Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल-उज्जैन समेत 25 जिलों में बारिश और तेज आंधी, श्योपुर में 1 इंच पानी गिरा, फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू

    भोपाल-उज्जैन समेत 25 जिलों में बारिश और तेज आंधी, श्योपुर में 1 इंच पानी गिरा, फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। फरवरी के महीने में सक्रिय हुए नए सिस्टम के कारण प्रदेश में तीसरी बार बारिश और ओलों का दौर शुरू हो गया। पिछले 24 घंटों में भोपाल, उज्जैन समेत 25 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें धार, श्योपुर, शिवपुरी, इंदौर, आगर-मालवा, राजगढ़, खरगोन, मुरैना, सीहोर, दतिया, ग्वालियर, गुना, रतलाम, बड़वानी, मंदसौर, शाजापुर, देवास, विदिशा, अशोकनगर, टीकमगढ़ और निवाड़ी छतरपुर जिले शामिल हैं।

    श्योपुर के नालछा में सबसे ज्यादा 1 इंच पानी गिरा। वहीं तेज आंधी की रफ्तार 63 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंची। भोपाल, सीहोर और आगर में 37 किलोमीटर, शाजापुर में 35 किलोमीटर, गुना में 31 किलोमीटर, राजगढ़ में 30 किलोमीटर और धार, नीमच, शिवपुरी में 28 किलोमीटर प्रति घंटे की गति दर्ज की गई।

    इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई जिलों में खड़ी फसलें आड़ी हो गई हैं, जिससे दानों की गुणवत्ता और पैदावार पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि से भी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित फसलों का समय पर सर्वे और उचित मुआवजा किसानों की राहत के लिए जरूरी है।

    मौसम का हाल बताते हुए मौसम विभाग ने कहा कि प्रदेश में खजुराहो सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा राजगढ़ 10.0°C और पचमढ़ी 10.2°C में भी कड़ाके की ठंड महसूस की गई।

    प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसानों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस संकट की घड़ी में उनके साथ है। उन्होंने कहा कि बारिश और ओलों से प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए अधिकारियों को तुरंत सर्वे का निर्देश दे दिया गया है। प्रभावित खेतों का दौरा कर वास्तविक नुकसान का आंकड़ा तैयार किया जाएगा, ताकि किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जा सके।

    कृषि मंत्री ने कहा, “जहां-जहां भी ओलावृष्टि और तेज बारिश की वजह से फसलें आड़ी हुई हैं या दाने खराब हुए हैं, वहां समय पर मुआवजा प्रदान किया जाएगा।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सर्वे का काम पूरी पारदर्शिता और तेजी के साथ पूरा किया जाए, ताकि किसानों को राहत राशि में किसी भी तरह की देरी न हो।

    प्रदेश में मौसम विभाग ने भविष्य के 48 घंटों में भी अनियमित वर्षा और आंधी की संभावना जताई है, जिससे किसानों और आम जनता को सतर्क रहने की जरूरत है। इस बीच प्रशासन और कृषि विभाग सतत निगरानी रखकर किसानों की मदद करने के लिए सक्रिय हैं।

  • 19 फरवरी महाकाल भस्म आरती: त्रिपुंड-त्रिनेत्र और ॐ के साथ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार

    19 फरवरी महाकाल भस्म आरती: त्रिपुंड-त्रिनेत्र और ॐ के साथ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि गुरुवार को सुबह 4 बजे कपाट खोले गए और भस्म आरती का आयोजन धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार विशेष विधि-विधान के साथ किया गया। मंदिर के गर्भगृह में पुजारियों ने सभी देवी-देवताओं का पूजन और जलाभिषेक के बाद पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से भगवान का अभिषेक किया।

    भगवान महाकाल का भांग और चंदन से राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके साथ ही शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की माला अर्पित की गई, जिससे बाबा महाकाल का अलंकरण और भी भव्य और मनोहारी दिखाई दिया।

    सुबह-सुबह सैकड़ों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद मांगा। श्रद्धालु बाबा महाकाल की जयकारे लगाते रहे, जिससे पूरा मंदिर जयकारों की गूंज से गुंजायमान हो उठा।

    मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ सुबह से ही रही और हर कोई भक्ति और श्रद्धा भाव से बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहा था। भस्म आरती के दौरान मंदिर में शांतिपूर्ण वातावरण, मंत्रोच्चार और दिव्य गंध ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

  • वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है मध्यप्रदेश सरकार: कृषि मंत्री कंषाना

    वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है मध्यप्रदेश सरकार: कृषि मंत्री कंषाना


    भोपाल। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और किसी भी परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हुई वर्षा और ओलावृष्टि के कारण फसलों को हुए नुकसान का शीघ्र निरीक्षण और राहत वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

    कृषि मंत्री कंषाना ने बताया कि जिन जिलों में भारी वर्षा और ओलावृष्टि की घटनाएं हुई हैं, वहां तत्काल प्रभाव से सर्वे और नुकसान का आकलन करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी सर्वे कार्य पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूर्ण किए जाएं, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत राशि प्रदान की जा सके।

    कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी किसान को नुकसान की स्थिति में अकेला नहीं छोड़ेगी और सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करें। उनका कहना था कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों को शीघ्र राहत प्रदान करना और उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है।

    कंषाना ने यह भी बताया कि कृषि विभाग लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और आवश्यकतानुसार फसल सुरक्षा उपायों को लागू किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और नुकसान कम करने के लिए दीर्घकालीन रणनीतियों पर भी काम किया जा रहा है।

    मंत्री कंषाना ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर कदम उठाती रहेगी और हर आवश्यक पहल में किसानों का समर्थन करेगी। उनका मानना है कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और विकास सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • : मध्यप्रदेश क्लाइमेट चेंज में बना लीडर, नवकरणीय ऊर्जा में निवेशकों के लिए खुले अवसर

    : मध्यप्रदेश क्लाइमेट चेंज में बना लीडर, नवकरणीय ऊर्जा में निवेशकों के लिए खुले अवसर


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई क्लाइमेट वीक-2026 में मध्यप्रदेश के नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि क्लाइमेट चेंज के खिलाफ संघर्ष में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सतत् विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना ही प्रगति की दिशा है। डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश 24×7 बिजली आपूर्ति में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेशकों को हरसंभव सहयोग मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश ने जलवायु समाधान, हरित विकास और ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में कई ठोस कदम उठाए हैं। प्रदेश में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट है, जिसमें किसी नागरिक को विस्थापित नहीं किया गया और ऊर्जा उत्पादन भी शुरू हो चुका है। सांची को देश की पहली सोलर सिटी बनाया गया है और सभी शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप लगाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

    डॉ. यादव ने एमओयू के तहत सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के साथ नवकरणीय ऊर्जा विकास को और तेज करने की बात कही। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 300 मेगावाट 4 घंटे और 6 घंटे सौर-सह एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं के साथ 24×7 नवकरणीय ऊर्जा बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अलावा सौर, पवन, बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन सहित सभी नवकरणीय तकनीकों में वित्तीय और नीतिगत प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों में मध्यप्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, सौर ऊर्जा में 48 प्रतिशत और पवन ऊर्जा में 19 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। परियोजनाओं के माध्यम से पड़ोसी राज्यों और भारतीय रेलवे को भी स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। डॉ. यादव ने निवेशकों से प्रदेश की तेजी से बदलती ऊर्जा यात्रा में शामिल होने का आव्हान किया, जिससे जलवायु संतुलन के साथ व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।

    कार्यक्रम में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने मध्यप्रदेश में बैटरी स्टोरेज आधारित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। आईएफसी के क्षेत्रीय निदेशक इमाद एन. फखौरी और सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन की निदेशक सीमा पॉल ने भी मध्यप्रदेश के नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की नेतृत्व क्षमता और वैश्विक स्तर पर इसके महत्व को सराहा।

    डॉ. यादव ने निष्कर्ष निकाला कि ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए मध्यप्रदेश और भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण करना अब सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि वास्तविकता बन रही है।

