Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर में छात्र आंदोलन पर सियासी तकरार NEET विरोधी छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए अपशब्द मानसिक प्रताड़ना और परिवार से दूर रखने के आरोप

    इंदौर में छात्र आंदोलन पर सियासी तकरार NEET विरोधी छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए अपशब्द मानसिक प्रताड़ना और परिवार से दूर रखने के आरोप


    इंदौर । नीट पेपर लीक के विरोध में इंदौर में प्रस्तावित न्याय यात्रा से पहले गिरफ्तार किए गए छह छात्र नेताओं ने रिहाई के बाद पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि उन्हें प्रशासन ने डीसीपी से चर्चा कराने का भरोसा देकर बुलाया लेकिन बातचीत कराने के बजाय सीधे थाने ले जाकर धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। छात्रों का कहना है कि पूरी कार्रवाई के दौरान उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के सदस्य राधे जाट ने बताया कि 23 जुलाई को प्रस्तावित न्याय यात्रा के संबंध में पुलिस प्रशासन से पहले ही संपर्क किया गया था। उन्होंने दावा किया कि यात्रा की पूरी जानकारी एक दिन पहले पुलिस कमिश्नर कार्यालय में दी गई थी और अनुमति भी मांगी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें यह कहकर बुलाया कि डीसीपी से चर्चा कराई जाएगी। छात्रों ने पुलिस पर भरोसा किया और उनके साथ चले गए लेकिन रास्ते में उनके मोबाइल फोन बंद करवा दिए गए। इसके बाद उन्हें पहले जिला अस्पताल चौकी और फिर चंदन नगर थाने ले जाया गया।

    छात्र नेताओं का कहना है कि अगले दिन मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें एसीपी के सामने पेश किया गया और फिर जेल भेज दिया गया। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर उनकी बात सुनने की कोशिश नहीं की गई। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे लेकिन प्रशासन ने आंदोलन शुरू होने से पहले ही उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।

    रिहा हुए छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और मानसिक रूप से परेशान किया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र सुरेंद्र यादव के साथ भी कथित रूप से अपशब्द कहे गए। इस मामले में विजय चौधरी चंद्रशेखर गुर्जर गौरव परिहार और हरिप्रपन्न गोस्वामी को भी गिरफ्तार किया गया था। सभी का कहना है कि उन्हें अपराधियों की तरह पेश किया गया जबकि उनका उद्देश्य केवल छात्रों की आवाज उठाना था।

    छात्र नेताओं का यह भी आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद चार दिनों तक उनके परिवारों को यह तक नहीं बताया गया कि उन्हें कहां रखा गया है। इससे परिजन लगातार परेशान रहे और उन्हें अपने बच्चों की कोई जानकारी नहीं मिल सकी। रिहाई के समय उनसे बॉन्ड ओवर भी भरवाया गया। छात्रों का कहना है कि इससे पहले उन्होंने एमपीपीएससी पटवारी भर्ती घोटाले और अन्य छात्र आंदोलनों में भी हिस्सा लिया था लेकिन कभी इस तरह की कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा।

    रिहाई के बाद छात्र नेताओं ने इंदौर में लागू कमिश्नरी व्यवस्था और धारा 151 के इस्तेमाल की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि गिरफ्तारी के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के नेता ने उनकी सुध नहीं ली। अब यह मामला छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच नए विवाद का कारण बनता दिखाई दे रहा है जबकि पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल लगातार उठ रहे हैं।

  • मध्य प्रदेश में मौसम का डबल अटैक कहीं बिजली गिरने से मौतें तो कहीं बारिश के लिए शिवलिंग जल में विराजमान

    मध्य प्रदेश में मौसम का डबल अटैक कहीं बिजली गिरने से मौतें तो कहीं बारिश के लिए शिवलिंग जल में विराजमान


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और इसके साथ ही कई इलाकों में तेज बारिश तथा आकाशीय बिजली की घटनाएं सामने आने लगी हैं। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में अगले चार दिनों तक भारी और अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसी बीच शहडोल जिले में रविवार को आकाशीय बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हो गए। मृतकों में एक 11 वर्षीय बच्चा भी शामिल है। सभी हादसे खेतों और खुले स्थानों पर हुए जहां लोग बारिश के दौरान काम कर रहे थे।

    मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में उमरिया शहडोल अनूपपुर डिंडौरी मंडला और बालाघाट जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही निम्न दाब क्षेत्र और डिप्रेशन भी सक्रिय हैं। आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 27 से 30 जुलाई के बीच कई क्षेत्रों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है।

    शहडोल जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र के ग्राम झींक में पहली घटना उस समय हुई जब खेत में धान की रोपाई का काम चल रहा था। अचानक आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना में दो अन्य लोग भी घायल हुए जिनका उपचार जारी है। जिले के अन्य हिस्सों में भी बिजली गिरने की अलग अलग घटनाओं में दो और लोगों की जान चली गई जबकि कई लोग घायल हुए। पुलिस ने सभी मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 13.2 इंच बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 15.5 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में लगभग 13 प्रतिशत दर्ज की गई है।

    उधर नर्मदापुरम जिले के इटारसी में बारिश की कमी से चिंतित किसानों और श्रद्धालुओं ने अच्छी वर्षा की कामना के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान किया। प्राचीन तिलक सिंदूर मंदिर में भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया गया तथा शिवलिंग को पूरी तरह जल में विराजमान किया गया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस परंपरा से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है। सुबह से मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए पहुंचे और किसानों की समृद्धि तथा अच्छी बारिश की प्रार्थना की।

    मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने सलाह दी है कि गरज चमक के समय खुले मैदानों खेतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें तथा सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

  • महेश्वर में दर्दनाक हादसा परिवार के सामने नर्मदा की तेज धारा में बहा इंदौर का युवक कुछ सेकेंड में हुआ लापता

    महेश्वर में दर्दनाक हादसा परिवार के सामने नर्मदा की तेज धारा में बहा इंदौर का युवक कुछ सेकेंड में हुआ लापता

    खरगोन । खरगोन जिले के महेश्वर स्थित सहस्त्रधारा घाट पर रविवार शाम एक दर्दनाक हादसे में इंदौर का 30 वर्षीय युवक नर्मदा नदी की तेज धारा में बह गया। परिवार के सामने हुए इस हादसे में युवक कुछ ही सेकेंड में तेज बहाव में ओझल हो गया। पत्नी और भाई लगातार मदद के लिए चीखते रहे लेकिन तेज बहाव और गहरे पानी के कारण कोई भी उसे बचाने के लिए नदी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सका। घटना का वीडियो भी सामने आया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार लापता युवक की पहचान इंदौर के निपानिया निवासी अर्पित हाड़ा के रूप में हुई है। वह अपने परिवार और दोस्तों के साथ महेश्वर तथा आसपास के पर्यटन स्थलों की सैर के लिए आया था। महेश्वर दर्शन के बाद सभी लोग जलकोटी स्थित सहस्त्रधारा घाट पहुंचे। शाम करीब चार से पांच बजे के बीच नर्मदा में स्नान करते समय अर्पित का पैर फिसल गया और वह तेज बहाव के साथ गहरे पानी में चला गया। देखते ही देखते वह कुछ ही पलों में लापता हो गया।

    हादसे के बाद मौके पर मौजूद पत्नी और भाई ने शोर मचाकर लोगों से मदद मांगी। आसपास मौजूद नाविक ग्रामीण और पर्यटक भी तुरंत पहुंचे लेकिन नदी का तेज बहाव पथरीला तल और गहराई इतनी अधिक थी कि कोई भी पानी में उतरकर बचाव नहीं कर सका। कुछ ही सेकेंड में युवक आंखों से ओझल हो गया।

    सूचना मिलते ही महेश्वर पुलिस होमगार्ड की रेस्क्यू टीम स्थानीय गोताखोर और बाद में एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। रविवार शाम से देर रात तक नदी के विभिन्न हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया लेकिन अंधेरा होने के कारण अभियान रोकना पड़ा। सोमवार सुबह छह बजे से एक बार फिर नावों और गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान शुरू किया गया। समाचार लिखे जाने तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल पाया था।

    लापता युवक के पिता अमर सिंह हाड़ा ने बताया कि अर्पित अपने परिवार और दोस्तों के साथ रविवार दोपहर इंदौर से निकला था। घर से निकलते समय उसने जल्द लौटने की बात कही थी। अर्पित जैविक पोषण ऑल इंडिया नाम से अपना कारोबार चलाता था। उसकी शादी को करीब पांच वर्ष हो चुके हैं और उसका तीन साल का एक बेटा भी है। परिवार का रो रोकर बुरा हाल है।

    पुलिस ने बताया कि सहस्त्रधारा घाट का इलाका तेज बहाव गहरे पानी और पथरीले तल के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अनजान या गहरे पानी वाले स्थानों पर स्नान करने से बचें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

    बताया जा रहा है कि पिछले तीन महीनों में नर्मदा घाट क्षेत्र में डूबने या तेज बहाव में बहने की यह चौथी घटना है। लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में स्थायी गोताखोरों और अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती का प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने की बात कही है।

  • MP: भोपाल के बुजुर्ग से शेयर मार्केट में मुनाफे का झांसा देकर 3.91 करोड़ रुपये की साइबर ठगी

    MP: भोपाल के बुजुर्ग से शेयर मार्केट में मुनाफे का झांसा देकर 3.91 करोड़ रुपये की साइबर ठगी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के चूना भट्टी इलाके में रहने वाले 67 वर्षीय बुजुर्ग साइबर ठगों (Cyber ​​Fraudsters) के ऐसे जाल में फंस गए कि उन्होंने करीब 3.91 करोड़ रुपये गंवा दिए। आरोपियों ने शेयर बाजार (Stock Market) और आईपीओ (IPO) में कई गुना मुनाफे का लालच देकर पहले भरोसा कायम किया और फिर अलग-अलग बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करा ली। ठगों ने इसके लिए फेसबुक विज्ञापन, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और नकली सेबी पंजीयन प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया।


    फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ संपर्क

    पीड़ित के मुताबिक, 29 मई को फेसबुक मैसेज के जरिए एक विज्ञापन का लिंक उनके पास पहुंचा था। इसके बाद ‘अनन्या कुलकर्णी’ नाम की युवती ने उन्हें फोन किया। उसने खुद को फिनसोल सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड की अधिकारी बताया। युवती ने बुजुर्ग को ‘सारथी प्लान’ के जरिए निवेश करने की सलाह दी और कई सौ गुना तक मुनाफा होने का दावा किया। बातों पर भरोसा होने के बाद बुजुर्ग ने निवेश शुरू कर दिया। आरोपियों ने उन्हें एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप पर निवेश और मुनाफे की जानकारी दिखाई, जिससे उन्हें लगा कि उनका पैसा तेजी से बढ़ रहा है।


    11 जून से 9 जुलाई तक ट्रांसफर किए करोड़ों

    पुलिस को दी शिकायत के अनुसार, बुजुर्ग ने 11 जून से 9 जुलाई के बीच अपने अलग-अलग बैंक खातों से आरटीजीएस और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए आरोपियों को करीब 3 करोड़ 91 लाख रुपये भेजे। ठग लगातार निवेश पर भारी रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाते रहे। ठगी का सबसे बड़ा संकेत तब मिला, जब फर्जी ऐप पर पीड़ित के निवेश खाते में 62 अरब 31 करोड़ रुपये की रकम दिखाई गई। इतनी बड़ी रकम देखकर उन्हें लगा कि उनका निवेश जबरदस्त मुनाफे में पहुंच गया है।


    रकम निकालने के लिए मांगा 20 फीसदी टैक्स

    जब बुजुर्ग ने ऐप में दिखाई जा रही रकम निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने नया बहाना बना दिया। उनसे कहा गया कि रकम निकालने से पहले कुल राशि का 20 फीसदी टैक्स या प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी। रकम निकालने में असफल रहने और लगातार अतिरिक्त पैसे मांगे जाने पर बुजुर्ग को संदेह हुआ। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई साइबर ठगी का पता चला। उन्होंने मामले की शिकायत साइबर पुलिस में दर्ज कराई।


    फर्जी दस्तावेजों से बनाया भरोसा

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ठगों ने बुजुर्ग का भरोसा जीतने के लिए फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के साथ नकली सेबी पंजीयन प्रमाण पत्र का भी इस्तेमाल किया। निवेश को वैध दिखाने के लिए शेयर बाजार और आईपीओ में बड़े रिटर्न का लालच दिया गया। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। पुलिस आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और फर्जी ट्रेडिंग ऐप से जुड़े डिजिटल सुरागों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

  • इंदौर में आरोपियों के जुलूस पर उठे सवाल जेल गेट पर खुद खोले पट्टे वायरल वीडियो के बाद पुलिस जांच के घेरे में

    इंदौर में आरोपियों के जुलूस पर उठे सवाल जेल गेट पर खुद खोले पट्टे वायरल वीडियो के बाद पुलिस जांच के घेरे में


    नई दिल्ली । इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में आरोपियों का जुलूस निकालने की पुलिस कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो में जेल गेट के बाहर आरोपी अपने हाथ और पैरों पर बंधे पट्टे खोलते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वीडियो में लगाए जा रहे दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसीपी ने जांच के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला मेडिकल दुकान के बाहर कार और बाइक की टक्कर के बाद हुए विवाद से जुड़ा है। घटना के बाद हीरानगर पुलिस ने एक नाबालिग सहित चार आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। पुलिस ने शोभित साक्यवार निक्की अहिरवार ओम उर्फ देवाय और एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर रविवार को इलाके में उनका जुलूस निकाला। जुलूस के दौरान आरोपियों के हाथ और पैरों पर पट्टे बांधे गए थे। इसके बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।

    देर रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसमें जेल गेट के बाहर आरोपी अपने हाथ और पैरों से पट्टे खोलते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने आरोप लगाए कि पट्टे केवल दिखावे के लिए बांधे गए थे। हालांकि इन दावों की किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है और न ही अब तक इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक किया गया है।

    वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल मच गई। मामले में एसीपी रूबीना मिजवानी ने कहा कि वायरल वीडियो की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है और वीडियो की सत्यता तथा घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सार्वजनिक स्थानों पर आरोपियों के जुलूस निकालने जैसी कार्रवाइयों को लेकर पहले भी बहस होती रही है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में दिखाई गई स्थिति किस परिस्थिति में बनी और पुलिस की कार्रवाई में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता हुई या नहीं।

  • दतिया में बीजेपी की अग्निपरीक्षा नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी और जातीय समीकरणों के बीच फंसा उपचुनाव

    दतिया में बीजेपी की अग्निपरीक्षा नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी और जातीय समीकरणों के बीच फंसा उपचुनाव


    दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं बल्कि बदले हुए राजनीतिक समीकरण बन गए हैं। पूर्व गृह मंत्री और लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद चुनावी माहौल बदलता नजर आ रहा है। पार्टी ने उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है लेकिन जमीन पर नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव और समर्थकों की भावनाएं अब भी चुनावी चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।

    ग्रामीण इलाकों में कई मतदाता आज भी नरोत्तम मिश्रा को दादा के नाम से याद करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में उनकी सक्रिय भूमिका रहती थी। ऐसे में टिकट बदलने के फैसले के बाद कुछ समर्थकों में नाराजगी दिखाई दे रही है। हालांकि पार्टी इसे पूरी तरह नियंत्रित करने का दावा कर रही है।

    पिछले करीब 18 वर्षों में दतिया बीजेपी संगठन में नरोत्तम मिश्रा का मजबूत प्रभाव रहा। इस दौरान उनका समर्थक नेटवर्क बूथ स्तर तक सक्रिय रहा और चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी काफी हद तक इसी टीम के पास रही। अब नए उम्मीदवार के साथ पार्टी को बूथ स्तर पर संगठन को फिर से सक्रिय करना पड़ रहा है। पुराने कार्यकर्ता दोबारा मैदान में जरूर उतरे हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर उनका जनसंपर्क पहले जैसा मजबूत नहीं माना जा रहा।

    इसी चुनौती को देखते हुए बीजेपी ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। अब तक आठ मंत्री क्षेत्र में प्रचार कर चुके हैं जबकि 20 विधायकों को अलग अलग शक्ति केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी भी लगातार मतदाताओं तक पहुंचने में जुटे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि व्यापक संगठनात्मक अभियान से संभावित नुकसान की भरपाई की जा सकेगी।

    नरोत्तम मिश्रा भी चुनावी अभियान से पूरी तरह दूर नहीं हैं। उन्हें चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है और उनके फोटो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रचार सामग्री में प्रमुखता से लगाए गए हैं। हालांकि उनका प्रचार करने का तरीका अलग है। वे उम्मीदवार के साथ मंच साझा करने के बजाय स्वयं घर घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं।

    नरोत्तम मिश्रा ने समर्थकों की नाराजगी के सवाल पर कहा कि अब पार्टी में कोई असंतुष्ट नहीं है और सभी कार्यकर्ता भाजपा की जीत के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने उन्हें लंबे समय तक विधायक और मंत्री बनने का अवसर दिया और अब वे केवल एक कार्यकर्ता के रूप में संगठन की जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस उपचुनाव में जातीय समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। खासकर ब्राह्मण मतदाताओं का रुझान चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में दतिया का उपचुनाव केवल उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं बल्कि संगठन की मजबूती स्थानीय नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।

  • गेहूं उत्पादन के बाद अब भंडारण में भी एमपी का दम 35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के साथ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल

    गेहूं उत्पादन के बाद अब भंडारण में भी एमपी का दम 35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के साथ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल


    नई दिल्ली । देश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के लिए पहचान बना चुका मध्य प्रदेश अब सरकारी खाद्यान्न भंडारण क्षमता के मामले में भी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 34.94 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इस उपलब्धि के साथ मध्य प्रदेश देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हो गया है और पंजाब हरियाणा राजस्थान गुजरात तमिलनाडु तेलंगाना तथा ओडिशा जैसे कई बड़े कृषि राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

    राज्यसभा में उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में यह जानकारी सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 3493.80 हजार मीट्रिक टन यानी लगभग 34.94 लाख मीट्रिक टन सरकारी खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। यह क्षमता प्रदेश में खरीदे गए गेहूं धान और अन्य खाद्यान्नों के सुरक्षित भंडारण तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    केंद्र सरकार के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय खाद्य निगम राज्य एजेंसियों और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर देशभर में कुल 55493.76 हजार मीट्रिक टन यानी लगभग 5.55 करोड़ मीट्रिक टन खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इसमें अकेले मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 6.3 प्रतिशत है। यह दर्शाता है कि देश के खाद्य सुरक्षा तंत्र में मध्य प्रदेश की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

    भंडारण क्षमता के मामले में प्रदेश से आगे केवल उत्तर प्रदेश बिहार महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश का स्थान आता है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रदेश पिछले कुछ वर्षों में गेहूं उत्पादन और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद में भी लगातार अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। अब पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध होने से खरीदे गए अनाज के सुरक्षित संरक्षण और समय पर वितरण में भी आसानी होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक गोदामों और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं के विस्तार से अनाज की बर्बादी कम होगी और किसानों से खरीदी गई उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी और जरूरत के समय विभिन्न राज्यों तक खाद्यान्न की आपूर्ति भी सुचारु रूप से की जा सकेगी।

    मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि राज्य के कृषि और खाद्य प्रबंधन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उत्पादन के साथ साथ भंडारण क्षमता में हुई यह बढ़ोतरी प्रदेश को देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का और अधिक मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

  • ऊर्जा विभाग का बड़ा फैसला 6500 संविदा अधिकारी और कर्मचारी बन सकेंगे नियमित एक बार मिलेगा सुनहरा मौका

    ऊर्जा विभाग का बड़ा फैसला 6500 संविदा अधिकारी और कर्मचारी बन सकेंगे नियमित एक बार मिलेगा सुनहरा मौका


    मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश सरकार ने बिजली कंपनियों में कार्यरत 6500 से अधिक संविदा अधिकारी और कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए नियमित नियुक्ति का रास्ता खोल दिया है। ऊर्जा विभाग ने संविदा कर्मचारियों के लिए नई नियुक्ति योजना लागू कर दी है जिसके तहत पात्र कर्मचारियों को नियमित रिक्त पदों पर भर्ती का अवसर मिलेगा। इसके लिए अक्टूबर से पहले ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों की मेरिट परीक्षा के अंकों और संविदा सेवा के अनुभव के आधार पर दिए जाने वाले बोनस अंकों को जोड़कर तैयार की जाएगी।

    ऊर्जा विभाग ने इस योजना को संविदा आधार पर कार्यरत कार्मिकों की समकक्ष नियमित पदों पर नवीन नियुक्ति योजना 2026 नाम दिया है। योजना का उद्देश्य लंबे समय से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को नियमित सेवा में आने का अवसर देना है। हाल ही में नियमितीकरण की मांग को लेकर संविदाकर्मियों ने प्रदर्शन भी किया था जिसके बाद सरकार ने यह अहम फैसला लिया है।

    योजना का लाभ एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी तथा मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को मिलेगा। हालांकि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

    इस योजना के तहत लाइन अटेंडेंट टेस्टिंग अटेंडेंट जूनियर इंजीनियर असिस्टेंट इंजीनियर सहित अन्य समकक्ष पदों पर कार्यरत संविदा अधिकारी और कर्मचारी आवेदन कर सकेंगे। संबंधित बिजली कंपनियों के प्रबंध संचालकों को योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    योजना में आवेदन के लिए वही कर्मचारी पात्र होंगे जिन्होंने योजना की स्वीकृति तिथि तक संबंधित कंपनी में कम से कम दो वर्ष की संविदा सेवा पूरी कर ली हो। यदि किसी कर्मचारी की दो संविदा नियुक्तियों के बीच अंतराल रहा है तो उसे सेवा में व्यवधान नहीं माना जाएगा लेकिन उस अवधि को अनुभव में नहीं जोड़ा जाएगा। पुनः नियुक्ति की स्थिति में भी वास्तविक सेवा अवधि के आधार पर अनुभव की गणना होगी। अनुभव प्रमाण पत्र कार्यपालन अभियंता या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा।

    नियमित पदों पर चयन पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से होगा। केवल उन्हीं पदों पर भर्ती की जाएगी जिनके समकक्ष नियमित रिक्तियां उपलब्ध होंगी। परीक्षा में प्राप्त अंकों के साथ संविदा सेवा के अनुभव के आधार पर बोनस अंक जोड़े जाएंगे और इसी आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार होगी। इससे लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धा में अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी नियुक्तियां मध्य प्रदेश शासन के आरक्षण नियमों के अनुसार की जाएंगी। संविदा कर्मचारियों को आवेदन के लिए अधिकतम आयु सीमा में भी छूट दी जाएगी ताकि अधिक से अधिक पात्र कर्मचारी इस अवसर का लाभ उठा सकें।

    यदि कोई संविदा कर्मचारी नियमित पद पर चयनित होता है तो उसे पहले अपने संविदा पद से त्यागपत्र देना होगा। इस प्रक्रिया में एक महीने की नोटिस अवधि की अनिवार्यता को शिथिल किया गया है। त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद संविदा सेवा समाप्त मानी जाएगी और भविष्य में उसी सेवा के आधार पर वरिष्ठता पदोन्नति या अन्य किसी लाभ का दावा मान्य नहीं होगा।

    सरकार के इस फैसले को बिजली कंपनियों में वर्षों से संविदा पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब उनकी नजर अक्टूबर से पहले होने वाली परीक्षा पर रहेगी जो नियमित सरकारी सेवा का रास्ता तय करेगी।

  • पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहले जान लें ये जरूरी ट्रैवल टिप्स वरना सफर का मजा हो सकता है खराब

    पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहले जान लें ये जरूरी ट्रैवल टिप्स वरना सफर का मजा हो सकता है खराब


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। घने जंगल ऊंचे पहाड़ मनमोहक झरने शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। खासकर मानसून के दौरान यहां की हरियाली और झरनों का नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। हालांकि पचमढ़ी की यात्रा पर निकलने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है ताकि आपका सफर सुरक्षित आरामदायक और यादगार बन सके।

    अगर आप पहली बार पचमढ़ी जा रहे हैं तो सबसे पहले मौसम की जानकारी जरूर लें। बरसात के दिनों में यहां लगातार बारिश होती है इसलिए रेनकोट छाता और वाटरप्रूफ बैग साथ रखें। फिसलन वाले रास्तों पर चलने के लिए मजबूत ग्रिप वाले जूते पहनना सबसे अच्छा रहता है। आरामदायक कपड़े चुनें ताकि ट्रैकिंग और घूमने में किसी तरह की परेशानी न हो।

    पचमढ़ी में कई पर्यटन स्थल वन क्षेत्र के अंदर स्थित हैं इसलिए यहां घूमने के लिए स्थानीय गाइड या अधिकृत जिप्सी सेवा का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। बी फॉल्स धूपगढ़ जटाशंकर गुफा पांडव गुफाएं अप्सरा विहार रजत प्रपात और महादेव मंदिर जैसे प्रमुख स्थानों की यात्रा समय के अनुसार करें ताकि सभी जगह आराम से घूम सकें।

    अगर आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं तो सुबह जल्दी निकलना सबसे अच्छा रहेगा। सुबह का मौसम सुहावना होता है और भीड़ भी कम रहती है। साथ ही पानी की बोतल हल्का नाश्ता और जरूरी दवाइयां अपने बैग में जरूर रखें। जंगल वाले क्षेत्रों में बिना अनुमति अंदर जाने से बचें और वन विभाग के सभी निर्देशों का पालन करें।

    पचमढ़ी की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखना हर पर्यटक की जिम्मेदारी है। प्लास्टिक की बोतलें चिप्स के पैकेट या अन्य कचरा खुले में बिल्कुल न फेंकें। जहां डस्टबिन उपलब्ध हो वहीं कचरा डालें। प्राकृतिक स्थलों पर तेज आवाज में संगीत बजाने से बचें ताकि वहां का शांत वातावरण बना रहे और वन्यजीव भी प्रभावित न हों।

    यात्रा पर निकलने से पहले होटल की बुकिंग पहले ही कर लेना समझदारी होगी खासकर छुट्टियों और मानसून सीजन में यहां पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है। पहले से बुकिंग होने पर आपको बेहतर सुविधा और उचित कीमत पर ठहरने की जगह मिल सकती है।

    पचमढ़ी की स्थानीय संस्कृति और स्वाद का आनंद लेना भी यात्रा का अहम हिस्सा है। यहां मिलने वाले स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प आपकी यात्रा को और खास बना सकते हैं। खरीदारी करते समय स्थानीय दुकानदारों से विनम्र व्यवहार करें और स्थानीय नियमों का सम्मान करें।

    अगर आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। फिसलन वाले झरनों और पहाड़ी किनारों पर अनावश्यक जोखिम न लें। फोटो खींचते समय भी सुरक्षा को प्राथमिकता दें क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

    पचमढ़ी सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अनमोल धरोहर है। सही योजना आवश्यक तैयारी और जिम्मेदार व्यवहार के साथ की गई यात्रा न केवल आपको खूबसूरत यादें देगी बल्कि इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में भी आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

  • एमपी में मूंग खरीदी पर लेटर वॉर तेज देश का 87 फीसदी कोटा मिलने के बावजूद 2 प्रतिशत खरीद केंद्र ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

    एमपी में मूंग खरीदी पर लेटर वॉर तेज देश का 87 फीसदी कोटा मिलने के बावजूद 2 प्रतिशत खरीद केंद्र ने राज्य सरकार से मांगा जवाब


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज होने के बीच केंद्र और राज्य सरकार के बीच भी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि प्रदेश को देश में सबसे अधिक मूंग खरीदी का कोटा पहले ही दिया जा चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार स्वीकृत लक्ष्य का केवल दो प्रतिशत ही खरीद सकी है। ऐसे में पहले निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए उसके बाद ही अतिरिक्त कोटा देने के प्रस्ताव पर नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा।

    जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 21 मई 2026 को केंद्र सरकार से प्रदेश के लिए मूंग खरीदी की मात्रा बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीन दिन पहले भेजे गए पत्र में कहा कि मूल्य समर्थन योजना के तहत मध्य प्रदेश को पहले ही देश का सबसे बड़ा कोटा दिया गया है। इसके बावजूद खरीदी की गति बेहद धीमी है और अब तक लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम खरीद हो पाई है।

    केंद्र सरकार के मुताबिक मध्य प्रदेश के लिए इस वर्ष 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। लेकिन 16 जुलाई 2026 तक केवल 7 हजार 947.92 मीट्रिक टन मूंग की खरीद हो सकी है जो स्वीकृत मात्रा का लगभग दो प्रतिशत है। इस दौरान करीब 12 हजार किसानों से ही उपज खरीदी गई। केंद्र ने राज्य सरकार से खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाने और पहले स्वीकृत लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया है।

    पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मूल्य समर्थन योजना के दिशा निर्देशों के अनुसार तूर उड़द और मसूर जैसी फसलों की शत प्रतिशत खरीद की व्यवस्था है जबकि अन्य अधिसूचित फसलों की खरीद अनुमानित उत्पादन के अधिकतम 25 प्रतिशत तक ही की जा सकती है। इसलिए अतिरिक्त कोटा तभी स्वीकृत किया जाएगा जब पहले से स्वीकृत मात्रा की खरीद पूरी हो जाएगी।

    केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष के आंकड़े भी साझा किए हैं। वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 19 हजार 692 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की मंजूरी दी गई थी। इसके विरुद्ध 3 लाख 93 हजार 123.79 मीट्रिक टन मूंग खरीदी गई थी। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 3 हजार 413.10 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया और 1 लाख 22 हजार 776 किसानों को इसका लाभ मिला।

    पत्र में सोयाबीन का उदाहरण भी दिया गया है। केंद्र ने बताया कि वर्ष 2025-26 में भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्य प्रदेश के लिए 22.21 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन स्वीकृत की गई थी। इसके लिए 1 हजार 93.13 करोड़ रुपए जारी किए गए जिससे 7 लाख 10 हजार 257 किसानों को लाभ मिला।

    इधर नर्मदापुरम सीहोर रायसेन हरदा और आसपास के जिलों में समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने 27 जुलाई से किसान क्रांति पदयात्रा शुरू करने की घोषणा की है। यह यात्रा नर्मदापुरम के सेठानी घाट से शुरू होकर बुधनी बरखेड़ा ओबेदुल्लागंज मंडीदीप होते हुए 29 और 30 जुलाई को भोपाल पहुंचेगी। किसान मुख्यमंत्री निवास तक मार्च निकालने की तैयारी में हैं। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार से सकारात्मक वार्ता नहीं हुई तो भोपाल में चक्काजाम किया जाएगा और रेल मार्ग भी बाधित किया जा सकता है। ऐसे में मूंग खरीदी का मुद्दा अब किसानों के आंदोलन के साथ राजनीतिक टकराव का भी बड़ा विषय बनता जा रहा है।