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  • 'सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक लड़ाई का मंच नहीं'-करूर मामले में डीएमके को झटका, मुख्यमंत्री विजय की यात्रा पर रोक लगाने से इनकार

    'सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक लड़ाई का मंच नहीं'-करूर मामले में डीएमके को झटका, मुख्यमंत्री विजय की यात्रा पर रोक लगाने से इनकार

    नई दिल्ली । करूर भगदड़ मामले से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को राहत देते हुए उनकी प्रस्तावित करूर यात्रा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने इस मामले में दायर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं बन सकती और राजनीतिक दलों को अपने मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने चाहिए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी मुख्यमंत्री की सार्वजनिक गतिविधियों या पीड़ित परिवारों से मिलने जैसे कार्यक्रमों में हस्तक्षेप करना न्यायालय का कार्यक्षेत्र नहीं है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित मामले की प्राथमिकी में मुख्यमंत्री विजय का नाम आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है, इसलिए केवल आशंकाओं के आधार पर उनकी यात्रा पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता।

    मुख्यमंत्री विजय करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात करने तथा प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और अन्य राहत उपायों की घोषणा करने वाले हैं। इसी प्रस्तावित दौरे को लेकर आपत्ति जताते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस तरह की गतिविधियों से मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

    अदालत ने इस दलील पर असहमति जताते हुए कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को अपने प्रतिद्वंद्वी के बयानों या कार्यक्रमों पर आपत्ति है तो उसका जवाब राजनीतिक मंच पर दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विवादों को अदालत में लाने की प्रवृत्ति उचित नहीं है और इससे न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि करूर भगदड़ मामले की जांच पहले से ही स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से आगे बढ़ रही है। ऐसे में जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने संबंधी किसी भी आरोप का मूल्यांकन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा, न कि राजनीतिक आशंकाओं के आधार पर। अदालत ने संकेत दिया कि जांच एजेंसियां अपने दायित्वों का निर्वहन स्वतंत्र रूप से करेंगी।

    इस मामले में पहले से जांच की निगरानी के लिए न्यायिक व्यवस्था लागू है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि जब जांच निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार चल रही है, तब केवल राजनीतिक मतभेदों के आधार पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता।

    सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को राजनीतिक मामलों में न्यायिक संयम का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका समाधान न्यायालय के बजाय सार्वजनिक विमर्श और राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री विजय का करूर दौरा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होने का रास्ता साफ हो गया है, जबकि करूर भगदड़ मामले की जांच अपनी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।

  • भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के सभी कानूनी रास्ते बंद: मानवाधिकार अदालत में आखिरी लड़ाई भी हारा, प्रत्यर्पण की प्रशासनिक औपचारिकताएं शुरू

    भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के सभी कानूनी रास्ते बंद: मानवाधिकार अदालत में आखिरी लड़ाई भी हारा, प्रत्यर्पण की प्रशासनिक औपचारिकताएं शुरू

    नई दिल्ली । पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के मुख्य आरोपी और लंबे समय से फरार चल रहे हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाए जाने की दिशा में एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) में अपनी आखिरी कानूनी लड़ाई हारने के बाद अब नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण पूरी तरह से तय हो गया है। राजनयिक और आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ब्रिटेन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीरव मोदी के पास मौजूद सभी कानूनी विकल्प अब पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं। इसके साथ ही ब्रिटिश सरकार की ओर से उसे भारत सौंपने की प्रशासनिक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इससे पहले यह तथ्य सामने आया था कि स्ट्रैसबर्ग स्थित यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने नीरव मोदी द्वारा दायर की गई याचिका को पूरी तरह गोपनीय रखा था। इस अदालत की यह स्थापित प्रक्रिया है कि मामलों के लंबित रहने के दौरान वह किसी भी प्रकार की जानकारी सार्वजनिक नहीं करती है। नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों में अपने सभी कानूनी रास्ते बंद होने के बाद अप्रैल 2026 में ईसीएचआर का दरवाजा खटखटाया था। इस कदम से ठीक पहले यूके सरकार ने उसे तुरंत भारत भेजने से संबंधित आवश्यक प्रत्यर्पण दस्तावेजों को अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसे रोकने के लिए उसने मानवाधिकार अदालत की शरण ली थी।

