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  • जलियांवाला बाग शहीदों को राष्ट्रपति और पीएम ने दी श्रद्धांजलि, बताया अमर बलिदान

    जलियांवाला बाग शहीदों को राष्ट्रपति और पीएम ने दी श्रद्धांजलि, बताया अमर बलिदान

    नई दिल्ली। देशभर में आज जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और उनके अद्वितीय बलिदान को भावपूर्ण स्मरण के साथ नमन किया गया। इस अवसर पर द्रौपदी मुर्मू और नरेंद्र मोदी ने शहीदों को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा को मजबूत करने वाला एक अमर अध्याय है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि जलियांवाला बाग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों का बलिदान देश के इतिहास में सदैव अमर रहेगा। उन्होंने कहा कि इस दर्दनाक घटना ने स्वतंत्रता के प्रति देशवासियों में नई चेतना और दृढ़ संकल्प का संचार किया, जिसने पूरे राष्ट्र को एकजुट किया। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र सदैव इन शहीदों का ऋणी रहेगा और उनकी देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शहीदों का साहस और त्याग भारतीयों की अदम्य भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उन वीरों ने जिस दृढ़ता के साथ अत्याचार का सामना किया, वह आज भी देशवासियों को न्याय, स्वतंत्रता और गरिमा के मूल्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उस समय की क्रूर घटनाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी और देश में जागरूकता तथा संघर्ष की भावना को और मजबूत किया। उन्होंने समाज को एकजुट रहने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश भी दिया।

    इस अवसर पर अमित शाह ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह घटना औपनिवेशिक शासन की क्रूरता का सबसे भयावह उदाहरण थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उन्होंने कहा कि इस घटना ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी और देश में क्रांतिकारी चेतना को बढ़ाया।

    उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद देश में स्वतंत्रता की लौ और तेज हुई, जिसने भगत सिंह और ऊधम सिंह जैसे अनेक महान क्रांतिकारियों को प्रेरित किया।जलियांवाला बाग हत्याकांड भारतीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक है, जिसने देश कोएकजुट कर स्वतंत्रता संग्राम को नई गति दी। यह घटना आज भी साहस, बलिदान और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक मानी जाती है और हर पीढ़ी को प्रेरित करती है।

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम को विकसित और समावेशी भारत की मजबूत नींव बताया गया

    नारी शक्ति वंदन अधिनियम को विकसित और समावेशी भारत की मजबूत नींव बताया गया


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में देशभर से आईं विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित महिलाओं ने भाग लेकर महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक नए युग की शुरुआत का संदेश दिया। सम्मेलन में महिलाओं ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जोरदार स्वागत करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया तथा इसके लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

    सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करेगा और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

    कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीतियों में संवेदनशीलता और संतुलन आएगा, जिससे समाज के सभी वर्गों के हितों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सकेगा। वक्ताओं का मानना था कि जब महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आती हैं, तो निर्णय अधिक समावेशी और समाज के वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होते हैं।

    प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि यह पहल लंबे समय से प्रतीक्षित थी और अब इसके लागू होने से महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सशक्त बनने का नया अवसर मिलेगा। इससे न केवल लोकतंत्र मजबूत होगा, बल्कि देश के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

    सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने महिला सशक्तीकरण को केवल एक नीति नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देकर ही विकसित भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान यह भावना स्पष्ट रूप से सामने आई कि मातृशक्ति को सशक्त बनाकर ही राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी और समाज में समानता तथा न्याय का वातावरण स्थापित होगा।

    नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को महिला नेतृत्व के एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां देश की महिलाएं विकास की मुख्यधारा में और अधिक प्रभावी रूप से अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

  • आशा भोसले ने मॉरीशस जाने से पहले तलत अजीज के साथ रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत।

    आशा भोसले ने मॉरीशस जाने से पहले तलत अजीज के साथ रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत।

    नई दिल्ली:महान पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन के बाद संगीत जगत में शोक की गहरी लहर है और देशभर के कलाकार उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी क्रम में प्रसिद्ध गायक तलत अजीज ने एक बेहद भावुक स्मृति साझा करते हुए बताया कि मॉरीशस जाने से पहले आशा जी ने उनके लिए आखिरी बार एक गीत की पंक्ति गुनगुनाई थी, जो अब उनकी यादों में हमेशा के लिए बस गई है।

    तलत अजीज ने कहा कि आशा भोसले जैसी महान कलाकार का जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने बताया कि कुछ ही समय पहले उनकी आशा जी से बातचीत हुई थी। उस दौरान जब वह मॉरीशस जाने वाले थे, तब आशा जी ने उनसे कहा था कि लौटने के बाद जरूर मिलना। इसी दौरान उन्होंने अपनी तबीयत ठीक न होने के बावजूद उनके लिए एक पंक्ति गुनगुनाई, जिसे वह अपने जीवन की सबसे अनमोल यादों में से एक मानते हैं।

    उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि आशा भोसले का स्वभाव अत्यंत स्नेहपूर्ण और सहज था। वह हर किसी से प्रेम और सम्मान के साथ पेश आती थीं। उनके साथ उनका रिश्ता बेहद खास था और वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें उनके साथ समय बिताने और उनसे जुड़ने का अवसर मिला।

    संगीत जगत के अन्य कलाकारों ने भी आशा भोसले को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व और गायकी की सराहना की। कलाकारों का कहना है कि उनकी आवाज में एक अद्भुत मिठास और गहराई थी, जो हर गीत को खास बना देती थी। उन्होंने अपने लंबे करियर में हर शैली के गीतों को नई ऊंचाई दी और अपनी बहुमुखी प्रतिभा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

    कुछ कलाकारों ने यह भी कहा कि आशा भोसले ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने जीवन में जो मुकाम हासिल किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने न केवल संगीत को जिया, बल्कि हर गीत में भावनाओं को इस तरह पिरोया कि वह सीधे लोगों के दिलों तक पहुंच गया।

    गायकों और कलाकारों के अनुसार, आशा भोसले के गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं और आने वाले समय में भी उनकी यह विरासत कायम रहेगी। उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक मानक स्थापित किया है कि किस तरह अपने अलग अंदाज और समर्पण से पहचान बनाई जाती है।

    आशा भोसले का योगदान भारतीय संगीत जगत में सदैव अमिट रहेगा और उनकी आवाज हमेशा लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी।

  • नशे की लत ने उजाड़ा हंसता खेलता परिवार और बेटे के हाथों हुई पिता की निर्मम हत्या..

    नशे की लत ने उजाड़ा हंसता खेलता परिवार और बेटे के हाथों हुई पिता की निर्मम हत्या..

    नई दिल्ली: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ से एक ऐसी हृदय विदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय रिश्तों और पारिवारिक मर्यादाओं को झकझोर कर रख दिया है। नशे की विनाशकारी लत के चलते एक युवक ने मामूली विवाद के बाद अपने ही पिता की लोहे की रॉड से हमला कर जान ले ली।

    यह दुखद वारदात शनिवार देर रात एक गांव में घटित हुई जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में मातम और सनसनी का माहौल व्याप्त है। नशा किस प्रकार एक हंसते खेलते परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है यह घटना उसका एक जीवंत और डरावना उदाहरण बनकर सामने आई है जिसने समाज के सामने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

    प्राप्त प्राथमिक विवरण के अनुसार अठाइस वर्षीय आरोपी युवक लंबे समय से विभिन्न प्रकार के नशों का आदी था और इसी लत के कारण घर में अक्सर कलह की स्थिति बनी रहती थी। शनिवार की रात भी आरोपी का अपने पचास वर्षीय पिता के साथ किसी बहुत ही सामान्य बात को लेकर वाद विवाद शुरू हुआ था।

    नशे के प्रभाव और अनियंत्रित क्रोध में डूबे युवक ने पास ही रखी लोहे की एक भारी रॉड उठाई और अपने पिता के सिर पर जोरदार प्रहार कर दिया। हमले के बाद लहूलुहान होकर पिता जमीन पर गिर पड़े और चीख पुकार सुनकर पहुंचे परिजनों ने उन्हें तत्काल चिकित्सालय पहुंचाया लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की और सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ और ग्रामीणों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी की नशे की लत ने उसे हिंसक बना दिया था और वह छोटी छोटी बातों पर भी अपना आपा खो बैठता था।

    शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। गांव के निवासी इस घटना से स्तब्ध हैं और उनका कहना है कि नशा केवल शरीर को ही नहीं बल्कि व्यक्ति के विवेक और संवेदनाओं को भी पूरी तरह समाप्त कर देता है।

    यह मामला केवल एक आपराधिक घटना मात्र नहीं है बल्कि यह हमारे समाज में तेजी से फैलते नशे के जाल की विभीषिका को भी दर्शाता है। पहाड़ी अंचलों में युवाओं के बीच बढ़ती नशाखोरी अब परिवारों के विनाश का कारण बन रही है जहां संस्कार और रिश्तों की डोर कमजोर पड़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि सामाजिक स्तर पर जागरूकता अभियान और नशामुक्ति प्रयासों की सक्रियता अनिवार्य है। जब तक युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालने के ठोस प्रयास नहीं होंगे तब तक रिश्तों के लहूलुहान होने का यह सिलसिला थमता नजर नहीं आता।

    वर्तमान में आरोपी गिरफ्त में है और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है लेकिन एक पिता को खोने और एक बेटे के अपराधी बनने का यह घाव परिवार के लिए कभी न भरने वाला साबित होगा। गांव की गलियों में आज सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग भारी मन से इस त्रासदी पर चर्चा कर रहे हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दी है कि यदि नशे के बढ़ते प्रभाव पर समय रहते लगाम नहीं कसी गई तो भविष्य में मानवीय मूल्यों का संरक्षण करना कठिन हो जाएगा और समाज को ऐसी ही अन्य पीड़ादायक घटनाओं का गवाह बनना पड़ेगा।

  • हंगरी चुनाव में टिस्जा पार्टी की निर्णायक जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई..

    हंगरी चुनाव में टिस्जा पार्टी की निर्णायक जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई..


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हंगरी के संसदीय चुनावों में पीटर मग्यार और उनकी टिस्जा पार्टी की निर्णायक जीत पर उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए भारत और हंगरी के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह चुनाव परिणाम हंगरी की राजनीति में एक बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, जहां लंबे समय से सत्ता में रही सरकार को हार का सामना करना पड़ा और देश में नई राजनीतिक दिशा का मार्ग प्रशस्त हुआ।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत और हंगरी के बीच संबंध सदैव गहरी मित्रता, साझा मूल्यों और आपसी सम्मान पर आधारित रहे हैं। उन्होंने नई सरकार के साथ मिलकर कार्य करने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि भारत यूरोपीय संघ के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों को और अधिक गति मिलेगी।

    हंगरी के हालिया चुनावों में रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जो वहां की जनता की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। परिणाम आने के बाद देश की राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है और सत्ता परिवर्तन को विशेषज्ञ यूरोपीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देख रहे हैं।

    विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव परिणाम का प्रभाव केवल हंगरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर यूरोपीय संघ की नीतियों और वैश्विक राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। नए नेतृत्व से यह उम्मीद की जा रही है कि वह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन और सहयोग को प्राथमिकता देगा।

    भारत और हंगरी के संबंध लंबे समय से स्थिर और सौहार्दपूर्ण रहे हैं। राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग की निरंतरता बनी रही है। अब नई सरकार के गठन के साथ यह अपेक्षा की जा रही है कि व्यापार, तकनीक, शिक्षा और वैश्विक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में संबंध और अधिक सुदृढ़ होंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी के इस संदेश को दोनों देशों के बीच भविष्य में मजबूत कूटनीतिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

  • विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पीएम मोदी ने महिला नेतृत्व को बताया देश की प्रगति का आधार

    विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पीएम मोदी ने महिला नेतृत्व को बताया देश की प्रगति का आधार


    नई दिल्ली। राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है तो पूरा शासन तंत्र अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और जनहितकारी बनता है। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व केवल सामाजिक बदलाव का प्रतीक नहीं है बल्कि यह एक मजबूत और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था की नींव भी है, जिससे देश के विकास को नई दिशा मिलती है।

    प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में इसे सभी राजनीतिक दलों की सहमति से पारित किया गया था, जो भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी और अधिक प्रभावी और निर्णायक बने, ताकि नीति निर्माण में उनका योगदान और मजबूत हो सके।

    अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भारत की प्रगति का सबसे बड़ा आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पदों से लेकर पंचायत स्तर तक महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और अपने दायित्वों को अत्यंत कुशलता और समर्पण के साथ निभा रही हैं। यह बदलाव न केवल शासन व्यवस्था को मजबूत कर रहा है बल्कि समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।

    प्रधानमंत्री ने पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। कई राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी लगभग आधी तक पहुंच चुकी है, जो भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक सशक्त बना रही है।

    उन्होंने कहा कि विभिन्न अध्ययनों में यह स्पष्ट हुआ है कि जहां निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है वहां व्यवस्था अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बनती है। जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं इसका सशक्त उदाहरण हैं, जहां महिलाओं की सक्रिय भूमिका ने ग्रामीण जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है।

    प्रधानमंत्री ने जनधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले करोड़ों महिलाएं बैंकिंग व्यवस्था से दूर थीं, लेकिन अब करोड़ों बैंक खाते खुलने से उनकी आर्थिक भागीदारी में बड़ा बदलाव आया है। इससे महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिली है और वे देश की विकास यात्रा का मजबूत हिस्सा बनी हैं।

    उन्होंने मुद्रा योजना और स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं उद्यमिता और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल रही है।

