Category: Madhya Pradesh

  • जबलपुर के अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ का आरोप, एक्सपायरी दवाओं का जखीरा मिला, युवक की मौत की जांच तेज

    जबलपुर के अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ का आरोप, एक्सपायरी दवाओं का जखीरा मिला, युवक की मौत की जांच तेज


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में बिना आवश्यक रजिस्ट्रेशन के संचालित किए जा रहे एक अस्पताल में जांच के दौरान एक्सपायरी दवाएं मिलने का मामला सामने आया है। बेलखाड़ू के पास स्थित अश्वनी अस्पताल में मंगलवार शाम ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में जांच की। करीब एक घंटे चली कार्रवाई के दौरान अस्पताल से 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं बरामद की गईं। इनमें एक्सपायरी दवाएं भी शामिल थीं। टीम ने लगभग 12 हजार रुपये की दवाएं जब्त की हैं। शुरुआती जांच में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। अधिकारियों के मुताबिक अस्पताल संचालिका सरिता साहू के पास एलोपैथिक चिकित्सा की मान्य डिग्री भी नहीं थी। आरोप है कि इसके बावजूद वह लंबे समय से मरीजों का इलाज कर रही थीं।

    यह मामला 19 वर्षीय शेखर चौधरी की मौत के बाद सामने आया है। तीन दिन पहले युवक की मौत के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था। मंगलवार को जांच के लिए अस्पताल खुलवाया गया तो वहां बच्चों और गर्भवती महिलाओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी मिलीं। इससे अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया और दवाओं के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि दवाओं की स्थिति और युवक की मौत के बीच सीधा संबंध जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    जानकारी के मुताबिक बेलखाड़ू के भट्टा मोहल्ले में रहने वाले शेखर चौधरी को 2 अक्टूबर को अचानक तेज पेट दर्द हुआ था। परिजन उसे खैरी गांव स्थित अश्वनी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां सुबह तक इलाज कराने के बाद वे उसे घर ले आए। लेकिन घर पहुंचने के कुछ समय बाद ही शेखर के हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी। उसकी बिगड़ती हालत देखकर परिजन उसे दोबारा अस्पताल ले गए। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही की आशंका जताई और पुलिस से शिकायत की।

    समीर चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि अस्पताल संचालिका सरिता साहू के कहने पर उनके मददगार सतीश साहू ने शेखर के हाथ और कमर में इंजेक्शन लगाए थे। अगले दिन उसे फिर इंजेक्शन दिया गया और ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई। परिजनों के मुताबिक ड्रिप चढ़ने के करीब आधे घंटे बाद शेखर की मौत हो गई। पुलिस को घटनास्थल से मिली ग्लूकोज की बोतल पर नवंबर 2025 की एक्सपायरी डेट दर्ज थी। इसके बाद आधी भरी बोतल ड्रिप निडिल इंजेक्शन की खाली शीशी और दवाइयों के रैपर जब्त किए गए थे।

    मंगलवार को ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण पटेल बीएमओ डॉ. श्रीपति मिश्रा और बेलखाड़ू चौकी प्रभारी अमित मिश्रा की टीम ने अस्पताल में रखी दवाओं की जांच की। अधिकारियों के मुताबिक यहां 23 तरह की एलोपैथिक दवाएं मिलीं जिनमें एक्सपायरी दवाएं और ग्लूकोज की ड्रिप भी शामिल थी। यह आशंका भी जांच के दायरे में है कि शेखर को चढ़ाई गई ड्रिप में मिलाया गया इंजेक्शन एक्सपायरी हो सकता है। इसकी पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही होगी।

    अधिकारियों के अनुसार अस्पताल का आवश्यक रजिस्ट्रेशन नहीं मिला और संचालिका के पास एलोपैथिक इलाज करने की मान्य डिग्री भी नहीं थी। जांच टीम ने सरिता साहू को कई बार मौके पर बुलाया लेकिन वह उपस्थित नहीं हुईं। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अस्पताल के संचालन दवाओं की वैधता और युवक की मौत के कारणों की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं की कोई भूमिका थी या नहीं और इस मामले में किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।

  • डबरा से भोपाल और बैतूल तक फैला फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क, 70 पासपोर्ट की जांच, विदेश गए लोगों का पता लगाने में जुटी STF

    डबरा से भोपाल और बैतूल तक फैला फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क, 70 पासपोर्ट की जांच, विदेश गए लोगों का पता लगाने में जुटी STF


