Category: Madhya Pradesh

  • उज्जैन प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव बृहस्पति महादेव के दर्शन आमजन से संवाद और विकास कार्यों का लिया जायजा

    उज्जैन प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव बृहस्पति महादेव के दर्शन आमजन से संवाद और विकास कार्यों का लिया जायजा


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को उज्जैन प्रवास के दौरान धार्मिक सामाजिक और विकास से जुड़े कार्यक्रमों में पूरी तरह सक्रिय नजर आए। महाकाल उत्सव के समापन के अगले ही दिन मुख्यमंत्री का यह दौरा आस्था, संवाद और विकास-तीनों आयामों को एक साथ समेटे रहा। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उन्होंने दिन की शुरुआत गोलामंडी क्षेत्र स्थित प्राचीन बृहस्पति महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन से की और प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

    मुख्यमंत्री अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ मंदिर पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से अभिषेक और आरती की गई। पूजा के बाद उन्होंने कहा कि बृहस्पति महादेव मंदिर से उनका पुराना और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। सार्वजनिक जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर वे यहां आशीर्वाद लेने आते रहे हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह उनका पहला बृहस्पतिवार दर्शन था, जिसे उन्होंने अपने लिए विशेष और भावुक क्षण बताया।पूजन के उपरांत मुख्यमंत्री ने उज्जैन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उज्जैन केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों को लेकर उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार पूरी गंभीरता और योजना के साथ काम कर रही है। सड़क, पेयजल, स्वच्छता, यात्री सुविधाएं और आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आने वाले वर्षों में उज्जैन वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत कर सके।

    धार्मिक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री का अंदाज पूरी तरह बदला नजर आया, जब वे शहर के बीच एक साधारण सी चाय की दुकान पर पहुंचे। यहां उन्होंने आम नागरिकों के साथ बैठकर चाय पी और अनौपचारिक बातचीत की। लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने शहर की समस्याएं, रोजमर्रा की जरूरतें और विकास से जुड़ी अपेक्षाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ ध्यान से उनकी बातें सुनीं, बल्कि समाधान का भरोसा भी दिया। जब चाय का भुगतान करने की बारी आई और दुकानदार ने पैसे लेने से मना किया, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए स्वयं भुगतान किया। इस सरल व्यवहार ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।

    इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय के समीप निर्माणाधीन गीता भवन का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह भवन जी प्लस टू संरचना में तैयार किया जा रहा है और अप्रैल 2026 तक इसके पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने निर्माण की गुणवत्ता, प्रगति और समय-सीमा की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और भवन तय समय में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा होना चाहिए।मुख्यमंत्री का यह उज्जैन दौरा साफ संकेत देता है कि उनकी प्राथमिकताओं में आस्था जनता से सीधा संवाद और विकास कार्यों की निगरानी-तीनों समान रूप से शामिल हैं।

  • राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत राज्य तिलहन मिशन का गठन: मुख्य सचिव करेंगे अध्यक्षता

    राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत राज्य तिलहन मिशन का गठन: मुख्य सचिव करेंगे अध्यक्षता


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन NMEO-OS के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन किया गया है।समिति में कृषि उत्पादन आयुक्त सहकारिता, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण/ फूड प्रोसेंसिंग इंडस्ट्रीज, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वित्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, कुलपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर/ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, आयुक्त/ संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, निदेशक भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इन्दौर म.प्र, प्रभारी अधिकारी नाबार्ड, समन्वयक स्टेट लेवल बैंकर समिति, तिलहन क्षेत्र में कार्यरत एफपीओ/ को-ऑपरेटिक्स के दो प्रतिनिधि प्रत्येक से एक , बीज एवं खाद्य तेल उत्पादक उद्योग से संबंधित दो प्रतिनिधिप्रत्येक से एक-एक , भारत सरकार, कृषि मंत्रालय द्वारा नामित अधिकारी संयुक्त सचिव स्तर सदस्य होंगे। किसान कल्याण तथा कृषि विकास राज्य मिशन संचालक NMEO-OS को सदस्य-सचिव नामित किया गया हैं।

