Category: National

  • मौत को दी मात! चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच गिरी महिला, लोको पायलट की सूझबूझ से बची जान

    मौत को दी मात! चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच गिरी महिला, लोको पायलट की सूझबूझ से बची जान


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर शुक्रवार को एक बड़ा रेल हादसा टल गया। प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर चलती दून एक्सप्रेस में चढ़ने की कोशिश कर रही एक महिला का संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच बने गैप में जा गिरी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन चलने के बाद महिला ने उसमें चढ़ने का प्रयास किया। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह सीधे प्लेटफॉर्म तथा ट्रेन के बीच फंस गई। यह भयावह दृश्य देखते ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों ने जोर-जोर से शोर मचाकर लोको पायलट को सतर्क किया।

    यात्रियों की आवाज सुनते ही लोको पायलट ने तत्काल ट्रेन के इमरजेंसी ब्रेक लगाए और ट्रेन रोक दी। इसके बाद मौके पर मौजूद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के जवान तुरंत हरकत में आए और महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनकी त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।

    हादसे में महिला को मामूली चोटें आईं। रेलवे अधिकारियों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे छुट्टी दे दी। फिलहाल महिला की हालत सामान्य बताई जा रही है। घटना के बाद रेलवे प्रशासन और जीआरपी ने यात्रियों से अपील की है कि वे कभी भी चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें।

    अधिकारियों ने कहा कि ऐसी छोटी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। यात्रियों को हमेशा ट्रेन के पूरी तरह रुकने के बाद ही सुरक्षित तरीके से चढ़ना और उतरना चाहिए तथा रेलवे सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि यात्रियों की सतर्कता, लोको पायलट की त्वरित सूझबूझ और सुरक्षा बलों की तेजी से की गई कार्रवाई कई बार बड़ी दुर्घटनाओं को टाल सकती है।
  • भारत-जापान रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, पीएम साने ताकाइची के पहले भारत दौरे पर होगी अहम वार्ता

    भारत-जापान रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, पीएम साने ताकाइची के पहले भारत दौरे पर होगी अहम वार्ता


    नई दिल्ली । भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के उद्देश्य से जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1 से 3 जुलाई, 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा साने ताकाइची का पहला आधिकारिक भारत दौरा होगा। इस दौरान वह 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी।

    नई दिल्ली में आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करने, रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर देगा। बैठक में आर्थिक सहयोग, निवेश, रक्षा, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस रहने की संभावना है।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त 2025 में जापान गए थे, जहां उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। उस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई मजबूती देने की प्रतिबद्धता जताई थी।

    जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जापान आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए पांच सूत्रीय रोडमैप भी प्रस्तुत किया था। उन्होंने निवेश, विनिर्माण, नवाचार और तकनीकी सहयोग को दोनों देशों के भविष्य के विकास का आधार बताया था।

    प्रधानमंत्री मोदी ने उस दौरान जापान की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नुकागा फुकुशिरो और जापानी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की थी। इसके अलावा उन्होंने जापान के विभिन्न प्रांतों के राज्यपालों के साथ बैठक कर क्षेत्रीय सहयोग और निवेश के अवसरों पर चर्चा की थी।

    जापान दौरे की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग रही थी। प्रधानमंत्री मोदी और शिगेरु इशिबा ने जापान के मियागी प्रांत स्थित Tokyo Electron Miyagi Limited का दौरा किया था, जहां उन्हें उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण तकनीकों और वैश्विक सप्लाई चेन में कंपनी की भूमिका की जानकारी दी गई थी।

    इस यात्रा के बाद भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। दोनों देशों ने सुरक्षित, भरोसेमंद और लचीली वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन विकसित करने तथा औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में मिलकर काम करने का संकल्प भी दोहराया था।

    साने ताकाइची की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और जापान रक्षा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल इकोनॉमी, हरित ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूती मिलेगी।

  • CBSE भाषा नीति पर साफ स्थिति, मौजूदा छात्रों को नहीं बदलना होगा विषय, दो विदेशी भाषाओं की पढ़ाई 10वीं तक जारी रखने की छूट

    CBSE भाषा नीति पर साफ स्थिति, मौजूदा छात्रों को नहीं बदलना होगा विषय, दो विदेशी भाषाओं की पढ़ाई 10वीं तक जारी रखने की छूट

    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई भाषा नीति को लेकर लंबे समय से चल रहे असमंजस पर शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने साफ किया है कि वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को अपनी मौजूदा भाषा संयोजन में किसी भी प्रकार का बदलाव करने की आवश्यकता नहीं होगी। इन छात्रों को 10वीं तक अपनी चुनी हुई भाषाओं के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी गई है। इस फैसले से देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।

    हाल ही में CBSE द्वारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत जारी किए गए सर्कुलर के बाद तीन-भाषा नीति को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। सर्कुलर में कहा गया था कि कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। इसके बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने इस प्रावधान पर आपत्ति जताई थी, खासकर उन छात्रों ने जो पहले से दो विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे हैं।

    इस विवाद के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया तक भी पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट में इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाएं दाखिल की गईं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन मामले को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का निर्देश दिया गया था। इसी बीच शिक्षा मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मौजूदा छात्रों पर यह नियम लागू नहीं होगा।

    मंत्रालय के अनुसार, नया भाषा ढांचा केवल भविष्य में लागू होने वाले बैच पर लागू किया जाएगा। यानी कक्षा 6 से नए प्रवेश लेने वाले छात्रों पर ही यह तीन-भाषा नीति प्रभावी होगी। वर्तमान में पढ़ रहे छात्र अपनी मौजूदा भाषा संरचना के साथ बिना किसी बदलाव के अपनी शिक्षा पूरी कर सकेंगे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी नीति परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि केवल पहले से मौजूद व्यवस्था को स्पष्ट करने का प्रयास है।

    शिक्षा मंत्रालय के अनुसार देश में हर वर्ष लगभग 24 लाख छात्र CBSE की 10वीं परीक्षा में शामिल होते हैं, जिनमें से केवल एक छोटा हिस्सा, लगभग 30 हजार छात्र, दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुनते हैं। यही वर्ग इस विवाद से प्रभावित हो सकता था। अब स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होने के बाद इन छात्रों को भी पूरी राहत मिल गई है।

    सरकार का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है, लेकिन इसे लागू करने में किसी भी प्रकार की अचानक बाध्यता नहीं होगी। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि छात्रों को किसी प्रकार की शैक्षणिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।

    कुल मिलाकर, इस स्पष्टीकरण के बाद CBSE की भाषा नीति को लेकर फैला भ्रम समाप्त हो गया है। मौजूदा छात्रों के लिए यह निर्णय बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जबकि नई व्यवस्था भविष्य के शैक्षणिक बैचों पर लागू होगी।

  • संतकबीरनगर में दर्दनाक हादसा, खेत में करंट लगने से 22 वर्षीय युवक की मौत

    संतकबीरनगर में दर्दनाक हादसा, खेत में करंट लगने से 22 वर्षीय युवक की मौत


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में 22 वर्षीय युवक की करंट लगने से मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया, जबकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, यह घटना खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र के निखरकपार गांव की है। गांव निवासी विनोद ने पुलिस को दी सूचना में बताया कि उनका छोटा भाई मुकेश शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे घर से लगभग 300 मीटर दूर स्थित अपने खेत को देखने गया था।

    बताया जा रहा है कि खेत के पास लगे बिजली के पोल में किसी कारणवश करंट उतर आया था। जैसे ही मुकेश पोल के संपर्क में आया, वह तेज करंट की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक युवक की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। सूचना मिलने पर पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

    प्रारंभिक जांच में बिजली के पोल में करंट उतरने की बात सामने आई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं स्थानीय लोगों ने बिजली व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

  • राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फैसला, चंपत राय और अनिल मिश्रा ने पद छोड़ा, जांच के बीच बढ़ी हलचल

    राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फैसला, चंपत राय और अनिल मिश्रा ने पद छोड़ा, जांच के बीच बढ़ी हलचल


    अयोध्या । अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी अपना पद छोड़ दिया है। दोनों के इस्तीफों की पुष्टि समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से की गई है। बताया जा रहा है कि दोनों ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दिया है।

    चढ़ावे में कथित गबन के आरोप सामने आने के बाद से ट्रस्ट के दोनों पदाधिकारी लगातार चर्चा में थे। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने पिछले दिनों चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े अन्य अधिकारियों से लंबी पूछताछ की थी। जांच के दौरान चढ़ावे की गिनती, नकदी की सुरक्षा व्यवस्था और पूरी प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल किए गए थे।

    जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि चढ़ावे की गिनती में शामिल कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया से हुई और नकदी प्रबंधन में किसकी क्या भूमिका थी। जांच के दौरान कई दस्तावेज भी खंगाले गए और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की गई।

    इससे पहले चंपत राय के चालक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित कई लोगों से पूछताछ की गई थी। जांच के दौरान नकदी प्रबंधन और चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई बिंदुओं पर जानकारी जुटाई गई। मामले में पहले ही कई शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं और एसआईटी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर भी सवाल उठे थे। अब चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को इस पूरे घटनाक्रम का अहम मोड़ माना जा रहा है। ट्रस्ट में दोनों पदों पर नई नियुक्तियों को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

  • जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता, गोरखपुर में CM योगी ने जनता दर्शन में सुनीं 200 फरियादियों की शिकायतें

    जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता, गोरखपुर में CM योगी ने जनता दर्शन में सुनीं 200 फरियादियों की शिकायतें

    गोरखपुर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने तीन दिवसीय गोरखपुर प्रवास के दौरान शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे करीब 200 फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनका प्रभावी तथा समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक शिकायत को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और उसका ऐसा समाधान किया जाए जिससे शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी मामलों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए।

    मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में पहुंचे लोगों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जनसेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और लोगों को न्याय तथा राहत दिलाने में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।

    जनता दर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग अपनी व्यक्तिगत, सामाजिक, राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य और अन्य प्रशासनिक समस्याएं लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

    जनता दर्शन में शामिल होने के लिए किसी विशेष पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती। कोई भी नागरिक सीधे कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी शिकायत मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकता है। हालांकि प्रशासन नागरिकों को सलाह देता है कि वे अपनी शिकायत पहले से ही जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करा दें, ताकि उसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहे और सुनवाई के दौरान प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा सके।

    सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि जनता दर्शन के समय और स्थान में प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार बदलाव संभव है। इसलिए नागरिकों को किसी भी आधिकारिक सूचना के लिए राज्य सरकार के अधिकृत पोर्टल या जनसुनवाई पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

  • पूर्वांचल के विकास को रफ्तार, देवरिया में 106 परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे CM योगी, गोरखपुर में अस्पताल का उद्घाटन भी

    पूर्वांचल के विकास को रफ्तार, देवरिया में 106 परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे CM योगी, गोरखपुर में अस्पताल का उद्घाटन भी


    लखनऊ।  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को पूर्वांचल के दो महत्वपूर्ण जिलों देवरिया और गोरखपुर के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह देवरिया में 456 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 106 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित करेंगे।

    मुख्यमंत्री का कार्यक्रम देवरिया के बरहज और रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित होगा। इस अवसर पर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बुनियादी ढांचा और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की जाएगी। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    मुख्यमंत्री लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रमाण-पत्र भी सौंपेंगे। इन योजनाओं का उद्देश्य पात्र परिवारों तक सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंचाना और उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।

    देवरिया कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री गोरखपुर पहुंचेंगे, जहां वह एस्ट्रोमेडिक्स मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। अस्पताल के शुरू होने से गोरखपुर और आसपास के जिलों के लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    अपने दौरे से पहले मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश जारी करते हुए कहा कि पूज्य देवरहा बाबा की पावन भूमि देवरिया में विकास और जनकल्याण के एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं से क्षेत्र के लोगों के जीवन में नई आशा, नए अवसर और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।

    सरकार के अनुसार, पूर्वांचल में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और जनहित योजनाओं के विस्तार के उद्देश्य से लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

  • अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- संवेदनहीनता का चेहरा सामने आया, जनता सब समझ चुकी है

    अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- संवेदनहीनता का चेहरा सामने आया, जनता सब समझ चुकी है


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश की जनता अब भाजपा नेताओं के भाषण सुनने के मूड में नहीं है, बल्कि जवाब चाहती है। अपने बयान में उन्होंने एक कथित वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि उससे भाजपा नेताओं की वास्तविक कार्यशैली और व्यवहार लोगों के सामने आ गया है।

