Category: Madhya Pradesh

  • एमपी टीईटी 2026 में शिक्षकों का विरोध बरकरार, तारीख तीन बार बढ़ाने और ऑफलाइन परीक्षा के फैसले के बावजूद आवेदन कम

    एमपी टीईटी 2026 में शिक्षकों का विरोध बरकरार, तारीख तीन बार बढ़ाने और ऑफलाइन परीक्षा के फैसले के बावजूद आवेदन कम

    मध्य प्रदेश। में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी 2026 को लेकर शिक्षकों का विरोध जारी है। आवेदन की समयसीमा तीन बार बढ़ाए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों ने परीक्षा के लिए पंजीयन नहीं कराया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, परीक्षा के लिए करीब 30 हजार शिक्षकों ने ही आवेदन किया है, जबकि प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख शिक्षक इसके दायरे में आते हैं। इस तरह करीब 1.20 लाख शिक्षकों ने निर्धारित समय तक फॉर्म नहीं भरा। आवेदन की अंतिम तारीख 11 अक्टूबर थी।

    आवेदन प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों को अतिरिक्त समय देने के लिए तीन बार समयसीमा बढ़ाई गई थी। इसके बावजूद पंजीयन की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ी। कुल डेढ़ लाख शिक्षकों की तुलना में लगभग 30 हजार पंजीयन का आंकड़ा बताता है कि बड़ी संख्या में शिक्षक अभी भी परीक्षा से दूर हैं। इस स्थिति के पीछे शिक्षकों का विरोध प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। शिक्षक संगठन लंबे समय से सेवा दे रहे अध्यापकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि जो शिक्षक पहले से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर प्रदेश में आंदोलन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए आयोग बनाने का भरोसा दिया था और उनसे परीक्षा के फॉर्म भरने की अपील की थी। इसके बाद शिक्षकों ने अपना आंदोलन स्थगित किया, लेकिन उनकी मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में दोबारा प्रदर्शन करने का विकल्प खुला रखा है। टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग अब भी विवाद का मुख्य विषय बनी हुई है।

    सरकार ने परीक्षा के तरीके को लेकर भी बदलाव का फैसला किया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन परीक्षा कराने की घोषणा की थी। इसके बाद ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह कदम शिक्षकों की मांगों के बीच उठाया गया था, लेकिन इससे विरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। शिक्षकों की मुख्य मांग परीक्षा के माध्यम को बदलने के बजाय टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने की है।

    शुरुआत में परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी ईएसबी को दी गई थी। इसके तहत 12 अक्टूबर से परीक्षा कराने की तैयारी की गई थी, लेकिन ऑफलाइन परीक्षा के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो सकीं। इसी कारण तय कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा नहीं हो पाई। ऑफलाइन परीक्षा में अभ्यर्थियों को कंप्यूटर के बजाय कागज पर प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। इसके लिए परीक्षा केंद्रों और अन्य जरूरी संसाधनों की अलग व्यवस्था करनी पड़ती है।

    अब परीक्षा कराने के लिए दूसरी एजेंसी की तलाश की जा रही है। हायर एजुकेशन बोर्ड के माध्यम से दिसंबर में परीक्षा आयोजित कराने की तैयारी बताई गई है। हालांकि, यह योजना अभी तैयारी के स्तर पर है और परीक्षा की नई तारीख या आगे की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में शिक्षकों के सामने परीक्षा की तारीख और अनिवार्यता से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार बना हुआ है। आवेदन के आंकड़े बताते हैं कि तारीख बढ़ाने और परीक्षा के तरीके में बदलाव के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक अब तक पंजीयन से दूर हैं।

  • ग्वालियर के 400 कमरों वाले जय विलास पैलेस के बिजली बिलों पर सवाल, कई कनेक्शनों में सालभर शून्य या बेहद कम खपत दर्ज

    ग्वालियर के 400 कमरों वाले जय विलास पैलेस के बिजली बिलों पर सवाल, कई कनेक्शनों में सालभर शून्य या बेहद कम खपत दर्ज

    मध्य प्रदेश । के ग्वालियर स्थित जय विलास पैलेस के बिजली बिलों और खपत के आंकड़ों को लेकर सवाल उठे हैं। करीब 80 एकड़ में फैले इस महल में लगभग 400 कमरे हैं और बिजली कंपनी के कुल 21 कनेक्शन बताए गए हैं। इन कनेक्शनों के बिलों की पड़ताल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पिछले 12 महीनों के दौरान बिजली की खपत शून्य या बेहद कम दर्ज की गई। अधिकांश कनेक्शनों पर पुराने मीटर लगे होने की जानकारी भी सामने आई है। महल के रानी महल वाले हिस्से में ज्योतिरादित्य सिंधिया का परिवार रहता है।

    उपलब्ध बिजली बिलों के अनुसार, रानी महल वाले हिस्से में लगे स्मार्ट मीटर पर पिछले 12 महीनों में कुल 360.389 यूनिट बिजली खपत दर्ज की गई। वहीं, महादजी चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर दर्ज घरेलू कनेक्शन में अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक सभी 12 महीनों में शून्य यूनिट खपत दिखाई गई। इस दौरान इस कनेक्शन पर कुल 1006 रुपये का बिल जारी हुआ, जिसमें अन्य शुल्क शामिल बताए गए हैं। बिलों में नियमित रीडिंग दर्ज होने की बात भी कही गई है।

    एक अन्य कनेक्शन चीफ सेक्रेटरी टू श्रीमंत हिज हाईनेस महाराजा के नाम पर दर्ज है। यह कनेक्शन 31 जुलाई 2015 को लगाया गया था और इस पर एक किलोवाट का विद्युत भार स्वीकृत है। नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक इसमें 2016 यूनिट बिजली की खपत दर्ज की गई। इस कनेक्शन पर 14,777 रुपये बकाया बताए गए, जिनमें पिछले महीनों की 14,686 रुपये की बिल राशि शामिल थी। बिल जमा करने की अंतिम तारीख 14 अक्टूबर 2026 दर्ज थी।

    पैलेस गार्डन स्थित एक व्यावसायिक कनेक्शन में अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच केवल पांच यूनिट बिजली खपत दर्ज की गई। यह कनेक्शन एक जुलाई 1980 को लगाया गया था और इस पर तीन किलोवाट का विद्युत भार स्वीकृत है। इसी तरह, वसुंधरा राजे चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर दर्ज कनेक्शन में एक साल के दौरान 2764 यूनिट खपत सामने आई। इस कनेक्शन पर 24,687 रुपये का पिछला बिल बकाया बताया गया था। अगस्त 2026 के बिल की राशि 471 रुपये दर्ज थी।

    मन्नू महल पैलेस के नाम पर दर्ज घरेलू कनेक्शन में अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक शून्य यूनिट खपत दिखाई गई। जूनियर महारानी स्वीट हाउस के पते पर दर्ज एक अन्य कनेक्शन में भी 12 महीनों तक बिजली खपत शून्य रही, जबकि इस अवधि में कुल 1322 रुपये का बिल आया। द महारानी स्वीट हाउस के नाम पर दर्ज कनेक्शन में भी पूरे साल शून्य यूनिट खपत दर्ज की गई और बिल की कुल राशि 1388 रुपये बताई गई।

    पैलेस परिसर के अन्य कनेक्शनों में भी बहुत कम खपत के आंकड़े सामने आए। एमपी सिंह सेक्रेटरी के नाम पर दर्ज दो कनेक्शनों में एक साल के दौरान दो-दो यूनिट बिजली खपत दर्ज की गई। इन पर क्रमशः 957 रुपये और 1180 रुपये का बिल बताया गया। वहीं, हिरनवन कोठी के पीआरओ के नाम पर दर्ज कनेक्शन में नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक केवल एक यूनिट बिजली खपत दर्ज हुई। इस कनेक्शन की सालाना बिल राशि 6700 रुपये बताई गई। इन आंकड़ों के साथ कई कनेक्शनों पर पुराने मीटर लगे होने की जानकारी भी दी गई है।

    जय विलास पैलेस परिसर के एक हिस्से में स्थित उषा किरण पैलेस होटल का बिजली कनेक्शन अलग है। होटल का संचालन ताज समूह के अधीन होता है और यहां 50 कमरे बताए गए हैं। होटल के पास 400 किलोवोल्ट एम्पियर क्षमता का अलग उच्च तनाव वाला कनेक्शन है। अगस्त महीने का इसका बिजली बिल 18 लाख 11 हजार 67 रुपये बताया गया है। यह बिल होटल के पृथक कनेक्शन का है, इसलिए इसे महल के अन्य घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शनों से अलग रखा गया है।

    बिजली कंपनी के उपमहाप्रबंधक गगनदेव शर्मा ने कहा कि होटल का बिल हर महीने जारी होता है और उसका कनेक्शन अलग है। उन्होंने यह भी कहा कि जय विलास पैलेस के घरेलू तथा व्यावसायिक कनेक्शनों पर बिल कम आने या खपत कम दर्ज होने के मामले की जांच कराई जा सकती है। हालांकि, आगे की कार्रवाई के बारे में दोबारा पूछे जाने पर कोई जानकारी नहीं दी गई। महल के प्रबंधक मयंक मधुकर और ज्योतिरादित्य सिंधिया के जनसंपर्क अधिकारी अनिल मिश्रा से भी पक्ष मांगा गया, लेकिन उन्होंने जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। बिजली कंपनी के महाप्रबंधक से भी लिखित जवाब मांगा गया, पर प्रतिक्रिया नहीं मिली।

