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  • जनगणना 2027: आधार से लेकर बैंक खातों तक….. लोगों से पूछी जाएंगी ये जानकारियां

    जनगणना 2027: आधार से लेकर बैंक खातों तक….. लोगों से पूछी जाएंगी ये जानकारियां


    नई दिल्ली।
    जनगणना 2027 (Census 2027) को लेकर आधार (Aadhaar), मतदाता पहचान पत्र (Voter ID), ड्राइविंग लाइसेंस (Driving license), पासपोर्ट, मोबाइल नंबर (Mobile number) और बैंक खातों (Bank accounts) से जुड़ी जानकारी मांगे जाने को लेकर लोगों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान नागरिकों से कोई निजी या गोपनीय बैंकिंग जानकारी नहीं मांगी जाएगी। नागरिकों से बैंक खातों की सिर्फ संख्या पूछी जाएगी।

    इसका मतलब है कि बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड, एटीएम या डेबिट कार्ड नंबर, पासवर्ड, पिन, ओटीपी, खाते में जमा राशि या लेन-देन का विवरण नहीं देना है। सिर्फ यह बताना है कि आपके नाम पर कितने बैंक खाते हैं। इसी तरह आधार, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट जैसे सरकार द्वारा जारी पहचान दस्तावेजों से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। यह जानकारी उपलब्ध होने की स्थिति में ही दी जानी है।

    कर्मियों को क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र: जनगणना का कार्य करने वाले कर्मचारियों की पहचान के लिए क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र की व्यवस्था की गई है। किसी भी तरह का संदेह होने की स्थिति में इस कोड की मदद से कर्मचारी की पहचान सत्यापित की जा सकती है।


    पहले से तैयारी पूरी रखें

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना में करीब 40 प्रश्न पूछे जाने हैं। इसलिए घर पर पहले से आवश्यक जानकारी कागज पर लिखकर तैयार रखना उपयोगी होगा। इससे प्रक्रिया में आसानी और गलत जानकारी देने की संभावना भी कम होगी।


    वित्तीय जानकारी नहीं लेंगे

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना का उद्देश्य लोगों की निजी बैंकिंग या वित्तीय जानकारी हासिल करना नहीं है। इसका उद्देश्य देश की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, आवास, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और जनसांख्यिकीय पहलुओं से जुड़ा विश्वसनीय आंकड़ा तैयार करना है।


    आपकी जानकारी सुरक्षित

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना की जानकारी ‘जनगणना अधिनियम, 1948’ के तहत एकत्र की जाती है। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत जानकारी गोपनीयता धारा 15 के तहत सुरक्षित है। इसलिए नागरिकों को अनावश्यक भय या भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है।


    साइबर ठगी से सावधान, आपको क्या नहीं बताना है

    1. बैंक अकाउंट नंबर
    2. एटीएम/डेबिट कार्ड नंबर
    3. इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड
    4. यूपीआई पिन
    5. ओटीपी
    6. खाते में उपलब्ध राशि
    7. बैंक लेन-देन का विवरण

  • राजनीति में अपराधियों का बोलबाला…. 326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ दर्ज हैं केस….

    राजनीति में अपराधियों का बोलबाला…. 326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ दर्ज हैं केस….


    नई दिल्ली।
    राजनीति में अपराधीकरण (Criminalization Politics) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को सौंपी गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लोकसभा (Lok Sabha) के 543 सदस्यों में से 251 और राज्यसभा (Rajya Sabha) के 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    न्यायालय में वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने एक हलफनामा दायर किया है। उन्हें सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) में ‘न्यायमित्र’ (अदालत की मदद करने वाला वकील) नियुक्त किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं।


    28 में से 14 CM के खिलाफ मामलों का अंबार

    हलफनामे में कहा गया है कि 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है, जिनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले दर्ज हैं, इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (29 मामले) और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (19 मामले) हैं।

    हंसारिया ने कहा कि मुकदमों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की निगरानी के बावजूद, 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है।

