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  • नीतीश कुमार के करीबी को मिल सकती है नई सरकार में अहम जिम्मेदारी..

    नीतीश कुमार के करीबी को मिल सकती है नई सरकार में अहम जिम्मेदारी..

    नई दिल्ली:   बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सत्ता समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। इस राजनीतिक हलचल के बीच नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है और संभावित मंत्रिमंडल को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसी क्रम में जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता और अनुभवी विधायक विजय कुमार चौधरी का नाम उपमुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में प्रमुखता से सामने आ रहा है।

    नीतीश कुमार के साथ लंबे समय से काम कर रहे विजय कुमार चौधरी बिहार की राजनीति में एक भरोसेमंद और अनुभवी चेहरे के रूप में पहचाने जाते हैं। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ के कारण उन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत रणनीतिक नेता माना जाता है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उनके नाम पर चर्चा यह संकेत दे रही है कि नई सरकार में अनुभव और संतुलन को प्राथमिकता दी जा सकती है।

    विजय कुमार चौधरी का जन्म बिहार के समस्तीपुर जिले में हुआ था और उन्होंने शिक्षा पूरी करने के बाद कुछ समय तक बैंकिंग क्षेत्र में भी कार्य किया, लेकिन बाद में उन्होंने पूरी तरह राजनीति को अपना करियर बना लिया। वे लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और कई बार विधानसभा चुनाव जीतकर जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ साबित कर चुके हैं।

    अपने राजनीतिक सफर में उन्होंने राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है, जिनमें वित्त, जल संसाधन, शिक्षा, ग्रामीण विकास और संसदीय कार्य जैसे अहम मंत्रालय शामिल रहे हैं। इसके अलावा वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने सदन की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में काम किया।

    जातिगत चर्चा के बीच यह भी स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में उपनाम और सामाजिक पहचान अलग-अलग संदर्भों में देखी जाती है, लेकिन विजय कुमार चौधरी की राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से उनके प्रशासनिक कौशल और लंबे अनुभव पर आधारित रही है। वे नीतीश कुमार के करीबी सहयोगियों में गिने जाते हैं और सरकार के निर्णयों में उनकी भूमिका अक्सर महत्वपूर्ण रही है।

    वर्तमान समय में जब एनडीए सरकार के गठन को लेकर मंथन चल रहा है, तब विजय कुमार चौधरी का नाम उपमुख्यमंत्री पद के लिए उभरकर सामने आना यह दर्शाता है कि संगठन अनुभवी और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता दे सकता है। उनकी छवि एक शांत, संतुलित और प्रशासनिक रूप से दक्ष नेता की रही है, जो सरकार की नीतियों को सुचारू रूप से लागू करने में सक्षम माने जाते हैं।

    बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार में किन नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिलती है और क्या विजय कुमार चौधरी को उपमुख्यमंत्री के रूप में बड़ी भूमिका सौंपी जाती है या नहीं, इसका आधिकारिक फैसला आने वाले समय में राजनीतिक दिशा को और स्पष्ट करेगा।

  • भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, मार्च में यात्री वाहनों की बिक्री 16 प्रतिशत उछली

    भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, मार्च में यात्री वाहनों की बिक्री 16 प्रतिशत उछली


    नई दिल्ली:भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग में एक बार फिर सकारात्मक रुझान देखने को मिला है, जहां मार्च में यात्री वाहनों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल बिक्री बढ़कर 4 लाख 42 हजार 460 यूनिट्स तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में स्पष्ट रूप से मजबूत प्रदर्शन को दर्शाती है। यह वृद्धि बाजार में बढ़ती मांग, बेहतर सप्लाई और डीलरशिप स्तर पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के कारण मानी जा रही है।

    पिछले वर्ष मार्च में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 3 लाख 81 हजार 358 यूनिट्स रही थी, जिसके मुकाबले इस साल का आंकड़ा बाजार की रिकवरी और उपभोक्ता विश्वास में सुधार को दर्शाता है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार त्योहारी सीजन से पहले खरीदारी गतिविधियों में तेजी ने भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    दोपहिया वाहनों के सेगमेंट में भी मजबूत उछाल देखने को मिला है। मार्च में इनकी थोक बिक्री 19.3 प्रतिशत बढ़कर 19 लाख 76 हजार 128 यूनिट्स तक पहुंच गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 16 लाख 56 हजार 939 यूनिट्स था। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में सुधार और शहरी क्षेत्रों में आवागमन की बढ़ती जरूरतें इस वृद्धि का प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।

