Category: Madhya Pradesh

  • खाद की कालाबाजारी पर सरकार सख्त: सूचना देने पर मिलेगा ₹1000 का इनाम, हेल्पलाइन जारी

    खाद की कालाबाजारी पर सरकार सख्त: सूचना देने पर मिलेगा ₹1000 का इनाम, हेल्पलाइन जारी


    मध्‍य प्रदेश । खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों की सुरक्षा और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक नई पहल की है। खाद की कालाबाजारी, नकली उर्वरकों की बिक्री, अधिक कीमत वसूली और अवैध भंडारण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने पूरे प्रदेश में “इन्फॉर्मर इंसेंटिव स्कीम” लागू की है। इस योजना के तहत ऐसी गतिविधियों की सटीक सूचना देने वाले व्यक्ति को जांच में शिकायत सही पाए जाने पर ₹1000 का प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

    कृषि विभाग का मानना है कि खरीफ मौसम में उर्वरकों की मांग बढ़ने के साथ ही कालाबाजारी और अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में आम नागरिकों और किसानों की भागीदारी से निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सरकार ने लोगों को सीधे सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।

    योजना के तहत किसान, आम नागरिक, व्यापारी या कोई भी व्यक्ति खाद से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी विभाग को दे सकता है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने का आश्वासन भी दिया गया है ताकि लोग बिना किसी डर के शिकायत दर्ज करा सकें। शिकायतें मुख्यमंत्री किसान हेल्पलाइन नंबर 155253 पर दर्ज कराई जा सकती हैं। यह हेल्पलाइन कार्य दिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सक्रिय रहेगी।

    कृषि विभाग के अनुसार सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई जाएगी। कलेक्टर के निर्देशन में गठित टीम शिकायत की सत्यता की पुष्टि करेगी। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है और संबंधित मामले में जब्ती, कार्रवाई या दोष सिद्ध होता है, तो सूचना देने वाले व्यक्ति को ₹1000 की प्रोत्साहन राशि सीधे उसके बैंक खाते में भेजी जाएगी।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान कृषि वर्ष 2026-27 के बजट से किए जाएंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस पहल से खाद वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे।

    इसी बीच खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश में खाद वितरण और बिक्री में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि कई जिलों से किसानों और किसान संगठनों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें डीएपी, एसएसपी और अन्य उर्वरकों को निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दरों पर बेचे जाने के आरोप लगाए गए हैं।

    पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानों पर पुराने स्टॉक की खाद को नई बढ़ी हुई दरों पर बेचा जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि पूरे प्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था की विशेष जांच कराई जाए, किसानों से कथित रूप से अधिक वसूली गई राशि वापस कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

    खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता और मूल्य नियंत्रण को लेकर सरकार और प्रशासन की निगरानी अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले दिनों में इस योजना के परिणाम किसानों और कृषि क्षेत्र पर सीधे प्रभाव डाल सकते हैं।

  • मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: कांग्रेस ने तेज की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई

    मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: कांग्रेस ने तेज की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी राजनीति में मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंच गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग पर फैसला सुरक्षित रखते हुए मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। इस बीच कांग्रेस ने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामले की तत्काल सुनवाई आवश्यक है क्योंकि नामांकन वापसी की समय-सीमा बेहद निकट है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि यदि विस्तृत सुनवाई अगले दिन हो तो भी तब तक चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं। दूसरी ओर चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि याचिका की प्रति उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है और मामले का अध्ययन करने के लिए समय चाहिए।

    अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को शुक्रवार तक के लिए सूचीबद्ध कर दिया। इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस पूरे प्रकरण को उठाने की तैयारी में हैं।

    राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं क्योंकि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह बदल गया है। यदि कांग्रेस उम्मीदवार चुनावी मैदान से बाहर रहती हैं तो भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना बढ़ जाएगी। भाजपा की ओर से महेश केवट के साथ-साथ अन्य दो उम्मीदवारों का निर्वाचन भी बिना मतदान के संभव हो सकता है।

    विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आयोग ने समय रहते निर्णय नहीं लिया। उन्होंने कहा कि आयोग चाहे तो इस मामले में हस्तक्षेप कर सकता था, जैसा कि अन्य राज्यों के कुछ मामलों में किया गया था। हालांकि ये आरोप कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    विवाद की जड़ 9 जून को हुई नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया में है, जब रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। भाजपा ने आपत्ति उठाई थी कि उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत से जुड़े मामले की जानकारी नहीं दी। कांग्रेस का तर्क है कि संबंधित प्रकरण केवल एक निजी शिकायत और नोटिस तक सीमित है तथा इसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।

    अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आयोग या अदालत कांग्रेस के पक्ष में राहत देती है तो राज्यसभा चुनाव फिर से मुकाबले की स्थिति में आ सकता है। वहीं यदि नामांकन रद्द रहने का फैसला बरकरार रहता है तो भाजपा के उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो सकता है।

    फिलहाल कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम स्थिति अदालत तथा संवैधानिक संस्थाओं के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • भांजे पर दुष्कर्म का आरोप: महिला ने जहरीला पदार्थ खाकर की आत्महत्या की कोशिश, मामला दर्ज

    भांजे पर दुष्कर्म का आरोप: महिला ने जहरीला पदार्थ खाकर की आत्महत्या की कोशिश, मामला दर्ज


    मध्‍य प्रदेश । भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां 33 वर्षीय महिला ने अपने रिश्तेदार पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार महिला द्वारा अस्पताल में उपचार के दौरान दिए गए बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल आरोपी की तलाश की जा रही है और मामले की जांच जारी है।

    पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक पीड़िता ग्रामीण क्षेत्र में अपने पति के साथ रहती है। उसका पति सब्जी व्यवसाय से जुड़ा है और रोजाना कारोबार के सिलसिले में मंडी जाता है। शिकायत के अनुसार इसी दौरान आरोपी, जो परिवार का परिचित और रिश्तेदार बताया जा रहा है, कथित रूप से घर पहुंचता था। महिला ने आरोप लगाया है कि 5 जून को पति की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती की। इसके बाद भी कथित रूप से आरोपी द्वारा उसे परेशान किया जाता रहा।

    पीड़िता ने अपने बयान में दावा किया है कि उसने घटना की जानकारी अपने पति और अन्य परिजनों को दी थी। हालांकि, उसके अनुसार मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और आरोपी के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। महिला का कहना है कि लगातार मानसिक दबाव और कथित उत्पीड़न के कारण वह बेहद परेशान हो गई थी।

    पुलिस के अनुसार 9 जून को महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक उसने जहरीले पदार्थ का सेवन किया था। उपचार के दौरान महिला ने पुलिस और चिकित्सकीय अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए महिला के बयान दर्ज किए।

    अधिकारियों का कहना है कि पीड़िता के बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। साथ ही अन्य साक्ष्यों और परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, महिला का उपचार जारी है और उसकी स्थिति पर चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

  • विदिशा में बनेगा देश का मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र, 14 जून को शिवराज सिंह चौहान करेंगे शिलान्यास, किसानों के लिए शुरू होगा वैज्ञानिक कृषि अभियान

    विदिशा में बनेगा देश का मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र, 14 जून को शिवराज सिंह चौहान करेंगे शिलान्यास, किसानों के लिए शुरू होगा वैज्ञानिक कृषि अभियान

     मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विदिशा संसदीय क्षेत्र के किसानों को समर्पित एक बड़े कार्यक्रम के तहत 14 जून को विदिशा जिले के बेरखेड़ी जट्टू में कृषि विज्ञान केंद्र की आधारशिला रखी जाएगी। इस अवसर को क्षेत्र के कृषि विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने और आधुनिक कृषि तकनीकों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

