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  • जेवर एयरपोर्ट पर तेज बारिश के बाद जलभराव, पार्किंग में भरा पानी देख उठे सवाल; 30 मिनट में संभाली गई स्थिति

    जेवर एयरपोर्ट पर तेज बारिश के बाद जलभराव, पार्किंग में भरा पानी देख उठे सवाल; 30 मिनट में संभाली गई स्थिति


    नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तेज बारिश के बाद कुछ समय के लिए जलभराव की स्थिति बन गई। एयरपोर्ट के पार्किंग कंपाउंड के पास बड़ी मात्रा में पानी जमा हो गया और टर्मिनल से पार्किंग एरिया की ओर जाने वाले रास्ते पर भी पानी भर गया। जलभराव का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पार्किंग क्षेत्र के पास पानी जमा दिखाई दे रहा है, जबकि एयरपोर्ट से जुड़े कर्मचारी जल निकासी की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद एयरपोर्ट परिसर में बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    बताया जा रहा है कि दिन के समय अचानक हुई तेज बारिश के बाद टर्मिनल और पार्किंग को जोड़ने वाले मार्ग पर पानी जमा हो गया। कुछ समय के लिए यात्रियों और एयरपोर्ट परिसर में मौजूद लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि एयरपोर्ट प्रबंधन को जलभराव की जानकारी मिलते ही टीमों को सक्रिय किया गया और पानी निकालने का काम शुरू कर दिया गया।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि तेज बारिश के कारण टर्मिनल से पार्किंग एरिया को जोड़ने वाले रास्ते पर कुछ समय के लिए पानी जमा हुआ था। एयरपोर्ट की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए करीब 30 मिनट के भीतर जलभराव को पूरी तरह खत्म कर दिया। प्रबंधन के मुताबिक इस दौरान उड़ानों के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा और एयरपोर्ट की अन्य व्यवस्थाएं भी सामान्य रूप से चलती रहीं।

    एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की आवाजाही को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम तुरंत उठाए गए। जलभराव वाले हिस्से में स्थिति सामान्य होने के बाद आवागमन भी सुचारु हो गया। साथ ही मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि बारिश के दौरान किसी तरह की परेशानी होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने एयरपोर्ट की जल निकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा जरूर छेड़ दी है। यात्रियों और सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि आधुनिक सुविधाओं से लैस एयरपोर्ट परिसर में तेज बारिश के बाद पानी जमा होने की स्थिति क्यों बनी। खास तौर पर टर्मिनल और पार्किंग के बीच के मार्ग में पानी भरने को लेकर लोग व्यवस्था की क्षमता पर सवाल कर रहे हैं।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण 28 मार्च 2026 को उद्घाटित हुआ था और 15 जून से यहां कमर्शियल उड़ान संचालन शुरू हुआ। ऐसे में शुरुआती बारिश के दौरान सामने आई जलभराव की तस्वीरों ने एयरपोर्ट की आधारभूत सुविधाओं और ड्रेनेज सिस्टम को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि एयरपोर्ट प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि जलभराव अस्थायी था और महज 30 मिनट में पानी निकाल दिया गया था।

    फिलहाल एयरपोर्ट प्रशासन की प्राथमिकता बारिश के दौरान यात्रियों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना और जलभराव की स्थिति दोबारा बनने पर तत्काल कार्रवाई करना है। वायरल वीडियो के बाद उठे सवालों के बीच आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारी बारिश के दौरान एयरपोर्ट परिसर की जल निकासी व्यवस्था किस तरह काम करती है।

  • विमानन सुरक्षा पर मंडराया नशीले पदार्थों का खतरा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के क्रू मेंबर्स की डोप टेस्टिंग बढ़ाने की मांग

    विमानन सुरक्षा पर मंडराया नशीले पदार्थों का खतरा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के क्रू मेंबर्स की डोप टेस्टिंग बढ़ाने की मांग

    नई दिल्ली । फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में हुई हालिया घटना के बाद देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा और जांच मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विमान के पायलट के नशीले पदार्थों के शुरुआती डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद विमानन नियामक ने सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

    विमानन विशेषज्ञों के अनुसार थाईलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों में कुछ पदार्थों की कानूनी सुलभता एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। शराब की उपस्थिति जांचने के लिए नियमित ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन अन्य साइकोएक्टिव पदार्थों का परीक्षण अपेक्षाकृत जटिल प्रक्रिया माना जाता है।

    अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी नशीले पदार्थ के प्रभाव में विमान का संचालन यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। ऐसे पदार्थों का असर शरीर में लंबे समय तक बना रहता है जिससे चालक दल की निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    वर्तमान में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के नियमों के तहत सभी अनुसूचित वाणिज्यिक एयरलाइंस को अपने कम से कम 10 प्रतिशत क्रू मेंबर्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का वार्षिक रूप से रैंडम डोप टेस्ट कराना अनिवार्य है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर अब इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    विमानन अधिकारियों का मानना है कि केवल स्व-घोषणा या नशामुक्ति अभियानों के भरोसे इस समस्या से नहीं निपटा जा सकता। इसके लिए रैंडम डोप जांच की आवृत्ति बढ़ाने और नियमों को अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता जताई जा रही है ताकि उड़ानों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित की जा सके।

    नियामक संस्थाएं अब चिकित्सा अधिकारियों के साथ मिलकर परीक्षण प्रक्रियाओं को और अधिक सटीक बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस निलंबन जैसे कड़े प्रावधान लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

  • चीफ जस्टिस की कॉकरोच टिप्पणी के दुरुपयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई को भेजा नोटिस

    चीफ जस्टिस की कॉकरोच टिप्पणी के दुरुपयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई को भेजा नोटिस


    नई दिल्ली । 
    भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वर्चुअल अदालती कार्यवाही के वीडियो को संपादित कर सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में प्रसारित करने और उसका व्यावसायिक उपयोग करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस विषय पर केंद्र सरकार और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से विस्तृत जवाब तलब किया है।

    यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा तीन माह पूर्व एक सुनवाई के दौरान की गई कॉकरोच टिप्पणी से जुड़ा हुआ है। दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालती कार्यवाही की चुनिंदा वीडियो क्लिप्स को चालाकी से एडिट कर सार्वजनिक किया गया जिसका मूल संदर्भ से कोई संबंध नहीं था।

    याचिकाकर्ता के अनुसार 15 मई को फर्जी वकीलों और अदालती प्रक्रियाओं के दुरुपयोग पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी की थी। हालांकि बाद में इस वक्तव्य को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मीम्स और व्यावसायिक सामग्री के रूप में प्रचारित किया गया।

    याचिका में दलील दी गई है कि न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने और जजों की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से ऐसी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। वर्तमान में अदालती कार्यवाहियों के अनधिकृत उपयोग और उससे होने वाली कमाई को रोकने के लिए कोई प्रभावी कानूनी तंत्र उपलब्ध नहीं है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न विधिक हलकों में न्यायालयीन कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई जा रही है। शीर्ष अदालत से मांग की गई है कि संस्थागत गरिमा की रक्षा के लिए ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों से इस प्रकार के दुरुपयोग को रोकने तथा संबंधित संस्थाओं की गतिविधियों की जांच करने के संबंध में रुख स्पष्ट करने को कहा है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा एक्शन, 8 आरोपियों के 54 रिश्तेदार और करीबी जांच के घेरे में; संपत्तियों का मांगा गया पूरा ब्योरा

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा एक्शन, 8 आरोपियों के 54 रिश्तेदार और करीबी जांच के घेरे में; संपत्तियों का मांगा गया पूरा ब्योरा


    नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर(Ayodhya Ram Mandir) के चढ़ावे में कथित चोरी और आर्थिक अनियमितताओं के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों के बाद अब उनके रिश्तेदार और करीबी भी जांच एजेंसियों की नजर में आ गए हैं। अयोध्या पुलिस और एसआईटी ने लखनऊ में आरोपियों तथा उनसे जुड़े 54 लोगों की संपत्तियों की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित आर्थिक अनियमितताओं से जुड़ी रकम का इस्तेमाल कहीं जमीन मकान फ्लैट या दूसरी अचल संपत्तियां खरीदने में तो नहीं किया गया।