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट दिलाने वाले नेटवर्क की जांच तेज हो गई है। स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ ने इस मामले में मुख्य आरोपी रियाल चौधरी और उसके साथी सम्यक बौधी को जेल से वापस पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। दोनों से की जा रही पूछताछ के दौरान पुलिस इस नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों और विदेश यात्राओं से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाने में लगी है। जांच के दो प्रमुख बिंदु हैं कि इस कथित फर्जीवाड़े में पैसा कहां से आया और संदिग्ध पासपोर्ट के जरिए कितने लोग विदेश गए।
    एसटीएफ की जांच में सम्यक बौधी के बैंक खाते अहम कड़ी बनकर सामने आए हैं। अधिकारियों ने उसके बैंक खातों के स्टेटमेंट हासिल कर लिए हैं और अब उनमें हुए लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खातों में रकम किन लोगों ने जमा कराई और किस उद्देश्य से पैसे ट्रांसफर किए गए। इसके साथ ही नकद निकासी का विवरण भी खंगाला जा रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने के बदले किसे कितना कमीशन मिला और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
    इस मामले में गुलाब राय गौतम का बैंक खाता भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रियाल चौधरी कथित तौर पर कमीशन देकर इस खाते का इस्तेमाल करता था और इसमें लाखों रुपये का लेनदेन हुआ है। एसटीएफ अब बैंक रिकॉर्ड और पूछताछ से मिली जानकारी को जोड़कर आर्थिक लेनदेन की पूरी कड़ी तैयार कर रही है। इससे कथित नेटवर्क के वित्तीय संचालन और उसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
    जांच का दूसरा बड़ा पहलू विदेश यात्राओं से जुड़ा है। एसटीएफ ने 70 संदिग्ध पासपोर्ट धारकों का पूरा रिकॉर्ड हासिल करने के लिए पासपोर्ट कार्यालय से डेटा मांगा है। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि इन पासपोर्ट के आधार पर कितने लोग विदेश गए और उनमें से कितने वापस भारत लौटे। यदि कोई व्यक्ति विदेश जाने के बाद वापस नहीं आया है तो उसकी यात्रा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।
    जांच में यह भी सामने आया है कि सम्यक बौधी ने कुछ बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय बताने के लिए उन्हें दो साल से जानने संबंधी शपथ पत्र दिए थे। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि रियाल चौधरी और सम्यक बौधी की मुलाकात कैसे हुई और कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट दिलाने की योजना किसने तैयार की। इन दस्तावेजों के आधार पर पहचान और निवास संबंधी प्रमाणपत्र कैसे हासिल किए गए इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
    बताया गया है कि डबरा भोपाल और बैतूल के कुछ बौद्ध विहारों तथा मठों के पते इस मामले में सामने आए हैं। एसटीएफ जांच कर रही है कि इन पतों का इस्तेमाल संदिग्ध पासपोर्ट बनवाने के लिए किस तरह किया गया। आधार कार्ड मूल निवासी प्रमाणपत्र और जन्म प्रमाणपत्र तैयार कराने में किसी व्यक्ति या सरकारी कर्मचारी की भूमिका रही या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है। स्थानीय पुलिस सत्यापन और पासपोर्ट शाखा में दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया भी अधिकारियों के रडार पर है।
    अब बैंक खातों के लेनदेन और पासपोर्ट कार्यालय से मिलने वाले यात्रा रिकॉर्ड के आधार पर एसटीएफ जांच की अगली दिशा तय करेगी। इन जानकारियों से कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और मददगारों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि मामले में किसकी क्या भूमिका रही है इसका अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
  • सिंधिया परिवार के महासमझौते पर संकट, धोखाधड़ी के आरोपों के बीच आज तय होगी संपत्ति विवाद की अगली राह

    सिंधिया परिवार के महासमझौते पर संकट, धोखाधड़ी के आरोपों के बीच आज तय होगी संपत्ति विवाद की अगली राह


    ग्वालियर । ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े बहुचर्चित विवाद में बुधवार 14 अक्टूबर को अहम कानूनी मोड़ आ सकता है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सहमति से तैयार किया गया समझौता प्रस्ताव एक बार फिर कानूनी अड़चनों में उलझ गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय में बुधवार को अंतरिम आवेदन और आपत्ति आवेदन पर बहस होनी है। इस सुनवाई के बाद अदालत तय कर सकती है कि मामले को आगे किस प्रक्रिया के तहत बढ़ाया जाएगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुनवाई अंतरिम आवेदनों तक सीमित रहेगी या फिर प्रतिमा देवी की आपत्ति स्वीकार कर साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

