Category: Madhya Pradesh

  • धार की भोजशाला में आस्था का संगम: बसंत पंचमी पर अखंड पूजन और जुमे की नमाज के बीच सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम

    धार की भोजशाला में आस्था का संगम: बसंत पंचमी पर अखंड पूजन और जुमे की नमाज के बीच सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम


    धार । मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले धार जिले में आज बसंत पंचमी के पावन पर्व पर एक अनूठा और संवेदनशील दृश्य देखने को मिल रहा है। मां वाग्देवी (सरस्वती) की आराधना और धार्मिक सद्भाव की चुनौती के बीच, भोजशाला परिसर में सूर्योदय के साथ ही हिंदू पक्ष द्वारा अखंड पूजा का अनुष्ठान प्रारंभ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के पालन में प्रशासन ने एक ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की है, जहां एक ओर मंत्रोच्चार की गूंज है, तो दूसरी ओर नमाज की शांतिपूर्ण अदायगी के लिए समय निर्धारित किया गया है।

    सूर्योदय की पहली किरण के साथ ही हिंदू समुदाय के श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष शीश नवाया। गुरुवार रात से ही भोजशाला में उत्सव का माहौल बन गया था, जब पूरी श्रद्धा के साथ मां वाग्देवी के चित्र को परिसर के भीतर स्थापित किया गया। आज सुबह से ही यहां महाआरती, धर्मसभा और भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जा रहा है, जो सूर्यास्त तक अनवरत जारी रहेगा। श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है और पूरा क्षेत्र ‘जय सरस्वती माता’ के उद्घोष से गुंजायमान है।

    हालांकि, आज शुक्रवार होने के कारण स्थिति अधिक संवेदनशील है। न्यायिक निर्देशों के तहत, हिंदू समुदाय की अखंड पूजा के बीच ही दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मुस्लिम पक्ष को जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। इसके लिए प्रशासन ने परिसर के भीतर एक निश्चित स्थान और सीमित संख्या तय की है। नमाजियों और पूजा करने वालों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं, ताकि दोनों पक्षों के बीच किसी भी प्रकार का टकराव न हो और दोनों अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वाह बिना किसी व्यवधान के कर सकें।

    इस दोहरे आयोजन को देखते हुए धार शहर को पूरी तरह से एक अभेद्य छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा की कमान किसी किलेबंदी से कम नहीं है, जहां 8000 से अधिक पुलिसकर्मी चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं। सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 13 एसपी रेंज के अधिकारियों के साथ 25 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 67 एसडीओपी और 107 नगर निरीक्षकों की फौज तैनात है। इसके अतिरिक्त, आरएएफ की 8 प्लाटून और सीआरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाल रखा है। महिला पुलिसकर्मियों की भी भारी तैनाती की गई है ताकि भीड़ नियंत्रण में कोई चूक न हो।

    प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अक्षरशः पालन करा रहे हैं। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। धार की यह धरा आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और आपसी समन्वय की एक बड़ी परीक्षा का केंद्र बनी हुई है। शाम तक चलने वाले इस अखंड पूजन और नमाज के शांतिपूर्ण समापन को लेकर पूरा प्रशासन मुस्तैद है, ताकि भोजशाला की ऐतिहासिक गरिमा और सामाजिक समरसता अक्षुण्ण बनी रहे।

  • भोपाल में एक बाइक पर सात युवक सवार: गौहर महल के पास वीडियो वायरल, कार्रवाई की मांग तेज

    भोपाल में एक बाइक पर सात युवक सवार: गौहर महल के पास वीडियो वायरल, कार्रवाई की मांग तेज


    भोपाल । भोपाल में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक स्प्लेंडर बाइक पर सात युवक सवार दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो वीआईपी रोड स्थित गौहर महल क्षेत्र का बताया जा रहा है, जो रेतघाट इलाके के निकट आता है। वीडियो में दिख रहे अधिकांश युवक नाबालिग बताए जा रहे हैं, लेकिन इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

    वायरल क्लिप 21 जनवरी की बताई जा रही है और इसकी लंबाई केवल 12 सेकंड है। इसमें साफ देखा जा सकता है कि एक ही दोपहिया वाहन पर सात युवक सफर कर रहे हैं, जो सामान्य यातायात नियमों के खिलाफ है। इतना ही नहीं, इस तरह की हरकतों से न केवल सवारों की जान खतरे में होती है, बल्कि सड़क पर मौजूद अन्य लोगों के लिए भी यह बेहद जोखिम भरा है।

