Category: Madhya Pradesh
-

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संसद भवन पर आतंकी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी
मध्य प्रदेश/3 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुआ आतंकी हमला भारतीय लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला था, जिसमें आतंकियों ने संसद भवन में घुसने का प्रयास किया और भारी गोलाबारी शुरू कर दी। इस हमले में सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। कई जवानों ने अपनी जान की आहुति देकर संसद भवन और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित किया।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह घटना भारतीय इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद की जाती है। डॉ. यादव ने यह भी कहा कि आतंकवाद का सामना करते हुए हमारे वीर जवानों ने न केवल अपने प्राणों की आहुति दी, बल्कि देश के स्वाभिमान की रक्षा भी की। यह बलिदान देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे पराक्रमी जवानों ने उस समय आतंकवादियों को कड़ी टक्कर दी और आतंकियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। आज पूरा देश उन जवानों की वीरता को याद कर रहा है। यह घटना हम सभी को यह याद दिलाती है कि देश की रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों के जवान अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटते।शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके साहस और बलिदान को नमन किया और कहा कि उनका योगदान देश के लिए अविस्मरणीय है। “हम सभी शहीदों की वीरता को सलाम करते हैं, और उनकी बलिदान की भावना को अपने दिलों में हमेशा जिंदा रखते हैं।”यह हमला उस समय हुआ था जब संसद में एक सत्र चल रहा था और इसमें कई महत्वपूर्ण नेता उपस्थित थे। आतंकवादियों का मकसद संसद में घुसकर बड़े पैमाने पर आतंक फैलाना था, लेकिन सुरक्षा बलों की तत्परता और साहस ने उन्हें नाकाम कर दिया। इस हमले में 9 सुरक्षा कर्मी और 5 आतंकवादी मारे गए थे, जिनमें से कई जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह शहीद जवानों के परिवारों के लिए सबसे कठिन समय था, और उनके परिवारों का संघर्ष और बलिदान भी कभी भुलाया नहीं जाएगा। उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की और कहा कि राज्य सरकार हर संभव मदद देने के लिए तत्पर है।आज पूरा देश उन जवानों की वीरता को याद कर रहा है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें सुरक्षा प्रदान की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लिया और कहा कि हम सभी को इस प्रकार के हमलों को नाकाम करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। -

मंदसौर जिले ने दो वर्षों में रचे विकास के नए आयाम: प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया
मध्य प्रदेश/ महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मंदसौर जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मंदसौर जिले ने बीते दो वर्षों में विकास के प्रत्येक क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उन्होंने जिले में किए गए विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति और उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी।प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित सुशासन भवन सभागार में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दो वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
बैठक में रहे उपस्थित
कार्यक्रम में सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग, सुवासरा विधायक श्री हरदीप सिंह डंग, जिला योजना समिति सदस्य श्री राजेश दीक्षित, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री बसंत शर्मा, पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार मीना, अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल, समस्त जिला अधिकारी एवं बड़ी संख्या में पत्रकारगण उपस्थित रहे।
धार्मिक और पर्यटन विकास
प्रभारी मंत्री ने बताया कि भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में लगभग 25 करोड़ रुपए की लागत से पशुपतिनाथ लोक का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। वहीं सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के अंतर्गत जिले में 61.62 करोड़ रुपए की लागत से 5 महत्वपूर्ण निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं।जल, ऊर्जा और आधारभूत संरचना
जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले के सभी 922 ग्रामों में 2.40 लाख से अधिक नल जल कनेक्शन दिए जा रहे हैं। लगभग 1332 करोड़ रुपए की लागत से नल-जल योजनाएं प्रगतिरत हैं।
इसके साथ ही गांधीसागर जल विद्युत गृह की 115 मेगावाट क्षमता की इकाइयों के नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण हेतु 418.91 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है।स्वास्थ्य और शिक्षा में ऐतिहासिक प्रगति
मंदसौर जिला मुख्यालय पर श्री सुंदरलाल पटवा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अक्टूबर 2024 से 100 सीटों के साथ प्रारंभ किया गया है, जहां वर्तमान में प्रथम व द्वितीय वर्ष के कुल 200 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
इसके अतिरिक्त जिले में 13 सांदीपनि विद्यालयों को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अधिकांश भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।कृषि और किसान कल्याण
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत जिले के 2.19 लाख से अधिककिसानों को 43.96 करोड़ रुपए की सहायता दी गई है।सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना में 8,803 किसानों को 10.20करोड़ रुपए की राशि सीधे खातों में दी गई। अतिवृष्टि एवं फसल क्षति के लिए जिले को 267.29 करोड़ रुपए की राहत राशि प्राप्त हुई।औद्योगिक विकास और रोजगार
जिले में 331.47 हेक्टेयर भूमि पर नए औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार किया गया है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में आयोजित कृषि उद्योग समागम 2025 में 3,600 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जिससे लगभग 12,500 रोजगार सृजित होंगे।मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत 487 हितग्राहियों को 35.39 करोड़ रुपए का ऋण देकर स्वरोजगार से जोड़ा गया।नगरीय और ग्रामीण विकास
अमृत 2.0 योजना में 194.82 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अंतर्गत 10,166 आवास पूर्ण हो चुके हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, ग्राम सड़क एवं आवास सहित 50,512 विकास कार्यों के लिए 810.01 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है।भविष्य की दिशा
प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि मंदसौर जिला निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है और आने वाले समय में इसे विकास के नए शिखर पर पहुंचाया जाएगा। -

मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में दो साल: अतीत, वर्तमान और भविष्य-तीनों में संतुलित विकास
मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल में अतीत, वर्तमान और भविष्य-तीनों क्षेत्रों में संतुलित विकास की दिशा में कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यकाल के शुरुआती दौर से ही प्रदेश की पहचान को सांस्कृतिक प्रशासनिक और विकासात्मक दृष्टिकोण से मजबूत करने की रणनीति अपनाई।
अतीत: सांस्कृतिक धरोहर का पुनर्निर्माणसरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया है। उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर का विस्तार कार्य न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शहर की पहचान भी मजबूत कर रहा है। प्राचीन धरोहर स्थलों पर संरक्षण गतिविधियाँ तेज की गई हैं। ओंकारेश्वर क्षेत्र में अद्वैत दर्शन से जुड़े प्रकल्पों को गति दी जा रही है। इसके अलावा, भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थल श्रीकृष्ण पाथेय के तहत तीर्थस्थल के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और राज्य में पर्यटन को प्रोत्साहित करना है।वर्तमान: प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचा
दो वर्षों में सरकार ने सड़क नेटवर्क, औद्योगिक कॉरिडोर और शहरी सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी है। ग्रामीण सड़कें भी सुधार के अभियान में हैं। शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल सुविधाओं और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम पर काम हुआ है। कृषि क्षेत्र में उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाएँ जैसे लाड़ली बहना और स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम भी प्रभावी रूप से लागू किए गए हैं।भविष्य: निवेश, ऊर्जा और स्वास्थ्य
आगामी दशक को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नई औद्योगिक नीति और औद्योगिक क्लस्टरों के विकास की योजना बनाई है। पीथमपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।सौर ऊर्जा उत्पादन, जल संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ढांचे को बढ़ावा देकर हरित ऊर्जा क्षेत्र में भी कदम बढ़ाए गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के सुधार के लिए जिला एवं ग्रामीण स्तर पर अस्पताल उन्नयन और टेली-मेडिसिन सेवाओं का विस्तार प्रस्तावित है।
संतुलित नेतृत्व का संकेत
डॉ. मोहन यादव के दो वर्षों का कार्यकाल यह दर्शाता है कि सरकार सांस्कृतिक गौरव, वर्तमान प्रशासनिक प्राथमिकताओं और भविष्य की विकास योजनाओं-तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। आने वाले समय में इन पहलों का वास्तविक असर प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों में देखने को मिलेगा।मध्यप्रदेश सरकार ने डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में दो साल में अतीत की सांस्कृतिक धरोहर, वर्तमान प्रशासनिक सुधार और भविष्य की विकास योजनाओं को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया है। यह संतुलित दृष्टिकोण राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत देता है। -

सिवनी तीन करोड़ की हवाला डकैती मामले में प्रमोद सोनी की जमानत खारिजन्यायालय ने साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका जताई
सिवनी ।सिवनी जिले में तीन करोड़ रुपये की हवाला डकैती के सनसनीखेज मामले में जबलपुर क्राइम ब्रांच के आरक्षक प्रमोद सोनी की जमानत याचिका को जिला न्यायालय ने खारिज कर दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले की जांच अभी जारी हैऔर उपलब्ध तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। विशेष न्यायाधीश एट्रोसिटीज पर सत्र न्यायाधीश सिवनीगालिब रसूल ने 11 दिसंबर को यह आदेश पारित कियाजिसमें आरोपित की रिहाई से साक्ष्य प्रभावित होने और जांच पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना जताई गई।यह मामला सिर्फ एक डकैती का नहीं बल्कि एक संगठित अपराध नेटवर्क का हिस्सा भी प्रतीत हो रहा हैजिसमें पुलिस महकमे के कुछ लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस द्वारा की गई जांच में सामने आए कॉल डिटेल्सआपसी संपर्कडिजिटल साक्ष्य और घटनाक्रम ने पूरे मामले को और भी जटिल बना दिया है।
प्रमोद सोनी की संलिप्तता का खुलासा
प्रमोद सोनी पर आरोप है कि वह हवाला डकैती के इस पूरे षड्यंत्र का हिस्सा थे। पुलिस की जांच के मुताबिकप्रमोद सोनी के कॉल डिटेल्स और डिजिटल साक्ष्य में उनकी भूमिका का खुलासा हुआ है। यह हवाला डकैती पुलिस महकमे के भीतर एक संगठित अपराध के नेटवर्क की ओर इशारा करता हैजो अपराधियों को सुरक्षा प्रदान करने और अवैध धन की तस्करी में मदद कर रहा था।
यहां तक कि जांच में यह भी पाया गया है कि प्रमोद सोनी ने अपने पद का दुरुपयोग किया और पुलिस की जानकारी का फायदा उठाकर हवाला नेटवर्क में शामिल हुए। उनके खिलाफ पुलिस ने ठोस साक्ष्य जुटाए हैंजिनमें आपसी संपर्क और फाइनेंशियल लेन-देन की जानकारियां शामिल हैं।
न्यायालय का फैसला और जमानत खारिज होने के कारण
विशेष न्यायाधीश गालिब रसूल ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि चूंकि मामले की जांच चल रही है और साक्ष्य के आधार पर यह प्रतीत होता है कि प्रमोद सोनी की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती हैइसलिए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुएआरोपित के खिलाफ जांच की प्रक्रिया को किसी भी तरह से प्रभावित होने का खतरा नहीं उठाया जा सकता।
न्यायालय ने यह स्वीकार किया कि हवाला डकैती का मामला केवल एक वित्तीय अपराध नहीं बल्कि एक बड़े आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा हैजिसमें पुलिस महकमे की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में प्रमोद सोनी को जमानत देना मामले की गहराई को देखते हुए उचित नहीं होगा।
पहले भी जमानत याचिकाएं खारिज
यह पहला मामला नहीं है जब इस हवाला डकैती मामले में जमानत याचिका खारिज की गई है। इससे पहले भी कई आरोपितों की जमानत याचिकाएं न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी हैं। जांच एजेंसियां मामले में हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं कि इस संगठित अपराध के नेटवर्क को पूरी तरह से नष्ट किया जाए।
सिवनी का यह हवाला डकैती मामला पुलिस महकमे की भ्रष्टाचार और अपराध से संबंधित गंभीर समस्याओं को उजागर करता है। अब जबकि प्रमोद सोनी और अन्य आरोपितों के खिलाफ ठोस साक्ष्य जुटाए जा चुके हैंयह उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
न्यायालय का यह फैसला इस बात को भी स्पष्ट करता है कि कानून के दायरे में रहते हुए किसी भी व्यक्ति को आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने का लाभ नहीं मिल सकताचाहे वह पुलिस अधिकारी हो या आम नागरिक। अब मामले की जांच और विस्तार से की जाएगीजिससे इस बड़े आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। -

पन्ना की शेरनी! 3 माह की मासूम के लिए सियार से भिड़ी मां, डंडे से पीटकर खदेड़ा
पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना ज़िले में एक मां ने हिम्मत दिखाते हुए अपनी तीन महीने की बच्ची की जान बचा ली. देर रात एक सियार उनके घर में घुस आया और सो रही बच्ची पर हमला कर दिया. बच्ची की रोने की आवाज़ सुनकर मां तुरंत वहां पहुंची और पहले सियार पर बर्तन फेंके, फिर डंडे से उसे भगाया. काफी मशक्कत के बाद सियार भाग गया और बच्ची की जान बच गई. बच्ची के सिर और आंख के पास चोटें आई हैं. प्राथमिक उपचार के बाद उसे गुनौर से ज़िला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है. इस घटना से पूरे इलाके में डर का माहौल है और मां की बहादुरी की तारीफ़ हो रही है.3 माह की मासूम के लिए सियार से भिड़ी मां
दरअसल, पन्ना जिले के ग्रामीण अंचलों में जंगली जानवरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में सिमरिया गांव में सोती हुई एक 3 माह की मासूम बच्ची पर एक सियार (क्षेत्रीय भाषा में लड़इया कहते है)ने घर पर जानलेवा हमला कर दिया. बच्ची के रोने की आवाज सुनकर, उसकी मां शब्बो बानो ने साहस दिखाते हुए पहले बर्तन फेंक कर और फिर डंडा लेकर वह सियार से भिड़ गईं. संघर्ष के बाद मां अपनी बच्ची को बचाने में कामयाब रहीं.देर तक सियार से लड़ती रही मां
अपनी बेटी की चीख सुनकर मां ने हाथ में पकड़ी सारी चीज़ें गिरा दीं. बिना कुछ सोचे-समझे वह बाहर भागी. सामने का नज़ारा देखकर किसी का भी दिल दहल जाता, लेकिन मां ने अपने डर को किनारे कर दिया. उसने पास पड़े कुछ बर्तन उठाए और पूरी ताकत से सियार पर फेंक दिए. वह चीखती रही और सियार से लड़ती रही. कुछ देर तक सियार और मां के बीच लड़ाई चलती रही. मां ने हिम्मत नहीं हारी और सियार से तब तक लड़ती रही जब तक वह भाग नहीं गया.बच्ची के सिर और आंख के पास चोटें
घायल बच्ची के सिर और आंख के पास चोटें आई हैं. उसे गुनौर से ज़िला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है. इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है. -

NH-44 पर बदइंतजामी का कहर: छौंदा टोल पर 5 किमी लंबा जाम, कैंसर पीड़ित मां के साथ फंसा बेटा-प्रशासन बेखबर
मध्य प्रदेश / मुरैना के मुरैना जिले में नेशनल हाईवे-44 पर स्थित छौंदा टोल प्लाजा इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही की पहचान बन चुका है। यहां लगने वाला रोज़ाना जाम अब केवल ट्रैफिक समस्या नहीं रहा बल्कि यह मानव संवेदना और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर रहा है। शुक्रवार शाम हालात इतने बिगड़े कि हाईवे पर 4 से 5 किलोमीटर लंबा महाजाम लग गया जो करुआ गांव तक फैल गया। हाईवे होने के कारण चंद मिनटों में ही वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम में आम वाहन ही नहीं बल्कि एंबुलेंस मरीजों की गाड़ियां और बुजुर्ग यात्री भी फंसे रहे। कई घंटे बीतने के बावजूद जाम खुलवाने की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई।
