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  • महिला आरक्षण में ‘कोटा के भीतर कोटा’: SC-ST महिलाओं को भी मिलेगा एक-तिहाई आरक्षण, जानिए बिल में क्या है नया?

    महिला आरक्षण में ‘कोटा के भीतर कोटा’: SC-ST महिलाओं को भी मिलेगा एक-तिहाई आरक्षण, जानिए बिल में क्या है नया?

    नई दिल्ली। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान अब पहले से आरक्षित सीटों पर भी लागू किया जाएगा। इसके तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में से एक-तिहाई सीटें उसी वर्ग की महिलाओं के लिए तय होंगी।

    आरक्षण के भीतर आरक्षण का फॉर्मूला
    सरकारी सूत्रों के मुताबिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत महिला आरक्षण सभी श्रेणियों सामान्य, SC और ST पर समान रूप से लागू किया जाएगा। यानी हर श्रेणी की लगभग एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जिससे “कोटा के भीतर कोटा” की व्यवस्था लागू होगी।

    परिसीमन के बाद बढ़ेंगी सीटें
    वर्तमान में लोकसभा की करीब 24 प्रतिशत सीटें SC और ST वर्ग के लिए आरक्षित हैं। परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ने के साथ यह अनुपात भी उसी हिसाब से बढ़ेगा। इसके बाद महिला आरक्षण लागू होने पर SC और ST वर्ग में भी महिलाओं के लिए अलग कोटा तय होगा।

    सरकार का दावा
    सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन के बाद सभी राज्यों की लोकसभा सीटें समान अनुपात में बढ़ाई जाएंगी, जिससे किसी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों की सीटों में कटौती के आरोपों को सरकार ने खारिज किया है।

    विपक्ष पर आरोप
    सरकारी पक्ष का कहना है कि जनगणना और परिसीमन को लेकर विपक्ष का रुख लगातार बदल रहा है। 2023 में जहां विपक्ष ने जनगणना का इंतजार न करने की बात कही थी, वहीं अब वह प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। सरकार ने इसे पूरी तरह तय प्रक्रिया बताते हुए किसी भी बदलाव से इनकार किया है।

  • अमरावती यौन शोषण मामले में मुख्य आरोपी के घर पर चला बुलडोजर, SIT कर रही जांच

    अमरावती यौन शोषण मामले में मुख्य आरोपी के घर पर चला बुलडोजर, SIT कर रही जांच


    नई दिल्ली
    /अमरावती। महाराष्ट्र के अमरावती जिले में लड़कियों को झांसा देकर यौन उत्पीड़न करने और आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। बुधवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अयान अहमद तनवीर अहमद (19) के घर पर बुलडोजर चलाया।

    परतवाड़ा निवासी अयान अहमद को इस मामले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है और वह एक राजनीतिक दल का कार्यकर्ता भी है। पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें अदालत ने 21 अप्रैल तक पुलिस रिमांड में भेज दिया है। मामले की जांच के लिए आईपीएस डॉ. शुभम कुमार के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।

    जांच अब कई गंभीर पहलुओं पर केंद्रित है, जिनमें संगठित शोषण नेटवर्क, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्मांतरण के आरोप शामिल हैं। भाजपा सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने दावा किया है कि यह नेटवर्क अन्य शहरों तक फैला हो सकता है। वहीं प्रशासन ने कहा है कि सभी एंगल से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    मोबाइल से मिले आपत्तिजनक वीडियो और फोटो
    पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मामले में 180 से अधिक लड़कियों के शोषण और 350 से ज्यादा आपत्तिजनक फोटो-वीडियो के प्रसार की आशंका है। आरोपियों ने कथित तौर पर ट्यूशन और कोचिंग सेंटरों के बाहर लड़कियों को निशाना बनाया। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं, जिनसे अब तक 18 वीडियो और 39 तस्वीरें बरामद की गई हैं। गिरफ्तार आरोपियों में उजेर इकबाल खान, तबरेज खान तसलीम खान और मोहम्मद साद मोहम्मद साबिर शामिल हैं। पुलिस ने पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

  • महिलाओं को 33% आरक्षण… आज संसद में पेश होंगे 3 बिल… सत्तापक्ष के पास LS में 67 और RS में 21 सीट कम

    महिलाओं को 33% आरक्षण… आज संसद में पेश होंगे 3 बिल… सत्तापक्ष के पास LS में 67 और RS में 21 सीट कम


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) में आज एकसाथ तीन-तीन विधेयक पेश किए जाने वाले हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के लोकसभा चुनावों (Lok Sabha elections) से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया को अमली जामा पहना दिया जाए। लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए आज से संसद का विशेष सत्र रखा गया है। इसमें लोकसभा में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए बिल लाया जाएगा। इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इन्हीं से संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।

    ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (‘Women’s Empowerment Act’) के तहत महिलाओं को मिलने वाला कोटा परिसीमन और जनगणना से जुड़ा है। केंद्र सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने और महिला आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है।


    सरकार कैसे पास कराएगी विधेयक? जानें नंबर गेम

    परिसीमन विधेयक को छोड़कर, अन्य दो विधेयक संविधान संशोधन विधेयक हैं। इन्हें पारित करने के लिए संसद में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। विपक्ष का वॉकआउट बहुमत के आंकड़े को कम कर सकता है। लोकसभा दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 है। सत्ताधारी NDA के पास 293 सदस्य हैं। यानी उसे अभी भी 67 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। राज्यसभा में बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 163 है। NDA की वर्तमान ताकत 142 के आसपास है, जो उसे बहुमत के आंकड़े से 21 सीट दूर रखती है।

    विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के समर्थक हैं, लेकिन सरकार द्वारा इसे परिसीमन और 2029 के चुनावों से जोड़ने के कारण वे इन विधेयकों का विरोध करने को मजबूर हैं।


    क्षेत्रीय संतुलन का डर

    विपक्ष का तर्क है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण केवल NDA को लाभ पहुंचाएगा। इसके अलावा, यह दक्षिण भारतीय राज्यों की संसदीय शक्ति को कम कर सकता है और उन्हें हाशिए पर धकेल सकता है।


    राहुल गांधी का आरोप

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया (X) पर आरोप लगाया कि सरकार की योजना 2029 के लिए सीटों का अपनी सुविधानुसार सीमाओं में बदलाव करने की है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संवैधानिक सुरक्षा उपायों को हटाकर पूरी शक्ति सरकार द्वारा नियुक्त आयोग को देता है।


    लोकसभा की सीटों में भारी वृद्धि

    प्रस्तावित विधेयकों के तहत परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 815 तक हो सकती है। केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए यह संख्या 35 हो सकती है। वर्तमान में राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य चुनकर आते हैं।


    क्षेत्रीय दलों का बदलता रुख

    BJD और BRS जैसे दल अक्सर मुद्दों के आधार पर सरकार का समर्थन करते रहे हैं> उन्होंने परिसीमन के मुद्दे पर अपना रुख कड़ा कर लिया है। इससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।


    सरकार का भरोसा- सब साथ हैं

    तमाम विरोधों के बावजूद सरकार का दावा है कि उनके पास पर्याप्त आंकड़े हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कोई भी दल सिद्धांत रूप में महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा है और इस भावना के साथ सभी एक साथ हैं।

  • Pawan Khera केस पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, तेलंगाना HC के आदेश पर लगी रोक

    Pawan Khera केस पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, तेलंगाना HC के आदेश पर लगी रोक


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता Pawan Khera को लेकर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम राहत (ट्रांजिट अग्रिम जमानत) के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे अब यह मामला (Pawan Khera Case) और ज्यादा गंभीर हो गया है और कानूनी लड़ाई शीर्ष अदालत तक पहुंच गई है।

    दरअसल, तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे असम की अदालत में जाकर नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें।

    क्या है Pawan Khera Case?
    यह विवाद उस बयान से जुड़ा है जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी पर कुछ आरोप लगाए थे। इसके बाद असम में उनके खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

    एफआईआर दर्ज होने के बाद असम पुलिस उनकी तलाश में जुट गई थी, जिसके चलते उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया। वहां से उन्हें सीमित अवधि के लिए राहत मिली थी।

    अब सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
    असम सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार का कहना है कि इस तरह की राहत जांच को प्रभावित कर सकती है और मामला गंभीर है।

    सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई है, जिससे अब पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, जहां यह तय होगा कि उन्हें राहत मिलती है या नहीं।

    कुल मिलाकर, यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुका है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

  • राज्यसभा डिप्टी लीडर बने Ashok Mittal पर ED की कार्रवाई

    राज्यसभा डिप्टी लीडर बने Ashok Mittal पर ED की कार्रवाई


    नई दिल्ली।  आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद Ashok Mittal के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। यह कार्रवाई पंजाब के जालंधर स्थित उनके आवास पर की जा रही है, जहां जांच एजेंसी की टीम सुबह से ही मौजूद है।

    दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस खंगाले जा रहे
    सूत्रों के मुताबिक, ED की टीम मित्तल के घर पर दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच कर रही है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि यह कार्रवाई किस मामले में की जा रही है। Ashok Mittal हाल ही में चर्चा में आए थे, जब AAP ने Raghav Chadha की जगह उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया था। ऐसे में उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद हुई यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।

    व्यवसाय से शिक्षा तक का सफर
    अशोक मित्तल का जन्म जालंधर में हुआ था। उनके परिवार ने ‘लवली स्वीट्स’ नाम से मिठाई का कारोबार शुरू किया था, जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया। बाद में उन्होंने 2005 में Lovely Professional University की स्थापना की, जो आज देश की बड़ी निजी यूनिवर्सिटीज में शामिल है। इस छापेमारी के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि AAP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी पहले भी केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाती रही है। फिलहाल ED की कार्रवाई जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और जानकारी सामने आने की संभावना है।

  • शहरी विकास को मिलेगा बूस्ट: अर्बन फंड से बढ़ेगी बाजार आधारित फाइनेंसिंग

    शहरी विकास को मिलेगा बूस्ट: अर्बन फंड से बढ़ेगी बाजार आधारित फाइनेंसिंग


    नई दिल्ली। देश के शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री Manohar Lal Khattar ने बुधवार को 1 लाख करोड़ रुपए के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) और क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम (CRGSS) की गाइडलाइंस लॉन्च कीं। इस फंड का मकसद बाजार आधारित फाइनेंसिंग के जरिए करीब चार गुना यानी 4 लाख करोड़ रुपए तक निवेश जुटाना है।

     सरकारी पैसे से खींचेंगे निजी निवेश
    कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि यह फंड शहरी विकास के तरीके में बड़ा बदलाव लाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी पूंजी का उपयोग कर निजी और संस्थागत निवेश को आकर्षित करना है।
    Government of India की इस पहल से शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें निवेश के लिए आकर्षक बनाया जाएगा।

    ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में बड़ा कदम
    मंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच शहर अब आर्थिक विकास, इनोवेशन और रोजगार के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। ऐसे में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर प्लानिंग, फाइनेंसिंग और गवर्नेंस बेहद जरूरी है।

    कहां खर्च होगा पैसा?
    इस 1 लाख करोड़ रुपए के फंड का इस्तेमाल कई अहम प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा—
    पुराने शहरों और बाजारों का पुनर्विकास
    शहरी परिवहन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी
    गैर-मोटर चालित परिवहन (साइकिल ट्रैक, पैदल मार्ग)
    पानी, स्वच्छता और क्लाइमेट-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर

    फंडिंग मॉडल क्या होगा?
    इस योजना की खास बात इसका फाइनेंसिंग मॉडल है-
    केंद्र सरकार केवल 25% तक ही फंड देगी
    कम से कम 50% राशि म्यूनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन और PPP मॉडल से जुटाई जाएगी
    इससे शहरों को आत्मनिर्भर बनने और बाजार से पूंजी जुटाने की दिशा में बढ़ावा मिलेगा।

     बजट का पूरा ब्रेकअप

    ₹90,000 करोड़ – इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स
    ₹5,000 करोड़ – प्रोजेक्ट तैयारी और क्षमता निर्माण
    ₹5,000 करोड़ – CRGSS (गारंटी स्कीम)

     छोटे शहरों को भी मिलेगा फायदा
    CRGSS स्कीम का खास फोकस टियर-2, टियर-3 शहरों और पहाड़ी व उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों पर रहेगा। इसका उद्देश्य इन शहरों को भी बाजार से फंड जुटाने में सक्षम बनाना है, ताकि विकास सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे।

    ULBs की भूमिका होगी अहम
    मंत्री ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को अपनी वित्तीय क्षमता बढ़ाने और आधुनिक फाइनेंसिंग मॉडल अपनाने पर जोर दिया। इससे शहर खुद अपने विकास के लिए संसाधन जुटा सकेंगे।

     डिजिटल कनेक्टिविटी और साझेदारी को बढ़ावा
    इस मौके पर शहरों को बैंकों, वित्तीय संस्थानों और क्रेडिट एजेंसियों से जोड़ने के लिए एक ई-डायरेक्टरी भी लॉन्च की गई। साथ ही राज्यों और मंत्रालय के बीच MoU तथा निजी क्षेत्र के साथ सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी किए गए।

     कब तक लागू रहेगा फंड?
    सरकार के अनुसार, यह फंड वित्त वर्ष 2026 से 2031 तक लागू रहेगा और इसका लक्ष्य भारतीय शहरों को ‘ग्रोथ हब’ में बदलना है।

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर, महंगाई बढ़ी; दरों पर RBI का रुख नरम

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर, महंगाई बढ़ी; दरों पर RBI का रुख नरम


    नई दिल्ली। देश में बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अब महंगाई पर साफ दिखने लगा है। मार्च 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) में उछाल दर्ज किया गया है, जिससे आने वाले समय में Reserve Bank of India की मौद्रिक नीति पर असर पड़ सकता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।

    ईंधन बना महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह
    रेटिंग एजेंसी ICRA के वरिष्ठ अर्थशास्त्री Rahul Agrawal के अनुसार, थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी व्यापक स्तर पर हुई है, जिसमें क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और ईंधन-ऊर्जा की कीमतों का बड़ा योगदान रहा।
    उन्होंने बताया कि फरवरी की तुलना में मार्च में मुख्य महंगाई में 175 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हुई, जिसमें करीब 150 बेसिस पॉइंट सिर्फ ईंधन और ऊर्जा सेक्टर से आए।

    खाद्य महंगाई स्थिर, गैर-खाद्य में उछाल
    मार्च में खाद्य महंगाई दर 1.8% पर स्थिर रही, लेकिन गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई 3.3% से बढ़कर 3.7% पर पहुंच गई, जो पिछले 41 महीनों का उच्चतम स्तर है। यह संकेत देता है कि उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ने से अन्य वस्तुएं महंगी हो रही हैं।

     वैश्विक कारणों का असर
    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी, शिपिंग और माल ढुलाई लागत में इजाफा और इनपुट लागत बढ़ने से आयात महंगा हो रहा है। इससे अप्रैल में भी महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    डीजल और गैस की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
    CareEdge Ratings की मुख्य अर्थशास्त्री Rajani Sinha के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के चलते थोक डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतों में तेज उछाल आया है।
    मार्च में थोक डीजल की कीमतों में 25% से ज्यादा की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर करीब 310 रुपये महंगे हुए।
    हालांकि खुदरा पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहीं, लेकिन थोक स्तर पर बढ़ोतरी का असर उद्योग और परिवहन पर पड़ा।

    कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी रहेंगी चुनौती
    अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 85-90 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती हैं। इससे परिवारों, सरकार और तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बना रहेगा।
    हालांकि मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन के कारण कंपनियां 100-105 डॉलर प्रति बैरल तक कीमतों को संभाल सकती हैं।

    ब्याज दरों पर क्या होगा असर?
    मौजूदा महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि Reserve Bank of India फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।
    अगर आर्थिक विकास दर कमजोर पड़ती है, तो साल के अंत तक दरों में कटौती पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाई जा सकती है।

  • सुप्रीम कोर्ट सख्त: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक, तीन हफ्ते में जवाब तलब

    सुप्रीम कोर्ट सख्त: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक, तीन हफ्ते में जवाब तलब


    नई दिल्ली।
    पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कांग्रेस नेता को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

    न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने यह आदेश असम सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई एक सप्ताह की ट्रांजिट बेल को चुनौती दी गई थी।

    कोर्ट का स्पष्ट निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक रहेगी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पवन खेड़ा असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो इस आदेश से उस प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की गई है।

    असम सरकार की दलील

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस मामले में तेलंगाना हाई कोर्ट को सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं था, क्योंकि एफआईआर और कथित अपराध दोनों असम में दर्ज हुए हैं। उन्होंने इसे ‘फोरम शॉपिंग’ बताते हुए कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

    क्या है पूरा मामला

    यह विवाद हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भूयान सरमा को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं।

    खेड़ा का पक्ष

    खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और अधिकतम मानहानि का मामला बनता है, जिसमें गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है।

    पहले क्या हुआ था

    तेलंगाना हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। इसी आदेश को चुनौती देते हुए असम सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

    राजनीतिक माहौल गर्म

    इस मामले ने राज्य की सियासत को भी गरमा दिया है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि बीजेपी ने खेड़ा के बयान को गैरजिम्मेदार और मानहानिकारक करार दिया है।

  • राघव चड्ढा को केंद्र से मिली Z सिक्योरिटी, पंजाब सरकार ने छीन ली थी सुरक्षा

    राघव चड्ढा को केंद्र से मिली Z सिक्योरिटी, पंजाब सरकार ने छीन ली थी सुरक्षा


    नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा को केंद्र सरकार ने Z श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई है। इससे पहले पंजाब की AAP सरकार उनकी सुरक्षा वापस ले चुकी थी। सूत्रों के अनुसार खुफिया एजेंसी की थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत दिल्ली और पंजाब में राघव चड्ढा को Z सिक्योरिटी मिलेगी जबकि अन्य स्थानों पर उन्हें Y प्लस सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

    पार्टी में बदली जिम्मेदारियां
    हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। साथ ही सदन में उनके बोलने पर भी रोक लगा दी गई थी। इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय ED ने अशोक मित्तल के जालंधर स्थित आवास और उनकी निजी यूनिवर्सिटी में छापेमारी भी की है।

    खामोश किया जा सकता है हराया नहीं
    पार्टी से मतभेद बढ़ने के बाद राघव चड्ढा ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें बोलने से रोका जा सकता है लेकिन हराया नहीं जा सकता। उन्होंने पार्टी की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का जवाब वीडियो जारी कर दिया।
    AAP नेतृत्व से बढ़ी दूरी
    पंजाब में AAP सरकार बनने के बाद 2022 में राघव चड्ढा को सुरक्षा दी गई थी जो लगातार जारी रही। लेकिन अरविंद केजरीवाल मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे नेताओं के जेल जाने पर उनकी चुप्पी पार्टी नेतृत्व को खली। हालांकि उस समय यह कहा गया कि वे आंखों के इलाज के लिए विदेश गए हुए थे। बाद में जब पार्टी के बड़े नेता जेल से बाहर आए तब भी उनकी सक्रियता कम दिखाई दी। इसके बाद उन्हें राज्यसभा में पद से हटाया गया और अब उनकी सुरक्षा भी वापस ले ली गई थी।

    Z सिक्योरिटी में कैसा होता है सुरक्षा घेरा
    Z श्रेणी की सुरक्षा देश में उच्च स्तर की सुरक्षा मानी जाती है। इसमें लगभग 22 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं जिनमें 4 से 6 NSG कमांडो शामिल होते हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ITBP CRPF और स्थानीय पुलिस के जवान भी इस सुरक्षा घेरे का हिस्सा होते हैं।

  • डिप्टी सीएम से सीएम तक का सफर: Samrat Choudhary की नई जिम्मेदारी और बढ़ी तनख्वाह

    डिप्टी सीएम से सीएम तक का सफर: Samrat Choudhary की नई जिम्मेदारी और बढ़ी तनख्वाह


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Samrat Choudhary ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाल ली है। करीब दो दशकों बाद सत्ता का समीकरण बदलता नजर आ रहा है और इसे ‘सम्राट युग’ की शुरुआत माना जा रहा है। सम्राट चौधरी को भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुना गया, जिसके बाद उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया। उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही राज्य की राजनीति में नई दिशा की उम्मीद जताई जा रही है।

    सैलरी और भत्तों में बदलाव
    मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी सैलरी में भी बढ़ोतरी हुई है। अब उन्हें हर महीने करीब 2 लाख 15 हजार रुपये वेतन मिलेगा। इससे पहले डिप्टी सीएम के तौर पर उनकी आय कम थी, लेकिन अब राज्य के शीर्ष पद पर पहुंचने के बाद उन्हें यह नई सैलरी और भत्ते मिलेंगे। अगर देश के अन्य मुख्यमंत्रियों से तुलना करें तो सैलरी के मामले में बिहार मध्यम स्तर पर आता है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री को सबसे ज्यादा वेतन मिलता है दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बिहार से ज्यादा सैलरी पाते हैं Yogi Adityanath (उत्तर प्रदेश CM) को करीब 3.65 लाख रुपये प्रति माह मिलते हैं

    बंगला और सुरक्षा
    मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी को पटना में VVIP सरकारी आवास मिलेगा। इसके साथ ही उनकी सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। अब उनके पास हाई लेवल सुरक्षा, सरकारी वाहन और पूरा काफिला होगा। मुख्यमंत्री को सरकारी काम के लिए मुफ्त हवाई और रेल यात्रा की सुविधा मिलती है। इसके अलावा उन्हें और उनके परिवार को बेहतर मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। Samrat Choudhary के मुख्यमंत्री बनने से बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने कार्यकाल में राज्य को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।