Category: National

  • दिल्ली विधानसभा में हंगामा, महिला आरक्षण बिल पर BJP का प्रदर्शन, सत्र से पहले गरमाया माहौल

    दिल्ली विधानसभा में हंगामा, महिला आरक्षण बिल पर BJP का प्रदर्शन, सत्र से पहले गरमाया माहौल

    नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में आज का दिन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण बन गया है। महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर आयोजित विशेष सत्र शुरू होने से पहले ही माहौल गर्म हो गया, जब भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन उस राजनीतिक असंतोष को दर्शाता है, जो लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर बना हुआ है।

    सत्र की शुरुआत से पहले ही विधानसभा परिसर के बाहर और भीतर हलचल बढ़ गई। भाजपा विधायकों ने महिला आरक्षण बिल को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और नारेबाज़ी करते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस प्रदर्शन ने पूरे राजनीतिक वातावरण को एक अलग दिशा दे दी।

    वहीं, सत्र के दौरान इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की संभावना जताई गई है। महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव को लेकर सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया है कि इस पर गंभीर विचार किया जाएगा। मंत्री स्तर से यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री स्वयं इस विषय पर एक प्रस्ताव लेकर आई हैं, जिस पर सदन में चर्चा की जाएगी।

    दूसरी ओर विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव से पहले किए गए वादों को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है। इसी क्रम में महिलाओं को दिए गए आर्थिक सहायता वादों का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    सत्र से पहले हुई इस राजनीतिक हलचल ने साफ कर दिया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल विधायी चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे को अपने-अपने दृष्टिकोण से पेश कर रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर टकराव का माहौल स्वाभाविक है, क्योंकि यह सीधे सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ मामला है। ऐसे में हर पक्ष अपनी बात को मजबूती से रखना चाहता है।

    सत्र के दौरान आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस चर्चा से कोई ठोस नतीजा निकलता है या यह केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक ही सीमित रह जाता है। फिलहाल, दिल्ली विधानसभा का यह विशेष सत्र अपने शुरुआती चरण में ही राजनीतिक गर्मी का केंद्र बन चुका है, और आगे की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • सरकारी नौकरी मिलने पर खुशी की लहर, अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया को बताया निष्पक्ष और साफ-सुथरी

    सरकारी नौकरी मिलने पर खुशी की लहर, अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया को बताया निष्पक्ष और साफ-सुथरी

    नई दिल्ली। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं के लिए खुशी का बड़ा मौका देखने को मिला, जब उन्हें सरकारी सेवा में चयन का नियुक्ति पत्र सौंपा गया। इस मौके पर पूरे आयोजन स्थल पर उत्साह और गर्व का माहौल था। लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह दिन उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया।

    कार्यक्रम में शामिल अभ्यर्थियों के चेहरे सफलता की खुशी से चमक उठे। कई युवाओं ने इसे अपने जीवन की पहली बड़ी उपलब्धि बताया, जबकि कुछ ने इसे अपने परिवार के सपनों की पूर्ति के रूप में देखा। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद युवाओं में आत्मविश्वास और संतोष साफ झलक रहा था।

    चयनित अभ्यर्थियों ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बताया। उनका कहना था कि इस बार चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश नहीं रही, जिससे मेहनत करने वाले उम्मीदवारों को उनका सही हक मिला है। इसी वजह से युवाओं का सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

    कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि इस तरह की पारदर्शी प्रक्रिया से युवाओं में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। उनका मानना है कि जब चयन प्रक्रिया साफ और ईमानदार होती है, तो मेहनत का परिणाम भी सही दिशा में मिलता है। इस अवसर पर कई युवाओं ने अपने परिवार के साथ इस खुशी को साझा किया और इसे जीवन का यादगार पल बताया।

    कार्यक्रम के दौरान अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि सरकारी सेवा में चयन होना केवल नौकरी नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है, जिसे वे पूरी ईमानदारी के साथ निभाएंगे। उनका कहना था कि अब उनका लक्ष्य प्रशिक्षण पूरा करके सेवा में योगदान देना है।

