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  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना


    नई दिल्‍ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. इस बार उन्होंने सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम का 4 मिनट 40 सेकेंड का AI वीडियो शेयर किया और सवाल किया, “क्या फिर चले गए वनवास?” इस वीडियो के जरिए मंदिर में हुई चोरी और उससे जुड़े घटनाक्रम को प्रतीकात्मक अंदाज में दिखाया गया है.

    अखिलेश यादव ने जो वीडियो शेयर किया है, वह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक सिनेमैटिक प्रस्तुति है. इसकी शुरुआत सूनी और शांत अयोध्या से होती है. इसके बाद मंदिर के अंदर भगवान श्रीराम की AI से बनाई गई आकृति दिखाई देती है. पूरे वीडियो में माहौल गंभीर रखा गया है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मंदिर में हुई घटना से अयोध्या का वातावरण बदल गया है.

    वीडियो के अगले हिस्से में मंदिर का वो कोना दिखता है जहां चोरी हुई. विजुअल्स में एक बड़ा दानपात्र और आसपास का सामान नजर आता है. गाना आगे बढ़ने पर अयोध्या के लोग और साधु-संत हाथ जोड़े खड़े दिखाई देते हैं, और प्रभु राम नगरी की सीमा की तरफ बढ़ते हैं. कुल मिलाकर अखिलेश यादव ने इस पूरे वीडियो और भजन के माध्यम से धर्म के नाम पर सरकार को आड़े हाथों लिया है.

    बता दें कि अबतक इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की टीमों ने अनुकल्प मिश्रा समेत सभी सात आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की. करीब डेढ़ से ढाई घंटे चली इस कार्रवाई में अलमारियों और बक्सों का कोना-कोना छाना गया. जांच में सामने आया है कि आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने अपने घर पर सात दिनों की भव्य रामकथा का आयोजन कराया था, जिस पर 50 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे. इस आयोजन के एक वीडियो में चंपत राय भी मौजूद दिख रहे हैं.

    यह पूरा मामला 5 जून 2026 को तब सामने आया था, जब राम मंदिर परिसर में रूटीन चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने कुछ कर्मचारियों की जेब से नकदी बरामद की. इसके बाद 7 जून को जब यह बात पब्लिक हुई, तो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस गबन का मुद्दा उठाकर जांच की मांग की. विपक्ष के दबाव और लोगों के गुस्से को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया.

    फिलहाल मामले की जांच तेज है. प्रशासन लगातार सभी आरोपियों की अवैध संपत्तियों और सबूतों को जुटाने में लगा है, ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके.

  • पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर फैली अफवाहों को सरकार ने बताया गलत, 10 बिंदुओं में दी सफाई

    पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर फैली अफवाहों को सरकार ने बताया गलत, 10 बिंदुओं में दी सफाई


    नई दिल्ली। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रहे दावों पर सरकार ने विस्तृत सफाई दी है। कई पोस्टों में इंजन खराब होने, माइलेज घटने और बीमा रद्द होने जैसे दावे किए जा रहे थे, जिन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पूरी तरह भ्रामक बताया है।

    मंत्रालय के अनुसार, E20 कार्यक्रम वैज्ञानिक शोध और कई देशों के लंबे अनुभव पर आधारित है। सरकार ने कहा कि वाहन मालिकों को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह ईंधन मानकों के अनुरूप सुरक्षित है।

    सरकार ने 10 बिंदुओं में दी स्पष्ट जानकारी
    सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलतफहमियों का जवाब देते हुए कई अहम तथ्य सामने रखे:-

    – एक लीटर एथेनॉल उत्पादन में 10,000 लीटर पानी लगने का दावा गलत है। सरकार के अनुसार, उत्पादन प्रक्रिया में केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है और कई प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक से काम करते हैं।

    – E20 कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि इसका उपयोग अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में लंबे समय से किया जा रहा है।
    – इंजन खराब होने का दावा गलत है। ARAI और अन्य संस्थाओं के अध्ययन में E20 से इंजन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है, हालांकि पुराने वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स बदलने की आवश्यकता हो सकती है।
    – परीक्षणों में केवल मामूली माइलेज बदलाव देखा गया है, जिससे वाहन की सामान्य कार्यक्षमता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।
    – E20 के लिए डिजाइन या स्वीकृत वाहनों की वारंटी और बीमा पर कोई असर नहीं पड़ता।
    – फ्यूल ग्रेड एथेनॉल में चीनी नहीं होती और इसमें डिनैचुरेंट मिलाए जाते हैं, जिससे पेट्रोल की गंध हावी रहती है। इसलिए चींटियों या मधुमक्खियों के आकर्षित होने का दावा गलत है।
    – अदालत में E20 कार्यक्रम की वैधता पर नहीं, बल्कि एथेनॉल खरीद अनुबंधों से जुड़े मामलों पर सुनवाई हो रही थी।
    – आधुनिक वाहनों और पेट्रोल पंपों की संरचना ऐसी है कि फ्यूल टैंक में पानी जाने की संभावना न्यूनतम रहती है।
    – सोशल मीडिया पर वायरल ‘रस मिलाने’ वाला वीडियो फर्जी बताया गया है। मंत्रालय के अनुसार एथेनॉल औद्योगिक मानकों के तहत ही तैयार होता है।
    – सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रण से अब तक 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बची है, किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की आय मिली है, कच्चे तेल के आयात में 310 लाख मीट्रिक टन की कमी आई है और प्रदूषण में भी गिरावट दर्ज की गई है।
  • भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत होगी कई गुना मजबूत, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों की खरीद को दी हरी झंडी

    भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत होगी कई गुना मजबूत, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों की खरीद को दी हरी झंडी

    नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बलों की आधुनिक युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 52 हजार करोड़ रुपये की रक्षा खरीद परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां, ड्रोन, मिसाइलें और निगरानी उपकरण शामिल किए जाएंगे। इस निर्णय का उद्देश्य बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों को स्वीकृति दी गई। इनमें ‘आकाश तरंग’ एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल, वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम तथा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन प्रणाली प्रमुख हैं। इन सभी प्रणालियों का उद्देश्य आधुनिक युद्ध में उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार ‘आकाश तरंग’ प्रणाली विशेष रूप से दुश्मन के ड्रोन हमलों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल पैदल सेना को दुश्मन के आधुनिक टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के विरुद्ध अधिक प्रभावी बनाएगी। मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल मध्यम दूरी तक विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगी, जबकि वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम कम दूरी के हवाई लक्ष्यों को तेजी से निष्क्रिय करने में सक्षम होगा।

    टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम उनकी सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा। यह प्रणाली युद्धक्षेत्र में आने वाले मिसाइल और रॉकेट जैसे खतरों का समय रहते पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सहायक होगी। इसके साथ ही जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक लक्ष्यभेदन अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन प्रणालियों से सेना की मारक क्षमता और परिचालन दक्षता दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।

    भारतीय नौसेना के लिए भी कई उन्नत परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन, नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम तथा इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना शामिल है। इन परियोजनाओं से समुद्री निगरानी, नौसैनिक अभियानों और आधुनिक युद्धपोतों की तकनीकी क्षमता को मजबूती मिलेगी। अत्याधुनिक सेंसर से लैस अनमैन्ड एरियल सिस्टम समुद्री क्षेत्र में निगरानी और स्थितिजन्य जागरूकता को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

    वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग आधारित हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है। यह अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, टोही, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक इलाकों में वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के लागू होने के बाद भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त युद्ध क्षमता, निगरानी तंत्र, वायु एवं समुद्री सुरक्षा तथा आधुनिक तकनीकी तैयारी में उल्लेखनीय सुधार होगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और नई सैन्य चुनौतियों को देखते हुए यह निर्णय भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • 8 जुलाई को काशी से शिक्षकों को बड़ी सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी, 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा' योजना का होगा शुभारंभ, लाखों परिवारों को मिलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

    8 जुलाई को काशी से शिक्षकों को बड़ी सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी, 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा' योजना का होगा शुभारंभ, लाखों परिवारों को मिलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को वाराणसी दौरे के दौरान ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा’ योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस योजना के माध्यम से बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और गंभीर बीमारियों के उपचार में आने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

    यह योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की तर्ज पर संचालित की जाएगी। इसके तहत पात्र लाभार्थी देशभर में सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना नकद भुगतान के उपचार प्राप्त कर सकेंगे। योजना के अंतर्गत मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं और उपचार संबंधी लाभ आयुष्मान भारत योजना के अनुरूप होंगे, जिससे शिक्षकों और उनके परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध हो सकेगी।

    योजना के प्रभावी और पारदर्शी संचालन के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण, सत्यापन और अनुमोदन ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए विशेष डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया गया है, जहां शिक्षक अपना विवरण दर्ज कर रहे हैं। डिजिटल प्रणाली अपनाने का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है, ताकि पात्र लाभार्थियों को बिना अनावश्यक विलंब के योजना का लाभ मिल सके।

    बेसिक शिक्षा विभाग के लिए तैयार किए गए पोर्टल पर अब तक लाखों लाभार्थी अपना विवरण दर्ज करा चुके हैं। आवेदन के बाद संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जानकारी का सत्यापन किया जाएगा, जबकि अंतिम स्वीकृति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर पर दी जाएगी। अनुमोदन के पश्चात लाभार्थियों का विवरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली से एकीकृत किया जाएगा, जिसके बाद आधार आधारित ई-केवाईसी पूरी कर डिजिटल कार्ड डाउनलोड किया जा सकेगा।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए भी ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस श्रेणी के शिक्षकों के आवेदन का सत्यापन संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य करेंगे और अंतिम अनुमोदन जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा प्रदान किया जाएगा। इसके बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की प्रणाली से जोड़ा जाएगा। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिक्षक डिजिटल कार्ड प्राप्त कर योजना के तहत कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

    राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से शिक्षकों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच अधिक आसान और प्रभावी बनेगी। डिजिटल व्यवस्था के कारण आवेदन से लेकर लाभ प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुविधाजनक होगी।

    सरकार इस योजना का दायरा आगे और बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है। आगामी चरण में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों को भी योजना से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए अलग ऑनलाइन डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। इस विस्तार के बाद राज्य में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में कार्मिकों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

  • विश्व धरोहर तक्षशिला पर मंडराया संकट, संरक्षण के नाम पर आधुनिक निर्माण से पाकिस्तान को यूनेस्को की सख्त फटकार

    विश्व धरोहर तक्षशिला पर मंडराया संकट, संरक्षण के नाम पर आधुनिक निर्माण से पाकिस्तान को यूनेस्को की सख्त फटकार

    नई दिल्ली । विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों के घेरे में आ गया है। प्राचीन तक्षशिला में संरक्षण कार्यों के दौरान आधुनिक निर्माण सामग्री और तकनीकों के उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने गंभीर आपत्ति जताई है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि यदि विवादित निर्माण कार्यों को तत्काल नहीं रोका गया और पहले किए गए बदलावों को वापस नहीं लिया गया, तो तक्षशिला को विश्व धरोहर सूची से हटाने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

    तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में गिनी जाती है। यह स्थल वैदिक, बौद्ध और प्राचीन भारतीय सभ्यता के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां विभिन्न कालखंडों के नगरों, मठों, धार्मिक स्थलों और पुरातात्विक अवशेषों का विशाल समूह मौजूद है, जो सदियों पुराने शहरी विकास और सांस्कृतिक इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

    यूनेस्को की आपत्ति उन संरक्षण कार्यों को लेकर है जिनमें ऐतिहासिक संरचनाओं की मरम्मत के दौरान आधुनिक सीमेंट, नई चिनाई और अतिरिक्त निर्माण का उपयोग किया गया। संस्था का मानना है कि इस प्रकार के हस्तक्षेप से स्मारकों की मौलिकता और ऐतिहासिक स्वरूप प्रभावित होता है। अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों के अनुसार किसी भी विश्व धरोहर स्थल पर मरम्मत या संरक्षण का कार्य मूल निर्माण शैली और पारंपरिक तकनीकों के अनुरूप होना चाहिए।

    जानकारी के अनुसार तक्षशिला परिसर के दो प्रमुख पुरातात्विक स्थलों पर किए गए निर्माण कार्यों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की गई। निरीक्षण के दौरान ऐसे बदलाव सामने आए जिनमें पुरानी दीवारों के स्थान पर नई दीवारें तैयार करना, उनकी ऊंचाई बढ़ाना तथा आधुनिक सामग्री का उपयोग शामिल बताया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के निर्माण से ऐतिहासिक संरचनाओं की प्रामाणिकता और सांस्कृतिक महत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    यूनेस्को ने पाकिस्तान से स्पष्ट रूप से कहा है कि संबंधित निर्माण कार्यों को तुरंत रोका जाए और जिन हिस्सों में आधुनिक हस्तक्षेप किया गया है, उनकी समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। संस्था ने यह भी संकेत दिया है कि यदि निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया तो तक्षशिला को संकटग्रस्त विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया जा सकता है। स्थिति में सुधार नहीं होने पर विश्व धरोहर का दर्जा वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व धरोहर स्थलों का संरक्षण केवल संरचनाओं को बचाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उनके मूल स्वरूप, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक होता है। आधुनिक निर्माण सामग्री का अनियंत्रित उपयोग किसी भी प्राचीन स्मारक की ऐतिहासिक विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सिद्धांत अत्यंत सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

    तक्षशिला लंबे समय से इतिहास, पुरातत्व और सांस्कृतिक अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां स्थित अवशेष भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन शिक्षा, व्यापार, धर्म और नगर नियोजन की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। ऐसे में संरक्षण कार्यों में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन केवल औपचारिक आवश्यकता नहीं, बल्कि इस वैश्विक धरोहर की ऐतिहासिक पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसके संरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।

  • ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐप पर शिकंजा, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी कंट्रोल के दुरुपयोग के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम

    ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐप पर शिकंजा, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी कंट्रोल के दुरुपयोग के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम


    नई दिल्ली। ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को लेकर सामने आए मामलों के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ऐसे मोबाइल ऐप, जिनके जरिए ब्लूटूथ समर्थित ई-रिक्शा बैटरियों को दूर से नियंत्रित किए जाने की आशंका जताई गई थी, उन्हें प्रमुख ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और तकनीकी खामियों के संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाना है।

    हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया कि कुछ लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट होकर वाहन को अचानक बंद कर दे रहे हैं। इन वीडियो ने ई-रिक्शा चालकों, बैटरी डीलरों और इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी। कई मामलों में चालक बीच सड़क पर वाहन बंद हो जाने के कारण असहाय नजर आए और उन्हें ई-रिक्शा को धक्का देकर सुरक्षित स्थान तक ले जाना पड़ा।

    घटनाओं के सामने आने के बाद संबंधित विभागों ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी जांच शुरू की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित मोबाइल ऐप वास्तव में किस प्रकार कार्य करते हैं और उनके फीचर्स का दुरुपयोग किस सीमा तक संभव है। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि ये ऐप ब्लूटूथ तकनीक के माध्यम से सीमित दूरी के भीतर मौजूद संगत लिथियम बैटरियों से वायरलेस तरीके से जुड़ सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे ऐप मूल रूप से बैटरी की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए विकसित किए जाते हैं। इनके माध्यम से बैटरी का वोल्टेज, तापमान, करंट और अन्य तकनीकी जानकारी देखी जा सकती है, जिससे बैटरी की कार्यक्षमता और रखरखाव में सुविधा मिलती है। हालांकि यदि सुरक्षा मानकों को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया जाए तो इसी नियंत्रण प्रणाली का गलत इस्तेमाल कर बैटरी के संचालन को प्रभावित किया जा सकता है, जिससे वाहन अचानक रुक सकता है।

    सरकार ने इसी संभावित खतरे को देखते हुए संबंधित ऐप को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म से हटाने की प्रक्रिया शुरू कराई है। अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ साइबर सुरक्षा और डिजिटल नियंत्रण प्रणाली की मजबूती भी उतनी ही आवश्यक है। यदि बैटरी प्रबंधन प्रणाली में पर्याप्त सुरक्षा नहीं होगी तो भविष्य में इस प्रकार के मामलों की पुनरावृत्ति हो सकती है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत एन्क्रिप्शन, सुरक्षित प्रमाणीकरण और नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट जैसी सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। इससे अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा बैटरी तक पहुंच बनाने और नियंत्रण हासिल करने की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। निर्माता कंपनियों को भी अपने सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर सुरक्षा मानकों की समय-समय पर समीक्षा करनी होगी।

