Category: Madhya Pradesh

  • पुलिस एबीवीपी झड़प: छतरपुर की काया विधि महाविद्यालय में धांधली के आरोप पर विरोध प्रदर्शन भड़क उठा

    पुलिस एबीवीपी झड़प: छतरपुर की काया विधि महाविद्यालय में धांधली के आरोप पर विरोध प्रदर्शन भड़क उठा


    छतरपुर । मध्य प्रदेश के छतरपुर कन्या विधि महाविद्यालय परिसर में सोमवार दोपहर को माहौल गरम हो गया जब महाविद्यालय में कथित धांधली के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता ज्ञापन सौंपने पहुंचे और उनसे पहले से मौजूद पुलिस बल के बीच तीखी झड़प हो गई। मामला प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच सीधे टकराव का रूप ले लिया जिससे परिसर में अफरातफरी और नारेबाजी का सीन बन गया।

    प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता और महिला छात्राओं का आरोप है कि महाविद्यालय में चल रही अनियमितताओं के पीछे प्राचार्य एचडी अहिरवार का हाथ है। उनका कहना था कि प्राचार्य के खिलाफ एक ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें वह कमीशन लेने के आरोपों से घिरे हैं और इसी के विरोध में उन्होंने प्राचार्य के तत्काल निलंबन की मांग करते हुए ज्ञापन देने का प्रयास किया।

    जब विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधि महाविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के लिए आगे बढ़े तब पुलिस ने हालात को नियंत्रित करने के लिये प्रतिक्रिया दी। इस दौरान双方 बौद्धिक बहस के बजाय धक्का मुक्की और नारे लगने लगे जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। प्रदर्शनकारी महिलाएँ और कार्यकर्ता दोनों ही पुलिस से कोई समझौता न होने पर और अधिक आक्रोशित दिखे।

    प्रदर्शनकारी समूह ने कहा कि महाविद्यालय में केवल एक ऑडियो वायरल होना ही पर्याप्त नहीं बल्कि कई अनियमितताएँ समय से चली आ रही हैं जिनके समाधान के लिए प्रशासन निष्क्रिय रहा। इसी निष्क्रियता के चलते विरोध प्रदर्शन तेज हुआ और पुलिस ने कुछ समय के लिये कार्यकर्ताओं को भगाने की कोशिश की। इस दौरान कदाचार से बचने के लिए पुलिस बल ने कुछ छात्रों और कार्यकर्ताओं को पकड़ने का प्रयास भी किया जिससे वातावरण तनावपूर्ण बन गया।

    घटना के बाद स्थानीय छात्रों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि उनके हलके की नहीं सुनी गई तो वे आंदोलन को और आगे बढ़ा सकते हैं। हालांकि पुलिस और महाविद्यालय प्रशासन ने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है लेकिन आसपास के इलाकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

    विश्लेषकों का कहना है कि विद्यार्थी परिषद जैसे छात्र संगठनों द्वारा अभाविप नेताओं के नेतृत्व में इस प्रकार के प्रदर्शनों के बढ़ते स्वर से शिक्षा संस्थानों में प्रशासन छात्र संपर्क और मानक संचालन प्रक्रियाओं के प्रति गंभीरता की आवश्यकता जताई जा रही है। अशांति को काबू में रखने के लिये पुलिस का कड़ा रुख और प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिये चुनौती बन सकता है।

  • कृषि में शोध बढ़ायेंगे, मंडी निर्यात नीति भी लायेंगे सरसों को भी लायेंगे भावांतर के योजना में

    कृषि में शोध बढ़ायेंगे, मंडी निर्यात नीति भी लायेंगे सरसों को भी लायेंगे भावांतर के योजना में


    भोपाल! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। इनके अथक परिश्रम से ही हमारे बाजार गुलजार है। हम वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रहे हैं। यह वर्ष प्रदेश के इतिहास में किसानों के हित और समग्र कल्याण के मामले में मील का पत्थर साबित होगा।उन्होंने कहा कि यह वर्ष ‘खेत से लेकर कारखाने तक और बाग से लेकर बाजार तक’ की पूरी मूल्य संवर्धन श्रृंखला को एक सूत्र में जोड़ेगा।