    अलग-अलग उच्च न्यायालय से आंकड़े इकट्ठा करके, न्यायमित्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि 2025 में 1,243 आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया, जबकि उसी साल 1,050 नए मामले दर्ज किए गए। उन्होंने न्यायालय को बताया कि पूर्व और मौजूदा सांसदों/विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 मामले लंबित हैं।


    170 मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी

    लोकसभा में 543 सदस्यों में से 251 सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 170 मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी के हैं (जिनमें पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा हो सकती है)।

    हलफनामे में ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 (33 प्रतिशत) सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 40 (18 प्रतिशत) मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी के हैं (जिनमें पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा हो सकती है)।

    वरिष्ठ वकील ने अलग-अलग उच्च न्यायालय की तरफ से दाखिल रिपोर्ट का विश्लेषण भी जमा किया। इसमें उत्तर प्रदेश शामिल नहीं था क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कोई रिपोर्ट नहीं मिली थी।


    केरल-तेलंगाना का तो हार बुरा है

    वकील स्नेहा कलिता के जरिए दाखिल हलफनामे के मुताबिक, केरल के 20 में से 19 सांसदों (95 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले दर्ज थे और उनमें से 11 पर गंभीर मामले थे। तेलंगाना के 17 सांसदों में से 14 (82 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले थे; ओडिशा में यह आंकड़ा 76 प्रतिशत (21 में से 16), झारखंड में 71 प्रतिशत (14 में से 10) और तमिलनाडु में 67 प्रतिशत (39 में से 26) था। वहीं, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य बड़े राज्यों के लगभग 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज थे।


    हरियाणा, छत्तीसगढ़ में केवल एक

    हरियाणा (10 सांसद) और छत्तीसगढ़ (11 सांसद) में से सिर्फ एक-एक सांसद पर आपराधिक मामले हैं; पंजाब में 13 में से दो, असम में 14 में से तीन, दिल्ली में सात में से तीन, राजस्थान में 25 में से चार, गुजरात में 25 में से पांच और मध्य प्रदेश में 29 में से नौ सांसदों पर आपराधिक मामले हैं।

    न्यायमित्र ने इस बात पर जोर दिया है कि सांसद/विधायक के खिलाफ आपराधिक मामलों के तेजी से निस्तारण के लिए उच्चतम न्यायालय को उन पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सांसद/विधायक के लिए तय की गई विशेष अदालत सिर्फ सांसद/विधायक के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई करें और जब इन मामलों की सुनवाई पूरी हो जाए, तभी दूसरे मामलों को लिया जाए। हंसारिया, विधि निर्माताओं के खिलाफ मामलों के जल्द निस्तारण के लिए अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में न्यायालय की मदद कर रहे हैं।

  • सात महीने से ISRO की लॉन्चिंग पर ब्रेक, सितंबर में GISAT-1A से फिर शुरू होगा अभियान, नवंबर में NVS-03 की तैयारी

    सात महीने से ISRO की लॉन्चिंग पर ब्रेक, सितंबर में GISAT-1A से फिर शुरू होगा अभियान, नवंबर में NVS-03 की तैयारी


    नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) करीब सात महीने के अंतराल के बाद एक बार फिर अपने लॉन्च अभियान को रफ्तार देने की तैयारी में है। तकनीकी दिक्कतों के चलते लगातार मिशनों में सामने आई समस्याओं के बाद लॉन्चिंग पर ब्रेक लगा हुआ था। अब अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट GISAT-1A को सितंबर के पहले सप्ताह में लॉन्च करने की तैयारी है। इसके बाद नवंबर में NVS-03 को लॉन्च किए जाने की संभावना है।

    GISAT-1A क्यों है अहम?
    GISAT-1A को जियो इमेजिंग सैटेलाइट और नई नामकरण व्यवस्था के तहत EOS-05 भी कहा जाता है। यह 2021 में लॉन्च किए गए GISAT-1 यानी EOS-03 का रिप्लेसमेंट है। पिछला मिशन रॉकेट के अंतिम प्रोपल्सिव सेगमेंट के इग्नाइट नहीं होने के कारण अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच सका था।

    नया GISAT-1A करीब 10 साल की मिशन लाइफ के लिए तैयार किया गया है। यह बड़े इलाकों की बार-बार तस्वीरें लेने में सक्षम होगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के साथ कृषि और वानिकी से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

    नवंबर में NVS-03 की लॉन्चिंग संभव
    GISAT-1A के बाद NVS-03 को लॉन्च किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक यह सैटेलाइट श्रीहरिकोटा में ईंधन भरने के बाद लॉन्च के लिए तैयार है। इसकी लॉन्चिंग नवंबर में संभावित है।

    NVS-03 का मिशन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले लॉन्च किए गए NVS-02 को तय कक्षा तक पहुंचाने में सफलता नहीं मिली थी। इसके चलते भारत के NavIC नेविगेशन सिस्टम की स्वतंत्र कवरेज प्रभावित हुई है।

    जनवरी में PSLV-C62 मिशन हुआ था फेल
    2026 में ISRO ने अब तक सिर्फ एक लॉन्च किया है। 12 जनवरी को PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के तहत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1 को कक्षा में स्थापित किया जाना था, लेकिन रॉकेट के तीसरे चरण में आई तकनीकी ‘एनोमली’ के कारण मिशन असफल हो गया। इसकी जांच के लिए बनाई गई फेलियर एनालिसिस कमेटी की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

    2025 में भी दो बड़े मिशनों को झटका
    2025 में ISRO ने पांच लॉन्च किए थे। इनमें PSLV-C61 से EOS-9 की लॉन्चिंग भी शामिल थी, लेकिन तीसरे चरण में आई एनोमली के कारण यह मिशन भी विफल हो गया था। ISRO ने दोनों घटनाओं को एक-दूसरे से असंबंधित बताया था।

    वहीं GSLV-F16 से NASA के साथ विकसित NISAR सैटेलाइट का लॉन्च सफल रहा। GSLV-F15 से NVS-02 को भी लॉन्च किया गया, लेकिन ऑर्बिट बढ़ाने की प्रक्रिया में समस्या के कारण सैटेलाइट तय कक्षा तक नहीं पहुंच सका। इसके अलावा LVM3 के जरिए Bluebird-2 और CMS-03 के लॉन्च भी किए गए।

    लॉन्चिंग के लक्ष्य से पीछे चल रहा ISRO
    ISRO की वार्षिक योजना के मुताबिक 2025-26 में 15 और 2026-27 में 27 मिशन का लक्ष्य रखा गया था। मौजूदा लॉन्चिंग इस लक्ष्य से काफी पीछे है। 2026-27 में ISRO ने कम से कम पांच SSLV, चार PSLV, तीन GSLV और एक LVM3 मिशन की योजना बनाई है। इसके अलावा गगनयान कार्यक्रम के तहत भी कई मिशन निर्धारित हैं।

    अब सितंबर में GISAT-1A की लॉन्चिंग ISRO के लिए सिर्फ एक सैटेलाइट मिशन नहीं, बल्कि लगातार सामने आई तकनीकी चुनौतियों के बाद लॉन्च कार्यक्रम को फिर पटरी पर लाने की बड़ी परीक्षा होगी।

  • छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी हेमंत सरकार, JSSC-CGL समेत कई परीक्षाएं रद्द; जांच के भी आदेश

    छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी हेमंत सरकार, JSSC-CGL समेत कई परीक्षाएं रद्द; जांच के भी आदेश

    रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई मैराथन बैठक के बाद सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। मंत्रियों के साथ तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में टीडीपीएल की ओर से आयोजित परीक्षा को रद्द करने, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की जांच कराने और पुरानी परीक्षाओं की भी समीक्षा करने का निर्णय लिया गया।

    बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी के माध्यम से युवाओं की नियुक्ति होती है और परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    TDPL की परीक्षा रद्द

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई शिकायतों और अनियमितताओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

    उन्होंने कहा कि परीक्षा किस तरह और किन नियमों के तहत आयोजित होनी चाहिए, इसे लेकर सरकार सुधार की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए बनाए गए रिफॉर्म पोर्टल में अब अभिभावकों को भी जोड़ा जाएगा।


    रिटायर्ड जज करेंगे JSSC-CGL की जांच

    सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा मामले की जांच एसआईटी और सीआईडी की टीम भी कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में सामने आ रहे कुछ तथ्य चौंकाने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि सीजीएल परीक्षा और नियुक्तियों से जुड़े लोगों तथा कुछ कंपनियों के बीच बड़े नेटवर्क की बात सामने आई है।

    2014 से अब तक की परीक्षाओं की होगी जांच

    सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं की जांच कराने का भी फैसला लिया है। इसके तहत परीक्षा प्रक्रिया, नियुक्तियों और उससे जुड़ी एजेंसियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी।

    हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार ने मजबूत कानून बनाए हैं और उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की मंशा भी रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

    रिफॉर्म के लिए बनी कमेटी

    परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता से जुड़े सुझाव देगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि परीक्षाएं निर्धारित एसओपी के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित की जाएं तो गड़बड़ी की आशंका काफी कम हो सकती है।

    सरकार के प्रमुख फैसले

    बैठक के बाद सरकार की ओर से सामने आए प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं-

    • TDPL द्वारा आयोजित परीक्षा रद्द की जाएगी।
    • JSSC-CGL परीक्षा को लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच होगी।
    • मामले की जांच SIT और CID भी कर रही है।
    • वर्ष 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं की जांच की जाएगी।
    • JSSC-CGL से जुड़ी परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
    • 14वीं JPSC परीक्षा तथा 2023/25 की बैकलॉग परीक्षा रद्द करने की बात कही गई है।
    • परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित रिफॉर्म कमेटी काम करेगी।
    • रिफॉर्म पोर्टल में अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा।

    सरकार के इन फैसलों को लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब जांच के निष्कर्ष और आगे की परीक्षा प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

  • अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    नई दिल्ली ।केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित बताए जा रहे शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। उनके अनुसार 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान के दौरान 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और आतंकी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बरामद की गई।

    अमित शाह के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने 12 अगस्त को रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम के जरिए समन्वित अभियान चलाया। कार्रवाई का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित आतंकी गतिविधियों और हिंसा की साजिशों को समय रहते रोकना था। इस अभियान में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल को शामिल किया गया।

    गिरफ्तारियों के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को पकड़ा गया। राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में आठ और उत्तराखंड में पांच गिरफ्तारियां हुईं। गुजरात, कर्नाटक और बिहार में तीन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल में दो दो लोगों को पकड़ा गया।

    गृह मंत्री ने कहा कि कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई। इनमें आईईडी, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और ग्रेनेड शामिल हैं। कुछ ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा जासूसी और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सीसीटीवी कैमरे भी बरामद किए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित और आईएसआई समर्थित आतंकी सिंडिकेट के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि यह नेटवर्क भारत में ग्रेनेड, आईईडी और पेट्रोल बम हमलों के अलावा लक्षित हत्याओं जैसी गतिविधियों में स्थानीय सहयोगियों का इस्तेमाल करता था।

    एजेंसियों के अनुसार नेटवर्क से जुड़े स्थानीय लोगों को कथित तौर पर धन उपलब्ध कराया जाता था और उनसे पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों तथा धार्मिक स्थलों की रेकी कराने जैसे काम लिए जाते थे। निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

    अमित शाह ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की समयबद्ध कार्रवाई से संभावित विध्वंसक योजनाओं को नाकाम किया गया। स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील अवसर से पहले इतने बड़े स्तर पर की गई कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बताया गया है कि इस नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। मामलों में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम, मादक पदार्थ संबंधी कानून और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसी धाराओं का इस्तेमाल किया गया है।

    सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका, उनके आपसी संपर्क, वित्तीय नेटवर्क और सीमा पार से संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं। बरामद हथियारों और अन्य सामग्री के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उसकी गतिविधियों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

  • भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश, वैश्विक उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज

    भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश, वैश्विक उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज

    नई दिल्ली ।भारत का मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार के अनुसार भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है और वैश्विक मत्स्य उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत योगदान करता है। जलीय कृषि उत्पादन के मामले में भी भारत दूसरे स्थान पर है, जबकि झींगा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में देश दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है।

    मत्स्य क्षेत्र का विस्तार सीधे तौर पर बड़ी आबादी की आजीविका से जुड़ा हुआ है। सरकार के मुताबिक देश में करीब तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर है। मछली पकड़ने और उत्पादन के अलावा प्रसंस्करण, परिवहन, भंडारण, विपणन और निर्यात जैसी गतिविधियों के जरिए भी मत्स्य मूल्य शृंखला में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होते हैं।

    सरकार ने बताया कि वर्ष 2015 से अब तक मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास और आधुनिकीकरण के लिए 39,272 करोड़ रुपये का संचयी निवेश किया गया है। यह निवेश ब्लू रिवोल्यूशन, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से किया गया है।

    इन योजनाओं का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र में आधुनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी मूल्य शृंखला को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि मछुआरों और मत्स्य किसानों को बेहतर बाजार, तकनीक और आय के अवसर उपलब्ध हो सकें।

    मत्स्य क्षेत्र में युवाओं और उद्यमशील किसानों की भागीदारी को भी सरकार महत्वपूर्ण मान रही है। आधुनिक जलीय कृषि तकनीक, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, कोल्ड चेन प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे पारंपरिक मत्स्य गतिविधियों को अधिक संगठित और बाजार आधारित बनाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

    सरकार का मानना है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी भारत की ब्लू इकोनॉमी को मजबूती दे सकती है। मत्स्य उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और निर्यात क्षमता बढ़ने से ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी 2024 में मंजूरी दी थी। यह प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना है और वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों के लिए लागू की जा रही है। इसके लिए करीब 6,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। इसका उद्देश्य वित्तीय और तकनीकी सहायता के जरिए मत्स्य क्षेत्र की संरचनात्मक कमियों को दूर करना, संस्थागत सुधारों को बढ़ावा देना, उत्पादकता बढ़ाना और आधुनिक तकनीक को अपनाने में मदद करना है।

    योजना के तहत बाजार तक पहुंच मजबूत करने और मत्स्य किसानों की आय बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बेहतर भंडारण और कोल्ड चेन सुविधाओं का विस्तार भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद मत्स्य पालन विभाग ने योजना के लाभार्थियों और उनके जीवनसाथियों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के योगदान को सम्मानित करना और सरकारी योजनाओं से मिले बदलावों को सामने लाना था। भारत की बढ़ती उत्पादन क्षमता, आधुनिक तकनीक और निर्यात संभावनाओं को देखते हुए मत्स्य क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश की ब्लू इकोनॉमी और ग्रामीण रोजगार का अहम आधार बन सकता है।

  • बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा

    बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा


    नई दिल्ली : 
    भारतीय जनता पार्टी ने 17 अगस्त 2026 को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में तैयार की गई इस टीम में स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव और वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। बीएल संतोष संगठन महामंत्री के पद पर बने हुए हैं। नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ महासचिव शामिल किए गए हैं।

    नई टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे धीरे तेज हो रही हैं। संगठन में उत्तर प्रदेश के आठ पदाधिकारियों को जगह मिली है। इसके अलावा दिल्ली से 10, महाराष्ट्र से पांच, राजस्थान और उत्तराखंड से चार चार तथा पंजाब और बिहार से दो दो चेहरों को स्थान मिला है। इससे राज्यों के प्रतिनिधित्व और चुनावी प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है।

    बीजेपी की सबसे बड़ी संगठनात्मक विशेषता उसका बहुस्तरीय ढांचा है। पार्टी की संरचना राष्ट्रीय स्तर से शुरू होकर राज्य, जिला, मंडल और बूथ तक जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केंद्रीय स्तर पर तय रणनीति को स्थानीय स्तर तक पहुंचाना और बूथ स्तर से मिलने वाले फीडबैक को ऊपर तक ले जाना है।

