Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में साकार हुआ कुंभलगढ़ दुर्ग जैसा 'महाराणा प्रताप लोक'मेवाड़ की वीरगाथा को मिलेगा नया रूप

    भोपाल में साकार हुआ कुंभलगढ़ दुर्ग जैसा 'महाराणा प्रताप लोक'मेवाड़ की वीरगाथा को मिलेगा नया रूप


    भोपाल । भोपाल में अब एक नई ऐतिहासिक धरोहर जुड़ गई है। राजधानी के तात्या टोपे नगर क्षेत्र में महाराणा प्रताप लोक का निर्माण पूरा हो गया है। यह परिसर लगभग चार एकड़ में फैला हुआ है और इसे जैसलमेर स्थित प्रसिद्ध कुंभलगढ़ दुर्ग की प्रतिकृति के तौर पर डिजाइन किया गया है। इस स्थल पर मेवाड़ के राजपूत शासकोंखासकर महान योद्धा महाराणा प्रताप की शौर्यगाथा को जीवंत किया जाएगा।

    मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के कार्यकारी अभियंता बृजेश तिवारी के अनुसारमहाराणा प्रताप लोक का निर्माण कार्य अब पूरा हो चुका है। इस परिसर का मुख्य आकर्षण महाराणा प्रताप की 20 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा हैजो उन्हें उनके प्रिय घोड़े चेतक पर आक्रमण की मुद्रा में दिखाती है। यह प्रतिमा न केवल शौर्य और वीरता का प्रतीक हैबल्कि यह मेवाड़ की ऐतिहासिक धरोहर को भी सम्मानित करती है।

    प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार नीरज अहिरवार ने किया है। इस मूर्तिकला का वजन करीब 2.5 टन है और इसकी लागत लगभग 35 लाख रुपये आई है। यह मूर्ति महाराणा प्रताप के महान युद्ध कौशल और उनकी देशभक्ति को प्रदर्शित करती हैजिससे आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा ले सकेंगी।

    महाराणा प्रताप लोक में कई अन्य आकर्षण भी होंगेजिनमें मेवाड़ की वीर गाथाओं को दर्शाने वाले चित्रशिल्प और अन्य ऐतिहासिक सामग्री भी शामिल की जाएगी। यह स्थल न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर के रूप में उभरेगाबल्कि यह क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और लोगों को भारतीय वीरता और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करेगा।

    भोपाल में यह परियोजना न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगीबल्कि यह राज्य के सांस्कृतिक इतिहास और गौरव को भी प्रमोट करेगी। इस परिसर के उद्घाटन के बादमहाराणा प्रताप लोक की शौर्यगाथा को और अधिक लोगों तक पहुँचाने का रास्ता खुलेगा। यह स्थल न केवल स्थानीय लोगों के लिएबल्कि राज्य और देश भर के पर्यटकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

  • जबलपुर में अंग्रेजों की 'दासता' की निशानियों को मिटाने की मुहिम: 15 से ज्यादा सड़क-चौराहों के नाम बदले

    जबलपुर में अंग्रेजों की 'दासता' की निशानियों को मिटाने की मुहिम: 15 से ज्यादा सड़क-चौराहों के नाम बदले


