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  • इंडिया गठबंधन में कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं…. इंडिया गठबंधन में सहयोगियों दलों ने खोला मोर्चा

    इंडिया गठबंधन में कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं…. इंडिया गठबंधन में सहयोगियों दलों ने खोला मोर्चा


    नई दिल्ली।
    हाल ही में तमिलनाडु (Tamil Nadu), केरल (Kerala) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) के बाद ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन में दरारें गहरी होती जा रही हैं। सोमवार को नई दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की अहम बैठक में वीसीके (VCK) और वामपंथी दलों ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर जोरदार हमला बोला है। तमिलनाडु की सत्ता से बाहर हुई डीएमके की नाराजगी इस कदर बढ़ गई है कि उसने गठबंधन में कांग्रेस के मौजूद रहने पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

    डीएमके की दो टूक- ‘कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं’
    डीएमके के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा तभी बनेगी, जब कांग्रेस इस गुट का हिस्सा नहीं होगी। डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “हम चुनाव प्रणाली ‘SIR’ के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भेजे जाने वाले पत्र पर भी हस्ताक्षर नहीं करेंगे।” नई दिल्ली में हुई इस बैठक में कांग्रेस द्वारा डीएमके से नाता तोड़ने का मुद्दा पूरी तरह छाया रहा और सहयोगियों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी।


    राहुल गांधी पर वामदलों का सीधा हमला

    केरल में कांग्रेस और वामदलों के बीच की तल्खी बैठक के दौरान खुलकर सामने आ गई। सीपीएम नेता जॉन ब्रिटास, सीपीआई के संतोष कुमार और डी. राजा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने केरल चुनाव के दौरान लेफ्ट को ‘बीजेपी की बी-टीम’ बताया था।

    वामपंथी नेताओं ने डीएमके के गठबंधन से अलग होने के लिए कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया और कई आरोप लगाए। जैसे- कांग्रेस ने तमिलनाडु चुनाव खत्म होने के ठीक बाद अचानक टीवीके (TVK) के पाले में जाकर द्रविड़ पार्टी (डीएमके) को उकसाने का काम किया है। कांग्रेस के इसी रवैये के कारण डीएमके ने गठबंधन छोड़ने जैसा बड़ा कदम उठाया।


    कांग्रेस की रणनीति से बिखर रहा है विपक्ष: वीसीके

    बैठक के दौरान वीसीके (VCK) के प्रमुख तोल थिरुमावलवन ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पार्टी के हालिया फैसलों ने कई सहयोगी दलों के भीतर गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। उन्होंने गठबंधन के भविष्य पर चिंता जताते हुए कुछ अहम बिंदु रखे: जैसे- केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कांग्रेस की जो रणनीति रही है, उसने गठबंधन के उन प्रमुख स्तंभों को कमजोर किया है जो अब तक मजबूती से खड़े थे। कांग्रेस के इस रवैये से मुख्य रूप से डीएमके, टीएमसी (TMC) और सीपीएम (CPM) जैसी अहम पार्टियों को नुकसान पहुंचा है। वीसीके प्रमुख ने स्पष्ट किया कि विपक्षी एकजुटता के बड़े लक्ष्य को देखते हुए कांग्रेस की यह रणनीति न तो वांछनीय है और न ही किसी भी तरह से फायदेमंद।

    सूत्रों ने बताया कि बैठक में शामिल माकपा के राज्यसभा सदस्य ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों का विषय उठाया। भाकपा महासचिव डी राजा ने भी इसको लेकर नाराजगी जताई कि राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद कांग्रेस द्वारा केरल में वाम नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए।

    सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नीति के तहत पार्टी की ओर से चुनाव में एक विषय उठाया गया था। विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं ने भी कहा कि अब इन बातों को भूलकर आगे बढ़ना है और मिलकर भाजपा का मुकाबला करना है। सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने कहा कि गठबंधन के घटक दलों को एक दूसरे की आलोचना से बचना चाहिए।


    क्या रहा बैठक का नतीजा?

    विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक में शामिल कई नेताओं ने पुराने गिले-शिकवे भूलकर, बड़ा दिल दिखाते हुए और एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा मोदी सरकार को चुनौती देने का सुझाव दिया।

    सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इस बात की जोरदार पैरवी की कि गठबंधन में शामिल दलों को एक दूसरे की आलोचना करने से बचना चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस गठबंधन को लेकर उनके रुख में बड़ा बदलाव आया है।

    बैठक में ममता और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात भी हुई। सूत्रों ने बताया कि बैठक औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ममता ने सोनिया गांधी से करीब 10 मिनट लंबी बातचीत की। कांग्रेस ने दोनों नेताओं की एक-दूसरे को गले लगाते हुए तस्वीर भी अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा की।

  • केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर

    केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर


    नई दिल्ली।
    देश में हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (Domestic LPG Cylinder Prices) में तेल वितरण कंपनियों ने 29 रुपये की बढ़ोतरी कर महंगाई का बम फोड़ा था. ये तीन महीने में 14.2 किलोग्राम वाले LPG Cylinder की कीमत में दूसरी बढ़ोतरी थी. सिलेंडर महंगा होने के बाद अब सरकार (Government) ने उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojna) के लाभार्थियों को बड़ा झटका दिया है. इस सरकारी स्कीम के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती की गई है।

    इसके साथ ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर DBT मिलता था।


    9 नहीं, अब सिर्फ 4 सिलेंडर

    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत अब तक लाभार्थियों के लिए रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 थी, जिसे कम करते हुए सरकार ने सिर्फ 4 कर दिया है. केंद्र सरकार के इस बड़े फैसले को लेकर अधिकारियों ने बताया कि ये कदम वित्तीय सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप बनाता है।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने इस संबंध में कहा कि संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है.


    2016 में शुरुआत, अब तक ऐसे घटी संख्या

    मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की थी और इसका उद्देश्य वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना था. योजना की शुरुआत में इसके लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिए जाते थे. लेकिन फिर सरकार ने इस वार्षिक कोटे को कम करते 9 कर दिया था और अब इसे घटाकर सिर्फ चार करने का फैसला लिया गया है.

    उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर पर सरकार सब्सिडी (LPG Cylinder Subsidy) भी देती है. इन्हें किफायती बनाए रखने के लिए सरकार ने मई 2022 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की, जिसे अगले साल यानी अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया था. सरकार की ओर से दी जाने वाली ये एलपीजी सब्सिडी हर रिफिल खरीद के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा की जाती है।


    उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर का दाम

    बता दें कि 7 जून को घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये हो गई. इससे पहले 7 मार्च को तेल वितरण कंपनियों ने 60 रुपये की बढ़ोतरी की थी. इस हिसाब से 300 रुपये की सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अपने पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होगा.

    पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने 2022 से अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं. हाल ही में घरेलू खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, सरकारी तेल विपणन कंपनियां बेचे गए प्रत्येक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं।

  • लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म

    लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म


    नई दिल्ली।
    लक्षद्वीप (Lakshadweep) को लेकर केंद्र सरकार (Central government) ने बड़ा फैसला किया है। यहां 47 साल पहले लागू की गई शराबबंदी (Prohibition of alcohol) अब खत्म कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक द्वीपसमहू में पर्यटन को बढ़ावा देने और राजस्व के लिए सरकार ने यह फैसला किया है। आपको बता दें कि लक्षद्वीप में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। ऐसे में इस्लामिक सिद्धातों को देखते हुए यहां 1979 में शराबबंदी लागू की गई थी। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से लक्षद्वीप के लोग खुश नहीं हैं।


    क्यों हटा ली गई शराबबंदी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने लक्षद्वीप एक्साइज रेग्युलेशन 2026 पर साइन कर दिए हैं। इसके बाद लक्षद्वीप प्रोहिबिशन रेग्युलेश 1979 को वापस ले लिया गया है। केंद्र सरकार लक्षद्वीप को वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। ऐसे में विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए रेस्तरां और होटलों में शराब उपलब्ध करवाने और रेवेन्यू जनरेट करने के लिए सरकार ने लगभग 50 साल पुराना कानून वापस ले लिया है।

    नए नियमों के मुताबिक नियंत्रित तरीके से द्वीपसमूह में शराब बेची जा सकगी। सरकार को इससे बड़ा मुनाफा होने वाला है. सरकार शराब पर एक्साइज ड्यूटी, लाइसेंस फीस और अन्य चार्ज लगाकर कमाई करेगी। पूरी तरह से लागू की गई शराबबंदी को नए कानून ने रिप्लेस कर दिया है और अब नियंत्रित करीके से शराब की मैन्युफेक्चरिंग, आयात, निर्यात, ट्रांसपोर्ट और बिक्री को लागू किया जाएगा। साथ ही सरकार इन सारी गतिविधियों पर पूरी नजर रखेगी।


    कैसे काम करेगा नया नियम

    रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि शराब को मनमाने तरीके से बेचने की छूट दे दी गई है। इसपर सरकार का पूर् नियंत्रण होगा। देसी और विदेशी शराब पर 400 फीसदी का आबकारी कर लगाया गया है। इसके अलावा बियर पर 200 फीसदी और वाइन पर 80 पर्सेंट का कर वसूला जाएगा। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट एजेंसियां शराब बिक्री के लिए लाइसेंस ले सकती हैं। 21 साल से नीचे वालों को शराब बेचने की अनुमति नहीं होगी।


    क्यों है इस फैसले पर विवाद कि आशंका

    लक्षद्वीप में 96.5 पर्सेंट मुसलमान रहते हैं। 1979 में शराबबंदी इस्लामिक सिद्धातों को ध्यान में रखकर ही की गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां शराब बेचने की अनुमति देकर माहौल बिगाड़ने का ही प्रयास है। अपने फायदे के लिए सरकार समाज को दूषित करना चाहती है। लक्षद्वीप से सांसद हमदुल्लाह सईद ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह से सरकार की उपलब्धता से युवाओं को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। वे नशे के आदी हो जाएंगे और फिर लक्षद्वीप में भी अपराध बढ़ने लगेंगे।

  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक, INDIA गठबंधन की बैठक में पांच अहम प्रस्तावों पर सहमति

    शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक, INDIA गठबंधन की बैठक में पांच अहम प्रस्तावों पर सहमति

    नई दिल्ली । विपक्षी गठबंधन INDIA alliance की 7वीं महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और हालिया चुनावों के बाद की रणनीति पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में शामिल दलों ने कई मुद्दों पर एकजुट रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

    बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि गठबंधन में शामिल 25 राजनीतिक दलों ने पांच प्रमुख प्रस्तावों पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा करना, चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देना है।

    बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णयों में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने पर सहमति शामिल है। गठबंधन का कहना है कि मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मामलों पर गंभीर चिंता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जाएगा। इसके साथ ही NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग को भी बैठक में समर्थन मिला।

    गठबंधन नेताओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि इस स्थिति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और उच्च स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसी कारण शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग को एजेंडे में शामिल किया गया।

    बैठक में आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा हुई और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी गई। विपक्षी दलों ने कहा कि महंगाई, रोजगार और निवेश की धीमी रफ्तार देश की आर्थिक चुनौतियों को बढ़ा रही है। इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई।

    गठबंधन ने यह भी निर्णय लिया कि अब से हर दो महीने में नियमित रूप से बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि राजनीतिक रणनीति और साझा मुद्दों पर लगातार समन्वय बना रहे। अगली बैठक हैदराबाद में निर्धारित की गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    बैठक में यह भी कहा गया कि संसद के भीतर विपक्षी दलों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा, ताकि सरकार से जुड़े मुद्दों पर एक संयुक्त और प्रभावी आवाज उठाई जा सके। नेताओं ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और विपक्षी दलों के साथ भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा की जरूरत है।

    इस बैठक में कई प्रमुख क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल शामिल हुए, जबकि कुछ दलों ने वर्चुअल रूप से भाग लिया। हालांकि कुछ राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही, लेकिन कुल मिलाकर बैठक को विपक्षी एकजुटता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    गठबंधन ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना है। बैठक के अंत में यह संदेश भी दिया गया कि आने वाले समय में विपक्षी एकता और समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाएगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच तैयार किया जा सके।

  • सूर्य की सतह पर सक्रिय ‘4461 रीजन’ से निकला शक्तिशाली विस्फोट, धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर खतरा, अंतरिक्ष एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी

    सूर्य की सतह पर सक्रिय ‘4461 रीजन’ से निकला शक्तिशाली विस्फोट, धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर खतरा, अंतरिक्ष एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी

    नई दिल्ली । सूर्य की सतह पर हाल ही में हुए शक्तिशाली सौर विस्फोट के बाद धरती की ओर तेजी से एक मैग्नेटिक महातूफान बढ़ने की स्थिति बन गई है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस सौर गतिविधि को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि इसका प्रभाव पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर पड़ सकता है। इस घटना के कारण अंतरिक्ष मौसम में अस्थिरता देखी जा रही है और कई क्षेत्रों में इसका असर महसूस होने की संभावना जताई गई है।

    वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य के सक्रिय क्षेत्र 4461 में 6 जून 2026 की सुबह एक तेज सोलर फ्लेयर दर्ज किया गया, जिसे M1.8 श्रेणी में रखा गया है। इस विस्फोट के साथ एक भारी और अत्यधिक चुंबकीय फिलामेंट भी अंतरिक्ष में निकला, जो लगभग 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की तेज रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। यह स्थिति वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि इस तरह के फिलामेंट सीधे तौर पर पृथ्वी के अंतरिक्ष वातावरण को प्रभावित कर सकते हैं।

    नासा और स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने इसे G3 श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान यानी जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म घोषित किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक जब सौर कण पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से टकराते हैं, तो इससे अंतरिक्ष मौसम में बदलाव आता है, जिसका असर संचार प्रणालियों, उपग्रहों और बिजली नेटवर्क पर भी पड़ सकता है। हालांकि इसे एक प्राकृतिक खगोलीय घटना माना जाता है, लेकिन इसकी तीव्रता अधिक होने पर तकनीकी सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं।

    वैज्ञानिकों ने बताया कि सूर्य के जिस क्षेत्र से यह विस्फोट हुआ है, वहां चुंबकीय रेखाएं असामान्य रूप से मुड़ी हुई थीं, जिससे अत्यधिक ऊर्जा एकत्रित हो गई। जब यह ऊर्जा अचानक रिलीज हुई, तो तेज एक्स-रे विकिरण भी उत्पन्न हुआ, जिसने कुछ समय के लिए रेडियो संचार में व्यवधान पैदा किया। यह प्रक्रिया सौर गतिविधियों के सामान्य चक्र का हिस्सा होती है, लेकिन इस बार इसकी तीव्रता अधिक देखी गई है।

    अंतरिक्ष मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलामेंट सूर्य के कोरोना क्षेत्र में मौजूद ठंडी और घनी प्लाज्मा संरचना होती है। जब इसे थामे रखने वाला चुंबकीय संतुलन बिगड़ता है, तो यह अंतरिक्ष में तेजी से फैल जाता है। यही प्रक्रिया इस बार के सौर विस्फोट में देखी गई है, जिसे वैज्ञानिक बेहद महत्वपूर्ण घटना मान रहे हैं।

    इस सौर गतिविधि का एक सकारात्मक प्रभाव भी हो सकता है, जिसमें पृथ्वी के ध्रुवीय और कुछ उच्च अक्षांश क्षेत्रों में ऑरोरा यानी उत्तरी रोशनी का शानदार दृश्य दिखाई दे सकता है। यह दृश्य हरे, बैंगनी और लाल रंग की चमकदार रोशनी के रूप में आसमान में नजर आता है। आमतौर पर यह नजारा उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्रों में दिखता है, लेकिन G3 या उससे अधिक तीव्रता के तूफानों में यह निचले अक्षांश क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।

    यदि मौसम और आकाशीय स्थितियां अनुकूल रहीं, तो उत्तरी भारत के कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड के हिस्सों में भी इस दुर्लभ खगोलीय दृश्य के दिखने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह अंतरिक्ष मौसम की स्थिति और तूफान की तीव्रता पर निर्भर करेगा।

    अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार इस सौर तूफान की निगरानी कर रही हैं और उपग्रहों के माध्यम से इसके प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अगले कुछ दिनों में इसके प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आ सकते हैं।

  • विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया

    विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु में राजनीतिक और डिजिटल अभिव्यक्ति से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जहां सरकार की नीतियों और योजनाओं पर सवाल उठाने के आरोप में एक यूट्यूबर को हिरासत में लिया गया है। चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर मारिदास को उनके मदुरई स्थित आवास से हिरासत में लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मुख्यमंत्री विजय और राज्य सरकार की योजनाओं के खिलाफ लगातार मानहानिकारक टिप्पणियां कीं।

    सूत्रों के अनुसार, यूट्यूबर मारिदास लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और सरकार की नई योजनाओं तथा घोषणाओं को लेकर लगातार आलोचनात्मक पोस्ट कर रहे थे। वे अक्सर आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर यह सवाल उठाते थे कि क्या सरकार द्वारा घोषित योजनाएं वास्तविक रूप से लागू हो पाएंगी या नहीं। उनकी टिप्पणियों को लेकर समर्थन और विरोध दोनों ही तरह की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही थीं।

    मामले में तब गंभीर मोड़ आया जब उनके खिलाफ चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यूट्यूबर द्वारा प्रसारित की गई जानकारी झूठी और भ्रामक है, जिसका उद्देश्य सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना है। शिकायत के बाद साइबर क्राइम विंग ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की और तथ्यों का मूल्यांकन किया।

    जांच के आधार पर सोमवार को एक विशेष पुलिस टीम मदुरई पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से यूट्यूबर को उनके घर से हिरासत में ले लिया गया। उन्हें आगे की पूछताछ के लिए चेन्नई ले जाया जा रहा है, जहां उनसे आरोपों को लेकर विस्तृत सवाल-जवाब किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर क्राइम विंग द्वारा दर्ज एक मामले के तहत की गई है।

    अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह तय किया जा रहा है कि किन धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली जानकारी की सत्यता की जांच जरूरी है, खासकर तब जब वह किसी सार्वजनिक व्यक्ति या सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़ी हो।

    वहीं, यूट्यूबर मारिदास पहले भी अपने राजनीतिक बयानों और आलोचनात्मक टिप्पणियों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। उनके बड़े फॉलोअर्स बेस के कारण उनके पोस्ट अक्सर चर्चा में आते रहे हैं। इस ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की सीमाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।

    फिलहाल पुलिस हिरासत और जांच प्रक्रिया जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्टता आने की संभावना है।

  • महिला वकीलों को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा रोडमैप, CJI सूर्यकांत ने 50% प्रतिनिधित्व की वकालत कर दिया स्पष्ट संदेश

    महिला वकीलों को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा रोडमैप, CJI सूर्यकांत ने 50% प्रतिनिधित्व की वकालत कर दिया स्पष्ट संदेश

    नई दिल्ली । भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि इस दिशा में एक मजबूत और दीर्घकालिक संस्थागत व्यवस्था तैयार की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रवेश स्तर पर अवसर उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि महिलाएं अपने पूरे पेशेवर जीवन में आगे बढ़ सकें और नेतृत्वकारी भूमिकाओं तक पहुंच सकें।

    लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कानूनी पेशे में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि न्यायिक और कानूनी संस्थाओं में संतुलित भागीदारी समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार करने के उद्देश्य से विभिन्न स्तरों पर कई पहलें शुरू की गई हैं और भविष्य में भी इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान उनसे यह सवाल पूछा गया कि बड़ी संख्या में छात्राएं कानून की पढ़ाई तो करती हैं, लेकिन करियर के मध्य चरण तक पहुंचते-पहुंचते अनेक महिलाएं इस पेशे से बाहर हो जाती हैं। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह एक वास्तविक समस्या है और इसे केवल नीतिगत घोषणाओं से हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए संस्थागत समर्थन, समान अवसर और पेशेवर विकास के अनुकूल वातावरण तैयार करना आवश्यक है।

    उन्होंने बताया कि पहले भी उन्होंने सुझाव दिया था कि सरकारी पैनलों में लॉ ऑफिसर के पदों पर महिलाओं की नियुक्तियों का अनुपात 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की पर्याप्त मौजूदगी न केवल प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है बल्कि न्याय व्यवस्था को अधिक संतुलित और समावेशी भी बनाती है।

    मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि बार काउंसिल, जिला बार एसोसिएशन और अन्य बार संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। उनका उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें महिला वकीलों को नेतृत्व के अवसर भी मिल सकें। उन्होंने संकेत दिया कि संस्थागत सुधारों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी को स्थायी रूप से मजबूत करने की योजना पर कार्य जारी है।

    महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मुद्दे के अलावा मुख्य न्यायाधीश ने भारत की न्यायिक व्यवस्था के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत को अपने संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक वास्तविकताओं, भाषाई विविधता और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप एक स्वदेशी न्यायशास्त्र विकसित करना चाहिए। उनके अनुसार, भारतीय अदालतों को ऐसे कानूनी सिद्धांतों और व्याख्याओं को बढ़ावा देना चाहिए जो देश की विशिष्ट आवश्यकताओं और सामाजिक संदर्भों को प्रतिबिंबित करें।

    उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी बदलावों के दौर में न्यायपालिका को आत्मनिर्भर दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। इसी सोच के तहत भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उनका मानना है कि भविष्य की न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक की भूमिका बढ़ेगी, इसलिए भारत को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप स्वतंत्र और विश्वसनीय डिजिटल ढांचा तैयार करना चाहिए।

    मुख्य न्यायाधीश के इन विचारों को न्यायपालिका में लैंगिक समानता, संस्थागत सुधार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। उनका संदेश स्पष्ट था कि न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, प्रतिनिधिक और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने के लिए व्यापक स्तर पर सुधारों की आवश्यकता है, जिन पर लगातार कार्य किया जा रहा है।

  • 2019 और 2024 की नाकामी के बाद फिर विपक्षी एकजुटता की कवायद, बिखरे इंडिया गठबंधन को नई दिशा देने में जुटीं ममता बनर्जी

    2019 और 2024 की नाकामी के बाद फिर विपक्षी एकजुटता की कवायद, बिखरे इंडिया गठबंधन को नई दिशा देने में जुटीं ममता बनर्जी

    नई दिल्ली । देश की राजनीति में विपक्षी एकजुटता की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजनीति के सामने प्रभावी चुनौती खड़ी करने के उद्देश्य से विभिन्न विपक्षी दल नए सिरे से साझा मंच तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में दिल्ली में आयोजित बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेता एक साथ रणनीति पर विचार कर रहे हैं। इस पूरी कवायद में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की भूमिका विशेष रूप से चर्चा में है।