    संगठन के शीर्ष स्तर पर मार्गदर्शक मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बाद पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले निकाय और राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्थान आता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन का सर्वोच्च पद होता है। पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता तय है तथा कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पद शामिल होते हैं। राष्ट्रीय महासचिवों में संगठन महामंत्री का पद विशेष महत्व रखता है, क्योंकि संगठन के नियमित संचालन और विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी इससे जुड़ी होती है।

    राष्ट्रीय स्तर के बाद राज्य संगठन पार्टी की रणनीति को जमीन पर लागू करता है। राज्य परिषद और राज्य कार्यकारिणी इसके प्रमुख अंग हैं। राज्य परिषद प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि राज्य कार्यकारिणी संगठन की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाती है।

    प्रदेश अध्यक्ष अपनी टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर नियुक्तियां करता है। राज्य स्तर पर संगठन महामंत्री की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है और उसकी नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर की सहमति आवश्यक होती है। इससे राष्ट्रीय और राज्य इकाइयों के बीच तालमेल बनाए रखने की व्यवस्था मजबूत होती है।

    राज्य के नीचे जिला और मंडल स्तर का संगठन आता है। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण इकाई बूथ है। बीजेपी की चुनावी रणनीति में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत रखना लंबे समय से प्राथमिकता रहा है। बूथ अध्यक्ष स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों का संचालन करता है, जबकि पन्ना प्रमुख मतदाता सूची के एक हिस्से की जिम्मेदारी संभालते हुए मतदाताओं से सीधे संपर्क करता है।

    संगठनात्मक चुनावों के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश के 1,036 जिलों में से 978 में जिला अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका है। इसी तरह 17,743 मंडलों में से 16,469 मंडल अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, जबकि 10,70,462 बूथों में से 7,88,197 बूथ अध्यक्षों का चुनाव पूरा हुआ है।

    बीजेपी में संगठन निर्माण की प्रक्रिया को संगठन पर्व कहा जाता है। इसमें बूथ से मंडल, जिला और प्रदेश स्तर होते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव तक क्रम आगे बढ़ता है। पार्टी के विभिन्न मोर्चे भी इसी ढांचे का हिस्सा हैं। युवा, महिला, किसान, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों के जरिए अलग अलग सामाजिक समूहों तक संगठन की पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। यही बहुस्तरीय व्यवस्था बीजेपी के चुनावी संगठन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल है।

  • ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा

    ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा


    नई दिल्ली । नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आई एक तस्वीर ने बारिश के दौरान एयरपोर्ट परिसर की तैयारियों और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। तस्वीर में एयरपोर्ट के आसपास बड़े स्तर पर पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है और पार्किंग तथा सड़क जैसे हिस्से भी जलमग्न नजर आ रहे हैं। तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि भारी बारिश के बाद जेवर एयरपोर्ट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। हालांकि तस्वीर और उसके साथ किए जा रहे दावे की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे वास्तविक स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    तस्वीर में एयरपोर्ट जैसी इमारत और उसके सामने बड़ी मात्रा में जमा पानी दिखाई देता है। कई वाहन पानी के बीच खड़े नजर आ रहे हैं जबकि आसपास के रास्ते भी जलभराव की चपेट में दिखाई दे रहे हैं। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे भारी बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था की परीक्षा के तौर पर देख रहे हैं तो कुछ लोग तस्वीर की वास्तविकता पर सवाल उठा रहे हैं।

    जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसे दिल्ली एनसीआर के लिए एक महत्वपूर्ण एयर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण से क्षेत्र में कारोबार पर्यटन रोजगार और रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जाती रही है। ऐसे में बारिश के दौरान जलभराव से जुड़ी कोई भी तस्वीर स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचती है।

    किसी भी बड़े एयरपोर्ट के लिए बारिश के पानी की निकासी बेहद महत्वपूर्ण होती है। रनवे टैक्सीवे पार्किंग एप्रन और यात्रियों के आवागमन वाले हिस्सों में जलभराव रोकना एयरपोर्ट संचालन की अहम जरूरत होती है। खासतौर पर मानसून के दौरान कम समय में होने वाली तेज बारिश के पानी को तेजी से बाहर निकालने के लिए प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम जरूरी होता है। अगर किसी एयरपोर्ट परिसर में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो इससे यातायात और संचालन के साथ बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।