    प्रधानमंत्री ने मातृत्व अवकाश को बढ़ाकर 26 सप्ताह किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह निर्णय महिलाओं के कार्यस्थल पर सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने स्किल इंडिया मिशन और ड्रोन दीदी जैसी पहलों को महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बताते हुए कहा कि महिलाएं अब कृषि, तकनीक और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला नेतृत्व वाला विकास भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुका है, जिससे न केवल महिलाओं का जीवन बदल रहा है बल्कि पूरे समाज की दिशा और सोच भी बदल रही है।

  • ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल

    ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राज्य को तीन हिस्सों में बांटने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों को बिहार और ओडिशा में मिलाने की योजना है, जिससे बंगालियों को परेशान किया जाएगा।

    परिसीमन के जरिए राज्य विभाजन का आरोप
    बांकुरा जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा परिसीमन विधेयक के जरिए पश्चिम बंगाल की सीमाओं में बदलाव करना चाहती है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से राज्य के कुछ हिस्सों का दूसरे राज्यों में विलय किया जा सकता है।

    केंद्रीय बलों पर महिलाओं के अपमान का आरोप
    मुख्यमंत्री ने चुनाव के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।

    टीएमसी सरकार गिराने के लिए ‘1000 करोड़ की साजिश’ का दावा
    ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील करने का आरोप लगाया। उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के एक वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भाजपा नेताओं से संपर्क और अल्पसंख्यक वोटों को बांटने की बात सामने आई है।

    SIR को बताया ‘देश का सबसे बड़ा घोटाला’
    मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को हाल के समय का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो केंद्र के सभी जनविरोधी कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा।

    सत्ता परिवर्तन का दावा
    ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि 2026 में केंद्र सरकार सत्ता से बाहर हो जाएगी। इसके बाद नई सरकार जनहित में फैसले लेगी और मौजूदा नीतियों में बदलाव किया जाएगा।

  • बिहार में सत्ता परिवर्तन की आहट: 14 अप्रैल को नए सीएम का ऐलान, 15 को शपथ ग्रहण संभव

    बिहार में सत्ता परिवर्तन की आहट: 14 अप्रैल को नए सीएम का ऐलान, 15 को शपथ ग्रहण संभव

    पटना। बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पहली बार राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने की दिशा में सक्रिय नजर आ रही है। इसी कड़ी में पार्टी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल के नेता के चयन के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

    14 अप्रैल को होगा नेता का चयन

    शिवराज सिंह चौहान 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे। उनकी मौजूदगी में भाजपा विधायक दल की बैठक में नए नेता के नाम पर मुहर लगेगी। इसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दल—जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा—की बैठकों के बाद संयुक्त बैठक में मुख्यमंत्री के नाम का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।

    15 अप्रैल को शपथ ग्रहण की तैयारी

    सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार का शपथ ग्रहण 15 अप्रैल को संभावित है। कार्यक्रम के लिए लोकभवन के साथ-साथ बापू सभागार को भी तैयार रखा गया है। पहले चरण में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कुछ वरिष्ठ मंत्री शपथ लेंगे, जबकि बाद में मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा। समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है।

    राज्यपाल को सौंपा जाएगा दावा

    एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद 14 अप्रैल की शाम को ही राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।

    नीतीश सरकार की आखिरी कैबिनेट

    वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को सुबह 11 बजे कैबिनेट की अंतिम बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक उनके लंबे कार्यकाल की आखिरी कैबिनेट मानी जा रही है। बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। इसके बाद वे डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित कर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंपेंगे।

    ‘हर जिम्मेदारी निभाऊंगा’—शिवराज

    पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वह पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे।

    सीएम आवास पर बढ़ी हलचल

    इधर, पटना में मुख्यमंत्री आवास पर नेताओं की आवाजाही भी तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई नेताओं ने नीतीश कुमार से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की।

    बिहार की राजनीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां 14 और 15 अप्रैल की तारीखें सत्ता परिवर्तन की दिशा तय करेंगी।

  • असम चुनाव में गरमाया माहौल: कुनकी चौधरी को पुलिस का समन

    असम चुनाव में गरमाया माहौल: कुनकी चौधरी को पुलिस का समन

    गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव के बीच सियासी माहौल और गरमा गया है। गुवाहाटी सेंट्रल सीट से चुनाव लड़ रहीं युवा उम्मीदवार कुनकी चौधरी को पुलिस ने आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के मामले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है।

    उन्हें पान बाजार थाने में तलब किया गया, जहां उन्होंने अपना पक्ष रखा।

    कैंपेन टीम पर कार्रवाई, तीन सदस्य हिरासत में

    मतदान खत्म होने के कुछ घंटों बाद पुलिस ने इस मामले में उनकी कैंपेन टीम के तीन सदस्यों को हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, ये तीनों सदस्य हरियाणा के रहने वाले हैं और चुनाव नियमों का उल्लंघन करते हुए मतदान से 48 घंटे पहले भी क्षेत्र में मौजूद थे।

    सबसे युवा उम्मीदवार पर सियासी घमासान

    27 वर्षीय कुनकी चौधरी इस चुनाव की सबसे युवा उम्मीदवार हैं और असम जातीय परिषद (AJP) के टिकट पर मैदान में हैं। उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विजय गुप्ता से है।

    इस बीच मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने चौधरी और उनके परिवार पर तीखे आरोप लगाए, जिससे यह मुकाबला और ज्यादा चर्चा में आ गया।

    सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर उनके परिवार पर सवाल उठाए थे।

    किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

    पुलिस ने यह केस लोक सेवक के आदेश में बाधा डालने, चुनाव के दौरान अनुचित प्रभाव डालने और जनप्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन से जुड़ी धाराओं के तहत दर्ज किया है। आरोप यह भी है कि मतदान के दिन भी प्रचार जारी था और सुरक्षा कर्मियों को मतदान केंद्रों के पास ले जाया गया।

    चौधरी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

    पूछताछ के बाद कुनकी चौधरी ने कहा कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि मुझे अपना पक्ष रखने का मौका मिला। मुझे सिस्टम पर भरोसा है और जांच निष्पक्ष होगी।”

    विपक्ष का आरोप—प्रशासन का दुरुपयोग

    वहीं, लुरिंज्योति गोगोई ने इसे राजनीतिक दबाव बताते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल प्रशासन और पुलिस का इस्तेमाल कर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।

    क्यों अहम है यह मामला?

    गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर मुकाबला इस बार खासा दिलचस्प हो गया है। एक तरफ युवा चेहरा और उभरती राजनीति, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल की मजबूत पकड़—ऐसे में यह विवाद चुनावी परिणामों पर भी असर डाल सकता है।

  • सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी

    सऊदी भागा आकिब, एटीएस जांच में बड़ा खुलासा; 2025 से लापता, लुकआउट नोटिस जारी


    लखनऊ। संदिग्ध आतंकी कनेक्शन की जांच में घिरे आकिब के खिलाफ अब एजेंसियों ने शिकंजा कसना तेज कर दिया है। एटीएस की पड़ताल में सामने आया है कि वह चार बार सऊदी अरब जा चुका है और अगस्त 2025 में चौथी बार विदेश जाने के बाद से अब तक भारत नहीं लौटा है। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है, वहीं पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

    जांच में सामने आई ट्रैवल हिस्ट्री के मुताबिक, आकिब का पासपोर्ट 9 अप्रैल 2018 को बना था। वह पहली बार 4 अगस्त 2019 को सऊदी अरब गया और 8 फरवरी 2022 को भारत लौटा। इसके बाद 8 अप्रैल 2022 को दोबारा सऊदी गया और 11 अप्रैल 2023 को वापस आया। तीसरी बार वह 20 जून 2023 को गया और 22 जुलाई 2025 को भारत लौटा। हालांकि, महज 10 दिन बाद ही 1 अगस्त 2025 को वह फिर सऊदी चला गया और तब से वहीं पर है।

    एटीएस ने उसकी पूरी यात्रा का ब्योरा खंगाल लिया है और अब उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आकिब के हिरासत में आने के बाद आतंकी मॉड्यूल और संभावित साजिश से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

    वीडियो जारी कर दी सफाई, कहा—अगर गलत हूं तो गोली मार देना

    इधर, मामले में तीन दिन पहले मॉड्यूल से जुड़े उवैद और जलाल हैदर की गिरफ्तारी के बाद यह प्रकरण और चर्चा में आया। इसी बीच आकिब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है।

    वीडियो में उसने पुलिस अधिकारियों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि वह देश की सुरक्षा करने वालों की इज्जत करता है। उसने यह भी दावा किया कि उसने अपने साथी को पुलिस के सामने सरेंडर कर सच्चाई बताने की सलाह दी थी। आकिब ने अपने ऊपर लगे आतंकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने कोई आपराधिक गतिविधि नहीं की, केवल गुस्से में अपशब्द कहे थे।

    वीडियो के अंत में उसने भावुक अपील करते हुए कहा, “मैं अपने ऊपर आतंकवादी का ठप्पा नहीं लगने दूंगा। अगर मैं गलत हूं, तो मेरे माथे पर गोली मार देना।”

    फिलहाल, एजेंसियां उसके ठिकाने और नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हैं।