Category: National

  • नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । नीट परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर देश भर में जारी उथल-पुथल के बीच राज्य सरकारों का रुख बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि आंदोलन में भाग लेने वाले सामान्य और निर्दोष छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कठोर प्रशासनिक कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक रुख में यह भी साफ कर दिया गया है कि आपराधिक इतिहास रखने वाले या हिंसा में संलिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

    राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि नीट परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों और छात्र असंतोष पर काफी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया है। गहन समीक्षा के बाद प्रशासन ने यह तय किया है कि जो युवा या विद्यार्थी केवल अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे, उनके खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और न ही उन्हें बेवजह परेशान किया जाएगा। लेकिन इस सुरक्षा का दायरा केवल निर्दोष विद्यार्थियों तक ही सीमित रहेगा और पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले तत्वों पर कानून का शिकंजा कसता रहेगा।

    प्रशासनिक स्तर पर यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के हालिया दिशानिर्देशों और न्यायिक टिप्पणियों के अनुरूप उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने भी हाल ही में विभिन्न याचिकाओं पर विचार करते हुए साफ कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए, जबकि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर जांच एजेंसियां नियमानुसार कार्रवाई जारी रख सकती हैं। इसी के तहत राज्य के गृह विभाग ने अपने पुलिस बलों को निर्देश दिए हैं कि वे पुराने दर्ज मामलों की समीक्षा करें और छात्रों की पहचान सुनिश्चित करके ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाएं।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों और अव्यवस्था के सिलसिले में पुलिस में मामला दर्ज किया गया था। इस दर्ज मुकदमे की कड़ी में जांच एजेंसियों ने व्यापक छानबीन की है और अब तक कई संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने या पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर हमला करने का प्रयास किया था।

    उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल से पहले पूर्वोत्तर राज्य असम और पड़ोसी राज्य बिहार की सरकारों ने भी इसी तरह का उदार रुख अपनाया था। दोनों राज्यों ने घोषणा की थी कि परीक्षा में धांधली के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों और आम नागरिकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकारों का मानना है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किए गए प्रदर्शनों पर दंडात्मक रुख अपनाना उचित नहीं है, बशर्ते उसमें किसी असामाजिक तत्व की साजिश शामिल न हो।

    देशव्यापी स्तर पर नीट परीक्षा को लेकर मचा बवाल जुलाई के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय स्तर पर हुए बड़े घटनाक्रमों के बाद थमता नजर आया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद त्यागने के बाद विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के दो दौर की सकारात्मक बातचीत हुई थी। उस वार्ता के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों ने यह सहमति व्यक्त की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को निरस्त किया जाएगा, पुलिसिया उत्पीड़न रोका जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कानून लाया जाएगा। अब राज्य सरकारें उसी समझौते और न्यायिक आदेशों का क्रियान्वयन कर रही हैं।

  • सरकारी अधिकारियों द्वारा वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लागू की 'वन ऑफिसर, वन कार' नीति

    सरकारी अधिकारियों द्वारा वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लागू की 'वन ऑफिसर, वन कार' नीति

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अपने मंत्रालयों और विभिन्न विभागों में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सरकारी वाहनों के बेजा इस्तेमाल को रोकने के लिए नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत ‘वन ऑफिसर, वन कार’ यानी एक अधिकारी को केवल एक ही सरकारी वाहन आवंटित करने की नीति को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। इस नए कदम से सरकारी तंत्र में अतिरिक्त गाड़ियों के अनधिकृत उपयोग पर पूरी तरह विराम लगने की उम्मीद है।