    हालांकि वायरल तस्वीर को देखकर सीधे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरा एयरपोर्ट जलमग्न हो गया या परियोजना की पूरी व्यवस्था विफल हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों के साथ कई बार गलत संदर्भ भी जोड़ दिए जाते हैं। तस्वीर पुरानी हो सकती है किसी दूसरे स्थान की हो सकती है या डिजिटल रूप से बदली गई हो सकती है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि के बिना बड़े दावे को तथ्य मानने से बचना जरूरी है।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि एयरपोर्ट प्रबंधन या संबंधित प्रशासन की ओर से बारिश और जलभराव को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है। अगर वास्तव में परिसर के किसी हिस्से में पानी जमा हुआ है तो इसकी वजह और जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।

    फिलहाल वायरल तस्वीर ने जेवर एयरपोर्ट की बारिश से निपटने की तैयारियों को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। लेकिन तस्वीर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय रिपोर्ट का इंतजार करना ज्यादा उचित होगा।

  • भूपेंद्र पटेल सैन फ्रांसिस्को पहुंचे, वाइब्रेंट गुजरात 2027 से पहले निवेशकों और टेक्नोलॉजी लीडर्स से करेंगे अहम मुलाकातें

    भूपेंद्र पटेल सैन फ्रांसिस्को पहुंचे, वाइब्रेंट गुजरात 2027 से पहले निवेशकों और टेक्नोलॉजी लीडर्स से करेंगे अहम मुलाकातें

    नई दिल्ली । गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सोमवार को सैन फ्रांसिस्को पहुंच गए। उनके साथ राज्य का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी अमेरिका पहुंचा है। यह दौरा गुजरात में विदेशी निवेश आकर्षित करने और जनवरी 2027 में प्रस्तावित वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    सैन फ्रांसिस्को पहुंचने पर गुजराती समुदाय के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इसके बाद पटेल अपने अमेरिकी कार्यक्रमों की शुरुआत सैन फ्रांसिस्को में गुजराती समुदाय के सदस्यों के साथ बैठक से करेंगे। इस दौरान गुजरात के आर्थिक विकास, निवेश की संभावनाओं और राज्य के साथ वैश्विक कारोबारी समुदाय के संबंधों को मजबूत करने पर बातचीत होने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री का यह विदेश दौरा 17 से 24 अगस्त तक अमेरिका और कनाडा में चलेगा। अमेरिकी चरण के दौरान सैन फ्रांसिस्को के अलावा वाशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क में भी निवेशकों, उद्योग संगठनों, तकनीकी क्षेत्र के प्रतिनिधियों और कारोबारियों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल कनाडा के टोरंटो जाएगा।

    दौरे के दौरान राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस और आमने-सामने की कारोबारी बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में गुजरात को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने के साथ राज्य में विदेशी कंपनियों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से विनिर्माण, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर जोर रहने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री के साथ गुजरात सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी दौरे पर हैं। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव एम.के. दास, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी. नटराजन, उद्योग एवं खान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ममता वर्मा, प्रधान सचिव संजीव कुमार और मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. विक्रांत पांडे शामिल हैं।

    इस यात्रा में गुजरात के व्यापार और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी है। उद्योग प्रतिनिधिमंडल में 22 कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें विनिर्माण, केमिकल, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों से जुड़े वरिष्ठ कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हैं। इससे सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ उद्योग जगत की सीधी भागीदारी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य की निवेश रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जनवरी 2027 में होने वाले अगले संस्करण से पहले गुजरात सरकार अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उद्योग समूहों के साथ संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रही है।