    पिछले एक दशक में विपक्षी दलों ने कई बार एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा बनाने का प्रयास किया है। वर्ष 2019 के आम चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच तालमेल स्थापित करने की कोशिश हुई थी, जबकि 2024 के चुनावों से पहले भी विभिन्न दलों ने साझा रणनीति पर काम किया। हालांकि इन प्रयासों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित राजनीतिक सफलता नहीं मिल सकी और भाजपा सत्ता में बनी रही। अब एक बार फिर विपक्षी दलों के बीच संवाद और समन्वय की प्रक्रिया शुरू होती दिखाई दे रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहती हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदले हालात और पार्टी के भीतर उभरती चुनौतियों के बीच उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता बढ़ाना भी एक राजनीतिक आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है। यही कारण है कि वे विपक्षी दलों के बीच संवाद स्थापित करने और साझा रणनीति बनाने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रही हैं।

    दिल्ली में आयोजित विपक्षी दलों की बैठक को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में कांग्रेस सहित कई क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिन राजनीतिक दलों के साथ अतीत में मतभेद प्रमुखता से सामने आते रहे, अब उनके साथ सहयोग और समन्वय की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। यह बदलाव विपक्षी राजनीति की बदलती प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है।

    ममता बनर्जी पहले ऐसे राजनीतिक मंच की पक्षधर रही हैं जिसमें कांग्रेस की भूमिका सीमित रहे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उनका रुख अपेक्षाकृत व्यावहारिक दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों के बीच व्यापक सहयोग के लिए अब कांग्रेस की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि विभिन्न विचारधाराओं और क्षेत्रीय हितों वाले दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है।

    विपक्षी खेमे के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल एकजुटता प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि साझा राजनीतिक एजेंडा तैयार करना भी है। पिछले अनुभव बताते हैं कि केवल चुनावी गठबंधन पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मतदाताओं के सामने स्पष्ट दृष्टिकोण और समन्वित रणनीति भी आवश्यक होती है। ऐसे में दिल्ली की यह बैठक भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि विपक्षी दलों की यह नई पहल केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित रहती है या फिर यह एक व्यापक और संगठित राजनीतिक अभियान का रूप लेती है। फिलहाल इतना तय है कि राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष फिर से अपनी सामूहिक ताकत को संगठित करने की कोशिश में जुटा हुआ है और ममता banerjee इस प्रक्रिया के प्रमुख चेहरों में शामिल दिखाई दे रही हैं।

  • शादी से पहले संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- असफल रिश्ता किसी को नैतिक रूप से दोषी नहीं ठहरा सकता

    शादी से पहले संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- असफल रिश्ता किसी को नैतिक रूप से दोषी नहीं ठहरा सकता

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि दो बालिग व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति से बने शादी-पूर्व संबंधों को किसी व्यक्ति के नैतिक चरित्र का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में ऐसे रिश्तों को केवल नैतिक दृष्टिकोण से आंकना उचित नहीं है और केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति के भविष्य या करियर को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

    यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की गई जिसमें तेलंगाना पुलिस भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक उम्मीदवार को नियुक्ति से वंचित कर दिया गया था। उम्मीदवार का चयन पुलिस कांस्टेबल पद के लिए हो चुका था, लेकिन उसके खिलाफ पूर्व में दर्ज एक आपराधिक मामले को आधार बनाकर उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया था। मामला एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा था, जिसमें शादी का वादा कर संबंध बनाने और बाद में विवाह नहीं करने का आरोप लगाया गया था।

    सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि शिकायत और आरोपी के बीच कई वर्षों तक संबंध रहे थे तथा दोनों वयस्क थे। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था और मामला विधिक प्रक्रिया के तहत समाप्त कर दिया गया था। इसके बावजूद भर्ती बोर्ड ने उम्मीदवार की नियुक्ति को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वह नैतिक पतन से जुड़े अपराध में शामिल रहा है और पुलिस सेवा के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता।

    न्यायालय ने भर्ती बोर्ड के इस दृष्टिकोण पर गंभीर आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को नैतिक पतन से जुड़े अपराध का दोषी मानने के लिए केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते। यह साबित होना आवश्यक है कि अपराध वास्तव में हुआ हो और संबंधित व्यक्ति की उसमें स्पष्ट भूमिका रही हो। केवल शिकायत दर्ज होने या बाद में समझौता हो जाने को दोष स्वीकार करने के समान नहीं माना जा सकता।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि उम्मीदवार ने अपने सत्यापन प्रपत्र में मामले की जानकारी छिपाई नहीं थी। उसने पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्यों का उल्लेख किया था। ऐसे में उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित परिस्थितियों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए था। अदालत ने कहा कि सरकारी नियोक्ता उम्मीदवार की उपयुक्तता का परीक्षण कर सकते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया तथ्यों और कानून पर आधारित होनी चाहिए, न कि पूर्वाग्रहों या धारणाओं पर।

    फैसले में अदालत ने सामाजिक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में विवाह से पहले बने सहमति आधारित रिश्ते असामान्य नहीं हैं। ऐसे संबंधों को किसी व्यक्ति के चरित्र या नैतिकता का अंतिम पैमाना नहीं बनाया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून दो अविवाहित बालिग व्यक्तियों को अपनी इच्छा से संबंध बनाने से नहीं रोकता। इसलिए केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति को नैतिक रूप से दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।

    अदालत ने यह भी कहा कि हर रिश्ता विवाह तक पहुंचे, यह आवश्यक नहीं है। किसी संबंध का समाप्त हो जाना अपने आप में धोखाधड़ी या आपराधिक कृत्य का प्रमाण नहीं बनता। मानवीय संबंध जटिल होते हैं और हर असफल संबंध को अपराध की दृष्टि से नहीं देखा जा सकता। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व निर्णय को निरस्त करते हुए उम्मीदवार की नियुक्ति पर पुनर्विचार का

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP ने तेज किया अभियान, अभिजीत दीपके बोले- छात्रों के भविष्य के सवाल पर अब राज्यों तक पहुंचेगा आंदोलन

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP ने तेज किया अभियान, अभिजीत दीपके बोले- छात्रों के भविष्य के सवाल पर अब राज्यों तक पहुंचेगा आंदोलन

    नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की घोषणा की है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि यदि 13 जून 2026 तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो वह स्वयं विभिन्न राज्यों और शहरों में जाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और इस मुद्दे पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

    छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन और बाद में जारी एक वीडियो संदेश में दीपके ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी प्रकार की अराजकता फैलाना नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं की चिंताओं को लोकतांत्रिक तरीके से सामने लाना है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा तक सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जाता तो आंदोलन का अगला चरण देश के अलग-अलग हिस्सों में शुरू किया जाएगा।

    दीपके ने बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन को व्यापक समर्थन मिला था। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उनके अनुसार यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा, जिसने युवाओं की नाराजगी और उनकी अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने कहा कि आने वाले कार्यक्रम भी इसी प्रकार लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से आयोजित किए जाएंगे।

    नेपाल और बांग्लादेश में हाल के वर्षों में युवाओं द्वारा किए गए आंदोलनों के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा कि भारत की परिस्थितियां अलग हैं और यहां के आंदोलन की तुलना पड़ोसी देशों की घटनाओं से नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके अभियान को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि उनका संगठन संवैधानिक और शांतिपूर्ण माध्यमों से अपनी मांगें रख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था मौजूद है और उसी व्यवस्था के भीतर रहकर आंदोलन संचालित किया जाएगा।

    CJP प्रमुख ने यह भी कहा कि यदि राज्यों में प्रस्तावित प्रदर्शन के बाद भी उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता तो देशभर के छात्रों को एकजुट कर पुनः नई दिल्ली में बड़ा आंदोलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है और जब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक अभियान जारी रहेगा।

    मई महीने में एक ऑनलाइन पहल के रूप में शुरू हुआ CJP अभियान कम समय में युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर संगठन को व्यापक समर्थन मिला है और इसके डिजिटल प्लेटफॉर्म से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं। इसी आधार पर संगठन ने हाल के दिनों में जमीनी स्तर पर भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है।

    दीपके ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है और इसका केंद्र केवल छात्रों तथा युवाओं से जुड़े मुद्दे हैं। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने और कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा।