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  • बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

    बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

    नई दिल्ली । बिहार की सियासत में पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहा हाई-प्रोफाइल विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था को दोबारा चाक-चौबंद करने का आदेश जारी किया है। सरकार के नए फैसले के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ नेताओं की ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा को तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया है। इसके साथ ही दोनों नेताओं को राज्य सरकार की ओर से पुनः बुलेटप्रूफ गाड़ियां भी उपलब्ध करा दी गई हैं, जिससे इस मुद्दे पर जारी गतिरोध के फिलहाल थमने के आसार हैं।

    इस पूरे प्रशासनिक विवाद की शुरुआत कुछ समय पहले हुई थी, जब बिहार सरकार के गृह विभाग ने वीआईपी नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा की थी। इस समीक्षा बैठक के बाद सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मिली ‘Z+’ श्रेणी की सुरक्षा को हटाने का निर्णय लिया था। सरकार के इस कदम के बाद बिहार की राजनीति में अचानक उबाल आ गया था और विपक्षी खेमे ने इस फैसले को लेकर सत्तापक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। राष्ट्रीय जनता दल ने इस प्रशासनिक कटौती को पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया था।

    सुरक्षा में की गई इस कटौती के विरोध में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने एक कड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपनी बची हुई शेष सरकारी सुरक्षा को भी प्रशासन को वापस लौटा दिया था। दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी सुरक्षा सरेंडर किए जाने की घटना ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी थी। राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि सत्तापक्ष जानबूझकर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रहा है और उनके जीवन को खतरे में डालने का प्रयास किया जा रहा है।

    यह विवाद उस समय और अधिक गहरा गया जब बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। तेजस्वी यादव ने सरकार के इस फैसले को विपक्ष के साथ किया जाने वाला खुला भेदभाव करार दिया था और एकजुटता दिखाते हुए अपनी स्वयं की सरकारी सुरक्षा भी प्रशासन को वापस सौंप दी थी। एक साथ तीन शीर्ष नेताओं द्वारा सुरक्षा लौटाए जाने के बाद सरकार चौतरफा दबाव में आ गई थी और इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर नए सिरे से विचार करना अनिवार्य हो गया था।

    विपक्ष के इस कड़े और आक्रामक रुख को देखते हुए आखिरकार बिहार सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और अपने पुराने फैसले की समीक्षा करनी पड़ी। सरकार के नए आदेश के तहत अब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को न सिर्फ ‘Z’ श्रेणी की कड़े घेरे वाली सुरक्षा वापस मिल गई है, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक बुलेटप्रूफ वाहन भी उनके काफिले में दोबारा शामिल कर दिए गए हैं। इस निर्णय के बाद राजद कैंप में इसे विपक्ष की नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में आगामी राजनीतिक समीकरणों और कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने इस विवाद को और अधिक लंबा न खींचना ही उचित समझा। हालांकि सुरक्षा बहाली के इस नए फैसले के बाद फिलहाल दोनों पक्षों के बीच जारी बयानबाजी और टकराव पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है।

  • गलवान के बाद पहली बड़ी राहत, सरकार ने चार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में दी एंट्री, जानिए वजह

    गलवान के बाद पहली बड़ी राहत, सरकार ने चार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में दी एंट्री, जानिए वजह


    नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच वर्ष 2020 के गलवान संघर्ष के बाद सुरक्षा कारणों से चीनी कंपनियों पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बीच केंद्र सरकार ने पावर सेक्टर को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने भारत में उत्पादन कर रही चार चीनी बिजली उपकरण निर्माता कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं के टेंडर में भाग लेने की विशेष अनुमति दे दी है। यह छूट केवल दो वर्षों के लिए दी गई है और सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसे भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। इस फैसले को देश की ऊर्जा सुरक्षा और बिजली क्षेत्र की जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार टीबीईए एनर्जी नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताईकाई इलेक्ट्रिक इंडिया को सार्वजनिक खरीद नियमों के कुछ प्रावधानों से राहत दी गई है। सामान्य तौर पर भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को सरकारी टेंडर में भाग लेने से पहले संबंधित भारतीय प्राधिकरण से अनिवार्य पंजीकरण और सुरक्षा मंजूरी लेनी होती है। इन चार कंपनियों को फिलहाल इस प्रक्रिया से सीमित अवधि के लिए छूट प्रदान की गई है।

    सरकार का कहना है कि यह फैसला बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इस वर्ष जनवरी में वित्त मंत्रालय से सिफारिश की थी कि भारत में निर्माण इकाइयां स्थापित कर चुकी कुछ कंपनियों को विशेष अनुमति दी जाए ताकि ट्रांसमिशन और बिजली ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में देरी न हो। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने दो वर्षों के लिए यह विशेष छूट मंजूर की।

    इन चारों कंपनियों की भूमिका भारतीय बिजली क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये कंपनियां ट्रांसफार्मर हाई वोल्टेज स्विच गियर गैस इंसुलेटेड स्विच गियर और ट्रांसमिशन लाइनों में इस्तेमाल होने वाले अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण भारत में करती हैं। इनमें से न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया देश की कई प्रमुख ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर काम कर रही है जबकि अन्य कंपनियां भी बिजली वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार में अहम योगदान दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपकरणों के बिना कई बड़ी बिजली परियोजनाएं समय पर पूरी करना मुश्किल हो सकता है।

    वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों के लिए कई सख्त नियम लागू किए थे। इसके तहत सरकारी खरीद में भाग लेने वाली कंपनियों के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से सुरक्षा और राजनीतिक मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। इसके अलावा प्रेस नोट तीन के माध्यम से चीन सहित भारत की सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश के लिए भी सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक कर दी गई थी। इन कदमों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी प्रभाव को नियंत्रित करना था।

    हालांकि बिजली क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी ने सरकार को सीमित दायरे में व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बिजली उद्योग ने भी चीनी तकनीशियनों के लिए वीजा प्रक्रिया में राहत की मांग की थी क्योंकि कई परियोजनाएं विशेषज्ञों की कमी के कारण प्रभावित हो रही थीं। सरकार का मानना है कि घरेलू विनिर्माण इकाइयों के माध्यम से काम कर रही इन कंपनियों को सीमित अवधि की छूट देने से बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं में तेजी आएगी और देश के ऊर्जा ढांचे को मजबूती मिलेगी। साथ ही सुरक्षा संबंधी निगरानी और अन्य सरकारी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी ताकि राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता न हो।

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, निजता की आड़ में नहीं छिपा सकेंगे विवाहेतर संबंध, कॉल रिकॉर्ड और होटल डिटेल देने होंगे

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, निजता की आड़ में नहीं छिपा सकेंगे विवाहेतर संबंध, कॉल रिकॉर्ड और होटल डिटेल देने होंगे


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों और निजता के अधिकार को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाला निजता का अधिकार किसी व्यक्ति को अपने जीवनसाथी से ऐसे तथ्यों को छिपाने की छूट नहीं देता जो अदालत में चल रहे व्यभिचार और तलाक के मामले की सुनवाई के लिए जरूरी हों। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि किसी पति या पत्नी पर विवाहेतर संबंध रखने का आरोप है तो वह प्राइवेसी का हवाला देकर अपने मोबाइल कॉल रिकॉर्ड या होटल में ठहरने से जुड़ी जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकता।

    न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पति की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि निजता का अधिकार महत्वपूर्ण जरूर है लेकिन यह पूर्ण या असीमित अधिकार नहीं है। जब न्याय के हित और किसी मामले की सच्चाई सामने लाने की आवश्यकता हो तब इस अधिकार पर उचित और कानूनी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। अदालत का मानना था कि यदि व्यभिचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी है तो संबंधित दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

    यह मामला वर्ष 1998 में विवाह करने वाले एक दंपति से जुड़ा है जिनकी वर्ष 2000 में एक बेटी का जन्म हुआ। कुछ समय बाद पत्नी को संदेह हुआ कि उसके पति का किसी अन्य महिला के साथ विवाहेतर संबंध है। पत्नी का आरोप था कि उसका पति दूसरी महिला के साथ जयपुर के एक होटल में भी रुका था। इन आरोपों के आधार पर उसने अदालत में तलाक की याचिका दायर की और अपने दावों को साबित करने के लिए पति के कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा होटल में ठहरने से संबंधित दस्तावेज मंगवाने की मांग की।

    फैमिली कोर्ट ने पत्नी की मांग को उचित मानते हुए संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश को पति ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि इससे उसके निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा। हालांकि हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि जनहित तथा न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए निजता के अधिकार पर आवश्यक सीमाएं लगाई जा सकती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम व्यभिचार को तलाक का वैध आधार मानता है इसलिए ऐसे मामलों में आवश्यक साक्ष्य जुटाना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पति सुप्रीम कोर्ट पहुंचा लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि अदालत के समक्ष किसी वैवाहिक विवाद में विवाहेतर संबंध का आरोप लगाया गया है तो संबंधित पक्ष को केवल निजता का हवाला देकर आवश्यक जानकारी छिपाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में सत्य का पता लगाने के लिए डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि निजता का अधिकार महत्वपूर्ण होते हुए भी न्यायिक जांच से ऊपर नहीं है। यदि किसी मामले में कॉल रिकॉर्ड होटल बुकिंग या अन्य डिजिटल साक्ष्य आरोपों की पुष्टि या खंडन के लिए आवश्यक हैं तो अदालत उन्हें मंगवा सकती है। यह फैसला भविष्य में तलाक और व्यभिचार से जुड़े मामलों की सुनवाई में साक्ष्यों के महत्व को और अधिक मजबूत करेगा।

  • Monsoon: कहीं मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त -व्यस्त.. तो कहीं बूंदाबांदी

    Monsoon: कहीं मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त -व्यस्त.. तो कहीं बूंदाबांदी


    नई दिल्ली
    । देश के लगभग 95 फीसदी क्षेत्रों में पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) कहीं आंधी-तूफान (Thunderstorm) और मूसलाधार बौछारों (Torrential downpours) से कहर बरपा रहा है तो कहीं बूंद-बूंद के लिए तरसा रहा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से लेकर पूर्वी भारत के ओडिशा, पश्चिम के गुजरात और मध्य के मुंबई में आफत की बारिश हो रही है। हिमाचल में फिर बादल फटा है, जिसके बाद पानी के साथ आए मलबे में कई वाहन दब गए। मुंबई में जल प्रलय जैसे हालात हो गए हैं और पांच घंटे के भीतर ही 70 मिमी तक वर्षा हुई है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बादल मंडरा तो रहे हैं, लेकिन बूंदा-बांदी से ज्यादा बरस नहीं रहे।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, बीते 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, असम, नागालैंड और कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है। ओडिशा, गुजरात, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी) हुई है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान और मध्य महाराष्ट्र में 60-125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान ने तबाही मचाई है। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा और गुजरात राज्य में कुछ जगहों पर 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली हैं। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी देते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।

    आदि कैलाश यात्रा की गई निलंबित
    मानसूनी बारिश में भूस्खलन के जोखिम और श्रद्धालुों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को निलंबित कर दिया गया है। धारचुला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि 1 मई को यात्रा शुरू होने के दो महीनों के अंदर 52,441 तीर्थयात्रियों ने आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट अब आगे के आदेशों के बाद ही जारी किए जाएंगे। यात्रा रोके जाने से पहले, एक जुलाई को आखिरी बार 103 तीर्थयात्रियों को परमिट जारी किए गए थे।

    मुंबई में जल प्रलय जैसे हालात, और बारिश की चेतावनी जारी
    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के कई इलाके भारी बारिश के कारण जलमग्न हो गए हैं। शुक्रवार को पांच घंटे की झमाझम बरसात ने जलप्रलय जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। सबसे ज्यादा बांद्रा में 73.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। बीएमसी ने कहा कि शुक्रवार सुबह 8 बजे तक बीते 24 घंटों के दौरान 100 मिमी वर्षा हुई है। हालांकि, प्रशासन ने मेट्रो, उपनगरीय रेल और बस सेवा के सामान्य संचालन का दावा किया है, लेकिन यात्रियों ने कहा कि उपनगरीय ट्रेन और बसें देर से चलीं। मौसम विभाग ने और बारिश की संभावना जताई है और अलर्ट जारी किया है।

    बारिश से मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर जगह-जगह गड्डे बन जाने से पालघर के पास एक के बाद एक कम से कम 15 आपस में टकरा गए। हालांकि, इसमें किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। वहीं, नांदेड़ में लगातार हो रही बारिश से बाढ़ की आशंका बढ़ गई है, जिसको देखते हुए 30 सितंबर तक राज्य आपदा मोचन बल की एक टीम को तैनात किया गया है।

    उज्जैन में शिप्रा का जलस्तर बढ़ा
    मध्य प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शुक्रवार को उज्जैन के कई हिस्सों में गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। भारी बारिश के बाद शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे राम घाट के पास स्थित कई मंदिर पानी में डूब गए हैं।

    उत्तराखंड में उफान पर नदी-नाले
    उत्तराखंड में भी बारिश से हालात बदहाल होने लगे हैं। उत्तरकाशी जिले की हर्षिल घाटी में मूसलाधार बारिश के बाद तेलगाड नदी उफान पर आ गई है जिससे मलबा गंगोत्री हाईवे तक पहुंचने से पुल निर्माण के लिए रखी सामग्री मलबे में दब गई है। साथ ही वहां पर पुल की निर्माणाधीन दीवारों को भी नुकसान हुआ है। भागीरथी नदी के बाद अब तेलगाड नदी का जलस्तर बढ़ने से लोग भयभीत हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गत वर्ष भी तेलगाड के मुहाने पर भूस्खलन के कारण झील बन गई थी। तेज बारिश से इसके टूटने का खतरा बढ़ गया है।

  • देश की अथर्व्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनेगा मिडिल क्लास….2036 तक कुल उपभोक्ता खर्च में होगा 93% हिस्सा

    देश की अथर्व्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनेगा मिडिल क्लास….2036 तक कुल उपभोक्ता खर्च में होगा 93% हिस्सा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की अर्थव्यवस्था (Economy) आने वाले सालों में किसके दम पर आगे बढ़ेगी? इसका जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने कहा है कि भारत का मिडिल क्लास (मध्यम वर्ग) ही देश की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा इंजन बनने जा रहा है। उन्होंने बताया कि 2036 तक भारत के मिडिल क्लास और उच्च-मध्यम वर्ग (Slightly Affluent Population) का देश के कुल उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) में 93% हिस्सा होगा, यानी अगले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा ताकत इसी वर्ग की बढ़ती खरीदारी और खर्च से मिलेगी।

    फ्रांस के Aix-Marseille यूनिवर्सिटी में आयोजित प्रतिष्ठित आर्थिक सम्मेलन Rencontres Économiques d’Aix-en-Provence को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह देश का मजबूत घरेलू उपभोग (Domestic Consumption) है, जिसे मिडिल क्लास लगातार आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि जब लोग ज्यादा खर्च करते हैं, तो उद्योगों का उत्पादन बढ़ता है, रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और पूरी अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है।

    निर्मला सीतारमण के अनुसार, वर्तमान में भारत की लगभग 31% आबादी मिडिल क्लास में आती है। OECD (Organisation for Economic Co-operation and Development) के अनुमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2030 से 2035 के बीच भारत दुनिया में मिडिल क्लास आबादी के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ सकता है। उन्होंने बताया कि साल 1995 से 2021 के बीच भारत का मिडिल क्लास औसतन 6.3% सालाना की दर से बढ़ा है और आने वाले सालों में यह रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion), जनकल्याण योजनाओं और आर्थिक सुधारों ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालकर मिडिल क्लास तक पहुंचने में मदद की है। उनके मुताबिक, अब तक 24.8 करोड़ (248 मिलियन) लोग बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) से बाहर आए हैं। इसके अलावा डिजिटल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और आसान लोन सिस्टम ने लोगों की आर्थिक क्षमता को मजबूत किया है। वहीं, कई वस्तुओं पर GST दरों में कमी से भी घरेलू खर्च बढ़ाने में मदद मिली है।

    निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि अब आर्थिक विकास केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या चेन्नई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहर भी तेजी से आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र बन रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के अनुमान के अनुसार, आने वाले सालों में 500 से अधिक भारतीय शहर नए आर्थिक हब के रूप में उभर सकते हैं। इससे देशभर में रोजगार, निवेश और उपभोग के नए अवसर पैदा होंगे।

    वित्त मंत्री ने भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत का कुशल युवा वर्ग तेजी से AI तकनीक अपना रहा है और उद्योगों को भी AI आधारित समाधान उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने बताया कि देश के MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर का लगभग 40% निर्यात होता है और इनमें से कई कंपनियां अब AI आधारित बिजनेस मॉडल अपना रही हैं। इससे नए रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे अधिक AI ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और डेटा सेंटर्स वाले प्रमुख देशों में शामिल हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण देश की बड़ी और कुशल तकनीकी कार्यबल है, जो वैश्विक कंपनियों की जरूरतों को पूरा कर रही है।

    वित्त मंत्री का मानना है कि आने वाले सालों में भारत की आर्थिक तरक्की का सबसे बड़ा आधार उसका तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास होगा। अगर मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो 2036 तक देश की लगभग 93% उपभोक्ता खरीदारी इसी वर्ग से आएगी, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभेगी।

  • केतन हत्याकांड में जांच तेज, दूसरा मोबाइल बरामद गवाहों के बयान से बढ़ीं सिया और चेतन की मुश्किलें

    केतन हत्याकांड में जांच तेज, दूसरा मोबाइल बरामद गवाहों के बयान से बढ़ीं सिया और चेतन की मुश्किलें


    नई दिल्ली। पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस का दावा है कि अब उसके पास ऐसे अहम सबूत मौजूद हैं जो इस मामले को और मजबूत बना रहे हैं। जांच के दौरान दूसरा मोबाइल फोन बरामद किया गया है जबकि कुछ महत्वपूर्ण गवाह भी सामने आए हैं। इन नए साक्ष्यों के बाद पुलिस का कहना है कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं कि केतन अग्रवाल की मौत हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं।

    पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। बरामद किए गए दूसरे मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि दोनों आरोपियों के बीच हुई बातचीत और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा सके। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि केतन अग्रवाल ने सिया गोयल को कितनी आर्थिक मदद दी थी और दोनों के बीच पैसों का लेनदेन किस स्तर तक हुआ था। इस संबंध में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

    इसी बीच पुणे की अदालत ने दोनों आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया था। अभियोजन पक्ष ने तीन दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड की मांग करते हुए दलील दी कि आरोपियों के मोबाइल फोन से कोड भाषा में हुई बातचीत मिली है जिसका पूरा अर्थ समझने और साजिश के अन्य पहलुओं का खुलासा करने के लिए आगे पूछताछ जरूरी है। हालांकि अदालत ने यह मांग खारिज करते हुए दोनों को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

    पुलिस का आरोप है कि 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले में केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देकर उसकी हत्या की गई थी। शुरुआत में इस घटना को दुर्घटना बताया गया था लेकिन जांच के दौरान मिले परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और आरोपियों के बदलते बयानों ने हत्या की आशंका को मजबूत कर दिया। इसी आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।

    जांच एजेंसियों ने लोहागढ़ किले और आसपास के सभी महत्वपूर्ण स्थानों का दोबारा निरीक्षण किया। घटनास्थल का विस्तृत पंचनामा तैयार किया गया और मुख्य आरोपी सिया गोयल को भी उन स्थानों पर ले जाकर घटनाक्रम की पुष्टि करने का प्रयास किया गया। पुलिस ने घटना वाले दिन पहने गए सिया के कपड़ों को भी जब्त कर लिया है जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इसके अलावा उन स्थानों की भी जांच की गई जहां सिया और चेतन के एक साथ जाने की जानकारी सामने आई है। जांच अधिकारियों को संदेह है कि दोनों ने हत्या की योजना पहले से बनाई थी और संभव है कि अलग अलग स्थानों पर उसका पूर्वाभ्यास भी किया गया हो।

    पुलिस ने सिया गोयल के लोनावला स्थित घर की भी तलाशी ली है जहां से कुछ अहम जानकारियां मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। जांच एजेंसियां दोनों आरोपियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी भी कर रही हैं क्योंकि पूछताछ के दौरान उनके बयानों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह परीक्षण कराया जाएगा। पुलिस का कहना है कि गवाहों के बयान डिजिटल साक्ष्य फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य तकनीकी प्रमाणों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां तेजी से जुड़ रही हैं और जांच अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।

  • पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ की जयपुर में हुई एंजियोप्लास्टी…. ब्लड ग्रुप को लेकर बड़ी चूक

    पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ की जयपुर में हुई एंजियोप्लास्टी…. ब्लड ग्रुप को लेकर बड़ी चूक


    जयपुर।
    पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Former Vice President Jagdeep Dhankhar) शुक्रवार को स्वास्थ्य जांच (Health Check-up) के लिए जयपुर पहुंचे, जहां निजी अस्पताल में उनकी सफल एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) की गई। लेकिन इस पूरे मेडिकल प्रोटोकॉल के बीच एक ऐसी चूक सामने आई, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। धनखड़ के लिए रिजर्व रखे जाने वाले ब्लड ग्रुप को लेकर जयपुर CMHO कार्यालय से बड़ी गलती हो गई। राहत की बात यह रही कि समय रहते यह त्रुटि पकड़ में आ गई और संशोधित पत्र जारी कर स्थिति संभाल ली गई।


    ब्लड ग्रुप की गलती से मचा हड़कंप

    पूर्व उपराष्ट्रपति के जयपुर दौरे को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से विशेष मेडिकल प्रोटोकॉल लागू किया गया था। उनके निजी सचिव की ओर से भेजे गए आधिकारिक प्रोटोकॉल लेटर में स्पष्ट रूप से A पॉजिटिव ब्लड ग्रुप रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन जयपुर CMHO कार्यालय ने SMS अस्पताल प्रशासन को जो पत्र भेजा, उसमें गलती से O नेगेटिव ब्लड ग्रुप रिजर्व रखने का उल्लेख कर दिया।

    मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई। अधिकारियों ने तत्काल पत्र में सुधार कराया और संशोधित निर्देश SMS अस्पताल को भेजे गए। यदि यह गलती समय रहते नहीं पकड़ी जाती तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती थी।


    CMHO बोले- टाइपिंग मिस्टेक थी

    जयपुर CMHO डॉ. रवि शेखावत ने इस पूरे मामले को टाइपिंग की त्रुटि बताया। उन्होंने कहा कि O नेगेटिव ब्लड ग्रुप पूर्व उपराष्ट्रपति की पत्नी का है, जो गलती से धनखड़ के नाम के सामने दर्ज हो गया। जैसे ही यह त्रुटि सामने आई, तुरंत उसे ठीक कर नया पत्र जारी कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में किसी तरह की चिकित्सा प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।


    एयरपोर्ट से सीधे अस्पताल पहुंचे धनखड़

    पूर्व उपराष्ट्रपति शुक्रवार सुबह जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से सीधे जवाहर सर्किल स्थित निजी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में उन्हें प्रारंभिक जांच के लिए भर्ती किया गया, जहां विभिन्न कार्डियक और रूटीन मेडिकल टेस्ट किए गए। चिकित्सकों की सलाह के बाद दोपहर में उनकी एंजियोग्राफी की गई और इसके बाद एंजियोप्लास्टी का निर्णय लिया गया।

    सूत्रों के अनुसार, धनखड़ के हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज मिलने के बाद दो स्टेंट लगाए गए। पूरा कार्डियक प्रोसीजर वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीन के. शर्मा की निगरानी में संपन्न हुआ। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है और चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।


    राजनीतिक नेताओं ने भी जाना हालचाल

    पूर्व उपराष्ट्रपति के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना मिलते ही राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर धनखड़ से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।


    पहले भी हो चुका है कार्डियक उपचार

    यह पहला मौका नहीं है जब जगदीप धनखड़ को हृदय संबंधी उपचार कराना पड़ा हो। इससे पहले मार्च 2025 में भी उन्हें हृदय संबंधी समस्या के चलते नई दिल्ली स्थित AIIMS में भर्ती कराया गया था, जहां उनका कार्डियक प्रोसीजर किया गया था। वहीं 12 जनवरी 2025 को अचानक तबीयत बिगड़ने और बेहोशी की शिकायत के बाद भी उन्हें AIIMS में भर्ती कर MRI सहित कई महत्वपूर्ण जांचें कराई गई थीं। चिकित्सकों की सलाह पर वे नियमित कार्डियक फॉलो-अप कराते रहे हैं।


    5 जुलाई को दिल्ली लौटेंगे

    मेडिकल प्रक्रिया के बाद धनखड़ फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में जयपुर में ही रहेंगे। उनके कार्यक्रम के अनुसार वे 3 और 4 जुलाई को जयपुर में रुकेंगे। इस दौरान उनका ठहराव लोकभवन में प्रस्तावित है। स्वास्थ्य में सुधार होने पर वे 5 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे।


    एक गलती जिसने खड़े कर दिए बड़े सवाल

    पूर्व उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति के मेडिकल प्रोटोकॉल में ब्लड ग्रुप जैसी बुनियादी जानकारी का गलत दर्ज होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि अधिकारियों ने इसे महज टाइपिंग मिस्टेक बताया और समय रहते सुधार भी कर लिया, लेकिन इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया कि वीवीआईपी प्रोटोकॉल में छोटी सी लापरवाही भी बड़े जोखिम का कारण बन सकती है। फिलहाल राहत की बात यह है कि धनखड़ की एंजियोप्लास्टी सफल रही है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना


    नई दिल्‍ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. इस बार उन्होंने सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम का 4 मिनट 40 सेकेंड का AI वीडियो शेयर किया और सवाल किया, “क्या फिर चले गए वनवास?” इस वीडियो के जरिए मंदिर में हुई चोरी और उससे जुड़े घटनाक्रम को प्रतीकात्मक अंदाज में दिखाया गया है.

    अखिलेश यादव ने जो वीडियो शेयर किया है, वह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक सिनेमैटिक प्रस्तुति है. इसकी शुरुआत सूनी और शांत अयोध्या से होती है. इसके बाद मंदिर के अंदर भगवान श्रीराम की AI से बनाई गई आकृति दिखाई देती है. पूरे वीडियो में माहौल गंभीर रखा गया है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मंदिर में हुई घटना से अयोध्या का वातावरण बदल गया है.

    वीडियो के अगले हिस्से में मंदिर का वो कोना दिखता है जहां चोरी हुई. विजुअल्स में एक बड़ा दानपात्र और आसपास का सामान नजर आता है. गाना आगे बढ़ने पर अयोध्या के लोग और साधु-संत हाथ जोड़े खड़े दिखाई देते हैं, और प्रभु राम नगरी की सीमा की तरफ बढ़ते हैं. कुल मिलाकर अखिलेश यादव ने इस पूरे वीडियो और भजन के माध्यम से धर्म के नाम पर सरकार को आड़े हाथों लिया है.

    बता दें कि अबतक इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की टीमों ने अनुकल्प मिश्रा समेत सभी सात आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की. करीब डेढ़ से ढाई घंटे चली इस कार्रवाई में अलमारियों और बक्सों का कोना-कोना छाना गया. जांच में सामने आया है कि आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने अपने घर पर सात दिनों की भव्य रामकथा का आयोजन कराया था, जिस पर 50 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे. इस आयोजन के एक वीडियो में चंपत राय भी मौजूद दिख रहे हैं.

    यह पूरा मामला 5 जून 2026 को तब सामने आया था, जब राम मंदिर परिसर में रूटीन चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने कुछ कर्मचारियों की जेब से नकदी बरामद की. इसके बाद 7 जून को जब यह बात पब्लिक हुई, तो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस गबन का मुद्दा उठाकर जांच की मांग की. विपक्ष के दबाव और लोगों के गुस्से को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया.

    फिलहाल मामले की जांच तेज है. प्रशासन लगातार सभी आरोपियों की अवैध संपत्तियों और सबूतों को जुटाने में लगा है, ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके.

  • पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर फैली अफवाहों को सरकार ने बताया गलत, 10 बिंदुओं में दी सफाई

    पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर फैली अफवाहों को सरकार ने बताया गलत, 10 बिंदुओं में दी सफाई


    नई दिल्ली। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रहे दावों पर सरकार ने विस्तृत सफाई दी है। कई पोस्टों में इंजन खराब होने, माइलेज घटने और बीमा रद्द होने जैसे दावे किए जा रहे थे, जिन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पूरी तरह भ्रामक बताया है।

    मंत्रालय के अनुसार, E20 कार्यक्रम वैज्ञानिक शोध और कई देशों के लंबे अनुभव पर आधारित है। सरकार ने कहा कि वाहन मालिकों को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह ईंधन मानकों के अनुरूप सुरक्षित है।

    सरकार ने 10 बिंदुओं में दी स्पष्ट जानकारी
    सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलतफहमियों का जवाब देते हुए कई अहम तथ्य सामने रखे:-

    – एक लीटर एथेनॉल उत्पादन में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा गलत है। सरकार के अनुसार, उत्पादन प्रक्रिया में केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है और कई प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक से काम करते हैं।

    – E20 कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि इसका उपयोग अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में लंबे समय से किया जा रहा है।
    – इंजन खराब होने का दावा गलत है। ARAI और अन्य संस्थाओं के अध्ययन में E20 से इंजन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है, हालांकि पुराने वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स बदलने की आवश्यकता हो सकती है।
    – परीक्षणों में केवल मामूली माइलेज बदलाव देखा गया है, जिससे वाहन की सामान्य कार्यक्षमता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।
    – E20 के लिए डिजाइन या स्वीकृत वाहनों की वारंटी और बीमा पर कोई असर नहीं पड़ता।
    – फ्यूल ग्रेड एथेनॉल में चीनी नहीं होती और इसमें डिनैचुरेंट मिलाए जाते हैं, जिससे पेट्रोल की गंध हावी रहती है। इसलिए चींटियों या मधुमक्खियों के आकर्षित होने का दावा गलत है।
    – अदालत में E20 कार्यक्रम की वैधता पर नहीं, बल्कि एथेनॉल खरीद अनुबंधों से जुड़े मामलों पर सुनवाई हो रही थी।
    – आधुनिक वाहनों और पेट्रोल पंपों की संरचना ऐसी है कि फ्यूल टैंक में पानी जाने की संभावना न्यूनतम रहती है।
    – सोशल मीडिया पर वायरल ‘रस मिलाने’ वाला वीडियो फर्जी बताया गया है। मंत्रालय के अनुसार एथेनॉल औद्योगिक मानकों के तहत ही तैयार होता है।
    – सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रण से अब तक 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बची है, किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की आय मिली है, कच्चे तेल के आयात में 310 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है और प्रदूषण में भी गिरावट दर्ज की गई है।
  • भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत होगी कई गुना मजबूत, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों की खरीद को दी हरी झंडी

    भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत होगी कई गुना मजबूत, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों की खरीद को दी हरी झंडी

    नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बलों की आधुनिक युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 52 हजार करोड़ रुपये की रक्षा खरीद परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां, ड्रोन, मिसाइलें और निगरानी उपकरण शामिल किए जाएंगे। इस निर्णय का उद्देश्य बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों को स्वीकृति दी गई। इनमें ‘आकाश तरंग’ एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल, वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम तथा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन प्रणाली प्रमुख हैं। इन सभी प्रणालियों का उद्देश्य आधुनिक युद्ध में उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार ‘आकाश तरंग’ प्रणाली विशेष रूप से दुश्मन के ड्रोन हमलों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल पैदल सेना को दुश्मन के आधुनिक टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के विरुद्ध अधिक प्रभावी बनाएगी। मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल मध्यम दूरी तक विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगी, जबकि वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम कम दूरी के हवाई लक्ष्यों को तेजी से निष्क्रिय करने में सक्षम होगा।

    टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम उनकी सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा। यह प्रणाली युद्धक्षेत्र में आने वाले मिसाइल और रॉकेट जैसे खतरों का समय रहते पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सहायक होगी। इसके साथ ही जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक लक्ष्यभेदन अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन प्रणालियों से सेना की मारक क्षमता और परिचालन दक्षता दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।

    भारतीय नौसेना के लिए भी कई उन्नत परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन, नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम तथा इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना शामिल है। इन परियोजनाओं से समुद्री निगरानी, नौसैनिक अभियानों और आधुनिक युद्धपोतों की तकनीकी क्षमता को मजबूती मिलेगी। अत्याधुनिक सेंसर से लैस अनमैन्ड एरियल सिस्टम समुद्री क्षेत्र में निगरानी और स्थितिजन्य जागरूकता को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

    वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग आधारित हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है। यह अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, टोही, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक इलाकों में वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के लागू होने के बाद भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त युद्ध क्षमता, निगरानी तंत्र, वायु एवं समुद्री सुरक्षा तथा आधुनिक तकनीकी तैयारी में उल्लेखनीय सुधार होगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और नई सैन्य चुनौतियों को देखते हुए यह निर्णय भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।