    ई-रिक्शा देश के अनेक शहरों में सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में उनकी सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तकनीकी कमजोरी को समय रहते दूर करना आवश्यक माना जा रहा है। सरकार की ताजा कार्रवाई को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में चालकों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

  • आम महोत्सव में दिखेगी स्वाद, तकनीक और निर्यात की नई तस्वीर, किसानों से लेकर बच्चों तक के लिए होंगे विशेष आकर्षण, यूपी की आम अर्थव्यवस्था बनेगी चर्चा का केंद्र

    आम महोत्सव में दिखेगी स्वाद, तकनीक और निर्यात की नई तस्वीर, किसानों से लेकर बच्चों तक के लिए होंगे विशेष आकर्षण, यूपी की आम अर्थव्यवस्था बनेगी चर्चा का केंद्र

    नई दिल्ली। आम केवल स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की कृषि, बागवानी और निर्यात अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा भी बन चुका है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित होने वाले आम महोत्सव में किसानों, बागवानों, कृषि विशेषज्ञों, व्यापारियों और आम प्रेमियों को एक ही मंच पर जोड़ने की तैयारी की गई है। इस आयोजन में आम की आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय निर्यात, बाजार प्रबंधन और नई तकनीकों पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता जैसे मनोरंजक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

    महोत्सव के दौरान कृषि विशेषज्ञ आम की बागवानी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देंगे। इसमें पौधों के वैज्ञानिक प्रबंधन, उन्नत किस्मों का चयन, समय पर कटाई, कीट एवं रोग नियंत्रण, फलों की गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा होगी। विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के व्यावहारिक उपाय भी बताएंगे।

    उत्तर प्रदेश देश में आम उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां की जलवायु और मिट्टी कई प्रसिद्ध किस्मों के लिए उपयुक्त है। राज्य के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, रटौल, बॉम्बे ग्रीन और गौरजीत जैसे आम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। विशेष रूप से मलिहाबाद का दशहरी अपनी मिठास, सुगंध और रेशारहित गूदे के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय है, जबकि वाराणसी का लंगड़ा और सहारनपुर का चौसा भी निर्यात बाजार में लगातार मांग बनाए हुए हैं।

    राज्य में आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक पैक हाउस, प्रसंस्करण इकाइयों और गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप फलों की पैकिंग और ट्रीटमेंट के कारण उत्तर प्रदेश से कई देशों में बड़ी मात्रा में आम और आम उत्पादों का निर्यात हो रहा है। भविष्य में जेवर क्षेत्र में प्रस्तावित फ्रूट टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट सेंटर से निर्यात प्रक्रिया को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है। किसानों को फ्रूट बैग वितरण और पुराने बागों के पुनर्जीवन के लिए दी जा रही सब्सिडी जैसी योजनाएं भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    आम महोत्सव में विभिन्न किस्मों की विशेषताओं को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। दशहरी अपनी सुगंध और मिठास के लिए प्रसिद्ध है, जबकि लंगड़ा का खट्टा-मीठा स्वाद इसे अलग पहचान देता है। चौसा अपनी रसीली बनावट के कारण पसंद किया जाता है और रटौल अपनी विशिष्ट खुशबू के लिए जाना जाता है। बॉम्बे ग्रीन और गौरजीत जैसी किस्में भी अपने स्वाद और समय से पहले पकने की विशेषता के कारण किसानों और उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं।

    महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण जापान की प्रसिद्ध मियाजाकी किस्म भी होगी, जिसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। पकने पर इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी हो जाता है तथा इसका गूदा पूरी तरह रेशारहित होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक होती है, जिससे इसका स्वाद अत्यंत मीठा माना जाता है। उत्तर प्रदेश के कुछ किसानों ने भी इसकी सफल खेती शुरू कर नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और निर्यात उन्मुख खेती के माध्यम से भारत का आम उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

  • अमित शाह से मुलाकात के बाद पंजाब की सियासत में बढ़ी हलचल, बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तोड़ी चुप्पी

    अमित शाह से मुलाकात के बाद पंजाब की सियासत में बढ़ी हलचल, बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तोड़ी चुप्पी


    नई दिल्ली ।
    पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या रंधावा कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि स्वयं रंधावा ने इन अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी मुलाकात का उद्देश्य केवल पंजाब की कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना था।

    रंधावा की इस मुलाकात का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और सभी दल अपनी राजनीतिक रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसी बीच कांग्रेस संगठन में हाल ही में हुए फेरबदल के बाद रंधावा को मिली नई जिम्मेदारी को लेकर उनकी नाराजगी की चर्चा भी लगातार सामने आती रही है। ऐसे माहौल में गृह मंत्री से हुई उनकी मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।

    हाल ही में गठित पंजाब कांग्रेस की नई टीम में रंधावा को कोर कमेटी का प्रमुख बनाया गया है। राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि वह संगठन में अधिक प्रभावशाली भूमिका की उम्मीद कर रहे थे। उनके करीबी नेताओं का भी मानना है कि नई जिम्मेदारी को लेकर वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि रंधावा ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    बीजेपी में शामिल होने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए रंधावा ने साफ कहा कि उनकी मुलाकात पूरी तरह प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी विषयों पर केंद्रित थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर पंजाब के सीमावर्ती जिलों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी गतिविधियों, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टर नेटवर्क और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर मामलों की जानकारी दी थी। इन्हीं पत्रों के आधार पर उन्हें चर्चा के लिए बुलाया गया।

    रंधावा के अनुसार उन्होंने बैठक में गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और पठानकोट जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति का विस्तृत विवरण रखा। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार गैंगस्टर गिरोह, अवैध वसूली, सीमा पार से होने वाली गतिविधियां और अपराधी नेटवर्क राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने जेलों के भीतर से मोबाइल फोन के इस्तेमाल और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर भी चिंता जताई।

    बैठक के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। रंधावा का कहना है कि यदि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इन परिस्थितियों को गंभीर मानती है तो आवश्यक कार्रवाई करना उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य और देश की सुरक्षा किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर है और इसी भावना के साथ उन्होंने अपनी चिंताओं को सरकार के सामने रखा।

    फिलहाल रंधावा ने भाजपा में शामिल होने की सभी अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है, लेकिन उनकी अमित शाह से मुलाकात ने पंजाब की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। चुनावी माहौल में यह घटनाक्रम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति की दिशा पर इसका असर पड़ सकता है। कांग्रेस और भाजपा दोनों की रणनीतियों पर भी अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।

  • करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK, सीएम विजय और मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक की मांग, CBI जांच की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल

    करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK, सीएम विजय और मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक की मांग, CBI जांच की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के बहुचर्चित करूर भगदड़ मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री थलपति विजय, उनके मंत्रियों और अन्य आरोपियों की सार्वजनिक बयानबाजी से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित पक्षों को मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका जाए।

    करूर में 27 सितंबर 2025 को एक राजनीतिक जनसभा के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 142 लोग घायल हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को इसकी जांच CBI को सौंप दी थी। जांच की निगरानी पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।

    DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन और अन्य आरोपियों की सार्वजनिक टिप्पणियां गवाहों और जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। याचिका में विशेष रूप से 2 जुलाई 2026 को मंत्री आधव अर्जुन के उस बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने करूर घटना को लेकर राजनीतिक जवाब देने जैसी टिप्पणी की थी। पार्टी का आरोप है कि इस प्रकार के बयान जांच की दिशा बदलने और गवाहों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने का माध्यम बन सकते हैं।