    राज्य तिलहन मिशन की बैठक का आयोजन कृषि उत्पादन आयुक्त, म.प्र. शासन की अध्यक्षता में किया जा सकेगा। मिशन के दायित्व अंर्तगत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, मिशन में निहित समग्र नीति दिशा-निर्देशों के भीतर राज्य में मिशन कार्यान्वयन की समग्र निगरानी की जायेगी। राज्य को सौंपे गए क्षेत्र, उत्पादन, और उत्पादकता लक्ष्यों और इसकी निगरानी के आधार पर तिलहन की खेती और उत्पादन के लिए राज्य तिलहन कार्य योजना को अंतिम रूप देना , कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार को प्रस्तुत करने से पहले मिशन के लक्ष्यों और उद्देश्यों के अनुरूप संभावित और वार्षिक राज्य कार्य-योजना को अंतिम रूप देना, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को प्रस्तुत नियमित रिपोर्टों के साथ प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर नजर रखकर राज्य स्तर पर मिशन की प्रगति की निगरानी की जायेगी।

    समिति द्वारा आवश्यक बुनियादी ढांचे इंफास्ट्रक्चर और कटाई के बाद प्रसंस्करण सुविधाओं आदि को विकसित करने के लिए राज्य स्तरीय वित्तीय संसाधन आवंटन की देखरेख करना, जिला मिशनों, मूल्य श्रृंखला भागीदारों और तकनीकी सहायता एजेंसियों के कामकाज और प्रगति की निगरानी करना और उनकी दक्षता बढ़ाने के लिए निर्देश जारी करना और एस.ओ.पी निर्धारित करना, प्रमुख मिशन के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने तथा इसे राज्य कृषि नीतियों और विकास योजनाओं के साथ जोडने के लिए संबंधित विभागों कृषि, सिंचाई वित्त. ग्रामीण विकास आदि के साथ समन्वय करके अन्य केन्द्रीय और राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण सुनिश्चित करने के कार्य किए जा

  • अपनी सांस्कृतिक अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में करें उपयोग : राज्यपाल श्री पटेल

    अपनी सांस्कृतिक अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में करें उपयोग : राज्यपाल श्री पटेल

    भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रशिक्षणअधिकारियों को सशस्त्र सीमा बल के लिये केवल अधिकारी नहींबल्कि एक जिम्मेदार संवेदनशील और सजग राष्ट्र-प्रहरी के रूप में तैयार करने का समन्वित प्रयास है। प्रशिक्षण व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सभी प्रशिक्षणार्थियों को एक-दूसरे के राज्य की संस्कृति विशेषताओं और विविधताओं को समझने का अवसर प्रदान करता है। विविधता में एकता की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अपने राज्य की विशिष्टताओं की अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में उपयोग कर “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के निर्माण में योगदान दे। राज्यपाल श्री पटेल गुरूवार को सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल के प्रशिक्षु सहायक कमांडेंट्स को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्र के प्रतिष्ठित बल में चयन की बधाई और शुभकामनाएं दी। लोकभवन में आयोजित सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि आप सभी उन सौभाग्यशाली लोगों में शामिल हैं जिन्हें सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल का हिस्सा बनकर माँ भारती की सेवा का अवसर मिला है। आपकी वर्दी केवल पहचान नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के सम्मान का प्रतीक है। इसी वर्दी के साये में देशवासी स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं। आप जब अपने परिवार से दूर सीमाओं पर तैनात होकर देश की रक्षा करते हैं तभी हर देशवासी चैन और शांति की नींद सो पाता है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कर्तव्यों का पालन करने वाले अधिकारी ही समाज में विश्वास और सम्मान अर्जित करते हैं। आप सभी निष्ठा समर्पण और साहस के साथ राष्ट्र की सेवा करें। सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल की गौरवशाली परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाएं।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वर्तमान समय में देश के समक्ष आंतरिक सुरक्षा सीमा प्रबंधन नक्सलवाद तस्करी साइबर अपराध और असामाजिक गतिविधियाँ जैसी अनेक महत्वपूर्ण चुनौतियां है। राष्ट्र प्रहरी के रूप में आपके निर्णय और कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपनी प्रतिभा से सीमा सुरक्षा प्रबंधन में आधुनिक तकनीक व्यावसायिक ज्ञान शारीरिक और मानसिक सक्रियता के नए मानक स्थापित करे। यह सुनिश्चित होना चाहिए कि असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी तत्वों पर कठोरता से नियंत्रण करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त करें। उनके अनुभवों से सीखें और अपने ज्ञान को सहकर्मियों के साथ साझा भी करें।

