जलन हुई जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

    दमकल वाहन का न पहुंच पाना

    घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड को बुलाया गया लेकिन संजय नगर की संकरी गलियों के कारण दमकल वाहन मौके तक नहीं पहुंच सका। इस बीच बिजली विभाग ने आग के फैलने की संभावना को देखते हुए क्षेत्र की बिजली आपूर्ति तुरंत बंद कर दी जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

    स्थानीय लोगों की सतर्कता

    आग की लपटें तेज हो गईं तो स्थानीय लोगों ने बाल्टियों और अन्य संसाधनों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने आग बुझा दी। अगर यह प्रयास समय पर न किया जाता तो आग पास के घरों तक फैल सकती थी।

    प्रशासन और बिजली विभाग की प्रतिक्रिया
    घटना की जानकारी मिलने के बाद बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और जली हुई डीपी का निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि डीपी को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इलाके में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बिजली आपूर्ति बहाल करने की कोशिश की जा रही है। बिजली विभाग ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए इलाके में लगे पुराने उपकरणों की जांच की जाएगी। स्थानीय निवासियों ने भी यह मांग की है कि जर्जर बिजली ढांचे की समय रहते मरम्मत की जाए ताकि ऐसी घटनाएं फिर से न हों।

  • इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का मामला नगर निगम कमिश्नर हटाए गए 15 मौतों के बीच सरकार ने हाईकोर्ट में केवल 4 मौतें मानी

    इंदौर में जहरीले पानी से मौतों का मामला नगर निगम कमिश्नर हटाए गए 15 मौतों के बीच सरकार ने हाईकोर्ट में केवल 4 मौतें मानी


    इंदौर । इंदौर में दूषित और जहरीले पानी के कारण हुई मौतों का मामला प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। सरकारी तंत्र की लापरवाही और बढ़ते जनआक्रोश के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर नगर निगम के कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटा दिया। साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब की गई जब इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में नर्मदा जल आपूर्ति से जुड़े पानी को पीने के बाद सैकड़ों लोग बीमार पड़े और कई की जान चली गई।

    स्थानीय लोगों ने पहले ही पानी में गंदगी और बदबू की शिकायत की थी लेकिन प्रशासन ने समय पर पानी की आपूर्ति को रोकने के बजाय इसे नजरअंदाज किया। इसके परिणामस्वरूप कई मौतें हुईं जिनकी संख्या को लेकर विवाद बना हुआ है। मृतकों के परिजनों और अस्पतालों के अनुसार अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है जबकि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट में केवल 4 मौतों की पुष्टि की है।

    हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने बताया कि सभी मृतकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। मृतकों की सूची में उर्मिला 28 दिसंबर तारा 60 नंदा 70 और हीरालाल 65 शामिल हैं। सरकार ने इसे एक “प्रारंभिक रिपोर्ट” बताया जबकि अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की है।

    इंदौर के अस्पतालों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी द्वारा की गई जांच में पानी को पीने योग्य नहीं पाया गया। लैब रिपोर्ट में फीकल कॉलिफॉर्म ई-कोलाई विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। विशेष रूप से हैजा फैलाने वाला बैक्टीरिया विब्रियो कोलेरी भी पानी में मौजूद था हालांकि सरकार इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहती। नगर निगम की लैब में भेजे गए सैंपल भी असंतोषजनक पाए गए।इस घटनाक्रम के बाद इंदौर नगर निगम में तीन नए अपर आयुक्त नियुक्त किए गए हैं। इनमें खरगोन के सीईओ आकाश सिंह आलीराजपुर के सीईओ प्रखर सिंह और इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक शामिल हैं।

    राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बयानबाजी हो रही है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने इंदौर में लोगों को “पानी नहीं जहर” बांटने का आरोप लगाया। वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान भी विवादों में रहे जिससे विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इंदौर के प्रभावित इलाकों में अब लोग टैंकरों बोतलबंद पानी और बोरिंग पर निर्भर हैं। प्रशासन ने पानी की आपूर्ति की निगरानी और जांच तेज करने का दावा किया है लेकिन मौतों के वास्तविक आंकड़े और जिम्मेदारी तय होने पर सवाल अभी भी खड़े हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण


    उज्जैन । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन जिले के खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने क्षेत्र में शिक्षा, कृषि, और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए कई योजनाओं का उद्घाटन किया।
    मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 39 विकास कार्यों की शुरुआत की, जिनमें 16 पूर्ण और 23 नए कार्य शामिल हैं। इनमें 35.40 करोड़ रुपये की लागत से सांदीपनि विद्यालय भवन और 11.30 करोड़ रुपये की लागत से नई कृषि उपज मंडी प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय में आधुनिक शिक्षा सुविधाओं का प्रबंध किया जाएगा, जिससे छात्रों का भविष्य उज्जवल होगा।
    इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में स्मार्ट क्लासेस, संयुक्त तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत भवन और स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ी परियोजनाओं का भी भूमिपूजन किया। कृषि उपज मंडी में विश्राम भवन, भोजनालय और पेयजल की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, ताकि किसानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर खाचरौद में फूड प्रोसेसिंग पार्क की घोषणा की, जो क्षेत्र के कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार प्रदान करेगा। इसके अलावा, उन्होंने नागदा से खाचरौद होते हुए उज्जैन और जावरा तक फोरलेन हाईवे बनाने की योजना की भी जानकारी दी, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से सीधा लाभ मिलेगा।
    किसानों के हित में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया और बताया कि सरकार गेहूं खरीदी पर 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दे रही है। इसके साथ ही, अगले तीन वर्षों में 32 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
    मुख्यमंत्री ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना और केन-बेतवा परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाई जाएगी, जिससे किसानों को  फायदेमंद होगा।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों ने इन विकास कार्यों को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। इस मौके पर उज्जैन सांसद अनि फिरोजिया, राज्यसभा सदस्य उमेशनाथ महाराज, खाचरौद विधायक डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।

  • उज्जैन में महाकाल महोत्सवशंकर महादेवन और सोना महापात्रा देंगे प्रस्तुति

    उज्जैन में महाकाल महोत्सवशंकर महादेवन और सोना महापात्रा देंगे प्रस्तुति


    उज्जैन । उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 14 से 18 जनवरी तक पांच दिवसीय महाकाल महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में देश-विदेश के प्रसिद्ध कलाकार शंकर महादेवन सोना महापात्रा और अन्य कई कलाकार अपनी शानदार प्रस्तुति देंगे। यह आयोजन महाकाल की महिमा को दर्शाने और लोक संस्कृति के रंगों को उजागर करने के लिए विशेष रूप से आयोजित किया जा रहा है।महोत्सव का उद्घाटन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 जनवरी को शाम 7 बजे महाकाल महालोक में करेंगे। इस मौके पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवालसंस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधीराज्यसभा सदस्य संत बालयोगी उमेशनाथसांसद अनिल फिरोजिया और निगम सभापति कलावती यादव भी मौजूद रहेंगे।

    कला और संस्कृति का संगम

    महोत्सव के दौरान शंकर महादेवन और सोना महापात्रा जैसे जानेमाने कलाकारों द्वारा संगीत और कला की शानदार प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावाभोपाल के भारत भवन में महाभारत का मंचन भी होगाजो दर्शकों के लिए एक अनूठा अनुभव होगा।

    इतिहास से जुड़ा महोत्सव

    यह महोत्सव सिर्फ संगीत और कला के लिए नहींबल्कि उज्जयिनी के इतिहास से भी जुड़ा हुआ है। करीब 2100 साल पहलेसम्राट विक्रमादित्य भी शिव महोत्सव का आयोजन करते थेजो आज भी लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।यह महाकाल महोत्सव उज्जैन के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण अवसर हैजो न केवल स्थानीय बल्कि देश-विदेश से आए पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करेगा।