    इससे पहले भी ग्वालियर से इसी तरह का वीडियो सामने आ चुका है, जिसमें सात नाबालिगों ने एक बाइक पर खतरनाक स्टंट किए थे।

    ग्वालियर वीडियो में नाबालिग तेज रफ्तार में बाइक चला रहे थे और यह घटना सोमवार रात की बताई गई थी, जबकि वीडियो मंगलवार सुबह वायरल हुआ था।

    भोपाल के वायरल वीडियो को लेकर लोगों में गुस्सा और चिंता दोनों बढ़ रही है। सोशल मीडिया यूजर्स ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है और सवाल उठाए हैं कि आखिर कैसे इतनी संख्या में युवक बिना किसी रोक-टोक के सड़क पर ऐसे खतरनाक प्रयोग कर रहे हैं।

    किसी भी तरह की पुष्टि नहीं, फिर भी खतरा बढ़ता जा रहा
    हालांकि वीडियो की सत्यता और सटीक तारीख की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, फिर भी यह घटना युवा सुरक्षा, ट्रैफिक नियमों और सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • भोपाल में खाद्य भवन निर्माण के लिए 150 पेड़ कटेंगे, विरोध में कर्मचारी-पर्यावरणविद् ने किया 'चिपको आंदोलन'

    भोपाल में खाद्य भवन निर्माण के लिए 150 पेड़ कटेंगे, विरोध में कर्मचारी-पर्यावरणविद् ने किया 'चिपको आंदोलन'


    भोपाल । भोपाल में अब एक बार फिर पेड़ कटाने का विवाद उभर आया है। अयोध्या बायपास और रत्नागिरी के बाद अब एमपी नगर में खाद्य भवन निर्माण के लिए लगभग 150 पेड़ काटे जाने की तैयारी है। ये पेड़ करीब 50 साल पुराने हैं और स्थानीय पर्यावरणविद्, कर्मचारी और आम नागरिक इस कदम के विरोध में हैं। गुरुवार को कर्मचारियों ने पेड़ों से चिपककर ‘चिपको आंदोलन’ किया और खुले तौर पर पेड़ कटाने का विरोध जताया।
    इस आंदोलन में कई महिला कर्मचारी भी हाथों में तख्तियां लेकर शामिल हुईं।

    जानकारी के अनुसार, वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन ने 64 करोड़ रुपए के बजट से सभी दफ्तरों को एक जगह शिफ्ट करने के लिए नए 6 मंजिला भवन का प्रस्ताव तैयार किया है। इस भवन का निर्माण एमपी नगर स्थित नाप-तौल नियंत्रक कार्यालय की जमीन पर होना है। अनुमान है कि सभी सुविधाओं सहित इस परियोजना पर 90 से 100 करोड़ रुपए तक खर्च आएगा। यह विवाद इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि वेयर हाउसिंग, खाद्य संचालनालय और नाप-तौल विभाग के अपने भवन हैं, जबकि केवल नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) ही किराए के दफ्तर में संचालित हो रहा है।

    वर्तमान में इसी जगह पर नाप-तौल मुख्यालय स्थित है। संभागीय और जिला कार्यालय पहले ही जेके रोड पर स्थानांतरित कर दिए गए हैं। यह पुरानी बिल्डिंग लगभग 50 साल पुरानी है, लेकिन अभी भी अच्छी स्थिति में है। नाप-तौल विभाग ने भी लगभग तीन महीने पहले पास में ही जमीन शासन से मांगी थी, जिससे यह सवाल उठता है कि नए भवन के लिए पेड़ काटना क्यों जरूरी है।

    वहीं दूसरी ओर, विध्यांचल भवन में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का संचालनालय है, जबकि वेयर हाउसिंग की अपनी बड़ी बिल्डिंग गौतम नगर में मौजूद है।

    यानी विभाग के पास पहले से ही भवन और सुविधाएँ हैं, फिर भी नए 6 मंजिला भवन का प्रस्ताव क्यों बनाया जा रहा है, यह विवाद का मुख्य मुद्दा बन रहा है।

    इस मामले में विरोध तेज होने पर अब उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस घटना की जांच के लिए कदम उठाया है। सरकार ने ADG (मेरठ जोन) भानु भास्कर की अध्यक्षता में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जिसे 5 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मांडविया 27 जनवरी को करेंगे खेलो एमपी यूथ गेम्स का भव्य शुभारंभ

    मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मांडविया 27 जनवरी को करेंगे खेलो एमपी यूथ गेम्स का भव्य शुभारंभ


    भोपाल।भोपाल में 27 जनवरी 2026 की शाम खेल और युवा ऊर्जा का भव्य उत्सव देखने को मिलेगा। खेलो एमपी यूथ गेम्स की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा किया जाएगा। यह भव्य समारोह शाम 6:30 बजे से टीटी नगर स्टेडियम में आयोजित होगा, जिसमें खेलों की थीम पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और देश के जाने-माने पार्श्व गायक कैलाश खेर की विशेष प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहेगी।

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि खेलो एमपी यूथ गेम्स की तैयारी व्यापक स्तर पर की गई है। प्रदेश में ब्लॉक स्तर की प्रतियोगिताएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं, जबकि जिला और संभाग स्तरीय मुकाबले प्रगति पर हैं, जो 25 जनवरी 2026 तक संपन्न हो जाएंगे। इसके बाद राज्य स्तर पर प्रदेश के 10 संभागों की टीमें प्रतिस्पर्धा में उतरेंगी।मंत्री श्री सारंग ने बताया कि शुभारंभ समारोह को पूरी तरह खेलों की भावना और युवा उत्साह पर आधारित रखा गया है। कैलाश खेर की संगीतमय प्रस्तुति के साथ-साथ इंडियाज़ गॉट टैलेंट फेम डांस ट्रूप द्वारा ऊर्जावान नृत्य, खेलों के इतिहास पर आधारित नृत्य-नाटिका और भव्य आतिशबाजी आयोजन को यादगार बनाएगी। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम खेल, संस्कृति और युवा शक्ति का जीवंत संगम होगा।

    खेलो एमपी यूथ गेम्स की एक बड़ी विशेषता यह है कि देश में पहली बार खेल विभाग और सभी मान्यता प्राप्त खेल संघों के समन्वय से इतने बड़े स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि इस मॉडल से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आए हैं। यह प्रयोग भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में मध्यप्रदेश का अहम कदम माना जा रहा है।खिलाड़ियों के चयन और सहभागिता को पारदर्शी बनाने के लिए डैशबोर्ड आधारित ऑनलाइन पंजीयन प्रणाली अपनाई गई है। अब तक एक लाख से अधिक खिलाड़ी पंजीकरण करा चुके हैं। पंजीयन से लेकर परिणामों तक की पूरी प्रक्रिया रीयल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए की जा रही है।

    राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं 31 जनवरी 2026 तक चलेंगी, जिनमें कुल 28 खेल शामिल हैं। खेलों का आयोजन प्रदेश के विभिन्न शहरों-भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, शिवपुरी, ग्वालियर, सागर और नर्मदापुरम-में उनकी स्थानीय परंपरा और लोकप्रियता के अनुसार किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार पिट्टू और रस्साकशी जैसे पारंपरिक खेलों के साथ-साथ क्रिकेट और थ्रोबॉल को भी विशेष स्थान दिया गया है।मंत्री श्री सारंग ने कहा कि खेलो एमपी यूथ गेम्स प्रदेश के युवाओं को प्रतिभा दिखाने का सशक्त मंच प्रदान कर रहे हैं और यह आयोजन मध्यप्रदेश को खेलों के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

  • लोकतंत्र के पर्व पर सौगात: 25 जनवरी से आम जनता के लिए खुलेगा 'लोकभवन', जानिए समय और प्रवेश की पूरी प्रक्रिया

    लोकतंत्र के पर्व पर सौगात: 25 जनवरी से आम जनता के लिए खुलेगा 'लोकभवन', जानिए समय और प्रवेश की पूरी प्रक्रिया


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोकतंत्र के महापर्व गणतंत्र दिवस को खास बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार ऐतिहासिक ‘लोकभवन’ के द्वार आगामी 25 जनवरी से आम नागरिकों के लिए खोल दिए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य जनता को प्रदेश की लोकतांत्रिक और प्रशासनिक विरासत से रूबरू कराना है। नागरिक 25 जनवरी से लेकर 27 जनवरी 2026 तक निर्धारित समयावधि में भवन परिसर का भ्रमण कर सकेंगे और इसकी भव्यता का अवलोकन कर सकेंगे।

