Category: National

  • अमेरिका में फायरिंग घटना पर पीएम मोदी का सख्त संदेश, बोले- लोकतंत्र में हिंसा अस्वीकार्य

    अमेरिका में फायरिंग घटना पर पीएम मोदी का सख्त संदेश, बोले- लोकतंत्र में हिंसा अस्वीकार्य

    नई दिल्ली। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में उस समय अचानक तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान गोलीबारी की घटना सामने आई। यह घटना एक होटल में आयोजित डिनर कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां देश के शीर्ष नेतृत्व और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अचानक हुई इस घटना से पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और सुरक्षा व्यवस्था तुरंत सक्रिय हो गई।

    जैसे ही गोली चलने की आवाज सुनाई दी, सुरक्षा बलों ने बिना किसी देरी के कार्रवाई शुरू कर दी और मौजूद सभी महत्वपूर्ण व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। कुछ ही समय में स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया और संदिग्ध को भी मौके से पकड़ लिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमलावर अकेले ही इस घटना को अंजाम देने की कोशिश कर रहा था और उसके पास हथियार भी मौजूद थे। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गंभीरता से की जा रही है ताकि इसके पीछे की वजहों का पता लगाया जा सके।

    इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह जानकर राहत मिली कि सभी प्रमुख व्यक्ति सुरक्षित हैं। उन्होंने उनके अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना भी की।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी प्रकार की हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं की एक स्वर में निंदा की जानी चाहिए क्योंकि लोकतंत्र संवाद और विचारों के आदान-प्रदान पर आधारित होता है, न कि भय और हिंसा पर।

    इस घटना पर अन्य देशों के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और इसे बेहद गंभीर बताते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है। सभी ने इस बात पर सहमति जताई है कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा और स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती हैं।

    उधर, अमेरिकी नेतृत्व की ओर से भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी गई है और सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई की सराहना की गई है। बताया गया है कि हालात अब पूरी तरह नियंत्रण में हैं और जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं।

    फिलहाल इस पूरे मामले में जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमले के पीछे असली उद्देश्य क्या था और इसमें कोई बड़ा नेटवर्क शामिल है या नहीं। इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • ममता का दावा 100 सीटें जीतने का, अमित शाह बोले- BJP जीतेगी 110 सीटें, बंगाल में सियासी जंग तेज

    ममता का दावा 100 सीटें जीतने का, अमित शाह बोले- BJP जीतेगी 110 सीटें, बंगाल में सियासी जंग तेज


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्म है और दूसरे चरण के मतदान से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। दोनों दलों ने पहले चरण के मतदान को लेकर अलग-अलग बड़े दावे किए हैं।

    तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि पहले चरण में उनकी पार्टी ने 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बना ली है। भवानीपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि टीएमसी इस चुनाव में भारी जीत की ओर बढ़ रही है और अगर जनता का समर्थन मिला तो पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिलेगा।

    ममता बनर्जी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी चुनावी दबाव में है और उनके खिलाफ केंद्र सरकार पूरी ताकत झोंक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को कमजोर करने के लिए बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टर केंद्रीय बल और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद भाजपा उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। भवानीपुर सीट का जिक्र करते हुए ममता ने कहा कि वे इस क्षेत्र से तीन बार जीत चुकी हैं और इस बार भी जनता का भरोसा उनके साथ है।

    वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए दावा किया कि पहले चरण की 142 सीटों में से भाजपा 110 सीटों पर आगे है। मिदनापुर की रैली में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह परिणाम भाजपा के लिए बड़ी जीत का संकेत है और राज्य में परिवर्तन तय है।

    अमित शाह ने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी और राज्य को भयमुक्त बनाया जाएगा। उन्होंने ममता सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना दक्षिण कोलकाता लॉ कॉलेज की घटना और संदेशखाली में महिलाओं पर कथित अत्याचार जैसे मामलों का उल्लेख किया।

    शाह ने यह भी कहा कि महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता बनर्जी राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही हैं। इसके अलावा उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार बनने पर मतुआ समुदाय को नागरिकता देने का काम किया जाएगा।

  • मुझ पर 36 केस, ममता पर मेहरबानी क्‍यों? राहुल गांधी ने मोदी सरकार और TMC दोनों पर साधा निशाना

    मुझ पर 36 केस, ममता पर मेहरबानी क्‍यों? राहुल गांधी ने मोदी सरकार और TMC दोनों पर साधा निशाना


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हुगली जिले के सेरामपुर में आयोजित रैली में केंद्र सरकार BJP-RSS और ममता बनर्जी की TMC पर एक साथ तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने सवाल उठाया कि उनके खिलाफ 36 केस दर्ज किए गए और ED ने 55 घंटे पूछताछ की लेकिन ममता बनर्जी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    राहुल गांधी ने दावा किया कि इसका कारण यह है कि ममता बनर्जी BJP से सीधे तौर पर मुकाबला नहीं करतीं इसलिए उन्हें केंद्र से राहत मिलती है। रैली में राहुल ने कहा कि देश में दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष चल रहा है। एक ओर कांग्रेस है जो संविधान एकता और भाईचारे की बात करती है जबकि दूसरी ओर BJP है जो उनके अनुसार नफरत और हिंसा फैलाने का काम करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS और BJP समाज में विभाजन पैदा करते हैं और धर्म के नाम पर लोगों को बांटते हैं।

    कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि इसका उद्देश्य देश में प्रेम और सद्भाव का संदेश फैलाना था। वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्राओं को भारत तोड़ो यात्रा बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार देश को बांटने की राजनीति कर रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी पर हमला जारी रखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते में उन्होंने देश के हितों से समझौता किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील में कृषि छोटे उद्योग ऊर्जा क्षेत्र और देश का डेटा प्रभावित हुआ। राहुल ने यह भी कहा कि कोई भी मजबूत प्रधानमंत्री दबाव में आकर ऐसा फैसला नहीं लेता।

    ममता बनर्जी पर सवाल उठाते हुए राहुल ने अपने खिलाफ कार्रवाई का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उन पर कई राज्यों में केस चल रहे हैं उनसे लंबी पूछताछ हुई यहां तक कि उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई। इसके मुकाबले उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ न तो ED और न ही CBI ने कोई ठोस कार्रवाई की।

    बंगाल की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में नौकरी पाने के लिए TMC से जुड़ाव जरूरी हो गया है। उन्होंने हिंदुस्तान मोटर्स की बंद फैक्ट्री का उदाहरण देते हुए कहा कि जो बंगाल कभी औद्योगिक रूप से मजबूत था वह अब पिछड़ गया है।

    इसके अलावा उन्होंने शारदा और रोज वैली जैसे पोंजी घोटालों कोयला तस्करी और अवैध खनन का मुद्दा उठाया। राहुल ने आरोप लगाया कि राज्य में हर काम के लिए गुंडा टैक्स देना पड़ता है जिससे आम जनता परेशान है।

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि केसः अदालत में पेश होंगी भगवान विष्णु और अन्य देवताओं की मूर्तियां

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि केसः अदालत में पेश होंगी भगवान विष्णु और अन्य देवताओं की मूर्तियां


    मथुरा ।
    श्रीकृष्ण जन्मभूमि (Shri Krishna Janmabhoomi) बनाम शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Eidgah Mosque) मामले में भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के विश्वरूप एवं अन्य देवों की मूर्तियों के तथ्य अदालत में पेश किए जाएंगे। ये मूर्तियां समय समय पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र में कराई गई खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थीं जो इस समय मथुरा के राजकीय संग्रहालय में सुरक्षित हैं। जन्मभूमि पक्ष ने पत्र के माध्यम से इन सभी के बारे में पूरी जानकारी संग्रहालय से प्राप्त कर ली है। जन्मभूमि पक्ष इसे अपने लिए बेहद महत्वपूर्ण मानकर चल रहा है।

    मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। जन्मभूमि पक्ष यह बात रख रहा है कि जहां वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद बनी है वही क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण का वास्तविक जन्मस्थान है जबकि मस्जिद पक्ष इसका विरोध कर रहा है।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट में जन्मभूमि पक्ष वाद बिंदू तय कराने के लिए अपनी दलील पेश कर रहा है जबकि मस्जिद पक्ष ने दलील दी है कि दूसरा पक्ष पहले यह तो साबित करे कि यह आस्था का विषय है। दोनों पक्ष अपनी अपनी बात के लिए तमाम साक्ष्य जुटा रहे हैं।

    इस मामले के वादी श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने आरटीआई के माध्यम से राजकीय संग्रहालय से उन मूर्तियों की जानकारी जुटाई है जो विभिन्न समय पर इस क्षेत्र में हुई खुदाई में प्राप्त हुई हैं। वहां से विधिवत सूचना प्रेषित कर दी गई है। ऐसी सात मूर्तियां एवं स्तंभ की जानकारी दी गई जो यहां से प्राप्त हुए हैं। इनमें से तीन मूर्ति व एक स्तंभ ऐसा है जिसे हिंदू पक्ष अपने लिए बेहद महत्वपूर्ण मानकर चल रहा है।

    ये भगवान कार्तिकेय एवं अग्निदेव की, देवी गंगा एवं विश्वरूप विष्णु भगवान की हैं। अन्य भगवान बुद्ध एवं जैन तीर्थंकर ऋषभनाथ से जुड़े हैं। ये सभी कटरा केशवदेव, श्रीकृष्ण जन्मस्थान से प्राप्त हुई हैं। यह पूरा क्षेत्र कटरा केशवदेव के ही नाम से जाना जाता है व अभिलेखों में भी दर्ज है।

    हमनें संग्रहालय से रखी इन मूर्तियों के बारे में जानकारी ली है। चाहे भगवान विष्णु का विश्वरूप हो या भगवान कार्तिकेय या नदी देवी की मूर्ति, सभी यह दर्शाते हैं कि यह क्षेत्र हिंदू आस्था का केंद्र रहा है। खास तौर से भगवान कृष्ण से जुड़ा रहा है। हम ये सारे तथ्य अदालत में पेश कर रहे हैं।
    -एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह, अध्यक्ष श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास

    मामला अदालत में विचाराधीन है। इस दौरान विभिन्न साक्ष्य कोर्ट में पेश किए जाते हैं। जो भी सबूत वो कोर्ट में पेश करेंगे उसका अध्ययन कर हम अपनी दलील पेश करेंगे। पहले भी इस तरह के तथ्य पेश किए गए हैं।
    -एडवोकेट तनवीर अहमद, शाही ईदगाह मस्जिद सचिव एवं पैरोकार

  • ऊफ ये गर्मी ! दुनिया के सबसे गर्म 100 शहरों में 92 भारत के…. दिल्ली में पारा 44 डिग्री के पार

    ऊफ ये गर्मी ! दुनिया के सबसे गर्म 100 शहरों में 92 भारत के…. दिल्ली में पारा 44 डिग्री के पार


    नई दिल्ली।
    गर्मी (Heat) शुरुआत में ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। वैश्विक तापमान आंकड़ों के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों (World 100 Hottest cities) में 92 भारत (India) के हैं। इसके अलावा 6 शहर थाईलैंड और दो शहर नेपाल के हैं। अप्रैल की शुरुआत में ही दिल्ली (Delhi), मुंबई, चेन्नई और बंगलूरू जैसे शहरों में पारा 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। दिल्ली में तापमान 44.5 डिग्री दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में इसमें और वृदि्ध की आशंका जताई जा रही है।

    देश में शनिवार को सर्वाधिक तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस यूपी के बांदा का रहा। इसके बाद प्रयागराज में 45.5 डिग्री, वाराणसी में 45 डिग्री, झांसी में 44.8 डिग्री रहा। गाजियाबाद में अधिकतम तापमान 43 डिग्री रहा। कई इलाकों में तापमान सामान्य से 5 डिग्री या उससे ऊपर है, जिससे हीट स्ट्रेस की स्थिति बन रही है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में लू चलने (Scorching Heatwave) की संभावना है। उत्तर भारत में रातें भी गर्म रह सकती हैं। यह स्थिति हीट डोम जैसे हालात की ओर इशारा करती है, जिसमें गर्म हवा एक क्षेत्र में फंस जाती है और तापमान लगातार बढ़ता रहता है।


    गाजियाबाद 43 डिग्री में तपा, सबसे गर्म शहरों में यूपी के 37

    100 सबसे गर्म शहरों में यूपी के 37 शहर हैं। प. बंगाल के 18, पंजाब के सात, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के छह-छह, बिहार और ओडिशा के पांच-पांच, महाराष्ट्र के चार, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश के दो-दो शहर शामिल हैं। ज्यादातर शहरों में तापमान तापमान 42 से 45 डिग्री दर्ज किया गया।


    दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में हीटस्ट्रोक यूनिट बनी

    दिल्ली में शनिवार को पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसके चलते राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल में हीटस्ट्रोक यूनिट बनाई गई है। इसमें कूलिंग टब, 200 किलो बर्फ बनाने की मशीनें और पोर्टेबल आइस पैक भी रखे गए हैं।


    दोपहर में काम नहीं कर सकेंगे मजदूर

    उत्तर प्रदेश : आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी में दोपहर 12 से 4 बजे तक मजदूरों के काम पर रोक।
    ओडिशा : सोमवार से सभी सरकारी स्कूल बंद रहेंगे।
    केरल : लोगों से दिन में 11 से 3 बजे के बीच बाहर न निकलने की सलाह। सेल्फ लॉकडाउन अपनाने के लिए कहा।
    कर्नाटक : सभी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक यूनिट बनाने का आदेश। ये सभी यूनिट 31 जुलाई तक चालू रखी जाएंगी।
    मध्य प्रदेश : नर्मदापुरम जिले में स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है।


    धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने हल्के कपड़े पहनने की सलाह

    मौसम विभाग ने दोपहर में धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और बच्चों, बुजुर्गों व बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। सावधानी बरतने से हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

    कश्मीर में बारिश और रोहतांग में बर्फबारी
    श्रीनगर समेत कश्मीर घाटी के मैदानी इलाकों में शनिवार को रुक-रुक कर हुई बारिश से गर्मी से राहत मिली है, जबकि जोजिला दर्रे पर हल्की बर्फबारी भी हुई। वहीं, हिमाचल में रोहतांग दर्रा, कुंजम दर्रा सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई।

  • देहरादून में जनसुनवाई के दौरान सीएम धामी ने सुनी जनता की फरियाद, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

    देहरादून में जनसुनवाई के दौरान सीएम धामी ने सुनी जनता की फरियाद, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश


    नई दिल्ली। देहरादून में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर जनता से सीधा संवाद स्थापित करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान प्रदेशभर से आए लोगों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा, जिनमें कई मामलों का मौके पर ही समाधान भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों की बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक सहायता से जुड़े कई मामलों पर तत्काल संज्ञान लिया गया और समाधान की प्रक्रिया शुरू की गई।

    सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता को तेज, पारदर्शी और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी शिकायत के निपटारे में अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं होगी और हर मामले की नियमित निगरानी की जानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि जनसुनवाई केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक प्रभावी माध्यम है। इससे न केवल समस्याओं का समाधान तेजी से होता है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी सुधार आता है।

    कार्यक्रम के दौरान कई लोगों को मौके पर ही राहत मिलने से उनके चेहरों पर संतोष देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उन योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से जनता तक पहुंचे।

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि सभी मामलों को गंभीरता से लिया जाए और उनकी प्रगति पर लगातार नजर रखी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रशासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाना है।

    इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी। राज्य में लागू नई नीतियों और विकास कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की। उनका कहना था कि नई पहल से राज्य में रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

    कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी भी देखने को मिली, जहां उन्होंने सरकारी योजनाओं पर आधारित रचनात्मक प्रस्तुतियां दीं। मुख्यमंत्री ने छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां युवाओं में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ाती हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और युवा विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार कार्य कर रही है। आने वाले समय में भी जनकल्याणकारी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा।

  • नए उपाध्यक्ष के तौर पर सक्रिय हुए अशोक लाहिड़ी, पीएम से मुलाकात में विकास एजेंडे पर चर्चा..

    नए उपाध्यक्ष के तौर पर सक्रिय हुए अशोक लाहिड़ी, पीएम से मुलाकात में विकास एजेंडे पर चर्चा..

    नई दिल्ली। नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद वरिष्ठ अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी ने राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद हुई एक महत्वपूर्ण औपचारिक बैठक मानी जा रही है, जिसमें देश की आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं से जुड़े व्यापक मुद्दों पर विचार-विमर्श की संभावना रही।

    अशोक लाहिड़ी लंबे समय से भारत की आर्थिक नीति निर्माण प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं और उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। उनके अनुभव को देखते हुए नीति आयोग में उनकी नियुक्ति को सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    इस नई जिम्मेदारी के साथ नीति आयोग में कार्यशैली और प्राथमिकताओं में भी बदलाव की उम्मीद की जा रही है। सरकार का फोकस इस समय विकास, निवेश और आर्थिक सुधारों को गति देने पर है, ऐसे में लाहिड़ी की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    लाहिड़ी का करियर चार दशकों से अधिक का रहा है, जिसमें उन्होंने मुख्य आर्थिक सलाहकार और विभिन्न वैश्विक वित्तीय संस्थानों के साथ काम किया है। उनकी विशेषज्ञता खास तौर पर वित्तीय नीति और मैक्रो-इकोनॉमिक प्लानिंग में मानी जाती है।

    उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल के बीच अपनी विकास रणनीतियों को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। इस संदर्भ में नीति आयोग में उनकी भूमिका नीति निर्माण को और अधिक व्यावहारिक और डेटा आधारित बनाने में मदद कर सकती है।

    प्रधानमंत्री से उनकी यह मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे आने वाले समय की नीति दिशा और प्राथमिकताओं के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

  • AAP में बगावत पर सियासी संग्राम: 7 सांसदों के BJP में जाने पर बोले संजय सिंह, यह असंवैधानिक, सदस्यता रद्द हो

    AAP में बगावत पर सियासी संग्राम: 7 सांसदों के BJP में जाने पर बोले संजय सिंह, यह असंवैधानिक, सदस्यता रद्द हो


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की खबर के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अवैध और असंवैधानिक करार दिया है।  संजय सिंह ने कहा कि राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों का यह कदम संसदीय नियमों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति को पत्र लिखकर इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।

    पार्टी के प्रति जिम्मेदारी पर उठाए सवाल

    संजय सिंह ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें पार्टी ने अवसर और पहचान दी, उनसे अपेक्षा थी कि वे जनता और संगठन के हित में काम करेंगे। उन्होंने खासतौर पर पंजाब के संदर्भ में कहा कि इन नेताओं को राज्य और पार्टी के विस्तार में योगदान देना चाहिए था।

    सोशल मीडिया पर भी उठाया मुद्दा

    संजय सिंह ने यह भी दावा किया कि पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम और फेसबुक को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे व्हाट्सऐप और अन्य माध्यमों के जरिए पार्टी का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा में इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या वाकई इन सांसदों की सदस्यता पर कोई कार्रवाई होती है। फिलहाल इतना तय है कि यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा गरमाने वाला है।
  • AAP को एक और झटका: स्वाति मालीवाल BJP में शामिल, मोदी-शाह की तारीफ कर केजरीवाल पर जमकर किए हमले

    AAP को एक और झटका: स्वाति मालीवाल BJP में शामिल, मोदी-शाह की तारीफ कर केजरीवाल पर जमकर किए हमले


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी को एक और बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। करीब दो दशक पुराने रिश्ते को खत्म करते हुए उन्होंने इस फैसले के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब एक दिन पहले ही राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने पहले ही संकेत दिए थे कि पार्टी के कुछ और सांसद भी जल्द पाला बदल सकते हैं, जिस पर अब मालीवाल के फैसले से मुहर लग गई है। भाजपा में शामिल होने के बाद स्वाति मालीवाल ने कहा कि उन्होंने यह कदम किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक सोच और विश्वास के आधार पर उठाया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जो लोग सकारात्मक और रचनात्मक राजनीति करना चाहते हैं, वे भाजपा से जुड़ें।