  • इंदौर में दूषित पानी से मौतों के 11 दिन बाद सरकार ने पेयजल आपूर्ति के लिए बनाई एसओपी

    इंदौर में दूषित पानी से मौतों के 11 दिन बाद सरकार ने पेयजल आपूर्ति के लिए बनाई एसओपी


    भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई मौतों के 11 दिन बादमध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति प्रणाली के लिए मानक संचालन प्रक्रिया एसओपी जारी की है। यह कदम पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करनेरिसाव रोकने और शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए उठाया गया है। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शुक्रवार देर रात इस एसओपी को जारी किया। इसके तहतशहरी क्षेत्रों में जल वितरण प्रणाली की नियमित जांच और अनुरक्षण की व्यवस्था की गई है।

    एसओपी के प्रमुख बिंदु

    सर्वेक्षण शहरी क्षेत्रों में जल वितरण प्रणाली का सात दिन में सर्वे किया जाएगा। पाइपलाइन का निरीक्षण 20 वर्ष से अधिक पुरानी पाइपलाइनों का चिन्हांकन करइन पाइपलाइनों से रिसाव को 48 घंटे के भीतर सुधारने की जिम्मेदारी तय की गई है। जल शोधन संयंत्र और टंकी की सफाई जल शोधन संयंत्रों और उच्च स्तरीय टंकियों की सफाई और निरीक्षण सात दिन के भीतर किया जाएगा।

    शिकायत निवारण शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए सशक्त तंत्र स्थापित किया जाएगा। इस एसओपी को केंद्रीय लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियंत्रण संगठन द्वारा जारी मैन्युअल ऑन वाटर सप्लाई एंड ट्रीटमेंट और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर तैयार किया गया है।

    जलापूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की कोशिश

    एसओपी के मुताबिकशहरी स्थानीय निकायों के लिए इसे अनिवार्य किया गया हैताकि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिले। जलापूर्ति प्रणाली की गुणवत्ता की नियमित जांचपुराने पाइपलाइनों के बदलाव और शोधन संयंत्रों की सफाई इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस कदम को लेकर अधिकारियों का कहना है कि इससे पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा।

  • RSS को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाएं…. यह पैरा-मिलिट्री नहीं : मोहन भागवत

    RSS को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाएं…. यह पैरा-मिलिट्री नहीं : मोहन भागवत


    भोपाल।
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh- RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने बड़ा बयान देते हुए कहा- संघ कोई पैरा-मिलिट्री संगठन (Paramilitary) नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ को लेकर लोगों के मन में गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं, जबकि RSS का असली मकसद समाज को जोड़ना और उसे मजबूत बनाना है। भागवत ने जोर देते हुए कहा कि ऐसे लोग संघ को ठीक से समझते नहीं हैं। जानिए उन्होंने और क्या कुछ कहा?


    ये लगो संघ को ठीक से नहीं समझते

    भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक एक जैसी वर्दी पहनते हैं, मार्च करते हैं और लाठी का अभ्यास भी करते हैं। लेकिन सिर्फ इन बातों के आधार पर यह मान लेना कि RSS कोई पैरा-मिलिट्री संगठन है, गलत है। उन्होंने कहा, “अगर कोई ऐसा सोचता है तो वह संघ को ठीक से नहीं समझता। RSS एक अलग तरह का संगठन है।”


    इंटरनेट या विकिपीडिया पर हर बात सही नहीं

    भागवत ने कहा कि आजकल लोग किसी भी विषय को गहराई से समझने की कोशिश नहीं करते। वे जल्दी-जल्दी जानकारी के लिए इंटरनेट या विकिपीडिया जैसे स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं, जहां हर बात सही हो, यह जरूरी नहीं। उन्होंने कहा कि जो लोग सही और भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी लेते हैं, वे संघ की भूमिका और उद्देश्य को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।