    जानकारी के मुताबिक आठ नामजद आरोपियों के साथ उनके 54 रिश्तेदारों और करीबियों के नाम की सूची लखनऊ प्रशासन को भेजी गई है। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से लखनऊ के जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में पिछले दो वर्षों के दौरान आरोपियों और उनके परिजनों के नाम दर्ज या नामांतरण की गई कृषि और गैर कृषि भूमि समेत दूसरी अचल संपत्तियों का विवरण मांगा गया है। पत्र के साथ क्षेत्राधिकारी अयोध्या की रिपोर्ट भी भेजी गई है, जिसमें संबंधित लोगों की संपत्तियों की विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

    जांच का दायरा केवल राजस्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रखा गया है। लखनऊ की संबंधित तहसीलों के एसडीएम और निबंधन कार्यालयों के सब रजिस्ट्रारों से भी रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं। इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण, नगर निगम और आवास विकास परिषद से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि पिछले दो वर्षों में सूची में शामिल लोगों ने जमीन, मकान, फ्लैट या किसी अन्य अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री की है या नहीं।

    एसआईटी यह भी जोड़ने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों के कथित आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों में हुई गतिविधियों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं। जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि आरोपियों या उनके करीबियों की संपत्ति में हाल के वर्षों में अचानक या असामान्य बढ़ोतरी हुई है या नहीं। अगर रिकॉर्ड में कोई संदिग्ध लेनदेन सामने आता है तो वह मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।

    इस मामले में आठ प्रमुख आरोपियों के अलावा 54 रिश्तेदारों और करीबियों को जांच के दायरे में लाया गया है। सूची में शामिल लोगों के नाम और पते के आधार पर अलग-अलग विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है। अयोध्या के साथ लखनऊ और दूसरे जिलों से जुड़े संपत्ति रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं। जांच एजेंसियां कथित गबन की रकम के संभावित इस्तेमाल और उसके स्रोत के बीच कड़ी तलाश रही हैं।

    इसी बीच आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के मामले में भी अदालत की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। विवेचना के दौरान बंद किए गए पेंशन खाते को दोबारा खोलने के लिए आरोपी की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने विवेचक और सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी को 13 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने बैंक खाते में आई धनराशि के सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट और आवश्यक कार्रवाई पूरी कर आख्या पेश करने को कहा है।

    अदालत के आदेश के मुताबिक आरोपी के जेल जाने के बाद खाते में आई पेंशन राशि से जुड़े तथ्य भी जांच का हिस्सा हैं। अब विवेचक को बैंक रिकॉर्ड के सत्यापन से संबंधित स्थिति स्पष्ट करनी होगी। ऐसे में राम मंदिर दान चोरी मामले में एक तरफ एसआईटी आरोपियों और उनके करीबियों की संपत्तियों की जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ अदालत में बैंक खातों और धनराशि से जुड़े पहलुओं पर भी सुनवाई जारी है। आने वाले दिनों में संपत्ति और वित्तीय रिकॉर्ड से सामने आने वाले तथ्य इस मामले की जांच की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।

  • स्कूल की सड़क से खराब खाना और शिक्षकों की कमी तक, बच्चों के प्रदर्शन पर अभिजीत दिपके बोले- हिम्मत को सलाम

    स्कूल की सड़क से खराब खाना और शिक्षकों की कमी तक, बच्चों के प्रदर्शन पर अभिजीत दिपके बोले- हिम्मत को सलाम


    नई दिल्ली। देश की नई पीढ़ी अब सिर्फ पढ़ाई और भविष्य की चिंता तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि अपने आसपास की समस्याओं को लेकर भी आवाज उठाने लगी है। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर उत्तराखंड के खटीमा और राजस्थान के बांसवाड़ा में स्कूली बच्चों की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन ने इसी बदलती तस्वीर की ओर इशारा किया है। इन तीनों जगहों पर बच्चों ने सड़क स्कूल की व्यवस्था भोजन पानी और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। बच्चों के इन प्रदर्शनों पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने अपने भविष्य और बेहतर सुविधाओं के लिए आवाज उठाने वाले बच्चों की हिम्मत को सलाम किया है।
    हमीरपुर में बच्चों की सबसे बड़ी मांग स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की थी। चंदूपुर के गंगवा का डेरा और बच्ची का डेरा क्षेत्र के छात्र लंबे समय से खराब रास्ते की परेशानी झेल रहे थे। बारिश के दौरान रास्ते में कीचड़ भर जाने से स्कूल पहुंचना मुश्किल और जोखिम भरा हो जाता था। इसी समस्या को लेकर छात्र ग्रामीणों के साथ हाथों में तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। बच्चों ने करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा की और जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना दिया। प्रशासन की ओर से बताया गया कि सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल चुका है और करीब एक करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से पक्की सड़क का निर्माण कराया जाएगा।

