Category: National

  • कर्नाटक में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठा विवाद, NDA ने चुनाव आयोग से की शिकायत; सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितताओं का लगाया आरोप

    कर्नाटक में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठा विवाद, NDA ने चुनाव आयोग से की शिकायत; सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितताओं का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत की है। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे मतदाता सूची की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    शिकायत में कहा गया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों को प्रत्येक घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप लगाया गया कि घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करने के बजाय सामुदायिक भवनों, अन्य सार्वजनिक स्थानों तथा कुछ निजी परिसरों में लोगों को बुलाकर सामूहिक रूप से फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इससे वास्तविक सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

    NDA नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में लोगों को व्हाट्सएप समूहों और अन्य माध्यमों से विशेष शिविरों में बुलाया गया, जहां एक साथ बड़ी संख्या में आवेदन पत्र भरे गए। उनका दावा है कि इस तरह की प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है और इससे मतदाता सूची में त्रुटियों या अनियमितताओं की आशंका बढ़ सकती है।

    ज्ञापन में नेताओं ने मांग की है कि अब तक भरे गए सभी गणना प्रपत्रों का दोबारा घर-घर जाकर सत्यापन कराया जाए। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आधारशिला है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

    प्रतिनिधिमंडल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों से ऐसी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उनका दावा है कि इन कथित अनियमितताओं से जुड़े कुछ वीडियो और अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर भी साझा की गई है। नेताओं ने आग्रह किया कि इन शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनी रहे।

    शिकायत के दौरान NDA नेताओं ने राज्य सरकार पर भी आरोप लगाए और कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया तो इसका असर चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता पर पड़ सकता है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

    मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं का सही पंजीकरण सुनिश्चित करना और सूची को अद्यतन रखना होता है। ऐसे में इस प्रक्रिया को लेकर उठे आरोपों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। अब नजर चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर रहेगी कि शिकायतों की जांच किस प्रकार की जाती है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो उसके समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • फिजूलखर्ची छोड़ सेवा का संदेश युवा समाजसेवी ने वृद्धजनों के साथ मनाया जन्मदिन

    फिजूलखर्ची छोड़ सेवा का संदेश युवा समाजसेवी ने वृद्धजनों के साथ मनाया जन्मदिन


    चित्रकूट। आज के दौर में जहां जन्मदिन के मौके पर भव्य पार्टियों और दिखावे का चलन तेजी से बढ़ रहा है वहीं चित्रकूट के युवा समाजसेवी बीपी पटेल ने समाज को प्रेरित करने वाली मिसाल पेश की। उन्होंने अपना जन्मदिन परिवार और दोस्तों के साथ किसी होटल या समारोह स्थल पर मनाने के बजाय गणेश बाग के समीप स्थित विनायकपुर वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच मनाया।

    इस अवसर पर बीपी पटेल ने वृद्धाश्रम में रह रहे सभी बुजुर्गों को मिठाई समोसा और फल वितरित किए तथा उनके साथ समय बिताकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। बुजुर्गों ने भी स्नेहपूर्वक उन्हें और जानकी पटेल को स्वस्थ जीवन तथा दीर्घायु का आशीर्वाद देते हुए उनके इस सामाजिक कार्य की सराहना की।

    समाजसेवी बीपी पटेल ने कहा कि जन्मदिन केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं बल्कि समाज के जरूरतमंद और उपेक्षित लोगों के साथ खुशियां बांटने का भी दिन होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे अपने विशेष अवसरों को सेवा और समाजहित के कार्यों से जोड़ें ताकि ऐसे आयोजन जरूरतमंद लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला सकें।

    इस मौके पर सभासद शंकर प्रसाद यादव धर्मेंद्र कुमार ओझा सुरेंद्र यादव हरिशरण जानकी पटेल जगपालक सिंह यादव आशीष श्रीवास्तव एडवोकेट प्रखर सिंह प्रदोष सिंह पटेल वृद्धाश्रम के प्रबंधक कामता प्रसाद समाजसेविका दिव्यांगना मिश्रा अनुराग सिंह पटेल अशोक पटेल और ओंकार सिंह चंदेल सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

    जन्मदिन समारोह से पहले बीपी पटेल ने पंपापुर देवांगना हनुमानगढ़ी आश्रम पहुंचकर सिद्ध संत तपशाली प्रेमदास जी महाराज का आशीर्वाद लिया और गुफा में विराजमान हनुमान जी के दर्शन कर अपने सामाजिक जीवन में सेवा और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

    बीपी पटेल की यह पहल न केवल बुजुर्गों के प्रति सम्मान का संदेश देती है बल्कि यह भी बताती है कि जीवन के खास अवसरों को समाज सेवा से जोड़कर उन्हें अधिक सार्थक और प्रेरणादायक बनाया जा सकता है।

  • अग्निपथ योजना में हो सकता है बड़ा बदलाव, अधिक अग्निवीरों को स्थायी सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचा

    अग्निपथ योजना में हो सकता है बड़ा बदलाव, अधिक अग्निवीरों को स्थायी सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचा

    नई दिल्ली। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए लाखों अग्निवीरों के लिए भविष्य में स्थायी सैन्य सेवा के अवसर बढ़ सकते हैं। तीनों सेनाओं की ओर से चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले अधिक अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा गया है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन प्रस्ताव पर गंभीर स्तर पर विचार किए जाने की चर्चा है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो अग्निपथ योजना लागू होने के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक माना जाएगा।

    मौजूदा व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को प्रदर्शन, योग्यता और संगठन की आवश्यकता के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किया जा सकता है। अब तीनों सेनाओं ने इस सीमा को बढ़ाने का सुझाव दिया है। बताया जा रहा है कि भारतीय नौसेना ने सबसे अधिक संख्या में अग्निवीरों को स्थायी सेवा देने का प्रस्ताव रखा है, जबकि थल सेना और वायुसेना ने भी मौजूदा प्रतिशत बढ़ाने की सिफारिश की है।

    यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब अग्निपथ योजना के तहत भर्ती पहला बैच अपना चार वर्षीय कार्यकाल पूरा करने की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित जवानों के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि चार वर्षों के दौरान विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जवानों को बड़ी संख्या में सेवा से बाहर करना व्यावहारिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    आधुनिक सैन्य अभियानों में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों, तकनीकी उपकरणों और विशेष युद्धक क्षमताओं का महत्व लगातार बढ़ा है। ऐसे में प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों को अधिक समय तक सेवा में बनाए रखने से सेना की परिचालन क्षमता मजबूत होगी। इसके साथ ही प्रशिक्षण पर होने वाले निवेश का भी बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

    रिपोर्टों के अनुसार सशस्त्र बलों में मानव संसाधन की आवश्यकता भी इस प्रस्ताव के पीछे एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में भर्ती प्रक्रिया का दायरा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित सैनिक उपलब्ध रह सकें। इससे सेना की दीर्घकालिक क्षमता और संचालन व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    हालांकि इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। बताया जा रहा है कि पहले संबंधित स्तर पर विस्तृत समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद ही सरकार अंतिम फैसला ले सकती है। इसलिए फिलहाल स्थायी सेवा में शामिल किए जाने की नई व्यवस्था लागू होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    अग्निपथ योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में युवाओं को चार वर्ष के लिए सेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती करने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत चयनित युवाओं को अग्निवीर कहा जाता है। सेवा अवधि पूरी होने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार सीमित संख्या में अभ्यर्थियों को नियमित सेवा का अवसर मिलता है, जबकि अन्य अग्निवीरों को सेवा निधि, कौशल प्रमाणपत्र और विभिन्न रोजगार सहायता सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

    योजना लागू होने के बाद नौकरी की स्थिरता, पेंशन और चार वर्ष बाद भविष्य की संभावनाओं को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। यदि स्थायी सेवा में शामिल किए जाने का प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो इससे बड़ी संख्या में अग्निवीरों के लिए सैन्य करियर के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही योजना को लेकर युवाओं के बीच विश्वास भी और मजबूत होने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।

  • राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक आज, चंपत राय के इस्तीफे से लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार तक कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

    राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक आज, चंपत राय के इस्तीफे से लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार तक कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को आयोजित होने जा रही है। हाल के दिनों में मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद और प्रशासनिक मुद्दों के बीच बुलाई गई इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की प्रशासनिक योजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार होने की संभावना है। बैठक को देखते हुए राम जन्मभूमि परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार बैठक दोपहर बाद आयोजित होगी। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए इस बार बैठक का स्थान बदला गया है और इसे राम जन्मभूमि परिसर स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास करेंगे। ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।

    बैठक के एजेंडे में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं। इनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों से जुड़े मामलों पर चर्चा प्रमुख मानी जा रही है। इसके अलावा मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावे की चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट पर भी विचार किया जाएगा। ट्रस्ट इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े निर्णय ले सकता है।

    बैठक में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी चर्चा होगी। हाल के वर्षों में राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है, जिसके चलते भीड़ प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ट्रस्ट भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्थाओं और संसाधनों पर भी विचार करेगा।

    इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय, लेखा-जोखा और विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी बैठक का हिस्सा होगी। ट्रस्ट प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने, वित्तीय प्रबंधन को और मजबूत बनाने तथा मंदिर संचालन से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दे सकता है। इन फैसलों का असर आने वाले समय में मंदिर की व्यवस्थाओं और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर दिखाई दे सकता है।

    बैठक के मद्देनजर अयोध्या में सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं। राम जन्मभूमि परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। सभी प्रवेश मार्गों पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है, जबकि संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है ताकि बैठक के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था की संभावना न रहे।

    धार्मिक और प्रशासनिक दृष्टि से इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इसमें लिए जाने वाले फैसले ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था और राम मंदिर के भविष्य के संचालन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। बैठक समाप्त होने के बाद ट्रस्ट की ओर से लिए गए निर्णयों की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।

  • राज्यसभा उपचुनाव में दिलचस्प हुआ बंगाल का सियासी गणित, टीएमसी में टूट के बावजूद ममता बनर्जी के समर्थन के बिना मुश्किल में ऋतब्रता गुट

    राज्यसभा उपचुनाव में दिलचस्प हुआ बंगाल का सियासी गणित, टीएमसी में टूट के बावजूद ममता बनर्जी के समर्थन के बिना मुश्किल में ऋतब्रता गुट

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही सभी दलों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल को देखते हुए दो सीटों का परिणाम अपेक्षाकृत स्पष्ट माना जा रहा है, जबकि तीसरी सीट पर राजनीतिक समीकरण और संभावित क्रॉस वोटिंग चुनाव को बेहद रोचक बना सकती है।

    राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 74 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास 207 विधायक हैं, जिससे वह दो उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में दिखाई देती है। हालांकि तीसरी सीट पर जीत के लिए आवश्यक अतिरिक्त समर्थन जुटाना उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

    दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के पास कुल 80 विधायक हैं, लेकिन पार्टी के भीतर सामने आए राजनीतिक मतभेदों ने समीकरण को जटिल बना दिया है। इसके बावजूद माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में ममता बनर्जी का प्रभाव अभी भी निर्णायक बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके समर्थन के बिना अलग गुट के लिए राज्यसभा तक पहुंच बनाना आसान नहीं होगा।

    ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से पर्याप्त विधायकों के समर्थन का दावा किया गया है। यदि इन दावों को सही माना जाए तो भी ममता बनर्जी के साथ मौजूद विधायकों की संख्या ऐसी स्थिति बना सकती है, जिससे अलग गुट के उम्मीदवार की जीत की संभावनाएं प्रभावित हों। यही कारण है कि राज्यसभा चुनाव केवल संख्या का नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी मुकाबला बन गया है।

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि क्या भारतीय जनता पार्टी तीसरी सीट के लिए अपने अतिरिक्त मतों का उपयोग किसी अन्य गुट के उम्मीदवार के पक्ष में करेगी। दो उम्मीदवारों की संभावित जीत के बाद भाजपा के पास कुछ मत शेष रह सकते हैं, जिनका इस्तेमाल चुनावी रणनीति के तहत किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी किसी दल की ओर से आधिकारिक संकेत सामने नहीं आए हैं।

    तीसरी सीट का परिणाम संभावित क्रॉस वोटिंग पर भी निर्भर माना जा रहा है। यदि किसी भी दल के विधायक पार्टी लाइन से हटकर मतदान करते हैं तो चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुट गए हैं और मतदान तक अंदरूनी गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।

    विधानसभा में भाजपा के अलावा तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायक हैं। कांग्रेस के पास दो विधायक हैं, जबकि हुमायूं कबीर की पार्टी के भी दो विधायक मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त सीपीआई और एआईएसएफ के पास एक-एक विधायक है। इन छोटी राजनीतिक ताकतों की भूमिका भी करीबी मुकाबले की स्थिति में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    राज्यसभा उपचुनाव केवल रिक्त सीटों को भरने की प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। चुनाव परिणाम यह स्पष्ट करेंगे कि टीएमसी के भीतर उभरे नए समीकरणों का वास्तविक असर कितना है और विपक्ष किस हद तक इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठा पाता है। आगामी मतदान और मतगणना पर पूरे राज्य के साथ राष्ट्रीय राजनीति की भी नजर बनी हुई है।

  • जंतर-मंतर आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके की छात्रों से अपील, बोले- लंबी लड़ाई के लिए सेहत बचाना जरूरी, अनशन का जिम्मा सोनम वांगचुक संभालें

    जंतर-मंतर आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके की छात्रों से अपील, बोले- लंबी लड़ाई के लिए सेहत बचाना जरूरी, अनशन का जिम्मा सोनम वांगचुक संभालें

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच आंदोलन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लगातार नौ दिनों से अनशन पर हैं, जबकि उनके समर्थन में कुछ छात्र भी भूख हड़ताल कर रहे हैं। इसी बीच आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने छात्रों से अनशन समाप्त कर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है।

    अभिजीत दीपके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है, जिसमें वह छात्रों और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि यह आंदोलन जल्द समाप्त होने वाला नहीं है। ऐसे में सभी लोगों का लंबे समय तक सक्रिय और स्वस्थ रहना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में छात्र लगातार अनशन करते रहेंगे तो आंदोलन की संगठनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    दीपके ने अपने संदेश में कहा कि सोनम वांगचुक को लंबे समय तक शांतिपूर्ण आंदोलनों और अनशन का अनुभव है, इसलिए वह इस जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से निभा सकते हैं। वहीं छात्रों और अन्य समर्थकों को अपनी ऊर्जा आंदोलन के संचालन, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में लगानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन की सफलता केवल अनशन पर नहीं, बल्कि लगातार सक्रिय जनभागीदारी और समन्वित प्रयासों पर भी निर्भर करती है।

    प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन का समर्थन करने वाले लोगों से संयमित जीवनशैली अपनाने और प्रतीकात्मक रूप से एक दिन का उपवास रखने की अपील की। उनका कहना है कि यदि समर्थक बारी-बारी से एक दिन का उपवास करें तो आंदोलन के प्रति एकजुटता का संदेश भी जाएगा और प्रदर्शन स्थल पर भोजन की व्यवस्था का दबाव भी कम होगा। उन्होंने भोजन में संतुलन और अनुशासन को अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया।

    जानकारी के अनुसार, लंबे समय से जारी अनशन के कारण सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है और उनका वजन कम हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन लगातार लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। प्रदर्शन में शामिल छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। वहीं आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधि लगातार यह भी प्रयास कर रहे हैं कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहे और इसमें शामिल लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    इसी उद्देश्य से अभिजीत दीपके ने छात्रों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय आंदोलन को अन्य माध्यमों से मजबूत करें। उनका मानना है कि किसी भी जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसके सक्रिय और स्वस्थ कार्यकर्ता होते हैं। ऐसे में लंबी अवधि के संघर्ष के लिए संयम, संगठन और सतत भागीदारी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

  • पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट, पहले कानूनी प्रक्रिया अपनाने की दी सलाह

    पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट, पहले कानूनी प्रक्रिया अपनाने की दी सलाह


    नई दिल्ली ।
    पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक है। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकरण और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।

    मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि कथित टिप्पणियां सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं। इस आधार पर मामले में शीघ्र सुनवाई की मांग की गई। हालांकि अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और कहा कि ऐसे मामलों के लिए पहले से निर्धारित कानूनी तंत्र मौजूद है, जिसका उपयोग किया जाना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह जानना चाहा कि क्या मामले में संबंधित एजेंसियों या पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई है। अदालत ने कहा कि देश में कानून लागू करने वाली संस्थाएं मौजूद हैं और उन पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति या संस्था ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की भूमिका सीधे हर शिकायत की प्रारंभिक जांच करने की नहीं है। शीर्ष न्यायालय का दायित्व व्यापक संवैधानिक और कानूनी निगरानी सुनिश्चित करना है। यदि प्रत्येक मामला सीधे सर्वोच्च अदालत में लाया जाएगा तो निचली अदालतों और अन्य सक्षम संस्थाओं की भूमिका प्रभावित होगी, जो न्यायिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

    न्यायालय ने कहा कि कानून के तहत उपलब्ध सभी विकल्पों का उपयोग किए जाने के बाद भी यदि संबंधित प्राधिकरण उचित कार्रवाई नहीं करते हैं, तब न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जा सकती है। अदालत ने संकेत दिया कि न्याय व्यवस्था में विभिन्न स्तरों पर स्थापित संस्थाओं को पहले अपना कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सद्भाव से जुड़े मामले संवेदनशील प्रकृति के होते हैं। ऐसे मामलों में सभी पक्षों को जिम्मेदारी और संयम के साथ व्यवहार करना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि संवेदनशील विषयों पर अनावश्यक विवाद या सनसनी फैलाने से बचना आवश्यक है, क्योंकि इससे सामाजिक वातावरण प्रभावित हो सकता है।

    अदालत ने दोहराया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि शिकायतों के निपटारे के लिए स्थापित संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    इस घटनाक्रम के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि शीर्ष अदालत ऐसे मामलों में पहले वैधानिक प्रक्रिया अपनाने को प्राथमिकता देती है। न्यायालय का संदेश यह रहा कि कानून के दायरे में उपलब्ध सभी उपायों का उपयोग करने के बाद ही किसी मामले को सर्वोच्च न्यायिक मंच तक ले जाना उचित माना जाएगा।

  • योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, जलालाबाद का नाम बदलेगा परशुरामपुरी; स्टार्टअप नीति, होमगार्ड स्वास्थ्य योजना समेत 28 प्रस्तावों को मंजूरी

    योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, जलालाबाद का नाम बदलेगा परशुरामपुरी; स्टार्टअप नीति, होमगार्ड स्वास्थ्य योजना समेत 28 प्रस्तावों को मंजूरी

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार ने विकास, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी। बैठक में कुल 29 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 28 को स्वीकृति मिल गई, जबकि मदरसा शिक्षा से संबंधित एक प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित रखा गया। सबसे चर्चित निर्णय शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने का रहा, जिसे मंत्रिमंडल ने अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी।