कैंसर पीड़ित मां की हालत बिगड़ीइस जाम की सबसे दर्दनाक तस्वीर तब सामने आई जब मुरैना निवासी अरविंद सिंह अपनी कैंसर पीड़ित मां उर्मिला के साथ फंस गए। अरविंद ने बताया कि उनकी मां की हाल ही में 14 घंटे लंबी सर्जरी कीमोथेरेपी और रेडिएशन हुआ है। वे ग्वालियर से नियमित चेकअप कराकर लौट रहे थे तभी शाम के समय छौंदा टोल पर जाम में फंस गए। अरविंद के मुताबिक “जाम करुआ गांव के विक्टर स्कूल तक था। घंटों खड़े रहने से मां की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं लेकिन न टोल प्रबंधन ने मदद की और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचा।
परिजनों ने कई बार मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।1 दिसंबर से नई कंपनी बढ़ी अव्यवस्था
गौरतलब है कि 1 दिसंबर से छौंदा टोल प्लाजा का संचालन शिवा कॉर्पोरेशन कंपनी के पास है। इससे पहले यह टोल पथ इंडिया द्वारा संचालित किया जा रहा था। नई कंपनी के टेकओवर के बाद से ही यहां अव्यवस्था बढ़ गई है।स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि शाम होते ही यहां जाम लगना आम हो गया है। टोल बूथ पर स्टाफ की कमीतकनीकी खामियां और सुस्त प्रबंधन इसकी बड़ी वजह मानी जा रही हैं।टोल मैनेजर का गैर-जिम्मेदाराना बयान
जब इस अव्यवस्था पर टोल मैनेजर अनुराग तोमर से सवाल किया गया तो उन्होंने हैरान करने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहाजाम लगता है तो हम ही खुलवाते हैं। अभी नया चार्ज संभाला है सिस्टम में थोड़ी समस्या है ठीक करवा रहे हैं। इस बयान से साफ है कि यात्रियों की परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
सिविल लाइन थाना प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ASP सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि छौंदा टोल पर जाम की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।उन्होंने चेतावनी दी-टोल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि जाम की स्थिति नहीं बननी चाहिए। अगर सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।छौंदा टोल पर लग रहा जाम सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का आईना है। जब मरीज और एंबुलेंस तक फंसे रहें तो यह सिस्टम की विफलता मानी जाएगी। -

नीमच से लौट रहे दंपती की सड़क दुर्घटना में मौत तीन लोग मारे गए
नीमच । राजस्थान के निंबाहेड़ा बायपास पर शुक्रवार रात को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में नीमच जिले के एक दंपती सहित तीन लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना नेशनल हाईवे 56 पर बडौली माधोसिंह मार्ग के चौराहे पर हुई जब एक मांगलिक कार्यक्रम से लौट रहे दंपती की कार पिकअप से टकराई और उसके बाद पीछे से आ रही थार ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में दोनों दंपती के सदस्यों और पिकअप चालक की मौके पर ही मौत हो गई।सभी मृतक नीमच जिले के सरवानिया महाराज क्षेत्र के निवासी थे। दुर्घटना का शिकार हुआ दंपती लखन मालू 40 वर्ष और उनकी पत्नी सविता डॉली मालू 36 वर्ष चित्तौड़गढ़ जिले में एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। उनकी मारुति वेन नेशनल हाईवे पर बायपास पर एक खड़ी पिकअप से टकराई जो पंचर होने के कारण वहां रुकी हुई थी।इस दौरान एक थार जीप पीछे से तेजी से आई और वेन को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वेन बुरी तरह पिचक गई और उसमें सवार दोनों दंपती की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा पिकअप चालक बसंतीलाल प्रजापत 30 वर्ष भी इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठा। वह ग्राम भूनियाखेड़ी का निवासी था। पिकअप में सवार एक अन्य व्यक्ति हस्तीमल पामेचा को गंभीर चोटें आईं जिसे उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।निंबाहेड़ा पुलिस ने घटना के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस दुर्घटना में शामिल सभी वाहनों का सही तरीके से निरीक्षण किया जा रहा है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।सदर थाना प्रभारी संजय शर्मा ने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल घायलों को अस्पताल भेजा। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटवाकर यातायात को सुचारू किया गया। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इसके कारणों का पता लगाया जाएगा।यह हादसा क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह हादसा उस समय हुआ जब लोग मांगलिक कार्यक्रम से लौट रहे थे और यह घटना उस समय हुई जब सड़क पर गाड़ी की स्थिति बिगड़ गई थी।