    तिपहिया वाहनों के बाजार में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस सेगमेंट की बिक्री 21.4 प्रतिशत बढ़कर 76 हजार 273 यूनिट्स तक पहुंच गई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 62 हजार 813 यूनिट्स था। इससे यह संकेत मिलता है कि छोटे व्यवसायों और शहरी परिवहन व्यवस्था में इन वाहनों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।

    हाल के महीनों के आंकड़े भी बाजार की मजबूती को दर्शाते हैं, जहां फरवरी में घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी और यह 4 लाख 17 हजार 705 यूनिट्स तक पहुंच गई थी। लगातार दूसरी अवधि में वृद्धि यह संकेत देती है कि ऑटो सेक्टर स्थिर और सकारात्मक गति में बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 में इस क्षेत्र में 7 से 9 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। इसका कारण त्योहारी मांग, नए मॉडलों की लॉन्चिंग और कुछ हद तक आर्थिक स्थिरता को माना जा रहा है। हालांकि वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि दर घटकर 4 से 6 प्रतिशत तक रह सकती है, जिसका कारण उच्च आधार प्रभाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव हो सकता है।

    ऑटोमोबाइल सेक्टर में संरचनात्मक बदलाव भी तेजी से हो रहे हैं। बाजार में यूटिलिटी वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो उपभोक्ताओं की प्रीमियम और आरामदायक वाहनों की ओर बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाती है। साथ ही सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग भी इस सेक्टर को नए रूप में ढाल रही है, जिससे भविष्य में विविधता और तकनीकी बदलाव और तेज होने की संभावना है।

  • तुम हो ना – घर की सुपरस्टार’ में महिलाओं को मिलेगा आत्मविश्वास का मंच, प्रोमो ने बढ़ाई भावनात्मक हलचल

    तुम हो ना – घर की सुपरस्टार’ में महिलाओं को मिलेगा आत्मविश्वास का मंच, प्रोमो ने बढ़ाई भावनात्मक हलचल

    नई दिल्ली:अभिनेता राजीव खंडेलवाल एक बार फिर टेलीविजन पर वापसी करने जा रहे हैं। इस बार वह एक नए गेम आधारित रियलिटी शो ‘तुम हो ना – घर की सुपरस्टार’ में होस्ट की भूमिका निभाते नजर आएंगे। लंबे समय बाद उनकी वापसी को लेकर दर्शकों में उत्साह देखा जा रहा है और माना जा रहा है कि यह शो उनके करियर का एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकता है। यह कार्यक्रम 28 अप्रैल से प्रसारित होने जा रहा है और इसे पारिवारिक मनोरंजन की श्रेणी में रखा गया है।

    यह शो मुख्य रूप से घरेलू महिलाओं की प्रतिभा और उनकी अनकही कहानियों को सामने लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें महिलाओं को अपने परिवार के साथ मंच पर आने और अपनी छुपी हुई क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम का फोकस उन महिलाओं पर है जिन्होंने जिम्मेदारियों और पारिवारिक जीवन के चलते अपने सपनों को पीछे छोड़ दिया, लेकिन आज भी अपने भीतर आत्मविश्वास और प्रतिभा को जीवित रखे हुए हैं।

    शो के प्रोमो में एक भावुक कहानी दिखाई गई है जिसमें एक महिला और उसके पति के बीच संवाद के जरिए जीवन के त्याग और समर्पण को दर्शाया गया है। महिला ने अपने करियर को छोड़कर गृहिणी का जीवन अपनाया, जबकि उसके पति ने उसके फैसले को सम्मान देते हुए हमेशा उसका समर्थन किया। इस भावनात्मक प्रस्तुति ने शो की दिशा और उद्देश्य को स्पष्ट किया है, जिसमें रिश्तों की गहराई और आत्मसम्मान को प्रमुखता दी गई है।

    राजीव खंडेलवाल प्रोमो में प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाते हुए नजर आते हैं और उन्हें आत्मविश्वास के साथ मंच पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। शो में रैंप जैसे मंचीय प्रारूप का उपयोग किया गया है, जहां प्रतिभागी अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व का प्रदर्शन करती दिखाई देंगी। यह प्रारूप कार्यक्रम को पारंपरिक रियलिटी शोज से अलग बनाता है और इसमें एक भावनात्मक और प्रेरणादायक दृष्टिकोण जोड़ा गया है।