    सरकार के अनुसार जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यता प्राप्त है। केंद्र सरकार से आवश्यक अनापत्ति मिलने के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। सरकार का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को अधिक स्पष्ट रूप से स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    बैठक में प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को भी मंजूरी दी गई। नई व्यवस्था के तहत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये का विशेष फंड बनाया जाएगा। इसके अलावा नए उद्यमों को प्रोटोटाइप विकसित करने, शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराने तथा इनक्यूबेशन केंद्रों को वार्षिक वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने समाप्त हो चुकी डेटा सेंटर नीति को भी दोबारा लागू करने का निर्णय लिया है।

    मंत्रिमंडल ने प्रदेश के लगभग 1.60 लाख होमगार्डों और उनके आश्रितों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा को भी मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य सेवा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को भी स्वीकृति दी गई, जिसके तहत पशुओं के बीमा प्रीमियम का अधिकांश हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। प्राकृतिक आपदा, बीमारी अथवा दुर्घटना से पशुओं की मृत्यु होने पर पशुपालकों को बीमा का लाभ मिलेगा।

    स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्ताव भी कैबिनेट की मंजूरी प्राप्त करने में सफल रहे। वाराणसी में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड वाले ईएसआईसी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज में श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए आधी सीटें आरक्षित रखने का भी निर्णय लिया गया है।

    बैठक में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की सीधी भर्ती संबंधी नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। संशोधित व्यवस्था के तहत पात्र खिलाड़ियों को समूह ‘ख’ और ‘ग’ के विभिन्न सरकारी पदों पर सीधे नियुक्ति का अवसर मिलेगा।

    इसके अलावा राज्य सरकार ने तीन निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना, लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की पेंशन संबंधी संशोधन, गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगम के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने सहित कई प्रशासनिक और विकासात्मक प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से राज्य में निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को नई गति मिलेगी।

  • 11 जुलाई को नौसेना के बेड़े में शामिल होगा ‘महेंद्रगिरि’, स्वदेशी तकनीक से बना अत्याधुनिक युद्धपोत बढ़ाएगा भारत की समुद्री ताकत

    11 जुलाई को नौसेना के बेड़े में शामिल होगा ‘महेंद्रगिरि’, स्वदेशी तकनीक से बना अत्याधुनिक युद्धपोत बढ़ाएगा भारत की समुद्री ताकत

    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना जल्द ही अपनी समुद्री शक्ति में एक और आधुनिक युद्धपोत जोड़ने जा रही है। 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में आयोजित विशेष समारोह के दौरान स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। प्रोजेक्ट-17ए श्रृंखला का यह छठा युद्धपोत देश की रक्षा आत्मनिर्भरता और अत्याधुनिक नौसैनिक तकनीक का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

    महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना की वर्तमान और भविष्य की समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। यह पूरी तरह स्वदेशी विशेषज्ञता और रक्षा विनिर्माण क्षमता का परिणाम है, जिससे भारत की तकनीकी दक्षता और मजबूत हुई है।

    यह युद्धपोत स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिसके कारण दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान सामान्य जहाजों की तुलना में काफी कम होती है। विशेष संरचना और आधुनिक डिजाइन इसे समुद्र में अधिक गोपनीय तरीके से संचालन करने में सक्षम बनाते हैं। युद्ध की स्थिति में यह विशेषता नौसेना को सामरिक बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    महेंद्रगिरि में अत्याधुनिक हथियार और आधुनिक युद्ध प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, आधुनिक सेंसर, पनडुब्बी रोधी हथियार और एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। यह युद्धपोत एक साथ वायु, समुद्र और पनडुब्बी से आने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम है।

    युद्धपोत में आधुनिक कंबाइंड डीजल ऑर गैस प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया गया है। सामान्य समुद्री गश्त के दौरान यह ईंधन की बचत करते हुए लंबी दूरी तक संचालन कर सकता है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर गैस टर्बाइन की सहायता से तेज गति भी हासिल कर सकता है। यह क्षमता इसे लंबी अवधि के समुद्री अभियानों और विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में प्रभावी बनाती है।

    महेंद्रगिरि की एक और बड़ी विशेषता इसकी उच्च स्वदेशी भागीदारी है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। देश की अनेक रक्षा कंपनियों के साथ-साथ सैकड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने इसके विभिन्न उपकरण, सेंसर, प्रणालियां और अन्य आवश्यक घटकों के निर्माण में योगदान दिया है। इससे रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

    यह युद्धपोत केवल युद्ध संचालन तक सीमित नहीं रहेगा। मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियान, खोज एवं बचाव कार्य, समुद्री सुरक्षा गश्त और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिशनों में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। किसी प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत पहुंचाने से लेकर हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति बनाए रखने तक, महेंद्रगिरि कई प्रकार के अभियानों में प्रभावी योगदान देने में सक्षम होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों और वैश्विक समुद्री व्यापार के महत्व को देखते हुए आधुनिक युद्धपोतों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में महेंद्रगिरि जैसे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रभाव को नई ऊंचाई देंगे। यह युद्धपोत आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री शक्ति, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और आधुनिक नौसैनिक क्षमता का महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर देश की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सैन्य नेतृत्व और सर्वोच्च कमांडर के बीच हुआ औपचारिक संवाद

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सैन्य नेतृत्व और सर्वोच्च कमांडर के बीच हुआ औपचारिक संवाद

    नई दिल्ली । भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उनकी पत्नी कोमल सेठ भी उनके साथ मौजूद रहीं। थलसेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद राष्ट्रपति के साथ यह उनकी पहली औपचारिक मुलाकात रही, जिसे सैन्य नेतृत्व और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के बीच संस्थागत संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भारतीय सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर हैं। ऐसे में सेना के नए प्रमुख की यह मुलाकात औपचारिक परंपराओं के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय और संवाद का भी महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। समय-समय पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी राष्ट्रपति से मुलाकात कर सैन्य परंपराओं और संस्थागत संबंधों को आगे बढ़ाते रहे हैं।

    हाल ही में भारतीय सेना के 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने वाले जनरल धीरज सेठ एक अनुभवी सैन्य अधिकारी हैं। बख्तरबंद कोर से जुड़े रहे जनरल सेठ ने अपने लंबे सैन्य करियर में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। सेना प्रमुख बनने से पहले वह उप-थलसेना प्रमुख के पद पर कार्यरत थे और विभिन्न महत्वपूर्ण सैन्य नियुक्तियों का अनुभव भी रखते हैं।

    कार्यभार ग्रहण करने के बाद जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सैन्य क्षमताओं को मजबूत बनाने को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सेना को तकनीक आधारित, अधिक सक्षम और तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप तैयार करना उनकी कार्ययोजना का प्रमुख हिस्सा होगा।

    उनकी रणनीतिक प्राथमिकताओं में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य क्षमताओं का विस्तार, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा, आत्मनिर्भरता को मजबूत करना तथा तीनों सेनाओं के बीच बेहतर संयुक्त संचालन क्षमता विकसित करना शामिल है। उनका मानना है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी श्रेष्ठता और समन्वित सैन्य संचालन निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

    थलसेना प्रमुख बनने के बाद जनरल धीरज सेठ ने अपना दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया है, जिसमें भारतीय सेना को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार करने पर विशेष बल दिया गया है। उनका मार्गदर्शक मंत्र ‘जय से विजय’ सैन्य क्षमता, नवाचार, आत्मनिर्भरता और संयुक्तता को बढ़ावा देने की सोच को दर्शाता है।

    राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले जनरल धीरज सेठ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी शिष्टाचार भेंट की थी। इस दौरान सेना के आधुनिकीकरण, रक्षा तैयारियों और भविष्य की रणनीतिक आवश्यकताओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई थी। नई जिम्मेदारी संभालने के बाद शीर्ष राजनीतिक और संवैधानिक नेतृत्व के साथ उनकी ये मुलाकातें भारतीय सेना की भावी दिशा और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही हैं। आने वाले समय में सेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में उनके नेतृत्व से महत्वपूर्ण पहल की उम्मीद की जा रही है।