Category: National

  • परिसीमन बिल पर बढ़ी सियासी हलचल, मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच निर्णायक टकराव के आसार

    परिसीमन बिल पर बढ़ी सियासी हलचल, मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच निर्णायक टकराव के आसार

    नई दिल्ली ।संसद के मानसून सत्र में अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र संभावित परिसीमन बिल बनता दिखाई दे रहा है। शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रारंभिक बहस के बाद अब लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नए राजनीतिक समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि 27 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाला सत्र इस विषय पर आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    परिसीमन प्रक्रिया का उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं और लोकसभा सीटों का पुनर्गठन करना है। प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा की कुल सीटों में वृद्धि का रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की संवैधानिक प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस विषय पर व्यापक राजनीतिक सहमति अभी तक बनती दिखाई नहीं दे रही है।

    संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। इसी कारण सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित करने की मानी जा रही है। राजनीतिक दलों के बीच लगातार संवाद और समर्थन जुटाने की कोशिशों को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी ओर विपक्ष भी साझा रुख अपनाकर अपनी रणनीति तैयार करने में जुटा हुआ है।

    परिसीमन को लेकर सबसे अधिक चिंता दक्षिण भारत के कई राज्यों ने व्यक्त की है। इन राज्यों का तर्क है कि उन्होंने लंबे समय से जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रभावी प्रयास किए हैं। ऐसे में यदि भविष्य में केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया जाता है तो उनका संसदीय प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम हो सकता है। इसी कारण कई क्षेत्रीय दल इस विषय पर विस्तृत चर्चा और संतुलित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार विभिन्न दलों से संवाद के जरिए व्यापक समर्थन जुटाने का प्रयास कर सकती है। वहीं कुछ क्षेत्रीय दलों ने संकेत दिए हैं कि यदि सभी राज्यों के हितों को संतुलित करने वाला समाधान सामने आता है तो वे अपने रुख पर विचार कर सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी व्यापक सहमति की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

    संसद के मौजूदा सत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में कई संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। पहली संभावना यह मानी जा रही है कि यदि पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित नहीं होता तो सरकार विधेयक को फिलहाल पेश करने से बच सकती है। दूसरी संभावना यह है कि विधेयक सदन में प्रस्तुत हो, लेकिन पर्याप्त बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित न हो सके। तीसरी संभावना यह मानी जा रही है कि आवश्यक समर्थन मिलने की स्थिति में विधेयक आगे बढ़े और संवैधानिक प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश करे।

    भारत में लोकसभा सीटों के परिसीमन का इतिहास कई दशकों पुराना है। पिछले लंबे समय से संसदीय सीटों की संख्या स्थिर बनी हुई है, जबकि इस अवधि में देश की जनसंख्या और जनसांख्यिकीय स्वरूप में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में नए परिसीमन की आवश्यकता पर चर्चा लगातार होती रही है। यदि भविष्य में इस दिशा में कोई संवैधानिक निर्णय लिया जाता है तो उसका प्रभाव देश की चुनावी राजनीति, राज्यों के प्रतिनिधित्व और संसदीय व्यवस्था पर व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें संसद के मानसून सत्र और आगे बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई हैं।

  • सीवान हिंसा पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, छात्रों के साथ कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री से पूछा बड़ा सवाल

    सीवान हिंसा पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, छात्रों के साथ कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री से पूछा बड़ा सवाल

    नई दिल्ली । बिहार के सीवान जिले में बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा और फायरिंग की घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए छात्रों के साथ की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलने और बड़ी संख्या में छात्रों की गिरफ्तारी तथा उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और उन्हें रिहा करने संबंधी आश्वासन का क्या हुआ। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और सरकार अपने वादों से पीछे हट रही है।

    कांग्रेस नेता ने दिल्ली और बिहार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि विभिन्न राज्यों में छात्रों के आंदोलनों के प्रति एक जैसी कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ सख्ती की घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने छात्रों से जुड़े मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    यह राजनीतिक प्रतिक्रिया उस समय सामने आई जब बिहार बंद के दौरान सीवान में प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और फायरिंग की घटनाओं के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। घटना में तीन प्रदर्शनकारी गोली लगने से घायल हुए, जबकि पथराव और झड़प के दौरान जिला पुलिस अधीक्षक सहित कई पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी भी घायल हुए।

    घायल प्रदर्शनकारियों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना भेजा गया। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और स्थिति पर लगातार नजर रखी। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई।

    फायरिंग को लेकर विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर एके-47 से गोलियां चलाई गईं। हालांकि पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। जिला पुलिस अधीक्षक ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदर्शनकारियों को गोली किसकी ओर से लगी। उन्होंने बताया कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्य सामने लाए जाएंगे।

    पुलिस के अनुसार, हिंसा और उपद्रव के मामले में अब तक 65 लोगों को हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से घटना की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    सीवान की घटना ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। एक ओर विपक्ष सरकार की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। अब सभी की नजर जांच के परिणाम और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • ग्रीन पटाखों में बैरियम नाइट्रेट पर बढ़ा विवाद, केंद्र की दो एजेंसियों के मतभेद पर सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

    ग्रीन पटाखों में बैरियम नाइट्रेट पर बढ़ा विवाद, केंद्र की दो एजेंसियों के मतभेद पर सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

    नई दिल्ली । दिवाली के दौरान कम प्रदूषण वाले विकल्प के रूप में प्रचारित किए गए ग्रीन पटाखों की पर्यावरणीय सुरक्षा पर नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार से जुड़े दो प्रमुख वैज्ञानिक और नियामक संस्थानों के बीच ग्रीन पटाखों में प्रयुक्त बैरियम नाइट्रेट को लेकर मतभेद सामने आने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दोनों पक्षों के अलग-अलग निष्कर्षों को देखते हुए अदालत से इस विषय पर अंतिम निर्णय देने का अनुरोध किया है।

    ग्रीन पटाखों को पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने वाला विकल्प माना गया था। इन्हें विकसित करने का उद्देश्य वायु प्रदूषण और ठोस अपशिष्ट को कम करना था, ताकि त्योहारों के दौरान पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को सीमित किया जा सके। इसी लक्ष्य के तहत वैज्ञानिक संस्थानों ने नए फॉर्मूलेशन तैयार किए थे और उनके आधार पर व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति भी दी गई थी।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ग्रीन पटाखों में प्रयुक्त बैरियम नाइट्रेट पर गंभीर आपत्ति दर्ज की। बोर्ड का मानना है कि बैरियम यौगिक प्रदूषण फैलाने वाले प्रमुख तत्वों में शामिल हैं और पटाखों में इनका उपयोग पर्यावरणीय दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। बोर्ड ने यह भी कहा कि इस विषय पर पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों के अनुरूप बैरियम साल्ट के उपयोग पर स्पष्ट प्रतिबंध की व्याख्या की जानी चाहिए और किसी भी मात्रा में इसका इस्तेमाल अदालत की भावना के विपरीत माना जा सकता है।

    दूसरी ओर, सीएसआईआर-नीरी का कहना है कि उसने केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप ऐसे ग्रीन पटाखों का फॉर्मूलेशन विकसित किया था, जिनसे पारंपरिक पटाखों की तुलना में प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आती है। संस्थान के परीक्षणों के अनुसार इन पटाखों से पीएम10 और पीएम2.5 जैसे सूक्ष्म कणों के उत्सर्जन में 40 से 60 प्रतिशत तक कमी देखी गई। इसी आधार पर कई प्रकार के प्रकाश आधारित ग्रीन पटाखों के उत्पादन की सिफारिश की गई थी।

    इसी वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर उद्योग से जुड़े संगठनों ने संशोधित फॉर्मूलेशन तैयार किए, जिनमें बैरियम नाइट्रेट की मात्रा कम रखते हुए अन्य ऑक्सीडाइजर का उपयोग किया गया। आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा प्रक्रियाओं के बाद संबंधित प्राधिकरणों से स्वीकृति मिलने पर पिछले कुछ वर्षों से ऐसे ग्रीन पटाखों का उत्पादन और बिक्री भी होती रही है। इन्हें दिवाली सहित अन्य अवसरों पर कम प्रदूषण वाले विकल्प के रूप में बाजार में उपलब्ध कराया गया।

    हालांकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि ग्रीन पटाखों के प्रदूषण संबंधी दावों की तुलना पूरी तरह बैरियम-रहित विकल्पों से नहीं की गई है। बोर्ड का तर्क है कि उपलब्ध अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि वर्तमान ग्रीन पटाखे वास्तव में सबसे सुरक्षित और कम प्रदूषण फैलाने वाले विकल्प हैं। इसलिए इस विषय पर और स्पष्ट वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता है।

    दोनों संस्थाओं के परस्पर विरोधी दृष्टिकोण को देखते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट किया है कि ग्रीन पटाखों के व्यावसायिक उत्पादन और उनके उपयोग को लेकर अंतिम निर्णय अदालत ही करे। अब न्यायालय के फैसले पर यह निर्भर करेगा कि आने वाले समय में ग्रीन पटाखों के मौजूदा फॉर्मूलेशन को जारी रखा जाएगा, उनमें संशोधन होगा या उनके उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश लागू किए जाएंगे। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पटाखा उद्योग तीनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सुहागरात के दिन ही नकदी-जेवर लेकर फरार हो गई दुल्हन!

    सुहागरात के दिन ही नकदी-जेवर लेकर फरार हो गई दुल्हन!


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से शादी के नाम पर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हरियाणा के एक युवक से धूमधाम से शादी कराने के बाद दुल्हन कुछ ही घंटों में नकदी और आभूषण लेकर फरार हो गई। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो महिला बिचौलियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि फरार दुल्हन की तलाश जारी है।
    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के दौरान पूरे गिरोह का खुलासा होने की संभावना है।

    शादी का झांसा देकर वसूले 1.10 लाख रुपये

    पुलिस के अनुसार, हरियाणा के सोनीपत जिले के खरखौदा थाना क्षेत्र के सिसाना गांव निवासी रविंद्र कुमार सिंह को देवरिया में शादी कराने का भरोसा दिलाया गया था। इसके लिए बिचौलियों ने उससे 1.10 लाख रुपये लिए। 24 जुलाई की रात भलुअनी कस्बे के एक मैरिज हॉल में गोल्डी यादव नाम की युवती के साथ उसकी शादी कराई गई। सभी वैवाहिक रस्में पूरी हुईं और सात फेरे भी लिए गए।

    सुहागरात से पहले ही लेकर भागी नकदी और जेवर

    शादी के कुछ ही घंटों बाद दुल्हन अचानक गायब हो गई। आरोप है कि वह अपने साथ 1.10 लाख रुपये नकद और शादी के दौरान मिले आभूषण भी ले गई।

    काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला तो पीड़ित दूल्हे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस ने दो महिला बिचौलियों को दबोचा

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान शादी कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाली मीना देवी और गीता देवी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उनके पास से बिचौलिये के तौर पर लिए गए 40 हजार रुपये भी बरामद किए हैं।

    फरार दुल्हन की तलाश जारी

    पुलिस के मुताबिक, फरार दुल्हन गोरखपुर जिले के बड़हलगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं यह शादी के नाम पर ठगी करने वाले किसी संगठित गिरोह का हिस्सा तो नहीं है।

    पुलिस का क्या कहना है?

    बरहज क्षेत्राधिकारी (सीओ) राजेश कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि शादी के बाद दुल्हन के नकदी और आभूषण लेकर फरार होने की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और फरार दुल्हन की तलाश जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

  • राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के परिणामों से उपजे तनाव के कारण छात्रा ने उठाया खौफनाक आत्मघाती कदम

    राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के परिणामों से उपजे तनाव के कारण छात्रा ने उठाया खौफनाक आत्मघाती कदम

    नई दिल्ली । चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता और मानसिक दबाव का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश की राजधानी में बीते एक महीने से चल रहा विरोध प्रदर्शन और अनशन भले ही सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद समाप्त हो गया हो, लेकिन परीक्षा के नतीजों और प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में उपजा मानसिक तनाव अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। इस बीच महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के कर्जत तालुका से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां मेडिकल की पढ़ाई का सपना देख रही उन्नीस वर्षीय छात्रा ने परीक्षा में कम अंक आने से निराश होकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

    घटना के संदर्भ में मिली जानकारी के अनुसार, उक्त छात्रा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के नतीजों को लेकर पिछले कुछ समय से अत्यधिक मानसिक दबाव का सामना कर रही थी। शनिवार को जब परिवार के सदस्य किसी कार्यवश घर से बाहर गए हुए थे, तब छात्रा ने घर पर अकेले रहते हुए यह अतिवादी कदम उठाया। जब परिजन वापस लौटे, तो उन्होंने स्थिति देखकर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस दल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि छात्रा ने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाई थी, लेकिन घोषित नतीजों में उसे बेहद कम अंक प्राप्त हुए। डॉक्टर बनने के अपने सपने के टूटने और भविष्य की अनिश्चितता के डर से वह गहरे अवसाद में चली गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रहे हैं और परिजनों व आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटे हैं।

    गौरतलब है कि हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्तर की इस प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और पुनरीक्षा से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण देशभर में लाखों छात्र और उनके अभिभावक भारी मानसिक दबाव से गुजर रहे थे। परीक्षा प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों द्वारा तनाव में आकर ऐसे खौफनाक कदम उठाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। छात्र संगठनों और शिक्षाविदों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

    राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों द्वारा पिछले एक महीने से लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। इस आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, गड़बड़ियों की उच्च स्तरीय जांच और छात्रों के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग उठाई थी। सरकार की ओर से उच्च स्तरीय समिति के गठन और सुधार संबंधी आश्वासन मिलने के बाद यह धरना-प्रदर्शन समाप्त किया गया था, लेकिन इस प्रशासनिक घटनाक्रम के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा का मुद्दा अब भी गंभीर बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का अत्यधिक दबाव और असफलता का डर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों और समाज को एक साथ मिलकर युवाओं को यह समझाने की आवश्यकता है कि कोई भी परीक्षा जीवन का अंतिम विकल्प नहीं होती। प्रशासनिक स्तर पर परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के लिए नियमित परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली स्थापित करना बेहद जरूरी हो गया है ताकि इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

  • बिहार बंद में हुई हिंसा के लिए तेज प्रताप यादव पर हत्या की कोशिश का केस, दोष सिद्ध हुआ तो होगी 10 साल की जेल

    बिहार बंद में हुई हिंसा के लिए तेज प्रताप यादव पर हत्या की कोशिश का केस, दोष सिद्ध हुआ तो होगी 10 साल की जेल


    पटना। बिहार बंद के दौरान पटना में हुई हिंसा के मामले में जनशक्ति जनता दल (JJD) प्रमुख तेज प्रताप यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इनमें सबसे अहम धारा 109 (हत्या की कोशिश) भी शामिल है। यदि यह आरोप अदालत में सिद्ध होता है तो 10 वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है, जबकि गंभीर चोट साबित होने पर सजा उम्रकैद तक हो सकती है।

    पटना की अदालत ने तेज प्रताप यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इसके बाद उन्हें बेऊर केंद्रीय कारागार भेजा गया। पुलिस ने शनिवार शाम उन्हें पटना के एक शॉपिंग मॉल से गिरफ्तार किया था।

    पुलिस के मुताबिक, बिहार बंद के दौरान गांधी मैदान क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान पथराव और हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसी घटना को लेकर गांधी मैदान थाना कांड संख्या 400/26 दर्ज किया गया, जिसमें तेज प्रताप यादव समेत अन्य लोगों को नामजद किया गया है।

    यह बिहार बंद कथित NEET पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में बुलाया गया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग गांधी मैदान इलाके में एकत्र हुए थे। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन हिंसक हो गया और पथराव में गांधी मैदान थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा, टीओपी प्रभारी प्रमोद कुमार सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

