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  • यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस का बड़ा दावा, सपा से बराबर सीटों की हिस्सेदारी की मांग, विपक्षी एकता पर भी दिया जोर

    यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस का बड़ा दावा, सपा से बराबर सीटों की हिस्सेदारी की मांग, विपक्षी एकता पर भी दिया जोर

    नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच विपक्षी राजनीति में सीट बंटवारे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेश प्रभारी राजेंद्र गौतम ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि राज्य में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन होता है, तो कांग्रेस बराबरी की भागीदारी की अपेक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और उत्तर प्रदेश में उसे सम्मानजनक तथा समान हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

    राजेंद्र गौतम ने कहा कि कांग्रेस का देश के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की मजबूत पहचान है। उनके अनुसार भारतीय जनता पार्टी का प्रभावी मुकाबला केवल एक मजबूत राष्ट्रीय दल ही कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय दलों की अपनी भूमिका है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति अलग है। इसी आधार पर उन्होंने संभावित गठबंधन में बराबरी की भागीदारी की बात कही।

    उन्होंने विपक्षी दलों के बीच व्यापक एकजुटता की भी वकालत की। उनका कहना था कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाली सभी राजनीतिक शक्तियों को एक मंच पर आने की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी सहित उन सभी दलों के साथ सहयोग की संभावना जताई जो भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाने के पक्षधर हैं।

    कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राज्यभर में अपने संगठन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगी। उन्होंने घोषणा की कि जुलाई से प्रदेशव्यापी दौरा शुरू किया जाएगा, जिसके दौरान कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने के साथ संगठन विस्तार पर भी काम किया जाएगा। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाना प्राथमिकता होगी, ताकि चुनावी तैयारी प्रभावी ढंग से की जा सके।

    राजेंद्र गौतम ने राज्य सरकार पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और विभिन्न सरकारी निर्णयों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी और जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्षी गठबंधन का स्वरूप तय होता है, तो सभी सहयोगी दलों से चर्चा के बाद साझा घोषणापत्र तैयार किया जाएगा। उनके अनुसार गठबंधन की राजनीति में सभी दलों की राय और प्राथमिकताओं को शामिल किया जाएगा, ताकि जनता के सामने एक साझा और स्पष्ट एजेंडा रखा जा सके।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के इस रुख को आगामी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। सीट बंटवारे को लेकर दिए गए इस बयान के बाद विपक्षी दलों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिक गई हैं। आने वाले महीनों में गठबंधन की संभावनाएं, सीटों का फार्मूला और साझा चुनावी रणनीति प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बनने की संभावना है।

  • जम्मू-कश्मीर का 'धदकई' गांव बना भारत का 'साइलेंट विलेज', जेनेटिक म्यूटेशन के कारण सन्नाटे के साए में जीने को मजबूर हैं ग्रामीण

    जम्मू-कश्मीर का 'धदकई' गांव बना भारत का 'साइलेंट विलेज', जेनेटिक म्यूटेशन के कारण सन्नाटे के साए में जीने को मजबूर हैं ग्रामीण

    नई दिल्ली। भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की सुदूर और बर्फीली पहाड़ियों के बीच बसा ‘धदकई’ गांव इन दिनों अपनी एक बेहद अनोखी और संवेदनशील भौगोलिक एवं चिकित्सीय स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस गांव को देश में ‘द साइलेंट विलेज ऑफ इंडिया’ यानी भारत का शांत गांव कहा जाता है। प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत दिखने वाले इस गांव की असल हकीकत यह है कि यहां की एक बहुत बड़ी आबादी जन्मजात रूप से न तो सुन सकती है और न ही बोल सकती है। इस छोटे से पर्वतीय क्षेत्र में पसरी यह खामोशी कोई प्राकृतिक सन्नाटा नहीं, बल्कि एक गंभीर अनुवांशिक बीमारी का नतीजा है।