    नवीनतम सर्कुलर के अनुसार, सरकारी वाहन की पात्रता रखने वाले किसी भी अधिकारी को एक से अधिक कार आवंटित नहीं की जाएगी। यदि किसी अफसर को अपने मूल पद के साथ किसी अन्य मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या स्वायत्त निकाय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा जाता है, तब भी वह केवल एक ही आधिकारिक वाहन का उपयोग करने का हकदार होगा। अतिरिक्त दायित्व के आधार पर दूसरी गाड़ी हासिल करने की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्र के अधीन कार्यरत अधिकारी सार्वजनिक उपक्रमों या स्वायत्त संस्थाओं के बेड़े में शामिल वाहनों को अपने दैनिक या नियमित इस्तेमाल के लिए अपने पास नहीं रख सकेंगे। इस तरह की कार्यप्रणाली पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। हालांकि, अंतर-राज्यीय या विभागीय आधिकारिक दौरों के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अधिकारियों को इन संस्थाओं के वाहनों का उपयोग करने की विशेष छूट दी जाएगी, ताकि शासकीय कार्यों में कोई बाधा न आए।

    नए परिपत्र में सभी मंत्रालयों और विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस्तेमाल में न आ रहे या अधिशेष वाहनों को तुरंत सुरक्षित कस्टडी में लिया जाए। यह निर्देश पूर्व में जारी उन नियमों को और मजबूती प्रदान करता है, जिनमें अधिकारियों द्वारा तय शुल्क देकर सीमित दायरे में सरकारी गाड़ी के निजी उपयोग की अनुमति दी गई थी। सरकार के इस कड़े रुख से जहां एक तरफ वाहनों के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा, वहीं दूसरी तरफ सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अनावश्यक वित्तीय बोझ में भी बड़ी कमी आएगी।

  • मेकेदातु डैम विवाद: राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री के बयान से भड़के सीएम विजय, पीएम मोदी को पत्र लिख की सीधे हस्तक्षेप की मांग

    मेकेदातु डैम विवाद: राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री के बयान से भड़के सीएम विजय, पीएम मोदी को पत्र लिख की सीधे हस्तक्षेप की मांग


    नई दिल्ली ।
    कावेरी नदी पर बनने वाले प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच का अंतर-राज्यीय जल विवाद एक बार फिर गहरा गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया है कि जब तक यह परियोजना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और उच्चतम न्यायालय के फैसलों के पूरी तरह अनुरूप न हो, तब तक इसे किसी भी प्रकार की वैधानिक या प्रशासनिक स्वीकृति न दी जाए।

    तमिलनाडु सरकार की यह तीखी प्रतिक्रिया राज्यसभा में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री द्वारा दिए गए एक हालिया बयान के बाद सामने आई है। संसद में एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा था कि सर्वोच्च अदालत के फैसले में ऐसा स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि नदी पर कोई ढांचा खड़ा करने से पहले ऊपरी राज्य को निचले तटीय राज्यों की पूर्व सहमति लेना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री विजय ने केंद्रीय मंत्री के इस तर्क को बेहद निराशाजनक और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है।

    प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कानूनी और तकनीकी पहलुओं का हवाला देते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने पूर्व के फैसलों का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने अलमट्टी डैम मामले में शीर्ष अदालत की संविधान पीठ के फैसले का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में निचले राज्यों की सहमति और केंद्र की मंजूरी पूरी तरह अनिवार्य है। इसके अलावा न्यायाधिकरण की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऊपरी राज्य बिना आपसी सहमति के ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकता जिससे निचले राज्यों के तय पानी के शेड्यूल पर विपरीत प्रभाव पड़े।

    मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मेकेदातु परियोजना केवल एक साधारण इंजीनियरिंग प्रस्ताव भर नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के लाखों किसानों की आजीविका और जीवनरेखा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। कावेरी नदी दक्षिण भारत के बड़े भूभाग के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। यही वजह है कि केंद्रीय जल आयोग ने पूर्व में विस्तृत रिपोर्ट को न्यायाधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाने के लिए वापस भेज दिया था। तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से मांग की है कि निचले राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही आगे कोई कदम उठाया जाए।

  • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम


    नई दिल्ली ।
    देश में पेपर लीक मामले को लेकर पिछले दिनों चले बड़े जनांदोलन के बाद एक बार फिर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन की आहट तेज हो गई है। जंतर-मंतर से संसद तक चले प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने केंद्र सरकार को दो दिनों के भीतर दूसरी बार कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। संगठन का साफ कहना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मुकदमे तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो वे एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

    इस पूरे विवाद की ताजा वजह सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया सुनवाई बनी है। शीर्ष अदालत की चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करते हुए पुलिस को मौजूदा प्राथमिकियों की जांच जारी रखने की इजाजत दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन युवाओं का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्होंने केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और हिरासत में लिए गए ऐसे निर्दोष लोगों को रिहा किया जाए।

    अदालत के इस रुख के सामने आते ही सीजेपी ने केंद्र सरकार पर अपनी सहमति और लिखित आश्वासनों से पीछे हटने का बड़ा आरोप लगाया है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि पच्चीस जुलाई को सरकार के साथ हुई वार्ता के दौरान यह लिखित भरोसा दिया गया था कि सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले पूरी तरह रद्द किए जाएंगे और किसी भी छात्र के खिलाफ आगे कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। इसी ठोस आश्वासन के आधार पर ही राष्ट्रव्यापी आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया गया था।

    संगठन का आरोप है कि अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी तंत्र ने प्राथमिकियों को बनाए रखने का कड़ा विरोध नहीं किया, जिससे अब भाजपा शासित राज्यों की पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर शिकंजा कसने का रास्ता मिल गया है। अगर सरकार की मंशा साफ होती, तो वह अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती थी। सरकार का यह ढुलमुल रवैया लाखों युवाओं के भविष्य और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

    उल्लेखनीय है कि जून महीने में नई दिल्ली में शुरू हुआ यह आंदोलन जुलाई के मध्य तक बेहद उग्र रूप ले चुका था। संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भारी झड़प में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। स्थिति बिगड़ती देख सरकार ने दो दौर की द्विपक्षीय बातचीत की थी, जिसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके अलावा मृतक छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अभयदान देने का समझौता हुआ था। अब उस समझौते के टूटने की आशंका ने एक बार फिर देश के युवाओं और छात्रों को उद्वेलित कर दिया है।

  • ममता और भक्ति का अद्भुत संगम 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहीं काजल चौधरी

    ममता और भक्ति का अद्भुत संगम 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहीं काजल चौधरी


    नई दिल्ली । सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और कांवड़ यात्रा के लिए विशेष माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस बार भी श्रद्धालुओं का सैलाब सड़कों पर दिखाई दे रहा है लेकिन इन्हीं हजारों कांवड़ियों के बीच एक ऐसी कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई है जिसने सेवा समर्पण और पारिवारिक संस्कार की नई मिसाल पेश कर दी है। दिल्ली के शाहदरा की रहने वाली काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चंद्रिदेवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पैदल यात्रा कर रही हैं। यह दृश्य जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं और हर किसी ने उनकी सराहना की।

    काजल चौधरी पेशे से लोक गायिका हैं और अपने भजन तथा देहाती रागनी के कारण सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने इस वर्ष अपनी सास को कंधों पर बैठाकर कांवड़ यात्रा शुरू की है। खास बात यह है कि उनके साथ 71 किलो गंगाजल भी है जिसे वह भगवान शिव को अर्पित करेंगी। पूरी यात्रा के दौरान उनका परिवार भी उनके साथ चल रहा है और सभी मिलकर सेवा और श्रद्धा का संदेश दे रहे हैं।

    यह पहली बार नहीं है जब काजल चौधरी ने ऐसा किया हो। पिछले वर्ष भी उन्होंने अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की यात्रा पूरी की थी। इसके अलावा इसी वर्ष उन्होंने अपनी सास के साथ 84 कोस की परिक्रमा भी की थी। लगातार दूसरी बार इस तरह की यात्रा कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि बुजुर्गों की सेवा केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि सबसे बड़ा धर्म भी है।

