Category: Madhya Pradesh

  • मध्य प्रदेश में दो साल में 32 पटवारी रिश्वत लेते पकड़े गए, इंदौर-उज्जैन संभाग में जमीन संबंधी मामलों में कार्रवाई

    मध्य प्रदेश में दो साल में 32 पटवारी रिश्वत लेते पकड़े गए, इंदौर-उज्जैन संभाग में जमीन संबंधी मामलों में कार्रवाई


    मध्य प्रदेश:
    में जमीन से जुड़े कामकाज में रिश्वतखोरी के मामलों और स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री कराने में आ रही दिक्कतों को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है। पिछले दो वर्षों में इंदौर और उज्जैन संभाग के 16 जिलों में 32 पटवारी रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हैं। इन मामलों में जमीन का नामांतरण, सीमांकन, ऋण पुस्तिका तैयार करने और सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने जैसे काम शामिल हैं। दूसरी ओर, स्वामित्व योजना के तहत शिविर लगाकर मुफ्त रजिस्ट्री कराने के निर्देशों पर भी पटवारियों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।

    स्वामित्व योजना के अंतर्गत मुफ्त रजिस्ट्री कराने को लेकर पटवारियों की अनिच्छा प्रशासन के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। संबंधित पटवारियों का कहना है कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया में यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो उनकी नौकरी पर भी संकट आ सकता है। उन्हें आशंका है कि भविष्य में जिले के अधिकारियों के बदलने पर उन्हें किसी तरह का संरक्षण नहीं मिलेगा। इसी वजह से वे इस काम को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं और निर्देशों के बावजूद प्रक्रिया में शामिल होने से बच रहे हैं।

    इस स्थिति को लेकर जिलों के कलेक्टर कई बार पटवारियों को फटकार लगा चुके हैं। उन्हें काम में सहयोग नहीं करने पर नौकरी से बर्खास्त करने की चेतावनी भी दी गई है। प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने भी कलेक्टरों के सामने इस मामले पर नाराजगी जाहिर की है। इसके बावजूद पटवारियों के रवैये में बदलाव नहीं आने की बात सामने आई है। प्रशासन की ओर से निर्देश दिए जाने के बाद भी योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया में बाधाएं बनी हुई हैं।

    इसी बीच लोकायुक्त की कार्रवाई ने जमीन से जुड़े कामों में रिश्वत मांगने के मामलों को सामने रखा है। पिछले दो साल में इंदौर और उज्जैन संभाग के 16 जिलों में 32 पटवारी रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए। इन मामलों में रिश्वत की रकम दो हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक बताई गई। अलग-अलग मामलों में पटवारियों पर जमीन का नामांतरण करने, ऋण पुस्तिका बनवाने और सरकारी अभिलेखों में नाम दर्ज करने के बदले पैसे मांगने के आरोप सामने आए। सभी मामले जमीन से संबंधित कामकाज से जुड़े थे।

    इंदौर संभाग में अकेले 15 मामले दर्ज किए गए। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेश सहाय के अनुसार, इन मामलों में शिकायत करने वाले लोग गरीब किसान और आदिवासी थे। उनसे जमीन का बंटान कराने, सीमांकन करवाने, ऋण पुस्तिका बनवाने और सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के बदले रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद संबंधित मामलों की जांच और सत्यापन किया गया। इसके बाद कार्रवाई करते हुए आरोपित पटवारियों को पकड़ा गया।

    कुछ मामलों में रिश्वत की रकम और काम की प्रकृति भी सामने आई। 29 सितंबर को पटवारी खूबसिंह धारवे और कुलदीप यादव को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने का मामला सामने आया। आरोप के मुताबिक, वे पट्टेदारों को रजिस्ट्री कराने से मना कर रहे थे और किसान का नामांतरण करने के लिए दो लाख रुपये मांग रहे थे। पैसे के बिना काम नहीं करने पर किसान ने शिकायत की थी।

    एक अन्य मामले में पटवारी दिनेश जगताप ने 450 वर्ग फीट के प्लॉट का नामांतरण करने के लिए तीन हजार रुपये मांगे थे। कार्रवाई के बाद उसे पकड़ा गया। अदालत से सजा मिलने पर उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं पटवारी कला भट्ट पर जमीन के कांकड़ का सीमांकन करने के लिए किसान से दस हजार रुपये मांगने का आरोप लगा। किसान के पैसे देने से इनकार करने पर काम रोक दिया गया था। बाद में लोकायुक्त की कार्रवाई में उसे दस हजार रुपये लेते हुए पकड़ा गया।

  • MP में 15-16 अक्टूबर को करवट बदलेगा मौसम, 9 जिलों में बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में रातें रहेंगी ठंडी

    MP में 15-16 अक्टूबर को करवट बदलेगा मौसम, 9 जिलों में बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में रातें रहेंगी ठंडी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 15 और 16 अक्टूबर को एक बार फिर मौसम बदलने की संभावना है। ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग के नौ जिलों में आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इससे पहले 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहने का अनुमान है। भोपाल-इंदौर सहित कई शहरों में रात के समय ठंडक रहेगी, जबकि दिन में धूप के कारण गर्मी महसूस होगी।

    मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार, आगामी दिनों में प्रदेश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय हो रहे नए मौसम तंत्र का असर दिखाई दे सकता है। ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश की संभावना जताई गई है। उज्जैन और जबलपुर समेत अन्य शहरों में भी रात में ठंडक और दिन में गर्मी का मिला-जुला मौसम बना रह सकता है।

    पश्चिमी विक्षोभ और नए सिस्टम से बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग के मुताबिक, सोमवार को पहले सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण का असर समाप्त हो गया। अब उत्तर भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती सिस्टम के सक्रिय होने से मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम बदल सकता है। इसी के चलते 15 और 16 अक्टूबर को बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनने का अनुमान है।

    मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर

    मध्य प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन अलग-अलग मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से बारिश का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है। पिछले एक सप्ताह के दौरान पूर्वी हिस्से के कई जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। हालांकि, रविवार और सोमवार को प्रदेश में कहीं भी आंधी-बारिश रिकॉर्ड नहीं हुई।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी स्थितियां देखने को मिली हैं। इस साल भी इसी तरह का रुख बना हुआ है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के साथ धूप तेज रही, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस हो रही है। इस बार प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा पानी

    जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच का 95.9 प्रतिशत है। इस तरह प्रदेश में औसत के मुकाबले लगभग 1.5 इंच कम पानी गिरा।

    प्रदेश में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम रही। क्षेत्रवार आंकड़ों में पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी बरसा।

    पूर्वी क्षेत्र के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम वर्षा हुई।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य बारिश का लक्ष्य पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    इसके विपरीत 30 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहा। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    इस तरह अक्टूबर में प्रदेश का मौसम धूप, रात की ठंडक और बीच-बीच में बारिश के बीच बदलता रहने का अनुमान है। अगले दिनों में मौसम प्रणालियों की सक्रियता के आधार पर बारिश की स्थिति में बदलाव हो सकता है।

  • मध्यप्रदेश के सभी सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए Zoho मेल अनिवार्य, 45 दिन लॉगिन नहीं करने पर बंद होगा ईमेल अकाउंट

    मध्यप्रदेश के सभी सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए Zoho मेल अनिवार्य, 45 दिन लॉगिन नहीं करने पर बंद होगा ईमेल अकाउंट

    मध्यप्रदेश: सरकार ने सरकारी डिजिटल संचार व्यवस्था में बदलाव करते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्वदेशी ईमेल प्लेटफॉर्म जोहो का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी ईमेल व्यवस्था की सुरक्षा मजबूत करना, साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच के जोखिम को कम करना तथा विदेशी क्लाउड सेवाओं पर निर्भरता घटाना है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी कर्मचारियों को आधिकारिक ईमेल संचार के लिए निर्धारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करना होगा। यह कदम सरकारी डिजिटल संचार प्रणाली को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया है। इसके माध्यम से सरकारी डेटा की सुरक्षा और ईमेल सेवाओं के संचालन पर नियंत्रण मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

    इस व्यवस्था को लागू करने के संबंध में राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के बीच भोपाल में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसके बाद सरकारी ईमेल सेवाओं के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए। नई व्यवस्था केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और एनआईसी से जुड़े राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत सरकारी डिजिटल संचार को सुरक्षित बनाने के प्रयासों से संबंधित है। इसके अंतर्गत राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों को आधिकारिक ईमेल के लिए निर्धारित जोहो प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना होगा। सरकार की इस पहल में साइबर सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल सेवाओं को स्वदेशी तकनीकी ढांचे के माध्यम से संचालित करने पर भी ध्यान दिया गया है।

    नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपनी आधिकारिक ईमेल आईडी का इस्तेमाल महीने में कम से कम एक बार करना होगा। यदि कोई यूजर लगातार 45 दिनों तक अपने ईमेल इनबॉक्स में लॉगिन नहीं करता है, तो सुरक्षा कारणों से उसका ईमेल खाता स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा। इस प्रावधान का उद्देश्य लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने वाले ईमेल खातों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को कम करना है। सरकारी ईमेल खातों का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों को निर्धारित अंतराल पर लॉगिन करना होगा। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी ईमेल आईडी सक्रिय रखने के लिए इस नियम का पालन करना आवश्यक होगा।

    सरकार प्रत्येक मेलबॉक्स आधारित ईमेल आईडी के रखरखाव के लिए प्रति यूजर सालाना 2,000 रुपये का सेवा शुल्क देगी। इस बदलाव के बावजूद सरकारी ईमेल पतों के आधिकारिक डोमेन में कोई परिवर्तन नहीं होगा। यानी कर्मचारियों की ईमेल आईडी के अंत में इस्तेमाल होने वाला सरकारी डोमेन पहले की तरह ही बना रहेगा। बदलाव मुख्य रूप से ईमेल सेवा के बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्वर संचालन में किया जाएगा। पहले जिन ईमेल सेवाओं का संचालन गूगल या माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से होता था, उनकी जगह अब जोहो के क्लाउड प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इससे मौजूदा ईमेल पहचान को बनाए रखते हुए तकनीकी व्यवस्था में बदलाव किया जा सकेगा।

    जोहो भारत की एक निजी आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनी है, जो विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था में सरकारी डेटा को देश के भीतर सुरक्षित रखने और डिजिटल संचार की सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया गया है। नई प्रणाली में एनआईसी की रणनीतिक भूमिका के साथ साइबर सुरक्षा मानकों, सुरक्षा ऑडिट और जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर जैसे प्रावधानों के पालन की बात कही गई है। हालांकि, पुराने ईमेल खातों और डेटा को नई व्यवस्था में स्थानांतरित करने तथा सभी विभागों में इसे पूरी तरह लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया के बारे में उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। नए नियमों के तहत ईमेल प्लेटफॉर्म का नियमित उपयोग, खातों की सक्रियता और सरकारी संचार की सुरक्षा प्रमुख बिंदु होंगे।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पर्यटकों से किया कान्हा नेशनल पार्क आने का आह्वान, वन्यजीव संरक्षण और जंगली भैंसों के पुनर्वास पर दिया जोर

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पर्यटकों से किया कान्हा नेशनल पार्क आने का आह्वान, वन्यजीव संरक्षण और जंगली भैंसों के पुनर्वास पर दिया जोर

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पर्यटकों, वन्यजीव प्रेमियों और आम नागरिकों से कान्हा नेशनल पार्क का भ्रमण करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कान्हा नेशनल पार्क देश ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। घने जंगलों से घिरा यह क्षेत्र बाघ, चीता, लकड़बग्घा, हाथी और कई अन्य वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है। मुख्यमंत्री ने लोगों से कम से कम एक बार यहां आकर वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते देखने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंडला जिले के कान्हा-किसली में स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान वन्यजीव संरक्षण और प्रदेश की प्राकृतिक संपदा से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के समृद्ध जंगलों में विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतुओं को अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से विचरण करने का अवसर मिल रहा है। उनके अनुसार, प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों से जैव विविधता को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है।

    मुख्यमंत्री ने बारहसिंगा के संरक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में इस वन्यजीव को भी नया जीवन मिला है। उन्होंने बताया कि यह प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्त होने की स्थिति की ओर बढ़ रही थी। ऐसे में इसके संरक्षण से जुड़ी पहल महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि जंगलों और उनमें रहने वाले जीवों का संरक्षण प्रदेश की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।

    चीता पुनर्बसाहट परियोजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में यह परियोजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। कूनो में चीतों की पुनर्बसाहट के साथ प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण और उनके लिए उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण बनाए रखने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों के पुनर्वास की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और वहां की सरकार के सहयोग से यह पहल शुरू की गई है। रविवार को छह मादा और आठ नर जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। इस तरह कुल 14 जंगली भैंसों को जंगल में स्वतंत्र विचरण के लिए विमुक्त किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण और पुनर्वास से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश के जंगलों में बाघ, चीता, तेंदुआ, मगरमच्छ, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या बढ़ रही है। उनके मुताबिक, वन्यजीव प्रदेश की पहचान और पर्यटन के महत्व को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य प्रदेश की जैव विविधता को सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघ, तेंदुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास मध्य प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर को समृद्ध बना रहे हैं। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताते हुए वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों से कान्हा नेशनल पार्क आने की अपील दोहराई। उनके अनुसार, प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखना लोगों को प्रदेश के समृद्ध वन क्षेत्र और जैव विविधता से परिचित कराने का अवसर प्रदान करता है।

  • देवास की माता टेकरी की अनोखी कथा, रूठकर पाताल में समाने लगीं बड़ी माता तो छोटी माता ने छोड़ी टेकरी

    देवास की माता टेकरी की अनोखी कथा, रूठकर पाताल में समाने लगीं बड़ी माता तो छोटी माता ने छोड़ी टेकरी

    मध्य प्रदेश: के देवास शहर की ऐतिहासिक माता टेकरी धार्मिक आस्था और प्राचीन मान्यताओं के लिए विशेष पहचान रखती है। यहां स्थित मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के मंदिरों में सालभर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि के दौरान दोनों मंदिरों में विशेष उत्साह दिखाई देता है। इस अवसर पर मंदिरों को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मान्यता है कि दोनों देवियों के यहां विराजमान होने के कारण ही इस स्थान का नाम देवास पड़ा। माता टेकरी से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं, जिनमें दो रूठी हुई बहनों की कहानी विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

    लोकमान्यता के अनुसार, माता टेकरी पर विराजित मां तुलजा भवानी को बड़ी माता और मां चामुंडा को छोटी माता कहा जाता है। प्रचलित कथा के मुताबिक, एक बार किसी बात को लेकर दोनों बहनों के बीच विवाद हो गया। इससे नाराज होकर दोनों ने टेकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। बड़ी माता क्रोधित होकर पाताल में समाने लगीं, जबकि छोटी माता टेकरी से नीचे उतरने लगीं। जब इस घटना की जानकारी भैरवजी और हनुमानजी को मिली तो वे दोनों देवियों को मनाने पहुंचे। उस समय तक बड़ी माता का आधा शरीर पाताल में समा चुका था और छोटी माता टेकरी से काफी नीचे उतर आई थीं। देवताओं ने दोनों से रुकने और वापस लौटने की विनती की। उनकी प्रार्थना स्वीकार करते हुए दोनों देवियां उसी अवस्था में रुक गईं। लोकविश्वास के अनुसार, इसी वजह से बड़ी माता के आधे स्वरूप को पाताल में माना जाता है। यह कथा आज भी माता टेकरी की धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    माता टेकरी को लेकर एक अन्य धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है। इसे रक्तपीठ के रूप में मान्यता प्राप्त है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, यहां माता सती के हृदय से रक्त की बूंदें गिरी थीं। इसी पवित्र स्थान पर पहाड़ों के बीच से मां चामुंडा के प्रकट होने की मान्यता है, जबकि मां तुलजा भवानी को स्वयंभू माना जाता है। इन मान्यताओं के कारण माता टेकरी का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु दोनों देवियों के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

    देवास के इतिहास में भी दोनों मंदिरों का विशेष स्थान रहा है। यहां कभी पवार राजवंश की दो रियासतें थीं, जिन्हें सीनियर और जूनियर रियासत के नाम से जाना जाता था। मान्यता के अनुसार, मां तुलजा भवानी जूनियर रियासत की कुलदेवी थीं, जबकि मां चामुंडा सीनियर रियासत की कुलदेवी मानी जाती थीं। इसी परंपरा के चलते दोनों देवियों के मंदिरों का राजपरिवार और स्थानीय धार्मिक संस्कृति से गहरा संबंध रहा है। आज भी श्रद्धालु इन मंदिरों को आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में देखते हैं।

    माता टेकरी को नाथ संप्रदाय की साधना स्थली के रूप में भी जाना जाता है। इस स्थान की परंपराएं गुरु गोरक्षनाथ, राजा भर्तृहरि और शीलनाथ महाराज जैसे योगियों से जुड़ी हुई हैं। लोककथाओं में टेकरी से उज्जैन तक लगभग 45 किलोमीटर लंबी गुप्त सुरंग होने का उल्लेख भी मिलता है। मान्यता है कि राजा भर्तृहरि इस सुरंग के रास्ते यहां आते थे, हालांकि इस दावे की ऐतिहासिक पुष्टि आवश्यक है।

    नवरात्रि के अवसर पर माता टेकरी के दोनों मंदिरों को आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल की व्यवस्था की गई है और गर्मी से राहत देने के लिए कारपेट बिछाए गए हैं। नौ दिनों तक मंदिरों में चौबीस घंटे दर्शन की व्यवस्था रहती है। कई श्रद्धालु घुटनों के बल तो कुछ व्हीलचेयर के सहारे माता के दरबार तक पहुंच रहे हैं। शहर के विभिन्न स्थानों पर भंडारे आयोजित किए जा रहे हैं, जहां इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं। रसूलपुर चौराहे से इंदिरा गांधी चौराहे तक विद्युत सजावट और विभिन्न स्थानों पर भगवा ध्वजों के साथ देवास में नवरात्रि का धार्मिक उत्साह दिखाई दे रहा है।

  • 6 दिन से लापता 18 वर्षीय सुहाना की तलाश में जुटी पुलिस, बाइक पर नंबर प्लेट नहीं और दोनों के मोबाइल बंद, 5 किलोमीटर के CCTV फुटेज खंगाले

    6 दिन से लापता 18 वर्षीय सुहाना की तलाश में जुटी पुलिस, बाइक पर नंबर प्लेट नहीं और दोनों के मोबाइल बंद, 5 किलोमीटर के CCTV फुटेज खंगाले


    ग्वालियर । ग्वालियर में चिड़ियाघर घूमने पहुंची 18 वर्षीय नवविवाहिता सुहाना जाटव के लापता होने का मामला छह दिन बाद भी सुलझ नहीं पाया है। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी है लेकिन अब तक सुहाना और उसके साथ जाने की बात सामने आए युवक अरमान खान का कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। पुलिस ने चिड़ियाघर के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में लगे 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले हैं। इसके बावजूद दोनों किस रास्ते से गए और इसके बाद कहां पहुंचे इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। मामले में सबसे बड़ी परेशानी उस बाइक पर नंबर प्लेट नहीं होना है जिस पर सुहाना के बैठकर जाने की बात सामने आई है। दोनों के मोबाइल फोन भी बंद बताए जा रहे हैं।
    जानकारी के मुताबिक शिवपुरी निवासी सुहाना जाटव की शादी कुछ महीने पहले करण जाटव से हुई थी। घटना वाले दिन पति-पत्नी किसी रिश्तेदार से मिलने के लिए ग्वालियर आए थे। इसके बाद सुहाना ने चिड़ियाघर घूमने की इच्छा जताई। दोनों दोपहर करीब 1:25 से 1:35 बजे के बीच चिड़ियाघर पहुंचे। पुलिस के अनुसार जब करण अपनी बाइक पार्क करने के लिए आगे गया तो सुहाना वहीं रुक गई। इसी दौरान कथित तौर पर अरमान खान वहां बाइक लेकर पहुंचा और सुहाना उसकी बाइक पर बैठकर चली गई। करण जब बाइक खड़ी करके वापस लौटा तो सुहाना वहां नहीं थी। उसने आसपास तलाश की और कुछ दूरी तक उनका पीछा करने की कोशिश भी की लेकिन दोनों का पता नहीं चल पाया।
    घटना के बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से घटनाक्रम और संभावित रास्तों की जांच शुरू की। पांच किलोमीटर के दायरे में 100 से अधिक कैमरों के फुटेज देखे गए। फुटेज में सुहाना के दूसरी बाइक पर बैठकर जाने से जुड़े दृश्य सामने आने की बात कही गई है। हालांकि इसके बाद दोनों किस दिशा में गए और उन्होंने आगे कौन सा रास्ता चुना इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। महल गेट के आगे कुछ रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से पुलिस की जांच प्रभावित हो रही है। बाइक पर नंबर प्लेट नहीं होने के कारण वाहन की पहचान करना भी चुनौती बना हुआ है।
    पड़ाव थाना प्रभारी शैलेंद्र भार्गव के मुताबिक सुहाना और अरमान के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर रखे गए हैं। लेकिन दोनों के फोन लगातार बंद आ रहे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल दोबारा चालू होने पर उनकी लोकेशन से जुड़ा कोई सुराग मिल सकता है। जांच टीम ने मुरैना जिले के जरैना गांव में भी उनके रिश्तेदारों के यहां तलाश की लेकिन वहां भी दोनों नहीं मिले। पुलिस अब उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य जानकारियों को जोड़कर उनके आने-जाने के संभावित रास्तों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
    इस बीच करण जाटव अपनी पत्नी की तलाश में रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क कर रहा है। घटना के छह दिन बीत जाने के बाद भी परिवार को सुहाना के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। पुलिस का कहना है कि तलाश जारी है और दोनों की गतिविधियों से जुड़े संभावित सुरागों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सुहाना और अरमान कहां हैं और वे चिड़ियाघर से निकलने के बाद किस स्थान पर पहुंचे। मामले की जांच पूरी होने और संबंधित लोगों के मिलने के बाद ही घटनाक्रम की आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • होटल में बुलाकर कपड़े उतरवाए फिर वीडियो वायरल करने की धमकी, ग्वालियर में डेटिंग ऐप के जरिए ठगी का खुलासा

    होटल में बुलाकर कपड़े उतरवाए फिर वीडियो वायरल करने की धमकी, ग्वालियर में डेटिंग ऐप के जरिए ठगी का खुलासा


    ग्वालियर । ग्वालियर में डेटिंग ऐप के जरिए दोस्ती कर एक युवक को होटल में बुलाने और फिर अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बदमाशों ने युवक को बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट की और खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद नकदी और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए उससे करीब 1.38 लाख रुपए वसूल लिए गए। आरोपी यहीं नहीं रुके और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर 70 हजार रुपए और मांगने लगे। शिकायत के बाद ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने मुरैना से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
    पुलिस के अनुसार माधौगंज की लड्डूवाली गली में रहने वाले 28 वर्षीय युवक ने बताया कि वह ग्राइंडर डेटिंग ऐप का इस्तेमाल करता है। 8 अक्टूबर को दोपहर करीब दो बजे उसकी हरियाणा नाम की प्रोफाइल से बातचीत शुरू हुई। बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति ने अपना नाम राहुल बताया और युवक को सिटी सेंटर के पटेल नगर स्थित होटल गोल्डन लीफ में मिलने के लिए बुलाया। युवक शाम करीब चार बजे होटल पहुंचा तो उसे कमरा नंबर 206 में ले जाया गया। वहां पहले से रची गई साजिश के तहत उसके साथ मारपीट की गई। कुछ ही देर में चार अन्य युवक भी कमरे में पहुंच गए। उन्होंने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए युवक को जेल भेजने की धमकी दी।
    आरोप है कि पांचों युवकों ने पीड़ित को बंधक बना लिया और बेल्ट से उसकी पिटाई की। इस दौरान उसके गाल और दाहिने पैर में चोटें आईं। इसके बाद आरोपियों ने उसके कपड़े उतरवाकर मोबाइल से अश्लील वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे पांच लाख रुपए मांगे गए। अचानक सामने आई इस स्थिति से घबराए युवक ने आरोपियों को अपनी जेब में रखे आठ हजार रुपए दे दिए। इसके बाद आरोपियों ने उसका एटीएम कार्ड और पासवर्ड अपने कब्जे में लेकर खाते से 30 हजार रुपए निकाल लिए। एक क्यूआर कोड के जरिए भी 30 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए।
    पीड़ित के मुताबिक इसके बाद आरोपी उसे सफेद क्रेटा कार में बैठाकर सिरोल की ओर ले गए। वहां युवक ने अपनी एक दोस्त से संपर्क किया और उसकी मदद से रकम ट्रांसफर कराई। आरोपियों ने संबंधित घर पहुंचकर 70 हजार रुपए नकद भी लिए। रात करीब साढ़े नौ बजे युवक को होटल के बाहर छोड़ दिया गया। हालांकि इसके बाद भी उसे राहत नहीं मिली। आरोपी लगातार संपर्क कर 70 हजार रुपए और मांगने लगे। रकम नहीं देने पर अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने और जान से मारने की धमकी दी गई। लगातार मिल रही धमकियों के कारण परेशान युवक ने आखिरकार क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह के निर्देश पर क्राइम ब्रांच की टीम गठित की गई। डीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार और डीएसपी मनीष यादव के मार्गदर्शन में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने रविवार रात मुरैना के अंबाह बायपास रोड से दो आरोपियों को पकड़ा। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरिभान उर्फ करुआ गुर्जर निवासी ग्राम पिपरई और सोनू गुर्जर निवासी ग्राम पिपरई के रूप में हुई है। दोनों गांव पिपरई क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि हरिभान ने ही राहुल नाम से फर्जी पहचान बनाकर युवक से संपर्क किया था।
    एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि डेटिंग ऐप के जरिए युवक को होटल बुलाने और अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल कर रकम वसूलने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। यह मामला ऑनलाइन दोस्ती के दौरान पहचान की पुष्टि करने और निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतने की जरूरत को सामने लाता है। किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग या धमकी मिलने पर पीड़ित को डरकर चुप रहने के बजाय पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
  • मध्य प्रदेश में पटवारियों की दोटूक, पहले बहाली के आदेश जारी करें कलेक्टर फिर करेंगे स्वामित्व योजना का काम, सरकार के सामने नई चुनौती

    मध्य प्रदेश में पटवारियों की दोटूक, पहले बहाली के आदेश जारी करें कलेक्टर फिर करेंगे स्वामित्व योजना का काम, सरकार के सामने नई चुनौती


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत होने वाली मुफ्त रजिस्ट्रियों पर एक बार फिर संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद काम पर लौटने की सहमति देने वाले पटवारियों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि जब तक निलंबन और बर्खास्तगी के आदेश वापस नहीं लिए जाते तब तक वे योजना का काम नहीं करेंगे। पटवारी संघ का कहना है कि सरकार के स्तर पर सहमति बनने और राजस्व विभाग की ओर से कानूनी संरक्षण से जुड़ा आदेश जारी होने के बावजूद जिलों में कलेक्टरों ने बहाली की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। ऐसे में पटवारी स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री की कार्रवाई शुरू करने के लिए तैयार नहीं हैं।
    रविवार शाम मध्य प्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी ने वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद राजस्व विभाग ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 218 के तहत आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री से जुड़े विवाद या न्यायालयीन प्रकरण की स्थिति में पटवारियों के खिलाफ केस चलाने से संरक्षण दिया गया है। हालांकि संघ का कहना है कि 17 सितंबर के बाद पटवारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को शून्य करने पर सहमति बनी थी लेकिन अब तक संबंधित कलेक्टरों ने बहाली के आदेश जारी नहीं किए हैं। इसी वजह से प्रदेश के पटवारी फिलहाल योजना के काम से अलग रहेंगे।

    इससे पहले 9 अक्टूबर की शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पटवारी संघ के बीच बातचीत के बाद सहमति बनने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद संघ ने 12 अक्टूबर से काम शुरू करने का ऐलान किया था। उस समय न्यायिक संरक्षण के आदेश जारी करने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाई को समाप्त करने पर सहमति बनने की बात कही गई थी। वेतन विसंगति के मुद्दे पर आयोग के गठन के बाद विचार करने और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित महासम्मेलन में आर्थिक मांगों पर घोषणा करने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन बहाली के आदेश जारी नहीं होने से सहमति के बावजूद विवाद फिर गहरा गया है।
    स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत गांवों की आबादी वाली भूमि का ड्रोन सर्वे कराकर संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनके घर और जमीन से जुड़े अधिकारों का दस्तावेज उपलब्ध कराना है। मध्य प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक करीब 50 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन रजिस्ट्रियों के लिए हितग्राहियों से स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इसका खर्च सरकार उठा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं जिनमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं।
    पटवारियों की मुख्य आपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया में उनकी भूमिका और संभावित कानूनी जिम्मेदारी को लेकर है। संघ के मुताबिक दस्तावेजों में ग्रामीण को क्रेता और पटवारी को विक्रेता या निष्पादक की भूमिका दी गई है। पटवारियों का कहना है कि वे जमीन के मालिक नहीं हैं और न ही उन्हें हर मामले में मालिकाना हक तय करने का अधिकार है। ऐसे में भविष्य में जमीन की सीमा हिस्सेदारी या कब्जे को लेकर विवाद होने पर उनके हस्ताक्षर के आधार पर उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने का डर है।
    संघ ने रिकॉर्ड में गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया है। गुना में पटवारी संघ के अनुसार कुछ मामलों में मौके पर कब्जा एक भाई का है जबकि दस्तावेजों में तीन भाइयों के नाम दर्ज हैं। ऐसे मामलों में भविष्य में विवाद की आशंका बनी रहती है। पटवारी संघ का कहना है कि उसे योजना से आपत्ति नहीं है लेकिन निष्पादक की भूमिका और उससे जुड़ी कानूनी जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। अब निगाहें सरकार और जिला प्रशासन के अगले कदम पर हैं क्योंकि बहाली के आदेश जारी नहीं हुए तो मुफ्त रजिस्ट्रियों का काम प्रभावित हो सकता है।
  • SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस का दिल्ली मार्च, जीतू पटवारी-उमंग सिंघार पहुंचे दिल्ली, एमपी में नेताओं पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद

    SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस का दिल्ली मार्च, जीतू पटवारी-उमंग सिंघार पहुंचे दिल्ली, एमपी में नेताओं पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली ।  राहुल गांधी के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली में प्रस्तावित कांग्रेस मार्च से पहले मध्य प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मार्च में शामिल होने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई वरिष्ठ नेता और विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं। इसी बीच दिल्ली रवाना होने की तैयारी कर रहे मुरैना ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष मधुराज सिंह तोमर और भिंड शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र भदौरिया को रविवार रात पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके अलावा श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के घर भी पुलिस पहुंची। इन घटनाओं के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पार्टी नेताओं को दिल्ली मार्च में शामिल होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुरैना ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष मधुराज सिंह तोमर और भिंड शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र भदौरिया दिल्ली जाने के लिए मुरैना में एक ही स्थान पर ठहरे हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे मार्च में शामिल होने की तैयारी से जोड़कर देखा है। हालांकि पुलिस की ओर से हिरासत में लिए जाने के कारण और कार्रवाई की अवधि को लेकर आधिकारिक पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में इस मामले में पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
    इसी घटनाक्रम के बीच श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के घर पुलिस पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि विधायक के घर पहुंची पुलिस से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। कांग्रेस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस विधायक को हिरासत में लेने में सफल हुई या नहीं इस बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस वजह से पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।
    दूसरी ओर मध्य प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली में प्रस्तावित मार्च में शामिल होने के लिए पहुंच चुके हैं। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा पूर्व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ विधायक आरिफ मसूद झूमा सोलंकी सेना पटेल फुंदेलाल मार्को और केशव देसाई सहित कई नेता और पूर्व विधायक शामिल हैं। दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में भी कांग्रेस के विधायक और नेता मौजूद हैं। पार्टी की ओर से इस मार्च के जरिए अपनी मांगों को आगे रखने की तैयारी की गई है।
    कांग्रेस का यह मार्च मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। पार्टी निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाती रही है। कांग्रेस की योजना मार्च के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचकर अपनी मांगें रखने की है। इस मुद्दे को लेकर पार्टी पहले भी अपनी आपत्तियां सामने रख चुकी है।
    मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिए जाने और विधायक के घर पुलिस पहुंचने की घटनाओं ने दिल्ली मार्च से पहले राजनीतिक विवाद को बढ़ा दिया है। कांग्रेस इसे अपने नेताओं को रोकने की कोशिश बता रही है जबकि पुलिस की कार्रवाई के आधार पर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में मार्च के दौरान पार्टी की गतिविधियों और इस पूरे घटनाक्रम पर आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रहेगी।
  • दो साल से उच्च पद का प्रभार फिर भी नियमित प्रमोशन नहीं, एमपी के 32 हजार शिक्षकों की पदोन्नति अटकी, जल्द फैसले की मांग तेज

    दो साल से उच्च पद का प्रभार फिर भी नियमित प्रमोशन नहीं, एमपी के 32 हजार शिक्षकों की पदोन्नति अटकी, जल्द फैसले की मांग तेज


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति का मामला लंबे समय से लंबित है। दूसरी ओर जनजातीय कार्य विभाग ने 264 उच्च श्रेणी शिक्षकों और प्रधानपाठकों को व्याख्याता के पद पर पदोन्नति देने के आदेश जारी कर दिए हैं। दोनों विभागों की इस अलग-अलग स्थिति को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों में नाराजगी सामने आई है। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने सवाल उठाया है कि जब मुख्यमंत्री की ओर से निर्देश दिए जाने की बात कही जा रही है तो फिर स्कूल शिक्षा विभाग में पात्र शिक्षकों की पदोन्नति के आदेश जारी करने में देरी क्यों हो रही है।
    शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर दोनों विभागों की स्थिति अब कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। शासकीय शिक्षक संगठन का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग में समान योग्यता और अर्हता के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को पदोन्नति के अवसर मिलने चाहिए। संगठन के मुताबिक जनजातीय कार्य विभाग में पिछले कुछ महीनों के दौरान सहायक शिक्षक से उच्च श्रेणी शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक से व्याख्याता के पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग में प्राथमिक शिक्षक सहायक शिक्षक माध्यमिक शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक संवर्ग के अनेक पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति अब भी अटकी हुई है।
    शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के लिए पदोन्नति की प्रक्रिया अलग-अलग दिखाई दे रही है। संगठन का तर्क है कि यदि दोनों विभागों में शिक्षकों की योग्यता अर्हता और सेवा शर्तें समान हैं तो पदोन्नति के अवसरों में अंतर नहीं होना चाहिए। संगठन ने शासन और संबंधित विभाग से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
    मामले का एक अहम पहलू उन शिक्षकों से भी जुड़ा है जो करीब दो साल पहले से उच्च पद का प्रभार संभाल रहे हैं। संगठन के अनुसार इन शिक्षकों को अब तक नियमित पदोन्नति के आदेश नहीं मिले हैं। उच्च पद की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद नियमित पदोन्नति नहीं मिलने से कर्मचारियों के सेवा संबंधी हित प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है। प्रभार और नियमित पदोन्नति के बीच अंतर होने के कारण शिक्षकों को अपने भविष्य और सेवा लाभों को लेकर स्पष्टता की जरूरत महसूस हो रही है।
    शिक्षक संगठन का कहना है कि लंबे समय तक पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने से पात्र कर्मचारियों के करियर पर असर पड़ता है। साथ ही विभागीय व्यवस्था में भी असंतोष बढ़ सकता है। संगठन ने मांग की है कि स्कूल शिक्षा विभाग सभी लंबित मामलों की समीक्षा करे और नियमानुसार पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ देने के लिए जल्द निर्णय ले। उच्च पद का प्रभार संभाल रहे शिक्षकों के मामलों का भी प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने की मांग की गई है।
    संगठन ने शासन से पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की अपील की है। इससे शिक्षकों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके मामलों पर कब तक निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षक पदोन्नति आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस मांग पर कब तक निर्णय लेता है और लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।