    कुछ चयनित युवाओं ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में और अधिक युवाओं को ऐसे अवसर मिलेंगे, जिससे रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। उनका कहना था कि यह अवसर न केवल उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में जिम्मेदारी निभाने का भी मौका देता है।

    पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल बेहद सकारात्मक रहा और हर ओर खुशी और संतोष का भाव दिखाई दिया। यह अवसर उन युवाओं के लिए एक नई शुरुआत साबित हुआ, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है।

  • सिक्किम दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने खेला मैच, आज कई बड़ी परियोजनाओं का करेंगे शिलान्यास

    सिक्किम दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने खेला मैच, आज कई बड़ी परियोजनाओं का करेंगे शिलान्यास

    नई दिल्ली। सिक्किम की स्थापना के 50 गौरवशाली वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बेहद ऊर्जावान और अनूठे अवतार में नजर आए। गंगटोक की ठंडी और ताजी सुबह में प्रधानमंत्री ने प्रोटोकॉल से हटकर स्थानीय बच्चों और युवाओं के साथ फुटबॉल के मैदान पर समय बिताया। स्पोर्ट्स जैकेट पहने प्रधानमंत्री ने न केवल गेंद पर अपने हाथ आजमाए, बल्कि युवाओं के साथ मैदान की दौड़ भी लगाई।

    खेल के प्रति प्रधानमंत्री का यह समर्पण और उनका ‘सुपर एनर्जेटिक’ अंदाज़ वहां मौजूद खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया। प्रधानमंत्री ने इस पल को यादगार बताते हुए युवाओं की असीमित ऊर्जा की जमकर सराहना की।

    प्रधानमंत्री का यह दो दिवसीय दौरा केवल खेल और उत्साह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिक्किम के भविष्य की नई इबारत लिखने वाला है। आज के विशेष कार्यक्रम में वे राज्य के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देने के लिए 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का उपहार देंगे। इन योजनाओं का मुख्य केंद्र शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी है।

    गंगटोक के पलजोर स्टेडियम से प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे और राज्य के पहले मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ सिक्किम विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर का भी लोकार्पण करेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के 160 स्कूलों को आधुनिक आईटी सुविधाओं से लैस कर बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाएगा।

    सिक्किम की दुर्गम भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बड़ा निवेश किया जा रहा है। तीस्ता नदी पर दो विशाल स्टील आर्च पुलों का निर्माण शुरू होगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए यात्रा सुगम हो सकेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेद और सोवा रिग्पा अस्पतालों की आधारशिला रखी जाएगी।

    इसके अलावा, पर्यटन और पर्यावरण को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आधुनिक ऑर्किड सेंटर और कैलाश मानसरोवर यात्रा की नई सुविधाओं का उद्घाटन भी प्रस्तावित है। कृषि क्षेत्र में किसानों की समृद्धि के लिए नए प्रोसेसिंग प्लांट और खेल प्रतिभाओं के लिए इनडोर क्रिकेट स्टेडियम जैसी सुविधाएं सिक्किम के समग्र विकास को एक नई गति प्रदान करेंगी।

  • यूपी पुलिस में बंपर भर्ती का ऐलान: योगी आदित्यनाथ बोले-इस साल एक लाख नई नौकरियां

    यूपी पुलिस में बंपर भर्ती का ऐलान: योगी आदित्यनाथ बोले-इस साल एक लाख नई नौकरियां

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य में इस वर्ष पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे हजारों युवाओं को सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि यूपी पुलिस में लगभग एक लाख नई भर्तियां इस साल की जाएंगी। इसके साथ ही अन्य सुरक्षा और सहयोगी विभागों में भी भर्ती प्रक्रिया तेज गति से जारी है। उन्होंने बताया कि हाल के समय में कई चरणों में भर्ती परीक्षाएं आयोजित की गई हैं, जिससे बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को चयन का अवसर मिला है।

    एक कार्यक्रम के दौरान चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए और उन्हें ईमानदारी, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की सलाह दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल का काम केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि समाज में विश्वास और सुरक्षा का माहौल स्थापित करना भी है।

    उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब चयन पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित है। किसी भी तरह की सिफारिश या अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिल सके।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पुलिस बल को काफी मजबूत किया गया है और प्रशिक्षण सुविधाओं में भी सुधार किया गया है। इससे नए भर्ती जवानों को बेहतर माहौल में ट्रेनिंग मिल रही है और वे अधिक सक्षम बनकर सेवा में उतर रहे हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत कानून व्यवस्था किसी भी राज्य के विकास की नींव होती है। जब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है, तो निवेश, विकास और रोजगार के अवसर अपने आप बढ़ते हैं।

    अंत में उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि फिटनेस और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है, ताकि वे न केवल नौकरी में सफल हों बल्कि समाज और देश की सेवा भी बेहतर तरीके से कर सकें।

  • आधी रात का हमला और बड़ा सवाल: क्या यह लोन वुल्फ अटैक था, ATS ने संभाली जांच

    आधी रात का हमला और बड़ा सवाल: क्या यह लोन वुल्फ अटैक था, ATS ने संभाली जांच


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के मुंबई के पास मीरा रोड इलाके से एक बेहद सनसनीखेज और चिंताजनक घटना सामने आई है जिसने सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं रविवार तड़के हुए इस हमले में एक शख्स ने दो सिक्योरिटी गार्ड्स से उनका धर्म पूछने के बाद उन पर चाकू से हमला कर दिया जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया

    जानकारी के मुताबिक यह घटना सुबह करीब चार बजे की है जब दोनों गार्ड एक निर्माणाधीन इमारत में ड्यूटी पर तैनात थे तभी 31 वर्षीय आरोपी जैब जुबैर अंसारी वहां पहुंचा और उनसे नाम और धर्म के बारे में पूछताछ करने लगा इसके बाद उसने उनसे कलमा पढ़ने के लिए कहा और मना करने पर अचानक चाकू निकालकर हमला कर दिया

    इस हमले में एक गार्ड को गंभीर चोटें आई हैं जबकि दूसरे को हल्की चोटें आईं घायल गार्ड्स को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है बताया जा रहा है कि हमले के दौरान एक गार्ड किसी तरह अपनी जान बचाकर पास के केबिन में छिप गया और वहीं से पुलिस को सूचना दी

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान की और महज डेढ़ घंटे के भीतर उसे गिरफ्तार कर लिया आरोपी मीरा रोड ईस्ट के नया नगर इलाके में किराए के मकान में रह रहा था

    प्रारंभिक जांच में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है पुलिस के अनुसार आरोपी इंटरनेट पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़े प्रोपेगैंडा वीडियो देखता था जिसके बाद इस मामले में आतंकी एंगल से भी जांच शुरू कर दी गई है

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड को सौंप दी गई है जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा था या फिर अकेले ही इस तरह के हमले की योजना बना रहा था जिसे लोन वुल्फ अटैक की श्रेणी में रखा जाता है

    पुलिस को आरोपी के पास से कुछ आपत्तिजनक सामग्री भी मिली है और उसके पिछले रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है बताया जा रहा है कि आरोपी पहले विदेश में पढ़ाई कर चुका है और पिछले कुछ समय से अकेले रह रहा था

    यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं बल्कि समाज में बढ़ती कट्टरता और ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री के असर की ओर भी इशारा करती है फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि इस हमले के पीछे असली वजह क्या थी

  • 7 लीटर दूध देने वाली विदेशी सानेन बकरी भारत में एंट्री गांधी जी ने कहा था गरीबों की गाय

    7 लीटर दूध देने वाली विदेशी सानेन बकरी भारत में एंट्री गांधी जी ने कहा था गरीबों की गाय


    नई दिल्ली । भारत में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को नई दिशा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है जहां स्विट्जरलैंड की मशहूर सानेन बकरी को जम्मू कश्मीर में लाया गया है। दूध उत्पादन के मामले में बेहद खास मानी जाने वाली यह नस्ल अब किसानों की आमदनी बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

    शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर के वैज्ञानिकों ने इस पहल की शुरुआत की है। प्रोजेक्ट के तहत 7 से 8 महीने की उम्र वाली 20 मादा और 4 नर सानेन बकरियां स्विट्जरलैंड से लाई गई हैं। यह पहली बार है जब किसी सरकारी संस्थान ने इस विदेशी नस्ल को भारत में संगठित तरीके से शामिल किया है।

    इस बकरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी दूध देने की क्षमता है। सानेन बकरी एक दिन में करीब 7 लीटर तक दूध दे सकती है जो इसे अन्य बकरियों से अलग बनाता है। यही वजह है कि इसे दूध की रानी भी कहा जाता है। खास बात यह भी है कि इसका दूध A2 कैटेगरी में आता है जो पोषण के लिहाज से काफी बेहतर माना जाता है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है।

    इस नस्ल का संबंध महात्मा गांधी से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि गांधी जी इस बकरी को भारत लेकर आए थे और इसकी खासियत को देखते हुए इसे गरीब आदमी की गाय कहा था। कम लागत में अधिक दूध उत्पादन करने की क्षमता के कारण यह छोटे किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है।

    गाय के मुकाबले सानेन बकरी का पालन करना आसान होता है। इसे कम जगह की जरूरत होती है और इसका खानपान भी अपेक्षाकृत सस्ता होता है। यही वजह है कि सीमित संसाधनों वाले किसान भी इसे आसानी से पाल सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं।

    फिलहाल इन बकरियों को सीधे किसानों को नहीं दिया जाएगा। पहले जम्मू कश्मीर की जलवायु में इनके अनुकूलन का अध्ययन किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह नस्ल यहां के वातावरण में बेहतर प्रदर्शन कर सके। इसके बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर किसानों और युवाओं में वितरित किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो सानेन बकरी जम्मू कश्मीर में डेयरी सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

  • पंजाब में रेलवे ट्रैक पर जोरदार धमाका, DFCCIL कॉरिडोर में दहशत, आतंकी साजिश की आशंका

    पंजाब में रेलवे ट्रैक पर जोरदार धमाका, DFCCIL कॉरिडोर में दहशत, आतंकी साजिश की आशंका

    नई दिल्ली। पंजाब में रेलवे सुरक्षा को लेकर एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। राजपुरा और शंभू के बीच स्थित डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर देर रात एक तेज धमाका हुआ, जिससे रेलवे ट्रैक को काफी नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत सक्रिय कर दिया गया।

    धमाका इतना शक्तिशाली था कि ट्रैक का एक हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हो गया। घटना स्थल पर मौजूद एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह घटना सामान्य दुर्घटना नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे किसी तरह की सुनियोजित योजना होने की संभावना भी जताई जा रही है।

    जांच के दौरान मौके से कुछ संदिग्ध वस्तुएं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है। विशेषज्ञ इन सामग्रियों की फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि विस्फोट कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ।

    रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। पूरे क्षेत्र में जांच तेज कर दी गई है और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। चूंकि यह रेलवे कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण मार्ग का हिस्सा है, इसलिए इसकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।

    इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इसी क्षेत्र में पहले भी इसी तरह की घटना की आशंका या घटना सामने आ चुकी है। बार-बार एक ही इलाके में इस तरह की गतिविधियां सामने आने से यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित साजिश तो नहीं है।

    घटना के बाद रेल संचालन पर भी असर पड़ा है और कुछ समय के लिए मालगाड़ियों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया है। सुरक्षा बलों को मौके पर तैनात किया गया है और पूरे ट्रैक की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि किसी भी तरह की और घटना को रोका जा सके।

    स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां हर संभावित पहलू से जांच कर रही हैं। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि मृतक व्यक्ति का इस घटना से क्या संबंध था और उसकी गतिविधियां किस दिशा में संकेत कर रही थीं।

    फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और सुरक्षा एजेंसियां इसे किसी भी संभावित साजिश के एंगल से खारिज नहीं कर रही हैं। इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • राघव चड्ढा का ही ये बिल अगर पास हो जाता तो नहीं बदल पाते पार्टी, चली जाती सांसदी! जानिए कैसे ?

    राघव चड्ढा का ही ये बिल अगर पास हो जाता तो नहीं बदल पाते पार्टी, चली जाती सांसदी! जानिए कैसे ?


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता राघव चड्ढा द्वारा हाल ही में राज्यसभा के 6 अन्य सदस्यों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के बीच एक दिलचस्प राजनीतिक विरोधाभास सामने आया है। अगर चार साल पहले उन्होंने खुद जिस दल-बदल विरोधी कानून को और सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा था, वह कानून बन गया होता, तो आज उनकी राजनीतिक स्थिति पूरी तरह अलग होती।

    सूत्रों के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत राज्यसभा में किसी दल के दो-तिहाई (2/3) सांसदों के एक साथ अलग होने पर उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से छूट मिल जाती है। इसी आधार पर 10 में से 7 सांसदों (चड्ढा सहित) के एक साथ जाने से उनकी सदस्यता सुरक्षित रहने की बात सामने आई है। लेकिन मामला यहीं दिलचस्प मोड़ लेता है। वर्ष 2022 में राज्यसभा में प्रवेश के कुछ ही महीनों बाद राघव चड्ढा ने एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था, जिसमें उन्होंने दल-बदल कानून को और सख्त बनाने की मांग की थी।

    उनके प्रस्तावित बिल में क्या था खास?

    इस विधेयक में उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव सुझाए थे। प्रस्ताव था कि किसी पार्टी के विलय को वैध मानने के लिए 2/3 की जगह 3/4 (तीन-चौथाई) समर्थन जरूरी किया जाए। साथ ही, पार्टी बदलने वाले सांसदों और विधायकों पर 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का भी सुझाव दिया गया था। इसके अलावा, ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ और विधायकों की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए भी सख्त प्रावधान प्रस्तावित किए गए थे, जिसमें सरकार गिरने की स्थिति में सांसदों/विधायकों को तय समय में सदन के सामने पेश होने की अनिवार्यता शामिल थी।

    संवैधानिक बदलाव का प्रस्ताव

    चड्ढा ने अपने विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 तथा दसवीं अनुसूची में संशोधन की मांग की थी, ताकि जनप्रतिनिधियों को अधिक जवाबदेह बनाया जा सके और दल-बदल पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    वर्तमान स्थिति

    राज्यसभा रिकॉर्ड के अनुसार, राघव चड्ढा का यह प्राइवेट मेंबर बिल अब भी लंबित है और कानून का रूप नहीं ले पाया। इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि यदि उनका ही प्रस्तावित सख्त कानून लागू हो जाता, तो आज दल-बदल के मौजूदा नियमों के तहत उन्हें और उनके साथियों को मिलने वाली छूट संभव नहीं होती।

  • आसाराम के आश्रम को सुप्रीम कोर्ट से राहत, बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक, जाने क्या है मामला?

    आसाराम के आश्रम को सुप्रीम कोर्ट से राहत, बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक, जाने क्या है मामला?


    जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद स्थित आसाराम के आश्रम से जुड़े मामले में बड़ा अंतरिम आदेश देते हुए बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि विवादित 45 हजार वर्ग मीटर जमीन पर 4 मई तक यथास्थिति बनाए रखी जाए।

    यह जमीन 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गुजरात सरकार द्वारा वापस लिए जाने की प्रक्रिया में है। वहीं आश्रम ट्रस्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें अतिक्रमण और पट्टे की शर्तों के उल्लंघन के आधार पर जमीन खाली करने का आदेश दिया गया था।

    SC ने क्या कहा?

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार से जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने को कहा है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रस्ट को उचित नोटिस नहीं दिए गए थे। सरकार को तीन दिन के भीतर दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, जबकि ट्रस्ट को भी जवाब देने के लिए समान समय दिया गया है। अदालत ने साफ किया कि अगली सुनवाई तक जमीन पर किसी भी तरह की तोड़-फोड़ या कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    सरकार और ट्रस्ट के दावे
    गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ट्रस्ट द्वारा पट्टे की शर्तों का उल्लंघन किया गया है और बिना अनुमति कई निर्माण किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप हैं। वहीं ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह जमीन सामाजिक कार्यों और स्कूल संचालन के लिए दी गई थी और 1960 में चैरिटेबल ट्रस्ट को वैध रूप से आवंटित की गई थी। उनके अनुसार, किसी भी तरह का उल्लंघन नहीं हुआ है और सरकार अब जमीन वापस लेने की कोशिश कर रही है।

    अदालत की टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि पहले जमीन का पट्टा दिया गया, फिर विस्तार किया गया और अब उसे अचानक खत्म करने की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई। अंत में सरकार की ओर से अदालत को भरोसा दिलाया गया कि 4 मई तक मौके पर कोई भी निर्माण या तोड़-फोड़ नहीं होगी। अगली सुनवाई अगले सोमवार को होगी।

  • केरल में 8 जहरीले सांपों और किंग कोबरा के लिए नहीं है खास एंटीवेनम, इलाज बना चुनौती

    केरल में 8 जहरीले सांपों और किंग कोबरा के लिए नहीं है खास एंटीवेनम, इलाज बना चुनौती


    नई दिल्ली। केरल में सांप काटने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में पाए जाने वाले आठ प्रमुख विषैले सांपों और किंग कोबरा के लिए कोई विशेष एंटीवेनम उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से डॉक्टरों को मरीजों का इलाज केवल लक्षणों के आधार पर करना पड़ रहा है।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिट वाइपर प्रजाति के सांप इस समस्या के केंद्र में हैं। इनमें कूबड़दार नाक वाला पिट वाइपर (हाइपनेल हाइपनेल) सबसे खतरनाक माना जाता है, जो जंगलों, रबर बागानों और खेतों में आमतौर पर पाया जाता है। यह केरल में सांप काटने के लगभग 25 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार बताया जाता है और इसकी मृत्यु दर भी अधिक है।

    इलाज सीमित, चुनौतियां बड़ी

    फिलहाल इन मामलों में इलाज डायलिसिस और प्लाज्मा थेरेपी जैसे तरीकों से लक्षण नियंत्रित करने तक सीमित है। स्वास्थ्य और वन विभाग लंबे समय से स्थानीय एंटीवेनम विकसित करने की सिफारिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस प्रगति नहीं हो पाई है।

    केरल में पाए जाने वाले प्रमुख विषैले सांप

    राज्य में मालाबार पिट वाइपर की विभिन्न किस्में, हॉर्सशू पिट वाइपर की दो प्रजातियां, बांस पिट वाइपर और बड़े आकार के पिट वाइपर जैसे सांप पाए जाते हैं। इनमें से कई प्रजातियां राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में फैली हुई हैं और इनके काटने के मामले सामने आते रहते हैं।

    किंग कोबरा और कोरल स्नेक पर भी संकट

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किंग कोबरा के लिए भारत में कोई स्वदेशी एंटीवेनम उपलब्ध नहीं है। असम में एक उत्पादन केंद्र पहले मौजूद था, लेकिन कम मांग के कारण उसे बंद कर दिया गया। इसी तरह पश्चिमी घाट में पाए जाने वाले कोरल स्नेक के लिए भी कोई एंटीवेनम विकसित नहीं किया गया है।

    वर्तमान में भारत में बहुसंयोजक (मल्टी-वैलेंट) एंटीवेनम चेन्नई से एकत्र किए गए विष के आधार पर तैयार किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केरल की स्थानीय सांप प्रजातियों के अनुसार अलग एंटीवेनम तैयार करना जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो राज्य में सांप काटने से होने वाली मौतों का खतरा और बढ़ सकता है।