Category: Madhya Pradesh

  • सरकारी खजाने पर डाका इंदौर में 8 करोड़ के गबन मामले में नया खुलासा आरोपी के खाते में पहुंचे थे 13.72 लाख रुपए

    सरकारी खजाने पर डाका इंदौर में 8 करोड़ के गबन मामले में नया खुलासा आरोपी के खाते में पहुंचे थे 13.72 लाख रुपए


    इंदौर । इंदौर में करीब 8 करोड़ रुपए के शासकीय धन के गबन से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। रावजी बाजार थाना पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत से तीन दिन की पुलिस रिमांड हासिल की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी के बैंक खाते में शासकीय मद से 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया तथा इस पूरे घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

    यह मामला मार्च 2023 में सामने आया था जब तत्कालीन संयुक्त कलेक्टर मुनीष सिंह सिकरवार की शिकायत के आधार पर रावजी बाजार थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने मिलाप चौहान रंजीत करोड़ मनीषा चौहान राहुल चौहान सहित कई लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद लगातार जांच का दायरा बढ़ता गया और कई अहम जानकारियां सामने आईं।

    पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग किया। जिन खातों में तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो पाया था उन खातों की जानकारी हासिल कर आरोपियों ने फर्जी स्वीकृति आदेश तैयार किए। इसके बाद वास्तविक हितग्राहियों के बैंक खातों की जगह अपने परिजनों दोस्तों और परिचितों के बैंक खातों की जानकारी दर्ज कर दी गई। इसी फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी राशि दोबारा जनरेट कर अलग-अलग निजी खातों में ट्रांसफर की जाती रही।

    जांच एजेंसियों के अनुसार इसी तरीके से लगभग 8 करोड़ रुपए की शासकीय राशि का गबन किया गया। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की थी। अब तक कई आरोपियों की भूमिका सामने आ चुकी है और लगातार नए तथ्य भी उजागर हो रहे हैं।

    इसी कड़ी में पुलिस ने सोमवार को सर्वहारा नगर परदेशीपुरा निवासी मनोज उर्फ हल्लू को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि सह आरोपी रंजीत करोड़ ने सरकारी मद से मनोज के बैंक खाते में 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे। पुलिस का दावा है कि इस रकम का उपयोग आरोपी और उसके सहयोगियों ने विभिन्न कार्यों में किया। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस राशि का कितना हिस्सा निकाला गया कितना खर्च हुआ और क्या इसे आगे अन्य खातों में भी भेजा गया।

    पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में इस पूरे घोटाले से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि सरकारी धन के गबन की इस साजिश में किसकी क्या भूमिका थी और किन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कराने में मदद की।

    यह मामला सरकारी वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है बल्कि गबन की पूरी राशि का हिसाब जुटाना और सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित करना भी है।

  • इंदौर में दो दर्दनाक घटनाएं ई रिक्शा चालक ने इलाज के दौरान तोड़ा दम मासूम की मौत के मामले में ठेकेदार पर कसा शिकंजा

    इंदौर में दो दर्दनाक घटनाएं ई रिक्शा चालक ने इलाज के दौरान तोड़ा दम मासूम की मौत के मामले में ठेकेदार पर कसा शिकंजा


    इंदौर । इंदौर में दो अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और निर्माण स्थलों पर बरती जाने वाली लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सड़क हादसे में घायल ई रिक्शा चालक ने कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया तो दूसरी ओर चार साल के मासूम की निर्माणाधीन मकान की खुली पानी की टंकी में डूबकर हुई मौत के मामले में पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। दोनों घटनाओं ने शहरवासियों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    पहली घटना बाणगंगा थाना क्षेत्र की है जहां पंचम की फेल निवासी 38 वर्षीय कपिल रमनवाल बीते 24 जुलाई की शाम अपने ई रिक्शा से गुजर रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे दूसरे वाहन को बचाने के प्रयास में उनका ई रिक्शा असंतुलित होकर पलट गया। हादसा इतना गंभीर था कि कपिल के सिर हाथ और पैर में गहरी चोटें आईं। राहगीरों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। कई दिनों तक इलाज के बाद सोमवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