    राजीव खंडेलवाल का टेलीविजन और मनोरंजन जगत में लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत छोटे पर्दे से की थी और जल्द ही अपनी दमदार अभिनय शैली के कारण लोकप्रियता हासिल की। इसके बाद उन्होंने कई टेलीविजन प्रोजेक्ट्स और डिजिटल सीरीज में काम किया, जहां उनकी अभिनय क्षमता और स्क्रीन प्रेजेंस को दर्शकों ने सराहा।

    उन्होंने फिल्मों में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया और अलग-अलग किरदारों के जरिए अपनी बहुमुखी प्रतिभा को साबित किया। इसके अलावा वह कई रियलिटी शोज को होस्ट कर चुके हैं, जहां उनकी सहज प्रस्तुति शैली और दर्शकों से जुड़ने की क्षमता को काफी पसंद किया गया।

    लंबे अंतराल के बाद उनकी यह वापसी दर्शकों के लिए खास मानी जा रही है। शो के विषय और प्रस्तुति को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि यह कार्यक्रम न केवल मनोरंजन करेगा बल्कि सामाजिक संदेश भी देगा और महिलाओं के आत्मविश्वास को नई पहचान प्रदान करेगा।

  • दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को लेकर उत्तराखंड में उत्साह, नेताओं ने बताया राज्य के विकास का बड़ा मोड़

    दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को लेकर उत्तराखंड में उत्साह, नेताओं ने बताया राज्य के विकास का बड़ा मोड़


    नई दिल्ली:दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले उत्तराखंड की राजनीति में इस परियोजना को लेकर उत्साह और सराहना का माहौल देखने को मिल रहा है। राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे देवभूमि के विकास के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है। नेताओं का कहना है कि इस परियोजना से न केवल यात्रा समय में भारी कमी आएगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

    पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड के विकास को नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रति केंद्र सरकार का विशेष ध्यान लगातार देखने को मिल रहा है और इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनके अनुसार उत्तराखंड की जनता विकास कार्यों से प्रभावित होकर लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रही है और सरकार के प्रति विश्वास बढ़ रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना केवल एक सड़क नहीं बल्कि विकास की एक बड़ी कड़ी है, जो उत्तराखंड को देश की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जोड़ती है। लगभग बारह हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह कॉरिडोर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण है, जो पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों को साथ लेकर चलता है। इससे यात्रा समय में भारी कमी आने के साथ क्षेत्रीय संपर्क भी मजबूत होगा।

    भाजपा सांसद नरेश बंसल ने इस परियोजना को उत्तराखंड के लिए गेमचेंजर बताते हुए कहा कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन और व्यापार में बढ़ोतरी से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उनके अनुसार यह एक्सप्रेसवे आधुनिक तकनीक और योजना का बेहतरीन उदाहरण है, जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह ग्रीन कॉरिडोर एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में से एक है। उन्होंने कहा कि पहले जहां देहरादून से दिल्ली पहुंचने में कई घंटे लगते थे, वहीं अब यह यात्रा काफी कम समय में पूरी हो सकेगी। इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

    विधायक बृजभूषण गैरोला ने भी इस परियोजना को राज्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह एक्सप्रेसवे लोगों की जीवनशैली को आसान बनाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं, जिनका लाभ सीधे जनता तक पहुंच रहा है।

    विधायक बिशन सिंह चुफाल ने कहा कि समय के साथ यात्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है और यह एक्सप्रेसवे उस बदलाव को और आगे ले जाएगा। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी पहले की तुलना में बेहद कम महसूस होगी, जिससे लोगों को समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी।

  • मिथिला की अनूठी परंपरा जुड़ शीतल, प्रकृति और आशीर्वाद का संगम बनकर देती है शांति और संतुलन का संदेश

    मिथिला की अनूठी परंपरा जुड़ शीतल, प्रकृति और आशीर्वाद का संगम बनकर देती है शांति और संतुलन का संदेश