    काजल चौधरी का कहना है कि माता पिता और सास ससुर की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता। उनका मानना है कि जब तक बुजुर्ग हमारे साथ हैं तब तक उनकी हर इच्छा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अपने माता पिता और बुजुर्गों की सेवा पूरे मन से करें ताकि उनका आशीर्वाद जीवनभर साथ बना रहे।

    इस यात्रा के दौरान काजल चौधरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि उनकी सास की इच्छा मुख्यमंत्री से मिलने की है और वे उन्हें अपने हाथों से एक भेंट देना चाहती हैं। काजल ने उम्मीद जताई कि उनकी सास की यह इच्छा भी जल्द पूरी होगी।

    मुजफ्फरनगर से गुजर रही यह अनोखी कांवड़ अब लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। रास्ते में जहां भी यह कांवड़ पहुंचती है लोग रुककर काजल और उनकी सास का अभिवादन करते हैं। कई श्रद्धालु उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं तो कई लोग उन्हें आधुनिक समय का श्रवण कुमार कहकर सम्मान दे रहे हैं। हालांकि काजल कहती हैं कि उन्होंने केवल अपना पारिवारिक कर्तव्य निभाया है और हर बेटे बहू को अपने बुजुर्गों के प्रति यही भावना रखनी चाहिए।

    आज जब भागदौड़ भरी जिंदगी में परिवारों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं तब काजल चौधरी की यह यात्रा समाज को यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति केवल मंदिरों में पूजा करने से नहीं बल्कि अपने बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करने से भी पूरी होती है। यही संस्कार भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान हैं और यही भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामला: इस्तीफे में चंपत राय का बड़ा खुलासा, 81 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकारी

    राम मंदिर चढ़ावा मामला: इस्तीफे में चंपत राय का बड़ा खुलासा, 81 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकारी


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के संयुक्त इस्तीफा पत्र से चढ़ावा चोरी मामले में अहम जानकारी सामने आई है। पहली बार सार्वजनिक हुए इस पत्र में दोनों ने स्वीकार किया है कि चोरी की घटना के बाद संबंधित लोगों से 81 लाख रुपये ट्रस्ट को वापस मिले थे। साथ ही, उन्होंने एसआईटी जांच की सिफारिश करने और निष्पक्ष जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के कामकाज से स्वयं को अलग करने का भी उल्लेख किया है।

    इस्तीफा पत्र के मुताबिक, 8 जून से दानपात्र की राशि को लेकर मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने लगीं, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई। पत्र में कहा गया है कि 4 जून की रात दानराशि की गणना के दौरान कुछ युवकों द्वारा कथित चोरी किए जाने की जानकारी एक ट्रस्टी को मिली थी।

    सीसीटीवी फुटेज से हुई पहचान
    पत्र के अनुसार, 5 जून की सुबह सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिसमें कुछ युवकों की पहचान हुई। ट्रस्ट ने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बजाय पहले संबंधित युवकों से पूछताछ करने का फैसला किया। इस्तीफा पत्र में दावा किया गया है कि 5 जून की रात से 8 जून के बीच संबंधित युवकों और उनके परिजनों ने कुल 81 लाख रुपये ट्रस्ट को लौटा दिए। साथ ही उन्होंने लिखित रूप में चोरी स्वीकार करते हुए स्वीकृति पत्र भी सौंपे।

    विवाद बढ़ने पर कराई गई एसआईटी जांच
    चंपत राय और अनिल मिश्रा ने पत्र में बताया कि जब यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बनने लगा, तब ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (SIT) गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और संबंधित सभी लोगों की प्रतिष्ठा बनी रहे। पत्र के अनुसार, राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध को स्वीकार करते हुए 15 जून से एसआईटी जांच शुरू करा दी।

    जांच पूरी होने तक खुद को किया अलग
    इस्तीफे के अंतिम हिस्से में दोनों पदाधिकारियों ने लिखा कि जब तक पूरे मामले में सत्य स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक वे ट्रस्ट के सभी दायित्वों से स्वयं को अलग रखना उचित समझते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंपा, जिसे ट्रस्ट की 6 जुलाई को आयोजित बैठक में स्वीकार कर लिया गया।

  • विकसित भारत के लिए मंत्रालयों में बेहतर तालमेल, स्वदेशी तकनीक और साइबर सुरक्षा पर जोर: प्रधानमंत्री मोदी

    विकसित भारत के लिए मंत्रालयों में बेहतर तालमेल, स्वदेशी तकनीक और साइबर सुरक्षा पर जोर: प्रधानमंत्री मोदी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक में विकसित भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल, महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक के विकास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़ी गलत सूचनाओं का प्रभावी जवाब देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा युवा सोच, गतिशील और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप काम करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने अपने आवास पर बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी से जुड़े मंत्रालयों के कामकाज और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी मंत्रालयों और विभागों को टीम भावना के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच बेहतर तालमेल होगा तो योजनाओं का लाभ लोगों तक तेजी और प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

    उन्होंने कहा कि सरकार की हर नीति और फैसला आम नागरिक को ध्यान में रखकर होना चाहिए। लोगों का हित और उनकी अपेक्षाएं ही शासन का आधार होना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना भी जरूरी है। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश की अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और लोगों के हित के लिए जरूरी है। इसके लिए नवाचार, नए ऊर्जा स्रोतों और क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छी व्यवस्था के लिए समय-समय पर सुधार जरूरी हैं। कार्यप्रणाली, कामकाज की संस्कृति और संस्थागत क्षमता में लगातार सुधार किया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा को भी मजबूत करना होगा। उन्होंने युवाओं, स्टार्टअप और नवाचार करने वाले उद्यमियों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार की बड़ी पहलों के बारे में सही जानकारी लोगों तक समय पर पहुंचनी चाहिए, ताकि गलत सूचनाओं और अफवाहों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि भविष्य के उद्योगों की जरूरतों के अनुसार उद्योग जगत के सहयोग से नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा नई सोच के साथ काम करना चाहिए और बदलती चुनौतियों के अनुसार खुद को लगातार तैयार रखना चाहिए।

    बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति, प्राथमिकताओं, नई संभावनाओं और कामकाज में आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार रखे। बैठक में कैबिनेट सचिव, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

    बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी जैसे अहम क्षेत्रों पर चर्चा हुई। उन्होंने नागरिक-केंद्रित शासन, बेहतर बुनियादी ढांचे, स्वदेशी तकनीक के विकास और युवाओं की अधिक भागीदारी पर जोर देने की बात कही।

  • कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर

    कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के समर्थन में बोलते हुए पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संगठित नकल और पेपर लीक राष्ट्र के लिए आतंकवाद और नक्सलवाद के समान खतरा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन दोनों खतरों का उन्मूलन कर दिया है और परीक्षा माफिया को भी उसी दृढ़ संकल्प के साथ जड़ से उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मूल 2024 के कानून को पहले को और मजबूत बनाता है। इसमें सजा को और कठोर किया गया है, जांच को समयबद्ध बनाया गया है तथा उन करोड़ों छात्रों के लिए न्याय की प्रक्रिया को तेज किया गया है।