  • MP में मौसम ने ली करवट, 20 से अधिक जिलों में बारिश, फसलें हुई प्रभावित

    MP में मौसम ने ली करवट, 20 से अधिक जिलों में बारिश, फसलें हुई प्रभावित


    भोपाल। मध्य प्रदेश का मौसम इस फरवरी फिर एक बार करवट लेने लगा है। नए मौसम सिस्टम के सक्रिय होने के बाद राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन समेत 20 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया है। फरवरी में यह तीसरी बार है जब प्रदेश के लोगों को ओले और ठंडी हवाओं के बीच मौसम की नटखट अदाओं का सामना करना पड़ा।

    गुरुवार सुबह राजधानी भोपाल समेत कई जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली। राजधानी में बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ करीब डेढ़ घंटे तक कभी रिमझिम और कभी तेज बारिश हुई। बारिश के साथ ठंडी हवाओं ने दिन के तापमान में गिरावट का इशारा कर दिया है, जिससे लोगों को एक बार फिर हल्की सर्दी का एहसास हुआ।

    इंदौर में बुधवार को दिनभर तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया और मौसम गर्म बना रहा। लेकिन रात करीब 12 बजे अचानक हल्की बारिश और ठंडी हवाओं ने शहर में मौसम का मिजाज बदल दिया। रतलाम, धार और शुजालपुर जैसे शहरों में भी तेज हवाओं और बूंदाबांदी के साथ तापमान में noticeable गिरावट दर्ज की गई।

    किसानों की चिंता बढ़ी, फसलें आड़ी और दाने प्रभावित

    बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। कई जिलों में खड़ी फसलें आड़ी हो गई हैं, जिससे दानों की गुणवत्ता और पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि से भी नुकसान की खबरें हैं। धार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तेज हवा और आंधी के चलते फसलों को खासा नुकसान पहुंचा।

    प्रदेश के ठंडे शहर: खजुराहो सबसे ठंडा

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार खजुराहो इस समय सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.2°C दर्ज किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में 10.0°C और पचमढ़ी में 10.2°C तापमान दर्ज हुआ, जहां कड़ाके की ठंड महसूस की गई।

    बारिश से प्रभावित जिलों की सूची

    भोपाल, दतिया, गुना, ग्वालियर, इंदौर, रतलाम, श्योपुर, उज्जैन, धार, विदिशा, बड़वानी, आगर-मालवा, शाजापुर, मुरैना, छतरपुर, शिवपुरी, सीहोर और मंदसौर में बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई।

    अगले दो दिनों का मौसम: अलर्ट और राहत

    मौसम विभाग के अनुसार, 20 फरवरी को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के आठ जिलों में बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी है। वहीं 21 फरवरी को मौसम साफ रहेगा और फिलहाल कहीं भी बारिश का अलर्ट नहीं है।

    शहरों में मौसम का हाल

    ग्वालियर: बारिश के बाद तापमान में गिरावट, लोग फिर से गर्म कपड़ों में दिखे।

    आगर मालवा: तीन दिनों से आसमान में बादलों का डेरा, मावठे की बारिश दर्ज।

    मुरैना: बुधवार रात की रुक-रुककर बारिश से सर्दी लौटी।

    भिंड और शिवपुरी: रातभर रुक-रुककर हुई बारिश से सड़कें जलमग्न, आवागमन प्रभावित।

    सीहोर: बीती रात 10 बजे से लगातार बारिश, कभी तेज और कभी हल्की बूंदाबांदी।

    मौसम के इस अचानक बदलाव ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। आने वाले दो दिनों में बारिश और ठंडी हवाओं का असर प्रदेश के कई हिस्सों में बना रह सकता है।

