Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर में कोहराम पटेल ब्रिज के नीचे बस ने बाइक को मारी टक्कर आक्रोशित भीड़ ने बस को किया आग के हवाले

    इंदौर में कोहराम पटेल ब्रिज के नीचे बस ने बाइक को मारी टक्कर आक्रोशित भीड़ ने बस को किया आग के हवाले


    इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के व्यस्ततम इलाके पटेल ब्रिज के नीचे बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गईजब एक भीषण सड़क हादसे ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। शुक्ला ब्रदर्स की एक तेज रफ्तार यात्री बस ने एक बाइक सवार को जोरदार टक्कर मार दीजिसके बाद मौके पर मौजूद गुस्साई भीड़ ने कानून को हाथ में लेते हुए बस में आग लगा दी। देखते ही देखते बस आग के गोले में तब्दील हो गई और काले धुएं का गुबार पूरे आसमान में छा गया।

    टक्कर के बाद भड़का जन-आक्रोश यह घटना सुबह करीब 9:30 बजे की हैजब छोटी ग्वालटोली क्षेत्र में पटेल ब्रिज के नीचे यातायात का भारी दबाव था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसारशुक्ला ब्रदर्स की बस ने बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। गनीमत रही कि बाइक सवार को गंभीर चोटें नहीं आईंलेकिन इस हादसे ने वहां मौजूद लोगों के गुस्से को भड़का दिया। आरोप है कि चालक की लापरवाही से नाराज भीड़ ने बस को घेर लिया और उसमें आग लगा दी। आगजनी की आशंका इसलिए भी प्रबल है क्योंकि टक्कर के कुछ ही मिनटों बाद बस धू-धू कर जलने लगी थी।दमकल ने पाया काबूचालक मौके से फरार घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम और तुकोगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड के सब इंस्पेक्टर शोभाराम मालवीय ने बताया कि आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि दूर से ही दिखाई दे रही थीं। दमकलकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए एक टैंकर पानी की मदद से आग पर काबू पायालेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। हैरानी की बात यह रही कि आग लगने के दौरान बस का चालक मौके पर नहीं मिला आशंका है कि वह भीड़ के डर से वाहन छोड़कर भाग खड़ा हुआ।

    पुलिस की पड़ताल: दुर्घटना या साजिश? तुकोगंज थाना प्रभारी जितेंद्र यादव ने बताया कि बाइक सवार को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया हैजहाँ उसकी हालत खतरे से बाहर है। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि बस में आग तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट से लगी या फिर इसे भीड़ ने जानबूझकर लगाया। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आगजनी करने वाले संदिग्धों की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि यदि आगजनी की पुष्टि होती हैतो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यातायात हुआ बाधितलाखों का नुकसान ब्रिज के नीचे हुई इस घटना के कारण घंटों तक यातायात व्यवस्था चरमरा गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रूट को डायवर्ट किया और वैकल्पिक मार्गों से वाहनों को निकाला। इस अग्निकांड में बस पूरी तरह नष्ट हो गई हैजिससे बस ऑपरेटर को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। फिलहालपुलिस बस चालक की तलाश कर रही है और बाइक सवार के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

  • सनातन धर्म की मुखर आवाज हर्षा रिछारिया का बड़ा फैसला, प्रचार कार्य से लिया पूर्ण विराम

    सनातन धर्म की मुखर आवाज हर्षा रिछारिया का बड़ा फैसला, प्रचार कार्य से लिया पूर्ण विराम


    ग्वालियर। अपनी ओजस्वी वाणी और प्रखर तर्कों के माध्यम से सोशल मीडिया पर सनातन धर्म का पक्ष रखने वाली चर्चित व्यक्तित्व हर्षा रिछारिया ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। हर्षा ने घोषणा की है कि वह अब सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के कार्यों से विराम ले रही हैं। लंबे समय से हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को युवाओं तक पहुँचाने में सक्रिय रहीं हर्षा के इस निर्णय ने उनके लाखों प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया है।

    अचानक लिए गए निर्णय के पीछे के संकेत हर्षा रिछारिया ने अपने आधिकारिक माध्यमों से जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह अब इस क्षेत्र से दूरी बना रही हैं। हालांकि उन्होंने इस फैसले के पीछे किसी एक विशिष्ट कारण का उल्लेख नहीं किया है लेकिन उनके इस कदम को उनके निजी जीवन और आत्ममंथन से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी इच्छा से यह विराम ले रही हैं और भविष्य में उनकी क्या योजनाएं हैं इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है।