    भ्रमण का समय और प्रवेश व्यवस्था राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि आम जनता की सुविधा के लिए अलग-अलग समय तय किए गए हैं। 25 जनवरी और 27 जनवरी 2026 को लोकभवन दोपहर 2:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक खुला रहेगा। वहीं 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मुख्य पर्व पर भ्रमण का समय सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक रखा गया है।भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रवेश और निकास के लिए स्पष्ट मार्ग निर्धारित किए गए हैं। आगंतुकों के लिए प्रवेश गेट क्रमांक-1 से होगा जबकि भ्रमण के पश्चात निकास गेट क्रमांक-4 से सुनिश्चित किया गया है। वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मिंटो हॉल परिसर में की गई है ताकि यातायात बाधित न हो।

    आकर्षण का केंद्र: विशेष प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम लोकभवन का यह भ्रमण केवल भवन देखने तक सीमित नहीं होगा बल्कि यहाँ आने वाले लोगों को ज्ञानवर्धक और मनोरंजक अनुभव भी मिलेगा। इस अवसर पर केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा “वीबी-जी रामजी योजना तथा वंदे भारत थीम” पर आधारित एक बेहद आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके साथ ही तीनों दिन केंद्रीय संचार ब्यूरो के सांस्कृतिक दलों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएंगी जो देशभक्ति के रंग में सराबोर होंगी।

    जनसंपर्क विभाग मध्यप्रदेश शासन द्वारा भी एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है जिसका विषय “राजभवन से लोकभवन” रखा गया है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से लोकभवन की ऐतिहासिकता इसकी लोकतांत्रिक महत्ता और प्रशासनिक यात्रा को बेहद रोचक ढंग से चित्रों और दस्तावेजों के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा। इतना ही नहीं आगंतुकों के लिए लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा जो प्रदेश के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालेंगी।राज्यपाल सचिवालय ने प्रदेश के नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और अपनी ऐतिहासिक विरासत को करीब से देखें। पूरे रूट पर सुरक्षा और जनसुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि नागरिक सुगमता से अवलोकन कर सकें।

  • मध्य प्रदेश: 10 दिन में 11 लाख वोटर्स को हटाने की साजिश? कांग्रेस का बड़ा आरोप, EC के दरवाज़े पर PCC चीफ

    मध्य प्रदेश: 10 दिन में 11 लाख वोटर्स को हटाने की साजिश? कांग्रेस का बड़ा आरोप, EC के दरवाज़े पर PCC चीफ


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, काटने और सुधार की प्रक्रिया 23 जनवरी को खत्म हो रही है। इसी बीच कांग्रेस ने बीजेपी पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की सुनियोजित साजिश का आरोप लगाया है।कांग्रेस का दावा है कि सिर्फ 10 दिनों में लगभग 11 लाख वोटरों के नाम काटने के लिए बीजेपी ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 उपलब्ध कराए हैं।

    कांग्रेस का मुख्य आरोप: “प्रिंटेड फॉर्म-7” से वोटर हटाए जा रहे हैं
    कांग्रेस का कहना है कि जिन फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाए जा रहे हैं, वे प्री-प्रिंटेड (पहले से भरे हुए) हैं।

    इन फॉर्मों में विधानसभा क्रमांक,विधानसभा का नाम,हटाने वाले मतदाता का नाम और विवरण पहले से दर्ज है।
    लेकिन आवेदक का नाम और हस्ताक्षर कहीं नहीं है।कांग्रेस इसे चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उल्लंघन और लोकतंत्र पर हमला करार दे रही है।

    जीतू पटवारी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, बीजेपी चुनाव हारने के डर से मैदान में नहीं, वोटर लिस्ट में खेल रही है।
    बिना आवेदक के नाम और हस्ताक्षर वाले प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 लोकतंत्र की हत्या का प्रमाण हैं।
    SC, ST, अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के मताधिकार को छीनने की यह सोची-समझी साजिश है।”उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो कांग्रेस सड़कों से लेकर अदालत तक यह मुद्दा ले जाएगी।हम एक भी मतदाता का नाम गलत तरीके से कटने नहीं देंगे।