    इसी तरह उत्तराखंड के खटीमा में सरकारी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के करीब 400 छात्रों ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर विरोध जताया। छात्रों की शिकायत खराब भोजन दूषित पानी और शौचालयों में गंदगी को लेकर थी। बड़ी संख्या में छात्रों के धरने के बाद मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचा। इसके बाद स्कूल की प्रिंसिपल भारती यादव को हटाने के निर्देश दिए गए। इस घटनाक्रम ने यह दिखाया कि छात्र अपनी रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अब खुलकर सवाल पूछ रहे हैं।

    राजस्थान के बांसवाड़ा में भी छात्रों ने शिक्षकों की कमी को लेकर स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी। कुशलगढ़ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बियापाड़ा में शिक्षकों के खाली पदों के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। छात्रों के विरोध को स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिला। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों से बातचीत की और छह शिक्षकों की डेप्युटेशन के आदेश जारी किए। इसके बाद छात्रों ने स्कूल का ताला खोल दिया।

    इन तीनों घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि अपने भविष्य के लिए लड़ रहे इन बच्चों को उनका सलाम है। उन्होंने खास तौर पर सवाल उठाया कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी बच्चों को अपने स्कूल तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आवाज क्यों उठानी पड़ रही है। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ग्रामीण भारत के बच्चों और स्कूलों के लिए काम करने का संकल्प लेने की अपील भी की।

    इन घटनाओं को व्यापक रूप से देखें तो यह केवल तीन स्थानीय विरोध प्रदर्शनों की कहानी नहीं है बल्कि नई पीढ़ी में बढ़ती जागरूकता का संकेत भी है। सड़क हो या स्कूल में शिक्षक भोजन हो या स्वच्छता बच्चे अब अपनी समस्याओं को सामने रखने और प्रशासन से जवाब मांगने का साहस दिखा रहे हैं। इनकी मांगें बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हैं और यही वजह है कि इन प्रदर्शनों ने व्यापक ध्यान खींचा है। तीन अलग-अलग राज्यों में सामने आई इन घटनाओं ने यह संदेश जरूर दिया है कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य को लेकर पहले से कहीं अधिक मुखर हो रही है।

  • जेवर एयरपोर्ट की पहली भारी बारिश में जलभराव से मचा हड़कंप, AAP ने उठाए निर्माण और भ्रष्टाचार पर सवाल

    जेवर एयरपोर्ट की पहली भारी बारिश में जलभराव से मचा हड़कंप, AAP ने उठाए निर्माण और भ्रष्टाचार पर सवाल


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र को जोड़ने वाले मार्ग पर जलभराव की स्थिति बन गई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी जमा होने के बाद एयरपोर्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया और इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई। हालांकि एयरपोर्ट प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब 30 मिनट के भीतर जलभराव को दूर कर दिया और यात्री तथा वाहनों की आवाजाही को सामान्य बनाए रखा। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक जलभराव के दौरान वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से निकाला गया था, जिससे उड़ानों के संचालन पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर से बताया गया कि मंगलवार को अचानक हुई भारी बारिश के कारण टर्मिनल और पार्किंग के बीच के रास्ते पर पानी जमा हो गया था। स्थिति की जानकारी मिलते ही एयरपोर्ट की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पानी निकालने का काम शुरू किया। आधे घंटे से भी कम समय में जलभराव को साफ कर दिया गया। प्रशासन के अनुसार इस दौरान यात्रियों के पिकअप और ड्रॉप की व्यवस्था भी जारी रही तथा किसी उड़ान को प्रभावित नहीं होना पड़ा। पानी निकलने के बाद टर्मिनल और पार्किंग के बीच वाहनों और यात्रियों की आवाजाही पहले की तरह सामान्य हो गई।

    एयरपोर्ट प्रशासन ने यह भी कहा कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बारिश के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए संबंधित टीमें अलर्ट पर हैं। एयरपोर्ट की ओर से दावा किया गया कि जलभराव के बावजूद परिचालन व्यवस्था सुचारु रही और यात्रियों को किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

