Category: Madhya Pradesh

  • नवरात्र में ट्रेन से दर्शन करने जा रहे हैं तो ध्यान दें, विंध्याचल में 12 ट्रेनों का दो मिनट का स्टॉपेज, मैहर में 30 की स्पीड लिमिट

    नवरात्र में ट्रेन से दर्शन करने जा रहे हैं तो ध्यान दें, विंध्याचल में 12 ट्रेनों का दो मिनट का स्टॉपेज, मैहर में 30 की स्पीड लिमिट


    भोपाल । शारदीय नवरात्र मेले के दौरान मां विंध्यवासिनी के दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए विंध्याचल स्टेशन पर 12 एक्सप्रेस ट्रेनों को अस्थायी ठहराव देने का निर्णय लिया गया है। यह सुविधा 26 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी। निर्धारित ट्रेनों को स्टेशन पर दो-दो मिनट का ठहराव दिया जाएगा। इससे मेले के दौरान विंध्याचल पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा मिल सकती है। रेलवे ने मैहर स्टेशन से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम गति भी 30 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की है।
    पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल के अनुसार नवरात्र मेले में यात्रियों की अतिरिक्त आवाजाही को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। विंध्याचल स्टेशन पर ठहराव पाने वाली ट्रेनों में मुंबई से पाटलिपुत्र डिब्रूगढ़ गुवाहाटी भागलपुर दानापुर और बनारस सहित विभिन्न शहरों के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों में यात्रा करने वाले श्रद्धालु निर्धारित समय पर विंध्याचल स्टेशन पर उतरकर आगे की यात्रा की योजना बना सकेंगे। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का समय जरूर जांच लें।
    रेलवे की सूची के अनुसार लोकमान्य तिलक टर्मिनस से पाटलिपुत्र जाने वाली ट्रेन संख्या 12141 रात 10:30 बजे से 10:32 बजे तक विंध्याचल स्टेशन पर रुकेगी। पाटलिपुत्र से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12142 शाम 4:05 बजे से 4:07 बजे तक ठहरेगी। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से डिब्रूगढ़ जाने वाली ट्रेन संख्या 15945 और गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन संख्या 15647 सुबह 5:50 बजे से 5:52 बजे तक स्टेशन पर रुकेंगी। वहीं डिब्रूगढ़ से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 15946 और गुवाहाटी से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 15648 शाम 7:05 बजे से 7:07 बजे तक ठहरेंगी।
    भागलपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12335 भी शाम 7:05 बजे से 7:07 बजे तक रुकेगी। इसके विपरीत दिशा में चलने वाली ट्रेन संख्या 12336 सुबह 5:50 बजे से 5:52 बजे तक विंध्याचल स्टेशन पर ठहराव लेगी। सर एम विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु से दानापुर जाने वाली ट्रेन संख्या 12295 रात 1:40 बजे से 1:42 बजे तक और दानापुर से बेंगलुरु जाने वाली ट्रेन संख्या 12296 रात 12:35 बजे से 12:37 बजे तक स्टेशन पर रुकेगी। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से बनारस जाने वाली ट्रेन संख्या 12167 रात 10:15 बजे से 10:17 बजे तक जबकि बनारस से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12168 दोपहर 12:10 बजे से 12:12 बजे तक ठहराव लेगी।
    दूसरी ओर मैहर स्टेशन से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। रेलवे ने नवरात्र मेले के दौरान सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। गति सीमा लागू होने से ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ सकता है इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय का ध्यान रखना चाहिए।
    नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए रेल यात्रा करते हैं। ऐसे में अस्थायी ठहराव और गति सीमा जैसी व्यवस्थाएं यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। यात्रा पर निकलने से पहले रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से ट्रेन का समय ठहराव और संभावित बदलाव की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। इससे अंतिम समय में होने वाली परेशानी से बचा जा सकेगा।

  • शिवराज के बेटे कार्तिकेय को मिली बड़ी जिम्मेदारी, एमपी वॉलीबॉल संघ की कमान संभाली, गांव-गांव तक खेल पहुंचाने का लक्ष्य