    नई दिल्ली:मिथिला क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं में जुड़ शीतल एक ऐसा पर्व है जिसे केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं बल्कि प्रकृति, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन के संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। यह त्योहार हर वर्ष गर्मी की शुरुआत के साथ मनाया जाता है और इसे नववर्ष की प्रतीकात्मक शुरुआत भी माना जाता है। मौसम में बदलाव के साथ जब तापमान बढ़ने लगता है, तब यह पर्व जीवन में शीतलता, संयम और सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश देता है।

    इस दिन घरों में विशेष परंपराओं का पालन किया जाता है। परिवार की महिलाएं सुबह उठकर घर के सभी सदस्यों पर घड़े का ठंडा और बासी पानी छिड़कती हैं। इसे आशीर्वाद और स्वास्थ्य सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। बच्चों को विशेष रूप से आशीर्वाद दिया जाता है ताकि वे स्वस्थ, शांत और संतुलित जीवन जी सकें। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि गर्मी से बचाव और शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक प्रदान करने की पारंपरिक विधि भी मानी जाती है।

    जुड़ शीतल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रकृति से जुड़ाव है। इस दिन लोग अपने घरों के पेड़ पौधों पर पानी डालते हैं और पर्यावरण के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। तुलसी के पौधे को विशेष रूप से महत्व दिया जाता है और उसे जल अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है। यह जीवन में पवित्रता, संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देता है।

    इस पर्व में मटके और पानी का विशेष महत्व होता है। कई घरों में मटके से धीरे धीरे पानी टपकाने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे जीवन में निरंतरता, संयम और संसाधनों के संतुलित उपयोग का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा यह भी संदेश देती है कि जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग सोच समझकर करना चाहिए ताकि भविष्य के लिए संतुलन बना रहे।

    खगोलीय दृष्टि से यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि सूर्य इस अवधि में अपनी राशि परिवर्तन प्रक्रिया के दौरान मौसम में बदलाव लाता है। दिन लंबे होने लगते हैं और गर्मी धीरे धीरे अपने प्रभाव को बढ़ाने लगती है। इसी समय कई धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की शुरुआत भी मानी जाती है, जिससे इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

    जुड़ शीतल केवल एक परंपरा नहीं बल्कि जीवन में शांति, शीतलता, प्रकृति के प्रति सम्मान और पारिवारिक एकता का गहरा संदेश देने वाला पर्व है। यह आधुनिक जीवन में भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है और लोगों को प्रकृति के साथ संतुलन में रहने की प्रेरणा देता है।

  • बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर तेज हुआ मंथन, सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नामों पर केंद्रित राजनीतिक चर्चा

    बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर तेज हुआ मंथन, सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नामों पर केंद्रित राजनीतिक चर्चा


    नई दिल्ली : बिहार में एनडीए की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज, नेतृत्व चयन पर भाजपा और जदयू में गहन मंथन, सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नाम चर्चा में

    बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले भारी बहुमत के बाद राज्य की राजनीति में सरकार गठन और नेतृत्व चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 202 सीटों के मजबूत समर्थन के साथ एनडीए अब सत्ता गठन की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। इस स्थिति ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों और संभावनाओं को और अधिक बढ़ा दिया है।

    गठबंधन के भीतर भाजपा और जदयू दोनों ही दल अपने अपने स्तर पर नेतृत्व संतुलन को लेकर विचार विमर्श कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ऐसे चेहरे की तलाश की जा रही है जो संगठनात्मक मजबूती के साथ प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक स्वीकार्यता भी रखता हो। इसी बीच सम्राट चौधरी का नाम प्रमुख दावेदारों में तेजी से उभरकर सामने आया है, जिन्हें संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय और प्रभावशाली नेता माना जा रहा है।

    इसके साथ ही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। संगठन से लंबे समय तक जुड़े रहने और पार्टी की वैचारिक धारा में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें भी एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका अनुभव और संगठनात्मक पकड़ नेतृत्व चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    जदयू और भाजपा के बीच सत्ता संतुलन और भविष्य की रणनीति को लेकर आंतरिक स्तर पर लगातार संवाद जारी है। नेतृत्व को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और गठबंधन के शीर्ष स्तर पर होने वाली बैठक के बाद ही तय किया जाएगा। इस प्रक्रिया ने बिहार की राजनीति में नई रणनीतिक हलचल पैदा कर दी है, जहां हर संभावित निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल मुख्यमंत्री पद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में राज्य की राजनीतिक दिशा और विकास नीति को भी प्रभावित करेगा। ऐसे में नेतृत्व चयन को लेकर हर कदम बेहद सोच समझकर उठाया जा रहा है ताकि गठबंधन की स्थिरता और जन समर्थन दोनों को बनाए रखा जा सके।

  • मार्च में महंगाई बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंची, वैश्विक तनाव और तेल बाजार की अस्थिरता से घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव

    मार्च में महंगाई बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंची, वैश्विक तनाव और तेल बाजार की अस्थिरता से घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली:देश में खुदरा महंगाई दर मार्च 2026 में बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं के बजट पर हल्का लेकिन स्पष्ट दबाव देखने को मिला है। यह आंकड़ा फरवरी के 3.21 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा अधिक है, लेकिन अभी भी यह स्थिति नियंत्रण में मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर जारी भू राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव ने भारत की कीमतों पर असर डाला है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन में आई बाधाओं का असर ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बदलाव के कारण परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ी है, जिसका प्रभाव धीरे धीरे अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है। इसका सीधा असर घरेलू खर्चों पर पड़ रहा है और उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर दबाव बन रहा है।

    खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी मिला जुला रुझान देखा गया है। कुछ सब्जियों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कुछ खाद्य पदार्थों जैसे प्याज, आलू और दालों के दामों में गिरावट भी देखने को मिली है। इसके बावजूद खाद्य महंगाई दर मार्च में बढ़कर 3.87 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो फरवरी की तुलना में अधिक है।

    ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आई वृद्धि भी महंगाई के आंकड़ों को ऊपर ले जाने में एक महत्वपूर्ण कारण रही है। एलपीजी सिलेंडर और अन्य ईंधन उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। ऊर्जा लागत में वृद्धि का असर सीधे तौर पर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिससे अन्य वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होती हैं।

    सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को प्रभावित किया है। निवेश और बाजार में अनिश्चितता के कारण इनकी मांग बढ़ी है, जिससे कीमतों में रिकॉर्ड स्तर की वृद्धि दर्ज की गई है।

    हालांकि राहत की बात यह है कि मौजूदा महंगाई दर अभी भी केंद्रीय बैंक के मध्यम लक्ष्य चार प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था फिलहाल स्थिर स्थिति में बनी हुई है, लेकिन बाहरी झटकों का असर लगातार महसूस किया जा रहा है।

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मुख्य रूप से सप्लाई साइड दबाव का परिणाम है, जिसमें वैश्विक तनाव, तेल बाजार की अस्थिरता और मौसम आधारित प्रभाव शामिल हैं। नीति निर्धारक फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

    आने वाले समय में महंगाई की दिशा काफी हद तक मानसून, वैश्विक बाजार और भू राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है तो इसका असर घरेलू कीमतों पर और अधिक स्पष्ट हो सकता है।

  • मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू

    मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू


    नई दिल्ली। नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन और तनाव के बीच Yogi Adityanath सरकार ने मजदूरों के हित में बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 1000 रुपये से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह नया शासनादेश 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू होगा।

    नए वेतन दर क्या हैं?
    सरकार द्वारा तय किए गए नए वेतन के अनुसार Gautam Buddh Nagar और Ghaziabad में अकुशल मजदूरी ₹11,313 से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दी गई है। अर्धकुशल मजदूरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये और कुशल मजदूरी 13,940 रुपये से बढ़कर 16,868 रुपये कर दी गई है। वहीं अन्य नगर निगम क्षेत्रों में अकुशल मजदूरी 13,006, रुपये अर्धकुशल 14,306 रुपये और कुशल रुपये 16,025 तय की गई है। अन्य जिलों में अकुशल मजदूरी रुपये 12,356, अर्धकुशल 13,591 रुपये और कुशल रुपये 15,224 निर्धारित की गई है।

    मजदूरों को मिली अंतरिम राहत
    सरकार का कहना है कि यह फैसला श्रमिकों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाकर लिया गया है और इससे मजदूरों को फिलहाल अंतरिम राहत मिलेगी। आगे वेज बोर्ड के माध्यम से मजदूरी की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम वेतन ₹20,000 किए जाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं, जिनका कोई आधिकारिक आधार नहीं है। सरकार ने बताया कि केंद्र स्तर पर नए लेबर कोड के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम ‘फ्लोर वेज’ तय करने की प्रक्रिया जारी है।

    20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की खबरें गलत
    मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। साथ ही नियोक्ताओं से कहा गया है कि वे श्रमिकों को समय पर वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा के सभी अधिकार सुनिश्चित करें, साथ ही महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखें।

  • दिल्ली से देहरादून अब मात्र ढाई घंटे में, आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुभारंभ से बदली उत्तर भारत की सड़क यात्रा की तस्वीर

    दिल्ली से देहरादून अब मात्र ढाई घंटे में, आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुभारंभ से बदली उत्तर भारत की सड़क यात्रा की तस्वीर


    नई दिल्ली:देश के सड़क नेटवर्क को नई दिशा देते हुए दिल्ली और देहरादून को जोड़ने वाले आधुनिक एक्सप्रेसवे का शुभारंभ किया गया है। लगभग 210 किलोमीटर लंबी यह ग्रीनफील्ड परियोजना राजधानी दिल्ली को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जोड़ने वाली सबसे तेज और आधुनिक सड़क सुविधाओं में से एक बन गई है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच का सफर, जो पहले छह से सात घंटे में पूरा होता था, अब घटकर लगभग ढाई से तीन घंटे का रह गया है। इससे यात्रियों को समय की बड़ी बचत के साथ-साथ आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।

    इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्याधुनिक एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जो राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर से गुजरता है। लगभग 12 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीव जैसे हाथी, बाघ और तेंदुए बिना किसी बाधा के सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें। यह संरचना आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करती है और इसे देश की सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

    दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का प्रभाव केवल इन दो शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आर्थिक और पर्यटन विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। इस मार्ग से हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी। इससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह एक्सप्रेसवे कई प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को जोड़ता है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो गई है।

    सुरक्षा और तकनीक के स्तर पर इस एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। पूरे मार्ग पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और यातायात नियंत्रण के लिए स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया गया है। रात के समय बेहतर दृश्यता के लिए सौर ऊर्जा आधारित लाइटिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है। इसके अलावा तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी के लिए विशेष तकनीक लागू की गई है ताकि सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    इस परियोजना को ग्रीन कॉरिडोर मॉडल के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से दूर डिजाइन किया गया है ताकि यात्रा निर्बाध और तेज बनी रहे। लगभग बारह हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे आधुनिक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

    यात्रियों की सुविधा के लिए मार्ग पर आधुनिक रेस्ट एरिया, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग पॉइंट और हरियाली से भरपूर विश्राम स्थल बनाए गए हैं। यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के विकास और पर्यटन को भी नई दिशा देगा।

  • अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में भड़की राजनीतिक हिंसा, बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं की झड़प में दो घायल, पूरे इलाके में तनाव

    अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में भड़की राजनीतिक हिंसा, बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं की झड़प में दो घायल, पूरे इलाके में तनाव


    नई दिल्ली :पश्चिम बंगाल  अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच भड़की हिंसक झड़प, राजनीतिक तनाव के बीच दो लोग घायल, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

    पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोड शो के बाद राजनीतिक माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। यह घटना बांकुरा मोड़ इलाके में हुई, जहां दोनों दलों के समर्थकों के बीच पहले कहासुनी हुई और देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल गया। इस झड़प में दोनों पक्षों के एक एक कार्यकर्ता घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच हल्की नोकझोंक हुई थी, लेकिन कुछ ही समय में स्थिति बेकाबू हो गई और हाथापाई शुरू हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। हालांकि तब तक दोनों पक्षों को चोटें लग चुकी थीं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया गया। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की आगे की हिंसा को रोका जा सके। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

    घायलों को तुरंत दुर्गापुर के सब डिविजनल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद राजनीतिक स्तर पर भी आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक पक्ष ने दूसरे पर हमले का आरोप लगाते हुए कहा कि रोड शो के बाद बढ़ी भीड़ से विपक्षी दल असहज हो गया था, जिसके कारण यह झड़प हुई। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से भी इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान दोनों दलों के समर्थकों के बीच तनाव का माहौल बना रहा। इलाके में फिलहाल स्थिति सामान्य लेकिन संवेदनशील बनी हुई है।

    पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की जांच में जुटा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि झड़प की शुरुआत किस कारण से हुई और इसमें कौन कौन शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।