    पुलिस ने बताया कि कपिल पिछले कई वर्षों से ई रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। उनके परिवार में माता पिता दो बच्चे और एक भाई हैं। उनकी असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी अन्य वाहन की भी भूमिका थी।

    दूसरी घटना कनाड़िया क्षेत्र की है जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। यहां चार वर्षीय रुद्र चौहान की निर्माणाधीन मकान परिसर में बनी खुली पानी की टंकी में गिरने से मौत हो गई थी। घटना 10 जुलाई की बताई गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चे के पिता गोलू काम पर गए हुए थे जबकि मां पूजा घर पर दोनों बच्चों के साथ मौजूद थीं। खेलते खेलते रुद्र घर से निकलकर पास के निर्माणाधीन मकान तक पहुंच गया जहां सुरक्षा के कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। खुली पानी की टंकी में गिरने से उसकी मौत हो गई।

    घटना के बाद परिजनों ने बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार राजेश पवैया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच में यह सामने आया कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था जिससे यह दुखद हादसा हुआ।

    दोनों घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सड़क पर सावधानी और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों ने भी मांग की है कि शहर में निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • MP: मंदसौर में फसल बीमा राशि बहुत कम मिलने से किसानों में आक्रोश… किया प्रदर्शन

    MP: मंदसौर में फसल बीमा राशि बहुत कम मिलने से किसानों में आक्रोश… किया प्रदर्शन


    मंदसौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मंदसौर जिले (Mandsaur district) की दलौदा तहसील में सोमवार शाम खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि (Crop Insurance Amount) को लेकर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि उन्हें फसल नुकसान के बदले मात्र 55 से 60 रुपए प्रति बीघा तक की बीमा राशि मिली है, जो बेहद कम है। सैकड़ों किसानों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर बीमा कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

    किसानों ने बताया कि उन्हें फसल नुकसान के बाद उचित मुआवजे की उम्मीद थी, लेकिन इतनी कम राशि मिलने से वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बीमा कंपनी के अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए बीमा राशि का दोबारा मूल्यांकन कर उचित भुगतान करने की मांग की।

    प्रदर्शन के दौरान ग्राम बेहपुर के किसानों ने एक अलग ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदसौर जिले के अधिकांश गांवों में खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि वितरित हो चुकी है, लेकिन बेहपुर के किसानों को अब तक कोई राशि नहीं मिली है।

    बेहपुर के किसानों के अनुसार, वर्ष 2025 में उनके गांव में खरीफ फसल को भारी नुकसान हुआ था। उनके आसपास के गांवों के किसानों को बीमा राशि मिल गई है, लेकिन बेहपुर के किसानों को इस लाभ से वंचित रखा गया है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है।

    मुख्यमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन में किसानों ने मांग की है कि बीमा कंपनी को निर्देश दिए जाएं कि ग्राम बेहपुर सहित जिन किसानों को अब तक फसल बीमा राशि नहीं मिली है, उन्हें जल्द से जल्द पात्रता के अनुसार भुगतान किया जाए। साथ ही, जिन किसानों को बेहद कम राशि मिली है, उनके मामलों की पुनः जांच कर उचित मुआवजा दिया जाए। इस संबंध में तहसीलदार बृजेश मालवीय ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनके ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

  • स्वच्छता के बाद अब अंगदान में भी देश का सिरमौर बना इंदौर 26वीं बार ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा धड़कता दिल

    स्वच्छता के बाद अब अंगदान में भी देश का सिरमौर बना इंदौर 26वीं बार ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा धड़कता दिल


