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  • हीटवेव से बचाव के लिए दिल्ली में बड़े कदम, स्कूलों में लागू होंगे नए सुरक्षा नियम..

    हीटवेव से बचाव के लिए दिल्ली में बड़े कदम, स्कूलों में लागू होंगे नए सुरक्षा नियम..


    नई दिल्ली। दिल्ली में गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और तापमान में हो रही तेजी से बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भीषण गर्मी और हीटवेव की स्थिति को देखते हुए अब स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में प्रशासन की ओर से नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को लू और गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से सुरक्षित रखना है।

    नए निर्देशों के अनुसार सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को 2 मई तक अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि स्कूलों ने हीटवेव से बचाव के लिए तय किए गए सभी सुरक्षा उपायों को लागू किया है या नहीं। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल परिसर में छात्रों के लिए साफ और सुरक्षित पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध हो।

    स्कूलों में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक वॉटर बेल सिस्टम को लागू करना है। इस व्यवस्था के तहत हर 45 से 60 मिनट में छात्रों को पानी पीने का अनिवार्य ब्रेक दिया जाएगा, ताकि शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या को रोका जा सके। यह कदम गर्मी के दौरान बच्चों की सेहत को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

    इसके अलावा स्कूलों को अपनी दैनिक समय-सारणी में भी बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। तेज गर्मी के समय बच्चों को लंबे समय तक धूप में रहने से बचाने के लिए आउटडोर असेंबली को कम किया जाएगा या फिर उसे इनडोर आयोजित किया जाएगा। साथ ही खेलकूद और अन्य बाहरी गतिविधियों को फिलहाल रोकने या सीमित करने की सलाह दी गई है।

    छात्रों को जागरूक करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत स्कूलों में छोटी-छोटी जानकारी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बच्चों को हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों और प्राथमिक उपचार के बारे में बताया जाएगा। इससे बच्चे न केवल खुद सतर्क रहेंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरों की भी मदद कर सकेंगे।

    निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बडी सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिसमें छात्रों को जोड़ियों में रखा जाएगा। इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी छात्र को कमजोरी, चक्कर या पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें, तो उसका साथी तुरंत शिक्षकों को सूचित कर सके।

    इसके साथ ही स्कूलों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना गर्मी से जुड़ी जरूरी जानकारी और सावधानियों को माता-पिता तक पहुंचाएं, ताकि घर और स्कूल दोनों जगह बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। स्कूल परिसर में भी सावधानी से संबंधित पोस्टर और सूचना सामग्री लगाई जाएगी, जिससे छात्रों में जागरूकता बनी रहे।

  • Heatwave Alert: शरीर कितनी गर्मी झेल सकता है? बढ़ते तापमान में बड़ा सवाल

    Heatwave Alert: शरीर कितनी गर्मी झेल सकता है? बढ़ते तापमान में बड़ा सवाल


    नई दिल्ली।देश के कई हिस्सों में गर्मी ने एक बार फिर अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई राज्यों में हालात ऐसे हैं कि दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इस बीच लू का असर भी तेज हो गया है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। ऐसे माहौल में सबसे अहम सवाल यह उठता है कि आखिर इंसानी शरीर कितनी गर्मी सह सकता है और कब यह सीमा टूटने लगती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इंसानी शरीर की गर्मी सहने की क्षमता सिर्फ तापमान पर निर्भर नहीं करती, बल्कि हवा में मौजूद नमी भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। इसे समझने के लिए “वेट बल्ब तापमान” की अवधारणा का उपयोग किया जाता है। यह बताता है कि शरीर पसीने के जरिए खुद को कितनी प्रभावी तरह से ठंडा कर सकता है। सामान्य तौर पर पहले माना जाता था कि इंसान लगभग 35 डिग्री सेल्सियस तक के वेट बल्ब तापमान को सहन कर सकता है, लेकिन नई समझ के अनुसार यह सीमा लगभग 30 से 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास मानी जाती है। इससे अधिक होने पर शरीर की प्राकृतिक ठंडा करने की प्रक्रिया कमजोर पड़ने लगती है।