    RSS को लेकर गलत कहानी बनाई जा रही

    उन्होंने यह भी कहा कि RSS को लेकर जानबूझकर एक गलत कहानी बनाई जा रही है। इसी वजह से संघ को अपने काम और सोच के बारे में लोगों को बार-बार समझाना पड़ रहा है। इतिहास की बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत पर हमला करने वाले अंग्रेज पहले लोग नहीं थे। उनसे पहले भी कई बार बाहर से आए लोगों ने भारत को हराया। उन्होंने कहा कि ये लोग न तो भारत से ज्यादा अमीर थे और न ही ज्यादा अच्छे या गुणवान, फिर भी उन्होंने हमें हराया। ऐसा सात बार हुआ और अंग्रेज आठवें आक्रमणकारी थे।

    अपने फायदे में सोचने पर देश कमजोर होगा
    भागवत ने सवाल उठाया कि अगर ऐसा बार-बार हुआ है तो आजादी की असली सुरक्षा क्या है। उन्होंने कहा कि इसका जवाब समाज को खुद तलाशना होगा। जब लोग सिर्फ अपने फायदे के बारे में सोचेंगे, तब देश कमजोर होगा। लेकिन अगर समाज एकजुट रहेगा और अच्छे मूल्यों को अपनाएगा, तो देश मजबूत बनेगा।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें, 30 साल पुरानी घटना ने फिर पकड़ी तूल

    इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें, 30 साल पुरानी घटना ने फिर पकड़ी तूल


    इंदौर । इंदौर के भागीरथीपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 15 लोगों की जान चली गई हैजिसके बाद स्थानीय प्रशासन और पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस घटना के बाद 30 साल पुरानी एक भयानक घटना की यादें ताजा हो गई हैंजब सुभाष चौक इलाके में पानी की टंकी में सड़ी लाश का पानी सप्लाई होने से लोग बीमार हो गए थे।

    पानी में सड़ी लाश मिलने की घटना ने उस समय पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। टंकी में पड़ा कंकाल पानी में मिलकर पूरे इलाके में सप्लाई हो रहा थाजिससे लोग दस्तउल्टी और बुखार जैसी समस्याओं से जूझने लगे थे। हालांकिइस घटना में किसी की मौत नहीं हुई थीलेकिन लोगों में गहरे डर का माहौल बन गया था।

    अब 30 साल बादभागीरथीपुरा इलाके में फिर से दूषित पानी ने लोगों की जान ली है। कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर प्रदेश सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस घटना ने इंदौर में पानी के सिस्टम की गुणवत्ता और प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है।

    इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी हैलेकिन स्थानीय लोग और नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इन मौतों के बादसियासी माहौल भी गर्मा गया है और सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।यह घटना इंदौर में पानी की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े करती हैऔर यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताती है कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिल सके।

  • टीकमगढ़ में पुलिस महकमे में शोक ड्यूटी से लौटकर प्रधान आरक्षक ने खाया जहर झांसी में इलाज के दौरान मौत

    टीकमगढ़ में पुलिस महकमे में शोक ड्यूटी से लौटकर प्रधान आरक्षक ने खाया जहर झांसी में इलाज के दौरान मौत


    टीकमगढ़ । मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है जहाँ कोतवाली थाने में तैनात एक जांबाज प्रधान आरक्षक ने संदिग्ध परिस्थितियों में जहरीले पदार्थ का सेवन कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस घटना के बाद से पुलिस विभाग और मृतक के परिजनों में मातम पसरा हुआ है।

    ड्यूटी से लौटने के बाद उठाया आत्मघाती कदम प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधान आरक्षक मोहनलाल चढ़ार की तैनाती टीकमगढ़ कोतवाली थाने में थी। गुरुवार को नव वर्ष के उपलक्ष्य में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए उनकी ड्यूटी प्रसिद्ध ‘बगाज माता मंदिर’ में लगाई गई थी। दिनभर मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभाने के बाद शाम को जब वे वापस लौटे तो उन्होंने टीकमगढ़ के चकरा तिराहा के पास अचानक सल्फास जहरीला पदार्थ खा लिया।