    राज्यपाल श्री पटेल का एस.एस.बी. अकादमी भोपाल के निदेशक श्री बी.एस. जायसवाल ने पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। एस.एस.बी. अकादमी भोपाल निदेशक श्री जायसवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षु अधिकारी सुश्री अनुष्का मनियारा और श्री अनुराग भार्गव ने प्रशिक्षण में अनुभवों को साझा किया। कमांडेंट प्रशिक्षण श्रीमती सुवर्णा सजवाल ने आभार व्यक्त किया। कोर्स डायरेक्टर डिप्टी कमांडेंट प्रशिक्षण श्री रोहित शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव लोकभवन और एस.एस.बी. के अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

  • भोपाल में ट्रैक्टर-ट्रॉली और लोडिंग वाहन की टक्कर, 5 की मौत: सभी मृतक एक ही परिवार के

    भोपाल में ट्रैक्टर-ट्रॉली और लोडिंग वाहन की टक्कर, 5 की मौत: सभी मृतक एक ही परिवार के


    नई दिल्ली। भोपाल के बैरसिया थाना इलाके में बुधवार रात करीब साढ़े 9 बजे एक भयावह सड़क हादसा हुआ। सिरोंज के एक ही परिवार के 15 लोग लोडिंग वाहन में नर्मदापुरम जा रहे थे, जहां किसी परिजन की अंतिम क्रिया होने वाली थी। इसी दौरान ठाकुर लाल सिंह स्कूल के पास सामने से आ रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से उनकी गाड़ी की आमने-सामने की टक्कर हो गई। हादसे में लोडिंग वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार कई लोग अंदर ही फंस गए।
    जान-माल का नुकसान
    हादसे में 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान इस प्रकार है
    लक्ष्मीबाई अहिरवार
    बबली बाई
    हरि बाई
    दीपक
    मुकेश
    इसके अलावा 9 लोग घायल हुए हैं। ट्रैक्टर सवार 3 लोग भी चोटिल हुए। सभी घायलों को बैरसिया शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    घटना के पीछे वजह
    बैरसिया के एसडीएम आशुतोष शर्मा, एएसपी नीरज चौरसिया और टीआई वीरेंद्र सेन ने मौके पर पहुंचकर घायलों का हाल जाना और अस्पताल में उचित इलाज के निर्देश दिए। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।

    हालांकि, पुलिस ने कहा कि वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी।

    परिवार की यात्रा और हादसे का शोक
    लोडिंग वाहन में सवार परिवार नर्मदापुरम किसी परिजन की अंतिम क्रिया में शामिल होने जा रहा था। ट्रक और लोडिंग वाहन की भिड़ंत ने पूरे परिवार को अंधेरे में छोड़ दिया। यह हादसा सड़क सुरक्षा और तेज गति के खतरों को फिर से उजागर करता है।इसी तरह इंदौर में शुक्रवार को भी सड़क हादसा हुआ था, जिसमें पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी प्रेरणा बच्चन (26) की मौत हुई थी। पुलिस के अनुसार कार चालक शराब के नशे में 130–140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चला रहा था।