    नमी वाली गर्मी को सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसमें पसीना शरीर से जल्दी वाष्पित नहीं हो पाता। जब पसीना सूख नहीं पाता तो शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और अंदरूनी तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। यही कारण है कि कम तापमान होने के बावजूद अधिक नमी वाली जगहों पर गर्मी ज्यादा असहनीय महसूस होती है।

    जब शरीर का तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच जाता है, तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। इस अवस्था को हीट स्ट्रोक कहा जाता है, जिसमें शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला तंत्र पूरी तरह से प्रभावित हो जाता है। इसके शुरुआती संकेतों में चक्कर आना, सिर दर्द, भ्रम की स्थिति, तेज कमजोरी और घबराहट शामिल होते हैं। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।

    तेज गर्मी का असर केवल बाहरी शरीर पर ही नहीं, बल्कि अंदरूनी अंगों पर भी पड़ता है। दिमाग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है, जिससे व्यक्ति मानसिक भ्रम या बेहोशी की स्थिति में जा सकता है। दिल को भी सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शरीर पर तनाव बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर शरीर का संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।

    ऐसे मौसम में सावधानी बेहद जरूरी हो जाती है। दोपहर के समय धूप में निकलने से बचना चाहिए, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए और शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करनी चाहिए। हल्के कपड़े पहनना, छांव में रहना और शरीर में पानी की कमी न होने देना जरूरी है। साथ ही ज्यादा मेहनत वाले काम गर्मी के समय से बचकर करने चाहिए।

    बढ़ती गर्मी और लू के इस दौर में जागरूक रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। समय पर सावधानी अपनाकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है और शरीर को इस बढ़ते तापमान के खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • Uttarakhand Board Result 2026 जारी 10वीं में 98% पास 12वीं में लड़कियों का जलवा

    Uttarakhand Board Result 2026 जारी 10वीं में 98% पास 12वीं में लड़कियों का जलवा


    नई दिल्ली । Uttarakhand Board of School Education ने वर्ष 2026 के लिए 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस साल करीब 2.15 लाख से ज्यादा छात्र इन परीक्षाओं में शामिल हुए थे और कुल मिलाकर परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं।

    10वीं कक्षा का रिजल्ट इस बार बेहद शानदार रहा है। कुल 98.20 प्रतिशत छात्र परीक्षा में सफल हुए हैं जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। टॉपर्स की बात करें तो अक्षत गोपाल ने 98.20 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं ईशांत कोठारी और भूमिका ने 98 प्रतिशत के साथ दूसरा स्थान हासिल किया जबकि योगेश जोशी 97.80 प्रतिशत अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

    12वीं कक्षा के परिणामों में भी अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला है लेकिन इस बार खास बात यह रही कि लड़कियों ने बाजी मार ली। कुल पास प्रतिशत 85.11 रहा जिसमें लड़कियों का पास प्रतिशत 88.09 और लड़कों का 81.93 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके अलावा गीतिका पंत और सुशीला ने 98 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉपर्स की सूची में अपना नाम दर्ज कराया।

    रिजल्ट देखने के लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट ubse uk gov in और uaresults nic in पर जाकर आसानी से अपना परिणाम चेक कर सकते हैं। इसके लिए छात्रों को 10वीं या 12वीं के रिजल्ट लिंक पर क्लिक कर अपना रोल नंबर दर्ज करना होगा जिसके बाद स्क्रीन पर उनका परिणाम दिखाई देगा।

    अगर वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक के कारण दिक्कत आती है तो छात्र SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं। 10वीं के छात्र UK10 रोल नंबर लिखकर 5676750 पर भेज सकते हैं जबकि 12वीं के छात्र UK12 रोल नंबर लिखकर इसी नंबर पर SMS भेजकर अपना परिणाम जान सकते हैं।

    इसके अलावा DigiLocker के माध्यम से भी छात्र अपनी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें ऐप या वेबसाइट पर मोबाइल नंबर के जरिए लॉगिन करना होगा।

