Category: Madhya Pradesh

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण


    भोपाल। गुरूवार, 29 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ की जयंती पर उनका पुण्य स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रो. रज्जू भैया का प्रखर व्यक्तित्व, उनके विचार और कृतित्व हमेशा राष्ट्रसेवकों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उन्होंने विशेष रूप से रज्जू भैया की मां भारती और राष्ट्र की सेवा में समर्पित जीवन की सराहना की और कहा कि उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करेंगे।

    मुख्यमंत्री के इस स्मरण ने राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के क्षेत्र में रज्जू भैया की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। उनकी जयंती पर देशभर में उनके योगदान और विचारों को याद किया जा रहा है।

  • विदिशा:लव जिहाद, धर्मांतरण और तीन तलाक का सनसनीखेज मामला सामने आया

    विदिशा:लव जिहाद, धर्मांतरण और तीन तलाक का सनसनीखेज मामला सामने आया


    विदिशा। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में एक बार फिर लव जिहाद और धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है। आरोपी सलीम खान पर आरोप है कि उसने पहले एक हिंदू युवती से दोस्ती की, भावनात्मक रूप से करीब आया और फिर शादी कर उसे जबरन इस्लाम कबूल करवाया।

    युवती ने शिकायत में बताया कि शादी के बाद वह एक बच्चे की मां बनी, लेकिन आरोपी ने किसी अन्य युवती से दूसरी शादी कर ली।

    साथ ही, युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी उसे प्रताड़ित करता रहा और तीन बार तलाक बोलकर छोड़ दिया।

    इसके अलावा, युवती ने यह भी आरोप लगाया कि काजी ने उसे हलाला कराने का प्रयास किया, जो विवादास्पद धार्मिक प्रथा है।

    पुलिस कार्रवाई: कोतवाली थाना में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत चौबे ने बताया कि जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है और आरोपी की तलाश जारी है।

    विदिशा जिले से आने वाले इस मामले ने एक बार फिर लव जिहाद और धर्मांतरण के मुद्दे पर बहस तेज कर दी है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई और जांच लगातार जारी है।

  • राज्य शिक्षा केन्द्र ने घोषित किए जिला स्तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड के परिणाम, 1–20 फरवरी तक विजेताओं का होगा सम्मान

    राज्य शिक्षा केन्द्र ने घोषित किए जिला स्तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड के परिणाम, 1–20 फरवरी तक विजेताओं का होगा सम्मान


    भोपाल । मध्यप्रदेश के समस्त शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 2 से 8 के विद्यार्थियों के लिए आयोजित जिला स्तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड के परिणाम राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा घोषित कर दिए गए हैं। इस ओलम्पियाड का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, बौद्धिक विकास और शैक्षिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना रहा।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रत्येक जिले से प्रत्येक विषय और प्रत्येक कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को जिला विजेता घोषित किया गया है। कुल मिलाकर प्रत्येक जिले से 32 विद्यार्थियों को जिला स्तरीय विजेता के रूप में चयनित किया गया है। इनके मार्गदर्शक शिक्षक भी इस अवसर पर सम्मानित होंगे।

    जिला स्तर पर विजेताओं के सम्मान समारोह का आयोजन 1 से 20 फरवरी 2026 के बीच किया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। इस आयोजन से शैक्षिक प्रतिभाओं को पहचान मिलने के साथ-साथ उन्हें प्रेरणा भी मिलेगी।

    उल्लेखनीय है कि शैक्षिक ओलम्पियाड की जिला स्तरीय परीक्षाएं 16 एवं 17 जनवरी 2026 को प्रदेश के सभी विकासखंडों में संपन्न हुई थीं। इस प्रतियोगिता में लगभग 2 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था। राज्य शिक्षा केन्द्र ने इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों में ज्ञान, तार्किक क्षमता और सृजनात्मक सोच को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

  • MP में लाइनमैन की जिज्ञासा बनी जानलेवा, बंदूक चलाते समय लगी गोली, गंभीर हालत में इंदौर रेफर

    MP में लाइनमैन की जिज्ञासा बनी जानलेवा, बंदूक चलाते समय लगी गोली, गंभीर हालत में इंदौर रेफर


    राजगढ़।  एक मामूली जिज्ञासा भारी पड़ गई जब पचोर में स्थित एक बिजली कंपनी के कार्यालय में लाइनमैन ने बंदूक कैसे चलती है यह देखना चाहा और हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, कंपनी के गार्ड भगवानसिंह दांगी, जो कि कांकरिया थाना छापीहेड़ा के निवासी हैं, के पास 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक थी। उसी कार्यालय में दो लाइनमैन, रामबाबू परमार (सूरजखेड़ी थाना करनवास) और अजय बैरागी (नरसिंहगढ़ निवासी), जो गार्ड के मित्र भी हैं, कार्यरत थे।