    झांसी मेडिकल कॉलेज में थमी सांसें जहर का सेवन करने के कुछ ही देर बाद मोहनलाल की स्थिति बिगड़ने लगी। उन्हें तत्काल स्थानीय जिला अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें झांसी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। झांसी में इलाज के दौरान उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और अंतत उन्होंने दम तोड़ दिया।

    पुलिस जांच में जुटी कारणों का खुलासा नहीं प्रधान आरक्षक ने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया इसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। कोतवाली थाना प्रभारी बृजेन्द्र सिंह घोषी ने बताया कि पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। थाना प्रभारी के अनुसार मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पीएम रिपोर्ट आने और परिजनों व सहकर्मियों के बयान दर्ज होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि उन्होंने यह कदम मानसिक तनाव या किसी अन्य कारण से उठाया।

    सहकर्मियों में शोक की लहर मोहनलाल चढ़ार के निधन की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। उनके सहकर्मियों का कहना है कि वे एक कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी थे और गुरुवार को ड्यूटी के दौरान भी वे सामान्य नजर आ रहे थे। पुलिस प्रशासन अब इस मामले के हर पहलू की जांच कर रहा है ताकि आत्महत्या के पीछे के सही कारणों का पता लगाया जा सके। महत्वपूर्ण जानकारी एक नजर में विवरण जानकारी मृतक का नाम मोहनलाल चढ़ार पदप्रधान आरक्षक थाना कोतवाली टीकमगढ़ घटना स्थल चकरा तिराहा के पासड्यूटी स्थलबगाज माता मंदिर नव वर्ष ड्यूटी मृत्यु का स्थानझांसी मेडिकल कॉलेज

  • ग्वालियर निजी स्कूलों पर फीस स्ट्रक्चर अपलोड न करने पर होगी कार्रवाई

    ग्वालियर निजी स्कूलों पर फीस स्ट्रक्चर अपलोड न करने पर होगी कार्रवाई


    ग्वालियर । ग्वालियर के निजी स्कूलों में फीस को लेकर हो रही मनमानी पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक सख्त कदम उठाया है। अब सभी प्राइवेट स्कूलों को फीस स्ट्रक्चर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है और इस जानकारी की हार्ड कॉपी जिला शिक्षा विभाग में भी जमा करानी होगी। 31 दिसंबर तक सभी स्कूलों को यह काम पूरा करना था लेकिन अब भी कई स्कूलों ने समय सीमा का पालन नहीं किया है। शिक्षा विभाग ने कहा कि जिन स्कूलों ने यह जानकारी अपलोड नहीं की उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    इस बार विभाग ने एक बड़ा बदलाव किया है। पहले केवल पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना आवश्यक था लेकिन अब पहली बार यह आदेश दिया गया है कि हर स्कूल को पोर्टल के साथ-साथ हार्ड कॉपी भी जमा करनी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी स्कूल अपनी फीस संरचना को छुपाने या उसे बदलने की कोशिश न कर सके। सभी प्राइवेट स्कूलों को विभाग के पोर्टल पर फीस संरचना 31 दिसंबर तक अपलोड करना था। अब विभाग तीन-चार दिन के भीतर इन आंकड़ों का मिलान करेगा। जिन स्कूलों ने यह जानकारी अपलोड नहीं की है या हार्ड कॉपी जमा नहीं की है उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    इस वर्ष कई स्कूलों ने पोर्टल पर फीस जानकारी तो अपलोड की लेकिन हार्ड कॉपी जमा करने में लापरवाही बरती। अब विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि हर स्कूल को पूर्ण जानकारी देनी होगी। शिक्षा विभाग ने यह भी बताया कि जिन स्कूलों के अपने पोर्टल हैं उन्हें भी अपनी फीस संरचना वहां दिखानी होगी ताकि अभिभावकों को सही और स्पष्ट जानकारी मिल सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह कदम बच्चों के अभिभावकों को सही जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि स्कूलों द्वारा फीस की अवैध वृद्धि नहीं की जा सके और पारदर्शिता बनी रहे।