    इस वर्ष हम क़ृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और इनमें वैल्यू एडिशन के लिए अधिकाधिक रोजगार आधारित उद्योगों के विकास, उन्नत किस्म के बीजोत्पादन, पशुपालन, दुग्धोत्पादन, मत्स्योत्पादन में वृद्धि सहित हर वो कदम उठाएंगे, जिनसे खेती और अन्नदाताओं का विकास हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से कृषि विश्वविद्यालय परिसर, ग्वालियर में हो रहे ‘कृषि मंथन एवं कृषि प्रौद्योगिकी मेला 2026’ को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना संबंधी कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में तेज़ी से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। हमारी सरकार प्रदेश में औषधीय और मसाला फसलों का उत्पादन बढ़ाने के सभी प्रयास कर रही है। हम जल्द ही कृषि उत्पादन निर्यात नीति लाने वाले हैं। हम कृषि में शोध कार्य भी बढ़ायेंगे। उन्होंने कहा कि हम खेती-किसानी और फल-फूलों की खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए कोई कसर नहीं रखेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कृषि मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह हमें किसानो के कल्याण के लिये प्रभावी और कारगर कदम उठाने में सहायक होगा। ‘कृषि मंथन’ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) नई दिल्ली और कृषि विभाग, म.प्र. शासन के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” की थीम पर हो रहा कृषि मंथन निश्चित ही किसानों को खेती में जरूरी सुधार और बदलाव लाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आधुनिक कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, प्रोसेसिंग, तकनीक अपनाने और ग्रामीण युवाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देकर व्यापक रोजगार सृजन करने पर फोकस कर रही है। तकनीकी नवाचार, विविधीकरण और नीतिगत समर्थन से इन क्षेत्रों में न केवल उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी, बल्कि विपणन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में बाजार अनुरूप लाभकारी व्यवस्था कृषकों के लिए निर्मित होगी। हम कृषि के अलावा उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं सहकारिता क्षेत्र में भी नई सोच से आगे बढ़ रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज कृषि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिमों का सामना कर रही है। इस मंथन में देश के विभिन्न कृषि संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक विचार मंथन कर नई तकनीकों के विकास की राह प्रशस्त करेंगे।

    वीडियो काँफ्रेंसिंग में सचिव कृषि एवं किसान कल्याण विभाग श्री निशांत वरवड़े, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह ने भोपाल से सहभागिता की। यूनिवर्सिटी परिसर में हो रहे इस कृषि मंथन में कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलगुरू प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार शुक्ला, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति डा. ब्रजेन्द्र सिंह, यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, धारवाड़, कर्नाटक के कुलपति डॉ. पी.एल पाटिल, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम, मेरठ के निदेशक डॉ. सुनील कुमार, देश के विभिन्न कृषि संस्थानों से आये वैज्ञानिक, आईसीएआर के पदाधिकारी सहित कृषि अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • जायका टीम ने किया एमपी ट्रांसको की ट्रांसमिशन लाइन एवं सब स्टेशन का बारीकी से निरीक्षण

    जायका टीम ने किया एमपी ट्रांसको की ट्रांसमिशन लाइन एवं सब स्टेशन का बारीकी से निरीक्षण


    भोपाल! जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) द्वारा मध्यप्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण हेतु मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) में संचालित जायका-
    2 वित्त पोषित विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत किए गए कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया गया।जायका जापान की इवैल्यूएटर सुश्री हिसाए ताकाहाशी एवं जायका के भारतीय प्रतिनिधि श्री कुनाल गुप्ता ने निर्माण कार्यों, उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन की बारीकी से जांच-पड़ताल की।

    ढीमरखेडा लाइन एवं सब स्टेशन का किया निरीक्षण

    निरीक्षण के दौरान टीम ने सर्वप्रथम 132 केवी सब स्टेशन ढीमरखेड़ा तथा इसके लिए निर्मित 132 केवी पनागरढीमरखेड़ा ट्रांसमिशन लाइन का अवलोकन किया। इवैल्यूएटर सुश्री ताकाहाशी ने लोन स्वीकृति के समय प्रस्तुत प्रारंभिक योजना, परियोजना के क्रियान्वयन, स्थापित उपकरणों की गुणवत्ता, लागत एवं रखरखाव से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण उपरांत उन्होंने सब स्टेशन एवं ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाए जाने पर संतोष व्यक्त किया।

    उपयोगिता जानने के लिए स्थानीय नागरिकों से भी की चर्चा

    जायका द्वारा वित्त पोषित फंड से निर्मित सब स्टेशन की उपयोगिता के संबंध में अधिकारियों से जानकारी लेने के साथ-साथ जायका टीम ने स्थानीय महिलाओं को बुलाकर उनका प्रत्यक्ष फीडबैक भी लिया।

    महिलाओं ने बताया कि सब स्टेशन के निर्माण से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब उन्हें पर्याप्त एवं निर्बाध बिजली मिल रही है, जिससे सिंचाई के लिए भी पर्याप्त विद्युत उपलब्ध हो रही है। इससे उनके आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है।

    स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर और स्काडा का भी किया अवलोकन

    जायका टीम ने एमपी ट्रांसको के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी )एवं स्वदेशी तकनीकी एवं उपकरणों से निर्मित स्काडा कंट्रोल सेंटर का भी अवलोकन किया और उसकी कार्य प्रणाली की प्रशंसा की।