    एफआईआर में धारा 109 के अलावा लोक सेवक पर हमला, दंगा, आपराधिक साजिश, गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी आदेश की अवहेलना, धार्मिक भावनाएं आहत करने, वैमनस्य फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी कई धाराएं भी जोड़ी गई हैं। साथ ही Prevention of Damage to Public Property Act, 1984 की धारा 3 और 4 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

    दूसरी ओर, तेज प्रताप यादव के वकील ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि जल्द ही अदालत में जमानत याचिका दाखिल की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कह रही है। न्यायालय में सुनवाई के बाद ही आरोपों पर अंतिम फैसला होगा।

  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में लगे 'थैंक्यू राहुल गांधी' के पोस्टर

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में लगे 'थैंक्यू राहुल गांधी' के पोस्टर


    नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली की सियासत में पोस्टर वार शुरू हो गई है। दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस (DPYC) ने राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में ‘थैंक्यू राहुल गांधी’ लिखे होर्डिंग्स लगाकर इसे छात्रों के आंदोलन और कांग्रेस के अभियान की सफलता बताया।

    दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने कहा कि जिस इस्तीफे की संभावना तक नहीं मानी जा रही थी, वह लगातार आंदोलन कर रहे छात्रों और राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए गए अभियान का परिणाम है। उनके मुताबिक, यह घटनाक्रम छात्रों की एकजुटता और संघर्ष की ताकत को दर्शाता है।

    युवा कांग्रेस का कहना है कि राजधानी में लगाए गए ये पोस्टर राहुल गांधी के प्रति युवाओं के समर्थन और आभार को व्यक्त करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं। संगठन का दावा है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस लगातार छात्रों के साथ खड़ी रही है।

    हालांकि, अक्षय लाकड़ा ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी युवा कांग्रेस का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अब भी बाकी हैं।

    युवा कांग्रेस की पहली मांग प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की है। वहीं दूसरी मांग यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं देश के छात्रों से माफी मांगें। संगठन ने कहा कि इन मांगों के पूरा होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

  • कैसे रूकेगा पेपर लीक ? PM मोदी की टास्क फोर्स के एक्सपर्ट ने बताई क्‍या है सबसे बड़ी चुनौती

    कैसे रूकेगा पेपर लीक ? PM मोदी की टास्क फोर्स के एक्सपर्ट ने बताई क्‍या है सबसे बड़ी चुनौती


    नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधारों के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और पेपर लीक से मुक्त बनाने की रूपरेखा तैयार कर रही है। इस समिति के सदस्य और आईआईटी मद्रास के निदेशक डॉ. वी. कामकोटि का कहना है कि केवल तकनीक के सहारे पेपर लीक की समस्या का पूरी तरह समाधान संभव नहीं है।

    तकनीक के साथ संस्थागत सुधार भी जरूरी
    डॉ. कामकोटि ने कहा कि टास्क फोर्स का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के साथ संस्थागत सुधारों को जोड़कर परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। उनका मानना है कि बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन सिर्फ उसी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।

    उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वर्ष 1985 में जेईई परीक्षा दी थी, तब करीब 5 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 15 लाख से अधिक हो गई है। ऐसे में विशाल परीक्षा तंत्र को सुरक्षित बनाए रखने के लिए नई व्यवस्थाओं की आवश्यकता है।

    विशेषज्ञों की टीम तैयार करेगी सुधारों की रूपरेखा
    टास्क फोर्स की अध्यक्षता तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। समिति में पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल, वरिष्ठ अधिकारी अमृत लाल मीणा सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम तकनीक, सुरक्षा, प्रशासन, लॉजिस्टिक्स और नीति निर्माण के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर सुधारों की सिफारिश करेगी।

