Category: National

  • अलीगंज अग्निकांड में बड़ा एक्शन, LDA के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों से होगी पूछताछ

    अलीगंज अग्निकांड में बड़ा एक्शन, LDA के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों से होगी पूछताछ


    लखनऊ। अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के 100 से अधिक वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है। वर्ष 2014 से 2026 तक इस भवन से जुड़े अधिकारियों का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है और सूची तैयार कर एसआईटी को सौंपी जाएगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

    22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित चार मंजिला कोचिंग कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे के बाद एलडीए ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, जिसने अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को सौंप दी है।

    रिपोर्ट में सामने आईं कई गंभीर खामियां
    जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार भवन में निर्धारित मानकों से अधिक निर्माण किया गया था। इसके अलावा आने-जाने का रास्ता बेहद संकरा था, जबकि आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी और बचाव के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं थे। प्रारंभिक जांच में इन्हीं कमियों को हादसे की प्रमुख वजह माना गया है।

    अब एसआईटी यह जांच करेगी कि भवन निर्माण की स्वीकृति, निरीक्षण और मानकों के पालन में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही और कहीं प्रशासनिक लापरवाही तो नहीं हुई।

    हादसे का घटनाक्रम
    22 जून को दोपहर करीब 2:15 बजे अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित चार मंजिला इमारत में आग लग गई। स्थानीय लोगों ने शुरुआती स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैलने लगी। दोपहर 2:30 बजे फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। करीब 3:10 बजे पहली दमकल मौके पर पहुंची और आग की गंभीरता को देखते हुए कुल 13 दमकल गाड़ियों को बुलाया गया। कई घंटे की मशक्कत के बाद शाम लगभग 6:30 बजे आग पर काबू पाया गया। इस दर्दनाक हादसे में 15 युवाओं की मौत हो गई।

    कोचिंग संस्थानों पर भी कार्रवाई
    हादसे के बाद प्रशासन ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। जांच के दौरान भवन और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पाए जाने पर फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले अन्य संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रहेगी।

    अब सभी की नजर एसआईटी जांच पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

  • NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में SIR के बारे में पढ़ेंगे बच्चे, समाजवाद-धर्मनिरपेक्षता की पुरानी व्याख्या हटाई

    NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में SIR के बारे में पढ़ेंगे बच्चे, समाजवाद-धर्मनिरपेक्षता की पुरानी व्याख्या हटाई


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की नई पाठ्यपुस्तक में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस बार छात्रों को चुनाव प्रक्रिया से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बारे में पढ़ाया जाएगा। वहीं, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र से संबंधित कुछ व्याख्याओं को पहले की तुलना में बदले हुए स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। नई सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों को संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की व्यापक समझ देना बताया गया है। इन बदलावों को लेकर शिक्षा और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

    संविधान की व्याख्या का बदला स्वरूप
    नई पुस्तक में संविधान को समझाने का तरीका भी बदला गया है। इसमें संविधान निर्माण की प्रक्रिया, संविधान सभा की भूमिका और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के कार्यों पर अधिक जोर दिया गया है। इसके अलावा समानता, स्वतंत्रता, अधिकार और नागरिकों की जिम्मेदारियों जैसे विषयों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।

    पहले की पुस्तकों में संविधान की प्रस्तावना और उसमें शामिल शब्दों की विस्तृत व्याख्या दी जाती थी, जबकि नई किताब में प्रस्तावना को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया है। साथ ही समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे शब्दों को भी पहले की तरह विस्तार से प्रस्तुत नहीं किया गया है।

    पहली बार कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में इमरजेंसी
    नई किताब में पहली बार वर्ष 1975 की इमरजेंसी को भी शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि उस दौर में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा और उस समय लिए गए फैसलों को लेकर किस तरह की चर्चाएं हुईं। इसे लोकतंत्र के सामने आने वाली चुनौतियों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    SIR को पाठ्यक्रम में क्यों मिली जगह
    पुस्तक में चुनाव आयोग की जिम्मेदारियों के साथ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को भी समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाए रखने की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की जाती है।

    चार विषय अब एक ही पुस्तक में
    इस बार इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र को अलग-अलग पुस्तकों के बजाय एकीकृत कर एक ही पुस्तक में शामिल किया गया है। NCERT का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के बीच आपसी संबंधों की समग्र समझ प्रदान करना है।

    शिक्षा मंत्री का बयान
    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विद्यार्थियों को देश के इतिहास और लोकतंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी होना आवश्यक है। उनके अनुसार, ऐसे विषयों का अध्ययन करने से नई पीढ़ी में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और इतिहास के प्रति बेहतर समझ विकसित होगी।

  • अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का कल्याण ही लक्ष्य', प्रशिक्षण महाअभियान में बोले CM योगी

    अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का कल्याण ही लक्ष्य', प्रशिक्षण महाअभियान में बोले CM योगी


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर में दो दिवसीय ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की विकास यात्रा को समर्पित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को भाजपा की वैचारिक नींव बताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रशिक्षण शिविर केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और आदर्शों को कार्यकर्ताओं के जीवन में उतारने का अभियान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में मिले संस्कारों के आधार पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय जनसंघ के संगठन महामंत्री के रूप में संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया।

    अंत्योदय को बताया विकास की मूल अवधारणा
    सीएम योगी ने कहा कि भारतीय राजनीति में ‘अंत्योदय’ का विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सबसे बड़ी देन है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की नीतियों का केंद्र समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति होना चाहिए। जब तक विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, तब तक सुशासन की अवधारणा अधूरी रहती है।

    उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय आर्थिक चिंतन को नई दिशा देते हुए अंत्योदय का सिद्धांत दिया, जिसे भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन और शासन दोनों में आत्मसात करने का प्रयास कर रही है।

    कार्यकर्ताओं को दिए संगठनात्मक मूल्यों के संदेश
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में चलाया जा रहा यह प्रशिक्षण महाअभियान कार्यकर्ताओं को राष्ट्रसेवा, संगठन, पारदर्शिता और जनकल्याण के मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता इन आदर्शों को अपने व्यवहार और कार्यशैली का हिस्सा बनाए, यही इस अभियान का उद्देश्य है।

    सोशल मीडिया पर भी दी शुभकामनाएं
    कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के महापुरुषों के आदर्श आज भी सार्वजनिक जीवन में शुचिता, पारदर्शिता और राष्ट्रसेवा के प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए प्रशिक्षण शिविर के सफल आयोजन की कामना की।

    उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम संगठन को मजबूत बनाने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं में वैचारिक स्पष्टता और जनसेवा की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।

  • चढ़ावा गबन मामले पर गरमाई सियासत, पवन पांडेय बोले- 'बुलडोजर नहीं चला, न्याय में भी दो आंख'

    चढ़ावा गबन मामले पर गरमाई सियासत, पवन पांडेय बोले- 'बुलडोजर नहीं चला, न्याय में भी दो आंख'


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने एक बार फिर इस मुद्दे पर भाजपा सरकार और ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं ने करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंचाई है।

    पवन पांडेय ने कहा कि इतिहास में महमूद गजनवी पर कई बार मंदिरों को लूटने के आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन उनके अनुसार राम मंदिर चढ़ावा मामले में जिस तरह की कथित घटनाएं सामने आई हैं, वे उससे भी अधिक गंभीर हैं। उन्होंने कहा, “40 दिनों में 70 बार लूटा, इन्होंने तो लूटने में गजनवी को भी पीछे छोड़ दिया।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जिन लोगों पर राम मंदिर की व्यवस्था, सुरक्षा और श्रद्धालुओं के चढ़ावे की जिम्मेदारी थी, वही लोग कथित तौर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहे। उनके अनुसार यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ विश्वासघात है।

    पूर्व मंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अपराधों पर सख्त कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन इस मामले में वैसी कठोर कार्रवाई दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि यदि यह इतना बड़ा मामला है तो निष्पक्ष और तेज जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    पवन पांडेय ने कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और करोड़ों लोगों की आस्था के आधार पर बना है। ऐसे में यदि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े किसी भी प्रकार के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रह सके।

    राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर पहले भी विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से जांच की मांग उठाई जा चुकी है। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई कर रही हैं। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

  • राम मंदिर विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री की दो टूक, बोले- सरकारी सजा से नहीं बचेंगे, ईश्वर का न्याय भी होगा

    राम मंदिर विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री की दो टूक, बोले- सरकारी सजा से नहीं बचेंगे, ईश्वर का न्याय भी होगा

    छतरपुर। अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी के मामले को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। इस बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने भगवान के मंदिर और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ छल किया है तो वह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ विश्वासघात है। ऐसे लोगों को कानून के साथ-साथ ईश्वरीय न्याय का भी सामना करना पड़ेगा।

    इंडोनेशिया में आयोजित हनुमान कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि मंदिर में चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी केवल धन की चोरी नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की श्रद्धा और विश्वास की चोरी है। उन्होंने कहा कि जो लोग भगवान के नाम पर चढ़ाई गई राशि में अनियमितता करते हैं वे महापाप के भागीदार बनते हैं।

    उन्होंने अपने संबोधन में रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि माता सीता का हरण करने वाले रावण का पूरा वंश नष्ट हो गया था। उसी प्रकार यदि कोई भगवान श्रीराम के मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ करता है तो उसे भी उसके कर्मों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को केवल सरकारी कार्रवाई ही नहीं बल्कि ईश्वर के न्याय का भी सामना करना होगा।

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज होना एक महत्वपूर्ण कदम है लेकिन जांच को पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार यदि निष्पक्ष जांच होगी तो पूरे प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों और जिम्मेदार लोगों का भी खुलासा होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

    राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी का मुद्दा उस समय सामने आया जब इस मामले को लेकर शिकायतें और आरोप सार्वजनिक हुए। इसके बाद जांच की मांग तेज हुई और विभिन्न स्तरों पर बैठकों तथा प्रशासनिक कार्रवाई का दौर शुरू हुआ। बाद में विशेष जांच के आधार पर संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और कई लोगों को नामजद किया गया।

    मामले के बीच ट्रस्ट में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के पद छोड़ने की खबर भी सामने आई। हालांकि पूरे प्रकरण की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सत्य देर-सवेर सामने आता है और न्याय की प्रक्रिया पर विश्वास रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में किसी भी दोषी को उसके कर्मों का फल अवश्य मिलता है।


  • अंधविश्वास बना मौत की वजह? झाड़-फूंक के दौरान युवक की मौत, मौलवी पर बलि देने का आरोप

    अंधविश्वास बना मौत की वजह? झाड़-फूंक के दौरान युवक की मौत, मौलवी पर बलि देने का आरोप


    बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बुखार से पीड़ित एक युवक की कथित झाड़-फूंक के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने मौलवी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि झाड़-फूंक के नाम पर युवक की जीभ काट दी गई, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसकी जान चली गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    यह मामला टिकैतनगर थाना क्षेत्र के सिहोरिया गांव का है। मृतक की पहचान सुकई गौतम के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक सुकई पिछले चार दिनों से तेज बुखार से पीड़ित था। इसी दौरान उसके एक परिचित ने इलाज के लिए खजुरी गांव के मौलवी गुल्ले हिदायत रसूल को बुलाने की सलाह दी। परिवार का कहना है कि मौलवी ने घर पहुंचकर युवक पर किसी प्रेत बाधा का साया होने की बात कही और झाड़-फूंक से उसे ठीक करने का दावा किया।

    परिजनों के अनुसार अगले दिन रात करीब आठ बजे मौलवी दोबारा घर पहुंचा और झाड़-फूंक शुरू की। उस समय परिवार के कुछ सदस्य गांव में ताजिया देखने गए हुए थे जबकि घर पर केवल सुकई और उसका भाई राजेश मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान मौलवी ने युवक को नहलाया, फूल-पत्ती चढ़ाई, कुछ मंत्र पढ़े और ताबीज का पानी पिलाया। इसके बाद उसने धारदार हथियार से युवक की जीभ काट दी। परिजनों का आरोप है कि इस घटना के बाद मौलवी मौके से फरार हो गया।

    बताया गया कि युवक की चीख-पुकार सुनकर उसका भाई मौके पर पहुंचा और अन्य परिजनों को सूचना दी। परिवार ने तुरंत उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने आरोपी मौलवी गुल्ले बाबा उर्फ हिदायत रसूल को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों और घटना की परिस्थितियों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

     

  • संदिग्ध हालात में युवती की मौत, बिना सूचना अंतिम संस्कार की कोशिश ने बढ़ाए सवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    संदिग्ध हालात में युवती की मौत, बिना सूचना अंतिम संस्कार की कोशिश ने बढ़ाए सवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार


    मुगलसराय। कोतवाली क्षेत्र के सुभाष नगर में शुक्रवार देर रात एक 19 वर्षीय युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। युवती का शव घर के एक कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। मृतका की पहचान खुशी सिंह के रूप में हुई है, जो अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहती थी।

    बताया गया कि खुशी के पिता ऑटो चालक हैं और परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वह पांच बहनों में चौथे स्थान पर थी। घटना के बाद परिजन बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए। इसी दौरान किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही मुगलसराय कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और अंतिम संस्कार रुकवाकर शव को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई।

    प्रारंभिक जांच में मामला फंदे से लटककर आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।

    पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों की पूरी जानकारी मिल सके। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि परिजन बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार क्यों करना चाहते थे। इसी वजह से मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि युवती कुछ समय पहले अपने दोस्तों के साथ बिना परिवार को बताए दार्जिलिंग घूमने गई थी। घर लौटने पर उसे इस बात को लेकर डांट भी पड़ी थी। हालांकि पुलिस ने इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और कहा है कि जांच केवल तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में किसी प्रकार की संदिग्ध परिस्थिति सामने आती है तो उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस मामले की हर संभावित दिशा में जांच कर रही है और सभी तथ्यों को एकत्र किया जा रहा है।

  • शर्मिष्ठा मुखर्जी का खुलासा, प्रणब मुखर्जी ने 2014 के जनादेश को बताया था भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक मोड़

    शर्मिष्ठा मुखर्जी का खुलासा, प्रणब मुखर्जी ने 2014 के जनादेश को बताया था भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक मोड़


    नई दिल्ली । पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और पूर्व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने एक लेख में अपने दिवंगत पिता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रसंग साझा करते हुए दावा किया है कि प्रणब मुखर्जी का मानना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में जनता से प्रत्यक्ष जनादेश प्राप्त हुआ। उनके अनुसार वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था जिसने चुनावी राजनीति की दिशा बदल दी।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान प्रणब मुखर्जी ने मोदी से चुनाव परिणाम का विश्लेषण पूछा। मोदी ने कहा कि लगभग तीन दशकों बाद किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ है। इस पर प्रणब मुखर्जी ने उनसे पूछा कि इसके अलावा और क्या विशेष बात रही। जब मोदी ने कोई उत्तर नहीं दिया तो उन्होंने स्वयं कहा कि यह पहला अवसर था जब देश की जनता ने औपचारिक रूप से घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में किसी नेता को स्पष्ट जनादेश दिया।

    लेख में दावा किया गया है कि प्रणब मुखर्जी का मानना था कि इससे पहले देश के प्रधानमंत्री या तो चुनाव के बाद पार्टी द्वारा चुने जाते थे या फिर गठबंधन की परिस्थितियों में सर्वसम्मति से तय किए जाते थे। जवाहरलाल नेहरू से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक किसी भी प्रधानमंत्री को चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में जनता से प्रत्यक्ष समर्थन नहीं मिला था। वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को पहले ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था और मतदाताओं ने उसी नेतृत्व को ध्यान में रखकर मतदान किया।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने यह भी लिखा कि उनके पिता का मानना था कि वर्ष 2014 का चुनाव भारतीय संसदीय लोकतंत्र में एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत था जहां मतदाताओं ने लगभग राष्ट्रपति प्रणाली जैसी शैली में एक व्यक्ति के नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने उल्लेख किया कि नरेंद्र मोदी उस समय राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे और पहली बार सांसद बनकर सीधे प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

    लेख में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का भी उल्लेख किया गया है। शर्मिष्ठा ने लिखा कि डॉ. सिंह को कांग्रेस नेतृत्व ने प्रधानमंत्री चुना था जबकि पी. वी. नरसिम्हा राव और एच. डी. देवेगौड़ा भी प्रधानमंत्री बनने के समय संसद के सदस्य नहीं थे। उनके अनुसार वर्ष 2014 का जनादेश इन सभी उदाहरणों से अलग था क्योंकि उसमें मतदाताओं ने सीधे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भारतीय जनता पार्टी की चुनावी सफलता के पीछे मजबूत संगठन, जमीनी स्तर पर निरंतर काम, विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच, रणनीतिक सुधार और प्रभावी नेतृत्व को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने लिखा कि इन सभी कारकों ने भाजपा को लगातार चुनाव जीतने वाली राजनीतिक ताकत बना दिया है।

    उन्होंने अपने पश्चिम बंगाल के अनुभव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों के दौरान कई मतदाता यह कहते थे कि वे भाजपा नहीं बल्कि मोदी को वोट दे रहे हैं। जब उन्हें याद दिलाया जाता था कि यह विधानसभा चुनाव है तो उनका जवाब होता था कि दोनों एक ही बात हैं। इससे स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तिगत प्रभाव पार्टी की राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

    लेख के अंत में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजादी के बाद भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि लोकतंत्र में उनकी नीतियों पर मतभेद स्वाभाविक हैं लेकिन उनके जनसंपर्क, नेतृत्व क्षमता और जनता के साथ मजबूत जुड़ाव को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनता से मिले इस व्यापक जनादेश के अनुरूप देश को आगे बढ़ाने की दिशा में यह नेतृत्व अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेगा।

  • पर्यावरण से गवर्नेंस तक हर मोर्चे पर मजबूत अदाणी पोर्ट्स, ESG स्कोर बढ़ने से वैश्विक भरोसे को मिली मजबूती

    पर्यावरण से गवर्नेंस तक हर मोर्चे पर मजबूत अदाणी पोर्ट्स, ESG स्कोर बढ़ने से वैश्विक भरोसे को मिली मजबूती


    नई दिल्ली । देश की अग्रणी पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड ने पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और कॉरपोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने कंपनी का ईएसजी स्कोर बढ़ाकर 84.3 कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि कंपनी सतत विकास, पारदर्शिता और जिम्मेदार कारोबारी संचालन के मामले में उद्योग की अग्रणी कंपनियों में शामिल है।

    कंपनी का यह स्कोर पिछले मूल्यांकन के 81 अंकों की तुलना में 3.3 अंक अधिक है। इस सुधार के साथ अदाणी पोर्ट्स को केयरएज की ओर से ईएसजी के क्षेत्र में लीडरशिप श्रेणी में स्थान मिला है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि कंपनी पर्यावरणीय जोखिमों के बेहतर प्रबंधन, सामाजिक उत्तरदायित्व और मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

    कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह नई रेटिंग वार्षिक समीक्षा के बाद जारी की गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट में किए गए नए खुलासों और सुधारों को भी शामिल किया गया। रिपोर्ट में पारदर्शिता बढ़ाने और वैश्विक ईएसजी मानकों के अनुरूप नीतियों को मजबूत करने के प्रयासों को विशेष महत्व दिया गया।

    पर्यावरण के क्षेत्र में कंपनी ने कार्बन उत्सर्जन, ऊर्जा उपयोग, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और पूरी वैल्यू चेन में पर्यावरणीय मानकों को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों ने भी कंपनी के प्रदर्शन को नई मजबूती दी है।

    सामाजिक जिम्मेदारी के मोर्चे पर भी अदाणी पोर्ट्स ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार, शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना, कार्यस्थल पर विविधता और समान वेतन को बढ़ावा देना तथा कर्मचारियों की भागीदारी मजबूत करना कंपनी की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। इन पहलों का सकारात्मक प्रभाव कंपनी की सामाजिक रेटिंग पर भी देखने को मिला।

    कॉरपोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में बोर्ड स्तर पर ईएसजी की नियमित निगरानी, व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम और सप्लाई चेन से जुड़े साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय ने कंपनी की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया है। कंपनी का कहना है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सतत सुधार की नीति ही उसकी दीर्घकालिक सफलता का आधार है।

    कंपनी ने अपने बयान में कहा कि यह रेटिंग इस बात का प्रमाण है कि पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अदाणी पोर्ट्स ईएसजी मानकों के मामले में अग्रणी कंपनियों में शामिल है। कंपनी पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और सुशासन के सर्वोत्तम मानकों को अपनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

    इस उपलब्धि के साथ कंपनी को हाल ही में एक और बड़ी सफलता मिली थी, जब एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने उसकी लंबी अवधि की इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग और सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की रेटिंग को BBB- से बढ़ाकर BBB कर दिया। एजेंसी ने कंपनी का स्टेबल आउटलुक भी बरकरार रखा। यह अपग्रेड मजबूत नकदी प्रवाह, स्वस्थ वित्तीय स्थिति और बड़े विस्तार कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता को देखते हुए दिया गया।

    इन लगातार मिल रही सकारात्मक रेटिंग्स ने अदाणी पोर्ट्स की वैश्विक विश्वसनीयता को और मजबूत किया है। साथ ही यह संकेत भी दिया है कि कंपनी भविष्य में सतत विकास, निवेशकों के भरोसे और जिम्मेदार कारोबारी संचालन के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • किताबों से कंप्यूटर तक, माछिल में सेना ने खोले शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते

    किताबों से कंप्यूटर तक, माछिल में सेना ने खोले शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते


    नई दिल्ली । भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती कुपवाड़ा जिले के माछिल क्षेत्र में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आधुनिक स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर का उद्घाटन किया है। इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं, महिलाओं और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कौशल उपलब्ध कराना है। इस नई सुविधा को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है और उन्होंने सेना की इस पहल की खुले दिल से सराहना की है।

    नवनिर्मित स्टडी हब में कंप्यूटर प्रशिक्षण, आईटी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, लाइब्रेरी और हाई स्पीड वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए कालीन बुनाई, सिलाई और अन्य कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

    स्थानीय युवतियों ने कहा कि पहले इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। कंप्यूटर सीखने या व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने के लिए उन्हें कुपवाड़ा शहर जाना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था और कई बार परिवार की अनुमति भी नहीं मिल पाती थी। अब गांव में ही आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र खुलने से नई-नई तकनीक और हुनर सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी।

    एक अन्य युवती ने सेना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कंप्यूटर सेंटर, कालीन बुनाई केंद्र और अन्य प्रशिक्षण सुविधाएं शुरू होने से अब स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा अधिक से अधिक लड़कियां शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ सकेंगी।

    स्थानीय युवकों ने भी इस पहल को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि इस केंद्र में माताओं और बहनों के लिए सिलाई और अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध होगा, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के विकास और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    गांव के एक निवासी ने बताया कि इस परियोजना में समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखा गया है। विद्यार्थियों के लिए आधुनिक लाइब्रेरी और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच मिलने से ग्रामीण छात्रों को अब बड़े शहरों जैसी सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही मिलेंगी।

    स्थानीय लोगों का मानना है कि इस स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर से आने वाले वर्षों में क्षेत्र के युवाओं को शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि सीमावर्ती गांव में कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक प्रशिक्षण की ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। भारतीय सेना की यह पहल न केवल शिक्षा को बढ़ावा देगी बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।