  • टेलीग्राम फ्रॉड का नया मामला: आसान कमाई का झांसा देकर छात्र से लाखों की ठगी

    टेलीग्राम फ्रॉड का नया मामला: आसान कमाई का झांसा देकर छात्र से लाखों की ठगी


    ग्वालियर में ऑनलाइन ठगी का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पार्ट-टाइम जॉब और आसान मुनाफे का झांसा देकर एक छात्र से करीब 3.50 लाख रुपए हड़प लिए गए। यह मामला शहर के मुरार थाना क्षेत्र का है, जहां साइबर ठगों ने टेलीग्राम ऐप का उपयोग करके पीड़ित को फंसाया। मुरार थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पीड़ित छात्र अमन कुशवाह मुरार के लाल टिपारा इलाके का रहने वाला है और बीबीए की पढ़ाई कर रहा है। अमन के मुताबिक कुछ दिन पहले उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें पार्ट-टाइम ऑनलाइन काम से कमाई का दावा किया गया था। मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद वह सीधे टेलीग्राम ऐप से जुड़ गया और एक ग्रुप में शामिल हो गया।

    ग्रुप में बताया गया कि होटल और अन्य व्यवसायिक संस्थानों को ऑनलाइन रेटिंग देनी होगी और इसके बदले अच्छा भुगतान मिलेगा। शुरुआत में अमन से केवल 300 रुपए जमा कराए गए और टास्क पूरा होने पर उसके अकाउंट में 500 रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। यह छोटा मुनाफा अमन के भरोसे को मजबूत करने का जरिया बना।इसके बाद ठगों ने बड़े टास्क का ऑफर दिया और अमन से 5 हजार रुपए जमा कराए गए। जैसे-जैसे वह टास्क करता गया, उसके अकाउंट में रकम बढ़ती दिखाई देने लगी। हालांकि, जब उसने राशि निकालने की कोशिश की, तो ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो सका। ग्रुप एडमिन ने कहा कि रकम निकालने के लिए और पैसे जमा करना जरूरी है।

    अकाउंट में बढ़ती रकम के लालच में अमन बार-बार पैसे ट्रांसफर करता गया। अलग-अलग खातों में कुल 3.50 लाख रुपए भेजने के बावजूद उसे पैसा नहीं मिला। इसके अलावा, ठगों ने उस पर और पैसे जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया और टास्क अधूरे रहने पर कोर्ट केस में फंसाने की धमकी भी दी।तब जाकर अमन को ठगी का एहसास हुआ। उसने तुरंत मुरार थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार यह एक संगठित साइबर फ्रॉड का मामला है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया गया है।

    मुरार थाना पुलिस ने बताया कि मामले की जांच में मोबाइल नंबर, बैंक खातों और टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे घर बैठे कमाई या बिना मेहनत मुनाफे के दावों से सतर्क रहें। किसी भी अनजान लिंक या ग्रुप से जुड़ने से पहले पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फ्रॉड में ज्यादातर छात्र और युवा आसानी से फंस जाते हैं, क्योंकि शुरुआती छोटे मुनाफे का लालच उन्हें बड़ा नुकसान उठाने के लिए प्रेरित करता है। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सतर्क रहने की जरूरत को उजागर किया है।

  • गोपाल भार्गव के सरकारी बंगले में मरीजों का आशियाना: भोपाल में बना प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम

    गोपाल भार्गव के सरकारी बंगले में मरीजों का आशियाना: भोपाल में बना प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम


    भोपाल। भोपाल के 74 बंगला क्षेत्र का बंगला नंबर बी-1, जो सागर जिले के रहली से विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का सरकारी आवास है, अब मरीजों का ठिकाना बन गया है। यह बंगला पहले मंत्री के रूप में भार्गव को आवंटित हुआ था, लेकिन अब यह बीमार बच्चों और मरीजों के लिए विशेष सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
    बच्चों के लिए प्ले स्कूल जैसा गेस्ट रूम
    गोपाल भार्गव की पुत्रवधु शिल्पी भार्गव ने इस बंगले में बीमार बच्चों, विशेषकर दिल से जुड़ी बीमारियों वाले बच्चों के लिए एक खास गेस्ट रूम तैयार कराया है। यह कमरे प्ले स्कूल की तरह सजाया गया है, जिसमें झूले, खिलौने और बच्चों के लिए विशेष बिस्तरों की व्यवस्था है। बच्चों का मनोबल बनाए रखने के लिए दीवारों पर रंग-बिरंगे कार्टून और आकर्षक पेंटिंग्स बनाई गई हैं।

    50 बिस्तरों के तीन हॉल
    बंगले में मरीजों के रहने के लिए तीन रेनोवेटेड हॉल बनाए गए हैं, जिनमें कुल 50 बिस्तरों की सुविधा है।

    मरीजों के आने-जाने, रुकने और इलाज के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। साथ ही एम्बुलेंस सेवा, भोजन और अस्पताल में इलाज कराने की पूरी सुविधा भी दी गई है।

    फ्री भोजन और खास मेन्यू
    बंगले में रहने वाले मरीजों के लिए सुबह नाश्ता, चाय और दो टाइम फ्री भोजन की सुविधा है। इस किचन को “गोपाल जी की रसोई” नाम दिया गया है। भोजन में मलाई कोफ्ता, मटर पनीर, पालक पनीर, बैगन भर्ता, आलू टमाटर, दाल मखनी, मूंग दाल, जीरा राइस, हलवा, खिचड़ी, गरम रोटियाँ, अचार, पापड़, चटनी और सलाद जैसी विविध और पौष्टिक डिशेज़ शामिल हैं।

    एम्बुलेंस सेवा और पंजीकरण
    हर रविवार को गढ़ाकोटा स्थित निज निवास गणनायक से तीन एम्बुलेंस भोपाल के लिए मरीजों को लेकर रवाना होती हैं।

    मरीजों का पंजीकरण गढ़ाकोटा में किया जाता है और भोपाल पहुंचते ही कर्मचारी आधार कार्ड, बीमारी की जानकारी और अस्पताल का नाम लेकर मरीजों को भर्ती कराते हैं।

    पूरी सुविधा निशुल्क
    गोपाल भार्गव के क्षेत्र के मरीजों को आने-जाने, रुकने, खाने और इलाज की पूरी सुविधा नि:शुल्क दी जाती है। इलाज आयुष्मान कार्ड या मुख्यमंत्री सहायता योजना के माध्यम से कराया जाता है। यदि इनसे मदद न मिले तो गोपाल भार्गव अपने निजी फंड से इलाज की व्यवस्था करते हैं।

    बच्चों के लिए अनुकूल वातावरण
    शिल्पी भार्गव ने यह व्यवस्था बच्चों के मनोबल को ध्यान में रखकर बनाई है। उनका उद्देश्य था कि जब बच्चे इलाज के लिए आएं तो उन्हें डर या असहजता महसूस न हो। इसलिए गेस्ट रूम को प्ले स्कूल जैसा सजाया गया और वातावरण को अनुकूल बनाया गया।

    लंबे समय से चल रही व्यवस्था
    अभिषेक भार्गव ने बताया कि यह व्यवस्था 2004 से शुरू है, जब गोपाल भार्गव मंत्री थे। उस समय भी मरीजों के आने-जाने, रहने, खाने और इलाज की सुविधा दी जाती थी। अब यह प्रकल्प निजी स्तर पर जारी है।

    जीवन और मृत्यु के लिए भी सुविधा
    गोपाल भार्गव का परिवार न केवल इलाज, बल्कि मृत्यु और अंतिम संस्कार की सुविधा भी प्रदान करता है। मरीज की मृत्यु होने पर शव घर तक पहुंचाने की व्यवस्था, बरमान घाट पर अस्थि विसर्जन और पंडित व नाई की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

    निजी खर्च और धर्म
    इस पूरे प्रकल्प में सरकारी मदद सीमित है। बंगले में साज-सज्जा और मरीजों की सुविधाएं निजी खर्च से ही संचालित होती हैं। गोपाल भार्गव का धर्म और ध्येय वाक्य है, “निरंतर कर्म” और यह दर्शन उनके कार्यों में स्पष्ट दिखाई देता है।

    गोपाल भार्गव और उनके परिवार द्वारा स्थापित यह व्यवस्था न केवल बीमार बच्चों और मरीजों के लिए मददगार साबित हो रही है, बल्कि यह मानवता और सेवा का अद्वितीय उदाहरण भी पेश करती है।