    हादसे के दिन, लाइनमैन ने मजाक-मजाक में बंदूक के काम करने का तरीका देखना चाहा। इसी दौरान बंदूक से अचानक गोली निकल गई और रामबाबू परमार के दाहिने हाथ की कोहनी में जाकर लगी। गोली लगते ही वह बुरी तरह से घायल हो गया। तुरंत मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने उसे पचोर अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे इंदौर रेफर कर दिया गया।

    पुलिस ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि यह हादसा किसी आपसी विवाद या बदइच्छा से नहीं, बल्कि जिज्ञासा और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण हुआ। घटना ने यह साफ कर दिया कि लाइसेंसी बंदूक भी सही सुरक्षा उपाय और प्रशिक्षण के बिना कितना खतरनाक साबित हो सकती है।

    स्थानीय अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और कंपनी प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सभी कर्मचारियों को हथियारों के सही उपयोग और सुरक्षा नियमों का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाए। इसके साथ ही कार्यालय में बंदूकों को सुरक्षित स्थान पर रखने और अनुचित प्रयोग पर रोक लगाने की भी चेतावनी दी गई है।

    हादसे के बाद रामबाबू परमार की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि उसे लंबी अवधि तक फिजियोथेरेपी और देखभाल की आवश्यकता हो सकती है। यह घटना न सिर्फ पचोर बल्कि पूरे राजगढ़ जिले के लिए चेतावनी बनकर आई है कि हथियारों के प्रति लापरवाही कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है।

    इस घटना ने स्थानीय लोगों और कर्मचारियों को यह याद दिलाया कि सुरक्षा नियमों का पालन करना किसी भी परिस्थिति में अनिवार्य है, चाहे मामला मजाक का ही क्यों न हो। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि हादसे की पूरी जांच की जाएगी और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

    इस पूरे मामले ने सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और हथियारों के सुरक्षित उपयोग की आवश्यकता को फिर से सबके सामने रखा है।

  • फिर खुली इंदौर की 'सोनम फाइल्स', राजा रघुवंशी हत्याकांड का रहस्य हुआ उजागर

    फिर खुली इंदौर की 'सोनम फाइल्स', राजा रघुवंशी हत्याकांड का रहस्य हुआ उजागर



    इंदौर। इंदौर का बहुचर्चित सोनम रघुवंशी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में इस केस पर आधारित एक वेब सीरीज रिलीज हुई है, जिसने केवल अपराध की क्रूरता को ही नहीं दिखाया, बल्कि उन पहलुओं को भी सामने लाया, जो लंबे समय तक पुलिस फाइलों में दबे हुए थे। इस केस ने ना सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया था।

    राजा रघुवंशी अपने जीवन के सबसे खूबसूरत पल शादी और हनीमून के लिए शिलांग गए थे।

    लेकिन नियति ने उनके इस हसीन सफर को मौत और धोखे का साया बना दिया। वेब सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे शादी और हनीमून की खुशियों के बीच एक सुनियोजित हत्या की साजिश रची गई।

    साल 2025 में हुए इस हादसे ने पूरे इंदौर को स्तब्ध कर दिया था। राजा रघुवंशी की हत्या के पीछे की साजिश और हत्यारे के मानसिक पक्ष पर अब तक बहुत कम प्रकाश डाला गया था। वेब सीरीज ने इसे ‘डिकोड’ करते हुए दिखाया है कि हत्यारे ने किस तरह से योजना बनाई और घटना को अंजाम दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस की खासियत इसके सतह के पीछे की रणनीति और मानसिक चालाकी में है।

    हत्यारे ने इतना सावधानीपूर्वक कदम उठाया कि शुरुआती जांच में कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाए। पुलिस ने भी शुरुआती जांच में कई बाधाओं का सामना किया। लेकिन अब, नई जानकारी और वेब सीरीज के माध्यम से जनता के सामने यह सब खुलकर आया है।

    वेब सीरीज दर्शकों को राजा रघुवंशी के अंतिम दिनों की भावनात्मक यात्रा, हनीमून के दौरान घटित घटनाओं और हत्या के पीछे की साजिश को विस्तार से दिखाती है। इसमें यह भी बताया गया है कि किस तरह हत्या के बाद हत्यारे ने अपने कदमों को छुपाने की कोशिश की। इसके साथ ही, कई ऐसे तथ्य उजागर किए गए हैं, जो पहले सार्वजनिक नहीं किए गए थे।

    पुलिस और फॉरेंसिक टीम की जांच भी इस केस की जटिलता को दर्शाती है। रिपोर्टों में यह सामने आया कि हत्या सुनियोजित और प्लान्ड थी।

    हत्यारे की मानसिक स्थिति, योजना की बारीकियां और अपराध की गहनता को समझना ही इस केस की सबसे बड़ी चुनौती थी।

    इंदौर के लोग अब भी इस क्राइम ड्रामा को लेकर चर्चा कर रहे हैं। केस की सच्चाई और वेब सीरीज में दिखाई गई घटनाओं के बीच तुलना करने के लिए कई दर्शक इसे देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वेब सीरीज न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि यह लोगों को अपराध की मनोरोग मानसिकता और जटिलताओं के बारे में जागरूक भी करती हैं।

    इस केस ने साबित किया कि प्यार, धोखा और मौत कभी-कभी एक ही सफर में साथ चल सकते हैं। राजा रघुवंशी हत्याकांड ने यह संदेश दिया कि अपराध का मनोवैज्ञानिक पहलू समझना उतना ही जरूरी है जितना कि अपराध की तकनीकी जांच।

    अब सवाल यह उठता है कि क्या इस केस में हत्यारे के सभी रहस्य उजागर हो पाए हैं? या फिर पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के दौरान कुछ और राज खुलेंगे। इंदौर की जनता और पूरे देश की नजरें इस केस और वेब सीरीज पर बनी हुई हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 जनवरी को करेंगे राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 जनवरी को करेंगे राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का शुभारंभ


    भोपाल । कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अवसर पर राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार, 30 जनवरी को दोपहर 3 बजे शासकीय गुलाब उद्यान, लिंक रोड क्रमांक-1, भोपाल में इस प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। प्रदर्शनी का आयोजन उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग और मध्यप्रदेश रोज़ सोसायटी के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य राज्य में पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देना और उद्यानिकी गतिविधियों में नई प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित करना है।

    प्रदर्शनी में विभिन्न प्रकार के फूलों की विस्तृत रेंज को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें स्थानीय और विदेशी प्रजातियों के गुलाब, गेंदा, सूरजमुखी, और अन्य सजावटी पौधे शामिल होंगे। इसके अलावा, प्रदर्शनी में फूलों की खेती, कटिंग, पौधरोपण तकनीक और उद्यानिकी से जुड़े नवाचारों के स्टाल भी लगेंगे।

    इस प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों और उद्यानिक प्रेमियों को फूलों की खेती और उनके व्यवसायिक अवसरों के बारे में जानकारी दी जाएगी। आयोजकों का कहना है कि यह पहल उद्यानिकी क्षेत्र को न सिर्फ रोजगार के अवसर प्रदान करेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी योगदान देगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मौके पर पौधरोपण करेंगे और प्रदर्शनी के प्रमुख स्टालों का अवलोकन करेंगे। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस प्रदर्शनी में आएं और पुष्प उत्पादन की महत्वता को समझें।

  • ग्वालियर: कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर युवती से दरिंदगी, शादी का झांसा देकर साल भर तक किया शोषण

    ग्वालियर: कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर युवती से दरिंदगी, शादी का झांसा देकर साल भर तक किया शोषण


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के घाटीगांव क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां एक युवक ने अपनी ही दूर की रिश्तेदार युवती को नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर हवस का शिकार बनाया। आरोपी यहीं नहीं रुका, बल्कि उसने शादी के ‘रंगीन सपने’ दिखाकर करीब एक साल तक युवती का शारीरिक शोषण किया। जब पीड़िता ने शादी के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी ने न केवल इनकार कर दिया बल्कि उसे जान से मारने की धमकी भी दी।

    दोस्त के जन्मदिन के बहाने ले गया खेत

    पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, 21 वर्षीय पीड़िता घाटीगांव क्षेत्र की रहने वाली है। उसकी पहचान आरोन निवासी रामनिवास बंजारा से थी, जो रिश्ते में उसका दूर का भाई लगता था। जनवरी 2025 की घटना: आरोपी ने दोस्त के जन्मदिन का बहाना बनाकर युवती को साथ घूमने चलने के लिए राजी किया। भरोसे में आकर युवती उसकी बाइक पर बैठकर चली गई। नशीली कोल्ड ड्रिंक आरोपी उसे गांव से दूर एक सुनसान खेत में बनी झोपड़ी में ले गया। वहां उसने युवती को कोल्ड ड्रिंक पिलाई, जिसमें नशीला पदार्थ मिला था। युवती के बेहोश होते ही आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

    शादी का झांसा और सीक्रेट मोबाइल

    होश आने पर जब युवती ने विरोध किया, तो रामनिवास ने शादी का वादा कर उसे शांत करा दिया। आरोपी ने युवती को अपने जाल में फंसाए रखने के लिए एक अलग मोबाइल और सिम कार्ड भी दिया था, ताकि वे गुप्त रूप से बात कर सकें। जब भी युवती के माता-पिता घर से बाहर होते, आरोपी वहां पहुंचकर उसका शोषण करता रहा। यह सिलसिला करीब एक साल तक चलता रहा।

    धमकी मिलने पर खुला राज

    हाल ही में जब पीड़िता और उसके परिजनों ने रामनिवास पर शादी का दबाव बनाया, तो उसने अपना असली रंग दिखा दिया। आरोपी ने शादी से साफ इनकार करते हुए युवती को धमकी दी कि अगर उसने इस बारे में किसी को बताया या दोबारा फोन किया, तो वह उसे जान से मार देगा। डरी-सहमी पीड़िता ने आखिरकार हिम्मत जुटाई और परिजनों के साथ थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई।

    पुलिस की कार्रवाई

    घाटीगांव थाना पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी रामनिवास बंजारा के खिलाफ दुष्कर्म  और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।

  • इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: अध्यक्ष के लिए रोमांचक मुकाबला, उपाध्यक्ष और सह सचिव पद पर बड़ी जीत

    इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: अध्यक्ष के लिए रोमांचक मुकाबला, उपाध्यक्ष और सह सचिव पद पर बड़ी जीत


    इंदौर । इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव परिणाम बुधवार देर रात घोषित किए गए। लंबे और रोमांचक मुकाबले के बाद अध्यक्ष पद पर मनीष यादव विजयी हुए। उपाध्यक्ष, सचिव और सह सचिव पदों पर भी नवनिर्वाचितों ने अपने मजबूत प्रदर्शन से जीत दर्ज की। चुनाव में कुल 1914 मतदाता शामिल हुए।

    अध्यक्ष पद का मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा। शुरुआत में गौरव श्रीवास्तव आगे चल रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, मनीष यादव ने 17वें राउंड में बढ़त बना ली और 20वें राउंड तक उसे बनाए रखा। अंततः मनीष यादव 512 वोटों के साथ 20 वोटों के अंतर से जीत गए। गौरव श्रीवास्तव को 492 वोट मिले। अन्य प्रत्याशियों में जीपी सिंह को 406, मनीष जैन को 282 और पवन जोशी को 95 मत मिले।

    उपाध्यक्ष पद पर अभिषेक तुगनावत ने शुरुआत से ही स्पष्ट बढ़त बनाए रखी और एकतरफा जीत दर्ज की। उन्हें 858 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी अपूर्वा शुक्ला को 311, धर्मेंद्र साहू को 232, मधुसूदन यादव को 216 और भावना साहू को 162 वोट ही मिले।

    सचिव पद के चुनाव में तीन प्रमुख प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर रही। मतों की बार-बार अदला-बदली के बीच मनीष गडकर 652 वोट लेकर विजयी हुए। उनके प्रतिद्वंद्वी गोविंद राय को 582 और निलेश मनोरे को 533 मत प्राप्त हुए। सह सचिव पद पर अमित राज ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की। उन्हें 1027 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ज्ञानेंद्र शर्मा को 739 वोट ही मिल सके। एग्जीक्यूटिव मेंबर के रूप में राहुल पांचाल, तेजस जैन, अमन मालवीय, रश्मेंद्र सूर्यवंशी और अर्निक जैन चुने गए।

    परिणाम घोषित होते ही बार परिसर में समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने कहा कि वे अधिवक्ताओं की समस्याओं, सुविधाओं और हाईकोर्ट परिसर से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से उठाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज द्विवेदी और मीडिया प्रभारी अजय मिश्रा के अनुसार, मतदान सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक हुआ। इसके बाद शाम 7 बजे से मतगणना शुरू हुई, जो देर रात करीब 1 बजे तक चली। इस चुनाव ने बार एसोसिएशन में नई ऊर्जा और उत्साह पैदा कर दिया है।

  • आयुष्मान योजना पर बड़ा फैसला: निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

    आयुष्मान योजना पर बड़ा फैसला: निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को लेकर दायर की गई जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में साफ कहा कि राज्य सरकार का यह कदम आम जनता को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन निजी अस्पतालों को इंपैनलमेंट या नवीनीकरण की शर्तों से कोई आपत्ति है, वे स्वयं अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं, लेकिन जनहित याचिका के माध्यम से इस प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी जा सकती।

    यह याचिका जबलपुर निवासी देवेंद्र दत्त द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आयुष्मान योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट के लिए नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स NABH  सर्टिफिकेट को अनिवार्य किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 23 सितंबर और 10 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश छोटे और मध्यम स्तर के निजी अस्पतालों के हितों के खिलाफ हैं। याचिका में कहा गया था कि NABH सर्टिफिकेट की शर्तें जटिल और खर्चीली हैं, जिससे छोटे अस्पताल योजना से बाहर हो सकते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच प्रभावित होगी।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। ऐसे में यह आवश्यक है कि योजना से जुड़े अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के मानक सुनिश्चित किए जाएं। NABH सर्टिफिकेशन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे अस्पतालों की सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन किया जा सकता है।

    कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार को यह अधिकार है कि वह अपनी योजनाओं के लिए आवश्यक मानक तय करे। यदि किसी निजी अस्पताल को लगता है कि ये शर्तें उसके लिए अनुचित हैं या उसके अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, तो वह व्यक्तिगत रूप से अदालत में याचिका दायर कर सकता है। लेकिन जनहित याचिका के माध्यम से पूरी नीति को चुनौती देना उचित नहीं है।

    इस फैसले को राज्य सरकार के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि आयुष्मान योजना में केवल उन्हीं अस्पतालों को शामिल किया जाना चाहिए, जो मरीजों को सुरक्षित, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं देने में सक्षम हों। NABH सर्टिफिकेशन को इसी दिशा में गुणवत्ता सुनिश्चित करने का एक मानक माना जा रहा है।

    वहीं, निजी अस्पतालों के एक वर्ग का मानना है कि NABH सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया महंगी और समय लेने वाली है, जिससे छोटे अस्पतालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब ऐसे अस्पतालों को या तो तय मानकों को पूरा करना होगा या फिर व्यक्तिगत स्तर पर कानूनी विकल्प तलाशने होंगे।

    कुल मिलाकर, हाईकोर्ट का यह निर्णय आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे योजना के लाभार्थियों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

  • शहडोल में बीज भंडार में भीषण आगजनी: लाखों का धान जलकर खाक, हादसा या लापरवाही? भंडारण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

    शहडोल में बीज भंडार में भीषण आगजनी: लाखों का धान जलकर खाक, हादसा या लापरवाही? भंडारण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल


    शहडोल । जिले में किसानों की मेहनत और सरकारी व्यवस्था पर उस वक्त बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत नर्सरहा स्थित बीज भंडार के धान गोदाम में भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही देर में गोदाम में रखा लाखों रुपये मूल्य का धान जलकर पूरी तरह खाक हो गया। धुएं के घने गुबार और उठती लपटों ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना दिया, वहीं किसानों और स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और आक्रोश भी देखने को मिला।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार को अचानक गोदाम से धुआं उठता दिखाई दिया और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते धान से भरी बोरियां आग की चपेट में आ गईं। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन तब तक गोदाम में रखा अधिकांश धान नष्ट हो चुका था।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर, एसडीएम सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल आग लगने का कारण अज्ञात बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से आग तेजी से फैली, उसने कई तरह के संदेह पैदा कर दिए हैं।

    इस घटना ने जिले की धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में शहडोल जिले में धान खरीदी को लेकर कई गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ दिन पहले ही धान की बोरियों से पत्थर और कंकड़ निकलने का मामला उजागर हुआ था, जिसने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया था। अब बीज भंडार में आग लगने की इस घटना ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

    स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि यदि यह हादसा है तो सुरक्षा इंतजामों में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, और यदि यह लापरवाही या किसी साजिश का नतीजा है तो इसके पीछे जिम्मेदार कौन है किसानों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि जलकर नष्ट हुआ धान आखिर किसका था और इसका असर उनकी भुगतान प्रक्रिया पर तो नहीं पड़ेगा।

    प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगजनी के कारणों की हर पहलू से जांच की जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने न केवल सरकारी भंडारण व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि किसानों के भरोसे को भी गहरी ठेस पहुंचाई है।