स्थानीय लोग इस हादसे को लेकर गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले दंपती और पिकअप चालक के परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है।सड़क हादसों के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने नेशनल हाईवे पर सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता जताई है। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के महत्व को उजागर किया है और लोगों से आग्रह किया गया है कि वे यात्रा के दौरान अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। -

सेवा, शिक्षा और संवेदना की मिसाल: डॉ. रश्म-जो इलाज को सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी मानती हैं
भोपाल आज के समय में जब चिकित्सा को अक्सर सिर्फ एक पेशे के तौर पर देखा जाता है, वहीं डॉ. रश्मि जैसी चिकित्सक उम्मीद की एक अलग तस्वीर पेश करती हैं। उन्होंने अपने ज्ञान, अनुभव और संवेदना से न सिर्फ मरीजों का इलाज किया, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को भी समान महत्व दिया। डॉ. रश्मि ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर से जनरल मेडिसिन में एमडी की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा उन्होंने डायबिटीज में सर्टिफिकेट कोर्स भी किया, जिससे मेटाबॉलिक और लाइफस्टाइल डिजीज़ के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई।अपने करियर की शुरुआत से ही डॉ. रश्मि ने प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दी हैं। उन्होंने एम्स भोपाल में तीन वर्षों तक सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे एलएन मेडिकल कॉलेज और पीएमएस भोपाल जैसे संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहीं। मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में उन्हें पांच साल का टीचिंग अनुभव प्राप्त है, जहां उन्होंने सैकड़ों मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षण दिया। वर्तमान में डॉ. रश्मि मेडिकल एजुकेशन और आईसीएमआर ICMR रिसर्च से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। वे सिर्फ क्लीनिकल प्रैक्टिस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रिसर्च और अकादमिक गतिविधियों के जरिए चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी उनकी भूमिका अहम रही है। वे बेसिक लाइफ सपोर्ट BLS प्रोग्राम, नर्सिंग ट्रेनिंग सेशन TEM में फैकल्टी इंचार्ज के रूप में कार्य कर चुकी हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने इमरजेंसी स्थितियों में त्वरित और सही उपचार के लिए मेडिकल व नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षित किया। डॉ. रश्मि के प्रोफेशनल इंटरेस्ट में डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, पेलिएटिव केयर, इमरजेंसी मेडिसिन और इमरजेंसी केयर इंटरवेंशन शामिल हैं। विशेष रूप से गंभीर और जरूरतमंद मरीजों के लिए उनका दृष्टिकोण बेहद मानवीय रहा है।
साथी डॉक्टरों के अनुसार, डॉ. रश्मि ने अब तक कई गरीब और असहाय मरीजों के इलाज का खर्च स्वयं उठाया है। इसके साथ ही वे मरीजों को अन्य संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक मदद दिलाने में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उनके लिए मरीज सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि एक इंसान होता है।उनकी यही सोच उन्हें एक संवेदनशील चिकित्सक के रूप में अलग पहचान दिलाती है-जहां इलाज के साथ भरोसा, सहानुभूति और सहयोग भी उतना ही जरूरी माना जाता है। डॉ. रश्मि की यात्रा यह साबित करती है कि एक अच्छा डॉक्टर वही है जो ज्ञान के साथ करुणा भी रखे। शिक्षा रिसर्च और समाजसेवा का संतुलन उन्हें चिकित्सा क्षेत्र की प्रेरणादायक शख्सियत बनाता है।
-

लॉ एंड ऑर्डर से लेकर रोजगार तक CM मोहन यादव का बड़ा बयान: कहा-मंत्री का भाई भी नहीं बचा मार्गदर्शन मिला तो मंत्रिमंडल बदलेगा