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “परीक्षा में धांधली, पेपर लीक, यह किसी आतंकवाद और माओवाद से कम खतरनाक नहीं हैं। इसका इलाज भी हम ही करेंगे क्योंकि हर मर्ज की दवा मोदी सरकार के पास है और जब मामला देश के युवाओं और उनके भविष्य का है तो यह सरकार युवाओं की सरकार है और युवाओं के हित में हम हर जरूरी और कड़े कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज इस देश के युवा और मोदी सरकार एक प्लेटफार्म पर खड़े हैं और हमारे एक इरादे भी स्पष्ट हैं कि हम एक ऐसा कानून लायेंगें जो टेरोरिज्म के खिलाफ बने के कानून से अधिक कठोर होगा। इसी उदेश्य से हमने 2024 में बने कानून में संशोधन कर इसे और भी मजबूत बनाया है जो इस सदन के सामने पेश किया गया है। यह सरकार केवल समस्या पर चर्चा नहीं करती, बल्कि समाधान की व्यवस्था बनाती है। यह विधेयक अपराधियों, परीक्षा कराने वाली लापरवाह एजेंसी और उनका प्रबंधन , सभी की जवाबदेही सुनिश्चित करता है”

    उन्होंने कहा कि भाजपा और राजग सरकार चिंतन भी करती है और कार्यवाई भी करती है, और कानून भी बनाते हैं। जिन्होंने पूरे पचपन साल साठ सालों तक पूरे ठाठ के साथ इस देश पर राज किया उन्होंने तो कोई कानून नहीं बनाया मगर 2024 में देश को पहला एंटी चीटिंग कानून देने का काम किया और अगर आज उस कानून को और भी कठोर बनाने की मांग उठी तो वह भी एनडीए ने ही किया। आज भारत में कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपलआईटी, एम्स की संख्या में जो इजाफा हुआ है वह मोदी सरकार की देन है। हमने 2020 में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू किया जिसका उद्देश्य है भारत को ग्लोबल नॉलेज पावर बनाना तो जो लोग आज युवाओं का सीजनल लीडर बनने की कोशिश कर रहे हैं वह अपने गिरेबान में झांकें की उन्होंने युवाओं के लिए क्या किया। जिन्होंने गुलशन को उजाड़ा है आज वह गुलशन में बहार लाने की दुहाई देते हैं तो अच्छा नहीं लगता है।”

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “विपक्ष को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि जब उनके शासन में पेपर लीक होते थे, तब न मजबूत केंद्रीय कानून बना, न ऐसी फास्ट ट्रैक व्यवस्था बनी और न ऐसी जवाबदेही की संरचना खड़ी हुई। यूपीए काल में ऐम्स पीजी जैसी परीक्षाओं से जुड़े गंभीर विवाद और अनियमितताएं सामने आईं, किंतु व्यापक राष्ट्रीय एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क नहीं बनाया गया। राज्यों के अनुभव भी हमें चेतावनी देते हैं, राजस्थान में रीट था भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले, हिमाचल प्रदेश में सरकारी परीक्षाएं से जुड़ा संकट, झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल विवाद और कर्नाटक में परीक्षा-पत्र लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं को अनिश्चितता में डाला। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार में भर्ती परीक्षाओं की एक लंबी शृंखला रही है, जिसने राज्य की भर्ती व्यवस्था की साख को बुरी तरह प्रभावित किया। देश के अलग-अलग राज्यों, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब अथवा अन्य स्थानों, में किसी भी परीक्षा में अनियमितता हो, उस पर राजनीति नहीं, कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। हमारा मानना है कि दोषी का दल नहीं देखा जाना चाहिए; केवल अपराध देखा जाना चाहिए। मैं विपक्षी दलों से पूछना चाहता हूँ, जब विद्यार्थी चिंतित हों, तब क्या हमारा काम उनकी पीड़ा को राजनीतिक मंच बनाना है, या उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए कानून को मजबूत करना है? छात्रों की चिंता को चुनावी नारा बनाना आसान है; उनकी मेहनत को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाना कठिन है, और मोदी सरकार ने कठिन रास्ता चुना है।”

  • नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की

    नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी ने जांच के दौरान जुटाए गए सैकड़ों गवाहों के बयान, दस्तावेज और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की है।’

    सीबीआई के अनुसार, चार्जशीट में 360 गवाहों के बयान, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है। जांच में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पाए गए हैं। फिलहाल सभी 13 आरोपित न्यायिक हिरासत में हैं।

