Category: Madhya Pradesh

  • इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई

    इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई


    नई दिल्ली। इंदौर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें भोपाल का अबान शकील मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। पुलिस ने अबान को इंदौर में ड्रग डिलीवरी के इंतजार के दौरान गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि अबान गोवा, इंदौर, मुंबई, दिल्ली और भोपाल जैसे कई बड़े शहरों में एमडी ड्रग की सप्लाई में सक्रिय था। इस गिरोह में दो युवतियां भी पैडलर के रूप में शामिल थीं, जिन्हें अबान और उसके साथी वैभव उर्फ बाबा शर्मा मोटे कमीशन और ड्रग की फ्री खुराक का लालच देकर तस्करी के काम में जोड़ते थे।
    पुलिस ने अबान की निशानदेही पर दो युवतियों और बाबा शर्मा को भी गिरफ्तार किया है।

    इंदौर पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि अबान और बाबा शर्मा अंतरराज्यीय एमडी तस्कर गिरोह के सदस्य हैं और यह गिरोह चार से पांच राज्यों में ड्रग तस्करी कर रहा था। जांच के दौरान यह तथ्य भी उजागर हुआ कि इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में आरोपी बाबा शर्मा, अलीशा मसीह और नेहा पार्टीज का आयोजन करते थे। इन पार्टियों में एंट्री फीस 10 से 15 हजार रुपए तक ली जाती थी और रईसजादों को ड्रग खपाने का काम किया जाता था।

    पुलिस ने बताया कि अबान अपनी पार्टीज के जरिए युवाओं को आकर्षित करता था और बाद में उन्हें एमडी की खुराक देकर पार्टी कल्चर के नाम पर नशे का आदी बनाता था। इसके बाद वही युवतियां और अन्य सदस्य ड्रग सप्लाई के लिए आगे काम करते थे। गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से गोवा, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, मुंबई सहित अन्य शहरों में पार्टीज आयोजित करते रहे हैं।

    अब तक इस मामले में कुल चार गिरफ्तारियां हुई हैं।

    इंदौर पुलिस ने अबान के साथ कनाड़िया, मुंबई और देवास से गिरोह के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी वैभव उर्फ बाबा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह अबान और युवतियों के साथ मिलकर एमडी ड्रग्स की तस्करी करता था।

    पुलिस के मुताबिक, गिरोह गोवा सहित कई राज्यों के पब, बार और क्लबों में एमडी ड्रग की सप्लाई करता था और इसकी कीमत लगभग 10 हजार रुपए प्रति ग्राम थी। पुलिस अभी आरोपी से एमडी ड्रग्स के सोर्स के बारे में पूछताछ कर रही है और उसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी भी संभव है।

    इस बीच, अबान शकील का नाम ड्रग तस्करी में फंसने के बाद भोपाल डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (बीडीसीए) ने उसे अपनी प्रारंभिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया है। बीडीसीए ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। अबान बीडीसीए का आजीवन सदस्य भी था। पुलिस ने बताया कि अबान कोहेफिजा इलाके में स्थित सैफिया कॉलेज मैदान के पास बने करोड़ों रुपए कीमत के बंगले में रहता था और उसके घर के पोर्च पर लग्जरी कारें खड़ी रहती थीं।
    इस मामले में इंदौर के कनाड़िया थाने में अपराध क्रमांक 37/2025 के तहत धारा 8/22 एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। अब तक आरोपियों से कुल 15.95 ग्राम एमडी ड्रग्स, बिना नंबर की इको स्पोर्ट्स कार, थार और एक एसयूवी जब्त की गई है। पुलिस का कहना है कि अबान थार जीप से भोपाल-इंदौर के पब और लाउंज में ड्रग सप्लाई करता था और उसके लिए लड़कियां भी पैडलर का काम करती थीं।

    इंदौर क्राइम ब्रांच और कनाड़िया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अबान की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच तेज कर दी है, जिससे जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है।

  • जबलपुर संभाग में वाहन फिटनेस का 'संकट': एक एजेंसी के भरोसे हजारों गाड़ियां, दूर-दराज के जिलों से आना पड़ेगा जबलपुर

    जबलपुर संभाग में वाहन फिटनेस का 'संकट': एक एजेंसी के भरोसे हजारों गाड़ियां, दूर-दराज के जिलों से आना पड़ेगा जबलपुर