भोपाल /मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल को 13 दिसंबर को दो साल पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने एक चर्चित अखबार के साथ से विशेष बातचीत में अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियों चुनौतियों और आने वाले तीन सालों के रोडमैप को विस्तार से रखा। बातचीत में लॉ एंड ऑर्डर नक्सलवाद रोजगार निवेश कृषि संकट मेट्रो प्रोजेक्ट और मंत्रिमंडल फेरबदल जैसे अहम मुद्दे केंद्र में रहे।कानून से ऊपर कोई नहीं मंत्री का भाई भी गिरफ्तार हुआa
लॉ एंड ऑर्डर पर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार में कानून सबके लिए समान है।उन्होंने कहा अगर कोई गलत करेगा तो वह बचेगा नहीं। मंत्री का भाई भी कानून से ऊपर नहीं है उसे भी गिरफ्तार किया गया है। यही सुशासन है। CM के इस बयान को सख्त प्रशासनिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।नक्सलवाद पर बड़ी उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनाया।उन्होंने कहा कि मंडला बालाघाट और डिंडौरी जैसे जिलों से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है।बीते एक साल में 10 नक्सलियों को ढेर किया गया और कई बार नक्सलियों ने सरेंडर किया। CM ने पूर्व कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले नक्सली खुलेआम हिंसा करते थे लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
दिल्ली से सरकार चलने के आरोपों पर पलटवार
विपक्ष के इस आरोप पर कि मध्य प्रदेश सरकार दिल्ली से चलाई जा रही है मुख्यमंत्री ने कहा-हमें गर्व है कि प्रधानमंत्री गृह मंत्री और पार्टी नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलता है। केंद्र और राज्य के अच्छे संबंधों से ही विकास तेज होता है।रोजगार पर फोकस: 60 हजार से ज्यादा नौकरियां रोजगार को बड़ी चुनौती मानते हुए CM ने बताया कि बीते दो सालों में 60 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं।उन्होंने कहा- बिजली विभाग में 50 हजार पद, स्वास्थ्य विभाग में 42 हजार पद,पुलिस विभाग में 22500 से अधिक पद,मंजूर किए गए हैं। भविष्य में एक परीक्षा-एक भर्ती सिस्टम लागू करने की भी योजना है।पेपर लीक पर सख्ती
भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के सवाल पर CM ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कोई बड़ा पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पारदर्शी और समयबद्ध परीक्षाएं सरकार की प्राथमिकता हैं।निवेश और इंडस्ट्रियल ग्रोथ
CM ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निवेश सिर्फ कागजों में नहीं जमीन पर उतर रहा है।उन्होंने बताया कि 6 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिला है।सागर में खाद कारखाने और 30 हजार करोड़ के नए इंडस्ट्रियल पार्क का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास अब हर क्षेत्र में दिख रहा है।कृषि और खाद संकट पर जवाब
कृषि आधारित वर्ष की घोषणा को लेकर CM ने कहा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है।उन्होंने माना कि कहीं-कहीं वितरण में दिक्कत आती है लेकिन अब SMS और होम डिलीवरी सिस्टम पर काम किया जा रहा है।भोपाल मेट्रो और मास्टर प्लान
भोपाल मेट्रो को लेकर CM ने कहा कि प्रधानमंत्री वीडियो संदेश के जरिए जुड़ेंगे और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में लोकार्पण होगा।भोपाल मास्टर प्लान पर उन्होंने कहा-25 साल का बैकलॉग है दो साल में सब नहीं होगा लेकिन समाधान जरूर निकलेगा।मंत्रिमंडल विस्तार पर क्या बोले?
मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के सवाल पर CM ने साफ कहा-जैसा पार्टी के पार्लियामेंट्री बोर्ड प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलेगा वैसा ही करेंगे।सादगी का संदेश: सामूहिक विवाह में बेटे की शादी
CM ने अपने छोटे बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करने के फैसले को सामाजिक संदेश बताया।उन्होंने कहा-दिखावे की शादी समाज पर बोझ डालती है। बड़े लोग फिजूलखर्ची करेंगे तो गरीब कर्ज लेगा।उन्होंने अंतिम संस्कार और विवाह में अनावश्यक खर्च से बचने की अपील भी की। डॉ. मोहन यादव के इंटरव्यू से साफ है कि सरकार सख्त प्रशासन तेज विकास और सामाजिक सादगी को अपनी पहचान बनाना चाहती है। अब देखना यह होगा कि अगले तीन सालों में ये दावे जमीन पर कितने असरदार साबित होते हैं।