    जबलपुर । जबलपुर शहर में पिछले कुछ वर्षों से एक विशेष मुहिम चलाई जा रही हैजिसका उद्देश्य अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान रखे गए स्थानों के नाम बदलना है। इस पहल के तहत शहर के प्रमुख मार्गोंतिराहों और चौराहों के नाम बदले जा रहे हैं ताकि देश की आज़ादी और भारतीय संस्कृति को सम्मानित किया जा सके। पिछले दो सालों में 15 से ज्यादा प्रमुख सड़कों और चौराहों के नाम बदल दिए गए हैं। इनमें राइट टाउननेपियर टाउन और रसल चौक जैसी जगहें शामिल हैंजो अंग्रेजी हुकूमत के दौरान ब्रिटिश अफसरों के नाम पर रखी गई थीं।
    इन नामों को अब भारतीय महापुरुषों बलिदानियों और महान शख्सियतों के नाम पर रखा जा रहा है। इस बदलाव की प्रक्रिया नगर निगम के महापौर परिषद द्वारा प्रस्तावित की जाती है और उसे मंजूरी के बाद लागू किया जाता है। उदाहरण के तौर पररसल चौक का नाम हाल ही में महर्षि दयानंद चौक कर दिया गया। रसल चौक का नाम ब्रिटिश अफसर ई एल रसल के नाम पर थाजो कमिश्नर ऑफिस में अधीक्षक थे। अब यह चौक महर्षि दयानंद की विरासत को सम्मानित करता हैजिन्होंने समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    इसी तरहब्लूम चौक का नाम बदलकर राजनारायण गुप्ता मार्ग रखा गया है। मिस्टर ब्लूमजो एक इंजीनियर थेशहर की कई सड़कों के नक्शे तैयार करने के लिए प्रसिद्ध थे। अब इस मार्ग का नाम स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी राजनारायण गुप्ता के नाम पर रखा गया हैजो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भागीदार रहे थे।नेपियर टाउनजो पहले एलन बर्टर नेपियर के नाम पर थाअब ओशो साधना पथ के रूप में पहचाना जाएगा। ओशोजिन्हें आचार्य रजनीश के नाम से भी जाना जाता हैभारतीय ध्यान और योग के महान गुरु रहे हैं। उनका योगदान न केवल भारत मेंबल्कि दुनियाभर में महसूस किया गया है।

    यह मुहिम सिर्फ शहर के नामों को बदलने तक सीमित नहीं हैबल्कि यह उन मूल्यों को भी आगे बढ़ाने का प्रयास हैजो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े हुए हैं। इस बदलाव से स्थानीय लोगों में गर्व और सम्मान की भावना पैदा हो रही हैक्योंकि अब वे उन स्थानों को ऐसे नामों से संबोधित कर सकते हैं जो स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय संस्कृति से जुड़े हुए हैं।आखिरकारयह मुहिम जबलपुर को एक नई पहचान देने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रही हैजो इतिहास और संस्कृति को सम्मान देती है।