    इस कार्यक्रम की घोषणा विदिशा से सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की है। उन्होंने किसानों से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह दिन क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित होगा। उनके अनुसार प्रस्तावित कृषि विज्ञान केंद्र केवल एक संस्थान नहीं होगा, बल्कि किसानों के लिए प्रशिक्षण, अनुसंधान और तकनीकी मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र बनेगा।

    कार्यक्रम के दौरान विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए तैयार किए गए वैज्ञानिक कृषि रोडमैप को लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। यह रोडमैप कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और किसानों को मौसम तथा बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप खेती करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कृषि क्षेत्र में उत्पादकता और लाभप्रदता दोनों में सुधार संभव है।

    इस अवसर पर ‘खेत बचाओ अभियान’ की भी शुरुआत की जाएगी। अभियान का उद्देश्य किसानों को नकली खाद, बीज और अन्य कृषि उत्पादों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक बनाना है। किसानों को यह बताया जाएगा कि असली और नकली उत्पादों की पहचान कैसे की जाए तथा गुणवत्ता वाले कृषि संसाधनों का चयन किस प्रकार किया जाए। इससे खेती में होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, उन्नत खेती की तकनीकों की जानकारी और विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के मार्गदर्शन सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों को नई फसल बुआई पद्धतियों, जैविक खेती, फसल प्रबंधन, जल संरक्षण और मौसम आधारित कृषि सलाह से अवगत कराया जाएगा। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में उपयोग हो रही नई मशीनों और उपकरणों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया जाएगा, ताकि किसान उन्हें समझ सकें और अपने खेतों में उपयोग कर सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और वैज्ञानिकों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। ऐसे केंद्रों के माध्यम से किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान, उन्नत बीजों की जानकारी, फसल रोग नियंत्रण की तकनीक तथा नवीन कृषि अनुसंधान का लाभ मिलता है। विदिशा में प्रस्तावित यह केंद्र आसपास के जिलों के किसानों के लिए भी उपयोगी संसाधन केंद्र साबित हो सकता है।

    कृषि क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों और बदलते मौसमीय परिस्थितियों के बीच वैज्ञानिक खेती की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विदिशा में स्थापित होने वाला कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने, उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि इस पहल से कृषि विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी।

  • भोपाल के ईरानी डेरे में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 17 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार, कई मामलों में वांटेड आरोपी दबोचे गए

    भोपाल के ईरानी डेरे में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 17 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार, कई मामलों में वांटेड आरोपी दबोचे गए


    मध्‍य प्रदेश । भोपाल में फरार अपराधियों और न्यायालय से जारी वारंट वाले आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते हुए निशातपुरा क्षेत्र के ईरानी डेरा अमन कॉलोनी में विशेष सर्चिंग अभियान चलाया। करीब 40 पुलिसकर्मियों की संयुक्त टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई के दौरान दो ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जिनकी तलाश लंबे समय से विभिन्न जिलों की पुलिस कर रही थी। पुलिस की अचानक हुई दबिश से क्षेत्र में कुछ समय के लिए हलचल और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर संजय सिंह के निर्देश पर 10 जून की शाम संचालित की गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य फरार अपराधियों, वारंटियों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना था। पुलिस टीम ने इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाते हुए कई लोगों से पूछताछ भी की।

    कार्रवाई के दौरान निशातपुरा थाना क्षेत्र के निगरानीशुदा बदमाश सालिग उर्फ रेहान ईरानी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ भोपाल समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में लूट, चोरी, जालसाजी, मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों के कुल 24 मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और विभिन्न मामलों में उसकी तलाश की जा रही थी।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी पर कुल 17 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इसमें बैतूल जिले के रानीपुर थाने के एक मामले में 10 हजार रुपये, रायसेन कोतवाली क्षेत्र के प्रकरण में 5 हजार रुपये तथा भोपाल के पिपलानी थाने के मामले में 2 हजार रुपये का इनाम शामिल था। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया था। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित रूप से पुलिस को बताया कि वह लंबे समय से ईरानी डेरे में छिपकर रह रहा था।

    अभियान के दौरान पुलिस ने रिजवान हुसैन नामक एक अन्य आरोपी को भी हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार जिला पन्ना से जुड़े एक मामले में उससे पूछताछ की जानी है। रिकॉर्ड के मुताबिक रिजवान के खिलाफ मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में चोरी, लूट, जालसाजी और मारपीट जैसे लगभग 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि इन मामलों में अंतिम न्यायिक निर्णय संबंधित अदालतों द्वारा किया जाना शेष है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान अन्य आपराधिक घटनाओं, फरार आरोपियों तथा संभावित गिरोह नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। इसके आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

    पुलिस का दावा है कि ईरानी डेरा क्षेत्र में लगातार की जा रही निगरानी और विशेष अभियानों के कारण मोबाइल झपटमारी तथा संपत्ति संबंधी अपराधों में कमी देखने को मिली है। इस संयुक्त कार्रवाई में निशातपुरा, छोला मंदिर और गांधीनगर थाना पुलिस की टीमों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

  • गर्मियों की गहरी जुताई किसानों के लिए फायदेमंद सौदा: कीटनाशकों का खर्च घटेगा, उत्पादन बढ़ेगा

    गर्मियों की गहरी जुताई किसानों के लिए फायदेमंद सौदा: कीटनाशकों का खर्च घटेगा, उत्पादन बढ़ेगा


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की बुआई की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे समय में कृषि वैज्ञानिक किसानों को गर्मियों की गहरी जुताई अपनाने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जून की तेज धूप का सही उपयोग कर खेतों की गहरी जुताई की जाए तो इससे न केवल मिट्टी की सेहत सुधरती है, बल्कि फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अनेक कीट, रोग और खरपतवार भी शुरुआती स्तर पर नियंत्रित किए जा सकते हैं।

    अक्सर किसान फसल कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ देते हैं और मानसून आने के बाद ही जुताई का कार्य करते हैं। कृषि वैज्ञानिक इसे एक रणनीतिक भूल मानते हैं। उनका कहना है कि गर्मियों में की गई गहरी जुताई मिट्टी के भीतर मौजूद कीटों के अंडों, लार्वा और रोगजनक फफूंद को सतह पर ले आती है, जहां तेज धूप और अधिक तापमान के कारण उनका प्रभाव काफी हद तक समाप्त हो जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार गहरी जुताई का एक महत्वपूर्ण लाभ मिट्टी की संरचना में सुधार भी है। खेत की सख्त परत टूटने से पौधों की जड़ें अधिक गहराई तक विकसित हो पाती हैं। इससे पौधों को पोषक तत्व और नमी बेहतर तरीके से प्राप्त होती है। इसके साथ ही वर्षा का पानी मिट्टी में अधिक मात्रा में समा जाता है, जिससे जल संरक्षण में भी मदद मिलती है।

    कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गहरी जुताई के बाद खेत में गोबर खाद, फसल अवशेष या अन्य जैविक पदार्थ मिलाने से मिट्टी की उर्वरता और जैविक गुणवत्ता में तेजी से सुधार होता है। खुली धूप में ये पदार्थ अच्छी तरह विघटित होकर मिट्टी का हिस्सा बन जाते हैं, जिससे आगामी फसल को आवश्यक पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध होते हैं और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो सकती है।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि गहरी जुताई किसानों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। मानसून के दौरान यदि कुछ दिनों तक वर्षा नहीं होती, तो मिट्टी की गहराई में संचित नमी फसल को सूखे के प्रभाव से बचाने में मदद करती है। इससे जल धारण क्षमता बढ़ती है और फसल का विकास बेहतर होता है।

    खरपतवार नियंत्रण के लिहाज से भी यह तकनीक काफी उपयोगी मानी जाती है। जुताई के दौरान खरपतवारों के बीज और जड़ें सतह पर आ जाती हैं, जो तेज धूप में नष्ट हो सकती हैं। इससे बाद में निंदाई-गुड़ाई पर होने वाला खर्च कम होता है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस प्रक्रिया से मजदूरी और खरपतवार नियंत्रण संबंधी खर्च में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

    कृषि महाविद्यालय पवारखेड़ा के सहायक प्राध्यापक डॉ. अनसिंह निनामा के अनुसार किसानों को हर दो से तीन वर्ष में कम से कम एक बार 9 से 12 इंच गहराई तक जुताई अवश्य करनी चाहिए। उनके अनुसार यह उपाय भूमिगत कीटों, जड़ गलन रोग और खरपतवारों को नियंत्रित करने के साथ-साथ फसल उत्पादन में 15 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि करने में सहायक हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन की बेहतर शुरुआत के लिए गर्मियों की गहरी जुताई एक कम लागत वाला लेकिन अत्यंत प्रभावी कृषि उपाय है, जो किसानों को लंबे समय तक आर्थिक और उत्पादन संबंधी लाभ दे सकता है।

  • भोपाल को ‘सिलेंडर फ्री’ बनाने की तैयारी: 4 बड़ी कॉलोनियों में 100% PNG कनेक्शन पर फोकस, चार इमली भी योजना में शामिल

    भोपाल को ‘सिलेंडर फ्री’ बनाने की तैयारी: 4 बड़ी कॉलोनियों में 100% PNG कनेक्शन पर फोकस, चार इमली भी योजना में शामिल


    मध्‍य प्रदेश । राजधानी भोपाल में घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर जारी चुनौतियों के बीच प्रशासन ने शहर को धीरे-धीरे ‘सिलेंडर फ्री’ बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। खाद्य विभाग और गैस वितरण एजेंसियों ने उन क्षेत्रों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन को बढ़ावा देने की योजना बनाई है, जहां गैस पाइपलाइन का नेटवर्क पहले से उपलब्ध है या तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

    खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शहर में थिंक गैस कंपनी द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में भूमिगत गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। होशंगाबाद रोड, बावड़ियाकलां, सलैया, अवधपुरी, अयोध्या बायपास और साकेत नगर जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में घरों तक पीएनजी कनेक्शन पहुंच चुके हैं। अब प्रशासन का लक्ष्य इन क्षेत्रों में अधिकतम परिवारों को पाइप्ड गैस नेटवर्क से जोड़ना है।

    योजना के तहत फिलहाल चार प्रमुख आवासीय परियोजनाओं और कॉलोनियों पर विशेष फोकस किया गया है। इनमें केराल केनसिप, सौम्या पार्कलैंड, सागर लेक व्यू होम्स और आकृति ग्रीन शामिल हैं। रणनीति यह है कि इन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत कनेक्शन सुनिश्चित करने के बाद अगले चरण में अन्य कॉलोनियों को शामिल किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि चरणबद्ध तरीके से कार्य करने से गैस नेटवर्क का विस्तार अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा।

    शहर के सबसे प्रतिष्ठित और वीआईपी इलाकों में शामिल चार इमली और 74 बंगला क्षेत्रों में भी गैस पाइपलाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत लोगों के सरकारी आवास स्थित हैं। अधिकांश हिस्सों में पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा होने के बाद यहां भी कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

    प्रशासन का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मांग और आपूर्ति के बीच अंतर के कारण कई उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि पीएनजी नेटवर्क के विस्तार से घरेलू गैस की आपूर्ति अधिक स्थिर और सुविधाजनक हो सकेगी।

    खाद्य विभाग के अनुसार, शहर की 172 से अधिक कॉलोनियों के सामने गैस पाइपलाइन नेटवर्क पहुंच चुका है। कई क्षेत्रों से लोग स्वयं भी पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर रहे हैं। भविष्य में पुराने भोपाल और अन्य घनी आबादी वाले इलाकों तक भी इस नेटवर्क का विस्तार करने की योजना है।

    सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, जिन क्षेत्रों में पीएनजी लाइन उपलब्ध होगी, वहां निर्धारित समयसीमा के भीतर कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने भी गैस इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को गति देने के लिए कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, जिससे पाइपलाइन नेटवर्क तेजी से विकसित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी व्यवस्था से उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी और गैस खत्म होने जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। साथ ही यह व्यवस्था दीर्घकालिक रूप से अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प के रूप में भी देखी जा रही है। हालांकि इसके साथ उपभोक्ताओं के सामने पारंपरिक एलपीजी और पीएनजी के बीच विकल्प चुनने का सवाल भी महत्वपूर्ण बना रहेगा।

  • एमपी में सड़क हादसों का भयावह आंकड़ा: एक साल में 1 लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं, हर 10 में से 6 पीड़ित युवा

    एमपी में सड़क हादसों का भयावह आंकड़ा: एक साल में 1 लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं, हर 10 में से 6 पीड़ित युवा


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। डायल-108 एंबुलेंस सेवा की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष में प्रदेशभर में 1,03,294 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इन हादसों का सबसे ज्यादा शिकार युवा वर्ग हुआ है।

    रिपोर्ट के मुताबिक 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लोग कुल दुर्घटनाओं में 61 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे अधिक प्रभावित रहे। इसके बाद 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 24 प्रतिशत लोग हादसों का शिकार बने। वहीं 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत, 0 से 15 वर्ष आयु वर्ग की 4 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की 3 प्रतिशत दर्ज की गई।

    जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सागर जिला सड़क हादसों के मामले में प्रदेश में सबसे ऊपर रहा, जहां एक वर्ष के दौरान 6,061 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इसके बाद इंदौर में 4,853 और भोपाल में 4,546 सड़क हादसे सामने आए। इसके अलावा छिंदवाड़ा, जबलपुर, धार और रीवा जैसे जिलों में भी तीन हजार से अधिक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो बढ़ती सड़क असुरक्षा की ओर संकेत करती हैं।

    महीनेवार विश्लेषण में मई 2025 सबसे चिंताजनक महीना साबित हुआ, जब 12,047 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। जून और जुलाई में दुर्घटनाओं की संख्या में कुछ कमी देखी गई, लेकिन अगस्त के बाद फिर से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया। त्योहारों के मौसम में अक्टूबर और नवंबर के दौरान भी हादसों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। इनमें ओवर स्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, सड़क के ब्लैक स्पॉट, गड्ढे, क्षमता से अधिक सवारी बैठाना तथा लापरवाही और स्टंटबाजी प्रमुख हैं।

    डायल-108 एंबुलेंस सेवा के वरिष्ठ प्रबंधक तरुण सिंह परिहार के अनुसार, दुर्घटनाओं के बाद गंभीर चोटों का बड़ा कारण हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना है। उन्होंने लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाने की अपील की है।

    वहीं भोपाल आरटीओ जितेंद्र शर्मा का कहना है कि सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवर स्पीडिंग है। उनके अनुसार यदि वाहन चालक निर्धारित गति सीमा का पालन करें तो सड़क दुर्घटनाओं में करीब 60 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

    हाल के दिनों में भोपाल में हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने भी लोगों का ध्यान सड़क सुरक्षा की ओर आकर्षित किया है। पुलिस के अनुसार तेज रफ्तार बाइक के डिवाइडर से टकराने की घटना में दो मेडिकल छात्रों की मौत हो गई थी। यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केवल सख्त कानून ही नहीं, बल्कि जनजागरूकता, बेहतर सड़क ढांचा और जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार भी उतना ही जरूरी है। बढ़ते हादसों के बीच सड़क सुरक्षा अब प्रदेश के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

  • एमपी में प्री-मानसून का असर तेज, 34 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, 6 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट

    एमपी में प्री-मानसून का असर तेज, 34 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, 6 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय बनी हुई हैं। ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज आंधी का दौर जारी है। बुधवार को 20 से अधिक जिलों में मौसम ने करवट ली, जबकि गुरुवार के लिए मौसम विभाग ने ग्वालियर और जबलपुर संभाग सहित 34 जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान हवाएं 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले सप्ताह मानसून के सक्रिय होने तक प्रदेश में प्री-मानसून का प्रभाव बना रहेगा। गुरुवार को मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है।

    हालांकि कई क्षेत्रों में आंधी और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन गर्मी का असर अभी भी पूरी तरह कम नहीं हुआ है। बुधवार को खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
    हालांकि कई क्षेत्रों में आंधी और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन गर्मी का असर अभी भी पूरी तरह कम नहीं हुआ है। बुधवार को खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम, ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। इसी के चलते 13 जून को ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है।

    इन जिलों में आंधी-बारिश की संभावना

    गुरुवार को ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में आंधी और बारिश होने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

    इन इलाकों में गर्मी का असर रहेगा

    इंदौर, धार, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भोपाल, विदिशा, सीहोर और राजगढ़ जिलों में गर्मी का असर बना रह सकता है।

    6 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट

    मौसम विभाग ने मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में गुरुवार को ओले गिरने की संभावना जताई है। वहीं 13 जून को ग्वालियर, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर और दमोह जिलों में तेज आंधी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच तेज: सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली, महिला आयोग ने जेल में की गिरिबाला सिंह से मुलाकात

    ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच तेज: सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली, महिला आयोग ने जेल में की गिरिबाला सिंह से मुलाकात


    मध्‍य प्रदेश। एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त हो गई है और अब एजेंसी मेडिकल, डिजिटल तथा फोरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर विभिन्न तथ्यों की पड़ताल कर रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर न्यायिक हिरासत में बंद ट्विशा की सास और रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह से मुलाकात की।

    महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। आयोग की टीम ने गिरिबाला सिंह से भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। आयोग के अनुसार गिरिबाला सिंह ने किसी प्रकार की परेशानी या शिकायत नहीं बताई और कहा कि उन्हें जेल में कोई विशेष समस्या नहीं है।

    निरीक्षण के दौरान गिरिबाला सिंह पुस्तकालय से संबंधित एक पुस्तक पढ़ती हुई दिखाई दीं। महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि बातचीत के दौरान वह शांत रहीं और आयोग को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि उन्हें जेल में किसी प्रकार की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हो। आयोग ने जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।

    दूसरी ओर सीबीआई मामले के विभिन्न पहलुओं को जोड़ने में जुटी हुई है। जांच एजेंसी को मिली दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर अब मेडिकल रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच में कथित रूप से प्रेग्नेंसी, मेडिकल उपचार, शरीर पर मिले चोटों के निशान तथा घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसी ने अभी तक किसी निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    सूत्रों के अनुसार सीबीआई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो तथा डिलीट किए गए डेटा की भी जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला को समझना और उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है।

    मामले में ट्विशा के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे ने प्रारंभिक जांच प्रक्रिया और कुछ दस्तावेजी पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि घटनास्थल से जब्त सामग्री और जांच प्रक्रिया में कुछ गंभीर विसंगतियां रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज आरोपियों तक समय से पहले पहुंचने की आशंका की जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों पर जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से जिला न्यायालय में विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अधिवक्ताओं द्वारा वकालतनामा प्रस्तुत किया गया है। न्यायालय ने इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया के तहत विधिक सेवा प्राधिकरण से अनुमति मांगी है।

    फिलहाल सीबीआई मामले की सभी कड़ियों को जोड़ने और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसी का कहना है कि वैज्ञानिक और तकनीकी तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।