Category: Madhya Pradesh

  • राज्यसभा चुनाव विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश, मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज, संवैधानिक सीमाओं का दिया हवाला

    राज्यसभा चुनाव विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश, मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज, संवैधानिक सीमाओं का दिया हवाला

    मध्य प्रदेश : से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं मीनाक्षी नटराजन को उस समय बड़ा कानूनी झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने उनके नामांकन पत्र को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान न्यायालय सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता और संविधान में इसके लिए स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की गई हैं।

    न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान संविधान के अनुच्छेद 329 का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं में न्यायिक हस्तक्षेप पर प्रतिबंध है। अदालत ने माना कि इस चरण में रिट याचिका पर विचार करना संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं होगा। इसी आधार पर याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया गया।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त किया जाता है तो उसके लिए उपलब्ध वैधानिक उपाय चुनाव आयोग के समक्ष अपनी शिकायत रखना होता है। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा कि क्या ऐसे मामलों में पहले किसी अदालत ने चुनावी प्रक्रिया के बीच हस्तक्षेप किया है, हालांकि याचिकाकर्ता पक्ष कोई ऐसा उदाहरण प्रस्तुत नहीं कर सका।

    मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल का नामांकन अनुचित आधार पर खारिज किया गया। उनका कहना था कि जिस आपराधिक मामले का उल्लेख न करने का आरोप लगाया गया है, वह ऐसा मामला नहीं था जिसके प्रकटीकरण की कानूनी बाध्यता बनती हो। उन्होंने तर्क दिया कि संबंधित मामले में केवल समन जारी हुए थे और उसे नामांकन निरस्त करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए था।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान यह आरोप लगाया गया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथपत्र में एक लंबित न्यायालयीन शिकायत का उल्लेख नहीं किया। निर्वाचन अधिकारी द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि प्रस्तुत शपथपत्र अधूरा है, जिसके चलते उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।

    चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। आपत्ति दर्ज कराने वाले पक्ष का दावा था कि उम्मीदवार ने अपने खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी छिपाई है, जबकि कांग्रेस ने इसे तकनीकी आधार पर लिया गया निर्णय बताते हुए निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इसे केवल व्यक्तिगत हार के रूप में नहीं देखतीं, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनकी शिकायतों पर अपेक्षित तत्परता से कार्रवाई नहीं की और पूरे मामले में निष्पक्षता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।

    कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि शुरू से ही उन्हें चुनावी प्रक्रिया के संचालन को लेकर संदेह था और अदालत के फैसले के बावजूद उनकी चिंताएं समाप्त नहीं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि उनका संघर्ष किसी राज्य सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनावी संस्थाओं की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए था।

    इस फैसले के साथ फिलहाल राज्यसभा चुनाव से जुड़े इस विवाद का न्यायिक अध्याय समाप्त हो गया है। हालांकि राजनीतिक स्तर पर यह मुद्दा आगे भी चर्चा का विषय बना रह सकता है, क्योंकि विपक्ष चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाता रहा है।

  • IIT इंदौर का 14वां दीक्षांत समारोह 27 जून को: इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. सिवन करेंगे अध्यक्षता, प्रो. अभय करांदिकर होंगे मुख्य अतिथि

    IIT इंदौर का 14वां दीक्षांत समारोह 27 जून को: इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. सिवन करेंगे अध्यक्षता, प्रो. अभय करांदिकर होंगे मुख्य अतिथि


    मध्य प्रदेश। देश के प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर अपने 14वें दीक्षांत समारोह के आयोजन की तैयारियों में जुट गया है। संस्थान का यह बहुप्रतीक्षित समारोह 27 जून 2026 (शनिवार) को आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को डिग्रियां और प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए जाएंगे।

    आईआईटी इंदौर प्रशासन के अनुसार इस वर्ष के दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य तथा भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के पूर्व सचिव प्रो. अभय करांदिकर होंगे। वहीं समारोह की अध्यक्षता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व चेयरमैन और आईआईटी इंदौर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के वर्तमान चेयरपर्सन डॉ. के. सिवन करेंगे।

    दोपहर 2:30 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के निदेशक के स्वागत संबोधन और वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुति के साथ होगी। इसके बाद बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन डॉ. के. सिवन विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में प्रो. अभय करांदिकर का दीक्षांत भाषण होगा, जिसमें वे विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के संबंध में मार्गदर्शन देंगे।

    समारोह के दौरान स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। इसके साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक और अन्य प्रतिष्ठित सम्मान भी दिए जाएंगे। संस्थान की परंपरा के अनुसार डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी सामूहिक रूप से शपथ ग्रहण करेंगे और समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेंगे।

    आईआईटी इंदौर ने समारोह में शामिल होने वाले अभिभावकों, शोधकर्ताओं और अन्य अतिथियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की है। संस्थान ने इंदौर एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन से सीधे कैंपस तक पहुंचने के लिए डिजिटल क्यूआर कोड आधारित नेविगेशन सुविधा उपलब्ध कराई है। इससे बाहरी राज्यों और अन्य देशों से आने वाले मेहमानों को संस्थान तक पहुंचने में आसानी होगी।

    जो लोग किसी कारणवश समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकेंगे, उनके लिए भी संस्थान ने विशेष व्यवस्था की है। दीक्षांत समारोह का सीधा प्रसारण आईआईटी इंदौर की आधिकारिक वेबसाइट पर किया जाएगा। दर्शक दोपहर 2:30 बजे से लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से पूरे कार्यक्रम को देख सकेंगे।

    आईआईटी इंदौर का यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं बल्कि विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत, शोध और उपलब्धियों का उत्सव भी माना जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी संस्थान को उम्मीद है कि यहां से निकलने वाले युवा देश और दुनिया में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।

  • इंदौर जंक्शन के मेगा री-डेवलपमेंट की शुरुआत: जल्द लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से चलेंगी ट्रेनें, यात्रियों को मिलेगी नई सुविधा

    इंदौर जंक्शन के मेगा री-डेवलपमेंट की शुरुआत: जल्द लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से चलेंगी ट्रेनें, यात्रियों को मिलेगी नई सुविधा


    मध्य प्रदेश। इंदौर के लाखों रेल यात्रियों के लिए आने वाला समय कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आने वाला है। शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशन इंदौर जंक्शन के व्यापक पुनर्विकास और आधुनिक स्वरूप में निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना के तहत इंदौर जंक्शन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसी परियोजना को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए ट्रेनों का संचालन चरणबद्ध तरीके से लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन से शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

    पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन की नई इमारत का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। स्टेशन परिसर में यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, पेयजल, यात्री सूचना प्रणाली और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रेलवे का उद्देश्य है कि संचालन शुरू होने से पहले यात्रियों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं।

    रेलवे अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल इंदौर यार्ड क्षेत्र में महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य जारी है। इसके तहत नॉन-इंटरलॉकिंग प्रक्रिया और विभिन्न तकनीकी उन्नयन किए जा रहे हैं। इस कार्य को पूरा करने के लिए रेलवे ने मेजर ब्लॉक भी लिया है। इसी कारण कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से निरस्त या उनके संचालन में बदलाव किया गया था।

    तकनीकी कार्यों के अंतर्गत ट्रैक सर्किट, सिग्नलिंग सिस्टम और कंप्यूटर आधारित ऑपरेशन कंट्रोल सिस्टम को नए स्टेशन परिसर के अनुरूप व्यवस्थित किया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि यह प्रक्रिया सुरक्षा और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए बेहद जरूरी है। सभी कार्य निर्धारित मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार किए जा रहे हैं।

    रेलवे के जोनल और मंडल स्तर के वरिष्ठ अधिकारी पूरे प्रोजेक्ट की नियमित निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव भविष्य में इंदौर को एक आधुनिक और अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। परियोजना पूरी होने के बाद यात्रियों को बेहतर यातायात व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और अधिक सुव्यवस्थित स्टेशन परिसर मिलेगा।

    रेलवे के अनुसार जैसे ही तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होंगी, ट्रेनों का संचालन लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन से शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद इंदौर जंक्शन पर नई स्टेशन बिल्डिंग और अन्य संरचनात्मक विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन के प्रस्थान और आगमन स्टेशन की जानकारी अवश्य जांच लें। संचालन में होने वाले बदलावों की जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप और सूचना केंद्रों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। इससे यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने में मदद मिलेगी।

    मेगा री-डेवलपमेंट परियोजना के पूरा होने के बाद इंदौर जंक्शन को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक नए स्वरूप में विकसित किए जाने की उम्मीद है, जो शहर की बढ़ती जरूरतों और यात्री संख्या को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेगा।

  • इंदौर में टमाटर के दाम 80 रुपए किलो के पार: एमपी की फसल खत्म, नई आवक तक राहत के आसार नहीं

    इंदौर में टमाटर के दाम 80 रुपए किलो के पार: एमपी की फसल खत्म, नई आवक तक राहत के आसार नहीं


    मध्य प्रदेश। भीषण गर्मी का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। इंदौर में टमाटर की कीमतें खुदरा बाजार में 80 रुपए प्रति किलो के पार पहुंच चुकी हैं और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि मध्य प्रदेश की स्थानीय फसल लगभग खत्म हो चुकी है, जबकि राजस्थान से आने वाली आवक भी तेजी से घट रही है। ऐसे में फिलहाल बाजार पूरी तरह महाराष्ट्र से आने वाले टमाटर पर निर्भर हो गया है।

    शहर की प्रमुख देवी अहिल्याबाई फल एवं सब्जी मंडी, चोइथराम में टमाटर के भाव लगातार बढ़ रहे हैं। मंडी में महाराष्ट्र के उच्च गुणवत्ता वाले टमाटर 800 से 1000 रुपए प्रति कैरेट तक बिक रहे हैं। थोक बाजार में इनका भाव 50 से 60 रुपए प्रति किलो के बीच है, जबकि खुदरा बाजार में यही टमाटर 70 से 80 रुपए या उससे अधिक कीमत पर ग्राहकों को मिल रहा है।

    व्यापारियों के अनुसार टमाटर की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ क्षेत्र में फसल का लगभग समाप्त हो जाना है। भीषण गर्मी और नई फसल की बुवाई के कारण किसानों के पास बिक्री योग्य टमाटर नहीं बचा है। वर्तमान में प्रदेश में केवल कुछ इलाकों में सीमित मात्रा में उत्पादन हो रहा है।

    दूसरा बड़ा कारण राजस्थान से आने वाली सप्लाई में गिरावट है। कोटा और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला टमाटर भी अब कम हो रहा है। व्यापारियों का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में वहां से आने वाली आवक लगभग बंद हो सकती है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

    इसी बीच गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों से टमाटर की मांग बढ़ने के कारण भी कीमतों पर असर पड़ा है। मांग बढ़ने और आपूर्ति घटने के कारण बाजार में संतुलन बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। इसके अलावा मंडी नाका शुल्क में वृद्धि को भी कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण माना जा रहा है।

    फिलहाल इंदौर मंडी में महाराष्ट्र के नारायणगांव, सलगमनेर और कलवन क्षेत्रों से टमाटर की खेप पहुंच रही है। व्यापारियों का कहना है कि आगामी तीन महीनों तक स्थिति लगभग इसी प्रकार बनी रह सकती है। यदि मानसून के दौरान परिवहन और भंडारण में दिक्कतें बढ़ती हैं तो कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। कुछ व्यापारियों का अनुमान है कि खुदरा बाजार में टमाटर का भाव 100 रुपए प्रति किलो तक भी पहुंच सकता है।

    टमाटर के साथ अन्य हरी सब्जियों के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। शिमला मिर्च, गिलकी, हरी मिर्च और ग्वार फली जैसी सब्जियां भी महंगी हो गई हैं। जो सब्जियां कुछ समय पहले 20 से 30 रुपए प्रति किलो बिक रही थीं, वे अब 40 से 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई हैं।

    व्यापारियों के अनुसार मालवा, निमाड़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे उत्पादक क्षेत्रों में गर्मी के कारण फसल प्रभावित हुई है। इसके चलते मंडियों में बड़ी मात्रा में माल नहीं पहुंच रहा है और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई फसल बाजार में आने और उत्पादन सामान्य होने के बाद ही उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत मिल सकेगी।

  • उज्जैन में मंदिर की दान पेटी पर चोरों का हाथ साफ: तीन साल से जमा राशि चोरी, जीर्णोद्धार के लिए रखे गए थे पैसे

    उज्जैन में मंदिर की दान पेटी पर चोरों का हाथ साफ: तीन साल से जमा राशि चोरी, जीर्णोद्धार के लिए रखे गए थे पैसे


    मध्य प्रदेश। धार्मिक नगरी उज्जैन में एक बार फिर चोरी की घटना ने लोगों को चिंतित कर दिया है। इस बार चोरों ने आस्था के केंद्र को निशाना बनाते हुए एक मंदिर की दान पेटी से नकदी चोरी कर ली। घटना चिमनगंज मंडी थाना क्षेत्र स्थित राज रॉयल एनक्लेव कॉलोनी के हिमानेश्वर महादेव मंदिर की है, जहां अज्ञात बदमाश दान पेटी का ताला तोड़कर उसमें रखी राशि लेकर फरार हो गए।

    जानकारी के अनुसार गुरुवार देर रात बदमाश मंदिर परिसर में घुसे और दान पेटी को निशाना बनाया। शुक्रवार सुबह जब कॉलोनी के निवासी नियमित पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे तो उन्होंने दान पेटी का टूटा हुआ ताला और मंदिर परिसर में बिखरा सामान देखा। इसके बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।

    सूचना मिलते ही चिमनगंज मंडी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। साथ ही आसपास के लोगों से पूछताछ कर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    स्थानीय निवासी युवराज सिंह पवार ने बताया कि मंदिर की दान पेटी पिछले लगभग तीन वर्षों से नहीं खोली गई थी। उनका कहना है कि मंदिर के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य के लिए दान राशि एकत्रित की जा रही थी। चूंकि मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए दान पेटी को बंद रखा गया था। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि उसमें पर्याप्त मात्रा में नकदी जमा हो चुकी थी।

    हालांकि दान पेटी में कितनी राशि मौजूद थी, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। पुलिस और मंदिर प्रबंधन इस संबंध में जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं। जांच के दौरान दान पेटी की स्थिति और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चोरी की गई रकम का अनुमान लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    घटना के बाद कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र में लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। रहवासियों का कहना है कि मंदिर जैसे धार्मिक स्थल को निशाना बनाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि लोगों की आस्था को भी ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की है।

    पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और विभिन्न पहलुओं से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर आरोपियों तक पहुंचा जाएगा। फिलहाल मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

  • उज्जैन में नाली विवाद ने ली युवक की जान: खेत पर मारपीट के बाद मौत, परिजनों ने पड़ोसियों पर लगाया हत्या का आरोप

    उज्जैन में नाली विवाद ने ली युवक की जान: खेत पर मारपीट के बाद मौत, परिजनों ने पड़ोसियों पर लगाया हत्या का आरोप


    मध्य प्रदेश। उज्जैन जिले के इंगोरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत बलेडी गांव में नाली विवाद को लेकर दो पड़ोसी पक्षों के बीच चल रहा तनाव एक युवक की मौत के साथ गंभीर घटना में बदल गया। मारपीट में घायल हुए 26 वर्षीय राहुल पिता कालू सिंह चौहान की उपचार से पहले ही मौत हो गई। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है, जबकि पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    मृतक के परिजनों का आरोप है कि परिवार और पड़ोसी पक्ष के बीच लंबे समय से नाली को लेकर विवाद चला आ रहा था। इस विवाद को लेकर पहले भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और झगड़े की घटनाएं हुई थीं, जिनकी शिकायत थाने में दर्ज कराई गई थी। परिजनों का दावा है कि इसी पुरानी रंजिश के चलते राहुल को निशाना बनाया गया।

    मृतक के भाई शिवाय चौहान के अनुसार घटना देर रात करीब 12 से 1 बजे के बीच की है। उनका कहना है कि राहुल अपने खेत पर मौजूद था, तभी पड़ोसी पक्ष के कुछ लोग वहां पहुंचे और उसके साथ मारपीट की। परिजनों का आरोप है कि मारपीट के दौरान राहुल को गंभीर चोटें पहुंचाई गईं, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। परिवार ने भूरालाल, रोहित तथा अन्य लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है।

    घटना की जानकारी मिलते ही इंगोरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आवश्यक साक्ष्य एकत्रित किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है।

    इंगोरिया थाने के सब इंस्पेक्टर राजन तोमर ने बताया कि दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की घटना सामने आई है। इस घटना में राहुल चौहान गंभीर रूप से घायल हुआ था, जिसकी बाद में मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों और चोटों की प्रकृति के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

    पुलिस के अनुसार मामले में कुछ संदिग्धों की पहचान की गई है और दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी कर रही है। वहीं परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।

    गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे विवाद कई बार गंभीर रूप ले लेते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसके आधार पर घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो पाती हैं। इस मामले में भी पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही मौत और आरोपों से जुड़े तथ्यों की अंतिम स्थिति सामने आएगी।

  • मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर उज्जैन में युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, चुनाव आयोग का पुतला जलाने पर पुलिस से हुई नोकझोंक

    मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर उज्जैन में युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, चुनाव आयोग का पुतला जलाने पर पुलिस से हुई नोकझोंक


    मध्य प्रदेश। उज्जैन में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के विरोध में गुरुवार शाम युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर के टावर चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की गई और प्रतीकात्मक रूप से पुतला दहन कर विरोध जताया गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बन गई।

    जानकारी के अनुसार युवा कांग्रेस के शहर अध्यक्ष अर्पित यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शाम करीब सात बजे टावर चौक पर एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए तथा नामांकन निरस्तीकरण के फैसले पर नाराजगी व्यक्त की। विरोध प्रदर्शन के तहत कार्यकर्ताओं ने टावर चौक क्षेत्र में रैली निकालते हुए दो चक्कर लगाए और इसके बाद पुतला दहन की तैयारी की।

    मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही प्रदर्शनकारी पुतले को दहन के लिए आगे बढ़ाने लगे, पुलिस ने उसे रोकने और अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिसकर्मियों और कार्यकर्ताओं के बीच पुतला छीनने को लेकर छीना-झपटी की स्थिति बन गई।

    बताया गया कि पुलिस पुतले का एक हिस्सा अपने कब्जे में लेने में सफल रही, लेकिन उससे पहले पुतला आंशिक रूप से जल चुका था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के एक अधिकारी की तस्वीर लगे कागज को प्रतीकात्मक रूप से जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। घटना के दौरान कुछ समय के लिए टावर चौक पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति भी बनी रही, हालांकि पुलिस ने हालात को नियंत्रित कर लिया।

    युवा कांग्रेस अध्यक्ष अर्पित यादव ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन को निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि पार्टी लोकतंत्र और संवैधानिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।

    हालांकि नामांकन निरस्तीकरण को लेकर अंतिम निर्णय और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की प्रक्रिया अलग से जारी है। मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    प्रदर्शन में शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी। फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया, लेकिन इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।

  • इंदौर में ड्राइवर ने फांसी लगाकर दी जान, वीडियो बनाकर प्रेमिका समेत 5 लोगों को ठहराया जिम्मेदार

    इंदौर में ड्राइवर ने फांसी लगाकर दी जान, वीडियो बनाकर प्रेमिका समेत 5 लोगों को ठहराया जिम्मेदार


    मध्य प्रदेश। इंदौर के नंदा नगर क्षेत्र में एक युवक द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। मृतक ने यह कदम उठाने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसे उसने अपने भाई को भी भेजा। वीडियो में युवक ने अपनी प्रेमिका, उसकी बहन, भाई और अन्य लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने वीडियो को जब्त कर लिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

    परदेशीपुरा थाना पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 25 वर्षीय लविश लश्करी के रूप में हुई है। लविश मूल रूप से उज्जैन का निवासी था और इंदौर में किराये के मकान में रहकर ड्राइवर का काम करता था। गुरुवार को उसके द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

    परिजनों के अनुसार लविश का खंडवा निवासी एक युवती के साथ करीब दो वर्षों से प्रेम संबंध था। युवक द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में दावा किया गया है कि वह लगभग डेढ़ वर्ष तक युवती के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहा था। वीडियो में उसने कहा कि कुछ समय पहले युवती के परिजनों को इस संबंध की जानकारी हो गई थी, जिसके बाद वे युवती को अपने साथ ले गए और उसका मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में रख लिया।

    मृतक ने वीडियो में यह भी कहा कि वह लंबे समय से युवती से संपर्क नहीं कर पा रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान था। वीडियो में उसने अपनी मौत के लिए कुछ लोगों को जिम्मेदार बताते हुए कई आरोप लगाए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि वीडियो में किए गए दावों और आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है तथा सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

    पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आत्महत्या के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

    इसी बीच शहर में आत्महत्या के दो अन्य मामले भी सामने आए हैं। द्वारकापुरी क्षेत्र के अहीरखेड़ी निवासी 28 वर्षीय करण बलाई ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों के अनुसार उसकी कुछ समय पहले शादी हुई थी, लेकिन पत्नी के अलग होकर चले जाने के कारण वह मानसिक रूप से परेशान रहता था। गुरुवार शाम उसके पिता ने उसे कमरे में फंदे पर लटका हुआ पाया।

    वहीं आजाद नगर क्षेत्र में हम्माली का काम करने वाले 40 वर्षीय कन्हैया जायसवाल ने भी आत्मघाती कदम उठा लिया। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद होने की जानकारी सामने आई है। कन्हैया के चार बच्चे हैं। घटना की जानकारी उस समय लगी जब देर रात उसकी पत्नी ने उसे फंदे पर लटका देखा।

    पुलिस तीनों मामलों में अलग-अलग जांच कर रही है और संबंधित परिस्थितियों तथा परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • उज्जैन में मटन दुकानों को लेकर फिर गरमाई राजनीति: हिंदू संगठनों ने महापौर को दी चुनौती, बोले- हटीं दुकानें तो दूध से कराएंगे स्नान

    उज्जैन में मटन दुकानों को लेकर फिर गरमाई राजनीति: हिंदू संगठनों ने महापौर को दी चुनौती, बोले- हटीं दुकानें तो दूध से कराएंगे स्नान


    मध्य प्रदेश। उज्जैन में मांस-मटन और मछली की दुकानों को नगर निगम सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। धार्मिक नगरी के स्वरूप और महाकाल मंदिर क्षेत्र की गरिमा का हवाला देते हुए लंबे समय से इस मांग को उठाया जा रहा है। हाल ही में इस विषय ने तब नया मोड़ ले लिया जब नगर निगम की एमआईसी बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जबकि पहले इसके लिए घोषणा की जा चुकी थी।

    दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद उज्जैन नगर निगम सीमा से शराब की दुकानों को बाहर किए जाने की कार्रवाई पहले ही हो चुकी है। इसके बाद विभिन्न सामाजिक और हिंदू संगठनों की ओर से शहर में संचालित मांस-मटन और मछली की दुकानों को भी नगर सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की मांग लगातार उठाई जा रही है। इसी क्रम में उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने कुछ समय पहले घोषणा की थी कि इस विषय पर एमआईसी बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा।

    शहर में यह माना जा रहा था कि प्रस्ताव पारित होने के बाद दुकानों को नगर निगम सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि हाल ही में आयोजित एमआईसी बैठक में यह प्रस्ताव प्रस्तुत ही नहीं किया गया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। महापौर मुकेश टटवाल ने बताया कि प्रस्ताव नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा को भेजा गया था, लेकिन बैठक के एजेंडे में इसे शामिल नहीं किया गया। इसके कारण इस विषय पर कोई निर्णय नहीं हो सका।

    एमआईसी बैठक में प्रस्ताव नहीं आने के बाद हिंदू जागरण मंच समेत कई हिंदूवादी संगठनों ने नाराजगी व्यक्त की है। संगठन के पदाधिकारियों अर्जुन भदौरिया और रितेश माहेश्वरी ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी शहर में मटन दुकानों को हटाने के दावे किए गए थे, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि दो वर्ष पहले भी नगर निगम परिषद में इस मुद्दे को लेकर विरोध दर्ज कराया गया था और महाकाल मंदिर मार्ग से मांस की दुकानों को हटाने की बात कही गई थी, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।

    अर्जुन भदौरिया ने दावा किया कि उन्हें इस बार भी दुकानों के स्थानांतरण को लेकर भरोसा नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि महापौर अपने दावे के अनुरूप शहर से मांस-मटन की दुकानों को हटाने में सफल होते हैं तो हिंदूवादी संगठन उनका दूध से स्नान कर सम्मान करेंगे। यह बयान अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

    जानकारी के अनुसार महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग और उससे जुड़े कई प्रमुख क्षेत्रों में वर्तमान में मांस-मटन की दुकानें संचालित हो रही हैं। इनमें हरिफाटक, बेगमबाग, मालीपुरा, तोपखाना, सब्जी मंडी, छत्री चौक, पटनी बाजार, महाकाल मार्ग, तेलीवाड़ा और खारकुआं जैसे इलाके शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि पूरे शहर में 150 से अधिक मांस, मटन और मछली की दुकानें संचालित हो रही हैं।

    फिलहाल इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है, लेकिन प्रस्ताव को लेकर शुरू हुआ विवाद यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में उज्जैन की स्थानीय राजनीति में यह मुद्दा और अधिक प्रमुखता से उभर सकता है।

  • भोपाल-ग्वालियर के बीच बनेगा नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: 80 किमी तक घटेगी दूरी, साढ़े 5 घंटे में पूरा होगा सफर

    भोपाल-ग्वालियर के बीच बनेगा नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: 80 किमी तक घटेगी दूरी, साढ़े 5 घंटे में पूरा होगा सफर


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सड़क संपर्क को और अधिक तेज, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना आकार लेने जा रही है। राज्य सरकार और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) भोपाल और ग्वालियर के बीच नया 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी कर रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने हेतु इसी महीने टेंडर जारी किए जाने की योजना है।

    प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनने के बाद भोपाल और ग्वालियर के बीच की दूरी में लगभग 70 से 80 किलोमीटर तक की कमी आएगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग से दूरी लगभग 425 किलोमीटर है, जो नए मार्ग के निर्माण के बाद घटकर करीब 340 से 350 किलोमीटर रह जाएगी। दूरी कम होने का सीधा लाभ यात्रा समय पर भी पड़ेगा। अभी जहां भोपाल से ग्वालियर पहुंचने में 7 से 8 घंटे तक का समय लगता है, वहीं नए कॉरिडोर के चालू होने के बाद यह सफर लगभग साढ़े पांच घंटे में पूरा किया जा सकेगा।

    जानकारी के अनुसार, इस परियोजना को बीओटी (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। एमपीआरडीसी की योजना अगले तीन वर्षों के भीतर इस परियोजना को पूरा करने की है। सड़क विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर प्रदेश के उत्तर और मध्य हिस्सों के बीच यातायात को अधिक सुगम बनाएगा तथा औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन गतिविधियों को भी गति देगा।

    सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र में विकसित आधुनिक सड़क परियोजनाओं के अध्ययन के बाद मध्य प्रदेश में ग्रीनफील्ड सड़क नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने पर सहमति बनी है। इसी रणनीति के तहत भोपाल-ग्वालियर कॉरिडोर को प्राथमिकता दी गई है। इससे पहले भोपाल-इंदौर, भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना, सागर-जबलपुर और जबलपुर-आशापुर जैसे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट भी विभिन्न चरणों में आगे बढ़ रहे हैं।

    एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक भरत यादव के अनुसार, प्रदेश में ऐसे मार्गों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां यातायात का दबाव अधिक है और यात्रा समय कम करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर न केवल तेज आवागमन सुनिश्चित करेंगे बल्कि ईंधन की बचत, परिवहन लागत में कमी और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार में भी मददगार साबित होंगे।

    प्रदेश में प्रस्तावित अन्य प्रमुख ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में भोपाल-मंदसौर कॉरिडोर शामिल है, जिसकी लंबाई 256 किलोमीटर और अनुमानित लागत 11,550 करोड़ रुपए है। इसी तरह सागर-सतना कॉरिडोर लगभग 218 किलोमीटर लंबा होगा और इसके निर्माण से यात्रा समय लगभग आधा रह जाएगा। वहीं जबलपुर-आशापुर कॉरिडोर भी प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है।

    बीओटी मॉडल के तहत विकसित होने वाली इन परियोजनाओं में कुल लागत का एक हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार वहन करती हैं, जबकि शेष निवेश निर्माण एजेंसी द्वारा किया जाता है। इसके बदले एजेंसी को निर्धारित अवधि तक टोल वसूली का अधिकार दिया जाता है। एमपीआरडीसी भविष्य में भी अधिक यातायात वाले मार्गों पर इसी मॉडल के तहत सड़क परियोजनाएं विकसित करने की योजना बना रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भोपाल-ग्वालियर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रदेश के सड़क नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा और इससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।