    ये अधिकारी रहे उपस्थित

    निरीक्षण के दौरान एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री के.एम. सिंघल, अधीक्षण अभियंता श्री आर.सी. शर्मा, कार्यपालन अभियंता श्री ए.पी.एस. चौहान, श्री शशि शेखर, श्री रविराज पटेल, सहायक अभियंता श्री जितेन्द्र तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

  • खंडवा में दरिंदगी पर कड़ा प्रहार, दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को तिहरा आजीवन कारावास, मौत तक जेल में रहेगा बंद

    खंडवा में दरिंदगी पर कड़ा प्रहार, दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को तिहरा आजीवन कारावास, मौत तक जेल में रहेगा बंद


    खंडवा /मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से न्याय व्यवस्था का एक बड़ा और सख्त संदेश सामने आया है। हरसूद न्यायालय ने महिला से दुष्कर्म और उसके बाद की गई निर्मम हत्या के मामले में आरोपी हरिराम उर्फ हरि को दोषी ठहराते हुए तिहरा आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने अपराध की क्रूरता और अमानवीयता को देखते हुए स्पष्ट किया कि आरोपी को मृत्यु तक जेल में ही रहना होगा।

    यह फैसला देर शाम सुनाया गया और कोर्ट कक्ष में सन्नाटा छा गया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि यदि ऐसे जघन्य अपराध में दोषी को कम दंड दिया जाता है तो समाज में गलत संदेश जाएगा और अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे। इसलिए आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 66, 70(1) और 103(1) के तहत दोषी पाते हुए प्रत्येक धारा में आजीवन कारावास तथा 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। इस प्रकार तीनों सजाएं मिलाकर आरोपी को तिहरा आजीवन कारावास अर्थात मृत्यु तक कारावास भुगतना होगा।

    अभियोजन पक्ष के वकील जाहिद अहमद के अनुसार घटना 23 मई 2025 की है। खालवा थाना क्षेत्र की रोशनी पुलिस चौकी को सूचना मिली थी कि शादी समारोह में गई एक महिला रात भर घर नहीं लौटी। अगली सुबह गांव की एक वृद्ध महिला ने उसे एक घर के पीछे खून से सने कपड़ों में जमीन पर पड़ा देखा। घर लाए जाने पर पीड़िता ने बताया कि गांव के ही हरिराम ने उसके साथ गलत काम किया है।

    घटना की भयावहता यहीं समाप्त नहीं हुई। घर की अन्य महिलाओं ने देखा कि पीड़िता गंभीर रूप से घायल थी और उसके शरीर पर गहरे घाव थे। कुछ ही देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान डीएनए रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई, जिससे आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य मिले।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों को एकत्रित कर अदालत में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने ठोस तर्कों और प्रमाणों के आधार पर आरोपी के अपराध को सिद्ध किया। न्यायालय ने भी अपने फैसले में कहा कि यह अपराध न केवल पीड़िता के प्रति बल्कि पूरे समाज के प्रति अत्यंत क्रूर कृत्य है।

    इस फैसले को जिले में न्याय की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि ऐसे कठोर निर्णय ही समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करते हैं और अपराधियों में भय पैदा करते हैं।

    खंडवा में आए इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय गंभीर अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। यह निर्णय न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि कानून से बड़ा कोई नहीं।

  • बंदियों के पुनर्वास को मिले मानवीय दृष्टि: मंगूभाई पटेल ने कहा सकारात्मक सोच से ही होगा नव-निर्माण

    बंदियों के पुनर्वास को मिले मानवीय दृष्टि: मंगूभाई पटेल ने कहा सकारात्मक सोच से ही होगा नव-निर्माण


    भोपाल । भोपाल स्थित लोकभवन में सोमवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बंदी पुनर्वास प्रयासों को समग्र बहुआयामी और मानवीय दृष्टिकोण से संचालित करने पर जोर दिया। गृह एवं जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कारागार केवल दंड देने का स्थान नहीं बल्कि सुधार और पुनर्स्थापन का केंद्र होना चाहिए। बंदियों की सोच को सकारात्मक दिशा देना और उन्हें आत्मविश्वास से भरना पुनर्वास प्रक्रिया की मूल भावना होनी चाहिए।

    राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि पुनर्वास का उद्देश्य बंदियों को अपराध की पहचान से मुक्त कर बेहतर नागरिक के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि मामूली अपराधों में विचाराधीन कैदियों को केवल सजा देना पर्याप्त नहीं बल्कि उन्हें रचनात्मक गतिविधियों और नैतिक मार्गदर्शन के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में लौटने योग्य बनाना आवश्यक है। इस दिशा में उत्पादक गतिविधियों का संयोजन कर बंदियों को रोजगारपरक कार्यों से जोड़ने की आवश्यकता बताई गई ताकि वे अपने परिवारों के जीवन-निर्वाह में भी आर्थिक सहयोग दे सकें।

    बैठक में राज्यपाल ने प्रधानमंत्री के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात का उल्लेख करते हुए सुझाव दिया कि इसका नियमित प्रसारण जेलों में कराया जाए। उनका मानना है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को देश की प्रगति प्रेरक व्यक्तित्वों और सकारात्मक पहल से जुड़ने का अवसर मिलेगा जिससे उनके भीतर आशावाद आत्मबल और आत्म-सुधार की भावना विकसित होगी। जेल की दीवारों के पीछे एकाकी जीवन जी रहे बंदियों के लिए यह कार्यक्रम मानसिक और नैतिक संबल का कार्य कर सकता है।

    राज्यपाल ने महिला बंदियों और उनके बच्चों के समुचित लालन-पालन बुजुर्ग एवं दिव्यांग बंदियों के लिए आवश्यक कृत्रिम उपकरणों की उपलब्धता तथा लंबित दया याचिकाओं के त्वरित निराकरण जैसे मुद्दों पर भी विशेष चर्चा की। उन्होंने कहा कि संवेदनशील वर्गों के लिए विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।

    बैठक में उपस्थित अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिव शेखर शुक्ला ने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 में प्राप्त 18 दया याचिकाओं का विभिन्न स्तरों पर परीक्षण किया जा रहा है और पिछले पांच वर्षों में आई सभी याचिकाओं की समीक्षा की प्रक्रिया भी जारी है। त्वरित निपटान के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया जा रहा है जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि जेल विभाग द्वारा एक अभिनव पहल के तहत गीता पाठ के ऑनलाइन कार्यक्रम का प्रदेश की जेलों में साप्ताहिक प्रसारण किया जा रहा है जिसमें श्लोकों का शुद्ध उच्चारण और भावार्थ समझाया जाता है। यह पहल बंदियों में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना के विकास में सहायक सिद्ध हो रही है।

  • किसान विरोधी बताकर कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, अटल पथ पर लगेगी किसानों की महाचौपाल

    किसान विरोधी बताकर कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, अटल पथ पर लगेगी किसानों की महाचौपाल


    भोपाल /भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस ने मंगलवार को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया है। राजधानी के अटल पथ पर किसानों की विशाल चौपाल लगाई जाएगी, जिसमें देशभर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।

    कांग्रेस के अनुसार यह ट्रेड डील किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है। पार्टी का आरोप है कि यदि यह समझौता मौजूदा स्वरूप में लागू होता है तो देश के कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ेगा और स्थानीय बाजारों में विदेशी दबाव बढ़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने इसे जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी की है।

    कार्यक्रम के तहत दोपहर एक बजे दोनों वरिष्ठ नेता भोपाल पहुंचेंगे और लगभग दो बजे सभा स्थल पर उपस्थित होकर किसानों को संबोधित करेंगे। सम्मेलन में प्रदेशभर से आए किसानों की भागीदारी होगी। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस आंदोलन में करीब एक लाख किसान शामिल होंगे। विशेष रूप से भोपाल के आसपास के 11 जिलों से बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों की आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का प्रयास है। चौपाल के माध्यम से किसान अपनी समस्याएं, आशंकाएं और सुझाव खुलकर रख सकेंगे। पार्टी इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाने की रणनीति पर काम कर रही है।

    इसी कड़ी में कांग्रेस व्यापारिक संगठनों से भी संवाद करेगी। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी भोपाल के श्यामला हिल्स और लखेरापुरा क्षेत्रों में व्यापारियों से मुलाकात करेंगे। अमेरिका ट्रेड डील के संभावित प्रभावों पर चर्चा की जाएगी और व्यापारियों की राय जानी जाएगी। दोपहर साढ़े तीन बजे कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बाजार क्षेत्रों में पहुंचकर आम व्यापारियों से संवाद करेंगे।

    भोपाल में प्रस्तावित यह मेगा प्रदर्शन प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। कांग्रेस इसे किसान हितों की रक्षा का आंदोलन बता रही है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    अटल पथ पर होने वाली यह किसानों की चौपाल केवल एक सभा नहीं बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा शक्ति प्रदर्शन मानी जा रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इस आंदोलन का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव कितना व्यापक होता है।

  • बीआरटीएस मार्ग पर बदलेगा ट्रैफिक का चेहरा, इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण की फिर से हुई शुरुआत

    बीआरटीएस मार्ग पर बदलेगा ट्रैफिक का चेहरा, इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण की फिर से हुई शुरुआत