    याचिका में मुख्यमंत्री विजय के प्रस्तावित करूर दौरे का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री मृतकों के परिजनों और घायलों को सरकारी सहायता, अनुकंपा नियुक्ति तथा अन्य लाभ देने के लिए वहां जाने वाले हैं। DMK ने स्पष्ट किया है कि उसे पीड़ित परिवारों को राहत और सहायता दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिन परिवारों को सहायता दी जानी है, वे CBI जांच में महत्वपूर्ण गवाह भी हैं। ऐसे में आरोपियों अथवा राजनीतिक कार्यपालिका का उनसे सीधा संपर्क जांच की निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा कर सकता है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2025 में, जब मामला न्यायालय में लंबित था, तब भी मुख्यमंत्री विजय ने मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये तथा घायलों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। पार्टी का कहना है कि भविष्य में भी यदि ऐसी सहायता दी जाती है तो वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों के अनुरूप और CBI को पूर्व सूचना देकर ही दी जानी चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    DMK ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि मंत्री आधव अर्जुन के हालिया बयान की जांच कराई जाए और यदि उसमें जांच को प्रभावित करने का प्रयास पाया जाता है तो उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। साथ ही मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन, बसी आनंद, सी.टी.आर. निर्मल कुमार और अन्य आरोपियों को जांच पूरी होने तक मामले पर किसी भी प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका जाए। अब इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख तय करेगा कि जांच के दौरान सार्वजनिक बयानबाजी और पीड़ित परिवारों से संपर्क को लेकर आगे क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।

  • अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री का देशवासियों से भावुक आह्वान, शिवभक्तों को दिए राष्ट्र निर्माण और जनसेवा से जुड़े पांच संकल्प

    अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री का देशवासियों से भावुक आह्वान, शिवभक्तों को दिए राष्ट्र निर्माण और जनसेवा से जुड़े पांच संकल्प


    नई दिल्ली ।
    पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 के औपचारिक शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के शिवभक्तों और तीर्थयात्रियों के नाम एक प्रेरणादायी संदेश जारी करते हुए सुरक्षित, अनुशासित और राष्ट्रहित से जुड़ी यात्रा का आह्वान किया। उन्होंने बाबा बर्फानी के दर्शन को सनातन परंपरा का अत्यंत पवित्र अवसर बताते हुए कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना का भी सशक्त प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देश के विभिन्न राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से जुड़े लाखों श्रद्धालु एक ही आस्था के सूत्र में बंधकर इस कठिन यात्रा में शामिल होते हैं। यही विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने सभी यात्रियों की सुरक्षित, सफल और मंगलमय यात्रा की कामना करते हुए यात्रा को सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का आग्रह किया।

    प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से पांच महत्वपूर्ण संकल्प अपनाने की अपील की। पहला संकल्प स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि हिमालय का प्राकृतिक वातावरण और अमरनाथ यात्रा मार्ग देश की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे में प्रत्येक श्रद्धालु का दायित्व है कि यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखे, प्लास्टिक और अन्य कचरे का उचित निस्तारण करे तथा प्रकृति को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचाए।

    दूसरे संकल्प में उन्होंने यात्रियों से सुरक्षा नियमों का पूरी गंभीरता से पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र का मौसम तेजी से बदलता है और यात्रा मार्ग चुनौतीपूर्ण है। इसलिए प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और चिकित्सा दलों द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना प्रत्येक यात्री की जिम्मेदारी है।

    तीसरे संकल्प के तहत प्रधानमंत्री ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यात्रा के दौरान अपने कुल खर्च का एक हिस्सा स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों और पारंपरिक उत्पादों की खरीद पर अवश्य खर्च करें। उनका कहना था कि इससे जम्मू-कश्मीर के स्थानीय परिवारों की आजीविका को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

    चौथे संकल्प में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियान को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि यात्रा के बाद अपने घर लौटकर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल करें। उनके अनुसार प्रकृति संरक्षण प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना हमारी जिम्मेदारी है।

    पांचवें और अंतिम संकल्प में प्रधानमंत्री ने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक को अपने संवैधानिक कर्तव्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रहित को भी समान महत्व देना चाहिए। यही भावना देश की निरंतर प्रगति और एकता को मजबूत करती है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में अमरनाथ यात्रा को सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का अद्भुत उदाहरण बताया। उन्होंने यात्रा को सफल बनाने में जुटे सुरक्षा बलों, प्रशासन, चिकित्सकों, स्वयंसेवकों, सफाई कर्मियों तथा स्थानीय नागरिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पण और सेवा भाव से ही लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुचारु रूप से संपन्न हो पाती है। अंत में उन्होंने बाबा बर्फानी से देशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और राष्ट्र की निरंतर उन्नति की प्रार्थना की।