    इंदौर । इंदौर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यह शहर केवल स्वच्छता के लिए ही नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवता के लिए भी पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। ब्रेन डेड डोनर गौरव दवे के परिवार ने कठिन समय में ऐसा निर्णय लिया जिसने कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। गौरव का हृदय ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद भेजा गया जहां जरूरतमंद मरीज को नया जीवन देने के लिए उसका प्रत्यारोपण किया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से 26वीं बार किसी ब्रेन डेड डोनर का हृदय दूसरे शहर भेजा गया है।

    अंगदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है। किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने का दुख असहनीय होता है लेकिन उसी कठिन घड़ी में लिया गया अंगदान का निर्णय कई अन्य परिवारों की खुशियां वापस लौटा सकता है। यही कारण है कि अंगदान को महादान कहा जाता है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति के हृदय लिवर किडनी कॉर्निया और अन्य अंग कई मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं।

    इंदौर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अंगदान को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां ब्रेन डेथ और अंगदान को लेकर लोगों में संकोच और भ्रम रहता था वहीं अब जागरूकता लगातार बढ़ रही है। परिवार स्वयं आगे आकर अंगदान के लिए सहमति दे रहे हैं जिससे कई गंभीर मरीजों को जीवनदान मिल रहा है।

    अंगदान की इस पूरी प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जैसे ही अंगदान की स्वीकृति मिलती है प्रशासन पुलिस और चिकित्सा संस्थानों की टीम समय के खिलाफ दौड़ शुरू कर देती है। विशेष यातायात व्यवस्था बनाकर अंगों को कम से कम समय में दूसरे शहर के अस्पताल तक पहुंचाया जाता है ताकि प्रत्यारोपण सफल हो सके। हर बार सायरन की आवाज और खाली सड़कों के बीच दौड़ता एंबुलेंस केवल एक वाहन नहीं बल्कि किसी की नई जिंदगी की उम्मीद लेकर आगे बढ़ता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हर हार्ट ट्रांसप्लांट केवल एक मेडिकल ऑपरेशन नहीं बल्कि दो परिवारों की भावनाओं से जुड़ी कहानी होती है। एक ओर जहां एक परिवार अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देता है वहीं दूसरी ओर वही धड़कन किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में जीवन की नई शुरुआत बन जाती है। यही अंगदान की सबसे बड़ी शक्ति है जो मृत्यु के बाद भी जीवन का संदेश देती है।

    अंगदान के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार इंदौर ने वर्ष 2015 से अब तक 26 सफल हार्ट डोनेशन किए हैं। इन सभी मामलों में पुरुष और महिला दोनों प्रकार के डोनर शामिल रहे हैं। हर सफल अंगदान यह संदेश देता है कि समाज में जागरूकता बढ़ रही है और लोग मानवता के इस सबसे बड़े कार्य को समझने लगे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश में आज भी ऐसे हजारों मरीज हैं जो केवल अंग उपलब्ध नहीं होने के कारण जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान के प्रति जागरूक होंगे तो अनेक परिवारों को नई जिंदगी मिल सकेगी। इंदौर ने लगातार सफल अंगदान के माध्यम से पूरे देश को यह संदेश दिया है कि इंसान की सबसे बड़ी विरासत उसकी संपत्ति नहीं बल्कि वह जीवन है जो वह अपने जाने के बाद भी किसी दूसरे को दे सकता है। यही भावना इंदौर को स्वच्छता के साथ साथ संवेदनाओं और मानवता की राजधानी भी बना रही है।

  • इंदौर में हाथी के हमले से गई ऑटो चालक की जान एक्सपर्ट ने बताया कब और क्यों सबसे ज्यादा आक्रामक हो जाता है गजराज

    इंदौर में हाथी के हमले से गई ऑटो चालक की जान एक्सपर्ट ने बताया कब और क्यों सबसे ज्यादा आक्रामक हो जाता है गजराज


    इंदौर । इंदौर में हाथी के हमले में एक ऑटो चालक की दर्दनाक मौत के बाद लोगों के बीच दहशत का माहौल है। इस घटना ने न केवल सार्वजनिक स्थानों पर हाथियों की मौजूदगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके व्यवहार को समझने की जरूरत भी सामने ला दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी सामान्य परिस्थितियों में शांत स्वभाव का होता है लेकिन कुछ विशेष अवस्थाओं में वह बेहद आक्रामक और खतरनाक हो सकता है।