    सोशल मीडिया पर रहा है गहरा प्रभाव गौरतलब है कि हर्षा रिछारिया ने बहुत कम समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई थी। उनके वीडियो और वक्तव्य अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते थे जिनमें वे सनातन परंपराओं शास्त्रों और समसामयिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखती थीं। उनके तर्कपूर्ण वीडियो के कारण ही वे युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुईं। उनके इस विराम से उन लोगों में निराशा है जो उन्हें धर्म के एक सशक्त पक्षकार के रूप में देखते थे।

    क्या यह स्थाई विदाई है? हर्षा के इस फैसले के बाद इंटरनेट पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे उनकी निजी पसंद मान रहे हैं तो कुछ का मानना है कि वे किसी नए स्वरूप में वापसी कर सकती हैं। फिलहाल उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे अभी किसी भी प्रकार के सार्वजनिक प्रचार कार्य का हिस्सा नहीं रहेंगी। उनके समर्थकों ने उनके इस निर्णय का सम्मान करते हुए उनके सुखद भविष्य की कामना की है।

  • भोपाल-इंदौर हाईवे पर बड़ा हादसा: भौरी जोड़ के पास 3-4 कारों की भिड़ंत, 6 से अधिक लोग घायल

    भोपाल-इंदौर हाईवे पर बड़ा हादसा: भौरी जोड़ के पास 3-4 कारों की भिड़ंत, 6 से अधिक लोग घायल


    भोपाल । भोपाल-इंदौर हाईवे पर मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भौरी जोड़ के पास तीन से चार कारों की आपस में जोरदार टक्कर हो गई, जिसमें 6 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसा इतना भीषण था कि कई वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और हाईवे पर कुछ समय के लिए ट्रैफिक पूरी तरह से ठप हो गया।
    घायलों को तुरंत घटनास्थल से एम्बुलेंस द्वारा नजदीकी अस्पताल भेजा गया जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की। घटना के बाद पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट किया जिससे सड़क पर लंबा जाम लग गया। पुलिस द्वारा स्थिति को नियंत्रित किया गया और यातायात को पुनः बहाल किया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह हादसा तेज रफ्तार या लेन बदलने की कोशिश के कारण हुआ हो सकता है। हालांकि पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है कि क्या हादसे का कारण ओवरस्पीडिंग लापरवाही या कोई अन्य वजह थी। हाईवे पर इस तरह के हादसे से यातायात प्रभावित होने के अलावा दुर्घटना में घायलों की बढ़ती संख्या ने सुरक्षा के मुद्दे को भी उजागर किया है। पुलिस और प्रशासन अब हादसे के कारणों का पता लगाने और भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए जरूरी कदम उठाने की योजना बना रहे हैं।

  • मध्य प्रदेश में सर्द हवाओं का सितम जारी, लेकिन कोहरे से मिली राहत, 15 से बदलेगा मौसम

    मध्य प्रदेश में सर्द हवाओं का सितम जारी, लेकिन कोहरे से मिली राहत, 15 से बदलेगा मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में ठंड का दौर लगातार जारी है, हालांकि पिछले कुछ दिनों की तुलना में कोहरे से लोगों को कुछ राहत मिली है। ज्यादातर इलाकों में आसमान साफ रहा और दिन में धूप निकलने से हल्की राहत महसूस की गई। भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में सुबह हल्का से मध्यम कोहरा देखने को मिला। उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं का असर प्रदेश के उत्तरी जिलों में ज्यादा दिखाई दे रहा है।
    मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा और धूप खिलने की संभावना है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में दिन के समय तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी होगी, लेकिन रात की ठंड बरकरार रहेगी। ग्वालियर-चंबल अंचल के साथ सागर और रीवा संभाग में सर्दी का असर अभी कम होने के आसार नहीं हैं।