  • एमपी में ठंड का कहर जारी, कोहरे ने रोकी रफ्तार, 16 जनवरी से बारिश के आसार

    एमपी में ठंड का कहर जारी, कोहरे ने रोकी रफ्तार, 16 जनवरी से बारिश के आसार

    मध्य प्रदेश में जनवरी की ठंड इस बार लगातार नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ती नजर आ रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान बीते कई दिनों से 7 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे नीचे बना हुआ है। भले ही मौसम विभाग ने अब तक औपचारिक रूप से शीतलहर की घोषणा नहीं की हो लेकिन आम लोगों के लिए सर्दी किसी शीतलहर से कम नहीं है। सुबह-शाम की ठिठुरन और दिनभर ठंडी हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।

    उत्तर-पश्चिमी अंचल खासतौर पर ग्वालियर-चंबल संभाग इन दिनों घने कोहरे की चपेट में है। ग्वालियर भिंड मुरैना और दतिया जिलों में सुबह के समय कोहरा इतना घना हो रहा है कि सड़कें हाईवे और आसपास की इमारतें तक साफ दिखाई नहीं दे रही हैं। कई स्थानों पर दृश्यता बेहद कम दर्ज की गई जिससे वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह के वक्त लोग हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी रफ्तार से सफर करने को मजबूर हैं।मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में कल्याणपुर शहडोल करौंदी खजुराहो और ग्वालियर शामिल रहे। इन क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है। हालांकि दिन में धूप निकलने से कुछ घंटों के लिए राहत जरूर मिलती है लेकिन सूर्यास्त के बाद ठंड फिर से तीखी हो जाती है और रातें बेहद सर्द बनी हुई हैं।

    घने कोहरे का सीधा असर रेल यातायात पर भी पड़ रहा है। दिल्ली–भोपाल–इंदौर रूट पर चलने वाली कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से पहुंच रही हैं। यात्रियों के मुताबिक मालवा एक्सप्रेस झेलम एक्सप्रेस और सचखंड एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ठंड और अनिश्चितता के बीच इंतजार करना पड़ रहा है जिससे खासकर बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल ठंड का असर बना रहेगा लेकिन 15–16 जनवरी के बाद मौसम का मिजाज बदल सकता है। पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में सक्रिय हो रहा एक नया पश्चिमी विक्षोभ मध्य प्रदेश के मौसम को प्रभावित करेगा। इसके असर से 16 जनवरी के बाद अगले 3 से 4 दिनों तक प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश या मावठा होने की संभावना है।

    बारिश के बाद तापमान में हल्की बढ़ोतरी जरूर देखने को मिल सकती है लेकिन ठंड से तुरंत राहत मिलने की उम्मीद कम है। मौसम विभाग का कहना है कि बादलों और नमी के कारण रात के तापमान में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में लोगों को अभी कुछ दिन और सर्दी से सतर्क रहने की जरूरत है।कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में ठंड और कोहरे ने आम जनजीवन की रफ्तार धीमी कर दी है। आने वाले दिनों में बारिश जहां किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है वहीं फिलहाल ठंड का असर बरकरार रहने के संकेत हैं।

  • भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम

    भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम


    इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई 23 मौतों ने प्रशासन और सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। जिस इलाके में कुछ दिन पहले तक मातम पसरा हुआ था वहां अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। ज़मीन के नीचे से लेकर अदालत के गलियारों तक इस त्रासदी का असर साफ दिख रहा है। प्रशासनिक स्तर पर जहां सुधार कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं वहीं न्यायिक मोर्चे पर भी मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अहम सुनवाई प्रस्तावित है।