    इस संपत्ति विवाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ वसुंधरा राजे यशोधरा राजे तथा उषा राजे के बीच पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। लंबे विवाद के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर अदालत में पेश किया था। माना जा रहा था कि इस समझौते से वर्षों पुराने विवाद को खत्म करने का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना की आपत्ति ने पूरे मामले को फिर से जटिल बना दिया है।

    प्रतिमा देवी ने अदालत में आरोप लगाया है कि उनसे धोखाधड़ी करके समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए। उनकी आपत्ति में ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित वसुंधरा राजे यशोधरा राजे और उषा राजे पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रतिमा देवी का कहना है कि समझौते की प्रक्रिया में उनके साथ उचित व्यवहार नहीं हुआ। उन्होंने अदालत से मामले में दोबारा पक्षकार के रूप में शामिल होने और संपत्ति में अपने अधिकारों पर विचार करने की मांग की है।
    दूसरी ओर वसुंधरा राजे यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से अदालत में इन आरोपों का जवाब दिया गया है।

    उनके पक्ष का कहना है कि समझौते पर हस्ताक्षर आपसी सहमति से किए गए थे। हस्ताक्षर के बाद परिवार के सदस्य वहां रुके थे और साथ में पारिवारिक भोजन भी हुआ था। इसके बाद तस्वीरें भी ली गई थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी कहा गया है कि समझौते पर हस्ताक्षर सहमति से हुए थे और प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं की गई।

    मामले की जटिलता की एक बड़ी वजह यह भी है कि मूल मुकदमे में पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार बनाया गया था। हालांकि पूर्व में अदालत की कार्यवाही के दौरान उपस्थित नहीं होने के कारण उन्हें एकपक्षीय घोषित कर दिया गया था। अब प्रतिमा देवी ने दोबारा प्रक्रिया में शामिल होने की मांग करते हुए मौजूदा समझौते पर सवाल उठाए हैं। चूंकि पद्मावती राजे भी संपत्ति में हिस्सेदार थीं इसलिए उनकी बेटियों के अधिकारों का सवाल समझौते की कानूनी वैधता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।

    सिंधिया राजघराने की देशभर में फैली अचल संपत्तियों के बंटवारे से जुड़ा यह विवाद अब निर्णायक प्रक्रिया की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस मामले में 78 साल पुराना विलय पत्र भी महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। बुधवार की सुनवाई में अदालत का रुख तय करेगा कि समझौते को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रहेगी या आपत्तियों और साक्ष्यों पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत होगी। हालांकि अंतिम फैसला अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।

  • ग्वालियर में 35 वर्षीय किसान की कुल्हाड़ी से हत्या, शव के पास मिला डॉट पेन, 3.32 लाख के हिसाब वाली पर्ची की जांच में जुटी पुलिस

    ग्वालियर में 35 वर्षीय किसान की कुल्हाड़ी से हत्या, शव के पास मिला डॉट पेन, 3.32 लाख के हिसाब वाली पर्ची की जांच में जुटी पुलिस


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक किसान की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। झांसी रोड थाना क्षेत्र के केदारपुर छोटी मढ़ैया में 35 वर्षीय किसान पुरुषोत्तम गुर्जर का शव बुधवार सुबह एक पड़ोसी के खेत में मिला। किसान के गले और सिर पर धारदार हथियार से गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। घटनास्थल के पास एक डॉट पेन मिला है जबकि मृतक की जेब से 3.32 लाख रुपये के लेनदेन का हिसाब लिखी पर्ची बरामद हुई है। किसान का मोबाइल फोन भी मौके से गायब बताया जा रहा है। पुलिस इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए हत्या की जांच कर रही है।

    परिजनों के मुताबिक मंगलवार को पुरुषोत्तम की पत्नी एक रिश्तेदार के यहां शोक कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। घर पर पुरुषोत्तम अपने दो बेटों और दो बेटियों के साथ था। मंगलवार देर रात उसके मोबाइल पर किसी का फोन आया। फोन पर बातचीत करने के बाद वह घर से बाहर निकल गया। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिवार के लोगों को उस समय अंदाजा नहीं था कि पुरुषोत्तम के साथ कोई अनहोनी हो सकती है। बुधवार सुबह जब उसका शव घर से करीब 300 मीटर दूर पड़ोसी के खेत में मिला तो इलाके में हड़कंप मच गया।

    घटना की सूचना मिलने पर झांसी रोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के साथ फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और जरूरी साक्ष्य जुटाए। शुरुआती जांच में सामने आया कि पुरुषोत्तम के गले पर कुल्हाड़ी के पांच और सिर पर एक गहरा घाव था। इन चोटों से आशंका जताई जा रही है कि उस पर धारदार हथियार से हमला किया गया। हालांकि हमले में कितने लोग शामिल थे और वारदात किस परिस्थिति में हुई इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पुलिस को मृतक की जेब से एक पर्ची मिली है जिस पर 1.32 लाख रुपये और 2 लाख रुपये के लेनदेन का हिसाब लिखा होने की जानकारी सामने आई है। दोनों रकम का कुल योग 3.32 लाख रुपये है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह हिसाब किस व्यक्ति या कारोबार से जुड़ा था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस लेनदेन का हत्या से कोई संबंध है या यह किसी अन्य मामले से जुड़ा दस्तावेज है। फिलहाल केवल पर्ची मिलने के आधार पर हत्या की वजह तय नहीं की गई है।

    घटनास्थल के पास डॉट पेन मिलने और पुरुषोत्तम का मोबाइल गायब होने से भी जांच के कई पहलू सामने आए हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पेन मृतक का था या किसी अन्य व्यक्ति का। वहीं मंगलवार देर रात आए फोन की जानकारी जुटाना भी अहम माना जा रहा है। मृतक के मोबाइल की उपलब्ध जानकारी और आखिरी बातचीत से घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।

    मृतक के ससुर पूरन सिंह गुर्जर ने बताया कि पुरुषोत्तम का गांव या बाहर किसी से विवाद होने की जानकारी परिवार को नहीं थी। उन्होंने जमीन या संपत्ति को लेकर किसी झगड़े से भी इनकार किया। परिजनों का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि हत्या किसने और क्यों की। उन्होंने पुलिस से आरोपियों की जल्द पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है।

    झांसी रोड थाने के सब इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के मुताबिक पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेनदेन की पर्ची गायब मोबाइल फोन देर रात आया कॉल और घटनास्थल से मिले साक्ष्य जांच के अहम बिंदु हैं। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही है। फिलहाल हत्या के पीछे की वजह और आरोपियों की पहचान स्पष्ट नहीं हुई है।

  • हेड कॉन्स्टेबल के ठिकानों पर सुबह 6 बजे लोकायुक्त का छापा, बंगले से लेकर जमीन और फर्मों तक जांच, करोड़ों के लेन-देन का पता चला

    हेड कॉन्स्टेबल के ठिकानों पर सुबह 6 बजे लोकायुक्त का छापा, बंगले से लेकर जमीन और फर्मों तक जांच, करोड़ों के लेन-देन का पता चला


    इंदौर । मध्य प्रदेश में आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीम ने बुधवार सुबह करीब 6 बजे इंदौर और देवास में एक साथ 15 ठिकानों पर सर्चिंग शुरू की। शुरुआती जांच में हेड कॉन्स्टेबल के पास करीब 6.26 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति होने का अनुमान सामने आया है। लोकायुक्त के अनुसार यह संपत्ति उनकी आंकी गई आय से करीब 223 प्रतिशत अधिक है। फिलहाल टीम बैंक खातों निवेश संपत्तियों और कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    फिरोज खान वर्तमान में पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में ड्राइवर के पद पर पदस्थ हैं। इससे पहले वह देवास के औद्योगिक थाने और बागली में भी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी करीब 20 साल की सरकारी सेवा बताई जा रही है। लोकायुक्त के मुताबिक वेतन के रूप में उनकी आय करीब 75 लाख रुपये आंकी गई है। अन्य स्रोतों से होने वाली आय को जोड़कर कुल आय लगभग 1.93 करोड़ रुपये मानी गई है। इसके मुकाबले शुरुआती जांच में 6.26 करोड़ रुपये की संपत्ति का अनुमान सामने आने के बाद मामले की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फिरोज खान पुलिस विभाग में अपनी पदस्थापना का प्रभाव दिखाकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में हस्तक्षेप करते थे। उन पर दूसरे लोगों के माध्यम से जमीनों का लेन-देन करने संपत्तियों में निवेश करने और परिवार के सदस्यों के अलावा एक परिचित महिला के नाम पर भी संपत्तियां खरीदने के आरोप हैं। शिकायत में कई वाहन रखने और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने की बात भी कही गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फिरोज खान पुलिस विभाग में अपनी पदस्थापना का प्रभाव दिखाकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में हस्तक्षेप करते थे। उन पर दूसरे लोगों के माध्यम से जमीनों का लेन-देन करने संपत्तियों में निवेश करने और परिवार के सदस्यों के अलावा एक परिचित महिला के नाम पर भी संपत्तियां खरीदने के आरोप हैं। शिकायत में कई वाहन रखने और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने की बात भी कही गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

    प्रारंभिक जांच में फिरोज खान की मां और पत्नी के नाम पर साहिल ट्रेडिंग नाम की फर्म होने की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त के अनुसार इस फर्म के खाते में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। वहीं उनकी परिचित रोशनी वर्मा द्वारा रोशनी सेल्स एंड सर्विस नाम से फर्म संचालित किए जाने की जानकारी भी मिली है। जमीनों की खरीद में कथित भूमिका सामने आने के बाद रोशनी वर्मा को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट नाम की फर्म के माध्यम से रियल एस्टेट में निवेश किए जाने की जानकारी की भी जांच की जा रही है।

    जांच में इंदौर जिले की सांवेर तहसील के ग्राम गुरान में करीब 21.75 बीघा कृषि भूमि से जुड़े सौदे का मामला भी सामने आया है। इस जमीन को लेकर शिकायतकर्ता के बेटे और उसके पिता के बीच विवाद बताया गया है। आरोप है कि इस विवाद का फायदा उठाकर फिरोज खान ने अपनी परिचित रोशनी वर्मा के नाम पर शिकायतकर्ता के पिता से कृषि भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करवाया। लोकायुक्त की टीम इस सौदे से संबंधित दस्तावेजों और भूमिका की पड़ताल कर रही है।

    कार्रवाई के दौरान देवास में 11 और इंदौर में चार ठिकानों की तलाशी ली जा रही है। इनमें मकान फ्लैट कृषि भूमि प्लॉट और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। देवास के आदर्श नगर सहित कई कॉलोनियों में संपत्तियों की जांच की जा रही है। इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में रोशनी वर्मा के निवास के अलावा स्कीम नंबर 94 के मनोरमा अपार्टमेंट और श्रीनगर कॉलोनी के श्रीदेवी अपार्टमेंट स्थित फ्लैट भी जांच के दायरे में हैं। स्कीम नंबर 94 स्थित बड़े बंगले के निचले हिस्से को किराए पर दिए जाने और उससे आय मिलने की जानकारी भी जांच में शामिल है। वीआईपी नंबर 9000 वाली स्कॉर्पियो की भी पड़ताल की जा रही है।

    लोकायुक्त की टीम बैंक खातों फर्मों के वित्तीय लेन-देन निवेश और संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार तलाशी पूरी होने के बाद बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और शुरुआती आंकड़ों के आधार पर संपत्ति तथा आय के स्रोतों का मिलान किया जा रहा है।

  • शिवपुरी में दर्दनाक हादसा, खेत के तालाब में डूबा 14 वर्षीय देव, लापता होने की सूचना पर तलाश में जुटी पुलिस को मिला शव

    शिवपुरी में दर्दनाक हादसा, खेत के तालाब में डूबा 14 वर्षीय देव, लापता होने की सूचना पर तलाश में जुटी पुलिस को मिला शव


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक दर्दनाक हादसे में 14 वर्षीय बालक की तालाब में डूबने से मौत हो गई। घटना सिरसौद थाना क्षेत्र के सिरसौद गांव की है जहां बालक गांव के एक खेत में बने तालाब में नहाने के लिए गया था। नहाते समय वह तालाब के गहरे हिस्से में चला गया और पानी में डूब गया। काफी देर तक बालक के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिवार के लोग सिरसौद थाने पहुंचे और पुलिस को उसके लापता होने की सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने तलाश शुरू की और तालाब के पास से बालक का शव बरामद हुआ।
    जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान देव नामदेव के रूप में हुई है। वह सिरसौद गांव निवासी प्रकाश नामदेव का बेटा था। मंगलवार को देव गांव के ही एक खेत में बने तालाब में नहाने पहुंचा था। बताया गया है कि नहाते समय वह धीरे-धीरे तालाब के गहरे हिस्से में चला गया। पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाने के कारण वह डूब गया। इस दौरान आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी नहीं मिल सकी और बालक की जान चली गई।
    दूसरी ओर जब देव काफी देर तक घर नहीं पहुंचा तो परिजन चिंतित हो गए। उन्होंने पहले आसपास के इलाकों और परिचितों के यहां उसकी तलाश की। लेकिन बालक का कहीं पता नहीं चलने पर परिवार के लोग सिरसौद पुलिस थाने पहुंचे। वहां उन्होंने देव के लापता होने की जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बालक की तलाश शुरू कर दी। पुलिसकर्मियों ने गांव में पूछताछ की और संभावित स्थानों पर खोजबीन की।
    तलाश के दौरान पुलिस खेत में बने तालाब के पास पहुंची। वहां किनारे पर देव के कपड़े मिले। कपड़े मिलने के बाद पुलिस को तालाब में उसके डूबने की आशंका हुई। इसके बाद पानी में तलाश की गई तो बालक का शव तालाब में उतराता हुआ मिला। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजन भी मौके पर पहुंचे। बालक का शव देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई और गांव में शोक का माहौल बन गया।
    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। कम उम्र में देव की मौत से परिजन सदमे में हैं। गांव के लोग भी इस हादसे से दुखी हैं।
    तालाब और अन्य जलस्रोतों में नहाने के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। खासकर खेतों में बने तालाबों में पानी की वास्तविक गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे स्थानों पर नहाने से डूबने का खतरा बढ़ जाता है। शिवपुरी की यह घटना एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बन गई है और ग्रामीण इलाकों में जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा को लेकर सतर्कता की जरूरत भी सामने लाती है।
  • शिवपुरी के जंगलों में मां बलारी का रहस्यमयी दरबार, सुबह बालिका तो दोपहर में युवा रूप की मान्यता, नवरात्र में बढ़ी भक्तों की भीड़

    शिवपुरी के जंगलों में मां बलारी का रहस्यमयी दरबार, सुबह बालिका तो दोपहर में युवा रूप की मान्यता, नवरात्र में बढ़ी भक्तों की भीड़


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित माधव टाइगर रिजर्व अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। इसी रिजर्व की पूर्वी रेंज के घने जंगलों और खूबसूरत वादियों के बीच सदियों पुराना मां बलारी माता मंदिर स्थित है। यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपनी अनूठी लोक मान्यताओं के कारण भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की आवाजाही बढ़ गई है। दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु जंगल के रास्ते सफर कर मां के दरबार में पहुंच रहे हैं और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
    मां बलारी मंदिर की सबसे खास मान्यता देवी के बदलते स्वरूप से जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित मान्यता के अनुसार मां का मुखमंडल 24 घंटे के भीतर तीन बार आंशिक रूप से बदलता है। कहा जाता है कि सुबह देवी बाल रूप में दर्शन देती हैं जबकि दोपहर में उनका स्वरूप युवा दिखाई देता है। वहीं रात के समय वृद्ध स्वरूप की मान्यता है। इसी अनूठी मान्यता के चलते मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा और आकर्षण बना हुआ है। नवरात्र के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर माता के दर्शन करने को उत्सुक हैं।
    मंदिर तक पहुंचने का रास्ता भी श्रद्धालुओं के लिए एक अलग अनुभव लेकर आता है। शिवपुरी शहर से मंदिर की दूरी करीब 25 किलोमीटर बताई गई है। यहां पहुंचने के लिए यात्रियों को कुछ दूरी कच्चे रास्ते पर तय करनी पड़ती है। इसके बाद करीब 7.4 किलोमीटर का मार्ग माधव टाइगर रिजर्व के जंगल से होकर गुजरता है। घने पेड़ों और प्राकृतिक हरियाली के बीच से गुजरने वाला यह रास्ता जहां प्रकृति के करीब होने का अनुभव देता है वहीं वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण सावधानी बरतना भी जरूरी है।
    नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और वन क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। दी गई जानकारी के अनुसार इस अवधि में भक्तों को अपने वाहनों से मंदिर तक जाने की अनुमति दी गई है। हालांकि जंगल में प्रवेश के लिए चेकपोस्ट पर वाहनों की एंट्री अनिवार्य रखी गई है। इससे वन क्षेत्र में आने-जाने वाले वाहनों पर नजर रखी जा सके और श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित बनी रहे।
    जंगल के रास्ते पर सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। वन विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे रास्ते में अनावश्यक रूप से न रुकें और समूह में आगे बढ़ें। इसके साथ ही डीजे बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। जंगल में तेज आवाज और लापरवाही वन्यजीवों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। ऐसे में श्रद्धालुओं से धार्मिक यात्रा के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जा रही है।
    मां बलारी मंदिर धार्मिक आस्था और प्राकृतिक वातावरण का अनूठा संगम है। एक ओर यहां देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच रही है तो दूसरी ओर माधव टाइगर रिजर्व की हरियाली इस स्थान को विशेष बनाती है। नवरात्र में मंदिर आने वाले भक्तों के लिए जरूरी है कि वे आस्था के साथ वन विभाग के नियमों का भी पालन करें। इससे धार्मिक परंपरा के साथ जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
  • MP: बांधवगढ़ रिजर्व में मानसून में शुरू हुआ प्रयोग हुआ हिट… 100 दिनों में पहुंचे 3780 पर्यटक

    MP: बांधवगढ़ रिजर्व में मानसून में शुरू हुआ प्रयोग हुआ हिट… 100 दिनों में पहुंचे 3780 पर्यटक


    उमरिया।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) में वन्यजीव पर्यटन (Wildlife tourism) को लेकर सैलानियों का उत्साह लगातार चरम पर है. कोर जोन के साथ-साथ अब बफर जोन पर्यटन (Bandhavgarh Buffer Zone Safari) भी भारी लोकप्रियता हासिल कर रहा है. मानसून के दौरान जब कोर जोन में सफारी पूरी तरह बंद रहती है, तब बफर क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां शुरू की गई थीं. यह प्रयोग इतना सफल रहा कि चालू पर्यटन सत्र (2026-27) के शुरुआती 100 दिनों के भीतर परासी और पचपेड़ी बफर जोन में 3,780 पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई से 8 अक्टूबर तक कुल 802 वाहनों के माध्यम से पर्यटकों ने बफर जोन का भ्रमण किया. इसमें 3,758 भारतीय और 22 विदेशी पर्यटक शामिल रहे।

    परासी बफर जोन: यहां 550 वाहनों से 2,588 पर्यटकों ने भ्रमण किया. पचपेड़ी बफर जोन: यहां 252 वाहनों के जरिए 1,192 पर्यटक जंगल सफारी के लिए पहुंचे। महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई में 243 वाहनों से 1,109, अगस्त में 265 वाहनों से 1,247 और सितंबर में 168 वाहनों से 780 पर्यटक आए. वहीं 1 से 8 अक्टूबर के दौरान 126 वाहनों से 644 सैलानी बफर जोन पहुंचे. पूरी अवधि में अगस्त माह में सबसे अधिक सैलानियों का आगमन दर्ज किया गया.


    प्राकृतिक परिवेश में बाघों के दीदार और स्थानीय रोजगार

    बफर जोन में पर्यटकों को बाघ (टाइगर) सहित अन्य दुर्लभ वन्यप्राणियों के उनके प्राकृतिक परिवेश में नियमित दीदार हो रहे हैं. कोर जोन खुलने के बाद भी बफर जोन के प्रति पर्यटकों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। बफर क्षेत्र में पर्यटन संचालन का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय आदिवासी और आसपास के समुदायों को मिला है. जिप्सी संचालन, गाइड सेवा, होमस्टे और स्थानीय हस्तशिल्प के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

  • MP: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की मची होड़…. अक्टूबर के शुरुआती 13 दिन में 4 लाख से ज्यादा आवेदन

    MP: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की मची होड़…. अक्टूबर के शुरुआती 13 दिन में 4 लाख से ज्यादा आवेदन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मतदाता सूची (Voter List) में नाम जुड़वाने के लिए 1 अक्टूबर से अब तक Form 6 के 4,06,338 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें 18 से 19 वर्ष की उम्र के युवाओं के 1,92,851 आवेदन शामिल हैं. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) संजीव कुमार झा ने यह जानकारी दी।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा (Chief Electoral Officer Sanjeev Kumar Jha) के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के निर्देशों के तहत प्रदेशभर में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) Form 6 के आवेदन एकत्र कर रहे हैं. पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर विशेष शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य पात्र नागरिकों को आवेदन जमा करने में मदद करना और उनका नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।


    क्या है Form 6 और कौन कर सकता है आवेदन?

    Form 6 भारतीय नागरिकों के लिए मतदाता सूची में नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने का निर्धारित आवेदन पत्र है. इसके लिए आवेदक की उम्र निर्धारित अर्हता तिथि पर कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए. साथ ही, उसे उस निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना जरूरी है, जहां वह मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहता है।

    ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकते हैं आवेदन
    भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, पात्र नागरिक Form 6 के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं.
    ऑनलाइन: निर्वाचन आयोग के Voter Services Portal के माध्यम से.
    ऑफलाइन: संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) या बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास आवेदन जमा करके।

    Form 6 पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
    इस बीच, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत ने नए Form 6 को न तो मंजूरी दी है और न ही उसे खारिज किया है। पीठ के अनुसार, बिहार में SIR से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे पर न्यायिक निर्णय नहीं दिया गया था.

    दरअसल, निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में संकेत दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 के बिहार SIR से संबंधित फैसले में Form 6 के घोषणा-पत्र को बरकरार रखा था. अब शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि उस सुनवाई में नए Form 6 की वैधता या स्वीकार्यता पर फैसला नहीं हुआ था।

    युवाओं के लिए मतदाता बनने का अवसर
    मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से अब तक मिले कुल 4,06,338 आवेदनों में करीब 47.45 प्रतिशत आवेदन 18 से 19 वर्ष के युवाओं के हैं. यह आंकड़ा नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी को दर्शाता है. पात्र नागरिक Form 6 के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने से पहले निर्धारित पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल से प्राप्त की जा सकती है।

  • MP: उज्जैन पुलिस ने पकड़े 2 करोड़ रुपये के तांबे स्क्रैप से भरे पांच वाहन, 5 तस्कर गिरफ्तार

    MP: उज्जैन पुलिस ने पकड़े 2 करोड़ रुपये के तांबे स्क्रैप से भरे पांच वाहन, 5 तस्कर गिरफ्तार


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) में अवैध गतिविधियों और संदिग्ध मामलों पर नकेल कसते हुए उज्जैन पुलिस (Ujjain Police) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने चेकिंग के दौरान तांबे के चूरे स्क्रैप से भरे पांच लोडिंग वाहनों को पकड़ा है। जब्त किए गए वाहनों और उनमें भरे माल की कुल अनुमानित कीमत लगभग दो करोड़ रुपये आंकी गई है।

    पुलिस को मिली खास सूचना के आधार पर रणकेश्वर मंदिर के पास ब्रिज के नीचे यह कार्रवाई की गई। पकड़े गए पांचों टाटा एस लोडिंग वाहनों के चालकों से जब माल से संबंधित वैध बिल, बिल्टी और परिवहन दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई भी वैध कागजात या संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद चोरी के माल के संदेह में पुलिस ने माल और वाहनों को विधिवत जब्त कर लिया।

    बताया जाता है कि पुलिस ने श्री हरिओम धर्मकांटा पर टाटा एस (MP-09-AX-5704): वजन – 4,165 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (नया वाहन, बिना नंबर): वजन – 2,335 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (MP-09-AJ-2175): वजन – 4,035 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (MP-09-BK-4988): वजन – 2,965 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (MP-09-BR-4162): वजन – 3,075 किलोग्राम है पांचों वाहनों का कुल ग्रॉस वजन 16,575 किलोग्राम है, जिसमें लगभग 11 टन तांबे का स्क्रैप (कीमत करीब 2 करोड़ रुपए) शामिल है।

    पुलिस ने मौके से पांचों वाहन चालकों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान सुरेश पिता मोहनलाल सोलंकी (निवासी – इंदौर), राहुल पिता राधेश्याम चौहान (निवासी – इंदौर), शंकर पिता कैलाश सिंह ढाला (निवासी – इंदौर), रामकिशन पिता मांगीलाल पंवार (निवासी – इंदौर), विनायक पिता रमेश राठौर (निवासी – इंदौर) के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(1)(e)/106 के तहत इस्तगासा पंजीबद्ध कर लिया है। जब्त वाहनों और माल को थाने में सुरक्षित रखवाया गया है। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह तांबे का चूरा कहां से लाया गया था और इसके तार किन चोरियों या अवैध नेटवर्क से जुड़े हैं।