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  • UP में आटे में मिलावट का बड़ा खेल: पत्थर का चूरा मिलाकर बेच रहे सफेद आटा, आगरा की 30 मिलों पर छापे

    UP में आटे में मिलावट का बड़ा खेल: पत्थर का चूरा मिलाकर बेच रहे सफेद आटा, आगरा की 30 मिलों पर छापे

    आगरा। बाजार में बिकने वाले गेहूं के आटे को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुनाफे के लिए कुछ मिल संचालकों पर गेहूं के साथ सेलखड़ी यानी मुलायम पत्थर का चूरा पीसकर आटा तैयार करने का आरोप है। फिरोजाबाद में मिलावट पकड़े जाने के बाद आगरा में खाद्य एवं औषधि विभाग ने आटा मिलों के खिलाफ जांच अभियान तेज कर दिया है। पिछले एक सप्ताह में 30 इकाइयों से 35 से अधिक नमूने लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित मिल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    फिरोजाबाद की मिल में मिली 30 किलो सेलखड़ी
    मामला उस समय सामने आया जब मंगलवार शाम खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम ने फिरोजाबाद के रजावली क्षेत्र के रामनगर गांव स्थित शिवाय ट्रेडिंग कंपनी की आटा मिल पर छापा मारा। टीम को वहां 30 किलो सेलखड़ी मिली। आरोप है कि इसे गेहूं के साथ पीसकर राज रसोई प्रीमियम ब्रांड के आटे की पैकिंग की जा रही थी। जांच में सेलखड़ी की आपूर्ति आगरा से होने की जानकारी सामने आई। खाद्य सुरक्षा विभाग ने शिवाय ट्रेडिंग कंपनी के दो संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। दोनों फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

    आगरा में दो दिन से मिलों की जांच
    खाद्य एवं औषधि विभाग की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर प्रदेशभर की आटा मिलों की जांच शुरू की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले आटे में चावल के चूरे की मिलावट के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन सेलखड़ी मिलाने का मामला पहली बार सामने आया है।

    आगरा में बुधवार को बसई खुर्द स्थित श्याम भोग एंटरप्राइजेज से श्याम भोग ब्रांड का 1,496 किलो आटा सील किया गया। इसके बाद गुरुवार देर रात तक भी विभाग की कार्रवाई जारी रही। जांच के दौरान कुछ स्थानों पर ब्रांडेड आटे की पैकिंग वाली जगहों पर गंदगी भी मिली।

    30 मिलों से लिए गए 35 से ज्यादा नमूने
    सहायक आयुक्त खाद्य महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सेलखड़ी मिलाकर गेहूं के आटे की बिक्री की शिकायत पर मुख्यालय स्तर से जांच कराई जा रही है। आगरा में अब तक 30 आटा मिलों से 35 से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं। इनकी जांच रिपोर्ट में यदि मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    आटे में क्यों मिलाते हैं सेलखड़ी?
    अधिकारियों के अनुसार, मिल संचालक सेलखड़ी के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग कारण बताते हैं। कभी इसे अनाज को कीड़ों से बचाने और कभी प्लास्टिक की बोरियों को चिकना करने के लिए इस्तेमाल करने की बात कही जाती है। हालांकि, मजदूरों से पूछताछ में एक अलग वजह सामने आई। बताया गया कि घटिया या खराब गेहूं से तैयार आटे में हल्का कालापन आ जाता है। उसे सफेद और चमकदार दिखाने के लिए सेलखड़ी मिलाई जाती है।

    ऐसे कर सकते हैं आटे की जांच
    खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह के अनुसार, घर पर भी कुछ सामान्य तरीकों से आटे में मिलावट की आशंका की जांच की जा सकती है।

    एक कटोरी आटे में नींबू की कुछ बूंदें डालें। बुलबुले उठने पर मिलावट की आशंका हो सकती है। एक गिलास पानी में आटा डालकर चम्मच से मिलाएं। आटा नीचे बैठने पर मिलावट की आशंका जताई गई है। हथेली पर आटा रखकर रगड़ें। सामान्य आटा खुरदरा महसूस होता है, जबकि असामान्य चिकनाहट मिलावट का संकेत हो सकती है। हालांकि, घरेलू परीक्षण केवल प्रारंभिक संकेत दे सकते हैं। मिलावट की पक्की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही होगी।

    सेहत के लिए भी नुकसानदेह होने की आशंका
    सीएमओ आगरा डॉ. अरुण श्रीवास्तव के मुताबिक, लंबे समय तक सेलखड़ी शरीर में पहुंचने से पेट संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे पेट दर्द, अपच और आंतों में रुकावट का खतरा बढ़ने की बात कही गई है। कैल्शियम या सिलिकेट के बारीक कण शरीर में जमा होने पर गुर्दे में पथरी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा दांतों की ऊपरी परत को नुकसान और मसूढ़ों में जख्म होने की आशंका भी बताई गई है। सीने में सेलखड़ी के कण जमा होने से टीबी संक्रमण का खतरा बढ़ने की बात भी सामने आई है।

    शिकायत के लिए नंबर
    खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 18001805533 और कार्यालय नंबर 0562-2970049 पर संपर्क किया जा सकता है। कार्यालय में शिकायत का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक है।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे


    मथुरा।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार दोपहर अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत वृंदावन पहुंचे। सड़क मार्ग से वृंदावन पहुंचने के बाद वे होटल विवांता गए, जहां कुछ देर विश्राम किया।

    पूर्व राष्ट्रपति के शुक्रवार शाम विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन करने का कार्यक्रम है। उनके आगमन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।

    रामनाथ कोविंद के दर्शन कार्यक्रम को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आम श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रेम मंदिर भी जाएंगे। रामनाथ कोविंद का वृंदावन में तीन दिन प्रवास प्रस्तावित है।

  • NDA सांसदों की बैठक में सोशल मीडिया पर खास जोर, PM मोदी ने युवाओं से कनेक्शन बढ़ाने और डिजिटल सक्रियता की दी सलाह

    NDA सांसदों की बैठक में सोशल मीडिया पर खास जोर, PM मोदी ने युवाओं से कनेक्शन बढ़ाने और डिजिटल सक्रियता की दी सलाह

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ NDA के नए लोकसभा सांसदों की बैठक में इस बार सोशल मीडिया की सक्रियता को खास महत्व दिया गया। बैठक के दौरान सांसदों को उनके पिछले 90 दिनों की सोशल मीडिया गतिविधियों का एक पेज का रिपोर्ट कार्ड सौंपा गया। इसमें अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर सांसदों की सक्रियता, पोस्ट की संख्या, लोगों तक पहुंच और प्रतिक्रियाओं से जुड़े आंकड़े शामिल थे। सांसदों से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के साथ अपना संपर्क और मजबूत करने को कहा गया।

    बैठक में प्रधानमंत्री ने NDA के भीतर पुराने और नए सांसदों के बीच समानता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में कोई सांसद 20 साल पुराना हो या 20 दिन पुराना, सभी के लिए बराबर सम्मान है। बैठक में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद NDA के साथ आए कुछ सांसद भी शामिल हुए। इनमें टीएमसी से अलग होकर NCPI में शामिल हुए सांसद और शिवसेना यूबीटी से अलग होकर शिवसेना में आए सांसद भी मौजूद रहे।

    सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड को बैठक की प्रमुख बातों में माना जा रहा है। इसमें सांसदों के पिछले तीन महीनों के डिजिटल प्रदर्शन का आकलन किया गया। रिपोर्ट में एक्स पर सांसद द्वारा की गई पोस्ट की संख्या, उन पोस्ट पर आए इंप्रेशन और कमेंट जैसे आंकड़े दर्ज किए गए। इसी तरह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सांसदों की गतिविधियों और उनकी पहुंच से जुड़े आंकड़े भी रिपोर्ट में शामिल किए गए।

    सांसदों को समझाया गया कि आज के दौर में जनता, खासकर युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इसलिए केवल संसद और क्षेत्र में सक्रिय रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी नियमित और प्रभावी संवाद जरूरी है। सांसदों को अपनी सोशल मीडिया मौजूदगी को अधिक सक्रिय और जनता से जुड़ा बनाने का सुझाव दिया गया।

    90 दिनों के डेटा को आधार बनाकर तैयार किया गया यह रिपोर्ट कार्ड सांसदों की डिजिटल सक्रियता का तुलनात्मक आकलन करने में भी मदद कर सकता है। पोस्ट की संख्या और इंप्रेशन जैसे आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि सांसद सोशल मीडिया पर कितने सक्रिय हैं और उनकी सामग्री कितने लोगों तक पहुंच रही है। इसके अलावा कमेंट और अन्य प्रतिक्रियाएं जनता की ऑनलाइन भागीदारी का संकेत देती हैं।

    बैठक में सांसदों के स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने और नियमित जांच कराने की सलाह दी। खासतौर पर 40 वर्ष से अधिक उम्र के सांसदों को नियमित मेडिकल चेकअप कराने की बात कही गई। योग को लेकर भी उन्होंने सांसदों से सवाल किया और पूछा कि नियमित योग करने वाले कितने सांसद हैं।

    प्रधानमंत्री ने स्थिर सरकार के महत्व का भी उल्लेख किया। बातचीत के दौरान उन्होंने विदेशों में सरकारों के बार-बार बदलने का उदाहरण देते हुए राजनीतिक स्थिरता की जरूरत पर बात की। साथ ही सांसदों को भरोसा दिलाया कि यदि उन्हें अपने क्षेत्र से जुड़ी कोई समस्या या व्यक्तिगत स्तर पर कोई कठिनाई हो तो वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

    बैठक में पूर्वी भारत के विकास को लेकर भी प्रधानमंत्री ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में कोलकाता, ओडिशा और भुवनेश्वर का ऐसा कायाकल्प होगा जिसकी अभी कल्पना करना भी मुश्किल है। इस तरह बैठक में डिजिटल सक्रियता, स्वास्थ्य, राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय विकास जैसे कई मुद्दों पर सांसदों को दिशा देने की कोशिश की गई।

  • कानपुर देहात की 360 महिलाएं बना रहीं करीब तीन लाख तिरंगे, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से बढ़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता

    कानपुर देहात की 360 महिलाएं बना रहीं करीब तीन लाख तिरंगे, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से बढ़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता

    नई दिल्ली । कानपुर देहात में इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सफल बनाने में ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े 96 स्वयं सहायता समूहों की करीब 360 महिलाएं दिन-रात मेहनत कर लगभग तीन लाख तिरंगे तैयार करने में जुटी हैं। इन महिलाओं के लिए तिरंगा बनाना केवल देशभक्ति से जुड़ा अभियान नहीं है, बल्कि रोजगार, आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता का भी माध्यम बन गया है। खास तौर पर गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को इससे सम्मान के साथ काम करने का अवसर मिला है।

    कानपुर देहात में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर तैयारियां तेज हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को जिले में करीब तीन लाख तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। महिलाएं निर्धारित समय के भीतर इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। तैयार किए जा रहे प्रत्येक तिरंगे की लंबाई 30 इंच और चौड़ाई 20 इंच रखी गई है। इसकी निर्धारित कीमत 20 रुपये तय की गई है। तैयार होने के बाद इन तिरंगों का इस्तेमाल जिले के स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और अन्य सरकारी भवनों पर किया जाएगा।

    महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी ने इस अभियान को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ दिया है। उमंग स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष प्रतिमा सिंह के अनुसार, ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उनका कहना है कि आत्मनिर्भर भारत के साथ आत्मनिर्भर महिलाओं का निर्माण भी जरूरी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर का इस्तेमाल कर आय अर्जित कर रही हैं और साथ ही परिवार की जिम्मेदारियों में भी योगदान दे रही हैं।

    इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव उन महिलाओं पर दिखाई दे रहा है, जिनके लिए गांव में रोजगार के अवसर सीमित रहे हैं। गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम शिक्षित महिलाओं को घर के आसपास काम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें काम के जरिए सम्मान और अपनी मेहनत की कमाई हासिल करने का अवसर मिल रहा है।

    कानपुर देहात की महिला स्वयं सहायता समूहों ने इससे पहले भी अपनी क्षमता दिखाई थी। पिछले वर्ष समूहों से जुड़ी महिलाओं ने करीब 200 मीटर लंबा तिरंगा तैयार किया था। उस दौरान तैयार किए गए झंडों पर महिलाओं को लागत निकालने के बाद करीब छह रुपये तक का मुनाफा मिला था। इस बार भी तिरंगे तैयार करने में आने वाली लागत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं वहन करेंगी और बिक्री से होने वाला मुनाफा सीधे समूह की महिलाओं को मिलेगा।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त अशोक कुमार ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से कानपुर देहात की महिलाएं सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज तैयार नहीं कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं। तीन लाख तिरंगे तैयार करने का यह अभियान ग्रामीण महिलाओं के हुनर को पहचान देने के साथ उनके लिए स्थायी आर्थिक अवसरों की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को आंदोलन का 14वां दिन रहा। बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी बीच अनशन कर रहे छात्र राहुल क्रांति की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम से तत्काल सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों में चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड विधानसभा के बाहर और सदन के भीतर भी राजनीतिक माहौल गरम रहा।

    भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। बताया गया कि राज्य में छह छात्र अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि लंबे समय से प्रदर्शन और अनशन के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर बातचीत के लिए कोई आधिकारिक बुलावा नहीं भेजा गया है। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    छात्रों की सबसे प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की है। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्रों की मांग है कि मामले की जांच सीबीआई या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की टीम से कराई जाए। इसके अलावा छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली में बड़े सुधार की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना जरूरी है।

    भर्ती परीक्षा विवाद का असर झारखंड विधानसभा में भी दिखाई दिया। विपक्षी विधायकों ने छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और जोरदार विरोध किया। विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग करने लगे। विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और पूरे मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

    वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया गया। सरकार ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखा जा रहा है। साथ ही सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पहले से सामने आए पुरानी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर भी जवाब दिया जाना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि सरकार छात्रों के मुद्दे को गंभीरता से देख रही है।

    फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन समाप्त करने के संकेत नहीं दिए हैं। अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने से आंदोलन का मामला और संवेदनशील हो गया है। अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से होने वाली किसी औपचारिक बातचीत पर है। वहीं सरकार के सामने भी छात्रों की मांगों और लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच समाधान निकालने की चुनौती है। आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और छात्र आंदोलन दोनों के और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • झांसी सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद की आज अंतिम विदाई, प्रयागराज में पिता अतीक की कब्र के पास होंगे दफन

    झांसी सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद की आज अंतिम विदाई, प्रयागराज में पिता अतीक की कब्र के पास होंगे दफन


    नई दिल्ली ।
    झांसी में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद की शुक्रवार को अंतिम विदाई होगी। परिवार की ओर से दफन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जुमे की नमाज के बाद प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अबान अहमद को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

    अबान को उसी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा, जहां उनके पिता अतीक अहमद, चाचा अशरफ और बड़े भाई असद की कब्रें मौजूद हैं। परिवार ने उनकी कब्र के लिए स्थान पहले से तैयार करा लिया है। अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और करीबी लोग मौजूद रहेंगे।

    जानकारी के मुताबिक, जुमे की नमाज के बाद अबान के जनाजे को कब्रिस्तान ले जाया जाएगा। व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए शव को सीधे एंबुलेंस के जरिए कब्रिस्तान पहुंचाने की तैयारी है। वहां धार्मिक रस्में पूरी करने के बाद उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों की कब्रों के पास दफन किया जाएगा।

    अबान की अंतिम विदाई में उनके दोनों बड़े भाई शामिल नहीं हो पाएंगे। उमर और अली फिलहाल अलग-अलग मामलों में जेल में बंद हैं। जेल में होने के कारण उनके जनाजे में पहुंचने की संभावना नहीं है। ऐसे में परिवार के अन्य सदस्य और करीबी लोग ही अंतिम रस्मों में मौजूद रहेंगे।

    अबान अहमद की मौत गुरुवार को झांसी में हुए सड़क हादसे में हुई थी। बताया गया कि जिस कार में वह सवार थे, वह अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई और डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी गंभीर थी कि अबान की जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे की खबर सामने आने के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

    अबान की मौत के बाद परिवार के सामने अब उनकी अंतिम विदाई की जिम्मेदारी है। प्रयागराज में होने वाले दफन के लिए कब्रिस्तान में जरूरी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई हैं। परिवार की योजना के अनुसार, जुमे की नमाज के बाद जनाजा निकाला जाएगा और इसके बाद कसारी-मसारी कब्रिस्तान में उन्हें दफन किया जाएगा।

    अबान को परिवार के अन्य सदस्यों के पास दफन किए जाने के कारण उनकी अंतिम विदाई को लेकर परिजनों और करीबी लोगों की मौजूदगी महत्वपूर्ण रहेगी। हादसे में अचानक हुई मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। शुक्रवार को धार्मिक रस्मों के साथ अबान अहमद को अंतिम विदाई दी जाएगी।

  • मोहन भागवत बोले- पूरी जानकारी के बिना फैसला ठीक नहीं, प्रियंका गांधी ने जवाब देकर तेज किया सियासी विवाद

    मोहन भागवत बोले- पूरी जानकारी के बिना फैसला ठीक नहीं, प्रियंका गांधी ने जवाब देकर तेज किया सियासी विवाद

    नई दिल्ली । आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। युवाओं से संवाद के दौरान भागवत ने उनके विचारों को सुनने के साथ कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने किसी भी मामले में पूरी जानकारी सामने आने से पहले जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कही। इसी दौरान उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताया, जिसके बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भागवत के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं को किसी तरह के प्रमाण या मंजूरी की जरूरत नहीं है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज हो गई है।

    मोहन भागवत ने युवाओं से बातचीत के दौरान कहा कि किसी भी घटना या विवाद के बारे में फैसला करने से पहले उसके सभी तथ्यों को समझना जरूरी है। उनका कहना था कि जब तक किसी मामले से जुड़े सभी तथ्य सामने नहीं आ जाते, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि सच्चाई सामने आने तक इंतजार किया जाना चाहिए। भागवत ने यह भी संकेत दिया कि कुछ रिपोर्टों में अन्य लोगों के शामिल होने की बातें सामने आई हैं, लेकिन बिना ठोस प्रमाण किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा। उनके इसी रुख को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं।

    प्रियंका गांधी ने भागवत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं को किसी प्रमाण या मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। उनके बयान को कांग्रेस ने युवाओं के मुद्दों और उनकी चिंताओं से जोड़कर देखा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि वास्तव में छात्रों और युवाओं की चिंता है तो संबंधित घटनाओं और उनसे जुड़े सवालों पर स्पष्ट रूप से जवाब सामने आना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि युवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

    कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं और छात्रों की चिंता वास्तविक है तो केंद्र सरकार को संबंधित मामलों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने छात्रों के साथ हुई घटनाओं की जांच की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जिन लोगों की भूमिका सामने आती है, उनसे जवाब मांगा जाना चाहिए।

    दरअसल, मोहन भागवत और प्रियंका गांधी के बयानों के बीच मुख्य अंतर किसी भी मामले में निष्कर्ष पर पहुंचने के तरीके को लेकर दिखाई दे रहा है। भागवत ने जहां पूरी जानकारी और प्रमाण सामने आने तक इंतजार करने पर जोर दिया, वहीं प्रियंका गांधी ने युवाओं के अधिकारों और उनकी आवाज को किसी बाहरी मंजूरी से अलग बताया। दोनों पक्षों की टिप्पणियों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। Gen-Z और Gen-Alpha युवाओं के साथ संवाद तथा उनके मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की ओर से और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

  • NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा खुलासा, विशेषज्ञों ने परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचाए सवाल

    NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा खुलासा, विशेषज्ञों ने परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचाए सवाल

    नई दिल्ली । NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी ने परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाले दावे किए हैं। जांच के अनुसार प्रश्नपत्र किसी प्रिंटिंग प्रेस से सीधे बाहर नहीं निकला, बल्कि प्रश्नों की जांच, अनुवाद और सुधार की प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों ने अपने अधिकार का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया। एजेंसी की चार्जशीट में कई लोगों के नाम सामने आए हैं और मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में होनी है।

    जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी समीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान कुछ विषय विशेषज्ञों के पास परीक्षा से पहले प्रश्नों तक पहुंच थी। आरोप है कि इसी दौरान बॉटनी, जूलॉजी, केमिस्ट्री और फिजिक्स से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने प्रश्नों को निर्धारित प्रक्रिया से बाहर पहुंचाया। एजेंसी का मानना है कि उन्हें मिली गोपनीय जानकारी और जिम्मेदारी का इस्तेमाल परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित करने के लिए किया गया।

    जांच का एक अहम हिस्सा पुणे में आयोजित कथित गुप्त पढ़ाई के सत्रों से जुड़ा है। एजेंसी के अनुसार कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले ऐसे स्थानों पर बुलाया गया, जहां उन्हें संभावित प्रश्न, उनके चार विकल्प और सही उत्तर बताए गए। इन सवालों को छात्रों से हाथ से लिखवाने की बात भी जांच में सामने आई है। कथित तौर पर ऐसा इसलिए किया गया ताकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बचा जा सके और गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड न बने।