    हालांकि जलभराव का वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और एयरपोर्ट के निर्माण पर सवाल खड़े कर दिए। AAP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए एयरपोर्ट की पहली ही भारी बारिश में जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी ने इसे कथित तौर पर घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि AAP के इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

    जेवर एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है। करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ था। इसके बाद 15 जून से इंडिगो की उड़ानों के साथ यहां व्यावसायिक परिचालन शुरू हुआ। एयरपोर्ट से जुड़ी सुविधाओं और कनेक्टिविटी को लेकर इसे दिल्ली एनसीआर के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।

    ऐसे में एयरपोर्ट परिसर में भारी बारिश के बाद जलभराव की घटना ने निर्माण गुणवत्ता और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। फिलहाल प्रशासन की ओर से पानी समय रहते निकाल दिया गया और उड़ानों का संचालन प्रभावित नहीं हुआ। आने वाले दिनों में बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था किस तरह काम करती है और क्या ऐसी स्थिति दोबारा सामने आती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • आज संसद में पेश होगी जस्टिस वर्मा ‘कैश कांड’ की रिपोर्ट, मानसून सत्र के सिर्फ 3 दिन बाकी

    आज संसद में पेश होगी जस्टिस वर्मा ‘कैश कांड’ की रिपोर्ट, मानसून सत्र के सिर्फ 3 दिन बाकी


    नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के अब सिर्फ तीन दिन शेष हैं, लेकिन सदन में जारी गतिरोध खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। राम मंदिर के कथित चढ़ावे की चोरी और 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज समेत कई मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। विपक्ष की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग भी की जा रही है।

    इस बीच बुधवार को संसद में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच कमेटी की रिपोर्ट पेश की जाएगी। दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास में मार्च 2025 में आग लगने के बाद स्टोर रूम से कथित तौर पर जली हुई नकदी मिलने के मामले में यह जांच शुरू हुई थी। घटना के बाद जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग तेज हो गई थी।

    लोकसभा और राज्यसभा में रखी जाएगी रिपोर्ट
    जस्टिस वर्मा के खिलाफ मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने जांच के दौरान दस्तावेज और मौखिक साक्ष्य जुटाए हैं। अब इसकी रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा के पटल पर रखी जाएगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद संसद में इस मामले को लेकर चर्चा होने की संभावना है। खास तौर पर यह सवाल अहम होगा कि जस्टिस वर्मा के इस्तीफा देने के बावजूद क्या उनके खिलाफ पद से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

    इस्तीफा दे चुके हैं जस्टिस वर्मा
    कैश बरामदगी के समय जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश थे। विवाद सामने आने के बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था। उनके खिलाफ 200 से ज्यादा सांसदों ने महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी। जस्टिस वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, राष्ट्रपति ने अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद उनके मामले को लेकर संसद में आगे की कार्रवाई पर भी चर्चा हो सकती है।

    अमित शाह आज दे सकते हैं जवाब
    छात्र आंदोलन के मुद्दे पर भी बुधवार को संसद में सरकार का पक्ष सामने आने की संभावना है। गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब दे सकते हैं। सरकार का कहना है कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री जवाब देने को भी तैयार हैं। वहीं सरकार ने विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर विपक्ष लगातार जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।

    FCRA बिल पर भी नजर
    संसद में आज के घटनाक्रम के अलावा अगले दिन की कार्यवाही भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। सरकार गुरुवार को FCRA बिल पेश कर सकती है। कांग्रेस और TMC इस बिल को वापस लेने की मांग कर रही हैं। सरकार बिल पेश करने के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज सकती है। ऐसे में मॉनसून सत्र के बचे तीन दिन सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।

  • भोपाल की झीलों से निकलेंगे देश-दुनिया के चैंपियन : मंत्री सारंग

    भोपाल की झीलों से निकलेंगे देश-दुनिया के चैंपियन : मंत्री सारंग


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि भोपाल की झीलें अब केवल पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र नहीं हैं, बल्कि देश के भविष्य के चैंपियन तैयार करने की भूमि बन रही हैं। राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रही है।

    मंत्री सारंग मंगलवार को भोपाल के बोट क्लब में राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप (रैंकिंग) के तृतीय संस्करण के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में होने वाली प्रत्येक रेस केवल पदक के लिए मुकाबला नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल करियर की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण अवसर है। प्रतियोगिता से निर्धारित होने वाली राष्ट्रीय रैंकिंग खिलाड़ियों के लिए आगे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