  • मुरैना का रहस्यमयी ककनमठ मंदिर भूतों द्वारा बना 1000 साल पुराना शिव मंदिर

    मुरैना का रहस्यमयी ककनमठ मंदिर भूतों द्वारा बना 1000 साल पुराना शिव मंदिर


    मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित ककनमठ मंदिर जो कि भगवान शिव को समर्पित है अपनी रहस्यमयी और ऐतिहासिक स्थिति के कारण एक विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर ना सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है बल्कि एक दिलचस्प किंवदंती के कारण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मंदिर 1000 साल पुराना माना जाता है और इसके निर्माण से जुड़ी रहस्यमयी कहानी इसे और भी दिलचस्प बना देती है।
    भूतों द्वारा मंदिर का निर्माण
    ककनमठ मंदिर को ‘भूतों का मंदिर’ भी कहा जाता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि इस मंदिर का निर्माण एक रात में भूतों ने किया था। किंवदंती के अनुसार जब भूत इस मंदिर का निर्माण करने के अंतिम चरण में थे तभी एक गांव की महिला ने हाथ से चलने वाली चक्की चला दी जिससे भूतों का काम अधूरा रह गया। इस घटना के बाद भूत मंदिर छोड़कर भाग गए और मंदिर का निर्माण कभी पूरा नहीं हो सका। यही कारण है कि आज भी यह मंदिर अधूरा और खंडहर में बदला हुआ दिखाई देता है।
    अद्भुत वास्तुकला
    ककनमठ मंदिर की वास्तुकला अत्यंत अद्भुत है। मंदिर के निर्माण में न तो सीमेंट का उपयोग किया गया है और न ही चूने का बल्कि एक के ऊपर एक विशाल पत्थर रखे गए हैं जो बिना किसी जोड़ के एक साथ जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद यह मंदिर पिछले एक हजार सालों से प्राकृतिक आपदाओं आंधी-तूफान और भूकंप जैसी घटनाओं का सामना करने के बावजूद अपनी जगह पर खड़ा है। यह मंदिर 115 फीट ऊंचा है और इसकी संरचना देखते ही बनती है।
    खंडित मूर्तियां और इतिहास
    ककनमठ मंदिर में कई हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां पाई जाती हैं लेकिन इनमें से अधिकांश खंडित अवस्था में हैं। इतिहासकारों का मानना है कि ये मूर्तियां विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा तोड़ी गईं थीं। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में इस मंदिर से संबंधित कई अवशेष भी पाए गए हैं। आज भी पुरातत्वविदों द्वारा किए गए उत्खनन में नई-नई जानकारी और अवशेष मिलते रहते हैं।
    मौसम की मार और मंदिर की अवस्था
    मंदिर की खंडहर स्थिति का मुख्य कारण इसका समय के साथ खराब होना है। पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. अशोक शर्मा के अनुसार मंदिर की खंडित अवस्था का कारण यहां की कठोर जलवायु और मौसम की मार है। हालांकि इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व आज भी बरकरार है।
    किवदंतियां और भविष्यवाणी
    किवदंतियों के अनुसार जब नाई जाति के नौ काने दूल्हे जिनकी एक आंख फूटी हो एक साथ इस मंदिर में पहुंचेंगे तो यह मंदिर पूरी तरह से ढह जाएगा। यह एक दिलचस्प और रहस्यमयी मान्यता है जो इस मंदिर के आसपास की लोककथाओं को और भी आकर्षक बनाती है। कैसे पहुंचे ककनमठ मंदिर मुरैना शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर सिहोनिया गांव में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए आपको निजी वाहन या किराए पर वाहन लेना होगा क्योंकि इस मार्ग पर कोई सार्वजनिक परिवहन नहीं चलता है। जब आप इस मंदिर के पास पहुंचेंगे तो आपको 3 किलोमीटर दूर से ही इसका गुंबद दिखाई देगा।

    ककनमठ मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। भूतों से जुड़ी कहानियां मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और इसके रहस्यमयी इतिहास ने इसे एक दिलचस्प स्थल बना दिया है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है।