  • बैतूल के मां चंडी दरबार पर बढ़ा विवाद, आदिवासी संगठनों ने मंदिर और जमीन का प्रबंधन ग्राम सभा को सौंपने की मांग उठाई

    बैतूल के मां चंडी दरबार पर बढ़ा विवाद, आदिवासी संगठनों ने मंदिर और जमीन का प्रबंधन ग्राम सभा को सौंपने की मांग उठाई


    मध्य प्रदेश ।
    के बैतूल जिले की चिचोली तहसील के गोधना गांव में स्थित मां चंडी दरबार को लेकर विवाद बढ़ गया है। रविवार को जिले के अलग-अलग इलाकों से आदिवासी समुदाय और सामाजिक संगठनों के लोग मंदिर परिसर पहुंचे और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गर्भगृह के पास बलि देकर अपना विरोध दर्ज कराया। उनकी प्रमुख मांग है कि मंदिर और उससे जुड़ी जमीन का प्रबंधन ग्राम सभा को सौंपा जाए, ताकि धार्मिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं से जुड़े फैसलों में समुदाय की भागीदारी बनी रहे।

    आदिवासी समाज का कहना है कि मां चंडी दरबार सैकड़ों साल पुराना धार्मिक स्थल है और उसका गहरा संबंध उनकी आस्था तथा परंपराओं से है। समुदाय के लोगों के मुताबिक, मां चंडी को कली कंकाली दाई के नाम से भी जाना जाता है और गोंडवाना शासन के समय से ही उन्हें आदिवासी समाज की आराध्य माना जाता रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मंदिर का संचालन निजी हाथों में जाने के बाद से उनकी नाराजगी बढ़ी है। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था के कारण पूजा-पाठ और मंदिर प्रबंधन से जुड़ी पुरानी परंपराओं में बदलाव किए गए हैं।

    मंदिर के संचालन को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद व्यवस्था में बदलाव हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत के आदेश के बाद मंदिर का संचालन स्थानीय यादव परिवार को सौंपा गया। आदिवासी समुदाय का आरोप है कि इसके बाद पहले से चली आ रही पूजा-पाठ की व्यवस्था में परिवर्तन किया गया और पुरानी संचालन समिति को हटा दिया गया। इसके साथ ही पुराने मंदिर के ढांचे को हटाकर नया निर्माण कराया जा रहा है। समुदाय के लोगों का कहना है कि इन बदलावों से उनकी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर असर पड़ रहा है।

    प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि मंदिर और जमीन के प्रबंधन से संबंधित निर्णय ग्राम सभा की भागीदारी से लिए जाएं। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों की आस्था से जुड़े विषयों में समुदाय की राय को महत्व दिया जाना चाहिए। आदिवासी समाज के मुताबिक, हर रविवार और बुधवार को मां चंडी दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर की पूजा व्यवस्था और परंपराओं को लेकर होने वाले फैसलों में स्थानीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    आदिवासी संगठनों ने अपनी मांग के समर्थन में पेसा कानून और वनाधिकार कानून का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि इन कानूनों में आदिवासी परंपराओं और अधिकारों की रक्षा से संबंधित प्रावधान हैं। समुदाय के लोग हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करने की बात कह रहे हैं, लेकिन उनका आरोप है कि मामले की सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन की ओर से जरूरी तथ्य अदालत के सामने नहीं रखे गए। यह आरोप आदिवासी समाज की ओर से लगाया गया है।

    दूसरी ओर, मंदिर के संचालन से जुड़े विवाद में यादव परिवार की जमीन होने की बात भी सामने आई है। विवाद बढ़ने के बाद परिवार ने सहयोग करने की बात कही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में परिवार की ओर से सहयोग के स्वरूप या प्रबंधन को ग्राम सभा को सौंपने की मांग पर किसी विस्तृत निर्णय का उल्लेख नहीं है।

    मां चंडी दरबार को लेकर विवाद का मुख्य केंद्र मंदिर की संचालन व्यवस्था, जमीन के प्रबंधन और पारंपरिक पूजा-पद्धति में बदलाव का मुद्दा है। आदिवासी और सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे मंदिर और जमीन के प्रबंधन में ग्राम सभा की भागीदारी चाहते हैं। फिलहाल, इस मांग और उससे जुड़े आरोपों के बीच मंदिर के संचालन को लेकर विवाद बना हुआ है।

  • कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलेगा कारण

    कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलेगा कारण

    मध्य प्रदेश । के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा के आठ महीने के एक शावक की मौत हो गई है। सोमवार को नियमित निगरानी के दौरान वन विभाग की टीम को आशा के साथ पांच के बजाय चार शावक दिखाई दिए। एक शावक के गायब होने की जानकारी मिलने के बाद उसकी तलाश शुरू की गई। कुछ समय बाद तलाशी अभियान के दौरान उसका शव बरामद कर लिया गया। फिलहाल शावक की मौत की वजह स्पष्ट नहीं हुई है और अधिकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शावक के दिखाई नहीं देने पर पार्क में उसकी तलाश के लिए अभियान चलाया गया। इसके तहत वन कर्मियों ने पार्क के बड़े हिस्से में खोजबीन की। तलाशी के दौरान शावक का शव मिलने के बाद उसकी मौत के कारणों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    मादा चीता आशा भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम के तहत नामीबिया से लाए गए चीतों में शामिल है। उसे विशेष विमान के जरिए कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया था। इस साल की शुरुआत में आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया था। इन शावकों के जन्म को देश में चीता पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया था। अब उसके एक शावक की मौत के बाद वन विभाग उसके कारणों की जांच कर रहा है।

    कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शावक की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की वजह के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल किसी निश्चित कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि शावक की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

    यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कूनो नेशनल पार्क में चीतों के प्रजनन से जुड़ी सकारात्मक खबरें भी सामने आती रही हैं। पार्क में शावकों के जन्म से भारत में चीते की आबादी को स्थापित करने और उसे स्थायी बनाने की उम्मीदों को बल मिला है। हालांकि, आशा के आठ महीने के शावक की मौत के बाद इस मामले में वन विभाग की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो गई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 59 बताई गई है। इनमें 40 शावक भारत में जन्मे हैं। वहीं, 15 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। शावक की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए वन विभाग रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

  • बुधनी के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 घर तोड़ने पर शिवराज की नाराजगी, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए

    बुधनी के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 घर तोड़ने पर शिवराज की नाराजगी, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए

    मध्य प्रदेश। के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 घर तोड़े जाने का मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरे मामले की रिपोर्ट अधिकारियों से मांगी गई है। उन्होंने मुख्य सचिव को भी इस संबंध में निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जांच के बाद मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

    शिवराज सिंह चौहान रविवार को कोसमी गांव पहुंचे थे। वहां उन्होंने आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे जुल्म की पराकाष्ठा बताया। उन्होंने कहा था कि इन्हीं लोगों के वोटों से डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री बने हैं। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई।

    सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह संवेदनशील है और यदि पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता ने कोई बात उठाई है, तो उसकी जांच कराने में कोई हर्ज नहीं है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अधिकारियों से घटना की रिपोर्ट तलब की गई है। उन्होंने निष्पक्ष जांच के जरिए पूरे मामले की स्थिति सामने आने की बात कही। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जांच के निष्कर्ष या घर तोड़े जाने की कार्रवाई के पीछे के कारणों का विवरण नहीं दिया गया है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल की सराहना करते हुए मध्य प्रदेश में पिछले करीब 12 वर्षों के विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने रोजगार, निवेश, नदी जोड़ो परियोजनाओं, मेट्रो विस्तार, ऊर्जा उत्पादन और धार्मिक पर्यटन से जुड़े कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा कि उनका मूल मंत्र असंभव दिखाई देने वाले कार्यों को भी संकल्प के साथ पूरा करना है।

    राहुल गांधी के हालिया वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक तरफ उनकी बहन योजनाओं और काम की बात करती हैं, जबकि राहुल गांधी तांडव की बात करते हैं। उन्होंने भगवान शिव के तांडव को सृजन और विसर्जन से जुड़ा बताते हुए इसे अराजकता से अलग रखने की बात कही। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं और मर्यादाओं का पालन करने की सलाह दी।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वह जितनी बार विधायक बने, उतनी बार मुख्यमंत्री रहे और जितनी बार सांसद बने, उतनी ही बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 2014 और 2019 में भाजपा को मिले पूर्ण बहुमत का भी जिक्र किया। इसके अलावा गरीब कल्याण योजनाओं, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत, आवास योजना, उज्ज्वला योजना, पीएम स्वनिधि और जल जीवन मिशन जैसी पहलों की जानकारी दी।

    डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक स्थलों के विकास और अंतरिक्ष कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने धारा 370 हटाने, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। अयोध्या के राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन के श्री महाकाल लोक के विकास के साथ चंद्रयान मिशन को भी उपलब्धियों में शामिल किया।

    मध्य प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल और ताप्ती नदी जोड़ो परियोजनाओं, गांधी सागर की 2,000 मेगावाट क्षमता वाली पंप स्टोरेज परियोजना, कूनो में चीता संरक्षण और भोपाल-इंदौर मेट्रो का उल्लेख किया। उन्होंने महिला सशक्तीकरण और रोजगार के बारे में बताते हुए कहा कि प्रदेश में 65 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। उनके अनुसार, 85 हजार सरकारी पदों पर भर्तियां हो चुकी हैं और एक लाख नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत और आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के लक्ष्य के अनुरूप दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करने की बात भी कही।

  • शराब दुकानों के ठेकों और लाइसेंस ट्रांसफर में गड़बड़ी, 2.75 करोड़ की ई-एफडीआर पर बैंक ने उठाए सवाल

    शराब दुकानों के ठेकों और लाइसेंस ट्रांसफर में गड़बड़ी, 2.75 करोड़ की ई-एफडीआर पर बैंक ने उठाए सवाल

    मध्य प्रदेश। में शराब दुकानों के ठेके और लाइसेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामले में आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को निलंबित कर दिया गया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। रायचूरा पर भोपाल में वर्ष 2024-25 के दौरान शराब दुकानों के ठेके आवंटित करने और लाइसेंस हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं करने के आरोप हैं। मामले की जांच के लिए गठित दो सदस्यीय टीम की रिपोर्ट में उनकी भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई थी। इसके बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की।

    मामला 8 अक्टूबर को एक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित खबर और 9 अक्टूबर को प्रकाशित समाचार के बाद सामने आया था। आरोपों की पड़ताल के लिए आबकारी विभाग ने दो सदस्यीय जांच दल बनाया। जांच में सात तरह की अनियमितताएं सामने आईं। इनमें 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की ई-एफडीआर, निर्धारित श्रेणी में शामिल नहीं होने वाले बैंक की प्रतिभूति स्वीकार करना, समय पर पूरी राशि जमा नहीं होना और लाइसेंस ट्रांसफर के दौरान निजी खाते की बैंक गारंटी तथा चेक स्वीकार करना शामिल है।

    जांच में सबसे गंभीर मामला AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की ई-एफडीआर से संबंधित पाया गया। रिकॉर्ड में 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की ई-एफडीआर और उसके सत्यापन की रिपोर्ट दर्ज थी। विभाग ने बैंक से इस दस्तावेज की पुष्टि कराई। बैंक ने 12 अक्टूबर को जारी पत्र में स्पष्ट किया कि संबंधित ई-एफडीआर उसके द्वारा जारी नहीं की गई थी। इससे दस्तावेज की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हुए। जांच में यह भी सामने आया कि एफडीआर के सत्यापन के लिए मई 2024 में विभाग की ओर से पत्र जारी किया गया था, लेकिन संबंधित अधिकारी तक पत्र पहुंचने का रिकॉर्ड नहीं मिला। बैंक को सत्यापन के लिए पत्र भेजे जाने का प्रमाण भी फाइल में उपलब्ध नहीं था। इसके बजाय लाइसेंसी जसवंत के ई-मेल से मिली सत्यापन रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई।

    जांच दल ने प्रतिभूति स्वीकार करने की प्रक्रिया में भी नियमों के उल्लंघन की बात कही। संबंधित प्रावधानों के अनुसार, केवल निर्धारित तीन श्रेणियों में आने वाले बैंकों की प्रतिभूतियां स्वीकार की जा सकती थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि AU स्मॉल फाइनेंस बैंक उस समय इन श्रेणियों में शामिल नहीं था, फिर भी उसकी एफडीआर स्वीकार की गई। ठेकेदार ने प्रतिभूति की आधी राशि 1 करोड़ 37 लाख 76 हजार 768 रुपये नकद जमा की थी। शेष आधी राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा होनी थी, लेकिन यह रकम 12 मई 2024 को जमा की गई। यानी निर्धारित समयसीमा से 22 दिन की देरी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस देरी पर नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय राशि स्वीकार कर ली गई।

    मेसर्स मां माइन्स के लाइसेंस ट्रांसफर में भी गड़बड़ियां सामने आईं। फर्म के लाइसेंस हस्तांतरण के लिए 10 जुलाई 2024 को आवेदन मिला था और भोपाल कलेक्टर ने 27 दिसंबर 2024 को आदेश जारी किया। जांच में पाया गया कि साझेदारी से जुड़े दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। एक समझौता पत्र में विजय सिंह को फर्म का साझेदार बताया गया था, जबकि आबकारी पोर्टल पर उपलब्ध पूरक दस्तावेजों में उन्हें साझेदार नहीं बताया गया। नियमों के अनुसार, ट्रांसफर लेने वाली फर्म को पूरी प्रतिभूति जमा करनी थी, लेकिन फर्म के बजाय विजय सिंह की ओर से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय विजय सिंह का फर्म से कोई दर्ज संबंध नहीं था।

    जांच रिपोर्ट में फर्म के खाते के बजाय विजय सिंह के निजी बैंक खाते के पोस्ट-डेटेड चेक स्वीकार करने पर भी सवाल उठाए गए। विभागीय पत्राचार में कुछ व्यक्तियों को मां माइन्स का साझेदार या लाइसेंसी बताकर पत्र भेजे गए, जबकि उपलब्ध दस्तावेजों में उनके साझेदार होने की पुष्टि नहीं थी। एक मामले में लाइसेंस ट्रांसफर का आवेदन मिलने से पहले ही संबंधित व्यक्ति को हस्तांतरण से जुड़ा पत्र जारी किए जाने का उल्लेख भी किया गया।

    आदेश में इन अनियमितताओं को मध्य प्रदेश राजपत्र में निर्धारित नियमों और आबकारी आयुक्त के निर्देशों का उल्लंघन बताया गया है। विभाग के अनुसार, इन प्रक्रियाओं से सरकारी राजस्व की सुरक्षा जोखिम में पड़ी और अधिकारी ने अपने पद से जुड़े दायित्वों का उचित पालन नहीं किया। इसी आधार पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत रायचूरा को निलंबित किया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है। आदेश में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी उल्लेख है।

  • कूनो नेशनल पार्क में माता चीता आशा के 8 महीने के शावक की मौत

    कूनो नेशनल पार्क में माता चीता आशा के 8 महीने के शावक की मौत


    श्योपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से बुरी खबर सामने आई है. नामीबियाई मादा चीता आशा (Namibian female cheetah Asha) के 8 महीने के एक शावक की मौत हो गई. आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया था. अब उसके चार शावक ही बचे हैं. शावक की मौत का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह सामने आएगी।

    चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्ट उत्तम कुमार शर्मा ने बताया, सोमवार सुबह नियमित मॉनिटरिंग की गई. इस दौरान मादा चीता आशा अपने 5 में से 4 शावकों के साथ नजर आई. एक शावक के गायब होने पर उसकी तलाश शुरू की गई. टीम ने काफी खोजबीन की. इसके बाद शावक मृत अवस्था में मिला।

    शावक की मौत कैसे हुई, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पार्क प्रबंधन ने 12 अक्टूबर को जारी प्रेस नोट में इसकी पुष्टि की है. मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चलेगा।

    उत्तम कुमार शर्मा के मुताबिक, शावक की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 53 रह गई है. इनमें भारत में जन्मे 40 चीते शामिल हैं. पार्क प्रबंधन के मुताबिक, इनमें से 15 चीते फिलहाल जंगल में खुले घूम रहे हैं। वहीं, गांधी सागर अभयारण्य में चार और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (VDTR) में दो चीते मौजूद हैं. इस तरह भारत में चीतों की कुल संख्या अब 59 रह गई है।


    पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आएगी मौत की वजह

    फिलहाल शावक की मौत के कारणों को लेकर स्थिति साफ नहीं है. पार्क प्रबंधन पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह का पता चल सकेगा।

  • राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान 2026 से नवाजे जाएंगे रघुवीर यादव, अनुपम खेर के विदेश दौरे के कारण बदला गया नाम

    राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान 2026 से नवाजे जाएंगे रघुवीर यादव, अनुपम खेर के विदेश दौरे के कारण बदला गया नाम

    मध्य प्रदेश। सरकार की ओर से इस वर्ष का राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान अभिनेता रघुवीर यादव को दिया जाएगा। 13 अक्टूबर को पार्श्वगायक किशोर कुमार की पुण्यतिथि के अवसर पर खंडवा में सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। रघुवीर यादव को वेब सीरीज पंचायत में प्रधान जी की भूमिका से खास पहचान मिली है। इससे पहले इस सम्मान के लिए अभिनेता अनुपम खेर का नाम तय किया गया था, लेकिन उनके खंडवा आने में असमर्थता जताने के बाद ज्यूरी ने रघुवीर यादव का चयन किया। कार्यक्रम मंगलवार शाम खंडवा के पुलिस ग्राउंड में आयोजित होगा।

    सम्मान समारोह में मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी और जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। परंपरा के अनुसार, सम्मान ग्रहण करने से पहले रघुवीर यादव किशोर कुमार के समाधि स्थल पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद आयोजित समारोह में उन्हें राष्ट्रीय किशोर कुमार अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन संस्कृति विभाग की ओर से किया जा रहा है।

    सम्मान के लिए अनुपम खेर का नाम पहले तय किए जाने की जानकारी सामने आई थी। चयन की औपचारिक घोषणा से पहले संबंधित ज्यूरी ने उनसे संपर्क किया था। बताया गया कि अनुपम खेर ने खंडवा आने में असमर्थता जताई, क्योंकि वे 17 अक्टूबर तक देश से बाहर रहने वाले थे। सम्मान ग्रहण करने के लिए चयनित कलाकार का खंडवा पहुंचना अनिवार्य होने के कारण ज्यूरी को दूसरे कलाकार का चयन करना पड़ा। इसके बाद रघुवीर यादव के नाम पर फैसला किया गया। इस वर्ष सम्मान के लिए कलाकार का नाम अंतिम समय में तय हो सका।

    राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान के लिए कलाकारों का चयन पांच सदस्यीय ज्यूरी करती है। यह समिति मुंबई में फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों और विशेषज्ञों के बीच चयन प्रक्रिया पूरी करती है। पहले कई मौकों पर चयनित कलाकारों को उनके घर जाकर भी सम्मान प्रदान किया गया था। वर्ष 2010 में अभिनेता देव आनंद को उनके निवास पर सम्मानित किए जाने के बाद ऐसी व्यवस्था का चलन बढ़ा। इससे खंडवा में किशोर कुमार के प्रशंसकों के बीच नाराजगी सामने आई, क्योंकि सम्मान समारोह का आयोजन किशोर कुमार की जन्मस्थली में किए जाने की अपेक्षा थी। इसके बाद वर्ष 2025 में नियम जोड़ा गया कि सम्मान प्राप्त करने वाले कलाकार को खंडवा आना अनिवार्य होगा।

    राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान की शुरुआत मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 1997-98 में की थी। किशोर कुमार के निधन के करीब दस वर्ष बाद शुरू किए गए इस सम्मान का उद्देश्य सिनेमा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित करना है। निर्देशन, अभिनय, पटकथा लेखन और गीत लेखन जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वालों को इसके लिए चुना जाता है। कलाकारों का चयन उनकी दीर्घ साधना, उपलब्धियों और सिनेमा में सक्रिय योगदान के आधार पर किया जाता है।

    शुरुआत में इस सम्मान के साथ दो लाख रुपये की राशि दी जाती थी। वर्तमान में सम्मानित कलाकार को पांच लाख रुपये की नकद राशि, स्मृति चिह्न, शॉल और श्रीफल प्रदान किए जाते हैं। शुरुआती वर्षों में समारोह राजधानी भोपाल में आयोजित होता था। बाद में तत्कालीन संस्कृति मंत्री विजय शाह की पहल पर आयोजन को खंडवा स्थानांतरित किया गया। इसका उद्देश्य किशोर कुमार की जन्मस्थली में उनके प्रति सम्मान और स्मृति को केंद्र में रखना था।

    रघुवीर यादव का जन्म 25 जून 1957 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षण लिया और वर्ष 1985 में फिल्म मैसी साहब से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। सलाम बॉम्बे!, बैंडिट क्वीन, दिल से, लगान, वॉटर और पीपली लाइव जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को पहचान मिली। वे अभिनेता होने के साथ गायक और संगीतकार भी हैं। फिल्म मैसी साहब के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिले, जबकि पंचायत वेब सीरीज में उनके अभिनय के लिए भी उन्हें सम्मानित किया गया है।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव आज इंदौर और रतलाम के दौरे पर रहेंगे, स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होकर शाम को खंडवा समारोह से जुड़ेंगे

    मुख्यमंत्री मोहन यादव आज इंदौर और रतलाम के दौरे पर रहेंगे, स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होकर शाम को खंडवा समारोह से जुड़ेंगे

    मध्य प्रदेश। के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार, 13 अक्टूबर को इंदौर और रतलाम के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे दोनों शहरों में आयोजित स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री भोपाल लौटेंगे, जहां उनके निवास पर मुलाकातों और विभिन्न विषयों पर चर्चा का कार्यक्रम निर्धारित है। शाम को वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से खंडवा में आयोजित राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान अलंकरण समारोह और संगीत संध्या में शामिल होंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री सुबह नई दिल्ली से इंदौर पहुंचेंगे। वे सुबह 8:50 बजे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। इसके बाद विमान से इंदौर के लिए रवाना होंगे और सुबह 10:20 बजे इंदौर हवाई अड्डे पर पहुंचने का कार्यक्रम है। इंदौर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री होटल विवांता अमलतास जाएंगे, जहां वे स्थानीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। होटल में उनका कार्यक्रम सुबह करीब 10:30 बजे से 10:40 बजे तक निर्धारित है।

    इंदौर में निर्धारित कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री हवाई अड्डे के लिए रवाना होंगे। सुबह 11:10 से 11:20 बजे के बीच उनके इंदौर हवाई अड्डे पहुंचने का कार्यक्रम है। इसके बाद वे हेलीकॉप्टर से रतलाम के लिए रवाना होंगे। तय समय के अनुसार, मुख्यमंत्री सुबह 11:55 बजे के आसपास रतलाम पहुंचेंगे। वहां वे स्थानीय आयोजनों में शामिल होंगे। दोनों शहरों का दौरा मुख्यमंत्री के दिनभर के निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा है।

    रतलाम में कार्यक्रम पूरे करने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12:30 बजे भोपाल के स्टेट हैंगर के लिए रवाना होंगे। उनके दोपहर करीब 1:30 बजे भोपाल पहुंचने का कार्यक्रम तय है। इसके बाद वे दोपहर 1:45 बजे मुख्यमंत्री निवास पहुंचेंगे। भोपाल लौटने के बाद दिन के शेष समय में मुख्यमंत्री निवास समत्व में मुलाकातों और बैठकों का सिलसिला चलेगा।

    मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर बाद 3:30 से 4:30 बजे तक निवास पर मुलाकातें निर्धारित हैं। इसके बाद शाम 4:30 से 5:45 बजे तक विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। शाम 5:45 से 7 बजे तक जनसंपर्क से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श का कार्यक्रम रखा गया है। सुबह की शुरुआत में निवास पर एडीजी इंटेलिजेंस और आयुक्त जनसंपर्क से ब्रीफिंग का कार्यक्रम भी निर्धारित है।

    दिन के अंतिम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शाम 7 बजे मुख्यमंत्री निवास समत्व से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए खंडवा में आयोजित राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान अलंकरण समारोह और संगीत संध्या से जुड़ेंगे। इस कार्यक्रम में उनकी सहभागिता ऑनलाइन माध्यम से होगी। इस तरह मुख्यमंत्री का दिन नई दिल्ली से इंदौर आगमन, रतलाम में स्थानीय आयोजनों में भागीदारी, भोपाल वापसी और शाम को खंडवा के समारोह में ऑनलाइन सहभागिता के बीच निर्धारित है।

  • बुधनी में आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई से भड़के शिवराज सिंह चौहान, अफसरों पर बरसे और मुख्यमंत्री मोहन यादव से की बात

    बुधनी में आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई से भड़के शिवराज सिंह चौहान, अफसरों पर बरसे और मुख्यमंत्री मोहन यादव से की बात

    मध्य प्रदेश। के बुधनी क्षेत्र के कुसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घरों पर वन विभाग की बुलडोजर कार्रवाई के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कड़ी नाराजगी जताई है। गांव पहुंचकर उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी परेशानियां सुनीं। वहां घरों के टूटने और फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति देखकर शिवराज अधिकारियों पर भड़क गए। उन्होंने कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। इस घटना के बाद प्रदेश में प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में अन्याय और जुल्म की हद पार कर दी गई है। उन्होंने गांव की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जिन घरों में सुबह तक परिवार रह रहे थे और बच्चों की आवाजें सुनाई दे रही थीं, वहां अब बच्चों की चीखें गूंज रही हैं। उनके मुताबिक, घरों को गिरा दिया गया और फसलें भी दब गईं। उन्होंने प्रभावित महिलाओं के रोने और परिवारों की पीड़ा का उल्लेख करते हुए कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को संवेदनहीन बताया।

    गुस्से में शिवराज ने संबंधित अधिकारियों के लिए बेहद कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें ‘नरपिशाच’ तक कह दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी वह मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे। शिवराज की मांग है कि जिन अधिकारियों ने यह कार्रवाई की, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। उन्होंने इस मामले को केवल प्रशासनिक कार्रवाई का विषय नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के साथ हुए व्यवहार से जुड़ा गंभीर मामला बताया।

    घटना के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से फोन पर बात की। उन्होंने दोनों नेताओं को घटनाक्रम की जानकारी दी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस बातचीत के बाद सरकार या प्रशासन की ओर से लिए गए किसी अंतिम निर्णय का उल्लेख नहीं है। फिलहाल शिवराज की नाराजगी और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग इस मामले के प्रमुख पहलू बने हुए हैं।

    इस घटनाक्रम ने शिवराज सिंह चौहान की वर्तमान राजनीतिक भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। वर्ष 2023 से पहले तक वह मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री के रूप में सक्रिय थे। उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व की पहचान आम लोगों से जुड़ाव, ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच और महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने वाले नेता के रूप में रही। कभी उन्हें ‘पांव-पांव वाले भैया’ के नाम से जाना गया, तो कभी लाड़ली बहनों के भाई के रूप में उनकी छवि सामने आई। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने आम लोगों के बीच अपनी सहज उपस्थिति बनाए रखने की कोशिश की थी।

    अब बुधनी और विदिशा से जुड़े सांसद के रूप में उनकी भूमिका के बीच कुसमी की घटना पर उनकी तीखी प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बनी है। सवाल यह उठ रहा है कि उनकी नाराजगी केवल अधिकारियों की कार्यशैली तक सीमित है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं। कांग्रेस इस घटनाक्रम को शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव के बीच संभावित मतभेदों से जोड़कर देख रही है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किसी टकराव की पुष्टि करने वाली जानकारी सामने नहीं आई है।

    बुधनी शिवराज सिंह चौहान का लंबे समय तक राजनीतिक आधार रहा है, जहां से वह लगातार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। ऐसे में इसी क्षेत्र में आदिवासी परिवारों के घरों पर हुई कार्रवाई के बाद उनका खुद गांव पहुंचना और अधिकारियों के खिलाफ खुलकर बोलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। अब इस मामले में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।