    सीबीआई की जांच के अनुसार कुछ प्रश्नों की तस्वीरें भी बाद में ली गईं और उन्हें दूसरे लोगों तक पहुंचाया गया। जांच में इस पूरे नेटवर्क में पैसों के लेन-देन की आशंका भी सामने आई है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्न कितने लोगों तक पहुंचे और इस प्रक्रिया में कौन-कौन लोग सीधे या परोक्ष रूप से शामिल थे।

    मामले में लातूर से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। जांच के मुताबिक कुछ छात्रों को अस्पताल बुलाकर कथित तौर पर पूरे प्रश्न याद कराए गए। इसके बाद लीक हुए प्रश्नों की एक पीडीएफ तैयार की गई और उसे टेलीग्राम के माध्यम से आगे भेजा गया। जांच एजेंसी का दावा है कि यह फाइल कई लोगों तक पहुंची और बाद में लाखों रुपये के बदले दूसरे व्यक्ति को दी गई।

    जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर प्रश्नों के इस नेटवर्क में 10 से 12 लाख रुपये तक के लेन-देन की बात सामने आई है। हालांकि, पूरे मामले में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और आर्थिक लेन-देन की वास्तविक स्थिति जांच के आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होगी।

    NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्नों की गोपनीयता और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि जांच में सामने आए आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो यह परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद गंभीर खामियों की ओर संकेत कर सकते हैं। फिलहाल सीबीआई पूरे नेटवर्क, प्रश्नों के स्रोत और उन्हें आगे पहुंचाने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में अदालत की अगली सुनवाई के बाद आगे की कानूनी स्थिति भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • TMC छोड़ने के बाद BJP से भी दूरी, बंगाल के 3 सांसदों ने बदला रास्ता, जानिए क्या है वजह ?

    TMC छोड़ने के बाद BJP से भी दूरी, बंगाल के 3 सांसदों ने बदला रास्ता, जानिए क्या है वजह ?


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद भी नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। मुर्शिदाबाद की तीन लोकसभा सीटों से जुड़े सांसद अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान इन दिनों अपने राजनीतिक रुख को लेकर चर्चा में हैं।

    तीनों सांसद पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए। अब उन्होंने BJP के नेतृत्व वाले केंद्रीय गठबंधन के साथ औपचारिक तौर पर जुड़ने से भी दूरी बना ली है। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार के साथ प्रशासनिक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर उनका संवाद जारी है।

    NDA बैठकों से बनाई दूरी
    तीनों सांसद नई दिल्ली में होने वाली NDA की प्रमुख संसदीय बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं, राज्य और केंद्र के नेताओं से उनकी बातचीत मुख्य रूप से विकास और प्रशासन से जुड़े विषयों तक सीमित है।

    जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल पूछे जाने पर कहा, “हमें गृह मंत्री के साथ दो विषयों पर चर्चा करनी थी, हम किसी अन्य मुद्दे पर कुछ नहीं कह सकते।”

    तीनों सांसदों ने पश्चिम बंगाल की मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इससे संकेत मिलता है कि वे फिलहाल किसी गठबंधन में शामिल होने के बजाय मुद्दा आधारित राजनीति पर जोर दे रहे हैं।

    मुर्शिदाबाद का समीकरण क्यों अहम?
    तीनों सांसद मुर्शिदाबाद जिले की महत्वपूर्ण सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। खलीलुर रहमान जंगीपुर, यूसुफ पठान बहरामपुर और अबू ताहिर खान मुर्शिदाबाद से सांसद हैं।

    मुर्शिदाबाद को पश्चिम बंगाल के संवेदनशील और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में गिना जाता है। ऐसे में BJP के साथ खुलकर खड़ा होना इन सांसदों के लिए अपने पारंपरिक मतदाताओं के बीच राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है। यही वजह मानी जा रही है कि वे केंद्र के साथ संवाद तो बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनने से फिलहाल बच रहे हैं।

    NCPI के लिए भी बढ़ी चुनौती
    तीनों सांसदों का अलग रुख उनकी नई पार्टी NCPI के लिए भी चुनौती पैदा कर सकता है। करीब 20 सदस्यों वाले इस समूह में यदि अलग-अलग सांसद अपनी स्वतंत्र राजनीतिक रणनीति अपनाते हैं तो संगठन के भीतर मतभेद की स्थिति बन सकती है।

    दूसरी ओर, BJP के लिए भी इन सांसदों को अपने पाले में लाना आसान नहीं होगा। राष्ट्रीय दलों की कोशिश आमतौर पर अलग हुए नेताओं या गुटों को एक साझा राजनीतिक आधार में बदलने की होती है, लेकिन ये सांसद फिलहाल पार्टी लाइन के बजाय अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पकड़ मजबूत रखने पर ज्यादा ध्यान देते दिखाई दे रहे हैं।

    स्थानीय समीकरण बनाम बड़े गठबंधन
    पश्चिम बंगाल में अगले चुनावों की तैयारियों के बीच मुर्शिदाबाद की तीनों सीटों का घटनाक्रम अहम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि जिन इलाकों में स्थानीय मुद्दे, मतदाताओं का सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय पकड़ ज्यादा प्रभावी होते हैं, वहां केवल बड़े राजनीतिक गठबंधन के सहारे चुनावी सफलता हासिल करना आसान नहीं होता।

  • रफ्तार ने छीनी जिंदगी, अतीक अहमद के बेटे अबान की दर्दनाक मौत; आखिरी बार बोला- 'मुझे बचा लो'

    रफ्तार ने छीनी जिंदगी, अतीक अहमद के बेटे अबान की दर्दनाक मौत; आखिरी बार बोला- 'मुझे बचा लो'


    नई दिल्ली। माफिया अतीक अहमद के परिवार पर एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गुरुवार सुबह प्रयागराज से झांसी जा रहे अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे 21 वर्षीय अबान अहमद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। वह अपने बड़े भाई अली से मिलने झांसी जेल जा रहा था। रास्ते में झांसी से करीब 70 किलोमीटर पहले पूंछ थाना क्षेत्र में उनकी तेज रफ्तार क्रेटा कार डिवाइडर से टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार पांचों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर ही अबान और उसके साथी सोनू ने दम तोड़ दिया जबकि तीन अन्य घायलों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना के समय कार की रफ्तार काफी तेज थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन कई फीट हवा में उछलकर सड़क पर दूर तक घिसटता चला गया। कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और सभी लोग अंदर फंस गए। आसपास मौजूद लोगों और पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद दरवाजा तोड़कर घायलों को बाहर निकाला।

    घटना के प्रत्यक्षदर्शी दीपक यादव ने बताया कि सबसे पहले वह मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने लोहे की रॉड की मदद से कार का दरवाजा तोड़ा और अंदर फंसे अबान को बाहर निकालने की कोशिश की। उनके अनुसार अबान के मुंह से खून निकल रहा था और उसने धीमी आवाज में कहा मुझे बचा लो। इसके कुछ ही क्षण बाद वह बेहोश हो गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।

    हादसे की वजह को लेकर दो अलग-अलग बातें सामने आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हाईवे पर अचानक एक बछड़ा आ गया था। उसे बचाने के प्रयास में चालक ने कार मोड़ी और संतुलन बिगड़ने से वाहन डिवाइडर से टकरा गया। वहीं घायल उमर अहमद का कहना है कि सड़क पर पड़ी ईंट के कारण कार अनियंत्रित हुई और हादसा हुआ। पुलिस दोनों पहलुओं की जांच कर रही है।

    फॉरेंसिक जांच के दौरान कार से सिगरेट के पैकेट जूते और दो अंग्रेजी उपन्यास भी बरामद हुए हैं। माना जा रहा है कि अबान ये सामान अपने बड़े भाई अली के लिए लेकर जा रहा था जो इस समय झांसी जेल में बंद है। दुर्घटना के समय अबान आगे की सीट पर बैठा था जबकि उसका साथी जैद वाहन चला रहा था। हल्की बारिश के कारण सड़क भी फिसलन भरी बताई जा रही है जिससे हादसे की आशंका और बढ़ गई।

    अबान अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा था। परिवार पहले ही कई बड़े झटके झेल चुका है। वर्ष 2023 में उसके भाई असद की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। उसी वर्ष अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा के बीच हत्या कर दी गई थी। फिलहाल परिवार के अन्य सदस्य अलग-अलग कानूनी मामलों में जेल में हैं जबकि अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन अब भी फरार है।

    अबान के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को प्रयागराज में अतीक अहमद की कब्र के पास ही अबान को सुपुर्द ए खाक किया जाएगा। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार के खतरों को सामने लाने वाला साबित हुआ है।