    भागीरथपुरा की सड़कों पर इन दिनों भारी हलचल है। पुलिस चौकी के सामने की मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी गलियों तक जेसीबी मशीनें लगातार खुदाई में जुटी हैं। कई जगह पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को हटाकर नई पाइप डाली जा रही हैं तो कहीं ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने का काम चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि नर्मदा जल आपूर्ति लाइन और सीवरेज व्यवस्था को पूरी तरह अलग किया जा रहा है ताकि दूषित पानी की समस्या भविष्य में दोबारा न हो।हालांकि इन सुधार कार्यों के चलते स्थानीय लोगों को फिलहाल भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह खुदी सड़कों कीचड़ और अधूरे भराव के कारण आवाजाही मुश्किल हो गई है। दोपहिया वाहन चालकों बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है। बावजूद इसके क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह असुविधा उन्हें मंजूर है अगर इससे भविष्य में किसी और परिवार को अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके की पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था वर्षों से बदहाल थी। इसको लेकर कई बार शिकायतें भी की गईं लेकिन समय रहते प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि यदि पहले ही सुधार कार्य किए गए होते तो शायद 23 निर्दोष लोगों की जान नहीं जाती।स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस त्रासदी की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। अब तक कुल 440 लोग दूषित पानी से बीमार होकर अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से 413 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है जबकि 27 मरीज अब भी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 8 मरीज आईसीयू में हैं और 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलाके में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि किसी भी नए मामले को समय रहते पकड़ा जा सके।

    न्यायिक स्तर पर भी मामला तूल पकड़ चुका है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दूषित पेयजल से जुड़ी पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने प्रशासन के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए थे कि यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब केवल एक स्थानीय हादसा नहीं रही बल्कि यह सिस्टम की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुकी है।

  • डॉक्टर भी हैरान, MP के रीवा में 50 साल से एक पल भी नहीं सोया ये शख्स

    डॉक्टर भी हैरान, MP के रीवा में 50 साल से एक पल भी नहीं सोया ये शख्स


    रीवा। मध्‍य प्रदेश के रीवा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर अच्छे-अच्छे डॉक्टर भी हैरान रह जाते हैं. रीवा शहर की चाणक्यपुरी कॉलोनी में रहने वाले 75 वर्षीय मोहनलाल द्विवेदी का दावा है कि उन्होंने पिछले करीब 50 सालों से एक पल के लिए भी नींद नहीं ली. हैरानी की बात ये है कि इतने लंबे समय तक न सोने के बावजूद उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं है और उनकी दिनचर्या बिल्कुल सामान्य लोगों जैसी है.

    जब मेडिकल साइंस भी रह गई जवाब ढूंढती
    मेडिकल साइंस के मुताबिक एक स्वस्थ इंसान को रोजाना 6 से 8 घंटे की नींद जरूरी होती है. नींद की कमी से शरीर और दिमाग पर गंभीर असर पड़ता है. लेकिन मोहनलाल द्विवेदी इस सिद्धांत को पूरी तरह चुनौती देते नजर आते हैं.

    नका कहना है कि न सिर्फ उन्हें नींद नहीं आती, बल्कि चोट लगने पर भी उन्हें दर्द का एहसास नहीं होता.
    पहले झाड़-फूंक, फिर बड़े शहरों के डॉक्टर
    शुरुआत में मोहनलाल ने अपनी इस समस्या को किसी से साझा नहीं किया. पूरी रात जागते रहते थे, लेकिन न आंखों में जलन होती थी और न ही कामकाज पर असर. जब परिवार को बताया गया तो पहले झाड़-फूंक करवाई गई. इसके बाद दिल्ली और मुंबई के बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों को दिखाया गया. कई तरह की जांचें हुईं, लेकिन बीमारी का कारण आज तक सामने नहीं आ सका.

    शानदार करियर, फिर भी नींद गायब
    मोहनलाल द्विवेदी का करियर भी किसी आम व्यक्ति से कम नहीं रहा. 1973 में लेक्चरर बने, 1974 में एमपीपीएससी पास कर नायब तहसीलदार बने, 2001 में ज्वाइंट कलेक्टर पद से रिटायर हुए. नींद की समस्या की शुरुआत 1973 के आसपास हुई और तब से आज तक उन्होंने सोने का अनुभव नहीं किया.
    किताबें, टहलना और शांत दिनचर्या
    मोहनलाल अपना ज्यादातर समय किताबें पढ़ने में बिताते हैं.

    रात के समय अक्सर छत पर टहलते नजर आते हैं. दिलचस्प बात ये भी है कि उनकी पत्नी भी दिन में सिर्फ 3 से 4 घंटे ही सोती हैं.
    डॉक्टर भी बोले-मामला अविश्वसनीय
    रीवा संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर राहुल मिश्रा का कहना है कि यह मामला मेडिकल साइंस के लिए बेहद चौंकाने वाला है. उनके मुताबिक, बिना सोए रहना लगभग असंभव है. हालांकि स्लीप थैरेपी और साइकोलॉजी में लगातार नए शोध हो रहे हैं. उन्होंने सलाह दी कि मोहनलाल को एक बार फिर साइकोलॉजी विभाग से संपर्क करना चाहिएइस्लामिक नाटो को लेकर पाक, सऊदी और तुर्की के बीच पक रही खिचड़ी, भारत के लिए चिंता?
  • पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास

    पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास


    भोपाल। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इस वर्ष भोपाल में एक नया और यादगार अध्याय जुड़ गया जब शहर में पहली बार भोजपाल पतंग महोत्सव का आयोजन किया गया। भेल स्थित जम्बूरी मैदान में आयोजित इस भव्य आयोजन ने पूरे शहर को पारंपरिक उल्लास और सामूहिक आनंद से भर दिया। बुधवार को हुए इस महोत्सव में 10 हजार से अधिक लोग अपने परिवार बच्चों और मित्रों के साथ शामिल हुए और खुले आसमान के नीचे रंग-बिरंगी पतंगों के साथ पर्व की खुशियां मनाईं।सुबह 10 बजे से शुरू हुआ यह पतंग महोत्सव शाम 5 बजे तक पूरे उत्साह और उमंग के साथ चला। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया आसमान में उड़ती सैकड़ों पतंगों ने जम्बूरी मैदान को एक जीवंत कैनवास में बदल दिया। बच्चों की किलकारियां युवाओं का जोश महिलाओं की मुस्कान और बुजुर्गों की उत्सुक भागीदारी ने इस आयोजन को एक पारिवारिक उत्सव का रूप दे दिया।

    इस आयोजन का श्रेय भोजपाल महोत्सव मेला समिति को जाता है जिसने शहर की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से इस पहल की। समिति की ओर से लगभग 2000 पतंगें और माझा नि:शुल्क वितरित किया गया ताकि हर वर्ग के लोग बिना किसी आर्थिक या अन्य बाधा के इस पर्व का आनंद ले सकें। पतंगबाजी के साथ-साथ महाप्रसादी के रूप में दो क्विंटल तिल-गुड़ के लड्डू और करीब 10 हजार लोगों के लिए खिचड़ी की व्यवस्था की गई जिसने मकर संक्रांति की मिठास और भी बढ़ा दी।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद आलोक शर्मा और विशिष्ट अतिथि भोपाल भाजपा जिला अध्यक्ष रविंद्र यति की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव संयोजक विकास वीरानी महामंत्री हरीश कुमार राम सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन कर महोत्सव की औपचारिक शुरुआत की। इसके बाद अतिथियों ने स्वयं लोगों को पतंग और माझा वितरित कर आयोजन का उत्साह दोगुना कर दिया।सुरक्षा को लेकर आयोजन में विशेष सावधानी बरती गई। चाइनीज मांझे के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया था। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव ने स्पष्ट किया कि केवल सूती और सुरक्षित धागे की ही अनुमति दी गई ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए आयोजन स्थल पर समिति के सदस्य और पुलिस टीम लगातार तैनात रही।

    आयोजन समिति के सदस्यों के अनुसार भोजपाल पतंग महोत्सव केवल पतंग उड़ाने का कार्यक्रम नहीं था बल्कि यह पारिवारिक मेल-जोल सामाजिक सौहार्द और पारंपरिक पर्वों की सामूहिक खुशी को साझा करने का एक मंच बना। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि शहरवासियों ने इस पहल को पूरे दिल से अपनाया है।समिति ने भविष्य में भी इस तरह के सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प जताया है ताकि भोपाल की पहचान एक ऐसे शहर के रूप में और मजबूत हो सके जहां परंपरा उत्सव और सामाजिक सहभागिता एक साथ जीवंत रहती है।