    केजरीवाल पर तीखे आरोप

    इस दौरान स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वह 2006 से उनके साथ थीं और हर आंदोलन में सहयोग किया, लेकिन उन्हें ही अपने घर में प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। मालीवाल ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने आवाज उठाई तो उन पर दबाव बनाया गया और एफआईआर वापस लेने के लिए धमकाया गया। उन्होंने केजरीवाल को “महिला विरोधी” बताते हुए यह भी कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्हें संसद में बोलने का अवसर तक नहीं दिया गया।

    मोदी-शाह की तारीफ

    स्वाति मालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों और फैसलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के विकास और बड़े निर्णयों में इनका नेतृत्व महत्वपूर्ण रहा है। कुल मिलाकर, AAP से लगातार हो रहे दलबदल ने दिल्ली की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले समय में इसके और असर देखने को मिल सकते हैं।

  • KYC प्रक्रिया में बड़ा बदलाव संभव, वित्त मंत्री ने आसान और एकीकृत सिस्टम की उठाई मांग..

    KYC प्रक्रिया में बड़ा बदलाव संभव, वित्त मंत्री ने आसान और एकीकृत सिस्टम की उठाई मांग..


    नई दिल्ली।देश के वित्तीय ढांचे को अधिक सुगम और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के प्रयासों के बीच केवाईसी प्रक्रिया में सुधार की जरूरत एक बार फिर प्रमुखता से सामने आई है। एक अहम कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने इस विषय पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था आम नागरिकों के लिए अनावश्यक रूप से जटिल बन गई है। उन्होंने संकेत दिया कि अब समय आ गया है कि इस प्रक्रिया को सरल, तेज और एक समान बनाया जाए, ताकि लोगों को बार-बार एक ही जानकारी देने की परेशानी से राहत मिल सके।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग वित्तीय प्लेटफॉर्म पर बार-बार केवाईसी कराने की बाध्यता लोगों के लिए असुविधाजनक है। इस कारण न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि कई बार प्रक्रिया पूरी करने में अनावश्यक देरी भी होती है। ऐसे में एक ऐसा सिस्टम विकसित करने की जरूरत है, जो हर प्लेटफॉर्म पर समान रूप से मान्य हो और उपयोग में सहज हो।

    इस दिशा में उन्होंने Securities and Exchange Board of India से आग्रह किया कि वह अन्य नियामकों के साथ समन्वय स्थापित कर एक साझा ढांचा तैयार करे। उनका मानना है कि यदि एकीकृत केवाईसी प्रणाली लागू होती है, तो इससे वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

    तेजी से बदलते वित्तीय माहौल को देखते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अब नियमों को नए सिरे से सोचने की जरूरत है। पारंपरिक तरीके से केवल समस्या आने के बाद नियम बनाने के बजाय, संभावित खतरों का पहले से आकलन करना जरूरी है। इससे न केवल जोखिम कम होंगे, बल्कि बाजार की स्थिरता भी बनी रहेगी।

    उन्होंने विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि ये आने वाले समय की बड़ी चुनौतियां हैं। इनसे निपटने के लिए नियमों को सख्त बनाने के साथ-साथ उन्हें लचीला भी रखना होगा, ताकि नवाचार पर रोक न लगे और सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।

    इसके अलावा उन्होंने सुझाव दिया कि नीतियां बनाते समय आम लोगों और विशेषज्ञों की राय को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे नियम अधिक संतुलित और व्यवहारिक बनेंगे, जो बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को ढाल सकें।

    वित्तीय स्थिति के व्यापक परिप्रेक्ष्य में उन्होंने यह भी बताया कि देश की मजबूत आर्थिक नींव और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार नीति निर्माण में लचीलापन प्रदान करते हैं। इससे सरकार को आर्थिक विकास को गति देने और आवश्यक क्षेत्रों में निवेश बनाए रखने में मदद मिलती है।

    समग्र रूप से देखा जाए तो केवाईसी प्रक्रिया को आसान और एकीकृत बनाने की पहल केवल एक सुधारात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह पूरे वित्तीय तंत्र को अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। आने वाले समय में इस दिशा में उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि आम नागरिकों को कितनी राहत मिलती है और वित्तीय सेवाएं कितनी सुलभ बन पाती हैं।