    बुधवार सुबह ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में कोहरे के कारण दृश्यता प्रभावित रही। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सीहोर, शाजापुर, देवास समेत 15 से अधिक जिलों में विजिबिलिटी 2 से 4 किलोमीटर के बीच दर्ज की गई। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा। फिलहाल कहीं भी शीतलहर या कोल्ड डे का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    उत्तरी हिस्सों में कड़ाके की ठंड, ग्वालियर–कटनी रहे सबसे ठंडे
    प्रदेश के उत्तरी जिलों में बर्फीली हवाओं के कारण न्यूनतम तापमान काफी नीचे चला गया है। मंगलवार रात ग्वालियर, छतरपुर का नौगांव और कटनी का करौंदी प्रदेश के सबसे ठंडे स्थान रहे। ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री, कटनी के करौंदी में 4.7 डिग्री, सतना के चित्रकूट में 5.3 डिग्री और नौगांव में 5.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। कोहरे की वजह से रेल यातायात पर भी असर पड़ा और कई ट्रेनें देरी से चलीं। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में तापमान 5.8 डिग्री दर्ज किया गया। खजुराहो में 6 डिग्री, दतिया में 6.2 डिग्री, मंडला और राजगढ़ में 6.4 डिग्री तथा रीवा में 6.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री, इंदौर में 9.5 डिग्री, उज्जैन में 11 डिग्री और जबलपुर में 9.5 डिग्री दर्ज हुआ।

    दिन में भी ठंड का असर
    मंगलवार को दिन के तापमान में भी खास बढ़ोतरी नहीं हो सकी। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 24.3 डिग्री, दतिया में 23.4 डिग्री और श्योपुर में 23.2 डिग्री रहा। पचमढ़ी में 21.8 डिग्री, खजुराहो में 23.4 डिग्री, नौगांव में 23.5 डिग्री, रीवा में 22.4 डिग्री, सीधी में 23 डिग्री, टीकमगढ़ और उमरिया में 24 डिग्री तथा मलाजखंड में 23 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    15 जनवरी से बदलेगा मौसम का मिजाज
    मौसम विभाग ने बताया कि 15 जनवरी से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से दो से तीन दिन बाद मध्य प्रदेश के मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। खास तौर पर उत्तरी जिलों में मावठा गिरने की संभावना जताई गई है।

  • ग्वालियर: ड्यूटी से लौटकर युवक ने लगाया मौत को गले, सूने कमरे में फंदे से झूलती मिली लाश

    ग्वालियर: ड्यूटी से लौटकर युवक ने लगाया मौत को गले, सूने कमरे में फंदे से झूलती मिली लाश


    ग्वालियर। शहर के हजीरा थाना क्षेत्र में मंगलवार की शाम एक हृदयविदारक घटना सामने आई जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक 27 वर्षीय ऊर्जावान युवक जो कुछ ही घंटों पहले अपनी ड्यूटी पूरी कर घर लौटा था उसने अज्ञात कारणों के चलते अपने ही कमरे में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। जब पिता ने कमरे का दरवाजा खोला तो सामने का मंजर देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर की खुशियाँ पल भर में मातम में बदल गईं और चीख-पुकार से पूरा मोहल्ला दहल उठा।

    सामान्य दिनचर्या और अचानक उठाया खौफनाक कदम मृतक की पहचान लाइन नंबर-8 निवासी राकेश दुरखरिया 27 के रूप में हुई है। राकेश एक निजी फर्म में नौकरी करता था और अपने परिवार का सहारा था। परिजनों के अनुसार मंगलवार का दिन भी अन्य दिनों की तरह सामान्य था। राकेश सुबह तैयार होकर काम पर गया और दिन भर मेहनत करने के बाद शाम को घर लौटा। घर आने के बाद उसने परिजनों से सामान्य बातचीत की और अपने कमरे में चला गया। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कमरे के बंद दरवाजे के पीछे वह मौत का रास्ता चुन लेगा।

    जब पिता ने देखा हृदयविदारक दृश्य काफी देर तक जब राकेश कमरे से बाहर नहीं आया और भीतर से कोई आहट नहीं हुई तो पिता को चिंता हुई। उन्होंने आवाज लगाई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब उन्होंने दरवाजा खोलकर भीतर झांका तो राकेश फंदे से लटका हुआ था। पिता की चीख सुनकर परिवार के अन्य सदस्य और पड़ोसी मौके पर दौड़े। आनन-फानन में उसे नीचे उतारा गया और नब्ज टटोली गई लेकिन तब तक राकेश की सांसें थम चुकी थीं।

    बिना सुसाइड नोट के उलझी गुत्थी सूचना मिलते ही हजीरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस को तलाशी के दौरान कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। राकेश के व्यवहार में भी हाल-फिलहाल कोई बदलाव नहीं देखा गया था जिससे आत्महत्या की वजह और भी रहस्यमयी हो गई है। पुलिस अब युवक के मोबाइल कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स को खंगाल रही है ताकि मौत के पीछे छिपे संभावित तनाव या कारणों का पता लगाया जा सके।