    नीरव मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय अदालत में यह याचिका तब दायर की गई थी, जब यूके हाईकोर्ट ने उसे प्रत्यर्पण के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत में अपील करने की अनुमति देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था। ब्रिटिश अदालत ने अपने फैसले में माना था कि भारत सरकार द्वारा भारतीय जेलों की स्थिति, चिकित्सा सुविधाओं और आरोपी की सुरक्षा को लेकर दिए गए आश्वासन पूरी तरह से पर्याप्त और संतोषजनक हैं। अब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार अदालत द्वारा भी किसी भी प्रकार की राहत देने से मना किए जाने के बाद उसके प्रत्यर्पण के मार्ग में मौजूद अंतिम तकनीकी और कानूनी अड़चन भी समाप्त हो गई है।

    उल्लेखनीय है कि नीरव मोदी मार्च 2019 में लंदन में अपनी गिरफ्तारी के बाद से ही वहां की वांड्सवर्थ जेल में न्यायिक हिरासत में बंद है। भारत में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडीडी) को पीएनबी धोखाधड़ी, कर्ज जालसाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के बेहद गंभीर मामलों में उसकी लंबे समय से तलाश है। भारतीय जांच एजेंसियों ने ब्रिटेन की अदालत में बेहद प्रभावी ढंग से पैरवी की है, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश अधिकारियों ने अब उसे भारतीय कानून के हवाले करने की अंतिम कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है और उसे किसी भी समय भारत लाया जा सकता है।

    इससे पूर्व, लंदन की हाईकोर्ट ऑफ जस्टिस ने नीरव मोदी की उस याचिका को भी पूरी तरह खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ बंद हो चुकी अदालती कार्यवाही को दोबारा शुरू करने की गुहार लगाई थी। नीरव मोदी ने ब्रिटेन के एक अन्य चर्चित मामले का हवाला देते हुए दावा किया था कि भारत भेजे जाने पर उसे प्रताड़ना और मानसिक टॉर्चर का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, भारतीय जांच एजेंसी सीबीआई के अधिकारियों ने अदालत में अकाट्य तथ्य और पुख्ता सबूत पेश कर नीरव मोदी के इन दावों को पूरी तरह से खारिज करवा दिया, जिसके बाद अदालत ने उसकी दलीलों को आधारहीन माना था।

  • बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में नया खुलासा, आरोपी कर्मचारी को मिला प्रमोशन और नोट गिनने की जिम्मेदारी

    बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में नया खुलासा, आरोपी कर्मचारी को मिला प्रमोशन और नोट गिनने की जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच के बीच सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपों के घेरे में आए कर्मचारी को मंदिर समिति में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती रहीं। यही नहीं, उन्हें पदोन्नति देकर चढ़ावे की गणना जैसे संवेदनशील कार्य में भी लगाया गया था, जिससे पूरे मामले पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के मुताबिक संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में हुई थी। यह ऐसा पद था, जहां पदोन्नति की व्यवस्था नहीं थी। इसके बावजूद वर्ष 2018 में उन्हें व्यक्तिगत सहायक के पद पर समायोजित किया गया। बाद में नियमों में संशोधन कर उनके लिए जनसंपर्क विशेष अधिकारी पद तक पदोन्नति का रास्ता भी तैयार किया गया। इसी दौरान उन्हें मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

    जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार

    मामले की जांच के लिए गठित समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, हालांकि समिति के सभी सदस्य अब तक बदरीनाथ नहीं पहुंचे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    बीकेटीसी अध्यक्ष ने क्या कहा

    बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र या प्रशासनिक जांच भी कराई जा सकती है। उनका कहना है कि संबंधित कर्मचारी मंदिर समिति का स्थायी कर्मचारी है और विभिन्न अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुका है। शिकायत मिलने के दिन ही जांच समिति गठित कर संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया था।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे बदले जरूर गए हैं, लेकिन पुराने कैमरों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है। यात्रा सीजन में कर्मचारियों की कमी के कारण कई बार अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी दी जाती हैं।

    संपत्ति की भी होगी जांच

    मंदिर समिति ने संकेत दिए हैं कि संदेह के घेरे में आए कर्मचारियों की संपत्ति की भी जांच की जाएगी। समिति के अनुसार चढ़ावे की राशि प्रतिदिन बैंक में जमा होती है और उसकी गणना बैंक प्रतिनिधि, गणना अधिकारी तथा तीर्थयात्रियों की मौजूदगी में की जाती है। अब तक रिकॉर्ड में किसी तरह की ओवरराइटिंग सामने नहीं आई है।

    कांग्रेस ने उठाए निष्पक्ष जांच पर सवाल

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनसे जुड़े अधिकारियों को ही जांच में शामिल करना उचित नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति या उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बिना श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल नहीं हो सकता। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा।

  • जम्मू-कश्मीर के डोडा में प्रकृति का भीषण प्रकोप: बादल फटने से थाथरी कस्बे में मची भारी तबाही, राष्ट्रीय राजमार्ग बंद और कई घर-वाहन क्षतिग्रस्त

    जम्मू-कश्मीर के डोडा में प्रकृति का भीषण प्रकोप: बादल फटने से थाथरी कस्बे में मची भारी तबाही, राष्ट्रीय राजमार्ग बंद और कई घर-वाहन क्षतिग्रस्त


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसूनी सीजन के दौरान प्रकृति का भीषण प्रकोप देखने को मिला है। राज्य के डोडा जिले के थाथरी इलाके में अचानक बादल फटने की एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है, जिसने स्थानीय जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। बादल फटने की इस घटना के बाद ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों से भारी मात्रा में कीचड़, बड़े-बड़े पत्थर और मलबा तीव्र गति से रिहायशी इलाकों की तरफ बहकर आ गया, जिसने थाथरी शहर और उसके आस-पास के निचले क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया।

    इस अचानक आई बाढ़ और मलबे के बहाव के कारण थाथरी का मुख्य बाजार और स्थानीय जामिया मस्जिद क्षेत्र सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। मलबे के तीव्र प्रवाह की वजह से बाजार में खड़ी कई गाड़ियां मलबे में दबकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि कई स्थानीय निवासियों के घरों को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। गनीमत यह रही कि इस पूरी अनहोनी में फिलहाल किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या जान जाने की सूचना नहीं मिली है, जिसे एक बड़ी राहत माना जा रहा है। हालांकि, भौतिक संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचा है।

    इस प्राकृतिक आपदा का सीधा असर क्षेत्र के परिवहन तंत्र पर भी पड़ा है। बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए मलबे के कारण बटोटे-डोडा-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-244) पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। सड़क पर भारी मात्रा में कीचड़ और पत्थर जमा हो जाने की वजह से प्रशासन को एहतियात के तौर पर इस हाईवे को यातायात के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा है। हाईवे बंद होने के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह से ठप हो गया है।

    मध्य प्रदेश। घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और अन्य संबंधित विभागों ने तत्परता दिखाते हुए प्रभावित क्षेत्र में तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय राजमार्ग को साफ करने और क्षेत्र में सामान्य कनेक्टिविटी को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए भारी अर्थ-मूविंग मशीनरी और जेसीबी मशीनों को काम पर लगाया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने आम जनता और यात्रियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि जब तक सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता, तब तक इस मार्ग पर गैर-जरूरी यात्रा से पूरी तरह परहेज करें।

    इधर जम्मू-कश्मीर के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर और इगतपुरी जैसे पश्चिमी हिस्सों में बादल फटने जैसी अत्यधिक भारी बारिश की आशंका को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया है। सुरक्षा के मद्देनजर वहां स्कूल, कॉलेज और प्रमुख मंदिरों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही ओडिशा में भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने के कारण मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। डोडा में फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी नुकसान का सटीक आकलन करने में जुटे हुए हैं।

  • चंपत राय की जगह कृष्ण मोहन संभालेंगे राम मंदिर ट्रस्ट की कमान, बोले- सबसे पहले व्यवस्था की कमियों को करेंगे दूर

    चंपत राय की जगह कृष्ण मोहन संभालेंगे राम मंदिर ट्रस्ट की कमान, बोले- सबसे पहले व्यवस्था की कमियों को करेंगे दूर


    अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा बदलाव किया गया है। ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को मंजूरी दे दी गई। इसके बाद कृष्ण मोहन (Krishna Mohan) को ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। खास बात यह है कि चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज कराने वाले भी कृष्ण मोहन ही हैं।

    कौन हैं कृष्ण मोहन?
    कृष्ण मोहन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र के चंद्रपुर गांव के रहने वाले हैं। वह भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी रह चुके हैं और महाराष्ट्र कैडर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद कृष्ण मोहन सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे। वर्तमान में वह हरदोई शहर में रहते हुए समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। सितंबर 2025 में उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था। यह पद कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद खाली हुआ था।

    लखनऊ यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई
    कृष्ण मोहन ने अपनी शिक्षा लखनऊ यूनिवर्सिटी से पूरी की। इसके बाद उन्होंने परमाणु ऊर्जा विभाग में भी काम किया। बाद में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ, जहां उन्होंने महाराष्ट्र में लंबे समय तक सेवाएं दीं। वर्ष 2012 में रिटायर होने के बाद वह समाजसेवा के कार्यों में जुट गए।

    ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति को सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट ने कहा है कि कृष्ण मोहन का शामिल होना समाज के व्यापक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    जिम्मेदारी संभालते ही बताईं प्राथमिकताएं
    अंतरिम महासचिव बनने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले से सभी को दुख पहुंचा है। उन्होंने माना कि प्रबंधन और संचालन व्यवस्था में कुछ कमियां रह गई थीं, जिनका फायदा उठाया गया।

    बताई ये प्राथमिकताएं-
    1. व्यवस्था की कमियों को दूर करना और सुरक्षा में सुधार करना।
    2. चढ़ावा चोरी के आरोपियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना।
    3. ट्रस्ट की छवि और रामभक्तों के भरोसे को फिर से मजबूत करना।

    कृष्ण मोहन ने कहा कि इस घटना से समाज में अविश्वास की स्थिति बनी है, लेकिन ट्रस्ट सभी न्यासियों के साथ मिलकर अपनी व्यवस्था को बेहतर बनाएगा और लोगों का विश्वास दोबारा कायम करने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे और प्रबंधन में मौजूद खामियों को दूर किया जाएगा।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 40 दिनों के CCTV में 70 चोरियां रिकॉर्ड, जेब-जूतों में नकदी छिपाते दिखे कर्मचारी

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 40 दिनों के CCTV में 70 चोरियां रिकॉर्ड, जेब-जूतों में नकदी छिपाते दिखे कर्मचारी


    अयोध्‍या । अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हाईलेवल बैठक हुई. करीब पांच घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों से लेकर जांच की प्रगति और ट्रस्ट की आगे की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया.

    एसआईटी जांच में कई बड़े खुलासे
    बैठक के बाद ट्रस्ट ने कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई, जिन पर सभी की नजरें टिकी थीं. दूसरी ओर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी और गबन के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है.

    40 दिन में 70 बार चोरी
    SIT की जांच के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 (लगभग 40 दिन ) के बीच उपलब्ध CCTV फुटेज में गिनती कक्ष के अंदर कई बार कर्मचारियों को नोटों की गड्डियां और खुले रुपये अपने कपड़ों, जेबों, जूतों तथा अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया. जांच रिपोर्ट में ऐसे करीब 70 संदिग्ध मामलों का उल्लेख किया गया है. जांच में साफ हुआ कि यह कोई एक-दो बार नहीं बल्कि कई दिनों तक दोहराई जाने वाली एक व्यवस्थित प्रक्रिया थी. गिनती कक्ष में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया. एंट्री और एग्जिट के समय तलाशी नहीं ली गई. कर्मचारियों के निजी सामान पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं था.

    जेबों- जूतों में भी पैसे छुपाकर ले गए आरोपी
    जांच में मालूम हुआ कि कई हंडियों की नकदी मिलाकर गिनी जाती थी और मूल्यवान वस्तुओं के रिकॉर्ड एवं सत्यापन में भी गंभीर कमियां पाई गईं. SIT ने प्रथम दृष्टया छह लोगों की संलिप्तता बताई है. इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्र, लवकुश मिश्र , मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रामशंकर मिश्र का नाम शामिल है.

    रिपोर्ट के अनुसार, जांच से पहले ही कुछ कर्मचारियों से लगभग 78.94 लाख रुपये की बरामदगी का संकेत मिला. इसके अलावा 4 जून 2026 को गिनती कक्ष से लगभग 2.25 लाख रुपये की अतिरिक्त बरामदगी का भी उल्लेख किया गया है.SIT ने पाया संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद जमा और वित्तीय लेन-देन मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई है. जांच से सुरक्षा व्यवस्था, CCTV निगरानी, SOP के अनुपालन, तलाशी व्यवस्था और पर्यवेक्षण में गंभीर लापरवाही रही, जिससे चोरी और गबन जैसी घटनाओं को रोकने में विफलता हुई. मूल्यवान वस्तुओं के प्रबंधन और रिकॉर्ड प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की सिफारिश की गई है.

  • मुंबई-दक्षिण गुजरात में बारिश बनी रेल संकट की वजह, पश्चिम रेलवे की 40 से अधिक ट्रेनें प्रभावित; हजारों यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

    मुंबई-दक्षिण गुजरात में बारिश बनी रेल संकट की वजह, पश्चिम रेलवे की 40 से अधिक ट्रेनें प्रभावित; हजारों यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

    नई दिल्ली। मुंबई और दक्षिण गुजरात में मानसून की तेज बारिश ने सोमवार को पश्चिम रेलवे के रेल परिचालन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया। कई स्थानों पर रेल पटरियों पर जलभराव होने से लंबी दूरी की ट्रेनों की आवाजाही बाधित हो गई। इसके चलते 40 से अधिक ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और हजारों यात्रियों को देरी, रद्दीकरण तथा मार्ग परिवर्तन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने राहत एवं सहायता कार्य तेज करते हुए प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों के लिए भोजन, पेयजल और सहायता केंद्रों की व्यवस्था की है।

    सबसे अधिक असर वसई रोड-विरार तथा सफाले-पालघर रेलखंड पर देखने को मिला, जहां भारी जलभराव के कारण ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। दोपहर तक विरार, वाणगांव, पालघर, दहानू रोड और वलसाड सहित कई स्टेशनों पर लंबी दूरी की अनेक ट्रेनों को रोकना पड़ा। जलभराव के कारण कई रेलगाड़ियों की गति धीमी करनी पड़ी, जबकि कुछ ट्रेनों को सुरक्षा कारणों से निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दिनभर में 40 से अधिक ट्रेन सेवाएं किसी न किसी रूप में प्रभावित रहीं। इनमें कई ट्रेनों का समय बदला गया, कुछ को रद्द करना पड़ा और कई रेलगाड़ियों को उनके निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही समाप्त कर दिया गया। इससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने-जाने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

    महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण रही, जहां सुबह कुछ ही घंटों के भीतर अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण रेल पटरियां जलमग्न हो गईं, जिससे परिचालन सामान्य बनाए रखना मुश्किल हो गया। इसके प्रभाव से कई प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनें रास्ते में फंस गईं। वहीं, गुजरात की ओर से आने वाली कुछ ट्रेनों को एहतियातन वापी और सूरत जैसे स्टेशनों पर रोक दिया गया ताकि प्रभावित रेलखंड पर अतिरिक्त दबाव न बढ़े।

    यात्रियों की सुविधा के लिए पश्चिम रेलवे ने राहत व्यवस्था भी शुरू की। विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से फंसे यात्रियों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराया गया। प्रमुख स्टेशनों पर सहायता केंद्र स्थापित किए गए, जहां यात्रियों को ट्रेन संचालन से जुड़ी जानकारी और आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    भारी बारिश का असर केवल लंबी दूरी की ट्रेनों तक सीमित नहीं रहा। मुंबई की उपनगरीय लोकल रेल सेवाएं भी प्रभावित हुईं। बोरीवली और चर्चगेट के बीच लोकल ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से चलीं, जबकि विरार-दहानू खंड पर परिचालन सबसे अधिक प्रभावित रहा। इससे दैनिक यात्रियों को भी कार्यालय और अन्य गंतव्यों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। अधिकारियों का कहना है कि मौसम की परिस्थितियों के अनुसार परिचालन में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं और जैसे ही जलभराव की स्थिति सामान्य होगी, ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बहाल करने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल प्रभावित रेलखंडों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक तकनीकी एवं राहत दल मौके पर तैनात हैं।

  • इंडोनेशिया पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का भव्य राजकीय स्वागत, फाइटर जेट्स ने किया एस्कॉर्ट; राष्ट्रपति प्रबोवो ने एयरपोर्ट पर की अगवानी

    इंडोनेशिया पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का भव्य राजकीय स्वागत, फाइटर जेट्स ने किया एस्कॉर्ट; राष्ट्रपति प्रबोवो ने एयरपोर्ट पर की अगवानी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को तीन देशों की अपनी आधिकारिक विदेश यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। इंडोनेशिया पहुंचने पर उनका विशेष राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया गया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं एयरपोर्ट पर मौजूद रहे और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी कर दोनों देशों के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का संदेश दिया।

    प्रधानमंत्री के विशेष विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायुसेना के फाइटर जेट्स ने उसे एस्कॉर्ट किया। राजकीय यात्राओं के दौरान दिया जाने वाला यह सम्मान दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास, सामरिक सहयोग और उच्च स्तरीय कूटनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। जकार्ता पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री का औपचारिक स्वागत भी निर्धारित राजकीय प्रोटोकॉल के तहत किया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा व्यक्तिगत रूप से किए गए स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति की उपस्थिति भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरी मित्रता तथा परस्पर सम्मान को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा के दौरान होने वाली द्विपक्षीय वार्ताएं दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा प्रदान करेंगी।

    भारत और इंडोनेशिया ने वर्ष 2018 में अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था। इसके बाद से रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग, ऊर्जा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सहित अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। मौजूदा यात्रा के दौरान भी इन विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, ताकि दोनों देशों के बीच सहयोग को और व्यापक बनाया जा सके।

    प्रधानमंत्री अपने इंडोनेशिया प्रवास के दौरान वहां रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। भारतीय प्रवासी लंबे समय से दोनों देशों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इस मुलाकात के दौरान समुदाय के साथ संवाद और द्विपक्षीय संबंधों में उनकी भागीदारी पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

    यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। यह स्थल भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। दोनों नेताओं का यह दौरा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और साझा ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

    इंडोनेशिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी विदेश यात्रा के अगले चरण में ऑस्ट्रेलिया और फिर न्यूजीलैंड जाएंगे। इस दौरान वे दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। चर्चाओं का मुख्य फोकस व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते रणनीतिक परिदृश्य के बीच प्रधानमंत्री मोदी का यह तीन देशों का दौरा भारत की क्षेत्रीय कूटनीति को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है। इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ बढ़ता सहयोग न केवल आर्थिक और सामरिक संबंधों को नई दिशा देगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और साझा विकास के एजेंडे को भी आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • इंडोनेशिया के 1100 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर पहुंचेंगे पीएम मोदी, हिंदू विरासत और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

    इंडोनेशिया के 1100 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर पहुंचेंगे पीएम मोदी, हिंदू विरासत और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंचे हैं। इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव योग्यकर्ता स्थित 9वीं शताब्दी का ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर माना जा रहा है। यह मंदिर न केवल दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे महत्वपूर्ण हिंदू धरोहरों में शामिल है, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंधों का भी जीवंत प्रतीक है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    प्रम्बानन मंदिर का निर्माण लगभग 850 ईस्वी के आसपास हुआ माना जाता है। यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है, जहां भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। परिसर का सबसे ऊंचा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर है। शिव मंदिर के भीतर माता पार्वती, भगवान गणेश और महर्षि अगस्त्य की प्राचीन मूर्तियां भी स्थापित हैं, जो इस परिसर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को और बढ़ाती हैं।

    मंदिर की दीवारों पर रामायण और भागवत पर आधारित विस्तृत शिल्पांकन आज भी आकर्षण का केंद्र हैं। इन कलाकृतियों में भारतीय संस्कृति और पौराणिक परंपराओं की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। मंदिर परिसर में नियमित रूप से रामायण बैले का मंचन भी किया जाता है, जो स्थानीय संस्कृति और भारतीय महाकाव्य की गहरी ऐतिहासिक कड़ी को दर्शाता है।

    प्रम्बानन मंदिर को वर्ष 1991 में विश्व धरोहर का दर्जा मिला था। यह स्थल आज भी लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। भारतीय और इंडोनेशियाई विशेषज्ञों के सहयोग से मंदिर परिसर के कुछ पुराने और क्षतिग्रस्त हिस्सों के संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान इस सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण कदमों की भी घोषणा होने की संभावना है।

    इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन यहां हिंदू और बौद्ध सभ्यता की विरासत आज भी सुरक्षित है। इस्लाम के आगमन से पहले यहां कई शक्तिशाली हिंदू-बौद्ध राजवंशों का शासन रहा, जिनकी छाप आज भी मंदिरों, स्मारकों और सांस्कृतिक परंपराओं में दिखाई देती है। जावा, बाली, सुमात्रा और अन्य द्वीपों पर स्थित अनेक प्राचीन मंदिर इस ऐतिहासिक विरासत के साक्षी हैं।

    बाली द्वीप आज भी हिंदू संस्कृति का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में हिंदू आबादी निवास करती है। वहीं इंडोनेशिया की सांस्कृतिक पहचान में रामायण, महाभारत, भगवान हनुमान और गरुड़ जैसे पात्रों का विशेष स्थान है। इनका प्रभाव स्थानीय कला, नृत्य, साहित्य और सांस्कृतिक आयोजनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल सांस्कृतिक महत्व तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को भी आगे बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। दोनों देशों के साझा हितों को देखते हुए यह दौरा व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक रणनीतिक सहयोग के इस संतुलन से भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई गति मिलेगी। प्रम्बानन मंदिर का दौरा इस बात का भी प्रतीक होगा कि सांस्कृतिक जुड़ाव आज भी दोनों देशों की साझेदारी की मजबूत नींव बना हुआ है।

  • 'भारत टैक्सी' मॉडल पर आएगी सहकारी जीवन बीमा कंपनी, अमित शाह बोले- 30 करोड़ सदस्यों को मिलेगा सशक्त मंच

    'भारत टैक्सी' मॉडल पर आएगी सहकारी जीवन बीमा कंपनी, अमित शाह बोले- 30 करोड़ सदस्यों को मिलेगा सशक्त मंच

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में जल्द ही एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी की स्थापना की जाएगी। यह कंपनी ‘भारत टैक्सी’ मॉडल की तर्ज पर संचालित होगी और इसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं की बीमा क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ करोड़ों सदस्यों को व्यापक लाभ उपलब्ध कराना होगा।

    सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि सहकारी जीवन बीमा कंपनी देश के सहकारी आंदोलन को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि ‘भारत टैक्सी’ मॉडल को अच्छा प्रतिसाद मिला है और अगले दो वर्षों में इसका विस्तार 500 शहरों तक करने की योजना है। इसी अनुभव के आधार पर अब बीमा क्षेत्र में भी सहकारी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान समय में करीब 8.5 लाख सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी इन संस्थाओं को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाने और बीमा सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख सहकारी संस्था इफको पहले से ही एक जापानी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम के माध्यम से बीमा कारोबार से जुड़ी हुई है।

    अमित शाह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन और तकनीकी सुधारों पर विशेष ध्यान दिया है। मंत्रालय ने देशभर की सहकारी संस्थाओं का व्यापक डेटाबेस तैयार किया है, जिससे भविष्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सहकारी तंत्र के विस्तार में मदद मिलेगी।

    उन्होंने जानकारी दी कि गुजरात के आणंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। यह संस्थान सहकारी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करेगा और क्षमता निर्माण के माध्यम से संस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने में योगदान देगा। उनके अनुसार सहकारी क्षेत्र अब केवल डेयरी, चीनी और उर्वरक उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि अनेक नए क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि ऐसी नीतियां तैयार करना है जो पूरे देश में सहकारी संस्थाओं के विकास को गति दें। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी राज्य सरकार ने मंत्रालय पर अपने अधिकार क्षेत्र में दखल देने का आरोप नहीं लगाया है।

    समारोह में केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार की पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अभी भी असंगठित है और इसे संगठित करने के लिए सहकारी व्यवस्था का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी सहकारिता क्षेत्र में सुधारों को लेकर सरकार के प्रयासों की सराहना की।

    कार्यक्रम में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया। इनमें 75 हजार टन क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का उद्घाटन तथा 47 नए अनाज भंडारण गोदामों का वर्चुअल शिलान्यास शामिल रहा। इसके अलावा ‘सहकार वन’ परियोजना का भूमिपूजन तथा उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की टिश्यू कल्चर सुविधाओं की आधारशिला भी रखी गई।

    इस अवसर पर 50 हजार प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को ई-पैक्स प्रणाली से जोड़ने की पहल को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। साथ ही भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीच बीज प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम के अंत में डेयरी सहकारी समितियों के लिए मॉडल उपविधियों तथा सहकारिता मंत्रालय की पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया।