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  • दोस्ती से बगावत तक, राघव चड्ढा ने मोड़ा सियासी रुख, संकट में केजरीवाल की साख।

    दोस्ती से बगावत तक, राघव चड्ढा ने मोड़ा सियासी रुख, संकट में केजरीवाल की साख।


    नई दिल्ली।आम आदमी पार्टी में हाल के घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गर्म कर दिया है। राज्यसभा में पार्टी के भीतर माने जा रहे सात सांसदों के रुख बदलने की खबरों ने न सिर्फ संगठन को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे सियासी समीकरण को भी अनिश्चितता में डाल दिया है। इस स्थिति को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि क्या पार्टी नेतृत्व इस चुनौती से उबर पाएगा या नहीं।

    मामले की जड़ में राज्यसभा के भीतर बदलता हुआ नंबर गेम है। कुल दस सांसदों में से सात के अलग रुख अपनाने की चर्चा ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। नियमों के मुताबिक यदि किसी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ किसी दूसरे दल के साथ जाते हैं, तो इसे “विलय” माना जा सकता है और उस स्थिति में उनकी सदस्यता पर तत्काल अयोग्यता लागू नहीं होती। इसी वजह से यह पूरा घटनाक्रम कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर अहम बन गया है।

    हालांकि अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सभी सात सांसदों की स्थिति एक जैसी नहीं है और कुछ नेताओं को लेकर अभी भी बातचीत जारी है। पार्टी की ओर से लगातार कोशिशें चल रही हैं कि इस टूट को रोका जाए और असंतोष को कम किया जाए। यही कारण है कि पूरा मामला अभी भी अनिश्चितता की स्थिति में बना हुआ है।

    इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा मोड़ संख्या से जुड़ा है। अगर पार्टी किसी तरह एक सांसद को भी वापस अपने पक्ष में लाने में सफल हो जाती है, तो यह आंकड़ा सात से घटकर छह हो जाएगा। ऐसी स्थिति में दो-तिहाई का गणित बिगड़ जाएगा और कथित विलय की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं। इसके साथ ही दल-बदल कानून के तहत संबंधित सांसदों की स्थिति भी खतरे में आ सकती है।

    इस राजनीतिक हलचल में कुछ प्रमुख नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, जिन्हें इस बदलाव का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इन नेताओं के फैसले ने पार्टी के भीतर असंतोष को और गहरा कर दिया है, जिससे संगठनात्मक संतुलन पर असर पड़ा है। यह संकेत भी मिलता है कि यह केवल एक अचानक लिया गया निर्णय नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही अंदरूनी असहमति का परिणाम हो सकता है।

    अब पूरा मामला आगे चलकर राज्यसभा के सभापति की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। वहीं अंतिम फैसला इस बात पर आधारित होगा कि क्या सांसदों का यह समूह कानूनी रूप से दो-तिहाई की शर्त पूरी करता है या नहीं। अगर प्रक्रिया में कोई कमी या विवाद सामने आता है, तो पूरा समीकरण पलट सकता है और स्थिति पूरी तरह बदल सकती है।

  • बंगाल चुनाव 2026 में पहले चरण के बाद सियासी गरमाहट, हिमंता का बड़ा दावा

    बंगाल चुनाव 2026 में पहले चरण के बाद सियासी गरमाहट, हिमंता का बड़ा दावा


    नई दिल्ली ।  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। Himanta Biswa Sarma ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि पहले चरण के बाद पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है और जनता का रुझान भाजपा की ओर है।

    पहले चरण के बाद BJP को बढ़त का दावा
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “पहले चरण का मतदान पूरा हो चुका है और हमें पूरा विश्वास है कि भाजपा ने मजबूत शुरुआत की है। इस बार हम असम में 100 सीटों का आंकड़ा पार करेंगे और पश्चिम बंगाल में 200 सीटें जीतेंगे।” उन्होंने इसे “शतक” और “दोहरा शतक” की जीत बताया।

    कितनी सीटों पर हुआ मतदान?
    चुनाव आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हुआ है, जबकि बाकी 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वहीं, तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में मतदान संपन्न हो चुका है। पहले चरण में कुछ जगहों पर छिटपुट हिंसा की घटनाएं सामने आईं, लेकिन इसके बावजूद 92 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो एक रिकॉर्ड माना जा रहा है। इस बीच, केंद्रीय मंत्री Dharmendra Pradhan ने भी पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व में राज्य की संस्थाएं कमजोर हुई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में बदलाव की मांग लगातार बढ़ रही है।

    जादवपुर यूनिवर्सिटी पर विवाद
    जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की टिप्पणी के बाद ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया पर धर्मेंद्र प्रधान ने सवाल उठाए और कहा कि राज्य के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को फिर से मजबूत करने की जरूरत है। पहले चरण के मतदान के बाद सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। अब नजर दूसरे चरण के मतदान और अंतिम नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।

  • पूर्व सेना प्रमुख का स्पष्टीकरण, सार्वजनिक कॉपी की प्रामाणिकता पर उठाए सवाल..

    पूर्व सेना प्रमुख का स्पष्टीकरण, सार्वजनिक कॉपी की प्रामाणिकता पर उठाए सवाल..


    नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख ने अपनी किताब से जुड़े विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जो भी चर्चा सार्वजनिक रूप से सामने आई कॉपी को लेकर हो रही है, उस पर वह कोई अंतिम राय नहीं दे सकते क्योंकि उन्होंने स्वयं अभी तक अपनी पुस्तक का अंतिम ड्राफ्ट नहीं देखा है। उनके इस बयान के बाद किताब को लेकर चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

    उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि एक लेखक के तौर पर उनके सामने जो सामग्री आई है, वह अंतिम संस्करण नहीं है। ऐसे में जो कॉपी सार्वजनिक रूप से प्रसारित की जा रही है, उसकी प्रमाणिकता पर वह कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। उनका कहना है कि बिना अंतिम रूप देखे किसी भी सामग्री को आधिकारिक मानना सही नहीं होगा।

    इस पूरे मामले में एक और अहम बात यह सामने आई है कि प्रकाशन से जुड़ी प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। प्रकाशक की ओर से भी पहले यह कहा गया था कि पुस्तक का कोई आधिकारिक और अंतिम संस्करण अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से अलग-अलग माध्यमों में जो अंश सामने आए हैं, उन्हें अंतिम सत्य मानना उचित नहीं माना जा सकता।

    विवाद की जड़ में किताब का एक कथित अंश रहा, जिसमें एक पंक्ति को लेकर अलग-अलग तरह की व्याख्याएं की जाने लगीं। इस पंक्ति को कुछ लोगों ने राजनीतिक संदर्भ में जोड़कर देखा, जिससे इस पर बहस और तेज हो गई। हालांकि पूर्व सेना प्रमुख ने इस पर साफ किया कि किताब में किसी भी स्थान पर किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सेना में ऑपरेशन के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया में जिम्मेदारी और भरोसे का संतुलन होता है, जिसे गलत तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी कथन या विचार को उसके मूल संदर्भ में समझना जरूरी होता है, न कि उसे तोड़-मरोड़कर अलग अर्थ देना।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अक्सर किसी भी विषय को अलग-अलग नजरिए से देखा जाता है, लेकिन हर बात को विवाद या राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाना सही नहीं है। उनका मानना है कि किसी भी लेखन को उसके पूरे संदर्भ और वास्तविक उद्देश्य के साथ ही समझा जाना चाहिए।

  • सीमा विवाद के बीच कूटनीतिक पहल, नेपाल के पत्रकारों की भारतीय विदेश सचिव से बातचीत..

    सीमा विवाद के बीच कूटनीतिक पहल, नेपाल के पत्रकारों की भारतीय विदेश सचिव से बातचीत..


    नई दिल्ली।भारत और नेपाल के बीच संबंधों में हाल के दिनों में कुछ मुद्दों को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है। सीमा क्षेत्रों में व्यापार और कस्टम व्यवस्था से जुड़े नए नियमों के कारण स्थानीय स्तर पर असंतोष की स्थिति देखी जा रही है। इसी बीच दोनों देशों के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है, जब नेपाल के पत्रकारों के एक समूह ने भारत के विदेश सचिव से मुलाकात की।

    इस मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों के बीच भारत-नेपाल संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बातचीत हुई। बैठक में आपसी सहयोग, विकास परियोजनाओं और भविष्य में साझेदारी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। विदेश सचिव ने इस अवसर पर दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों की मजबूती पर जोर दिया और भविष्य में सहयोग बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक दृष्टिकोण साझा किया।

    सीमा क्षेत्रों में हाल ही में लागू किए गए कस्टम नियमों के कारण कुछ स्थानों पर लोगों की दैनिक जीवनशैली पर असर पड़ा है। खासकर सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत के बाजारों पर निर्भर रहते हैं, ऐसे में नियमों में बदलाव से उनकी परेशानियां बढ़ी हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इन नियमों का उद्देश्य मुख्य रूप से अनौपचारिक व्यापार और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखना है।

    साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि व्यक्तिगत उपयोग के लिए जरूरी वस्तुओं पर किसी तरह की सख्ती नहीं की जाएगी, जिससे आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इस मुद्दे को लेकर नेपाल में अलग-अलग स्तर पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं और कुछ स्थानों पर असंतोष भी सामने आया है।

    कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में दोनों देशों के बीच लगातार संवाद और आपसी समझ बेहद जरूरी है। भारत और नेपाल के संबंध लंबे समय से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत रहे हैं, और ऐसे मुद्दों को बातचीत के माध्यम से हल किया जा सकता है।

  • उत्तराखंड में बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित, सीएम धामी ने छात्रों को दी बधाई..

    उत्तराखंड में बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित, सीएम धामी ने छात्रों को दी बधाई..


    नई दिल्ली।उत्तराखंड में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं, जिससे हजारों छात्रों और अभिभावकों में उत्साह का माहौल है। इस वर्ष कक्षा 10वीं और 12वीं के नतीजों में छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है और कुल पास प्रतिशत में भी सुधार देखने को मिला है। परिणाम जारी होने के साथ ही राज्य के टॉपर्स की सूची भी सामने आ गई है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी सफल विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता छात्रों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो छात्र इस बार अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं कर सके हैं, उन्हें निराश नहीं होना चाहिए और आगे और अधिक मेहनत के साथ प्रयास जारी रखना चाहिए।

    कक्षा 10वीं के परिणामों के अनुसार इस वर्ष कुल पास प्रतिशत 92.10 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो एक मजबूत शैक्षणिक प्रदर्शन को दर्शाता है। इस परीक्षा में छात्राओं ने एक बार फिर छात्रों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। लड़कियों का पास प्रतिशत 96.07 प्रतिशत रहा, जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 88.03 प्रतिशत दर्ज किया गया।

    कक्षा 10वीं में इस बार टॉपर्स की सूची में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है। नैनीताल जिले के रामनगर के छात्र ने 98.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं, दो छात्रों ने 98 प्रतिशत अंक के साथ संयुक्त रूप से दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि तीसरे स्थान पर 97.80 प्रतिशत अंकों के साथ एक अन्य छात्र रहा।

    इसी तरह कक्षा 12वीं के परिणामों में कुल पास प्रतिशत 85.11 प्रतिशत रहा है। यहां भी छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 88.09 प्रतिशत पास प्रतिशत हासिल किया, जबकि छात्रों का पास प्रतिशत 81.93 प्रतिशत रहा। यह अंतर इस बात को दर्शाता है कि राज्य में लड़कियों का शैक्षणिक प्रदर्शन लगातार मजबूत हो रहा है।

    इंटरमीडिएट परीक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला है। बागेश्वर और ऊधम सिंह नगर की दो छात्राओं ने संयुक्त रूप से राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है, दोनों ने 98 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। उनके प्रदर्शन को राज्य स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

  • उत्तम नगर हत्या कांड: कोर्ट ने पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने के आदेश दिए..

    उत्तम नगर हत्या कांड: कोर्ट ने पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने के आदेश दिए..


    नई दिल्ली।दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में हुए तरुण हत्या कांड से जुड़े मामले में अदालत ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए और किसी भी संभावित खतरे से उनकी रक्षा सुनिश्चित की जाए।

    यह मामला होली के दौरान हुई एक हिंसक झड़प से जुड़ा है, जिसमें 27 वर्षीय तरुण की मौत हो गई थी। घटना के बाद से ही इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और पीड़ित परिवार ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। इसी आधार पर अदालत में याचिका दाखिल कर पुलिस सुरक्षा की मांग की गई थी।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परिवार को धमकियों और संभावित खतरे की आशंका है, जिसके चलते उनकी सुरक्षा बेहद जरूरी है। अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे परिवार के साथ सीधे संपर्क में रहें और आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराएं। इसके लिए स्थानीय पुलिस अधिकारी को अपना व्यक्तिगत संपर्क नंबर परिवार को देने का आदेश दिया गया है।

    पुलिस ने अदालत को बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही बढ़ा दी गई है। इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है। साथ ही संवेदनशील इलाकों में पुलिस पिकेट भी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

    इसके अलावा सोशल मीडिया पर फैल रही भड़काऊ सामग्री पर भी कार्रवाई की गई है और बड़ी संख्या में आपत्तिजनक वीडियो हटाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ सामग्री को गंभीरता से लिया जाएगा और उस पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।

    कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि परिवार को किसी भी प्रकार का संदिग्ध या आपत्तिजनक कंटेंट मिलता है, तो वे तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें। पुलिस को ऐसे मामलों में बिना देरी के कानूनी कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।

    यह घटना 4 मार्च की है, जब होली के त्योहार के दौरान एक छोटी सी बात ने हिंसक झड़प का रूप ले लिया था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पानी के गुब्बारे से जुड़ी एक घटना के बाद दो परिवारों के बीच विवाद बढ़ गया, जो बाद में हिंसा में बदल गया और इसमें तरुण की जान चली गई।

    इस पूरे मामले ने इलाके में गहरा असर डाला है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अदालत के ताजा आदेश के बाद अब पीड़ित परिवार को अतिरिक्त सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।

  • केजरीवाल के कथित नए घर पर घमासान BJP के आरोप AAP का पलटवार

    केजरीवाल के कथित नए घर पर घमासान BJP के आरोप AAP का पलटवार


    नई दिल्ली । नई दिल्ली की सियासत में एक बार फिर ‘बंगला विवाद’ ने जोर पकड़ लिया है। अरविंद केजरीवाल के कथित नए सरकारी आवास को लेकर भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

    बीजेपी की ओर से प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ तस्वीरें जारी कर दावा किया कि ये केजरीवाल के नए बंगले की हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी के लोधी एस्टेट इलाके में मिला यह आवास बेहद आलीशान है। वर्मा ने तंज कसते हुए इसे ‘शीशमहल 2’ बताया और सवाल उठाया कि इस पर कितना खर्च हुआ और यह पैसा कहां से आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो नेता पहले सादगी की बात करते थे अब वही महंगे इलाकों में रह रहे हैं।

    इसके साथ ही बीजेपी ने कोविड काल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब दिल्ली महामारी से जूझ रही थी तब भी कथित तौर पर इस आवास का निर्माण कार्य जारी रहा। पार्टी ने इसे प्राथमिकताओं का सवाल बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।

    वहीं आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि बीजेपी द्वारा जारी की गई तस्वीरें पूरी तरह फर्जी हैं और उनका केजरीवाल के आवास से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।

    AAP का कहना है कि बीजेपी बिना तथ्य के आरोप लगा रही है और मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पूरी की गई हैं।

    फिलहाल इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी लगातार सवाल उठा रही है जबकि AAP जवाब देकर आरोपों को खारिज कर रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है क्योंकि दोनों ही दल इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने में लगे हुए हैं।

  • राज्यसभा में NDA मजबूत, AAP सांसदों के दल-बदल से दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा गठबंधन

    राज्यसभा में NDA मजबूत, AAP सांसदों के दल-बदल से दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा गठबंधन


    नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक अहम बदलाव देखने को मिला है, जहां आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के दल बदलकर भाजपा में शामिल होने के बाद राज्यसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की स्थिति काफी मजबूत हो गई है। इस घटनाक्रम ने उच्च सदन में राजनीतिक संतुलन को प्रभावित किया है और सत्ता पक्ष को दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंचा दिया है।

    वर्तमान स्थिति के अनुसार राज्यसभा में कुल 244 सदस्य हैं और किसी भी पार्टी या गठबंधन को दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए 163 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है। हालिया बदलावों के बाद एनडीए के समर्थन में सांसदों की संख्या 145 तक पहुंच गई है। हालांकि यह आंकड़ा अभी भी आवश्यक बहुमत से 18 सीट दूर है, लेकिन इसे सत्ता पक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण बढ़त माना जा रहा है।

    भाजपा की स्थिति भी इस घटनाक्रम के बाद मजबूत हुई है। पहले जहां पार्टी के पास 106 सांसद थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 113 हो गई है। इसके अलावा कुछ मनोनीत सदस्यों और निर्दलीय सांसदों के समर्थन से यह आंकड़ा और बढ़कर करीब 122 तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जो सदन के कुल सदस्यों का लगभग आधा हिस्सा है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहता है, तो आने वाले समय में सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में आसानी हो सकती है। विशेष रूप से वे संविधान संशोधन विधेयक, जिनके लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, उन पर सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।

    हाल ही में महिला आरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण झटका लगा था। उस समय सत्ता पक्ष दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था, जिससे यह विधेयक पारित नहीं हो पाया। अब राज्यसभा में बदलते समीकरणों को उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, हाल ही में शामिल हुए सांसदों का विलय राज्यसभा में उनकी मूल पार्टी के संसदीय दल के दो-तिहाई से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व होने के कारण मान्य किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह सत्ता पक्ष की स्थिति को और मजबूत करेगा और सदन में उसकी पकड़ और अधिक प्रभावी हो जाएगी।

  • केरल में सनसनी: मां की हत्या के बाद बेटा खुद पहुंचा थाने, किया आत्मसमर्पण..

    केरल में सनसनी: मां की हत्या के बाद बेटा खुद पहुंचा थाने, किया आत्मसमर्पण..


    नई दिल्ली।
    केरल के कन्नूर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। यहां एक 30 वर्षीय युवक ने अपनी ही मां की चाकू मारकर हत्या कर दी और बाद में खुद पुलिस के सामने जाकर आत्मसमर्पण कर दिया। यह घटना पेरावूर के पास कनिचर इलाके में शुक्रवार रात को हुई, जिसके बाद से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और सदमा है।

    मृतका की पहचान 53 वर्षीय गीताम्मा के रूप में हुई है, जो अपने परिवार के साथ कनिचर में रहती थीं। आरोपी बेटा क्रिस्टी घटना के बाद सीधे मोटरसाइकिल से पुलिस स्टेशन पहुंचा और वहां जाकर अपने अपराध की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह वारदात घर के अंदर उस समय हुई जब परिवार का अन्य कोई सदस्य मौजूद नहीं था।

    जानकारी के अनुसार, घटना शुक्रवार रात लगभग 8 से 9 बजे के बीच हुई। आरोपी ने अपने घर के बेडरूम में अपनी मां पर चाकू से हमला किया, जिससे उनकी गर्दन पर गंभीर चोट लगी और उनकी मौके पर ही हालत बिगड़ गई। पुलिस के पहुंचने से पहले ही स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी। बाद में महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने यह कदम कुछ लोगों द्वारा अपनी मां के बारे में कथित अपमानजनक बातें सुनने के बाद उठाया। हालांकि इस दावे की पुष्टि अभी जांच का हिस्सा है और पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। घटना के बाद आरोपी ने एक दोस्त को फोन किया और फिर बिना भागे सीधे पुलिस स्टेशन जाकर आत्मसमर्पण कर दिया।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, क्रिस्टी ने बेंगलुरु के एक कॉलेज में पढ़ाई की थी, लेकिन वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सका और बाद में घर लौट आया था। उसकी मां गीताम्मा इलाके में एक ब्यूटी पार्लर चलाती थीं और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहती थीं।

    परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि आरोपी नशे का आदी था, हालांकि पुलिस ने इस बात की पुष्टि नहीं की है। फिलहाल पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ा रही है, ताकि घटना के पीछे की असली वजह सामने लाई जा सके।

    इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है और लोग इसे पारिवारिक तनाव और मानसिक असंतुलन से जुड़ा मामला मान रहे हैं। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई जारी है।

  • BRS से बाहर होने के बाद के. कविता का बड़ा ऐलान, नई पार्टी के साथ नई जंग..

    BRS से बाहर होने के बाद के. कविता का बड़ा ऐलान, नई पार्टी के साथ नई जंग..


    नई दिल्ली। तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिला है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी और पूर्व सांसद के. कविता ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है। उन्होंने इस नई पार्टी का नाम तेलंगाना राष्ट्र समिति रखा है, जो राज्य के आंदोलनकारी इतिहास से जुड़ा हुआ नाम माना जाता है।

    यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ समय पहले उन्हें उनकी पुरानी पार्टी भारत राष्ट्र समिति से निलंबित कर दिया गया था। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद उन्हें संगठन से बाहर कर दिया गया। निलंबन के बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं, जिन पर अब उन्होंने अपनी नई पार्टी के ऐलान के साथ विराम लगा दिया है।

    नई पार्टी की घोषणा करते हुए के. कविता ने तेलंगाना के विकास से जुड़े अहम मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य को बने हुए 12 साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जनता की मूलभूत अपेक्षाएं अभी भी पूरी नहीं हो सकी हैं। उन्होंने विशेष रूप से पानी, धन और रोजगार जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि ये वही आधार थे जिन पर तेलंगाना आंदोलन खड़ा हुआ था, लेकिन आज भी कई समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी नई पार्टी का उद्देश्य शासन को जनता के और करीब लाना है। उनका कहना है कि राजनीति को जमीनी समस्याओं से जोड़ना जरूरी है, जिन्हें अक्सर बड़े राजनीतिक दल नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सभी वर्गों के विकास पर ध्यान देगी और किसी भी तरह के जाति, धर्म या समुदाय के भेदभाव से दूर रहेगी।

    राजनीतिक बयानबाजी के दौरान उन्होंने अपनी पूर्व पार्टी के साथ-साथ राज्य की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि विपक्ष की भूमिका निभाने वाली पार्टियां भी जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम रही हैं, जिससे लोगों में निराशा बढ़ी है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए कदम से तेलंगाना की राजनीति में नई हलचल पैदा हो सकती है। यह बदलाव आने वाले समय में राज्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है और सत्ता तथा विपक्ष दोनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।