Category: Madhya Pradesh

  • वित्तीय संकट का हवाला देकर डिप्टी सीएम की नई कारों पर रोक, दूसरी ओर सीएम और मंत्रियों के लिए खरीदी गईं गाड़ियां

    वित्तीय संकट का हवाला देकर डिप्टी सीएम की नई कारों पर रोक, दूसरी ओर सीएम और मंत्रियों के लिए खरीदी गईं गाड़ियां

    भोपाल । मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में सरकारी वाहनों की खरीद को लेकर नया मामला सामने आया है। सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए नई गाड़ियां खरीदी हैं, लेकिन दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल को नई कार देने के प्रस्ताव वित्त विभाग ने लौटा दिए हैं। विभाग ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए दोनों डिप्टी सीएम को मौजूदा सरकारी वाहनों की मरम्मत कराकर इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इस फैसले के बाद सरकारी खर्चों पर नियंत्रण के निर्देशों और नई गाड़ियों की खरीद को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
    जानकारी के अनुसार दोनों उपमुख्यमंत्रियों के सरकारी वाहन निर्धारित किलोमीटर की सीमा पार कर चुके हैं। नियमानुसार सरकारी वाहन के एक लाख दस हजार किलोमीटर चलने के बाद उसे बदलने का प्रावधान है। दोनों डिप्टी सीएम की गाड़ियां इस सीमा से अधिक चल चुकी हैं। इसके बाद गृह विभाग के माध्यम से नई कार खरीदने के प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे गए थे। हालांकि वित्त विभाग ने इन प्रस्तावों को मंजूरी देने के बजाय वापस कर दिया और पुरानी गाड़ियों की मरम्मत कराकर चलाने के निर्देश दिए।
    दूसरी ओर चालू वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए नई इलेक्ट्रिक कार खरीदी गई है। इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के लिए इनोवा क्रिस्टा खरीदी गई। गृह सचिव कृष्णा वेणी के लिए भी नई इनोवा क्रिस्टा की व्यवस्था की गई है। इस तरह मुख्यमंत्री मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारी के लिए नई गाड़ियों की खरीद हुई है, जबकि दोनों डिप्टी सीएम के प्रस्तावों को वित्तीय कारणों से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसी अंतर को लेकर सरकारी वाहन खरीद की नीति और प्राथमिकताओं पर चर्चा हो रही है।
    गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने करीब तीन महीने पहले वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकारी खर्चों में कटौती करने के निर्देश जारी किए थे। अधिकारियों के विदेश दौरे महंगे होटलों में बैठकें और अन्य गैरजरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखने को कहा गया था। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागों को यथासंभव वर्चुअल बैठकें आयोजित करने और जिलों के अधिकारियों को अनावश्यक रूप से भोपाल नहीं बुलाने के निर्देश भी दिए थे। मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या कम करने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाकर सात रखने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद नई गाड़ियों की खरीद जारी रहने से खर्चों पर नियंत्रण के निर्देशों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
    वाहनों की खरीद का पिछला रिकॉर्ड भी इस मामले को महत्वपूर्ण बनाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश में सबसे ज्यादा 27 कारें खरीदी गई थीं। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक चार नई कारों की खरीद हुई है। इनमें मुख्यमंत्री की इलेक्ट्रिक कार और तीन इनोवा क्रिस्टा शामिल हैं। वहीं दोनों उपमुख्यमंत्रियों के लिए नई कार खरीदने के प्रस्ताव मंजूर नहीं किए गए हैं।
    वित्त विभाग ने आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले दूसरे अनुपूरक बजट को लेकर भी विभागों को निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव 22 अक्टूबर तक ऑनलाइन भेजने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे नए मदों के प्रस्ताव शामिल नहीं किए जा सकेंगे जिनसे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़े। वाहन खरीद के प्रस्तावों को भी अनुपूरक बजट में शामिल नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे नई गाड़ियों की खरीद के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने की संभावना सीमित होती दिखाई दे रही है।
    इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने वीवीआईपी और राज्य अतिथियों की सुरक्षा तथा परिवहन व्यवस्था के लिए 12.68 करोड़ रुपये की 44 नई गाड़ियां खरीदने को मंजूरी दी है। इनमें 4.08 करोड़ रुपये की बुलेटप्रूफ टोयोटा लैंड क्रूजर 300 भी शामिल है। मध्य प्रदेश में डिप्टी सीएम की कारों के प्रस्ताव खारिज होने और महाराष्ट्र में महंगी गाड़ियों की खरीद की मंजूरी के बीच सरकारी वाहन खर्च का मुद्दा चर्चा में है। फिलहाल मध्य प्रदेश में दोनों उपमुख्यमंत्रियों को पुरानी गाड़ियों से ही काम चलाना होगा और नई कारों को लेकर आगे का फैसला वित्तीय मंजूरी पर निर्भर करेगा।
  • भोपाल में गरबा महोत्सव की धूम, 4000 से ज्यादा प्रतिभागियों ने की रिहर्सल, खास थीम और महाआरती के साथ सजेगा पंडाल

    भोपाल में गरबा महोत्सव की धूम, 4000 से ज्यादा प्रतिभागियों ने की रिहर्सल, खास थीम और महाआरती के साथ सजेगा पंडाल


    भोपाल । भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित पांच दिवसीय अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव 2026 का दूसरा दिन आज उत्साह और पारंपरिक रंगों के बीच मनाया जाएगा। मंगलवार से शुरू हुए इस आयोजन में गरबा प्रेमियों के बीच खास उत्साह देखने को मिल रहा है। गुजराती लोकगीतों की धुन पर गरबा डांडिया और तीन ताली के जरिए प्रतिभागी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। रंग-बिरंगे परिधान रोशनी से सजा पंडाल और पारंपरिक संगीत इस आयोजन को खास बनाने की तैयारी में हैं। नवरात्र के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव लोगों को धार्मिक आस्था के साथ भारतीय लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर दे रहा है।
    महोत्सव की तैयारियों को लेकर पहले से ही व्यापक स्तर पर अभ्यास किया गया है। पहली ग्राउंड रिहर्सल में चार हजार से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान गुजराती पारंपरिक गीतों की धुन और प्रशिक्षकों की काउंटिंग के साथ प्रतिभागियों ने गरबा डांडिया और तीन ताली का अभ्यास किया। सामूहिक नृत्य के दौरान तालमेल बनाए रखने और निर्धारित स्टेप्स को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया। सोमवार को दूसरी ग्राउंड रिहर्सल भी आयोजित की गई थी ताकि मुख्य आयोजन के दौरान प्रतिभागी पूरे उत्साह और बेहतर तालमेल के साथ प्रस्तुति दे सकें।
    इस बार महोत्सव में पारंपरिक गुजराती वेशभूषा के साथ अलग-अलग राज्यों की पोशाकों और विशेष थीम का आकर्षण भी देखने को मिल सकता है। पिछले आयोजनों में राजस्थानी परिधान महाकुंभ और श्रीनाथ जैसी थीम के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता दिखाई थी। इस बार भी प्रतिभागियों की वेशभूषा और पंडाल की सजावट उत्सव में चार चांद लगाने की तैयारी में है। पारंपरिक आभूषणों और रंगीन परिधानों के साथ गरबा करने वाले प्रतिभागियों के बीच उत्सव का माहौल और आकर्षक बनेगा।
    आयोजन में बढ़ती भागीदारी को देखते हुए गरबा सर्किल का आकार भी बढ़ाया गया है। पहले इसका आकार 100 फीट था जिसे बढ़ाकर 110 फीट कर दिया गया है। इससे प्रतिभागियों को सामूहिक नृत्य के दौरान अधिक जगह मिल सकेगी। बड़े गरबा सर्किल में एक साथ बड़ी संख्या में प्रतिभागियों के नृत्य करने से आयोजन की भव्यता बढ़ने की उम्मीद है। गरबा की पारंपरिक लय और डांडिया की खनक के बीच पूरा मैदान उत्सव के रंग में रंगा नजर आएगा।
    अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव में माता अम्बे की पूजा-अर्चना और महाआरती भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पारंपरिक नृत्य का यह संगम श्रद्धालुओं और गरबा प्रेमियों को आकर्षित करता है। रोशनी से सजे पंडाल में माता की आराधना के बाद गरबा और डांडिया का उत्साह देखने को मिलेगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में शहर के लोगों को परिवार और दोस्तों के साथ उत्सव का आनंद लेने तथा गुजराती संस्कृति की परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
    महोत्सव में प्रवेश के लिए पास अनिवार्य रखा गया है। आयोजकों के अनुसार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पास प्राप्त किए जा सकते हैं। एक कपल पास पर दो लोगों को प्रवेश मिलेगा और इनमें एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य है। पास अभिव्यक्ति मैनेजमेंट द्वारा निर्धारित दुकानों से खरीदे जा सकते हैं। इसके अलावा भेल दशहरा मैदान स्थित गरबा ग्राउंड पर बनाए गए दो ऑफलाइन स्टॉल से भी पास लेने की सुविधा है। ऑनलाइन पास के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था भी की गई है। आयोजकों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से ही पास खरीदें ताकि प्रवेश के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
  • एमपी में बस सफर होगा हाईटेक, मोबाइल एप से बुक करें टिकट, नियम तोड़ने वाले कंडक्टरों पर होगी सख्त कार्रवाई

    एमपी में बस सफर होगा हाईटेक, मोबाइल एप से बुक करें टिकट, नियम तोड़ने वाले कंडक्टरों पर होगी सख्त कार्रवाई


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बस से सफर करने वाले यात्रियों के लिए जल्द ही बड़ी सुविधा शुरू हो सकती है। अब यात्रियों को बस का टिकट लेने के लिए काउंटर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रेलवे की तर्ज पर मोबाइल एप के जरिए घर बैठे बस टिकट बुक करने की व्यवस्था तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत शुरू होने वाली इस सुविधा का उद्देश्य यात्रियों को आसान और पारदर्शी परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है। इसके लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड आईआरसीटीसी की तर्ज पर मोबाइल एप तैयार करा रही है। शुरुआती चरण में भोपाल और इंदौर के आईएसबीटी से इस सुविधा की शुरुआत करने की तैयारी है।
    प्रस्तावित एप के माध्यम से यात्री अपने सफर का रूट चुन सकेंगे। इसके अलावा बस में चढ़ने का स्थान और गंतव्य निर्धारित करके टिकट बुक किया जा सकेगा। हालांकि अभी एप का आधिकारिक नाम और डाउनलोड लिंक जारी नहीं किया गया है। बुकिंग शुरू होने की तारीख भी घोषित नहीं हुई है। ऐसे में यात्रियों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा। किसी अनजान वेबसाइट या अनधिकृत एप से टिकट बुक करने से बचना जरूरी है।
    डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था में भुगतान की प्रक्रिया भी अहम होगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार टिकट की राशि सीधे संबंधित बस ऑपरेटर के खाते में जमा होगी। एप के संचालन के लिए टिकट राशि पर 0.1 से 0.2 प्रतिशत तक कन्विनियंस फीस लेने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि यात्रियों को टिकट बुक करते समय पूरा किराया देना होगा या भुगतान के दूसरे विकल्प भी मिलेंगे इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यूपीआई डेबिट और क्रेडिट कार्ड सहित अन्य भुगतान माध्यमों को लेकर भी अंतिम नियमों का इंतजार है।
    यात्रियों के सामने सबसे बड़ा सवाल बस छूट जाने की स्थिति में टिकट की वैधता को लेकर है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बुक किया गया टिकट केवल निर्धारित बस और समय के लिए मान्य होगा या उसी रूट की अगली बस में भी उसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। टिकट कैंसिल कराने समय बदलने और रिफंड से जुड़े नियम भी घोषित नहीं किए गए हैं। इसलिए यात्रियों को बुकिंग शुरू होने से पहले इन शर्तों की जानकारी लेना जरूरी होगा।
    बसों की निगरानी के लिए भी योजना में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सेवा में शामिल निजी बसों में जीपीएस और कैमरा सिस्टम चालू रखना अनिवार्य होगा। इससे बसों की लोकेशन और संचालन पर नजर रखने में मदद मिलेगी। हालांकि यात्रियों को एप पर लाइव लोकेशन देखने की सुविधा मिलेगी या नहीं इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। बस का प्लेटफॉर्म अधिकृत स्टॉपेज और बोर्डिंग की जगह से जुड़ी जानकारी भी आधिकारिक नियम जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
    योजना में टिकट व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान भी प्रस्तावित है। किराया लेने के बाद टिकट नहीं देने वाले कंडक्टर के खिलाफ केस और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। वहीं बिना टिकट यात्रा करते पकड़े जाने पर यात्रियों पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि जुर्माने की राशि और जांच की प्रक्रिया के विस्तृत नियम अभी सामने नहीं आए हैं। यात्रियों को सलाह है कि किराया देने के बाद टिकट जरूर लें और यात्रा पूरी होने तक उसे सुरक्षित रखें।
    इसी बीच मध्य प्रदेश में सड़क हादसों को कम करने के लिए 38 नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की तैयारी भी चल रही है। भोपाल ग्वालियर उज्जैन छतरपुर और बैतूल में पांच रीजनल ड्राइविंग सेंटर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके अलावा 33 अन्य प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाने हैं। इनमें 11 केंद्रों के प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं जबकि 22 केंद्रों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश में इंदौर और छिंदवाड़ा में पहले से ड्राइविंग एंड ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट संचालित हैं। इन पहलों से बस परिवहन को अधिक व्यवस्थित बनाने और वाहन चालकों के प्रशिक्षण में सुधार की उम्मीद है।
  • MP में फिर बदलेगा मौसम, 20 जिलों में तीन दिन आंधी-बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में अलर्ट नहीं

    MP में फिर बदलेगा मौसम, 20 जिलों में तीन दिन आंधी-बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में अलर्ट नहीं


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद अब एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से 15 से 17 अक्टूबर के बीच प्रदेश के 20 जिलों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश होने की संभावना है। हालांकि, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में फिलहाल बारिश को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    मौसम केंद्र, भोपाल के अनुसार, अगले तीन दिनों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर देखने को मिलेगा। 15 और 16 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में बारिश की संभावना है। इसके बाद 17 अक्टूबर को मौसम का प्रभाव रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग तक पहुंच सकता है।

    इन 20 जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 17 अक्टूबर को प्रदेश के 20 जिलों में आंधी और बारिश का असर रह सकता है। इनमें ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट शामिल हैं।

    इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। वहीं, प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में फिलहाल इस सिस्टम का खास असर होने की संभावना नहीं है।

    मानसून विदा, फिर भी क्यों हो रही बारिश?

    मध्य प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के रुझानों से पता चलता है कि अक्टूबर में गर्मी, बारिश और हल्की ठंड का मिला-जुला असर रहता है।

    इस साल भी मौसम का यही मिजाज दिखाई दे रहा है। दिन में धूप और गर्मी महसूस हो रही है, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ रही है। इसी बीच, मौसमी सिस्टम सक्रिय होने पर कुछ इलाकों में बारिश की स्थिति बन रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    सामान्य से 4% कम हुई सीजन की बारिश

    जून से सितंबर तक चले मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है। इस तरह प्रदेश में सामान्य के मुकाबले लगभग 1.5 इंच कम पानी बरसा।

    बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर भी रहा। पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसत से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन और भोपाल समेत अन्य क्षेत्रों में सामान्य से करीब 12 प्रतिशत कम बारिश हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

    प्रदेश के 25 जिलों में बारिश सामान्य या उससे अधिक रही। इनमें भोपाल, ग्वालियर, गुना, छतरपुर और रीवा समेत कई जिले शामिल हैं। वहीं, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रायसेन, देवास और धार समेत 30 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।

    मानसून के शुरुआती दौर में कम बारिश का असर पूरे सीजन के आंकड़ों पर दिखाई दिया। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। बाद के महीनों में हुई बारिश के बावजूद शुरुआती कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी।

  • शिवपुरी में पारस देसी घी में सीसे की मात्रा अधिक मिलने पर बिक्री पर प्रतिबंध

    शिवपुरी में पारस देसी घी में सीसे की मात्रा अधिक मिलने पर बिक्री पर प्रतिबंध

    शिवपुरी। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने पारस देसी घी के एक बैच की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। जांच में इस बैच में सीसे की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। इसके बाद संबंधित घी को मानव उपभोग के लिए असुरक्षित घोषित करते हुए उसके विक्रय, प्रदर्शन और ऑनलाइन आपूर्ति पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

    कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई के संबंध में अभिहित अधिकारी एवं उपसंचालक ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी विष्णुदत्त शर्मा ने नियमित निरीक्षण के दौरान छत्री रोड स्थित ब्लिंक कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के स्टोर से पारस देसी घी के बैच नंबर GU26FQG55 का नमूना लिया था। इसे जांच के लिए भोपाल भेजा गया था।

    राज्य खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट में नमूने में सीसे की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। इसके आधार पर संबंधित बैच को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत मानव उपभोग के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है।

    अभिहित अधिकारी एवं उपसंचालक डॉ. संजय ऋषिश्वर ने ब्लिंक कॉमर्स और संबंधित विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित बैच के घी का न तो दुकानों पर प्रदर्शन किया जाए और न ही उसकी बिक्री या ऑनलाइन आपूर्ति की जाए। उपलब्ध शेष स्टॉक को तत्काल अलग रखकर उस पर ‘विक्रय हेतु प्रतिबंधित’ अंकित करना होगा।

    संबंधित कारोबारियों को आदेश प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर घी की कुल प्राप्त मात्रा, बेची गई मात्रा और शेष स्टॉक का विवरण बिलों सहित विभाग में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

    विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित बैच का विक्रय करते पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 59 सहित अन्य लागू दंडात्मक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

  • मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर कानूनी रणनीति बनाने दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, उमंग सिंघार ने विशेष सत्र बुलाने की मांग की

    मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर कानूनी रणनीति बनाने दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, उमंग सिंघार ने विशेष सत्र बुलाने की मांग की

    मध्य प्रदेश। में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात की। इस बैठक में प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य विषय ओबीसी आरक्षण से जुड़े हाईकोर्ट के निर्णय के कानूनी पहलू और आगे की कार्रवाई की रणनीति रहा।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक के बाद बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ ओबीसी आरक्षण के मामले पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि चर्चा में उच्च न्यायालय के फैसले से संबंधित कानूनी पहलुओं के साथ आगामी कानूनी कार्रवाई की रणनीति पर भी बात हुई। सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाएगी, इसे लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।

    इस बीच, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सॉलिसिटर जनरल से बातचीत कर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगवाना चाहते हैं, लेकिन इस उद्देश्य से दिल्ली जाने की जरूरत पर उन्होंने सवाल किया। सिंघार के मुताबिक, राज्य सरकार के पास विधानसभा के माध्यम से भी इस विषय पर कदम उठाने का विकल्प है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि जब विधानसभा मौजूद है, तो ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर विशेष सत्र क्यों नहीं बुलाया जा रहा है।

    उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने के पक्ष में है और इसके लिए तैयार है। उन्होंने राज्य सरकार से ओबीसी आरक्षण के संबंध में अध्यादेश जारी करने तथा कानून पारित कराने की मांग की। सिंघार ने सवाल उठाया कि सरकार ऐसा करने से क्यों बच रही है और बार-बार मामले को अदालत के निर्णय पर क्यों छोड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ओबीसी वर्ग को फिर से झूठे सपने दिखा रहे हैं।

    नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि सरकार की नीयत स्पष्ट है, तो उसे तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर ओबीसी आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनके बयान के अनुसार, विधानसभा में इस विषय पर चर्चा और जरूरी कदम उठाने से सरकार की स्थिति सामने आ सकती है। हालांकि, विशेष सत्र बुलाने या अध्यादेश जारी करने को लेकर सरकार की ओर से किसी नए फैसले की जानकारी खबर में नहीं दी गई है।

    हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार की अगली कानूनी कार्रवाई को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल से मुलाकात के दौरान कानूनी पहलुओं और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तारीख या इस संबंध में किसी औपचारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि राज्य सरकार इस मामले को आगे किस कानूनी प्रक्रिया के तहत ले जाएगी।

    ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत किए जाने का मामला अब राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और विपक्ष की मांगों के बीच केंद्र में है। यदि सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाती है, तो उसे आरक्षण बढ़ाने के समर्थन में अपना कानूनी आधार प्रस्तुत करना होगा। फिलहाल, मुख्यमंत्री की कानूनी सलाह-मशविरा संबंधी पहल और उमंग सिंघार की विशेष सत्र बुलाने की मांग इस मुद्दे पर सामने आए प्रमुख घटनाक्रम हैं।

  • धीरेंद्र शास्त्री ने दमोह में हिंदुओं से एकजुट रहने की अपील की, बोले- मुसीबत में घर से नहीं निकले तो सबसे बड़े बुजदिल

    धीरेंद्र शास्त्री ने दमोह में हिंदुओं से एकजुट रहने की अपील की, बोले- मुसीबत में घर से नहीं निकले तो सबसे बड़े बुजदिल


    दमोह जिले:
    बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथयात्रा तीसरे दिन मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा से रवाना हुई। यात्रा आगे बढ़ने से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान गौरीशंकर के दर्शन किए। इसके बाद सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ और राष्ट्रगान हुआ। इस दौरान बच्चों को सनातन धर्म, हिंदू एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े सात वचनों का पालन करने की शपथ दिलाई गई।

    यात्रा में अयोध्या की हनुमानगढ़ी के राजू दास महाराज, मलूकपीठ के गंगा दास महाराज, हरिद्वार के मोनी महाराज और चित्रकूट धाम के राधेश्याम महाराज भी धीरेंद्र शास्त्री के साथ मौजूद रहे। हटा से यात्रा रवाना होने के दौरान श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया। ग्रामीणों ने फूलों से रंगोली बनाई और ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा का अभिनंदन किया। स्वागत के लिए स्कूली छात्राएं भी कलश लेकर खड़ी रहीं।

    इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से सवाल किया कि यदि भविष्य में किसी हिंदू पर मुसीबत आती है, तो क्या वे उसकी मदद के लिए घर से बाहर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि यदि संकट के समय भी लोग घर से बाहर नहीं निकलते हैं, तो वे सबसे बड़े बुजदिल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रथयात्रा का उद्देश्य राजनीति में प्रवेश करना या किसी को वोट दिलवाना नहीं है।

    यात्रा के पहले दिन भी धीरेंद्र शास्त्री ने धर्म के प्रति प्रतिबद्धता और हिंदुओं की एकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि चाहे कितने भी विरोधी सामने आएं, प्राण चले जाने की स्थिति में भी धर्म नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने सनातन धर्म को मानने वालों की एकजुटता को भारत की मजबूती से जोड़ा। यात्रा के दौरान श्रद्धालु जात-पात समाप्त करने और आपसी भाईचारे का संदेश देने वाले नारे लगाते रहे।

    यात्रा में शामिल कुछ युवकों ने भी उत्साह जताते हुए कहा कि कोई आकर यात्रा रोककर दिखाए। बिहार से आए संत ऋषि ने पन्ना में मिले सहयोग और उत्साह की सराहना की। उन्होंने लोगों से अच्छे कार्यों में सहयोग करने, गुरु के साथ जुड़े रहने और उनकी बातों का पालन करने की अपील की।

    सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 3.0 रविवार सुबह करीब 11:30 बजे बागेश्वर धाम से शुरू हुई थी। पांच दिनों की इस यात्रा में लगभग 500 किलोमीटर की दूरी तय की जानी है। यात्रा पांच जिलों से होकर गुजरेगी। इसके घोषित उद्देश्यों में सनातन एकता, सामाजिक समरसता, नशामुक्ति और लव जिहाद से मुक्त बुंदेलखंड का संकल्प शामिल है। सोमवार को पन्ना में रात्रि विश्राम के बाद यात्रा सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, राष्ट्रगान और बच्चों को शपथ दिलाने के कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ी।

    यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। इंदौर की दीपिका ने कहा कि साधु-संतों और सुंदरकांड मंडल के प्रयासों से ऐसा हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए, जो केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों के विचारों और आचरण में भी दिखाई दे। उन्होंने सभी को समान अधिकार और सम्मान मिलने की बात कही।

    कानपुर के मातृशक्ति सुंदरकांड मंडल की सदस्य संध्या सिंह अपने साथियों के साथ पैदल यात्रा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी इच्छा से गुरु सेवा और हिंदू राष्ट्र के संकल्प के लिए निकली हैं तथा इसे अपनी जिम्मेदारी भी मानती हैं। श्रद्धालु पूजा दुबे ने बताया कि महाराज के आशीर्वाद से उनके परिवार और बेटी को लाभ मिला है। वहीं, सीता व्यास ने कहा कि वह चार साल से धीरेंद्र शास्त्री से जुड़ी हैं और उन्हें देखकर भावुक हो जाती हैं।

  • ग्वालियर में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसे, दूसरे फ्लोर पर तकनीकी खराबी से अचानक रुकी लिफ्ट

    ग्वालियर में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसे, दूसरे फ्लोर पर तकनीकी खराबी से अचानक रुकी लिफ्ट

    मध्य प्रदेश । के ग्वालियर में सोमवार शाम पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा लिफ्ट में फंस गए। वह जयेंद्रगंज इलाके में एक नई इंग्लिश कोचिंग क्लास की शाखा का उद्घाटन करने पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल पर पहली मंजिल से तीसरी मंजिल तक जाने के दौरान लिफ्ट दूसरे फ्लोर पर तकनीकी खराबी के कारण अचानक रुक गई। इसके बाद उन्हें करीब 10 से 15 मिनट तक लिफ्ट के अंदर रहना पड़ा। बाद में कर्मचारियों ने दरवाजा खोलकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    यह कार्यक्रम लश्कर क्षेत्र के जयेंद्रगंज में संजय कॉम्प्लेक्स के सामने स्थित एक इमारत में आयोजित किया गया था। यहां ‘ग्वालियर नंबर 01 स्पोकन इंग्लिश क्लासेस’ की नई शाखा शुरू की जानी थी। डॉ. नरोत्तम मिश्रा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे। निर्धारित कार्यक्रम के तहत उन्हें तीसरी मंजिल पर स्थित कोचिंग सेंटर तक जाना था।

    जानकारी के अनुसार, डॉ. मिश्रा पहली मंजिल से लिफ्ट में सवार हुए। लिफ्ट ऊपर की ओर बढ़ी, लेकिन दूसरे फ्लोर पर पहुंचते ही तकनीकी समस्या के कारण झटके के साथ रुक गई। लिफ्ट के अचानक बंद होने से उसमें मौजूद लोग अंदर ही फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही इमारत में मौजूद कर्मचारियों और कार्यक्रम के आयोजकों ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश शुरू की।

    लिफ्ट का दरवाजा खोलने के लिए कर्मचारियों ने प्रयास किए। करीब 10 से 15 मिनट की मशक्कत के बाद दरवाजा खुल सका और डॉ. मिश्रा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान कार्यक्रम के आयोजक, उनके सुरक्षाकर्मी और पुलिसकर्मी भी परेशान रहे। हालांकि, उन्हें बाहर निकालने के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया।

    घटना के समय मौजूद किसी व्यक्ति ने लिफ्ट में फंसने और बाहर निकाले जाने का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके बाद मामला चर्चा में आया। वीडियो में लिफ्ट से जुड़ी घटना के दृश्य सामने आए। हालांकि, लिफ्ट में तकनीकी खराबी किस वजह से आई, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    लिफ्ट से बाहर आने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कोचिंग संस्थान की नई शाखा का उद्घाटन किया। उन्होंने रिबन काटकर केंद्र की शुरुआत की और इसके बाद कार्यक्रम में शामिल हुए। इस तरह लिफ्ट में फंसने की घटना के बावजूद उद्घाटन कार्यक्रम पूरा किया गया।

    कार्यक्रम के बाद डॉ. मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कुछ तस्वीरें और वीडियो साझा किए। उन्होंने कोचिंग संस्थान को युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक बेहतर विकल्प बताया। वहीं, लिफ्ट में उनके फंसने और कर्मचारियों द्वारा सुरक्षित बाहर निकाले जाने से जुड़ा वीडियो भी प्रसारित हो रहा है। घटना के संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लिफ्ट दूसरे फ्लोर पर तकनीकी खराबी के कारण रुकी थी और करीब 10 से 15 मिनट बाद उन्हें बाहर निकाला गया।

  • कोयंबतूर से भोपाल बाइक पर जा रहे 29 वर्षीय युवक की बैतूल में मौत, नेशनल हाईवे-47 पर अज्ञात भारी वाहन ने मारी टक्कर

    कोयंबतूर से भोपाल बाइक पर जा रहे 29 वर्षीय युवक की बैतूल में मौत, नेशनल हाईवे-47 पर अज्ञात भारी वाहन ने मारी टक्कर

    मध्य प्रदेश। के बैतूल जिले में नेशनल हाईवे-47 पर हुए सड़क हादसे में 29 वर्षीय एस. गौतम की मौत हो गई। वह तमिलनाडु के कोयंबतूर के रहने वाले थे और दुबई में नौकरी करते थे। गौतम बाइक से कोयंबतूर से भोपाल जा रहे थे। मंगलवार देर रात रास्ते में एक अज्ञात भारी वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

    यह दुर्घटना बैतूल बाजार थाना क्षेत्र में झिटापटी यात्री प्रतीक्षालय के पास हुई। हादसे का समय रात करीब 2:30 से 3 बजे के बीच बताया गया है। टक्कर मारने वाले भारी वाहन की पहचान अभी नहीं हो सकी है। पुलिस वाहन और उसके चालक का पता लगाने में जुटी है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गौतम भोपाल में अपने किसी पारिवारिक मित्र से मिलने के लिए निकले थे। वह कोयंबतूर से भोपाल तक लगभग 1,800 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए बाइक से यात्रा कर रहे थे। बताया गया है कि फ्लाइट उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने सड़क मार्ग से जाने का फैसला किया था। हालांकि, दुर्घटना के समय तक वह कितनी देर से लगातार बाइक चला रहे थे, इस संबंध में जानकारी सामने नहीं आई है।

    हादसे की सूचना मिलने के बाद शव को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की एंबुलेंस से बैतूल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मर्चुरी में रखवा दिया गया। फिलहाल पोस्टमार्टम की प्रक्रिया परिवार के सदस्यों के आने के बाद पूरी की जाएगी।

    घटना के बाद भोपाल से गौतम के कुछ परिचित बैतूल पहुंचे। उनके परिवार के सदस्यों के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। परिजनों के आने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    गौतम के पारिवारिक जीवन को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनके पिता का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया था। परिवार में उनकी मां, भाई और भाभी हैं। उनका पालन-पोषण पारिवारिक संघर्षों और कई परेशानियों के बीच हुआ था। वह दुबई में नौकरी करते थे और भोपाल में एक पारिवारिक मित्र से मिलने जा रहे थे।

    बैतूल बाजार थाने के बीट प्रभारी रमन धुर्वे के मुताबिक, दुर्घटना के बाद शव को एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया गया था। फिलहाल पुलिस अज्ञात भारी वाहन की पहचान करने का प्रयास कर रही है। हादसे के कारणों और टक्कर मारने वाले वाहन के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

  • जबलपुर हाईकोर्ट में बार अध्यक्ष के व्हाट्सऐप अकाउंट बैन का मामला, मेटा ने कहा विवाद अधिवक्ता और व्हाट्सऐप के बीच

    जबलपुर हाईकोर्ट में बार अध्यक्ष के व्हाट्सऐप अकाउंट बैन का मामला, मेटा ने कहा विवाद अधिवक्ता और व्हाट्सऐप के बीच


    मध्य प्रदेश।
    के जबलपुर हाईकोर्ट में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह का व्हाट्सऐप अकाउंट बंद किए जाने के मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान मेटा की ओर से कहा गया कि विवाद का संबंध सीधे तौर पर व्हाट्सऐप और याचिकाकर्ता के बीच है तथा इसमें मेटा की कोई भूमिका नहीं है। अदालत ने व्हाट्सऐप कंपनी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

    सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच के समक्ष हुई। मेटा की ओर से अधिवक्ता मयंक उपाध्याय अदालत में पेश हुए, जबकि वरुण पाठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल हुए। मेटा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले में विवाद व्हाट्सऐप और याचिकाकर्ता के बीच का है। वहीं, भारत संघ की ओर से अधिवक्ता सचिन जैन मौजूद रहे। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल और अधिवक्ता गुंचा रसूल ने पक्ष रखा।

    याचिका के अनुसार, मृगेंद्र सिंह का व्हाट्सऐप अकाउंट 23 अगस्त 2026 को बंद कर दिया गया था। उनका कहना है कि अकाउंट बंद करने से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही इसकी वजह बताई गई। सिंह के मुताबिक, वह कई वर्षों से इस नंबर का इस्तेमाल कर रहे थे। उनके पेशे से जुड़े कई जरूरी काम इसी अकाउंट के माध्यम से किए जाते थे। इनमें कानूनी कामकाज, मामलों का प्रबंधन, मुवक्किलों से बातचीत और केस से संबंधित दस्तावेजों का आदान-प्रदान शामिल था।

    मृगेंद्र सिंह ने याचिका में बताया कि अकाउंट बंद होने वाले दिन ही उन्होंने ऐप के माध्यम से इसकी समीक्षा करने का अनुरोध किया था। हालांकि, उनके अनुसार इस प्रक्रिया से कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि अकाउंट बंद होने से उनके नियमित पेशेवर कामकाज पर असर पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से राहत देने की मांग की है। उनका पक्ष है कि डिजिटल माध्यम से होने वाला संवाद बाधित होने से कानूनी कार्यों को संचालित करने में परेशानी होती है।

    याचिकाकर्ता ने अकाउंट बंद किए जाने को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का उल्लंघन बताया है। इसके अलावा, उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के पालन में भी कथित चूक का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिकायत के निपटारे के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया गया। ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और मामले में अदालत का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।

    मेटा और व्हाट्सऐप के संबंधों का मुद्दा भी इस मामले में सामने आया। मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक ने वर्ष 2014 में व्हाट्सऐप के अधिग्रहण की घोषणा की थी और उसी वर्ष यह प्रक्रिया पूरी हुई थी। व्हाट्सऐप एलएलसी मेटा की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। इसके बावजूद सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से कहा गया कि मौजूदा विवाद में उसकी सीधी भूमिका नहीं है।

    हाईकोर्ट ने फिलहाल व्हाट्सऐप को अपना जवाब पेश करने का अवसर दिया है। मृगेंद्र सिंह ने याचिका में अपना अकाउंट बहाल करने, राहत प्रदान करने और कथित नियम उल्लंघन के संबंध में भारत संघ को उचित कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है। अब 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में कंपनी का पक्ष सामने आने की उम्मीद है।