    जबलपुर । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय मोर्थ के एक नए आदेश ने जबलपुर संभाग के हजारों वाहन मालिकों और चालकों की रातों की नींद उड़ा दी है। नए निर्देशों के अनुसार, अब व्यावसायिक और सवारी वाहनों की फिटनेस जांच जिला स्तर पर बंद कर दी गई है। अब संभाग के सभी 8 जिलों के वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए जबलपुर स्थित एकमात्र ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर निर्भर रहना होगा। इस फैसले ने न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि दूर-दराज के जिलों से आने वाले आवेदकों के लिए यह “जी का जंजाल” बन गया है।

    8 जिलों का बोझ और महज एक टेस्टिंग स्टेशन जबलपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला और डिंडौरी जैसे जिलों के हजारों वाहनों का जिम्मा अब अकेले जबलपुर की एक निजी एजेंसी के भरोसे है। परेशानी की बात यह है कि वर्तमान में शहर में केवल एक ही एटीएस कार्यशील है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या एक ही केंद्र पर संभाग भर के हजारों वाहनों की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच समय पर पूरी हो पाएगी? जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से भारी भीड़ और काम में देरी होने के कारण भ्रष्टाचार और व्यावहारिक समस्याएं बढ़ना तय है।

    1,000 की फीस और 12,000 का खर्च: वाहन चालकों का फूटा गुस्सा इस नए आदेश का सबसे ज्यादा असर वाहन संचालकों की जेब पर पड़ रहा है। बालाघाट, छिंदवाड़ा और डिंडौरी जैसे जिलों से जबलपुर की दूरी 200 से 210 किलोमीटर तक है। वाहन चालकों का कहना है कि फिटनेस सर्टिफिकेट की निर्धारित सरकारी फीस भले ही महज 1,000 रुपये के आसपास हो, लेकिन लंबी दूरी तय कर जबलपुर आने-जाने का खर्च कमर तोड़ रहा है। ईंधन डीजल , ड्राइवर-खलासी का भत्ता, रास्ते में रुकने का खर्च और एक-दो दिन का समय बर्बाद होने के कारण कुल खर्च 10 से 12 हजार रुपये तक पहुँच रहा है।

    व्यवसाय पर संकट और सुरक्षा के दावे एक तरफ सरकार का तर्क है कि ऑटोमेटेड टेस्टिंग से वाहनों की जांच अधिक सटीक होगी और सड़क हादसों में कमी आएगी, लेकिन दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। वाहन संचालकों का कहना है कि यदि सरकार को यह व्यवस्था लागू ही करनी थी, तो पहले प्रत्येक जिले में एटीएस केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए थे। बिना तैयारी के थोपे गए इस नियम से परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोग खासे परेशान हैं। फिलहाल, जबलपुर के एकमात्र एटीएस पर वाहनों का दबाव बढ़ना शुरू हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में आवेदकों की परेशानी और बढ़ने की आशंका है।

  • MP: हरदा में 300 स्टूडेंट्स होस्टल की दीवार फांद DM से मिलने के लिए पैदल ही निकले

    MP: हरदा में 300 स्टूडेंट्स होस्टल की दीवार फांद DM से मिलने के लिए पैदल ही निकले


    हरदा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के हरदा जिले (Harda district) में एकलव्य आवासीय विद्यालय (Eklavya Residential School) के 300 से अधिक स्टूडेंट खराब खाने और सुविधाओं से परेशान होकर शनिवार सुबह हॉस्टल की दीवार फांदकर कलेक्टर (Collector) से मिलने निकल पड़े। कड़ाके की ठंड में वे करीब 40 किलोमीटर दूर कलेक्ट्रेट की ओर पैदल ही चल दिए। जब छात्र लगभग 8 से 9 किलोमीटर पैदल चल चुके थे तब जिला प्रशासन को इसकी खबर मिली। इसके बाद जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने हाईवे पर ही छात्रों को रोका और उनकी समस्याओं को सुलझाने का भरोसा देकर उन्हें बसों से वापस स्कूल भेजा।


    डीएम ने बीच में रोका और शिकायतें सुनीं

    अधिकारियों ने बताया कि जब छात्र लगभग 8-9 किलोमीटर पैदल चल चुके थे तब प्रशासन एक्टिव हुआ और जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने सोडलपुर के पास नेशनल हाईवे पर ही उन्हें रोक लिया। उन्होंने छात्रों को उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया और उन्हें बसों के जरिए वापस स्कूल भिजवाया। स्टूडेंट का आरोप है कि स्कूल में काफी समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी है खाने की क्वालिटी बहुत खराब है और वहां साफ-सफाई की हालत भी बहुत बुरी है।


    क्या की शिकायतें?