    सदमे में परिवार जांच जारी हजीरा थाना पुलिस का कहना है कि प्राथमिक तौर पर मामला आत्महत्या का ही नजर आ रहा है लेकिन बिना किसी पुख्ता सबूत के ठोस कारण बताना जल्दबाजी होगी। फिलहाल मर्ग कायम कर लिया गया है। परिजनों की स्थिति अभी बयान देने लायक नहीं है; उनके सामान्य होने पर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। क्या यह कदम किसी कार्यस्थल के दबाव आर्थिक तंगी या किसी निजी उलझन का परिणाम था यह जांच का मुख्य विषय है। इस घटना ने एक बार फिर युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव और अचानक लिए जाने वाले घातक फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।ग्वालियर के हजीरा थाना क्षेत्र में 27 वर्षीय निजी कर्मचारी राकेश दुरखरिया ने ड्यूटी से लौटने के बाद घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है जिससे मौत के कारण रहस्य बने हुए हैं। पुलिस मोबाइल और अन्य साक्ष्यों के जरिए मामले की जांच कर रही है।

  • मकर संक्रांति पर नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी ठंड में ,हर हर नर्मदे,के जयकारे

    मकर संक्रांति पर नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी ठंड में ,हर हर नर्मदे,के जयकारे


    नर्मदापुरम । मकर संक्रांति का पर्व हर वर्ष सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है और इसी दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं। मकर संक्रांति का पर्व प्रकृति सूर्य उपासना और मानव जीवन के संतुलन का प्रतीक है। इस दिन से खरमास का अंत होता है और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन को लेकर नर्मदापुरम बैतूल छिंदवाड़ा भोपाल जैसे बड़े शहरों से श्रद्धालु नर्मदा तट पर आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे।

    नर्मदापुरम के प्रसिद्ध सेठानी घाट पर सुबह 4:00 बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। कड़कड़ाती ठंड में भी श्रद्धालु “हर हर नर्मदे” के जयकारे लगाते हुए नर्मदा नदी में स्नान करने पहुंचे। मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से तिल और खिचड़ी का दान करना पवित्र माना जाता है और श्रद्धालु यहां आकर सत्यनारायण भगवान की पूजा के बाद इन दानों को नर्मदा नदी में अर्पित कर रहे हैं। दरिद्र नारायण को कंबल और अन्य वस्तुएं भेंट करने की भी परंपरा है जिसे श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा से निभा रहे हैं।

    मकर संक्रांति के पर्व पर नेमावर के पेढ़ी घाट सिद्धनाथ घाट और नागर घाट पर भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। यहां देवास हरदा और सीहोर जिले से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। ठंड में भी श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में आस्था की डुबकी लगाई और नर्मदे हर के उद्घोष के साथ सूर्योदय का स्वागत किया। मकर संक्रांति के दिन स्नान दान और सूर्य उपासना का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां श्रद्धालुओं ने अनाज कपड़े तिल खिचड़ी और अन्य सामग्री का दान किया।

    सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और पुलिस ने घाटों पर पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। शास्त्रों में मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव को विशेष वस्तुएं अर्पित करने का विधान है जिनमें लाल वस्त्र गेहूं गुड़ मसूर दाल तांबा स्वर्ण सुपारी नारियल और दक्षिणा शामिल हैं। इन धार्मिक क्रियाओं के साथ श्रद्धालु अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कुल मिलाकर मकर संक्रांति का यह पर्व नर्मदा तट पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम बनकर उभरा जहां लाखों श्रद्धालुओं ने एक साथ आकर इस पवित्र दिन का लाभ उठाया।

  • कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का विवादित बयान: SC-ST विधायकों की स्थिति ‘कुत्ते जैसी’ आदिवासियों को हिंदू न बनने देने की बात कही

    कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का विवादित बयान: SC-ST विधायकों की स्थिति ‘कुत्ते जैसी’ आदिवासियों को हिंदू न बनने देने की बात कही


    भोपाल । मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने अपने विवादित बयानों से एक बार फिर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति के विधायकों और सांसदों की स्थिति की तुलना कुत्ते से की है। उनका कहना था कि जब SC/ST समुदाय के जनप्रतिनिधि जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम में आते हैं तो उनकी स्थिति वैसी हो जाती है जैसे कुत्ते के मुंह में बंधी पट्टी जिसे काटने की बात तो छोड़िए वह कुत्ता भौंक भी नहीं सकता। यह बयान भोपाल में कांग्रेस की डिक्लेरेशन-2 ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक के दौरान दिया गया जहां मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