    इंदौर शहर में लंबे समय से प्रतीक्षित एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट आखिरकार जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है। बीआरटीएस मार्ग पर बनने वाले इस बहुप्रतीक्षित कॉरिडोर का काम फिर से शुरू हो गया है और मशीनों की गूंज के साथ मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। करीब चार साल पहले गुजरात की कंपनी राजकमल बिल्डर्स को इस प्रोजेक्ट का ठेका दिया गया था, लेकिन विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से यह योजना अधर में लटक गई थी। अब एक बार फिर निर्माण की कवायद तेज हो गई है।

    करीब पंद्रह साल पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी। हालांकि बाद में एबी रोड पर बीआरटीएस निर्माण हो जाने के कारण एलिवेटेड कॉरिडोर की आवश्यकता और व्यवहारिकता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। लंबे विचार-विमर्श और समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही परियोजना को दोबारा हरी झंडी दी गई और अब कॉरिडोर मार्ग पर बेरिकेडिंग कर काम शुरू कर दिया गया है।

    फिलहाल एलआईजी गुरुद्वारा के पास मिट्टी परीक्षण किया जा रहा है। इससे पहले ट्रैफिक सर्वे, प्लानिंग और प्रारंभिक मिट्टी परीक्षण पर ही पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। अब दोबारा परीक्षण कर निर्माण की औपचारिक प्रक्रिया को गति दी जा रही है। छह किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर एलआईजी से नवलखा चौराहे तक बनेगा और इसे पूरा करने में लगभग तीन वर्ष का समय लगने का अनुमान है।

    यह प्रोजेक्ट वर्ष 2021 में राजकमल बिल्डर्स को सौंपा गया था और 2024 तक इसके पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन ट्रैफिक लोड अपेक्षित 4 प्रतिशत तक नहीं पहुंचने के कारण मामला अटक गया। अनुबंध की शर्तों के अनुसार यदि लोक निर्माण विभाग परियोजना रद्द करता तो सरकार को कंपनी को 30 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता। इसी कारण दो माह पहले दोबारा समीक्षा कर प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया और अब निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

    इस महत्वाकांक्षी योजना पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है। हाल ही में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में यह तय किया गया कि तीन प्रमुख चौराहों पर भुजाएं उतारी जाएंगी और ट्रैफिक सुगमता के लिए रोटरी भी बनाई जाएगी।

    एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से बीआरटीएस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और शहर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। लंबे समय से अटकी इस परियोजना के फिर से शुरू होने से शहरवासियों में उम्मीद जगी है कि इंदौर का यातायात ढांचा और मजबूत होगा तथा विकास की रफ्तार और तेज होगी।

  • मप्र में मुकुंदपुर जू का एवियारी विदेशी पक्षियों से हुआ गुलजार

    मप्र में मुकुंदपुर जू का एवियारी विदेशी पक्षियों से हुआ गुलजार

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मैहर जिले के मुकुंदपुर में स्थित महाराजा मारतन्द सिंह जू देव वाईट टाइगर सफारी (मुकुंदपुर) का वॉक इन एवियारी विभिन्न प्रजातियों के रंगे-बिरंगे प्रवासी पक्षियों से गुलजार हो गया है।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रविवार को मैहर जिले के प्रवास के दौरान मुकुंदपुर जू का निरीक्षण किया। इस दौरान उनकी उपस्थिति में जू में लाए गए विदेशी प्रजाति के पक्षी भी उनके रहवास में छोड़े गए। नॉर्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड सिगरोली द्वारा सीएसआर मद से मुकुंदपुर को प्रदाय किए गए नए विदेशी पक्षियों को वॉक इन एवियारी के अंदर प्राकृतिक निवास पर छोड़ा गया।

    वन्यजीव संरक्षण के लिए मुकुंदपुर जू के एवीयरी मे अब नये प्रजाति के रंग बिरंगे पक्षी आ चुके है, जिनमें रेड स्कारलेट मैकॉ, रेड ग्रीन विंग्ड मैकॉ, सल्फर-क्रेस्टेड कॉकाटू, ब्लू गोल्ड मैकॉ, हैनस मैकॉ, अफ्रीकन ग्रे पैरोट, ग्रैंड इलेक्टस, सन कोनूर, कॉकेटियल्स, और लव बर्ड शामिल हैं।

    नये पक्षियों के आगमन से पर्यटक को अब और अधिक विदेशी प्रजाति के पक्षी देखने को मिलेंगे।उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने भ्रमण के दौरान पक्षियों के सरंक्षण के प्रयासो की सराहना की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा जिले के हरिहरपुर में की जा रही प्राकृतिक खेती का भी अवलोकन किया। इस मौके पर सीसीएफ राजेश राय, वन मंडल अधिकारी विद्या भूषण मिश्रा उपस्थिति रहे।

  • मप्र में कलेक्टर्स की अनदेखी के चलते 20 जिलों में 77 करोड़ की 33 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा

    मप्र में कलेक्टर्स की अनदेखी के चलते 20 जिलों में 77 करोड़ की 33 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा

    भोपाल। मध्य प्रदेश के 20 जिलों में 77 करोड़ रुपये की 33 सरकारी संपत्तियों का मालिक वक्फ बोर्ड है। वक्फ बोर्ड के नाम पर ये संपत्तियां जिला कलेक्टरों की अनदेखी और लापरवाही की वजह से हुई हैं।

    इसके अलावा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने रायसेन जिले में साढ़े चार किलोमीटर लंबी सड़क ऐसी जगह बना दी, जो कुछ दिन बाद डूब क्षेत्र में आने वाला था। साथ ही विदिशा और नर्मदापुरम जिले में स्वीकृति से ज्यादा लंबी सड़क बनाकर सरकार को 15 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की निष्क्रियता की वजह से प्रदेश में अवैध कॉलोनियां पनप गईं, तो दूसरी तरफ इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर नगर निगम आश्रय शुल्क के रूप में जमा 260 करोड़ रुपये का हिसाब ही नहीं दे पाए।

    यह खुलासा कैग (नियंत्रक महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट को एक दिन पहले विधानसभा में पेश किया गया था, जिसमें 2018 से 2023 के बीच सरकार के 14 विभागों के कामकाज और योजनाओं की पड़ताल करने के बाद उक्त गड़बड़ियों का खुलासा किया है।

    कैग की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर भी ऑडिट किया। वक्फ की 81 संपत्तियों की जांच में पाया कि 20 जिलों की 33( 41 फीसदी) संपत्तियां जो दस्तावेजों में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज थीं। उन्हें वक्फ की संपत्ति के रूप में रजिस्टर्ड किया गया। कैग ने रिपोर्ट में लिखा है कि इन 20 जिलों के कलेक्टरों ने संपत्तियों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को निरस्त करने करने के लिए कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए। सरकारी विभागों के इस रवैये की वजह से वक्फ एक्ट का दुरुपयोग हुआ बल्कि सरकारी जमीनों पर कब्जा हो गया।

    हालांकि, सरकार ने अपने जवाब में बताया कि ये टेक्निकल मिस्टेक है। ये भी कहा कि वक्फ एक्ट में जिला प्रशासन से एनओसी लेने का कोई प्रोविजन नहीं है। जिला प्रशासन को हर संपत्ति के बारे में पता था। जब राजस्व रिकॉर्ड का कंप्यूटरीकरण किया गया तो उस दौरान स्वामित्व के कॉलम में सरकारी संपत्ति दर्ज हुई।

    कैग ने सरकार के इस उत्तर को खारिज कर दिया और लिखा कि जिन संपत्तियों का परीक्षण किया उनमें से कुछ एक या दो साल पहले ही रजिस्टर्ड हुई हैं। साथ ही ये भी लिखा कि दो संपत्तियों पर कलेक्टरों की तरफ से आपत्ति दर्ज की गई थी इसके बाद भी वक्फ बोर्ड ने उन्हें बतौर वक्फ की संपत्ति दर्ज किया। जिन संपत्तियों को वक्फ ने अपना समझ लिया वो सामुदायिक प्रयोजन के लिए रिजर्व की गई थी।

    कैग ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (नगर तथा ग्राम निवेश) के लेखा परीक्षा के दौरान पांच बड़े शहरों में हुए प्लान्ड डेवलपमेंट को लेकर ऑडिट किया। ये ऑडिट 2018 से 2023 के बीच भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन नगर निगम में किया गया। इस दौरान 10 अहम बातें सामने आईं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग शहरों के व्यवस्थित विकास की प्लानिंग करने में ही नाकाम रहा है। कैग ने लिखा- टीएंडसीपी ने बीना पेट्रोकेमिकल्स और औद्योगिक प्रदेश के अलावा कोई भी प्रादेशिक योजना तैयार नहीं की।

    भोपाल का मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं कर पाया। भोपाल में अभी भी साल 2005 का मास्टरप्लान ही लागू है। विकास योजनाओं की तैयारी के लिए टीएंडसीपी उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर ने हितधारकों से इनपुट कलेक्शन नहीं किया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन नगर निगम ने स्थानीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास के लिए जोन स्तर पर प्लान तैयार नहीं किए, जिससे अवैध कॉलोनियों और स्लम एरिया में बढ़ोतरी हुई। अवैध मैरिज गार्डन की 126 शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने में टीएंडसीपी नाकाम रहा। इसके अलावा नालों का अतिक्रमण और नालों के लिए जमीन छोड़ने के नियमों का पालन भी नहीं करा पाया। कॉलोनाइजर्स ने जो अधूरी कॉलोनियां विकसित कीं, उनके पूरी होने से पहले ही कॉलोनी के बंधक रखे प्लॉट्स को मुक्त कर दिया।

    नगर निगमों ने सुपरविजन फीस पर जीएसटी नहीं वसूला, जिसके चलते सरकार को 96 लाख रुपए का नुकसान हुआ। नगर निगम के अफसरों ने कॉलोनी डेवलपमेंट और बिल्डिंग परमिशन जारी करने के बाद विकास कार्य की मॉनिटरिंग नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार, 142 बिल्डिंग और 43 कॉलोनियों के भौतिक सत्यापन के दौरान पाया गया कि मिनिमम ओपन स्पेस, तलघर, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट नहीं बनाई गई। ऑडिट के दौरान पाया गया कि टीएंडसीपी से परमिशन लिए बगैर कॉलेज, रिसॉर्ट और आईटी पार्क बन गए।

    मप्र में जीएसटी लागू होने के बाद गड़बड़ियां देखकर भी आंखे मूंदे रहे अफसर, कई शहरों में मिली खामियां

    कैग की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती दौरान में मध्य प्रदेश में व्यापारियों की गड़बड़ियां देखकर भी जीएसटी विभाग के अफसर आंखें मूंदे रहे और उन पर ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते कई शहरों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। इसमें पाया गया कि कई मामलों में जीएसटी विभाग के अफसरों ने ब्याज की राशि के अंतर और ई-वे बिल का कम भुगतान को भी नजरअंदाज किया। गौरतलब है कि 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था। इसके बाद अधिकारी व व्यापारियों को नियमों को समझने में काफी मशक्कत करना पड़ी थी।

    इंदौर और भिंड में करोड़ों की कर चोरी के मामले

    कैग की रिपोर्ट के मुताबिक भिंड वृत में वर्ष 2018-19 से 2020-21 के बीच एक प्रकरण में 63 से 162 दिनों की देरी से जीएसटी का भुगतान किया गया। इस प्रकरण में 24 करोड़ रुपये का भुगतान ही नहीं किया गया। वहीं इंदौर के एक ई-वे बिल सत्यापन के प्रकरण में कैग ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। इंदौर के एक करदाता के प्रकरण में वर्ष 2018-19 व 2020-21 के दौरान 137.17 करोड़ की देनदारी के ई-वे बिल जारी किए गए लेकिन तीन साल के दौरान फर्म द्वारा 0.15 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह 137.02 करोड़ कर राशि का कम भुगतान किया गया। इतना ही नहीं, इंदौर में आइटीसी इनपुट सेवा वितरक (आईएसडी) क्रेडिट का गलत लाभ उठाकर 4.15 करोड़ रुपये की राशि मिसमैच होने का मामला भी सामने आया।

    भोपाल में टर्नओवर और पीथमपुर में टीडीएस की गड़बड़ी

    भोपाल में जीएसटी वार्षिक रिटर्न के मामले में वर्ष 2020-21 के दौरान लेखापरीक्षित वार्षिक वित्तीय विवरण व जीएसटीआर-9 के बीच 2166.46 कराेड़ का टर्नओवर असमायोजित मिला। कैग द्वारा यह जानकारी शासन को दिए जाने के बाद राज्य शासन ने सितंबर 2024 में करदाता को डीआरसी-01 जारी किया। पीथमपुर के एक प्रकरण में टीडीएस रिटर्न में कम राशि बताई गई। इस प्रकरण में लेखा परीक्षा ने पाया कि जीएसटी के मुताबिक कटौती की गई कर राशि 2.53 करोड़ और कर योग्य मूल्य 126.65 करोड़ था, जबकि इस मामले में 95.42 करोड़ के कर की राशि को छुपाया गया।

    1895 स्कूलों में टीचर्स ही नहीं, 435 स्कूलों में शिक्षक तो हैं, पर बच्चे नहीं

    कैग की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1895 स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्र तो हैं. लेकिन एक भी शिक्षक यहां पदस्थ नहीं है, वहीं, दूसरी ओर 435 स्कूल ऐसे पाए गए, जहां एक भी विद्यार्थी का नामांकन नहीं है, इसके बावजूद यहां शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।

    कैग रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2023 तक प्रदेश के 66 हजार 814 स्कूलों की समीक्षा में यह विसंगतियां सामने आईं हैं. 435 शून्य नामांकन वाले स्कूलों में से 105 स्कूलों में एक वर्ष से, 38 स्कूलों में दो वर्षों से, 33 स्कूलों में तीन वर्षों से और 259 स्कूलों में चार वर्षों से किसी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है। इनमें से 320 स्कूलों में शिक्षकों के लिए पद स्वीकृत ही नहीं थे, फिर भी वहां शिक्षक पदस्थ पाए गए। कैग ने विभाग के जवाब को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि बंद करने या तबादले की प्रक्रिया के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।

    छात्र-शिक्षक अनुपात में भारी गड़बड़ी

    शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्राइमरी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1, मिडिल में 35:1 व सेकंडरी और हायर सेकंडरी में 30:1 होना चाहिए। हालांकि, प्राइमरी स्तर पर औसत स्थिति सामान्य बताई गई है, लेकिन मिडिल स्कूलों में यह अनुपात 37:1, सेकंडरी में 40:1 और हायर सेकंडरी में 54:1 दर्ज है। जिलों की स्थिति और भी चिंताजनक है. टीकमगढ़ में मिडिल स्कूलों का पीटीआर 57:1 है, जो राज्य औसत से काफी अधिक है। सेकंडरी स्तर पर अशोक नगर में 66:1 का अनुपात दर्ज हुआ। वहीं, हायर सेकंडरी में टीकमगढ़ का पीटीआर 112:1 पाया गया, जो राज्य औसत से 58 अंक अधिक है।

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  • गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य में गिद्धों की हुई वृद्धि, 1013 गिद्धों के साथ बना सुरक्षित ठिकाना

    गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य में गिद्धों की हुई वृद्धि, 1013 गिद्धों के साथ बना सुरक्षित ठिकाना

    मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य एक बार फिर गिद्धों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। ‘प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना 2025-26’ के तहत रविवार को संपन्न हुई, जिसमें यहां कुल 1013 गिद्ध पाए गए हैं।

    गणना का निरीक्षण मुख्य वन संरक्षक उज्जैन वृत्त, आलोक पाठक एवं वनमंडलाधिकारी मंदसौर, संजय रायखेरे द्वारा किया गया। बताया गया कि गाँधीसागर अभयारण्य केवल स्थानीय गिद्धों का ही नहीं, बल्कि विदेशी प्रजातियों का भी पसंदीदा ठिकाना है। गणना में पाए गए हिमालयन ग्रिफन, यूरेशियन ग्रिफन और सिनेरियस जैसे गिद्ध लंबी दूरी तय कर यहाँ पहुँचते हैं। ये मुख्य रूप से तिब्बत, मध्य एशिया, और हिमालय की ऊँचाइयों से शीतकाल के दौरान प्रवास करते हैं। ये प्रवासी गिद्ध आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के महीने में गाँधीसागर पहुँचते हैं और गर्मी शुरू होने से पहले यानी मार्च-अप्रैल तक यहाँ रुकते हैं।

    1. स्थानीय निवासी (4 प्रजातियाँ):

    ये गिद्ध वर्ष भर अभयारण्य में रहते हैं और यहीं प्रजनन करते हैं:

    भारतीय गिद्ध : चंबल की ऊँची चट्टानों पर घोंसले बनाने वाली मुख्य प्रजाति।

    सफेद पीठ वाला गिद्ध : पेड़ों पर बसेरा करने वाले ये गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    राज गिद्ध : अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट लाल सिर वाली प्रजाति।

    मिस्र का गिद्ध : आकार में छोटे और सफेद रंग के स्थानीय गिद्ध।

    विदेशी मेहमान/प्रवासी (3 प्रजातियाँ):

    ये प्रजातियाँ शीतकाल (अक्टूबर-नवंबर से मार्च-अप्रैल) के दौरान तिब्बत, मध्य एशिया और हिमालय की ऊँचाइयों से प्रवास कर यहाँ पहुँचती हैं:

    हिमालयन ग्रिफन : हिमालय के ठंडे क्षेत्रों से आने वाले विशालकाय गिद्ध।

    यूरेशियन ग्रिफन : लंबी दूरी तय कर आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रवासी।

    सिनेरियस गिद्ध : दुनिया के सबसे भारी और बड़े गिद्धों में शुमार।

    गाँधीसागर ही क्यों है ‘गिद्धों का स्वर्ग’?

    निरीक्षण के दौरान डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि सुरक्षित चट्टानें चंबल नदी के किनारे स्थित ऊँची और दुर्गम चट्टानें गिद्धों को सुरक्षित घोंसले बनाने और प्रजनन के लिए आदर्श स्थान प्रदान करती हैं। प्रचुर भोजन और जल: अभयारण्य में वन्यजीवों की अच्छी संख्या और आस-पास के क्षेत्रों में पशुधन की उपलब्धता के कारण इन्हें पर्याप्त भोजन मिलता है। चंबल का पानी इनके लिए बारहमासी जल स्रोत है। मानवीय हस्तक्षेप मुक्त: अभयारण्य का शांत वातावरण और सुरक्षित कॉरिडोर इनके फलने-फूलने में मदद करता है।