    अखिलेश यादव ने कहा कि अहंकार इंसान का विवेक छीन लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने किसी नेता को ईमानदारी, सादगी और जनसेवा का प्रतीक मान रखा था, उनका भ्रम अब टूट चुका है। उनके अनुसार हाल ही में सामने आए एक कथित वीडियो ने उस बनाई गई छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।

    सपा प्रमुख ने कहा कि किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटने के समय संवेदना और सहानुभूति दिखाने के बजाय यदि कोई सार्वजनिक रूप से कठोर भाषा और व्यवहार अपनाता है, तो यह उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद लोगों के सामने उस नेता का वास्तविक चेहरा उजागर हो गया है और कथित नायकत्व का मायाजाल बिखर गया है।

    अखिलेश यादव ने दावा किया कि इस घटना से सबसे अधिक निराश वे समर्थक हुए हैं, जो अब तक संबंधित नेता की छवि का प्रचार करते रहे थे। उन्होंने कहा कि लोग अब यह सोचने को मजबूर हैं कि यदि ऐसी घटना उनके अपने परिवार के साथ होती, तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होती। उनके अनुसार इस घटना ने समाज में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठे हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी पत्रकारों और अधिकारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार के मामले सामने आ चुके हैं। उनका कहना था कि जिसके सार्वजनिक व्यवहार में संयम नहीं होता, उसके नेतृत्व पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

    सपा अध्यक्ष ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब यह भी कहा जा सकता है कि वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से बनाया गया है, लेकिन जनता सब समझती है। उन्होंने दावा किया कि लोग वास्तविकता और दिखावे के बीच का अंतर पहचान चुके हैं।

    अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ी किसी भी घटना को समाज गंभीरता से लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण से भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा है और महिलाओं के बीच इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।

  • लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, ट्रेलर से टकराई डबल डेकर बस, 2 की मौत, 30 घायल

    लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, ट्रेलर से टकराई डबल डेकर बस, 2 की मौत, 30 घायल


    फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर सवारियों से भरी एक तेज रफ्तार डबल डेकर बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस में सवार यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई। हादसे में दो लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि करीब 30 यात्री घायल हो गए।

    यह दुर्घटना नंगला खंगर थाना क्षेत्र में हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस में 60 से अधिक यात्री सवार थे। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और बस सीधे आगे चल रहे ट्रेलर से जा भिड़ी। टक्कर के बाद बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कई यात्री उसमें फंस गए।

    हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान दो यात्रियों ने दम तोड़ दिया। अन्य घायलों का इलाज जारी है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के समय बस में क्षमता से अधिक नहीं, बल्कि 60 से ज्यादा यात्री सफर कर रहे थे। हादसे के कारण एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने क्षतिग्रस्त बस और ट्रेलर को हटवाकर यातायात सामान्य कराया।

    प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और चालक का वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है, हालांकि तकनीकी और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और नियंत्रित गति से वाहन चलाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अधिकारियों ने वाहन चालकों से सावधानी बरतने और निर्धारित गति सीमा का पालन करने की अपील की है।

  • जमीन विवाद में रिश्तों का कत्ल, ससुर पर दामाद की हत्या का आरोप, सास-ससुर हिरासत में

    जमीन विवाद में रिश्तों का कत्ल, ससुर पर दामाद की हत्या का आरोप, सास-ससुर हिरासत में


    रायबरेली । उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में जमीन विवाद ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नसीराबाद थाना क्षेत्र के कुंवरमऊ ग्राम सभा के पूरे दुर्गा सिंह मजरे में हुए खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान वीरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई, जबकि मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि इस दौरान वीरेंद्र सिंह पर चाकू से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    मृतक के परिजनों ने इस घटना के लिए उसके ससुर को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि जमीन विवाद के दौरान ससुर ने चाकू से हमला किया, जिसके कारण वीरेंद्र सिंह की मौत हुई। हालांकि पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    घटना की सूचना मिलते ही नसीराबाद थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ साक्ष्य भी जुटाए हैं। मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    पुलिस ने मृतक के सास और ससुर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    इस दर्दनाक घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर पुलिस क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।