    इससे पहले मंत्री सारंग ने चैंपियनशिप का शुभारंभ किया। रविवार 16 अगस्त तक होने वाली इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेलिंग खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी राष्ट्रीय रैंकिंग निर्धारित होगी, जो आगे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    भोपाल बन रहा देश का प्रमुख वाटर स्पोर्ट्स केंद्र
    मंत्री सारंग ने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब और यहां की प्राकृतिक परिस्थितियां सेलिंग, रोइंग, कयाकिंग और केनोइंग जैसे खेलों के लिए बेहद अनुकूल हैं। मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना वर्ष 2007 में हुई थी और आज यह देश की प्रमुख वाटर स्पोर्ट्स प्रशिक्षण संस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि अकादमी में सेलिंग, रोइंग, कयाकिंग, केनोइंग और स्लालम की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां प्रशिक्षित खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश तथा देश का नाम रोशन किया है।

    वाटर स्पोर्ट्स में मध्यप्रदेश की शानदार उपलब्धियां
    मंत्री सारंग ने बताया कि मध्य प्रदेश वाटर स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ियों ने अब तक 28 अंतर्राष्ट्रीय और 69 राष्ट्रीय पदक अर्जित किए हैं तथा खिलाड़ियों ने 37 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सहभागिता की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियां प्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में विकसित हो रहे मजबूत खेल इकोसिस्टम का प्रमाण हैं और भोपाल देश में वाटर स्पोर्ट्स की नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    सेलिंग में मध्य प्रदेश का दबदबा
    सारंग ने कहा कि वर्ष 2025 की राजा भोज मल्टीक्लास सेलिंग चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 16 पदक- 8 स्वर्ण, 5 रजत और 3 कांस्य हासिल किए थे। प्रतियोगिता की 12 में से 8 कैटेगरी में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीते थे। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियां साबित करती हैं कि भोपाल अब केवल प्रतियोगिताओं की मेजबानी करने वाला शहर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैंपियन तैयार करने वाला प्रमुख केंद्र बन रहा है।

    हर प्रतिभावान खिलाड़ी को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर
    सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर प्रतिभावान बच्चे को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले। इसी दिशा में प्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसरों के निर्माण की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं तथा प्रत्येक जिले में फीडर सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। मंत्री सारंग ने कहा कि मध्य प्रदेश पहले राष्ट्रीय खेलों में 17वें स्थान पर रहा करता था, लेकिन पिछले तीन वर्षों में प्रदेश लगातार तीसरे स्थान पर आ रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 18 खेलों की 11 अकादमियां संचालित की जा रही हैं।

    भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों का नया मंच तैयार
    मंत्री सारंग ने कहा कि भोपाल में लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर विकसित किया जा रहा है। इसके प्रथम चरण का लोकार्पण जल्द होने वाला है। इससे मध्य प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन को नई गति मिलेगी। मंत्री सारंग ने बताया कि नवंबर माह में अंतरराष्ट्रीय महिला हॉकी एशियन चैंपियनशिप का आयोजन भोपाल के अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर में मध्य प्रदेश खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से किया जाएगा। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय एशियन रोइंग चैंपियनशिप भी भोपाल में होने वाली है।

    16 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे समापन एवं पुरस्कार वितरण
    राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप का आयोजन 11 से 16 अगस्त तक किया जाएगा। प्रतियोगिता का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह 16 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में आयोजित होगा। इस अवसर पर विभिन्न वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरण कर उनका सम्मान किया जाएगा।

    भोपाल की झीलों से निकलेंगे भारत के भविष्य के चैंपियन
    मंत्री सारंग ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे प्रतियोगिता में जीत और पदक के लिए पूरी ताकत से खेलें, लेकिन अपने मन में भारत के लिए खेलने का सपना भी लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि “भोपाल की इन झीलों में केवल नावें नहीं चल रही हैं, यहां भारत के भविष्य के चैंपियन अपने सपनों को गति दे रहे हैं। राजा भोज की इस धरती से हम संकल्प लें कि मध्य प्रदेश की झीलों से निकलने वाली प्रतिभाएं देश के तिरंगे को दुनिया के हर खेल मंच पर ऊंचा करेंगी।”

    सारंग ने कहा कि मध्य प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को अवसर, आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा गौरव के साथ फहराएं।

  • Fitch का भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम, BBB- रेटिंग बरकरार; FY27 में 6.4% GDP ग्रोथ का अनुमान

    Fitch का भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम, BBB- रेटिंग बरकरार; FY27 में 6.4% GDP ग्रोथ का अनुमान


    नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और ऊर्जा संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग को BBB- पर स्थिर आउटलुक के साथ बरकरार रखा है। इसके साथ ही भारत की अल्पकालिक जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग F3 पर भी कायम रखी गई है। फिच का यह आकलन ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और भू राजनीतिक तनाव का असर कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर रेटिंग एजेंसी का भरोसा बना हुआ है।

    फिच के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूत विकास क्षमता मौजूद है और पिछले कुछ वर्षों में देश ने अलग अलग आर्थिक झटकों का जिस तरह सामना किया है उससे इसकी लचीलापन क्षमता साबित हुई है। एजेंसी का मानना है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का भारत का रिकॉर्ड और नीतिगत विश्वसनीयता में सुधार आगे भी आर्थिक वृद्धि का आधार बनेगा। हालांकि ऊर्जा संकट के कारण निकट अवधि में कुछ चुनौतियां जरूर बनी हुई हैं लेकिन इनसे भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।

    फिच ने मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष यानी FY27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। यह पिछले तीन वर्षों में दर्ज 7.4 प्रतिशत की औसत विकास दर से कम है लेकिन इसके बावजूद BBB रेटिंग वाले देशों की औसत विकास दर 2 प्रतिशत के मुकाबले भारत की अनुमानित वृद्धि तीन गुना से भी अधिक है। यही अंतर भारत की आर्थिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान देता है। एजेंसी का कहना है कि हाल के वर्षों में भारत ने कई तरह के आर्थिक और बाहरी झटकों के बावजूद अपनी मजबूती बनाए रखी है और आगे भी यही रुझान जारी रहने की उम्मीद है।

    हालांकि भारत के सामने कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। फिच ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितता को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। भारत दुनिया का एक बड़ा शुद्ध ऊर्जा आयातक है ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में तेजी का असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है। इसके बावजूद फिच को उम्मीद है कि ऊर्जा संकट से जुड़े जोखिम लंबे समय तक भारत की विकास संभावनाओं को प्रभावित नहीं करेंगे।

    महंगाई के मोर्चे पर भी फिच ने भारत को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक अनुमान दिया है। एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में औसत महंगाई दर 4.1 प्रतिशत रह सकती है जबकि FY26 में यह 2.1 प्रतिशत थी। ऊर्जा संकट के कारण महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका जरूर है लेकिन फिच के मुताबिक यह भारतीय रिजर्व बैंक की 2 से 6 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर रहने की उम्मीद है। मुख्य महंगाई दर भी करीब 4 प्रतिशत के आसपास स्थिर बनी हुई है जिससे कीमतों के दबाव को लेकर फिलहाल बड़ी चिंता नहीं दिखाई दे रही है।
    महंगाई के मोर्चे पर भी फिच ने भारत को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक अनुमान दिया है। एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में औसत महंगाई दर 4.1 प्रतिशत रह सकती है जबकि FY26 में यह 2.1 प्रतिशत थी। ऊर्जा संकट के कारण महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका जरूर है लेकिन फिच के मुताबिक यह भारतीय रिजर्व बैंक की 2 से 6 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर रहने की उम्मीद है। मुख्य महंगाई दर भी करीब 4 प्रतिशत के आसपास स्थिर बनी हुई है जिससे कीमतों के दबाव को लेकर फिलहाल बड़ी चिंता नहीं दिखाई दे रही है।

    फिच ने यह भी माना कि राजकोषीय नीति ने ऊर्जा संकट से पैदा होने वाले महंगाई के दबाव को सीमित करने में मदद की है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक पर तत्काल दबाव कुछ कम हुआ है। हालांकि एजेंसी का अनुमान है कि ऊर्जा संकट के दूसरे दौर के प्रभाव और अल नीनो से जुड़े जोखिमों को देखते हुए आरबीआई साल के अंत में अपनी नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसी स्थिति में रेपो रेट 5.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