    एजेंसी ने बताया कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद 12 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के लिए 72 अधिकारियों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की गई। इसके बाद महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में 92 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

    जांच के दौरान प्रश्नपत्र लीक की पूरी श्रृंखला का खुलासा हुआ। गिरफ्तार आरोपितों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञ, कई कथित बिचौलिये तथा दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े पदाधिकारी शामिल हैं।

    चार्जशीट में शामिल आरोपितों के नाम इस प्रकार हैं:

    • मनीषा मंधारे (जीवविज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (रसायन विज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय हवलदार (भौतिकी विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय वाघमारे
    • धनंजय निवृत्ति लोखंडे
    • शुभम मधुकर खैरनार
    • यश यादव
    • मांगीलाल बिवाल
    • विकास बिवाल
    • दिनेश बिवाल
    • डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे
    • शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर (आरसीसी कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के संचालक)
    • तेजस हर्षदकुमार शाह (एपीएमए कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में भौतिकी संकाय एवं मुख्य परिचालन अधिकारी)

    सीबीआई ने जांच के दौरान आरोपितों के कथित आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की है। एजेंसी ने कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिए हैं। मामले की आगे की सुनवाई विशेष अदालत में होगी, जबकि जांच के अन्य पहलुओं पर भी कार्रवाई जारी है।

  • ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आम नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ और उद्योगों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सुधारों की पहचान कर उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सुधारों की निगरानी और प्रगति के मूल्यांकन के लिए पीएमरेफ पोर्टल पर नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल भी शुरू किया है।

    सरकार के अनुसार नया मॉड्यूल मंगलवार से कार्य करना शुरू कर चुका है और यह सभी मंत्रालयों एवं विभागों के लिए एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। इस पोर्टल पर विभिन्न मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक उपायों और सुशासन से जुड़ी पहलों का विस्तृत विवरण अपलोड करेंगे। इससे सभी सुधारात्मक प्रयासों का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करना आसान होगा।

    केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक मंत्रालय ऐसे सुधारों की पहचान करे जो आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाएं, प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाएं तथा उद्योगों के लिए कारोबार करना अधिक सुगम बनाएं। ये सुधार उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की सिफारिशों, अनौपचारिक मंत्रिसमूह (आईजीओएम) के सुझावों अथवा संबंधित मंत्रालयों द्वारा स्वयं तैयार किए गए प्रस्तावों पर आधारित हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि विभागीय स्तर पर नवाचार और सुधारों को बढ़ावा देने से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    नई व्यवस्था के तहत सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपनी सभी सुधार संबंधी पहलों का विवरण पीएमरेफ पोर्टल पर अपलोड करें और समय-समय पर उनकी प्रगति को अपडेट करते रहें। जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मंत्रालय को हर सप्ताह शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक अपनी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इससे विभिन्न योजनाओं और सुधारों की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी तथा आवश्यक होने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

    सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सुधार प्रक्रिया को एक व्यवस्थित और संस्थागत ढांचे के तहत संचालित करना है, ताकि विभिन्न मंत्रालयों में लागू किए जा रहे नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन किया जा सके। इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और सुधार संबंधी पहलों के क्रियान्वयन में भी गति आएगी। साथ ही विभिन्न विभागों के सफल अनुभवों को साझा कर अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने का अवसर मिलेगा।

    पीएमरेफ (प्रधानमंत्री रिफरेंस/रिफॉर्म्स) पोर्टल प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है। यह नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक पहलों और प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं की निगरानी के साथ-साथ अन्य सरकारी निगरानी प्रणालियों से भी जुड़ा हुआ है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों, निर्णयों और विभिन्न संदर्भों की प्रगति पर भी नजर रखी जाती है। सरकार को उम्मीद है कि नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल प्रशासनिक सुधारों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।