Category: National

  • भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर शिकंजा, बिहार में साइबर अभियान के तहत 128 केस दर्ज, 16 गिरफ्तारियां और 823 पोस्ट हटाई गईं

    भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट पर शिकंजा, बिहार में साइबर अभियान के तहत 128 केस दर्ज, 16 गिरफ्तारियां और 823 पोस्ट हटाई गईं

    पटना । बिहार में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, भ्रामक और विधि-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री के खिलाफ पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया है। मार्च से जून 2026 के बीच राज्यभर में साइबर निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई को तेज करते हुए कुल 128 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जबकि इस दौरान 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई राज्य में बढ़ते डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और अफवाह फैलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए की गई है।

    राज्य पुलिस के अनुसार इस अवधि में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और संबंधित सेवा प्रदाताओं को कुल 453 टेकडाउन नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों के माध्यम से 856 आपत्तिजनक और भ्रामक यूआरएल हटाने का अनुरोध किया गया, जिनमें से 823 यूआरएल को प्लेटफॉर्म्स द्वारा पहले ही हटा दिया गया है। इसके अलावा 9 सोशल मीडिया हैंडल, आईडी और चैनलों को पूरी तरह निष्क्रिय किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, सार्वजनिक संस्थानों और आम नागरिकों के खिलाफ गलत जानकारी और आपत्तिजनक सामग्री साझा की जा रही थी। ऐसी पोस्ट्स से सामाजिक तनाव बढ़ने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी, जिसके चलते विशेष निगरानी और कार्रवाई की गई।

    साइबर इकाइयों की ओर से बताया गया है कि यह अभियान केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना भी है। पुलिस लगातार ऐसे अकाउंट्स और कंटेंट पर नजर रख रही है जो अफवाह फैलाने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। इसके तहत संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी भी की जा रही है।

    बिहार पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। पुलिस का कहना है कि जनता की जागरूकता और सहयोग से ही साइबर अपराधों और अफवाहों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

  • लद्दाख से जंतर-मंतर तक पहुंचा आंदोलन, सोनम वांगचुक की नई भूख हड़ताल से तेज हुआ शिक्षा और पर्यावरण सुधार का मुद्दा

    लद्दाख से जंतर-मंतर तक पहुंचा आंदोलन, सोनम वांगचुक की नई भूख हड़ताल से तेज हुआ शिक्षा और पर्यावरण सुधार का मुद्दा


    नई दिल्ली ।
    पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक Sonam Wangchuk ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे उनका लंबा चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। यह आंदोलन अब केवल लद्दाख के अधिकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक सुधारों तक फैल चुका है।

    इस बार वांगचुक की प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में कथित खामियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही तय करने की बात शामिल है। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठा रहे हैं। इसके साथ ही वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार की मांग पर जोर दे रहे हैं, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

    वांगचुक का आंदोलन पहली बार 2024 में लद्दाख के राज्य दर्जे और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग के साथ शुरू हुआ था। उस समय उन्होंने अत्यधिक ठंड में उपवास कर सरकार का ध्यान क्षेत्रीय अधिकारों और पर्यावरणीय मुद्दों की ओर आकर्षित किया था। इसके बाद यह आंदोलन धीरे-धीरे दिल्ली तक पहुंचा और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

    सितंबर 2024 में उनकी ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ ने आंदोलन को व्यापक पहचान दिलाई, जब उन्हें दिल्ली बॉर्डर पर हिरासत में लिया गया। इसके बाद दिल्ली में 16 दिनों के अनशन के बाद सरकार से बातचीत का आश्वासन मिलने पर उन्होंने उपवास समाप्त किया था। हालांकि, लद्दाख मुद्दों पर स्थायी समाधान न मिलने के कारण आंदोलन लगातार जारी रहा।

    2025 में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आईं और वांगचुक की संस्था पर कार्रवाई की गई। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। कई महीनों की हिरासत के बाद 2026 की शुरुआत में उनकी रिहाई हुई।

    रिहाई के बाद वांगचुक ने अपने आंदोलन को नए मुद्दों से जोड़ते हुए इसे व्यापक सामाजिक अभियान का रूप दिया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलनों के साथ जुड़कर उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को भी अपने एजेंडे में शामिल कर लिया।

    वर्तमान चरण में उनका आंदोलन लद्दाख के पर्यावरण और लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ देश की शिक्षा प्रणाली की चुनौतियों को भी केंद्र में ला रहा है। उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

    इस आंदोलन ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है कि क्या क्षेत्रीय अधिकारों और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों को एक साझा मंच पर लाकर प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।

  • ‘मन की बात’ एपिसोड 135 में पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, आत्मनिर्भरता, बचत और जनभागीदारी पर दिया जोर

    ‘मन की बात’ एपिसोड 135 में पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, आत्मनिर्भरता, बचत और जनभागीदारी पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता और संसाधन संरक्षण पर विशेष जोर दिया। इस दौरान उन्होंने हाल की अपनी अपीलों का सकारात्मक प्रभाव सामने आने पर नागरिकों को धन्यवाद भी दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में कई परिवारों ने विवाह समारोहों में सोना खरीदने के बजाय पुराने आभूषणों के पुनर्चक्रण को प्राथमिकता दी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए कार पूलिंग जैसे उपाय अपना रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत के नागरिकों ने जिस तरह सामूहिक जिम्मेदारी दिखाई है, वह सराहनीय है। उन्होंने इसे देश की बदलती सोच और जागरूक समाज का प्रतीक बताया और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने हाल ही में की गई उस अपील का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बचत, अनावश्यक विदेश यात्राओं में कमी और एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि इन कदमों से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बचत होती है, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    संबोधन में उन्होंने किसानों से प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती अपनाने का भी आग्रह दोहराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटकर न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है, बल्कि खेती की लागत को भी कम किया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना की हालिया उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए देश की बढ़ती रक्षा क्षमताओं पर गर्व जताया। उन्होंने स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इसके साथ ही उन्होंने रक्षा क्षेत्र में घरेलू तकनीक के बढ़ते उपयोग को भी देश की बड़ी उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया।

    कार्यक्रम में विज्ञान, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने युवाओं को खगोल विज्ञान और विज्ञान गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और विभिन्न एस्ट्रोनॉमी क्लबों की सराहना की। उन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हालिया पुरातात्विक खोजों और विदेशों से लौटाई गई ऐतिहासिक धरोहरों को भारत के लिए गर्व का विषय बताया।

    प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के तहत गंगा डॉल्फिन बचाव अभियान और पारंपरिक भारतीय पेय पदार्थों के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि भारतीय जीवनशैली की समृद्ध परंपरा को भी दर्शाते हैं।

    अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने नागरिकों से वैज्ञानिक सोच अपनाने, अंधविश्वास से दूर रहने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी ही भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे ले जाती है।

  • केंद्र सरकार में बड़े मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा गर्म, नए चेहरों को मौका और सहयोगी दलों की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना

    केंद्र सरकार में बड़े मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा गर्म, नए चेहरों को मौका और सहयोगी दलों की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार में इस संभावित बदलाव को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही एक बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक इस संबंध में किसी भी प्रकार की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित फेरबदल में युवाओं और महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की संभावना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार नई पीढ़ी के सांसदों को मंत्रिपरिषद में शामिल कर संगठनात्मक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नई ऊर्जा लाना चाहती है। इसके साथ ही महिला भागीदारी बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि सामाजिक प्रतिनिधित्व को और व्यापक बनाया जा सके।

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पिछड़ी जातियों को साधने के लिए विशेष रणनीति अपनाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में आगामी चुनावों को देखते हुए सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह धारणा है कि विभिन्न वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व चुनावी दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है।

    मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर सहयोगी दलों की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर विभिन्न घटक दल अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। खासकर महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों से जुड़े राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए सहयोगी दलों को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

    इसी बीच कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में बदलाव को लेकर भी अटकलें तेज हैं। हालांकि इन चर्चाओं की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बड़े मंत्रालयों में फेरबदल के जरिए सरकार अपनी नीति और प्राथमिकताओं को नए सिरे से प्रस्तुत कर सकती है। इसे प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    विपक्ष से आए नेताओं की संभावित भूमिका को लेकर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ राजनीतिक वर्गों का मानना है कि ऐसे नेताओं को तुरंत मंत्रिमंडल में शामिल करना संगठनात्मक संतुलन के लिए उपयुक्त नहीं होगा, जबकि अन्य इसे क्षेत्रीय विस्तार की रणनीति का हिस्सा मानते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मंत्रिमंडल विस्तार होता है, तो इसका प्रभाव केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित करेगा। यह कदम सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें 2029 के लोकसभा चुनावों सहित कई आगामी चुनावों को ध्यान में रखा गया है।

    फिलहाल सभी चर्चाएं संभावनाओं पर आधारित हैं और अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय तथा पार्टी नेतृत्व के स्तर पर लिया जाएगा।

  • मुंबई पुलिस ने मुहर्रम जुलूस पर बड़ी साजिश नाकाम की, 30 हजार कैप्सूल और 50 किलो जहरीला केमिकल बरामद, आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई पुलिस ने मुहर्रम जुलूस पर बड़ी साजिश नाकाम की, 30 हजार कैप्सूल और 50 किलो जहरीला केमिकल बरामद, आरोपी गिरफ्तार

    नई दिल्ली । मुंबई में मुहर्रम जुलूस के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी और गंभीर साजिश का खुलासा करते हुए उसे नाकाम कर दिया है। पुलिस के अनुसार यह मामला सामूहिक जहरखुरानी की योजना से जुड़ा था, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को निशाना बनाने की आशंका जताई गई थी। इस कार्रवाई के बाद पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि पुणे निवासी एक व्यक्ति को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिसके पास से बड़ी मात्रा में जहरीले रसायन से भरे कैप्सूल बरामद हुए हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों की योजना बना रहा था और उसने ऑनलाइन माध्यम से भारी मात्रा में केमिकल सामग्री और खाली कैप्सूल मंगाए थे।

    अधिकारियों के मुताबिक आरोपी ने इन कैप्सूल्स को सामान्य दवाओं के रूप में बांटने की योजना बनाई थी, जिससे लोगों को भ्रमित कर उन्हें नुकसान पहुंचाया जा सके। पुलिस को यह जानकारी एक संदिग्ध घटना के बाद मिली, जब जुलूस में शामिल एक व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं और जांच को आगे बढ़ाया गया।

    जांच के दौरान आरोपी को मुंबई के एक ठिकाने से गिरफ्तार किया गया, जहां वह पिछले कई दिनों से छिपा हुआ था। उसके पास से भारी मात्रा में जहरीला पदार्थ और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। पुलिस ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों को भी जांच में शामिल किया है।

    अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए तकनीकी और वित्तीय जांच भी की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी का कोई बड़ा नेटवर्क या संपर्क किसी संगठित समूह से तो नहीं जुड़ा है। साथ ही उसके पिछले लेन-देन और यात्रा रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

    इस घटना के बाद मुंबई पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

  • नंबर ब्लॉक करने से भड़का युवक गर्लफ्रेंड को जबरन कार में बैठाया रास्ते में चाकू से हमला फिर धमाके में जिंदा जला

    नंबर ब्लॉक करने से भड़का युवक गर्लफ्रेंड को जबरन कार में बैठाया रास्ते में चाकू से हमला फिर धमाके में जिंदा जला


    नई दिल्ली। कर्नाटक के तुमकुरु जिले से रिश्तों में अविश्वास और जुनूनी सोच का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। शुरुआती पुलिस जांच के अनुसार ब्रेकअप से नाराज एक युवक ने अपनी पूर्व प्रेमिका का कथित तौर पर अपहरण कर लिया और उसे जबरन कैब में बैठाकर बेंगलुरु से अंकोला की ओर ले जाने लगा। रास्ते में युवक ने महिला को जान से मारने की धमकी दी और फिर खुद भी आत्महत्या करने की बात कही। कुछ देर बाद कार में जोरदार धमाका हुआ जिसमें युवक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि महिला और कैब चालक घायल हो गए।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 30 वर्षीय नागेंद्र के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि नागेंद्र और महिला पहले रिलेशनशिप में थे लेकिन कुछ समय पहले दोनों का ब्रेकअप हो गया था। महिला ने उससे दूरी बनाने के लिए उसका मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया था। इसी बात से नाराज होकर शनिवार सुबह नागेंद्र महिला के बेंगलुरु स्थित किराए के घर पहुंचा जहां दोनों के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि इसके बाद उसने महिला को जबरन कैब में बैठाया और वहां से निकल गया।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद महिला के परिजनों ने तुरंत पुलिस में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच शुरू ही की थी कि कुछ समय बाद तुमकुरु जिले के जोगिहल्ली इलाके से कार में धमाके और आग लगने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि कार पूरी तरह जल चुकी थी। महिला और कैब चालक घायल अवस्था में बाहर मिले जबकि नागेंद्र कार के भीतर फंसा रह गया और उसकी मौत हो गई।

    जांच में घायल महिला ने पुलिस को बताया कि रास्ते भर नागेंद्र उसे धमकाता रहा। उसने कहा कि पहले वह उसे मार देगा और फिर खुद भी अपनी जान दे देगा। आरोप है कि सफर के दौरान उसने महिला पर चाकू से हमला भी किया। जब कैब जोगिहल्ली के पास पहुंची तो चालक ने वाहन रोक दिया। इसी दौरान महिला किसी तरह कार का दरवाजा खोलकर बाहर निकलने में सफल रही। कुछ ही क्षण बाद कार में तेज धमाका हुआ और वाहन आग की लपटों में घिर गया।

    पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी अपने साथ विस्फोटक सामग्री लेकर आया था। घटनास्थल से विस्फोटक जैसी वस्तु मिलने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि धमाके की असली वजह क्या थी और विस्फोटक किस प्रकार का था इसकी पुष्टि फोरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

    तुमकुरु पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी विस्फोटक कहां से लेकर आया और उसका उद्देश्य क्या था। फिलहाल घायल महिला और कैब चालक का अस्पताल में इलाज चल रहा है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि रिश्तों में अस्वीकार किए जाने के बाद हिंसक व्यवहार कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।

  • रिश्ते पर शक ने छीनी दो जिंदगियां छह माह की गर्भवती पत्नी की पानी में डुबोकर हत्या का सनसनीखेज मामला

    रिश्ते पर शक ने छीनी दो जिंदगियां छह माह की गर्भवती पत्नी की पानी में डुबोकर हत्या का सनसनीखेज मामला


    नई दिल्ली। फरीदाबाद से सामने आए एक दिल दहला देने वाले मामले ने घरेलू हिंसा और रिश्तों में अविश्वास की भयावह तस्वीर उजागर कर दी है। पुलिस के अनुसार 23 वर्षीय छह माह की गर्भवती महिला की कथित तौर पर उसके पति ने हत्या कर दी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी अपनी पत्नी पर लगातार शक करता था और इसी वजह से उसे रोजाना कई घंटों तक घर के अंदर बंद रखता था। घटना के बाद आरोपी फरार है और उसकी तलाश के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी अमित गुप्ता दिल्ली के लाजपत नगर स्थित एक निजी कंपनी में ग्राफिक डिजाइनर के रूप में काम करता था। वह रोज सुबह काम पर निकलने से पहले घर का मुख्य दरवाजा बाहर से बंद कर देता था और शाम को लौटकर ही उसे खोलता था। इस दौरान उसकी पत्नी नेहा कुमारी पूरे दिन घर के अंदर अकेली रहती थी। पुलिस का कहना है कि आरोपी को संदेह था कि उसकी पत्नी का किसी अन्य व्यक्ति से संबंध है और इसी शक के कारण वह उसे किसी से मिलने तक नहीं देता था।

    परिवार के लोगों और पड़ोसियों ने भी पुलिस को बताया कि नेहा लंबे समय से इस तरह की प्रताड़ना झेल रही थी। उसे अकेले बाजार जाने की भी अनुमति नहीं थी और वह अधिकतर समय घर में कैद जैसी जिंदगी बिताने को मजबूर थी। पड़ोसियों ने पुष्टि की कि महिला अक्सर पूरे दिन घर के अंदर बंद रहती थी और बाहर बहुत कम दिखाई देती थी। इसके बावजूद उसने कभी खुलकर अपने साथ हो रही प्रताड़ना का विरोध नहीं किया।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने पिछले कुछ दिनों से नौकरी पर जाना बंद कर दिया था। इसी बात को लेकर पति पत्नी के बीच विवाद हुआ था। अधिकारियों के अनुसार इसी विवाद के बाद आरोपी ने कथित तौर पर अपनी गर्भवती पत्नी का सिर पानी से भरी बाल्टी में डुबो दिया जिससे उसकी मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

    मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि महिला के पिता ने अपनी बेटी और दामाद के लिए जमीन खरीदकर घर बनवाया था। हालांकि जमीन का पंजीकरण आरोपी के नाम पर कराया गया था। पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

    महिला के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया है और विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई और मजबूत होगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि घरेलू हिंसा और संदेह जैसी मानसिकता किस तरह पूरे परिवार को बर्बाद कर सकती है। फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और उम्मीद जताई जा रही है कि उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • देश में अब तक 43% कम बारिश… मानसून कमजोर रहने की संभावना, सूखे की आहट ने बढ़ाई टेंशन

    देश में अब तक 43% कम बारिश… मानसून कमजोर रहने की संभावना, सूखे की आहट ने बढ़ाई टेंशन


    नई दिल्ली।
    देश में मानसून (Monsoon) की रफ्तार धीमी पड़ने से 27 जून तक सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. मौसम वैज्ञानिकों (Meteorologists) का कहना है कि इस बार अल नीनो के साथ इंडियन ओशन डाइपोल (Indian Ocean Dipole- IOD) भी न्यूट्रल स्थिति में है, जिससे मानसून को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना कम हो गई है. कई राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई में भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है. हालांकि IMD को उम्मीद है कि अगले महीने मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने पर कुछ सुधार संभव है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों का मानना है कि अभी सूखे की आधिकारिक घोषणा जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन यदि जुलाई में भी बारिश सामान्य से काफी कम रही तो कई राज्यों में हालात गंभीर हो सकते हैं. अल नीनो की सक्रियता पहले से ही मानसून को कमजोर कर रही है और न्यूट्रल IOD के कारण उसे अतिरिक्त ताकत नहीं मिल रही. यही वजह है कि वैज्ञानिक पूरे मानसून सीजन पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. आने वाले कुछ सप्ताह खेती और जल संसाधनों दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भारत के मानसून को प्रभावित करने वाले दो बड़े कारक अल नीनो और इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) हैं. अल नीनो सक्रिय (El Nino Affect) होने पर सामान्य तौर पर मानसून कमजोर पड़ जाता है. यदि उसी समय पॉजिटिव IOD मौजूद हो तो वह बारिश की कमी की भरपाई करने में मदद करता है. लेकिन इस बार हिंद महासागर में न्यूट्रल IOD की स्थिति बनी हुई है. इसका मतलब है कि यह मानसून को न तो मजबूत करेगा और न ही कमजोर, जिससे अल नीनो का असर ज्यादा प्रभावी दिखाई दे सकता है।

    1 जून से 27 जून के बीच देशभर में 43 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है. कई राज्यों में हालात और ज्यादा खराब हैं. मेघालय में 82 प्रतिशत, गुजरात में 79 प्रतिशत, मणिपुर में 71 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 68 प्रतिशत, झारखंड में 66 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 59 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत, ओडिशा में 52 प्रतिशत और बिहार में 50 प्रतिशत तक बारिश की कमी रिकॉर्ड की गई है. मध्य प्रदेश में भी 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो खेती के लिहाज से चिंताजनक मानी जा रही है।

    देश के चार प्रमुख मौसम क्षेत्रों में भी बारिश सामान्य से काफी कम रही है. मध्य भारत में सबसे अधिक 57 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है. इसके बाद पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में 44 प्रतिशत, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 30 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 27 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में मानसून पहुंचने के बावजूद अपेक्षित बारिश नहीं हुई है।

    दिल्ली में भी उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. शनिवार को अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस रहा, लेकिन अधिक आर्द्रता के कारण ‘फील्स लाइक’ तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. मौसम विभाग के अनुसार हवा में नमी बढ़ने से गर्मी और ज्यादा महसूस हो रही है. यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्तर भारत में उमस और गर्मी का असर कुछ दिन और बना रह सकता है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अभी मानसून का पूरा सीजन बाकी है और जुलाई में पूरे देश में मानसून के फैलने के बाद बारिश के आंकड़ों में सुधार की संभावना है. हालांकि अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए विभाग ने पहले ही सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जुलाई और अगस्त की बारिश ही तय करेगी कि यह मानसून सामान्य रहेगा या फिर देश को सूखे जैसी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

    फिलहाल वैज्ञानिक लगातार मौसम के वैश्विक संकेतकों पर नजर रख रहे हैं. यदि अल नीनो लंबे समय तक प्रभावी रहा और IOD न्यूट्रल ही बना रहा तो कई राज्यों में खरीफ फसलों, जलाशयों और पेयजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि अंतिम तस्वीर पूरे मानसून सीजन के समाप्त होने के बाद ही साफ होगी. फिलहाल किसानों और आम लोगों दोनों की नजर अब जुलाई की बारिश पर टिकी हुई है।

  • बाबा श्याम के भक्तों की भीड़ से रींगस रेलवे स्टेशन की रिकॉर्ड कमाई, तीन दिनों में ₹1.25 करोड़ का राजस्व

    बाबा श्याम के भक्तों की भीड़ से रींगस रेलवे स्टेशन की रिकॉर्ड कमाई, तीन दिनों में ₹1.25 करोड़ का राजस्व


    नई दिल्ली। खाटूश्यामजी के विश्वप्रसिद्ध मंदिर में बाबा श्याम के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने उत्तर पश्चिम रेलवे की कमाई में जबरदस्त इजाफा कर दिया है। निर्जला एकादशी और द्वादशी के मेले के साथ-साथ वीकेंड की छुट्टियों के चलते रींगस रेलवे स्टेशन जंक्शन पर यात्रियों का अभूतपूर्व दबाव देखने को मिला। इसी अवधि में रेलवे को रिकॉर्ड राजस्व की प्राप्ति हुई है।

    रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में करीब 1.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ट्रेन से यात्रा की, जिससे रींगस स्टेशन को ₹1.25 करोड़ से अधिक की आय हुई है।

    ट्रेनों में भारी भीड़, यात्रियों की बढ़ी संख्या

    रींगस स्टेशन अधीक्षक बाबूलाल बाजिया के अनुसार, बाबा श्याम के दर्शन के लिए आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक रही कि कई ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची। रविवार को वीकेंड की वजह से भीड़ और बढ़ गई, जिससे आने वाले दिनों में राजस्व में और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।

    सुरक्षा के लिए 160 जवान तैनात

    भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेलवे प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। जीआरपी चौकी प्रभारी एएसआई मुकेश कुमार सैनी ने बताया कि स्टेशन परिसर में 100 आरपीएफ और 60 जीआरपी जवानों की तैनाती की गई है। इनमें महिला कर्मियों को भी शामिल किया गया है ताकि महिला यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    इसके अलावा स्वयंसेवक भी व्यवस्था संभालने में सहयोग कर रहे हैं। जयपुर मंडल से सीनियर डीसीएम जगदीश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम लगातार स्टेशन पर निगरानी बनाए हुए है।

    भीषण गर्मी को देखते हुए यात्रियों के लिए अस्थायी शेल्टर और विश्राम स्थल भी बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालु धूप और लू से राहत पा रहे हैं।

    भीड़ नियंत्रण के लिए खास इंतजाम

    स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग रूट तय किए गए हैं ताकि अव्यवस्था या भगदड़ जैसी स्थिति न बने। यात्रियों की सुविधा के लिए कुल 21 टिकट काउंटर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 12 मैनुअल और 9 ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) शामिल हैं।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ये विशेष व्यवस्थाएं रविवार देर रात तक जारी रहेंगी ताकि वीकेंड की भीड़ को सुचारु रूप से संभाला जा सके।

    रींगस: खाटूधाम का मुख्य प्रवेश द्वार

    गौरतलब है कि खाटूश्यामजी कस्बे में फिलहाल कोई रेलवे स्टेशन नहीं है, इसलिए देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रींगस जंक्शन ही प्रमुख पड़ाव है। यहां से खाटूधाम की दूरी लगभग 17 किलोमीटर है, जिसे यात्री सड़क मार्ग, निजी वाहनों, ई-रिक्शा या पैदल यात्रा के जरिए पूरा करते हैं।

    श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में खाटूश्यामजी से करीब 11 किलोमीटर दूर सुंदपुरा गांव में नया रेलवे स्टेशन बनाने की घोषणा की है। इसके बाद भविष्य में भक्तों को खाटूधाम पहुंचने के लिए एक और नजदीकी विकल्प मिलेगा, जिससे रींगस स्टेशन पर दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

  • तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन


    चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डीएमके (DMK) की लंबे समय से सहयोगी रही मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK) ने डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने की घोषणा कर दी है। पार्टी ने डीएमके पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया है। साथ ही अभिनेता और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय को आगामी उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों में समर्थन देने का भी ऐलान किया है।

    शनिवार को चेन्नई में आयोजित एमडीएमके की सामान्य परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। पार्टी की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि चुनाव पूर्व गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा, लेकिन फिलहाल एमडीएमके डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी।

    DMK पर लगाए गंभीर आरोप

    पार्टी प्रमुख वाइको ने आरोप लगाया कि डीएमके ने हिंदुत्व समर्थक ताकतों के साथ मिलकर एआईएडीएमके (AIADMK) के नेतृत्व वाली सरकार बनाने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि यह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा और इस घटनाक्रम के बाद सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के अस्तित्व का उद्देश्य ही समाप्त हो गया।

    पार्टी के प्रस्ताव में कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए गठबंधन में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया था, इसलिए कार्यकर्ताओं की राय के आधार पर यह निर्णय लिया गया।

    विजय की पार्टी को समर्थन

    एमडीएमके ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के प्रति खुला समर्थन जताया। वाइको ने कहा कि टीवीके भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे, दो-भाषा नीति और सी.एन. अन्नादुरै के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का दावा करती है। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में दोनों दलों के बीच राजनीतिक सहयोग और मजबूत हो सकता है।

    विधायकों के इस्तीफे को लेकर दावा

    वाइको ने यह भी दावा किया कि विजय ने एमडीएमके के दोनों विधायकों को इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने की पेशकश भी की थी। हालांकि दोनों विधायकों ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।

    एमडीएमके के विधायक आर. सेंथिलसेल्वन और टी.एम. राजेंद्रन वर्ष 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके के ‘राइजिंग सन’ चुनाव चिह्न पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में एमडीएमके ने गठबंधन के तहत चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें दो पर जीत हासिल की थी।

    ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों पर जवाब

    विजय पर लगाए जा रहे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों का जवाब देते हुए वाइको ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी के विधायकों को डीएमके में शामिल कराने की कोशिश होती है, तो उसे क्या कहा जाएगा।

    एमडीएमके वर्ष 2017 से डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों से दोनों दलों के रिश्तों में लगातार खटास देखने को मिल रही थी। विजय और वाइको की हालिया मुलाकात तथा एमडीएमके नेताओं की नाराजगी के बाद अब गठबंधन टूटने से तमिलनाडु की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।