    घटना रविवार को राजनगर क्षेत्र में हुई जहां एक हाथी ने अचानक ऑटो चालक विजय होलकर पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथी ने पहले अपनी सूंड से उन्हें उठाकर जमीन पर पटक दिया और इसके बाद कई बार पैरों से कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल विजय को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने महावत के खिलाफ मामला दर्ज किया हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया। पूरे मामले की जांच जारी है।

    इंदौर चिड़ियाघर के प्रभारी और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. उत्तम यादव के अनुसार हाथी के अचानक आक्रामक होने के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका मस्त काल हो सकता है। यह एक प्राकृतिक अवस्था होती है जिसमें विशेष रूप से नर हाथियों के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन तेजी से होते हैं। इस दौरान उनका व्यवहार सामान्य से बिल्कुल अलग हो जाता है और वे बिना किसी स्पष्ट उकसावे के भी हमला कर सकते हैं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि मस्त काल के दौरान हाथी की कनपटी के पास स्थित ग्रंथियों से लगातार स्राव निकलता है और बार बार पेशाब आना भी इस अवस्था का प्रमुख संकेत होता है। यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो महावत को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और हाथी को भीड़भाड़ वाले इलाके से हटाकर सुरक्षित और एकांत स्थान पर रखना चाहिए। इस दौरान हाथी अपने महावत तक पर हमला कर सकता है इसलिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी अत्यंत संवेदनशील और बुद्धिमान जीव है। तेज आवाज भीड़ पटाखों का शोर अपरिचित वातावरण या लगातार तनाव भी उसे असहज बना सकता है। यदि ऐसे हालात में वह पहले से मस्त काल में हो तो उसके हिंसक होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए धार्मिक आयोजनों जुलूसों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हाथियों को शामिल करते समय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना आवश्यक है।

    इंदौर में पहले भी हाथियों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों के बाद यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या हाथियों की नियमित स्वास्थ्य जांच उनके व्यवहार की निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन पर्याप्त रूप से किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महावतों को हाथियों के व्यवहार और मस्त काल की पहचान का विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि समय रहते संभावित खतरे को टाला जा सके।

    इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन्यजीवों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। हाथी भले ही शांत और समझदार जीव माना जाता हो लेकिन उसकी प्राकृतिक प्रवृत्तियों को नजरअंदाज करना इंसानों और स्वयं पशु दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए सुरक्षा नियमों का पालन और वैज्ञानिक समझ के साथ वन्यजीवों का प्रबंधन ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • संघर्ष से निकला छात्र बना आंदोलन का चेहरा बड़वानी के अरुण बड़ोले ने 26 दिन तक उठाई हजारों विद्यार्थियों की आवाज

    संघर्ष से निकला छात्र बना आंदोलन का चेहरा बड़वानी के अरुण बड़ोले ने 26 दिन तक उठाई हजारों विद्यार्थियों की आवाज


    बड़वानी  मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के छोटे से गांव लिंबई के रहने वाले अरुण बड़ोले की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। मां आज भी खेतों में मजदूरी करके परिवार का पेट पालती हैं जबकि पिता की आंखों की रोशनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमजोर होती जा रही है। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई का सफर आसान नहीं था लेकिन अरुण ने सिर्फ अपने भविष्य के बारे में नहीं सोचा बल्कि हजारों विद्यार्थियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने का फैसला किया।

    देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे अरुण पिछले छह वर्षों से इंदौर में किराए के कमरे में रह रहे हैं। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए वे ड्राइवरी का काम भी करते हैं। परिवार में तीन बहनों की जिम्मेदारी और सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने संघर्ष को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जब देशभर में नीट परीक्षा को लेकर विवाद और छात्रों का आंदोलन तेज हुआ तब अरुण ने भी इंदौर में छात्रों की आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया।

    उन्होंने 30 जून से आंदोलन की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उनके साथ केवल चार साथी थे। पहले दस से बारह दिनों तक धरना स्थल पर गिने चुने छात्र ही मौजूद रहते थे। कई बार ऐसा भी लगा कि आंदोलन आगे नहीं बढ़ पाएगा लेकिन अरुण और उनके साथियों ने हार नहीं मानी। लगातार डटे रहने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का असर यह हुआ कि धीरे धीरे छात्रों सामाजिक संगठनों और शहर के लोगों का समर्थन मिलने लगा। देखते ही देखते यह आंदोलन प्रदेश के सबसे लंबे छात्र आंदोलनों में शामिल हो गया और पूरे 26 दिनों तक लगातार चलता रहा।

    अरुण का कहना है कि अगर वे अपने जैसे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के लिए आवाज नहीं उठाते तो खुद को कभी माफ नहीं कर पाते। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता हर छात्र का अधिकार है। यही सोच उन्हें लगातार संघर्ष करने की ताकत देती रही। आर्थिक परेशानियां और रोजमर्रा की जिम्मेदारियां भी उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सकीं।

    आंदोलन के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बारिश हो या कम होती भीड़ उन्होंने धरना स्थल नहीं छोड़ा। धीरे धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल होने लगे। इस दौरान शहर के कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी उनका समर्थन किया जिससे आंदोलन को नई ऊर्जा मिली।

    आंदोलन समाप्त होने के बाद भी अरुण का कहना है कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। उनका मानना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता और विद्यार्थियों के अधिकारों का सवाल है। यदि भविष्य में भी छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय होता है तो वे फिर से आंदोलन के लिए तैयार रहेंगे। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए वे हमेशा आवाज उठाते रहेंगे।

    अरुण बड़ोले की कहानी बताती है कि सीमित संसाधन कभी बड़े सपनों और मजबूत इरादों के सामने बाधा नहीं बनते। कठिन परिस्थितियों में भी यदि उद्देश्य स्पष्ट हो और हौसला मजबूत हो तो एक साधारण छात्र भी हजारों लोगों की उम्मीद और संघर्ष का प्रतीक बन सकता है।

  • शिवराज के सामने गूंजे अगले मुख्यमंत्री के नारे विजयवर्गीय का दर्द छलका प्रहलाद ने मांगी मुक्ति राजनीति में बढ़ी हलचल

    शिवराज के सामने गूंजे अगले मुख्यमंत्री के नारे विजयवर्गीय का दर्द छलका प्रहलाद ने मांगी मुक्ति राजनीति में बढ़ी हलचल


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं जिन्होंने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। दतिया उपचुनाव के प्रचार के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने अचानक समर्थकों ने अगले मुख्यमंत्री मामा हैं के नारे लगाने शुरू कर दिए। हालांकि शिवराज सिंह चौहान ने तुरंत समर्थकों को रोकते हुए साफ संकेत दिया कि वह ऐसे नारों के पक्ष में नहीं हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई अटकलों को हवा जरूर दे दी है।

    सभा के दौरान शिवराज सिंह चौहान अपने पुराने अंदाज में जनता से संवाद कर रहे थे। जब एक समर्थक ने आई लव यू मामा कहा तो उन्होंने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया और लोगों का अभिवादन किया। इसी दौरान कुछ युवकों ने अगले मुख्यमंत्री मामा हैं के नारे लगाए। शिवराज ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए समर्थकों को ऐसा करने से रोक दिया। इसके बाद यह घटना राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गई और विभिन्न स्तरों पर इसके अलग-अलग मायने निकाले जाने लगे।

    इधर प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान भी सुर्खियों में आ गया। इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि दोनों जिला अध्यक्षों का अच्छा समय चल रहा है और शायद उनके बीच बैठने से उनका भी अच्छा समय आ जाए। हालांकि यह बात उन्होंने हल्के अंदाज में कही लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे उनके हालिया बयानों और राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा। पिछले दिनों भी विजयवर्गीय ने अपनी उपेक्षा को लेकर पत्र लिखा था जिसकी काफी चर्चा हुई थी।

