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  • पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदलेगा समीकरण, तीस्ता जल विवाद सुलझने की उम्मीद..

    पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदलेगा समीकरण, तीस्ता जल विवाद सुलझने की उम्मीद..

    ढाका। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। इस राजनीतिक बदलाव ने भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से लंबित जल विवादों के समाधान को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं।

    बांग्लादेश की सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भाजपा को जीत पर बधाई देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। पार्टी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के प्रदर्शन की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे दोनों पक्षों के रिश्ते और मजबूत होंगे। बीएनपी का मानना है कि नई राजनीतिक परिस्थिति से ढाका और कोलकाता के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौते को लेकर नई प्रगति की संभावना जताई गई है।

    तीस्ता विवाद पर ममता पर आरोप
    बीएनपी ने अपने बयान में ममता बनर्जी और उनकी सरकार को तीस्ता समझौते में देरी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि पिछली राज्य सरकार के रुख के कारण यह संधि लंबे समय से अटकी हुई है। अब बीएनपी को उम्मीद है कि भाजपा सरकार केंद्र के साथ समन्वय कर इस समझौते को आगे बढ़ाएगी। उनका कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद तीस्ता बैराज परियोजना को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

    पुराना है जल बंटवारे का मुद्दा
    भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं, लेकिन अब तक सिर्फ दो जल समझौते ही हो सके हैं—गंगा जल संधि और कुशियारा नदी संधि। 1996 की गंगा जल संधि के तहत फरक्का बैराज पर पानी के बंटवारे को नियंत्रित किया जाता है, हालांकि बांग्लादेश समय-समय पर कम पानी मिलने की शिकायत करता रहा है।

    तीस्ता नदी को लेकर 1983 में एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% पानी देने की बात कही गई थी, लेकिन यह पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। बाद में 2011 में मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान नए प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन राज्य सरकार के विरोध के चलते यह समझौता भी अधूरा रह गया।

    वैचारिक अंतर के बावजूद सहयोग की उम्मीद
    बीएनपी नेता हेलाल ने यह भी कहा कि भले ही बीएनपी और भाजपा के बीच वैचारिक अंतर हो, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि तीस्ता जल विवाद और द्विपक्षीय संबंध जैसे मुद्दों पर दोनों पक्ष सहयोग कर सकते हैं। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तेजी आने की संभावना है, जिससे लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।

  • दुनिया में भारत का जलवा: विदेशों से आया रिकॉर्ड पैसा, रेमिटेंस में फिर नंबर-1

    दुनिया में भारत का जलवा: विदेशों से आया रिकॉर्ड पैसा, रेमिटेंस में फिर नंबर-1

    नई दिल्‍ली। वैश्विक स्तर पर भारतीयों की मेहनत और कौशल का असर एक बार फिर दिखा है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों में काम कर रहे भारतीयों ने अपने देश को रिकॉर्ड स्तर पर पैसा भेजकर नया इतिहास रच दिया है।
    इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन की ‘वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, साल 2024 में भारत को करीब 137 बिलियन डॉलर (लगभग 11.4 लाख करोड़ रुपये) का रेमिटेंस मिला। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और भारत लगातार एक दशक से इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।
    00 बिलियन डॉलर पार करने वाला इकलौता देश
    रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का पहला और इकलौता देश बन गया है जिसने रेमिटेंस में 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया है। इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर भारतीयों की आर्थिक भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है।
    दूसरे देशों से काफी आगे भारत
    रेमिटेंस के मामले में भारत के बाद मेक्सिको दूसरे, फिलीपींस तीसरे और फ्रांस चौथे स्थान पर हैं। हालांकि इनमें से कोई भी देश अभी तक 100 बिलियन डॉलर के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है।
    लगातार बढ़ता ग्राफ
    अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2010 में भारत को करीब 53.48 बिलियन डॉलर, 2015 में 68.91 बिलियन डॉलर और 2020 में 83.15 बिलियन डॉलर का रेमिटेंस मिला था।
    पिछले चार वर्षों में इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया है।
    किन देशों से आता है ज्यादा पैसा?
    रेमिटेंस भेजने वाले देशों में अमेरिका सबसे आगे है, जहां से 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसके अलावा सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और जर्मनी भी प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं।
    छात्रों की भी मजबूत मौजूदगी
    आर्थिक योगदान के साथ-साथ भारतीय छात्र भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
    आंकड़ों के मुताबिक, विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है। 2022 तक 6.20 लाख से अधिक भारतीय छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा ले रहे थे।
    रेमिटेंस के क्षेत्र में भारत की यह उपलब्धि न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि दुनियाभर में भारतीयों की भूमिका कितनी अहम हो चुकी है। लगातार बढ़ता यह आंकड़ा आने वाले समय में भारत की आर्थिक ताकत को और मजबूत कर सकता है।
  • टोल प्लाजा हटेंगे…. देश में शुरू होगा नया GPS बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम

    टोल प्लाजा हटेंगे…. देश में शुरू होगा नया GPS बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम


    नई दिल्ली।
    देश में बहुत जल्द ही नया टोल सिस्टम (New Toll System) आने वाला है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने इसको लेकर जानकारी दी है। इसके मुताबिक इस साल के अंत तक पूरे देश से टोल प्लाजा हट सकते हैं। इसकी जगह ऑटोमैटिक सिस्टम (Automatic system) शुरू होगा। जीपीएस बेस्ड इस सिस्टम (GPS Based System) के जरिए गाड़ियों की नंबर प्लेट और फास्टैग लिंक्ड सिस्टम से पैसे कट जाएंगे। गडकरी ने इस सिस्टम के कई फायदे बताए हैं। जिसमें सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टोल प्लाजा पर लगने वाली लाइनों से छुटकारा मिल जाएगा।


    जेब पर भी नहीं पड़ेगा भारी

    नितिन गडकरी ने बताया कि नया सिस्टम काफी सस्ता भी पड़ेगा। टाइम्स ड्राइव ऑटो समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 के दौरान केंद्रीय परिवहन मंत्री इस नए सिस्टम की खूबियां बता रहे थे। उन्होंने कहाकि एक बार ऑटोमैटिक सिस्टम लागू होने के बाद वाहन चालकों के पैसे भी बचेंगे। गडकरी ने कहाकि अभी तक टोल बूथ पर 125 से 150 रुपए देने पड़ते हैं। लेकिन नया सिस्टम लागू होने के बाद यह रकम घटकर 15 रुपए प्रति टोल तक आ सकती है। सिर्फ इतना ही नहीं, 3000 रुपए का पास भी बनवाया जा सकेगा, जिससे वाहन चालक 200 टोल क्रॉसिंग्स तक पार कर सकेंगे।


    कैसे कटेगा पैसा

    नए टोल सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए गडकरी ने कहाकि वाहन चालक आराम से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से जाएंगे। बिना वाहन को रोके नंबर प्लेट और फास्टैग डिटेल कैप्चर की जाएंगी। इसके बाद तय की गई दूरी के अनुसार बैंक अकाउंट से टोल अमाउंट ऑटोमैटिकली कट जाएगी। परिवहन मंत्री के मुताबिक फिलहाल 85 टोल लोकेशंस पर यह सिस्टम पहले ही शुरू किया जा चुका है। इस साल के अंत तक इसे पूरे देश में लागू करने की योजना है।

    ट्रॉलिंग पर क्या बोले

    नितिन गडकरी ने कहाकि सुधार हमेशा प्रैक्टिकल होने चाहिए। उन्होंने गाड़ियों के हॉर्न को बांसुरी और तबले की धुनों से बदले जाने की अपने सुझाव को याद किया। इसके लिए उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा ट्रॉल किया गया था। गडकरी ने बताया कि लोगों ने इस आइडिया की इतनी ज्यादा खिंचाई की कि उन्हें यह आइडिया ही ड्रॉप करना पड़ा। उन्होंने कहाकि इसके बाद मुझे समझ आया कि सुधार प्रैक्टिकल होने चाहिए और ऐसे होने चाहिए जिसे बड़े पैमाने पर स्वीकार किया जाए।

  • बड़ा फैसला…. छह साल बाद सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या…. कैबिनेट ने दी मंजूरी

    बड़ा फैसला…. छह साल बाद सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या…. कैबिनेट ने दी मंजूरी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जजों की संख्या को लेकर मंगलवार को अहम फैसला लिया। कैबिनेट ने SC में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने की मंजूरी दे दी। यह फैसला छह साल बाद लिया गया है, जब 2019 में इसे 31 से बढ़ाकर 33 किया गया था। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद सुप्रीम कोर्ट को और मजबूत करना व न्याय प्रक्रिया को तेज (Justice Process Speeding up) करना है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने बताया कि फिलहाल अदालत में 33 न्यायाधीश और एक मुख्य न्यायाधीश हैं। संसद के आगामी सत्र में इस संबंध में एक विधेयक पेश किया जाएगा। विधेयक के पारित होने के बाद मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के जजों की कुल संख्या 38 हो जाएगी। यह फैसला न्यायालय में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से लिया गया है।


    SC में कुछ इस तरह बढ़ती गई जजों की संख्या

    सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 में मूल रूप से मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर 10 न्यायाधीशों का प्रावधान था। 1960 में इसे 13 और बाद में 17 किया गया। 1986 के संशोधन से संख्या 25 हो गई और 2009 में इसे 30 कर दिया गया। फिलहाल ताजा प्रस्ताव के बाद न्यायपालिका को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उठाया गया है, जो देश के न्यायिक ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक साबित होगा।

    भारत के संविधान में सुप्रीम कोर्ट की कुल संख्या तय नहीं है। अनुच्छेद 124(1) के तहत चीफ जस्टिस के अलावा अन्य जजों की संख्या संसद तय करती है। समय-समय पर बढ़ती मुकदमों की संख्या को देखते हुए इसमें बदलाव किया जाता है। इस बढ़ोतरी का मकसद लंबित मामलों के बोझ को कम करना है। हालांकि, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ जजों की संख्या बढ़ाने से ही न्याय में देरी पूरी तरह दूर नहीं हो सकती।

  • बाजार में बिकने वाला सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में केन्द्र सरकार

    बाजार में बिकने वाला सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में केन्द्र सरकार


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) बाजार (Market) में बिकने वाले सिंथेटिक पनीर (Synthetic Cheese) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India- FSSAI) ने फैसला लिया है कि कम पोषण वाले और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले दिखावटी पनीर को बाजार से पूरी तरह बाहर किया जाएगा। मामले से जुड़े दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

    इस मामले में बनी एक हाई लेवल कमेटी ने अक्टूबर 2025 में इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया था, जिसे मार्च 2026 की बैठक में आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। समिति का कहना था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक देश है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में बड़ी मात्रा में सस्ता सिंथेटिक पनीर बेचा जा रहा है। यह असली पनीर जैसा दिखता और स्वाद में मिलता-जुलता होता है, जिससे आम ग्राहक के लिए पहचान करना मुश्किल हो जाता है और वह भ्रमित होता है।


    1,000 कंपनियों के पास सिंथेटिक पनीर बनाने के लाइसेंस

    इसी वजह से इसे बाजार से चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना बनाई जा रही है। वर्तमान में सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं है। देश में करीब 1,000 ऐसी कंपनियां या कारोबारी हैं, जिनके पास इसे बनाने का लाइसेंस है। नई नीति के तहत अब नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे और मौजूदा कंपनियों को अपना स्टॉक खत्म करने और उत्पादन बंद करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।


    इसलिए पड़ी जरूरत

    बीते कुछ समय से बाजार में ‘सिंथेटिक पनीर’ का चलन तेजी से बढ़ा है। यह एक सस्ता विकल्प है, जिसे ताजे दूध की बजाय मुख्यतः पाम ऑयल, मिल्क पाउडर, स्टार्च और इमल्सीफायर्स से बनाया जाता है। यह दिखने और बनावट में असली पनीर जैसा होता है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और पोषण मूल्य दूध से बने पनीर की तुलना में काफी कम होता है। यह सिंथेटिक पनीर सस्ता होने के कारण कई रेस्तरां में उपयोग किया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को भ्रम होता है।

    लगातार बढ़ रहा बाजार: उत्तर भारत में खासतौर पर पनीर प्रोटीन का प्रमुख स्रोत माना जाता है। यही कारण है कि भारत का पनीर बाजार 10.8 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। मार्केट रिसर्च कंपनी आईएमएआरसी के अनुसार, वर्ष 2033 तक भारतीय पनीर बाजार के 22.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 8.7% रहने की संभावना है।

    कीमत में भारी अंतर: अधिकारियों के अनुसार, असली ब्रांडेड पनीर की कीमत करीब 450 रुपये प्रति किलो तक होती है, जबकि खुले में बिकने वाला सिंथेटिक या बिना ब्रांड वाला पनीर 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।


    स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ा

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सिंथेटिक पनीर में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम और फैट बहुत ज्यादा होता है। इसके नियमित सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध पैदा हो सकता है, जो टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकता है।

  • बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत पर दुनियाभर से आ रही प्रतिक्रियाएं, ट्रंप ने भी PM मोदी को दी बधाई

    बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत पर दुनियाभर से आ रही प्रतिक्रियाएं, ट्रंप ने भी PM मोदी को दी बधाई


    वॉशिंगटन।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party -BJP)) की ऐतिहासिक जीत के बाद देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत की बधाई दी है।

    व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने बातचीत में बताया कि हाल ही में फोन पर हुई बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि भारत सौभाग्यशाली है कि उसका नेतृत्व आप जैसे नेता के हाथों में है। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को इस हालिया ऐतिहासिक और निर्णायक चुनावी जीत के लिए बधाई दी है।


    बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव

    भाजपा की इस जीत के साथ पहली बार पार्टी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की है। यह राज्य लंबे समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। इस चुनाव परिणाम के साथ ही राज्य में बनर्जी का करीब 15 साल का शासन समाप्त हो गया है। इसे पीएम मोदी के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उनका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कद और मजबूत हुआ है।


    ‘यह नए युग की शुरुआत’

    जीत की घोषणा के बाद नई दिल्ली में समर्थकों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इसे पश्चिम बंगाल के लिए नए युग की शुरुआत बताया था। उन्होंने कहा कि यह जनादेश भयमुक्त, विकासशील और विश्वास से भरे बंगाल की दिशा में एक निर्णायक कदम है। पीएम मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का उल्लेख करते हुए कहा “अब दशकों का इंतजार खत्म हुआ है और जनता ने उस विजन को साकार करने का अवसर भाजपा को दिया है।”


    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा भारत का प्रभाव

    इस ऐतिहासिक जीत और ट्रंप की बधाई को भारत की बढ़ती वैश्विक साख से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूती मिलेगी और वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका और प्रभावशाली होगी।

  • टिकट के बदले 5 करोड़ मांगे गए, TMC छोड़ मनोज तिवारी का बड़ा खुलासा, बंगाल में सियासी भूचाल

    टिकट के बदले 5 करोड़ मांगे गए, TMC छोड़ मनोज तिवारी का बड़ा खुलासा, बंगाल में सियासी भूचाल



    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर और नेता मनोज तिवारी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी पारा और चढ़ा दिया है। तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से नाता तोड़ते हुए पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    मनोज तिवारी, जो कभी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल थे और राज्य सरकार में खेल मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं, अब खुलकर पार्टी के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि विधानसभा चुनाव में टिकट देने के बदले उनसे 5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी।

    तिवारी का कहना है कि यह घटना उनके लिए चौंकाने वाली थी और इसी ने उन्हें पार्टी छोड़ने के फैसले के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में पारदर्शिता और सिद्धांतों की बात करने वाली पार्टी के भीतर इस तरह की मांग बेहद निराशाजनक है।

    उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि TMC के साथ उनका “चैप्टर खत्म” हो चुका है और अब वे आगे की राजनीतिक राह पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे या नहीं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच बंगाल चुनाव के नतीजों ने पहले ही राज्य की राजनीति की तस्वीर बदल दी है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहली बार राज्य में सत्ता हासिल की है, जबकि लंबे समय से सत्ता में रही ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका लगा है।

    राजनीतिक जानकार मानते हैं कि चुनावी हार के बाद TMC के भीतर असंतोष बढ़ सकता है और मनोज तिवारी जैसे नेताओं के आरोप इस असंतोष को और हवा दे सकते हैं। ऐसे आरोपों से पार्टी की छवि पर भी असर पड़ सकता है, खासकर तब जब विपक्ष पहले से ही पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर हमलावर रहा है।

    हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक ममता बनर्जी या TMC की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे राजनीतिक अटकलों का दौर और तेज हो गया है।

    इस घटनाक्रम का एक और पहलू यह भी है कि चुनाव के बाद नेताओं का दल-बदल और खुलासे सामने आना आम बात होती है। लेकिन जब कोई बड़ा नाम इस तरह का आरोप लगाता है, तो उसका असर व्यापक होता है और वह सियासी विमर्श का केंद्र बन जाता है।

    कुल मिलाकर, मनोज तिवारी का यह आरोप सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में नए विवाद की शुरुआत साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह मामला और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है।

  • करुणानिधि के पीछे खड़ा वही लड़का बना ‘किंगमेकर’: विजय की जीत पर RGV का तंज, TVK ने बदली तमिलनाडु की सियासत

    करुणानिधि के पीछे खड़ा वही लड़का बना ‘किंगमेकर’: विजय की जीत पर RGV का तंज, TVK ने बदली तमिलनाडु की सियासत


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां फिल्म स्टार थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत ली हैं। सिर्फ दो साल पुरानी पार्टी का यह प्रदर्शन राज्य की राजनीति में ‘विजय युग’ की शुरुआत माना जा रहा है।

    234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, और TVK इससे सिर्फ 10 सीट पीछे रहकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इससे विजय के मुख्यमंत्री बनने की राह लगभग साफ मानी जा रही है।

    इस ऐतिहासिक जीत के बीच मशहूर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा (RGV) ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर शेयर कर सियासी हलचल बढ़ा दी। तस्वीर में एम करुणानिधि फीता काटते नजर आ रहे हैं, और उनके पीछे एक युवा लड़का खड़ा है—जो कोई और नहीं बल्कि खुद विजय हैं।

    इस फोटो को शेयर करते हुए RGV ने तंज कसते हुए लिखा कि करुणानिधि ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनके पीछे खड़ा यह लड़का एक दिन उनकी पार्टी को इतनी बड़ी चुनौती देगा।

    सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है और यूजर्स भी दिलचस्प प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे ‘किस्मत का खेल’ बता रहे हैं, तो कुछ विजय को नया करुणानिधि तक कह रहे हैं।

    विजय की इस जीत ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को बड़ा झटका दिया है। पिछले चुनाव में 133 सीटें जीतने वाली DMK इस बार सिर्फ 59 सीटों पर सिमट गई है। यानी करीब 74 सीटों का नुकसान, जो पार्टी के लिए करारी हार साबित हुआ है।

    करीब 60 साल तक तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के बीच सिमटी रही, लेकिन विजय ने महज दो साल में इस राजनीतिक चक्र को तोड़ दिया।

    कुल मिलाकर, एक पुरानी तस्वीर ने आज की राजनीति की तस्वीर बदल दी है—जहां कभी करुणानिधि के पीछे खड़ा एक लड़का आज तमिलनाडु की सियासत का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका है।

  • मैं हारी नहीं, हराई गई हूं, ममता का बड़ा हमला इस्तीफा से इनकार, चुनाव आयोग और BJP पर 100 सीट ‘लूटने’ का आरोप

    मैं हारी नहीं, हराई गई हूं, ममता का बड़ा हमला इस्तीफा से इनकार, चुनाव आयोग और BJP पर 100 सीट ‘लूटने’ का आरोप


    नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी साफ कर दिया है कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने कहा, हम हारे नहीं हैं, हमें हराया गया है। यह जनादेश नहीं, साजिश है। उन्होंने दो टूक कहा कि वह राजभवन नहीं जाएंगी और इस्तीफा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

    ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग विलेन की तरह काम कर रहा था और भाजपा के साथ मिलकर करीब 100 सीटें “लूटी गईं।” ममता ने दावा किया कि काउंटिंग सेंटरों पर कब्जा किया गया, कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों के साथ बदसलूकी हुई और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किया गया।

    उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया, छापेमारी की गई और कई आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया। ममता ने आरोप लगाया कि पूरे चुनाव में सत्ता पक्ष ने दबाव और डर का माहौल बनाया। उनका कहना था कि “आधिकारिक तौर पर वे हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हमने ही चुनाव जीता है।”

    ममता ने अपने राजनीतिक तेवर भी साफ कर दिए। उन्होंने कहा,अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ूंगी, सड़कों पर रहूंगी और शेर की तरह लड़ाई जारी रखूंगी। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए 5 सांसदों समेत 10 सदस्यों की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई जाएगी।

    गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 294 में से 207 सीटें हासिल की हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट गई। इस नतीजे के साथ ही 15 साल से सत्ता में काबिज ममता सरकार का अंत हो गया।

    इन चुनावों में सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में भी बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले। तमिलनाडु में विजय की पार्टी TVK ने चौंकाने वाली जीत दर्ज की, जबकि केरल में कांग्रेस की वापसी हुई और असम-पुडुचेरी में NDA ने सत्ता बरकरार रखी। कुल मिलाकर, ममता बनर्जी के तीखे तेवर और चुनाव नतीजों पर उठाए गए सवाल आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और गर्माने वाले हैं।

  • 5 राज्यों के नतीजों में सियासी भूचाल: बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत, ममता का किला ढहा; तमिलनाडु में विजय की TVK ने रचा इतिहास

    5 राज्यों के नतीजों में सियासी भूचाल: बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत, ममता का किला ढहा; तमिलनाडु में विजय की TVK ने रचा इतिहास


    नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति की तस्वीर ही बदल दी है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सत्ता परिवर्तन हुआ, जबकि असम और पुडुचेरी में NDA ने वापसी कर ली है। इन नतीजों ने जहां कई दिग्गजों को चौंकाया, वहीं कई बड़े राजनीतिक किले भी ढह गए।

    सबसे बड़ा उलटफेर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला, जहां भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार सत्ता पर कब्जा कर लिया। पार्टी ने महज 10 साल में 3 सीटों से छलांग लगाकर 207 सीटों तक पहुंचकर इतिहास रच दिया। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस 81 सीटों पर सिमट गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत 22 मंत्री चुनाव हार गए, जिससे 15 साल पुराना उनका शासन खत्म हो गया।

    बंगाल में भाजपा का स्ट्राइक रेट करीब 70% रहा, जो इस जीत की ताकत को दर्शाता है। पार्टी ने बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ा, ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य की कमान किसे मिलेगी। संभावित चेहरों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य शामिल हैं। साथ ही महिला मुख्यमंत्री के विकल्प पर भी चर्चा तेज है।

    इस जीत में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की रणनीति अहम मानी जा रही है। मोदी ने 242 सीटों पर प्रचार किया, जिनमें से 184 सीटों पर भाजपा को जीत मिली। वहीं ‘पन्ना प्रमुख’ जैसी रणनीति और बूथ स्तर की माइक्रो मैनेजमेंट ने भी बड़ा असर डाला।

    तमिलनाडु में भी बड़ा राजनीतिक भूचाल आया। यहां एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम ने 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। 59 साल में पहली बार ऐसा होगा जब राज्य में DMK या AIADMK के अलावा किसी तीसरी पार्टी की सरकार बनेगी। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी चुनाव हार गए, जो इस बदलाव की बड़ी मिसाल है।

    केरल में 10 साल बाद कांग्रेस की वापसी हुई है, जिससे राज्य में वामपंथी सरकार का अंत हो गया। वहीं असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर अपनी पकड़ मजबूत की है।

    कुल मिलाकर, इन चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि देश की राजनीति में बड़ा बदलाव चल रहा है। कहीं दशकों पुरानी सरकारें खत्म हो रही हैं, तो कहीं नई पार्टियां तेजी से उभर रही हैं। आने वाले समय में इन नतीजों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ देखने को मिलेगा।