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  • E20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद: भूटान ने भारत से साधारण ईंधन की मांग की, तेल कंपनियों के प्रस्ताव को किया खारिज

    E20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद: भूटान ने भारत से साधारण ईंधन की मांग की, तेल कंपनियों के प्रस्ताव को किया खारिज


    नई दिल्ली। देश में E20 पेट्रोल को लेकर चल रहा विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। भारत में लगातार यह आरोप लगाया जा रहा है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज कम हो रहा है और इंजन संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी बीच पड़ोसी देश भूटान ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताते हुए तेल कंपनियों और भारत सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।

    भूटानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भूटान सरकार ने भारत से अनुरोध किया है कि उसे पहले की तरह सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखी जाए। भूटान का कहना है कि उसके भौगोलिक हालात और परिवहन जरूरतों को देखते हुए उसे अधिक माइलेज देने वाले पारंपरिक ईंधन की आवश्यकता है।

    भूटान का बड़ा हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है, जहां ऊंची चढ़ाइयां और कठिन रास्ते हैं। ऐसे में वाहनों के लिए बेहतर माइलेज बेहद जरूरी माना जाता है। इसी आधार पर भूटान ने चिंता जताई है कि यदि E20 पेट्रोल से जुड़ी समस्याएं सही साबित होती हैं, तो पहाड़ी देश की परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    भूमिगत भंडारण को लेकर भी जताई चिंता
    भूटान के लिए E20 पेट्रोल को लेकर केवल माइलेज ही नहीं, बल्कि भंडारण भी एक बड़ी चुनौती बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूटान भारत से आयातित ईंधन को भूमिगत टैंकों में संग्रहित करता है। भूटानी अधिकारियों का कहना है कि इन टैंकों में E20 मिश्रित पेट्रोल रखने से पानी के रिसाव का खतरा बढ़ सकता है।

    स्थानीय मीडिया के अनुसार, भूमिगत भंडारण संरचना की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। वैज्ञानिक दृष्टि से भी बताया गया है कि E20 पेट्रोल में मौजूद इथेनॉल नमी को तेजी से सोख सकता है, जिससे टैंकों में पानी जमा होने की आशंका रहती है।

    भूटान ने E20 पेट्रोल खरीदने से किया इनकार
    भूटान, जो अपनी जरूरत का अधिकांश ईंधन भारत से खरीदता है, ने स्पष्ट रूप से ईथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लेने से इनकार कर दिया है। साथ ही उसने भारत सरकार से आग्रह किया है कि यदि भविष्य में E20 पेट्रोल की आपूर्ति बढ़ाई जाती है, तो उसे पहले से इसकी जानकारी दी जाए।

    भूटानी अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत सरकार को उनके लिए नए और सुरक्षित ईंधन भंडारण टैंकों की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    क्या है E20 विवाद?
    भारत में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से E20 पेट्रोल के समर्थन में रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह नीति कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    हालांकि, कई वाहन मालिकों का दावा है कि 2023 से पहले बने वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में गिरावट और इंजन की खराबी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। इसी कारण देश में इस ईंधन को लेकर बहस तेज हो गई है।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, जहां सरकार ने इसे एक परीक्षण (पायलट प्रोजेक्ट) के रूप में बताया। सरकार के अनुसार इसके परिणाम अगले वर्ष तक स्पष्ट होंगे। वहीं आलोचकों का कहना है कि इस नीति के चलते आम उपभोक्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

  • गुजरात में पीएम मोदी का अनोखा अंदाज, भाषण में बोले- “सुन रहे हो न, विनोद”, सभागार में गूंजे ठहाके

    गुजरात में पीएम मोदी का अनोखा अंदाज, भाषण में बोले- “सुन रहे हो न, विनोद”, सभागार में गूंजे ठहाके


    अहमदाबाद। गुजरात के साणंद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अलग अंदाज देखने को मिला। सेमीकंडक्टर उद्योग पर अपने संबोधन के बीच उन्होंने सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो चुके संवाद “सुन रहे हो न, विनोद” का जिक्र किया, जिसे सुनते ही कार्यक्रम स्थल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा।

    प्रधानमंत्री साणंद में सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट सुविधा के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति और बड़े लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ने की बात कही।