    उधर मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का बयान भी लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना। दतिया उपचुनाव में टिकट वितरण को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें किसी पद का मोह नहीं है और यदि कभी जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाए तो इसमें भी कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में व्यक्ति पद के लिए नहीं बल्कि संगठन और विचारधारा के लिए काम करता है। उनके इस बयान को भी राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

    निवाड़ी में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा विधायक अनिल जैन ने शायराना अंदाज में मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए उन्हें जादूगर तक कह दिया। उन्होंने मंच से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील भी की। इसके बाद मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री की तुलना भगवान महाकाल से कर दी। उन्होंने कहा कि जैसे महाकाल भोले हैं वैसे ही मुख्यमंत्री भी सहज और सरल स्वभाव के हैं। इस बयान ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हुई।

    इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि दतिया उपचुनाव के बाद पार्टी अपने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर नजर रख सकती है ताकि संगठन के भीतर अनुशासन और एकजुटता बनाए रखी जा सके। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों मंचों से दिए जा रहे बयान समर्थकों के नारे और नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने वाले समय की राजनीतिक दिशा को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रही हैं।

  • मध्य प्रदेश में बारिश को लेकर बड़ा अलर्ट अगले 24 घंटे में 8 जिलों में हो सकती है मूसलाधार बारिश कई इलाकों में बढ़ेगा जलभराव का खतरा

    मध्य प्रदेश में बारिश को लेकर बड़ा अलर्ट अगले 24 घंटे में 8 जिलों में हो सकती है मूसलाधार बारिश कई इलाकों में बढ़ेगा जलभराव का खतरा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और आने वाले तीन दिन प्रदेश के कई जिलों के लिए भारी बारिश लेकर आ सकते हैं। मौसम विभाग ने मंगलवार को आठ जिलों में हैवी रेन का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले चौबीस घंटे के दौरान चार इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। राजधानी भोपाल में सुबह से ही रिमझिम बारिश का दौर शुरू हो गया जिससे मौसम सुहावना हो गया और तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई।

    मौसम विभाग के अनुसार सतना कटनी उमरिया मंडला डिंडौरी सिवनी रायसेन और बैतूल में भारी बारिश की आशंका है। इन इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने और लोगों को नदी नालों तथा जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा भोपाल सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर झाबुआ अलीराजपुर धार बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन उज्जैन नीमच मंदसौर रतलाम आगर मालवा शाजापुर देवास नर्मदापुरम हरदा ग्वालियर श्योपुर मुरैना भिंड दतिया शिवपुरी गुना अशोकनगर जबलपुर नरसिंहपुर छिंदवाड़ा पांढुर्णा बालाघाट रीवा सीधी सिंगरौली मऊगंज मैहर शहडोल अनूपपुर सागर पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज वर्षा हो सकती है।

    प्रदेश में अब तक मानसून की स्थिति सामान्य से कमजोर बनी हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक मध्य प्रदेश में औसतन 336 दशमलव 7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक लगभग 407 मिलीमीटर वर्षा हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब तक करीब 17 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी लगभग 20 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में करीब 15 प्रतिशत दर्ज की गई है।

    बारिश की कमी का असर प्रदेश के अधिकांश जिलों में दिखाई दे रहा है। अनूपपुर बालाघाट छतरपुर छिंदवाड़ा दमोह डिंडौरी जबलपुर कटनी मैहर मंडला मऊगंज नरसिंहपुर निवाड़ी पांढुर्णा पन्ना रीवा सागर सतना सिवनी शहडोल सीधी सिंगरौली टीकमगढ़ उमरिया आगर मालवा अलीराजपुर अशोकनगर बड़वानी बैतूल दतिया धार गुना ग्वालियर हरदा झाबुआ खंडवा खरगोन मुरैना नर्मदापुरम नीमच रायसेन रतलाम शाजापुर श्योपुर शिवपुरी उज्जैन और विदिशा सहित कुल 48 जिलों में सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। दूसरी ओर भोपाल भिंड बुरहानपुर देवास इंदौर मंदसौर राजगढ़ और सीहोर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश हुई है। इनमें देवास सबसे आगे है जहां सामान्य से लगभग 29 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र अब पश्चिम बंगाल और उत्तर ओडिशा तट के करीब पहुंच चुका है। यह सिस्टम झारखंड और छत्तीसगढ़ से होते हुए मध्य भारत की ओर बढ़ेगा। इसके साथ मानसून ट्रफ भी सक्रिय बनी हुई है जिससे 28 जुलाई से 30 जुलाई के बीच मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी वर्षा होने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने नदी नालों के पास न जाने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। लगातार सक्रिय हो रहे मानसूनी सिस्टम के कारण आने वाले दिनों में प्रदेश के जलाशयों का जलस्तर बढ़ने और खेती के लिए भी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • भोपाल के छात्रावास में जन्मदिन बना मातम 12वीं की छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान सुसाइड नोट मिलने से जांच तेज

    भोपाल के छात्रावास में जन्मदिन बना मातम 12वीं की छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान सुसाइड नोट मिलने से जांच तेज


    भोपाल । भोपाल के कटारा हिल्स स्थित आदिवासी कन्या छात्रावास में रविवार शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई जहां 12वीं कक्षा की छात्रा और जेईई की तैयारी कर रही 17 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सबसे दुखद बात यह रही कि जिस दिन उसने यह कदम उठाया उसी दिन उसका 17वां जन्मदिन भी था। इस घटना से छात्रावास में रहने वाली अन्य छात्राएं शिक्षक और परिजन गहरे सदमे में हैं। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें छात्रा ने इस कदम के लिए स्वयं को जिम्मेदार बताते हुए अपने माता पिता से माफी मांगी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

    मृतक छात्रा की पहचान अलीराजपुर जिले की रहने वाली दर्शन मिनामा के रूप में हुई है। वह भोपाल के अनंत हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं की छात्रा थी और साथ ही एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान से जेईई परीक्षा की तैयारी कर रही थी। वह सितंबर 2025 से छात्रावास में रह रही थी और पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर मानी जाती थी।

    जानकारी के अनुसार रविवार शाम वह कोचिंग से लौटकर अपने कमरे में चली गई। उसकी रूममेट पिछले लगभग बीस दिनों से गांव गई हुई थी जिसके कारण वह कमरे में अकेली रह रही थी। शाम करीब छह बजे उसकी सहेलियां जन्मदिन मनाने के लिए केक लेकर उसके कमरे पर पहुंचीं लेकिन काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला। लगातार आवाज देने और दरवाजा खटखटाने के बाद जब सेंट्रल लॉक खोला गया तो छात्रा कमरे के अंदर फंदे से लटकी हुई मिली। यह दृश्य देखकर छात्राओं में चीख पुकार मच गई और तुरंत वार्डन को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया।

    मौके पर पहुंची पुलिस एफएसएल टीम और फोटोग्राफर ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। कमरे की तलाशी के दौरान एक सुसाइड नोट मिला जिसमें छात्रा ने लिखा कि वह अपने इस कदम के लिए स्वयं जिम्मेदार है और अपने माता पिता से माफी मांगती है। पुलिस ने सुसाइड नोट को जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस को छात्रा के मानसिक तनाव या अवसाद में होने की आशंका है लेकिन आत्महत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा। पुलिस परिजनों से बातचीत कर रही है और छात्रा के दोस्तों तथा शिक्षकों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियों को समझा जा सके। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया परिजनों की मौजूदगी में पूरी की जाएगी।

    इस घटना ने छात्रावास की व्यवस्थाओं और वहां रहने वाली छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग दस महीने पहले इसी छात्रावास में 12वीं की एक अन्य छात्रा ने भी आत्महत्या कर ली थी। उस समय भी घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और काउंसलिंग सिस्टम को मजबूत करने की बात कही गई थी लेकिन अब दोबारा हुई इस घटना ने उन दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर पढ़ाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में परिवार शिक्षकों और छात्रावास प्रबंधन को नियमित संवाद बनाए रखना चाहिए ताकि यदि कोई छात्र मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी से गुजर रहा हो तो समय रहते उसकी पहचान कर उचित सहायता उपलब्ध कराई जा सके। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और सुसाइड नोट सहित सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • एनजीटी के आदेशों की अनदेखी कर वेटलैंड में मड रैली जैव विविधता पर मंडराया खतरा प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

    एनजीटी के आदेशों की अनदेखी कर वेटलैंड में मड रैली जैव विविधता पर मंडराया खतरा प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल


    भोपाल । भोपाल के कलियासोत डैम के वेटलैंड क्षेत्र में आयोजित मड रैली एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पर्यावरणविदों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस आयोजन को प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बताते हुए आयोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में सैकड़ों लोग और दर्जनों वाहन पहुंचे वहां पहले से ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद खुलेआम मड रैली का आयोजन होना कई सवाल खड़े करता है।

    रविवार को कलियासोत डैम के किनारे बड़ी संख्या में ऑफरोड वाहनों की रेस आयोजित की गई। आयोजन में पचास से अधिक गाड़ियों ने हिस्सा लिया जबकि सैकड़ों लोग वहां मौजूद रहे। इस दौरान कई वाहन आपस में टकरा गए और कुछ लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई। इतनी बड़ी गतिविधि होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वेटलैंड केवल जलभराव वाला क्षेत्र नहीं होता बल्कि यह अनेक दुर्लभ जलीय जीव जंतुओं पक्षियों और वनस्पतियों का प्राकृतिक आवास होता है। यहां मगरमच्छ घड़ियाल कछुए मछलियां और कई प्रवासी पक्षी निवास करते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही तेज आवाज और भीड़भाड़ से इन जीवों का प्राकृतिक जीवन प्रभावित होता है। इतना ही नहीं कई जीवों के घोंसले और अंडे भी ऐसे आयोजनों के कारण नष्ट हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में भी इसी तरह की मड रैली के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की गई थी। इसके बाद जनवरी 2020 में एनजीटी ने देशभर के वेटलैंड क्षेत्रों में मड रैली और इसी तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। उस समय भोपाल जिला प्रशासन ने भी ऐसे आयोजन की अनुमति निरस्त कर दी थी। इसके बावजूद दोबारा ऐसे आयोजन का होना नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    वन विभाग के अनुसार कलियासोत और आसपास के जंगलों में बाघ तेंदुए सहित कई वन्यजीवों की आवाजाही रहती है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों और अत्यधिक शोर से वन्यजीवों के व्यवहार पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे आयोजनों पर रोक नहीं लगी तो क्षेत्र की जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

    घटना के बाद प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। राजस्व अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं और अवैध रूप से मड रैली आयोजित करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में हर शनिवार और रविवार को विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि इस तरह की गतिविधियों को रोका जा सके।

    जानकारों के मुताबिक ऐसे आयोजनों की जानकारी आम तौर पर सार्वजनिक नहीं की जाती। सोशल मीडिया और निजी मैसेजिंग ग्रुप के माध्यम से चुनिंदा लोगों को सूचना दी जाती है जिससे बड़ी संख्या में ऑफरोड वाहन चालक और दर्शक मौके पर पहुंच जाते हैं। यही वजह है कि प्रशासन को समय रहते सूचना नहीं मिल पाती।

    पर्यावरण विशेषज्ञों ने मांग की है कि वेटलैंड क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही पूरी तरह नियंत्रित की जाए नियमित गश्त बढ़ाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका मानना है कि प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।