    कुल मिलाकर फिच की ताजा रेटिंग भारत की आर्थिक मजबूती पर वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। विकास दर में कुछ कमी का अनुमान होने के बावजूद भारत की वृद्धि क्षमता अभी भी दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और समान रेटिंग वाले देशों से काफी बेहतर बनी हुई है। ऊर्जा कीमतों और वैश्विक तनाव जैसी चुनौतियों के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखना आने वाले समय में भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

  • कागजी नोटों की जगह आएगी प्लास्टिक आधारित करेंसी? ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों के ट्रायल को मिली मंजूरी

    कागजी नोटों की जगह आएगी प्लास्टिक आधारित करेंसी? ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों के ट्रायल को मिली मंजूरी

    नई दिल्ली। भारत की करेंसी व्यवस्था में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। संसद में मंगलवार को दी गई जानकारी के मुताबिक दोनों मूल्यवर्गों में एक-एक अरब यानी कुल 2 अरब पॉलीमर नोटों को ट्रायल के लिए जारी करने की योजना को स्वीकृति मिली है। अगर यह परीक्षण सफल रहता है तो आने वाले समय में इन नोटों को नियमित रूप से प्रचलन में लाने का रास्ता साफ हो सकता है। इस कदम का उद्देश्य भारतीय मुद्रा को ज्यादा टिकाऊ बनाने के साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना है।

    राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश के आधार पर आरबीआई ने आरबीआई अधिनियम 1934 की धारा 25 के तहत पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के मुताबिक ट्रायल के दौरान 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलीमर नोट तैयार किए जाएंगे। परीक्षण के नतीजे संतोषजनक रहने पर भविष्य में इन मूल्यवर्गों के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जा सकते हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पॉलीमर नोट आने के बाद पुराने कागजी नोटों को तत्काल बंद करने की योजना नहीं है। आरबीआई के अनुसार पॉलीमर बैंक नोटों को मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ समानांतर रूप से चलाने का प्रस्ताव है। यानी शुरुआती दौर में लोगों को कागजी और पॉलीमर दोनों तरह के 10 और 20 रुपये के नोट इस्तेमाल करने को मिल सकते हैं।

    पॉलीमर बैंक नोट खास तरह के प्लास्टिक आधारित पदार्थ से बनाए जाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनका ज्यादा टिकाऊ होना है। सामान्य कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट नमी, धूल और रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाली घिसावट को बेहतर तरीके से सहन कर सकते हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में पहले से पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में पॉलीमर बैंक नोट लंबे समय से प्रचलन में हैं।

    पॉलीमर नोटों की ज्यादा उम्र का सीधा फायदा करेंसी प्रबंधन पर भी पड़ सकता है। अगर नोट ज्यादा समय तक खराब हुए बिना चल सकें तो पुराने नोटों को बार-बार बदलने और नए नोट छापने की जरूरत कम हो सकती है। इसके अलावा पॉलीमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर शामिल करना भी अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। इससे नकली नोटों की समस्या पर नियंत्रण करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    हालांकि सरकार ने अभी पॉलीमर नोटों को आम जनता के बीच बड़े स्तर पर जारी करने की तारीख तय नहीं की है। वित्त मंत्री ने बताया कि आरबीआई की ओर से आवश्यक खरीद प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पॉलीमर नोट आम लोगों के हाथ में कब तक पहुंचेंगे और पूरी परियोजना पर कितना खर्च आएगा।

    आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि पॉलीमर नोटों को लेकर परीक्षण जारी है और बाजार में उतारने से पहले इनकी पूरी तरह जांच की जाएगी। केंद्रीय बैंक फील्ड ट्रायल के परिणामों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही बड़े स्तर पर पॉलीमर नोटों को जारी करने का अंतिम फैसला करेगा। आरबीआई का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को प्रचलन में लाने का है।

    अगर फील्ड ट्रायल सफल रहता है और इसके बाद नियमित जारी करने की मंजूरी मिलती है तो भारत की मुद्रा व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। फिलहाल 10 और 20 रुपये के 2 अरब पॉलीमर नोटों का परीक्षण इस दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में ट्रायल के परिणाम यह तय करेंगे कि भारत में प्लास्टिक आधारित करेंसी का इस्तेमाल कितने बड़े स्तर तक बढ़ाया जाएगा।