    गुजराती कहावतों से शुरू हुई चर्चा
    कार्यक्रम में सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस के चेयरमैन सुबैया ने अपने संबोधन में गुजराती की दो प्रसिद्ध कहावतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने विकास के लिए स्पष्ट दिशा तय की है और अब उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि वह उसी सोच के साथ आगे बढ़े।

    उन्होंने गुजराती कहावत “निशान चूक माफ, पण नहीं माफ नीचू निशान” का जिक्र करते हुए कहा कि ऊंचा लक्ष्य रखना जरूरी है। यदि लक्ष्य तक पूरी तरह नहीं पहुंचा जाए तो उसे स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन छोटा लक्ष्य तय करना उचित नहीं है।

    सुबैया ने यह भी बताया कि उनकी कंपनी की पहली सेमीकंडक्टर चिप्स की खेप जापान स्थित साझेदारों को भेजी जा रही है। उनके मुताबिक, यह भारत के वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दूसरी गुजराती कहावत “काम बोले छे” का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कंपनी का काम ही उसकी सबसे बड़ी पहचान बनेगा।

    पीएम मोदी ने ऐसे जोड़ा वायरल डायलॉग
    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों कहावतों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे कभी छोटे लक्ष्य या छोटी सोच में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने कहा, “अगर मुझे कोई प्रतिमा बनानी हो, तो मैं उसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाऊंगा।” इसे सरदार वल्लभभाई पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ओर संकेत माना गया।

    इसके बाद प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा, “और सुबैया जी ने ‘काम बोले छे’ भी कहा… सुन रहे हो न, विनोद… काम बोले छे।” यह सुनते ही सभागार में मौजूद लोगों और मंच पर बैठे अतिथियों के बीच हंसी और तालियों का दौर शुरू हो गया।

    सोशल मीडिया पर लोकप्रिय है यह संवाद
    “सुन रहे हो न, विनोद” और “देख रहे हो न, विनोद” जैसे संवाद एक वेब शो के बाद सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। बाद में कंटेंट क्रिएटर्स और मीम पेजों ने इनका व्यापक इस्तेमाल किया, जिससे यह इंटरनेट पर चर्चित संवाद बन गया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सार्वजनिक मंच से इसका उल्लेख किए जाने के बाद यह प्रसंग भी चर्चा का विषय बन गया।

  • CG: पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस

    CG: पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस


    दुर्ग।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की लोक संस्कृति (Folk Culture) को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पंडवानी गायिका (Pandvani singer) पद्म विभूषण तीजन बाई (Padma Vibhushan Teejan Bai) का रविवार सुबह 3:15 बजे रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

    दुर्ग जिले की निवासी तीजन बाई ने अपनी अद्भुत गायन शैली, दमदार प्रस्तुति और सशक्त अभिनय के माध्यम से पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में प्रस्तुत कर देश-विदेश के लाखों दर्शकों का दिल जीता।

    तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाएं सुनने और गाने का शौक था। सामाजिक विरोध और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को नहीं छोड़ा। महिलाओं के लिए उस दौर में पंडवानी की ‘कापालिक शैली’ में प्रस्तुति देना वर्जित माना जाता था, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ते हुए मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई। तीजन बाई ने 13 साल की उम्र में सबसे चंद्रखुरी में अपनी प्रस्तुति दी।

    तीजन बाई ने भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी समेत अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोककला का डंका बजाया। उनकी कला की सराहना देश-विदेश में हुई। तीजन बाई को कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले, जिनमें प्रमुख हैं- पद्मश्री (1988) संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995) पद्मभूषण (2003), पद्म विभूषण (2019)।

    तीजन बाई केवल एक लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक थीं। उन्होंने अपने जीवन के छह दशक लोककला को समर्पित किए और नई पीढ़ी को पंडवानी की समृद्ध परंपरा से जोड़ा।

  • बिहार में अपराध पर सख्ती की बड़ी तैयारी, 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट से तेज होगी सुनवाई और समयबद्ध मिलेगा न्याय

    बिहार में अपराध पर सख्ती की बड़ी तैयारी, 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट से तेज होगी सुनवाई और समयबद्ध मिलेगा न्याय

    नई दिल्ली ।  बिहार सरकार ने अपराध नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार जल्द ही 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी, ताकि गंभीर आपराधिक मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से लंबित मामलों की संख्या घटेगी, न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में अपराध से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन और प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करना तथा अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सरकार का विश्वास है कि समय पर न्याय मिलने से आम लोगों का न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।

    राज्य सरकार के अनुसार इन विशेष अदालतों के माध्यम से हत्या, लूट, दुष्कर्म, अपहरण और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी। लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होने पर अदालतों पर बढ़ता बोझ भी कम होगा और पीड़ित पक्ष को अपेक्षाकृत कम समय में न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे न्यायिक प्रणाली की कार्यक्षमता में भी सुधार आने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि अपराधियों के खिलाफ त्वरित फैसले और समयबद्ध सजा कानून के प्रति सम्मान और भय दोनों को मजबूत करेंगे। न्याय मिलने में होने वाली अनावश्यक देरी अक्सर पीड़ितों और गवाहों के लिए चुनौती बनती है। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    बिहार सरकार का कहना है कि न्यायिक सुधार केवल अदालतों की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्य की कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से भी है। यदि गंभीर अपराधों का त्वरित निपटारा होगा तो अपराध करने वालों के बीच स्पष्ट संदेश जाएगा कि कानून का उल्लंघन करने पर शीघ्र कार्रवाई और सजा निश्चित है। इससे अपराध की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायता मिलने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का भी मानना है कि फास्ट ट्रैक अदालतें तभी अधिक प्रभावी साबित होंगी, जब इनके साथ पर्याप्त न्यायिक अधिकारी, अभियोजन तंत्र, पुलिस जांच और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। समयबद्ध सुनवाई के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होगा, ताकि मामलों के निस्तारण की गति बनी रहे और प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ सके।

    सरकार का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, तेज और भरोसेमंद बनाना है। 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि यह योजना निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लागू होती है तो इससे न केवल लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

  • 1.78 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात का दावा, राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा देश

    1.78 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात का दावा, राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा देश

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत का रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि देश की बढ़ती विनिर्माण क्षमता, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर वैश्विक विश्वास का मजबूत संकेत है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा वर्ष 2014-15 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। वहीं रक्षा निर्यात भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यह बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उनके अनुसार यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रक्षा उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार की नीतियों ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों को रक्षा विनिर्माण में निवेश और नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे देश में आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण की क्षमता विकसित हुई है और निर्यात के नए अवसर भी खुले हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की शुरुआत हुई थी, तब इसकी सफलता को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की गई थीं। हालांकि समय के साथ यह पहल विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम देने में सफल रही। रक्षा उत्पादन के साथ-साथ मोबाइल निर्माण, ऑटोमोबाइल निर्यात, डिजिटल अवसंरचना और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी देश ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन की नीति के आधार पर विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक स्तर पर विनिर्माण, तकनीक और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल करेगा। उनके अनुसार आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण आधार है।

    उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने स्वदेशी चिप निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सरकार आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने के साथ उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दे रही है, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विनिर्माण क्षमता तैयार हो सके।

    राजनाथ सिंह ने डिजिटल क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से होने वाले डिजिटल लेनदेन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं और इसकी पहुंच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। इसके साथ ही देश में स्वदेशी 5जी नेटवर्क के विस्तार और 6जी तकनीक के विकास पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

    उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद जीएसटी अब केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का प्रभावी माध्यम बन चुका है। रक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में हुए इन सुधारों ने भारत की आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को नई दिशा दी है तथा देश को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की प्रक्रिया को गति प्रदान की है।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय कार्य का मिला सम्मान, डॉ. रश्मि विज को राज्य स्तरीय डॉक्टर्स अवॉर्ड, एचपीवी अभियान में अमृतसर बना अग्रणी

    स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय कार्य का मिला सम्मान, डॉ. रश्मि विज को राज्य स्तरीय डॉक्टर्स अवॉर्ड, एचपीवी अभियान में अमृतसर बना अग्रणी


    नई दिल्ली । स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने और जनहित से जुड़े टीकाकरण अभियानों को सफलतापूर्वक लागू करने में उल्लेखनीय योगदान के लिए जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रश्मि विज को पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से राज्य स्तरीय डॉक्टर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, टीकाकरण कार्यक्रमों की प्रभावी निगरानी तथा जनजागरूकता बढ़ाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया।

    डॉ. रश्मि विज ने विशेष रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में अमृतसर जिले ने एचपीवी टीकाकरण कवरेज के मामले में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही सिविल अस्पताल को पहला ‘मुस्कान’ प्रमाणन दिलाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों को नई पहचान मिली।

    सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. रश्मि विज ने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, मेडिकल अधिकारियों, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का समान योगदान रहा है, जिन्होंने अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा 14 से 15 वर्ष की किशोरियों के लिए शुरू किए गए एचपीवी टीकाकरण अभियान को अमृतसर में मिशन के रूप में संचालित किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया तथा वैक्सीन से जुड़ी भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास किया। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में पात्र किशोरियों का टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सका।

    डॉ. विज ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन को विश्व के अनेक देशों में लंबे समय से सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले यह टीका सीमित रूप से निजी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध था, जबकि अब पंजाब सरकार पात्र किशोरियों को इसे निःशुल्क उपलब्ध करा रही है। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम को मजबूत करना है।

    उन्होंने इस अवसर पर बरसात के मौसम में डेंगू से बचाव को लेकर भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की। उनके अनुसार स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से जागरूकता अभियान चला रहा है और प्रत्येक सप्ताह डेंगू नियंत्रण गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। उन्होंने नागरिकों से घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, पानी जमा न होने देने तथा कूलर, गमले, टायर और अन्य पात्रों की नियमित सफाई करने का आग्रह किया।

    डॉ. रश्मि विज ने कहा कि मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और सामुदायिक जागरूकता दोनों समान रूप से आवश्यक हैं। उन्होंने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, संतुलित आहार अपनाने, खुले में बिकने वाले अस्वच्छ खाद्य पदार्थों से परहेज करने और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। उनका मानना है कि जनभागीदारी और स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों से न केवल टीकाकरण अभियान सफल बनाया जा सकता है, बल्कि डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम भी प्रभावी ढंग से की जा सकती है।

  • 2020 दिल्ली दंगा साजिश केस में अदालत का बड़ा फैसला, UAPA मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी नामंजूर

    2020 दिल्ली दंगा साजिश केस में अदालत का बड़ा फैसला, UAPA मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी नामंजूर

    नई दिल्ली। वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। दोनों आरोपियों ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज मामले में ट्रायल कोर्ट से नियमित जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की प्रकृति को देखते हुए फिलहाल उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।

    यह मामला दिल्ली दंगा साजिश केस की एफआईआर संख्या 59/2020 से संबंधित है। इस प्रकरण की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही है। जांच एजेंसी का आरोप है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की आड़ में व्यापक स्तर पर हिंसा भड़काने की कथित साजिश रची गई थी। इन्हीं आरोपों के आधार पर UAPA तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

    अदालत के समक्ष दायर जमानत याचिकाओं में दोनों आरोपियों की ओर से नियमित जमानत देने का अनुरोध किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाएं स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

    दिल्ली दंगा साजिश मामला पिछले कई वर्षों से देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ विस्तृत जांच की गई है और विभिन्न चरणों में अदालत के समक्ष आरोपपत्र भी प्रस्तुत किए जा चुके हैं। कानूनी प्रक्रिया के दौरान कई बार जमानत और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई होती रही है, जिससे यह मामला लगातार न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।

    फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान 50 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। हिंसा के दौरान अनेक मकान, दुकानें, वाहन और अन्य संपत्तियां भी क्षतिग्रस्त हुई थीं। इसके बाद पुलिस ने घटनाक्रम की विस्तृत जांच शुरू की और कथित बड़ी साजिश के पहलू को भी जांच के दायरे में शामिल किया।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि UAPA के तहत दर्ज मामलों में जमानत संबंधी प्रावधान सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में अधिक कठोर होते हैं। ऐसे मामलों में अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपों की गंभीरता और कानून में निर्धारित शर्तों के आधार पर निर्णय लेती है। इसलिए प्रत्येक जमानत याचिका का मूल्यांकन मामले के तथ्यों और न्यायिक मानकों के अनुरूप किया जाता है।

    अदालत के ताजा फैसले के बाद दोनों आरोपियों के लिए फिलहाल ट्रायल कोर्ट से राहत का रास्ता बंद हो गया है। हालांकि भारतीय न्यायिक व्यवस्था के तहत उनके पास उच्च न्यायालय अथवा अन्य सक्षम न्यायिक मंचों पर कानूनी उपाय अपनाने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। मामले की आगे की सुनवाई और ट्रायल निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगा।

  • 6 से 11 जुलाई तक प्रधानमंत्री मोदी का अहम विदेश दौरा, व्यापार, रक्षा और निवेश समेत कई मुद्दों पर होगी उच्चस्तरीय बातचीत

    6 से 11 जुलाई तक प्रधानमंत्री मोदी का अहम विदेश दौरा, व्यापार, रक्षा और निवेश समेत कई मुद्दों पर होगी उच्चस्तरीय बातचीत

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की बहुस्तरीय विदेश यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे का उद्देश्य तीनों देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना है। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और व्यापार, निवेश, रक्षा, क्षेत्रीय सहयोग तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे अहम विषयों पर चर्चा करेंगे।

    प्रधानमंत्री अपनी यात्रा की शुरुआत इंडोनेशिया से करेंगे, जहां वह 6 से 8 जुलाई तक आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वह इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेता भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे और भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इंडोनेशिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर प्रंबानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती देने का प्रतीक मानी जा रही है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री वहां भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे और प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद करेंगे।

    इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करेंगे। मेलबर्न में वह ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज़ के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, आर्थिक साझेदारी, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे।

    ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भाग लेंगे, जहां दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों और निवेशकों को संबोधित करेंगे। इस मंच पर व्यापारिक सहयोग बढ़ाने, निवेश के नए अवसर तलाशने और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर रहेगा। प्रधानमंत्री मेलबर्न में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।

    यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 10 और 11 जुलाई को न्यूजीलैंड पहुंचेंगे। यह दौरा विशेष महत्व रखता है क्योंकि लगभग चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की राजकीय यात्रा होगी। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ उनकी विस्तृत वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, वाणिज्य, रक्षा, कृषि, शिक्षा और अन्य सहयोगी क्षेत्रों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में बढ़ते संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नई पहल पर भी चर्चा होने की संभावना है।

    न्यूजीलैंड में प्रधानमंत्री व्यापार और खेल जगत की प्रमुख हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित कर दोनों देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने का संदेश देंगे। यह छह दिवसीय विदेश दौरा भारत की सक्रिय कूटनीतिक नीति, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की रणनीति और प्रमुख साझेदार देशों के साथ बहुआयामी संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • वैश्विक नौसैनिक मंच पर भारत की बढ़ी रणनीतिक भागीदारी, RIMPAC 2026 में P-8I विमान के साथ भारतीय नौसेना करेगी संयुक्त युद्धाभ्यास

    वैश्विक नौसैनिक मंच पर भारत की बढ़ी रणनीतिक भागीदारी, RIMPAC 2026 में P-8I विमान के साथ भारतीय नौसेना करेगी संयुक्त युद्धाभ्यास

    नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने दुनिया के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास RIMPAC 2026 में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराते हुए P-8I समुद्री गश्ती विमान को हवाई भेज दिया है। इस अभ्यास में भारत की मौजूदगी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, साझेदारी और संयुक्त सैन्य सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित यह अभ्यास विभिन्न देशों की नौसेनाओं को आधुनिक युद्धक परिस्थितियों में एक साथ प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करता है।

    अमेरिकी प्रशांत बेड़े के नेतृत्व में आयोजित होने वाला RIMPAC इस वर्ष अपने 30वें संस्करण में आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन 24 जून से 31 जुलाई तक हवाई द्वीप समूह और उसके आसपास किया जा रहा है। इस बार अभ्यास की थीम ‘Partners: Integrated and Ready’ रखी गई है, जिसका उद्देश्य सहभागी देशों के बीच बेहतर समन्वय, साझा रणनीति और संयुक्त परिचालन क्षमता को विकसित करना है।

    भारतीय नौसेना का P-8I विमान समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियानों, खुफिया जानकारी जुटाने तथा लंबी दूरी की समुद्री गश्त के लिए अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म माना जाता है। इस विमान की भागीदारी से भारत को समुद्री निगरानी, सूचना साझा करने और सहयोगी नौसेनाओं के साथ संयुक्त संचालन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। साथ ही इससे समुद्री क्षेत्र में अंतर-संचालन क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    इस वर्ष आयोजित अभ्यास में 30 देशों की नौसेनाएं और सैन्य बल हिस्सा ले रहे हैं। इसमें 30 से अधिक युद्धपोत, पांच पनडुब्बियां, 200 से अधिक सैन्य विमान, 15 देशों की थल सेनाएं तथा लगभग 30 हजार सैन्यकर्मी शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर होने वाला यह अभ्यास वैश्विक समुद्री सुरक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है, जहां विभिन्न देशों की सेनाएं आधुनिक युद्धक और मानवीय अभियानों का संयुक्त प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं।

    अभ्यास के दौरान प्रतिभागी देश समुद्र और जमीन दोनों क्षेत्रों में कई प्रकार के अभियानों का अभ्यास करेंगे। इनमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, हवाई रक्षा, मिसाइल और तोप अभ्यास, समुद्री सुरक्षा अभियान, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, बारूदी सुरंग निष्क्रियकरण, विस्फोटक आयुध प्रबंधन, गोताखोरी तथा बचाव अभियान जैसे कई महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य विभिन्न सेनाओं के बीच समन्वय और संचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है।

    सैन्य अधिकारियों का मानना है कि जटिल और वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त अभ्यास से सहभागी देशों की युद्धक तैयारी बेहतर होती है। इसके माध्यम से सैन्य बल आधुनिक रणनीतियों, तकनीकी प्रणालियों और परिचालन प्रक्रियाओं को साझा करते हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में मिलकर प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने की क्षमता विकसित होती है। यह अभ्यास समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन को भी मजबूती प्रदान करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सामरिक महत्व को देखते हुए भारत की सक्रिय भागीदारी उसके समुद्री हितों और क्षेत्रीय सहयोग की नीति को और मजबूत करती है। RIMPAC 2026 में भारतीय नौसेना की उपस्थिति न केवल उसकी पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि यह वैश्विक समुद्री सुरक्षा, मुक्त एवं समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र और मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • लखनऊ पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर वरिष्ठ नेताओं संग करेंगे मंथन

    लखनऊ पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर वरिष्ठ नेताओं संग करेंगे मंथन

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे। उनके दौरे को वर्ष 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति तथा संगठनात्मक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

    लखनऊ पहुंचने पर नितिन नवीन का पार्टी कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्ण स्वागत किया। स्वागत कार्यक्रम के दौरान उनके काफिले के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनका स्वागत किया और राज्य में उनके आगमन पर शुभकामनाएं दीं। दौरे के दौरान पार्टी नेतृत्व और राज्य सरकार के शीर्ष नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है।

    भाजपा सूत्रों के अनुसार इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करना और संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने की रणनीति तैयार करना है। पार्टी नेतृत्व विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से फीडबैक लेकर भविष्य की कार्ययोजना को अंतिम रूप देने पर भी विचार करेगा।

    अपने दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान नितिन नवीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी बैठक करेंगे। इसके अलावा उनकी प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्रियों, विधायकों तथा विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग चरणों में चर्चा प्रस्तावित है। इन बैठकों में संगठन के विस्तार, जनसंपर्क अभियान और चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय अध्यक्षों, जिला इकाई प्रमुखों और अन्य संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ भी संवाद करेगा। माना जा रहा है कि इन बैठकों के माध्यम से जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा। भाजपा संगठन आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर तक अपनी तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

    दौरे के दौरान नितिन नवीन समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों के साथ संवाद का कार्यक्रम भी निर्धारित है। पार्टी का मानना है कि ऐसे संवादों से विभिन्न वर्गों के सुझाव प्राप्त होंगे और संगठन को व्यापक जनसंपर्क अभियान में मदद मिलेगी।

    भाजपा अध्यक्ष का यह दौरा उत्तर प्रदेश में उनके हालिया दौरों की श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पहले भी वह राज्य के विभिन्न शहरों का दौरा कर संगठनात्मक बैठकों में भाग ले चुके हैं। पार्टी नेतृत्व लगातार राज्य में संगठन की सक्रियता बढ़ाने और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद पर जोर दे रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य होने के कारण भाजपा की चुनावी रणनीति में केंद्रीय भूमिका निभाता है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इन बैठकों से निकले निर्णय भाजपा की चुनावी रणनीति को और स्पष्ट कर सकते हैं।