    कांग्रेस की मांग: EC तुरंत कार्रवाई करे
    कांग्रेस ने चुनाव आयोग से निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की है
    सभी प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 की तुरंत जांच
    बिना वैध आवेदन और हस्ताक्षर वाले फॉर्मों को निरस्त
    दोषी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई
    कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और मताधिकार की रक्षा का मामला है।

    एक व्यक्ति ने 25-25 आपत्तियां”कांग्रेस का नया आरोप
    पटवारी ने कहा कि नियमों के अनुसार एक व्यक्ति केवल एक ही आपत्ति दर्ज करा सकता है, लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एक ही व्यक्ति द्वारा 25-25 आपत्तियां दर्ज कराई हैं।उन्होंने कहा कि इसके प्रमाण चुनाव आयोग को सौंप दिए गए हैं।

    BLO को चेतावनी: अनियमितता मिली तो FIR
    पटवारी ने BLOs को चेतावनी दी कि, यदि किसी भी बूथ पर अनियमितता पाई गई, तो संबंधित BLO के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी।
    उन्होंने कहा कि कुछ BLO ईमानदारी से काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ भाजपा नेताओं के दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी सर्विस रिकॉर्ड (CR) खराब हो सकती है।

    फर्जी आपत्तियों का आरोप
    पटवारी ने आरोप लगाया कि कई मतदाताओं को जानकारी तक नहीं है, और उनके नाम से ऑनलाइन फर्जी आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं।

    यह खासकर अल्पसंख्यक और आदिवासी क्षेत्रों में हो रहा है।उन्होंने कहा:वोट चोरी करके चुनाव जीतने की कोशिश की जा रही है।

    मंत्री विश्वास सारंग पर भी सवाल
    पटवारी ने कहा कि मंत्री विश्वास सारंग पिछले चुनाव हार चुके थे।
    उनकी सीट और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों से करीब एक-एक लाख वोट कम हुए हैं, जहाँ जीत-हार का अंतर अक्सर इतना ही रहता है।उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मांग की कि इन गड़बड़ियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया पर भारी आरोप लगाए हैं और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।अब सवाल यह है कि चुनाव आयोग इस मामले में कब और क्या कार्रवाई करता है, क्योंकि 23 जनवरी तक समय बहुत कम है।

  • भोपाल: RGPV कैंपस में छात्रा की संदिग्ध मौत; स्टाफ से विवाद के बाद बीटेक फर्स्ट ईयर की सव्याश्री ने की आत्महत्या

    भोपाल: RGPV कैंपस में छात्रा की संदिग्ध मौत; स्टाफ से विवाद के बाद बीटेक फर्स्ट ईयर की सव्याश्री ने की आत्महत्या


    भोपाल। राजधानी के प्रतिष्ठित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के गर्ल्स हॉस्टल में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बीटेक फर्स्ट ईयर की एक छात्रा का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। मृतका की पहचान सव्याश्री मुनागला (19) के रूप में हुई है, जो धार जिले की रहने वाली थी।

    विवाद और खामोशी: मौत से पहले क्या हुआ?
    शुरुआती जांच में एक गंभीर पहलू सामने आया है।

    बताया जा रहा है कि सुसाइड से पहले सव्याश्री का हॉस्टल की एक महिला स्टाफ के साथ तीखा विवाद हुआ था।
    अकेली थी छात्रा: सव्याश्री की रूममेट 10 जनवरी से छुट्टी पर थी, जिसका फायदा उठाकर उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
    संदेह का घेरा: वार्डन के मुताबिक, छात्रा एक दिन की छुट्टी के बाद लौटी थी। लौटने पर हुई ‘सामान्य पूछताछ’ और स्टाफ के साथ हुई ‘बहस’ के बीच की कड़ियों को पुलिस जोड़ने में जुटी है।

    जांच के अहम बिंदु: मोबाइल और लैपटॉप में छिपे हैं राज
    पुलिस और FSL (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की टीम ने मौके पर पहुंचकर बारीकी से मुआयना किया।
    कोई सुसाइड नोट नहीं: कमरे से कोई लिखित नोट नहीं मिला है, जिससे गुत्थी और उलझ गई है।

    डिजिटल फुटप्रिंट्स: पुलिस ने सव्याश्री का स्मार्टफोन और लैपटॉप जब्त कर लिया है।

    साइबर टीम यह पता लगाएगी कि क्या वह किसी बाहरी दबाव या साइबर बुलिंग का शिकार तो नहीं थी।

    दरवाजे का लॉक: टीआई विजेंद्र मर्सकोले के अनुसार, पुलिस के पहुंचने से पहले ही दरवाजा खोला जा चुका था, जिसका लॉक टूटा हुआ मिला।

    घटनाक्रम: एक नजर में
    बुधवार रात सव्याश्री ने मेस में डिनर किया, व्यवहार सामान्य था।
    गुरुवार दोपहर जब वह काफी देर तक बाहर नहीं आई, तो सहेलियों ने वार्डन को सूचना दी।
    पुलिस कार्रवाई गेट तोड़कर शव को नीचे उतारा गया और हमीदिया मर्चुरी भेजा गया।

    प्रशासन पर सवाल
    हॉस्टल में छात्रा और स्टाफ के बीच हुई नोक-झोंक ने अब तूल पकड़ लिया है। परिजन और साथी छात्र यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या स्टाफ का व्यवहार इतना प्रताड़ित करने वाला था कि छात्रा को जान देनी पड़ी?
    धार से परिजनों के पहुंचने के बाद शुक्रवार को शव का पोस्टमॉर्टम होगा। पुलिस का कहना है कि कॉल डिटेल्स और परिजनों के बयानों के आधार पर जल्द ही FIR की दिशा तय की जाएगी।
    डिस्क्लेमर: आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है। यदि आप या आपके आसपास कोई तनाव में है, तो कृपया मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट या हेल्पलाइन नंबरों से मदद लें।

  • भोपाल में कर्मचारी मोर्चा: दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी सत्याग्रह पर, महिला कर्मचारी भी शामिल

    भोपाल में कर्मचारी मोर्चा: दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी सत्याग्रह पर, महिला कर्मचारी भी शामिल


    भोपाल में सरकारी कर्मचारियों ने अपने अधिकारों और मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। स्थायी दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी एकजुट होकर सतपुड़ा गेट पर सत्याग्रह पर बैठे हैं। आंदोलन में महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। यह आंदोलन कर्मचारियों की पांच सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा है जो लंबे समय से प्रतीक्षित थे।

    प्रांत अध्यक्ष अशोक पांडे के अनुसार कर्मचारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं: पहला उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर के आदेशानुसार सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए या उन्हें नियमित किया जाए। दूसरा शासन द्वारा अस्थाई पदों को सांख्येत्तर घोषित करने वाले आदेश दिनांक 22 दिसंबर 2025 को निरस्त किया जाए। तीसरा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाए ताकि उनके अधिकार सुनिश्चित हो सकें। चौथा अंशकालीन कर्मचारियों को श्रमायुक्त द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन या कलेक्टर दर के अनुसार वेतन भुगतान किया जाए। पांचवा अस्थाई कर्मचारियों को पेंशन सुविधा का लाभ प्रदान किया जाए।

    सत्याग्रह में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी आवाज़ सुनी नहीं जा रही और उनकी न्यायसंगत मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की अनदेखी और समय पर समाधान न मिलने के कारण उन्हें मजबूर होकर सड़क पर आंदोलन करना पड़ा है। महिला कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल होकर यह संदेश दे रही हैं कि कर्मचारियों की समस्याएं केवल पुरुष कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं बल्कि सभी वर्गों को समान अधिकार मिलने चाहिए।स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा दृष्टि से सत्याग्रह स्थल पर विशेष व्यवस्था की है। हालांकि कर्मचारियों का आंदोलन शांतिपूर्ण है लेकिन इसका असर प्रशासन पर निश्चित रूप से पड़ेगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी जायज़ मांगों को मान्यता दिलाना है न कि किसी तरह का विवाद खड़ा करना।

    इससे पहले भी विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की समान मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया था लेकिन इसे लागू करने में ढिलाई बरती गई। अब कर्मचारियों ने सत्याग्रह के माध्यम से सीधे सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचने का निर्णय लिया है।सत्याग्रह में भाग लेने वाले कर्मचारी मानते हैं कि यह आंदोलन उनके अधिकारों की लड़ाई है और यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आगे और बड़े पैमाने पर आंदोलन की संभावना भी बनी हुई है। कर्मचारी मंच इस आंदोलन को लंबी लड़ाई के रूप में तैयार कर रहा है और इसका असर न केवल भोपाल बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी दिखाई देगा।