    छात्रों का आरोप है कि स्कूल में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि वहां न तो खाना अच्छा मिलता है और न ही साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। छात्रों ने यह भी कहा कि जब वे इन समस्याओं की शिकायत करते हैं तो हॉस्टल की प्रिंसिपल उन्हें मानसिक रूप से परेशान करती हैं। एक छात्र ने पत्रकारों को बताया कि बार-बार शिकायत करने पर भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तब उन्हें मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा।


    डीएम ने दिया भरोसा

    स्टूडेंट ने जिलाधिकारी से बातचीत के दौरान प्राचार्य को हटाए जाने की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने स्टूडेंट को भरोसा दिया कि खाने की गुणवत्ता जांच करने के लिए एक पालक समिति बनाई जाएगी और छात्रों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक ‘संपर्क समिति’ भी गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्राचार्य के खिलाफ भी छात्रों की शिकायतें सामने आई हैं। बच्चों की परेशानी को देखते हुए मैं स्वयं मौके पर पहुंचा।


    मामले की होगी जांच

    जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने कहा कि छात्रों को समझाकर वापस भेज दिया गया है। पूरे मामले की जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, कांग्रेस के स्थानीय विधायक अभिजीत शाह ने हास्टल में बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें रसोई में रखी खाद्य सामग्रियों में कई खामियां मिलीं। जब पीने के पानी की टंकी की जांच की गई तो उसके अंदर पेड़ की जड़ें मिलीं। उन्होंने इसका एक वीडियो भी साझा किया। बता दें कि मध्य प्रदेश में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

  • शहडोल में नेशनल हाईवे पर धू-धू कर जला कोयले से भरा ट्रक: टक्कर के बाद भड़की आग, ड्राइवर ने कूदकर बचाई जान

    शहडोल में नेशनल हाईवे पर धू-धू कर जला कोयले से भरा ट्रक: टक्कर के बाद भड़की आग, ड्राइवर ने कूदकर बचाई जान


    शहडोल । जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नेशनल हाईवे-43 पर शनिवार-रविवार की दरमियानी रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। धुरवार टोल प्लाजा के पास कोयले से लदे एक ट्रक की टक्कर आगे चल रहे वाहन से हो गई, जिसके तुरंत बाद ट्रक के इंजन में भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते ट्रक का अगला हिस्सा आग के गोले में तब्दील हो गया। गनीमत रही कि चालक ने समय रहते सूझबूझ दिखाई और ट्रक से कूदकर अपनी जान बचा ली।

    टक्कर के बाद इंजन में भड़की लपटें जानकारी के अनुसार, कोयला लोड ट्रक बुढ़ार से कटनी की ओर जा रहा था। रात करीब 12 बजे धुरवार टोल प्लाजा के समीप ट्रक अपने आगे चल रहे एक ट्रैक चेसिस वाहन से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक के इंजन में शॉर्ट सर्किट हुआ और अचानक आग लग गई। टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारियों ने जैसे ही ट्रक से उठती आग की लपटें देखीं, उन्होंने तत्काल पुलिस और दमकल विभाग को सूचित किया।

    मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू सूचना मिलते ही सोहागपुर थाना पुलिस दमकल वाहनों के साथ मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि आग ट्रक के इंजन तक ही सीमित रही और पीछे लदे कोयले तक नहीं पहुँच पाई, अन्यथा एक बड़ा धमाका या भीषण क्षति हो सकती थी। इस अग्निकांड में ट्रक का इंजन पूरी तरह जलकर खाक हो गया है।

    हाइवे पर थमी रफ्तार, लगा लंबा जाम मुख्य हाईवे पर ट्रक में आग लगने और बीच सड़क पर वाहन के खड़े होने के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। शहडोल-बुढ़ार हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और जाम की स्थिति निर्मित हो गई। पुलिस ने आग बुझने के बाद क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त ट्रक को सड़क किनारे करवाया और यातायात को सुचारू रूप से बहाल कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है

  • शहडोल के धनपुरी का देश में डंका: दिल्ली में सम्मानित हुईं CMO पूजा बुनकर, डिकार्बनाइजेशन में नगर परिषद ने पेश की मिसाल

    शहडोल के धनपुरी का देश में डंका: दिल्ली में सम्मानित हुईं CMO पूजा बुनकर, डिकार्बनाइजेशन में नगर परिषद ने पेश की मिसाल


    शहडोल । पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की एक छोटी सी नगर परिषद ने देश के सामने बड़ी नजीर पेश की है। नई दिल्ली में आयोजित ‘डिकार्बनाइजेशन भारतीय शहर संवाद एवं विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला’ में धनपुरी नगर परिषद को शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान द्वारा आयोजित इस गरिमामयी समारोह में धनपुरी की मुख्य नगरपालिका अधिकारी CMO पूजा बुनकर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जो पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण है।

    महानगरों को पीछे छोड़ धनपुरी ने किया कमाल अक्सर माना जाता है कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और डिकार्बनाइजेशन जैसे जटिल लक्ष्य केवल बड़े महानगरों तक सीमित हैं। लेकिन धनपुरी नगर परिषद ने इस धारणा को तोड़ दिया है। कार्यशाला में मौजूद देशभर के शहरी विकास विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच धनपुरी द्वारा किए गए नवाचारों की जमकर सराहना की गई। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के भारतीय प्रमुख एवं वरिष्ठ सलाहकार हितेश वैद्य ने धनपुरी के प्रयासों को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि यदि धनपुरी जैसा छोटा शहर संकल्प ले सकता है, तो यह वैश्विक स्तर पर एक मिसाल है। यह साबित करता है कि पर्यावरण बचाने की इच्छाशक्ति भौगोलिक सीमाओं की मोहताज नहीं होती।

    शून्य कार्बन उत्सर्जन का बड़ा संकल्प राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने के बाद CMO पूजा बुनकर ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह उपलब्धि नगर परिषद की पूरी टीम और नागरिकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने संकल्प लिया कि धनपुरी नगर परिषद शत-प्रतिशत शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर काम करेगी। पूजा बुनकर ने बताया कि दिल्ली में प्राप्त तकनीकी प्रशिक्षण और नीतिगत ज्ञान का उपयोग कर धनपुरी को मध्यप्रदेश की पहली ‘डिकार्बनाइजेशन सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

    विकास और पर्यावरण का संतुलन नगर विकेंद्रीकरण पहल के तहत धनपुरी ने कचरा प्रबंधन, ऊर्जा की बचत और हरियाली बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में जो मॉडल पेश किया है, उसकी गूंज अब राष्ट्रीय राजधानी तक पहुँच गई है। इस उपलब्धि पर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों में खुशी की लहर है। जानकारों का मानना है कि ऐसे प्रयास न केवल प्रदूषण कम करने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सतत और स्वस्थ शहरी जीवन की नींव रखेंगे।

  • सोशल मीडिया की दोस्ती ने किया मानसिक बेहाल: बैतूल में हाईटेंशन टावर पर चढ़ा युवक, पुलिस ने बचाई जान

    सोशल मीडिया की दोस्ती ने किया मानसिक बेहाल: बैतूल में हाईटेंशन टावर पर चढ़ा युवक, पुलिस ने बचाई जान


    बैतूल मुलताई । सोशल मीडिया की आभासी दुनिया कभी-कभी हकीकत में जानलेवा साबित हो सकती है। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ ‘हेलो ऐप’ पर हुई एक दोस्ती एक युवक के लिए जी का जंजाल बन गई। इस दोस्ती से उपजे मानसिक तनाव के कारण युवक ने आत्महत्या की नीयत से एक हाईटेंशन विद्युत टावर पर चढ़कर पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और घंटों चली काउंसलिंग के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।

    खुद कॉल कर दी टावर पर चढ़ने की सूचना घटना देर रात की है, जब ज्ञान मंदिर क्षेत्र के पास स्थित एक विशाल हाईटेंशन टावर पर युवक को चढ़ते देखा गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि युवक ने टावर पर चढ़ने के बाद खुद ही डायल 112 पर कॉल किया और पुलिस को बताया कि वह अपनी जीवनलीला समाप्त करने जा रहा है। सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम और स्थानीय पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। अंधेरी रात होने के कारण युवक की सटीक लोकेशन ढूंढना मुश्किल था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी की मदद से युवक को काफी ऊंचाई पर चिन्हित किया।

    2 घंटे चला ‘हाई वोल्टेज’ ड्रामा टावर पर चढ़ा युवक बेहद भावुक और मानसिक रूप से परेशान था। पुलिस टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए सीधे ऊपर चढ़ने के बजाय नीचे से ही युवक से फोन पर बातचीत जारी रखी। करीब दो घंटे तक पुलिसकर्मी उसे समझाते रहे और उसकी बातों को सुनकर उसे ढांढस बंधाया। इस मानसिक काउंसलिंग का सकारात्मक असर हुआ और युवक का इरादा बदल गया। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस की टीम उसे सुरक्षित नीचे उतारने में कामयाब रही।

    हेलो ऐप से शुरू हुई थी परेशानी पूछताछ में युवक की पहचान 27 वर्षीय अरविंद वाघने (पिता यशवंत), निवासी नागपुर के रूप में हुई है। अरविंद मुलताई के एक ढाबे पर अचारी रसोइया का काम करता है। उसने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले ‘हेलो ऐप’ के माध्यम से उसकी एक व्यक्ति से दोस्ती हुई थी। इस दोस्ती के बाद कुछ ऐसी परिस्थितियां बनीं कि वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगा। युवक का कहना था कि वह इस उलझन से इतना तंग आ चुका था कि उसे मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आ रही थी।
    पुलिस ने युवक को सुरक्षित बचाकर उसके परिजनों को सूचित कर दिया है और उसकी काउंसलिंग की जा रही है ताकि वह दोबारा ऐसा आत्मघाती कदम न उठाए। यह घटना सोशल मीडिया के बढ़ते खतरों और उनसे होने वाले मानसिक आघात की ओर एक गंभीर इशारा करती है।

  • भोपाल स्लॉटर हाउस विवाद: कांग्रेस का भाजपा पर तीखा प्रहार, पीसी शर्मा ने 'हिंदू हृदय सम्राटों' की चुप्पी पर उठाए सवाल

    भोपाल स्लॉटर हाउस विवाद: कांग्रेस का भाजपा पर तीखा प्रहार, पीसी शर्मा ने 'हिंदू हृदय सम्राटों' की चुप्पी पर उठाए सवाल


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नगर निगम स्लॉटर हाउस में कथित तौर पर गौमांस मिलने का मामला अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम में तब्दील हो गया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने इस मामले में भाजपा के हिंदूवादी दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है।

    पीसी शर्मा ने मीडिया से चर्चा के दौरान तीखे लहजे में कहा कि जो भाजपा नेता खुद को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ कहलाना पसंद करते हैं, वे आज इस गंभीर मामले पर खामोश क्यों हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति दोहरे मापदंडों पर टिकी है। शर्मा ने कहा एक तरफ माइनॉरिटी और मुस्लिम समाज से हर छोटी बात पर नफरत जताई जाती है, लेकिन जब पैसे लेने की बात आती है, तो वहां कोई परहेज नहीं दिखता। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसकी शह पर नगर निगम के स्लॉटर हाउस में इस तरह की गतिविधियां संचालित हो रही थीं?

    कांग्रेस नेता ने इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि भोपाल की महापौर, नगर निगम आयुक्त और एमआईसी मेयर-इन-काउंसिल के सदस्यों की भूमिका की बारीकी से जांच होनी चाहिए। शर्मा ने मांग उठाई कि इन सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। मध्यप्रदेश में ‘बुलडोजर न्याय’ का जिक्र करते हुए पूर्व मंत्री ने सरकार को उन्हीं के अंदाज में घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गायों की हत्या के मामले में भाजपा सरकार का एक्शन कहीं नजर नहीं आ रहा है। शर्मा ने मांग की कि जिन लोगों ने इस स्लॉटर हाउस की अनुमति दी है और जो इसके संचालन के लिए जिम्मेदार हैं, उनके घरों पर भी सरकार को बुलडोजर चलाना चाहिए। उन्होंने वर्तमान सांसद और पूर्व महापौर द्वारा उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए कहा कि जब भाजपा के अपने ही लोग सवाल उठा रहे हैं, तो मुख्यमंत्री को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

    केवल भोपाल ही नहीं, पीसी शर्मा ने इंदौर में हुई हालिया हिंसक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चाहे भोपाल में गौ माता की हत्या का मामला हो या इंदौर में कानून-व्यवस्था की विफलता के कारण हो रही नागरिकों की हत्याएं, सरकार पूरी तरह से संवेदनहीन बनी हुई है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा केवल चुनावी लाभ के लिए हिंदुत्व का कार्ड खेलती है, लेकिन जब वास्तविक रूप से आस्था और कानून के संरक्षण की बात आती है, तो वह पीछे हट जाती है। फिलहाल, राजधानी का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। कांग्रेस इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक ले जाने की तैयारी में है, वहीं भाजपा की ओर से इस पर रक्षात्मक रुख देखने को मिल रहा है। जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस मामले में कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करती है या यह मुद्दा भी केवल सियासी बयानबाजी की भेंट चढ़ जाएगा।

  • राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी पर सरकार को घेरा, बोले– लोग पानी पीकर मर रहे, यही अर्बन मॉडल

    राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी पर सरकार को घेरा, बोले– लोग पानी पीकर मर रहे, यही अर्बन मॉडल


    इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और बीमारियों को लेकर शुक्रवार को सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि लोग पानी पीकर मर रहे हैं और इसे ही स्मार्ट सिटी और अर्बन मॉडल बताया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रही है और इसे पूरे मामले की जवाबदेही लेनी होगी। शनिवार को इंदौर पहुंचे राहुल गांधी ने सबसे पहले बॉम्बे हॉस्पिटल का दौरा किया, जहां उन्होंने दूषित पानी से प्रभावित मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की। वहां उन्होंने रोगियों की हालत और उनके परिवारों की समस्याओं को बारीकी से समझा और अस्पताल प्रशासन से स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद वे भागीरथपुरा पहुंचे, जहां उन्होंने दूषित पानी के कारण अपनी जान गंवाने वाली गीता बाई और जीवनलाल के परिवारों से मिलकर संवेदना व्यक्त की।

    राहुल गांधी ने दोनों परिवारों को आर्थिक सहायता के रूप में चेक भी प्रदान किए। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ इंदौर या मध्यप्रदेश का नहीं है, बल्कि पूरे देश में शहरी जल आपूर्ति प्रणाली की कमजोरी का उदाहरण है। उन्होंने सरकार से तत्काल कार्रवाई करने और लोगों को सुरक्षित पीने के पानी की गारंटी देने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि जल संकट और दूषित पानी की आपूर्ति जैसी समस्याओं को अर्बन मॉडल और स्मार्ट सिटी की उपलब्धियों के नाम पर छुपाया जा रहा है। उनका कहना था कि जनता की जान से खेलना स्वीकार्य नहीं है और इस मुद्दे पर सभी स्तरों पर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

    राहुल गांधी के इस दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने भी उनसे मिलकर अपने अनुभव साझा किए और मांग की कि सरकार ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि इंदौर का मामला चेतावनी है कि शहरों में जल प्रबंधन और स्वास्थ्य सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाए। राहुल गांधी की यह पहल लोगों के बीच संवेदनशीलता और तत्काल कार्रवाई की मांग को उजागर करती है। उनका यह दौरा केवल समर्थन और सहानुभूति दिखाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने वास्तविक मदद और आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत मिली।

  • MP में कांग्रेस विधायक के विवादित बयान से सियासी तूफान, शिवराज चौहान बोले- बेटियां देवी स्वरूप, ऐसी सोच शर्मनाक

    MP में कांग्रेस विधायक के विवादित बयान से सियासी तूफान, शिवराज चौहान बोले- बेटियां देवी स्वरूप, ऐसी सोच शर्मनाक


    भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया द्वारा लड़कियों को लेकर दिए गए विवादित बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी हलचल मचा दी है। उनके बयान को लेकर चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे शर्मनाक और अस्वीकार्य बताया।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बेटियां उनके लिए केवल संतान नहीं, बल्कि देवी का स्वरूप हैं।

    उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की सोच समाज को गलत दिशा में ले जाती है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा देने का काम करती है।

    दरअसल, कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने एक सार्वजनिक बयान में कहा था कि “अगर खूबसूरत लड़की दिख जाए तो दिमाग विचलित हो सकता है और रेप जैसी घटनाएं हो सकती हैं।” इस बयान के सामने आने के बाद विपक्ष, महिला संगठनों और आम लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि इस तरह के बयान अपराधियों को मानसिक रूप से ठहराने का प्रयास हैं।

    बेटियां मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का रूप” शिवराज
    भोपाल में मीडिया से बातचीत करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारी संस्कृति में बेटियों को मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का स्वरूप माना गया है। उन्होंने कहा कि बेटियों को जाति, धर्म या किसी भी वर्ग में बांटना गलत है। सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा क्या अब बेटियों को भी बांटने की कोशिश की जाएगी?