  • क्लाइमेट चेंज से निपटने में लीडर बन रहा है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    क्लाइमेट चेंज से निपटने में लीडर बन रहा है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्लाइमेट चेंज एक गंभीर वैश्विक चुनौती है। क्लाइमेट चेंज मानव अस्तित्व
    , आर्थिक स्थिरता और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि सतत् विकास की राह में हम पर्यावरण की अनदेखी नहीं कर सकते। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना ही प्रगति का मूल आधार है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि क्लाइमेट चेंज के मामले में ठोस और समयबद्ध समाधान पर काम करना आज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की क्लाइमेट चेंज को लेकर प्रतिबद्धताओं में भी राज्यों का योगदान भी महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश क्लाइमेट चेंज से निपटने में सर्वाधिक नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादक बन लीडर की भूमिका में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के सबसे तेज गति से विकास करने वाले राज्यों में अग्रणी है। यहां लगभग हर क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। मुख्यमंत्री ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मप्र में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने का विश्वास और सुरक्षा की गारंटी देते हुए कहा कि राज्य और निवेशक मिलकर देश को नवकरणीय ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बिजली देने की दिशा में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों के साथ हमारा रिश्ता नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम मुंबई में क्लाइमेट वीक-2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग (मप्र शासन) एवं ग्रीन एनर्जी के लिए विख्यात सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के बीच मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमओयू हुआ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का समाधान केवल एक देश, एक राज्य या एक सरकार ही नहीं कर सकती, इसके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन, हरित विकास और जलवायु समाधान के लिए आगे बढ़ने की दिशा में मुम्बई क्लाइमेट वीक एक महत्वपूर्ण मंच है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए त्वरित और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों को बढ़ावा देना, हरित तकनीकों को अपनाना और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करना ही भविष्य का विकास मार्ग है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पृथ्वी को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकारों के साथ ही उद्योगों, संस्थाओं और इस देश में रहने वाले हर नागरिक की भी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट जैसे व्यवहारिक बदलावों को अपनाने की अपील की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरित ऊर्जा उत्पादन के जरिए क्लाइमेट चेंज से निपटने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार के नवाचारों की जानकारी देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भारत के उन अग्रणी राज्यों में से एक है, जिसने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जिसने ईवी नीति बनाई, जो क्लाइमेट चेंज की ओर कारगर कदम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हमारी सरकार मध्यप्रदेश में 300 मेगावाट 4 घंटे सौर-सह एनर्जी स्टोरेज परियोजना, 300 मेगावाट 6 घंटे सौर-सह एनर्जी परियोजना सहित 24x7 घंटे नवकरणीय ऊर्जा बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज परियोजना पर काम कर रही है। यह एक नया प्रयोग है। यह भारत की अपनी तरह की पहली परियोजना है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जो इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते 12 सालों में मप्र की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। सौर ऊर्जा में 48 प्रतिशत और पवन ऊर्जा में 19 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। नवकरणीय ऊर्जा की बड़ी परियोजनाओं के जरिए हमने म.प्र. की जरूरतों को पूरा करने के बाद पड़ोसी राज्यों और भारतीय रेलवे को भी स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट है। ये एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसमें हमने किसी भी नागरिक को विस्थापित नहीं होने दिया, इस प्रोजेक्ट में ऊर्जा उत्पादन भी प्रारंभ हो चुका है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सांची देश की पहली सोलर सिटी बनी है। हम सभी शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप लगाने की ओर बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार निवेशकों, निजी क्षेत्र और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर मप्र को भारत का नवकरणीय ऊर्जा हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। हम सौर, पवन, एनर्जी स्टोरेज, बायोफ्यूल तथा ग्रीन हाइड्रोजन सहित सभी नवकरणीय टेक्नोलॉजी में वित्तीय एवं नीतिगत प्रोत्साहन भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से आव्हान किया कि मध्यप्रदेश की तेजी से परिवर्तनकारी यात्रा में हमारे साथ जुड़ें। इससे जलवायु को संतुलित रखने में तो मदद मिलेगी ही, यह सबके व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और मप्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने कहा कि हम ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ मप्र और भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण करेंगे।

    नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए हम बैटरी स्टोरेज आधारित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मप्र में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्रोजेक्ट, शाजापुर, आगर-मालवा और रीवा में अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना पर काम हुआ है। उन्होंने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश अनंत संभावनाओं का प्रदेश है। यहां निवेश करें, सरकार आपके साथ है।

    अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा, विद्युत आपूर्ति का एक कारगर, सस्ता और विश्वसनीय विकल्प है। हम मध्यप्रदेश के नागरिकों को कम से कम दर पर विद्युत आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने निवेशकों और उद्योगपतियों से कहा कि वे नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उनकी जरूरतों और सुझावों के बारे में बताएं, सरकार इस क्षेत्र के विकस के लिए किए जाने वाले सभी नवाचारों में इन सुझावों को समाहित करेगी। एसीएस श्री श्रीवास्तव ने कहा कि मप्र में 24x7 घंटे विद्युत आपूति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डावोस में वर्ल्ड इकॉनामिक फोरम में विश्व समुदाय के समक्ष कमिटमेंट किया था, जिसे हम अब पूरा करने जा रहे हैं।

    विश्व बैंक समूह से संबद्ध इंटरनेशनल फाइनेंस कार्पोरेशन (आईएफसी) के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय निदेशक श्री इमाद एन. फ़खौरी ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र में मध्यप्रदेश सरकार की तेजी सराहनीय है। इस क्षेत्र के विकास में सरकार की सोच और दिशा स्पष्ट है। 24X7 घंटे नवकरणीय ऊर्जा पर मध्यप्रदेश सरकार की इन्वेस्टर्स फ्रेंडली डिजाइन से हम प्रभावित हैं। हम मध्यप्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र की सभी विशेषताओं और विशेषज्ञताओं का वैश्विक स्तर पर लाभ लेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में एफडीआरई सेंटर्स की स्थापना के लिए हम सरकार को हर जरूरी सहयोग देंगे।

    सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन की भारत में निदेशक सुश्री सीमा पॉल ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश नेतृत्वकर्ता है। मप्र में फिलहाल लगभग 500 गीगावॉट नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा के विकास एवं विस्तार में हम मध्यप्रदेश के साझेदार भी हैं और भागीदार भी। उन्होंने कहा कि इसी दिशा में हम आज मध्यप्रदेश के साथ पार्टनरशिप के लिए एक एमओयू भी कर रहे हैं।

    कार्यक्रम को डॉ. अश्विनी कुमार एवं श्री अमित सिंह ने भी संबोधित किया। मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में हुए विकास एवं नवाचारों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर देश-विदेश के पर्यावरण विशेषज्ञों, नीति-नियंताओं और बड़ी संख्या में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। म.प्र. ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री अमनवीर सिंह बैंस भी उपस्थित थे।

  • MP Morning News: मोहन कैबिनेट की अहम बैठक आज, विधानसभा में पेश होगा पहला पेपरलेस बजट; ग्वालियर में किसान सम्मेलन, विपक्ष मांगेगा कर्ज पर श्वेत पत्र

    MP Morning News: मोहन कैबिनेट की अहम बैठक आज, विधानसभा में पेश होगा पहला पेपरलेस बजट; ग्वालियर में किसान सम्मेलन, विपक्ष मांगेगा कर्ज पर श्वेत पत्र


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक गतिविधियां आज बेहद अहम रहने वाली हैं। विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री Mohan Yadav की अध्यक्षता में मोहन कैबिनेट की बैठक होगी जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद सुबह 11 बजे सदन में वित्त मंत्री Jagdish Devda बजट पेश करेंगे। अनुमान है कि इस बार का बजट करीब 4.70 लाख करोड़ रुपए का हो सकता है जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 से 15 प्रतिशत अधिक होगा।

    सरकार इस बजट को खास बनाने जा रही है क्योंकि यह मध्य प्रदेश विधानसभा का पहला पेपरलेस बजट होगा। वित्त मंत्री पारंपरिक ब्रीफकेस की जगह टैबलेट के माध्यम से बजट प्रस्तुत करेंगे। इससे पहले वर्ष 2025-26 में राज्य का बजट 4.21 लाख करोड़ रुपए था जबकि सरकार ने 2028 तक इसे 7.28 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