  • भोपाल आज: नाटक, टेक फेस्ट और क्रिकेट का संगम, बिजली कटौती का खाका भी जारी

    भोपाल आज: नाटक, टेक फेस्ट और क्रिकेट का संगम, बिजली कटौती का खाका भी जारी


    भोपाल में आज कला, संस्कृति, खेल और टेक्नोलॉजी का संगम देखने को मिलेगा। महाभारत समागम के तहत नाट्य प्रस्तुतियों का आयोजन होगा। MANIT में चार दिवसीय टेक्नोसर्च 2026 का आगाज होगा, वहीं बैरागढ़ क्रिकेट ग्राउंड में जैन लिगेसी क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरुआत होगी। इस दौरान कई इलाकों में बिजली कटौती रहेगी।

    बिजली कटौती सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक हमीदिया रोड, इब्राहिमगंज, सज्जाद कॉलोनी, बाल विहार, दवा बाजार, नादरा बस स्टैंड, चेतन मार्केट, मलिक मार्केट और आसपास के क्षेत्रों में होगी। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक रानी अमन बाई कॉलोनी, तुलसी नगर, सोनिया कॉलोनी नवीन नगर, फूटी बावड़ी, राजीव नगर बी-सी सेक्टर और इंद्रलोक, प्रकाश नगर, भेल नगर बसंतकुंज, भारत आजाद नगर, छत्तीसगढ़ कॉलोनी, वर्धमान नगर, राज सम्राट फेस-3, सुरभि मोहिनी, युगांतर, कंचन नगर, इंडस प्रज्ञा, विद्यासागर, सिद्धार्थ पैलेस, आधारशिला ईस्ट ब्लॉक आधारशिला एक्सटेंशन, सुभालय व आसपास बिजली गुल रहेगी।

    रेल यात्रियों के लिए भी खबर है कि नांदेड़ के लिए दो स्पेशल ट्रेनें चंडीगढ़-नांदेड़-चंडीगढ़ और हजरत निजामुद्दीन-नांदेड़-हजरत निजामुद्दीन चलेंगी। चंडीगढ़-नांदेड़-चंडीगढ़ स्पेशल 23 व 24 जनवरी को चंडीगढ़ से प्रस्थान करेगी और 25 व 26 जनवरी को नांदेड़ से लौटेगी। भोपाल आगमन रात 9:50 बजे और प्रस्थान सुबह 9:55 बजे होगा। हजरत निजामुद्दीन-नांदेड़-हजरत निजामुद्दीन ट्रेन 23 व 24 जनवरी को निजामुद्दीन से रवाना होगी और नांदेड़ से 24 व 25 जनवरी को लौटेगी।

    महाभारत समागम में आज सुबह 5 बजे पूर्वरंग में छत्तीसगढ़ के शिव शर्मा द्वारा पंडवानी गायन होगा। शाम 6 बजे अंतरंग सत्र में ‘सौगंधिक वधम्’ नाट्य प्रस्तुति होगी, जिसका निर्देशन विशाल मजुमदार करेंगे और प्रस्तुति चित्राशा कलालय, कोलकाता द्वारा दी जाएगी। शाम 7:30 बजे बहिरंग सत्र में ‘स्वर्गारोहण’ नाटक का मंचन कंकण पॉप आर्ट्स ट्रस्ट, नई दिल्ली द्वारा किया जाएगा।

    जनजातीय संग्रहालय में दोपहर 12 बजे से शलाका चित्र प्रदर्शनी शुरू होगी। वहीं, MANIT में आज से चार दिवसीय मैफिक एक्स टेक्नोसर्च 2026 का आयोजन होगा। यह फेस्ट टेक्नोलॉजी, इनोवेशन ई-स्पोर्ट्स, ऑटो-शो, साइंस मॉडल और कल्चरल नाइट्स का बड़ा मंच बनेगा। इसमें इनो-फेस्ट फिन-स्पार्क, ऑटो-एक्सपो और ‘गिग-ए-नाइट’ जैसे इवेंट आकर्षण का केंद्र होंगे।बैरागढ़ क्रिके ग्राउंड पर आज से जैन लिगेसी कप 2.0 शुरू होगा। 10 टीमें मैदान में उतरेंगी। लीग मुकाबले 22 से 25 जनवरी तक होंगे और फाइनल 26 जनवरी शाम 4 बजे खेला जाएगा। टूर्नामेंट का उद्देश्य खेल के साथ सामाजिक सरोकार को जोड़ना है और आईपीएल की तर्ज पर ऑक्शन के बाद टीमें बनाई गई हैं।

