Category: Madhya Pradesh

  • वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघ की संदिग्ध मौत, एक माह पहले कान्हा से किया था शिफ्ट

    वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघ की संदिग्ध मौत, एक माह पहले कान्हा से किया था शिफ्ट

    सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व से एक दुखद खबर सामने आई है। कान्हा नेशनल पार्क से करीब एक महीने पहले ही शिफ्ट किए गए एक युवा बाघ का शव रिजर्व के कोर एरिया में मिला है। इस घटना के बाद वन विभाग और टाइगर रिजर्व प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृत बाघ को 18-19 जनवरी की दरमियानी रात को रेडियो कॉलर लगाकर नौरादेही के कोर एरिया में छोड़ा गया था। वन विभाग की विशेष टीम लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रही थी। पिछले दो दिनों से बाघ का सिग्नल एक ही स्थान से मिल रहा था, जिससे टीम को किसी अनहोनी की आशंका हुई। रविवार की शाम करीब जब मॉनिटरिंग दल मोहली परिक्षेत्र के मानेगांव बीट (कक्ष क्रमांक 159) पहुँचा, तो वहां बाघ मृत अवस्था में पाया गया।

    सोमवार को टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बाघ की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह अभी स्पष्ट नहीं है। वन विभाग निम्नलिखित पहलुओं पर जांच कर रहा है। क्या किसी दूसरे बाघ के साथ आपसी संघर्ष में इसकी जान गई, या फिर शिफ्टिंग के बाद बाघ नए वातावरण में खुद को ढाल नहीं पाया, हालांकि अधिकारी अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन डॉग स्क्वायड की मदद से शिकार की संभावनाओं की भी पड़ताल की जा रही है।

    सोमवार सुबह से ही डॉग स्क्वायड और विशेषज्ञों की टीम मौके पर मौजूद है। बाघ के शव का पोस्टमार्टम वरिष्ठ पशु चिकित्सकों के पैनल द्वारा किया जा रहा है। विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो पाएगा।

  • मप्रः 400 के.व्ही. इंदौर–नागदा ट्रांसमिशन लाइन में लाइव लाइन मेंटेनेंस

    मप्रः 400 के.व्ही. इंदौर–नागदा ट्रांसमिशन लाइन में लाइव लाइन मेंटेनेंस

    भोपाल। मध्य प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) की इंदौर टीम ने 400 के.व्ही. इंदौर–नागदा महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइन पर सफलतापूर्वक लाइव लाइन मेंटेनेंस कार्य कर सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। लगभग 200 मेगावाट पॉवर फ्लो वाली चालू लाइन पर यह कार्य संपन्न किया गया, जिससे न केवल ग्रिड की स्थिरता बनी रही, बल्कि 400 के.व्ही. लाइन के संभावित लंबे आउटेज को भी टाला जा सका।

    एम पी ट्रांसको, इंदौर की अतिरिक्त मुख्य अभियंता नीलम खन्ना ने सोमवार को बताया कि विगत दिवस 400 के.व्ही. इंदौर–नागदा लाइन के एक फेज में डिस्क इंसुलेटर स्ट्रिंग को बदलना आवश्यक हो गया था। महाशिवरात्रि पर्व के दौरान ग्रिड की स्थिरता प्रभावित न हो, इस उद्देश्य से कार्य को चालू लाइन में ही करने का निर्णय लिया गया।

    वेयर हैंड तकनीक से हुआ मेंटेनेंस

    उन्होंने बताया कि व्हीकल-माउंटेड इंसुलेटेड एरियल वर्क प्लेटफॉर्म की सहायता से अत्याधुनिक हॉट-स्टिक उपकरणों और वेयर-हैंड तकनीक का उपयोग करते हुए यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस दौरान विद्युत आपूर्ति में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आया।।

    लाइव लाइन मेंटेनेंस का यह रहा फायदा

    लाइव लाइन मेंटेनेंस करने से ग्रिड की विश्वसनीयता और स्थिरता बनी रही। साथ ही संभावित लंबे शटडाउन को टालते हुए इंदौर और नागदा क्षेत्र के बीच विद्युत आदान-प्रदान का विकल्प सुरक्षित रखा गया एवं ट्रांसमिशन चार्ज से संबंधित वाणिज्यिक क्षति से भी बचाव संभव हुआ।

    इनका रहा विशेष योगदान

    इंदौर के समीप राऊ क्षेत्र में ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस का नेतृत्व सहायक अभियंता राजेन्द्र कनोजे ने किया। भोपाल, इटारसी और इंदौर के वेयर-हैंड प्रशिक्षित लाइन मेंटेनेंस स्टाफ मनाराम पटेल, जाधो पंवार, सुंदरलाल, मधुर मौसम रायकवार, गुलाबराव एवं दीपक कोरी ने समन्वित रूप से कड़े सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए अत्यंत सावधानी और दक्षता के साथ यह कार्य संपन्न किया।

  • उज्जैन में कुडियाट्टम की अद्भुत प्रस्तुति से दर्शक मंत्रमुग्ध

    उज्जैन में कुडियाट्टम की अद्भुत प्रस्तुति से दर्शक मंत्रमुग्ध

    उज्जैन। मध्य प्रदेश उज्जैन में विक्रम उत्सव अंतर्गत आयोजित विक्रम नाट्य समारोह में सोमवार शाम प्रसिद्ध नाट्य प्रस्तुति ‘जटायूवधम्’ (कुडियाट्टम शैली) का प्रभावशाली मंचन किया गया। केरल के सुप्रसिद्ध कलाकार मार्गी मधु चाक्यार द्वारा प्रस्तुत इस शास्त्रीय रंगमंच ने अपनी पारंपरिक गरिमा,सशक्त भावाभिनय और सजीव मंच संयोजन से दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।

    कार्यक्रम पंडित सूर्यनारायण व्यास कला संकुल,कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित हुआ,जहां कला प्रेमियों की बड़ी संख्या उपस्थित रही। प्रस्तुति में कुडियाट्टम की शास्त्रीय बारीकियों और अभिनय की सूक्ष्मता ने वातावरण को आध्यात्मिक और भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की। निर्देशक मार्गी मधु चाक्यार,पद्मश्री मुझिक्कुलम कोच्चुकूटन चाक्यार के पुत्र और अम्मानूर माधव चाक्यार के भतीजे हैं। उन्हें रंगकर्म की समृद्ध परंपरा विरासत में मिली है। उनके मंडल ने भारत के साथ-साथ स्विट्जरलैंड,इटली,फ्रांस और दुबई के प्रतिष्ठित उत्सवों में भाग लिया है तथा जेरूसलम,सिंगापुर और येल विश्वविद्यालय (यूएसए) सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति दी है।

    जटायु के बलिदान का गौरवशाली प्रसंग

    नाटक में रामायण का अत्यंत भावुक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार रावण मायारूपी वेश में माता सीता का हरण कर ले जाता है।माता सीता के हाथ में भगवान श्री राम द्वारा दिया गया चूड़ामणि होता है,जिसके जादुई रत्न के रावण के स्पर्श में आते ही उसका मायारूप टूट जाता है,किंतु रावण को इसका आभास नहीं होता। माता सीता को संकट में देख वीर पक्षी जटायु सहायता के लिए आते हैं और रावण से भीषण युद्ध करते हैं। अंततः रावण छलपूर्वक जटायु का वध कर लंका की ओर प्रस्थान करता है। प्रस्तुति के इस चरम दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

    विश्व की प्राचीन जीवित संस्कृत नाट्य परंपरा

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पद्मश्री भरत गुप्त (वाइस चेयरपर्सन,एनएसडी), आयुष गुप्ता मध्य प्रदेश के एक रेकी ग्रैंड मास्टर,योग प्रैक्टिशनर, राजेश कुशवाह (वरिष्ठ कार्य परिषद सदस्य,सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय), नरेश शर्मा (समाजसेवी) और संजू मालवीय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर निर्देशक ने कहा कि कूडियाट्टम विश्व की सबसे पुरानी जीवित संस्कृत नाट्य परंपरा मानी जाती है,जिसे यूनेस्को की मान्यता भी प्राप्त है। केरल में विकसित यह कला एक हजार वर्षों से अधिक पुरानी है।

    प्रस्तुत नाटक संस्कृत नाट्यकार शक्तिभद्र की रचना आश्चर्य चूड़ामणि के चतुर्थ अंक पर आधारित है,जिसमें जटायु के गौरवपूर्ण बलिदान का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है। भाव,भंगिमा और परंपरा के अद्भुत संगम से सजी ‘जटायूवधम्’ की प्रस्तुति विक्रम उत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही और दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की।

  • बड़वानी में केला उत्पादन तकनीक और निर्यात पर आज कार्यशाला सह कृषि संवाद

    बड़वानी में केला उत्पादन तकनीक और निर्यात पर आज कार्यशाला सह कृषि संवाद


    बड़वानी। जिला प्रशासन एवं उद्यानिकी विभाग, बड़वानी के तत्वावधान में 17 फरवरी को कृषि विज्ञान केन्द्र, तलून में एक दिवसीय सेमिनार सह कार्यशाला कृषि संवाद का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम एकीकृत बागवानी विकास मिशन और पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। जिसका मुख्य केंद्र केला उत्पादन की उन्नत तकनीक एवं निर्यात है। साथ ही मिर्च, डॉलर चना और क्षेत्र की एक्सोटिक फसलों के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी।

    कार्यशाला का उद्देश्य जिले के किसानों को केले की खेती में आधुनिक तकनीकों, टिश्यू कल्चर के लाभ, कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के तरीकों और अंतर्राष्ट्रीय बाजार (एक्सपोर्ट) की बारीकियों से अवगत कराना है। कार्यशाला में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 900 से 1000 किसान शामिल होंगे।

    इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें शामिल होने वाले प्रत्येक कृषक को विभाग द्वारा एक विशेष बुकलेट (मार्गदर्शिका) प्रदान की जाएगी। बुकलेट में केला व अन्य प्रमुख फसलों का संपूर्ण जीवन चक्र, खेती के दौरान आने वाली व्यावहारिक परेशानियाँ और उनके समाधान,एक्सपोर्ट (निर्यात) की संभावनाएँ और अंतर्राष्ट्रीय मानक विषयों का विस्तृत संकलन किया गया है, जिससे किसान कार्यशाला के बाद भी इसे एक संदर्भ के रूप में उपयोग कर सकें।

    कृषि संवाद कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा किसानों को कृषि के क्षेत्र में मार्गदर्शन दिया जाएगा। इस क्रम में जैन इरीगेशन जलगांव के अंर्तराष्ट्रीय केला विशेषज्ञ श्री केबी पाटिल, एग्रोनॉमिस्ट श्री अजहर जैदी, जैन कृषि तीर्थ जलगांव के डॉ. सुधीर भोंगले द्वारा टिश्यू कल्चर तकनीक पर, मुंबई एवं बुरहानपुर के केला एक्सपोर्टर श्री शाहिद अली, श्री अमोल महाजन, श्री विकास अग्रवाल द्वारा केला एक्सपोर्ट, टेरा ग्लैब खरगोन के सीईओ श्री संजय पाटीदार, वैज्ञानिक डॉ. महेन्द्रसिंह, डॉ. आरपी शर्मा, रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ. व्हाय के जैन, अवार्ड टू बनाना फॉर्मर ऑफ इंडिया श्री संतोष लछेटा द्वारा केला उत्पादन तकनीक एवं जिले के प्रगतिशील किसान श्री जयदेव पाटीदार, श्री बलराम जाट और कृषि विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया जाएगा। साथ ही इस कार्यक्रम में एपिडा जैसे राज्य स्तरीय संस्थाओं के भी शामिल होने की संभावना है।

    क्षेत्र के प्रमुख केला निर्यातकों जैसे राजेश्वरी केला ग्रुप, श्री सांई केला ग्रुप आदि की सूची और निर्यात के मानकों की जानकारी भी साझा करेंगे, जिससे किसान अपनी फसल को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार कर सकेंगे।

  • रेल नेटवर्क से दुर्लभ कछुओं की तस्करी का भंडाफोड़, 313 जीवित कछुए और 2 तोते बरामद

    रेल नेटवर्क से दुर्लभ कछुओं की तस्करी का भंडाफोड़, 313 जीवित कछुए और 2 तोते बरामद


    भोपाल ! स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ), भोपाल ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) एवं वनमंडल भोपाल के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए रेल नेटवर्क के माध्यम से दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के कछुओं की तस्करी करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

    ट्रेन संख्या 19322 पटना-इंदौर एक्सप्रेस में संत हिरदाराम स्टेशन पर दिनांक 3 फरवरी 2026 को कार्रवाई करते हुए प्रथम श्रेणी वातानुकूलित कोच में अटेंडेंट के रूप में कार्यरत आरोपी अजय सिंह राजपूत, निवासी इंदौर, के कब्जे से 311 दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के जीवित कछुए जब्त किए गए थे। इस संबंध में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/23 दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई। पूछताछ और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर प्रदेश के विभिन्न शहरों—नीमच, मंदसौर, रतलाम, इंदौर, देवास, उज्जैन, नागदा, शाजापुर तथा उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक साथ छापामार कार्रवाई की गई। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य पालतू पशु दुकानदार, डॉग ब्रीडर, रेल एसी कोच अटेंडेंट आदि के रूप में कार्य करते हुए रेल मार्ग से वन्यजीवों की तस्करी कर रहे थे।

    कार्रवाई के दौरान कुल 313 जीवित दुर्लभ, प्रतिबंधित एवं अनुसूची-1 में दर्ज चार प्रजातियों के कछुए (इंडियन टेंट टर्टल, इंडियन रूफ्ड टर्टल, क्राउनड रिवर टर्टल एवं स्टार टॉरटॉइस) तथा 2 जीवित रोज-रिंग्ड पैराकीट (तोते) बरामद किए गए। आरोपियों के कब्जे से एक मोटरसाइकिल एवं सात मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। गिरफ्तार आरोपियों में अरविंद परिहार, परवेज खान, नवीन ऊर्फ दीपह पारखे, करण मालवीय, आसिफ खान, अजय सिंह राजपूत और एक नाबालिग आरोपी शामिल हैं। सभी आरोपियों को माननीय न्यायालय भोपाल में प्रस्तुत कर जेल भेज दिया गया है। प्रकरण में विवेचना जारी है।

    कछुए जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और नदियों को जीवंत एवं स्वच्छ बनाए रखने में सहायक होते हैं। वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि दुर्लभ एवं प्रतिबंधित जलीय वन्यजीवों को पालना, रखना या उनका क्रय-विक्रय करना दंडनीय अपराध है। ऐसे अपराध में 7 वर्ष तक के कारावास एवं जुर्माने का प्रावधान है।


  • ग्वालियर में स्टंटबाजी का वीडियो वायरल: कार की छत और सनरूफ पर बैठे तीन-चार युवकों ने उड़ाई ट्रैफिक नियमों की धज्जियां

    ग्वालियर में स्टंटबाजी का वीडियो वायरल: कार की छत और सनरूफ पर बैठे तीन-चार युवकों ने उड़ाई ट्रैफिक नियमों की धज्जियां


    ग्वालियर । ग्वालियर की सड़कों पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन अब आम दृश्य बन गया है, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं। पड़ाव थाना क्षेत्र के पड़ाव चौराहे के पास तीन से चार कार सवार युवकों ने खुलेआम जानलेवा स्टंट किया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ युवक चलती कार की विंडो से आधे बाहर लटके हुए हैं, एक युवक कार की छत पर खड़ा है, जबकि दूसरा सनरूफ से बाहर निकलकर बैठा हुआ है। यह सब तेज रफ्तार से शहर की सड़कों पर हो रहा था और आसपास गुजर रहे वाहन तथा राहगीरों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक थी।

    वीडियो में यह भी देखा गया कि कार के भीतर बैठे अन्य लोग भी युवकों की इस हरकत का समर्थन कर रहे थे, जबकि कोई भी यातायात नियम का पालन नहीं कर रहा था। ट्रैफिक पुलिस के होने के बावजूद इस दौरान कोई अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था, जिससे युवकों को खुलेआम यह खतरनाक स्टंट करने का मौका मिला। वीडियो किसी राहगीर ने बनाया और सोशल मीडिया पर साझा किया, जिससे यह तेजी से वायरल हो गया।

    सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने के बाद लोग इसे लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि इस तरह की हरकतें न केवल खुद के लिए बल्कि अन्य वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती हैं। वहीं, कुछ लोगों ने ट्रैफिक पुलिस की अनदेखी को लेकर भी सवाल उठाए हैं और मांग की है कि ऐसे मामलों में तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर पड़ाव थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वीडियो में दिखाई दे रही कार के नंबर प्लेट और अन्य विवरण के आधार पर युवकों की पहचान की जा रही है। जल्द ही इनके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं में खतरनाक ड्राइविंग, ट्रैफिक नियम उल्लंघन और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस का कहना है कि ऐसे खतरनाक स्टंट को रोकने के लिए जागरूकता अभियान और सख्त निगरानी की आवश्यकता है। युवाओं को यह समझना होगा कि केवल सोशल मीडिया पर धमाकेदार वीडियो बनाने के लिए अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालना कानून और समाज दोनों के लिए गंभीर समस्या है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि तेज रफ्तार और खतरनाक स्टंट से होने वाले हादसे कभी कभी स्थायी चोट या मौत का कारण बन सकते हैं। ऐसे मामलों में ट्रैफिक नियमों का पालन करना अनिवार्य है और पुलिस को भी इन गतिविधियों पर सतत निगरानी बनाए रखनी चाहिए। ग्वालियर में ट्रैफिक सुरक्षा को लेकर हाल ही में कई बार चेतावनी जारी की जा चुकी है, लेकिन लोग अब भी नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं।

    पड़ाव थाना पुलिस ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस तरह के स्टंट को रोकने के लिए विशेष टीम बनाई जा सकती है। वायरल वीडियो ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियम पालन की आवश्यकता को सामने ला दिया है।

  • MP Assembly बजट सत्र 2026: आवारा कुत्तों के आतंक पर सदन में हंगामा, कांग्रेस विधायकों ने किया ध्यानाकर्षण

    MP Assembly बजट सत्र 2026: आवारा कुत्तों के आतंक पर सदन में हंगामा, कांग्रेस विधायकों ने किया ध्यानाकर्षण


    भोपाल । मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में आवारा कुत्तों के आतंक का मुद्दा गूंजा। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने सदन का ध्यानाकर्षण किया और कुत्तों के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई।

    2025 में भोपाल में 19 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए लेकिन लगातार करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद आवारा कुत्तों की संख्या घटने का नाम नहीं ले रही। सीएम मोहन यादव ने कहा कि नसबंदी की बात राष्ट्रीय स्तर तक जाएगी और आवारा श्वान सदियों से हमारे बीच रहे हैं। नगर निगम की टीम लगातार श्वानों की नसबंदी और एंटी-रैबीज टीकाकरण कर रही है।

    कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि डॉग्स लवर की वजह से कई निर्णय रुक गए और लोग कुत्तों के हमलों में मारे जा रहे हैं। वहीं राजन मंडलोई ने सदन में मांग की कि डॉग बाइट के कारण हुई मौतों के मुआवजे की जानकारी भी दी जाए।

    भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नसबंदी के लिए डॉक्टरों की संख्या कम है और सरकार दूसरे राज्यों से विशेषज्ञ बुलाएगी। उन्होंने लोगों को श्वानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास दिलाया। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने एंटी-रैबीज टीके की गुणवत्ता में कोई कमी न होने की पुष्टि की। सदन में इस मुद्दे पर मंथन और सुझाव लेने की प्रक्रिया जारी रहने की घोषणा की गई।

  • Bhopal: होटल में चल रहा था शादी समारोह.. अचानक भड़की आग, मची अफरा-तफरी

    Bhopal: होटल में चल रहा था शादी समारोह.. अचानक भड़की आग, मची अफरा-तफरी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के एक होटल (Hotel) में सोमवार रात को भीषण आग लग गई। बताया जाता है कि जिस समय यह घटना हुई उस वक्त शादी समारोह (Wedding Ceremony) चल रहा था। आग लगने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं और राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

    राजधानी भोपाल में शादी समारोह में लगी आग इतनी भयानक थी कि लपटें कई मीटर ऊंची उठती रहीं. शादी खजूरी थाना क्षेत्र के भौंरी स्थित एक होटल में हो रही थी. उस दौरान शादी समारोह में लगभग 170-200 लोग मौजूद थे और आग लगते ही लोग इधर-उधर भागने लगे. आग और भगदड़ के बीच शादी समारोह में रखे एक गैस सिलेंडर में ब्लास्ट (Cylinder Blast) हो गया. इससे और ज्यादा अफरा-तफरी मच गई. लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे. सूचना मिलने के बाद दमकल (Fire Department) और पुलिस (Bhopal Police) भी पहुंच गई. आग के दौरान होटल में कई लोग भी फंस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए जेसीबी मशीन बुलानी पड़ी. इससे दीवार तुड़वाकर रास्ता बनाया और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला.


    तीन फायर स्टेशनों से पहुंची गाड़ियां

    गांधीनगर, बैरागढ़ और फतेहगढ़ फायर स्टेशन से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया. लोगों का कहना है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी और देखते ही देखते लपटें करीब 50 फीट तक ऊपर उठने लगीं . हालांकि, आग लगने की स्पष्ट वजह नहीं पता चली है. पुलिस इसकी जांच कर रही है. करीब आधी रात तक मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया और रात में ही आग पूरी तरह बुझा दी गई. राहत की बात यह रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया।

    बता दें कि भोपाल में एक दिन पहले भी आग लगने की घटना हुई थी। भोपाल के इंटर स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) के सामने स्थित मेहता इंडस्ट्री के गोदाम में रविवार दोपहर पौने चार बजे आग लग गई थी। फैक्ट्री के पिछले हिस्से में बने गोदाम में रखे लकड़ी और प्लाईवुड के सामान ने आग पकड़ ली जिससे लपटें उठने लगीं। भोपाल में कल हुई आग की घटना की खबर मिलते ही नगर निगम की 12 दमकलें वहां पहुंच गईं और दो घंटे की मेहनत के बाद आग को बुझा दिया गया। फायर ब्रिगेड ने गोदाम के पीछे की टिन की दीवार काटकर पानी और झाग का छिड़काव किया। इस आग में गोदाम पूरी तरह जलकर राख हो गया है लेकिन अच्छी बात यह है कि किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई है।

    आग लगने के समय फैक्ट्री के पास वाली झुग्गी बस्ती के लोग घरों का सामान बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर चले गए। आग लगने का कारण अभी पता नहीं चल पाया है। फैक्ट्री मालिक अरुण जैन ने भी मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों से बात की। दमकल और पुलिस कर्मियों की सावधानी से बड़ी दुर्घटना टल गई। हालांकि गोदाम में रखा सामान पूरी तरह जल गया।

  • MP: शिवपुरी में वकील की हत्या के बाद अधिवक्ताओं में आक्रोश, कार्य का बहिष्कार कर सड़क पर उतरे

    MP: शिवपुरी में वकील की हत्या के बाद अधिवक्ताओं में आक्रोश, कार्य का बहिष्कार कर सड़क पर उतरे


    शिवपुरी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी जिले (Shivpuri district) में एडवोकेट संजय कुमार सक्सेना (Advocate Sanjay Kumar Saxena) की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या किए जाने से प्रदेश भर के अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है. इस घटना के विरोध में मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के आह्वान पर सोमवार को पूरे मध्य प्रदेश में वकील न्यायालयीन कार्य से विरत रहे और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को तत्काल लागू करने की मांग दोहराई है।

    दरअसल शिवपुरी में हुई इस सनसनीखेज वारदात के बाद प्रदेश का अधिवक्ता समुदाय एकजुट हो गया है. राज्य अधिवक्ता परिषद जबलपुर के आह्वान पर सोमवार को मध्यप्रदेश के सभी जिलों में वकील न्यायालयीन कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं. इसी कड़ी में इंदौर में जिला कोर्ट और हाईकोर्ट के अधिवक्ता भी अपने कार्य से विरक्त रहे. अधिवक्ताओं का कहना है कि वे पिछले बीस वर्षों से लगातार एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से केवल आश्वासन ही मिला है।

    इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष यादव ने कहा कि वर्ष 2012 से अब तक राज्य सरकार द्वारा अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू करने का आश्वासन दिया जाता रहा है, लेकिन इसे अमल में नहीं लाया गया. वकीलों का कहना है कि यदि जल्द ही एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.

  • MP: CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान…सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर स्थापित करेंगे 1.01 करोड़ का पुरस्कार

    MP: CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान…सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर स्थापित करेंगे 1.01 करोड़ का पुरस्कार


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने उज्जैन (Ujjain.) के शासक रहे सम्राट विक्रमादित्य (Emperor Vikramaditya) के नाम पर पुरस्कार देने की घोषणा की है। उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने इसकी घोषणा की। यादव ने कहा कि विक्रमादित्य का शासनकाल स्वर्ण युग के रूप में प्रसिद्ध है।

    मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन के शासक रहे सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1.01 करोड़ रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन के महान शासक की स्मृति में 21 लाख रुपए के राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार और 5-5 लाख रुपए के तीन राज्य स्तरीय पुरस्कारों की भी घोषणा की।


    उज्जैन में विक्रमोत्सव में की घोषणा

    सीएम यादव ने उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने और उनके शौर्य, न्याय तथा प्रजावत्सल आदर्शों को अमर बनाने के लिए उनकी स्मृति में एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतरराष्ट्रीय अलंकरण सम्मान शुरू किया जाएगा।


    सबसे बड़े धार्मिक आयोजन का पुरस्कार

    उन्होंने कहा कि यह देश का सबसे प्रतिष्ठित अलंकरण भारत की सांस्कृतिक गरिमा को विश्व मंच पर नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा। यादव ने कहा कि विक्रमोत्सव की ख्याति तेजी से बढ़ रही है और यह प्रसन्नता का विषय है कि विक्रमोत्सव को एशिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन का पुरस्कार मिला। ज्ञात हो कि विक्रमोत्सव-2025 को ईमैक्सम ग्लोबल अवार्ड द्वारा ‘लांगस्टैडिंग आईपी ऑफ द इयर’ से सम्मानित किया गया है।


    विक्रमादित्य का शासनकाल स्वर्ण युग

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष और आने वाले समय में भी विक्रमोत्सव अपनी उत्सवधर्मी सांस्कृतिक पहचान को दुनिया में स्थापित करेगा। यादव ने कहा कि विक्रमादित्य का शासनकाल दुनिया भर में शिक्षा, विज्ञान, ज्योतिष और साहित्य के स्वर्ण युग के रूप में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि विक्रम संवत और भारतीय कैलेंडर हमारी वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक समृद्धि के गौरवशाली प्रतीक हैं। उज्जैन का सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजन, विक्रमोत्सव, हमारी परंपराओं को सशक्त करेगा।


    उज्जैन पृथ्वी का नाभि स्थल

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन पृथ्वी का नाभि स्थल कहा जाता है और सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इसे सनातन के विश्वास का केंद्र भी बनाती है। उन्होंने कहा कि इसी दिव्य परंपरा को अधिक भव्य व्यवस्थित और श्रद्धालु केंद्रित बनाने के लिए सिंहस्थ की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।


    शिप्रा नदी में 30 किमी घाटों की व्यवस्था

    उन्होंने कहा कि उज्जैन तथा आसपास के क्षेत्रों में विकास के कार्य तेजी से जारी हैं। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए उज्जैन के आसपास ‘फोर लेन’ और ‘सिक्स लेन’ सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। शिप्रा नदी में स्नान के लिए 30 किमी घाटों की व्यवस्था की गई है। इसे निर्मल और अविरल बनाए रखने के लिए व्यवस्थित कार्य योजना प्रगति पर है।