  • मुंबई-आगरा फोरलेन पर केमिकल से भरे ट्रक में आग दूसरे ट्रक को भी लपेटा

    मुंबई-आगरा फोरलेन पर केमिकल से भरे ट्रक में आग दूसरे ट्रक को भी लपेटा


    महू । इंदौर जिले के मानपुर क्षेत्र में सोमवार सुबह मुंबई-आगरा फोरलेन पर दो ट्रकों में आग लग गई जिससे पूरा इलाका हड़बड़ी में आ गया। आग की लपटें और धुआं इतना विकराल था कि वह करीब एक किलोमीटर तक दिखाई देने लगा। ट्रकों में से एक ट्रक केमिकल से भरा हुआ था जबकि दूसरा ट्रक आग की चपेट में आ गया। इस हादसे से फोरलेन पर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
    घटना के बारे में जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। मानपुर और महू की फायर ब्रिगेड की टीम ने एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान पुलिस ने जाम में फंसे वाहनों को हटाकर यातायात व्यवस्था बहाल की और स्थिति को नियंत्रण में किया।
    आगजनी का यह मामला मानपुर थाना क्षेत्र के पास हुआ। ट्रक चालक राकेश ने बताया कि वह मुंबई के भिवंडी इलाके से इंदौर की लोहा मंडी के लिए केमिकल से भरे डिब्बे लेकर जा रहा था। रास्ते में वह मानपुर में चाय पीने के लिए रुका था लेकिन अचानक ढाबे के एक कर्मचारी ने बाहर खड़े ट्रक में आग लगने की सूचना दी। चालक के अनुसार ट्रक में कल ही माल भरा गया था और जब वह बाहर गया तो देखा कि आग तेजी से फैल रही थी।
    यह ट्रक आग की चपेट में आते ही पास खड़ा दूसरा ट्रक भी प्रभावित हो गया जिसके चलते दोनों ट्रकों में जलन के कारण आसपास के इलाके में धुआं और लपटें दिखाई देने लगीं। चूंकि यह ट्रक केमिकल से भरा हुआ था यह आग और भी खतरनाक हो सकती थी। मौके पर मौजूद लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग की लपटों ने धीरे-धीरे विकराल रूप ले लिया। फिर दमकल कर्मियों की मदद से आग को काबू किया गया।
    पुलिस अधिकारी लोकेंद्र हीहोर ने बताया कि आग के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है लेकिन यह घटना दोनों ट्रकों के बीच हुई थी। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है ताकि आग के कारणों का स्पष्ट पता लगाया जा सके। इस मामले में ट्रक चालक राकेश और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ की जा रही है।
    आग लगने के कारण फोरलेन पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया था जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि दमकल की टीम की तत्परता और पुलिस की सजगता से एक घंटे में स्थिति पर नियंत्रण पाया गया। इसके बाद यातायात को फिर से बहाल किया गया और मार्ग खोल दिया गया।
    इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों और सड़क पर दुर्घटनाओं के प्रति जागरूकता की जरूरत को उजागर किया। खासकर केमिकल या अन्य खतरनाक सामग्री ढोने वाले ट्रकों के लिए सुरक्षा उपायों का पालन करना और ट्रक ड्राइवरों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। आग की घटनाओं से बचने के लिए नियमित रूप से ट्रकों की जांच और रख-रखाव करना आवश्यक है। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और यह देखने के लिए जांच करेगी कि आग कैसे लगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जन्मदिन की शुभकामनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जन्मदिन की शुभकामनाएं




    मध्यप्रदेश / भोपाल के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को उनके जन्मदिन के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने शुभकामना संदेश में श्री शर्मा के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु जीवन और जनसेवा के प्रति उनकी निरंतर सक्रियता की कामना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नेतृत्व न केवल राजस्थान के विकास को नई दिशा दे रहा है, बल्कि सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में भी राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

    डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राजस्थान में विकास की गति तेज हुई है और आमजन के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए अनेक प्रभावी योजनाएं लागू की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि श्री शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में राजस्थान आने वाले समय में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक सशक्त राज्य के रूप में उभरेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि श्री भजनलाल शर्मा की कार्यशैली ऊर्जा, पारदर्शिता और समर्पण का प्रतीक है। वे जनसेवा को अपना प्रमुख उद्देश्य मानते हुए निरंतर जनता से संवाद बनाए रखते हैं, जिससे शासन और प्रशासन के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी स्थापित हो रही है। यह जनभागीदारी ही किसी भी राज्य के समग्र विकास की नींव होती है।

    अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा खाटू श्याम जी से प्रार्थना करते हुए कहा कि राजस्थान निरंतर विकास, सुशासन और जनकल्याण के पथ पर अग्रसर रहे। उन्होंने कामना की कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सदैव असीम ऊर्जा और सामर्थ्य प्राप्त हो, जिससे वे जनसेवा के अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ करते रहें।मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह शुभकामनाएं दोनों राज्यों के बीच सौहार्द, सहयोग और सकारात्मक राजनीतिक संवाद को भी दर्शाती हैं, जो संघीय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।

  • भोपाल में ब्राह्मण समाज का उग्र प्रदर्शन: CM हाउस घेराव की कोशिश, पुलिस से झड़प; बैरिकेडिंग टूटी, वॉटर कैनन का इस्तेमाल