    बजट के साथ सरकार अगले तीन वर्षों का रोडमैप भी पेश करेगी। वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किए जाने के मद्देनजर किसानों के लिए विशेष प्रावधानों की उम्मीद है। सिंचाई परियोजनाओं ग्रामीण बुनियादी ढांचे और कृषि नवाचारों पर जोर दिया जा सकता है। युवाओं के लिए नई सरकारी नौकरियों की घोषणा और महिलाओं-गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को भी प्राथमिकता मिल सकती है। साथ ही सिंहस्थ 2028 के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान की संभावना जताई जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिन भी व्यस्त रहेगा। वे सुबह विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने के बाद ग्वालियर रवाना होंगे। ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कुलैथा में आयोजित प्रदेश स्तरीय किसान सम्मेलन में वे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यहां लगभग 88 से 90 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री प्रदेशभर के किसानों को सिंगल क्लिक के माध्यम से किसान सम्मान राशि भी वितरित करेंगे। सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष Narendra Singh Tomar और सांसद Bharat Singh Kushwah सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री मुंबई दौरे पर जाएंगे जहां 17 से 19 फरवरी तक आयोजित मुंबई क्लाइमेट वीक-2026 में मध्य प्रदेश की ओर से नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण से जुड़े नवाचारों पर प्रस्तुति दी जाएगी। मुख्यमंत्री विशेष सत्र की अध्यक्षता भी करेंगे।

    उधर विधानसभा में विपक्ष भी आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। कांग्रेस राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग करेगी। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश पर करीब 4.94 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है जबकि सरकार लगभग 4.75 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश करने जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार को कर्ज की वास्तविक स्थिति और वित्तीय प्रबंधन पर पारदर्शिता दिखानी चाहिए। इस तरह आज का दिन मध्य प्रदेश की राजनीति और नीतिगत दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • नर्मदापुरम में करोड़ों की मूंग चोरी: वेयरहाउस से 10 हजार से ज्यादा बोरियां गायब, प्रशासन ने तोड़ा ताला तो खुला राज

    नर्मदापुरम में करोड़ों की मूंग चोरी: वेयरहाउस से 10 हजार से ज्यादा बोरियां गायब, प्रशासन ने तोड़ा ताला तो खुला राज


    नर्मदापुरम । नर्मदापुरम जिले के माखननगर स्थित चीलाचौंन के एकलव्य वेयरहाउस से सरकारी मूंग की बड़ी चोरी का मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और वेयरहाउस प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि वेयरहाउस में रखे सरकारी स्टॉक में से दो स्टॉक पूरी तरह गायब पाए गए जिनमें करीब 10 हजार 200 से अधिक बोरियां मूंग की थीं। इनकी अनुमानित कीमत लगभग 4 करोड़ 25 लाख रुपए बताई जा रही है।

    मामले की गंभीरता तब सामने आई जब 13 फरवरी 2026 को माखननगर ब्रांच मैनेजर हेमंत नाथ ने वेयरहाउस से दो स्टॉक मूंग गायब होने की सूचना विभागीय अधिकारियों को दी। इसके बाद तहसीलदार एमपी वेयरहाउसिंग के क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल सोरटे और जिला वेयरहाउसिंग प्रबंधक वासुदेव दवंडे सहित अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। तीन दिनों तक वेयर संचालक की अनुपस्थिति के बाद प्रशासन की मौजूदगी में वेयरहाउस का ताला तोड़ा गया। अंदर निरीक्षण करने पर दो स्टॉक मूंग पूरी तरह गायब मिले।

    जानकारी के अनुसार वेयरहाउस के अंदर कुल दस स्टॉक मूंग रखी गई थी। इनमें से दो स्टॉक के गायब होने से यह स्पष्ट है कि बड़ी मात्रा में अनाज की निकासी बिना आधिकारिक रिकॉर्ड के की गई है। इतनी बड़ी संख्या में बोरियों की चोरी होना अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है क्या यह अंदरूनी मिलीभगत का मामला है? क्या निगरानी व्यवस्था पूरी तरह विफल रही? और सबसे बड़ा सवाल प्रशासन को इतनी बड़ी गड़बड़ी की जानकारी समय रहते क्यों नहीं हुई?