    इस साल की परीक्षा 21 फरवरी से 20 मार्च 2026 के बीच आयोजित की गई थी जबकि प्रैक्टिकल परीक्षाएं 16 जनवरी से 15 फरवरी तक हुई थीं। कुल मिलाकर इस बार का रिजल्ट छात्रों के लिए काफी सकारात्मक रहा है जहां 10वीं में रिकॉर्ड पास प्रतिशत और 12वीं में लड़कियों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है।

  • IMD की चेतावनी लू का कहर शरीर कितनी गर्मी सह सकता है समझना जरूरी

    IMD की चेतावनी लू का कहर शरीर कितनी गर्मी सह सकता है समझना जरूरी


    नई दिल्ली। देश में गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। India Meteorological Department (IMD) ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों में लू (Heatwave) का अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।

    सिर्फ तापमान नहीं, नमी भी है बड़ा कारण
    विशेषज्ञों के अनुसार, इंसान का शरीर सिर्फ तापमान से नहीं बल्कि गर्मी और नमी के मेल से प्रभावित होता है। इसे “वेट बल्ब तापमान” कहा जाता है। पहले माना जाता था कि इंसान 35°C तक का वेट बल्ब तापमान सह सकता है, लेकिन नई रिसर्च के मुताबिक यह सीमा करीब 30–31°C के आसपास है। इससे ज्यादा होने पर शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता।

    नमी वाली गर्मी क्यों ज्यादा खतरनाक?
    सूखी गर्मी में पसीना जल्दी सूखकर शरीर को ठंडा करता है, लेकिन नमी ज्यादा होने पर पसीना सूख नहीं पाता। इस वजह से शरीर जल्दी गर्म हो जाता है कम तापमान में भी खतरा बढ़ जाता है जब शरीर का तापमान 40°C के पार चला जाता है, तो हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में शरीर का कूलिंग सिस्टम काम करना बंद कर देता है। इसके लक्षण हो सकते हैं चक्कर आना, भ्रम या घबराहट बेहोशी समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

    शरीर के अंदर क्या होता है असर?
    तेज गर्मी का असर शरीर के जरूरी अंगों पर भी पड़ता है दिमाग में सूजन और भ्रम दिल पर ज्यादा दबाव शरीर का तापमान कंट्रोल सिस्टम फेल बढ़ती गर्मी और लू के बीच सावधानी बेहद जरूरी है। धूप में कम निकलें पानी ज्यादा पिएं शरीर को ठंडा रखें गर्मी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, इसलिए समय रहते सतर्क रहना जरूरी है।

  • गुजरात के सूरत में मुस्लिम युवक ने की महिला से छेड़छाड़, गुस्साई भीड़ ने आरोपी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

    गुजरात के सूरत में मुस्लिम युवक ने की महिला से छेड़छाड़, गुस्साई भीड़ ने आरोपी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

    सूरत। गुजरात की डायमंड सिटी नाम से मशहूर सूरत में कुछ देर पहले छेड़छाड़ की एक घटना को लेकर जमकर हंगामा हुआ. शहर के व्यस्त इलाके में एक मुस्लिम युवक ने महिला से छेड़छाड़ की. पीड़िता की चीख-पुकार सुन मौके पर मौजूद भीड़ ने आरोपी युवक को जमकर पीटा. शिकायत के बाद पुलिस ने एक्शन लेते हुए फौरन आरोपी को गिरफ्तार किया है. इस घटना से आक्रोशित भीड़ ने छेड़छाड़ के आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने के लिए अल्थान इलाके में थाने के बाहर खूब हंगामा और प्रदर्शन किया.
    स्थानीय लोगों ने थाने के बाहर नारेबाजी की. इस दौरान, उनकी पुलिस के साथ झड़प हुई. इसके बाद, पुलिस ने लोगों को मौके से खदेड़ा. थाने का घेराव करने आए लोगों में महिला और पुरुष दोनों शामिल थे. लोग अपने हाथों में लाठी और डंडे लिए नजर आए.
    आरोपी को पीटा
    जब ये घटना सामने आई तो लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया. इसके बाद 112 नंबर पर कॉल करके पुलिस को बुलाया गया. जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक ये खबर दावानल की तरह पूरे इलाके में फैल चुकी थी. इस वजह से बहुत सारे लोग वहां आ गए थे. इसके बाद, भीड़ ने पुलिस वैन से उतारकर आरोपी को पीटा. हालात बिगड़े तो और फोर्स बुलानी पड़ी और तब जाकर आरोपी को गिरफ्तार किया गया.
    हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में
    भारी संख्या में पुलिस फोर्स इलाके में तैनात की गई है. ACP, सूरत ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है. हम लोगों से अपील करते हैं कि कृपया कानून-व्यवस्था अपने हाथ न लें. पुलिस अपना काम कर रही है. हम दोषी को कड़ी सजा देंगे.
    विधायक ने की शांति की अपील

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधायक मनु पटेल भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने भी लोगों से शांति बहाल करने की अपील की. उन्होंने कानून-व्यवस्था का पालन करने की अपील की. इस घटना के मद्देनजर, मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया है.

    क्राइम ब्रांच की टीम ने भी पूरे इलाके को राउंड अप किया. दूसरे थानों से भी पुलिस के जवान यहां पहुचे हैं.
    सूरत में ऐसा ही एक और घिनौना मामला

    सूरत की सरौली पुलिस ने इस घटना से पहले 21 वर्षीय मोजबीर को तीन साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में दबोचा था. बिहार निवासी आरोपी सरौली इलाके की एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करता था. बीते गुरुवार दोपहर जब पीड़िता की मां कुछ काम से बाहर गई थी, तब शेख ने उसे अगवा कर लिया और छत पर बने बाथरूम में ले गया. वहां उसने पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया. इससे पहले कि वह कोई और जघन्य अपराध कर पाता, पीड़िता की मां उसे ढूंढते हुए छत पर पहुंच गई. स्थानीय लोग तुरंत इकट्ठा हो गए और शेख की पिटाई कर दी. सरौली पुलिस को सूचना दी गई और शेख के खिलाफ बलात्कार के मामले में बीएनएस (बाल यौन उत्पीड़न अधिनियम) और बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया.

  • सांप से भिड़ गया कुत्ता, गंवाई जान, लेकिन मासूम छात्रों को बचा लिया; गांववालों ने किया अंतिम संस्कार

    सांप से भिड़ गया कुत्ता, गंवाई जान, लेकिन मासूम छात्रों को बचा लिया; गांववालों ने किया अंतिम संस्कार

    मयूरभंज। ओडिशा के मयूरभंज जिले में एक कुत्ते की बहादुरी की खूब चर्चा हो रही है। इसने अपनी जान पर खेलकर स्कूल में पढ़ने वाले 30 मासूम छात्रों की जान बचाई है। असल में यहां पर एक विषैला सांप निकल आया था। लेकिन यह कुत्ता, सांप से भिड़ गया और सभी बच्चों को बचा लिया। उसकी इस बहादुरी से प्रेरित होकर गांव के लोगों ने उसे काली नाम दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला ढिराकुला गांव का है और घटना सुबह 8.30 बजे हुई।
    छात्रों के बीच जा पहुंचा सांप
    जानकारी के मुताबिक श्री जगन्नाथ शिशु विद्या मंदिर में किंडरगार्टन स्कूल में छात्र, परिसर के बाहर जुटे हुए थे। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि इसी दौरान एक विषैला सांप वहां पहुंचा, जहां पर छात्र बैठे हुए थे। अभी वहां मौजूद लोग सोच ही रहे थे कि वहां बैठे मासूम छात्रों को कैसे बचाया जाए, तभी यह कुत्ता वहां पहुंच गया। इसके बाद उसने मोर्चा संभाल लिया और छात्रों को बचा लिया। वहां पर मौजूद लोगों ने बताया कि सांप के बार-बार हमले के बावजूद काली डरा नहीं और मोर्चे पर डटा रहा।

    सांप की हो गई मौत
    इस दौरान कुत्ता के हमलों से सांप की मौत हो गईं। वहीं, कुत्ता को भी सांप ने मुंह में काट लिया था। इसके चलते बाद में कुत्ता की मौत हो गई। जगहों पर काट लिया था। स्थानीय लोग काली की वीरता से काफी ज्यादा प्रभावित हुए। तमाम लोगों ने बताया कि इससे पहले इस कुत्ता को किसी ने देखा नहीं था। घटना के बाद सबने जुटकर उसे अंतिम विदाई दी। काली के शव को सफेद कपड़ों से ढंका गया और चारों तरफ फूल बिखेरे गए। इसके बाद उसके शव को एक ट्रॉली पर रखकर गांव में घुमाया गया।

  • AAP को सबसे बड़ा झटका, राघव चड्ढा नहीं, इस सांसद के जाने से हिला केजरीवाल का पूरा संगठन

    AAP को सबसे बड़ा झटका, राघव चड्ढा नहीं, इस सांसद के जाने से हिला केजरीवाल का पूरा संगठन

    नई दिल्ली। 24 अप्रैल 2026 आम आदमी पार्टी के इतिहास में एक बड़े राजनीतिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है। यह दिन सिर्फ राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने के कारण नहीं, बल्कि इसलिए अहम बन गया क्योंकि अरविंद केजरीवाल की टीम में पहली बार इतनी बड़ी टूट देखने को मिली। पार्टी का संसदीय दल बिखर गया और बागी गुट ने एक तिहाई सांसदों के साथ भाजपा में विलय कर लिया।

    हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम में सबसे बड़ा नुकसान संदीप पाठक के जाने से हुआ है। उनकी भूमिका सिर्फ एक सांसद की नहीं, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की रीढ़ के रूप में देखी जाती थी।

    साल 2022 में जब आम आदमी पार्टी ने हरभजन सिंह और अशोक मित्तल जैसे चेहरों को राज्यसभा भेजा, तब सबसे ज्यादा चर्चा संदीप पाठक को लेकर हुई थी, क्योंकि वे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते थे। लेकिन पर्दे के पीछे उनकी भूमिका बेहद प्रभावशाली थी, जिसे पहचान देते हुए उन्हें उच्च सदन में भेजा गया था।

    2016 में पार्टी से जुड़ने वाले संदीप पाठक ने संगठन के भीतर तेजी से अपनी जगह बनाई। उनकी सार्वजनिक उपस्थिति भले कम रही, लेकिन पार्टी की रणनीति और विस्तार में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई। यही वजह रही कि जब तीन राज्यसभा सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी छोड़ने का ऐलान किया, तो सबसे बड़ा झटका संदीप पाठक के फैसले से लगा।

    पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, स्वाति मालीवाल या राघव चड्ढा के जाने की आशंका पहले से थी, लेकिन संदीप पाठक का जाना अप्रत्याशित रहा। वहीं अशोक मित्तल और हरभजन सिंह के रुख में बदलाव को उतना चौंकाने वाला नहीं माना गया।

    रणनीति के मास्टरमाइंड थे पाठक
    संदीप पाठक को 2022 में संगठन महासचिव बनाया गया था और वे पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते थे। पंजाब में पार्टी की जीत के पीछे उनकी रणनीति को अहम माना जाता है। इसके अलावा गोवा, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चुनावी रणनीति तैयार करने में भी उनकी बड़ी भूमिका रही। उनकी अहमियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे, तब उनसे मिलने के लिए सुनीता केजरीवाल और बिभव कुमार के साथ संदीप पाठक को ही भेजा गया था।

    कैसे जीता भरोसा
    संदीप पाठक ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत आम आदमी पार्टी में दिल्ली डायलॉग कमीशन से की थी, जहां वे आशीष खेतान के साथ काम करते थे। अपनी रणनीतिक समझ और संगठन क्षमता के दम पर उन्होंने जल्दी ही केजरीवाल का भरोसा जीत लिया और पार्टी में राष्ट्रीय संयोजक के बाद सबसे अहम पद तक पहुंचे।

    राघव चड्ढा का जाना क्यों कम असरदार
    हालांकि राघव चड्ढा की लोकप्रियता आम जनता में ज्यादा रही है, लेकिन पिछले डेढ़ साल में उनकी सक्रियता पार्टी में कम हो गई थी। वे पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी के सदस्य जरूर थे, लेकिन पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी लगभग खत्म हो चुकी थी। ऐसे में उनका अलग होना अपेक्षित माना जा रहा था।

  • उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में प्रचंड गर्मी से लोग बेहाल …. अगले 4 दिन हीटवेव का अलर्ट

    उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में प्रचंड गर्मी से लोग बेहाल …. अगले 4 दिन हीटवेव का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India) के मैदानी भागों और मध्य भारत (Central India) में प्रचंड गर्मी (Extreme heat.) ने कोहराम मचा दिया है। आसमान से बरसती आग और औद्योगिक इकाइयों व वाहनों से फैलते प्रदूषण ने दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR.) समेत बड़े शहरों में दुश्वारियां और बढ़ा दी हैं। ज्यादातर इलाकों में लू चल रही है और सुबह 10 बजे के बाद से ही घरों से निकलना मुश्किल हो गया है।

    अभी तीन से चार दिन यही स्थित बनी रहने और लू चलने की प्रबल संभावना है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम हिमालयी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर में गरज-चमक के साथ बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से मौसम खुशनुमा बना हुआ है।

    इन राज्यों में चलेगी लू, नहीं मिलेगी गरमी से राहत
    भारतीय मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में पिछले कई दिनों से लू चल रही है। इससे लू की स्थिति और भी गंभीर हो गई। आईएमडी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, असम, अरुणाचल, मणिपुर, कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर बारिश और तेज हवाएं चलने से लोगों को गर्मी से राहत भी मिली।


    गरमी बढ़ाने वाला अल नीनो इस साल फिर ढाएगा कहर

    संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि पिछली बार दुनिया का तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाली मौसमी घटना अल नीनो के इस साल 2026 के मध्य में फिर से लौटने की उम्मीद है। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र की मौसम एवं जलवायु एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा कि आगामी मई से जुलाई के बीच अल नीनो के हालात बनने के पूरे आसार हैं और इसके शुरुआती संकेत भी दिखने लगे हैं।

    यह मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सतह के तापमान को बढ़ाती है। इससे हवाओं, दबाव और वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन आता है। मौसम की स्थिति अल नीनो और उसके विपरीत ला नीना और सामान्य स्थिति के बीच बदलती रहती है। पिछले अल नीनो के कारण 2023 अब तक का दूसरा सबसे गर्म साल और 2024 अब तक का सबसे गर्म साल बना।


    भीषण गर्मी की चपेट में यूपी

    उत्तर प्रदेश में प्रचंड गर्मी अपने पूरे रंग में है। शुक्रवार को प्रदेश के ज्यादातर इलाके भीषण गर्मी के चपेट में रहे। तपिश के प्रकोप से अब जनजीवन और लोगों का कामकाज प्रभावित होने लगा है। प्रयागराज, वाराणसी, हरदोई, आगरा, मेरठ,अलीगढ़ और शाहजहांपुर जैसे शहरों भयानक लू के थपेड़ों का प्रकोप रहा और दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। 45.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ प्रयागराज प्रदेश में सर्वाधिक गर्म रहा। वहीं 44.3 डिग्री, बांदा और हमीरपुर में 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।


    तेजी से बढ़ रहा समुद्री सतह का तापमान

    डब्ल्यूएमओ ने कहा कि उसके नवीनतम मासिक वैश्विक मौसमी जलवायु अपडेट में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो मई-जुलाई की शुरुआत में अल नीनो की स्थिति की संभावित वापसी की तरफ इशारा करता है। पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि अगले तीन महीनों में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहेगा।

    डब्ल्यूएमओ ने कहा कि हालांकि, जलवायु परिवर्तन से अल नीनो घटनाओं की तीव्रता नहीं बढ़ती है, लेकिन यह इससे जुड़े असर को बढ़ा सकता है, क्योंकि गर्म महासागर और वायुमंडल से लू और भारी वर्षा जैसी चरम मौसम घटनाओं के लिए ऊर्जा और नमी की उपलब्धता बढ़ जाती है।़

  • World Malaria Day: मलेरिया के साथ दूसरी बीमारियों का बढ़ रहा खतरा, मल्टी-इंफेक्शन ने बढ़ाई इलाज की चुनौती

    World Malaria Day: मलेरिया के साथ दूसरी बीमारियों का बढ़ रहा खतरा, मल्टी-इंफेक्शन ने बढ़ाई इलाज की चुनौती

    नई दिल्ली। विश्व मलेरिया दिवस के मौके पर सामने आई एक अहम जानकारी ने मलेरिया को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर बुखार को मलेरिया मानकर इलाज शुरू कर देना कई बार जोखिम भरा साबित हो सकता है। दिल्ली के अस्पतालों में किए गए अध्ययन में पाया गया है कि कई मरीजों में मलेरिया के साथ डेंगू, चिकनगुनिया या टाइफाइड जैसी बीमारियां भी एक साथ मौजूद हैं। यह मल्टी-इंफेक्शन डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

    वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल में जुलाई 2022 से नवंबर 2023 के बीच किए गए अध्ययन में 4259 बुखार के मरीजों की जांच की गई। इनमें से 87 मरीज (करीब 2.04%) मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें लगभग 45 प्रतिशत मरीज ऐसे थे, जिनमें मलेरिया के साथ अन्य संक्रमण भी मौजूद थे, जिससे बीमारी की पहचान और उपचार दोनों जटिल हो गए।

    अध्ययन में Plasmodium vivax और Plasmodium falciparum दोनों तरह के संक्रमण दर्ज किए गए। मरीजों में ठंड लगना (80.46%), पीलिया (51.72%), मांसपेशियों में दर्द (56.32%), पूरे शरीर में दर्द (54.02%) और लीवर व स्प्लीन का बढ़ना (64.37%) प्रमुख लक्षण पाए गए। कुछ गंभीर मामलों में एनीमिया भी बड़ी जटिलता के रूप में सामने आया।

    माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रो. डॉ. मोनिका मटलानी के अनुसार, जब मलेरिया अन्य संक्रमणों के साथ होता है तो लक्षण आपस में मिल जाते हैं। इससे सही समय पर बीमारी की पहचान करना कठिन हो जाता है और इलाज में देरी हो सकती है। उन्होंने बताया कि जुलाई से सितंबर के बीच मलेरिया का खतरा सबसे ज्यादा रहता है और पुरुषों में संक्रमण का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक देखा गया है।

    वहीं All India Institute of Medical Sciences के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल के अनुसार, दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया सभी मच्छरों से फैलते हैं, जबकि टाइफाइड दूषित पानी और खराब स्वच्छता से जुड़ा है। ऐसे में इन बीमारियों को अलग-अलग पहचानना चुनौतीपूर्ण हो जाता है और कई मामलों में एक से अधिक संक्रमण एक साथ पाए जाते हैं।

    प्रमुख लक्षण:-
    तेज बुखार के साथ ठंड और कंपकंपी
    अत्यधिक पसीना आना
    सिरदर्द और कमजोरी
    मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द
    उल्टी या मतली
    भूख कम लगना
    चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना
    गंभीर स्थिति में पीलिया

    बचाव के उपाय:-
    मच्छरदानी का इस्तेमाल करें
    घर के आसपास पानी जमा न होने दें
    पूरी बाजू के कपड़े पहनें
    बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

  • बंगाल चुनाव: नैरेटिव vs बूथ मैनेजमेंट की जंग, अब 142 सीटों पर किसकी रणनीति पड़ेगी भारी?

    बंगाल चुनाव: नैरेटिव vs बूथ मैनेजमेंट की जंग, अब 142 सीटों पर किसकी रणनीति पड़ेगी भारी?


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान ने सियासी माहौल को चरम पर पहुंचा दिया है। इस बार का चुनाव कई मायनों में अलग नजर आ रहा है, जहां नैरेटिव बनाने में भाजपा सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस से आगे दिख रही है, वहीं जमीनी स्तर पर बूथ मैनेजमेंट अब भी तृणमूल की सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है।

    पहले चरण में एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि भाजपा के बूथ पहले की तरह खाली नहीं रहे। इससे मुकाबला अब सिर्फ वोटों तक सीमित न रहकर नैरेटिव और जमीनी पकड़ के बीच संतुलन का हो गया है। पहले चरण के बाद दोनों दलों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। भाजपा जहां दूसरे चरण की 142 सीटों पर अपने बूथ प्रबंधन को और मजबूत करने में जुटी है, वहीं तृणमूल अपने मजबूत नेटवर्क के सहारे भाजपा के नैरेटिव को चुनौती देने की तैयारी में है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हुगली में नाव चलाकर आत्मविश्वास दिखाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए भाजपा और केंद्रीय नेतृत्व पर हमले तेज कर दिए हैं, ताकि जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ और नैरेटिव दोनों को मजबूत किया जा सके।

    बंपर मतदान: किसके पक्ष में संकेत?

    पहले चरण में करीब 93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक है। 2011 में 84.7 प्रतिशत और 2021 में लगभग 82 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बढ़े हुए मतदान को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं। भाजपा इसे सत्ता विरोधी लहर का संकेत मान रही है, जबकि तृणमूल इसे महिला और ग्रामीण वोटरों का समर्थन बता रही है।

    दावों की जंग: रणनीति या अतिरेक?

    पहले चरण के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 152 में से 110 सीटें जीतने का दावा किया, जिसे भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने बढ़ाकर 125 सीटों तक पहुंचा दिया। राजनीतिक विश्लेषक इन दावों को काडर का मनोबल बढ़ाने की रणनीति मान रहे हैं। जवाब में ममता बनर्जी ने भी इसे बंगाल की अस्मिता और अपनी योजनाओं के समर्थन के रूप में पेश किया है।

    असली चुनौती: शहरी वोटर को बूथ तक लाना

    दूसरे चरण की 142 सीटों में कोलकाता और आसपास का शहरी इलाका निर्णायक भूमिका निभाएगा। यहां पारंपरिक रूप से मतदान प्रतिशत कम रहता है। 2021 में जहां राज्य का औसत मतदान 82 प्रतिशत था, वहीं कोलकाता में यह करीब 62-63 प्रतिशत ही रहा। ऐसे में शहरी मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करना दोनों दलों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

    रणनीति का नया दौर
    शहरी क्षेत्रों में कम मतदान की समस्या को देखते हुए दोनों दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा ने पहले चरण से मुक्त हुए अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को दूसरे चरण की सीटों पर तैनात कर दिया है, ताकि घर-घर जाकर मतदाताओं को बूथ तक लाया जा सके। वहीं तृणमूल ने भी इसी तरह की रणनीति अपनाते हुए हर बूथ पर अपने कोर वोटर को साधे रखने और विपक्ष के प्रभाव को सीमित करने पर जोर दिया है।

    4 मई तक बढ़ेगी सियासी गर्मी

    पहले चरण के भारी मतदान ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। अब दूसरे चरण में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में ध्रुवीकरण, घुसपैठ और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे मुद्दों पर सीधी टक्कर देखने को मिलेगी। अंतिम नतीजे 4 मई को आएंगे, लेकिन इतना तय है कि इस बार मुकाबला नारों से आगे बढ़कर बूथ स्तर की कड़ी परीक्षा में बदल चुका है। जीत उसी की होगी, जो मतदाताओं को घर से निकालकर मतदान केंद्र तक पहुंचाने में सफल रहेगा।