    शिवराज के बेटे कार्तिकेय को मिली बड़ी जिम्मेदारी, एमपी वॉलीबॉल संघ की कमान संभाली, गांव-गांव तक खेल पहुंचाने का लक्ष्य


    भोपाल । मध्य प्रदेश में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने खेल प्रशासन के क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्हें मध्य प्रदेश वॉलीबॉल संघ का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है। रविवार को भोपाल में आयोजित चुनाव में प्रदेश के 33 जिला वॉलीबॉल संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्तिकेय को वर्ष 2026 से 2030 तक के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष चुना गया है। इस जिम्मेदारी के साथ अब प्रदेश में वॉलीबॉल के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उनसे कई उम्मीदें जुड़ गई हैं।
    अध्यक्ष चुने जाने के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान ने प्रदेश में वॉलीबॉल को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश वॉलीबॉल खेल नीति 2026 का प्रारूप जल्द तैयार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में इस खेल के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य नई प्रतिभाओं को सामने लाना और खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही खेल से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने और जिला संघों को आर्थिक सहायता देने की दिशा में भी काम करने की बात कही गई है।
    कार्तिकेय ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने के लिए संघ के पदाधिकारियों जिला संघों के प्रतिनिधियों और सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी ने जिस भरोसे के साथ उन्हें यह जिम्मेदारी दी है उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उनका लक्ष्य वॉलीबॉल को प्रदेश के गांवों और युवाओं तक पहुंचाना है ताकि अधिक से अधिक खिलाड़ी इस खेल से जुड़ सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    चुनाव प्रक्रिया एडवोकेट दिलीप मालवीय की देखरेख में संपन्न हुई। नई कार्यकारिणी में अनवर खान को वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना गया है। विधायक आशीष शर्मा और राम पांडे को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। सतीश जोशी महासचिव और विशाल शर्मा कोषाध्यक्ष चुने गए हैं। वहीं डीआर सिंह और राजेश शुक्ला संयुक्त सचिव बनाए गए हैं। कार्यकारिणी में आशीष सिंह भूपेन्द्र कांत राजेन्द्र चतुर्वेदी मेरिट खिलाड़ी श्वेता शर्मा और रीवा के कृष्णानंद को भी शामिल किया गया है।
    बैठक में विभिन्न आयु वर्गों की राज्य स्तरीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप आयोजित कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इससे प्रदेश के अलग-अलग जिलों के खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने और अपनी प्रतिभा साबित करने का मंच मिल सकेगा। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं नए खिलाड़ियों को अनुभव देने और बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की पहचान करने में उपयोगी साबित हो सकती हैं।
    नई कार्यकारिणी के सामने अब प्रदेश में वॉलीबॉल के विस्तार और जिला संघों को मजबूत करने की चुनौती होगी। खेल नीति का प्रारूप तैयार करना सुविधाओं में सुधार करना और खिलाड़ियों को प्रशिक्षण तथा प्रतियोगिताओं के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। कार्तिकेय सिंह चौहान ने गांव-गांव तक वॉलीबॉल पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। अब इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए संघ की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।

  • एमपी में शराब तस्करी के आरोपियों का वाहन चोरी से कनेक्शन, पूछताछ में 16 बाइक और एक छोटा हाथी चुराने की बात आई सामने

    एमपी में शराब तस्करी के आरोपियों का वाहन चोरी से कनेक्शन, पूछताछ में 16 बाइक और एक छोटा हाथी चुराने की बात आई सामने


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में अवैध कच्ची शराब की तस्करी के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों से वाहन चोरी की 17 वारदातों का खुलासा हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 5 लाख रुपये कीमत की छह चोरी की बाइक बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान 16 बाइक और एक महिंद्रा लोडिंग वाहन चोरी करने की बात स्वीकार की है। मामले में आलोट और जावरा ग्रामीण अनुभाग की संयुक्त पुलिस टीम ने कार्रवाई की। रविवार रात ताल थाने में पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी दी।
    पुलिस के मुताबिक 11 अक्टूबर को अवैध कच्ची शराब की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हरपाल कंजर और अर्जुन कंजर को गिरफ्तार किया गया था। दोनों के पास से 10 लीटर अवैध कच्ची शराब और एक हीरो एचएफ डीलक्स बाइक जब्त की गई। इस मामले में ताल थाने में प्रकरण दर्ज किया गया। कार्रवाई के दौरान बरामद बाइक के बारे में पूछताछ की गई तो आरोपियों ने उसे ग्राम भाटखेड़ा से चोरी करना स्वीकार किया। इस चोरी के संबंध में कालूखेड़ा थाने में पहले से मामला दर्ज था।
    इसके बाद पुलिस ने आरोपियों से विस्तार से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार हरपाल और अर्जुन ने अपने साथी लखन कंजर के साथ मिलकर अलग-अलग स्थानों से बाइक और एक महिंद्रा लोडिंग वाहन चोरी करने की बात बताई। इसके आधार पर पुलिस ने तीसरे आरोपी लखन कंजर को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने वाहन चोरी से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाई और छह बाइक बरामद कीं।
    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरपाल कंजर उम्र 20 वर्ष पिता धारिया कंजर अर्जुन कंजर उम्र 19 वर्ष पिता लखन कंजर और लखन कंजर उम्र 22 वर्ष पिता हरीलाल कंजर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार तीनों राजस्थान के झालावाड़ जिले में उन्हेल नागेश्वर थाना क्षेत्र के टोकड़ा गांव के निवासी हैं। फिलहाल वाहन चोरी की वारदातों में उनकी कथित भूमिका और बरामद वाहनों से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है।
    पुलिस ने जिन छह बाइक को जब्त किया है उनमें दो हीरो एचएफ डीलक्स बाइक एक हीरो स्प्लेंडर एक होंडा शाइन और दो स्प्लेंडर प्लस शामिल हैं। इनमें से एक एचएफ डीलक्स बाइक का संबंध कालूखेड़ा थाने में दर्ज चोरी के मामले से बताया गया है। कुछ बाइक बिना नंबर प्लेट के मिलीं जबकि दो स्प्लेंडर प्लस के इंजन और चेसिस नंबर घिसे हुए पाए गए। पुलिस इन वाहनों की पहचान और उनके वास्तविक मालिकों से संबंधित जानकारी की जांच कर रही है।
    पूछताछ में आरोपियों ने ताल थाना क्षेत्र से होंडा शाइन और आलोट क्षेत्र से एचएफ डीलक्स बाइक चोरी करने की बात कही है। इसके अलावा नामली थाना क्षेत्र से होंडा शाइन महिंद्रा लोडिंग वाहन और बजाज प्लेटिना चोरी करने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार जावरा औद्योगिक क्षेत्र से सुपर स्प्लेंडर स्प्लेंडर प्लस और दो होंडा शाइन चोरी करने की बात भी आरोपियों ने स्वीकार की है। सैलाना थाना क्षेत्र से दो सुपर स्प्लेंडर चोरी करने का मामला भी पूछताछ में सामने आया है।
    पुलिस की इस कार्रवाई से जिले और आसपास के क्षेत्रों में हुई वाहन चोरी की कई घटनाओं की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। बरामद वाहनों और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अन्य मामलों के संबंध में भी पड़ताल कर रही है।

  • जूनियर डॉक्टरों के लिए बड़ी खबर, तीनों पीजी वर्ष के स्टाइपेंड में इजाफा, जानिए अब किसे हर महीने कितनी रकम मिलेगी

    जूनियर डॉक्टरों के लिए बड़ी खबर, तीनों पीजी वर्ष के स्टाइपेंड में इजाफा, जानिए अब किसे हर महीने कितनी रकम मिलेगी


    भोपाल । मध्य प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले जूनियर डॉक्टरों के लिए राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने पीजी और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के मासिक स्टाइपेंड में 4.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। वित्त विभाग की सहमति मिलने के बाद बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इस फैसले से पीजी प्रथम वर्ष से लेकर तृतीय वर्ष तक के डॉक्टरों के साथ सुपर स्पेशियलिटी के विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा।
    सरकार के आदेश के अनुसार पीजी प्रथम वर्ष के डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 77 हजार 662 रुपये से बढ़ाकर 81 हजार 126 रुपये कर दिया गया है। यानी अब उन्हें हर महीने पहले की तुलना में 3 हजार 464 रुपये अधिक मिलेंगे। इसी तरह पीजी द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को अब 80 हजार 50 रुपये के बजाय 83 हजार 620 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। इस श्रेणी में मासिक स्टाइपेंड में 3 हजार 570 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
    पीजी तृतीय वर्ष के डॉक्टरों के स्टाइपेंड में भी इजाफा किया गया है। पहले उन्हें हर महीने 82 हजार 441 रुपये मिलते थे जबकि अब यह राशि बढ़ाकर 86 हजार 118 रुपये कर दी गई है। इस तरह तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को हर महीने 3 हजार 677 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। वहीं सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रम के प्रथम द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों का मासिक स्टाइपेंड भी बढ़ाकर 86 हजार 118 रुपये कर दिया गया है।
    विभाग के मुताबिक यह बढ़ोतरी महंगाई भत्ते के आधार पर की गई है। सरकार के इस निर्णय से मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टरों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। पीजी और सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य करने होते हैं। ऐसे में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी उनके मासिक खर्चों को संभालने में मदद कर सकती है।
    इस बीच प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड का मुद्दा भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी कर इसे 21 हजार 500 रुपये प्रतिमाह किए जाने की खबर सामने आई है। दूसरी ओर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन भी जारी रहने की जानकारी दी गई है। भोपाल में कमला पार्क के पास प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
    जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का आदेश ऐसे समय आया है जब चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों की आर्थिक मांगें चर्चा में हैं। अब बढ़ी हुई राशि के भुगतान और आदेश के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

  • मुफ्त बस से स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए बदल सकते हैं नियम, कलेक्टर तय कर सकेंगे किराया, आज कैबिनेट में हो सकता है फैसला

    मुफ्त बस से स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए बदल सकते हैं नियम, कलेक्टर तय कर सकेंगे किराया, आज कैबिनेट में हो सकता है फैसला


    भोपाल। मध्य प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए परिवहन सुविधा से जुड़ा बड़ा बदलाव हो सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों में संचालित बस सेवा के लिए किराया निर्धारित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव पर 12 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में चर्चा के बाद मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि सरकार प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो अब तक मुफ्त बस सेवा का लाभ ले रहे बच्चों के अभिभावकों को आने वाले समय में किराया देना पड़ सकता है। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।
    विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक जिले में संचालित सांदीपनि विद्यालयों की बसों का किराया निर्धारित करने की जिम्मेदारी कलेक्टरों को दी जा सकती है। कलेक्टर अपने जिले की परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किराया तय कर सकेंगे। इसके बाद अभिभावकों से निर्धारित शुल्क वसूलने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किराया कितना होगा और इसे सभी विद्यार्थियों पर लागू किया जाएगा या कुछ विशेष श्रेणियों के बच्चों को इससे छूट मिलेगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत का कोई प्रावधान होगा या नहीं इस पर भी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
    प्रदेश में वर्तमान में 370 सांदीपनि विद्यालयों में बच्चों को बसों के जरिए घर से स्कूल लाने और स्कूल से घर पहुंचाने की व्यवस्था संचालित है। इस सुविधा का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में मदद देना और उनकी पढ़ाई को सुगम बनाना है। अब सरकार इस व्यवस्था पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नई व्यवस्था किस तरह लागू होगी और अभिभावकों को कितना भुगतान करना पड़ेगा।
    इस प्रस्ताव के बीच बसों की उपलब्धता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के 19 जिलों में सांदीपनि विद्यालयों के करीब डेढ़ लाख बच्चों को बस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई विद्यालयों में बसें उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थी इस सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में सरकार के सामने केवल किराया तय करने का ही नहीं बल्कि सभी पात्र बच्चों तक परिवहन सुविधा पहुंचाने का सवाल भी है। अभिभावकों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि जिन स्कूलों में अभी बसें उपलब्ध नहीं हैं वहां पहले परिवहन व्यवस्था शुरू की जाएगी या नई शुल्क व्यवस्था लागू करने पर प्राथमिकता दी जाएगी।
    यदि प्रस्ताव मंजूर होता है तो इसके क्रियान्वयन से जुड़े नियम और शर्तें भी अहम होंगी। अभिभावकों को राहत देने के लिए जरूरतमंद परिवारों को छूट मिलेगी या नहीं और बस सेवा की गुणवत्ता तथा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे इस पर फैसले के बाद स्थिति साफ हो सकती है। फिलहाल सभी की नजर कैबिनेट के निर्णय पर है।
    इसके अलावा बैठक में मैहर पांढुर्णा निवाड़ी और मऊगंज जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यालय खोलने तथा जिला स्तर पर पद सृजित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही 17 सितंबर से शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान की प्रगति और अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा भी मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ कर सकते हैं। कैबिनेट के फैसलों से प्रदेश में शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।

  • रतलाम ने नम आंखों से दी तेजकुंवरबाई काश्यप को अंतिम विदाई, अहिंसा ग्राम में बसाए 100 परिवार, महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

    रतलाम ने नम आंखों से दी तेजकुंवरबाई काश्यप को अंतिम विदाई, अहिंसा ग्राम में बसाए 100 परिवार, महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम में सोमवार को तेजकुंवरबाई काश्यप का अंतिम संस्कार किया गया। मध्य प्रदेश सरकार के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री और रतलाम शहर के विधायक चेतन्य काश्यप ने अपनी मां को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। स्टेशन रोड स्थित वीसाजी मेंशन से सुबह करीब 10:30 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई यात्रा त्रिवेणी मुक्तिधाम पहुंची जहां धार्मिक रीति रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके निधन से काश्यप परिवार के साथ ही उनसे जुड़े लोगों में शोक का माहौल है।
    अंतिम यात्रा से पहले तेजकुंवरबाई काश्यप का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में शहरवासी और शुभचिंतक उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री निर्मला भूरिया और पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी सहित भाजपा के कई नेता और पदाधिकारी भी अंतिम दर्शन के लिए उपस्थित रहे। व्यापारियों के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। त्रिवेणी मुक्तिधाम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उनके जीवन और सामाजिक योगदान को याद किया गया।
    तेजकुंवरबाई काश्यप का रविवार को 83 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया था। वह पिछले कई दिनों से बीमार थीं। उनके निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी शोक व्यक्त किया। परिवार और परिचितों के लिए उनका जाना एक बड़ी क्षति है। उनके जीवन की कहानी संघर्ष और जिम्मेदारी निभाने के साथ धर्म और समाजसेवा के प्रति समर्पण से जुड़ी रही।
    तेजकुंवरबाई का जन्म 17 मार्च 1943 को मध्य प्रदेश के कुक्षी में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय चंपालाल खूंटवाला ने पालिताना तीर्थ में त्रिस्तुतिक जैन समाज की पहली धर्मशाला चंपा निवास का निर्माण करवाया था। वर्ष 1958 में उनका विवाह रतलाम के अशोक कुमार काश्यप से हुआ। लेकिन वर्ष 1964 में पति के आकस्मिक निधन के बाद उनके जीवन की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गईं। उस समय उनकी उम्र महज 21 वर्ष थी। कम उम्र में पति को खोने के बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और पारिवारिक दायित्वों के साथ धार्मिक गतिविधियों तथा तपस्या और साधना के प्रति अपना समर्पण बनाए रखा।
    उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष जरूरतमंद परिवारों और महिलाओं के लिए किए गए प्रयास भी रहे। वर्ष 2005 में चेतन्य काश्यप फाउंडेशन ने रतलाम में अहिंसा ग्राम की स्थापना की थी। यहां करीब 100 जरूरतमंद परिवारों को बसाने और उनके संस्कार निर्माण से जुड़े प्रयासों में तेजकुंवरबाई ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनका योगदान केवल परिवारों को बसाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में भी काम किया।
    महिलाओं को सिलाई बुनाई कढ़ाई और दूसरे उपयोगी कौशलों का प्रशिक्षण दिलाने के प्रयासों के जरिए उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने में उन्होंने सहयोग किया। स्वसहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल भी उनके सामाजिक योगदान का हिस्सा रही। उनके कार्यों का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सहारा देना और महिलाओं को अपनी आजीविका के लिए सक्षम बनाना था।
    सोमवार को अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ और लोगों की श्रद्धांजलि उनके प्रति सम्मान को दर्शाती रही। तेजकुंवरबाई काश्यप अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां संभालने से लेकर जरूरतमंदों के लिए काम करने तक का उनका जीवन परिचितों और समाज से जुड़े लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा।

  • महाकाल लोक के बाद अब गढ़कालिका लोक की तैयारी, 18.50 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार, नवरात्रि के बाद शुरू हो सकता है निर्माण

    महाकाल लोक के बाद अब गढ़कालिका लोक की तैयारी, 18.50 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार, नवरात्रि के बाद शुरू हो सकता है निर्माण


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में मां गढ़कालिका के भक्तों को जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त भव्य मंदिर परिसर की सौगात मिल सकती है। महाकाल लोक की तर्ज पर अब गढ़कालिका माता मंदिर को गढ़कालिका लोक के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 18.50 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। करीब डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाले इस लोक के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। तकनीकी बिड खुलने और निर्माण एजेंसी का चयन होने के बाद परियोजना का काम शुरू होने की उम्मीद है। योजना का उद्देश्य मंदिर परिसर को व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान बेहतर अनुभव मिल सके।
    गढ़कालिका माता मंदिर उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। वर्तमान में मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार मुख्य सड़क पर स्थित है और यह अपेक्षाकृत संकरा है। भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं के आवागमन में परेशानी होने की आशंका रहती है। गढ़कालिका लोक परियोजना के तहत प्रवेश व्यवस्था को नए सिरे से विकसित करने की योजना बनाई गई है। इससे मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हो सकेगी और भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
    परियोजना की खास बात यह है कि आम श्रद्धालुओं और वीआईपी आगंतुकों के लिए प्रवेश की अलग-अलग व्यवस्था प्रस्तावित है। मौजूदा मुख्य द्वार को वीआईपी प्रवेश के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। इसके सामने वीआईपी पार्किंग भी विकसित की जाएगी। वहीं आम श्रद्धालुओं के लिए पश्चिम दिशा में ओखलेश्वर रोड की तरफ से करीब नौ मीटर दूर नया प्रवेश मार्ग प्रस्तावित है। यहां जिगजैग कतार व्यवस्था बनाई जाएगी ताकि दर्शन के लिए आने वाले लोगों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। इस व्यवस्था से एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर भी प्रवेश द्वार के आसपास भीड़ का दबाव कम करने में सहायता मिल सकती है।
    गढ़कालिका लोक के विकास के साथ आसपास की सड़कों को बेहतर बनाने की योजना भी महत्वपूर्ण है। मंदिर के सामने वाली सड़क और ओखलेश्वर श्मशान से होते हुए कालभैरव की दिशा में जाने वाली सड़क का चौड़ीकरण कर उन्हें फोरलेन बनाने का काम किया जा रहा है। सड़कें चौड़ी होने से मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से त्योहारों और विशेष धार्मिक अवसरों पर बढ़ने वाले यातायात के दबाव को संभालना भी आसान हो सकता है। हालांकि परियोजना की वास्तविक समयसीमा और सुविधाओं का अंतिम स्वरूप निर्माण एजेंसी के चयन तथा आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
    गढ़कालिका मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इसी मंदिर में मां कालिका की आराधना कर दिव्य ज्ञान प्राप्त किया था। उज्जैन में आयोजित होने वाले कालिदास समारोह की शुरुआत भी परंपरागत रूप से इस मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होती है। मंदिर का जीर्णोद्धार छठी शताब्दी में राजा हर्षवर्धन द्वारा कराए जाने की मान्यता है जबकि इसका वर्तमान स्वरूप ग्वालियर के महाराजा से जुड़ा बताया जाता है। साधना और तांत्रिक परंपराओं में भी इस स्थान का विशेष महत्व माना जाता है।
    महाकाल लोक के विकास के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। गढ़कालिका लोक परियोजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि योजना के अनुसार निर्माण पूरा होता है तो मंदिर परिसर में प्रवेश व्यवस्था पार्किंग और श्रद्धालुओं की कतारों का प्रबंधन पहले से बेहतर हो सकेगा। इससे न केवल भक्तों को सुविधा मिलने की उम्मीद है बल्कि उज्जैन के धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजर टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण कार्य शुरू होने पर है।

  • मोहन यादव ने नरसिंहपुर से कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपना इतिहास देखे पार्टी

    मोहन यादव ने नरसिंहपुर से कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपना इतिहास देखे पार्टी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा है। नरसिंहपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था। मुख्यमंत्री ने इस पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को अपने इतिहास पर नजर डालने की नसीहत दी। उनके बयान के बाद SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।
    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव में सफलता हासिल करती है तो उसे चुनावी प्रक्रिया में कोई खामी नजर नहीं आती लेकिन जब परिणाम उसके पक्ष में नहीं आते तो वह चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने केरल और हिमाचल प्रदेश का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अलग-अलग परिस्थितियों में अलग रुख अपनाती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने से पहले राजनीतिक दलों को अपने पुराने फैसलों और व्यवहार पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के खिलाफ लगाए जाने वाले गंभीर आरोपों के लिए ठोस तथ्यों और प्रमाणों की जरूरत पर भी जोर दिया।
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने टीएन शेषन और लालकृष्ण आडवाणी के बीच हुए चुनाव का जिक्र किया। दरअसल पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर गुजरात की गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से हुआ था। मुख्यमंत्री ने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाली पार्टी को अपने पुराने राजनीतिक निर्णयों को भी याद रखना चाहिए।
    मोहन यादव ने अपने भाषण में पूर्व आईपीएस अधिकारी केपीएस गिल का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हितों के लिए अधिकारियों और संवैधानिक पदों से जुड़े लोगों को राजनीति में अवसर दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नेहरू-गांधी परिवार पर परिवारवाद को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश की करीब 600 रियासतों ने अपने अधिकार सौंपे थे लेकिन उनके मुताबिक कांग्रेस ने राजनीतिक नेतृत्व को एक परिवार तक सीमित रखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया। ये आरोप मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान लगाए।
    गौरतलब है कि कांग्रेस SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी कर रही है। इसी मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के विरोध को उसके राजनीतिक रुख से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियां चुनावी मतदाता सूची की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता से संबंधित हैं।
    नरसिंहपुर में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान उन्होंने संदीपनी एक्सीलेंस स्कूल के नए भवन का उद्घाटन किया और विद्यार्थियों के लिए बस सेवा को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों के खातों में राशि हस्तांतरित करने और विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल रहे। इस तरह शिक्षा और विकास कार्यों के बीच मुख्यमंत्री ने SIR विवाद को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चल रही बहस में पार्टी के पुराने राजनीतिक इतिहास का हवाला दिया।

  • MP: गरीबों के घर तोड़ने पर भड़के शिवराज…. मुख्य सचिव को लगाया फोन, बोले- जुल्म की हो गई इंतहा

    MP: गरीबों के घर तोड़ने पर भड़के शिवराज…. मुख्य सचिव को लगाया फोन, बोले- जुल्म की हो गई इंतहा


    सीहोर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की हाई-प्रोफाइल बुधनी विधानसभा (Budhni Assembly ) इलाके के कोसमी गांव (Kosmi Village) में गरीब परिवारों के मकानों पर बुलडोजर चलाए जाने के मामले ने बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) रविवार को खुद मौके पर पहुंचे. वहां उजाड़े गए गरीब परिवारों की आपबीती सुनकर और तबाही का मंजर देखकर शिवराज सिंह चौहान का गुस्सा फूट पड़ा।

    केंद्रीय मंत्री ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए साफ कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने, उनकी फसलें चौपट करने और पीने के पानी के कुएं को मिट्टी से भरने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।


    मुख्य सचिव और प्रदेशाध्यक्ष को लगाया फोन

    घटनास्थल पर निरीक्षण के दौरान वन विभाग और जिला प्रशासन का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने गहरा आक्रोश जताया. उन्होंने मौके से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी फोन कर पूरी स्थिति से अवगत कराया. उन्होंने साफ किया कि वह इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री मोहन यादव से व्यक्तिगत रूप से बात कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।

    प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर हुई तबाही का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ”गरीबों के आशियाने उजाड़ने के साथ-साथ उनके खेतों में खड़ी मक्के और तुअर की फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया. हद तो यह हो गई कि उनके सिंचाई और पीने के पानी के एकमात्र साधन कुएं को भी मिट्टी से भर दिया गया. यह बेहद शर्मनाक और अमानवीय कृत्य है.”

    केंद्रीय मंत्री शिवराज ने प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाते हुए ऐलान किया कि जिन गरीब परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उन्हें नया पक्का घर बनाकर दिया जाएगा. जब तक उनके रहने की स्थाई व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने का अस्थायी इंतजाम तुरंत किया जाएगा।


    ‘यह पार्टी को बदनाम करने की साजिश’

    पीड़ितों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने अपनी ही सरकार के प्रशासनिक तंत्र और अधिकारियों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ”ये जो अन्याय हुआ है, उसकी पूरी जानकारी मुझे मुख्यमंत्री महोदय को देनी है. सिसकती हुई इनकी सिसकियां, इनकी आंखों के आंसू, इनके कुचले हुए खेत और इनका चौपट किया हुआ भविष्य… यह सब मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को बताऊंगा. मुझे तो यह मुख्यमंत्री जी को भी बदनाम करने की साजिश लगती है।

    अच्छा, ये वो लोग हैं जो हमेशा बीजेपी को ही वोट देते हैं. इन्होंने लोकसभा में भी वोट दिए और विधानसभा में भी दिए. यह तो पार्टी को बदनाम करने की कुछ अधिकारियों की साजिश है. इन्हीं के वोट से हम लोग जीतते हैं और इन्हीं के वोट से मोहन जी मुख्यमंत्री बने. यह सचमुच में मेरे लिए बहुत दुखद है. मैंने पहले भी निवेदन किया था कि वर्षों से इनका जमीन पर कब्जा है, इसलिए इन्हें तंग न किया जाए.”

  • MP में सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी…. CM ने काजीरंगा से लाए गए 8 भैंसों को कान्हा रिवर्ज में छोड़ा

    MP में सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी…. CM ने काजीरंगा से लाए गए 8 भैंसों को कान्हा रिवर्ज में छोड़ा


    मंडला/बालाघाट।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों (Wild buffaloes) को उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने की दिशा में रविवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत क्वारंटाइन अवधि पूरी कर चुके आठ जंगली भैंसों को एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्मित बड़े बाड़े में विमुक्त किया। इस पहल का उद्देश्य जंगली भैंसों को क्षेत्र की आबोहवा और पर्यावरण के अनुकूल बनाकर उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। लगभग सौ वर्षों बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण प्रारंभ हो रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर आठ जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश लाया गया है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

    दो चरणों में काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसे

    जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में आठ जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में लाया गया था। प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को विशेष रूप से निर्मित एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाड़े में छोड़ा गया। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को इसी बाड़े में रखा गया।

    कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को छोटे बाड़े में क्वारंटाइन कर रखा गया, ताकि वे यहां के वातावरण और जलवायु के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद रविवार 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित कर विमुक्त किया।

    तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य

    मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसे लगभग सौ वर्ष पहले विलुप्त हो चुके थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से वन विभाग ने इस प्रजाति को पुनः स्थापित करने के लिए विशेष योजना तैयार की है। सूपखार क्षेत्र में पूर्व में जंगली भैंसों की उपस्थिति के प्रमाण मिलने के आधार पर यहां पुनर्स्थापना परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को पुनः स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल मध्यप्रदेश में जैव-विविधता के संरक्षण, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को मजबूत बनाने और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र के विकास पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को पुनः स्थापित कर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य बनाकर चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के बाद इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।