    बरैया ने जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम को SC/ST समुदाय के लिए एक बड़ी समस्या बताया। उनका मानना है कि इस व्यवस्था के कारण बाबा साहब अंबेडकर का सपना पूरा नहीं हो सका। वे चाहते हैं कि SC/ST के लिए सेपरेट इलेक्टोरल सिस्टम लागू किया जाए ताकि उनकी स्थिति बेहतर हो सके। बरैया ने आदिवासी समुदाय को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उनका कहना था कि आदिवासियों को हिंदू नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरना धर्म की स्थापना की गई है और आदिवासियों को सरना धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

    उनका दावा था कि अगर आदिवासी सरना धर्म अपनाते हैं तो उनके लिए मुक्ति का मार्ग खुल सकता है। बरैया ने यह भी कहा कि आदिवासी आज भी सिविलाइज नहीं हैं और जंगलों के कटने से उनका ज्ञान और संस्कृति प्रभावित हो रही है। यह बयान कांग्रेस पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन सकता है क्योंकि बरैया का यह बयान न केवल समाज के एक बड़े वर्ग को आहत कर सकता है बल्कि पार्टी के भीतर भी विवाद पैदा कर सकता है। इसके अलावा इस तरह के बयान कांग्रेस की छवि को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं खासकर जब पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और विक्रांत भूरिया जैसे लोग मंच पर मौजूद थे।

    सेपरेट इलेक्टोरल के संदर्भ में बरैया का बयान यह बताता है कि वे चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलाव के पक्षधर हैं। सेपरेट इलेक्टोरल एक ऐसी प्रणाली है जिसमें चुनावी प्रक्रिया को जाति धर्म या वर्ग के आधार पर विभाजित किया जाता है। यह व्यवस्था ब्रिटिश काल में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व के लिए लागू की गई थी लेकिन संविधान सभा में इसकी आलोचना हुई और इसे समाप्त कर दिया गया। भारत ने जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम अपनाया जिसमें सभी वर्ग एक साथ वोट डालते हैं लेकिन आरक्षित सीटों पर SC/ST समुदाय के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं।विधायक बरैया के इस बयान ने एक बार फिर उनकी राजनीति और कांग्रेस पार्टी के भीतर के विवादों को सामने ला दिया है और यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस पर किस तरह का रुख अपनाती है।

  • प्राइवेट स्कूलों की मान्यता व नवीनीकरण के लिए आवेदन की अंतिम तिथि अब 20 जनवरी 2026

    प्राइवेट स्कूलों की मान्यता व नवीनीकरण के लिए आवेदन की अंतिम तिथि अब 20 जनवरी 2026


    भोपाल!
    राज्य शिक्षा केन्द्र, ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत संचालित प्राइवेट स्कूलों की मान्यता एवं मान्यता नवीनीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए सभी अशासकीय विद्यालयों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन माध्यम से मान्यता नवीनीकरण अथवा नवीन मान्यता के लिए आवेदन करना होगा।

    राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूर्व में आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2025 निर्धारित की गई थी, किन्तु तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए इसे बढ़ाकर अब 20 जनवरी 2026 कर दिया गया है।

    राज्य शिक्षा केन्द्र ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार नियम 11 के उपनियम 4(ग) के तहत यदि कोई स्कूल निर्धारित समय-सीमा में ऑनलाइन आवेदन नहीं करता है, तो उस स्कूल को मान्यता विहीन माना जाएगा और विद्यालय का संचालन शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 18 के अंतर्गत दंडनीय अपराध होगा।

  • मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव आज उज्जैन में करेंगे श्रीमहाकाल महोत्सव का शुभारंभ

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव आज उज्जैन में करेंगे श्रीमहाकाल महोत्सव का शुभारंभ


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 जनवरी को श्रीमहाकाल महालोक उज्जैन में पाँच दिवसीय ‘श्रीमहाकाल महोत्सव’ का शुभारंभ करेंगे। 18 जनवरी 2026 तक चलने वाला यह महोत्सव श्रीमहाकाल महालोक और त्रिवेणी संग्रहालय के प्रांगण में कला, संगीत और वैचारिक विमर्श का अनूठा संगम होगा। वीर भारत न्यास और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में यह महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर भारतीय संस्कृति, कला और अटूट श्रद्धा के महोत्सव की साक्षी बनने जा रही है।