    उन्होंने यह भी कहा कि बेटियां पूजा के लिए हैं, उन पर टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान केवल सरकार नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

    दुष्कर्म पीड़िता को आर्थिक सहायता का ऐलान
    शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में अपने संसदीय क्षेत्र में हुई एक मासूम बेटी के साथ दुष्कर्म की घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज को शर्मसार करती हैं। उन्होंने बताया कि पीड़िता के खाते में तत्काल 10 लाख रुपये जमा किए जाएंगे और उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। साथ ही, पीड़िता के बालिग होने पर उसे 28 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित हो सके।

    बीजेपी का कांग्रेस पर तीखा हमला
    इस मामले में बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस विधायक पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक का बयान बेहद चौंकाने वाला है और इसमें रेप जैसी जघन्य घटना को धार्मिक संदर्भों से जोड़ने की कोशिश की गई है।

    पूनावाला ने कांग्रेस नेता प्रियंका वाड्रा से सवाल किया कि क्या वह इस तरह के बयान से सहमत हैं।

    महिला सुरक्षा पर फिर तेज हुई बहस
    फूल सिंह बरैया का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर संवेदनशीलता चरम पर है। इस बयान ने एक बार फिर महिला सुरक्षा, नेताओं की जिम्मेदारी और समाज की सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इस पूरे विवाद ने साफ कर दिया है कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर समाज किसी भी तरह की असंवेदनशील टिप्पणी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। शिवराज सिंह चौहान ने दो टूक कहा कि बेटियां सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी हैं और उनके सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

  • उज्जैन में पहली बार विंध्य हर्बल वन मेला, 12 से 16 फरवरी तक दशहरा मैदान में आयोजित

    उज्जैन में पहली बार विंध्य हर्बल वन मेला, 12 से 16 फरवरी तक दशहरा मैदान में आयोजित


    उज्जैन । महाकाल की नगरी उज्जैन में पहली बार विंध्य हर्बल वन मेला आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार यह पांच दिवसीय मेला 12 से 16 फरवरी 2026 तक दशहरा मैदान में चलेगा। मेले का शुभारंभ 12 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कर कमलों द्वारा होने की संभावना है। वन विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस मेले का उद्देश्य आमजन को वन, पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण, आयुर्वेद एवं पारंपरिक ज्ञान, वनोपज आधारित हर्बल उत्पादों, आयुष, स्वास्थ्य, जैव विविधता और जनजातीय संस्कृति से जोड़ना है। मेले में प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से हर्बल उत्पाद, आयुर्वेदिक औषधियां, वनोपज आधारित हस्तशिल्प कृतियां और आंचलिक व्यंजन प्रदर्शित किए जाएंगे।

    मेला केवल उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा। इस दौरान आमजन को विभिन्न जड़ी-बूटियों और वनोपज के बारे में जानकारी दी जाएगी और उन्हें खरीदने का अवसर भी मिलेगा। मेले में आने वाले पर्यटक और नागरिक वन और पर्यावरण से जुड़े कार्यशालाओं और लाइव डेमोंस्ट्रेशन में भाग लेकर नई जानकारियां हासिल कर सकेंगे। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मेले में देशभर से हर्बल उत्पाद और पारंपरिक ज्ञान की विविधता पेश की जाएगी। यह मेला न केवल व्यापारियों और कारीगरों के लिए अवसर प्रदान करेगा, बल्कि आमजन के लिए भी वन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने का एक अनूठा मंच बनेगा। साथ ही, इस मेले में युवा और छात्र पर्यावरणीय शिक्षा और आयुर्वेदिक ज्ञान के महत्व को समझने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

    उज्जैन की यह पहल महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर आयोजित की जा रही है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य पर केंद्रित गतिविधियों का भी संयोजन होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस मेला से जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। पांच दिवसीय मेले में आने वाले नागरिक हर्बल उत्पादों की खरीदारी के साथ-साथ आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा पर आधारित कार्यशालाओं में भाग लेकर अपनी स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ा सकेंगे। वन और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह मेला एक विशेष अनुभव प्रदान करेगा, जो वन्य जीवन और जैव विविधता के महत्व को सीधे तौर पर समझने का अवसर देगा।