    भौगोलिक दृष्टि से यह गांव जम्मू से लगभग 260 किलोमीटर दूर दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित है, जहां मुख्य रूप से अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से ताल्लुक रखने वाले गुज्जर मुस्लिम समुदाय के लोग निवास करते हैं। करीब 2,000 की कुल आबादी वाले इस गांव में वर्तमान में 90 से अधिक लोग पूरी तरह से मूक-बधिर हैं। गांव की सामाजिक संरचना के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां के कुल 105 परिवारों में से 55 से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिनके घर में कम से कम एक या उससे अधिक सदस्य इस शारीरिक अक्षमता के साथ जीने को मजबूर हैं। कई घरों में स्थिति इतनी गंभीर है कि सात में से छह बच्चे मूक-बधिर पैदा हुए हैं।

    इस अनोखी चुनौती से निपटने के लिए ग्रामीणों ने आपस में संवाद का एक अनूठा तरीका खोज निकाला है। धदकई गांव के लोगों ने अपनी एक स्थानीय सांकेतिक भाषा (लोकल साइन लैंग्वेज) विकसित कर ली है। खास बात यह है कि गांव के जो लोग सामान्य रूप से सुन और बोल सकते हैं, वे भी इस इशारों की भाषा में पूरी तरह पारंगत हैं। इसके चलते पूरा गांव बिना किसी बाहरी रुकावट या हिचकिचाहट के आपस में रोजमर्रा की बातें बेहद आसानी से साझा कर लेता है। स्थानीय रिकॉर्ड्स के अनुसार, गांव में मूक-बधिर बच्चे के जन्म का पहला आधिकारिक मामला वर्ष 1901 में दर्ज किया गया था, जो समय के साथ लगातार बढ़ता चला गया।

    लंबे समय तक स्थानीय समाज इस स्थिति को दैवीय अभिशाप या वहां की मिट्टी-पानी का दोष मानता रहा, लेकिन हालिया वर्षों में जब वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की विभिन्न टीमों ने इस पर व्यापक शोध किया, तो एक चौंकाने वाली चिकित्सीय वजह सामने आई। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे ‘जेनेटिक क्लस्टर’ या ‘फाउंडर्स इफेक्ट’ कहा जाता है। अनुसंधान में पाया गया कि गुज्जर समुदाय के लोग सदियों से अपनी ही जनजाति और बेहद करीबी रिश्तेदारों के भीतर शादियां करते आ रहे हैं। इस सीमित जेनेटिक पूल (डीएनए संरचना) के कारण मानव शरीर के ‘ओटीओएफ’ (ओटोफर्लिन) नामक जीन में गंभीर विकृति आ गई है, जो कान से दिमाग तक आवाज के सिग्नल भेजने में असमर्थ हो जाता है।

    चिकित्सीय विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इस अनुवांशिक चक्रव्यूह को तोड़ने का एकमात्र व्यावहारिक उपाय यह है कि गांव की युवा पीढ़ी अपने रिश्तेदारों या अंतर्जातीय कम्युनिटी से बाहर शादियां करना शुरू करे। इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने शादी से पहले जेनेटिक रिस्क की जांच के लिए ‘कलर-कोडेड कार्ड्स’ बनाने की वकालत की है। वर्तमान में भारतीय सेना और विभिन्न गैर-सरकारी सामाजिक संस्थाओं द्वारा इस शांत वादी में उम्मीद की नई किरण जगाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत यहां के युवाओं को ‘इंडियन साइन लैंग्वेज’ सिखाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम तेज कर दी गई है।

  • असम-अरुणाचल में बारिश बनी आफत, बाढ़ से 22 हजार से अधिक लोग प्रभावित, 60 साल पुराना रेलवे पुल ढहने से रेल सेवा ठप

    असम-अरुणाचल में बारिश बनी आफत, बाढ़ से 22 हजार से अधिक लोग प्रभावित, 60 साल पुराना रेलवे पुल ढहने से रेल सेवा ठप

    नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने असम और अरुणाचल प्रदेश में हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। कई जिलों में आई बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। असम में हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने के बाद कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटा है तथा मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है।

    असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार राज्य के धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और कोकराझार समेत कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 22 हजार से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हो चुके हैं। सबसे अधिक असर धेमाजी जिले में देखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। बाढ़ का पानी दर्जनों गांवों तक पहुंच चुका है और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

    लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी किनारे बसे गांवों में खतरा बढ़ने के बाद प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। इस प्राकृतिक आपदा का असर पशुधन पर भी पड़ा है और हजारों मवेशी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

    इसी बीच धेमाजी जिले में लगभग छह दशक पुराना रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होकर आंशिक रूप से ढह गया। बताया गया कि लगातार बारिश और नदी किनारे तेज कटाव के कारण पुल का एक पिलर कमजोर हो गया, जिससे उसका एक हिस्सा टूट गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय पुल से कोई ट्रेन नहीं गुजर रही थी, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पुल को नुकसान पहुंचने के बाद संबंधित रेलवे खंड पर ट्रेन सेवाएं एहतियातन रोक दी गई हैं और तकनीकी टीमें मरम्मत कार्य में जुट गई हैं।

    अरुणाचल प्रदेश में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। हाल ही में बादल फटने की घटनाओं के बाद कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है। अब तक कई लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार खोज अभियान चला रहे हैं। लेकू नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे सीमावर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।

    मौसम विभाग ने 1 जुलाई तक असम और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश, तेज आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और आपदा प्रबंधन दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

    बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य सरकार से स्थिति की जानकारी लेकर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत एवं पुनर्वास कार्य को तेज गति से आगे बढ़ा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने तक सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगले कुछ दिन पूर्वोत्तर के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • अमरनाथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, पहली पूजा के साथ सुरक्षा व्यवस्था हुई मजबूत, 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण

    अमरनाथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, पहली पूजा के साथ सुरक्षा व्यवस्था हुई मजबूत, 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण

    नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत से पहले सोमवार को बाबा बर्फानी की पहली पूजा विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा ने पूजा-अर्चना कर यात्रा के सफल और सुरक्षित संचालन की कामना की। इस वर्ष पवित्र यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस धार्मिक यात्रा के लिए प्रशासन ने लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

    इस बार श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग दोनों से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना होंगे। प्रशासन के अनुसार 15 अप्रैल से अब तक चार लाख से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं। यात्रा का पहला जत्था 2 जुलाई को जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया जाएगा।

    यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया है। बालटाल और चंदनवाड़ी में बेस अस्पताल शुरू कर दिए गए हैं, जबकि दोनों यात्रा मार्गों पर चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन सहायता केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को किसी भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का तुरंत उपचार मिल सके, इसके लिए डॉक्टरों और मेडिकल टीमों की तैनाती भी की गई है।

    प्रशासन का कहना है कि यात्रा मार्गों पर बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि महागणेश टॉप के पास जमी बर्फ को हटाने का कार्य अंतिम चरण में है। अधिकारियों के मुताबिक अगले दो से तीन दिनों में यह काम भी पूरा कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह सुगम हो सकेगी।

    यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को भी अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोड ओपनिंग पार्टी लगातार गश्त कर रही है। इसके साथ ही इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सक्रिय कर पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी की जा रही है। पुलिस, अर्धसैनिक बलों और प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर मॉक ड्रिल और सुरक्षा अभ्यास भी आयोजित किए गए हैं। यात्रा मार्ग और बेस कैंपों पर आने वाले श्रद्धालुओं तथा साधु-संतों की नियमित जांच भी की जा रही है।

    अमरनाथ यात्रा के लिए दो प्रमुख मार्ग निर्धारित किए गए हैं। पारंपरिक पहलगाम मार्ग लगभग 41 किलोमीटर लंबा है, जहां से पवित्र गुफा तक पहुंचने में सामान्यतः तीन से चार दिन का समय लगता है। यह मार्ग अपेक्षाकृत आसान माना जाता है और ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ने के कारण श्रद्धालुओं को अनुकूल वातावरण मिलता है। वहीं बालटाल मार्ग करीब सात किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसकी चढ़ाई अधिक खड़ी और कठिन होने के कारण यह अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

    यात्रा शुरू होने से पहले जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रायल काफिले का सफल ड्राई रन भी किया गया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का परीक्षण किया गया। ट्रायल काफिला तय समय के भीतर रामबन पहुंचा, जिससे प्रशासन ने यात्रा की तैयारियों पर संतोष जताया। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

  • Snan Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ आज 108 कलशों से स्‍नान के बाद होंगे बीमार… फिर 15 दिन का आराम

    Snan Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ आज 108 कलशों से स्‍नान के बाद होंगे बीमार… फिर 15 दिन का आराम


    पुरी।
    भगवान जगन्‍नाथ (Lord Jagannath) की रथ यात्रा (Rath Yatra) से पहले एक महत्‍वपूर्ण अनुष्‍ठान किया जाता है, जिसे स्‍नान यात्रा कहा जाता है. ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा (Jagannath Snana Purnima) के दिन महाप्रभु जगन्‍नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा का विशेष स्‍नान होता है, जिस कारण इस दिन को स्‍नान पूर्णिमा और इस परंपरा को स्‍नान यात्रा कहा जाता है।

    साल 2026 में स्‍नान यात्रा आज 29 जून 2026, सोमवार को है. वहीं रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी. रथ यात्रा से पहले भगवान का सुन कुएं के पवित्र जल से स्‍नान होता है. इसके बाद वे 15 दिनों के बीमार पड़ते हैं और आराम के लिए एकांतवास में चले जाते हैं।


    108 स्‍वर्ण कलशों से भगवान का स्‍नान

    स्‍नान यात्रा उत्‍सव मशहूर रथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत होता है. इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है. यह जल एक खास पवित्र कुएं का होता है, जिसे साल में एक बार ही खोला जाता है. इस जल में खास जड़ी-बूटियां, इत्र आदि मिलाकर 3 देवी-देवताओं का स्‍नान कराया जाता है।

    भगवान का विशेष श्रृंगार होता है. भगवान जगन्‍नाथ गजवेश धारण करते हैं. यानी कि उनका मुख गजानन के रूप में सजाया जाता है. इससे जुड़ी एक कथा है कि भगवान गणेश के एक भक्‍त ने जब जगन्‍नाथ भगवान के दर्शन करने की इच्‍छा की तो उसे भगवान जगन्‍नाथ ने गजानन रूप में दर्शन दिए थे. आज भी उसी परंपरा का पालन करते हुए हर साल स्‍नान यात्रा के दिन भगवान गज वेश धारण करते हैं।


    15 दिन नहीं होंगे दर्शन

    इस महास्‍नान के बाद महाप्रभु जगन्‍नाथ 15 दिन के लिए प्रतीकात्‍मक रूप से बीमार होते हैं और एकांतवास में रहते हैं. इस दौरान श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन नहीं होते हैं. पुजारी भगवान को तरह-तरह के काढ़े का भोग लगाते हैं।

    यह परंपरा बताती है कि भगवान भी इंसान की तरह बीमार होते हैं. उन्‍हें औषधियां दी जाती हैं. 15 दिन के अनवसर काल में के बाद भगवान स्‍वस्‍थ होकर नवयौवन रूप में भक्‍तों को दर्शन देते हैं।

    …फिर निकलती है रथ यात्रा
    इसके बाद कई धार्मिक अनुष्‍ठान प्रारंभ होते हैं और फिर भगवान जगन्‍नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा 3 दिव्‍य और भव्‍य रथों में सवार होकर गुंडिचा मंदिर के लिए निकलते हैं. इन रथों की रस्सियां खींचने के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालु पहुंचते हैं. (संबंधित खबर: कौन थीं गुंडिचा, जिनके मंदिर में हर साल जाते हैं भगवान जगन्नाथ?)

    मान्‍यता है कि जो भक्‍त रथ की रस्सियों को छू भी ले उसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है और वह मोक्ष प्राप्‍त करता है. वहीं इस रथ यात्रा के दर्शन करने से पाप नष्‍ट होते हैं और सारे तीर्थ करने का पुण्‍य प्राप्‍त होता है।

  • विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि, गगन तकनीक से जेट विमान की हुई सफल लैंडिंग

    विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि, गगन तकनीक से जेट विमान की हुई सफल लैंडिंग


    नई दिल्ली। भारत ने विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की निगरानी में पहली बार जेट इंजन वाले विमान की सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली के जरिए सफल लैंडिंग कराई गई। उदयपुर हवाई अड्डे पर इंडिगो के एयरबस A320 विमान ने इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा विकसित गगन (GPS Aided GEO Augmented Navigation) प्रणाली का उपयोग करते हुए सफलतापूर्वक लैंडिंग की।

    छोटे हवाई अड्डों के लिए साबित होगी वरदान

    इससे पहले टर्बोप्रॉप एटीआर विमान इस तकनीक का उपयोग कर चुके हैं, लेकिन जेट विमान में पहली बार इसका सफल इस्तेमाल किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सैटेलाइट आधारित लैंडिंग प्रणाली उन छोटे हवाई अड्डों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जहां पारंपरिक और महंगे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) उपलब्ध नहीं हैं। इससे खराब मौसम में भी सुरक्षित लैंडिंग की क्षमता बढ़ेगी।

    भारत बना चुनिंदा देशों में शामिल

    गगन प्रणाली का विकास इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से किया है। यह प्रणाली विमान संचालन के लिए लोकलाइजर परफॉर्मेंस विद वर्टिकल गाइडेंस (LPV) जैसी उन्नत लैंडिंग प्रक्रियाओं को आवश्यक सटीकता और कवरेज उपलब्ध कराती है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी स्वदेशी सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन प्रणाली मौजूद है।

    सैटेलाइट नेविगेशन में नई उड़ान

    उदयपुर के लिए संचालित इंडिगो की उड़ान ने वर्टिकल गाइडेंस के साथ लोकलाइजर परफॉर्मेंस अप्रोच (LPV) को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसे भारत में सैटेलाइट आधारित विमानन नेविगेशन प्रणाली के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    इंडिगो कर रही तकनीक का विस्तार

    इंडिगो ने वर्ष 2022 में अपने एटीआर विमानों में एलपीवी आधारित संचालन की शुरुआत की थी। अब एयरलाइन अपने जेट विमानों सहित पूरे बेड़े में इस स्वदेशी सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन सिस्टम की सुविधा का विस्तार कर रही है। इससे भविष्य में देश के अधिक हवाई अड्डों पर सुरक्षित और आधुनिक लैंडिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

  • 3 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, सफर से पहले जान लें क्या रखें साथ और किन चीजों से करें परहेज

    3 जुलाई से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा, सफर से पहले जान लें क्या रखें साथ और किन चीजों से करें परहेज


    नई दिल्ली। बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए बहुप्रतीक्षित अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होगी, जो 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। हर साल देशभर से लाखों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन आस्था से भरपूर यात्रा में शामिल होते हैं। यदि आप भी इस वर्ष अमरनाथ यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सफर को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए जरूरी सामान और आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखना बेहद जरूरी है।

    यात्रा में ये जरूरी सामान साथ रखें

    जरूरी दवाइयां
    नियमित रूप से ली जाने वाली दवाइयां।
    सिरदर्द, बुखार, उल्टी और सर्दी-जुकाम की दवाएं।
    फर्स्ट एड किट।
    बैंडेज, एंटीसेप्टिक क्रीम और अन्य प्राथमिक उपचार का सामान।

    मौसम के अनुसार कपड़े रखें
    अमरनाथ यात्रा ऊंचाई वाले और ठंडे इलाके में होती है, इसलिए मौसम को ध्यान में रखते हुए सामान पैक करें।
    – गर्म कपड़े।
    – रेनकोट या बरसाती।
    – छाता।
    – वाटरप्रूफ ट्रेकिंग जूते।
    – अतिरिक्त ऊनी मोजे और मौसम के अनुसार कपड़े।

    इन जरूरी चीजों को भी रखें साथ
    – सनस्क्रीन।
    – धूप का चश्मा।
    – हेडलैंप या टॉर्च।
    – ट्रेकिंग स्टिक।
    – मोबाइल के लिए वाटरप्रूफ कवर।
    – बैग के लिए रेन कवर।

    जरूरी दस्तावेज रखना न भूलें
    यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर सुरक्षा जांच होती है। इसलिए अपने साथ सभी आवश्यक दस्तावेज रखें।
    वैध पहचान पत्र।
    यात्रा पंजीकरण से जुड़े सभी दस्तावेज।
    संबंधित विभाग द्वारा बताए गए अन्य जरूरी प्रमाण पत्र।

    क्या साथ नहीं ले जाना चाहिए?
    जरूरत से ज्यादा सामान लेकर यात्रा पर न जाएं।
    बैग हल्का रखें ताकि पैदल यात्रा में परेशानी न हो।
    महंगे गहने या कीमती सामान साथ ले जाने से बचें।
    ऐसी वस्तुएं न रखें जिनके खोने या क्षतिग्रस्त होने का जोखिम हो।

    सही तैयारी और आवश्यक सावधानियों के साथ अमरनाथ यात्रा न केवल सुरक्षित बल्कि अधिक आरामदायक भी बन सकती है।

  • होटल में चल रहे देह व्यापार के धंधे पर मुंबई पुलिस का बड़ा प्रहार, रेस्क्यू की गईं मराठी और बंगाली फिल्मों की अभिनेत्रियां, फिल्म जगत स्तब्ध

    होटल में चल रहे देह व्यापार के धंधे पर मुंबई पुलिस का बड़ा प्रहार, रेस्क्यू की गईं मराठी और बंगाली फिल्मों की अभिनेत्रियां, फिल्म जगत स्तब्ध

    नई दिल्ली। देश की आर्थिक और मनोरंजन राजधानी मुंबई से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। मुंबई पुलिस की एक विशेष टीम ने दक्षिण मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थित एक नामी होटल में चल रहे बेहद हाई-प्रोफाइल देह-व्यापार रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस औचक छापेमारी और दबोचने की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से दो प्रसिद्ध अभिनेत्रियों (एक्ट्रेस) को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। इस खुलासे के बाद से ही माया नगरी के गलियारों में हड़कंप मच गया है और मनोरंजन जगत के कई बड़े नामों पर सवाल उठने लगे हैं।

    पुलिस विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रेस्क्यू की गई दो अभिनेत्रियों में से एक मराठी सिनेमा की जानी-मानी मुख्य अभिनेत्री (लीड एक्ट्रेस) है, जो कई बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रह चुकी है। वहीं, दूसरी अभिनेत्री बंगाली फिल्मों के साथ-साथ कुछ बॉलीवुड फिल्मों में छोटे और कैमियो रोल कर चुकी है। पुलिस ने इन दोनों ही पीड़ित महिलाओं को इस अवैध धंधे के चंगुल से छुड़ाकर सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इन अभिनेत्रियों को किन परिस्थितियों में इस अनैतिक दलदल में धकेला गया।

    इस पूरी छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से एक मुख्य दलाल को रंगे हाथों गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़ा गया आरोपी मनोरंजन उद्योग से ही जुड़ा हुआ एक सक्रिय शख्स है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सेलिब्रिटीज के साथ काम करने वाला एक पेशेवर मेकअप आर्टिस्ट है। वह फिल्म सेट और शूटिंग के दौरान अभिनेत्रियों से जान-पहचान बढ़ाता था और फिर उनकी मजबूरियों या आर्थिक तंगहाली का फायदा उठाकर उन्हें इस अवैध व्यापार के नेटवर्क में शामिल कर लेता था। सेलिब्रिटी नेटवर्क होने के कारण वह हाई-प्रोफाइल ग्राहकों तक आसानी से पहुंच बना लेता था।

    गौरतलब है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले इसी साल जनवरी महीने में भी नवी मुंबई के तुर्भे नाका इलाके में पुलिस ने एक ऐसे ही बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा किया था। उस दौरान अनैतिक मानव तस्करी विरोधी विभाग (AHTU) की टीम ने एक स्थानीय लॉज पर अचानक छापा मारकर सात महिलाओं को मुक्त कराया था और मौके से तीन आरोपियों को दबोचा था। पुलिस के अनुसार, इस तरह के रैकेट को चलाने वाले शातिर अपराधी अक्सर बड़े होटलों और लॉज को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाते हैं।

    पुलिस की शुरुआती जांच और कार्यप्रणाली से यह साफ हुआ है कि ये आरोपी आपस में मिलीभगत कर पीड़ित महिलाओं को आलीशान होटलों में ठहराते थे। इसके बाद विभिन्न डिजिटल माध्यमों और संपर्कों के जरिए ग्राहकों को बुलाकर उनकी पसंद के अनुसार मोटी रकम का सौदा तय किया जाता था। इस रैकेट की पुख्ता जानकारी जुटाने और आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए पुलिस ने नकली ग्राहकों (डमी कस्टमर्स) का जाल बिछाया था, जिसके बाद इस पूरी अवैध गतिविधि का भंडाफोड़ हो सका। फिलहाल, गिरगांव मामले में स्थानीय पुलिस सख्त कानूनी धाराओं के तहत आगे की तफ्तीश कर रही है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट के अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

  • कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर विदेश मंत्रालय की सख्त एडवाइजरी, वैध चीनी वीजा और तिब्बत परमिट के बिना सफर शुरू न करने की सलाह

    कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर विदेश मंत्रालय की सख्त एडवाइजरी, वैध चीनी वीजा और तिब्बत परमिट के बिना सफर शुरू न करने की सलाह

    नई दिल्ली। कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 पर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए विदेश मंत्रालय ने एक नई और बेहद महत्वपूर्ण ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से यात्रा की योजना बना रहे सभी नागरिकों को सचेत किया है कि वे अपने सभी जरूरी यात्रा दस्तावेज और परमिट प्राप्त करने के बाद ही भारत से प्रस्थान करें। मंत्रालय द्वारा यह कदम उन रिपोर्टों के बाद उठाया गया है, जिनमें आवश्यक अनुमति और प्रवेश पत्रों के अभाव में कई भारतीय नागरिकों के नेपाल में फंसे होने की बात सामने आई थी। पुष्ट दस्तावेजों के बिना केवल उम्मीद के सहारे यात्रा शुरू करना श्रद्धालुओं के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर रहा है।

    विदेश मंत्रालय को पिछले कुछ दिनों में उन भारतीय नागरिकों से मदद और आपातकालीन सहायता के लिए कई अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जो आवश्यक चीनी वीजा और तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन (TAR) परमिट के बिना ही काठमांडू पहुंच गए थे। वर्तमान में लगभग 52 भारतीय श्रद्धालु नेपाल की राजधानी काठमांडू में फंसे हुए हैं और आगे की सुरक्षित यात्रा या स्वदेश वापसी के लिए तत्काल सरकारी सहायता की मांग कर रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चूंकि यह पवित्र यात्रा चीन के तिब्बत क्षेत्र से होकर गुजरती है, इसलिए सीमा पार करने के लिए नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास से जारी वैध वीजा और संबंधित चीनी प्राधिकारियों से मिलने वाला ट्रैवल परमिट अनिवार्य है।

    इस साल की यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए भारत और चीन दोनों ही तरफ से नियमों को काफी कड़ा किया गया है। सीमा पार तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद अब प्रत्येक श्रद्धालु अपने साथ केवल 20 किलोग्राम तक का ही आवश्यक सामान ले जा सकेगा। कुमाऊं मंडल विकास निगम के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने पूरे यात्री समूह के लिए अलग से केवल 5 किलोग्राम अतिरिक्त वजन ले जाने की विशेष छूट दी है। इन नए नियमों के तहत सामान के वजन को लेकर चीनी सीमा चौकियों पर बेहद सख्त जांच की जाएगी, इसलिए यात्रियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप ही पैकिंग करने को कहा गया है।