    भोपाल में ब्राह्मण समाज का उग्र प्रदर्शन: CM हाउस घेराव की कोशिश, पुलिस से झड़प; बैरिकेडिंग टूटी, वॉटर कैनन का इस्तेमाल

    भोपाल/ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को उस वक्त हालात तनावपूर्ण हो गए, जब ब्राह्मण समाज के प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हो गई। यह प्रदर्शन सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर किया गया था। ब्राह्मण समाज के लोगों का आरोप है कि संतोष वर्मा ने ब्राह्मण बेटियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। रविवार सुबह बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रोशनपुरा चौराहे पर एकत्र हुए। ग्वालियर से आए वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी शुरू की और मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने लगे। पुलिस ने पहले ही इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे और बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद किया गया था। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़ते हुए आगे बढ़ गए।

    रोशनपुरा चौराहे से आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारी बाणगंगा चौराहे तक पहुंच गए। यहां चार लेयर की बैरिकेडिंग लगाई गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे भी पार करने की कोशिश करते रहे। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए तीन बार चेतावनी दी, लेकिन जब भीड़ नहीं मानी तो मजबूरी में वॉटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। धक्का-मुक्की और भगदड़ के दौरान कई बुजुर्ग और महिलाएं घायल हो गईं। मौके पर मौजूद एम्बुलेंस और मेडिकल टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया।

    पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गाड़ियों में बैठाकर रातीबड़ इलाके में ले जाकर तितर-बितर किया। काफी देर की मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव किया गया। इस बीच राज्य सरकार ने सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ बर्खास्तगी का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। यह प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग GADकी ओर से 12 दिसंबर को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग DoPTको भेजा गया था। हालांकि प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यह प्रस्ताव अधूरा और अस्पष्ट है।

    पूर्व मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार ने बताया कि प्रस्ताव में यह साफ नहीं किया गया है कि सरकार संतोष वर्मा को पूरी तरह बर्खास्त करना चाहती है या सिर्फ उनका प्रमोशन रद्द करना चाहती है। दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं और इनके लिए अलग तरह के तथ्यों और सबूतों की जरूरत होती है। प्रस्ताव में केवल इतना उल्लेख है कि विभिन्न संगठनों से ज्ञापन मिले हैं और वर्मा के बयान से सामाजिक तनाव पैदा हुआ है। इसी अस्पष्टता के कारण आशंका जताई जा रही है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को वापस भी कर सकती है। वहीं, ब्राह्मण समाज और अन्य सवर्ण संगठनों का कहना है कि केवल प्रस्ताव भेजना पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि जब तक ठोस और अंतिम कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी सेवा संघ, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, ब्राह्मण रेजिमेंट समेत कई संगठनों ने प्रस्ताव भेजे जाने को पहली सफलता बताया है  लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई में देरी हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल मध्यप्रदेश सरकार ने विवाद बढ़ने के बाद संतोष वर्मा को कृषि विभाग से हटाकर मंत्रालय में उपसचिव के पद पर पदस्थ कर दिया है। बावजूद इसके, सामाजिक संगठनों का आक्रोश कम होता नजर नहीं आ रहा। 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री निवास घेराव की घोषणा पहले ही की जा चुकी है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी और प्रशासनिक हलचल और बढ़ने की संभावना है।

  • खजुराहो के गौतम रिसॉर्ट में चार कर्मचारियों की मौत खाद्य लाइसेंस निलंबित जांच जारी

    खजुराहो के गौतम रिसॉर्ट में चार कर्मचारियों की मौत खाद्य लाइसेंस निलंबित जांच जारी


    छतरपुर । मध्य प्रदेश के खजुराहो में स्थित गौतम रिसॉर्ट में चार कर्मचारियों की मौत के मामले में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए होटल का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दौरान 8 दिसंबर को यह घटना हुई जब रिसॉर्ट के 11 कर्मचारी भोजन करने के बाद बीमार पड़ गए थे। इनमें से चार की मौत हो गई जबकि सात अन्य का इलाज ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में चल रहा है। घटना के बाद कलेक्टर के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने होटल का खाद्य लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इस कदम को प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है ताकि मामले की गंभीरता को समझा जा सके और भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों।

    मृतकों के बारे में जानकारी

    यह कर्मचारी लंबे समय से गौतम रिसॉर्ट के पिछले हिस्से में रहते थे और होटल में हाउसकीपिंग व गार्डनिंग का काम करते थे। अस्पताल में भर्ती सात अन्य कर्मचारियों में से 20 वर्षीय हार्दिक ने इलाज के दौरान शनिवार को दम तोड़ दिया। इससे पहले अन्य मृतकों में रामस्वरूप कुशवाह प्रागीलाल कुशवाह और गिरिजा रजक की मौत हो चुकी थी। कर्मचारियों ने रिसॉर्ट के भोजनालय में भोजन किया था जिसके बाद सभी की तबीयत बिगड़ गई थी।

    खाद्य जांच और रिपोर्ट का इंतजार

    घटना के बाद प्रशासन ने मृतकों के विसरा और केमिकल सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असल कारणों का पता चल सकेगा। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर यह संभावना जताई जा रही है कि भोजन में कोई विषाक्त पदार्थ हो सकता है जिससे फूड पॉइजनिंग का मामला सामने आया। हालांकि अधिकारियों ने इस संबंध में अभी कोई पुष्टि नहीं की है और पूरी तरह से रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुख जताया और अधिकारियों से सख्त कार्रवाई करने की बात कही। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि होटल के खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए होटल का लाइसेंस निलंबित कर दिया और कर्मचारियों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच तेज कर दी है। इस घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों और राजनीतिक दलों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही खजुराहो में पर्यटन उद्योग पर भी इस घटना का नकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। इस घटना ने प्रशासन की तत्परता को भी उजागर किया क्योंकि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जल्दी कार्रवाई की और सभी बीमार कर्मचारियों को समय रहते अस्पताल में भर्ती करवा दिया। हालांकि यह घटना पर्यटन स्थल के लिए एक बड़ा झटका है जो खजुराहो में आने वाले पर्यटकों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

  • शहडोल में पार्सल गोदाम में भीषण आग लाखों का सामान जलकर खाक 25 लाख का माल बचाया

    शहडोल में पार्सल गोदाम में भीषण आग लाखों का सामान जलकर खाक 25 लाख का माल बचाया


    शहडोल । संभागीय मुख्यालय शहडोल के सोहागपुर थाना क्षेत्र में स्थित बाणगंगा मेला मैदान के पास स्थित एस.एस. पार्सल गोदाम में बीती रात एक भीषण आग लग गई। इस घटना में गोदाम में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया लेकिन दमकल कर्मियों और पुलिस की तत्परता के कारण एक बड़ी आपदा टल गई। आगजनी से लगभग 30 लाख रुपये का सामान जल चुका है जबकि 25 लाख रुपये से अधिक का माल सुरक्षित बचा लिया गया।

    पुलिस के अनुसार घटना रात लगभग 4 बजे की है। उस समय सोहागपुर पुलिस की चीता स्कॉट और मोबाइल पार्टी गश्त पर थी। बाणगंगा मेला मैदान से गुजरते समय चीता स्कॉट में तैनात आरक्षक शशि यादव की नजर गोदाम के अंदर लगी आग पर पड़ी। उन्होंने तुरंत मोबाइल पार्टी और दमकल विभाग को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल कर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और गोदाम के शटर पर लिखे नंबर के माध्यम से गोदाम मालिक को सूचित किया।

    गोदाम मालिक शुभम दुबे ने बताया कि उनके गोदाम में दवाइयां हार्डवेयर सामग्री जूते इलेक्ट्रॉनिक सामान और 100 से अधिक कूलर रखे हुए थे। आग इतनी भीषण थी कि गोदाम के भीतर खड़ी एक कार और एक लोडर वाहन भी आंशिक रूप से जल गए। हालांकि दमकल कर्मियों और पुलिस की सूझबूझ से दोनों वाहनों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया।

    आग बुझाने के लिए दमकल विभाग ने चार बड़ी और एक छोटी फायर ब्रिगेड को लगाया था। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इस दौरान पुलिस और दमकल कर्मियों के संयुक्त प्रयास से गोदाम में रखा 25 लाख रुपये से अधिक का माल सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि गोदाम में रखा लगभग 30 लाख रुपये का सामान जलकर खाक हो गया।

    सोहागपुर थाना प्रभारी भूपेंद्र मणि पांडे ने बताया कि पुलिस की सतर्क गश्त और दमकल कर्मियों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया। उन्होंने यह भी कहा कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल नुकसान का आकलन 30 लाख रुपये के आसपास किया गया है लेकिन पुलिस और दमकल कर्मियों की तत्परता से बड़ी मात्रा में सामान बचाया जा सका। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि पुलिस और दमकल विभाग की सतर्कता और समन्वय से बड़े हादसों को टाला जा सकता है। शहडोल के नागरिकों ने इस मानवीय प्रयास की सराहना की और अधिकारियों को बधाई दी।

  • सीहोर में बिजली विभाग ने कबूतर का रेस्क्यू किया हाई टेंशन तारों में फंसा था पक्षी

    सीहोर में बिजली विभाग ने कबूतर का रेस्क्यू किया हाई टेंशन तारों में फंसा था पक्षी



    सीहोर ।
    सीहोर शहर की ब्रह्मपुरी कॉलोनी में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने एक अद्वितीय मानवता का उदाहरण पेश करते हुए हाई टेंशन लाइन में फंसे कबूतर की जान बचाई। यह घटना तब हुई जब बच्चों की पतंग के धागे में उलझकर एक कबूतर हाई टेंशन तारों में फंस गया। इस कारण उसकी जान को गंभीर खतरा था लेकिन बिजली विभाग की टीम ने तत्परता और सावधानी से इस पक्षी को बचाया और एक मिसाल कायम की।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कबूतर तारों में फंसा हुआ तड़प रहा था और उसकी स्थिति बेहद खतरनाक थी। नीचे खड़े लोग पक्षी को बचाना चाहते थे लेकिन हाई टेंशन लाइनों के कारण वे उसे छूने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे। यह स्थिति एक गंभीर संकट का रूप ले चुकी थी क्योंकि यदि समय रहते कोई कदम नहीं उठाया गया तो पक्षी की जान जा सकती थी।

    इसी दौरान एक जागरूक नागरिक ने इस मामले की सूचना बिजली विभाग को दी। सूचना मिलते ही विभाग की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सबसे पहले कर्मचारियों ने इलाके की बिजली सप्लाई बंद करवाई ताकि किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रिक शॉक लगने से कबूतर को नुकसान न पहुंचे।

    इसके बाद कर्मचारियों ने पूरी सावधानी के साथ उच्च दबाव वाली तारों में उलझे पतंग के धागे को हटाया और कबूतर को सुरक्षित रूप से तारों से बाहर निकाला। इस पूरी प्रक्रिया में कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर यह काम किया क्योंकि हाई टेंशन तारों से छेड़छाड़ करना अत्यधिक खतरनाक हो सकता था।

    कबूतर को सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद आसपास खड़े लोग राहत की सांस लेकर बिजली विभाग के कर्मचारियों की सराहना करने लगे। यह घटना न केवल एक अद्वितीय रेस्क्यू ऑपरेशन को दर्शाती है बल्कि यह भी साबित करती है कि छोटे प्रयास जब संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से किए जाते हैं तो किसी की जान को बचाने में मदद कर सकते हैं।

    बिजली विभाग के कर्मचारियों ने यह दिखाया कि अगर हम सभी संवेदनशील और जागरूक रहें तो समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। इस घटना के बाद लोग इसे एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में याद करेंगे और यह साबित करेगा कि एक छोटे से प्रयास से हम किसी की जान बचा सकते हैं। यह घटना एक बार फिर से यह स्पष्ट करती है कि समाज में मानवता और जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करना बेहद आवश्यक है ताकि किसी भी संकट का सामना करने में हम सक्षम हो सकें।

  • छिंदवाड़ा में सांसद निवास के पास सरेआम गुंडागर्दी युवकों को बेल्ट और बल्ले से पीटा 2 आरोपी हिरासत में

    छिंदवाड़ा में सांसद निवास के पास सरेआम गुंडागर्दी युवकों को बेल्ट और बल्ले से पीटा 2 आरोपी हिरासत में


    छिंदवाड़ा । छिंदवाड़ा में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। कोतवाली थाना क्षेत्र के परासिया रोड पर जो सांसद निवास और कार्यालय से कुछ कदम की दूरी पर स्थित है एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें दो गुटों के युवकों के बीच सरेआम बेल्ट और बल्ले से मारपीट होती दिखाई दे रही है। यह घटना गुरुवार को हुई जब पुरानी रंजिश और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई के चलते इन युवकों ने सड़क पर लगभग 10 मिनट तक उत्पात मचाया।

    वीडियो में देखा जा सकता है कि ट्रैफिक के बीच सड़क पर कई लोग खड़े होकर तमाशा देख रहे थे लेकिन कोई भी घटनास्थल पर हस्तक्षेप करने के लिए आगे नहीं आया। हमलावरों ने बिना किसी डर के बेल्ट और बल्ले से एक-दूसरे को बेरहमी से मारा। हमले के दौरान सिर हाथ और पैर पर जमकर चोटें आईं। हमलावरों को न तो पुलिस का खौफ था और न ही आसपास के लोगों का डर। यह घटना पूरी तरह से सड़क पर एक असमर्थता की स्थिति उत्पन्न कर रही थी।

    आरोपियों ने जिस तरह से यह मारपीट की उससे यह भी प्रतीत होता है कि इस घटना के पीछे एक पुरानी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई का कारण हो सकता है। हमलावरों के बीच इस संघर्ष का मुख्य उद्देश्य केवल इलाके में अपनी ताकत दिखाना था जो उनके व्यवहार से साफ तौर पर स्पष्ट हो रहा था।

    मारपीट के बाद सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल था क्योंकि लोग गाड़ी चलाने और इस हिंसक घटना से बचने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। पुलिस की समय पर प्रतिक्रिया के बावजूद घटनास्थल पर काफी देर तक स्थिति नियंत्रण से बाहर रही। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर दो आरोपियों को हिरासत में ले लिया लेकिन बाकी आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

    यह घटना स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है। सांसद निवास के पास इस प्रकार की हिंसक घटना का होना स्थानीय प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है। इलाके में सुरक्षा के प्रति जनता का विश्वास कमजोर हो रहा है खासकर जब पुलिस की उपस्थिति भी इस प्रकार की घटनाओं को रोकने में नाकाम रहती है।

    वीडियो वायरल होने के बाद इलाके के लोग इस हिंसक घटना की निंदा कर रहे हैं। इस घटना ने छिंदवाड़ा में कानून-व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है और इस प्रकार की घटनाओं के पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।

    इसके अलावा वीडियो में दिखाए गए कुछ लोग घटनास्थल पर खड़े होकर यह तमाशा देख रहे थे लेकिन किसी ने भी हमलावरों को रोकने की कोशिश नहीं की। यह दर्शाता है कि लोगों में भी कानून और सुरक्षा के प्रति किसी प्रकार का भय नहीं रह गया है और हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं।

    अब पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में न हों और सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कानून बनवाने के लिए आवाज उठाएं।