    मामले में एक और दिलचस्प पहलू यह है कि सरकारी मूंग एक निजी एकलव्य वेयरहाउस में रखी गई थी। बताया जा रहा है कि वेयरहाउस मालिक आरती तोमर का एपी कॉर्पोरेशन वेयरहाउसिंग के साथ अनुबंध है जिसके तहत सरकारी अनाज की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी वेयरहाउस संचालक की होती है। हालांकि वेयर संचालक ने माखननगर थाने में आवेदन देकर विभागीय अधिकारियों और ब्रांच मैनेजर पर ही मूंग चोरी कराने का आरोप लगाया है।

    वेयरहाउस की एक-एक चाबी मालिक और प्रबंधक के पास होने की बात सामने आई है जिससे संदेह और गहरा हो गया है। यदि दोनों पक्षों के पास चाबी थी तो इतनी बड़ी मात्रा में मूंग बाहर कैसे चली गई? क्या स्टॉक रजिस्टर और भौतिक सत्यापन में गड़बड़ी थी? या फिर यह सुनियोजित ढंग से की गई बड़ी चोरी है?

    वेयरहाउसिंग क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल सोरटे ने बताया कि एसडीएम तहसीलदार और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में ताला तोड़कर निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि वेयर संचालक को कई बार मौके पर उपस्थित होने के लिए कहा गया था लेकिन उनके नहीं आने पर यह कदम उठाया गया। फिलहाल प्रशासन मामले की विस्तृत जांच में जुटा है और जिम्मेदारों की पहचान की जा रही है।

    करोड़ों रुपए के सरकारी अनाज की इस कथित चोरी ने न केवल वेयरहाउस प्रबंधन बल्कि प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है जिससे साफ होगा कि आखिर इस बड़े घोटाले के पीछे कौन जिम्मेदार है।

  • लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: रिश्वत की दूसरी किस्त ₹30,000 लेते पटवारी हरीश पाटीदार को रंगे हाथों गिरफ्तार, कार्रवाई जारी

    लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: रिश्वत की दूसरी किस्त ₹30,000 लेते पटवारी हरीश पाटीदार को रंगे हाथों गिरफ्तार, कार्रवाई जारी


    मंदसौर । मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई एक बार फिर सुर्खियों में है। मंदसौर जिले के सुवासरा तहसील में पदस्थ पटवारी हरीश पाटीदार को रिश्वत की दूसरी किस्त ₹30,000 लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत की जा रही है और मामले में जांच तथा अन्य कदम जारी हैं।

    यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब एक किसान दिनेश चंद्र जोशी ने उज्जैन लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई कि उसका दत्तक पुत्र आनंद जोशी के नाम पर कृषि भूमि का नामांतरण करवाने के लिए पटवारी ने पहले ₹40,000 की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने सत्यापन कराकर 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते समय पटवारी को स्थानीय तहसील कार्यालय में पकड़ा।

    आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) 2018 की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के हिस्से के रूप में सामने आई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लोकायुक्त विभाग भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सतर्क है।

    जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने बताया कि नामांतरण के लिए पटवारी ने जबरदस्ती रिश्वत की मांग की थी और नामांतरण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा रहा था, जिसके बाद उन्होंने लोकायुक्त में शिकायत की। इस शिकायत पर लोकायुक्त टीम ने पहले सत्यापन किया और उसके बाद पटवारी को दूसरी किस्त लेते समय ट्रैप में फँसाकर गिरफ्तार किया।

    मामले का यह पहलू बताता है कि आम जनता द्वारा की गई शिकायत पर लोकायुक्त की टीम ने तात्कालिक प्रतिक्रिया दी और भ्रष्टाचार के आरोप में आरोपी को पकड़कर छानबीन शुरू कर दी है। इस गिरफ्तारी ने दिखाया है कि लोकायुक्त सदैव भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार रहता है, चाहे वह किसी भी सरकारी तंत्र का अधिकारी हो।