    5 दिनों तक बहेगी संगीत सरिता

    महोत्सव की मुख्य सभाओं में देश के ख्यातिलब्ध कलाकार भगवान शिव की आराधना अपनी स्वर-लहरियों से करेंगे। 14 जनवरी: महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ ‘शिवोऽहम्’ की संगीतमय प्रस्तुति देंगे। 15 जनवरी: मुम्बई का प्रसिद्ध ‘द ग्रेट इंडियन क्वायर’ ‘शिवा’ थीम पर प्रस्तुति देगा। 16 जनवरी: सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीत यात्रा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी। 17 जनवरी: इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं मुम्बई के विपिन अनेजा व उनके बैंड द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति होगी। 18 जनवरी: महोत्सव का समापन इंडोनेशिया (कोकोरदा पुत्रा) और श्रीलंका (अरियारन्ने कालूराच्ची) के दलों द्वारा प्रस्तुत ‘शिव केंद्रित नृत्य नाटिका’ से होगा, जो महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को दर्शाएगा।

    त्रिवेणी संग्रहालय में प्रतिदिन जनजातीय संस्कृति के होंगे दर्शन

    महोत्सव में प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्यप्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दर्शन होंगे। इसमें छिंदवाड़ा का भड़म, बैतूल का ठाट्या, धार का भगोरिया और सागर का बरेदी जैसे पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन होगा। प्रतिदिन निकलने वाली ‘कला यात्रा’ शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए श्रीमहाकाल लोक पहुँचेगी। इसमें शिव बारात, डमरू वादन और मलखंब के रोमांचक प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होंगे।

    15 जनवरी को होगा बौद्धिक विमर्श

    सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ, 15 जनवरी को प्रातः 10:30 बजे एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसका विषय ‘शिव तत्त्व और महाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में’ रखा गया है, जहाँ विद्वान शिव तत्व की दार्शनिक गहराईयों पर प्रकाश डालेंगे। आमजन को इस भक्तिमय उत्सव में सहभागी होने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।

  • MP की राजनीति हिली! दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस नेता के राज्यसभा मार्ग पर सस्पेंस

    MP की राजनीति हिली! दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस नेता के राज्यसभा मार्ग पर सस्पेंस

    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा सीट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। यह बयान कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा लिखे गए पत्र के संदर्भ में आया था। पत्र में आग्रह किया गया था कि आगामी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से किसी नेता को उम्मीदवार बनाना चाहिए। इस मांग के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई और सवाल उठने लगा कि क्या दिग्विजय सिंह एक बार फिर राज्यसभा जाएंगे या नहीं।

    दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया, “यह मेरे हाथ में नहीं है। पार्टी का फैसला जो भी होगा, वह सर्वमान्य होगा। इतना जरूर मैं कह सकता हूं कि मैं अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहा हूं।” उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार दिग्विजय सिंह राज्यसभा के लिए नहीं जाएंगे, जिससे मध्य प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं।

    दिग्विजय सिंह का वर्तमान कार्यकाल इस वर्ष जून में समाप्त हो रहा है। राज्य में कुल तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। कांग्रेस के पास 64, बीएपी के पास 1 और भारतीय जनता पार्टी के पास 165 विधायक हैं। इस हिसाब से राजनीतिक समीकरण, दलों की ताकत और उम्मीदवारों का चयन सभी के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    राज्यसभा सीटों की इस लड़ाई में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से उम्मीदवार का चयन पार्टी की छवि और स्थानीय समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद अब कांग्रेस के नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सस्पेंस और रणनीति का माहौल है। राजनीतिक विश्लेषक इसे मध्य प्रदेश की सियासत में एक नया मोड़ भी मान रहे हैं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव हमेशा पार्टी की भीतरी ताकत और प्रभाव को दिखाने का मौका होते हैं।

    इस घटना ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में सामुदायिक समीकरणों और अनुभव को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना रही है। दिग्विजय सिंह का यह कदम पार्टी के भीतर नए नेताओं के लिए अवसर और सियासी समीकरणों में बदलाव ला सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत को रोचक और रणनीतिक मोड़ दे दिया है, और अब सबकी निगाहें आगामी राज्यसभा चुनाव पर टिकी हुई हैं।