    सामान के वजन के साथ-साथ इस बार श्रद्धालुओं की मेडिकल फिटनेस को लेकर सबसे कड़ा नियम लागू किया गया है। यात्रा पर रवाना होने वाले प्रत्येक दल के साथ पांच सदस्यीय एक समर्पित सर्विस टीम चलेगी, जिसमें चार पेशेवर रसोइये (कुक) और एक योग्य डॉक्टर अनिवार्य रूप से शामिल होगा। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि यात्रा के दौरान किसी भी मार्ग या पड़ाव पर डॉक्टर को यह महसूस होता है कि किसी यात्री की सेहत या शारीरिक स्थिति आगे बढ़ने के अनुकूल नहीं है, तो पूरे ग्रुप को उसी पॉइंट से अपनी यात्रा तुरंत स्थगित कर वापस लौटना होगा। किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए स्वास्थ्य मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    विदेश मंत्रालय ने श्रद्धालुओं से यह भी अपील की है कि वे जिस भी प्राइवेट ऑपरेटर के माध्यम से बुकिंग कर रहे हैं, उसकी प्रामाणिकता और पंजीकरण की अच्छी तरह जांच कर लें। वैध एजेंटों के माध्यम से ही नेपाल मार्ग के लिए अग्रिम अनुमति पत्र सुनिश्चित किए जाने चाहिए। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, इस साल की कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला आधिकारिक जत्था आगामी 30 जून को नई दिल्ली से रवाना होने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह जत्था विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए आगामी 5 जुलाई को धारचूला स्थित बेस कैंप पहुंचेगा, जहां से आगे की कठिन चढ़ाई और सीमा पार का सफर शुरू होगा।

  • पश्चिम बंगाल में नए कानूनों की बड़ी पहल, UCC विधेयक सहित 5 प्रस्तावित बिलों पर विधानसभा में होगा जोरदार सत्र

    पश्चिम बंगाल में नए कानूनों की बड़ी पहल, UCC विधेयक सहित 5 प्रस्तावित बिलों पर विधानसभा में होगा जोरदार सत्र

    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है क्योंकि विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में कई अहम विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। प्रस्तावित विधेयकों में समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा बिल सबसे प्रमुख माना जा रहा है, जिस पर पूरे राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। इसके साथ ही सरकार कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण से जुड़े अन्य चार विधेयक भी पेश करने की योजना बना रही है।

    प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू करने की बात कही जा रही है। इस कदम को सरकार समान नागरिक अधिकार और लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा सुधार बताने की तैयारी में है।

    इसके साथ ही सरकार ‘योगी मॉडल’ की तर्ज पर तैयार एक विधेयक भी पेश कर सकती है, जिसका उद्देश्य संगठित अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करना बताया जा रहा है। इस प्रस्तावित कानून में अवैध खनन, हथियार और ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों पर कठोर प्रावधान शामिल होने की बात कही जा रही है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस कानून के तहत अपराधियों को जन सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए हिरासत में रखने और उनकी संपत्ति जब्त व नीलाम करने जैसे प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। इसके अलावा सार्वजनिक अव्यवस्था, दंगे, आगजनी और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं पर नियंत्रण के लिए भी अलग विधेयक लाया जा सकता है।

    राज्य सरकार का दावा है कि इन प्रस्तावित कानूनों से कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराध पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन विधेयकों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ले जा सकती है। वहीं, कानून-व्यवस्था से जुड़े सख्त प्रावधानों पर मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।

    सोमवार को होने वाला यह विशेष सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें राज्य की नीतिगत दिशा और भविष्य की कानून व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालने वाले निर्णय सामने आ सकते हैं।