    इस गिरफ्तारी के साथ ही लोकायुक्त की टीम अब आगे पूरे मामले की जांच कर रही है, जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि कथित रिश्वत की मांग और लेन-देन में और कौन-कौन शामिल था। लोकायुक्त की कार्रवाई से जिले में अधिकारियों-कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है और जनता के बीच भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश भी गया है कि शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है।

  • एमपी बजट पर सियासी संग्राम: PCC चीफ जीतू पटवारी ने बजट को ‘ठग-गुब्बारा और धांधलियों का बजट’ कहा, भ्रष्टाचार की नसबंदी की मांग

    एमपी बजट पर सियासी संग्राम: PCC चीफ जीतू पटवारी ने बजट को ‘ठग-गुब्बारा और धांधलियों का बजट’ कहा, भ्रष्टाचार की नसबंदी की मांग


    भोपाल । मध्य प्रदेश में वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पेश होने के साथ ही सियासी तनाव भी तेज़ हो गया है। बुधवार को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेपरलेस बजट विधानसभा में पेश किया गया, जिसमें किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं। इस दौरान विपक्ष खासकर कांग्रेस ने बजट पर तीखी टिप्पणी की, इसे जनता के साथ धोखा, ठग, गुब्बारा और धांधलियों का बजट करार दिया।
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि यह बजट भ्रष्टाचार की नसबंदी करने की बजाय सरकार का ढोंग बजट है। उन्होंने कहा कि सरकार सदन में कुत्तों की नसबंदी जैसी बातों पर समय बर्बाद कर रही है, जबकि असल मुद्दों भ्रष्टाचार और आर्थिक संकट पर काम होना चाहिए। पटवारी ने दावा किया कि पिछले वित्त वर्ष में केंद्र से मिलने वाला ₹50,000 करोड़ नहीं मिला, जिसके कारण सरकार अब तक अपने बजट का सिर्फ़ आधा ही खर्च कर सकी है और यह बजट फर्जी तथा खोखला है।

    पटवारी ने कर्ज बढ़ने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सरकार रोज़ाना ₹213 करोड़ कर्ज ले रही है तथा इस वित्त वर्ष में लगभग ₹72,000 करोड़ का उधार लिया गया है, जिससे राज्य गंभीर आर्थिक संकट के कगार पर है। उन्होंने कहा कि बजट को वास्तविकता के साथ पेश करना चाहिए और मुख्यमंत्री मोहन यादव को राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है। विपक्ष ने बजट को गुब्बारा एवं धांधलियों का बजट बताया, जिसमें सिर्फ वाढ़ती व्यय और घोषणाओं का फोकस है लेकिन जमीन पर कोई ठोस योजना या क्रियान्वयन नहीं दिख रहा। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बजट में निवेश वाले वादे सिर्फ़ शोरगरबा हैं और वास्तव में जनता को इससे कोई ठोस लाभ नहीं मिलेगा।

    पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है, तो क्यों गरीबी बनी हुई है और राशन की लंबी कतारें आज भी चल रहीं हैं? उन्होंने कहा कि बजट में रोज़गार और महंगाई जैसे मुद्दे पर कोई ठोस प्रावधान नहीं है और सरकार का आर्थिक समझ बिल्कुल जीरो है। इसके अलावा कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग भी की, विशेष रूप से बेटियों की सुरक्षा और एेसी अन्य भयावह स्थितियों पर जहाँ प्रतिदिन लड़कियों के लापता होने और बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं। पीसीसी चीफ ने कहा कि यह मामला सिर्फ़ प्रदेश का नहीं है इसके लिए केंद्रीय गृह एवं विदेश मंत्रालय को भी तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

    वहीं, बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री ने सत्तापक्ष की ओर से बजट को गरीबों, महिलाओं और युवाओं के हित का बताया और कहा कि इसमें कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। लेकिन विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि बजट सिर्फ़ प्रचार का औज़ार है और आर्थिक वास्तविकताओं से इसका कोई वास्ता नहीं है।  इस बीच बजट को सरकार की लंबी-अगली रणनीति के रूप में देखा जा रहा है और समर्थन तथा विरोध दोनों तरफ से इसका सियासी विश्लेषण जारी है।