    आज भोपाल में नाटक, टेक्नोलॉजी, क्रिकेट और बिजली कटौती की पूरी लिस्ट को ध्यान में रखते हुए लोगों को समय और कार्यक्रम के अनुसार योजना बनानी होगी। शहर भर में कला और खेल प्रेमियों के लिए यह दिन खास रहेग

  • एमपी नगर में खाद्य भवन निर्माण पर विरोध तेज: 150 पुराने पेड़ों की कटाई के खिलाफ कर्मचारी और पर्यावरणविद करेंगे ‘चिपको आंदोलन’

    एमपी नगर में खाद्य भवन निर्माण पर विरोध तेज: 150 पुराने पेड़ों की कटाई के खिलाफ कर्मचारी और पर्यावरणविद करेंगे ‘चिपको आंदोलन’


    भोपाल के एमपी नगर क्षेत्र में प्रस्तावित 6 मंजिला खाद्य भवन के निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस परियोजना में लगभग 150 पुराने पेड़ों को काटने की तैयारी है जिनमें पीपल और बरगद जैसे बड़े वृक्ष शामिल हैं। इन पेड़ों की उम्र 40 से 50 साल बताई जा रही है। पेड़ों की कटाई के विरोध में अब कर्मचारी संगठनों के साथ पर्यावरणविद भी मैदान में उतर आए हैं। वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा लगभग 64 करोड़ रुपये की लागत से नया भवन बनाने की योजना है। इस भवन में खाद्य संचालनालय वेयर हाउसिंग और नाप-तौल विभाग के दफ्तरों को एक ही परिसर में शिफ्ट किया जाएगा। सभी सुविधाओं को जोड़कर खर्च 90 से 100 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

    यह निर्माण एमपी नगर स्थित नाप-तौल नियंत्रक कार्यालय की डेढ़ एकड़ जमीन पर प्रस्तावित है। पुराने भवन को तोड़कर नया निर्माण होगा, जिसके चलते परिसर में मौजूद सैकड़ों पेड़ों को हटाना तय माना जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि नागरिक आपूर्ति निगम को छोड़ दें तो बाकी सभी विभागों के पास पहले से ही सरकारी भवन हैं। ऐसे में केवल एक विभाग के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च करना और इसके बदले 150 पेड़ों की बलि देना अनुचित है।

    मप्र नाप-तौल अधिकारी-कर्मचारी संघर्ष समिति ने मोर्चा खोल दिया है। समिति के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी ने बताया कि गुरुवार को भोजन अवकाश के समय कर्मचारी और पर्यावरण से जुड़े लोग पेड़ों से चिपककर चिपको आंदोलन करेंगे। विरोध के प्रतीक स्वरूप कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि नए भवन के निर्माण में करीब तीन साल लगेंगे, इस दौरान मुख्यालय को किराए के भवन में शिफ्ट करना पड़ेगा जिससे लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे।

    कर्मचारियों के अनुसार सात साल पहले जगह की कमी का हवाला देकर नाप-तौल मुख्यालय से कुछ कार्यालय 50 लाख रुपये खर्च कर जेके रोड स्थित किराए के भवन में भेजे गए थे, जहां आज भी स्टाफ और सामग्री के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। वहीं, मुख्यालय परिसर में टैंक लॉरी कैलिब्रेशन सुविधा विकसित करने के लिए पहले ही 5 करोड़ रुपये की स्वीकृति मांगी जा चुकी है।

    पर्यावरणविदों का कहना है कि शहर में हरियाली लगातार घट रही है, ऐसे में पुराने और बड़े पेड़ों को बचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अगर पेड़ कट गए तो न केवल शहर का हरित आवरण घटेगा बल्कि आसपास के तापमान और वायु गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। कर्मचारियों और पर्यावरणविदों के इस आंदोलन से प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है।विरोध तेज होने के साथ ही यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। कर्मचारी संगठनों और पर्यावरणविदों का कहना है कि केवल प्रशासनिक फैसले से निपटने के बजाय सार्वजनिक हित और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखना जरूरी है।