    बताया जा रहा है कि 25 से अधिक वर्षों के बाद गुजरात के किसी मौजूदा मुख्यमंत्री का यह पहला आधिकारिक अमेरिका दौरा है। ऐसे में इस यात्रा को राज्य सरकार की वैश्विक निवेश पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    गुजरात सरकार का लक्ष्य विदेशी निवेश के साथ-साथ राज्य के उद्योगों को वैश्विक कारोबारी नेटवर्क से जोड़ना भी है। अमेरिका और कनाडा में होने वाली बैठकों के दौरान संभावित निवेश, औद्योगिक साझेदारी, तकनीकी सहयोग और गुजरात में नई परियोजनाओं की संभावनाओं पर बातचीत होगी।

    मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब राज्य सरकार वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के अगले संस्करण की तैयारियों को गति दे रही है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ शुरुआती बातचीत से संभावित भागीदारी और निवेश प्रस्तावों को समिट से पहले आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। इससे गुजरात की औद्योगिक और निवेश संबंधी प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने में भी मदद मिलने की संभावना है।

  • भारतीय नौसेना को मिलेंगे दो एमक्यू-9बी सी गार्डियन ड्रोन, रक्षा मंत्रालय ने 1,943 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

    भारतीय नौसेना को मिलेंगे दो एमक्यू-9बी सी गार्डियन ड्रोन, रक्षा मंत्रालय ने 1,943 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

    नई दिल्ली ।भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और खुफिया क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका की जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक के साथ दो एमक्यू-9बी सी गार्डियन हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम को लीज पर लेने के लिए करीब 1,943 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

    यह लीज व्यवस्था 30 महीने की अवधि के लिए होगी। अनुबंध पर सोमवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर रक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक अधिग्रहण ए. अनबारासु भी मौजूद रहे। समझौते का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी और उनसे जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने की नौसेना की क्षमता को बढ़ाना है।

    एमक्यू-9बी सी गार्डियन को लंबी अवधि तक उड़ान भरने और बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसमें आधुनिक सेंसर, उन्नत निगरानी प्रणाली और विभिन्न प्रकार के पेलोड लगाए जा सकते हैं। इन क्षमताओं के कारण यह समुद्री क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखने के लिए उपयोगी प्लेटफॉर्म माना जाता है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार इन ड्रोन की तैनाती से भारतीय नौसेना की मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ड्रोन समुद्र के विशाल हिस्सों में लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस यानी आईएसआर कवरेज उपलब्ध कराने में मदद करेंगे। इससे समुद्री गतिविधियों पर लंबे समय तक नजर रखना और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना आसान होगा।

    हिंद महासागर क्षेत्र भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही के साथ ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी मौजूद हैं। ऐसे में समुद्र में होने वाली गतिविधियों की वास्तविक समय के करीब निगरानी और तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता नौसेना के लिए अहम है।

    एमक्यू-9बी सी गार्डियन की लंबी उड़ान क्षमता नौसेना को लंबे समय तक किसी विशेष समुद्री क्षेत्र पर निगरानी बनाए रखने में मदद कर सकती है। इसके जरिए जहाजों की आवाजाही, समुद्री गतिविधियों और संभावित सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ी जानकारी जुटाने की क्षमता बढ़ेगी। इससे समुद्री सीमा सुरक्षा और रणनीतिक निगरानी अभियानों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री मौजूदगी और निगरानी ढांचे को लगातार मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरण और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच उन्नत मानव रहित प्लेटफॉर्म नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    रक्षा क्षेत्र में हाल के दिनों में सरकार की खरीद गतिविधियां भी तेज हुई हैं। पिछले सप्ताह रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए करीब 1,577 करोड़ रुपये के दो अनुबंध किए थे। इन समझौतों के तहत लोइटर म्यूनिशन सिस्टम, संबंधित हथियार और अन्य उपकरणों की खरीद की जानी है।

    नौसेना के लिए एमक्यू-9बी सी गार्डियन की लीज भी इसी व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण प्रक्रिया का हिस्सा है। लीज व्यवस्था के माध्यम से नौसेना को सीमित अवधि में आधुनिक निगरानी क्षमता उपलब्ध होगी। इससे परिचालन जरूरतों को पूरा करने के साथ समुद्री क्षेत्र में भारत की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।