    ‘मेकर-चेकर’ मॉडल पर भी मंथन
    डॉ. कामकोटि ने बताया कि समिति बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों की तरह ‘मेकर-चेकर’ मॉडल लागू करने की संभावना पर भी विचार कर रही है। इस व्यवस्था में किसी एक व्यक्ति द्वारा किए गए कार्य का स्वतंत्र रूप से दूसरे अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाएगा, जिससे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाई जा सके। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति अभी शुरुआती चरण में काम कर रही है और अंतिम सिफारिशों पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    पेपर लीक की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
    डॉ. कामकोटि के मुताबिक, किसी भी परीक्षा प्रणाली की सबसे अहम कड़ी प्रश्नपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति होता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया ही सुरक्षित और विश्वसनीय नहीं होगी, तो कोई भी तकनीक पेपर लीक को पूरी तरह नहीं रोक सकती। इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करने वालों की जवाबदेही, ईमानदारी और पूरी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना टास्क फोर्स की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

  • झांसी पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, कहा- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश विकास कर रहा

    झांसी पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, कहा- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश विकास कर रहा


    झांसी।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव रविवार को निवाड़ी में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण करने के बाद अपने आध्यात्मिक गुरु ऋतेश्वरमहाराज से मिलने झांसी सर्किट हाउस पहुंचे। यहां उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सभी मिलकर जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि दतिया उपचुनाव के मद्देनजर उन्होंने भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ समीक्षा बैठक की। हालांकि मीडिया द्वारा पूछे गए अन्य सवालों का जवाब दिए बिना वह वहां से रवाना हो गए।

    झांसी पहुंचने पर पुलिस लाइन से हेलीकॉप्टर से सर्किट हाउस पहुंचे मुख्यमंत्री का सदर विधायक पं. रवि शर्मा, बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा, भाजपा पार्षद सुनील नैनवानी सहित भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। सर्किट हाउस में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। यहां उन्होंने भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इसके बाद वह पुलिस लाइन से हेलीकॉप्टर द्वारा मध्यप्रदेश के सागर जिले के लिए रवाना हो गए।

    इससे पहले, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ओरछा पहुंचकर प्रसिद्ध रामराजा मंदिर में दर्शन किए और जहांगीर महल का भ्रमण किया। इसके बाद निवाड़ी में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने 46 राजस्व स्टाफ आवास (निवाड़ी) तथा 29 राजस्व स्टाफ आवास (पृथ्वीपुर) का लोकार्पण किया। साथ ही जिला चिकित्सालय निवाड़ी के 100 बिस्तरीय भवन के उन्नयन कार्य, ग्राम जेवरा, पृथ्वीपुर और सेंधरी में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवनों तथा संजीवनी क्लिनिक का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री अपराह्न झांसी पहुंचे और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे के दौरे पर रवाना हो गए।

  • एयर इंडिया की चेक-इन सुविधा अब नई दिल्ली और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों पर भी उपल्बध

    एयर इंडिया की चेक-इन सुविधा अब नई दिल्ली और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों पर भी उपल्बध


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह की अगुवाई वाली एयर इंडिया ने दिल्ली मेट्रो चेक-इन सर्विस के साथ अब नई दिल्ली और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों पर अपनी चेक-इन सर्विस की शुरुआत की है।

    एयर इंडिया ने रविवार को ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा कि शहर से आसमान तक, हम हर सफर को आसान बनाते हैं। कंपनी ने कहा कि हमारी दिल्ली मेट्रो चेक-इन सर्विस के साथ अब आप नई दिल्ली और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों पर अपनी चेक-इन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

    एयरलाइन ने कहा कि घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह की फ़्लाइट्स के लिए पहले से चेक-इन की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने कहा कि मेट्रो से सीधे एयरपोर्ट तक सुरक्षित सामान का ट्रांसफर। ये सर्विस रोजाना सुबह 07:00 बजे से रात 09:00 बजे तक यात्री के लिए उपलब्ध है।

    एयर इंडिया ने कहा कि ट्रैफिक की वजह से होने वाली देरी से बचने और समय बचाने का एक सुविधाजनक तरीका है। यह हमारे मेहमानों के सफर के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में एक और कदम है, ताकि शहर से आसमान तक उन्हें आराम, सुविधा और सुकून मिल सके।